राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : मजबूती से काबिज
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : मजबूती से काबिज
Date : 23-Oct-2019

मजबूती से काबिज
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ राजीव नशीने किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे सीएम-मंत्रियों के बंगले सहित पुराने रायपुर में अहम निर्माण-मरम्मत कार्यों का जिम्मा संभालते हैं। यह मलाईदार काम वे सालों से करते आए हैं। उनके खिलाफ ढेरों शिकायतें हैं, इन सबके बावजूद उनका कभी बाल बांका नहीं हुआ। पिछली सरकार में तो उन्हें कई बार सरकारी हेलीकॉप्टर में यात्रा करते भी देखा गया। जैसे ही सरकार बदली, उन्हें हटाने के लिए कई नेता और अफसर उन्हें जिले से बाहर भेजने की कोशिश में लग गए। सुनते हैं कि ट्रांसफर लिस्ट में उनका नाम भी था। इसकी भनक लगते ही नशीने सक्रिय हो गए और कुछ प्रभावशाली लोगों ने  इसके लिए मेहनत भी की। आखिरकार नशीने का तबादला होने से रह गया। तबादला तो दूर, उनका डिवीजन तक नहीं बदला। अब लोग नशीने की सबको साधने की कला की दाद देने लगे हैं। 

चित्रकोट से चित्र बदलेंगे?
चित्रकोट उपचुनाव के नतीजे गुरूवार को आएंगे। मगर इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने ऐलान किया था कि दंतेवाड़ा में हार का बदला चित्रकोट सीट छीनकर लेंगे। दंतेवाड़ा के उलट चित्रकोट में भाजपा के सभी प्रमुख नेताओं को वहां प्रचार के लिए भेजा गया था। मतदान के बाद जो रूझान सामने आए हैं, उससे पार्टी के  प्रमुख नेता मायूस हैं। हालांकि यहां के चुनाव संचालक नारायण चंदेल उम्मीद से हैं कि पार्टी प्रत्याशी को अच्छे मतों से जीत हासिल होगी। मगर कुछ प्रमुख नेताओं ने पार्टी हाईकमान को यहां के संभावित नतीजों से अवगत करा दिया है। चर्चा तो यह भी है कि यदि चुनाव नतीजे अनुकूल नहीं आए, तो पार्टी यहां संगठन में कोई आमूलचूल परिवर्तन की दिशा में कदम उठा सकती है।

लंका से अयोध्या, दशहरे से दीवाली
गूगल मैप जैसे आसान इंटरनेट एप्लीकेशन ने लोगों की कल्पनाशक्ति में चार चांद लगा दिए हैं। अब लोग यह हिसाब आसानी से लगा लेते हैं कि दशहरे के दिन श्रीलंका में रावण को मारकर राम रवाना हुए होंगे तो लगातार पैदल चलते-चलते वे दीवाली के दिन, 20 दिन में अयोध्या पहुंचे होंगे। अब राम तो भगवान थे, इसलिए वे लगातार भी पैदल चल सकते थे। लंका से अयोध्या तक का 3145 किलोमीटर का सफर ठीक इतने ही दिनों में पैदल किया जा सकता है। अब दिक्कत यह है कि ऐसे में पुष्पक विमान की कहानी का क्या होगा? जो भी हो, पुष्पक विमान में तो सीटें सीमित ही रही होंगी, और ऐसे में लंका से अयोध्या पैदल आने वाले वानर-साथी-भक्तों का ध्यान रखते हुए बीस दिन बाद दीवाली मनाई गई होगी।

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