राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज और सत्ता का गृह नक्षत्र
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज और सत्ता का गृह नक्षत्र
Date : 01-Nov-2019

रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज और सत्ता का गृह नक्षत्र 

छत्तीसगढ़ सरकार में रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में एनआईटी) के पूर्व छात्रों का दबदबा बना है। राज्य के प्रशासनिक मुखिया आरपी मंडल रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। कॉलेज में उनसे एक साल जूनियर राकेश चतुर्वेदी वन विभाग के मुखिया हैं। मंडल के कॉलेज में सहपाठी राजेश गोवर्धन वन विकास निगम के एमडी हैं। यह भी संयोग है कि एडीजी (इंटेलिजेंस) संजय पिल्ले भी रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक हैं और वे अगले कुछ दिनों में डीजी के पद पर प्रमोट हो जाएंगे। संजय पिल्ले के ही कॉलेज के सहपाठी अतुल शुक्ला वर्तमान में पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) के पद पर हैं। 

यही  नहीं, नया रायपुर को बसाने में अहम भूमिका निभाने वाले एपीसीसीएफ (वर्तमान में निलंबित) श्याम सुंदर बजाज भी रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक हैं। पिल्ले, शुक्ला और बजाज कॉलेज में एक ही बैच के हैं। वह दौर छात्र राजनीति का था। इस दौरान प्रदेश में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने भी रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। वे संजय पिल्ले के सहपाठी हैं। और वर्ष-82 में इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। यानी वे मौजूदा सभी अफसरों के नेता रहे हैं। 

रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से ही एपीसीसीएफ संजय शुक्ला ने भी सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की है और वे अगले कुछ दिनों में पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट हो जाएंगे। संजय शुक्ला से कॉलेज में एक साल जूनियर सुधीर अग्रवाल और तपेश झा वर्तमान में एपीसीसीएफ के पद पर हैं। दिलचस्प बात यह है कि छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी प्रशासनिक सेवा में आने से पहले रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में कुछ समय अध्यापन कर चुके हैं।

इंजीनियरिंग कॉलेज के ठीक सामने साइंस कॉलेज से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश में सबसे ज्यादा समय तक मुख्य सचिव रहे और वर्तमान में रेरा चेयरमैन विवेक ढांड भी पढ़कर निकले हैं। साइंस कॉलेज के बगल में स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज से डॉ. रमन सिंह ने डॉक्टरी की डिग्री हासिल की। और वे 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। सरकार के दो मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह और डॉ. शिवकुमार डहरिया भी आयुर्वेदिक कॉलेज से पढ़कर निकले हैं। कुल मिलाकर इस इलाके का गृह नक्षत्र कुछ ऐसा है कि प्रदेश की सत्ता इस आधा किमी के दायरे से निकली है। 

स्कूल के साथी
यह भी संयोग है कि राज्य के प्रशासनिक मुखिया आरपी मंडल और राज्य पॉवर कंपनी के चेयरमैन शैलेन्द्र शुक्ला बिलासपुर के शासकीय गवर्नमेंट हाईस्कूल से पढ़कर निकले हैं। मंडल और शैलेन्द्र शुक्ला के साथ वन विकास निगम के एमडी राजेश गोवर्धन व ग्रामोद्योग सचिव हेमंत पहारे भी थे। ये सभी स्कूल के दिनों के साथी हैं और पहली से 11वीं कक्षा साथ पढ़ाई की।

यह भी दिलचस्प है कि राज्य के वन मुखिया राकेश चतुर्वेदी और पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ)अतुल शुक्ला ने रायपुर के सेंटपॉल्स स्कूल से पढ़ाई की है। यह भी संयोग है कि चतुर्वेदी के पिताजी, अतुल शुक्ला के शिक्षक रहे हैं। चतुर्वेदी के पिताजी सेंटपॉल्स स्कूल में अध्यापक थे। इससे परे अतुल शुक्ला के पिता, राकेश चतुर्वेदी के इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षक रहे हैं। अतुल शुक्ला के पिता इंजीनियरिंग कॉलेज में प्राध्यापक थे। खास बात यह है कि अहम पदों पर काबिज ये सारे अफसर एक-दूसरे से पुराने परिचित होने के कारण आपसी तालमेल बहुत अच्छा है। 

पीताम्बरा पीठ
दूर दराज से लोग अपनी मनोकामना लेकर दतिया स्थित पीताम्बरा पीठ जाते हैं। पीताम्बरा देवी के मंदिर में छत्तीसगढ़ के कई नेता-अफसर और आम लोग भी अक्सर मत्था टेकने जाते हैं। इससे परे रायपुर में भी एक 'पीताम्बराÓ भवन काफी चर्चित हो रहा है। पीताम्बरा उद्योग भवन के मालिक कांग्रेस के एक बड़े नेता हैं और चर्चा है कि उनकी सरकार के अलग-अलग विभागों में ठेका-सप्लाई आदि में अहम भूमिका रहती है। सुनते हैं कि नेताजी पहले पार्टी दफ्तर में बैठते थे, लेकिन इससे पार्टी के नेता ही नाखुश थे। पार्टी नेताओं की नाराजगी को देखकर उन्होंने ठिकाना बदल दिया है। अब सिविल लाईन में एक भवन किराए से लिया है। पीताम्बरा नाम से चर्चित इस भवन में ठेकेदारों-सप्लायरों, उद्योगपतियों की भीड़ अक्सर देखी जा सकती है। नेताजी की कृपा से इन सब की मनोकामना पूरी होने लगी है। लिहाजा, लोगों ने हंसी-मजाक में पीठ का दर्जा दे दिया है।

गांवों में नो प्लास्टिक का हाल
कल गुरुवार को किसी के यहां शोक प्रकट करने पाटन के एक गांव जाना हुआ। बाइक पर सवार जाते हुए पाटन रोड पर ही स्थित ग्राम अमेरी के मोड़ के समीप शराब दुकान पर नजर पड़ी। शराब दुकान का प्रांगण तो बड़ा था ही, उसके सामने पगडंडी या छोटी मुरुम वाली कच्ची सड़क के पार करीब 5 एकड़ से ज्यादा का खुला मैदान (भाठा) दिखा, यह खुला मैदान भी घास की बजाय प्लास्टिक डिस्पोजल और चखना आइटम्स के खाली पैकेट्स से पटा हुआ था।

तस्वीर में देखी जा सकती है कि जहां तक नजर आ रहा है वहां तक प्लास्टिक कचरा पटा हुआ है। शहरों में तो राज्य सरकार कथित नो प्लास्टिक अभियान चला रहे हैं लेकिन गांवों की स्थिति यह तस्वीर बयान कर रही है, वह भी मुख्यमंत्री के इलाके की तस्वीर, जिस सड़क से आए दिन लालबत्ती गाडिय़ां और सरकारी अमला रफ्तार से निकल जाता होगा। इन इलाकों में गाय के खाने के लिए घास आसानी से उपलब्ध है या यह प्लास्टिक कचरा, यह भी तस्वीर बता रही है।
इन तस्वीरों से अंदरुनी इलाकों में नो प्लास्टिक अभियान का असल हाल समझा जा सकता है। (तस्वीर और टिप्पणी ब्लॉगर संजीत त्रिपाठी)
(rajpathjanpath@gmail.com)

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