राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सवाल महंगा पड़ गया?
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सवाल महंगा पड़ गया?
Date : 03-Dec-2019

सवाल महंगा पड़ गया?
पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने नान प्रकरण में महंगे वकीलों की सेवाएं लेने पर सवाल क्या खड़े किए, बवाल मच गया। सुनते हैं कि सीएम सदन में जवाब देने से पहले ब्रीफिंग ले रहे थे, तो उनके पास भुगतान को लेकर ऐसी-ऐसी जानकारियां आईं कि वे चकित रह गए। रमन सरकार में तो कई वकीलों ने जमकर चांदी काटी थी। ऐसे ही एक प्रकरण की जांच भी चल रही है। हुआ यूं कि रमन सरकार की तेंदूपत्ता नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी और इसमें सरकार की पैरवी तत्कालीन महाधिवक्ता ने की थी। चूंकि महाधिवक्ता सरकार के विधि अधिकारी होते हैं। उनका वेतन भत्ता तय रहता है। ऐसे में उन्हें शासन की पैरवी के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके महाधिवक्ता को 13 लाख रूपए लघु वनोपज संघ से भुगतान कर दिया गया। सरकार बदलने के बाद एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी पूरी जानकारी निकलवाई और अलग-अलग स्तरों पर इसकी शिकायत की। संघ ने इस पूरे मामले में विधि विभाग से मार्गदर्शन मांगा है। विधि विभाग में पिछले छह महीने से फाइल पड़ी है, अब विधानसभा में सवाल उठा, तो इस पर भी निगाहें गईं। 

एक प्रकरण में तो एक जूनियर वकील को स्टैंडिंग कॉउंसिल बनाने पर विधि विभाग ने विपरीत टिप्पणी की थी, बावजूद इसके उनकी नियुक्ति कर दी गई। कमल विहार योजना के खिलाफ तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दर्ज प्रकरणों की पैरवी के लिए वकीलों पर ही करीब 13 करोड़ रूपए खर्च कर दिए गए। ऐसे ही ढेरों वकीलों को पिछली सरकार के दौरान भुगतान की जानकारी वर्तमान सीएम के पास पहुंची, तो वे पहले से ही भरे थे और जब पूर्व सीएम ने सरकार पर सरकारी खजाना लुटाने का आरोप लगाया, तो भूपेश बघेल भड़क गए। उनके तेवर देख पुराने सीएम भी ज्यादा कुछ नहीं बोल पाए और उल्टे उन्हें सीएम सर, सीएम मैडम के नाम पर काफी कुछ सुनना पड़ गया। 

आईएएस बिरादरी खफा...
पूर्व सीएम रमन सिंह के एक और सवाल को लेकर आईएएस बिरादरी गुस्से में है। उन्होंने पूछ लिया कि पिछले पांच साल में कितने आईएएस अफसर विदेश यात्रा पर गए थे। सबसे ज्यादा यात्राएं ऋचा शर्मा ने की, वे 24 बार विदेश प्रवास पर रहीं। कुल मिलाकर 63 आईएएस अफसर 129 बार विदेश टूर पर गए। दिलचस्प बात यह है कि खुद रमन सिंह ने इसकी अनुमति दी थी। 

आईएएस के वाट्सएप ग्रुप में पूर्व सीएम के सवाल पर तीखी प्रतिक्रियाएं आई है। एक आईएएस ने लिखा कि विदेश यात्रा पर आपत्ति थी, तो उन्होंने (रमन सिंह) ने अनुमति क्यों दी? सबसे ज्यादा खफा ऋचा शर्मा बताई जा रही हैं, जिन्हें नियम-कायदे मानने वाली और ईमानदार अफसर माना जाता है। उनके पति राजकमल दुबई में एक निजी कंपनी में हैं। वे भी छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस रहे हैं, जिन्होंने बाद में नौकरी छोड़कर निजी कंपनी ज्वाईन कर ली। सुनते हंै कि ऋचा जब भी विदेश गई, उन्होंने सीएम से अनुमति ली। चूंकि उनका परिवार दुबई में रहता है, यह तत्कालीन सीएम की जानकारी में था और हर बार उन्होंने अनुमति दी। ऐसे में उनकी निजी यात्राओं को सार्वजनिक तौर पर उठाने से उनकी नाराजगी स्वाभाविक है। इनमें से हर यात्रा उन्होंने अपने निजी खर्च से की थी।

एक अन्य आईएएस ने पोस्ट किया कि निजी यात्राओं के लिए आईएएस अफसरों को अब परमिशन की जरूरत नहीं रह गई है। एक अन्य अफसर ने लिखा कि निजी कंपनी के लोग एक साल में कई बार विदेश प्रवास पर जाते रहते हैं, ऐसे में आईएएस अफसरों की निजी यात्राओं पर सवाल खड़े करना पूरी तरह गलत है। वैसे भी दुबई और अन्य एशियाई देशों में आने-जाने में कोई ज्यादा खर्च नहीं होता। चर्चा तो यह भी है कि एक-दो अफसर पूर्व सीएम के राडार पर हैं, और उनकी विदेश यात्राओं पर सवाल उठाकर उन्हें घेरने की रमन सिंह की रणनीति है। चाहे कुछ भी हो, पूर्व सीएम अब आईएएस अफसरों के पसंदीदा नहीं रह गए हैं, कम से कम आईएएस अफसरों के मैसेज देखकर तो यही लगता है।  

कुछ आईएएस अफसरों का यह कहना है कि अगर वे निजी विदेश प्रवास पर जा रहे हैं, तो यह जानकारी निजी है, और सरकार को इसे बाहर किसी को देने का कोई हक भी नहीं है, यह निजता का उल्लंघन है। सरकार खुद चाहे तो इस खर्च का हिसाब मांग ले, लेकिन बाकी दुनिया को यह जानने का हक क्यों होना चाहिए कि वे निजी प्रवास पर किस-किस देश जाते हैं?

केंद्र और राज्य की बदली तस्वीरें
बस्तर में 2012 में सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के सुरक्षाकर्मियों ने जिस तरह 17 बेकसूर आदिवासियों को थोक में मार डाला था, वह मामला आज राज्य में एकदम गर्म है। एक अजीब सी बात यह है कि उस वक्त राज्य में तो भाजपा की रमन सरकार थी, लेकिन केंद्र में यूपीए की सरकार में कांगे्रस के पी चिदंबरम गृहमंत्री थे जो कि सीआरपीएफ को नियंत्रित करने वाला मंत्रालय भी था। अब आज राज्य की भूपेश सरकार अगर इस हत्याकांड के हत्यारों को सजा दिलाती है, तो उस वक्त के गृहमंत्री के नाम पर भी आंच तो आएगी। लेकिन चिदंबरम आज जेल में हैं, और यूपीए की उस वक्त की सरकार के गृहमंत्री की छवि बचाना भूपेश सरकार की प्राथमिकता भी नहीं है। सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मीडिया और कांगे्रस के छत्तिसगढिय़ा नेताओं का दबाव कार्रवाई के लिए है, और कार्रवाई करने की बात मुख्यमंत्री ने कल ही सार्वजनिक रूप से कही भी है। छत्तीसगढ़ में उस वक्त के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस फर्जी मुठभेड़ को पूरी तरह सही करार दिया था, और अब उनका वह सार्वजनिक बयान राजनीतिक रूप से उनके लिए भारी पड़ रहा है क्योंकि उन्हीं की शुरू करवाई गई न्यायिक जांच ने मुठभेड़ को फर्जी और मारे गए लोगों को बेकसूर बताया है। (rajpathjanpath@gmail.com)

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