राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : मजबूत पकड़, पर चुनौती कायम...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : मजबूत पकड़, पर चुनौती कायम...
Date : 17-Dec-2019

मजबूत पकड़, पर चुनौती कायम...

ढेबर बंधु इन दिनों सुर्खियों में हैं। गुजराती मूल के ढेबर बंधुओं में सबसे छोटे एजाज ढेबर मौलाना अब्दुल रउफ वार्ड से चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें महापौर पद का दावेदार भी माना जा रहा है। कभी जोगी के करीबी रहे ढेबर बंधु अब सीएम भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं। उनकी सत्ता के गलियारों में गहरी पकड़ है। कबाड़ के धंधे से आगे बढऩे वाले ढेबर बंधुओं को शहर के बड़े बिल्डरों में गिना जाता है। दो दिन पहले सीएम भूपेश बघेल और रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री  रविन्द्र चौबे ने एजाज ढेबर के समर्थन में सभा ली थी। 

सभा में चौबे ने यह कहा कि एजाज में शहर का विकास करने की क्षमता है। प्रभारी मंत्री के इस बयान के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं और यह कहा जा रहा है कि चुनाव जीतने पर उन्हें अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। धनबल से मजबूत होने के बावजूद एजाज की राह आसान नहीं है। वजह यह है कि उनके खिलाफ भाजपा से तीन बार के पार्षद सुनील बांद्रे चुनाव मैदान में हैं, जिन्हें बेहद विनम्र और मिलनसार माना जाता है। इससे परे ढेबर बंधु गलत वजहों से भी चर्चा में रहे हैं। एजाज के बड़े भाई याहया ढेबर को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड प्रकरण में उम्रकैद की सजा हुई थी। खुद एजाज ढेबर बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ विधानसभा का चुनाव लडऩा चाहते थे और उसके लिए चुनाव के पहले कई महीने भूपेश बघेल के आसपास मेहनत भी की थी। जब टिकट नहीं मिली तो एजाज के समर्थकों ने राजीव भवन में तोडफ़ोड़ भी की थी, जिसकी बाद में उन्होंने मरम्मत करवाई थी। 

ढेबर समर्थकों का मानना है कि उन्हें जग्गी हत्याकांड में फंसाया गया था। इस प्रकरण के बाद ही ढेबर बंधुओं ने अजीत जोगी से अपना नाता तोड़ लिया था। सुनते हैं कि गुजराती लिंक के कारण कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल से ढेबर बंधुओं की सीधी जान-पहचान है। यह भी प्रचारित हो रहा है कि यदि एजाज चुनाव जीतते हैं, तो अहमद पटेल से नजदीकियों के चलते आगे की राह आसान हो जाएगी। चाहे कुछ भी हो, एजाज को लेकर प्रचार-प्रसार के चलते उनका वार्ड हाईप्रोफाइल हो गया है। 


राह आसान नहीं...
मौदहापारा वार्ड से कांग्रेस प्रत्याशी अनवर हुसैन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। सात साल पहले उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विवि के कार्यक्रम में तत्कालीन सीएम रमन सिंह को किसानों की समस्या को लेकर खुली चुनौती दे दी थी। उस वक्त के केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार भी मौजूद थे। अनवर की चुनौती पर रमन सिंह अपना आपा खो बैठे फिर क्या था, पुलिस ने उन्हें पीट-पीटकर कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाला था। 

सीमित संसाधनों से चुनाव लड़ रहे अनवर की साख अच्छी है। उन्हें जुझारू माना जाता है। मगर कांग्रेस के कई स्थानीय नेता बागी उम्मीदवार को मदद कर रहे हैं। मौदहापारा परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर का निवास स्थान भी है। लिहाजा, उनकी भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वैसे तो मौदहापारा हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन बागी उम्मीदवार की दमदार मौजूदगी से अनवर की राह आसान नहीं रह गई है। हाल यह है कि खुद अकबर को नाराज नेताओं को मनाने के लिए आगे आना पड़ रहा है। ऐसे में कांग्रेस को अपना गढ़ बचाने के लिए इस बार तगड़ी चुनौती मिल रही है। 

पुराने साथी आमने-सामने, पर साथ भी
स्कूल के दिनों के साथी नवीन चंद्राकर और मुकेश कंदोई रायपुर म्युनिसिपल चुनाव के चलते आमने-सामने हो गए हैं। नवीन और मुकेश, दोनों ही ने कालीबाड़ी स्कूल में एक साथ छठवीं से बारहवीं तक पढ़ाई की थी। नवीन कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता हैं और वे महापौर प्रमोद दुबे के सचिव हैं। जबकि मुकेश का अपना कारोबार है। मगर सदरबाजार वार्ड से दोनों की पत्नियां चुनाव लड़ रही हैं। अच्छी बात यह है कि दोनों पुराने दोस्त चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी से परहेज कर रहे हैं और सिर्फ अपनी पार्टी और अपना एजेंडा लेकर वोट मांग रहे हैं।

इसे देखकर कुछ दिन पहले फेसबुक पर पोस्ट की गई एक फोटो याद पड़ती है जिसमें राज्य सरकार के मीडिया सलाहकार और कांगे्रस में गए हुए रूचिर गर्ग, सीपीएम के संजय पराते, और आम आदमी पार्टी के  डॉ. संकेत ठाकुर एक साथ दिख रहे हैं और तीनों रायपुर की कालीबाड़ी स्कूल में एक साथ पढ़े हुए भी हैं। तीन अलग-अलग पार्टियां, तीनों में चर्चित और जुझारू, और आज भी संबंध अच्छे।

जंगल में मंगल जारी...
नए साल में आधा दर्जन से अधिक आईएफएस अफसर पदोन्नत होने जा रहे हैं। इसके लिए डीपीसी की तैयारी चल रही है। वर्ष-2006 बैच के आधा दर्जन डीएफओ अब सीएफ के पद पर पदोन्नत हो जाएंगे। सीएफ के पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम 14 साल की सेवा जरूरी है। इसके अलावा सीसीएफ स्तर के अफसर बीपी लोन्हारे और नरेन्द्र पाण्डेय 31 तारीख को रिटायर हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के बाद सीसीएफ के दो रिक्त पदों पर भी पदोन्नति होगी। 

एपीसीसीएफ से पीसीसीएफ के एक रिक्त पद के लिए सीनियर एपीसीसीएफ नरसिम्हा राव को पदोन्नति देने की तैयारी चल रही है। नरसिम्हा राव सबसे ज्यादा पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव रहे हैं। पिछली सरकार में विभागीय मंत्री ने मीटिंग में ही उनके खिलाफ टिप्पणी कर दी थी बाद में उन्हें पद से हटाकर वापस वन विभाग भेज दिया गया। हालांकि कई लोग नहीं चाहते कि वे पदोन्नत हो, लेकिन सरकार किसी से भेदभाव करते नहीं दिखना चाहती है। ऐसे में उन्हें हफ्ते-दस दिन में उन्हें पदोन्नत किया जा सकता है।  (rajpathjanpath@gmail.com)

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