राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : मतगणना के बाद तीर्थयात्रा?
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : मतगणना के बाद तीर्थयात्रा?
Date : 23-Dec-2019

मतगणना के बाद तीर्थयात्रा?

वैसे तो छत्तीसगढ़ के म्युनिसिपल चुनाव नतीजे मंगलवार की देर शाम तक घोषित हो जाएंगे, लेकिन प्रदेश भर में महापौर-अध्यक्ष पद के लिए रस्साकसी 29 तारीख तक जारी रहेगी। इसके लिए कांग्रेस और भाजपा में मंथन चल रहा है। कांग्रेस में प्रभारी मंत्री कमान संभाल रहे हैं। जिन निकायों में बहुमत रहेगा वहां दिक्कत नहीं है, लेकिन जहां बहुमत नहीं है वहां निर्दलीय व अन्य को तोड़कर महापौर अथवा अध्यक्ष बनाने की कोशिश होगी। ऐसी स्थिति में पार्षदों को प्रदेश से बाहर पिकनिक पर भेजने की रणनीति बनाई जा रही है। 

कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा कि यह फैसला स्थानीय स्तर पर परिस्थितियों को देखकर लिया जाएगा। भाजपा में भी इसको लेकर कोर ग्रुप की बैठक में चर्चा हुई है। भाजपा नेता अपने पार्षदों को तोड़-फोड़ से बचाने के लिए पुरी और अन्य जगहों पर टूर प्लान कर रहे हैं। भाजपा के एक नेता का कहना है कि बहुमत नहीं होने पर संबंधित निकायों के पार्षदों को अपने साथ जोड़कर ज्यादा दिन तक नहीं रखा जा सकता। क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें हटाया जा सकता है। वैसे भी जिनकी सरकार रहती है, उनके पास धन-बल और प्रशासन सबकुछ नियंत्रण में रहता है। ऐसे में यह मुहावरा फिट बैठता है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस। 

झारखंड का असर होगा?
झारखंड चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा संगठन में सौदान सिंह की हैसियत कम हो सकती है। पार्टी हाईकमान ने सौदान सिंह को एक तरह से फ्री हैंड दे दिया था। सौदान की सिफारिश पर ही राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम को वहां का प्रभारी बनाया गया, लेकिन दोनों असफल साबित हुए। झारखंड के नतीजों का छत्तीसगढ़ में भी प्रभाव पडऩे की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश में संगठन के चुनाव हो चुके हैं और अगले कुछ दिनों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव होंगे। 

ऐसे में माना जा रहा था कि झारखंड में सफल होने पर सौदान सिंह की सिफारिश पर ही छत्तीसगढ़ में अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है। मगर इसकी संभावना अब कम हो गई है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि दुर्ग और अन्य स्थानों में विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने खुलकर सौदान सिंह और रमन सिंह को जमकर कोसा था। झारखंड चुनाव में विफलता से सौदान विरोधी काफी खुश हैं और उन्हें भरोसा है कि देर सवेर उन्हें छत्तीसगढ़ के प्रभार से मुक्त कर दिया जाएगा। वाकई ऐसा होता है या नहीं, नए अध्यक्ष की नियुक्ति में स्पष्ट हो पाएगा। 
(rajpathjanpath@gmail.com)

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