इतिहास

इतिहास में 29 दिसंबर
इतिहास में 29 दिसंबर
Date : 29-Dec-2019

29 दिसंबर 1911 में सुन यात सेन को नए चीन गणतंत्र का राष्ट्रपति घोषित किया गया. चीन में आम जनता और साम्यवादी कार्यकर्ता उन्हें चीन गणतंत्र का राष्ट्रपिता मानते हैं.
सुन यात सेन का जन्म 12 नवंबर 1866 को कांटोन प्रांत के पास एक गांव में हुआ. उनके पिता के पास थोड़ी सी जमीन थी और वह सिलाई का काम भी करते थे. 13 साल की उम्र में सुन अपने भाई के पास हवाई चले गए और वहां पढ़ाई की. सुन कुछ सालों बाद वापस चीन लौट गए लेकिन उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई के लिए हांगकांग भेज दिया.
1892 में डॉक्टर की पढ़ाई खत्म करने के बाद सुन ने शादी कर ली लेकिन दो ही साल बाद तय किया कि वे चीन को उपनिवेशकों की चंगुल से आजाद करेंगे. 1894 में उन्होंने सिंग चुंग हुई नाम की क्रांतिकारी पार्टी का गठन किया और चीन पर शासन कर रहे चिंग राजवंश को गद्दी से हटाने की कोशिश की.
सुन और उनके क्रांतिकारी सहयोगियों की योजना असफल रही और सुन को अगले 16 साल देश में जाने से प्रतिबंधित कर दिया गया. पहले वह लंदन गए जहां उन्हें चीन के खुफिया अफसरों ने अगवा कर लिया. सार्वजनिक दबाव के बाद सुन रिहा हो गए और पश्चिमी जगत में चीन गणतंत्र के लिए लड़ने वाले के नाम से मशहूर हो गए.
1898 में सुन ने फिर पूरब का रुख किया और जापान में बस गए. वहां उन्होंने चिंग शासन के तख्तापलट के उद्देश्य से एक नई क्रांतिकारी पार्टी तुंग मेंग हुई का गठन किया. 1906 से लेकर 1909 तक पार्टी ने चिंग शासक को अपदस्थ करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन सारी नाकाम हो गईं.
1912 में सुन ने राष्ट्रीय पार्टी कुओमिंतांग का गठन किया जिसके सिद्धांत राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और सामाजिक सुरक्षा थे. 1913 में पार्टी ने दोबारा चिंग शासन के प्रतिनिधि जनरल युआन शिह काई को हटाने की कोशिश की जो फिर नाकाम रही. सुन को एक बार फिर चीन छोड़ना पड़ा.
जापान में कई साल बिताने के बाद आखिरकार 1921 में सुन ने दक्षिण चीन में शासन विरोधी सरकार का गठन किया. फिर उन्होंने सोवियत रूस से मदद मांगी ताकि देश के उत्तरी हिस्से में नियंत्रण पाने की संभावना अच्छी हो. चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने भी कुओमिंतांग के साथ आने का फैसला किया.
पेकिंग में फिर सुन ने चीन गणतंत्र स्थापित करने के मकसद से शासकों से बातचीत की लेकिन इसी दौरान कैंसर से उनकी मौत हो गई. कुओमिंतांग के तीन सिद्धांत, राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और सामाजिक सुरक्षा आज भी चीन गणतंत्र के मार्गदर्शक हैं.

  • 1980 - सोवियत संघ के पूर्व प्रधानमंत्री कोसिगिन का देहान्त।
  • 1984-  लोक सभा की 508 में से 401 सीटें अपने नाम कर, 28 दिसंबर 1984 को कांग्रेस ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे भारी बहुमत से संसदीय चुनाव जीता था। इस चुनाव में 28 सीटें जीतकर तेलुगु देसम सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के तौर पर उभरी।
  • 1985 - श्रीलंका ने 43 हजार  भारतीयों को नागरिकता प्रदान की।
  • 1987 -अंतरिक्ष यात्री युरी रोमैनेन्को ने रिकॉर्ड 326 दिनों की अंतरिक्ष उड़ान पूरी की तथा सोयुज़ अंतरिक्षयान से कज़ाकिस्तान में बर्फ से ढंके एक स्थान पर उतरे।
  • 1989 - वाक्लाव हाबेल 1948 के बाद पहली बार चेकोस्लोवाकिया के ग़ैर-साम्यवादी राष्ट्रपति चुने गए।
  • 1997- हांगकांग में रहस्यमय बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए करीब 14 लाख मुर्गों को मारा गया।
  • 1996 - नाटो के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एकत्र होकर कार्य करने के मुद्दे पर रूस एवं चीन में सहमति।
  • 1998 - विश्व के पहले परमाणु बम बनाने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक रेगर सक्रेबर का निधन।
  • 2002 - पाकिस्तान पर्यटकों को भारत के तीन शहरों में घूमने की अनुमति।
  • 2004 - सुनामी लहरों के कारण इंडोनेशिया में मरने वालों की संख्या 60 हजार पहुंची।
  • 2006 - चीन ने वर्ष 2006 में राष्ट्रीय रक्षा पर श्वेत पत्र जारी किया।
  • 2008 - प्रसिद्ध चित्रकार मंजीत बाबा का निधन हो गया। 
  • 1942- हिन्दी फि़ल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना का जन्म हुआ। 
  • 1844 - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष वोमेश चन्द्र बनर्जी, का निधन हुआ। 
  • 1967 - प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ एवं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायकओंकारनाथ ठाकुर का निधन हुआ। 
  • 1863 - स्विस हृदय विज्ञानी विल्हेम हिस का जन्म हुआ, जिन्होंने 1893 में संशोधित मांसपेशीय रेशों के समूह के बारे में बताया, जिसे बण्डल आफ हिस कहते हैं। यह हृदय के संवेग संचालन तंत्र का निर्माणक भाग होता है। (निधन-10 नवम्बर 1934)
  • 1766-स्कॉटलैण्ड के रसायनज्ञ और आविष्कारक चाल्र्स मैसिन्टश का जन्म हुआ, जिन्होंने रबर से निर्मित जलरोधी वस्त्रों का आविष्कार किया। आज रेनकोट के निर्माण में इनका ही योगदान माना जाता है। (निधन-25 जुलाई 1843)
  • 1960- अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रेड्रिक फ्यूलर रसेल का निधन हुआ, जिन्होंने टायफाइड बुखार के लिए पहली सफल वैक्सीन का निर्माण किया। (जन्म-17 अगस्त 1870)
  • 1929-जर्मन इंजीनियर, इंजन डिज़ाइनर  विल्हेम मेबैक का निधन हुआ, जिन्होंने स्प्रे कार्ब्युरेटर का आविष्कार किया और साथ में (1900-1901) में पहले मर्सीडीज़ वाहन के निर्माण में मुख्य डिज़ाइनर की भूमिका निभायी। (जन्म-9 फरवरी 1846)

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