राजपथ - जनपथ

 छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जोगी-भाजपा साथ-साथ...
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जोगी-भाजपा साथ-साथ...
Date : 10-Jan-2020

जोगी-भाजपा साथ-साथ...

जोगी पार्टी की भाजपा से नजदीकियां बढ़ती जा रही हैं। म्युनिसिपल चुनाव में जोगी पार्टी के सहयोग के दम पर गौरेला, पेंड्रा, रतनपुर और कोटा में भाजपा ने जीत हासिल की। यहां कांग्रेस ने जोगी पार्टी के लोगों को तोडऩे की कोशिश भी की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई। कोटा और मरवाही विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व जोगी दंपत्ति करते हैं। वैसे तो जोगी परिवार की कांग्रेस में शामिल होने की खबर उड़ती रहती है। मगर यह परिवार भाजपा के ज्यादा नजदीक रहा है। 

बलौदाबाजार में भी जोगी पार्टी के विधायक हैं। यहां उम्मीद की जा रही थी कि जोगी पार्टी के पार्षदों का कांग्रेस को साथ मिलेगा और नगर पालिका में कांग्रेस का कब्जा हो जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ। नगर पालिका में जोगी पार्टी के पार्षदों का समर्थन भाजपा को मिल गया और भाजपा का नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कब्जा हो गया। जोगी की जाति की जांच के मामले को भाजपा सरकार ने 15 साल तक लटकाए रखा। जबकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही जांच में तेजी आई। ऐसे में जोगी पार्टी का भाजपा को साथ मिल रहा है, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।  

अपनी समझ भी इस्तेमाल करें...
छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने सिगरेट की खुली बिक्री पर रोक लगा दी है। अब जिसे खरीदना हो वह पूरा पैकेट ही खरीदे। मतलब यह कि कोई सिगरेट पीने की लत छोडऩे की कोशिश कर रहे हों, और एक बार में एक सिगरेट खरीद रहे हों, तो वह मुमकिन नहीं है। अब पूरे का पूरा पैकेट लेना होगा, और आदत छोडऩे की हसरत अगर हो, तो उस हसरत को ही छोडऩा होगा। इसके पीछे तर्क यह है कि सिगरेट के पैकेट पर तो उससे कैंसर होने की चेतावनी दर्ज रहती है, लेकिन सिगरेट पर अलग से ऐसी कोई चेतावनी नहीं रहती, और एक सिगरेट खरीदकर पीने वाले को सावधानी का ऐसा संदेश नहीं मिलता। 

कोई कानून किस तरह अपने मकसद को ही शिकस्त देने वाला हो सकता है, यह उसकी एक शानदार मिसाल है। यह छत्तीसगढ़ सरकार का अपना फैसला नहीं है, बल्कि बीते बरस केन्द्र सरकार ने ही कोटपा नाम के इस कानून को लागू किया है जिसके तहत सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू प्रोडक्ट की बिक्री पर कुछ प्रतिबंध और लागू किए गए हैं, और इन्हें तोडऩे पर बड़े जुर्माने का इंतजाम किया गया है। अभी प्रतिबंधित इलाकों में सिगरेट पीने पर भी दो सौ रूपए का जुर्माना है, और स्कूल-कॉलेज के आसपास सिगरेट-बीड़ी-तम्बाकू की बिक्री पर भी। केन्द्र सरकार ने सिगरेट की खुली बिक्री पर जुर्माना बढ़ाते हुए इस बात को अनदेखा किया है कि देश में करीब 70 फीसदी सिगरेट खुली बिकती है, और पैकेट खरीदने की ताकत भी कम लोगों में रहती है। अब यह नया जुर्माना एक तो लागू करना नामुमकिन है, दूसरी तरफ यह लोगों के जेब में हमेशा पैकेट को बनाए रखेगा जिससे उनका सिगरेट पीना बढ़ेगा। छत्तीसगढ़ सरकार को केन्द्र सरकार के इस नियम को लागू करते हुए अपनी खुद की समझ का भी इस्तेमाल करना चाहिए। (rajpathjanpath@gmail.com)

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