राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सांसद नहीं पहुंच पाए संसद
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सांसद नहीं पहुंच पाए संसद
Date : 23-Mar-2020

सांसद नहीं पहुंच पाए संसद

कोरोना संक्रमण के चलते विमानसेवा रोक दी गई है। हाल यह रहा कि सुनील सोनी को छोड़कर कोई भी भाजपा सांसद संसद की कार्रवाई में हिस्सा लेने दिल्ली नहीं जा पाए। सभी सांसदों को दिल्ली पहुंचने के लिए कहा गया था। सुनील सोनी रविवार की देर शाम विस्तारा की नियमित फ्लाइट से दिल्ली पहुंच गए। जबकि बाकी सांसद सोमवार की सुबह दिल्ली रवाना होने वाले थे, लेकिन लॉक डाउन के चलते सारी फ्लाइट निरस्त कर दी गई हैं और भाजपा सांसद दिल्ली जाने से रह गए।   दूसरी तरफ, दिल्ली का हाल यह रहा कि संसद की कार्रवाई में सवा तीन सौ भाजपा सांसदों में से सिर्फ 85 ही हिस्सा ले पाए। बाकी सांसद  लॉक डाउन की वजह से दिल्ली नहीं पहुंच पाए। 


स्प्रे वाला अखबार
देश के एक प्रमुख अखबार हिंदुस्तान टाईम्स ने दिल्ली की अपनी प्रेस का एक वीडियो जारी किया तो उससे अखबार लेने वालों में एक दहशत भी फैली, और बाकी अखबारों के सामने एक चुनौती भी खड़ी हो गई। अखबार में मशीन पर ही सेनिटाईजर का स्प्रे छपे हुए अखबारों पर हो रहा है। इस समूह का हिन्दी अखबार हिंदुस्तान ऐसे स्प्रे केे नीचे दिख रहा है। अब इससे बाकी बड़े अखबारों के संक्रामक होने की छवि भी बन रही है, और लोगों में यह दहशत भी हो रही है कि अखबार संक्रमण लेकर आ सकते हैं। लोगों को लग रहा है कि मशीन से लेकर बंडल और टैक्सी तक, एजेंट और हॉकर तक के हाथ तो लगते ही हंै। अभी तक देश के कई अखबार तरह-तरह के प्रयोग करते आए हैं। कुछ अखबार मशीन पर ही पन्नों को जोडऩे के लिए गोंद लगाते हैं जिससे पन्ने बिखरते नहीं। कुछ अखबार किसी खुशबू को छिड़ककर पेपर भेजते हैं जो कुछ लोगों को पसंद आती है, और कुछ लोगों को उससे एलर्जी भी होती है। अब सेनिटाईजर वाला पेपर सच में ही सेनिटाईजर सहित होगा, या कोई अखबार महज पानी ही स्प्रे करते हुए वीडियो बनाकर प्रचार पाएगा, इसका ठिकाना तो है नहीं। इसके लिए तो फिर अखबार आए तो उसे सूंघकर देखा जाए, लेकिन उसके भी अपने अलग खतरे होंगे।

दुनिया ने अभी तक ऐसे खतरे को देखा नहीं है जिसमें किसी बीमारी के संक्रमण के डर से अखबार न निकलें। कम से कम हिंदुस्तान के पिछली आधी सदी के इतिहास में ऐसा याद नहीं पड़ता। यह अलग बात है कि महीनों तक जनता, एक पूरे प्रदेश की जनता बिना अखबारों के रहे, ऐसा कश्मीर में हुआ है, और बाकी देश को उसकी खबर भी नहीं है। कश्मीर आधा बरस तक बिना इंटरनेट के भी रहा, बिना मोबाइल फोन के भी रहा, लेकिन बाकी देश को उसकी भी खबर नहीं है।

आने वाले दिन अगर और बुरे संक्रमण के होंगे, तो हो सकता है कि लोगों को इंटरनेट और फोन से मिलने वाले अखबार पर तसल्ली करनी पड़े। बीते कल आपका यह अखबार 'छत्तीसगढ़' भी नहीं छपा क्योंकि कोरोना-चेन के संक्रमण को रोकने की वैज्ञानिक कोशिश में भागीदार बनने के लिए इस अखबार ने छुट्टी रखी थी। असामान्य और असाधारण खतरे असाधारण समाधान भी खड़े करते हैं। अखबारों के पाठक ऐसी कई नौबतों के लिए तैयार रहें। 

ठलहा लोगों की मौलिक सलाहें...
लोग सरकार-बाजार के करीब-करीब बंद हो जाने की वजह से, स्कूल-कॉलेज बंद हो जाने से खाली बैठे हैं। और ऐसे में उनकी कल्पनाशीलता आसमान पर पहुंच रही है। कुछ लोग वॉट्सएप पर कोरोना से बचने की तरह-तरह की मौलिक सलाहें भेज रहे हैं। 

एक सलाह- रविवार की सुबह कब्ज की दवा का ओवरडोज ले लें। चार चम्मच जमालगोटा खा लेने पर आप दिन भर घर पर ही रहेंगे, और बार-बार साबुन से हाथ भी धुलता रहेगा।

एक दूसरी सलाह- अगर आप मोदी विरोधी हैं, तो भी 22 तारीख को घर पर ही रहें, क्योंकि विरोध करने के लिए भी जिंदा रहना जरूरी है।

एक तीसरी सलाह- जितने धर्म स्थानों पर चंदा देते आए हैं, वे सारे ईश्वर आज पट बंद करके दहशत में बैठे हैं। इसलिए चंदा उन अस्पतालों को दें जो आज मुसीबत के वक्त भी जान पर खेलकर आपके लिए खड़े हैं।

एक चौथी सलाह-लोग मास्क लगाना तो सीख गए हैं, लेकिन खांसते-छींकते वक्त मास्क हटाना नहीं है इसे भी सीख लें।

एक पांचवी सलाह- कोरोना के कान नहीं हैं, इसलिए तेज आवाज में भोजपुरी गानों से न उसे परेशान किया जा सकता, न ही उसे लहंगे वाले गानों से कोई शर्म आती, इसलिए ऐस गाने न बजाएं। (rajpathjanpath@gmail.com)

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