राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पैसेवाले चोरों की बेशर्मी भी देखने लायक !
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पैसेवाले चोरों की बेशर्मी भी देखने लायक !
15-Apr-2020

एक तरफ देश भर में छाये कोरोना-संकट की वजह से पुलिस को वैसे भी रात-दिन काम करना पड़ रहा है, उसके ऊपर कहीं लोग महुआ से शराब बनाते पकड़ा रहे हैं, कहीं जुआ खेलते पकड़ा रहे हैं . भिलाई में कल एक उठाईगिरी हो गई और एक कारोबारी की बड़ी रकम चली गयी. पुलिस के मत्थे शहर कस्बों में लोगों की आवा-जाही को रोकना तो है ही, कोरबा जिले के कटघोरा में पुलिस कोरोना का ख़तरा उठाकर भी मरीजों को एम्बुलेंस में बिठाने, जांच करवाने के काम में लगी हुई है. 

इस बीच पुलिस का काम बढ़ाने में किसी को जऱा भी शर्म नहीं आ रही है. अभी राजधानी रायपुर से लगे अभनपुर थाने की एक खबर है कि किसी के घर 12 तारीख की रात 2 बजे बकरे के बाड़े में आवाज आई. इस पर सुनने वाले ने बाड़े के मालिक को फ़ोन किया, वह अपने भाई के साथ पहुंचा, तो दो चोर एक बकरे को मोटरसाइकिल पर लेकर भाग गए, लेकिन बाकी 3 चोर एक और मोटरसाइकिल छोड़कर भागे. मतलब यह कि दो मोटरसाइकिल्स, और पांच चोर ! 5 हज़ार का बकरा लेकर भागे, और एक मोटरसाइकिल छोड़ गए ! छूटी मोटरसाइकिल के नंबर से पुलिस ने आज के आज नया रायपुर और आरंग थाना इलाके के पांच चोरों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया. बकरा भी एक के कब्जे से बरामद करके मालिक को वापिस दिलवाया गया. 

अब सवाल यह है कि दो मोटरसाइकिल्स के पांच मालिकों को 5 हज़ार के बकरे के लिए पुलिस के मत्थे इतना काम लादते शर्म नहीं आयी, जो कि वैसे भी बोझ से लदी हुई चल रही है?

लेकिन लोगों का कहना है कि आने वाले दिन इस किस्म के छोटे-छोटे जुर्म से भरे हुए रहेंगे. लोग बेरोजगार होंगे, और खाली जेब भी. बैठे-ठाले वे कई किस्म के छोटे जुर्म करेंगे. मतलब यह कि कोरोना जाने के बाद भी पुलिस के लिए बोझ छोड़कर जायेगा?

बैगा और परिवार क्वारंटाइन में  

कटघोरा में दो दर्जन कोरोना मरीज मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। मरीजों का इलाज रायपुर के एम्स में हो रहा है और तकरीबन सभी की हालत बेहतर है। तब्लीगी जमात से ताल्लुक रखने वाले ये मरीज काफी दहशत में भी थे। बिरादरी के एक युवक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उनसे संपर्क में आए लोग इलाज के बजाए झाड़-फूंक कराने में लग गए। 

सुनते हैं कि क्वारंटाइन में रहने के दौरान इनमें से कुछ लोग पड़ोस के गांव के एक बैगा पास भी गए। बैगा ने झाड़-फूंक कर ठीक करने का दावा किया। ये लोग संतुष्ट होकर लौट आए। झाड़-फूंक के बाद इनका भी सैंपल लिया गया। करीब आधा दर्जन लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। अब हाल यह है कि बैगा और उसके परिवार के लोगों को क्वारंटाइन में रखा गया है। हर बीमारी का इलाज करने का दावा करने वाला खुद दहशत में है। 

हनुमान वाला मास्क
कोरोना युग में सोशल मीडिया भी मास्क वाली तस्वीरों से भरा पड़ा है। हालांकि जागरुकता के लिए सेलिब्रिटिज और नेता ऐसा कर रहे हैं, लेकिन फॉलोअर्स कैसे पीछे रह सकते हैं। यही वजह है कि फेसबुक-ट्वीटर की प्रोफाइल पिक्चर से लेकर वाट्सएप के स्टेटस में भी मास्क वाली तस्वीरें छाई हुई हैं । टीवी चैनल के रिपोर्टर और पत्रकार भी मास्क पहनकर लाइव कर रहे हैं। दूसरी तरफ इन दिनों टीवी पर रामायण सीरियल सुबह शाम एक एक घंटे दिखाया जा रहा है। घर-घर में लोग रामायण देख रहे हैं। स्वाभाविक है बच्चों की भी नजर पूरे समय पर टीवी पर टिकी है। रामायण में इस समय हनुमान से लेकर पूरी वानर सेना मैदान पर है। वानर का किरदार निभाने वाले सभी मुंह और नाक में मास्कनुमा मुखौटा लगाए रहते हैं। ऐसे किरदार बच्चों के बीच खासे लोकप्रिय भी होते हैं। इसके पहले जब रामायण का प्रसारण हुआ तो उस दौर के लोगों को याद होगा कि उस समय बच्चों के खेलने के लिए तीर कमान और वानरों के मुखौटों की बाढ़ आ गई थी। तकरीबन हर बच्चों के हाथों में रामायण से जुड़ा ही खिलौना दिखाई देता था। ये उस दौर की बात थी, लेकिन अब समय बदल गया। बच्चे भी हाईटेक हो गए हैं। लैपटॉप-मोबाइल और इलेक्ट्रानिक्स गैजेट्स के जमाने में वे ऐसे खिलौनों से खेलना तो दूर उसके बारे में ठीक से जानते तक नहीं, लेकिन कोरोना युग में रामायण के प्रसारण से उसके पात्रों के बारे में  बच्चे वाकिफ हुए हैं। चूंकि बच्चे सोशल मीडिया और कोरोना युग के हैं तो उनकी बातें और फरमाइश भी अलग ही होगी। वे सवाल करते हैं कि क्या रामायण काल में भी कोई कोरोना जैसी बीमारी फैली थी, जो सभी वानर मास्क लगाए रहते हैं। इसी तरह उनकी फरमाइश की बात करें, तो उसमें रामायण इफेक्ट दिखाई देता है। उन्हें मास्क भी कपड़ों वाला या वैसा पसंद नहीं है, जो आमतौर पर उपलब्ध है। वे तो सेलिब्रेटिस वाला वैसे ही मास्क की डिमांड कर रहे हैं, जिसमें नाक-मुंह ढंका होता है जिसे वे हनुमान मास्क कहने लगे हैं। खैर, फरमाइश और सोच भी समय के साथ बदलती हैं, इसका अनुभव भी लोगों को हो रहा है। यह एक अलग बात है कि कोरोना संकट के इस दौर में बच्चों के तरह तरह के सवालों और ऐसे कनेक्शन जोडऩे से कई माता पिता अपने बाल तो जरुर नोंच रहे होंगे। 

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