राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसर का बाल-बांका नहीं
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसर का बाल-बांका नहीं
09-May-2020

अफसर का बाल-बांका नहीं

सरकार के एक मंत्री अपने विभाग के निगम में गड़बड़झाले से काफी  परेशान हैं। वे चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार निगम के प्रमुख अफसर को हटाने के लिए चिठ्ठी लिखी थी, लेकिन अफसर का बाल-बांका नहीं हुआ। अब निगम में जो कुछ भी गड़बड़ हो रहा है, उसका ठीकरा मंत्रीजी पर फूट रहा है।

सुनते हैं कि अफसर, कांग्रेस के एक बड़े पदाधिकारी के करीबी हैं। ऐसे में उन्हें हटाना भी आसान नहीं रह गया है। आखिरकार मंत्रीजी ने परिस्थितियों को भांपकर अफसर की शिकायत करना छोड़ दिया है और सिफारिश की है कि अफसर को और अहम जिम्मेदारी दे दी जाए। अब देखना है कि मंत्रीजी की सिफारिश मान्य होती है, अथवा नहीं।

किराए की उम्मीद भी नहीं

लॉकडाउन के चलते कई जगहों पर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद चल रहा है। शहर के मध्य में स्थित एक व्यावसायिक कॉम्पलेक्स के दर्जनभर से अधिक दुकानदार किराया नहीं पटा पा रहे हैं। ऐसे में दुकान के मालिकों ने उन्हें किराया देने अथवा दुकान खाली करने के लिए दबाव बनाया है। कुछ व्यापारी नेता इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। दुकान के मालिकों को समझाइश देने की कोशिश हो रही है कि दुकान बंद है। कारोबार नहीं हो रहा है। ऐसे में किराए के लिए दबाव बनाना उचित नहीं है।

कुछ इसी तरह का मिलता-जुलता मामला एक खास कारोबार से भी जुड़ा है।  सुनते हैं कि इस कारोबार ने अपने दफ्तर का तीन महीने का किराया नहीं पटाया है। मकान मालिक ने जब उन पर किराया देने अथवा दफ्तर खाली करने के लिए दबाव बनाया, तो उन्होंने पीएम के उस कथन का जिक्र करते हुए लंबा चौड़ा खत लिख दिया जिसमें पीएम ने किरायादारों पर दबाव नहीं बनाने का आग्रह किया था। अब मालिक परेशान हैं, और कोरोना संकट खत्म होने तक किराए की उम्मीद भी नहीं दिख रही है।

कोरोनारुपी खुशी

सरकारी कामकाज और ठेकों में लेन-देन सामान्य शिष्टाचार माना जाता है। हालांकि यह काम भी पूरी सावधानी और कोड वर्ड में किया जाता है। जैसा कि इस समय कोरोना संक्रमण का दौर चल रहा है, लिहाजा कोड वर्ड भी उसी हिसाब से तय हो रहे हैं। चर्चा है कि इस समय कोरोना के नाम से ही लेन-देन चल रहा है। आशय यह है कि अगर किसी को कुछ देना है तो वे कोरोना देना है कहकर इशारा कर रहे हैं। अब समझदार के लिए इशारा काफी होता है, जो कोड वर्ड को समझ गए, वो खुशी-खुशी कोरोना ले रहे हैं लेकिन जो नहीं समझ पाए, उनके भाग्य में कोरोनारुपी खुशी नहीं है।

धनिया का टेंशन

छत्तीसगढ़ में खेता किसानी से जुड़े विभाग ने धनिया से तौबा कर ली है। ऐसा नहीं है कि धनिया से कोई नुकसान हो रहा है, बल्कि यह फायदे का सौदा है। खाने में तो धनिया का विशेष महत्व होता है। धनिया के बिना तो किचन अधूरा ही रहता है। अमीर-गरीब सभी के खाने में धनिया तो आवश्यक है। इसके बावजूद विभाग के लोग इससे परहेज करते हैं। उनकी समस्या यह है कि वो किसानों को धनिया बोने की सलाह भी नहीं दे सकते, क्योंकि इसके कई मतलब निकाले जा सकते हैं। समस्या केवल इतनी सी होती तो बात नहीं बिगड़ती। दरअसल, अब तो उन पर किसानों की धनिया बोने के आरोप लग रहे हैं। लिहाजा धनिया का नाम सुनते ही वे लोग टेंशन में आ जाते हैं।इसके पीछे का राज बहुतों को मालूम है।

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