राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जो जीता वही सिकंदर
28-Aug-2020 6:37 PM 7
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जो जीता वही सिकंदर

जो जीता वही सिकंदर

आखिरकार पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी को शहर जिले की कमान सौंप दी गई। पूर्व सीएम रमन सिंह की पसंद पर श्रीचंद के नाम पर मुहर लगी। श्रीचंद का नाम तय कराने में पूर्व मंत्री राजेश मूणत की अहम भूमिका रही है। जबकि पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और सांसद सुनील सोनी, पार्षद रमेश सिंह ठाकुर अथवा जयंती पटेल को अध्यक्ष बनाने की कोशिश में थे। रमन सिंह और सौदान सिंह की जोड़ी ने सच्चिदानंद उपासने जैसे संगठन के बड़े नेताओं को भी झटका दिया है, जो पिछले कई दिनों से पार्टी नेताओं की कार्यप्रणाली को लेकर आग उगल रहे थे।

उपासने और श्रीचंद के बीच तो खुले तौर पर वाकयुद्ध चल रहा था। श्रीचंद के नाम की घोषणा के बाद पार्टी में अंदरूनी खींचतान बढ़ गई है। सुनते हैं कि प्रदेश भाजपा के एक बड़े नेता ने सीधे केन्द्रीय नेतृत्व को फोन कर श्रीचंद की नियुक्ति से पहले किसी तरह की रायशुमारी नहीं करने की शिकायत की। कुल मिलाकर रमन और सौदान की जोड़ी एक बार फिर असंतुष्टों के निशाने पर आ गई है। अब देखना है  आगे-आगे होता है क्या? फिलहाल तो जो जीता वही सिकंदर।

अपर हाउस का दबदबा

प्रदेश भाजपा में लोकसभा सदस्यों के बजाए राज्यसभा सदस्यों को ज्यादा तवज्जो मिल रही है। कम से कम जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से तो यही लगता है। इससे परे राज्यसभा सदस्य सुश्री सरोज पाण्डेय और रामविचार नेताम अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब रहे हैं।

रामविचार अपने करीबी गोपाल मिश्रा को बलरामपुर का जिलाध्यक्ष बनवाने में कामयाब रहे। जबकि आरएसएस और स्थानीय बड़े नेताओं ने ओमप्रकाश जायसवाल का नाम सुझाया था। जायसवाल को जिला महामंत्री बनाकर संतुष्ट किया गया। सरोज के समर्थक तो पूरे मंडलों में छा गए हैं। यह करीब-करीब तय माना जा रहा है कि दुर्ग और भिलाई के जिलाध्यक्षों के चयन में भी उनकी राय को महत्व मिलेगा।

भाजपा के नौ लोकसभा सदस्यों का हाल देखिए, केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह तो अपने गृह जिले सूरजपुर में भी पसंद का अध्यक्ष नहीं बनवा पाईं। यही हाल मोहन मंडावी का रहा। मोहन की जगह विक्रम उसेंडी की पसंद पर कांकेर जिलाध्यक्ष का नाम तय किया गया। इसी तरह बिलासपुर में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल की पसंद पर अध्यक्ष और बाकी पदाधिकारियों की नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की चली है।

रायगढ़ और जशपुर में प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की चलनी ही थी। रायपुर के जुझारू सांसद सुनील सोनी और आरएसएस के पसंदीदा माने जाने वाले संतोष पाण्डेय भी अपने संसदीय क्षेत्र के जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया में कहीं नजर नहीं आए। कुल मिलाकर निर्वाचित भाजपा सांसद मायूस बताए जा रहे हैं।

ब्रिटिश संसदीय प्रणाली में राज्य सभा को उच्च सदन कहा जाता है, यहां वह उच्च साबित हो भी रहा है।

सरकार की जांच क्षमता, और ठगी

जैसे-जैसे फोन स्मार्टफोन होते जा रहे हैं, टीवी स्मार्टटीवी होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे तरह-तरह की जालसाजी भी बढ़ रही है, और यह साबित हो रहा है कि इंसानों के ये औजार ही स्मार्ट हो रहे हैं, इंसान खुद स्मार्ट नहीं हो रहे हैं।

अब जालसाज आए दिन लोगों के नंबर जुटाकर उन्हें तरह-तरह के झांसे के मैसेज भेजते हैं। जिन्होंने किसी कर्ज की अर्जी नहीं दी है, उन्हें भी कर्ज मंजूर होने का संदेश आता है और साथ में एक लिंक भी आता है जो कि जाल में फंसने का एक न्यौता रहता है।

अब सवाल यह है कि झारखंड के गांव जामताड़ा जैसी जगहें देश भर में साइबर-ठगी के लिए इतनी कुख्यात हो गई हैं कि वहां मानो पूरा गांव ही ठगी में लगा है। ऐसे में सरकार अपनी सारी जांच की क्षमता के चलते हुए भी संगठित अपराध पर काबू नहीं पा रही है। एक-एक टेलीफोन नंबर से रोज सैकड़ों लोगों को फोन करके कोई ईनाम मिलने की खबर देकर ठगते हैं, तो कोई बैंक एटीएम का नंबर या पासवर्ड पूछकर ठगते हैं, और सरकारी एजेंसियां कुछ नहीं कर पातीं। सरकार की तकनीकी क्षमता के बावजूद रात-दिन ऐसी ठगी चलना हैरान करता है क्योंकि टेलीफोन और सिमकार्ड से लोगों की लोकेशन भी आसानी से पता लग जाती है, फिर ऐसे जुर्म करने वाले जालसाजों की ही क्यों खबर नहीं होती?

आज सुबह ही इस अखबार के संपादक को जालसाजी का ऐसा न्यौता मिला। अब यह संदेश तो बताता है कि यह बल्क एसएमएस तकनीक से भेजा गया है, सरकार की जांच सीमा के भीतर ऐसी जालसाजी थोक में हो रही है।

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