राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : किसी तरह कॉफ्रेंस संपन्न
27-Sep-2020 5:17 PM 12
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : किसी तरह कॉफ्रेंस संपन्न

किसी तरह कॉफ्रेंस संपन्न  

कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच कार्यक्रम कवरेज मीडियाकर्मियों के लिए जोखिमभरा हो गया है। वैसे तो राजनीतिक दल भी वर्चुअल प्रेस  कॉफ्रेंस पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, लेकिन कभी-कभार अहम विषयों पर बड़े नेता मीडियाकर्मियों से रूबरू होकर चर्चा करना बेहतर समझते हैं। ऐसे मौके पर व्यवस्था बनाए रखना मीडियाकर्मियों के साथ-साथ आयोजनकर्ताओं के लिए चुनौती रहती है। राजीव भवन में सीएम भूपेश बघेल के प्रेस कॉफ्रेंस से पहले संचार विभाग के मुखिया शैलेष नितिन त्रिवेदी को तो अपने सहयोगी प्रवक्ताओं से व्यक्तिगत तौर पर संपर्क कर आग्रह करना पड़ा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए वे प्रेस  कॉफ्रेंस में मौजूद न रहें। 

कई प्रवक्ता, जो कि शैलेष की जगह संचार विभाग का मुखिया बनने के उत्सुक हैं, वे शैलेष की अपील को नजर अंदाज कर प्रेस कॉफ्रेंस का हिस्सा बनने के लिए तैयार थे और वे उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। दो दर्जन प्रवक्ताओं की  कॉफ्रेंस में मौजूदगी से संक्रमण का खतरा भी था। तब शैलेष ने उनके तेवर भांपकर समझाइश दी कि सीएम साब ने खुद होकर सभी प्रवक्ताओं से हाथ जोड़कर अपील की है कि कोरोना के खतरे को देखते हुए राजीव भवन न आएं। प्रेस  कॉफ्रेंस में संचार विभाग के मुखिया के नाते वे खुद और गिरीश देवांगन ही मौजूद रहेंगे। अब जब सीएम ने हाथ जोड़ दिए, तो प्रवक्ताओं को बात माननी ही थी। इस बार कॉफ्रेंस में बाकी प्रवक्ता नहीं गए और शैलेष की चतुराई से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ किसी तरह  कॉफ्रेंस संपन्न हो पाई। 

मंशा क्या पूरी हो पाएगी ?

खबर है कि प्रदेश भाजपा की सूची जल्द जारी हो सकती है। इस बार सूची में कई चौंकाने वाले नाम आ सकते हैं। मसलन, युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अमित साहू का नाम तेजी से उभरा है। अमित, पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के नजदीकी माने जाते हैं, और वे रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। रायपुर दक्षिण का प्रतिनिधित्व पूर्व सीएम के धुर विरोधी बृजमोहन अग्रवाल करते हैं, जो कि अब तक अपराजेय हैं। 

रमन सिंह का खेमा अमित को अध्यक्ष बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है। इससे एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश है। अमित की नियुक्ति से सबसे बड़े पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक साहू समाज को साधने की तैयारी है, तो बृजमोहन के सामने उनके ही अपने विधानसभा क्षेत्र में नया नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश भी है। मगर अनाम अमित के सहारे बृजमोहन को घेरने की मंशा क्या पूरी हो पाएगी, यह देखना है। 

आगे आप खुद समझदार हैं...

कोरोना से अस्पताल जाने की नौबत का पहले से तो कुछ पता होता नहीं। दिल की बीमारी हो, या डायबिटीज, लोगों को बरसों से पता होता है कि खर्च आ सकता है। इसलिए आज जब कोरोना से अचानक अस्पताल की नौबत आ जाती है, और सरकारी अस्पताल या तो मन को नहीं सुहाते, या दूसरे मरीज पसंद नहीं आते, तो लोगों को मन मारकर निजी अस्पताल जाना पड़ता है। निजी अस्पतालों के बिल बड़े बन रहे हैं, तो वे बड़ी तकलीफ भी दे रहे हैं। खासकर जो लोग बचकर आ जा रहे हैं, उन्हें लग रहा है कि पूरा बिल बर्बाद हो गया, मानो चल बसे होते तो बिल काम आया होता। 

एक जानकार और समझदार ने आज सुबह इस बारे में कहा कि लोग केन्द्र और राज्य सरकारों को बजट का अधिक पैसा इलाज और पढ़ाई के लिए रखने को कहते हैं, विकसित और संपन्न देशों की मिसाल देते हैं कि वे इन दो कामों के लिए कितना फीसदी बजट रखते हैं। तो फिर लोग अपने इलाज के लिए अपने घरेलू बजट का अधिक हिस्सा क्यों नहीं रखते? और निजी अस्पतालों में आमतौर पर संपन्न या उच्च-मध्य वर्ग के लोग ही जा रहे हैं, जो कि चाहते तो समय रहते इलाज का बीमा ले सकते थे, या रकम बचाकर रख सकते थे। अपनी खुद की लापरवाही के बाद अब अस्पताल के बिल को क्यों रोना? 

एक समझदार ने इस बहस में आज कहा- इलाज और पढ़ाई इन दो चीजों में सस्ता ही महंगा पड़ता है। आगे आप खुद समझदार हैं...।

आसान टेक्नालॉजी से जिंदगी मुश्किल

कम्प्यूटरों के इस दौर में इनकी वजह से कई काम आसान हो जाते हैं, क्योंकि तेजी से होते हैं। लेकिन कई काम मुश्किल भी हो जाते हैं क्योंकि मुश्किलें खड़ी करना आसान है। 

किसी व्यस्त इंसान की जिंदगी में परेशानी घोलना हो, तो किसी ईमेल पाने वाले लोगों के सैकड़ों नामों के बीच उसका नाम जोड़कर मेल भेज दी जाए। नतीजा यह होता है कि जिन्हें ईमेल मिली है, वे महज उसे जवाब देने के बजाय जब रिप्लाई टू ऑल करने लगते हैं, तो उन सैकड़ों लोगों को ईमेल मिलने लगता है। इस अखबारनवीस को अभी कुछ महीनों की राहत के बाद ऐसा ही हमला फिर झेलना पड़ रहा है जब किसी एक ने एक हस्ताक्षर अभियान चलाते हुए उसका नाम भी सैकड़ों लोगों के साथ जोड़ दिया। अब लोग जवाब देते हुए रिप्लाई टू ऑल कर रहे हैं, और हर कुछ घंटों में ऐसा एक गैरजरूरी ईमेल आते जा रहा है। कम्प्यूटर टेक्नालॉजी का अगर सावधानी से इस्तेमाल न हो, तो दूसरों के लिए ऐसी परेशानी खड़ी होते रहती है। 

बिना फंड संवर रही प्रकृति..

विश्व पर्यटन दिवस एक बहाना होता है प्राचीन, ऐतिहासिक धरोहरों की यात्रा करने की। इससे जुड़े सरकारी विभागों का काम होता है कि संरक्षण के नाम पर फंड लगाये, खर्च करे। जमीन पर कितना काम होता है इससे ज्यादा मतलब नहीं पर प्रचार खूब होता है। इस बार का विश्व पर्यटन दिवस अलग तरह का है। जो लोग लॉकडाउन और कोरोना के बीच भी प्रकृति और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कर आये हैं वे वहां के नजारों को देखकर खुश हैं। कोरबा जिले में बुका झील का पानी खूब साफ दिखाई दे रहा है। अचानकमार में सड़कों को हिरण, वनभैंसा पार करते हुए दिन में आसानी से दिखाई दे रहे हैं। गरियाबंद के जंगल में रंग बिरंगे पक्षी बिना खौफ चहचहा रहे हैं। सबक यही मिलता है कि आउटिंग के नाम पर, प्रकृति प्रेम के नाम पर हम जो सालभर जंगलों, पर्यटन स्थलों को रौंदते रहते हैं उसे भी साल के कुछ दिन इत्मीनान से सांस लेते हुए नई फुर्ती, ताजग़ी लाने के लिये छोड़ देना चाहिये।

 

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