राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रेप के मामलों पर केवल राजनीति
14-Oct-2020 7:14 PM 48
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रेप के मामलों पर केवल राजनीति

रेप के मामलों पर केवल राजनीति

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव और बलरामपुर और उसके बाद सरगुजा संभाग के ही राजपुर और वाड्रफनगर में हुई की दुष्कर्म की वारदातों पर जिस तरह कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने हाथरस से जोडक़र सियासत शुरू की है जरा भी हैरान करने वाली नहीं है। दोनों खुद को एक दूसरे से साफ सुथरा, महिला और बालिका सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बताने पर तुले हुए हैं। कांग्रेस के नेता समझते हैं कि हाथरस की घटना बड़ी है, भाजपा कहती है कि हाथरस मामले में तो सब तरह की जांच बैठा दी गई, हाईकोर्ट ने भी मामले में संज्ञान ले लिया है कार्रवाई तो बस्तर और सरगुजा की घटनाओं में होनी चाहिये। प्रदेश के एक मंत्री कहते हैं कि हाथरस की घटना बड़ी, बलरामपुर की छोटी। तब, भाजपा से नेता प्रतिपक्ष और दूसरे नेताओं के बयान आने लग गये। कोंडागांव की घटना को वहां के सांसद ने ज्यादा गंभीर बताया। हाथरस की घटना को बनावटी कहा और राहुल गांधी की इसमें रुचि लेने के औचित्य पर सवाल उठाया तो कोंडागांव के कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन पर सडक़ पर ही उतर आये। दरअसल, ऐसा करके दोनों ही दल अपनी संवेदनहीनता ही प्रगट कर रहे हैं। हैरानी यही है कि तमाम राजनैतिक दल कहते हैं कि ऐसे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिये और हकीकत यह है कि राजनीति के अलावा कुछ नहीं हो रहा है।

तो सरकार में रहकर अनशन करेंगे सिंहदेव ?

हाथियों को सुरक्षित रहवास देने और वनवासियों की सुरक्षा के लिये सरकार की लेमरू परियोजना में ज्यादातर इलाका तो कोरबा जिले का है पर इसमें सरगुजा जिले के भी करीब 52 गांव आने वाले हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव ने कल खम्हरिया में एक जनसभा में साफ कहा कि यह मत समझना कि मैं सरकार में हूं इसलिये आपका साथ नहीं दूंगा। जरूरत पड़ी तो आप लोगों के साथ आमरण अनशन करूंगा। उनका कहना है कि जब लेमरू एलिफेंट प्रोजेक्ट लाया गया तो इसका दायरा 450 वर्ग किलोमीटर रखने की बात हुई थी, पर अब यह 4000 वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करने की बात हो रही है। गांवों को विस्थापित किया जाना है पर यह ग्रामीणों की सहमति के बिना नहीं हो सकता। सिंहदेव के सामने जब इन ग्रामीणों ने नहीं हटाने की मांग की तब सिंहदेव ने यह बात रखी। सिंहदेव ने उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताया और कहा कि ग्राम सभा की सहमति बगैर कुछ नहीं हो सकता। कई बार सिंहदेव की साफगोई संकेत देने लगती है कि वे अपनी ही सरकार से नाखुश तो नहीं चल रहे?

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