राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : दो नंबर की दारू, मालिक का क्या?
20-Oct-2020 6:26 PM 229
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : दो नंबर की दारू, मालिक का क्या?

दो नंबर की दारू, मालिक का क्या?

हरियाणा पुलिस ने दिल्ली जाकर वहां एक शराब कारखाना के मालिक को गिरफ्तार किया है कि उसके कारखाने में बनी शराब हरियाणा में स्मगलिंग से पहुंच रही थी। इस डिस्टिलरी में बनी शराब हरियाणा में पकड़ाई थी, और वहां पुलिस की जांच में इसका मालिक अशोक जैन पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। अब एक अदालत के आदेश से पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले गई।

इधर छत्तीसगढ़ में लगातार दूसरे प्रदेशों के लिए बनी हुई शराब स्मगलिंग से आकर गांव-गांव में बिक रही है। मध्यप्रदेश में बनी गोवा का बड़ा स्टॉक अभी यहां जब्त हुआ, तो आबकारी विभाग के जानकार लोगों ने बताया छत्तीसगढ़ में केडिया डिस्टिलरी यह ब्रांड बनाती है, और केडिया का ही दूसरा बेटा मध्यप्रदेश में यह ब्रांड बनाता है। नियमों के हिसाब से कोई ब्रांड एक ही प्रदेश में बनाया जा सकता है, और उस नाम से दूसरे प्रदेश में दारू नहीं बनाई जा सकती।

लेकिन इस नियम से परे बड़ी बात यह है कि दो नंबर की दारू का बड़ा-बड़ा स्टॉक पकड़ाने के बाद भी, महंगी गाडिय़ों में जब्ती होने के बाद भी जहां से दारू बनकर आई है उस कंपनी या कारखाने के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? अगर चार बड़े कारखानेदार जेल चले जाएं, तो सारी तस्करी थम जाएगी। लेकिन शराब कारखानेदार सत्तारूढ़ राजनीति में इतना वजन रखते हैं कि उनकी गिरफ्तारी आसान नहीं रहती है। अभी हरियाणा में जिस जैन की गिरफ्तारी हुई है उसके बारे में भी लोगों का यही कहना है कि हरियाणा सरकार से पटी नहीं होगी, इसलिए उसे पटरी से उतार दिया। क्योंकि लोगों ने यह देखा कि जिस वक्त की शराब तस्करी के लिए इस डिस्टिलरी मालिक को गिरफ्तार किया गया उसी दौर में आधा दर्जन दूसरे डिस्टिलरी की भी टैक्स चोरी की शराब जब्त हुई थी, लेकिन उनमें से किसी के खिलाफ कुछ नहीं हुआ। दो नंबर की दारू जनता के हक में आने वाले टैक्स की बहुत बड़ी चोरी होती है, और जिस देश में जनता एक-एक पैसे के लिए तरस रही है, वहां पर अरबों की टैक्स चोरी छोटी बात तो है नहीं।

मरवाही में नोटा पर भी नजर...

मरवाही में जोगी दम्पत्ति का नामांकन रद्द होने के बाद भी यहां के एक-एक घटनाक्रम पर लोगों की जबरदस्त दिलचस्पी बनी हुई है। अमित जोगी किसी का समर्थन या विरोध नहीं करेंगे यह अपने बयान में कह चुके हैं लेकिन वे यह भी कह रहे हैं कि वे गांव-गांव जायेंगे और न्याय मांगेंगे। अब, मरवाही के मतदाताओं ने उनके साथ कोई अन्याय तो किया नहीं। उन्होंने तो हर चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जिताया। जो संकट सामने है उसका फैसला तो आखिरकार कोर्ट में होना है। अमित जोगी के इस रुख का किसे कितना फायदा होगा, या नुकसान आने वाले कुछ दिनों में साफ होगा। वे पक्ष-विपक्ष किसी का साथ नहीं देने की बात कर रहे हैं। ऐसे में उनके दौरे चुनाव आयोग के घेरे में भी नहीं होंगे। बस, एक बात ध्यान में रखनी होगी कि इस बार कांग्रेस या भाजपा किसी के लिये भी यह चुनाव एकतरफा नहीं है, जैसा जोगी के मैदान में रहते होता था। अब नोटा भी उलटफेर कर सकती है। दंतेवाड़ा का सन् 2018 का चुनाव याद होगा जब भीमा मंडावी जीते थे। उनके और कांग्रेस उम्मीदवार के बीच हार-जीत का फासला करीब दो हजार मतों का था और नोटा में चले गये थे जागरूक तथा नेताओं से खिन्न मतदाताओं के 9929 वोट। कांग्रेस भाजपा के बाद नोटा से अधिक वोट पाने वाले एक ही उम्मीदवार थे सीपीआई के नंदराम सोरी। मरवाही में 2018 के चुनाव में अगर कड़ी टक्कर होती तो नोटा पर ध्यान जाता। यहां भी नोटा को 4500 से ज्यादा वोट मिले। कुल दस प्रत्याशियों में पांच ऐसे थे जिन्हें नोटा से कम मत मिले। मरवाही में फैसला दो डॉक्टरों पर होना है। देखें नोटा की यहां क्या भूमिका होगी? नोट और नोटा ?!

धान का एथेनॉल और हंगर इन्डेक्स

धान खरीदी पर प्रोत्साहन दिये जाने के कारण इसका उत्पादन प्रदेश में लगातार बढ़ता ही जा रहा है लेकिन उगाये धान को खपाये कहां? पिछले सीजन में करीब 83 लाख टन मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई, जिससे 56.50 लाख टन चावल मिला। विभिन्न योजनाओं में खपाने के बावजूद करीब 10.50 लाख टन मीट्रिक धान या कहें 7.10 लाख चावल बच गया। केन्द्र सरकार अतिरिक्त चावल खरीदने को तैयार नहीं होता। इसे लेकर पिछले सत्र में विवाद था आगे भी इसकी संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए बचे हुए धान का एथेनॉल बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने केन्द्र को दिया था और इसके लिये मंजूरी तथा मदद मांगी थी। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस प्रस्ताव को मान लिया है। भाजपा की बैठक में उन्होंने इस निर्णय की घोषणा की। धान खरीदी के कारण राजस्व पर पडऩे वाला अतिरिक्त भार इससे कुछ कम होगा। दूसरी ओर दो दिन पहले ही आई एक और रिपोर्ट सामने है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के 107 देशों में भारत का स्थान 94वां है। एक तरफ लोगों की जरूरत से ज्यादा अनाज है दूसरी तरफ भुखमरी भी। एक ही देश में। कल्याणकारी योजनाओं  और वितरण व्यवस्था की विफलता, नीति बनाने वालों की गड़बड़ी, आखिर ये है क्या?

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