राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बैंक खाता खुला नहीं, ठगी शुरू
31-Oct-2020 8:04 PM 293
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बैंक खाता खुला नहीं, ठगी शुरू

बैंक खाता खुला नहीं, ठगी शुरू

जिस रफ्तार से लोगों के पास फोन, कम्प्यूटर, इंटरनेट बढ़ रहे हैं इससे अधिक रफ्तार से साइबर ठगी और जालसाजी बढ़ रही है। अभी हफ्ते भर पहले एक नंबर से कुछ बहुत आकर्षक मोबाइल नंबरों की बिक्री का मैसेज आया। उसमें से एक नंबर खरीदने के लिए छत्तीसगढ़ से एक व्यक्ति ने फोन लगाया तो बेचने वाले ने तुरंत ही अपना बैंक खाता नंबर दे दिया कि इसमें 18 हजार रूपए जमा करा दें। उससे पूछा गया कि वह किस शहर में है, तो उसने जयपुर बतलाया। जब कहा गया कि जयपुर में ही किसी को नगद रकम देकर भेज देते हैं जो सिम ले लेगा, तो उसने अनमने ढंग से एक अधूरा पता दिया। उसके नंबर पर जब जयपुर से किसी ने फोन किया कि पता समझा दो, नगद रकम लेकर आ रहे हैं, सिम लेने के लिए, तो उसकी दिलचस्पी बिक्री में खत्म हो गई। दिक्कत यह है कि देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खाता खोलकर ऐसी जालसाजी आसानी से की जा रही है, और बैंकों के ग्राहक शिनाख्ती के सारे इंतजाम मानो शरीफों को परेशान करने के लिए हैं, और जालसाजों को लिए दोस्ताना हैं।

रायपुर में आज सुबह इस अखबारनवीस ने एक बैंक में खाता खोला। अभी टेलीफोन पर उसकी एक औपचारिकता होना बाकी थी। खाता खोलते वक्त एक फिंगरप्रिंट डिवाइस पर अंगूठे का निशान लिया गया था, उसका ईमेल आधार कार्ड की तरफ से आ भी गया। अभी बैंक से फोन नहीं आया, लेकिन एक किसी का भेजा एसएमएस जरूर आ गया कि खाते में 92 हजार रूपए जमा है। अब 15 हजार रूपए देकर जो खाता खोला गया है, अभी तो वह रकम भी दूसरे बैंक से निकली नहीं है, नए बैंक पहुंची नहीं है, और जालसाज को खबर लग गई, उसने 92 हजार रूपए उपलब्ध होने का मैसेज भी भेज दिया। इसके नीचे कोई एक लिंक है जिसे क्लिक करने के लिए कहा गया है। अब कितने लोग होंगे जो ऐसे लिंक को क्लिक करने से अपने को रोक पाएंगे? और क्लिक करते ही जालसाजी का सिलसिला आगे बढ़ निकलेगा।

इस तरह की साइबर जालसाजी और ठगी बढ़ते ही चल रही है। और सरकार है कि लोगों के सुलभ शौचालय जाने पर भी आधार कार्ड अनिवार्य करने पर आमादा है। अंगूठे का निशान देते ही आधार का ईमेल आया, और कुछ मिनटों के भीतर जालसाज का एसएमएस भी आया। इन दोनों का कोई रिश्ता हो तो भी हैरानी नहीं होगी क्योंकि सरकार के अधिकतर कम्प्यूटरों तक हैकरों की घुसपैठ आम बात है।

इनसे दाल-सब्जी में संशोधन करवाएं...

रात-दिन सरकार के समाचार भेजने वाले लोग भी जब आए दिन अपनी भेजी खबरों में संशोधन भेजते हैं, तो उन लोगों को भारी परेशानी होती है जिन्होंने उनकी पहले की खबर पर मेहनत करके उसे सुधारकर तैयार किया है। अब यह संशोधन कायदे से तो सिर्फ इतना आना चाहिए कि कौन सा हिस्सा बदला जा रहा है। लेकिन उसे फिल्मी सस्पेंस की तरह रखकर पूरे का पूरा प्रेस नोट दुबारा भेज दिया जाता है, जिसका मतलब यह होता है कि पूरे प्रेस नोट को दुबारा सुधारा जाए।

ऐसे लोगों को घर पर दो-दो बार नमक पड़ी हुई दाल और सब्जी मिलनी चाहिए, और पहला कौर खाते वक्त जुबानी संशोधन बताया जाए कि नमक दो बार पड़ गया है, संशोधित करके एक बार का नमक हटा दें। जब ऐसे लोग इस तरह से नमक हटाने की मेहनत करेंगे, तब उन्हें समझ आएगा कि सुधारकर, संपादन करके तैयार किए गए प्रेस नोट में संशोधन कितना आसान होता है!

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