राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बेवजह क्यों बढ़ गये सीमेन्ट, स्टील के दाम?
11-Jan-2021 4:43 PM 260
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बेवजह क्यों बढ़ गये सीमेन्ट, स्टील के दाम?

बेवजह क्यों बढ़ गये सीमेन्ट, स्टील के दाम?

कोरोना के भयावह दौर के गुजरने के बाद उद्योग धंधों में तेजी आई है। खेती और आटोमोबाइल्स सेक्टर को छोडक़र बाकी सब व्यवसायों में बीते साल गिरावट थी। खासकर पहले से रेरा, टैक्स और रजिस्ट्री के नियमों के चलते रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी मंदी देखने को मिली। अब लोग थोड़ी राहत की सांस ले रहे हैं और इसमें निवेश की सोच रहे हैं। लोगों ने अपने रुके हुए घर, दफ्तर बनाने के काम को भी दुबारा शुरू किया है पर स्टील और सीमेन्ट के दाम बढऩे लगे हैं। लागत बढऩे की प्रमुख वजह यही है। बिल्डरों का कहना है कि न तो इस समय मजदूरी बढ़ी, न कच्चे माल का दाम बढ़ा न ही बिजली दर में कोई बढ़ोतरी हुई है फिर भी यह स्थिति बन गई है। ऐसा केवल छत्तीसगढ़ में नहीं बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रहा है। एक रियल एस्टेट कारोबारी का कहना है कि जिस तरह सिंडिकेट पहले सीमेन्ट में था, अब स्टील में भी बन चुका है। बिजली की तरह एक नियामक प्राधिकरण इनकी कीमत पर नियंत्रण के लिये बनना चाहिये। भारत माला और दूसरी सडक़, ब्रिज परियोजनाओं की लागत बढऩे के कारण चिंतित केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बात के संकेत भी दिये हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार पर बोलें, दिल्ली भूल जायें

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर चल रहा संकट किसी से छिपा नहीं रह गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर आंदोलन शुरू करने की बात कही है। पहले 13 जनवरी को सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में धरना-प्रदर्शन की तैयारी की गई है उसके बाद 22 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों में रैली और प्रदर्शन किया जाना है। भले ही भाजपा के पास छत्तीसगढ़ में सीटें बहुत कम है पर कैडर तो पहले जैसा ही है। इसलिये पूरी संभावना है कि इन धरना प्रदर्शनों में ठीक-ठाक भीड़ इक_ी हो जायेगी। दूसरी तरफ इस वक्त हर किसी के दिमाग में दिल्ली में चल रहे किसानों का आंदोलन भी घूम रहा है। भले ही वहां छत्तीसगढ़ के लोग ज्यादा नहीं पहुंचे पर यहां भी कई जगहों पर धरना प्रदर्शन हो रहे हैं। अम्बिकापुर में तो दिल्ली के किसानों की तरह एक छोटी ट्रैक्टर रैली भी निकाली गई। छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार को धान खरीदी पर घेरने के लिये भाजपा नेता सतर्क दिखाई दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि वे अपने मंच से दिल्ली के किसान आंदोलन पर संभल कर बात करें। किसान कानून के फायदे गिनाने की कोशिश भी न करें। लोगों का ध्यान भटकेगा।

पोल्ट्री बिजनेस का बुरा हाल

छत्तीसगढ़ में अब तक बर्ड फ्लू का कोई केस नहीं मिल पाया है लेकिन लोग दहशत में हैं। रतनपुर में दो दिन पहले तीन कौवे एक साथ मरे पाये गये। अलग-अलग स्थानों से भी एक से अधिक संख्या में पक्षियों, मुर्गियों की मौत की खबर आई है। इनका सैम्पल शासकीय पोल्ट्री फॉर्म भेजकर जांच कराई गई है। कहीं से भी पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं आई है। इसके बावजूद लोग चिकन और अंडे खाने से परहेज कर रहे हैं। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, सरगुजा सभी जगहों से खबरें हैं कि चिकन के दाम 50 फीसदी तक घट गये हैं। नानवेज के शौकीन रविवार को अधिक खरीदारी करते हैं पर कल मांग कम रही। अंडों की बिक्री में भी गिरावट आई है। पोल्ट्री फॉर्म चलाने वालों को उम्मीद है कि अगर हफ्ते, दस दिन बाद भी कोई केस नहीं आयेगा तो लोगों का डर थोड़ा कम होगा और बाजार सुधर सकेगा।

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