राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ज्योतिषी निकल लिए...
14-Jan-2021 4:43 PM 157
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ज्योतिषी निकल लिए...

ज्योतिषी निकल लिए...

राज्यपाल आम लोगों से मेल मुलाकात से परहेज नहीं करती हैं। धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग अक्सर उनसे मिलने जाते हैं। ऐसे ही एक ज्योतिषी का पिछले दिनों राजभवन जाना हुआ। वहां उन्होंने अफसरों से भी मुलाकात की। अफसर भी फुर्सत में थे। उन्होंने जिज्ञासावश अपना भविष्यफल पूछ लिया। एक महिला अफसर को ज्योतिषी ने बताया कि उनका जल्द प्रमोशन होने वाला है। वे आईएएस बन जाएंगी। चूंकि महिला अफसर 2003 बैच की थीं। लिहाजा, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

एक अन्य अफसर को लेकर भी ज्योतिषी ने काफी अच्छी बातें कही। ज्योतिषी ने अफसर से कहा कि उनका भी जल्द प्रमोशन होगा। विभाग में उन्हें काफी महत्व मिलेगा। अफसर ने हाथ जोडक़र कहा-महाराजजी, चार महीने बाद मेरा रिटायरमेंट है। पदोन्नति अब नहीं होगी। जहां तक विभाग में महत्व का सवाल है, यदि ऐसा होता, तो राजभवन के बजाए विभाग में ही रहता। ज्योतिषी को समझ में आ गया कि उनकी भविष्यवाणी गलत साबित हो रही है, तो उन्होंने किसी तरह बात बनाकर वहां से निकल लिए।

बीजेपी में परफॉर्मेंस का दबाव

भाजपा में जिन नेताओं ने जोड़-तोडक़र पद हासिल कर लिए हैं, उन पर अब बेहतर परफार्मेंस के लिए दबाव है। भाजपा की नई प्रभारी डी पुरंदेश्वरी ने साफ-साफ कह दिया है कि पद में हैं, तो उन्हें परफार्मेंस दिखाना होगा। उन्होंने सरकार के खिलाफ धान-बोनस को लेकर विधानसभा सीट स्तरीय प्रदर्शन को लेकर टारगेट दिया था, और प्रदर्शन के बाद रिकॉर्डिंग कर उन्हें भेजना था। हालांकि ज्यादातर जिलों में अपेक्षाकृत भीड़ नहीं जुट पाई। 22 तारीख को फिर जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन हैं, जिसमें प्रदेश प्रभारी खुद भी शामिल होंगी।

पदाधिकारियों की दिक्कत यह है कि धरना-प्रदर्शन के लिए भीड़ जुटाने से लेकर सारी व्यवस्था खुद करनी है। सत्ता में थे, तो सारी व्यवस्थाओं में पर्दे के पीछे सरकारी तंत्र जुट जाता था, और सारा काम आसानी से हो जाता था। अब विपक्ष में हैं, तो स्वाभाविक है कि सारा इंतजाम खुद करना है। जिन्हें पद नहीं मिला, और जो नाराज हैं उनका सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसे में बेहतर परफार्मेंस चुनौती बन गई है। अब 22 तारीख को धरना-प्रदर्शन है, जिसकी समीक्षा प्रदेश प्रभारी करेंगी। देखना है आगे-आगे होता है क्या।

आपकी अर्जी  फरियाद, हमारी कागज का टुकड़ा?

कोविड-19 महामारी शुरू होने के बाद जिला मुख्यालयों में जनदर्शन का जो सिलसिला बंद हुआ वह अब तक दुबारा शुरू नहीं हो पाया है। इसका मतलब यह नहीं कि समस्यायें घट गई हैं। आये दिन लोग दूर-दराज के गांवों से राशन, पेंशन, आवास, पानी, फसल आदि की समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। लगभग हर जिले में किसी अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर को इन आम लोगों की शिकायतों को लेने और आश्वस्त कर लौटाने की जिम्मेदारी दे दी गई है। लोग भले ही इस उम्मीद से पहुंचें कि सीधे कलेक्टर बात सुनें। इन्हें लगता है कि कलेक्टर ही जिले का मालिक है और यदि उन्होंने भरोसा दिला दिया तो सब ठीक हो जायेगा। पर सबको ऐसा मौका नहीं मिलता। लोग एक ही समस्या को लेकर बार-बार अपनी दिनभर की रोजी का नुकसान कर और यात्रा खर्च ढोकर पहुंचते हैं।

पर इन दिनों जिला दफ्तरों में एक खास मौका देखने मिला। अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, सीईओ, एसडीएम, तहसीलदार और जिले के बड़े-बड़े अधिकारी ज्ञापन लेकर कलेक्टर के सामने एक साथ खड़े हैं। इस समय कोविड गाइडलाइन के चलते जनदर्शन बंद है। बहरहाल, छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी संघ के बैनर पर इन्होंने कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपा है। इस उम्मीद के साथ कि वे इसे मुख्य सचिव तक आवश्यक कार्रवाई के लिये भिजवायें। वे बैकुंठपुर में हुई रिटायर्ड अपर कलेक्टर एडमंड लकड़ा की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं, जिन्हें एक कीमती जमीन के गलत आबंटन के आरोप में पुलिस ने जेल भेज दिया।

अधिकारी बता रहे हैं कि किसी मजिस्ट्रेट पर या राजस्व न्यायालय के पीठासीन अधिकारी पर पुलिस ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकती। उन्हें संरक्षण मिला हुआ है। काश, इनमें से कोई हर्षमंदर या ब्रह्मदेव जैसा कलेक्टर हो जो इतने अधिकारियों को अपनी तकलीफ पर एक साथ तैनात देखकर बोले- आओ, काफिला लेकर सब गांव की ओर निकल चलें।

भाजपा नेताओं पर एट्रोसिटी एक्ट

आरटीओ उन दफ्तरों में से है, जहां सरकार चाहे किसी की हो, रौनक बनी रहती है। बल्कि सभाओं में भीड़ जुटाने में इसकी बड़ी जरूरत पड़ती है। सत्ता पक्ष का ख्याल तो रखा ही जाता है, ज्यादा समय तक टिके रहने के लिये विपक्ष के नेताओं का भी ख्याल समय-समय पर कर लिया जाता है। यही वजह है कि कई जिलों में ऐसे बहुत से अधिकारी हैं जो पिछली सरकार में भी ठीक-ठाक वजन रखते थे और अब भी उनका रुतबा है। यह एक सामान्य धारणा ही है। हर जगह ऐसा ही होता हो जरूरी नहीं। बहुत अधिकारी भ्रष्ट विभागों की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद बेदाग माने जाते हैं।

पर जगदलपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय दूसरी वजह से चर्चा में है। भाजपा ने बीते दिनों लोकल ट्रांसपोर्टरों से हो रही कथित अवैध वसूली पर रोक लगाने की मांग की। पर उन्हें संभवत: दिक्कत छह-सात पहले लगाये गये शिलालेख से छेड़छाड़ को लेकर थी। इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों और भाजपा नेताओं के नाम थे। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने अति उत्साह में आरटीओ की नाम पट्टिका पर स्याही पोत दी। शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि ऐसा करना उनके लिये नई परेशानी खड़ी कर देगा।

अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करा दी है। आंदोलन का तरीका कुछ हटकर हो तो चर्चा दूर तक हो ही जाती है। नाम पट्टिका पर स्याही पोतने से तो भाजपा कार्यकर्ता चर्चा में आ ही गये पर इस विरोध से निपटने के लिये आरटीओ ने जो तेवर दिखाया उसकी भी कम चर्चा नहीं है। अब अवैध वसूली, शिलालेख की शिकायत को किनारे रख दीजिये। कौतूहल इस बात को लेकर ज्यादा है कि पुलिस इस एफआईआर पर एक्शन क्या लेती है। 

किसान आंदोलन में ट्रैक्टर का क्रेज

दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में ट्रैक्टर का बड़ा आकर्षण है। ज्यादातर आंदोलनकारी ट्रैक्टर से ही पंजाब, हरियाणा और आसपास के दूसरे राज्यों से पहुंचे हैं। वे ट्रॉली पर बैठकर ही नारेबाजी और जोशपूर्ण गीत गा रहे हैं। खाना, पीना, सोना सब ट्रैक्टरों पर हो रहा है। खास बात यह है कि ट्रैक्टर किसानी का उपकरण होने के कारण इसे किसी इलाके में आने-जाने के लिये दूसरे मालवाहकों की तरह अलग परमिट लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इसीलिये एक राज्य से दूसरे राज्य किसान इसे आसानी से लेकर जा रहे हैं।

बीती 7 जनवरी को हजारों ट्रैक्टरों की परेड दिल्ली में निकली थी जो 26 जनवरी को आंदोलनकारियों द्वारा किये जाने वाले प्रदर्शन का रिहर्सल थी। लोग नजर जमाये बैठे हैं कि जब रिहर्सल में इतनी लम्बी कतारें थीं तो 26 जनवरी का माहौल कैसा रहेगा?  इधर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में भी ट्रैक्टर रैलियां किसानों के समर्थन में निकली। ट्रैक्टर ने ऐसा असर डाला है कि अब सभी दल डीजल के दाम क्या हैं, भूलकर अपने आंदोलनों में इस्तेमाल करना चाह रहे हैं। अम्बिकापुर में किसानों के समर्थन में कांग्रेसियों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। कल भाजपा ने भी जगह-जगह प्रदर्शन किया था, पर राज्य सरकार के खिलाफ। जगदलपुर सहित कई जगह ट्रैक्टरों पर भाजपा नेता, कार्यकर्ता निकले। मगर, फिलहाल भाजपा को ट्रैक्टरों से परहेज करना चाहिये। कहीं लोग यह न समझ लें कि वे दिल्ली बार्डर पर बैठे किसानों का साथ देने निकल पड़े हैं।

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