राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जलवायु की सुध...
24-Jan-2021 6:30 PM 218
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : जलवायु की सुध...

जलवायु की सुध...

मौसम में बदलाव अब धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण कर रहा है। इससे न सिर्फ कृषि बल्कि जनजीवन पर भी असर पडऩे लगा है। कई राज्यों में इस दिशा में अच्छा काम हो रहा है, और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से वित्तीय मदद भी मिली है। मगर छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों में इस पर कोई काम नहीं हुआ। हाल यह रहा कि जलवायु परिवर्तन विषय पर राज्य के वन अफसर विदेश यात्रा करते रहे, लेकिन एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार नहीं की गई। जबकि जलवायु परिवर्तन, एसएफआईआरटी के अधीन रहा है, और यहां पीसीसीएफ स्तर के अफसर पदस्थ रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन पर अब जाकर सरकार ने सुध ली है, और वन विभाग का नाम बदलकर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कर दिया गया है। इसमें सीएम भूपेश बघेल खुद रूचि ले रहे हैं, और उनके सलाहकार प्रदीप शर्मा की मौजूदगी में हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स राकेश चतुर्वेदी के साथ एक बैठक भी हो चुकी है। जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है, और इसके लिए सीनियर एपीसीसीएफ सुधीर अग्रवाल को नोडल अफसर बनाया गया है।

 सुधीर बेहद काबिल अफसर माने जाते हैं, और अगले दो-तीन महीने के भीतर कार्ययोजना तैयार कर केन्द्र सरकार को भेज दी जाएगी। उम्मीद है कि जलवायु परिवर्तन पर रिसर्च और विपरीत प्रभाव को रोकने के लिए केन्द्र सरकार 5 सौ करोड़ तक राशि आबंटित कर सकती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी वित्तीय मदद की भी संभावना है। कुल मिलाकर इस दिशा में काफी काम की गुंजाइश है। खैर, देर से ही सही इस गंभीर समस्या पर काम तो शुरू हुआ।

विपक्ष में होने से महत्व

भाजयुमो अध्यक्ष अमित साहू की पार्टी के भीतर काफी पूछपरख बढ़ गई है। चूंकि अभी तक कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है। इसलिए पार्टी के नेता अपने समर्थकों को भाजयुमो में एडजेस्ट करने के लिए अमित के आगे-पीछे हो रहे हैं। अमित का हाल यह है कि तीनों मोबाइल लगातार घनघनाते रहते हैं। जिलों के दौरे में अमित की खूब खातिरदारी होती है। सीनियर नेता भी उनसे मिलने आते हैं। चूंकि पार्टी सरकार में नहीं है, इसलिए उन्हें इतना महत्व मिल जा रहा है, जितना पहले किसी भाजयुमो अध्यक्ष को नहीं मिला।

जानें किस अफसर की क्या पढ़ाई है!

देश में सबसे ताकतवर समझी जाने वाली सिविल सर्विस, आईएएस में आने वाले लोग कौन सी पढ़ाई करने के बाद इस मुकाबले में उतरते हैं, इसे एक नजर में देखें। आज राज्य में सबसे सीनियर आईएएस चित्तरंजन कुमार खेतान हिन्दी में एम.ए. हैं, उन्हीं के बैचमेट बी.वी.आर.सुब्रमण्यम मैकेनिकल इंजीनियर हैं। तीसरे नंबर के अमिताभ जैन भी मैकेनिकल इंजीनियर हैं, और उन्होंने एम.टेक भी किया हुआ है। उनके बाद की रेणु पिल्लै समाजशास्त्र में एम.ए. हैं। अगला नंबर सुब्रत साहू का है जो कि राजनीति विज्ञान में एम.ए. हैं। इन दिनों भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर गए हुए अमित अग्रवाल इलेक्ट्रीकल इंजीनियर हैं। ऋचा शर्मा एम.ए. हैं, और लोकनीति में डिप्लोमा प्राप्त हैं। निधि छिब्बर ने इतिहास में एम.ए. किया, एलएलबी किया, और बौद्धिक संपदा में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाया। उनके पति और लिस्ट में अगले, विकासशील इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, और इसी में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं। मनोज कुमार पिंगुआ बॉटनी में बीएससी हैं, और एन्थ्रोपोलॉजी में एमएससी हैं। डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी एमबीबीएस हैं, और उनके पति गौरव द्विवेदी जूलॉजी में ग्रेजुएट हैं। भारत सरकार गए हुए सुबोध कुमार सिंह भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने बीई के बाद एमई भी किया हुआ है। डॉ.एम.गीता एन्थ्रोपोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट हैं, और पीएचडी भी की हुई है। निहारिका बारिक ने समाजशास्त्र में एम.ए. किया हुआ है। सोनमणि बोरा विख्यात जेएनयू से राजनीति विज्ञान में एम.ए. हैं, और अमरीका से लोकप्रशासन में पोस्ट ग्रेजुएट किया है। डी.डी.सिंह बीए हैं। शहला निगार राजनीति विज्ञान में एम.ए., एम.फिल हैं। भारत सरकार गए हुए डॉ. रोहित यादव एमबीबीएस हैं, और उन्हीं के बैचमेट डॉ. कमलप्रीत सिंह भी एमबीबीएस हैं। अमृत कुमार खलको भूगोल में पीजी हैं, और विजय कुमार धुर्वे इकानॉमिक में एमए हैं। रीता शांडिल्य बीएससी और फिजिक्स में एमएससी हैं। परदेशी सिद्धार्थ कोमल इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई किए हुए हैं। रीना बाबासाहब कंगाले एलएलबी हैं। ऋतु सैन राजनीति में एमए हैं, और जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय मामलों में एम.फिल हैं। रायपुर में रहते हुए उन्होंने रविशंकर विश्वविद्यालय से एलएलबी भी किया है। अविनाश चम्पावत राजनीति विज्ञान और भूगोल में एमए हैं। (आगे के लोगों के बारे में कल)

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