राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बोरा का इंतजार जारी
19-Feb-2021 6:03 PM 267
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बोरा का इंतजार जारी

बोरा का इंतजार जारी

भाप्रसे के अफसर सोनमणि बोरा को राज्य सरकार ने केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने की हरी झंडी दे दी है, लेकिन अब तक उनकी वहां पोस्टिंग नहीं हुई है। चूंकि उन्होंने खुद होकर केन्द्र सरकार में काम करने की इच्छा जताई थी, लिहाजा, यहां उन्हें कोई अहम दायित्व नहीं सौंपा गया है। उनके पास अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण संसदीय कार्य विभाग का प्रभार दे दिया गया है, जहां रोज-रोज फाइल भी नहीं आती है। विधानसभा सत्र के दौरान थोड़ा बहुत काम रहता है।

98 बैच के अफसर बोरा केन्द्र में संयुक्त सचिव के पद पर इम्पैनल हुए हैं। मगर फिलहाल उनकी पोस्टिंग की संभावना कम दिखाई दे रही है। वजह यह है कि केन्द्र सरकार में पोस्टिंग के लिए समिति की बैठक काफी समय से नहीं हुई है। कोरोना की वजह से बैठक टल रही है, और अगले कुछ हफ्ते बैठक होने की संभावना भी नहीं दिख रही है। यानी बोरा को केन्द्र में प्रतिनियुक्ति के लिए अगले दो-तीन महीने और इंतजार करना होगा।

 ऊंची छलांग

छत्तीसगढ़ के कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके डॉ. संजय द्विवेदी ने ऊंची छलांग लगाई है। डॉ. द्विवेदी आईआईएमसी के डीजी के पद पर हैं। यह पद केन्द्र सरकार में अतिरिक्त सचिव के समकक्ष है। आईआईएमसी में ऑल इंडिया इनफार्मेशन सर्विस के अफसर ट्रेनिंग लेते हैं, और यह देश के सबसे पुराने प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है।

आमतौर पर यहां अतिरिक्त सचिव स्तर के आईएएस अफसर ही डीजी के पद पर रहे, लेकिन पहली बार सीनियर जर्नलिस्ट को मौका मिला है। संघ परिवार के करीबी माने जाने वाले डॉ. संजय द्विवेदी, भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विवि में कुलसचिव के पद पर थे।

डॉ. द्विवेदी से परे गत वर्ष आईआईएस में चयनित शालिनी अवस्थी  ट्रेनिंग पूरा कर सूचना एवं प्रसारण विभाग के डीएवीपी में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदस्थ हुई हैं। शालिनी मूलत: छत्तीसगढिय़ा हैं, और वे छत्तीसगढ़ की अकेली अफसर हैं, जो आईआईएस में चयनित हुई। शालिनी भी मीडिया संस्थान में काम कर चुकी हैं, और आईआईएस में आने से पहले वे दिल्ली म्युनिसिपल में अफसर थीं।

रहस्यमय तरीके...

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक सबसे व्यस्त चौक, शारदा चौक पर ट्रैफिक पुलिस जब झपटकर किसी दुपहिए-चौपहिए को रोकती है, तो शुरूआती बातचीत के बाद एक ट्रैफिक सिपाही ड्राइवर को लेकर बगल के मंदिर में जाता है। हो सकता है कि वहां ड्राइवर को ईश्वर के सामने यह कसम दिलाई जाती होगी कि वे दुबारा ट्रैफिक नियम नहीं तोड़ेंगे, लेकिन हर बात में बुराई देखने वाले कुछ लोगों का यह मानना है कि ट्रैफिक पुलिस जब ट्रैफिक की नजरों से परे किसी को ओट में ले जाती है, तो वह कोई धार्मिक कसम दिलाने के लिए नहीं ले जाती।

बात यहां तक रहती तो भी ठीक था। शंकर नगर और केनाल रोड के जंक्शन पर जब ट्रैफिक पुलिस इसी तरह किसी को झपट्टा मारकर पकड़ती है, तो ड्राइवर को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय के बंगले के गेट पर बनी छोटी सी कोठरी में ले जाती है। पांडेयजी के बंगले में चहल-पहल कम रहती है, और गेट पर गार्ड का कमरा खाली रहता है। अब पुलिस ड्राइवरों को यहां लाकर पता नहीं कौन सी कसम दिलवाती है!

श्रीराम की एक भूमि कोरबा में भी...

प्रदेशभर से सरकारी और निजी जमीन की आ रही अफरा-तफरी की खबरों के बीच राजस्व मंत्री के जिले कोरबा से एक अनूठी खबर आई है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक जमीन भगवान राम, पिता दशरथ, निवास अयोध्या चढ़ी हुई मिली। पटवारी, तहसीलदार से शिकायत हुई तो पहले यह कहा गया कि यह नामांतरण ऑनलाइन एंट्री के दौरान ट्रायल के लिये किया गया होगा, जिसे बाद में सुधारा नहीं गया। यहां तक तो ठीक है अब इसके बाद रिकॉर्ड सुधरा तो यह जमीन सीएसईबी के नाम पर चढ़ गई।

सीबीएसई के अधिकारियों ने साफ किया कि उनका इस जगह पर कोई भूखंड नहीं है। अब तहसीलदार कह रहे हैं आईडी किसी ने हैक कर ली और जान-बूझकर शरारत की गई है। बहरहाल, गड़बड़ी करने वालों का अब तक पता नहीं चला है। इधर, इस जमीन के दो दावेदार सामने आये हैं और दोनों ही दावा कर रहे हैं कि जमीन का रिकॉर्ड उनके पास है। असली भू-स्वामी कौन है यह तय होना अभी बाकी है। जमीन का मामला संवेदनशील है।

पटवारी बस्ते में बंद दस्तावेजों में भी छेड़छाड़ होती रही है पर रिकॉर्ड का ऑनलाइन किया जाना तो जीरो ईरर होना चाहिये। इस तरह से जमीन का मालिकाना हक बदलना आसान रहा तो गड़बडिय़ां इतने बड़े पैमाने पर शुरू हो सकती है, जिन्हें पकडऩा मुश्किल हो जायेगा। धान बिक्री के रकबे की एंट्री के दौरान भी ऐसी गड़बडिय़ां सामने आ चुकी हैं। 

नेताओं को  फुरसत नहीं नाम कटाने की

गवाही, चालान की प्रक्रिया को यदि पूरी गंभीरता और तेजी से निपटाया जाये तो राजनीतिक आंदोलन ही बंद हो जायेंगे। न धरना-प्रदर्शन होगा, न चक्काजाम। इन आंदोलनों में शामिल होने वालों की उम्मीद बनी रहती है कि यदि कोर्ट में केस भी चला तो गवाह नहीं टिकेंगे। सरकार बन गई तो केस खत्म करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जायेगी। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ खूब धरना, प्रदर्शन किया, गिरफ्तारियां दी। अब इन राजनीतिक मुकदमों के खात्मे की प्रक्रिया शुरू हुई है। गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रियों की एक उप-समिति भी बनी है, जिसकी एक बैठक भी हो चुकी।

अब यह हो रहा है कि किस तरह के मामलों का खात्मा करने का प्रस्ताव बनाया जाये यह थानेदारों को समझ नहीं आ रहा है। बहुत से गंभीर आपराधिक प्रकरण हैं जिन पर ये नियम लागू नहीं हो सकता, हालांकि वे राजनैतिक लोगों से ही जुड़े हुए हैं। इसके अलावा जिन नेताओं के विरुद्ध मामले दर्ज हैं वे खुद आवेदन लेकर नहीं आ रहे हैं, जो एक अनिवार्य प्रक्रिया है। यह बात खुद गृह मंत्री ने बैठक में उठाई है। इधर, प्रदेश में ‘बिगड़ती कानून-व्यवस्था’ को लेकर 20 फरवरी को भाजपा महिला मोर्चा प्रदर्शन करने जा रही है। वे आंकड़े बता रही हैं कि किस-किस तरह के अपराध कितने बढ़े। अगर ये राजनीतिक मामले भी शून्य हो जायें तो फेहरिस्त थोड़ी छोटी ना हो जाती?

स्कूल में फैले संक्रमण से सबक लेंगे?

महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्थानों, खासकर ट्रेनों में यात्रा के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने के लिये बड़ी संख्या में वालिंटियर्स तैनात करने का निर्णय लिया है। हाल ही में संक्रमण के मामलों ने वहां फिर रफ्तार पकड़ी, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। अपने यहां भी स्कूल, कॉलेज, मल्टीप्लेक्स, बस, ट्रेन में गतिविधियां सामान्य हो रही है। इधर राजनांदगांव के एक स्कूल में 9 शिक्षकों और दो छात्रों में कोरोना का संक्रमण पाया गया। संभवत: आगे इनकी संख्या और बढ़ सकती थी।

कोरोना गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है यह अब सिर्फ रेडियो, टीवी के विज्ञापनों में सुनाई दे रहा है। सार्वजनिक स्थलों पर लोग जागरूक रहें, इसकी कोई कोशिश नहीं हो रही। कोरोना के दौरान जब लोगों की सहूलियत के लिये कुछ घंटे, दिन के लिये अनलॉक किये गये तो हाट-बाजार में वालेंटियर्स तैनात किये जाते थे। अब जिस तरह से इस ओर बेफिक्री दिखाई दे रही है, वह किसी भी दिन चिंता बढ़ा सकती है। महाराष्ट्र का प्रयोग छत्तीसगढ़ में भी किया जाये तो कुछ गलत नहीं।

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