राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : आदित्यों का उदय...
21-Feb-2021 5:20 PM 250
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ :  आदित्यों का उदय...

आदित्यों का उदय...

सरगुजा की राजनीति में विशेषकर कांग्रेस दूसरी पीढ़ी के नेताओं का दबदबा बढ़ रहा है। इन दिनों दो ‘आदित्य’ की जमकर चर्चा है। टीएस सिंहदेव के भतीजे आदित्येश्वर शरण सिंहदेव, जो कि जिला पंचायत के सदस्य भी हैं, वे काफी सक्रिय हैं। एक तरह से टीएस का राजनीतिक प्रबंधन आदित्येश्वर ही संभालते हैं। इससे परे सरगुजा के एक और प्रभावशाली नेता और सरकार के मंत्री अमरजीत भगत के बेटे आदित्य भगत की भी ग्रैंड लॉचिंग हो चुकी है।

आदित्य को एनएसयूआई में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें सोशल मीडिया विभाग का चेयरमैन बनाया गया है। आदित्य की नजर अगले लोकसभा चुनाव पर है, जिसके लिए वे अभी से मेहनत कर रहे हैं। कुछ लोगों का अंदाजा है कि आदित्येश्वर भी विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं। कुल मिलाकर दोनों ‘आदित्य’ की कार्यशैली पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।

पेपर की बात छोडि़ए

डी पुरंदेश्वरी के प्रदेश भाजपा का प्रभार संभालने के बाद से पार्टी के नेता अचानक सक्रिय हो गए हैं। खुद पुरंदेश्वरी मोर्चा-प्रकोष्ठों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही हैं। इस वजह से बेहतर कार्यक्रम करने के लिए पदाधिकारियों पर काफी दबाव भी है। कार्यक्रम हो रहे हैं, तो खर्च भी हो रहा है। ऐसे में पदाधिकारी फंड के इंतजाम के लिए बड़े नेताओं के आगे-पीछे हो रहे हैं।

पिछले दिनों अंबिकापुर में पार्टी की संभागीय बैठक में केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह अपने विभाग के कामकाज का बखान कर रहीं थी कि उनके विभाग का पूरा काम पेपरलेस हो गया है, तो एक सीनियर पदाधिकारी ने उन्हें टोक दिया, और कहा कि पेपर की बात छोडि़ए, फंड के बारे में सोचिए। इस पर वहां जमकर ठहाका लगा।

बड़े दिल के लोग

आज जब चारों तरफ मकान मालिक आर किराएदार एक-दूसरे के खिलाफ अदालत में खड़ नजर आते हैं, तब भी इस कलयुग में ऐसे बड़े दिल के लोग रहते हंै जिन्होंने अपनी 50 साल की किराये की दुकान (3000 फीट) बिना किसी दबाव के, बिना किसी पैसे के खाली कर दी और चाबी जगह के मालिक ट्रस्ट को दे दी। ऐसे ही एक वाकया आज ही हुआ है। श्री ऋषभदेव मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट एमजी रोड रायपुर में बहुत से किरायेदार हैं, जिनमें से एक किरायेदार हैं श्री स्टील, जिनके मालिक हैं अनिल, अनुराग एवं आकाश श्रीवास्तव। करीब पचास बरस से ये श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के किरायेदार थे। दादाबाड़ी की इस विशाल भूमि पर एक भव्य मंदिर एवं दादाबाड़ी का निर्माण कार्य जोरशोर से चल रहा है, इसके लिए ट्रस्ट को अपनी जमीन किरायेदारों से वापस चाहिए। ट्रस्ट ने श्री स्टील के मालिकों से केवल एक बार बात की, श्री स्टील के मालिकों ने बिना कुछ बताए, बिना कुछ लिए अपना ऑफिस खाली कर ट्रस्ट को चाबी उस समय भेज दी जब ट्रस्ट के सभी ट्रस्टी मंदिर के लिए मार्बल खरीदने मकराना गए हुए थे। आज दादाबाड़ी के एक धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन में ट्रस्ट बोर्ड ने अनिल श्रीवास्तव को बहुमान हेतु आमंत्रित किया, जिसमें उन्होंने बड़ी उदारता एवं सरलता से बड़े भाव से ये कहा कि ये तो मंदिर की जमीन थी और हम तो किरायेदार थे और भगवान की इस जमीन से हमने कमाया और ये तो हमारा फर्ज था कि आपकी जमीन आपको वापस दें। उन्होंने इतनी बड़ी बात इतनी सहजता से कह दी जो कि बहुत बड़े दिलवाले ही कर सकते हैं। ट्रस्ट मंडल ने कहा कि आज ऐसे व्यक्ति का सम्मान करने का मौका मिला। ट्रस्ट मंडल भगवान से प्रार्थना करता है कि वे और उनका परिवार उतरोत्तर तरक्की करे।

भाजपा को पेशोपेश में डाला डॉ. जोगी ने

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस की विधायक डॉ. रेणु जोगी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक को पत्र लिखकर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिये समर्थन मांगा है। जकांछ ने मरवाही उप-चुनाव में कांग्रेस को शिकस्त देने के लिये भाजपा को समर्थन दे दिया था। हालांकि इसके बावजूद नतीजे को पलटा नहीं जा सका। कांग्रेस बार-बार जकांछ पर आरोप लगाती रही है कि यह भाजपा की ‘बी’ टीम है। अब यदि भाजपा और जकांछ साझा अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस सरकार के खिलाफ विधानसभा में लाती है तो कांग्रेस सरकार अपने बचाव में इसी बात को फिर दोहरायेगी।

भाजपा इस बार भले ही बहुत कम सीटों पर सिमट गई है लेकिन इतनी भी कमजोर नहीं है कि अकेले अविश्वास प्रस्ताव ला सके। सदन के 10 प्रतिशत विधायकों की ही मांग जरूरी है। इस लिहाज से उसके पास पर्याप्त विधायक तो हैं ही। अविश्वास प्रस्ताव गिरने की आशंका होने के बावजूद विपक्ष की ओर से प्राय: इसलिये लाया जा सकता है कि वह सरकार की विफलताओं पर सदन में बोलें और उसे पूरा प्रदेश सुने।

भाजपा और उनके मोर्चा संगठन इन दिनों प्रदेश भर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार को सडक़ पर घेरने में लगी हुई है, पर इनकी पार्टी के रणनीतिकारों के ध्यान में यह बात नहीं आई कि सरकार के दो साल होने के बाद उन्हें अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार मिल गया है। यह मुद्दा उठाने का श्रेय जकांछ को मिल गया जिसके कुल जमा चार विधायक हैं। डॉ. रेणु जोगी की चि_ी का भाजपा की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। शायद वे सोच रहे हैं कि वे कहें अविश्वास प्रस्ताव तो हम लायेंगे, समर्थन आप दीजिये।

दूसरी वैक्सीन के लिये भी मान-मनुहार

कोविड टीका कोविशील्ड लगाने का लक्ष्य पूरा हो इसके लिये पहले चरण में विभिन्न जिलों के स्वास्थ्य अधिकारी और प्रशासन ने बहुत कोशिश की तब यह लक्ष्य 70 प्रतिशत के आसपास पहुंचा। पहला टीका लगवाने वालों को यह बात अच्छी तरह बताई गई थी कि कोरोना से बचाव तभी होगा जब 28 दिन के भीतर दूसरा डोज भी ले लिया जाये। अब जब दूसरे चरण का वैक्सीनेशन शुरू हुआ है तो और भी मुश्किल खड़ी हो रही है। कहीं-कहीं तो 10 प्रतिशत लोग भी दुबारा टीका लगवाने नहीं आ रहे। कोई कह रहा है सर्दी, खांसी है, कोई तो बिना संकोच बता रहा है कि शराब पीना शुरू कर दिया था, पहला डोज बेकार हो गया, दूसरे से क्या फायदा? क्या इसका मतलब यह निकाला जाये कि पहले चरण में टीका जिन लोगों ने लगवाया वे कोरोना को लेकर चिंतित नहीं थे बल्कि हेल्थ वर्कर्स और अधिकारियों की बात रखने के लिये टीकाकरण सेंटर तक पहुंच पाये? वैक्सीनेशन पर भरोसा जगाने के लिये अब किसी नये उपाय की तलाश करनी पड़ेगी।

दो जिलों के बॉर्डर पर जुआ

सट्टा और जुए के खेल में किस तरह पुलिस से बचने के लिये नये-नये तरीके निकाले जाते हैं वह बलौदाबाजार और बिलासपुर सीमा पर शिवनाथ नदी के किनारे लगे जुआरियों के मेले में पुलिस के हाथ लगी नाकामी से पता चलता है। वैसे तो इस छापेमारी में पुलिस ने करीब 50 हजार रुपये जब्त किये और 15 जुआरियों को पकड़ा। पर जितना बड़ा फड़ था, यह कुछ नहीं है। पुलिस ने मौके से करीब 70 दुपहिया वाहन और तीन कारें जब्त की हैं। यानि खेलने वालों की संख्या डेढ़ सौ के आसपास थी। उनके पास की रकम कुछ हजार में तो होगी नहीं, कई लाख हो सकती है।

दरअसल, बलौदाबाजार जिले के जुआरियों ने जिस जगह को चुना वह शिवनाथ नदी के दूसरी तरफ है। यह बिलासपुर जिले का हिस्सा है। जैसे ही पुलिस की दबिश हुई जुआरियों ने नदी पार की और जिले की सीमा से बाहर निकलकर अपने जिले में आ गये। पुलिस हाथ मलती रह गई। दोनों जिलों की पुलिस यदि तालमेल से काम करती तो शायद दोनों तरफ से घेराबंदी होती और ज्यादा जुआरी धर लिये जाते।

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