राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कोरोना और मदद
19-Apr-2021 5:12 PM (134)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कोरोना और मदद

कोरोना और मदद

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जनप्रतिनिधि भी बेबस नजर आ रहे हैं। कई मंत्री-विधायक तो बेड, ऑक्सीजन-रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए गुहार लगा रहे लोगों का फोन उठाना तक बंद कर चुके हैं। प्रशासन के दरवाजे पहले ही बंद हो चुके थे। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में कुछ नेता संक्रमण के खतरे को नजर अंदाज कर लोगों की भरपूर मदद कर रहे हैं।

बृजमोहन अग्रवाल ने जनसंगठनों के साथ मिलकर विधानसभा रोड में अपने कृति इंजीनियरिंग कॉलेज को कोविड अस्पताल बनवाया है, और वहां निशुल्क उपचार की सुविधा मुहैया करवाई है। ऐसे ही पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, और उनसे जुड़े लोग पीडि़तों की हर संभव मदद करते देखे जा सकते हैं।

पूर्व मंत्री के पुत्र पंकज और विशाल, तो पीपीई किट पहनकर कोरोना संक्रमितों के इलाज की व्यवस्था करने में जुटे हैं। मोवा के पास रहने वाले बेहद सामान्य परिवार के कोरोना पीडि़त लोगों ने फोन कर सत्यनारायण शर्मा से मदद की गुहार लगाई। परिवार की महिला सदस्य का ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। ऐसे में सत्यनारायण शर्मा के पुत्र विशाल तुरंत पीपीई किट पहनकर पीडि़त के घर पहुंचे, और महिला को अस्पताल में दाखिल करवाया। अब महिला की हालत बेहतर बताई जा रही है।

कुछ इसी तरह बीरगांव में पिछले दिनों एक कोरोना पीडि़त व्यक्ति की मौत हो गई। परिवार में सिर्फ पत्नी और पुत्री थी। ऐसे कठिन समय में पंकज पीपीई किट पहनकर वहां पहुंचे, परिवार को दिलासा दिया, और खुद वहां मौजूद रहकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करवाई। प्रचार-प्रसार से दूर रहकर सत्यनारायण शर्मा के दोनों पुत्रों की सेवाभावी कार्यों की जमकर सराहना हो रही है।

पर्सनल नंबर दिया था, वह आपने...

प्रशासन ने कोरोना पीडि़तों के मदद के लिए कई अफसरों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए हैं, ताकि पीडि़तों को मदद मिल सके। मगर हाल यह है कि चाहे जिला प्रशासन हो या फिर स्वास्थ्य अमला, सबने हाथ खड़े कर दिए हैं। और आम लोगों के फोन उठाने बंद कर दिए हैं।

रविवार को एक निजी कोविड अस्पताल के उद्घाटन मौके पर सांसद सुनील सोनी, सीएमएचओ डॉ. मीरा बघेल से यह शिकायत करते सुने गए कि आप फोन नहीं उठाती हैं। इस पर सीएमएचओ ने तपाक से जवाब दिया कि मैंने आपको अपना पर्सनल नंबर दिया था, वह आपने अन्य परिचितों को दे दिए हैं। अब रोज सैकड़ों फोन, बेड और ऑक्सीजन-रेमडेसिविर के लिए आते हैं। यह सब व्यवस्था कर पाना उनके बस की बात नहीं है। ऐसे में फोन उठाना मुश्किल है।

योगग्राम में कैसे मिले संक्रमित? 

चिकित्सकों की इस सलाह पर किसी को भी संदेह नहीं है कि व्यायाम, योगाभ्यास और संतुलित दिनचर्या से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाई जा सकती है। पर यह कोई नहीं कह सकता कि ऐसा करके आप कोरोना के संक्रमण से 100 फीसदी बचे रहेंगे। बाबा रामदेव के अलावा। 

छत्तीसगढ़ में भी बाबा रामदेव की बातों पर यकीन करने वाले हजारों लोग हैं। वे हर सुबह बारी-बारी कई टीवी चैनलों पर कार्यक्रम देखकर यकीन कर लेते हैं कि योग करने से कोरोना पास नहीं फटकेगा और कोरोनिल खाने से कोरोना का वायरस मर जायेगा। कोरोनिल की लाचिंग केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की थी, तब से बाबा की बात पर लोगों का यकीन और बढ़ गया। 

इधर हरिद्वार के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की बुलेटिन में बताया गया है कि पतंजलि योगपीठ में कोरोना के 10, आचार्यकुलम में 9 और योग ग्राम में कोरोना के 20 केस निकले हैं। बाबा रामदेव कहते हैं आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट भी गलत होती है। हो सकता है ऐसा ही हो। पर बाबा, आप तो सावधानी रखिये और डॉक्टरों की सलाह भी सुन लीजिये। अपने-आपको क्यों बेवकूफ बनाना, देश भर के ग्राहक क्या मर गए हैं?

डर के आगे जीत है...

हर रोज सैकड़ों संक्रमितों और दर्जनों मौतों की कोरोना खबर से लोगों का मन डूबा जा रहा है। लॉकडाउन में घर बैठे लोग संक्रमितों की मौत, ऑक्सीजन और बिस्तरों की कमी, अस्पतालों में जगह पाने के लिये टूटती सांस लिये बैठे मरीज के बारे में ही ज्यादा सोचने लगे हैं। केन्द्र और राज्य सरकार संसाधनों के इंतजाम में हो रही देरी के चलते बदहवास दिखाई दे रही है। अखबार भी रोज सुबह आ रहे हैं। उसमें भी पहले पन्ने पर भयानक तस्वीरों और मोटी-मोटी हेडिंग के साथ बीते बढ़ती मौतों और नये मरीजों की दुर्दशा बताई जा रही है। अब लगता है कि इस त्रासदी में भी जो कुछ अच्छा हो रहा है, उसे भी लोगों तक पहुंचाया जाये। जैसे एक दिन में कितने लोग स्वस्थ हुए वह पहले बताया जाये, कितने और संक्रमित हो गये बाद में बताया जाता। बीते एक दो दिन से ऐसा हो रहा है। वैसे इन दिनों सरकार और प्रशासन की विफलताओं, अव्यवस्था की इतनी अधिक खबरें फूट-फूट कर निकल रही हैं कि सकारात्मक खबरों की आड़ में उन्हें छिपाया जाना बहुत मुश्किल है।

डॉलर के मुकाबले गुड़ाखू

बीते साल लॉकडाउन में गुड़ाखू और तम्बाकू बेचने वालों को पुलिस ने चुन-चुन कर ढूंढा, पिटाई की और केस भी बनाया। फेरी, टपरे में छिप छुपाकर जो लोग छोटी-मोटी कमाई कर लेने की उम्मीद में थे उनका अनुभव बुरा रहा। किस फैक्ट्री का या होलसेलर का माल निकलकर आया, यह पुलिस ने पता नहीं किया। उनका कुछ नहीं बिगड़ा। इस बार संभलकर सब चल रहे हैं। पुलिस के हाथ ज्यादा केस नहीं आ रहे हैं। लोग बता रहे हैं कि चूंकि लॉकडाउन लगाने की तारीख पहले से ही सबको मालूम थी इसलिये लोगों ने अपनी व्यवस्था कर ली थी। गड़बड़ तो इसलिये हो गई क्योंकि लॉकडाउन की तारीख बढ़ा दी गई है। अब फिर ब्लैक में इसकी डिमांड हो रही है। एक ऐसे ही गुड़ाखू प्रेमी का दर्द है- गुड़ाखू तो डॉलर से भी महंगा हो गया है- एक रुपये का डिब्बा 150 रुपये में मिल रहा है।

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