राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नियामक आयोग की दौड़
31-May-2021 5:54 PM (369)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : नियामक आयोग की दौड़

नियामक आयोग की दौड़

सरकार पर जल्द से जल्द बिजली नियामक आयोग का चेयरमैन तय करने का दबाव है। चेयरमैन तय नहीं होने के कारण बिजली की नई दरें घोषित नहीं हो पाई है। आयोग के चेयरमैन-सदस्य के लिए कुल 90 आवेदन आए हैं। चयन कमेटी के मुखिया जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक वर्चुअल बैठक हो चुकी है।

बड़े दावेदारों में सहकारिता आयोग के चेयरमैन सुनील कुजूर, और राज्य पॉवर कंपनी के पूर्व चेयरमैन शैलेन्द्र शुक्ला सहित कई नाम हैं। सुनील कुजूर ने चेयरमैन के लिए आवेदन किया, तो बाकी दावेदार थोड़े मायूस दिख रहे हैं। वजह यह है कि कुजूर सीएस रह चुके हैं, और वर्तमान में आयोग के अध्यक्ष भी हैं। इन सबके बाद भी उन्होंने चेयरमैन बनने की इच्छा जताई है, तो बाकियों का मायूस होना स्वाभाविक है।

नियामक आयोग में सिर्फ मनोज डे ही अकेले ऐसे चेयरमैन थे, जो कि टेक्नोक्रेट थे। बाकी चेयरमैन आईएएस ही रहे हैं। कुछ लोग याद करते हैं कि मनोज डे की नियुक्ति के समय भी आईएएस को चेयरमैन बनाने के लिए काफी दबाव था। आईएएस लॉबी ने मध्यप्रदेश के पूर्व आईएएस अतिन्द्र सेन का नाम आगे बढ़ाया था।

बताते हैं कि उस समय सीएस पी जॉय उम्मेन भी अतिन्द्र सेन को चेयरमैन बनाने के पक्ष में थे। मगर सीएम डॉ. रमन सिंह ने मनोज डे के नाम पर मुहर लगाई। उस समय चर्चा थी कि मनोज डे के लिए दिग्गज कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा ने भी सिफारिश की थी। खैर, इस बार कुछ लोगों का अंदाजा है कि सीएम भूपेश बघेल किसी टेक्नोक्रेट को चेयरमैन बना सकते हैं। मगर कुजूर का आवेदन चौंका जरूर रहा है।

तबादलों की अटकलें जारी

सरकार के प्रवक्ता और मंत्री रविन्द्र चौबे ने प्रशासनिक फेरबदल की संभावनाओं पर विराम लगाते हुए कहा था कि फेरबदल फिलहाल नहीं होंगे। सरकार की प्राथमिकता कोरोना पर काबू पाने की है। मगर अब कोरोना संक्रमण कुछ हद तक काबू में हैं। ऐसे में अब फिर फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही है।

सुनते हैं कि जून महीने में आईएएस, आईपीएस, और आईएफएस अफसरों के बड़े पैमाने पर तबादले होंगे। आईएफएस के पीसीसीएफ से लेकर सीएफ के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हो गई है, ऐसे में फारेस्ट अफसरों के तबादले की लंबी सूची निकलना तय है। इसमें पीसीसीएफ और सीसीएफ स्तर के अफसरों के प्रभार बदले जा सकते हैं। कुछ डीएफओ, और सीएफ का भी बदलना तय है। इसी तरह आईपीएस की भी सूची जारी हो सकती है। जिसमें आधा दर्जन जिलों के एसपी को बदला जा सकता है।

आईएएस में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं। इस क्रम में कुछ जिलों के कलेक्टरों को बदला जा सकता है। रायपुर और कोरबा कलेक्टर को दो साल से अधिक हो चुके हैं। चर्चा है कि उन्हें कोई अहम दायित्व सौंपा जा सकता है। मानसून के आने के साथ ही कई जिलों में नए डीएम, एसपी, और  डीएफओ का भी आगमन हो सकता है।

लोकप्रिय अफसरों से सरकार को फायदा

कई अफसर लोकप्रियता में अपने मंत्रियों से भी आगे निकल जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कुछ ऐसा ही स्वास्थ्य विभाग की एक आईएएस अफसर प्रियंका शुक्ला के साथ है। उनके मंत्री टी एस सिंहदेव के ट्विटर पर 1 लाख 88 हजार से कम फॉलोवर हैं, लेकिन प्रियंका शुक्ला के फॉलोअर्स की गिनती कल दो लाख पार कर गई है। वे सरकार और विभाग के कामकाज के बारे में तो ट्वीट करती ही हैं काम आवे मानवी जीवन की बहुत सारी सकारात्मक बातें पर भी ट्वीट करती हैं। उनकी लोकप्रियता जितनी बढ़ती है उतना ही फायदा उससे सरकार को होता है क्योंकि वह विभाग और सरकार की बहुत सारी सकारात्मक बातों को, कामयाबी की बहुत सारी कहानियों को भी ट्वीट करती रहती हैं। स्वास्थ्य विभाग एक ऐसा अनोखा विभाग है जहां के नए प्रमुख सचिव डॉ आलोक शुक्ला भी लोकप्रियता में आगे हैं और उनकी वेबसाइट ने अभी 31 लाख की दर्शक संख्या पार कर ली है। आलोक शुक्ला भी सरकार की कामयाबी से परे बच्चों के साहित्य को लेकर भी लगातार सक्रिय रहते हैं, और उनकी लोकप्रियता का फायदा भी सरकार की सकारात्मक बातों के प्रचार को मिलता है।

मंत्री पर आंच, जांच में आयेगा सच सामने?

सरस्वती नगर थाने में पुलिस ने ठगी के आरोप में जीवमंगल सिंह टंडन नाम के एक व्यक्ति पर अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है। कुछ लोगों ने इस बात के सबूत पुलिस को दिये हैं कि एसईसीएल,बीएसपी आदि केन्द्रीय उपक्रमों में नौकरी लगाने के लिये उन्होंने आरोपी को लाखों रुपये दिये हैं। पकड़े गये आरोपी ने अपने बयान में बलरामपुर कलेक्टर और नगरीय प्रशासन मंत्री को लपेट लिया है। उसका कहना है कि चुनाव के दौरान डॉ. शिव डहरिया को उसने करीब 40 लाख रुपये दिये। मंत्री तक कितने रुपये पहुंचे, पहुंचे भी या नहीं यह तो पता नहीं मगर पुलिस की छानबीन का यह मसला जरूर है कि जो 40 लाख रुपये चुनाव में बांटने की बात कर रहा हो उसके ख़िलाफ केवल 19 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जाहिर है और लोग भी ठगी के शिकार हुए होंगे, पर सामने नहीं आ रहे होंगे। मंत्री की तरफ से भी जवाब आना जरूरी है कि इस व्यक्ति को वे पहचानते हैं या नहीं।

अस्पताल पूछ रहे, तीसरी लहर आयेगी भी?

कोरोना का दूसरा वेव बहुत खतरनाक रहा। देश-प्रदेश के शासन-प्रशासन ने पहली लहर खत्म होने के बाद मान लिया था कि अब खतरा टल गया है। दूसरी लहर आने के बाद आलोचना हुई कि उन्होंने वैज्ञानिकों की चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया कि संक्रमण फिर घातक रूप से फैलेगा। कमोबेश जब दूसरी लहर का आक्रमण धीमा हो रहा है, विशेषज्ञ तीसरी लहर की आशंका पर लोगों को सतर्क कर रहे हैं। मार्च के आखिरी सप्ताह के बाद प्रदेश के निजी चिकित्सालयों को आनन-फानन में कोविड मरीजों के अनुकूल बनाया गया। बिस्तर बढ़ाये गये। प्रदेश में 14 हजार से अधिक कोविड बेड तैयार हो गये। मरीजों के कम होने के बाद अब 70 फीसदी से ज्यादा बिस्तर खाली हो गये। न रेमडेसिविर की मांग वैसी है न ऑक्सीजन बेड की। एक बड़े अस्पताल के प्रबंधक चिकित्सक बता रहे हैं कि वे इन दिनों कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित अमेरिका, ब्रिटेन, इटली आदि देशों की खबरों पर नजर बनाये हुए हैं। यदि लहर वहां आयेगी तो पक्का है कि कुछ समय बाद हम भी घिरेंगे। सटीक जानकारी इसलिये चाहिये क्योंकि दर्जनों बिस्तरों के रखरखाव और उसी के एवज में रखे गये स्टाफ का खर्च तो उन्हें वहन करना ही पड़ रहा है।

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