राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : एक जैसे नहीं होते सब अधिकारी
20-Jun-2021 5:07 PM (343)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : एक जैसे नहीं होते सब अधिकारी

एक जैसे नहीं होते सब अधिकारी
कोविड लॉकडाउन के दौरान सूरजपुर जिले में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की जो अप्रिय छवि बन गई थी, ऐसा लगता है उसे ठीक करने के लिये नये कलेक्टर गौरव सिंह चिंतित है। शुक्रवार को वे प्रतापपुर इलाके के दौरे पर गये थे। जब लौट रहे थे, रास्ते में एसईसीएल का एक कर्मचारी घायल अवस्था में सडक़ पर पड़ा हुआ था। कलेक्टर ने तुरंत गाड़ी रुकवाई। घायल को अपनी गाड़ी में बिठा लिया और उसे लेकर भटगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच गये। अस्पताल पहुंचाना भी काफी था, पर वे घायल कर्मचारी के प्राथमिक उपचार तक वहीं रुके। इसके बाद ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को उन्होंने ठीक तरह से उपचार के लिये फोन किया। एसईसीएल कर्मचारी की हालत गंभीर ही थी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे अम्बिकापुर रेफर करना पड़ा। प्राय: बड़े प्रशासनिक अधिकारी ऐसी घटनाओं को अनदेखा कर देते हैं या फिर सम्बन्धित को फोन करने के बाद अपनी जवाबदारी पूरी समझ लेते हैं, पर, वहां के पहले खौफ खा चुके लोग कलेक्टर की संवेदनशीलता की सराहना कर रहे हैं।  

अफसरों की वफादारी में फंसे 
पुलिस महकमे के दो बड़े अफसरों के झगड़े का दंश दो हवलदारों को झेलना पड़ रहा है। दोनों अफसर, एक के बाद एक रायपुर के कप्तान रहे हैं। वे यहां पदस्थ थे तो दोनों हवलदारों के संपर्कों का खूब इस्तेमाल किया। इससे अफसरों की छवि भी चमकी। बाद में वे प्रमोट होकर पीएचक्यू गए, तो दोनों ही हवलदार अफसरों के आंखों की किरकिरी बन गए। 

दरअसल, दोनों अफसर एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। दोनों अफसरों को शक रहा है कि हवलदार उनके विरोधी के करीबी हैं। और इसका नतीजा यह रहा कि पिछली सरकार में एक अफसर पॉवरफुल हुए, तो दोनों हवलदारों की क्लॉस लगा दी, और उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में हवलदार किसी तरह बहाल हुए, तो पुलिस लाइन में अटैच कर दिया। 

सरकार बदली तो दूसरा अफसर पॉवरफुल हो गया, और दोनों हवलदारों को अपने दिन फिरने की उम्मीद जगी। मगर हवलदारों को उस वक्त झटका लगा जब पॉवरफुल अफसर ने उन्हें अपने विरोधी अफसर का ही करीबी बता दिया। दोनों हवलदारों के फील्ड में पोस्टिंग के प्रस्ताव निरस्त कर दिए। अब हवलदार, दोनों अफसरों के रिटायरमेंट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दोनों ही अफसर 2023 तक रिटायर हो जाएंगे। इसके बाद ही हवलदारों का भाग्योदय हो सकता है। तब तक तो उन्हें इंतजार के अलावा कोई और चारा नहीं दिख रहा है। 

ननकीराम ने तारीफ की या तंज कसा?
भाजपा विधायक व पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर जब कुछ बोलते हैं तो पार्टीलाइन की बहुत ज्यादा परवाह नहीं करते। वे हैं भी इतने सीनियर कि पार्टी के दूसरे नेता भी न तो उन्हें नजरअंदाज कर  पाते न ही उनका विरोध कर पाते। भाजपा शासनकाल में उन्होंने कितनी ही बार शराबबंदी को लेकर आवाज उठाई। आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग को भी उठाया करते थे।

फिलहाल चर्चा में उनका मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ हुआ संवाद है। मौका था कोरबा जिले में विकास कार्यों के वर्चुअल उद्घाटन का। उन्होंने इस दौरान बघेल को दो-दो बार प्रधानमंत्री बनने की शुभकामनायें दीं। बघेल ने उनसे कहा- ननकी भैया, मोदी जी सुन रहे हैं। मंत्री रविन्द्र चौबे का कहना है कि बघेल सरकार में हो रहे विकास कार्यों से भाजपा के सांसद विधायक भी खुश हैं। यह बात अलग है कि कंवर ने मुख्यमंत्री से प्रशासन के कामकाज के तरीके को लेकर कुछ शिकायतें भी की थीं।

अब भाजपा नेताओं का कहना है कि यह तो तंज कसा गया है। कंवर कह रहे थे कि आप मुख्यमंत्री नहीं प्रधानमंत्री बन जायें पर काम अच्छे से करवायें।

वक्त से पहले मिला तोहफा 
सरकार ने एक साथ 56 अधीक्षक-तहसीलदारों को प्रमोशन का तोहफा दिया है। ये तहसीलदार 10 साल की सर्विस में ही डिप्टी कलेक्टर बन गए। आमतौर पर नायब तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर तक पहुंचने में कम से कम 15 साल का वक्त लगता है। मगर उनके समय पूर्व प्रमोशन देने के लिए नियमों में संशोधन होता रहा। पिछली सरकार में राजस्व मंत्री रहे प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने उदारता दिखाई, और नई तहसीलों के गठन के बाद रिक्त पदों को भरने के लिए नायब तहसीलदारों के प्रमोशन के लिए ठोस पहल की थी। इसके बाद प्रमोशन का रास्ता खुल गया, और ये सभी नायब तहसीलदार, उप तहसीलदार, और फिर तहसीलदार हो गए, और अब डिप्टी कलेक्टर बन गए। इनमें से ज्यादातर डिप्टी कलेक्टरों को मनचाही पोस्टिंग भी मिल गई है। 

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(rajpathjanpath@gmail.com)

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