राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अच्छे काम का नतीजा
02-Jul-2021 5:28 PM (316)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अच्छे काम का नतीजा

अच्छे काम का नतीजा 

प्रदेश में आईपीएस अफसरों की तबादला लिस्ट में एक संयोग ऐसा जुड़ा है कि आईपीएस प्रशांत अग्रवाल संभवत: पुलिस महकमे के इकलौते अफसर हैं, जो कि पूर्व, और वर्तमान सीएम के निर्वाचन जिले में पुलिसिंग का मौका मिला है। प्रशांत पिछली सरकार में नांदगांव में पदस्थ थे। नांदगांव रमन सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है, और वहां नक्सल मोर्चे में काफी काम किया था। प्रदेश के एक बड़े बिजनेस घराने से ताल्लुक रखने वाले प्रशांत की बिलासपुर से दुर्ग पोस्टिंग हुई है, जो कि सीएम के साथ होम मिनिस्टर का भी गृह जिला है।

 प्रशांत अग्रवाल से परे भोजराम पटेल जैसे अफसर कोरबा भेजा गया है। पटेल ने गरियाबंद में बेहतर काम किया है। वे जिले में मादक पदार्थों, और कीमती पत्थरों की तस्करी रोकने में काफी हद तक सफल रहे। इसी तरह महासमुंद में प्रफुल्ल ठाकुर ने सराहनीय काम किया है, और यही वजह है कि उन्हें धमतरी एसपी बनाया गया। इसी तरह दुर्ग में करीब दो साल तक रहने के बाद प्रशांत ठाकुर को जांजगीर-चांपा एसपी बनाया गया है। जांजगीर-चांपा, दुर्ग की अपेक्षा नया जिला जरूर है, लेकिन वहां बेहतर पुलिसिंग की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशांत ठाकुर की पोस्टिंग की एक प्रमुख वजह यह भी है। 

अच्छे दिन का इंतजार

छत्तीसगढ़ कैडर के 2006 बैच के आईपीएस मयंक श्रीवास्तव, और आरएन दास  अपने दूसरे राज्यों में बैचमेट की तुलना में अच्छी पोस्टिंग नहीं पा सके हैं। मयंक,  झीरम कांड के दौरान बस्तर एसपी थे। वे निलंबित भी हुए। पिछली सरकार ने उन्हें दुर्ग, और फिर बिलासपुर एसपी बनाया। वे कोरबा एसपी रहे। मगर सरकार बदलते ही उनके सितारे गर्दिश में चले गए, और अहम पोस्टिंग से वंचित हैं। इसी तरह राजेन्द्र नारायण दास को पिछली सरकार में अच्छा महत्व मिला। उनके कांकेर एसपी रहते चर्चित अंतागढ़ कांड हुआ था जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम पवार ने नाम वापस ले लिया था। 

कई और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में नाम वापस लिया था। इस पूरे मामले पर पुलिस अफसरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए थे। सरकार बदलने के बाद दास एक तरह से लूप लाइन में हैं। जबकि उनके बैच के दो अफसर महाराष्ट्र में प्रभारी आईजी से लेकर नक्सल डीआईजी जैसे अहम पदों पर बखूबी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र के अमरावती में मयंक और दास के बैचमेट चंद्र किशोर मीणा प्रभारी आईजी के रूप में 5 जिलों को सम्हाल रहे हैं। यही नहीं, उनके एक अन्य बैचमेट संदीप पाटिल नागपुर में पदस्थ होकर गढ़चिरौली डीआईजी जैसा चुनौतीपूर्ण काम सम्हाल रहे हैं। फिलहाल मयंक, और दास को अच्छे दिन का इंतजार है।

विस्फोट की धमक दूर तक जाएगी

छत्तीसगढ़ में आईपीएस जीपी सिंह पर एसीबी के छापे की खबर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रही है। प्रदेश के सियासी, प्रशासनिक गलियारों से लेकर हर वर्ग की दिलचस्पी इस छापे से निकलने वाली जानकारी पर टिकी हुई है। अभी तक इस कार्रवाई के बारे में कोई आधिकारिक ब्यौरा तो सामने नहीं आया है, लेकिन मीडिया और समाचार पत्रों के जरिए अनुपातहीन संपत्ति मिलने, मनी लॉड्रिंग और खदानों में निवेश की जानकारी की खबरें सामने आ रही है। हालांकि किसी भी छापे में इस तरह के प्रमाण मिलना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन इस छापे में लोगों की दिलचस्पी इन बातों से परे कुछ और है। क्योंकि यह छापा किसी व्यापारी या उद्योगपति के ठिकानों पर तो पड़ा नहीं है, बल्कि सूबे के एक ताकतवर माने जाने वाले आईपीएस के ठिकानों पर कार्रवाई हुई है। 

ऐसे में आम लोगों की धारणा है कि आईपीएस पर यह कार्रवाई किसी विशेष प्रयोजन के तहत की गई है। अनुपातहीन संपत्ति के कारण कार्रवाई होती तो अब तक कई और अफसर नप गए होते। एंटी करप्शन ब्यूरो में ही 100 के आसपास आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अफसरों के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति के मामले दर्ज हैं। विधानसभा के तकरीबन हर सत्र में इस तरह के सवाल उठते रहते हैं और सरकार की तरफ से लिखित जवाब आता है। ऐसे में आम लोगों की कुछ और जानकारी सामने की अपेक्षा वाजिब ही लगती है। खैर, ये तो लोगों की अपेक्षा की बात हुए, लेकिन वे यहीं नहीं रूक रहे हैं, वे तो पूर्वानुमान भी लगा रहे हैं। पिछले 24 घंटों से इस बारे में कई तरह की जिज्ञासा, अनुमान और सवाल सुनने को मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई उस सियासी हलचल को कुचलने की कोशिश है, जिसे पिछले कुछ दिनों से लगातार हवा दी जा रही है और वो भी लगातार सुर्खियों में है। लोगों के इस अनुमान में कितना दम है, यह तो छापे की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन इतना मानना ही पड़ेगा कि पब्लिक को सियासी लोग ऐसे ही भगवान का दर्जा नहीं देते। वे सिर्फ वोट देने के लिए नहीं है, बल्कि सरकार के फैसलों और कार्रवाइयों का भी बारीक विश्लेषण कर अपनी राय देते रहते हैं। 

समय ने दिखाया कुचक्र

छत्तीसगढ़ में इस छापे की एक और बात चर्चा में हैं। लोग मान रहे हैं कि जैसी करनी वैसी भरनी। जीपी सिंह का कार्यकाल विवादों और चर्चाओं में रहा है। बात चाहे एसपी राहुल शर्मा की आत्महत्या का हो या फिर चर्चित आईपीएस अफसर को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय बुलाने का हो। यह बात तो छत्तीसगढ़ के अधिकांश लोग जानते हैं कि जीपी सिंह करीब सालभर पहले तक एसीबी के चीफ थे और आज उसी एसीबी ने उन पर छापे की कार्रवाई की है। ब्यूरो के मुखिया रहते हुए उन्होंने भी राज्य के चर्चित आईपीएस और ब्यूरो के पूर्व चीफ को पूछताछ के लिए आरोपित की तरह दफ्तर तलब किया था। ब्यूरो में उस वक्त के प्रत्यक्षदर्शियों का तो यहां तक कहना है कि चर्चित अफसर ने उनसे तेज आवाज और आपत्तिजनक भाषा में बात की थी, आज उनके साथ भी वही हो रहा है या हो रहा होगा। वे बस्तर में पदस्थ रहने के दौरान भी अपने वरिष्ठ अफसर के सरकारी आवास में दबिश देने के कारण भी सुर्खियों में आए थे। कुल मिलाकर इसे समय का चक्र ही कहें, जो घूमता तो हमेशा रहता है, लेकिन जब अपने ऊपर आता है, तभी उसका अंदाजा होता है। 

नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया के विधानसभा क्षेत्र आरंग में समर्थक बकायदा कैलेण्डर बंटवा रहे हैं। इसमें डॉ. डहरिया की विकास गाथा उल्लेखित है। अब क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं, तो उसे उपलब्धि के तौर पर प्रचारित करना गलत भी नहीं है। बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में जरूरी भी हो गया है। मगर उत्साही समर्थकों ने इतना प्रचार किया कि कैलेण्डर में जून महीना 31 दिन का हो गया। पहले तो कैलेण्डर में इस गलती की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन अब घर-घर पहुंचा, तो गलतियां लोगों की जुबान में आ गई। गलती ऐसी है कि कैलेण्डर को वापस लेना भी कठिन है। हाल यह है कि विकास गाथा से ज्यादा चर्चा गलती की हो रही है। 

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