राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धडक़न और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कांग्रेस में वीडियो बवाल
20-Aug-2021 5:26 PM (431)
छत्तीसगढ़ की धडक़न और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कांग्रेस में वीडियो बवाल

कांग्रेस में वीडियो बवाल 

पीएल पुनिया के करीबी सन्नी अग्रवाल का एक महिला के साथ आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में गदर मचा है। इस पर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने तो ट्वीट कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम से जवाब मांग लिया है। सन्नी को माहभर पहले ही भवन-एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल का चेयरमैन बनाया गया था। बताते हैं कि भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने वीडियो सार्वजनिक प्लेटफार्म से उठाया, और फेसबुक पर अपलोड कर दिया। 

वीडियो में शामिल लड़की, मधुवन में जो कन्हैया किसी गोपी से मिले, राधा कैसे न जले.. गीत पर हावभाव इंगित करती दिख रही है। गौरीशंकर ने किसी का नाम नहीं लिखा, और कमेंट भी गंदा नहीं था, फिर भी सन्नी थाने पहुंच गए। सन्नी ने गौरीशंकर पर बदनाम करने का आरोप मढ़ दिया। सन्नी ने टीआई से कहा बताते हैं कि साब, मेरा और वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का टैटू मिलान कर लीजिए, मेरा टैटू छोटा है। मेरी छबि खराब करने की कोशिश की जा रही है। 

बताते हैं कि यह वीडियो जून के महीने से टिक टॉक पर तैर रहा था। तब किसी ने ध्यान नहीं दिया। और जब गौरीशंकर ने फेसबुक पर वीडियो अपलोड किया, तो मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। सुनते हैं कि एक तिकड़मी नेता ने विवाद से बचने के लिए सन्नी को फौरन थाने में शिकायत करने की सलाह दी। सन्नी ने इसका अनुसरण किया। वैसे भी कभी-कभी अपने बचाव के लिए पहले हमला करना उपयुक्त नीति होती है। 

मगर यह मामला अब सन्नी को उल्टा पड़ता दिख रहा है। सन्नी की शिकायत के बाद गौरीशंकर थाने पहुंच गए, और पूरे वीडियो की सत्यता की जांच की मांग कर दी है। हल्ला यह है कि सन्नी की तरफ से महिला को आगे लाकर उनसे शिकायत कराने की कोशिश भी हो रही है, लेकिन चर्चा यह भी है कि महिला ने ऐसा करने से मना कर दिया है। इससे परे पार्टी में जूनियर सन्नी अग्रवाल को मलाईदार निगम मिलने से कई कांग्रेस नेता नाखुश भी चल रहे हैं। उन्होंने भी वीडियो को मौके के रूप में देखा, और सन्नी की शिकायत पार्टी हाईकमान से कर दी है। देखना है अब आगे होता है क्या?

दुर्ग रेंज के लिए कौन?

प्रदेश के दूसरे पॉवरफुल रेंज माने जाने वाले दुर्ग के लिए नए आईजी की तलाश प्रशासनिक हल्के में जोरशोर से चल रही है। मौजूदा आईजी विवेकानंद सिन्हा एडीजी प्रमोट होने के बाद पीएचक्यू का रूख करने की तैयारी में है। उनकी जगह पुलिस महकमे में राजनीतिक और प्रशासनिक तालमेल में दक्ष अफसर को ही पदस्थ किए जाने की संभावना है। दुर्ग रेंज में करीब पौने दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके एडीजी सिन्हा का प्रमोशन करीब 6 माह देरी से हुआ है। अब वह पीएचक्यू में नए जिम्मेदारी सम्हालने का दिमाग लेकर दुर्ग रेंज में काम कर रहे हैं। दुर्ग में प्रदेश सरकार के ताकतवर मंत्रियों की तादाद भी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गृह जिला होने के साथ-साथ गृहमंत्री रविन्द्र चौबे और पीएचई मंत्री रूद्रगुरू भी इसी रेंज के विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में पुलिस महकमे के रेंज स्तर पर मुखिया के तौर पर कुछ अफसरों का नाम चर्चा में है। बताया जा रहा है कि 2003 बैच के ओपी पाल के अलावा डॉ. संजीव शुक्ला का नाम भी रेंज आईजी के नाम चर्चा में है। 2003 बैच के ही बीएन मीणा भी केंद्रीय प्रतिनियुक्त से लौटकर नई जिम्मेदारी के लिए इंतजार में है। पीएचक्यू में आईजी स्तर के अफसरों की कमी के चलते प्रभारी आईजी के तौर पर डीआईजी अफसरों को मौका मिल सकता है। 

इतने पैसों को आखिर सहदेव संभालेगा कैसे?

सोशल मीडिया की खबरों के मुताबिक 'बसपन का प्यार...' गाकर मशहूर हुए बस्तर के सहदेव को बादशाह से एक करोड़, नेहा कक्कड़ से 50 लाख, एक कार कम्पनी की ओर से महंगी कार और राज्य सरकार से 10 एकड़ जमीन मिली है। सोशल मीडिया पर यह पढ़कर सुनकर लोग चिंतित हैं कि बालक इतने रुपये, उपहारों को संभालेगा कैसे?

पर हकीकत कुछ अलग है। एक पत्रकार ने सहदेव से सम्पर्क कर जो जानकारी सोशल मीडिया पर डाली है उसके अनुसार उसे अब तक कुल जमा 5 लाख रुपये मिले हैं।सबसे बड़ी रकम बादशाह से मिली। नेहा कक्कड़, बादशाह का एक-डेढ़ करोड़ देना केवल किस्सा है। कार नहीं मिली, बल्कि एक कार कंपनी ने 21 हजार रुपये दिये हैं। जिले के मंत्री कवासी लखमा ने एक टीवी उसे दिया है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान देने का आश्वासन दिया है। बादशाह ने पढ़ाई का खर्च भी उठाने की बात कही है। यानि, जीने का स्तर तो सुधरा है-पर अभी सहदेव और उसका परिवार एक साधारण जीवन ही जी रहा है।

किसान सम्मान निधि लौटाने का फरमान

प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अब तक सात किश्त बंट चुकी है। हर किश्त के बाद अगले में किसानों की संख्या कम होती गई। हजारों ऐसे मामले सामने सामने आये जिसमें फर्जी किसानों को सम्मान निधि बांट दिये जाने की जानकारी बाहर आ गई। इनकी अगली किश्त तो रोक दी गई पर अब केन्द्र सरकार ने उनसे वसूली करने का आदेश जारी किया है। इसका जिम्मा कृषि विभाग को दिया गया है, क्योंकि सूची भी उनकी ही थी। अब अकेले कोरबा जिले की बात करें तो अब तक 25 हजार अपात्र किसानों का पता चल चुका है जिन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि अंदर कर ली। इनसे कैसे वसूली की जाये यह विभाग के लिये सिरदर्द बन गया है। इसके पीछे वजह है कि वसूली भी उन्हीं अपात्रों से की जानी है जिनको पात्र बनाने के लिये एक हिस्सा एडवांस में ले लिया गया था। जिन लोगों ने फर्जी किसान बना दिये वे चिंता में हैं कि कहीं उनसे रिकव्हरी न हो जाये।

डॉक्टर ने ली रिश्वत, लोगों ने भीख मांगकर लौटाये

सरगुजा में दो माह पहले एक महिला के पति की सांप काटने से मौत हो गई। यहां के मेडिकल कॉलेज में संविदा डॉक्टर नारायण गोले ने उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख करने के एवज में 12 हजार रुपये रिश्वत ले लिये। महिला ने अपनी गरीबी का हवाला दिया तब इतने में बात तय हुई वरना मांग 50 हजार रुपये की थी। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। सब अखबारों में घटना कवर हुई। लोगों का गुस्सा फूटा। वे डॉक्टर को बर्खास्त करने, लाइसेंस रद्द करने और रिश्वत की रकम लौटाने की मांग पर अस्पताल में ही धरने पर बैठ गये। जिला प्रशासन के आश्वासन पर आंदोलन खत्म किया गया। पर डॉक्टर को बख्श दिया गया। उसकी संविदा नियुक्ति तो समाप्त कर दी गई लेकिन कारण, सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता दिया गया। रिश्वत का कहीं जिक्र नहीं। पीडि़त महिला को रुपये भी नहीं लौटाये गये।

कई बार ऐसा हुआ है कि अधिकारियों ने रिश्वत लेने वालों को फटकार लगाते हुए रुपये वापस दिलाये हैं पर इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। दो माह इंतजार किया गया। फिर कल कई संगठन उस गरीब महिला के रुपये लौटाने के लिये आगे आये। उन्होंने अनोखा तरीका अपनाया। भिक्षा पात्र लेकर नगर भ्रमण किया और लोगों से सहयोग मांगा। इसके जरिये 11 हजार 170 रुपये मिल गये। डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सिर से महिला को पैसे लौटाने का बोझ तो उतरा पर चर्चा शहर भर में हो गई। ऐसा उस शहर में हुआ जहां से स्वास्थ्य मंत्री प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

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