राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धडक़न और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसरों के किस्से अपरंपार
02-Sep-2021 7:17 PM (343)
छत्तीसगढ़ की धडक़न और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसरों के किस्से अपरंपार

अफसरों के किस्से अपरंपार

जब अफसरों के किस्से निकलते हैं तो बड़ी दिलचस्प और चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य तक काम करने वाले एक आला अफसर का हाल यह था कि रायपुर से भोपाल जाने-आने के लिए जब टिकट करवानी रहती थी, तो वे कई अलग-अलग मातहत अफसरों को टिकट करवाने के लिए कह देते थे, और सरकारी खर्च पर तो टिकट बनती ही थी। इसके बाद वह एक टिकट छोडक़र बाकी टिकट कैंसिल करवा लेते थे और उसमें पैसा बच जाता था। रायपुर से भोपाल आते-जाते रास्ते में जितने स्टेशन मध्य प्रदेश के पड़ते थे, वहां पर विभाग के अफसरों से खाने-पीने का ऐसा सूखा सामान बुलवा लेते थे जो कि भोपाल पहुंचकर वापस रायपुर आने तक भी खराब ना हो और फिर हफ्ता भर उसमें काम चल जाए। तो हर स्टेशन पर ऐसा सूखा सामान पहुंचते रहता था।

ऐसे कई तरह के किस्से बहुत से अफसरों के बारे में रहते हैं। जो अक्सर छोटी-छोटी भी रिश्वत ले लेते हैं, उन्हें सरकारी जुबान में कहीं अधिक हिकारत से बुलाया जाता है और चिंदी चोर कहा जाता है कि वह तो पांच-पांच हजार भी ले लेता है. मानो सस्ते में काम निपटाने वाला बुरा इंसान हो गया, और लोगों को निचोडक़र अधिक पैसा वसूलने वाले अफसर बेहतर इंसान हो गए। सरकारी जुबान में जब किसी की भी चर्चा होती है, तो कम पैसे लेने वालों को बहुत ही गंदी नजरों से देखा जाता है, उसकी एक वजह शायद यह भी रहती है कि ऐसे लोग सरकारी काम का रेट बिगाड़ जाते हैं।

प्रदेश को मिला बाघों का नया ठिकाना

10 साल से भी अधिक लंबी प्रक्रिया के बाद आखिरकार कोरिया जिले के सोनहत ब्लाक में स्थित गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व का दर्जा दे दिया गया है। सन् 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने सबसे पहले इस नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था जिस पर तत्कालीन मंत्री जयराम रमेश ने सहमति भी जताई थी। अब जाकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की तकनीकी समिति ने इसकी मंजूरी दी है। छत्तीसगढ़ में अब 4 टाइगर रिजर्व हो गये हैं। यहां पहले से इंद्रावती, सीतानदी-उदंती और अचानकमार टाइगर रिजर्व हैं।

टाइगर रिजर्व के बनने के बाद बाघों के मूवमेंट के लिए एक कॉरिडोर तैयार हो जाएगा जो अचानकमार से कोरिया और बांधवगढ़ होते हुए पलामू तक जाएगा। इससे बाघों की वंश वृद्धि में मदद मिलेगी, जिसका वनों के संरक्षण में खास भूमिका है। मध्यप्रदेश जिसे टाइगर स्टेट कहा जाता है उसके साथ जुडऩे के अब दो रास्ते छत्तीसगढ़ को मिल गए हैं। अचानकमार टाइगर रिजर्व का एक सिरा पहले से ही कान्हा नेशनल पार्क से जुड़ा हुआ है।

यह भी खास है कि मध्यप्रदेश में इस समय अफ्रीका से चीतों को लाने की तैयारी हो रही है। चीते इस देश से विलुप्त हो चुके हैं। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो पालपुर नेशनल पार्क में अफ्रीका से चीते लाकर नवंबर में छोड़ जाएंगे। ऐसे में यदि छत्तीसगढ़ में चीते की आमद भी हो सकती है।

किसानों के गोबर की बंदरबांट

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी नरवा-गरुवा घुरवा-बाड़ी योजना जनपद और पंचायतों के अधिकारियों कर्मचारियों के लिए इस तरह से अवैध कमाई का जरिया बन चुकी है इसकी बानगी नवागढ़ ब्लाक के खोखरा गौठान से निकल कर आ रही है।

गौ पालक किसानों की शिकायत है कि खोखरा गौठान में जब वे गोबर लेकर जाते हैं तो रजिस्टर में उसकी मात्रा 30 किलो घटाकर दर्ज की जाती है। जब गौठान समिति से पूछा गया तो उन्होंने पंचायत सचिव का नाम लिया। पंचायत सचिव ने बताया कि जनपद के सीईओ के कहने पर ऐसा किया जा रहा है। सीओ का कहना है कि उसने तो ऐसा कोई आदेश नहीं दिया। यदि यह बात सही है तो सीईओ को तुरंत गोबर हड़पने वालों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिये था। मगर, सोशल मीडिया और वेब पोर्टल पर जब स्थानीय पत्रकारों ने यह खबर चला दी तो उल्टे सीईओ ने खबर छापने वाले पत्रकार को ही एफआईआर  की धमकी दे डाली। यह सब तब हो रहा है जब गौठान समितियों में और जनपद पंचायत में कांग्रेस का ही कब्जा है।

कम से कम मदिराप्रेमियों की सुन लो...

शराब दुकानों को हटाने को लेकर तीन चार साल पहले आंदोलन होते थे तो प्रशासन अपनी बात सही ठहराने के लिये यह तर्क देता था कि ग्रामीणों की भीड़ तो ठेकेदारों की आपसी प्रतिद्वंदिता की वजह से इक_े कराई गई है। पर अब तो सब ठेके सरकारी हैं, फिर भी प्रशासन शराब दुकानों को हटाने के सवाल को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेता है। धमतरी जिले में आबकारी विभाग ने अधारी नवागांव की शराब दुकान सोरिद भाट में शिफ्ट करते हुए एक किसान की खेत में खोल दी गई है। यहां खेतों में काम करने के लिए महिलाएं गुजरती हैं। पास में ही एक मंदिर भी है। लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया है कि इसे हटाया जाए। हद तो यह है कि पास में ही हाई स्कूल भी है। इस डर से कि बच्चों के साथ कोई अनहोनी ना हो स्कूल को भी बंद कर दिया गया है। सैकड़ों लोग जाकर प्रदर्शन कर चुके हैं कलेक्ट्रेट में बरसते पानी के बीच। इनमें महिलाएं बड़ी संख्या में थीं। पर प्रशासन नहीं सुन रहा है।

अब थक हार कर लोगों ने शराबियों को ही समझाने की कोशिश शुरू की है। कल से एक नए तरीके से आंदोलन शुरू कर दिया गया है। शराब खरीदने के लिए दुकान पहुंचने वाले लोगों को चंदन, बंदन तिलक लगाया जा रहा है और उनसे भी समर्थन मांगा जा रहा है। शराब खरीदने वालों कहना है, भैया दुकान कहीं भी खोलें क्या फर्क पड़ता है। जहां बिकेगी वहीं से खरीद लेंगे। हम आपके साथ हैं। प्रशासन आंदोलन कर रहे लोगों की भले न सुन रहा हो, राजस्व देने वाले मदिरा प्रेमियों की बात पर तो गौर करना चाहिये।

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