राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : खादी भंडार में बरसों बाद भीड़
03-Oct-2021 5:51 PM (366)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : खादी भंडार में बरसों बाद भीड़

खादी भंडार में बरसों बाद भीड़

प्रदेश भाजपा ने महात्मा गांधी का जन्मदिन कूद-कूदकर मनाया। राजनीतिक हल्कों में भाजपा नेताओं का गांधी प्रेम चर्चा का विषय बना हुआ है। जनसंघ, और भाजपा की स्थापना के बाद पहली दफा गांधी जयंती के मौके पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। रमन सिंह, और पार्टी के छोटे-बड़े नेता स्वच्छता का संदेश देने झाडू लेकर सडक़ों पर निकले। और बाद में खादी कपड़ों की जमकर खरीददारी की गई।

आजाद चौक स्थित खादी भंडार में गांधी जयंती के मौके पर बरसों बाद भीड़ देखी गई। वहां खरीददारी करने रमन सिंह, विष्णुदेव साय, और बृजमोहन अग्रवाल कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। बृजमोहन ने तो कार्यकर्ताओं को अपनी पसंद का कपड़ा लेने के लिए कह दिया। ज्यादातर कार्यकर्ताओं ने गमछा, और रूमाल ही लिया।

वैसे भी पार्टी के बाकी नेताओं की तुलना में बृजमोहन को खर्च करने के मामले में काफी उदार माना जाता है। उनको लेकर यह भी प्रचारित रहा है कि मंत्री पद पर रहते बृजमोहन के विभाग का एक हिस्सा अघोषित रूप से दान पुण्य में ही खर्च होता था। सब खरीददारी कर रहे थे, तो महिला मोर्चा की कार्यकर्ता भला पीछे कैसे रहती।

बृजमोहन ने उन्हें भी कपड़ा लेने की छूट दे दी। और महिला कार्यकर्ताओं ने महंगी-महंगी साडिय़ां पसंद की, तो बृजमोहन ने उन्हें नहीं रोका। कुल एक लाख का बिल बना। बृजमोहन ने 20 हजार तो तुरंत दे दिए, बाकी पैसे भिजवाने की बात कहकर सबको संतुष्ट कर दिया।

खरीददारी में रमन सिंह भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने बृजमोहन, विष्णुदेव साय, सुनील सोनी, और खुद के लिए कुर्ता पैजामा, और केसरिया जैकेट खरीदे। बरसों बाद रमन सिंह को खरीददारी करते, और फिर जेब से पैसे निकालकर भुगतान करते देखा गया। यह दृश्य देखकर कईयों को सुखद आश्चर्य भी हुआ। आम तौर पर कई बड़े नेता जेब में पैसे नहीं रखते हैं।

रमन सिंह की तरह दिवंगत विद्याचरण शुक्ल, और तरूण चटर्जी को लेकर यह बात कही जाती है कि वो अपने राजनीतिक जीवन में जेब में पैसे लेकर नहीं निकले। जब राह चलते किसी को मदद करने की बात आती थी, तो विद्याचरण शुक्ल के साथ इतने करोड़पति लोग साथ होते थे जो कि शुक्ल की मन की बात समझते थे, और तुरंत हाथ खोलकर खर्च करने में पीछे नहीं रहते थे। कुछ भी हो, गांधी जयंती पर दिग्गजों को अपने जेब से खर्च करते देखना चौंकाने वाला भी रहा।

किस्सा कुर्सी का...

खेती-किसानी में सुधार सरकार की पहली प्राथमिकता है। मगर ढाई साल में इस विभाग के पांच कृषि उत्पादन आयुक्त बदले जा चुके हैं। सरकार बदलते ही सबसे पहले सुनील कुजूर कृषि उत्पादन आयुक्त बने। इसके बाद केडीपी राव को कृषि उत्पादन आयुक्त बनाया गया।

केडीपी के रिटायर होने के बाद मनिंदर कौर द्विवेदी इस पद पर रहीं।  कुछ विवाद के बाद उन्हें हटा दिया गया, और फिर डॉ. एम गीता को कृषि उत्पादन आयुक्त का दायित्व सौंपा गया। एम गीता की भी बदली हो गई, और अब डॉ. कमलप्रीत सिंह कृषि उत्पादन आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सबसे कम प्रयोग आबकारी विभाग में हुए हैं जहां डॉ. कमलप्रीत के बाद निरंजन दास सचिव बने हुए हैं। जबकि हेल्थ, पंचायत, फूड में भी दो से अधिक बार सचिव बदले जा चुके हैं।

वादा करके नहीं भूले सिंहदेव, बस पूरा नहीं हुआ...

2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान घोषणा पत्र तैयार करने में तब के नेता प्रतिपक्ष और अब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की प्रमुख भूमिका रही। हर उस वर्ग को जो आंदोलन कर रहा था, मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया और घोषणा पत्र में उसे शामिल किया गया। ऐसा ही एक वायदा था स्कूलों में नियुक्त सफाई कर्मचारियों को कम से कम कलेक्टर दर पर वेतन देने और शासन की सेवा में शामिल करने का। सैकड़ों की संख्या में स्कूली सफाई कर्मचारी सिंहदेव के महल, कोठीघर के सामने धरने पर बैठ गये। इतनी बड़ी संख्या, कि पूरा रास्ता जाम हो गया। हालांकि कोठीघर की सुरक्षा के लिये पहले से ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी कर दी थी।

धरने पर बैठे लोग सिंहदेव के मतदाता थे, आश्वासन उन्हें दिया गया था। उनका सामना भी आगे करना ही है। धरनास्थल पर ही लोगों ने उनसे वीडियो कॉल कर बात की। सिंहदेव उपलब्ध हो गये। सफाई कर्मचारियों ने याद दिलाया कि आपने तो हमें लिखकर दिया है कि सरकार बनने के 10 दिन के भीतर हमें कलेक्टर रेट पर मजदूरी देंगे और शिक्षा विभाग में शामिल करेंगे। सिंहदेव ने समझाने की कोशिश की। धीरे-धीरे सब वादा पूरा कर रहे हैं, देर हो गई है। पर आंदोलन करने वाले उनकी बात सुन नहीं रहे थे। कहा- तीन साल हो रहे हैं कब पूरा करेंगे। सिंहदेव ने आखिर में जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के ऊपर डाल दी। कहा कि वे ही बता पायेंगे, कब तक आपसे किया गया वादा पूरा होगा। आंदोलन करने वालों ने कहा कि क्या आप उनसे बात करेंगे, सिंहदेव ने कहा-हां करेंगे। क्या आप हमसे मिलवा देंगे, सीएम से। कुछ साफ जवाब नहीं।

चुनाव घोषणा पत्र सबने मिलकर तैयार किया, जो आश्वासन दिये गये उस पर भी सहमति सबकी थी। आश्वासन पूरा नहीं होने पर अब गुस्सा निकलकर बाहर आने लगा है क्योंकि दो माह बाद सरकार को तीन साल पूरे हो जायेंगे। जो भी हो, सिंहदेव ने बचकर निकलने का नहीं सोचा, वीडियो कॉलिंग को टाला नहीं। वे अपने वायदे से मुकरे भी नहीं। सच्चाई स्वीकार कर ली कि हां, वादा किया था। यह बात अलग है कि जिम्मेदारी उन्होंने सीएम पर डाल दी है।

दिल्ली में सीजी सचिवालय!

भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर का एक ट्वीट फिर चर्चा में है। दिल्ली गये विधायकों और मंत्रियों को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा है। कहा- छत्तीसगढ़ का एक सचिवालय दिल्ली में भी खोला जाना चाहिये, ताकि माननीय मंत्री और विधायक वहीं से अपने क्षेत्र की तथाकथित रूप से सेवा कर सकें, क्योंकि आजकल माननीय लोगों की दिल्ली में खूब परेड हो रही है।

पता नहीं लोगों को यकीन क्यों नहीं हो रहा। जब विधायक कह रहे हैं कि वे दिल्ली घूमने के लिये गये हैं तो मान लेना चाहिये। घूमना-फिरना अकेले तो होता नहीं इसलिये बहुत से लोग एक साथ गये हैं।

संयोगिता खुद को मजबूत कर रहीं...

जशपुर कुमार युद्धवीर सिंह जूदेव ने अपनी पत्नी संयोगिता सिंह को उनकी राजनीति में प्रवेश करने का फैसला लेने के बाद कुछ पंक्तियां लिखी थीं युद्धवीर सिंह ने एक किताब आरएसएस भेंट की थी, उसी के कवर के बाद वाले पन्ने पर यह पंक्तियां लिखी गईं। संयोगिता सिंह ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया है। अपनी पत्नी को इसमें संबोधित करते हुए युद्धवीर सिंह लिखते हैं- यह पवित्र किताब देने का कारण यह है कि मेरी तरह आप भी अब सार्वजनिक जीवन में आ चुकी हैं। और जब आप इस नये जीवन में प्रवेश करते हैं तो आपको अपनी विचारधार का चयन करना होता है। चूंकि हमारा दल, हमारी सोच राष्ट्रवादी एवं हिन्दुत्व विचारधारा की है,तो हमें सबसे ज्यादा सीख अपनी मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से मिलती है। भगवा झंडे के प्रति हमारी आस्था को जोडऩे में यह किताब आपकी मदद करेगी।

यह पत्र बताता है कि संयोगिता सिंह युद्धवीर सिंह और जूदेव परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिये खुद को मानसिक रूप से तैयार कर रही हैं।   

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