राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : शानाओ मा गुजरातीनो अभ्यास करियो
24-Oct-2021 6:43 PM (109)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : शानाओ मा गुजरातीनो अभ्यास करियो

शानाओ मा गुजरातीनो अभ्यास करियो

एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के तहत स्कूलों में श्रेष्ठ भारत क्लब बनाया जायेगा। इसके तहत छत्तीसगढ़ के बच्चों को साझा राज्य गुजरात की वर्णमाला, गीत, कहावत ही नहीं उनकी कला और संस्कृति से संबंधित निबंध भी सीखना होगा। गुजरात की संस्कृति, इतिहास, परंपरा जाननी होगी, नाटकों का मंचन भी करना होगा। आदेश तो आ गया है, संस्कृतियों को साझा करने से किसी को ऐतराज नहीं हो सकता है पर छत्तीसगढ़ को लेकर अलग ही बात है। छत्तीसगढ़ी को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने, प्राथमिक शिक्षा में पूरी तरह इसे शामिल करने और आठवीं अनुसूची में जगह दिलाने के लिये दो दशक से भी ज्यादा काम करने वाले अनेक आंदोलनकारियों को यह फरमान हास्यास्पद लग रहा है। जिस राज्य में अपने ही बच्चों, युवाओं, अफसरों को अपनी ही छत्तीसगढ़ी भाषा की आदत नहीं डाली जा सकी, क्या वे गुजराती के लिये आये दिशा-निर्दशों को लागू कर पायेंगे? स्कूलों में भी पहले तो शिक्षकों को ही गुजराती भाषा, कला, कला-संस्कृति सीखनी होगी जिनके लिये अब भी छत्तीसगढ़ी में अध्ययन कराना आसान नहीं हो पाया है। वैसे यह पता नहीं चला है कि क्या गुजरात में भी इस आदान-प्रदान योजना के तहत प्राथमिक स्कूलों में छत्तीसगढ़ी पर यही काम होने वाला है?

कहीं पे तीर कहीं पे निशाना

राजनांदगांव के पूर्व कलेक्टर गणेशशंकर मिश्रा भाजपा में शामिल होने के बाद से सिलसिलेवार नांदगांव के दौरे पर बने हुए हैं। भाजपा में अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत बनाने के सियासी इरादे के पीछे जीएस का पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से नजदीकियां बढ़ाना है। वह यह मानकर चल रहे हैं कि दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में रमन की टिकट वितरण में सीधी दखल होगी। वैसे भाजपा में जीएस जिस तामझाम से शामिल हुए थे, उसकी तुलना में पार्टी के भीतर उनकी खास पकड़ नहीं बन पाई है। राजनांदगांव में कल शिवनाथ नदी की गंगा आरती आयोजन के पीछे जीएस ने ही जिम्मा सम्हाला था। नदी की आरती के कार्यक्रम में रमन शामिल हुए। धरसींवा से विधानसभा टिकट की उम्मीद लगाए जीएस मिश्रा आईएएस होने के मापदंड पर अपनी उम्मीदवारी को लेकर आशावान है। यहां यह भी बता दें कि डायरेक्ट आईएएस रहते ओपी चौधरी ने भाजपा की सदस्यता ली, पर खरसिया से पिछले चुनाव में मिली हार के बाद से उनकी सियासी स्थिति काफी कमजोर हुई। जीएस मिश्रा प्रमोटी आईएएस रहते रिटायर हुए हैं। राजनांदगांव के कार्यक्रम के सूत्रधार जीएस मिश्रा कहीं पे तीर कहीं पर निशाना लगाते हुए अपनी टिकट के लिए सियासी उठापटक कर रहे हैं।

मल्टीनेशनल कंपनी के बीज का हश्र

नये कृषि कानून लागू होने के बाद खेती में रुचि लेने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों से किसानों को किस तरह से झटका लग सकता है इसका नमूना दुर्ग, पाटन और धमधा में देखने को मिल सकता है। यहां 269 किसानों ने हैदराबाद की एक मल्टीनेशनल कंपनी की सलाह और निगरानी में नर-नारी बीज बोये। मालामाल हो जाने का भरोसा दिया गया था। पर, धान का उत्पादन केवल 10 फीसदी हो पाया। किसानों को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। यह सब कृषि विभाग की सलाह और आश्वासन पर हुआ इसलिये जब फसल बर्बाद हो गई तो किसानों ने अधिकारियों पर दबाव बनाया। ये जागरूक किसान थे, ज्यादातर ने वैकल्पिक प्रचलित बोनी भी की थी, इसलिये लड़ रहे हैं। अब जाकर उनको आश्वासन मिला है कि मुआवजा मिलेगा और उनके खाते में आयेगा। सब सही हो जाये तो ठीक- पर अगर मुआवजा देने से कंपनी ने इंकार कर दिया तो? क्या फैसला अदालत से होगा, या फिर नये कानून के अनुसार एसडीएम सर्वेसर्वा होंगे?

सिंहदेव पर सरगुजा के तेवर

यह पहला मौका नहीं, जब कांग्रेस संगठन और सरकार को सरगुजा जिले में कार्यकर्ताओं की नाराजगी का शिकार होना पड़ा है। खासकर सिंहदेव समर्थकों की।

पिछले महीने जब पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का दौरा लगभग तय था, मंत्रियों को कार्यकर्ताओं का ख्याल आया था। तब उन्होंने साफ कहा था कि अधिकारी उनको प्रताडि़त कर रहे हैं, मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इससे पूर्व भाजपा की सरकार में वे इतने परेशान नहीं हुए थे। तब किसी तरह मंत्री शिव डहरिया और प्रेम साय ने स्थिति संभाल कर उनको मनाया था। पर तालमेल अब तक नहीं बैठ पाया।

राजीव भवन में प्रभारी सचिव सप्तगिरी उल्का के सामने कल उनका आक्रोश फिर फूट गया। इस बार कार्यकर्ताओं ने ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री वाले प्रश्न भी किए। कहा, वरिष्ठता के लिहाज से सिंहदेव के दूसरे नंबर की मंत्रिमंडल में होने सदस्य के बाद भी उनकी उपेक्षा हो रही है।

ज्यादा रोष यूथ कांग्रेस और छात्र संगठन में दिखा। वे कह रहे थे स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं से उनके पोस्टर से सिंहदेव की तस्वीर गायब हैं। कुछ जोशीले लोगों तो ये भी चेतावनी दे दी है कि अगले चुनाव में अच्छे नतीजों की उम्मीद न रखें।

यानि सरगुजा से लेकर दिल्ली तक जो बवाल हो रहा है उसने बीजेपी की आंखों में चमक तो ला ही दी है।

मनेंद्रगढ़ के साथ नाम का विवाद

वैसे तो 15 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिन 4 जिलों की घोषणा की थी, मुख्यालय और कार्यालय के मामले में स्थानीय उपेक्षा को लेकर लगभग चारों जगहों से विरोध प्रदर्शन किया गया था। पर लगता है मनेंद्रगढ़ चिरमिरी जिले का विवाद सुलझाने में सरकार और प्रशासन को कुछ ज्यादा ही कठिनाई हो रही है।

मानपुर मोहला, सक्ती और सारंगढ़ जिले मुख्यमंत्री द्वारा 15 अगस्त को की गई घोषणा के लगभग  साढ़े पांच माह बाद अस्तित्व में आ जाएंगे,  किंतु मनेंद्रगढ़, चिरमिरी का मामला लटक गया है। अफसरों का कहना है कि इस जिले का नाम क्या हो, कौन-कौन सी तहसील शामिल की जाए और मुख्यालय किसे बनाया जाए। इस पर विवाद सुलझाने में फिलहाल दिक्कत हो रही है। सवाल कोरिया जिले से कुछ तहसीलों को काटने का भी खड़ा हुआ है। देखना है इस इलाके के लोगों को समझौते की राह कब मिलेगी।

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