राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कौन आए, कौन नहीं?
29-Oct-2021 6:15 PM (190)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कौन आए, कौन नहीं?

कौन आए, कौन नहीं?

राजनीतिक हलचल के बीच साइंस कॉलेज मैदान में आदिवासी महोत्सव का रंगारंग आगाज हुआ, तो लोगों का ध्यान स्वाभाविक रूप से देश -विदेश से आए कलाकारों पर था। निगाहें मंच पर बैठे अतिथियों पर भी थी। और इसमें स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की गैर मौजूदगी पर भी कानाफूसी होती रही।

सिंहदेव पिछले कई दिनों से दिल्ली में डटे थे। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक बड़ी थी, और इसमें सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री भी थे। बैठक निपटने के बाद वो रायपुर आने के बजाए भोपाल निकल गए।

महोत्सव में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में केसी वेणुगोपाल, पीएल पुनिया, अधीररंजन चौधरी, रणदीप सिंह सूरजेवाला, भक्त चरणदास को भी आमंत्रित किया गया है, लेकिन सिर्फ बीके हरिप्रसाद ही पहुंचे। खैर, कांग्रेस नेताओं के नहीं आने से महोत्सव की रौनक कम नहीं हुई । देश-विदेश से आए आदिवासी कलाकारों के नृत्य देखकर लोग झूम उठे।

जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट

सेंट्रल जेल में कैदियों से मेल मुलाकात के लिए नियम तय हैं। विचाराधीन वीआईपी कैदियों से जेलर के कक्ष में विशेष अनुमति से मुलाकात हो जाती है। लेकिन इस दौरान फोटो खींचने, और मोबाइल  ले जाने पर मनाही रहती है। मगर कवर्धा कांड के आरोपी विजय शर्मा, और दुर्गेश देवांगन के वीआईपी मुलाकातियों के लिए जेल मैनुअल को भी दरकिनार कर दिया गया।

दोनों से मिलने प्रदेश भाजपा के बड़े नेता रोजाना सेंट्रल जेल पहुंच रहे हैं। नंदकुमार साय सेंट्रल जेल पहुंचे, तो विजय शर्मा ने साय के साथ बकायदा फोटो खिंचवाई, और फिर उनके समर्थकों ने फेसबुक पर अपलोड कर दिया। विजय शर्मा से मिलने बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, पवन साय, शिवरतन शर्मा सहित कई नेता जा चुके हैं। अजय तो उनके लिए मीठा-खारा भी लेकर गए थे। कुल मिलाकर विजय को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है।

दबाया सबने, चुकाया एक ने

वैसे तो सरकारी दफ्तरों में करोड़ों रुपयों के गबन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, पर मुंगेली नगरपालिका में सिर्फ 13 लाख की नाली नहीं बनने पर वहां के अध्यक्ष, सीएमओ, इंजीनियर और ठेकेदार लपेटे में आ गये। अध्यक्ष संतूलाल सोनकर को सुप्रीम कोर्ट से भी अग्रिम जमानत नहीं मिल पाई। शीर्ष कोर्ट ने सात दिन के भीतर निचली अदालत में आवेदन लगाने की छूट दी है। इस बीच सोनकर मंत्रालय में अपना पक्ष रखकर आ गये, कहा कि इंजीनियर, अधिकारियों की जांच के बाद ही उनके पास फाइल आती है और उनके मत के अनुसार ही सबसे आखिर में वे हस्ताक्षर करते हैं। इसके बावजूद जमानत का पेंच तो फंसा हुआ है। अब हुआ यह है कि जिस ठेकेदार पर बिना नाली बनाये भुगतान लेने का आरोप है, उनके पिता ने नगरपालिका के खाते में पूरी राशि वापस जमा करा दी है। कहा जा रहा है कि अब अध्यक्ष महोदय को अग्रिम जमानत मिलने में आसानी होगी। बाकी आरोपी भी अभी फरार ही हैं।

सबने तो मिल-बांटकर राशि की गड़बड़ी की होगी पर अकेले ठेकेदार के सिर पर भुगतान की जिम्मेदारी क्यों आई? जवाब मिला, क्योंकि बाकी ने तो लिफाफे या टेबल के नीचे से लिये होंगे, बिल तो ठेकेदार के नाम पर ही जारी हुए थे। यह भी सवाल बना हुआ है कि राशि वापस जमा करा देने से अब अभियोजन का पक्ष तो मजबूत हो सकता है। साबित हो गया कि नाली बनाये बगैर भुगतान कर दिया गया था। वरना क्या पड़ी थी 13 लाख रुपये जमा करते? बहरहाल, अध्यक्ष सहित आधा दर्जन लोगों को जेल जाना पड़ेगा या बेल मिल जायेगी, यह सवाल बना हुआ है।

काबुल रिटर्न सैनिक स्कूल की प्राचार्य

सैनिक स्कूल अंबिकापुर में पहली बार महिला प्राचार्य नियुक्त की गई हैं। कर्नल जितेंद्र डोगरा के तबादले के बाद यह जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट कर्नल मिताली मधुमिता को दी गई है। पर खास बात केवल प्राचार्य का महिला होना नहीं हैं। इंटरनेट सर्फ करेंगे तो उनकी उपलब्धियों से भरी कई जानकारी हाथ लगेगी। सेना मेडल, वीरता पुरस्कार पाने वाली मिताली थल सेना की पहली और एकमात्र महिला अधिकारी हैं। वह ज्यादा चर्चा में तब आई थीं जब 26 फरवरी 2010 को काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले के दौरान एक बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने आतंकवादी हमले के दौरान 7 भारतीय समेत 19 राजनयिकों की जान बचाई। भारत ही नहीं देश के बाहर भी उनके साहस की सराहना हुई। अंबिकापुर सैनिक स्कूल में पद संभालने के बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में यहां के बच्चे प्रवेश पा सकें और छत्तीसगढ़ का नाम ऊंचा कर सकें, यह उनका लक्ष्य होगा।

सरेंडर पर भाजपा में बिखराव

कवर्धा में दो समुदाय से उपजे दंगे के शांत होने के बाद पुलिस भाजपा नेताओं की धरपकड़ से पार्टी के भीतर बिखराव की हालत बन गई है। खास तौर पर सरेंडर के मामले में सामूहिक समर्पण के निर्णय पर ही नेताओं में फूट पड़ गई है। बताते है कि भाजपा नेता विजय शर्मा की वजह से पार्टी की सरेंडर नीति धरी की धरी रह गई। बताते है कि विजय शर्मा ने सरेंडर पर राज्यसभा सांसद सरोज पांडे से व्यक्तिगत राय ली थी। पांडे ने बिना किसी हिचक के फौरन शर्मा को अदालत में समर्पण की सलाह दे दी। दरअसल शर्मा को सियासी फायदे में यह लगा कि अकेले सरेंडर करने से उनकी राजनीतिक छवि सशक्त होगी। उनकी इस महत्वाकांक्षा से साझा सरेंडर की तैयारी में लगे दीगर नेताओं को झटका लगा। शर्मा को दो मामलों में जमानत मिल गई लेकिन एक्ट्रोसिटी प्रकरण में राहत नहीं मिली है। सुनते है कि कवर्धा में अब भाजपा नेताओं के राजनीतिक मंसूबों पर भी सवाल उठ रहे है। दीवाली सिर पर है ऐसे में कुछ आरोपी जेल में बंद हैं। घर-परिवार के लोग त्यौहार से पहले अपनों को जेल से बाहर भी देखना चाहते हैं। चर्चा है कि भाजपा के आला नेताओं के बाहर घूमने पर कवर्धा में कानाफूसी भी हो रही है।

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