राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : महिलाओं पर नसबंदी का दारोमदार
22-Nov-2021 6:26 PM (145)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : महिलाओं पर नसबंदी का दारोमदार

महिलाओं पर नसबंदी का दारोमदार

छत्तीसगढ़ में पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिये अभियान शुरू किया गया है, जो 4 दिसंबर तक चलेगा। पहले चरण में जागरूक किया जाएगा, दूसरे चरण में नसबंदी के लिये शिविर लगेंगे। पूरे देश में पुरुष नसबंदी का प्रतिशत है। कई राज्यों में यह एक प्रतिशत से भी कम है। राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में कोरोना काल के डेढ़ साल में एक भी पुरुष की नसबंदी नहीं हुई। छत्तीसगढ़ में बीते 10 साल में करीब 3.5 लाख महिलाओं ने नसबंदी कराई जिनमें से केवल 15 हजार पुरुष थे। डॉक्टर कहते हैं पुरुषों की बजाय महिलाओं की नसबंदी ज्यादा जटिल होती है, उनकी नस पेट के भीतर होती है। पुरुषों की नसबंदी करना आसान होता है। पुरुषों की सोच यह है कि उनमें नसबंदी कराने से कमजोरी आयेगी। वे परिवार चलाने के लिये दौड़-धूप और कड़ी मेहनत करते हैं। डॉक्टरों का कहना है यह भ्रांति है कि नसबंदी से कमजोरी आती है। कोरोना काल के चलते पुरुष, महिला दोनों की नसबंदी ही पिछले दो साल से प्रभावित हुई है। यह घटकर 10 से 15 प्रतिशत रह गया है। इसके पहले सन् 2014 में, तखतपुर के नसबंदी शिविर में 13 महिलाओं की एक के बाद एक मौत हो गई थी। उसके बाद लंबे समय तक नसबंदी शिविर नहीं लगे। इस बार पुरुषों को स्वास्थ्य विभाग और वालेंटियर नसबंदी के लिये कितना जागरूक कर पाते हैं, यह पखवाड़ा खत्म होने पर मालूम होगा।

कोल ब्लॉक के लिये सर्वे पर रोक

हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक आवंटन के खिलाफ कोरबा, सरगुजा, सूरजपुर जिले के आदिवासियों ने अक्टूबर माह में पदयात्रा निकाली और पैदल राजधानी पहुंचे थे। वे वापस लौटे उसके बाद ही एक कोयला खनन की मंजूरी जारी कर दी गई। पर ऐसा नहीं कि उनके विरोध का कोई असर नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ सरकार ने 1995 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में हाथी रिजर्व क्षेत्र अधिसूचित कर दिया। यहां के ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा है कि जहां खदान खुलेगी उसी से लगकर हाथी रिजर्व कैसे बनाया जायेगा। हाथी रिजर्व के लिये कोई तैयारी जमीन पर नहीं दिखी लेकिन कोल ब्लॉक के लिये सर्वे का काम शुरू हो गया। कोरबा जिले के परोगिया ब्लॉक में सर्वे के काम को ग्रामीणों ने बंद करा दिया। कहा- सर्वे के लिये ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली गई है। अभी तो सर्वे बंद हो गया है, पर क्या आवंटन के बाद सर्वे और खनन का काम आगे भी स्थानीय लोग रुकवा पायेंगे। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव की नौबत आ सकती है।

सबसे हैंडसम अफसर कौन?

वैसे तो अफसर कैसे दिखते हैं यह मायने नहीं रखता, मायने यह रखता है कि वे काम कैसा करते हैं। लेकिन फिर भी अगर छत्तीसगढ़ के अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को देखें और उनमें से आदमियों का चेहरा, कद-काठी, व्यक्तित्व याद करें कि उनमें सबसे अधिक हैंडसम कौन हैं, तो रायपुर के आईजी आनंद छाबड़ा बिना किसी विवाद के नंबर वन आते दिखते हैं। एक वक्त हिंदी फिल्मों में जिस तरह चॉकलेटी चेहरा लेकर ऋषि कपूर आए थे, उसी के सरीखा खूबसूरत चेहरा, आकर्षक व्यक्तित्व, और शानदार कपड़े पहनने के शौकीन डॉ. आनंद छाबड़ा किसी पेशेवर मॉडल, या टीवी सीरियल के कलाकार की तरह दिखते हैं। अब अखिल भारतीय सेवाओं में मॉडलिंग का कोई रिवाज नहीं है नहीं तो वह छत्तीसगढ़ के लिए एक मैडल जरूर लेकर आ सकते थे।

डीजीपी अवस्थी हटाए क्यों गए?

पुलिस विभाग अभी तक अपने पिछले डीजीपी डीएम अवस्थी के अचानक हटा दिए जाने के हडक़ंप से पूरी तरह उबरा नहीं है। बहुत से लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि डीजीपी को अचानक कैसे हटा दिया गया। फिर भी पुलिस अफसरों की कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने राज्य की पुलिस को लेकर जो तेवर दिखाए थे उससे ऐसा लग रहा था कि यह अवस्थी को हटाने की जमीन बन रही है। और हुआ भी वैसा ही। लेकिन इसके पीछे वजह क्या थी, यह अलग-अलग लोगों का अलग-अलग कहना है। कुछ लोगों का यह मानना है कि अवस्थी ने पुलिस मुख्यालय के महत्व को खत्म ही कर दिया था, वहां बैठना बंद कर दिया था, और शहर के बीच ट्रांजिट हॉस्टल में एक कमरा लेकर वहीं से अपना दफ्तर चलाते थे। केंद्र सरकार की कई ऐसी वीडियो कॉन्फ्रेंस रहती थी जिनमें डीजीपी की जगह उनके दूसरे-तीसरे नंबर के मातहत बैठते थे। हालत यह हो गई थी कि डीजीपी के सहायक ही दूसरे अफसरों को जाकर वीडियो कांफ्रेंस की खबर कर देते थे कि आप ही बैठ जाइएगा।

कुछ दूसरी वजह भी सुनाई पड़ रही हैं जिनमें से एक यह है कि अपने साथी अफसरों के टेलीफोन भी अवस्थी कई-कई हफ्ते नहीं उठाते थे, और न ही कॉल बैक करते थे। एक बड़े आईपीएस अफसर का कहना था कि उनके फोन से घंटी जाने के बाद भी 20-20 दिन तक अवस्थी बात नहीं करते थे, और ऐसी जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचती थी। जो भी हो, अवस्थी का लंबा करियर बाकी है, और अगर मुख्यमंत्री उनसे संतुष्ट रहते, तो इस सरकार का पूरा कार्यकाल डीजीपी रहते हुए गुजार सकते थे। यह एक और बात है कि उपाध्याय या विश्वरंजन जैसे लंबे समय तक रहने वाले डीजीपी भी, डीजीपी रहते हुए रिटायर नहीं हुए, इस पद से हटाकर दूसरी जगह भेजे जाने के बाद ही रिटायर हुए। इसलिए पूरे कार्यकाल डीजी रहना भी आसान नहीं रहता है।

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