इतिहास

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Posted Date : 23-May-2018
  • 23 मई 1848 को पैदा होने वाले लिलिएनथाल ऐसे शख्स हैं जिन्होंने इंसान को पहली बार उड़ना सिखाया. उनकी उड़ान ने क्रांति कर दी. अमेरिका के राइट बंधुओं ने पहला हवाई जहाज बना कर दुनिया को हैरान कर दिया लेकिन असल में उड़ने के ख्वाब को पहली बार हकीकत में बदला जर्मनी के ओटो लिलिएनथाल ने. लिलिएनथाल ने ग्लाइडर बनाया और उससे कई उड़ानें भरीं. बार बार उड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि इंसान उड़ान भरने वाली मशीन विकसित कर सकता है.
    पंछियों को कई साल तक करीब से देखने के बाद लिलिएनथाल ने ग्लाइडर बनाया. उसके पंख पंछियों जैसे ही बनाए गए. पंखों को साधने के लिए उन्हें लकड़ी से कसा. इसके बाद लिलिएनथाल बर्लिन में 10 मीटर ऊंची इमारत में गए. छत से उन्होंने छलांग मार दी. उनकी साहसिक छलांग ने इंसानी सभ्यता का सदियों पुराना उड़ने का सपना साकार कर दिया.
    इसके बाद उन्होंने तमाम ऊंची चोटियों से कई बार उड़ान भरी. बिना इंजन के सिर्फ हवा की मदद से उन्होंने कुल पांच घंटे उड़ान भरी. वह 1896 में बर्लिन के पास एक ऊंची पहाड़ी पर गए. वहां से उन्होंने तीन बार सफल उड़ान भरी. लेकिन चौथी बार ग्लाइडर नाक के बल गिरा. लिलिएनथाल ने उसे संभालने की भरसक कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए. धरती से 15 मीटर की ऊंचाई पर ग्लाइडर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह पूरी रफ्तार से गिरा. लिलिएनथाल लिलीनथाल को गंभीर चोटें आई. अगले दिन 10 अगस्त 1896 को उनकी मौत हो गई.
    अमेरिका के राइट बंधुओं ने लिलिएनथाल की तकनीक का गहरा अध्ययन किया. इसके आधार पर ही वो पहला हवाई जहाज बनाने में सफल हुए. विल्बर राइट के मुताबिक, "लिलिएनथाल ने इंसान के हजारों साल के बोझ को अकेले झटक दिया." लिलिएनथाल को आज ग्लाइडर किंग के नाम से जाना जाता है.
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    • 1805- गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेजली ने एक आदेश के अंतर्गत दिल्ली के मुग़ल बादशाह के लिए एक स्थायी प्रावधान की व्यवस्था की थी।
    • 1949 - पश्चिम जर्मनी संविधान को अंगीकार करने के बाद औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया।
    • 1950 -अश्वेत अमेरिकी आविष्कारक एफ.एम. जोन्स को शीतलन (रेफ्रीजेरेशन) नियंत्रण प्रणाली के लिए पेटेंट जारी किया गया।
    • 1962-पहली बार मानव के हाथ का प्रत्यारोपण हुआ जिसे डॉ. डॉनल्ड ए. मैल्ट तथा जे. मैकहान ने संपादित किया।
    • 1977 - बेनिन ने संविधान को अंगीकार किया।
    • 1984 - बछेन्द्री पाल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फ़तह करने वाली पहली भारतीय महिला बनी।
    • 1999 - योहानिस रौ संघीय जर्मनी के नए राष्ट्रपति नियुक्त।
    • 2001 - पाकिस्तान का भारत को एम.एफ़.एन. का दर्जा देने से पुन: इंकार।
    • 2004 - बांग्लादेश में तूफ़ान के कारण मेघना नदी में नाव डूबने से 250 डूबे। सिंगापुर में जहाज़ के टैंकर से टकराने के कारण 4 हजार कारें डूबी।
    • 2008 -  भारत ने सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल पृथ्वी-2 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।  
    • 2009 - भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति  रोह मू ह्यून ने अपने घर के नज़दीक पहाडिय़ों से छलांग लगाकर आत्महत्या की।
    • 2010 - मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता में भारत के उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बिना विवाह किये महिला और पुरुष का एक साथ रहना अपराध नहीं माना। 
    • 1919 - जयपुर राजघराने की राजमाता महारानी गायत्री देवी का जन्म हुआ। 
    • 2010 - नक्सली आंदोलन के जनक भारतीय कानू सान्याल का निधन हुआ। 
    • 1908 - अमेरिकी भौतिक शास्त्री जॉन बारडीन का जन्म हुआ, जो 1956 और 1972 दो बार भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार के सहविजेता रहे। सन् 1956 का पुरस्कार उन्हें विलियम शोक्ले और वॉल्टर ब्रैटन के साथ ट्रान्जि़स्टर की खोज के लिए, तथा 1972 का नोबेल लियॉन एन. कूपर तथा जॉन आर. श्रीफर के साथ सुपरकन्डक्टर का सिद्धांत विकसित करने के लिए प्राप्त हुआ।  (निधन- 30 जनवरी 1991)-
    • 1707 -स्वीडन के वनस्पति विज्ञानी  कैरोलस लीनियस का जन्म हुुआ, वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने वंश (जीनस) और प्रजाति (स्पिशीज़) के जरिए जीवधारियों के नामकरण का एक तरीका सुझाया।  (निधन-10 जनवरी 1778)
    • 1960-फ्रांसीसी इंजीनियर, रसायनज्ञ और नियॉन लाइट के आविष्कारक  ज्यॉर्जेस क्लाउड का निधन हुआ। क्लाउड पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सीलबंद नियॉन ट्यूब में विद्युत आवेश प्रवाहित कराया और 1902 में नियॉन प्रकाश लैम्प की खोज की। (जन्म-24 सितम्बर 1870)
    • 1949- अमेरिकी भौतिकशास्त्री  विलियम वैब्सटर हैन्सन का निधन हुआ, जिन्होंने राडार निर्माण के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन्हें माइक्रोवेव तकनीक के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। (जन्म 27 मई 1909)
    • महत्वपूर्ण दिवस-अंतर्राष्ट्रीय तिब्बत मुक्ति दिवस । 
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Posted Date : 21-May-2018
  • 1991 में आज ही के दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हुई. श्रीलंका में शांति सेना भेजने से नाराज तमिल विद्रोहियों के संगठन लिट्टे ने तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में राजीव पर आत्मघाती हमला करवाया. राजीव गांधी की आखिरी तस्वीर
    श्रीपेरम्बदूर में लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार कर रहे राजीव गांधी के पास एक महिला फूलों का हार लेकर आई. जैसे ही वो महिला हार पहनाने के लिए बेहद करीब पहुंची, धमाका हो गया. धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी चपेट में आने वाले ज्यादातर लोगों के मौके पर ही परखच्चे उड़ गए.
    46 साल के युवा नेता को खोने का मातम पूरे देश में देखा जा सकता था. देश भर में ज्यादातर जगहों पर सुबह सुबह लोगों को रेडियो के जरिए राजीव गांधी की हत्या की खबर मिली. देखते ही देखते देश भर के सरकारी संस्थानों में तिरंगा झुक गया. स्कूलों में शोकसभाएं हुईं.
    जवाहर लाल नेहरू के नाती और इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव ने ब्रिटेन में कॉलेज की पढ़ाई की. इसके बाद 1966 में वो कर्मशियल पायलट बन गए. राजीव गांधी 1980 तक इंडियन एयरलाइंस के पायलट थे. उनके छोटे भाई संजय गांधी राजनीति में थे. 1980 में एक विमान हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई. इसके बाद राजीव राजनीति में आए. उन्होंने संजय गांधी की मौत के बाद खाली हुई अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.
    1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने. लोकसभा चुनावों में कांग्रेस तीन चौथाई बहुमत से संसद में दाखिल हुई. 533 में से पार्टी ने 414 सीटें जीतीं. राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री बने तब उनकी उम्र महज 40 साल थी. युवा प्रधानमंत्री से देश को काफी उम्मीदें थीं. उन्होंने स्कूलों में कंप्यूटर लगाने की व्यापक योजना बनाई. देश भर में उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किए, ताकि गांव के बच्चों को छठी से 12वीं तक अच्छी पढ़ाई करने का मौका मिले. राजीव ने गांव गांव तक टेलीफोन पहुंचाने के लिए पीसीओ कार्यक्रम शुरू किया. लाइसेंस राज को कम किया गया, लेकिन वक्त बीतने के साथ सरकार की छवि पर बड़े धब्बे भी लगने लगे. सिख दंगे, भोपाल गैस कांड, शाहबानो केस, बोफोर्स कांड, काला धन और श्रीलंका नीति को लेकर सरकार की बेहद आलोचना हुई.
    इतिहासकार रामचंद्र गुहा के मुताबिक राजीव गांधी के कार्यकाल में कांग्रेस के नेताओं से पसीने की गंध की जगह आफ्टर शेव की बास आने लगी. गुहा मानते हैं कि उस दौर में राजनीति में बड़े भ्रष्टाचार की शुरुआत हुई. इसकी कीमत 1989 के चुनाव में राजीव गांधी को चुकानी पड़ी. कांग्रेस की हार हुई और वीपी सिंह की सरकार बनी. 1990 में सरकार गिरी और कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार बनी. 1991 में यह सरकार भी गिर गई और चुनाव का एलान हुआ. इन्हीं चुनावों के लिए प्रचार करने राजीव तमिलनाडु गए थे.
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    • 1819-पहली साइकिल न्यूयॉर्क में चलते देखी गई।
    • 1853-पहली बार लंदन में जनता के लिए ऐक्वेरियम खोला गया।
    • 1981 - पियरे मोरो फ्रांस के प्रधानमंत्री नियुक्त।
    • 1994 - दक्षिणी यमन द्वारा उत्तरी यमन से अलग होने की घोषणा।
    • 1998 - 32 वर्षों तक लगातार इंडोनेशिया पर शासन करने वाले राष्ट्रपति सुहार्तों का त्यागपत्र।
    • 2002 - बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति एच.एम. इरशाद को 6 महीने कारावास की सज़ा।
    • 2003 - विश्व के 190 से भी अधिक देशों ने तम्बाकू के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संधि को जिनेवा में मंजूरी दी।
    • 2008 - रिजर्व बैंक ने सेंचुरियन बैंक ऑफ़ पंजाब के एचडीएफसी बैंक में विलय प्रस्वाव को मंज़ूरी दी। नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी विलिस ई लैंक का निधन। 
    • 2010 - ओडिशा तट पर बंगाल की खाड़ी में भारतीय सेना के जंगी जहाज़ रणवीर से भारतीय नौसेना ने सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के उध्र्वाधर प्रक्षेपण संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। दार्जीलिंग में अखिल भारतीय गोरखा लीग के अध्यक्ष मदन तमांग  की हत्या कर दी गई। 
    • 1931 - भारत के प्रसिद्ध व्यंग्य रचनाकार शरद जोशी का जन्म हुआ। 
    • 1960 -  रुस्तम-ए-ज़मां पहलवान के नाम से मशहूर गामा पहलवान का निधन हुआ। 
    • 1991 -भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के पुत्र, भारत की कांग्रेस (इ) पार्टी के अग्रणी महासचिव (1981 से) और भारत के प्रधानमंत्री (1984-1989) राजीव गांधी की हत्या। 
    • 1922- अमेरिकी चिकित्सक राबर्ट गुड का जन्म हुआ, जो आधुनिक प्रतिरक्षण विज्ञान के अग्रणी माने जाते हैं। उन्होंने 1968 में अस्थिमज्जा का पहला सफल प्रत्यारोपण किया जो उन्होंने अपनी बहन से एक बच्चे में किया था जिसे प्रतिरक्षण तंत्र की बीमारी थी। (निधन-13 जून 2003)
    • 1860 -डच शरीर क्रिया विज्ञानी  विलियम ईन्थोवेन का जन्म हुआ,  जिन्हें इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम सहायता से हृदय की विद्युत विशेषताओं के बारे में बताया। इसे उन्होंने एक नैदानिक उपकरण के रूप में विकसित किया। (निधन-29 सितम्बर 1927) 
    • 1935-डच वनस्पति वैज्ञानी और आनुवांशिकीविद्  ह्यूगो (मैरी) डी व्राइस का निधन हुआ, जिन्होंने जैविक विकास का प्रायोगिक अध्ययन प्रतिपादित किया, तथा उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) का सिद्धान्त दिया। (जन्म-16 फरवरी 1848) 
    • 1786- स्वीडिश रसायनज्ञ  कार्ल विल्हेम शीले का निधन हुआ, जिन्होंने 1772 में आक्सीजन की खोज की। शीले एक उत्साही प्रयोगविद् थे जिन्होंने कठिन और गंभीर परिस्थितियों में काम किया। अपनी एकमात्र पुस्तक कैमिकल आब्ज़र्वेशन्स ऐन्ड एक्सपैरिमेन्ट आन एयर ऐण्ड फायर में उन्होंने आक्सीजन और नाइट्रोजन के बारे में बताया। उन्होंने कई तत्वों की भी खोज की, जैसे क्लोरीन (1774), मैंगनीज़ (1774), टंगस्टन (1781)।  (जन्म-9 दिसम्बर 1742)
    •  महत्वपूर्ण दिवस-आतंकवाद विरोध/बलिदान दिवस (राजीव गांधी की पुण्य तिथि) ।
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Posted Date : 20-May-2018
  • जीन्स पहनना किसे अच्छा नहीं लगता. इतिहास में आज का दिन है ब्लू जीन्स का दिन. दुनिया की पहली जीन्स बनाई लेवी स्ट्रॉस ने और उनका खास जर्मन कनेक्शन भी है.
    सैन फ्रैंसिस्को के बिजनेसमैन लेवी स्ट्रॉस और दर्जी जेकब डेविस को इसी दिन जीन्स बनाने का पेटंट दिया गया. लेवी स्ट्रॉस जर्मनी के बवेरिया में पैदा हुए और 1847 में न्यू यॉर्क पहुंचे. 1850 में लोएब स्ट्रॉस ने अपना नाम लेवी स्ट्रॉस में बदल दिया और अमेरिका में सोने की तलाश में शामिल हो गए.
    जेकब डेविस नेवादा के रेनो में एक दर्जी थे. वे लीवाई स्ट्रॉस की कंपनी से लगातार सामान खरीदते थे. एक दिन उन्होंने स्ट्रॉस को चिट्ठी लिखी और अपने नए पतलून के बारे में बताया जिसकी सिलाई में  वह धातु के बटन लगाते थे ताकि वह जल्दी फटे नहीं. डेविस के पास बड़े पैमाने पर इन पतलूनों को बनाने के पैसे नहीं थे, और
    वह स्ट्रॉस से मदद मांगना चाहते थे. स्ट्रॉस को तरकीब पसंद आई और दोनों ने मिलकर इनका पेटंट बनाया. 20 मई 1873 में दोनों को अमेरिकी सरकार ने यह पेटंट दिया और ब्लू जीन्स बाजार में आने लगी.
    1920 की दशक तक मजदूर और आम लोग स्ट्रॉस की जीन्स खरीदने लगे. लीवाइ्स जीन्स की स्टाइल नंबर 501 तभी से मशहूर हो गई और आज भी यह इस ब्रैंड के मंहगे जीन्स में से है. अब महिलाओं से लेकर बच्चों और पुरुष, सब यह जीन्स पसंद करते हैं.

     

    • ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 20 मई वर्ष का 140 वां (लीप वर्ष में यह 141 वां) दिन है। साल में अभी और 225 दिन शेष हैं। 
    • 1830- डी हाइड ने फाउन्टेन पेन का पेटेन्ट कराया।
    • 1910 -जापान ने कोरिया को औपचारिक रुप से अपना एक भाग बना लिया और इसका नाम बदल कर चोजऩ रख दिया।
    • 1940-अन्वेषक आइगर सिकॉर्स्की ने जनता के सामने अपना हैलिकॉप्टर प्रदर्शित किया।
    • 1995 - रूस द्वारा मानव रहित अंतरिक्ष यान स्पेक्त्र  का सफल प्रक्षेपण।
    • 1999 - कुर्द विद्रोही नेता सेमडिम साकिक को मृत्युदंड की सज़ा।
    • 2000 - फिजी में बंदूक़धारियों के नेता जार्ज स्पेट ने देश के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
    • 2001 - अफग़़ानिस्तान में तालिबान ने हिन्दुओं की अलग पहचान के लिए ड्रेस कोड बनाया।
    • 2003 - पाकिस्तान ने उग्रवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन पर प्रतिबंध लगाया।
    • 2004 - ताइवान में नवगठित सरकार ने शपथ ग्रहण की। यूरोपीय संघ के बाद अमेरिका ने भी कृषि निर्यात सब्सिडी कम करने की घोषणा की।
    • 1900- हिन्दी भाषा के जाने-माने कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म हुआ।  
    • 1932 -भारत में क्रांतिकारी विचारों के जनक  विपिन चन्द्र पाल का निधन हुआ। 
    • 1957 - प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और आंध्रप्रदेश के  प्रथम मुख्यमंत्री टी. प्रकाशम का निधन हुआ। 
    • 1860 -जर्मन जैव रसायनज्ञ ऐडवर्ड बकनर का जन्म हुआ, जिन्होंने बताया कि किण्वन केवल खमीर की कोशिका के कारण नहीं होता बल्कि उसमें मौजूद एंज़ाइम के कारण होता है।  (निधन-13 अगस्त 1917)
    • 1806- ब्रिटेन के दार्शनिक और अर्थशास्त्री जॉन स्टीवर्ट मिल का जन्म हुआ। दर्शनशास्त्र में वे ऑगस्ट कैंट के विचारों से प्रभावित थे। अर्थ व्यवस्था में वे उत्पादन और उपभोग के लिए सहकारी संस्थाएं स्थापित किए जाने के पक्षधर थे। सन 1873 में उनका निधन हुआ।
    • 1913- अमेरिकी इलेक्ट्रिक इंजीनियर विलियम रैडिंगटन हैवलेट  का जन्म हुआ,  जिन्होंने हैवलेट पैकार्ड कम्पनी की नींव रखी जो आज कम्प्यूटर निर्माण की अग्रणी कम्पनी है। (निधन-12 जनवरी 2001)
    • 1947 -जर्मन भौतिकशास्त्री फिलिप एडवर्ड ऐन्टन लेनार्ड का निधन हुआ, जिन्हें कैथोड किरणों पर अनुसंधान के लिए वर्ष 1905 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। (जन्म-7 जून 1862)
    • 1793 -स्विस प्रकृतिविद् चाल्र्स बनेट का निधन हुआ, जिन्होंने अनिषेकजनन (पार्थेनोजेनेसिस) की खोज की। इसका अर्थ होता है बिना निषेचन के प्रजनन। उन्होंने पता लगाया कि कीट अपने शरीर के छिद्रों से श्वसन करते हैं जिन्हें उन्होंने स्टिग्मैटा कहा। (जन्म 13 मार्च 1720)।
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Posted Date : 19-May-2018
  • आज का इतिहास भारत के सबसे युवा राष्ट्रपति के नाम है. 1977 में 25 जुलाई के दिन उन्होंने ये पद ग्रहण किया था. आज उनका जन्मदिन है. नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठे राष्ट्रपति बने. उनका जन्म 19 मई को 1913 में मद्रास प्रेसिंडेंसी के इल्लूर गांव में हुआ.
    भारत की आजादी की लड़ाई में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक करियर लंबा चला. वह इस दौरान कई अलग अलग पदों पर रहे. जब तेलंगाना को आंध्र में मिला कर आंध्रप्रदेश बनाया गया था, उस समय नीलम संजीव रेड्डी इसके पहले मुख्यमंत्री बने थे. 1956 से 1960 तक. इसके बाद दूसरी बार भी वह ही इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए.
    इसके बाद वे दो बार लोकसभा के स्पीकर के पद पर रहे. 25 जुलाई 1977 को वह भारत के छठे राष्ट्रपति बने. चार साल के अंदर उन्होंने तीन सरकारें देखीं. उनके राष्ट्रपति काल में मोरारजी देसाई, चरण सिंह और फिर इंदिरा गांधी की सरकार रही. 1982 में उनका कार्यकाल पूरा हुआ. इसके बाद जैल सिंह राष्ट्रपति बने.
    अपने विदाई भाषण में उन्होंने कार्यकाल के दौरान रही तीनों सरकारों की आलोचना की और कहा कि वे देश की जनता के हालात सुधारने में पूरी तरह विफल रहे. उन्होंने अपील की कि मजबूत विपक्ष को खड़ा होना चाहिए ताकि सरकार के कुशासन को काबू में किया जा सके. पहली जून 1996 को उनकी निमोनिया से मृत्यु हो गई.
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    • 1959 -दो परमाणु रिएक्टरों वाली पहली पनडुब्बी बनी जिसका नाम ट्राइटन था।
    • 1999 - भारतीय मूल के महेन्द्र चौधरी फिजी के प्रधानमंत्री नियुक्त, मैक्सिको में बाल्कान डिफ्य़ूजो नामक ज्वालामुखी सक्रिय।
    • 2000 - फिजी में भारतीय मूल के प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी की सरकार को सात नाकाबपोश सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा तख्तापलट।
    • 2001 - इस्रायल का फिलीस्तीनी मुख्यालयों पर हवाई हमला, 15 घायल।
    • 2002 - पूर्वी तिमोर चार सदियों की दासता के बाद नयी सहस्त्राब्दी के पहले नये राष्ट्र के रूप में विश्व मानचित्र पर उभरा।
    • 2006 - भारतीय मूल के मलेशियाई उद्योगपति टी. रविचन्द्रन ने माउंट एवरेस्ट को फ़तह किया।
    • 2007 - अमेरिकी सीनेट में समग्र आव्रजन सुधार विधेयक पर सहमति।
    • 2008 -  परम्परावादी मराठी थियेटर के पुरोधा विजय तेंदुलकर का निधन। भारत व चीन के बीच नाथुला से व्यापार पुन: शुरू हुआ। विश्व श्रम संगठन के कार्यकारी अक्ष्यक्ष असाने ने नई दिल्ली में सामाजिक सुरक्षा पर सम्मेलन का उदघाटन किया। मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महाथिर मुहम्मद ने सत्तायुढ़ दल से अलग होने की घोषणा की। कैलाश मानसरोवर के लिए चीन ने भारतीय यात्रियों का दौरा स्थगित किया। 
    • 2010-  भारत सरकार को 34 दिनों से चले आ रहे 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से 67718.95 करोड़ रुपए का शुल्क मिलना तय हो गया।  बिहार के मुजफ्फरपुर-रक्सौल रेलखंड पर मोतीहारी जि़ला के जीवधारा और पीपरा रेलवे स्टेशन के बीच बंगारी हॉल्ट के समीप नक्सलियों ने रेल पटरी उड़ा दी, जिससे एक टैंकर मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई तथा इसकी 13 बोगियों में आग लग गई। 
    • 1913 - भारत के पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म हुआ। 
    • 1934 - जाने-माने लेखक रस्किन बांड का जन्म हुआ। 
    • 1938 - जाने माने अभिनेता गिरीश कर्नाड का जन्म हुआ। 
    • 1904 - टाटा समूह के संस्थापक जमशेद जी टाटा का निधन हुआ। 
    • 1979 - हिन्दी के शीर्ष साहित्यकार हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का निधन हुआ। 
    • 1869-  आयरिश वनस्पति विज्ञानी हेनरी होरैटियो डिक्सन का जन्म हुआ, जिन्होंने जॉन जॉली के साथ मिलकर ट्रान्सपिरेशन पर काम किया और पेड़ों में पानी के परिवहन का तरीका समझाया और इसका सिद्धांत दिया। (निधन- 20 दिसम्बर 1953)
    • 1914- ब्रिटिश जैव रसायनज्ञ  मैक्स फर्डिनैण्ड पेट्रूज़ का जन्म हुआ, जिन्होंने एक्स-किरण विवर्तन द्वारा हीमोग्लोबिन की संरचना मालूम की, जिसके लिए उन्हें 1962 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
    • 1944 -ब्रिटेन के मानवविज्ञानी गॉडफ्रे विल्सन का निधन हुआ, जिन्होंने अफ्रीका में सामाजिक परिवर्तन के बारे में बताया। ज़ाम्बिया में रोड्स लिविंगस्टोन संस्थान के पहले निदेशक थे। उनका मत था कि अफ्रीका की समस्याएं उपनिवेशवाद से उपजी हैं, तथा इन सामाजिक विषमताओं का कारण औद्योगिकीकरण तथा मज़दूरों का पलायन है। (जन्म-1908)
    • 1942-आयरिश भौतिकशास्त्री  सर जोजफ़ लॉर्मर का निधन हुआ, जो त्वरित इलेक्ट्रॉन से ऊर्जा निकलने की दर बताने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा स्पेक्ट्रम लाइन के टूटने को स्पष्ट किया। (जन्म 11 जुलाई 1857)।

     

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Posted Date : 18-May-2018
  • बीजेपी विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ज़रूर ले ली है, लेकिन जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) नेता एचडी कुमारास्वामी ने अभी भी हार नहीं मानी है.
    विधानसभा चुनाव में कुमारस्वामी की जेडीएस तीसरे नंबर पर रही है. उनकी पार्टी ने 37 सीटें जीती हैं. 78 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने उनको समर्थन दिया है जिसके बल पर वह मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं. मंगलवार को आए 222 सीटों के परिणामों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी.
    उसने 104 सीटें जीती हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे भी पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद भी येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन गए और चुनावों में तीसरे पायदान पर रहने के बाद भी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
    कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बनेंगे या नहीं ये तो वक़्त बताएगा, लेकिन भारतीय राजनीति में ऐसा काफ़ी अर्से से होता रहा है कि सदन में कम संख्या होने पर भी कई नेता महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे हैं.
    चौधरी चरण सिंह
    1977 में जनता पार्टी के नेतृत्व में पहली ग़ैर-कांग्रेसी सरकार बनी. इसके प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई चुने गए थे.
    वैचारिक मतभेदों के कारण दो साल बाद देसाई को इस्तीफ़ा देना पड़ा. इसके बाद गठबंधन में शामिल भारतीय लोक दल के नेता चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.
    उस समय चरण सिंह के पास केवल 64 सांसद थे. जनता पार्टी के बाकी सहयोगियों ने उनका समर्थन करने से इनक़ार कर दिया.
    बाद में कांग्रेस ने उन्हें समर्थन करने का वादा किया, लेकिन कोई समर्थन न होने के कारण तीन हफ़्तों के अंदर चरण सिंह को इस्तीफ़ा देना पड़ा.
    हालांकि, जनवरी 1980 में जब तक दोबारा चुनाव कराए गए तब तक वह प्रधानमंत्री पद पर रहे.
    वी.पी. सिंह
    1989 के आम चुनावों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. कांग्रेस को 195 और जनता दल को 142 सीटें मिली थीं.
    बीजेपी और वामपंथी पार्टियों के समर्थन से जनता दल के नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.
    लेकिन राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी ने उनसे समर्थन वापस ले लिया. एक साल से कम ही समय में वीपी सिंह ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.
    चंद्रशेखर
    वीपी सिंह के इस्तीफ़े के बाद जनता दल नेता चंद्रशेखर ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी छोड़ दी और समाजवादी जनता पार्टी का गठन किया.
    उस समय उनके पास केवल 64 सांसद थे लेकिन कांग्रेस के समर्थन के कारण चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.
    चंद्रशेखर तकरीबन सात महीने प्रधानमंत्री पद पर रहे लेकिन कांग्रेस ने उनसे समर्थन वापस ले लिया और चंद्रशेखर को छह मार्च 1991 को इस्तीफ़ा देना पड़ा.
    वाजपेयी, देवगौड़ा और गुजराल
    11वीं लोकसभा के लिए 1996 में हुए चुनावों में बीजेपी को 161, कांग्रेस को 140 और राष्ट्रीय मोर्चे को 79 सीटें मिली थीं.
    सबसे बड़ी पार्टी के नेता की हैसियत से अटल बिहारी वाजपेयी को तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नियुक्त किया.
    लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण वाजपेयी सरकार केवल 13 दिन में गिर गई. इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी.
    आज कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए कोशिश कर रहे कुमारास्वामी के पिता एचडी देवगौड़ा उस समय संयुक्त मोर्चा के नेता की हैसियत से प्रधानमंत्री बने थे.
    इससे पहले जनता दल नेता देवगौड़ा कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके थे.
    लेकिन बाहर से समर्थन कर रही कांग्रेस ने एक बार फिर समर्थन ले लिया और अप्रैल 1997 में देवगौड़ा सरकार गिर गई. वे तकरीबन 10 महीने देश के प्रधानमंत्री पद पर रहे.
    इसके बाद संयुक्त मोर्चा ने इंद्र कुमार गुजरात को अपना नेता चुना और कांग्रेस के समर्थन से वे प्रधानमंत्री रहे. गुजराल इस पद पर करीब 11 महीने तक रहे.
    कोड़ा निर्दलीय होकर सीएम
    ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) से राजनीति शुरू करने वाले मधु कोड़ा पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने थे.
    झारखंड की पहली सरकार में मंत्री रहने वाले मधु कोड़ा को 2005 में बीजेपी ने विधानसभा का टिकट देने से इनक़ार कर दिया था लेकिन वह निर्दलीय चुनाव जीत गए.
    2005 में एनडीए को 36 और यूपीए को 26 सीटें मिलीं. पहले कांग्रेस-झामुमो गठबंधन के उम्मीदवार शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने जो बहुमत साबित नहीं कर पाए.
    इसके बाद बीजेपी समर्थित एनडीए के नेता अर्जुन मुंडा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उसमें मधु कोड़ा खनन मंत्री बने.
    सितंबर 2006 में कोड़ा और दूसरे निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया और मुंडा सरकार गिर गई.
    इसके बाद कोड़ा ने झामुमो, आरजेडी और अन्य दलों के समर्थन से अपनी सरकार बनाई और कांग्रेस ने उसे बाहर से समर्थन दिया.
    दो साल बाद झामुमो नेता शिबू सोरेन मुख्यमंत्री पद की मांग करने लगे और झामुमो ने उनसे समर्थन वापस ले लिया.
    इसके बाद 2008 में कोड़ा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.
    जगदंबिका पाल उत्तर प्रदेश के दो दिन के मुख्यमंत्री बने थे
    एक दिन के सीएम
    1996 में उत्तर प्रदेश की 13वीं विधानसभा के चुनाव हुए. 425 सीटों की विधानसभा में बीजेपी को 173, सपा को 108, बसपा को 66 और कांग्रेस को 33 सीटें मिली थीं.
    21 फ़रवरी 1998 को राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह सरकार को बर्ख़ास्त कर कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल को रात में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी.
    इसको कल्याण सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी जिसके बाद कोर्ट ने इस फ़ैसले को असंवैधानिक क़रार दिया और कल्याण सिंह फिर मुख्यमंत्री बने. (BBC)

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Posted Date : 18-May-2018
  • 18 मई 1912 भारतीय सिनेमा का एक बड़ा दिन था. उस दिन भारत में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई, जो भारत में बनी पहली फिल्म साबित हो सकती थी. इस दिन 'श्री पुंडलिक' नाम की एक फिल्म कोरोनेशन सिनेमैटोग्राफ गिरगांव मुंबई में रिलीज की गई. भारत की पहली मूक फिल्म होने की ये उम्मीदवार है. श्री पुंडलिक नाम की ये फिल्म दादा साहेब तोरणे ने बनाई और निर्देशित की थी.
    बिना संवादों वाली इस फिल्म के लिए तोरणे और उनके सहयोगी नानासाहेब चित्रे और किर्तीकर ने शूटिंग स्क्रिप्ट लिखी. फिर इसे प्रोसेसिंग के लिए लंदन भेजा गया. ये फिल्म 1,500 फीट लंबी यानी करीब 22 मिनट की थी. लंदन में तैयार होने के बाद इसे मुंबई के गिरगांव के कोरोनेशन सिनेमैटोग्राफ में दिखाया गया. ये फिल्म दो सप्ताह चली.
    कुछ लोगों का दावा है कि ये फिल्म पहली भारतीय फिल्म इसलिए नहीं कही जा सकती क्योंकि यह एक मराठी नाटक की फोटोग्राफिक रिकॉर्डिंग थी. और क्योंकि इसके कैमरामैन भारतीय नहीं हो कर ब्रिटेन के जॉन्सन थे.
    इसके करीब एक साल बाद भारत के इतिहास में पहली फिल्म के तौर पर गिनी जाने वाली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' रिलीज हुई थी, जिसे दादा साहेब फाल्के ने बनाया था.
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    • 1804-फ्रांस की सेनेट के समर्थन से नेपोलियन बोनापार्ट इस देश के शासक बने। इस प्रकार फ्रांस में क्रांति की सफतला के 15 वर्ष बाद पुन: राजशाही शासन व्यवसथा स्थापित हो गयी किंतु दस वर्ष बाद 11 अप्रैल सन 1814 ईसवी को फ्रांस में नेपोलियन की तानाशाही भी उस समय समाप्त हो गयी जब उनको योरोपीय सरकारों ने पराजित करके देश निकाला दे दिया। 
    • 1910 -हैली पुच्छलतारा दिखायी दिया।
    • 1914 -पहली बार व्यावसायिक माल पनामा नहर से होकर गुजरा।
    • 1994 - संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1995 को संयुक्त राष्ट्र सहिष्णुता वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया, गाजा पट्टी क्षेत्र से अंतिम इस्रायली सैनिक टुकड़ी हटाए जाने के साथ ही क्षेत्र पर फिलीस्तीनी स्वायत्तशासी शासन पूर्णत:लागू।
    • 2004 - इस्रायल के राफा विस्थापित कैम्प में इस्रायली सैनिकों ने 19 फिलीस्तीनियों को मौत के घाट उतारा।
    • 2006 - नेपाल नरेश को कर के दायरे में लाया गया।
    • 2007 - कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूर सुल्तान नजर वायेव का कार्यकाल असीमित समय के लिए बढ़ा।
    • 2008 -  पाश्र्व गायक नितिन मुकेश को मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित किया। भारतीय मूल के लेखक इन्द्रा सिन्हा को उनकी किताब एनिमल पीपुल हेतु कामनवेल्थ सम्मान प्रदान किया गया। 
    • 1933 - भारत के बारहवें प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा का जन्म हुआ। 
    • 1824 -   जर्मन वनस्पति वैज्ञानिक विल्हेम (फ्रेड्रिक बेनेडिक्ट) हॉफ्मीस्टर का जन्म हुआ,  जिनके पेड़-पौधों के अनुसंधान ने उन्हें आपेक्षिक पादप आकृतिविज्ञान का अग्रणी बना दिया। उन्होंने 1982 में पौधों में लैंगिक और अलैंगिक दोनों पीढिय़ों के एकांतरण की खोज की, जो सभी पेड़-पौधों के जीवन-चक्र को समझने का आधार है। (निधन-12 जनवरी1877)
    • 1048 - फारसी कवि, गणितज्ञ और खगोलशास्त्री  उमर खय्याम का जन्म हुआ। खय्याम निशापुर (इरान) में पैदा हुए थे। उन्होंने बीजगणित पर कार्य किया जो ईरान में आज भी पढ़ाया जाता है। ज्यामिति में उन्होंने यूक्लिड के कार्य को पढ़ा तथा समान्तर रेखाओं पर कार्य किया।  (निधन- 4 दिसम्बर 1131)
    • 1912- जर्मनी के पादप कोशिका विज्ञानी  एड्वर्ड एडॉल्फ स्ट्रॉसबर्गर का निधन हुआ, जिन्होंने जिसने जिमनोस्पर्म के भ्रूण थैलियों के बारे में बताया (जैसे कोनिफर), और ऐन्जियोस्पर्म (फूलों वाले पौधे) में युग्मित निषेचन के बारे में बताया। उन्होंने कोशिका में पाए जाने वाले द्रव को साइटोप्लाज़्म तथा केन्द्रक में पाए जाने वाले द्रव के लिए न्यूक्लियोप्लाज़्म कहा। (जन्म-1 फरवरी 1844)
    • 1975-मूलत: पोलैंड से ताल्लुक रखने वाले अमेरिकी भौतिक रसायनज्ञ  कासिमीर फैजान्स का निधन हुआ,  जिन्होंने ब्रिटेन के फ्रेडरिक सॉडी के साथ मिलकर रेडियोएक्टिव विस्थापन का नियम प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार जब कोई रेडियोएक्टिव तत्व विखण्डित होता है तो उसका परमाणु भार दो अंक कम हो जाता है। (जन्म-27 मई 1887)।
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Posted Date : 17-May-2018
  • -शकील अख़्तर
    कांग्रेस सरकार ने टीपू सुल्तान को एक हीरो के तौर पर पेश किया और उनकी जयंती मनाने का फ़ैसला भी किया था
    मैसूर के पूर्व शासक टीपू सुल्तान को एक बहादुर और देशभक्त शासक के रूप में ही नहीं धार्मिक सहिष्णुता के दूत के रूप में भी याद किया जाता है.
    लेकिन कुछ समय से भाजपा नेताओं और दक्षिणपंथी इतिहासकार टीपू को एक क्रूर और हिंदुओं के दुश्मन मुस्लिम सुल्तान के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.
    टीपू के हिंदुओं का सफ़ाया करने वाला शासक बताया जा रहा है.
    कर्नाटक चुनाव अभियान के दौरान भी कई बार ये सवाल उठाया गया कि टिपू राज्य का नायक है या हिंदुओं का विरोधी अत्याचारी शासक.
    टीपू सुल्तान मैसूर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर श्रीरंगपट्टनम में एक सुंदर मकबरे में अपने पिता हैदर अली और माँ फ़ातिमा फ़ख़रुन्निसा के बाज़ू में दफन हैं.
    श्रीरंगपट्टनम टीपू की राजधानी थी और यहां जगह-जगह टीपू के युग के महल, इमारतें और खंडहर हैं.
    टीपू पर इस विवाद के बावजूद अब भी लोग उसके मक़बरे और महलों को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रीरंगपट्टनम आते हैं.
    लोगों की स्मृतियों में अब भी मैसूर का टीपू एक देशभक्त और अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़ते हुए अपनी जान देने वाले योद्धा के तौर पर बना हुआ है.
    कर्नाटक की पूर्व कांग्रेस सरकार ने कुछ साल पहले राज्य के कई अन्य नायकों की तरह टीपू को भी कर्नाटक का गौरव क़रार दिया और उनके जन्मदिन पर आधिकारिक तौर पर जश्न मनाना शुरू किया.
    भाजपा और आरएसएस इसका विरोध करते हैं. उनके विचार में, राज्य सरकार मुसलमानों को ख़ुश करने के लिए टीपू के जन्म का जश्न मनाती है.
    राज्य में भाजपा के नेता अनंत कुमार हेगड़े कहते हैं कि टीपू पक्षपाती शासक थे और उन्होंने तटीय क्षेत्रों में हजारों हिंदुओं की हत्या की थी और मंदिर तोड़े थे.
    वह कहते हैं, "टीपू नायक नहीं बल्कि हज़ारों हिंदुओं का हत्यारा था."
    टीपू सुल्तान मैसूर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर श्रीरंगपट्टनम में एक सुंदर मकबरे में अपने पिता हैदर अली और माँ फ़ातिमा फ़ख़रुन्निसा के बाज़ू में दफन हैं
    कैसा था टीपू का साम्राज्य?
    टीपू के साम्राज्य में हिंदू बहुमत में थे. टीपू सुल्तान धार्मिक सहिष्णुता और आज़ाद ख़्याल के लिए जाना जाते हैं.
    उन्होंने श्रीरंगपट्टनम, मैसूर और अपने राज्य के कई अन्य स्थानों में कई मंदिर बनाए, और मंदिरों के लिए ज़मीन दी. एक बड़ा मंदिर ख़ुद उनके ही महल के प्रवेश द्वार से कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित है.
    लेकिन हिंदुत्व से प्रभावित बहुत से इतिहासकार और बुद्धिजीवी टीपू को एक हिंदू विरोधी शासक के रूप में देखते है.
    कर्नाटक के डॉक्टर चिदानंद मूर्ति ने कन्नड़ भाषा में टीपू पर लिखी अपनी किताब में लिखा है, "वे बेहद चालाक शासक थे. उन्होंने मैसूर सम्राज्य के भीतर अपनी हिंदू प्रजा पर कोई अत्याचार नहीं किया और न ही उनके मंदिरों को नुकसान पहुंचाया. लेकिन तटीय क्षेत्रों और केरल के मलाबार इलाक़े पर हमले में हिंदुओं के लिए बहुत क्रूर थे."
    "वे क्रूर और पक्षपाती शासक थे. वे जिहादी थे. उन्होंने हज़ारों हिंदुओं को ज़बदरदस्ती मुस्लिम बना दिया, वे अपनी धार्मिक पुस्तक का पालन करता था जिसमें लिखा था मूर्तिपूजकों का वध करो."
    टीपू के सैन्य अभियान
    इतिहासकार रवि वर्मा ने टीपू सुल्तान के बारे अपने एक लेख में लिखा है, "केरल में टीपू के सैन्य अभियानों के बारे में कई प्रमाणित दस्तावेज़ों से स्पष्ट रूप से साबित होता है कि मैसूर का सुल्तान एक पक्षपातपूर्ण मुस्लिम क्रूर शासक था जो केरल में सैकड़ों हिंदू मंदिरों को नष्ट करने के लिए, बड़ी संख्या में हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनाने और हिंदुओं पर अपार अत्याचार करने का ज़िम्मेदार था."
    रवि वर्मा ने सैंकड़ों मंदिरों की एक सूची भी प्रस्तुत की है जो उनके अनुसार टीपू ने नष्ट की है.
    लेकिन टीपू के काल का गहन अध्ययन करने वाले इतिहासकार प्रोफ़ेसर बी शेख अली कहते हैं कि इन दावों का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है. उनके विचार में टीपू के क्रूर शासक की नई छवि इतिहास से अधिक वर्तमान राजनीतिक माहौल से प्रभावित है.
    वे कहते हैं, "जब मुस्लिम आए, तो उन्होंने अपना इतिहास लिखा, जब अंग्रेज़ आए तो उन्होंने अपनी तरह से इतिहास लिखा अब पार्टी बदल गई है तो वे चाहते हैं कि वे अपनी तरह से इतिहास बदलें. वे इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना चाहते हैं."
    प्रोफ़ेसर अली कहते हैं कि इतिहास को समकालीन राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि में समझने की ज़रूरत है.
    देश की बदलती हुई राजनीति में इतिहास की एक नई व्याख्या की जा रही है. इस बदलती हुई पृष्ठभूमि में भविष्य के इतिहास में टीपू सुल्तान जैसे पूर्व शासकों को शायद भुला दिया जाए या फिर उन्हे हिंदू विरोधी और क्रूर शासक के तौर पर पेश किया जाए. (बीबीसी)

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Posted Date : 17-May-2018
  • आज ही के दिन मशहूर कॉमेडियन चार्ली चैपलिन का चुराया गया ताबूत खोज निकाला गया था. साल 1977 में स्विट्जरलैंड में चार्ली चैपलिन की मौत हुई थी. महान हास्य अभिनेता चार्ली चैपलिन के निधन के बाद उन्हें स्विट्जरलैंड की जेनेवा झील के पास दफनाया गया था. लेकिन दो चोर उनके ताबूत को वहां से खोद कर चुरा ले गए और उनके परिवार से ताबूत के बदले चार लाख पाउंड की वसूली की मांग करने लगे.
    चार्ली चैपलिन की पत्नी ने चोरों की इस मांग को मानने से इनकार कर दिया. जांच में जुटी पुलिस ने टेलीफोन टैप किए और उसके बाद ताबूत के चोर पकड़ लिए गए. चार्ली चैपलिन के जन्म के बारे में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. लेकिन कहा जाता है कि उनका जन्म 16 अप्रैल 1889 को लंदन में हुआ. कॉमेडी के जरिए पूरी दुनिया को लोट पोट कर देने वाले चैप्लिन का बचपन बहुत मुश्किलों में गुजरा. मां की बीमारी, पिता की मौत और कंगाली के बीच 13 साल की उम्र में वो वह स्टेज शो करने लगे. 1908 में एक कॉमेडी कंपनी के शो में एक छोटे से रोल ने लंदन में और ब्रिटेन में उन्हें मशहूर कर दिया. इसके बाद तो उन्हें कई शो और फिल्में मिली. 1916 आते आते वह सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कॉमेडियन बन गए. पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब मानवता कराह रही थी तब 26 भाषाओं में चैप्लिन की मूक फिल्में लोगों को कुछ देर गम भुलाने में मदद कर रही थी.
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    • 1769- ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के कपड़ा उद्योग को बर्बाद करने के लिए बुनकरों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए।
    • 1890-कॉमिक कट्स नाम का पहला साप्ताहिक कॉमिक पत्र ब्रिटेन में अल्फ्रेड नॉर्थक्लिफ द्वारा छापा गया।
    • 1955 -परमाणु रिएक्टर को फर्मी तथा जि़लार्ड ने पेटेन्ट कराया।
    • 1975 - जापानी महिला श्रीमती जुनको तैबेई माउंट एवरेस्ट पर चढऩे वाली प्रथम महिला बनी।
    • 1987 - सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया।
    • 2000 - रूसी संसद के ऊपरी सदन फ़ेडरलिस्ट्स ने परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि की मंजूरी प्रदान की।
    • 2010 - भारतीय बॉक्सरों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक जीत लिए।  देश के सबसे पुराने पारंपरिक खेल कबड्डी को बढ़ावा देते हुए पंजाब सरकार ने अगले महीने कबड्डी विश्वकप का आयोजन करने की घोषणा की। भारतीय सेना ने  अग्नि-2 प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण किया।   
    • 1836 - ब्रिटेन के खगोलशास्त्री सर जोजफ़ नॉर्मन लॉक्यर का जन्म हुआ,  जिन्होंने 1868 में पृथ्वी पर खोजे जाने से पहले ही सूर्य में हीलियम तत्व की खोज की और उसका नामकरण भी किया। इसके अलावा उन्होंने सूर्य की बाहरी परत का नाम क्रोमोस्फेयर दिया। (निधन-16 अगस्त 1920)
    • 1749 -अंग्रेज़ सर्जन  ऐडवर्ड जेनर का जन्म हुआ, जिन्होंने चेचक के टीके की खोज की। उस समय गांवों में प्रचलित था कि चेचक की ही तरह की गाय की एक हानिरहित बीमारी जिसे हो जाए, उसे बाद में चेचक की बीमारी नहीं होती। 
    • 14 मई 1796 को उन्होंने डेयरी में काम करने वाली लड़की से उस बीमारी का द्रव लिया और उसे एक आठ वर्षीय लड़के के शरीर में प्रविष्ट करा दिया। इससे लड़के को गौचेचक हो गया, फिर छह महीने बाद उन्होंने उसे चेचक से संक्रमित किया तो पाया कि लड़का बिलकुल ठीक था।  (निधन-26 जनवरी 1823) 
    • 1991 -इंग्लैण्ड में जन्मे अमेरिकी जीवविज्ञानी जॉर्ज इवेलिन हचिन्सन का निधन हुआ, जो स्वच्छ पानी की झीलों का पारिस्थितिक अध्ययन करने के कारण आधुनिक झील विज्ञान के जनक माने जाते हैं। (जन्म-30 जनवरी 1903)
    • 1916-रूसी भौतिक शास्त्री  बॉरिस बॉरिसोविक गॉलिट्सिन का निधन हुआ, जो भूकम्प विज्ञान पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भूकंपमापी यंत्र के निर्माण में मदद की। (जन्म-2 मार्च 1862) 
    • महत्वपूर्ण दिवस-  विश्व दूर संचार दिवस 
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Posted Date : 16-May-2018
  • यह ज्यादा पुराना इतिहास नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों ने आज ही के दिन मानव स्टेम सेल का क्लोन बनाने में सफलता हासिल की थी. मेडिकल दुनिया में यह अहम कदम माना गया. 16 मई 2013 को अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पहली बार क्लोन किए गए इंसानी भ्रूण से स्टेम सेल यानि मूल कोशिका निकालने में सफलता पाई. पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से वैज्ञानिक मानव के क्लोन किए गए भ्रूण से स्टेम सेल निकालने की कोशिश कर रहे थे. पहले माना जा रहा था कि इलाज के लिए बनाए जाने वाले कृत्रिम भ्रूण का विकास कोशिकाएं बनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही रुक जाता है. मूल कोशिकाएं यानि स्टेम सेल खुद को शरीर की किसी भी कोशिका में ढाल सकते हैं.
    वैज्ञानिक काफी समय से कोशिश कर रहे हैं कि पार्किंसन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, रीढ़ में चोट और आंखों में रोशनी के इलाज में इनका इस्तेमाल हो सके. चूंकि प्रत्यारोपण में शरीर के बाहरी अंग को स्वीकार नहीं करने की आशंका बहुत ज्यादा होती है, इसलिए वैज्ञानिकों ने मरीज के खुद के डीएनए क्लोनिंग करके स्टेम सेल बनाने का फैसला किया. इस प्रक्रिया के तहत सोमेटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर तकनीक के जरिए मरीज का डीएनए खाली अंडाणु में डाला जाता है. 1996 में इसी तकनीक का डॉली भेड़ का क्लोन बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. डॉली पहली स्तनपायी प्राणी थी, जिसे क्लोन करके बनाया गया था.
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    • 1999 - दक्षेस का 2002 ई. में होने वाला शिखर सम्मेलन थिम्पू में कराए जाने की घोषणा।
    • 2004 - रोजर फ़ेडेरर ने हेम्बर्ग मास्टर्स खिताब जीता।
    • 2006 - हालीवुड की चर्चित अदाकारा आस्कर पुरस्कार के लिए नामित नाओमी वाट्स को संयुक्त राष्ट्र संस्था का राजदूत बनाया गया। न्यूजीलैंड के 47 वर्षीय मार्क इंजलिस ऐसे पहले पर्वतारोही बन गये, जिन्होंने कृत्रिम पैरों के सहारे एवरेस्ट की चोटी पर झण्डा फहराया।
    • 2008 - उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों के स्नाकोत्तर पाठ्यक्रमों में 27 प्रतिशत ओबीसी कोटा पर रोक के कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्णय को ख़ारिज कर दिया।  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर थिम्पु पहुँचे। 
    • 1805 - सर अलेक्ज़ेंडर बन्र्स का जन्म हुआ, जो वर्तमान पाकिस्तान, अफग़़ानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़बेकिस्तान एवं ईरान में अभियानों के लिए प्रसिद्ध ब्रिटिश अन्वेषक एवं राजदूत थे। 
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Posted Date : 16-May-2018
  • ज़फ़र सैयद
    12 मई 1739 की शाम. दिल्ली में ज़बरदस्त चहल-पहल, शाहजहांनाबाद में चरागां और लाल क़िले में जश्न का समां है. ग़रीबों में शरबत, पान और खाना बांटा जा रहा है. फ़कीरों को झोली भर-भर कर रुपए दिए जा रहे हैं. आज दरबार में ईरानी बादशाह नादिर शाह के सामने मुग़लिया सल्तनत के तेरहवें ताजदार मोहम्मद शाह बैठे हैं लेकिन इस वक़्त उनके सर पर शाही ताज नहीं है क्योंकि नादिर शाह ने ढाई महीने पहले उनसे सल्तनत छीन ली थी.
    56 दिन दिल्ली में रहने के बाद अब नादिर शाह के वापिस ईरान लौटने का वक़्त आ गया है और अब वो हिंदुस्तान की बागडोर दोबारा मोहम्मद शाह के हवाले करना चाहते हैं.
    नादिर शाह ने सदियों से जमा मुग़ल खजाने में झाड़ू फेर दी है और शहर के तमाम अमीर और प्रभावशाली लोगों की जेबें उलटा ली हैं.
    लेकिन उसे दिल्ली की एक तवायफ़ नूर बाई ने, जिस का ज़िक्र आगे चलकर आएगा, ख़ुफ़िया तौर पर बता दिया है कि ये सब कुछ जो तुम ने हासिल किया है, वो उस चीज़ के आग़े कुछ भी नहीं है जिसे मोहम्मद शाह ने अपनी पगड़ी में छुपा रखा है.
    नादिर शाह घाघ था और घाट-घाट का पानी पिए हुए था उसने मौक़े पर वो चाल चली जिसे नहले पर दहला कहा जाता है. उसने मोहम्मद शाह से कहा, "ईरान में रस्म है कि भाई ख़ुशी के मौक़े पर आपस में पगड़ियां बदल देते हैं, आज से हम भाई-भाई बन गए हैं, तो क्यों न इसी रस्म को अदा किया जाए." मोहम्मद शाह के पास सर झुकाने के अलावा कोई चारा नहीं था. नादिर शाह ने अपनी पगड़ी उतार कर उसके सर रखी, और उस की पगड़ी अपने सर और यूं दुनिया का मशहूर हीरा कोहेनेूर हिंदुस्तान से निकल कर ईरान पहुंच गया.
    रंगीला बादशाह
    इस हीरे के मालिक मोहम्मद शाह अपने परदादा औरंगज़ेब आलमगीर के दौरे हुक़ूमत में 1702 में पैदा हुए थे. उनका पैदाइशी नाम तो रोशन अख़्तर था, हालांकि 29 सितंबर 1719 को शाही इमाम सैय्यद ब्राद्रान ने उन्हें सिर्फ़ 17 बरस की उम्र में सल्तनत-ए-तैमूरिया के तख़्त पर बिठाने के बाद अबु अल फ़तह नसीरूद्दीन रोशन अख़्तर मोहम्मद शाह का ख़िताब दिया.
    ख़ुद उनका तखल्लुस 'सदा रंगीला' था. इतना लंबा नाम कौन याद रखता, इसलिए जनता ने दोनों को मिलाकर मोहम्मद शाह रंगीला कर दिया और वो आज तक हिंदुस्तान में इसी नाम से जाने जाते हैं.
    मोहम्मद शाह के जन्म के वक़्त औरंगज़ेब आलमगीर ने हिंदुस्तान में एक ख़ास क़िस्म का कट्टर इस्लाम लागू कर दिया था और उसका सबसे पहला निशाना वो कलाकार बने जिनके बारे में ये राय थी कि वो इस्लामी उसूलों का पालन नहीं करते. इसकी एक दिलचस्प मिसाल इतालवी यात्री निकोलो मनूची ने लिखी है. वो कहते हैं कि औरंगज़ेब के दौर में जब संगीत पर पाबंदी लगी तो गवैयों और संगीतकारों की रोज़ी-रोटी बंद हो गई. आख़िर तंग आकर एक हज़ार कलाकारों ने जुमे के दिन दिल्ली की जामा मस्जिद से जुलूस निकाला और बाजों को जनाज़ों की शक्ल में लेकर रोते पीटते गुज़रने लगे.
    औरंगज़ेब ने देखा तो पूछा, "ये किसका जनाज़ा लिए जा रहे हैं जिसकी ख़ातिर इस क़दर रोया पीटा जा रहा है?" उन्होंने कहा, "आपने संगीत का क़त्ल कर दिया है, उसे दफ़नाने जा रहे हैं." औरंगज़ेब ने जवाब दिया, "क़ब्र ज़रा ग़हरी खोदना." भौतिकी का नियम है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है. यही नियम इतिहास और मानवीय समाज पर भी लागू होता है कि जिस चीज़ को जितनी सख़्ती से दबाया जाता है वो उतनी ही ताक़त से उभरकर सामने आती है इसलिए औरंगज़ेब के बाद भी यही कुछ हुआ और मोहम्मद शाह के दौर में वो तमाम कलाएं अपनी पूरी ताक़त के साथ सामने आ गईं जो उससे पहले दब गईं थीं.
    इसकी सबसे दिलचस्प गवाही 'मरक़ए दिल्ली' से मिलती है. ये एक किताब है जिसे मोहम्मद शाह के दरबारी दरगाह क़ली ख़ान ने लिखा था और उसमें उन्होंने लफ़्ज़ों से वो तस्वीरें खींची हैं कि उस ज़माने की जीती-जागती सांस लेती दिल्ली आंखों के सामने आ जाती है. इस किताब के हवाले से एक अजीब बात सामने आती है कि सिर्फ़ बादशाह ही नहीं, दिल्ली के लोगों की ज़िंदगी भी पेंडुलम की तरह दो छोरों के बीच झूल रही थी. एक तरफ़ तो वो ऐश-ओ-आराम से लबरेज़ ज़िंदगी जी रहे थे और जब इससे उकता जाते तो औलियाओं के हाथ थाम लेते थे. और जब वहां से भी दिल भर जाता तो दोबारा फिर वहीं लौट आते.
    'मरक़ए दिल्ली' मे आंहज़ोर के क़दम शरीफ़, क़दम गाह हज़रत अली, निज़ामुद्दीन औलिया का मक़बरा, कुतुब साहब की दरग़ाह और दर्जनों दूसरे स्थानों का ज़िक्र किया है जहां उनके मानने वालों की भीड़ रहती थी. किताब में लिखा है कि यहां 'औलिया कराम की इनती क़ब्रें हैं कि उनसे बहार भी जल उठे.' एक तरफ़ तो यहां ग्यारहवीं शरीफ़ सारी दिल्ली में बड़ी धूम धाम से होती है, झाड़-फ़ानूस सजाए जाते हैं और रोशन महफ़िलें होती हैं. 
    दूसरी ओर इस दौरान संगीत को भी ख़ूब बढ़ावा मिला. दरग़ाह ने ऐसे कई संगीतकारों का ज़िक्र किया है जो शाही दरबार से संबंध रखते थे. उनमें अदा रंग और सदा रंग सबसे नामी हैं जिन्होंने ख़्याल-तर्ज़-ए-गायकी को नया मुकाम दिया जो आज भी माना जाता है. मरक़ए दिल्ली में कहा गया है, "सदा रंग जैसे ही अपने नाख़ून से साज़ के तार छेड़ता है दिलों से बेख़्तियार होकर निकलती है और जैसे ही उस के गले से आवाज़ निकलती है, लगता है बदन से जान निकल गई."
    उसी दौर की एक बंदिश आज भी गाई जाती है, 'मोहम्मद शाह रंगीले सजना तुम बिन कारी बदरया, तन ना सुहाए. 'मोहम्मद शाह रंगीले सजना, तुम्हारे बिना काले बादल दिल को नहीं भाते.' दरग़ाह क़ुली ने दर्जनों कव्वालों, ढोलक नवाज़ों, पिखलोजियों, धमधी नवाज़ों, सबूचा नवाज़ों, नक़ालों, यहां तक भाटों तक का ज़िक्र किया है जो शाही दरबार से बावस्ता थे.
    हाथियों का ट्रैफ़िक जाम
    उस दौर में नृत्य भी क्यों पीछे रहता? नूर बाई का पहले ज़िक्र आ चुका है. उसके कोठे के आगे अमीरों और प्रभावशाली लोगों के हाथियों का वो हुजूम होता था कि ट्रैफ़िक जाम हो जाता. मरक़ए दिल्ली में लिखा है, "जिस किसी को उसकी महफ़िल का चस्का लगा उसका घर बर्बाद हुआ और जिस दिमाग़ में उसकी दोस्ती का नशा समाया वो बगुले की तरह चक्कर काटता रहता. एक दुनिया ने अपनी पूंजी खपा दी और अनगिनत लोगों ने उस काफ़िर की खातिर सारी दौलत लुटा दी."
    नूर बाई ने नादिर शाह से भी संबंध बना लिए थे. और बहुत संभव है कि ऐसी ही किसी एकांत की मुलाक़ात में उसने कोहेनूर का राज़ नादिर शाह पर खोल दिया.
    यहां ये बता देना ज़रूरी है कि ये वाक़या ईस्ट इंडिया कंपनी के इतिहासकार थियो मैटकॉफ़ ने कोहेनूर के बारे में किताब में बताया है, हालांकि कई इतिहासकार इस पर शक़ भी ज़ाहिर करते हैं. इसके बावजूद ये इस क़दर मशहूर है कि हिंदुस्तान की सामूहिक याद्दाश्त का हिस्सा बन गया है. दरग़ाह क़ुली ख़ान एक और तवायफ़ अद बेग़म का हैरतअंगेज़ हाल कुछ यूं बयां करते हैं-
    "अद बेग़म दिल्ली की मशहूर बैग़म हैं जो पायजामा नहीं पहनती, बल्कि अपने बदन के निचले हिस्से पर पायजामों की तरह फूल-पत्तियां बना लेती हैं. ऐसी फूल-पत्तियां बनाती हैं जो बुने हुए रोमन थान में होती हैं. इस तरह वो अमरीकों की महफ़िल में जाती हैं और कमाल ये है कि पायजामे और उस नक़्क़ाशी में कोई फ़र्क़ नहीं कर पाता. जब तक उस राज़ से पर्दा ना उठे कोई उनकी कारीगरी को नहीं भांप सकता."
    ये मीर तक़ी मीर की जवानी का ज़माना था. ये शायद संभव है कि ये शेर उन्होंने अद बेग़म ही से प्रभावित होकर कहा हो- जी फट गया है रश्क से चसपां लिबास केक्या तंग जामा लिपटा है उसके बदन के साथ इस दौरान मोहम्मद शाह के दिन और रात का हाल ये थाः सुबह के वक़्त झरोखा दर्शन में जाकर बटेरों या हाथियों की लड़ाइयों से दिल बहलाना.
    उस दौरान कभी कोई फ़रयादी आ गया तो उसकी परेशानी भी सुन लेना. दोपहर के वक़्त बाज़ीगरों, नटों, नक़ालों और भांटों की कला से आनंद उठाना, शामें नृत्य और संगीत से और रातें....
    बादशाह को एक और शौक़ भी था. वो अकसर जनाना लिबास पहनना पसंद करते थे और बदन पर जनाना रेशमी पोशाक पहनकर दरबार में आ जाते.
    उस वक़्त उनके पांव में मोती जड़े जूते हुआ करते थे. अलबत्ता किताबों में लिखा है कि नादिर शाह के हमले के बाद वो ज़्यादातर सफ़ेद लिबास पर ही संतोष करने लगे थे.
    मुग़ल चित्रकारी जो औरंगज़ेब के दौर में मुरझा गई थी अब पूरी चमक से खुलकर सामने आई.
    उस दौर के मशहूर चित्रकारों में निधा मल और चित्रमन के नाम शामिल हैं जिनके चित्र मुग़लिया चित्रकारी के सुनहरे दौर के कलाकारों के मुक़ाबले पर रखे जा सकते हैं.
    शाहजहां के बाद पहली बार दिल्ली में मुग़ल चित्रकारों का दूसरा दौर शुरू हुआ. उस शैली की विशेषताओं में हल्के रंगों का इस्तेमाल अहम हैं.
    उसके अलावा पहले दौर के मुग़लिया चित्रों में पूरा फ्रेम खचाखच भर दिया जाता था. मोहम्मद शाह के दौर में मंज़र में सादगी पैदा करने और खाली जगह रखने का रुझान पैदा हुआ जहां नज़र इधर उधर घूम फिर सके.
    इसी दौर की एक मशहूर तस्वीर वो है जिस में ख़ुद मोहम्मद शाह रंगीला को एक कनीज़ से सेक्स करते दिखाया गया है. कहा जाता था कि दिल्ली में अफ़वाह फैल गई थी कि बादशाह नामर्द है, जिसे दूर करने के लिए इस तस्वीर का सहारा लिया गया.
    सोने की चिड़िया
    ऐसे में सत्ता कैसे चलती और कौन चलाता? अवध, बंगाल और दक्कन जैसे उपजाऊ और मालदार सूबों के नवाब अपने-अपने इलाक़ों के बादशाह बन बैठे.
    उधर, दक्षिण में मराठों ने दामन खींचना शुरू कर दिया और सल्तनत-ए-तैमूरिया के बखिए उधड़ने शुरू हो गए लेकिन सल्तनत के लिए सब से बड़ा ख़तरा पश्चिम से नादिर शाह की शक्ल में शामत-ए-आमाल की तरह नमूदार हुआ और सब कुछ तार-तार कर गया.
    नादिर शाह ने हिंदुस्तान पर हमला क्यों किया शफ़ीक़ुर्रहमान ने अपनी शाहकार तहरीर 'तुज़के नादरी' इसकी कई वजहें बयान की हैं.
    मसलन हिंदुस्तान के गवैये 'नादरना धीम-धीम' कर के हमारा मज़ाक उड़ाते हैं, या फिर ये कि 'हम तो हमला करने नहीं बल्की अपनी फूफी जान से मुलाक़ात करने आए थे.' मज़ाक अपनी जगह, असल सबब सिर्फ़ दो थे.
    पहलाः हिंदुस्तान सैन्य लिहाज़ से कमज़ोर था. दूसराः माल और दौलत से भरा हुआ था.
    गिरावट के बावजूद अब भी काबुल से लेकर बंगाल तक मुग़ल शहंशाह का सिक्का चलता था और उसकी राजधानी दिल्ली उस समय दुनिया का सबसे बड़ा शहर था जिसकी बीस लाख नफ़ूस पर शामिल आबादी लंदन और पेरिस की संयुक्त आबादी से ज़्यादा थी, और उसका शुमार दुनिया के अमीर तरीन शहरों में किया जाता था.
    इसलिए नादिर शाह 1739 में हिंदुस्तान जाने के मशहूर रास्ते ख़ैबर दर्रे को पार करके हिंदुस्तान में दाख़िल हो गया. कहा जाता है कि मोहम्मद शाह को जब भी बताया जाता कि नादिर शाह की फौजे आगे बढ़ रही हैं तो वो यही कहताः- 'हनूज़ दिल्ली दूर अस्त यानी अभी दिल्ली बहुत दूर है, अभी से फ़िक्र की क्या बात है.'
    जब नादिर शाह दिल्ली से सौ मील दूर पहुंच गया तो मुग़ल शहंशाह को ज़िंदगी में पहली बार अपनी फौजों का नेतृत्व स्वंय करना पड़ा. यहां भी हालात ऐसे की उनके लश्कर की कुल तादाद लाखों में थी, जिसका बड़ा हिस्सा बावर्चियों, संगीतकारों, कुलियों, सेवकों, खजांचियों और दूसरे नागरिक कर्मचारियों का था जबकि लड़ाका फौज एक लाख से कुछ ही ऊपर थी.
    उसके मुक़ाबले पर ईरानी फौज सिर्फ़ 55 हज़ार की थी. लेकिन कहां जंगों में पले नादिर शाही लड़ाका दस्ते और कहां हंसी खेल में धुत मुग़ल सिपाही. करनाल के मैदान में सिर्फ़ तीन घंटों में फैसला हो गया और नादिर शाह मोहम्मद शाह को क़ैदी बनाकर दिल्ली के विजेता की हैसियत से शहर में दाख़िल हुआ.
    क़त्ल-ए-आम
    अगले दिन इद-उल-जुहा थी. दिल्ली की मस्जिदों में नादिर शाह के नाम का खुत्बा पढ़ा गया और टकसालों में उसके नाम के सिक्के ढाले जाने लगे.
    अभी चंद ही दिन गुज़रे थे कि शहर में अफ़वाह फैल गई कि एक तवायफ़ ने नादिर शाह को क़त्ल कर दिया है.
    दिल्ली के लोगों ने इससे सह पाकर शहर में तैनात ईरानी सैनिकों क़त्ल करना शुरू कर दिया. इसके बाद जो हुआ वो इतिहास के पन्नों पर कुछ यूं बयां हैं-
    "सूरज की किरण अभी अभी पूर्वी आसमान फूटी ही थीं कि नादिर शाह दुर्रानी अपने घोड़े पर सवार लाल क़िले से निकल आया. उसका बदन ज़र्रा-बक़्तर से ढका हुआ, सर पर लोहे का कवच और कमर पर तलवार बंधी हुई थी और कमांडर और जरनैल उनके साथ थे. उसका रुख आधा मील दूर चांदनी चौक में मौजूद रोशनउद्दौला मस्जिद की ओर था. मस्जिद के बुलंद सहन में खड़े हो कर उसने तलवार म्यान से निकाल ली."
    ये उसके सिपाहियों के लिए इशारा था. सुबह के नौ बजे क़त्ल-ए-आम शुरू हुआ. कज़लबाश सिपाहियों ने घर-घर जाकर जो मिला उसे मारना शुरू कर दिया.
    इतना ख़ून बहा कि नालियों के ऊपर से बहने लगा. लाहौरी दरवाज़ा, फ़ैज़ बाज़ार, काबुली दरवाज़ा, अजमेरी दरवाज़ा, हौज़ क़ाज़ी और जौहरी बाज़ार के घने इलाक़े लाशों से पट गए.
    हज़ारों औरतों का बलात्कार किया गया, सैकड़ों ने कुओं में कूद कूद कर के अपनी जान दे दी. कई लोगों ने ख़ुद अपनी बेटियों और बीवीयों को क़त्ल कर दिया कि वो ईरानी सिपाहियों के हत्थे न चढ़ जाएं.
    अकसर इतिहास के हवालों के मुताबिक उस दिन तीस हज़ार दिल्ली वालों को तलवार के घाट उतार दिया गया. आख़िर मोहम्मद शाह ने अपने प्रधानमंत्री को नादिर शाह के पास भेजा. कहा जाता है कि प्रधानमंत्री नंगे पांव और नंगे सिर नादिर शाह के सामने पेश हुए और ये शेर पढ़ा-
    'दीगर नमाज़दा कसी ता बा तेग़ नाज़ कशी... मगर कह ज़िंदा कनी मुर्दा रा व बाज़ क़शी'
    (और कोई नहीं बचा जिसे तू अपनी तलवार से क़त्ल करे...सिवाए इसके कि मुर्दा को ज़िंदा करे और दोबारा क़त्ल करे.)
    इस पर कहीं जाकर नादिर शाह ने तलवार दोबारा म्यान में डाली तब कहीं जाकर उसके सिपाहियों ने हाथ रोका.
    क़त्ल-ए-आम बंद हुआ तो लूटमार का बाज़ार खुल गया. शहर के अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया और फौज की ड्यूटी लगा दी गई कि वो वहां से जिस क़दर हो सके माल लूट ले. जिस किसी ने अपनी दौलत छुपाने की कोशिश की उसे बहुत बुरी तरह प्रताड़ित किया गया.
    जब शहर की सफ़ायी हो गई तो नादिर शाह ने शाही महल की ओर रुख किया. उस का ब्यौरा नादिर शाह के दरबार में इतिहासकार मिर्ज़ा महदी अस्त्राबादी ने कुछ यूं बयां किया है-
    'चंद दिनों के अंदर अंदर मज़दूरों को शाही खजाना खाली करने का हुक़्म दिया गया. यहां मोतियों और मूंगों के समंदर थे, हीरे, जवाहरात, सोने चांदी के खदाने थीं, जो उन्होंने कभी ख़्वाब में भी नहीं देखीं थीं. हमारे दिल्ली में क़याम के दौरान शाही खजाने से करोड़ों रुपए नादिर शाह के खजाने में भेजे गए. दरबार के उमरा, नवाबों, राजाओं ने कई करोड़ सोने और जवाहरात की शक्ल में बतौर फिरौती दिए.'
    एक महीने तक सैकड़ों मज़दूर सोने चांदी के जवाहरात, बर्तनों और दूसरे सामान को पिघलाकर ईंटे ढालते रहे ताक़ि उन्हें ईरान ढोने में आसानी हो.
    शफ़ीक़ुर्रहमान 'तुज़क-ए-नादरी' में इसका वर्णन विस्तार से करते हैं. 'हम ने कृपा की प्रतीक्षा कर रहे मोहम्मद शाह को इजाज़त दे दी कि अगर उसकी नज़र में कोई ऐसी चीज़ है जिसको हम बतौर तोहफ़ा ले जा सकते हों और ग़लती से याद न रही हो तो बेशक़ साथ बांध दे. लोग दहाड़े मार-मार कर रो रहे थे और बार बार कहते थे कि हमारे बग़ैर लाल क़िला खाली खाली सा लगेगा. ये हक़ीक़त थी कि लाल क़िला हमें भी खाली खाली लग रहा था.'
    नादिर शाह ने कुल कितनी दौलत लूटी? इतिहासकारों के एक अनुमान के मुताबिक उस की मालियत उस वक़्त के 70 करोड़ रुपए थी जो आज के हिसाब से 156 अरब डॉलर बनते हैं. यानी दस लाख पचास हज़ार करोड़ रुपए. ये मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी सशस्त्र डकैती थी.
    शराब और अफ़ीम की लत ने मोहम्मद शाह को अपनी सल्तनत ही की तरह खोखला कर दिया था.
    उर्दू शायरी का सुनहरा दौर
    मुग़लों की दरबारी और सरकारी ज़बान फ़ारसी थी. लेकिन जैसे जैसे दरबार की गिरफ़्त आम लोगों की ज़िंदगी पर ढीली पड़ती गई, लोगों की ज़बान यानी उर्दू उभरकर ऊपर आने लगी. बिलकुल ऐसे ही जैसे बरगद की शाख़ें काट दी जाएं तो उसके नीचे दूसरे पौधों को फलने फूलने का मौक़ा मिल जाता है. इसलिए मोहम्मद शाह रंगीला के दौर को उर्दू शायरी का सुनहरा दौर कहा जा सकता है.
    उस दौर की शुरूआत ख़ुद मोहम्मद शाह के तख़्त पर बैठते ही हो गई थी जब बादशाह के साल-ए-जुलूस यानी 1719 में वली दक्कनी का दीवान दक्कन से दिल्ली पहुंचा. उस दीवान ने दिल्ली के ठहरे हुए अदबी झील में ज़बरदस्त तलातुम पैदा कर दिया और यहां के लोगों को पहली बार पता चला कि उर्दू (जिसे उस ज़माने में रेख़्ता, हिंदी या दक्कनी कहा जाता था) में यूं भी शायरी हो सकती है.
    देखते ही देखते उर्दू शायरी की पनीरी तैयार हो गई, जिन में शाकिर नाजी, नज़मउद्दीन अबूर, शदफ़उद्दीन मज़मून और शाह हातिम वगैरा के नाम अहम हैं.
    उन्हीं शाह हातिम के शागिर्द मिर्ज़ा रफ़ी सौदा हैं, जिनसे बेहतर क़सीदा निगार उर्दू आज तक पैदा नहीं कर सकी. सौदा के ही समकालीन मीर तक़ी मीर की ग़ज़ल का मुक़ाबला आज तक नहीं मिल सका. उसी दौर की दिल्ली में एक तरफ़ मीर दर्द की ख़ानक़ाह हैं, वही मीर दर जिन्हें आज भी उर्दू का सबसे बड़ा सूफ़ी शायर माना जाता है. उसी अहद में मीर हसन परवान चढ़े जिन की मसनवी 'सहर-उल-बयान' आज भी अपनी मिसाल आप है.
    यही नहीं बल्कि उस दौरान पनपने वाले 'दूसरे दर्जे' के शायरों में भी ऐसे नाम शामिल हैं जो उस ज़माने में धुंधला गए लेकिन किसी दूसरे दौर में होते तो चांद बन कर चमकते. उनमें मीर सौज़, क़ायम चांदपुरी, मिर्ज़ा ताबिल और मीर ज़ाहक वग़ैरा शामिल हैं.
    सिर्फ़ दो मुग़ल बादशाह अकबर और औरंगज़ेब का शासनकाल ही मोहम्मद शाह रंगीला के शासनकाल से लंबा था
    अंजाम
    बेतहाशा शराब पीने और अफ़ीम की लत ने मोहम्मद शाह को अपनी सल्तनत ही की तरह अंदर से खोखला कर दिया था इसीलिए उन की उम्र छोटी ही रही.
    अभी 46 ही को पहुंचे थे कि एक दिन अचानक ग़ुस्से का दौरा पड़ा. उन्हें उठाकर हयात बख़्श बाग़ भेज दिया गया, लेकिन ये बाग़ भी बादशाह की ज़िंदगी की घड़ियां लंबी नहीं कर सका और वो सारी रात बेहोश रहने के बाद अगले दिन चल बसे. उन्हें निज़ामुद्दीन औलिया की मज़ार में अमीर ख़ुसरो के बराबर में दफ़न किया गया.
    ये अप्रैल की 15 तारीख़ थी और साल था 1748. एक लिहाज़ से ये मोहम्मद शाह के लिए अच्छा ही हुआ क्योंकि इसी साल नादिर शाह के एक जरनल अहमद शाह अब्दाली ने हिंदुस्तान पर हमलों की शुरुआत कर दी थी.
    ज़ाहिर है कि बाबर, अकबर या औरंगज़ेब के मुक़ाबले मोहम्मद शाह कोई फौजी जरनल नहीं था और नादिर शाह के ख़िलाफ़ करनाल के अलावा उसने किसी जंग में सेना का नेतृत्व नहीं किया था. न ही उनमें जहांबानी व जहांग़ीर की वो ताक़त और ऊर्जा मौजूद थी जो पहले मुग़लों का ख़ासा थी. वो मर्द-ए-अमल नहीं बल्कि मर्द-ए-महफिल थे और अपने परदाता औरंगज़ेब के मुक़ाबले में युद्ध की कला से ज़्यादा लतीफ़े की कला के प्रेमी थे.
    क्या मुग़ल सल्तनत के पतन की सारी ज़िम्मेदारी मोहम्मद शाह पर डाल देना सही है? हमारे ख़्याल से ऐसा नहीं है. ख़ुद औरंगज़ेब ने अपनी कट्टर सोच, कठोर प्रशासन और बिना वजह सेना बढ़ाने से तख़्त के पांव में दीमक लगाना शुरू कर दी थी.
    जिस तरह सेहतमंद शरीर को संतुलित भोजन की ज़रूरत होती है, वैसे ही सेहतमंद समाज के लिए ज़िंदा दिली और ख़ुश तबियत इतनी ही ज़रूरी है जितनी ताक़तवर फौज. औरंगज़ेब ने तलवार के पलड़े पर ज़ोर डाला तो पड़पौते ने हुस्न और संगीत वाले पर. नतीजा वही निकलना था जो सबके सामने है.
    ये सब कहने के बावजूद प्रतिकूल हालात, बाहरी हमलों और ताक़तवर दरबारियों की साज़िशों के दौरान मुग़ल सल्तनत की बिखरी हुई चीज़ों को संभालकर रखना ही मोहम्मद शाह की सियासी कामयाबी का सबूत है. उनसे पहले सिर्फ़ दो मुग़ल बादशाह अकबर और औरंगज़ेब ही हुए हैं जिन्होंने मोहम्मद शाह से लंबी हकूमत की. दूसरी तरफ़ मोहम्मद शाह को आख़िरी ताक़तवर मुग़ल बादशाह भी कहा जा सकता है. वरना उसके बाद आने वाले बादशाहों की हैसित दरबारियों, रोहीलों, मराठों और आख़ीर में अंग्रेज़ों की कठपुतलियों से ज़्यादा कुछ नहीं थी.
    सारी रंगीनियां और रंगरेलियां अपनी जगह, मोहम्मद शाह रंगीला ने हिंदुस्तान की गंगा जमनी तहज़ीब और कलाओं को बढ़ावा देने में जो किरदार अदा किया उसे नज़रअंदाज़ करना नाइंसाफ़ी होगी. (बीबीसी)

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Posted Date : 15-May-2018
  • जो मैकडोनाल्ड आज घर घर में जाना पहचाना नाम है, क्या आप जानते हैं कि वह कितने साल पुराना है? आज ही के दिन इसके पहले रेस्त्रां की शुरुआत हुई थी. बर्गर और फ्रेंच फाइ के सस्ते मेनु से भारत में कुछ साल पहले अपनी शुरुआत करने वाला मैकडोनाल्ड बदलते समय के स्वाद के साथ मेनु भी बदलता रहा है. 1940 में आज ही के दिन मैक और डिक मैकडोनाल्ड नाम के दो भाइयों ने मिलकर कैलिफोर्निया के सैन बर्नार्डीनो में छोटा सा रेस्त्रां खोला था. इसी का बाद में उनके कारोबारी सहयोगी रे क्रोक की मदद से दुनिया भर की मशहूर खाद्य चेन के रूप में विस्तार हुआ. रेस्त्रां की खास बात उसके दाम थे जो कि जेब पर भारी नहीं पड़ते थे. आज दुनिया भर में फैले हुए मैकडोनाल्ड के मेनु में सिर्फ बर्गर और फ्रेंच फ्राइ नहीं और भी बहुत कुछ है.
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    • 1718-जेम्स पकल ने मशीनगन का पेटेन्ट कराया।
    • 1776 - दुनिया में भाप से चलने वाला पहला जहाज बनाया गया। फ्रांस के एक इंजीनियर डेनिस पापिन ने भाप की शक्ति का पता लगाया जिसके 70 वर्ष बाद एक अन्य फ्रांसीसी वैज्ञानिक मार्की डोज़ेफऱा ने भाप का जहाज बनाया। जहाज मे भाप की शक्ति का प्रयोग जल यातायात के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति थी। 
    • 1941-इंग्लैण्ड के पहले जेटयान ने उड़ान भरी।
    • 1995 - एलीसन गारग्रीब्स बिना आक्सीजन सिलीडंर के एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली पहली महिला बनीं।
    • 1999 - कुवैती सरकार द्वारा महिलाओं को संसदीय चुनावों में मताधिकार का हक प्रदत्त।
    • 2001 - इटली में दक्षिणपंथी गठबंधन को बहुमत।
    • 2002 - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक पर प्रतिबंधों का अनुमोदन किया।
    • 2003 - इराक युद्ध में अमेरिकी सेनाओं के कमांडर टामी फ्रैक्स के खिलाफ ब्रूसेल्स की अदालत में युद्ध सम्बन्धी मुकदमा दायर।
    • 2005 - 20 साल के बाद कनाडा में भारत का विमान उतरा।
    • 2008 - श्रीलंका सरकार ने आतंकवादी संगठन लिट्टे पर प्रतिबंध दो साल के लिए बढ़ाया। भारतीय मूल की मंजूला सूद ब्रिटेन में मेयर बनने वाली पहली एशियाई महिला बनीं। 
    • 1817 -प्रख्यात विद्वान और धार्मिक नेता  देवेन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म हुआ। 
    • 1907 - महान क्रांतिकारी सुखदेव का जन्म हुआ। 
    • 1923 -भारतीय हास्य अभिनेता  जॉनी वॉकर का जन्म हुआ। 
    • 1933 - भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन का जन्म हुआ। 
    • 1965 -बालीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित नेने का जन्म हुआ। 
    • 1991 - श्रीमती एडिथ क्रेसन का निधन हुआ, जो फ्रांस की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 
    • 2010 - राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व भारत के उपराष्ट्रपति  भैरोंसिंह शेखावत का निधन हुआ।  
    • 1859 - फ्रांसीसी भौतिक रसायनज्ञ पियरे क्यूरी का जन्म हुआ, जिन्हें उनकी पत्नी मैडम क्यूरी के साथ 1903 में भौतिकविज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला। इन्होंने आर्थिक कठिनाइयों से जूझते हुए भी हार नहीं मानी, तथा दोनों ने रेडियम तथा पोलोनियम नामक तत्वों की खोज की।  (निधन-19 अप्रैल 1906)
    • 1803   ब्रिटिश अभियंता  सर आर्थर थॉमस कॉटन का जन्म हुआ, जिन्होंने जीवन भर जल संचयन के लिए नहरें, बांध आदि का निर्माण किया और दक्षिण भारत में हज़ारों लोगों को अकाल से बचाया तथा अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने में योगदान दिया। (निधन- 14 जुलाई 1899)
    • 1992- अमेरिकी भौतिक शास्त्री  रॉबर्ट मॉरिस पेज का निधन हुआ, जिन्होंने पल्स राडार तकनीक का आविष्कार किया। उन्होंने इस क्षेत्र में 65 पेटेंट प्राप्त किए जिन्हें आज नौ-परिवहण, मौसम-विज्ञान, खगोलशास्त्र आदि में इस्तेमाल किया जाता है। ( जन्म-2 जून 1903)
    • 1715-अंग्रेज़ अन्वेषक  थॉमस सेवरी का निधन हुआ, जिन्होंने भाप से चलने वाले जल पम्प का निर्माण किया और 1698 में उसे पेटेन्ट कराया। वर्ष 1649 में उन्होंने कांच की प्लेट को पॉलिश करने का तरीका खोजा। (जन्म-1650)।
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Posted Date : 14-May-2018
  • आज ही के दिन 1992 में भारत ने तमिल टाइगर्स के नाम से मशहूर श्रीलंकाई विद्रोही संगठन एलटीटीई पर प्रतिबंध लगा दिया था. संयुक्त राष्ट्र और भारत समेत 32 देशों ने उसे आतंकवादी संगठन करार दिया.
    2009 में श्रीलंका की सरकार ने तमिल विद्रोहियों के साथ करीब 26 सालों तक चले संघर्ष के खत्म होने का एलान किया. लेकिन संगठन के अंतरराष्ट्रीय तार अभी सक्रिय हैं. भारत ने गैरकानूनी गतिविधियों संबंधी अधिनियम के तहत एलटीटीई पर 14 मई 1992 को प्रतिबंध लगा दिया था. तब से भारत प्रतिबंध को हर दो साल पर बढ़ाता रही है. एलटीटीई पर यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका में भी प्रतिबंध है.
    अलगाववागदी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम की कोशिश थी श्रीलंका में उत्तरी और पूर्वी इलाके को स्वतंत्र देश बनाना. 1980 के दशक की शुरुआत से ही श्रीलंका लगातार बढ़ते हिंसक जातीय संघर्ष का सामना कर रहा था. श्रीलंका में संघर्ष बढ़ने के साथ साथ भारत में शरणार्थियों की भीड़ भी बढ़ रही थी. जिसके चलते 1987 में भारत और श्रीलंका के बीच शांति की बहाली के लिए समझौता हुआ. समझौते के तहत भारतीय शांति सेना को श्रीलंका में शांति कायम करने में मदद करनी थी. इसका मकसद था लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम(एलटीटीई) जैसे श्रीलंकाई तमिलों और श्रीलंकाई सेना के बीच गृहयुद्ध खत्म कराना.
    भारतीय सेना वहां शांति बहाली के लिए गई थी, लेकिन जब उसी के खिलाफ उग्रवादियों ने हमला कर दिया तो उन्हें बल प्रयोग करना पड़ा. नतीजा यह हुआ कि लिट्टे भारतीय सैनिकों को दुश्मन की तरह देखने लगा. भारतीय सेना के तमिल टाइगर्स के साथ तीन हफ्ते तक चले संघर्ष में कामयाबी हासिल हुई और जाफना प्रायद्वीप से एलटीटीई के पांव उखड़ गए. हालांकि भारतीय सेना की इसी कार्रवाई का बदला लेने के लिए एलटीटीई ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मानव बम के जरिए हत्या कर दी.
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    • 1575 -अंगोला देश पुर्तगाली साम्राज्यवादियों के अधिकार में चला गया। पुर्तगाल के क़बज़े से पहले तक यह क्षेत्र गिनी देश का एक भाग था
    • 1948 -जायोनी विचारधारा के मुख्य नेता डेविड बिन गोरियन ने फि़लिस्तीन देश के आधे भाग पर ज़ायोनी शासन के गठन की घोषणा की। 
    • 1973-अमेरिका ने स्काईलैब-1 की शुरूआत की जो उनका पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान था।
    • 1999 - पाकिस्तानी पत्रकार जनम सेठी की पत्रिका फ्राइडे टाइम्स की जब्ती, सदी का आखिरी विश्व कप क्रिकेट की लॉडर्स (इंग्लैंड) में शुरुआत।
    • 2004 - डेली मिरर नामक पत्रिका ने ईराक में युद्धबंदियों पर कथित अत्याचार को दर्शाने वाली झूठी तस्वीरों के प्रकाशन के लिए ब्रिटेन से माफी मांगी।
    • 2006 - पूर्व कम्यूनिस्ट नेता गिओर्गिओ नैपोलितानो इटली के नए राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित। न्यूयार्क टाइम्स के प्रबंध सम्पादक और पुलित्जर पुरस्कार विजेता ए.एम. रोसेंथल का 84 वर्ष की अवस्था में निधन। चीन ने कला के स्तर पर चल रही जालसाजी से बचने के लिए एक आयोग का गठन किया।
    • 2007 - जापान ने अपने शांतिवादी संविधान में संशोधन सम्बन्धी विधेयक को मंजूरी दी।
    • 2008 - टाइम्स एनआईई ने इंटरनेशनल न्यूजपेपर मार्केटिंग एसोसियेशन (इनमा) अवार्ड-2008 जीता।
    • 2010- भारत-रूस के बीच रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, हाइड्रोकार्बन, व्यापार एवं निवेश आदि में 22 समझौते हुए। 
    • 1936 - भारतीय अभिनेत्री वहीदा रहमान का जन्म हुआ। 
    • 1923 - भारतीय फि़ल्मों के प्रसिद्ध निर्माता व निर्देशक मृणाल सेन का जन्म हुआ।  
    • 2010-ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मराठी कवि  वृंदा करंदीकर का निधन हुआ। 
    • 2011- किसान नेता  महेन्द्र सिंह टिकैत का निधन हुआ। 
    • 1918-अमेरिकी चिकित्सक लार्स फ्रेड्रिक निल्सन  का जन्म हुआ, जिन्होंने सन् 1963 में पहले मानव फेफड़ों के प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों के दल का नेतृत्व किया। अगले वर्ष 1964 में जानवर से मानव में फेफड़े का प्रत्यारोपण किया। (निधन-19 फरवरी 2003
    • 1863-अमेरिकी गणितज्ञ  जॉन चाल्र्स फील्ड का जन्म हुआ। जिन्होंने गणित में मेडल देने का विचार प्रस्तुत किया जिसे उनके नाम पर फील्ड मेडल कहा जाता है। इसे गणित का नोबेल माना जाता है। (निधन-9 अगस्त 1932)
    • 1899-रसायनज्ञ लार्स फ्रेड्रिक निल्सन का निधन हुआ,  जिन्होंने 1879 में स्कैन्डियम के आक्साइड, स्कैन्डिया की खोज की। (जन्म-27 मई 1840)
    • 1983-अमेरिकी भौतिक रसायन शास्त्री और धातुकर्मी जॉन चिपमैन का निधन हुआ,  जिन्होंने भौतिक रसायन विज्ञान के सिद्धांतों का तरल धातु तथा पिघले लोहे और धातुमल पर अध्ययन करने में इस्तेमाल किया।
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Posted Date : 13-May-2018
  • वे भारत के तीसरे राष्ट्रपति तथा प्रमुख शिक्षाविद थे. आज ही के दिन 1967 में उन्होंने भारत के राष्ट्रपति का पद संभाला था.
    बात हो रही है भारत के तीसरे राष्ट्रपति डॉक्टर जाकिर हुसैन की. वह भारत के प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति थे. तीन मई 1969 को असामयिक मृत्यु के कारण वह राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. वह 1957 से 1962 तक बिहार के राज्यपाल और 1962 से 1967 तक भारत के उपराष्ट्रपति भी रहे. उन्हें वर्ष 1963 मे भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
    डॉ जाकिर हुसैन का जन्म हैदराबाद में हुआ था. लेकिन बाद में उनके पिता उत्तर प्रदेश के शहर कायमगंज रहने आ गए. डॉक्टर हुसैन यहीं बड़े हुए. भारत में शैक्षिक ढांचे को खड़ा करने में उनका अहम योगदान रहा. वह अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री के लिए जर्मनी के बर्लिन विश्वविद्यालय गए और लौट कर 1920 में उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की स्थापना में खास योगदान दिया तथा इसके उपकुलपति बने. स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात उन्होंने विभाजन के दौरान सख्तियां झेल चुके अलीगढ़ विश्वविद्यालय के उपकुलपति का पद संभाला. महात्मा गांधी के निमन्त्रण पर वह प्राथमिक शिक्षा के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष भी बने, जिसकी स्थापना 1937 में स्कूलों के लिए गांधीवादी पाठ्यक्रम बनाने के लिए हुई थी.
    वे भारतीय प्रेस आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अन्तरराष्ट्रीय शिक्षा सेवा तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी जुड़े रहे. 1956-58 में वह संयुक्त राष्ट्र संगठन यूनेस्को की कार्यकारी समिति में भी रहे.

    • 1913-पहला चार इंजन का वायुयान बना और उड़ा।
    • 1890- निकोला टेस्ला को इलेक्ट्रिक जेनरेटर के लिए पेटेन्ट जारी किया गया।
    • 1918 - भारत ने राजस्थान के पोखरण में दो परमाणु परीक्षण किये।
    • 1995 - चेल्सी स्मिथ मिस यूनिवर्स 1995 बनीं।
    • 1998 - अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने परमाणु परीक्षण के विरोध में भारत के खिलाफ कड़े प्रतिबंध की घोषणा की, जापान ने भारत को दी जाने वाली सहायता पर रोक लगायी, ट्रिनडाड एवं टोबैगो की सुन्दरी बेंडी फि़ट्ज विलियम मिस यूनिवर्स 1998 बनीं।
    • 1999 - जापानी छात्र के नागुयी विश्व की सात सर्वोच्च चोटियों पर चढऩे वाला दुनिया का सबसे कम उम्र (25 वर्षीय) का पर्वतारोही बना।
    • 2000 - मिस इंडिया लारा दत्ता ने साइप्रस में सम्पन्न प्रतियोगिता में मिस यूनीवर्स -2000 का खिताब जीता।
    • 2003 - रियाद में आत्मघाती हमलों में 29 व्यक्ति मारे गये।
    • 2008 - पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के सभी नौ मंत्रियों ने जजों की बहाली के मुद्दे पर इस्तीफ़ा दिया।
    • 2010 - भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट को 2010 के निवानो शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 
    • 1905 - भारत के पूर्व राष्ट्रपति फख़़रुद्दीन अली अहमद का जन्म हुआ। आपात स्थिति की घोषणा के कारण इनका कार्यकाल काफ़ी अलोकप्रिय रहा।
    • 2001-अंग्रेज़ी के उत्कृष्ट भारतीय लेखकों में से एक आर. के. नारायण का निधन हुआ, जिनकी किताब मालगुडी डेज ने काफी लोकप्रियता हासिल की थी।  
    • 1857- ब्रिटेन के जीवाणु विज्ञानी सर रॉनल्ड रोस का जन्म हुआ, जिन्हें मादा ऐनोफेलीज मच्छर में मलेरिया परजीवी की खोज करने के लिए सन् 1902 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला। (निधन-16 सितम्बर 1932)
    • 1893-  अमेरिकी मनोवैज्ञानिक हेनरी एलेक्ज़ेण्डर म्यूरे का जन्म हुआ,  जिन्होंने मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास पर सिद्धांत दिया जिसके अनुसार मनुष्य का व्यक्तित्व उसकी जन्मजात आवश्यकताओं तथा उसके भौतिक और सामाजिक पर्यावरण से उसके परस्पर सम्बन्धों पर निर्भर करता है। (निधन-23 जून 1988)
    • 1878- अमेरिका के महान वैज्ञानिकों में से एक  जोजफ़़ हेनरी का निधन हुआ, उन्होंने टेलीग्राफ के विकास में मदद की, तथा विद्युत संबन्धी कुछ सिद्धांत दिए। (जन्म-17 दिसम्बर 1797)
    • 1884- अमेरिकी आविष्कारक  साइरस हॉल मैक्काॉरमिक का निधन हुआ, जिन्होंने पहली व्यावसायिक रूप से सफल कटाई मशीन का निर्माण किया। सन् 1831 में साइरस ने जनता के सामने अपनी मशीन प्रदर्शित की तथा 4 फीट के पट्टे को काटा। सन् 1834 में उन्होंने उसे पेटेन्ट कराया।  (जन्म-15 फरवरी 1809)।
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Posted Date : 12-May-2018
  • 12 मई का इतिहास एक ऐसी रुसी महिला से जुड़ा है जो 1927 में भारत की ओर आकर्षित हुईं और जहाज पर सवार हो कर यहां पहुंच गई. जानिए कि उन्होंने क्या किया. ये कहानी है यूजीन पीटरसन की. इनका जन्म रूस में 12 मई के दिन 1899 में हुआ था. 15 साल की उम्र में उन्होंने रवीन्द्र नाथ टैगोर की और योगी रामचक्र की किताबें पढ़ी और उनसे वह इतनी आकर्षित हुईं कि भारत आने की चाह उनके मन में पैदा हुई.
    1927 में वो भारत आने के लिए जहाज पर सवार हुई और उन्होंने अपने लिए एक ऐसा नाम चुन लिया जो भारतीय लगता था. उन्होंने खुद को इंद्रा देवी कहना शुरू किया. वह पहली ऐसी विदेशी महिला थीं जो तिरुमलैई कृष्णमाचार्य की योग छात्रा बनी और फिर योग शिक्षक के रूप में दुनिया के कई देशों में गई. इतना ही नहीं रिगा में पैदा हुई यूजीन उर्फ इंद्रा ने कुछ हिन्दी फिल्मों में भी काम किया.
    मशहूर योग गुरू कृष्णमाचार्य ने भी उन्हें तभी छात्रा के रूप में स्वीकार किया जब मैसूर के महाराज ने खुद उनके लिए अनुरोध किया. 1938 में इंद्रा देवी पहली विदेशी योगी बनी. जितनी भी चुनौतियां गुरू ने उनके लिए रखी वो सब उन्होंने पूरी कीं. जब इंद्रा देवी का भारत छोड़ने का मौका आया तो कृष्णमाचार्य ने खुद उनसे कहा कि वह योग शिक्षक के रूप में काम कर सकती हैं. उन्होंने चीन, अमेरिका, सहित अर्जेंटीना में योग शिक्षा दी.
    1982 में वह अर्जेंटीना चलीगई. 1987 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय योग फेडरेशन का अध्यक्ष बनाया गया.
    102 साल की उम्र में साल 2002 में उनकी ब्यूनस आयर्स में मौत हुई.
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    • 1816-अमेरिका में पहली छपाई मशीन ईजाद हुई।
    • 1945 -पहली बार स्ट्रेप्टोमाइसिन का सफलतापूर्ण प्रयोग मानव पर किया गया।
    • 1964 -कराची में ऊर्दू मीडियम सांइस कॉलेज की आधारशिला रखी गयी। इस कॉलेज की आधार शिला पाकिस्तान के तत्कालीन फ़ील्डमार्शल अय्यूब ख़ान ने रखी थी। यह पाकिस्तान का पहला कालेज है जिसमें इंटरमीडियट से एमएससी की पढ़ाई ऊर्दू भाषा में होती थी और छात्र छात्राओं की संख्या की दृष्टि से पाकिस्तान का यह सबसे बड़ा कॉलेज था। उर्दू सीडियम साइंस कॉलेज की एक महत्तवपूर्ण संस्था लेखन और अनुवाद का एक विभाग है जो अब तक विज्ञान की विभिन्न पुस्तकों को प्रकाशित कर चुकी है।
    • 1999 - रूस के उपप्रधानमंत्री सर्गेई स्तेपनिश कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त, अमेरिकी वित्तमंत्री रोबर्ट रूबिन का अपने पद से इस्तीफ़ा।
    • 2002 - मिस्र, सीरिया और सऊदी अरब ने पश्चिम एशिया मामले में शांति समझौते की इच्छा जताई।
    • 2007 - पाकिस्तान के कराची शहर में हिंसा।
    • 2008 - जजों की बहाली के मुद्दे को लेकर कोई समझौता न होने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ ने साझा सरकार से हटने का निर्णय लिया। चीन में आए भीषण भूकम्प से हज़ारों लोग मारे गये।
    • 2010 - बिहार के चर्चित बथानी टोला नरसंहार मामले में भोजपुर के प्रथम अपर जि़ला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने तीन दोषियों को फांसी तथा 20 को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। 
    • 1875 - कृष्णचन्द्र भट्टाचार्य - प्रसिद्ध दार्शनिक, जिन्होंने हिन्दू दर्शन पर अध्ययन किया।
    • 1895 - जे. कृष्णमूर्ति, एक दार्शनिक तथा आध्यात्मिक विषयों के बड़े ही कुशल एवं परिपक्व लेखक थे। 
    • 2008 - विजय तेंदुलकर, भारतीय नाटक और रंगमंच के विकास में अग्रणी 
    • 1910 -  अंग्रेज़ रसायनज्ञ डोरोथी हॉज्किन मिस्र का जन्म हुआ,  जिन्हें एक्स किरणों की सहायता से जीव विज्ञान से संबन्धित अहम् अणुओं की संरचनाओं पर कार्य के लिए वर्ष 1964 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला। (निधन-29 जुलाई 1994)
    • 1863 - रूसी भू रसायनज्ञ तथा खनिज विज्ञानी  व्लादिमिर इवानोविच वरनेड्स्की का जन्म हुआ,  जो भू-रसायन तथा जैव भू रसायन के संस्थापक भी थे। नूस्फेयर अर्थात मानव के दिमाग द्वारा नियंत्रित जैवमंडल को प्रचलित करने वाले वे पहले व्यक्ति थे। (निधन-6 जनवरी 1945) 
    • 1994- अमेरिकी रसायनज्ञ और टेफ्लॉन (यह पॉलीटेट्राफ्लोरोइथाइलीन का ट्रेडमार्क नाम है) के अन्वेषक रॉय जे. प्लंकेट का निधन हुआ, । टेफ्लॉन आज धात्विक बरतनों में जंगरोधी के रूप में काम आता है। यह रेडियोधर्मी वस्तुएं बनाने के काम आता है। (जन्म- 26 जून 1910)
    • 1884- फ्रांसीसी रसायनज्ञ और शिक्षाविद्  चाल्र्स एडॉल्फ वर्ट्ज़ का निधन हुआ,  जो कार्बनिक नाइट्रोजन यौगिकों, हाइड्रोकार्बन तथा ग्लाइकॉल पर अध्ययन करने के लिए जाने जाते हैं। (जन्म 26 नवम्बर 1817)
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Posted Date : 11-May-2018
  • आज का दिन एक ऐसे साहित्यकार के नाम है जिसने कहानी दुनिया में सनसनी फैला दी. उनके नाम से बदनाम कहानियों का एक कलेक्शन है. आज है सआदत हसन मंटो का जन्मदिन, टोबा टेकसिंह, खोल दो, ठंडा गोश्त जैसी एक से एक कहानियां दुनिया को देने वाले सआदत हसन मंटो आज ही के दिन 1912 में भारत के समराला में पैदा हुए.
    फिल्म, रेडियो, स्क्रिप्ट राइटिंग, पत्रकारिता ऐसा कोई काम नहीं जो मंटो ने नहीं किया हो. उनकी कहानियों के करीब 22 संग्रह प्रकाशित हुए हैं. इसके अलावा उनके नाम पर एक नॉवेल, पांच रेडियो प्ले और निबंधों के तीन संग्रह और दो संग्रह निजी स्कैचेस के हैं.
    भारत और पाकिस्तान के अलग होने से पहले ब्रिटिश इंडिया में मंटो पर छह बार अश्लीलता का मुकदमा चला और पाकिस्तान में तीन बार. लेकिन उन्हें कभी दोषी साबित नहीं किया जा सका.
    काली सलवार जैसी उनकी कई कहानियां हैं जो सीधे मन मस्तिष्क को भेदती हैं. उन्हें पढ़ने वाला इन कहानियों को भूल नहीं सकता. वो पाठक के दिमाग में काफी समय तक घूमती रहती हैं.
    1936 में मंटो अलीगढ़ से मुंबई आए और उन्होंने एक फिल्म पत्रिका तसव्वुर के लिए लिखना शुरू किया. इसके अलावा दो फिल्मों के लिए मंटो ने डायलॉग भी लिखे. आठ दिन, चल चल रे नौजवान और मिर्जा गालिब जैसी फिल्मों के लिए लिखे उनके स्क्रीनप्ले काफी मशहूर भी हुए. 1948 में मंटो ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया.
    उनके मशहूर स्कैच पाकिस्तान के अफाक नाम के अखबार में प्रकाशित हुए थे. इनमें अशोक कुमार, नरगिस, इस्मत चुगताई, नूरजहां, मोहम्मद अली जिन्ना जैसे कई मशहूर लोगों के स्कैच शामिल थे.
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    • 1947- एक्रॉन की बी.एफ. गुडरिक कम्पनी ने ट्यूब रहित टायर बनाए।
    • 1995 - संयुक्त राष्ट्र महासभा के कक्ष में 24 दिन तक चले सम्मेलन की समाप्ति पर परमाणु अप्रसार संधि को अनिश्चित काल के लिए स्थायी बना दिया गया।
    • 1998-भारत ने राजस्थान के पोकरण में तीन परमाणु परीक्षण किये। 
    • 2000 - दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जन्मी आस्था भारत का एक अरबवां बच्चा घोषित।
    • 2001 - संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रक्षेपास्त्र रक्षा प्रणाली को भारत का समर्थन, अमेरिकी संसद ने संयुक्त राष्ट्र की देय राशि रोकी।
    • 2002 - बांग्लादेश में नौका दुर्घटना में 378 लोग मरे।
    • 2005 - बगलिहार परियोजना पर भारत-पाक मतभेदों को निपटाने हेतु विश्व बैंक ने तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त किया।
    • 2007 - इस्रायल ने हमास से जुड़ी रिफ़ॉर्म एवं चेंज पार्टी को गैर-क़ानूनी घोषित किया।
    • 2008 - दक्षिणी वजीरिस्तान में नाटो सेना ने हमला किया। न्यूयार्क के कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विश्व का पहला जिनेटिकली माडिफ़ाइड मानव भ्रूण तैयार किया।
    • 2010 -  भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक खंड़पीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पंचायत और स्थानीय चुनाव में राज्य सरकार को आरक्षण देने का अधिकार है। 
    • 1912 -  कहानीकार और लेखक सआदत हसन मंटो का जन्म हुआ।  मंटो फि़ल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। 
    • 1918 - अमेरिकी भौतिकशास्त्री रिचर्ड फिलिप्स फाइनमैन का जन्म हुआ । उन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के वैज्ञानिकों में सबसे प्रतिभाशाली माना जाता है। उन्होंने उपपरमाण्विक कणों के जटिल व्यवहार को समझाने के लिए फाइनमैन चित्र दिए। उन्हें क्वान्टम इलेक्ट्रोडायनामिक्स पर कार्य करने के लिए वर्ष 1965 में नोबेल पुरस्कार मिला। (निधन-15 फरवरी 1988)
    • 1924-ब्रिटेन के खगोल भौतिकशास्त्री एंटनी हेविश का जन्म हुआ, जिन्होंने पल्सर की खोज की। पल्सर ब्रह्माण्डीय पिण्ड होते हैं जिनसे नियमित रूप से रेडियो तरंगें निकलती हैं। इसके लिए उन्हें 1974 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
    • 1686 -जर्मन भौतिकशास्त्री ओटो वॉन ग्वेरिके का निधन हुआ, जिन्होंने 1654 में निर्वात (वैक्यूम) बनाने के लिए पहला पिस्टन हवा पम्प बनाया। उन्होंने दहन तथा श्वसन क्रिया में हवा का महत्व समझाया। (जन्म 20 नवम्बर 1602)
    • 1956 -अमेरिकी खगोलशास्त्री वाल्टर (सिडनी) ऐडम्स का जन्म हुआ, जो मुख्यत: सूर्य धब्बों तथा तारों की गतियों से जुड़े स्पेक्ट्रमी अध्ययन करने के लिए जाने जाते हैं। (जन्म-20 दिसम्बर 1876)
    • महत्वपूर्ण दिवस- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस।
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Posted Date : 10-May-2018
  • आज ही के दिन 1994 में नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. लोकतांत्रिक चुनावों के बाद नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुने गए. दक्षिण अफ्रीका की राजधानी प्रेटोरिया में जब मंडेला ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो उस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए दुनिया भर के नेता मौजूद थे. पूरे अफ्रीका में जश्न का माहौल था. अपने भाषण के अंत में मंडेला ने कहा, "कभी नहीं, कभी नहीं और कभी नहीं यह खूबसूरत धरती कभी दूसरों के उत्पीड़न को अनुभव करेगी. अब स्वतंत्रता का राज होगा. मानवता के इससे बेहतर उपलब्धि के मौके पर सूरज कभी नहीं डूबेगा. ईश्वर अफ्रीका को आशीर्वाद दे."
    मंडेला का जन्म 1918 में देश के दक्षिण पूर्वी हिस्से में हुआ. उन्होंने 1943 में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (एएनसी) में कदम रखा. उनकी मदद से 1961 में पार्टी की सैनिक टुकड़ी बनी. लेकिन 1964 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और राजद्रोह और साजिश के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई. इस कैद के 27 में से 18 साल मंडेला ने रोबेन आइलैंड जेल में बिताए. बाद में यह जेल स्वतंत्रता का प्रतीक बना.
    अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और पैन अफ्रीकी कांग्रेस पर लगे प्रतिबंध हटने के नौ दिन बाद 11 फरवरी 1990 को मंडेला को रिहाई मिली. चार महीने पहले उनके अन्य साथियों को रिहा किया जा चुका था लेकिन मंडेला की रिहाई पर एक मत नहीं बन पा रहा था. इससे पहले रिहाई के कई सशर्त प्रस्ताव वह ठुकरा चुके थे.
    10 मई 1994 को वह दक्षिण अफ्रीका के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पहले राष्ट्रपति बने. अपने वादे के अनुसार उन्होंने 1999 में राष्ट्रपति पद छोड़ दिया और 1995 में स्थापित नेल्सन मंडेला चिंल्ड्रन्स फंड के लिए काम करने लगे. 5 दिसंबर 2013 को उनका देहांत हो गया.
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    • 1860-जर्मन वैज्ञानिकों ने सीजिय़म तत्व की खोज की घोषणा की।
    • 1994 - दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला द्वारा प्रिटोरिया में एक ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की गई।
    • 1999 - पेनिसिलन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सर एडवर्ड इब्राहम की मृत्यु।
    • 2001 - भारत व ताजिकिस्तान ने संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए, घाना में फ़ुटबाल मैच के दौरान हिंसा, 130 मरे।
    • 2005 - लाहौर-अमृतसर बस सेवा शुरू करने पर भारत और पाकिस्तान सहमत।
    • 2006 -  नोबेल पुरस्कार से सम्मानित आस्कर एरियास ने दुबारा कोस्टारिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की। इसरो के अध्यक्ष जी. माधवन नायर और नासा के प्रशासक माइकेल ग्रिफिऩ ने चन्द्रमा पर भेजे जाने वाले भारत के चन्द्रयान 1 पर दो अमेरिकी वैज्ञानिक उपकरण लगाने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। भारत में सऊदी अरब के पहले राजदूत शेख़ मुहम्मद इब्न ऊमान अल मुलहेम का 105 वर्ष की आयु में निधन।
    • 2007 - अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने कार्य स्थली पर होने वाले भेदभाव पर रिपोर्ट जारी की।
    • 2008 - लेबनान में ईरान समर्थित विद्रोही संगठन हिजबुल्ला ने राजधानी बेरुत के मुस्लिम इलाके पर क़ब्ज़ा करने का दावा किया। 
    • 1905 - बांग्ला और हिन्दी फि़ल्मों के प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और अभिनेता पंकज मलिक का जन्म हुआ। 
    • 2002 - जाने-माने शायर कैफ़ी आज़मी का निधन हुआ। 
    • 1830 - फ्रांसीसी रसायनशास्त्री फ्रैन्कॉइस मैरी रॉउल्ट का जन्म हुआ, जिन्होंने विलयन पर नियम दिए जिन्हें राउल्ट्स के नियम के नाम से जाना जाता है। इससे घुले हुए पदार्थ का आण्विक भार ज्ञात करना सम्भव हुआ। (निधन-1 अप्रैल 1901) 
    • 1901- आयरिश भौतिकशास्त्री और एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफर  जॉन डेसमन्ड बर्नल का जन्म हुआ, जिन्होंने ठोस यौगिकों की परमाण्विक संरचनाओं का अध्ययन किया। उन्होंने आण्विक जीवविज्ञान में भी अनुसंधान किए। (निधन-15 सितम्बर 1971)
    • 1910 -इटली के रसायनज्ञ स्टैनिस्लाओ कैनिज़ैरो का निधन हुआ, जिन्होंने आण्विक भार तथा परमाण्विक भार में अंतर बताया। सन् 1853 में इन्होंने कैनिज़ैरो अभिक्रिया की खोज की। (जन्म-13 जुलाई 1826)
    • 1829 -अंग्रेज़ चिकित्सक तथा भौतिकशास्त्री थॉमस यंग का निधन हुआ, जिन्होंने प्रकाश का तरंग सिद्धांत दिया और प्रकाश के व्यतिकरण का अध्ययन किया। (जन्म-13 जून 1773)
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Posted Date : 09-May-2018
  • आज ही के दिन 1994 में नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. लोकतांत्रिक चुनावों के बाद नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुने गए. दक्षिण अफ्रीका की राजधानी प्रेटोरिया में जब मंडेला ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली तो उस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए दुनिया भर के नेता मौजूद थे. पूरे अफ्रीका में जश्न का माहौल था. अपने भाषण के अंत में मंडेला ने कहा, "कभी नहीं, कभी नहीं और कभी नहीं यह खूबसूरत धरती कभी दूसरों के उत्पीड़न को अनुभव करेगी. अब स्वतंत्रता का राज होगा. मानवता के इससे बेहतर उपलब्धि के मौके पर सूरज कभी नहीं डूबेगा. ईश्वर अफ्रीका को आशीर्वाद दे."
    मंडेला का जन्म 1918 में देश के दक्षिण पूर्वी हिस्से में हुआ. उन्होंने 1943 में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (एएनसी) में कदम रखा. उनकी मदद से 1961 में पार्टी की सैनिक टुकड़ी बनी. लेकिन 1964 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और राजद्रोह और साजिश के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई. इस कैद के 27 में से 18 साल मंडेला ने रोबेन आइलैंड जेल में बिताए. बाद में यह जेल स्वतंत्रता का प्रतीक बना.
    अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और पैन अफ्रीकी कांग्रेस पर लगे प्रतिबंध हटने के नौ दिन बाद 11 फरवरी 1990 को मंडेला को रिहाई मिली. चार महीने पहले उनके अन्य साथियों को रिहा किया जा चुका था लेकिन मंडेला की रिहाई पर एक मत नहीं बन पा रहा था. इससे पहले रिहाई के कई सशर्त प्रस्ताव वह ठुकरा चुके थे.
    10 मई 1994 को वह दक्षिण अफ्रीका के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पहले राष्ट्रपति बने. अपने वादे के अनुसार उन्होंने 1999 में राष्ट्रपति पद छोड़ दिया और 1995 में स्थापित नेल्सन मंडेला चिंल्ड्रन्स फंड के लिए काम करने लगे. 5 दिसंबर 2013 को उनका देहांत हो गया.
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    • 1882-स्टैथेस्कोप की डिज़ाइन के लिए विलियम एफ. फोर्ड को पेटेंट जारी किया गया।
    • 1944-पहला नेत्र बैंक न्यूयॉर्क शहर में खुला।
    • 2000 - जाफना प्राय:द्वीप के एलीफेंट दर्रे पर कब्ज़े के लिए लिट्टे के साथ हुए संघर्ष में श्रीलंका के 358 सैनिक मारे गये।
    • 2002 - कराची विस्फोट में पाकिस्तान के ही संगठन का हाथ होने के संकेत।
    • 2004 - चेचेन्या में एक विस्फोट में वहां के राष्ट्रपति अखमद कादरोव का निधन।
    • 2005 - मास्को में रूस द्वारा द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी सेना पर विजय की 60वीं वर्षगांठ के जलसों में भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भाग लिया।
    • 2008 - अमेरिका ने पाकिस्तान को 8.1 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता देने से इंकार किया।
    • 2010 - भारत की वंदना शिवा को विकासशील देशों में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग देने के लिए वर्ष 2010 के सिडनी शांति पुरस्कार के लिए चुना गया। उन्हें चार नवंबर को सिडनी ओपेरा हाउस में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। 
    • 1540 -  उदयपुर, मेवाड़ में शिशोदिया राजवंश के राजा महाराणा प्रताप का जन्म हुआ। 
    • 1866 - स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म हुआ। 
    • 1986 - माउंट एवरेस्ट, हिमालय पर पहुंचने वाले सर्वप्रथम व्यक्ति तेनजि़ंग नोर्गे का निधन हुआ। 
    • 1998 - प्रसिद्ध भारतीय गजल गायक और अभिनेता तलत महमूद का निधन हुआ।   
    • 1850-  अमेरिकी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तथा उद्योगपति ऐडवर्ड वेस्टन का ब्रिटेन में जन्म हुआ, जिन्होंने वेस्टन इलेक्ट्रिकल इन्स्ट्रूमेंट कम्पनी की स्थापना की। उन्होंने इलेक्ट्रोप्लेटिंग डायनमो का आविष्कार किया। उन्होंने 1875 में डायनमो तथा निकल प्लेटिंग एनोड को पेटेन्ट कराया। (निधन-20 अगस्त 1936)
    • 1845- स्वीडन के वैज्ञानिक, इंजीनियर तथा अन्वेषक  कार्ल गुस्टाफ पैट्रिक डी लैवल का जन्म हुआ, जिन्होंने उच्च गति की टर्बाइन का विकास किया। वर्ष 1877 में इन्होंने उच्च गति के सेन्ट्रीफ्यूगल क्रीम सेपरेटर का निर्माण किया जो मक्खन उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज थी। (निधन-2 फरवरी 1913)
    • 1850- फ्रांसीसी रसायनज्ञ  जोसफ लुइस गे लुसैक का निधन हुआ, जिन्होंने गैसों पर अनुसंधान किया। इन्होंने बताया कि जल का निर्माण करने में हाइड्रोजन और आक्सीजन गैसें 2 और 1 के अनुपात में परस्पर संयोग करती हैं। (जन्म-6 दिसम्बर 1778)
    • 1931- अमेरिकी भौतिकशास्त्री अल्बर्ट अब्राहम माइकेलसन का निधन  हुआ, जिन्होंने प्रकाश की गति का सही मापन किया और स्पेक्ट्रोस्कोपिक और मेट्रोलोजिकल जांच में कार्य किया तथा परिशुद्धदर्शी उपकरण के लिए 1907 में उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। (जन्म-19 दिसम्बर 1852)
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Posted Date : 08-May-2018
  • मिस्र के पिरामिड और ममी में हमेशा से दुनिया भर की दिलचस्पी रही है. ममी को लेकर पश्चिमी देशों में तमाम क़िस्से-कहानियां चलन में हैं. इन पर कई फ़िल्में भी बनी हैं.
    ममी के बारे में और जानने के मकसद से कई तरह की रिसर्च और खोजबीन चलती रहती है. हाल ही में प्राचीन मिस्र के राजा तूतेनख़ामेन को लेकर एक नई खोज की गई है. जिसके बाद मिस्र के अधिकारियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. अधिकारियों के मुताबिक तूतेनख़ामेन के मकबरे में कोई गुप्त कमरा नहीं है.
    इससे पहले मिस्र के अधिकारी ये दावा करते रहे थे कि इस युवा राजा के 3,000 साल पुराने मकबरे की दीवार के पीछे एक गुप्त कमरा है. एक थ्योरी में कहा गया था कि तूतेनख़ामेन के मकबरे में एक गुप्त चेंबर है जिसमें रानी नेफरतीती का मकबरा हो सकता है. कई लोगों का मानना है कि रानी नेफरतीती तूतेनख़ामेन की मां थी. इस छिपे हुए मकबरे को खोजने का काम तब शुरू हुआ था, जब ब्रिटिश पुरातत्वविद निकोलस रीवेस को प्लास्टर के नीचे दरवाज़ा होने के कुछ सबूत मिले थे.
    2015 में छपे निकोलस रीवेस के रिसर्च पेपर 'द बुरियल ऑफ़ नेफरतीती' के मुताबिक़ रानी नेफरतीती के लिए भी एक छोटा मकबरा बनाया गया था और उनके अवशेष भी इसी मकबरे के अंदर हो सकते हैं. नेफरतीती के अवशेष कभी मिल नहीं सके, लेकिन उनके बारे में जानने की कोशिश हमेशा होती रही.
    रानी नेफरतीती की एक तीन हज़ार साल पुरानी मूर्ति आज भी मौजूद है, जो कि प्राचीन मिस्र में उनकी पहचान को और भी पुख्ता करती है.
    ये भी माना जाता है कि रानी के पति फ़राओ अख़नातन की मौत और उनके बेटे के गद्दी पर बैठाने के बीच का जो वक्त था उस दौरान रानी ने मिस्र पर शासन किया था.
    कहा जाता है कि उन्होंने अपने पति के साथ ईसा पूर्व 1353 से लेकर ईसा पूर्व 1336 तक शासन किया था.
    महारानी नेफरतीती और फ़राओ अख़नातेन का नाम मिस्र के प्राचीन इतिहास से इस कारण मिटा दिया गया था क्योंकि अख़नातन ने अनेक मिस्री देवताओं की पूजा के स्थान पर केवल एक देवता यानी सूर्य देवता की पूजा शुरू कराई थी.
    पुरातत्वविद निकोलस के सनसनीखेज पेपर सामने आने के बाद कई और भी बाते सामने आईं जिससे गुप्त कमरा होने के दावे को बल मिला.
    मिस्र के अधिकारियों ने भी कह दिया था कि उन्हें नब्बे फ़ीसदी तक यकीन है कि तूतेनख़ामेन के मकबरे में एक और गुप्त चेंबर है.
    मकबरे की रिसर्च टीम के हेड डॉक्टर फ्रांसेस्को पोरसेली ने कहा, "ये बात कुछ हद तक थोड़ा निराश करने वाली है कि तूतेनख़ामेन के मकबरे के पीछे कुछ नहीं मिला, लेकिन दूसरी तरफ मुझे ये भी लगता है कि ये एक अच्छा विज्ञान है." उनकी शोहरत इस बात को लेकर भी ज़्यादा है क्योंकि तूतेनख़ामेन की कब्र लगभग सही सलामत अवस्था में मिली थी.
    साल 1922 में ब्रिटिश पुरातत्वविद होवार्ड कार्टर ने तूतेनख़ामेन के मकबरे की खोज की थी. तूतेनख़ामेन की जो ममी मिली थी उससे पता चला कि मौत के समय उनकी उम्र महज़ 17 साल थी. आठ या नौ साल की उम्र में उन्हें राजा की गद्दी मिल गई थी. तूतेनख़ामेन की मौत को लेकर अलग-अलग किस्से हैं. कोई कहता है कि उनकी हत्या की गई, तो कोई कहता है कि शिकार के दौरान घायल होने के बाद उनकी मौत हुई थी. जब तूतेनख़ामेन की क़ब्र को खोदने का काम चल रहा था, उस दौरान इस मिशन से जुड़े कई लोगों की मौत की ख़बर आई थी.
    पुरातत्वविद होवार्ड का ये मिशन 1922 के दौरान चल रहा था. इसे 'वैली ऑफ़ किंग्स' की खोज कहा गया था. जब कई लोगों की संदिग्ध मौत के बाद इस मिशन में पैसे लगाने वाले ब्रिटिश रईस लॉर्ड कार्नारवॉन की भी मच्छर काटने से मौत हो गई, तो इसे फराओ तूतनख़ामेन के श्राप का नतीजा बताया गया. (bbc)

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Posted Date : 08-May-2018
  • आज का दिन द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास में अहम दिन है. आठ मई 1945 को जर्मनी के आत्मसमर्पण के साथ छह साल चला युद्ध यूरोप में समाप्त हुआ. तीस अप्रैल 1945 को जर्मन तानाशाह हिटलर के आत्महत्या करने के बाद आठ मई को जनरल आल्फ्रेड योडल ने बिना शर्त आत्मसमर्पण के कागजों पर हस्ताक्षर कर दिए. आत्मसमर्पण मसौदे पर हस्ताक्षर फ्रांस के शहर रेंस में हुए.
    द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत सितंबर 1939 में जर्मनी द्वारा पौलैंड पर हमले के साथ हुई. 1933 में अडोल्फ हिटलर के शासक बनने के साथ ही जर्मनी प्रथम विश्व युद्ध में मिली बेइज्जती का बदला लेने और दोबारा शक्तिशाली राष्ट्र बनने की कोशिश में जुट गया. प्रथम विश्व युद्ध में हार के बाद जर्मनी को वारसा की संधि पर जबरन हस्ताक्षर करना पड़े थे. इसके कारण उसे अपने कब्जे वाला बहुत सारा क्षेत्र छोड़ना पड़ा था. अपनी सेना सीमित करनी पड़ी और दूसरे देशों को प्रथम विश्व युद्ध में हुए नुकसान का भुगतान देना पड़ा था.
    1939 से 1945 तक चलने वाले द्वितीय विश्व युद्ध में 61 देशों की थल, जल और वायु सेनाएं शामिल थीं. इस युद्ध में विश्व दो हिस्सों, मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र में बंट गया. पोलैंड पर जर्मनी के आक्रमण के बाद फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और ब्रिटेन, अमेरिका और योवियत संघ समेत अन्य मित्र देशों ने फ्रांस का साथ दिया. दुनिया की आबादी का लगभग अस्सी फीसदी हिस्सा द्वितीय विश्व युद्ध में प्रभावित हुआ. इस युद्ध में करीब सात करोड़ जानें गई जिनमें बहुत बड़ा हिस्सा नागरिकों का था.
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    • 1847 -इंग्लैण्ड के रॉबर्ट डब्ल्यू. थॉमसन के नाम रबर टायर के लिए पेटेन्ट ज़ारी किया गया।
    • 1886- कोका कोला पहली बार अटलान्टा में जैकब फार्मेसी में बेचा गया। इसके आविष्कारक थे जॉन स्टिथ पेम्बर्टन।
    • 1945 - मित्र राष्ट्रों की सेनाओं के समक्ष जर्मनी का आत्मसमर्पण।
    • 1999 - बेलग्राद स्थित चीनी दूतावास पर नाटो द्वारा प्रक्षेपास्त्रों से हमला।
    • 2000 - भारतीय मूल के 69 वर्षीय लॉर्ड स्वराजपाल ब्रिटेन के चौथे सबसे बड़े विश्वविद्यालय ब्रिटिश यूनीवर्सिटी के कुलपति नियुक्त।
    • 2001 - अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य नियंत्रण बोर्ड से भी बाहर।
    • 2002 - पाकिस्तान दौरा रद्द कर न्यूजीलैंड की टीम स्वदेश लौटी।
    • 2004 - श्रीलंका के मुरलीधरन ने 521 विकेट लेकर सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने का रिकार्ड बनाया।
    • 2006 - संयुक्त राज्य अमेरिका पाकिस्तान को आधुनिकतम पारम्परिक शस्त्र प्रणाली देने पर सहमत।
    • 2010 - छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में ताड़मेटला हमले के एक माह बाद बीजापुर- भोपालपट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर सीआरपीएफ के बख्तरबंद वाहन को बारूदी सुरंग विस्फोट कर उड़ा दिया। इस घटना में आठ जवान शहीद हो गए। विस्फोट में वहां से गुजऱ रहे दो नागरिक भी घायल हो गए। 
    • 1929 - भारत की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी का जन्म हुआ। 
    • 1847- जर्मन अन्वेषक  आस्कर हैमरस्टीन का जन्म हुआ,  जिन्होंने सिगार का निर्माण किया, थिएटर बनाए। उनका जन्म स्टेटिन (पोलैण्ड) में हुआ, पर फिर वे 1863 में न्यूयॉर्क चले गए जहां उन्होंने सिगार के कारखाने में काम किया और खुद के बनाए सिगार बनाए। फिर उन्होंने सिगार रोलिंग मशीन तथा थिएटर के डिजाइन बनाए। (निधन-1 अगस्त 1919)
    • 1786- अंग्रेज़ अन्वेषक  थॉमस हैन्कॉक का जन्म हुआ, जिन्होंने ब्रिटिश रबर उद्योग की नींव रखी। उनका मुख्य आविष्कार था मैस्टिकेटर (कूचने का साधन)। यह रबर को टुकड़े तथा शीट बनाने में काम आता है। (निधन-26 मार्च 1865)
    • 1794- फ्रांसीसी वैज्ञानिक ऐन्टनी लॉरेन्ट लैवाइज़े का निधन हुआ, जो आधुनिक रसायन विज्ञान के जनक के रूप में जाने जाते हैं। वे महान प्रयोगविद् थे जिन्होंने अपने खज़ाने से एक बड़ी-सी प्रयोगशाला बनाई थी, और वहां वायु पर अनुसंधान किए। (जन्म-26 अगस्त 1743)
    • 1915-अमेरिकी अन्वेषक  होरैस वाइमैन का निधन हुआ, जिन्होंने वस्त्र उद्योग में तथा लूम से सम्बन्धित 260 पेटेन्ट प्राप्त किए। उन्हें उनका पहला पेटेन्ट 29 अक्टूबर 1867 में लूम के लिए प्राप्त हुआ। (जन्म-27 नवम्बर 1827) 
    • महत्वपूर्ण दिवस- विश्व प्रवासी पक्षी दिवस,  रेड क्रॉस दिवस।
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Posted Date : 07-May-2018
  • ''अगर मुझे संसद में 15 मिनट बोलने का मौक़ा दे दिया जाए तो प्रधानमंत्री बैठ तक नहीं पाएंगे.''
    - राहुल गांधी
    ''वे 15 मिनट बोलेंगे, ये भी बहुत बड़ी बात है. और मैं बैठ नहीं पाऊंगा, ये सुनकर मुझे याद आता है, क्या सीन है. लेकिन इस चुनाव अभियान के दौरान कर्नाटक में, आपको जो भाषा पसंद हो, उसमें. हिंदी, अंग्रेज़ी या आपकी माता जी की मातृभाषा में आप 15 मिनट, हाथ में कागज़ लिए बिना कर्नाटक की आपकी सरकार की अचीवमेंट, सिद्धियां, 15 मिनट कर्नाटक की जनता के सामने बोल दीजिए.''
    - नरेंद्र मोदी
    ''जब कभी मोदी जी को डर लगता है, वो व्यक्तिगत हमला करते हैं. वो उसके बारे में ख़राब बोलते हैं. ग़लत बोलते हैं. मुझमें और उनमें यही फ़र्क है. वो भारत के प्रधानमंत्री हैं और मैं उन पर व्यक्तिगत हमला नहीं करूंगा.''
    - राहुल गांधी
    ''1948 में पाकिस्तान से युद्ध जीता...जनरल थिमय्याजी के नेतृत्व में. लेकिन उस पराक्रम के बाद कश्मीर को बचाने वाले जनरल थिमय्या का उस समय के प्रधानमंत्री नेहरू और उस समय के रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने बार-बार अपमान किया था.''
    - नरेंद्र मोदी
    ये पिछले दो-चार दिन में कर्नाटक चुनावी अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी दल कांग्रेस के सबसे बड़े नेता के बयान हैं. लेकिन मोदी के थिमय्या वाले बयान पर अलग से विवाद हो गया है.
    मोदी ने कर्नाटक के कलबुर्गी में कहा था, ''और इसी कारण जनरल थिमय्या को अपने पद से सम्मान के ख़ातिर इस्तीफ़ा देना पड़ा था.''
    ''भारत और चीन की घटना आज भी इतिहास की तारीख़ों में दर्ज है...और उनके साथ फ़ील्ड मार्शल करियप्पा के साथ क्या व्यवहार किया गया.''
    ''इतना ही नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक के बाद, हमारे वर्तमान सेना नायक...कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता, उन्होंने यहां तक कह दिया कि ये तो गुंडे हैं, गुंडे हैं.''
    लेकिन मोदी ज़रा चूक कर गए. और कांग्रेस ने इसे तुरंत लपका. रणदीप सुरजेवाला ने लिखा, ''जनरल थिमय्या 8 मई 1957 में सेना प्रमुख बने थे और 1947 में नहीं, जैसा कि आपने कहा है. वी के कृष्णा मेनन 1947 से 1952 के बीच राजदूत रहे थे न कि रक्षा मंत्री जैसा कि आपने कहा.''
    ये सच है कि वी के कृष्णा मेनन साल 1947 से 1952 के बीच लंदन में भारत के राजदूत और 1957 से 1962 के बीच रक्षा मंत्री रहे.
    उनके के एस थिमय्या के साथ रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे और साल 1959 में थिमय्या ने नेहरू को इस्तीफ़े की पेशकश भी की. हालांकि, नेहरू ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार करने से मना कर दिया और इसे वापस लेने के लिए मनाया भी.
    नेहरू और थिमय्या के रिश्ते
    थिमय्या साल 1948 के कश्मीर युद्ध में शामिल रहे क्योंकि उन्हें वेस्टर्न आर्मी कमांडर के एम करियप्पा ने जम्मू कश्मीर का जीओसी नियुक्त किया था.
    उन्होंने 1 नवंबर, 1948 को ज़ोजी ल में अपनी अगुवाई में हमला कराया और कबाइली-पाकिस्तानी सैनिकों को भगाने में कामयाबी पाई.
    चुनाव में किसके साथ है कर्नाटक का मुसलमान
    कर्नाटक: न हवा, न लहर चुनाव में हावी है जाति
    साल 1953 में नेहरू ने उन्हें कोरिया में युनाइटेड नेशंस के न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रिएशन कमिशन में नियुक्त किया, जिसे एक अहम पद माना जाता था.
    थिमय्या की वहां काफ़ी तारीफ़ हुई. साल 1954 में लेफ़्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्हें सिविल सर्विस के लिए पद्माभूषण से नवाज़ा गया. उस वक़्त कांग्रेस सत्ता में थी.
    साल 1957 में थिमय्या को नेहरू ने ही सेना प्रमुख के रूप में चुना और उनसे सीनियर दो लोगों को नज़रअंदाज़ किया गया. ये लेफ़्टिनेंट जनरल संत सिंह और कुलवंत सिंह थे.
    वो साल 1961 तक इस पद पर रहे और 1962 के युद्ध से 15 महीने पहले रिटायर हुए. जुलाई 1964 में उन्होंने साइप्रस में कमांडर ऑफ़ यूएन फ़ोर्स का कमांडर बनाया गया, जहां दिसंबर 1965 में उनका निधन हुआ.
    करियप्पा की कहानी
    करियप्पा साल 1953 में भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ़ के रूप में रिटायर हुए. साल 1949 में उन्हें नेहरू सरकार ने भारतीय सेना का पहला भारतीय कमांडर-इन-चीफ़ बनाया गया.
    रिटायरमेंट के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया जहां वो 1956 तक रहे. अप्रैल 1986 में उन्हें राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने फ़ील्ड मार्शल पद से नवाज़ा.
    पिछले साल कांग्रेसी नेता संदीप दीक्षित ने कहा था, ''पाकिस्तान एक ही चीज़ कर सकता है कि इस तरह के ऊलजुलूल चीज़ें करें, बयानबाज़ी करें. ख़राब तब लगता है जब हमारे आर्मी चीफ़ सड़क के गुंडे की तरह बयान देते हैं. पाकिस्तान को देने हैं तो दें वो तो हैं ही ऐसे.''
    बाद में उन्होंने इस बयान के लिए माफ़ी मांगी. और राहुल गांधी ने इसे गलत बताया था. उन्होंने कहा था, ''ये बिलकुल गलत है, आर्मी चीफ़ी के बारे में राजनीतिक लोगों को कमेंट करने की ज़रूरत नहीं है.'' (बीबीसी)

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