राजपथ - जनपथ

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छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : टमाटर के अच्छे दिन...
30-Nov-2021 6:20 PM (72)

टमाटर के अच्छे दिन...

वैसे तो डीजल के भाव के कारण ठंड में भारी आवक होने के बावजूद सब्जियों के दाम घटे नहीं हैं पर टमाटर कुछ ज्यादा ही ऊपर चढ़ा हुआ है। ठीक क्वालिटी का टमाटर 60 रुपये से कम नहीं जो अमूमन दूसरे वर्षों में 10-12 रुपये में मिल जाता था। दुर्ग और सरगुजा संभाग में टमाटर की बंपर पैदावार होती है। इस बार भी हुई है। बीते साल की घटना याद होगी जब धमधा इलाके में टमाटर इसी सीजन में 1 रुपये किलो मिल रहा था, यानि लागत भी नहीं निकल रही थी। जशपुर के फरसाबहार, पत्थलगांव और लुड़ेग इलाके में खेतों और सडक़ों पर फेंके गये टमाटर की तस्वीर तो देश और देश के बाहर भी सुर्खियों में रही है। पर इस बार टमाटर उत्पादकों के अच्छे दिन हैं। यूपी, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि में छत्तीसगढ़ से टमाटर बड़ी मात्रा में निर्यात हो रहे हैं। व्यापारी किसानों के पास आकर 25 से 30 रुपये में ले जा रहे हैं। सरगुजा से हर दिन लगभग 70 लाख रुपये का टमाटर यूपी जा रहा है। छत्तीसगढ़ के भी थोक विक्रेताओं को किसान 25-30 रुपये में ही बेच रहे हैं लेकिन उपभोक्ता के हाथ में आते-आते यह 60 रुपये हो जा रहा है। यानि किसान ही नहीं, थोक व्यापारी और चिल्हर विक्रेताओं को इस समय टमाटर अच्छा मुनाफा दे रहा है।

शराब के समर्थक कांग्रेसी..

रामानुजगंज विधायक बृहस्पति सिंह का कोई नया ऑडियो-वीडियो वायरल होता है तो अब कोई सनसनी महसूस नहीं होती। करीब आधे मिनट के नये वायरल वीडियो में वे शराब के समर्थन में बोल रहे हैं। वे सभा में कथित रूप से कह रहे हैं कि मैं नहीं कहता शराब मत पियो, इसमें कोई बुराई नहीं है। संपत्ति है तो पियो, मगर घर में। शाम को पियो और सुबह फिर अपने काम में लग जाओ।

अब, इसमें उन्होंने कौन सी नई बात कह दी। अक्टूबर महीने में तो महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंडिया के वायरल वीडियो में भी इसी तरह की बात थी। वे भी कह रही थीं, घर में पियो।

जिस तरह से बीच-बीच में कांग्रेस के नेता, मंत्री शराब की तरफदारी करते हुए बयान देते हैं, उससे तो शराब पीने वालों को निश्चिंत रहना चाहिये कि कभी यहां शराबबंदी भी हो पायेगी। हां, घर में पीने की सलाह जरूर चिंताजनक है। इसलिये कि घरों में पीने का अभियान चलाकर कहीं जगह-जगह चल रहे चखना सेंटर्स को बंद न करा दिये जायें। इससे चलाने वाले दुकानदारों की ही नहीं, रोजाना वसूली करने वाले आबकारी वालों की कमाई भी मारी जायेगी।

कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक

प्रोफेशनल कांग्रेस, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शशि थरूर हैं- में ऐसे लोगों को सदस्य बनाया जाता है जो विभिन्न क्षेत्रों में आईकॉन हो। पिछले महिने पूर्वी जोन प्रभारी ज़ारिता लेत्फलांग जब छत्तीसगढ़ आई थीं तो क्रिकेटर राजेश चौहान को उन्होंने अपनी टीम में लिया था। अब प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजन बाई ने सदस्यता ली है। छत्तीसगढ़ में पंडवानी को गांव-गांव में सुना जाता है। हर गांव में तीजन बाई को जाना भी जाता है और उनकी बड़ी प्रतिष्ठा है।आने वाले दिनों में यह कांग्रेस के लिये फायदेमंद साबित हो सकता है। सरकार की भी छत्तीसगढिय़ा छवि को संगठन के रास्ते से मजबूती मिल सकती है।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा का परिवारवाद
29-Nov-2021 5:38 PM (108)

भाजपा का परिवारवाद

वैसे तो भाजपा परिवारवाद के खिलाफ खूब बोलती है। मगर कई मौके पर तो इसके पक्ष में खड़ी दिखती है। बात निकाय चुनाव की हो रही है। भाजपा ने संभागीय चुनाव समिति घोषित की है। इसमें दुर्ग की समिति में राज्यसभा सदस्य सरोज पाण्डेय के साथ-साथ उनके सगे भाई राकेश पाण्डेय को भी रखा है। यही नहीं, राकेश, और उनकी पत्नी यानी सरोज की भाभी पार्षद चुनाव लडऩा चाहती हैं। ऐसे में अब सूची पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ नेताओं ने इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान से भी की है। प्रत्याशी की घोषणा से पहले ही पार्टी में घमासान शुरू हो गया है।

नफरत जीत गई, आर्टिस्ट हार गया

बीते 14 नवंबर को स्टैडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में होने वाला शो रद्द कर दिया गया था। अब बेंगलूरु से खबर है कि वहां पुलिस ने सांप्रदायिक सद्भाव के उल्लंघन की आशंका बताकर आयोजकों को रविवार के दिन तय शो करने की इजाजत नहीं दी। फारूकी ने खुद इस बारे में ट्वीट किया और लिखा - नफरत जीत गई, आर्टिस्ट हार गया। गुड बाय. नाइंसाफी।

फारूकी ने जिक्र किया है कि दो माह के भीतर आयोजन स्थल और दर्शकों के खतरे की आशंका के चलते उसके 12 शो रद्द हो चुके हैं। जो मजाक मैंने आज तक नहीं किया, उसके लिये मुझे जेल भेजा गया। उस शो को रद्द किया गया जिसमें सेंसर सर्टिफिकेट भी था।

यह हाल है कि कोई भी धमकी देकर किसी भी कलाकार का वजूद खत्म करने पर तुल जाये और कानून-व्वयस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी लेने वाला तंत्र अपने हाथ खड़े कर दें। फारूकी शायद अब कोई नया काम करेंगे, क्योंकि उन्होंने यह भी लिखा है कि- ‘आई थिंक, दिस इज द इंड।’

ट्रैक्टर में रजिस्ट्रेशन नंबर

एक दिसंबर से शुरू हो रही धान खरीदी को लेकर सरहदी जिलों के प्रशासन में अलग तरह की टेंशन है। फरमान है कि हर हालत में दूसरे राज्यों से आने वाला धान रोका जाये। इसके लिये तरह-तरह के उपाय सोचे जा रहे हैं। जैसे मध्यप्रदेश से लगे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में ऐसी हर ट्रैक्टर रोकी जा रही है जिनमें रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लिखा है या मिट गया है। इन ट्रैक्टरों में रजिस्ट्रेशन नंबर पुलिस खुद अपने सामने खड़े होकर लिखा रही है। ट्रैक्टरों की सूची डीलरों और आरटीओ से ले ली गई है। मालिक, संचालकों को फोन करके यह  चेतावनी दी जा रही है कि बिना नंबर प्लेट वाली ट्रैक्टर को धान खरीदी केंद्र में घुसने नहीं दिया जायेगा। पुलिस सोच रही है कि अब दूसरे राज्यों से ट्रैक्टर ने प्रवेश किया, तो इसका पता तुरंत चल जायेगा।

रेडी टू ईट से महिलाओं का बाहर होना

प्रदेश में रेडी टू ईट का काम अब स्व-सहायता महिला समूहों के हाथ छिन रहा है। यह काम राज्य बीच एवं कृषि विकास निगम को सौंपा गया है। निगम की इकाईयों में ही इसका निर्माण और वितरण का काम होगा। पर, दूसरी तरफ दावा किया जा रहा है कि इससे 15 हजार स्व सहायता समूह, जिनसे 4 लाख महिलायें जुड़ी है, उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जायेगा। समूहों ने फूड बनाने के लिये 2 से 4 लाख की मशीनें भी खरीदी हैं जो बेकार हो जायेंगी। 

खबर यह है कि निगम का नाम सिर्फ दिखावे के लिये है। निर्माण और वितरण का काम ठेके पर दिया जा रहा है जिसका लाभ किसी एक फर्म को ही मिलेगा। सवाल यही है कि जब महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने, उन्हें सशक्त बनाने की बात हो रही है तब किसी ऐसे काम को एक संस्था या फर्म को क्यों सौंपा जा रहा है? ज्ञात हो कि रेडी टू ईट तैयार भोजन है जो बच्चों, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं को सुपोषण के लिये दिया जाता है। 

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : विजय बघेल की पूछ-परख
28-Nov-2021 4:47 PM (131)

विजय बघेल की पूछ-परख

वैसे तो सीएम भूपेश बघेल, और दुर्ग सांसद विजय बघेल के आपस में चाचा-भतीजे के रिश्ते हैं। रिश्तेदारी के बाद भी दोनों के बीच राजनीतिक अदावत जग जाहिर है। दोनों के करीबी लोग एक-दूसरे का सम्मान भी करते देखे जा सकते हैं।  पिछले दिनों भाजपा के विधायक-सांसदों ने सीएम हाउस को घेरने का फैसला लिया, तो विजय बघेल थोड़े विलंब से पहुंचे, और वो सीधे सीएम हाउस पहुंच गए। उन्हें किसी ने रोका नहीं। वहां सीएम के परिवार के लोग और अन्य भी थे। जिन्होंने विजय बघेल का पूरा सम्मान किया, लेकिन विजय तो अपनी पार्टी के सांसद और विधायकों को ढूंढ रहे थे। उन्हें बताया गया कि विधायक-सांसदों को सर्किट हाउस के पास ही रोक दिया गया है। फिर विजय बघेल वहां से निकले, और अपने दल के नेताओं के साथ हुए। दूसरी तरफ, रमन सिंह, बार-बार विजय बघेल को पूछ रहे थे। उनसे जुड़े लोगों का सोचना था कि विजय बघेल की वजह से शायद कुछ अप्रिय न हो। चाहे कुछ भी हो, धरना-प्रदर्शन के दौरान विजय बघेल की काफी पूछ-परख होती रही।

सरोज समर्थकों का दबदबा

दुर्ग जिले के तीन नगर निगमों भिलाई, भिलाई-चरौदा, और रिसाली के अलावा नगर पालिका जामुल व नगर पंचायत मारो में चुनाव हो रहे हैं। मगर यहां भाजपा की बड़ी नेता सरोज पांडेय चुनावी परिदृश्य से गायब है। उन्हें पार्टी ने यूपी में प्रचार का जिम्मा दिया गया है। वो पीएम के निर्वाचन क्षेत्र बनारस में बकायदा मकान लेकर पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। निकाय चुनाव से दूर रहने के बावजूद सरोज यहां प्रत्याशी चयन में रूचि ले रही हैं। चर्चा है कि तीनों नगर निगम और पालिका में अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दिलाने की कोशिश कर रही हैं। उनके करीबी लोगों ने तो बकायदा सूची बनानी शुरू कर दी है। इससे परे सरोज विरोधी, जो कि उनकी गैर मौजूदगी से खुश थे, वो भी अब पर्यवेक्षक और प्रभारियों की सूची जारी होने के बाद से मायूस हैं। संकेत साफ है कि प्रचार से दूर रहने के बाद भी टिकट वितरण में सरोज समर्थकों का दबदबा कायम रहेगा।

ऐसा कौन सा काम है?

मोबाइल फोन पर लोगों को लगातार ऐसे संदेश मिलते हैं कि उन्हें किसी काम के लिए छांटा गया है और घर बैठे उन्हें पार्ट टाइम या फुल टाइम काम करके हर दिन 6000 से 9000 रुपये रोज तक की कमाई का वायदा किया जा रहा है। अब अगर कोई कंपनी इस तरह की तनख्वाह या मेहनताना दे रही है तो इनकम टैक्स को भी उस पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि इतनी तनख्वाह, इतनी कमाई तो बड़ी-बड़ी कंपनियों के बड़े-बड़े लोगों को भी नहीं होती। इस तरह के ढेरों संदेश रोज मिलते हैं और लोगों को तो सावधान रहना ही चाहिए, केंद्र और राज्य सरकार की साइबर ठगी पर नजर रखने वाली एजेंसियों को भी ऐसे संदेशों से होकर इन्हें भेजने वालों तक पहुंचना चाहिए और देखना चाहिए कि दुनिया में ऐसा कौन सा काम है जो घर बैठे इतनी कमाई करवाता है। रोजाना ऐसे कई-कई मैसेज आते हैं एसएमएस पर भी आते हैं और व्हाट्सएप पर भी। इसके पहले कि लोग ठग लिए जाएं, सरकारी एजेंसियों को ध्यान देना चाहिए।

इस साल इतने पीएम आवास बनने थे?

सन् 2021-22 के लिये प्रधानमंत्री आवास योजना के जो लक्ष्य केंद्र ने दिये, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का हवाला देते हुए चली खबरों के मुताबिक उनकी संख्या 7 लाख 82 हजार हैं। यही सब तरफ नेशनल न्यूज चला।

गौरतलब है कि सन् 2018 में भाजपा सरकार के दौरान, योजना के नये नामकरण के बाद के तीन वर्षों के दौरान 3 लाख 52 हजार 106 मकान ही बन पाये थे, जबकि इसी तीन साल की अवधि का लक्ष्य 6 लाख 88 हजार 235 मकानों का था। इसी वर्ष सन् 2018 की मई माह में इस आंकड़े को जारी कर केंद्र ने बताया था कि छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री आवास निर्माण में पूरे देश में अव्वल है। यानि अपना राज्य तब अव्वल आया जब औसत 1 लाख 20 हजार से कम आवास हर साल बनाये गये। अब 2021-22 के लिये 7.81 लाख 999 मकान का लक्ष्य सुनकर हैरानी हो सकती है। वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष के लिये लक्ष्य केवल 1.57 लाख मकानों का रखा गया था, जिसे केंद्र ने रद्द किया है। उल्लेखनीय है कि मैदानी इलाकों में 1.20 लाख और पहाड़ी इलाकों में 1.30 लाख रुपये एक आवास पर खर्च किया जाता है जिसकी 40 प्रतिशत राशि राज्य को अपने फंड से करनी है। राज्य सरकार ने कई कारणों से इस अंशदान को देने में असमर्थता जताई है। 

बीपीएल परिवारों के लिये प्रधानमंत्री आवास योजना एक बड़ा सहारा है। लाखों की संख्या में लोग अपने पक्के मकान इसीलिये बना पाये। योजना इंदिराजी के नाम पर थी तो राशि कुछ कम थी। पीएम आवास योजना से लोगों ने कुछ खुद के जोड़े हुए पैसे इसमें और लगाकर टाइल्स वाले कमरे और शॉवर वाले बाथरूम तक बनाये। ग्रामीण क्षेत्रों में कारीगरों और छोटी-छोटी बिल्डिंग मटेरियल की दुकान चलाने वालों को भी फायदा मिलता रहा।

पर, अब राज्य में यह योजना ठप पड़ी है। पिछले दो साल से योजना की गति धीमी होने की चर्चा थी लेकिन अब इस पर विवाद इसलिये बढ़ा क्योंकि इस साल का आवंटन केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि नये-नये नियम लादकर योजना को जटिल बना दिया गया। आपत्ति सीएम की ओर से आई है कि जब योजना का नाम बदला गया है तो पूरी राशि केंद्र ही दे। सेंट्रल एक्साइज और कोयले की पेनाल्टी की राशि केंद्र ने रोक रखी है। कांग्रेस का कहना है कि गरीबों को उनकी पुरानी जगह से हटाना होगा, साथ ही रेरा का पंजीयन भी जरूरी किया गया है, जबकि मध्यप्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों में इन शर्तों के बिना भी राशि जारी हो रही है। 

डॉ. रमन सिंह और दूसरे भाजपा नेताओं ने इसे राज्य सरकार की विफलता बताया है। योजना को चाहे जिस कारण से भी स्थगित करना पड़ा हो, आवासहीनों और कच्चे मकानों में रहने वालों को निराशा हो रही है। इसका असर चुनावों पर भी पड़ सकता है। राज्य में सरकार कांग्रेस की है, योजना केंद्र के नाम से चल रही है। किस पर असर होगा, टटोलना पड़ेगा।

धान खरीदी के लिये जन सुनवाई!

उद्योग स्थापित करने के लिये किस तरह से अधिकारी किस तरह साठगांठ कर ग्रामीणों को अंधेरे में रखकर पैतरेबाजी करते हैं, यह मुलमुला (जांजगीर) में डोलोमाइट खदान के लिये रखी गई पर्यावरणीय जन सुनवाई से सामने आया। जन सुनवाई जिस जगह पर रखी गई वहीं पर धान खऱीदी केंद्र है। मुनादी की शर्त पूरी करनी थी, सो वहां अफसरों ने कोटवारों से कहा कि धान खरीदी एक दिसंबर से शुरू हो रही है, किसी को आपत्ति है तो आकर बता दे। किसानों को भला धान खरीदी शुरू होने में क्या दिक्कत हो सकती है। वे तो इसका इंतजार ही कर रहे हैं। इसलिये लोग किसी तरह की आपत्ति करने पहुंचे नहीं। अधिकांश लोगों को पता ही नहीं कि खदान के नाम पर जनसुनवाई होने वाली है। भीड़ नहीं पहुंची। अधिकारियों ने जनसुनवाई के लिये निर्धारित समय तक वहां बैठने की औपचारिकता पूरी की और लौट गये। दो चार लोगों को बैनर लगा देखकर पता चला कि सुनवाई किस बात की हो रही है तो उन्होंने अपनी आपत्ति जरूर दर्ज कराई। अधिकारियों ने सफाई दी कि अखबारों में तो विज्ञापन छपवाया गया था, लोग नहीं आये तो क्या करें।

शत-प्रतिशत कोविड का दूसरा डोज

प्रदेश में कोरोना से बचाव के लिये हर दिन लगभग एक लाख टीके लगाये जा रहे हैं। रायगढ़, महासमुंद जैसे जिलों में पहला डोज शत-प्रतिशत लगाया जा चुका है, पर दूसरे डोज की धीमी गति को लेकर चिंता है। ऐसे में खबर है कि सरायपाली ब्लॉक में शत-प्रतिशत दूसरी डोज लगाई जा चुकी है। यह लक्ष्य 26 नवंबर को हासिल किया गया। ठीक एक माह पहले 26 अक्टूबर को सरायपाली कस्बे में दूसरे डोज का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया गया। सरायपाली ओडिशा से नजदीक है। वहां कल ही एक साथ 25 स्कूली बच्चों को कोरोना से संक्रमित पाया गया। देश के कई राज्यों में एक बार फिर संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। तब दूसरी डोज में गति लाने की जरूरत सभी महसूस कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : एक तीर से दो निशाना
27-Nov-2021 5:55 PM (105)

एक तीर से दो निशाना

नगरीय निकाय चुनाव में एक बार फिर सीएम भूपेश बघेल, और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल आमने-सामने हैं। सीएम के विधानसभा क्षेत्र पाटन के भिलाई-चरौदा निगम में भी चुनाव हो रहे हैं। और यहां भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को जिताने का जिम्मा बृजमोहन अग्रवाल पर छोड़ दिया है। बृजमोहन को भिलाई-चरौदा का प्रभारी बनाया गया है।

रमन सरकार में भिलाई-चरौदा निगम अस्तित्व में आया था। तब पार्टी ने वहां चुनाव में सरोज पाण्डेय, प्रेम प्रकाश पाण्डेय, विजय बघेल जैसे बड़े नेताओं के बजाए बृजमोहन अग्रवाल को चुनाव प्रभारी बनाया था। उस समय भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे। बृजमोहन के बेहतर चुनाव प्रबंधन के चलते विपरीत माहौल में भाजपा ने भिलाई-चरौदा में फतह हासिल की। मगर इस बार हालात बदल गए हैं। भूपेश बघेल सीएम हैं, और भाजपा विपक्ष में हैं।

भाजपा के चुनाव प्रभारियों की नियुक्तियों को कुछ लोग पार्टी में अंदरूनी खींचतान से जोडक़र भी देख रहे हैं। पार्टी के बृजमोहन विरोधी खेमा मानता है कि बृजमोहन के सीएम भूपेश बघेल से बेहतर तालमेल है। ऐसे में संगठन के हावी खेमे ने बृजमोहन को बीरगांव के बजाए भिलाई-चरौदा में उलझाकर एक तीर से दो निशाना साधा है। चाहे कुछ भी हो, बृजमोहन के भिलाई-चरौदा की कमान संभालने से वहां का चुनाव दिलचस्प हो गया है। 

बारदानों की जमाखोरी...

धान खरीदी के लिए इस बार फिर बारदानों का संकट सामने आ गया है। सरकार ने किसानों से उनका पुराना बारदाना पिछली बार से 3 रुपये अधिक में खरीदने का निर्णय लिया है। इस बार 15 रुपये की जगह 18 रुपये मिलेंगे। पर बाजार के हाल कुछ अलग है। जगह-जगह से खबर आ रही है की कुछ चतुर व्यापारियों ने पहले से बारदाने खरीद कर अपने पास जमा कर लिए हैं और इसे किसानों को 30-35 और 40 रुपये में बेच रहे हैं। सरकार ने ऐसी राशन दुकानों को निलंबित करने का निर्णय लिया है जिन्होंने अपने खाली बारदाने जमा नहीं किये, लेकिन उन व्यापारियों का क्या, जिन्होंने बोरों की जमाखोरी कर ली है। अभी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। किसानों को धान बेचना है इसलिए मजबूरी में उन्हें यह नुकसान भी झेलना ही है।

सीएम-पीएम मुलाकात की यादें

छत्तीसगढ़ के मुखिया भूपेश बघेल पूरे मंत्रिमंडल के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने की तैयारी में है। राज्य के मुख्य सचिव ने पीएमओ से समय के लिए पत्राचार भी किया है। मुख्यमंत्री बघेल उसना चावल और राइस मिलर्स की समस्याओं से प्रधानमंत्री को अवगत कराना चाहते हैं। हालांकि राज्य और केन्द्र सरकार के मुखिया के बीच कामकाज के सिलसिले में मेल-मुलाकात होती रहती है, लेकिन इस मुलाकात को लेकर सियासत गर्म है और इसे राज्य तथा केन्द्र सरकार के बीच टकराव से जोडक़र देखा जा रहा है। इसके पहले छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी और तब के प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी बाजपेयी के बीच मुलाकात को लेकर भी खूब सियासत हुई थी। स्व जोगी भी पूरे लाव-लश्कर के साथ दिल्ली गए थे। बाद में जोगी इस मुलाकात के किस्से भी सुनाय़ा करते थे। वे बताते थे कि दिल्ली पहुंचने पर स्व वाजपेयी ने समोसा-जलेबी खिलाकर सब का स्वागत किया था और काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में मामले का पटाक्षेप हो गया था। यह मामला इसलिए भी य़ाद किया जा रहा है कि राज्य के मुखिया भी प्रधानमंत्री से मुलाकात करने जा रहे हैं। ऐसे में लोगों की दिलचस्पी यह है कि जोगी-वाजपेयी की तरह इस बार भी समोसा-जलेबी का स्वाद चखने मिलेगा या फिर कुछ और। क्योंकि राज्य और केन्द्र के मौजूदा मुखियाओं के तेवर बिल्कुल अलग हैं। सियासी बयानबाजियों में तो दोनों के बीच तल्खियां किसी से छिपी नहीं है।

किसान नेताओं का फार्मूला

छत्तीसगढ़ में किसान का मसला हमेशा सुर्खियों में रहता है। दिसंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है। स्वाभाविक है कि बारदाना, सोसायटियों में अव्यवस्था सहित तमाम मुद्दे छाए रहेंगे। पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के लिए यह हॉट टॉपिक रहने वाला है। खास बात यह है कि आरोप-प्रत्यारोप लगाने वाले अधिकांश सियासतदार लाभार्थी भी होते हैं। हालांकि उनके लाभार्थी होने से कोई परहेज नहीं है। दिक्कत तब होती है, जब विपक्षी दल के नेता अव्यवस्था के खिलाफ कोई मुद्दा उठाते हैं, वैसे ही सत्ता पक्ष की ओर से धान खरीदी बिक्री का बही खाता बाहर आ जाता है। ऐसे में सियासी कारणों से ही सही मुद्दा उठाने वाले शांत हो जाते हैं। वैसे भी सिय़ासत के साथ खेती-किसानी करना भी मजबूरी है। आखिर आईटी रिटर्न में आय का स्त्रोत भी तो दिखाना पड़ता है। उधर, खेती-किसानी से आमदनी कमाने वाले विपक्ष के नेताओं ने सत्तापक्ष के बही-खाता उजागर करने के हथियार को भोथरा करने का तरीका निकाल लिया है। ऐसे नेता अब सामान्य धान के बजाए सुगंधित और महंगे धान की खेती कर रहे हैं, जिसे वे खुले बाजार में अच्छे दाम में बेच भी सकते हैं और सरकार को खेती की आमदनी की जानकारी भी नहीं मिलेगी। जिससे वे सरकार पर हमलावर भी हो सकते हैं। 

प्लेटफॉर्म टिकट फिर दस रुपये..

प्लेटफॉर्म टिकट को 50 रुपये करने का, कोरोना काल में ट्रेन किराये में बढ़ोतरी का फायदा जनता को समझा नहीं सके। अब चुनावों के लिये उलटी गिनती चल रही है। इसलिये ट्रेन का किराया भी घटाकर पहले जैसा कर दिया गया, प्लेटफॉर्म टिकट का दाम भी। इस बीच जो अतिरिक्त वसूली की गई, रेलवे ने यात्री सुविधायें बढ़ाने के लिये कितना खर्च किया, कुछ पता नहीं चला। तपस्या अधूरी रह गई।

कोरिया बचाओ मंच का आंदोलन

जिला पुनर्गठन के बाद कोरिया जिले में विरोध का सिलसिला टूट नहीं रहा है। अब सभी प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस, भाजपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने जिले के दोनों नगरीय निकाय क्षेत्र में होने वाले स्थानीय चुनावों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। बहिष्कार के इस फैसले में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी साथ देने का मन बनाया है। नागरिकों ने कोरिया बचाओ मंच का गठन भी कर लिया है। यह विरोध कितना कारगर होगा, सरकार तक इनकी बात कैसे पहुंचेगी, यह आज से शुरू हो रहे नामांकन पत्रों की बिक्री से मालूम हो पाएगा। वैसे निर्दलीय शायद ही मानें। लेकिन शासन को चाहिए कि वह इस विरोध को नजरअंदाज ना करे।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कौन-कौन हैं पैराशूट नेता ?
26-Nov-2021 5:53 PM (116)

कौन-कौन हैं पैराशूट नेता ?

बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था लेकिन बिलासपुर में स्थिति संतोषजनक नहीं थी। जिले की केवल दो सीटें तखतपुर और बिलासपुर हाथ आई। हाल में जन-जागरण अभियान में यहां पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने यह कहकर चौंका दिया कि पैराशूट उम्मीदवारों के चलते कांग्रेस को जिले में नुकसान उठाना पड़ा है। अब वह गलती नहीं दोहराई जायेगी। क्रीज वाले नेता नहीं, जमीन से जुड़े लोगों को टिकट दी जायेगी। उन्होंने इशारे में बिल्हा का नाम भी लिया जहां से नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक विधायक चुने गये हैं। यहां कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे राजेन्द्र शुक्ला को उन्होंने 25 हजार के बड़े अंतर से हराया था। बेलतरा के कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र साहू तो तीसरे स्थान पर रह गये थे। बिल्हा और बेलतरा में जोगी कांग्रेस, कांग्रेस की पराजय का एक बड़ा कारण रहा। अब दोनों ही जगह के प्रत्याशी सियाराम कौशिक और अनिल टाह, जोगी कांग्रेस छोडक़र, कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। बिल्हा और बेलतरा में कांग्रेस के दोनों चेहरे नये और युवा थे। मरकाम ने पैराशूट प्रत्याशी केवल बिलासपुर के उम्मीदवारों को कहा है या प्रदेश के दूसरी हारी हुई सीटों के लिये भी यह अभी साफ नहीं हुआ है।

टीकाकरण की रफ्तार और नये केस

गुरुवार को कोरोना से सुरक्षा के लिये 1.10 लाख वैक्सीन लगाई गई। पिछले 8-10 दिनों से रोजाना एक लाख के आसपास डोज लग रही है। पहला डोज लगवाने वालों की संख्या अब जल्द ही 90 फीसदी तक हो जायेगी। केंद्र ने नवंबर माह तक शत-प्रतिशत पहला डोज लगाने का लक्ष्य दिया है। इसके लिये घर- घर दस्तक भी दी जा रही है। अब जब माह खत्म होने में सिर्फ चार दिन शेष हैं 100 प्रतिशत पहला डोज हासिल होगा या नहीं देखना होगा। ऐसे लोग जिन्हें दोनों डोज लग चुके हैं उनकी संख्या अभी 47 प्रतिशत ही है। यह भी एक बड़ा लक्ष्य होगा। गुरुवार की रिपोर्ट देखें तो कोरोना के नये मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। रायगढ़ से 11 नये मरीजों का पता चला है।

मुंबई हमले के शहीदों के लिए

26 नवंबर 2008 को मुम्बई में हुए आतंकी हमले से जुड़ी अनेक तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैर रही हैं। इनमें से एक तस्वीर यह है जिसे यूपी के एक आईपीएस ने ट्विटर एकाउंट पर शेयर किया है।

 

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कोरोना से छोडऩी पड़ी ट्रेनिंग
25-Nov-2021 6:29 PM (117)

कोरोना से छोडऩी पड़ी ट्रेनिंग

छत्तीसगढ़ के वन अफसरों की देश की राजधानी नई दिल्ली में विभागीय ट्रेनिंग से दीगर राज्य से आए एक अफसर के कोरोना संक्रमित होने पर ट्रेनिंग छोडकऱ वापस लौटना पड़ा। छत्तीसगढ़ से करीब 9 वन अधिकारी दिल्ली और लखनऊ में माहभर की ट्रेनिंग में शामिल होने गए थे। 8 नवंबर से शुरू हुई इस ट्रेनिंग में समूचे देश से 43 डीएफओ स्तर के अफसर  हिस्सा बने थे। तकरीबन पखवाड़े भर ट्रेनिंग के बीच एक अफसर बीमार हो गए। जांच में उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। साथी अफसर की सेहत खराब होने पर बाकी की जांच की गई। इस रिपोर्ट में तकरीबन 9 अफसर कोरोना संक्रमित हो गए। इसके बाद ट्रेनिंग को रोकना पड़ा और अब अफसर वापस अपने मुख्यालय लौटकर ऑनलाइन ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे हैं। विभागीय ट्रेनिंग में गए अफसरों के प्रभार अब भी दूसरे वन अधिकारी सम्हाल रहे हैं। बताते हैं कि यह ट्रेनिंग विभागीय प्रमोशन और क्रमोन्नति के लिए जरूरी है। छत्तीसगढ़ के अफसर इसका लाभ मिलने और नई वन सुरक्षा और संपदा की जानकारी हासिल करने के लिए ट्रेनिंग में पहुंचे थे। अब प्रत्यक्ष के बजाय ऑनलाइन ट्रेनिंग करने के लिए कोरोना ने मजबूर कर दिया।

सफर ही जारी रहता है

छत्तीसगढ़ में बरस दर बरस लोग नेताओं और अफसरों के खिलाफ अदालती मामले देख-देख कर थक गए हैं। पिछली रमन सिंह सरकार के समय से कई नेताओं, और अफसरों के खिलाफ मामले दायर किए गए, और मौजूदा भूपेश बघेल सरकार के समय भी पिछली सरकार के सबसे ताकतवर कुछ अफसरों के खिलाफ केस दर्ज हुए। लेकिन इन सबका हाल देखें तो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इतने बड़े-बड़े वकील इतनी संख्या में खड़े रहते हैं की बस. और बिना किसी फैसले के अदालतों में सुनवाई ही आगे बढ़ती रहती है, उसे देखकर लोगों को लगता है कि क्या ताकतवर लोगों के मामलों में कभी इंसाफ की बारी भी आती है या फिर सुनवाई ही चलती रहती है। कुल मिलाकर सरकार की तरफ से दर्ज किए गए केस, या सरकार के खिलाफ दर्ज किए गए केस चलते ही रहते हैं, चलते ही रहते हैं, उन्हें शायद मंजिल कभी मिलती नहीं, सफर ही जारी रहता है।

फटकार कहाँ तक जाएगी?

पदयात्रा पर चर्चा के लिए शहर कांग्रेस की बुधवार को हुई बैठक में जिलाध्यक्ष गिरीश दुबे ने एक महिला नेत्री को फटकार लगाई, तो हर कोई सन्न रह गया। महिला नेत्री फूट फूटकर रो पड़ी। प्रतिमा चंद्राकर, और अमरजीत चावला ने किसी तरह महिला नेत्री को शांत कराया, और शहर जिलाध्यक्ष गिरीश दुबे को बाहर जाने कहा।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि गिरीश दुबे, सभापति प्रमोद दुबे के करीबी हैं। और उन्हें जिलाध्यक्ष बनवाने में प्रमोद दुबे की भूमिका रही है। सुनते हैं कि महिला नेत्री भी पहले प्रमोद दुबे खेमे से जुड़ी हुई थीं। बाद में वो संसदीय सचिव विकास उपाध्याय के खेमे में आ गई।

उन्हें गिरीश के न चाहते हुए भी पदयात्रा के एक क्षेत्र का प्रभारी बना दिया गया। फिर क्या था महिला नेत्री पार्टी नेताओं के बीच आपसी खींचतान की शिकार हो गई, और बैठक में फटकार सुननी पड़ी। कुछ लोग मानते हैं कि ये मामला आने वाले दिनों में तूल पकड़ेगा। क्योंकि महिला नेत्री के साथ अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ विकास उपाध्याय का खेमा गिरीश के खिलाफ मोर्चा खोल सकता है। देखना है कि आगे-आगे होता है क्या।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ऐसे निपटा निकाय चुनाव विवाद
24-Nov-2021 5:18 PM (146)

ऐसे निपटा निकाय चुनाव विवाद

नगरीय निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। विपक्षी दल भाजपा ने ऐसे अफसरों पर निगरानी रखना शुरू कर दिया है, जो कि कांग्रेस के नेताओं के करीबी माने जाते हैं। इन अफसरों के खिलाफ शिकायत की तैयारी चल रही है। चुनाव में तो अफसरों के खिलाफ शिकवा-शिकायतें  होती रहती हैं। कई बार ऐसे मौके भी आते हैं, जब आयोग के अफसर पशोपेश में पड़ जाते हैं।

ऐसा ही एक मामला वर्ष-2009 में खरसिया नगर पालिका चुनाव में भी आया था। तब खरसिया के स्थानीय विधायक, और दबंग कांग्रेस नेता नंदकुमार पटेल ने साफ शब्दों में कह दिया था कि खरसिया के रिटर्निंग ऑफिसर तहसीलदार को हटाया जाए, अन्यथा कांग्रेस चुनाव का बहिष्कार कर देगी। वहां के तहसीलदार को रमन सरकार के मंत्री अमर अग्रवाल का करीबी माना जाता था। और उनकी वजह से चुनाव में धांधली की आशंका जताई जा रही थी। मगर अमर अग्रवाल ने तहसीलदार को हटाने के पक्ष में नहीं थे, और उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था।

नंदकुमार पटेल कलेक्टर से मिलने के बाद तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त शिवराज सिंह से मिले। और रिटर्निंग ऑफिसर को लेकर अपनी शिकायतें बताई। शिवराज सिंह ने पटेल की बातें ध्यान से सुनी, और उनकी कुछ आपत्तियों को जायज माना। मगर अमर अग्रवाल को भी नाराज नहीं करना चाहते थे। लिहाजा, उन्होंने बीच का रास्ता निकाला, और आदेश दिया कि 20 हजार से अधिक आबादी वाले नगर पालिकाओं में डिप्टी कलेक्टर रिटर्निंग ऑफिसर होंगे। इसके बाद न सिर्फ खरसिया बल्कि चार और नगर पालिकाओं के रिटर्निंग ऑफिसर बदल गए। और दोनों ही नेता संतुष्ट हो गए। चुनाव बिना किसी विवाद के निपट गया।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार नगरीय निकाय चुनाव हुए तो आयुक्त डॉ. सुशील त्रिवेदी, तत्कालीन सीएस एके विजयवर्गीय के साथ हेलीकॉप्टर से पूरे प्रदेश का दौरा करते थे। उनके तामझाम, और दिशा निर्देशों से कलेक्टर हलाकान रहते थे। डॉ. त्रिवेदी के बाद पूर्व सीएस शिवराज सिंह निर्वाचन आयुक्त बने।  पूर्व सीएस शिवराज सिंह तो चुनाव से पहले सिर्फ एक बार कलेक्टर-एसपी की बैठक लेने कक्ष से बाहर निकले, और इसके बाद पूरा चुनाव कमरे में ही निपटा दिया। वो हमेशा अफसरों के मार्गदर्शन के लिए उपलब्ध रहते थे, और शिकायतकर्ताओं को भी पूरा मान देते थे। यही वजह है कि उनके कार्यकाल में प्रदेश में निकाय, और पंचायत चुनाव में कही भी विवाद की स्थिति नहीं बनी। शिवराज सिंह ने चुनाव निपटाने के तौर तरीकों से बाद के चुनाव आयुक्तों को भी सीख मिली।

बैठक में शामिल होना मजबूरी

सूरजपुर जिला भाजपा संगठन के नेताओं को शिकायत रही है कि जिले की बैठक में आने से केन्द्रीय राज्यमंत्री, और सांसद रेणुका सिंह परहेज करती हैं। रेणुका के बैठक में नहीं आने की एक प्रमुख वजह जिलाध्यक्ष बाबूलाल गोयल हैं, जो कि पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा के करीबी माने जाते हैं। रेणुका के विरोध के बाद भी बाबूलाल गोयल जिलाध्यक्ष बनने में कामयाब रहे।

बाबूलाल के अध्यक्ष बनने के बाद से रेणुका ने एक तरह से जिला पदाधिकारियों की बैठक में जाना ही छोड़ दिया था। रेणुका सिंह केन्द्र में मंत्री हैं, तो पदाधिकारी चाहते हैं कि वो बैठक में जरूर आए। पार्टी की बैठक हमेशा अग्रसेन भवन में होती रही है। लेकिन इस बार रेणुका कोई  बहाना न बना दे, इसलिए बैठक उनके प्रेम नगर स्थित बंगले में ही रख दी गई है। यह बैठक 27 तारीख को होगी। अब चूंकि घर में बैठक हो रही है इसलिए रेणुका शामिल होने से मना नहीं कर सकती हैं।

दोने का महुआ...

ननकी राम कंवर, नंदकुमार साय और स्व. अजीत जोगी जैसे नेता शराब को आदिवासियों की बर्बादी का बड़ा कारण मानते हैं। जोगी तो कहते थे कि उन्हें घर में जो पांच बोतल महुआ या चावल की शराब बनाने की छूट मिली है वह भी खत्म कर देनी चाहिये। इस पर कोशिश हुई पर जैसे ही कुछ समय के लिये इसे बंद किया गया, अंग्रेजी बेचने वाले कोचिये हावी हो गये। शराब रीति-रिवाज और व्यवहार में बना हुआ है। बस्तर, जशपुर के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में ही नहीं बल्कि शहरी समाज में भी। यदि सरकार शराबबंदी के अपने चुनावी वादे को लागू कर देगी तो होम मेड शराब की बिक्री बढ़ जायेगी। इस पर बैन लगाने का विचार वोटों के नजरिये से भी जोखिम भरा है। बिहार में नीतिश कुमार सरकार ने शराबबंदी लागू की है पर वह कामयाब नहीं हुई है। आज ही वहां के एक भाजपा सांसद का बयान आया है कि बैन हटना चाहिये। इससे शराब की अवैध खपत बढ़ी है। जिन्हे पीना है वे पुलिस की मदद ले रहे हैं। राबड़ी देवी ने कल एक वीडियो शेयर किया था जिसमें फ्लाइट से दिल्ली से पटना पहुंची बरात के कमरों को पुलिस छान रही है। शराब बिक्री बंद करना, नहीं करना, क्या करना है- सरकार समझे। बस, हम एक तस्वीर शेयर कर रहे हैं,  बस्तर की। अतिथि को दोने में ऐसे भरकर महुआ पिलाई जाती है।

खारून नदी का झाग

खारून नदी को राजधानी रायपुर की जीवनरेखा कहते हैं। इस नदी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करने की नगर निगम की योजना ठंडे बस्ते में है। कुछ दिन पहले ही इस पर ख़बर चली थी। हर महीने नगर निगम के प्रभारी पर 10 लाख रुपये जुर्माना रोपित करने का आदेश एनजीटी ने पर्यावरण मंडल को दे रखा है। पिछले कुछ दिनों से खारून नदी का पानी झाग से भरा हुआ और मटमैला है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सीएम ने भी यहां स्नान किया। पर्यावरण विभाग के अधिकारी बचाव में यह कह रहे हैं कि ठंड के दिनों में ऐसा होता है। पर वे यह भी मानते हैं कि पानी प्रदूषित है। इसी बात पर तसल्ली कर ली जाये कि खारून में कम से कम  पानी तो है, नदी सूखी नहीं है।

अनुशासित भाजपायी...

किरंदुल से विशाखापट्टनम के बीच चलने वाली ट्रेन में एचएलबी कोच की सुविधा शुरू कर दी गई है। रेलवे की की कोई सुविधा यानि केंद्र की भाजपा सरकार की उपलब्धि। लिहाजा बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने एलएचबी कोच से पहली बार सफर करने वाले यात्रियों का स्वागत किया। पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, कई पूर्व विधायक और भाजपा के अनेक नेता इस मौके पर मौजूद थे। आगे की खबर यह है कि स्टेशन में घुसने वाले सभी लोगों ने प्लेटफॉर्म टिकट कटाई। प्रेस नोट के साथ टिकट का शॉट भी शेयर किया।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : भाजपा नेताओं का तिरूपति दर्शन
23-Nov-2021 5:16 PM (198)

भाजपा नेताओं का तिरूपति दर्शन
भाजपा नेता प्रीतेश गांधी की संगठन के कर्ता-धर्ता पवन साय के साथ तिरूपति मंदिर के दर्शन करते तस्वीर वायरल हुई, तो धमतरी के भाजपा नेताओं में हलचल मच गई। सुनते हैं कि प्रीतेश धमतरी जिले की कोर कमेटी में आना चाहते हैं लेकिन क्राइटेरिया में फिट नहीं होने के कारण उन्हें नहीं रखा गया।

प्रीतेश, केन्द्र और प्रदेश संगठन के बड़े नेताओं से अपने रिश्तों का हवाला देकर दबाव बनाने की कोशिश भी की लेकिन धमतरी जिले के पदाधिकारी टस से मस नहीं हुए। चर्चा है कि प्रीतेश धमतरी सीट से विधानसभा का चुनाव लडऩा चाहते हैं। इसके  लिए वो पार्टी के भीतर जोड़-तोड़ में लगे हैं।

पीएम नरेन्द्र मोदी, जब छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी थे तब प्रीतेश ने मोदी से जान पहचान बना ली थी। इसका फायदा उन्हें मिला और जब भी मोदी छत्तीसगढ़ दौरे पर आए हैं प्रीतेश का नाम स्वागत करने वालों की सूची में जरूर रहता था। इस वजह से प्रदेश के बड़े नेता उन्हें काफी भाव देते हैं। अब पवन साय को लेकर दक्षिण भारत यात्रा में निकले हैं तो धमतरी के भाजपा नेताओं का दबाव में आना स्वाभाविक है।

हाईकोर्ट जाएगी सरकार?
फोन टैपिंग के प्रकरण में निलंबित आईपीएस रजनेश सिंह को कैट से राहत तो मिल गई है। कैट ने उनकी बहाली के आदेश दिए हैं लेकिन इस बात की संभावना कम है कि सरकार उन्हें बहाल कर दे। चर्चा है कि कैट के बहाली के आदेश के खिलाफ सरकार हाईकोर्ट का रूख कर सकती है। हालांकि इस फैसला होना बाकी है। ईओडब्ल्यू के तत्कालीन डीजी मुकेश गुप्ता के साथ ही रजनेश सिंह को भी निलंबित किया गया था। दोनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज है।

रजनेश सिंह से परे पूर्व प्रमुख सचिव बाबूलाल अग्रवाल को भी कैट ने दोबारा सेवा में रखे जाने का आदेश दिया था। बाबूलाल अग्रवाल को जबरिया रिटायर कर दिया गया था। मगर बाबूलाल अग्रवाल के मामले में केेंद्र सरकार ही कैट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट चली गई। इसके बाद तो उनकी बहाली रूक गई। इसी तरह आईपीएस के.सी. अग्रवाल को भी जबरिया रिटायर किया गया था। उनके मामले में भी कैट ने बहाली के आदेश दिए थे मगर के.सी. अग्रवाल के मामले में राज्य सरकार उदार रही, और बहाल कर दिया। अब देखना है कि रजनेश के मामले में सरकार क्या निर्णय लेती है।


तब गंवाया, अब पाया
छत्तीसगढ़ में मौजूदा भूपेश सरकार ने जिस तरीके से चिटफंड कंपनियों की संपत्ति जप्त करके उसमें पूंजी लगाने वाले लोगों को उसका कुछ हिस्सा वापस देना शुरू किया है, उससे राज्य के लाखों ठगे गए लोगों के बीच एक बड़ा भरोसा पैदा हो रहा है। यह जरूरी नहीं है कि पूरी की पूरी रकम वापस मिल जाए, लेकिन मिलना शुरू हुआ है यह भरोसा भी छोटा नहीं रहता है। एक खूबी की बात यह है कि चिटफंड कंपनियों का पूरा कारोबार 15 बरस की रमन सरकार के दौरान फैला था और इस सरकार के दौरान वह रकम वापस वसूल करके लोगों को देने का काम चल रहा है। इन दोनों बातों के फर्क को देखें तो लगता है कि किसान कर्ज माफी और धान खरीदी जैसे बड़े फैसलों की तरह चिटफंड की ठगी की रकम का कुछ हिस्सा लोगों को मिलना भी एक बड़ा फैसला साबित हो सकता है। जिन लोगों को रकम अगले विधानसभा चुनाव तक नहीं मिल पाएगी उन्हें उम्मीद तो मिलेगी ही। (rajpathjanpath@gmail.com)

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : महिलाओं पर नसबंदी का दारोमदार
22-Nov-2021 6:26 PM (116)

महिलाओं पर नसबंदी का दारोमदार

छत्तीसगढ़ में पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिये अभियान शुरू किया गया है, जो 4 दिसंबर तक चलेगा। पहले चरण में जागरूक किया जाएगा, दूसरे चरण में नसबंदी के लिये शिविर लगेंगे। पूरे देश में पुरुष नसबंदी का प्रतिशत है। कई राज्यों में यह एक प्रतिशत से भी कम है। राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में कोरोना काल के डेढ़ साल में एक भी पुरुष की नसबंदी नहीं हुई। छत्तीसगढ़ में बीते 10 साल में करीब 3.5 लाख महिलाओं ने नसबंदी कराई जिनमें से केवल 15 हजार पुरुष थे। डॉक्टर कहते हैं पुरुषों की बजाय महिलाओं की नसबंदी ज्यादा जटिल होती है, उनकी नस पेट के भीतर होती है। पुरुषों की नसबंदी करना आसान होता है। पुरुषों की सोच यह है कि उनमें नसबंदी कराने से कमजोरी आयेगी। वे परिवार चलाने के लिये दौड़-धूप और कड़ी मेहनत करते हैं। डॉक्टरों का कहना है यह भ्रांति है कि नसबंदी से कमजोरी आती है। कोरोना काल के चलते पुरुष, महिला दोनों की नसबंदी ही पिछले दो साल से प्रभावित हुई है। यह घटकर 10 से 15 प्रतिशत रह गया है। इसके पहले सन् 2014 में, तखतपुर के नसबंदी शिविर में 13 महिलाओं की एक के बाद एक मौत हो गई थी। उसके बाद लंबे समय तक नसबंदी शिविर नहीं लगे। इस बार पुरुषों को स्वास्थ्य विभाग और वालेंटियर नसबंदी के लिये कितना जागरूक कर पाते हैं, यह पखवाड़ा खत्म होने पर मालूम होगा।

कोल ब्लॉक के लिये सर्वे पर रोक

हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक आवंटन के खिलाफ कोरबा, सरगुजा, सूरजपुर जिले के आदिवासियों ने अक्टूबर माह में पदयात्रा निकाली और पैदल राजधानी पहुंचे थे। वे वापस लौटे उसके बाद ही एक कोयला खनन की मंजूरी जारी कर दी गई। पर ऐसा नहीं कि उनके विरोध का कोई असर नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ सरकार ने 1995 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में हाथी रिजर्व क्षेत्र अधिसूचित कर दिया। यहां के ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा है कि जहां खदान खुलेगी उसी से लगकर हाथी रिजर्व कैसे बनाया जायेगा। हाथी रिजर्व के लिये कोई तैयारी जमीन पर नहीं दिखी लेकिन कोल ब्लॉक के लिये सर्वे का काम शुरू हो गया। कोरबा जिले के परोगिया ब्लॉक में सर्वे के काम को ग्रामीणों ने बंद करा दिया। कहा- सर्वे के लिये ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली गई है। अभी तो सर्वे बंद हो गया है, पर क्या आवंटन के बाद सर्वे और खनन का काम आगे भी स्थानीय लोग रुकवा पायेंगे। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव की नौबत आ सकती है।

सबसे हैंडसम अफसर कौन?

वैसे तो अफसर कैसे दिखते हैं यह मायने नहीं रखता, मायने यह रखता है कि वे काम कैसा करते हैं। लेकिन फिर भी अगर छत्तीसगढ़ के अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को देखें और उनमें से आदमियों का चेहरा, कद-काठी, व्यक्तित्व याद करें कि उनमें सबसे अधिक हैंडसम कौन हैं, तो रायपुर के आईजी आनंद छाबड़ा बिना किसी विवाद के नंबर वन आते दिखते हैं। एक वक्त हिंदी फिल्मों में जिस तरह चॉकलेटी चेहरा लेकर ऋषि कपूर आए थे, उसी के सरीखा खूबसूरत चेहरा, आकर्षक व्यक्तित्व, और शानदार कपड़े पहनने के शौकीन डॉ. आनंद छाबड़ा किसी पेशेवर मॉडल, या टीवी सीरियल के कलाकार की तरह दिखते हैं। अब अखिल भारतीय सेवाओं में मॉडलिंग का कोई रिवाज नहीं है नहीं तो वह छत्तीसगढ़ के लिए एक मैडल जरूर लेकर आ सकते थे।

डीजीपी अवस्थी हटाए क्यों गए?

पुलिस विभाग अभी तक अपने पिछले डीजीपी डीएम अवस्थी के अचानक हटा दिए जाने के हडक़ंप से पूरी तरह उबरा नहीं है। बहुत से लोगों को यह समझ नहीं आ रहा है कि डीजीपी को अचानक कैसे हटा दिया गया। फिर भी पुलिस अफसरों की कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने राज्य की पुलिस को लेकर जो तेवर दिखाए थे उससे ऐसा लग रहा था कि यह अवस्थी को हटाने की जमीन बन रही है। और हुआ भी वैसा ही। लेकिन इसके पीछे वजह क्या थी, यह अलग-अलग लोगों का अलग-अलग कहना है। कुछ लोगों का यह मानना है कि अवस्थी ने पुलिस मुख्यालय के महत्व को खत्म ही कर दिया था, वहां बैठना बंद कर दिया था, और शहर के बीच ट्रांजिट हॉस्टल में एक कमरा लेकर वहीं से अपना दफ्तर चलाते थे। केंद्र सरकार की कई ऐसी वीडियो कॉन्फ्रेंस रहती थी जिनमें डीजीपी की जगह उनके दूसरे-तीसरे नंबर के मातहत बैठते थे। हालत यह हो गई थी कि डीजीपी के सहायक ही दूसरे अफसरों को जाकर वीडियो कांफ्रेंस की खबर कर देते थे कि आप ही बैठ जाइएगा।

कुछ दूसरी वजह भी सुनाई पड़ रही हैं जिनमें से एक यह है कि अपने साथी अफसरों के टेलीफोन भी अवस्थी कई-कई हफ्ते नहीं उठाते थे, और न ही कॉल बैक करते थे। एक बड़े आईपीएस अफसर का कहना था कि उनके फोन से घंटी जाने के बाद भी 20-20 दिन तक अवस्थी बात नहीं करते थे, और ऐसी जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचती थी। जो भी हो, अवस्थी का लंबा करियर बाकी है, और अगर मुख्यमंत्री उनसे संतुष्ट रहते, तो इस सरकार का पूरा कार्यकाल डीजीपी रहते हुए गुजार सकते थे। यह एक और बात है कि उपाध्याय या विश्वरंजन जैसे लंबे समय तक रहने वाले डीजीपी भी, डीजीपी रहते हुए रिटायर नहीं हुए, इस पद से हटाकर दूसरी जगह भेजे जाने के बाद ही रिटायर हुए। इसलिए पूरे कार्यकाल डीजी रहना भी आसान नहीं रहता है।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अब ये मामला सुलग रहा है
21-Nov-2021 6:36 PM (131)

अब ये मामला सुलग रहा है

प्रदेश के एक ताकतवर नेता अपने दल में घिरते जा रहे हैं। नेताजी ने अपने दल की एक महिला नेत्री को फोन कर इधर-उधर की बातें कह दी थीं। इस चर्चा को ‘छत्तीसगढ़’ ने इसी कॉलम में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कुछ प्रमुख नेताओं ने महिला नेत्री का पता लगाकर वस्तुस्थिति की जानकारी जुटाई है।

सुनते हैं कि रायपुर के पड़ोस के विधानसभा क्षेत्र की रहवासी इस महिला नेत्री ने अपने दल के कुछ नेताओं को सब कुछ सच बता दिया है। इसके बाद नेताओं ने महिला नेत्री की शिकायत प्रदेश प्रभारी तक पहुंचा दी है। नेताजी पहले भी मीटू प्रकरण में फंस चुके हैं।

उन पर करीब ढाई साल पहले एक महिला ने नेताजी पर आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाया था। उस समय तो पार्टी के रणनीतिकार नेताजी के पक्ष में सामने आ गए थे इसलिए बात दब गई। मगर इस बार अब ये मामला दल के अंदरखाने में सुलग रहा है। देखना है कि आगे-आगे होता है क्या?

खैरागढ़ की टिकट मामाजी के हाथ

खैरागढ़ उपचुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों के अंदरखाने में प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा चल रही है। भाजपा में पूर्व सीएम रमन सिंह के भांजे विक्रांत सिंह का नाम सबसे मजबूत दावेदार  के रूप में देखा जा रहा है। विक्रांत जिला पंचायत के उपाध्यक्ष हैं, और सबसे ज्यादा वोटों से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते।

विक्रांत जनपद अध्यक्ष भी रह चुके हैं। नगर पंचायत के भी अध्यक्ष रहे हैं। यानी 2004 से लगातार किसी न किसी पद पर निर्वाचित रहे हैं। संगठन के स्थानीय नेता भी उन्हें टिकट देने की वकालत कर रहे हैं।  खैरागढ़ की टिकट विक्रांत के मामाजी (रमन सिंह) के हाथ में हैं। यानी मामाजी जिसे चाहेंगे उन्हें टिकट मिलेगी।

 वैसे भी उपचुनाव विरोधी दल के लिए मुश्किल होता है। खैरागढ़ में तो अब तक चार बार उपचुनाव हुए हैं जिसमें चारों बार सत्ताधारी दल को ही जीत मिली है। ऐसे में खैरागढ़ के चुनावी इतिहास को देखते हुए रमन सिंह अपने भांजे पर दांव लगाएंगे, इसमें पार्टी नेताओं को संदेह है।

चर्चा है कि इस बार भी रमन सिंह अपने करीबी पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल को आगे कर सकते हैं। कांग्रेस में सात दावेदार हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस जाति समीकरण को देखते हुए लोधी समाज के किसी नए चेहरे को आगे कर सकती है।

जशपुर में घर वापसी अभियान..

एक बार फिर जशपुर में जूदेव परिवार का अभियान- ऑपरेशन घर वापसी शुरू हुआ है। पत्थलगांव के बसना, सरायपाली के करीब 400 परिवारों को उनके मूल धर्म में वापस लाने के लिये प्रबल प्रताप सिंह जूदेव खूंटापानी के कार्यक्रम में पहुंचे थे। जाहिर है ये आदिवासी हैं और कुछ पीढ़ी पहले ईसाई धर्म अपना चुके थे। जशपुर जिला मिशनरी कामकाज का बड़ा केंद्र है और वहां बड़ी संख्या ऐसे आदिवासियों की है जिन्होंने धर्म बदला। घर वापसी जूदेव परिवार की यूएसपी है और इसका फायदा इस राजनीतिक परिवार को तो मिलता ही है, भाजपा को लाभ पहुंचाती रही है। इस समय जब भाजपा छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे को अगले चुनाव तक विस्तारित करने की दिशा में बढ़ रही है। ऐसे में जूदेव परिवार की उसे बड़ी जरूरत है। बीते चुनाव में जूदेव परिवार की पसंद के दावेदारों के नाम काट दिये गये थे। इसके बाद स्व. युद्धवीर सिंह जूदेव का नेतृत्व के प्रति असंतोष भी झलकता रहा। इस बार?

मासूमों को ऑनलाइन पढ़ाई से क्षति?

बाल दिवस के मौके पर 14 नवंबर से 20 नवंबर तक प्रदेश की कई स्कूलों में नेत्र सुरक्षा सप्ताह के तहत बच्चों की आंखों की जांच की गई। बेमेतरा जिले का आंकड़ा आया है कि 9238 बच्चों में 330 में दृष्टिदोष का पता लगा। ये बच्चे 15 साल से कम उम्र के हैं। इन बच्चों को ब्लैक बोर्ड पर लिखे अक्षर ठीक से दिखाई नहीं देते। इतनी बड़ी संख्या को लेकर चिकित्सक हैरान हैं और अभिभावक तथा शिक्षक चिंतित। डॉक्टरों का कहना है कि  आंखों में दिक्कत की बड़ी वजह लगातार ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल फोन पर दूसरे गैजेट्स का इस्तेमाल करना हो सकता है। बेमेतरा दूसरे जिलों से हटकर नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी भी बड़ी संख्या मंददृष्टि पीडि़त बच्चे हो सकते हैं। सतर्क होना चाहिये। 

अधर श्रृंगार..

रायपुर के लोधीपारा के एक पान दुकान की तस्वीर। रोजी-रोटी तो छत्तीसगढ़ में है लेकिन दिल में अपना गांव बसा हुआ है। हां, अभी दरवाजा बंद है। तिवारी जी किसी को प्लाट दिखाने के लिये गये होंगे।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अब आंदोलन नहीं तो क्या करें...
20-Nov-2021 5:21 PM (118)

अब आंदोलन नहीं तो क्या करें...

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नाली निर्माण में 13 लाख रुपये के गबन की शिकायत की तो पहले तो उन्हें जांच के लिये मशक्कत करनी पड़ी, फिर जांच में दोषी तो गुहार लगाई एफआईआर दर्ज कराने के लिये। मुंगेली के इस मामले में नगरपालिका के अध्यक्ष संतूलाल सोनकर को जेल भेज दिया गया है। 15 दिन बीत गये। भाजपा ने चलो, कोई कार्रवाई नहीं की। उनका अपनी पार्टी का मामला है। पर कांग्रेसी उम्मीद कर रहे थे कि जब उनकी सरकार आई है तो शासन की कार्रवाई भी प्रावधानों के अनुसार फुर्ती करे। पर अध्यक्ष जेल जाने के बावजूद अपने पद पर बने हुए हैं। कांग्रेस पार्षदों ने नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 41 का हवाला देते हुए उन्होंने कलेक्टर से 22 नवंबर से पहले कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। कहा है कि ऐसा न होने पर वे उग्र आंदोलन करेंगे। कभी कांग्रेस का गढ़ रहा मुंगेली विधानसभा सीट अब लगातार भाजपा के खाते में जा रही है। ऐसे में अपनी ही सरकार में आंदोलन करने की नौबत आ रही है, विवश हैं कांग्रेस कार्यकर्ता।

घोष वर्ग में भागवत की बातों का सार...

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मदकू द्वीप की सभा में धर्मांतरण पर नपी-तुली बात कही लेकिन समर्पित कार्यकर्ताओं के लिये यही काफी है। आरएसएस के साथ यह सुविधा हमेशा रहती है कि वह  अपने आपको राजनीतिक संगठन हीं बताता है जिसके चलते कोई सवाल नहीं। मार्गदर्शन लेने के लिये मौजूद थे भाजपा के तमाम दिग्गज। पर उन्हें किसानी, बेरोजगारी, आदिवासियों के भू-अधिकार की हालिया छत्तीसगढ़ की समस्याओं पर कोई निर्देश नहीं मिला। 2023 के चुनाव की तैयारी में हुए तीन दिन की घोष वर्ग सम्मेलन में क्या प्रस्ताव थे, किन विषयों पर चिंतन-मनन हुआ होगा, भागवत के उद्बोधन से इसका सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।

पढ़े-लिखे सलीकेदार...

आईएएस सोनल गोयल ने यह तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सवाल किया है कि क्या सहानुभूति और दया को आत्मसात करने के लिए पढ़ा-लिखा होना काफी है?

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रमन काका को देवव्रत देते थे सेहत-सलाह
19-Nov-2021 5:04 PM (105)

रमन काका को देवव्रत देते थे सेहत-सलाह

खैरागढ़ विधायक देवव्रत सिंह का यूं इस तरह दुनिया से जाना हर किसी को खल रहा है। संसार में नहीं होने के बाद उनकी अच्छाई में से एक बात पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के जेहन में भी है। आपसी संवाद में देवव्रत रमन को काका पुकारते हुए कई बार सेहत के लिए फिक्रमंद होने पर जोर देते थे। राजघराने से वास्ता रखने के बाद भी देवव्रत ने निजी जिंदगी में नशे को अपने पर हावी नहीं होने दिया। राजनीतिक जीवन में कई तरह के तनाव और संघर्षों से घिरे होने के बावजूद देवव्रत ने नशे का रास्ता नहीं चुना। पूर्व सीएम रमन से मेल-मुलाकात में देवव्रत खानपान पर संयम रखने की चर्चा छेड़ देते थे। खैरागढ़ के राजा के बजाय देवव्रत ने आम जीवन में एक सादगीपसंद जीवन बिताया। अचानक दुनिया को छोडकऱ जाने के बाद राजनेताओं के किस्सों में देवव्रत की खूबियां हैरान करने के साथ उनकी सरलता को भी जाहिर कर रही है। रमन समेत कई गैर कांग्रेसी उनकी फिटनेस से बेहद प्रभावित रहे।

अकबर सीएम-देवव्रत को लाए नजदीक

पिछले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोडकऱ जोगी कांग्रेस में शामिल हुए देवव्रत ने बेहद ही रोचक मुकाबले में भाजपा के हाथ से जीत छीन ली थी। कांग्रेस छोडऩे की वजहों पर देव्रवत ने कभी भी खुलकर चर्चा नहीं की, पर उनके करीबियों की जुबां में कांग्रेस अध्यक्ष रहते सीएम बने भूपेश बघेल को लेकर तल्खियां थी। मुख्यमंत्री बघेल के साथ विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत के बाद भी रिश्ते सुधरते नहीं देखकर देवव्रत ने सीएम के सबसे विश्वस्त मंत्री मोहम्मद अकबर को साधा। अकबर के साथ प्रगाढ़ राजनीतिक रिश्ते को सीढ़ी बनाकर धीरे-धीरे देव्रवत सीएम के भरोसे को वापस पाने के कगार पर पहुंचने लगे थे। अकबर स्व. शिवेन्द्र बहादुर के भतीजे होने की वजह से पसंद करते थे। बताते है कि अकबर को अविभाजित राजनांदगांव की सियासत में शिवेन्द्र बहादुर ने ही जगह दिलाई। वीरेन्द्र नगर विधानसभा से अकबर ने चुनावी राजनीति का सफर शुरू किया। अकबर आज भी शिवेन्द्र बहादुर की इस पहल को उपकार के तौर पर मानते हैं, इसलिए उनका खैरागढ़ राजघराने के लिए गहरा लगाव है। देवव्रत को सीएम के नजदीक लाने में जुटे अकबर ने प्रभारी मंत्री की हैसियत से काम देने में खुलकर सहयोग किया। सुनते हैं कि देवव्रत को जरूरत से ज्यादा मदद करते देखकर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सीएम से उनकी शिकायत कर दी। अकबर ने भी सीएम को काम करने की वजहों से अवगत कराया। बताते हंै कि देवव्रत ने अकबर के जरिये सीएम को भरोसा दिया कि किसी भी सूरत में सरकार के खिलाफ नहीं जाएंगे। मरवाही उपचुनाव का समय था कि देवव्रत ने जनता कांग्रेस के खिलाफ  माहौल बनाया, जिसे सियासी जगत में चुनाव जीतने में एक बड़ा मदद माना गया।

कलेक्टर की मुसीबत बना अधिकारी

जिलों में सभी विभागों के प्रमुख कलेक्टर के अधीन काम करते हैं, अपना बॉस मानकर चलते हैं। यह अलग बात है कि कलेक्टर के पास राजस्व जैसे एक दो विभागों को छोडक़र बाकी में सीधे दखल करने का अधिकार नहीं है। छोटे कर्मचारियों पर वे वेतन काटने, रोकने और निलंबन की कार्रवाई तो कर देते हैं पर यदि कोई राजपत्रित अधिकारी है तो उन्हें सचिवालय को अनुशंसा भेजना होता है। कुछ अधिकारी कलेक्टर की इस सीमा को समझते हैं और इसीलिये उनकी परवाह नहीं करते। समय सीमा की जिलों में हर सप्ताह बैठक होती है, कार्यों की प्रगति कितनी हुई इसकी समीक्षा होती है। वहां से अधिकारी फटकार सुनकर लौट जाते हैं। पर कलेक्टर के साथ समस्या होती है कि राज्य सरकार उनको ही उत्तरदायी मानकर चलती है। खासकर उन मामलों में जो सरकार, या कहें मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी (फ्लैगशिप) योजना हो।

रायगढ़ कलेक्टर ने धान के अलावा दूसरी खेती को प्रोत्साहित करने के लिये जो आंकड़े मांगे, उसमें बताया जाता है कृषि उप-संचालक ने गड़बड़ी की, जमीनी हकीकत और रिपोर्ट में भारी अंतर दिखा। अन्य कई विभागीय कार्य पूरे नहीं हुए। बीते एक साल से परेशान कलेक्टर ने उप-संचालक को हटाने की अनुशंसा ऊपर की। इसके बाद उनका तबादला हो गया। उप-संचालक कोर्ट से स्थगन आदेश लेकर आ गये। अब कलेक्टर को तो काम चाहिये था, सो उन्होंने सोचा होगा-कोर्ट का ऑर्डर है तो बैठे रहें। उनका प्रभार उन्होंने एक डिप्टी कलेक्टर को दे दिया। अब कृषि उप-संचालक खाली बैठे हैं।

मालूम हुआ है कि प्रभार छीनने की बात को अदालत की अवमानना बताते हुए उप-संचालक ने अपने विभाग में पत्राचार शुरू किया है।

क्या खास है मदकू द्वीप में?

रायपुर से करीब 75 किलोमीटर बाद मुंगेली जिले में, बिलासपुर मार्ग पर मनोरम दृश्य से भरपूर मदकू द्वीप के लिये दाहिनी ओर रास्ता है। शिवनाथ नदी यहां कुछ इस तरह घुमावदार है कि बचा हुआ मिट्टी का टीला द्वीप दिखाई देता है। सुरम्य वातावरण में हर साल फरवरी माह में मसीही समाज का मेला लगता है, जो करीब 110 सालों से चला आ रहा है। पांच-छह दिन तक न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से क्रिश्चियन समुदाय के लोग यहां पहुंचते हैं। वे यहां तरह-तरह से मनोरंजन और आध्यात्मिक कार्यक्रम करते हैं। इसी दौरान बहुत से रिश्ते भी तय हो जाते हैं। सभी समुदायों के लोग मेला पहुंचते हैं। पहले द्वीप तक जाने के लिये नौकाओं का सहारा था लेकिन अब स्टाप डेम बन जाने के बाद पुल-पुलिया भी तैयार हो गई हैं। पर्यटन विभाग ने मदकू द्वीप में बोटिंग की सुविधा भी शुरू कर दी है।

मदकू द्वीप में जब कुछ आध्यात्मिक महत्व के अवशेषों का पता चला तो अब से करीब 25-30 साल पहले इसका सर्वेक्षण शुरू हुआ। सेवानिवृत्त पुरातत्वविद् अरुण शर्मा ने इस पर काफी काम किया। यहां के धूमकेश्वर महादेव, राधा कृष्ण, गणेश, हनुमान, ऋषि मांडूक व श्री राम मंदिर 11वीं शताब्दी के हैं। कई अवशेषों को संकलित कर पुननिर्माण यहां कराया गया है और अब यह हिंदुओं के धार्मिक स्थल के रूप में भी जाना जाता है।

छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिये धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा है, जिसे उनको आगामी चुनावों तक न केवल जिंदा रखना है बल्कि उसे और बड़ा आकार देना है। समझा जा सकता है कि मदकू द्वीप को क्यों आरएसएस के सम्मेलन के लिये चुना गया है।

एक मुद्दा तो टला टकराव का..

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के बाद अब छत्तीसगढ़ के बिल का क्या होगा? अक्टूबर 2020 में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर राज्य ने कृषि उपज मंडी (संशोधन विधेयक) पारित किया । मुख्य बात थी केंद्र के कानून से निजी मंडियों की स्थापना होने वाली थी, छत्तीसगढ़ सरकार ने विधेयक के जरिये उनको नियंत्रित करने का अधिकार ले लिया। जब्ती, तलाशी, निगरानी, निरीक्षण का अधिकार सरकार को मिलता। अब केंद्र के तीनों बिल वापस होने का रास्ता खुलने के बाद छत्तीसगढ़ के बिल के इस हिस्से का औचित्य नहीं रह गया है।

पर बिल में कुछ बातें हैं जिनकी  प्रासंगिकता अभी भी है ,जैसे इसमें कृषि उत्पादों को व्यापक दायरे में परिभाषित किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने की बात की गई है। बहरहाल, पीएम के संबोधन के बाद कम से कम एक मुद्दा समाप्त हुआ जिसमें प्रदेश सरकार और गवर्नर के बीच टकराव नहीं होगा।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : ऐसे स्मार्ट बनाएंगे किसी शहर को?
18-Nov-2021 6:14 PM (116)

ऐसे स्मार्ट बनाएंगे किसी शहर को?

पिछले मई महीने में इसी कॉलम में राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब परिसर, गांधी उद्यान और कुछ दूसरी जगहों पर तस्वीरों के साथ बताया गया था कि पेड़ों में पेंटिंग के कारण उनकी मौत हो रही है। और अब बिलासपुर में वही हो रहा है। नेहरू चौक से सिंधी कॉलोनी की तरफ पेड़ों में बिना सोचे समझे पेंटिंग की जा रही है। इससे पेड़ों की सेहत पर क्या असर पड़ेगा स्मार्ट सिटी के योजनाकारों को इसकी बिल्कुल चिंता नहीं है।

सोशल मीडिया पर पर्यावरण प्रेमी प्राण चड्डा ने जब ऐसी कुछ तस्वीरें साझा की तो रायपुर के नितिन सिंघवी ने नगरीय प्रशासन संचालनालय के 31 अक्टूबर 2021 के आदेश को शेयर किया और बताया कि सन् 2019 से ही आयुक्तों और नगर पालिका के अधिकारियों को साफ निर्देश है कि पेड़ों को मारने के लिए लाखों रुपए का खर्च कर प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं करें। स्मार्ट सिटी के बजट को विवेक का इस्तेमाल किये बगैर अनाप-शनाप कामों में लुटाने का यह एक और नमूना है। साल डेढ़ साल पहले चंडीगढ़ में रेलवे स्टेशन के बाहर पेड़ों को रंगने के खिलाफ वहां के नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया था, पर यहां खामोशी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश दिया है कि स्मार्ट सिटी के लिये कोई भी नया काम मंजूर करने से पहले उससे अनुमति ली जाएगी, लेकिन लगता है पहले के चल रहे कामों पर भी रोक ना लग जाए इस डर से पैसे बहाये जा रहे हैं।

पुलिस का जनदर्शन

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस के जनदर्शन में अलग-अलग नजारे दिखाई दे रहे हैं। कोरबा के जनदर्शन में 88 साल के एक बुजुर्ग अपनी कोई समस्या बताने के लिए पहुंचे थे। पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल अपनी कुर्सी छोडक़र उनके पास पहुंच गये। उनके लिए नाश्ता मंगवाया और कहा जब इसे पूरा खा लेंगे तब आपकी समस्या सुनेंगे। ऐसा ही किया। गद्गद् वृद्ध ने उन्हें अपना मुक्तक भी सुना दिया। एसपी ने ताली बजाई, तो मातहतों ने भी बजाई। उम्मीद करनी चाहिए कि अगर एसपी के दायरे में होगी तो बुजुर्ग की समस्या हल हो गई होगी। एसपी से रोज कोई कहां मिल पाता है? लोगों को तो टीआई से लेकर सिपाही तक ही काम रहता है। काश, उनका भी ऐसा ही बर्ताव थाना पहुंचने वालों के साथ हो जाये।

कांग्रेस नेता का जलवा बरकरार..

कांग्रेस हो या कोई और दल, पद पाने के लिए, खासकर जब सत्ता हो तो होड़ क्यों मची रहती है, उसे जांजगीर में हुई एक घटना से समझा जा सकता है। एक कांग्रेस नेता के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने मोर्चा खोल दिया। शिकायत थी कि नेता ने अपने साथियों के साथ वसूली के लिये रात 2 बजे एक के बाद एक 40 ट्रकों को रोक लिया। एक ड्राइवर से मारपीट की, जातिगत टिप्पणी की। नेता ट्रांसपोर्टरों से कह रहे हैं जब तक पैसे नहीं बांधोगे, गाडिय़ां नहीं चलेंगीं। गुस्साये ट्रांसपोर्टर थाने में अपनी चाबी रखकर लौट रहे थे, नहीं करना है धंधा। टीआई के समझाने पर माने।

ट्रांसपोर्टरों की शिकायत के अनुसार ये नेता डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर हैं। वही, जिन्हें डॉ. चरण दास महंत और जांजगीर-कोरबा के कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के कारण प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने जिला अध्यक्ष बनाने के बाद पद से हटा दिया था। मगर, हटाये जाने के एक सप्ताह बाद ही उससे बड़ा ओहदा दे दिया गया- पिछड़ा वर्ग विभाग का प्रदेश अध्यक्ष।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : परी का श्रृंगार
17-Nov-2021 5:30 PM (102)

परी का श्रृंगार

यादवों के शौर्य और पराक्रम का उत्सव राउत नाचा एकादशी के बाद से छत्तीसगढ़ में जगह-जगह शुरू हो चुके हैं। बहुरंगी वेशभूषा में हाथों में सुसज्जित लाठी और पैरों में घुंघरू बांधकर टोलियां नृत्य करते हुए दिखाई दे रही हैं। इन समूहों का अनिवार्य हिस्सा है टिमकी, मोहरी, दफड़ी, सिंगबाजा बजाते हुए वाद्यकार। और इनका अटूट हिस्सा होता है नचकहर या परी, जो स्त्री के वेश में श्रृंगार किया हुआ युवक होता है। ये सुंदरियों की तरह ही सुंदर लगते हैं। यह तस्वीर सारंगढ़ जिले के पिंटू का है जो एक यादवों की टोली में जाने के लिये तैयार हुआ है।

अब रह गया छत्तीसगढ़..

पेट्रोल-डीजल की कीमत जब आसमान छूने लगी तो केंद्र सरकार ने टैक्स में थोड़ी रियायत दी। इसलिये दाम में मामूली गिरावट हुई। केंद्र सरकार के फैसले के बाद भाजपा शासित राज्यों को भी ध्यान आया कि उन्हें भी कुछ राहत देनी चाहिये, उन्होंने भी वैट में कुछ कमी ला दी। पंजाब में कुछ महीनों के बाद चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस शासित होने के बावजूद जब वैट कम किया तो यही बात कही गई। पर अब दूसरे कांग्रेसी राज्य राजस्थान ने भी टैक्स घटा दिये। आज से वहां पेट्रोल और डीजल 4-5 रुपये कम हो गये। अब तीसरा कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ ही बचा है जहां वैट घटाने से सरकार ने मना कर दिया है। कहा गया कि केंद्र पहले टैक्स को यूपीए सरकार के स्तर पर लाये, फिर हम कम करेंगे। लोग कह रहे हैं कि अपनी सरकार केंद्र को घेर जरूर रही है पर नाइंसाफी तो जनता के साथ हो रही है। पहले भी पेट्रोल के दाम सौ से ऊपर थे, अब भी।

सीएम के समर्थन में बायकॉट

प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में जनजाति दिवस गौरव के दिन वर्चुअली 50 एकलव्य मॉडल रेसिडेंसियल स्कूल का शिलान्यास किया। इसमें छत्तीसगढ़ का एकमात्र स्कूल शामिल है- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का। क्षेत्रीय सांसद ज्योत्सना महंत ने इसे लाने के लिये बड़ा प्रयास किया था। कार्यक्रम में भूपेश बघेल सहित संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री भी वर्चुअली शामिल थे। पर जैसा कि पता है कि किसी को बोलने का मौका मिलने की उम्मीद कम थी। बघेल सहित किसी मुख्यमंत्री को बोलने का मौका नहीं मिला। इस पर जीपीएम के कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता नाराज हो गये और भूमिपूजन से पहले ही वर्चुअल सभा को छोडक़र बाहर निकल आये। वैसे कुछ कांग्रेसियों ने कलेक्टर से इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की कि प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल का नाम शिलालेख में गायब कर दिया गया।

 

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : महिला नेत्री को फोन करना भारी पड़ा
16-Nov-2021 4:28 PM (157)

महिला नेत्री को फोन करना भारी पड़ा

खबर है कि पिछले दिनों आरंग में हुए एक राजनीतिक जलसे की चर्चा खूब हुई। मगर अगले दिन ऐसा कुछ हुआ कि पार्टी के कुछ प्रमुख लोगों के बीच काफी बातें हो रही है। सुनते हैं कि एक बड़े नेता ने अपनी पार्टी की महिला नेत्री को फोन कर कुछ इधर-उधर की बातें कह दीं। नेताजी की रंगीन मिजाजी किसी से छिपी नहीं है। मगर महिला नेत्री ने  नेताजी को इतना बुरी तरह हड़काया कि वो सिहर उठे। 

चर्चा है कि महिला नेत्री ने तो यह तक कह दिया कि आप लोगों की वजह से अच्छे लोग पार्टी में नहीं आते हैं। बताते हैं कि महिला नेत्री ने  हाईकमान तक शिकायत करने की धमकी दे दी थी, लेकिन किसी तरह अपनी बातों पर सफाई देकर मामले को शांत करने की कोशिश की। मामला तो शांत  होता दिख रहा है, लेकिन पार्टी के प्रमुख नेताजी के व्यवहार की खूब चर्चा हो रही है। 

खरीदी शुरू हुई नहीं, धान तस्करी चालू

पड़ोसी राज्यों और छत्तीसगढ़ की धान खरीद नीति में बड़ा फर्क है। राजीव किसान न्याय योजना को मिला दें तो 2500 रुपए प्रति क्विंटल किसानों को मिल रहा है। पिछली बार तकरीबन 93 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था इस बार 1 करोड़ 5 लाख मीट्रिक टन खरीदने का लक्ष्य है। पड़ोस के झारखंड में भी वैसे तो इस साल 80 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य है पर उन्हें इसकी कीमत अधिकतम 2070 रुपये मिलेगी। इसमें केंद्र सरकार का समर्थन मूल्य और राज्य का बोनस दोनों शामिल है। ओडिशा में सरकार सीधे नहीं मिलर्स के माध्यम से खरीदती है। मिलर्स उतना ही खरीदते हैं, जितनी उनकी आवश्यकता होती है। मध्यप्रदेश में नीति है कि राइस मिलर्स की जांच में फेल होने वाली किस्म की धान को समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाएगा। जांच में पास होने वाले धान की कीमत ही समर्थन मूल्य पर ही मिलती है।

ऐसे तमाम कारण है कि सीमा से लगे छत्तीसगढ़ में धान की तस्करी होती है। किसान और कोचिये सीजन में मुस्तैद हो जाते हैं। गरियाबंद जैसे जिले ज्यादा संवेदनशील हैं।  

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जशपुर, महासमुंद, बलरामपुर, मुंगेली, कोरिया आदि जिले ओडिशा, झारखंड और मध्य प्रदेश सहित सात राज्यों से जो जुड़ते हैं। हर साल निगरानी के लिए चेक पोस्ट बनाने की बात होती है। यह पूर्ववर्ती सरकार के समय से चला रहा है।  

हालत यह है कि खरीदी तो 1 दिसंबर से शुरू होनी है लेकिन अभी से तस्करी का धान दूसरे राज्यों से पहुंचना शुरू हो गया है। सूरजपुर जिले की ओडग़ी में 4 पिकअप वैन जब्त किये गये तो गरियाबंद में भी 12 लाख रुपए का धान सीज किया गया। दरअसल, समस्या यह है कि निगरानी के लिये जो चेक पोस्ट बनाये जाते हैं उनमें बैठने वाले कर्मचारियों पर निगरानी कौन रखे।

जनरल यात्री अब भी बेहाल

कुछ दिन पहले रेलवे ने जोर शोर से घोषणा की थी कि अब कोविड मामलों में कमी के कारण ट्रेनों का स्पेशल स्टेटस हटा दिया गया है और पहले की तरह सामान्य किराया लिया जाएगा। ट्रेनों को कोविड के पहले की स्थिति में लाया जायेगा। पर वास्तव में ऐसा नहीं हुआ है।

ज्यादातर मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से महिला एवं दिव्यांग कोटे के लिए लगाए जाने वाले अलग डिब्बे वापस नहीं लगाये गए हैं। इतना ही नहीं जनरल डिब्बों को हटा दिया गया है। उनकी जगह सीटिंग सामान्य बोगी लगा दी गई है। जनरल डिब्बे जिसमें काउंटर से करंट टिकट कटा कर लोग सफर की सुविधा थी वह चालू नहीं हुई है। अब भी यात्रियों के लिये सीट नंबर जरूरी है। इन जनरल डिब्बों में रिजर्वेशन का किराया भी जुड़ गया है। लोगों को लंबी लाइन पर लगने के बाद टिकट मिल पा रही है, क्योंकि इस कतार में जनरल सीट पर सफर करने वाले भी हैं। रेलवे ने यह भी साफ नहीं है कि पहले की तरह जनरल डिब्बा कब लगाए जाएंगे, जनरल टिकट कब से दी जायेगी। महिलाओं, दिव्यांगों के लिए अलग बोगी कब शुरू की जाएगी, मासिक सीजन टिकट भी चुप्पी है।

दिवंगत अबीर के वीडियो...

मणिपुर उग्रवादी हमले में शहीद हुए कर्नल विप्लव त्रिपाठी के बेटे अबीर के वीडियो उनके गुजर जाने के बाद यू ट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे हैं। इन्हें देखकर कोई भी कह सकता है कि अबीर को मौका मिला होता तो वे भी युवा होने पर फौज में ही जाना पसंद करते। ऐसे एक वीडियो में सेना को दी जाने वाली ट्रेनिंग करते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में उन्होंने शहीद भगत सिंह स्टाइल का हैट और मूंछें लगाई हैं। इसमें वे कह रहे हैं- 'जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो जनाजे उठते हैं।Ó

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रनौत के समर्थन में यह भी...
15-Nov-2021 5:22 PM (124)

रनौत के समर्थन में यह भी...

इस समय कंगना रनौत के बयान का डंका बजा हुआ है। ज्यादातर लोग इस बात की आलोचना कर रहे हैं कि उन्होंने आजादी को भीख में मिली बताकर लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान किया और 2014 में हुए सत्ता परिवर्तन को आजादी बताकर तो हद ही कर दी। छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर कांग्रेस ने उनके खिलाफ थाने में शिकायतें की हैं। एफआईआर दर्ज होने की बात भी देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही है। वाट्सएप पर भी एक अलग तरह का युद्ध चल रहा है। छत्तीसगढ़ में वाट्सएप से उठाकर उसी पर वेब पोर्टल के समाचार डालकर हिट्स लाने का चलन है। ऐसे कुछ पोर्टल आपत्तिजनक सामग्री उठाकर भी समाचार बना डाल रहे हैं। इनमें गांधी, नेहरू की अभद्र भाषा में आलोचना करते हुए पूछा जा रहा है कि कंगना रनौत ने गलत क्या कहा? जो तर्क समर्थन में दिये गये हैं उनकी प्रामाणिकता संदिग्ध हैं। हाल ही में जिलों में सोशल मीडिया की सामग्री पर नजर रखने के लिये बनाई समितियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है, न ही एफ़आईआर के लिये पीछे पड़े कांग्रेस नेताओं का। और तो और अपने प्रदेश में ऐसे पोर्टल विज्ञापनों से पोषित भी किये जा रहे हैं।

बिरसा किसके आदर्श, किसके भगवान?

आदिवासी समुदाय का एक बड़ा वर्ग अपने आपको हिंदू नहीं मानता, न ही उसकी वर्ण व्यवस्था से सहमत है। वे खुद को प्रकृति पूजक मानते हैं। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने हमेशा आदिवासियों को हिंदू धर्म का हिस्सा माना। अभी कल ही राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस का एक कार्यक्रम बिलासपुर में हुआ। बिरसा मुंडा को यहां पहुंचीं राज्यपाल ने आदिवासियों का भगवान बताया और कहा कि आदिवासी समाज सनातन धर्म की रीढ़ है। गौरव दिवस का यह आयोजन देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रहे हैं। भोपाल में तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम है। जहां भाजपा की सरकारें हैं आयोजन सरकार करा रही है लेकिन सरकार न हो फर्क नहीं पड़ता। अनेक संगठन हैं। राज्यपाल की मौजूदगी हो तो कार्यक्रम की शोभा तो बढ़ ही जाती है, बात लोगों तक पहुंच भी जाती है। वैसे देश जानता है कि गांधी, बोस, आजाद, भगत सिंह और कई महान सेनानियों की तरह बिरसा मुंडा ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया। बाकी नेताओं से कहीं पहले। वे नेता तो देश के हुए न कि किसी वर्ग के। 

बुरी नजर वाले को कोरोना टीका

यह संदिग्ध तरह का स्लोगन एक ट्रक में दिखा। अपने आप में यह कोरोना

टीकाकरण के खिलाफ प्रचार-दुष्प्रचार भी कहा जा सकता है। कोरोना टीका तो

अच्छे बुरे सबकी जरूरत है। दुष्प्रचार पर तो जुर्म भी दर्ज हो जाता है। 

कुल्लू का पेड़ भी केंचुल बदलता है!

छत्तीसगढ़ के पथरीले पहाड़ी और नाले में कुल्लू का पेड़ न केवल आयुर्वेदिक गुणों की खान है अलबत्ता साल में दो तीन बार तने और शाखों का रंग बदलता है। यह पेड़ छतीसगढ़ के अलावा और भी जगह मिलता है, इसे घोस्ट ट्री कहा जाता है।

इस बारे में छत्तीसगढ़ के वन और प्रकृतिप्रेमी प्राण चड्ढा ने लिखा है- इसकी गोंद ठंडी तासीर की होती है और आयुर्वेदिक दवाओं में बड़ी मांग होने के कारण गोद के लोभ में कई पेड़ कुल्हाड़ी की चोट दर चोट से मारे जाते हैं। मुंगेली जिले में अंग्रजों के बनाये खुडिय़ा रेस्ट हाउस के सामने इसके कुछ बुजुर्ग पेड़ चांदनी रात में सफेद चमकते है।

कुल्लू का वानस्पतिक नाम ईस्टर कुलिया यूरेन है। चमकीले आकर्षक रंग के चलते ये पेड़ रात में अलग से पहचान में आते हैं। होली पर जब पत्ते गिर जाते हैं, तब पीले रंग के फूल खिलते हैं। कुल्लू का गोंद शक्तिवर्धक और औषधीय गुणों के लिए सभी पहचानते हैं इस वजह प्रतिबंधित होने के बावजूद ये पेड़ कुल्हाड़ी का शिकार बन रहा है। वन विभाग को इस शानदार पेड़ को बचाने प्रोजेक्ट बना कर काम हाथ में लेना होगा।

चित्र- अक्टूबर 2021में कान्हा नेशनल पार्क में लिया था जिसमें पेड़ अपने पुराने छाल का रंग बदलते हुए। ऐसा लगता है जैसे पेड़ भी केंचुल बदल  रहा है।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : रनौत के समर्थन में यह भी...
15-Nov-2021 5:22 PM (41)

रनौत के समर्थन में यह भी...

इस समय कंगना रनौत के बयान का डंका बजा हुआ है। ज्यादातर लोग इस बात की आलोचना कर रहे हैं कि उन्होंने आजादी को भीख में मिली बताकर लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान किया और 2014 में हुए सत्ता परिवर्तन को आजादी बताकर तो हद ही कर दी। छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर कांग्रेस ने उनके खिलाफ थाने में शिकायतें की हैं। एफआईआर दर्ज होने की बात भी देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही है। वाट्सएप पर भी एक अलग तरह का युद्ध चल रहा है। छत्तीसगढ़ में वाट्सएप से उठाकर उसी पर वेब पोर्टल के समाचार डालकर हिट्स लाने का चलन है। ऐसे कुछ पोर्टल आपत्तिजनक सामग्री उठाकर भी समाचार बना डाल रहे हैं। इनमें गांधी, नेहरू की अभद्र भाषा में आलोचना करते हुए पूछा जा रहा है कि कंगना रनौत ने गलत क्या कहा? जो तर्क समर्थन में दिये गये हैं उनकी प्रामाणिकता संदिग्ध हैं। हाल ही में जिलों में सोशल मीडिया की सामग्री पर नजर रखने के लिये बनाई समितियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है, न ही एफ़आईआर के लिये पीछे पड़े कांग्रेस नेताओं का। और तो और अपने प्रदेश में ऐसे पोर्टल विज्ञापनों से पोषित भी किये जा रहे हैं।

बिरसा किसके आदर्श, किसके भगवान?

आदिवासी समुदाय का एक बड़ा वर्ग अपने आपको हिंदू नहीं मानता, न ही उसकी वर्ण व्यवस्था से सहमत है। वे खुद को प्रकृति पूजक मानते हैं। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने हमेशा आदिवासियों को हिंदू धर्म का हिस्सा माना। अभी कल ही राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस का एक कार्यक्रम बिलासपुर में हुआ। बिरसा मुंडा को यहां पहुंचीं राज्यपाल ने आदिवासियों का भगवान बताया और कहा कि आदिवासी समाज सनातन धर्म की रीढ़ है। गौरव दिवस का यह आयोजन देश के दूसरे हिस्सों में भी हो रहे हैं। भोपाल में तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम है। जहां भाजपा की सरकारें हैं आयोजन सरकार करा रही है लेकिन सरकार न हो फर्क नहीं पड़ता। अनेक संगठन हैं। राज्यपाल की मौजूदगी हो तो कार्यक्रम की शोभा तो बढ़ ही जाती है, बात लोगों तक पहुंच भी जाती है। वैसे देश जानता है कि गांधी, बोस, आजाद, भगत सिंह और कई महान सेनानियों की तरह बिरसा मुंडा ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया। बाकी नेताओं से कहीं पहले। वे नेता तो देश के हुए न कि किसी वर्ग के। 

बुरी नजर वाले को कोरोना टीका

यह संदिग्ध तरह का स्लोगन एक ट्रक में दिखा। अपने आप में यह कोरोना

टीकाकरण के खिलाफ प्रचार-दुष्प्रचार भी कहा जा सकता है। कोरोना टीका तो

अच्छे बुरे सबकी जरूरत है। दुष्प्रचार पर तो जुर्म भी दर्ज हो जाता है। 

कुल्लू का पेड़ भी केंचुल बदलता है!

छत्तीसगढ़ के पथरीले पहाड़ी और नाले में कुल्लू का पेड़ न केवल आयुर्वेदिक गुणों की खान है अलबत्ता साल में दो तीन बार तने और शाखों का रंग बदलता है। यह पेड़ छतीसगढ़ के अलावा और भी जगह मिलता है, इसे घोस्ट ट्री कहा जाता है।

इस बारे में छत्तीसगढ़ के वन और प्रकृतिप्रेमी प्राण चड्ढा ने लिखा है- इसकी गोंद ठंडी तासीर की होती है और आयुर्वेदिक दवाओं में बड़ी मांग होने के कारण गोद के लोभ में कई पेड़ कुल्हाड़ी की चोट दर चोट से मारे जाते हैं। मुंगेली जिले में अंग्रजों के बनाये खुडिय़ा रेस्ट हाउस के सामने इसके कुछ बुजुर्ग पेड़ चांदनी रात में सफेद चमकते है।

कुल्लू का वानस्पतिक नाम ईस्टर कुलिया यूरेन है। चमकीले आकर्षक रंग के चलते ये पेड़ रात में अलग से पहचान में आते हैं। होली पर जब पत्ते गिर जाते हैं, तब पीले रंग के फूल खिलते हैं। कुल्लू का गोंद शक्तिवर्धक और औषधीय गुणों के लिए सभी पहचानते हैं इस वजह प्रतिबंधित होने के बावजूद ये पेड़ कुल्हाड़ी का शिकार बन रहा है। वन विभाग को इस शानदार पेड़ को बचाने प्रोजेक्ट बना कर काम हाथ में लेना होगा।

चित्र- अक्टूबर 2021में कान्हा नेशनल पार्क में लिया था जिसमें पेड़ अपने पुराने छाल का रंग बदलते हुए। ऐसा लगता है जैसे पेड़ भी केंचुल बदल  रहा है।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अवस्थी के जाने से हैरानी नहीं
14-Nov-2021 6:18 PM (151)

अवस्थी के जाने से हैरानी नहीं

डीजीपी बदले गए तो जानकार लोगों को आश्चर्य नहीं हुआ। सुनते हैं कि डीएम अवस्थी के तौर-तरीकों से गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू तो नाखुश थे ही। सीएम ने भी कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस से पहले अहम बैठकों में उन्हें बुलाना बंद कर दिया था। शिकायतें तो कई थीं, लेकिन एक शिकायत यह भी थी कि वो पीएचक्यू के बजाए पुलिस लाइन के सामने ट्रैंजि़ट हॉस्टल में ज्यादा समय गुजारते हैं। एक तरह से पुलिसिंग चौपट-सी हो गई थी।

चर्चा है कि अवस्थी के रेगुलर डीजी के ऑर्डर होने से पहले उन्हें उनकी खामियों को लेकर साफ-साफ बता दिया गया था। यह भी कहा गया था कि इन सबको नजरअंदाज कर रेगुलर डीजीपी बनाया जा रहा है। हल्ला तो यह भी है कि अवस्थी ने सब-कुछ ठीक करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। अहम मसलों पर वो जांच को किसी किनारे पर नहीं पहुंचा रहे थे। कामकाज में नुक्ताचीनी के बाद भी वो करीब-करीब तीन साल डीजीपी रहे। यानी एएन उपाध्याय के बाद सबसे ज्यादा समय तक।

तमाम खामियों के बावजूद पुलिस वेलफेयर आदि को लेकर विभाग के छोटे अधिकारी-कर्मचारी उनसे खुश रहते थे। वैसे डीजीपी पद से हटने का ऑर्डर होने के बाद बिना देरी किए अवस्थी ने नया दायित्व संभाल भी लिया है। यदि सब कुछ ठीक रहता है, तो उन्हें और दायित्व  मिल सकता है। क्योंकि रिटायरमेंट में अभी डेढ़ साल से अधिक समय बाकी है।

भाजपा में शह और मात

भाजपा के भले ही 14 विधायक रह गए हैं, लेकिन उनमें भी शह-मात का खेल चलते रहता है। इसका नमूना कवर्धा विवाद पर देखने को  मिला। सुनते हैं कि भाजपा विधायकों ने गुपचुप रणनीति बनाई थी कि सभी विधायक बिना पूर्व सूचना के कवर्धा विवाद की न्यायिक जांच की मांग को लेकर सीएम हाउस के सामने धरने पर बैठेंगे।

बाद में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक मीडिया से मुखातिब हुए, और ऐलान कर गए कि यदि कवर्धा मामले की न्यायिक जांच नहीं हुई, तो विधायक धरने पर बैठेंगे। अब जब रणनीति का खुलासा हो गया है, तो सरकार, और पुलिस भाजपा विधायकों को सीएम हाउस के आसपास फटकने देगी, यह तो सोचना भी नहीं चाहिए।

बसों की टाइमिंग का बवाल

अल्टीमेटम के बाद भी राजधानी रायपुर के पंडरी बस स्टैंड से एक भी बस ऑपरेटर का दफ्तर हटाकर भाठागांव नये बस स्टैंड आईएसबीटी में नहीं ले जाया गया है। नई जगह पर यातायात थाना खोल दिया गया है। टर्मिनल का पूरा काम पहले ही हो चुका है। सोमवार से पंडरी में तोड़-फोड़ शुरू करने की बात भी हो रही है। बस ऑपरेटरों ने एक आम समस्या की तरफ ध्यान दिलाया है। नई जगह से बस छूटने और पहुंचने का समय दूरी के कारण बदल जायेगा। इसके चलते पहले से ही सवारियों के लिये स्पर्धा करने वाले संचालकों में आये दिन विवाद होने की आशंका है। सारे विभागों ने अपना काम तो कर लिया पर परिवहन विभाग ने टाइम टेबल सुधारने का काम नहीं किया। यह थोड़ा पेचीदा भी हो सकता है कि क्योंकि रायपुर ही नहीं दूसरे जिलों में मसलन बलौदाबाजार, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, जहां ये बसें पहुंचती और वहां से छूटती हैं, वहां भी टाइम टेबल में सुधार करना होगा।

मन हो न हो सुनें जरूर..

प्रदेश भाजपा ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रेडियो वार्ता ‘मन की बात’ को सुनना अपने कार्यकर्ताओं के लिये अनिवार्य कर दिया है। इसके लिये प्रदेश में जगह-जगह बूथ भी बनाये जायेंगे। अनिवार्य करने का क्या मतलब निकाला जाना चाहिये? एक बार देखा गया था कि सोशल मीडिया पर जितने लोगों ने मन की बात सुनी उनमें लाइक से दुगनी संख्या डिसलाइक करने वालों की थी। क्या धीरे-धीरे इसके श्रोता घट रहे हैं? पार्टी कार्यकर्ता सुनें न सुनें, वे तो मोदी के प्रशंसक रहेंगे ही। पार्टी कोशिश कर सकती है कि आम लोगों में इसे सुनने की रुचि बढ़े। पर, मन की बात में बात उनके काम की भी होनी चाहिये।

सलमान खुर्शीद का नहीं आना

हाल ही में कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने अपना रायपुर दौरा स्थगित कर दिया। कुछ संगठनों ने उनके कार्यक्रम को रुकवा देने की धमकी दी थी। अब फिर एक खबर है कि सलमान खुर्शीद का दौरा भी रद्द हो गया। राजधानी में आज शुरू हुए राष्ट्रीय शिक्षा समागम में खुर्शीद को तब विशिष्ट अतिथि तय कर लिया गया था जब उनकी किताब सनराइज ओवर इंडिया की बातें सामने नहीं आई थीं। शिक्षा विभाग ने निमंत्रण पत्र में उनका नाम भी छाप दिया था। पर दो दिन पहले तय किया गया कि खुर्शीद नहीं आयेंगे। उनका आना क्यों टल गया, इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। मंत्री ने यह जरूर बताया है कि अब उनकी जगह विशिष्ट अतिथि अजय माकन होंगे। सलमान खुर्शीद एक सीनियर वकील होने के नाते बहुत बार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी पैरवी करने के लिये भी आते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अपना फोन टैप होने की मुनादी !
13-Nov-2021 1:06 PM (105)

अपना फोन टैप होने की मुनादी !

दुनिया में बहुत से जानकार लोगों का यह मानना है कि आज एक घुसपैठिया सॉफ्टवेयर पेगासस के पीछे तमाम लोग लग गए हैं, और लोगों को यह ध्यान भी नहीं रह गया है कि ऐसे दूसरे भी सॉफ्टवेयर हो सकते हैं। मिलिट्री दर्जे की हैकिंग करने के लिए पेगासस की कोई मोनोपोली तो है नहीं, बहुत से देशों में ऐसे हैकर बसे हुए हैं जो रेनसमवेयर बनाते हैं और लोगों के कंप्यूटर हैक करके उसकी जानकारी छोडऩे के लिए रकम वसूलते हैं। अभी यह खबर भी सामने आई थी कि अमेरिका ने ऐसे हैकरों को पकडऩे के लिए एक बहुत बड़ा इनाम रखा है। यह बात जाहिर है कि दुनिया के बहुत से देशों में कानूनी और गैरकानूनी दोनों तरह की हैकिंग होती है।

आज हिंदुस्तान में भी सरकार और राजनीति से जुड़े हुए बहुत से लोग इतनी सावधानी बरतते हैं कि मोबाइल के सिम कार्ड पर बात नहीं करते, और या तो व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हैं, या आईफोन के फेसटाइम को और अधिक सुरक्षित मानते हैं। हिंदुस्तान में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की 10 एजेंसियों के पास टैपिंग के अधिकार हैं। ऐसे में जब छत्तीसगढ़ के एक सीनियर आईएएस ऑफिसर डॉ. आलोक शुक्ला अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर यह लिखते हैं कि उनका फोन टैप किया जा रहा है, और मैसेज भेजने वाले उन पर खतरे के लिए खुद ही जिम्मेदार रहेंगे, तो यह बात लोगों को हक्का-बक्का करने वाली है। शायद ही किसी इतने सीनियर अफसर ने इसके पहले कभी इस तरह खुलकर यह बात कही हो कि उसके फोन टैप किए जा रहे हैं। खैर उन्होंने किसी सरकार या किसी एजेंसी का नाम नहीं लिखा है, इसलिए लोग अपने अपने हिसाब से अंदाज लगा सकते हैं कि उनके फोन को कौन टैप कर रहा है।



रेलवे की आधी-अधूरी राहत

रेलवे ने सभी तरह की ट्रेनों में स्पेशल का टैग हटाकर रेगुलर करने का निर्णय लिया है। केन्द्र सरकार जब कोरोना के खिलाफ जंग को प्रभावी तरीके से लड़ऩे की बात कह रही हो और नये केस कम हो रहे हों तो रेलवे के लिये महामारी के नाम पर लंबे समय तक स्पेशल और इसके नाम पर बढ़ा हुआ किराया लेकर ट्रेन चलाने का कोई मतलब समझ नहीं आ रहा था। रेलवे की घोषणा से कई बातें साफ नहीं हुई है। मसलन, बुजुर्गों और अन्य कई श्रेणियों में रियायती टिकट शुरू होगी या नहीं? रोजाना सफर करने वालों को एमएसटी की सुविधा कब से दी जायेगी?

आदेश में यह साफ तो कर दिया गया है कि अब भी एसी क्लास में बिस्तर, कंबर, तकिया नहीं दिया जायेगा। रिजर्वेशन कंफर्म होने पर ही आरक्षित सीटों पर सफर किया जा सकेगा।  

रेलवे के एक अधिकारी ने इसे पेट्रोल डीजल के दामों से टैक्स कम करने की अगली कड़ी बताया। लोग सचमुच बढ़ती हुई महंगाई से काफी बेचैनी महसूस कर रहे थे। इस बात की तरफ केन्द्र का ध्यान हाल ही में आये उप-चुनाव के नतीजों के बाद गया है। फिर आने वाले दिनों में यूपी सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। निर्णय लेते समय इसका ध्यान भी रखा गया।

भाजपा का काउंटर अभियान

एक तरफ कांग्रेस ने प्रदेश में नये सदस्य जोडऩे के लिये 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है तो भाजपा ने अभियान का पीछा करना शुरू कर दिया है। दावा है कि आरंग के दीपावली मिलन कार्यक्रम में प्रभारी डी.  पुरंदेश्वरी की मौजूदगी में 6000 लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली। मंत्री डॉ. शिव डहरिया का कहना है कि कई लोगों को सदस्यता लेने के लिये डराया-धमकाया गया। पुरंदेश्वरी ने इस आरोप को आधारहीन बताया है। कांग्रेस ने पदयात्रा का कार्यक्रम भी बना लिया है। कांग्रेस के खेमे से बैठकों में लगातार खबर आ रही है कि कार्यकर्ता अधिकारियों से काम नहीं करा पाने के कारण नाराज चल रहे हैं। वहीं भाजपा कार्यकर्ता पिछले चुनाव में हुई भारी पराजय से अब तक उबर नहीं पाये हैं। शायद यही वजह है कि अभी से कार्यकर्ताओं को दोनों ही दल रिचार्ज करने में लग गये हैं।


कॉमेडियन के शो का स्थगित होना
कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी का कार्यक्रम 14 नवंबर को राजधानी में तय था। इस बीच कुछ संगठनों ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन देकर शो को कैंसिल करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि पुलिस ऐसा नहीं करेगी तो हम रद्द करा देंगे। फारूकी के खिलाफ इंदौर में एक एफआईआर इस आरोप के साथ दर्ज की गई थी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी कर लोगों की धार्मिक भावना को भड़काया, जबकि ऐसी कोई रिकॉर्डिंग पेश नहीं हो पाई थी। कॉमेडियन को गिरफ्तार भी किया गया था। कॉमेडियन ने खुद ही शो रद्द करने की जानकारी देकर पुलिस प्रशासन को तो उलझन से बचा लिया लेकिन उससे भी बड़ा काम ये हो गया कि इस मामले में किसी को प्रदर्शन, विरोध करने का मौका नहीं मिला। (rajpathjanpath@gmail.com)

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : कहानी सवन्नी की...
12-Nov-2021 8:12 PM (93)

कहानी सवन्नी की...

प्रदेश में भले ही भाजपा सरकार नहीं है लेकिन सवन्नी बंधुओं का जलवा बरकरार है। बात भूपेन्द्र सिंह सवन्नी और उनके छोटे भाई महेन्द्र सिंह सवन्नी की हो रही है। भूपेन्द्र प्रदेश भाजपा के महामंत्री हैं, तो महेन्द्र सरकारी नौकर हैं। वो मंडी बोर्ड के एडिशनल एमडी हैं। दोनों ही मिलनसार हैं, और गुस्से से परहेज करते हैं। इन्हीं विशिष्ट गुणों की वजह से दोनों अपनी-अपनी संस्था में बेहद पॉवरफुल हैं।

दोनों भाइयों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले आए। जांच एजेंसियों तक शिकायत पहुंची लेकिन जांच किसी किनारे नहीं लग पाई। भाजपा मेें सौदान सिंह के छत्तीसगढ़ के प्रभार से मुक्त होने के बाद पवन साय सर्वेसर्वा हुए, तो सवन्नी उनके विश्वासपात्र हो गए। यह चर्चा आम है कि पार्टी संगठन के बड़े फैसलों में सवन्नी का सीधा दखल रहता है।

दूसरी तरफ, सरकार बदलने के बाद भी छोटे भाई महेन्द्र सिंह सवन्नी की सेहत में कोई फर्क नहीं पड़ा है। महेन्द्र सिंह की अब भी मंडी बोर्ड में तूती बोलती है। दोनों भाइयों की हैसियत को देखकर लोग अब चुटकी लेने लगे हैं कि खाता न बही, सवन्नी जो कहे वह सही।

और सन्नी की...

राजीव भवन में मोहन मरकाम की मौजूदगी में महामंत्री अमरजीत चावला के साथ गाली-गलौज करना अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन सन्नी अग्रवाल को भारी पड़ रहा है। वो पार्टी से निलंबित हैं। उन्हें भरोसा था कि पीएल पुनिया रायपुर आते ही उनका निलंबन खत्म करा देंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ।

होटल में सन्नी, पुनिया के आगे-पीछे होते रहे। वो दीवाली की बधाई देने के लिए एक कारोबारी को साथ लेकर पहुंचे थे। पुनिया ने कारोबारी की बधाई तो स्वीकारी, लेकिन सन्नी को उलटे पांव लौटा दिया। उन्हें पद से हटाने के लिए दबाव बन रहा है। चर्चा है कि सन्नी, अमरजीत से माफी मांगकर और संगठन में लिखित माफीनामा देकर बहाली की कोशिश में हैं। उनसे जुड़े लोग अमरजीत को गुस्सा थूकने के लिए कह रहे हैं, लेकिन अमरजीत अभी पसीजते नहीं दिख रहे हैं। देखना है कि पार्टी से निलंबन के बाद सन्नी को पद से हटाया जाता है, अथवा नहीं।

डीजीपी का बदला जाना..

डीजीपी की छुट्टी का संदेश क्या है? अपने छत्तीसगढ़ में यूपी और बिहार की तरह क्राइम नहीं है, पर तस्करी का धंधा जोरों से चल रहा है। गांजा और शराब दूसरे राज्यों से ट्रकों में भर के लाई जा रही है। चौराहों पर आए दिन चाकूबाजी और तलवार बाजी हो रही है। बहुत से लोग घायल हो रहे हैं तो कुछ की मौत भी हो रही है। यह बात लगातार दिखाई दे रही है कि जनता से पुलिस का संपर्क टूट चुका है।  सीएम ने गृह विभाग को ठीक तो कर दिया, अब स्वास्थ्य विभाग बाकी है।

खुल गया, खुल गया... बंद है, बंद है

सस्ती दवाइयां मुहैया कराने के लिए बीते अक्टूबर महीने में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के अधिकांश जिलों में धनवंतरी योजना के अंतर्गत दुकानों का उद्घाटन किया। लोग बड़े खुश हुए कि ब्रांडेड और जेनेरिक दवाइयां सस्ते में मिल सकती है। आदिवासी इलाकों के लिए तो यह योजना वरदान थी मगर बीजापुर से जो खबर आई है वह हैरान करती है। यहां की दवा दुकान है खुली पर दो-चार दिन बाद ही बंद हो गई। अब सरकार को चाहिए कि जितना जोर शोर से उसने खबर फैलाई की सस्ती दुकान खुल गई इसी तरह से शोर करके बताएं की दुकानें तो बंद हो गई हैं।

नीलामी से व्यापारियों को दुकानें खोलने की निविदा स्वीकृत की गई थी। उन्होंने प्रतियोगिता के बाद दुकानें तो हासिल कर ली लेकिन दवा भेजने में शायद दिक्कत हो रही हो। दवा लिखने वाले भी तो सहयोग करें। सरकार में तय किया गया था सरकारी डॉक्टर ब्रांडेड दवाइयां नहीं सिर्फ जेनेरिक लिखेंगे मगर ताबड़तोड़ आज ब्रांडेड ही लिखी जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : हुक्का बंद, शराबखोरी होने दो..
11-Nov-2021 6:32 PM (139)

हुक्का बंद, शराबखोरी होने दो..

सीएम की हर बैठक के बाद पुलिस अधिकारी अपना रिकॉर्ड दुरुस्त करने में लग जाते हैं। उन्होंने प्रदेश में हुक्का बार चलने पर फटकार क्या लगाई अगले दिन रायपुर, बिलासपुर और दूसरे जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई चालू हो गई। पहले हुक्का बार में ही छापामारी की जाती थी पर इस बार हुक्का का सामान, चिमनी और फ्लेवर बेचने वाले भी पकड़े गये। यदि यह नशे के खिलाफ जंग है तो सेल्यूट। बस काम कुछ आगे तक होना चाहिये था। शराबखोरी बढ़ रही है। देर रात होने वाले हंगामे, मारपीट, यहां तक की मर्डर में, कितने हुक्का बार से लौटने वाले हैं और कितने शराब दुकानों से- इसका भी ब्यौरा जुटाना चाहिये। कितने घर हुक्का के चलते तबाह हो रहे हैं और कितने शराब की वजह से इसका भी डेटा हो। यह वही सरकार है जिसे शराबबंदी के अपने चुनावी वादे को पूरा करना है।

काश यहां भी चुनाव होता..

कोरोना महामारी के चलते अदालतें लम्बे वक्त तक बंद रही। इसके चलते प्रोफेशनल्स आर्थिक संकट में जूझ रहे थे। वकील जो सबको न्याय दिलाने के लिये पैरवी करते हैं उनकी भी हालत बुरी हो गई। उन वकीलों की ज़्यादा जिन्होंने चार-पांच साल की वकालत में ज्यादा जमा नहीं कर रखा था। इन्हें आर्थिक सहायता देने के लिये सीएम, विधि मंत्री, बार कौंसिल आदि में आवेदन लगाये गये। हाईकोर्ट में भी केस लगाया गया। जरूरतमंदों की तादात ज्यादा थी, मदद कुछ को ही मिल पाई। यह संख्या कुल इस पेशे से जुड़े में से एक या दो फीसदी ही रही। अब जरा यूपी पर निगाह डालिये। वहां सीएम ने घोषणा की है कि इस पेशे से जुड़े लोगों को पांच लाख रुपये तक की एकमुश्त मदद की जायेगी। जो पात्रता रखते हैं उन्हें आवेदन जमा करने कहा गया है।

अपने राधेश्याम बारले

कर्नाटक में लोक वाद्य और पर्यावरण पर विशिष्ट योगदान करने वाले हजब्बा और तिम्मक्का पर खूब चर्चा हुई कि वे नंगे पांव राष्ट्रपति से पद्म पुरस्कार लेने के लिये पहुंचे। पर पंथी नृत्य को नई ऊंचाई देने वाले अपने छत्तीसगढ़ के राधेश्याम बारले ने भी तो नंगे पांव ही राष्ट्रपति से सम्मान ग्रहण किया। इसकी बात मीडिया पर कम हुई इसलिये तस्वीर साझा की जा रही है।

कुछ सवाल आपके मन में उठ सकते हैं मसलन, नंगे पांव क्यों गये राधेश्याम? वेशभूषा तो सलीके ही है। कोविंद जी के पास नंगे पांव दिखाकर छत्तीसगढ़ की हालत बतानी है क्या? कुल मिलाकर क्या नंगे पांव दिखाने के पीछे कोई राजनीति है?

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : राज्यपाल ने रिपोर्ट पढ़ ली तो?
10-Nov-2021 6:41 PM (104)

राज्यपाल ने रिपोर्ट पढ़ ली तो?
झीरम घाटी आयोग की रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार पेशोपेश में है। न्यायिक जांच आयोग और राज्यपाल दोनों ही राजनीतिक व्यक्ति या संगठन नहीं इसलिये संभलकर बोलना पड़ रहा है। आयोग से नहीं पूछा जा सकता कि आपने हमें न देकर रिपोर्ट राज्यपाल को क्यों दी? राज्यपाल से भी नहीं कह सकते कि दी तो आपने क्यों रख ली?  

मीडिया से आयोग और राज्यपाल को प्रतिक्रिया मिल रही होगी पर वे अपनी संस्थागत मर्यादाओं के चलते जवाब नहीं देंगे। अभी तो रिपोर्ट राज्यपाल को सिर्फ दी गई है। रिपोर्ट पढ़ी और उस पर उनकी कोई टीप आती है तो फिर उस पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया होगी? राज्यपाल ने रिपोर्ट को देखने की बात तो कह ही दी है। मंडी बिल और यूनिवर्सिटीज़ का नाम बदलने के विधेयकों के रुकने के बावजूद दूसरे कुछ राज्यों की तरह, सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव की स्थिति प्रदेश में अब तक नहीं बनी। पर, झीरम सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिये बड़ा संवेदनशील मुद्दा है। जांच आयोग की रिपोर्ट से कहीं यह नौबत तो नहीं आने वाली है?

जिम्बाबवे तकनीक से शिफ्टिंग
कानन पेंडारी जू में चीतलों की संख्या फिर बढ़ी है। यहां चीतलों की उछल-कूद के लिये मैदान काफी बड़ा है पर प्रजनन भी उतनी ही तेजी से होता है। इनकी अच्छी देखभाल की जाती है और जब संख्या बढ़ जाती है तो किसी अभयारण्य में छोड़ दिया जाता है। इस बार भी अधिक चीतलों को अचानकमार, तैमोर पिंगला और गुरुघासीदास उद्यान में छोडऩे की तैयारी चल रही है। पहले देखा गया है कि चंचल प्रकृति के चीतलों को वाहनों में भरने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। पर इस बार इन्हें पकडऩे के लिये बोमा तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक फिसलन वाली रैंप तैयार की जा रही है, जिसकी प्रवेश करते समय तो चौड़ाई  40 मीटर है पर आगे चलकर संकरा होते हुए यह 1.5 मीटर ही रह जाता है। पूरे रैंप में चीतल के लिये आहार फैला दिये जाते हैं। जैसे ही डेढ़ मीटर का फासला खत्म होता है, उन्हें गाड़ी में भर लिया जाता है। इसे बोमा तकनीक कहते हैं जो जिम्बाबवे में अपनाई जाती है। छत्तीसगढ़ में पहली बार इसका प्रयोग किया जा रहा है।

वही घोड़ा, वही मैदान
कांग्रेस का सदस्यता अभियान चल रहा है। जिला पदाधिकारियों पर जिम्मेदारी है कि प्रदेश में तय किये गये लक्ष्य के अनुरूप 10 लाख सदस्य बनाने के लिये अपना जोर लगायें। इसके चलते कार्यकर्ताओं की एक बार फिर पूछ-परख बढ़ी है, बैठकें ले जा रही है। मरवाही उप-चुनाव में कांग्रेस को रिकॉर्ड तोड़ जीत के मुकाम तक पहुंचाने वाले कार्यकर्ता दुखी और नाराज हैं। यह नाराजगी वही है जो हर जगह कांग्रेस की बैठकों से निकलकर आ रही है। कार्यकर्ताओं से जब कहा गया कि ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने के लिये जुट जायें तो साफ पूछा गया कि किस मुंह से जायें? अधिकारी निरंकुश हो गये हैं। कार्यकर्ताओं का काम करना तो दूर वे बात करना भी पसंद नहीं करते। अपना काम तो छोडिय़े किसी फरियादी, जरूरतमंद का भी काम नहीं करा पाते। चुनाव आने पर ही हमें पूछा जाता है और घोड़े की तरह मैदान में दौड़ा दिया जाता है। अब सदस्यता के लिये दौडऩे कहा जा रहा है। कृषि, बिजली, राजस्व, शिक्षा विभाग में समस्याओं, शिकायतों की अर्जियां धूल खा रही हैं। काम होंगे नहीं तो कैसे किसी से कहें कि सदस्य बनो। (rajpathjanpath@gmail.com)

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : 108 फीट भगवा ध्वज लगाने की अर्जी
09-Nov-2021 6:15 PM (79)

108 फीट भगवा ध्वज लगाने की अर्जी

कवर्धा के लोहारा चौक पर क्या 108 फीट भगवा ध्वज आने वाले दिनों में लहराने लगेगा?  एक संगठन श्री शंकराचार्य जनकल्याण न्यास ने इस चौक के पास 10 वर्गफीट जमीन की मांग प्रशासन ने की है। कलेक्टर का जैसा बयान आया है कि इसके लिये प्रक्रिया शुरू हो गई है। दावा आपत्ति ली जायेगी फिर शासन को रिपोर्ट भेज दी जायेगी। निर्णय शासन ही लेगा। दूसरी तरफ न्यास की ओर से एक चेतावनी भी है। यदि प्रशासन स्थान उपलब्ध नहीं कराता है तो भी 10 दिसंबर को शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई में यहां ध्वजारोहण होगा। कवर्धा जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर अभी-अभी थोड़ी राहत मिली है। उम्मीद ही कर सकते हैं कि आगे भी माहौल अच्छा बना रहेगा।

नगर निगमों के चुनाव की आहट   

काफी संभावना है कि प्रदेश के चार नगर-निगम बिरगांव, रिसाली, चरोदा और भिलाई के चुनाव दिसंबर-जनवरी में हों। कोविड के कारण ये चुनाव टल रहे थे पर अब सभी संबंधित जिलों में इसकी तैयारी हो रही है। कहा जा रहा है कि इन नगर निगमों के परिणामों से एक आकलन लगाया जा सकेगा कि सरकार के कामकाज को लेकर लोगों में क्या राय है। विधानसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले उप-चुनावों में भाजपा की स्थिति लगातार कमजोर होती गई। पिछले कुछ समय से विपक्ष के तौर पर उसकी सक्रियता बढ़ी दिखाई दे रही है। इन चुनावों में उसे अपना प्रदर्शन सुधारने का अवसर मिल सकता है। बिरगांव ऐसी सीट है जहां जनता कांग्रेस का भी ठीक-ठाक प्रभाव है।

अब प्रदेश में महापौर पार्षदों के जरिये चुने जा रहे हैं। इस पद्धति को अपनाने के चलते पिछले चुनाव में कांग्रेस को फायदा भी हुआ था। इन चारों नगर-निगमों क्या स्थिति बनती है, देखना रोचक होगा।

बस्तर के बांस की साइकिल

वैसे तो धातु की बनी साइकिल भी अपने आप में ईको फ्रैंडली है, पर बस्तर के युवा मो. आसिफ खान ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए बांस की साइकिल तैयार की है। इस साइकिल में चेचिस, सीट, सीट कवर, हैंडल व मडगार्ड बांस से बने हैं। अनूठी बात यह है कि इसमें बस्तर की शिल्प कला भी उकेरी गई है। अब इसका व्यावसायिक रुप से उत्पादन भी शुरू किया गया है। देशभर में बिक्री के लिये फ्लिपकार्ट के साथ करार किया जा चुका है। अमेजॉन से भी बात चल रही है। यानि इस साइकिल के लिये ऑनलाइन ऑर्डर भी लिये जायेंगे। बेंगलूरु, मुंबई आदि शहरों से पहले भी बांस की साइकिल बनाने और इस्तेमाल करने की खबरें आई हैं। मुंबई के कैप्टन शशि पाठक ने तो आसिफ का मार्गदर्शन भी किया है। विदेशों में भी बांस की साइकिलों का चलन है पर बस्तर की साइकिल की डिजाइन ज्यादा आकर्षक है और फिर शिल्पकला तो शायद पहली बार साइकिल पर उकेरी गई है।    

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सोशल मीडिया पोस्ट के खतरे
08-Nov-2021 7:09 PM (83)

सोशल मीडिया पोस्ट के खतरे

छत्तीसगढ़ सरकार ने अब हर जिले में सोशल मीडिया निगरानी टीम बनाने के लिये कलेक्टर्स को निर्देश दिया है। कई जिलों में यह टीम बन चुकी है।लगता है सभी जिलों में कुछ समय के बाद बन जायेगी। यह टीम देखेगी कि कोई पोस्ट भडक़ाऊ तो नहीं, समाज में अशांति फैलने का उससे खतरा तो नहीं है? छत्तीसगढ़ में कुछ लोग पहले गिरफ्तार किये जा चुके हैं जो अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कुछ नेताओं को को टारगेट करते हुए पोस्ट डाले। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी संभवत: कवर्धा की घटना का दोहराव न हो, इसलिये बनाई गई है। पर, यदि सोशल मीडिया पोस्ट पर त्रिपुरा जैसी कार्रवाई हो जाये तो? वहां सीधे-सीधे यूएपीए के तहत 102 लोगों पर अपराध दर्ज किया गया है, जिसमें 7 साल की सजा है और आसानी से जमानत भी नहीं। इनमें त्रिपुरा इज बर्निंग नाम से ट्विटर पर पोस्ट डालने वाले श्याम मीरा सिंह, कई एक्टिविस्ट और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के मेम्बर्स हैं। केस 68 ट्विटर पोस्ट, 32 फेसबुक पोस्ट तथा दो यू ट्यूब पोस्ट के चलते दर्ज किये गये हैं। त्रिपुरा में पहले भी दो पत्रकारों पर ये धारायें लगाई जा चुकी है। यूपी में कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी पर पोस्ट डालने वालों पर ये एक्ट लग गया। संयोग यह है कि यूपीएपी कानून यूपीए सरकार के समय लाया गया था और ज्यादा इस्तेमाल भाजपा की सरकारें कर रही हैं। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी भी छत्तीसगढ़ में मौजूदा कांग्रेस सरकार लेकर आई है। मॉनिटरिंग कमेटी कब कौन सी पोस्ट, कब यूएपीए लगाने के लायक समझ लेगी कह नहीं सकते। इसलिये, क्योंकि कमेटी एक बार बन गई है, आगे भी कायम रहेगी, सरकारें तो बदलती रहेंगीं।

धर्मान्तरण मुद्दा बनकर रहेगा?

अंबिकापुर में कल एक पादरी और उनके एक सहयोगी पर प्रलोभन और झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करने के आरोप में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज कराई। दुर्ग के रेलवे इलाके में पुलिस ने  रविवार को ही ईसाई समुदाय की शिकायत पर 20-25 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। इनका आरोप है कि प्रार्थना कक्ष में घुसकर कुछ लोगों ने मारपीट की, दान पेटी लूट ली। रायपुर में थाने के भीतर पादरी की पिटाई की घटना तो हो ही चुकी है। कवर्धा का मामला भी सबके सामने है। मान लेना चाहिये कि छत्तीसगढ़ में एक नया चुनावी मुद्दा आकार ले रहा है, जो आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में काम आ सकता है।

राजनीतिक नुकसान की चिंता

खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने सरगुजा के चिरंगा गांव में दी गई एलुमिना प्लांट की अनुमति रद्द करने की मांग करते हुए सीएम को पत्र लिखा है। शायद इसलिये कि मतदाता जान लें। अपनी जिम्मेदारी उन्होंने पूरी कर दी है, बाकी फैसला ऊपर लिया जायेगा। इस पत्र से खास बात यह निकली है कि उन्हें अपने और कांग्रेस के वोटों तथा राजनीतिक नुकसान की चिंता है। दरअसल, ग्रामीणों ने पहले ही यह स्थिति पैदा कर दी है कि प्लांट का काम आगे बढ़ नहीं पा रहा है। फैक्ट्री के लिये कोई गाड़ी गांव में घुस नहीं पा रही है। लोग घेर लेते हैं, रतजगा कर रहे है। चिरंगा में चाहे जितने वोटर हों लेकिन उनके विरोध की खबर आसपास के गांवों में भी फैल रही है। पूर्व मंत्री गणेशराम भगत ने आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दे डाली है। मंत्रीजी का समर्थन को लेकर चिंतित होना जायज है। उनको श्रेय जाता है कि वे सत्ता में रहकर भी सरकार को उसके किसी फैसले पर आगाह कर रहे हैं। वरना, हसदेव अरण्य मामले में तो कुछ बयानों को छोड़ दें तो आम तौर पर चुप्पी ही है। किसी को अपना वोट बिगडऩे की चिंता नहीं, चाहे वह जनप्रतिनिधि पक्ष का हो या विपक्ष का।

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा

कौन से जनप्रतिनिधि किस सरकारी कार्यक्रम में बुलाये जायेंगे, कौन नहीं, इसका फैसला अधिकारी करते हैं। ऐसे आयोजनों में सम्मानजनक तरीके से बुलावे के लिये अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से जाकर मिलना चाहिये। पर, स्थापित परंपरा और दिशानिर्देशों की परवाह नहीं की जा रही है। कोरबा में हुई राज्य स्तरीय शालेय क्रिकेट प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह के निमंत्रण पत्र से वहां की सांसद ज्योत्सना महंत का नाम गायब था। पता चला कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया। जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय टेकाम को भी बुलाना जरूरी नहीं समझा गया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर विधायक पुरुषोत्तम कंवर और मोहित राम केरकेट्टा का नाम तो कार्ड में लिखा गया लेकिन वे नहीं पहुंचे। कार्ड में नाम डालकर बुलाना भूल गये होंगे। जिले के शीर्ष अधिकारी भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। आम तौर पर ऐसे मामलों से प्रभावित, उपेक्षित जनप्रतिनिधि जब सत्ता में होते हैं तो चुप रहना ही ठीक समझते हैं। उन्हें लगता है कि अपनी ही सरकार को परेशानी में क्यों डालना। पर बिलासपुर के विधायक शैलेष पांडे ने कुछ दिन पहले सीएम को चि_ी लिखकर कलेक्टर पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने और हटाने की मांग कर चुके हैं। राज्योत्सव के आमंत्रण पत्र से शहर का विधायक होने के बावजूद उनका नाम गायब तो था ही, बुलाया भी नहीं गया। ऐसे मामलों में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि अफसरशाही पहले के सरकार में ज्यादा हावी थी या अब है।

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : तोहफों का सैलाब धीमा
07-Nov-2021 6:54 PM (128)

तोहफों का सैलाब धीमा

दीवाली के मौके पर गिफ्ट का चलन कोई नया नहीं है। मंत्रालय में तो अफसर-कर्मियों को गिफ्ट देने के लिए कंपनियों के प्रतिनिधि, ठेकेदार, और अन्य प्रभावशाली लोगों की भीड़ देखने को मिलती रही है। पिछले साल तो कोरोना की वजह से एक तरह से सूना रहा, लेकिन इस बार थोड़ी रौनक देखने को मिली।

त्योहार को लेकर किसी तरह की रोक-टोक न होने के बावजूद गिफ्ट देने वालों की अपेक्षाकृत भीड़ कम देखने को मिली। वजह यह है कि सीएस अमिताभ जैन ने तो हिदायत दे रखी थी कि दीवाली की बधाई देने न आएं। लिहाजा भीड़ छँट गई।

सचिव स्तर के एक अफसर ने बाहर से आए कंपनियों के प्रतिनिधियों से गिफ्ट लेने से तो परहेज नहीं किया, लेकिन उन्होंने सारे गिफ्ट अपने स्टाफ के लोगों के बीच बांट दिया। स्टाफ के लोगों के पास इतने गिफ्ट आ गए कि वो प्राइवेट गाड़ी में घर गए।

अमिताभ जैन की तरह पूर्व मुख्य सचिव सुनिल कुमार के तेवर रहे हैं। सुनिल कुमार का खौफ इतना था कि लोग उनसे दीवाली या नववर्ष के मौके पर मिलने गिफ्ट लेकर जाना, तो दूर गुलदस्ता लेकर जाने में भी कतराते थे।

मरकाम टीम से दो-दो हाथ

कांग्रेस से निलंबित निगम अध्यक्ष सन्नी अग्रवाल अब मोहन मरकाम, और उनकी टीम से दो-दो हाथ करते दिख रहे हैं। सदस्यता अभियान के शुरू होने के मौके पर पिछले दिनों सीएम भूपेश बघेल राजीव भवन पहुंचे, तो वहां सन्नी ने अपने साथियों के साथ भूपेश के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।

शहरभर में पोस्टर लगवाए जिसमें मरकाम की तस्वीर गायब थी। पोस्टर में सिर्फ सीएम के अलावा गिरीश देवांगन, और रामगोपाल की तस्वीर थी। दीवाली के मौके पर अपने से जुड़े लोगों, और मीडिया कर्मियों को खूब गिफ्ट बांटे। मरकाम त्योहार मनाने कोंडागांव चले गए। उनकी टीम का हाल यह रहा कि वो दीवाली के बधाई संदेश तक कार्यकर्ताओं तक नहीं पहुंचा पाए। ऐसे में सन्नी जैसे लोग भारी तो पड़ेंगे ही।

सेव फॉरेस्ट, स्टॉप अदानी

ग्लास्को में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कांफ्रेंस के बाहर करीब 1 लाख लोगों ने अपने-अपने तरीके से धरती को प्रदूषण से बचाने और पर्वावरण को सुरक्षित रखने के लिये शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इसमें भारत के भी लोग थे और इन भारतीयों में कुछ ऐसे लोग जिनका संपर्क, संबंध छत्तीसगढ़ से है। इन लोगों ने हसदेव के जंगलों को बचाने के लिये पोस्टर और नारों के जरिये आवाज उठाई। एक वीडियो ट्विटर पर साझा हुआ है- फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया पेज पर। इसमें हसदेव अरण्य में अदानी को दी गई अनुमति रद्द करने की मांग की जा रही है। उनके हाथ में पोस्टर हैं जिन पर लिखा है, सेव फॉरेस्ट, स्टॉप अदानी। सरगुजा और कोरबा के जंगल से पैदल चलकर पहुंचे प्रभावित ग्रामीणों के बारे में राजधानी रायपुर के अधिकारियों को तो पता नहीं चला, पर यह यात्रा दुनिया के अलग-अलग कोनों में लोगों का ध्यान खींच रही है। याद होगा, इसी यात्रा के बाद स्वीडन की प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी हसदेव अरण्य को बचाने के लिये ट्वीट किया था।

रेल्वे और फिल्म शूटिंग

रेलवे ने छत्तीसगढ़ की खूबसूरती की फिल्म शूटिंग को पहले से ज्यादा आसान कर दिया है। रेलवे ट्रैक और स्टेशनों में शूटिंग के लिए रेलवे जोनल मुख्यालय में सिंगल विंडो सिस्टम शुरू कर दिया है। इसके पहले लोग बिना अनुमति के छोटी मोटी शूटिंग या यूट्यूब ब्लॉग बना लेते थे। अधिकारिक तौर पर फिल्म शूटिंग के लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी लेनी पड़ती थी। मुंबई हावड़ा रूट, कटनी रूट  हो या विशाखापट्टनम और बस्तर की रेल लाइन, खूबसूरती छत्तीसगढ़ में सब तरफ बिखरी हुई है।  छत्तीसगढ़ में फिल्में भी खूब बनती है। रेलवे के गलियारे में शूटिंग का मौका मिलने से उम्मीद कर सकते हैं कि छत्तीसगढ़ की विशेषताओं को ज्यादा अच्छी तरह से देश दुनिया में दिखाया जा सकेगा। बॉलिवुड और देश-दुनिया के फिल्म निर्माता भी छत्तीसगढ़ को शूट करने पहुंच सकते हैं।

सरकार योजना बना रही, लोग पैसे खाने में लगे

सरगुजा संभाग में संरक्षित पिछड़ी जनजातियों के साथ जो मजाक होता रहा है, उसका एक और उदाहरण सामने आया है। लुंड्रा ब्लॉक में पहाड़ी कोरवा युवाओं को ड्राइविंग ट्रेनिंग देने के लिए एक एनजीओ को एक लाख रुपये दिये गये। ट्रेनिंग के नाम पर उन्हें जीप की ड्राइविंग सीट पर बिठाया गया और फोटो खींच ली गई। चाय नाश्ता करा कर उन्हें वापस भेज दिया गया। हालत यह है कि जिन 30 युवकों को ड्राइविंग सिखाने का दावा किया गया है वे चार पहिया वाहनों में चाबी तक नहीं लगा पाते। मामले ने तूल पकड़ा जब पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि आप तो स्वयं आदिवासी अधिकारी है इसके बावजूद युवकों को ठगा गया और आप अन्याय होते देख रहे थे। अधिकारी ने सफाई दी कि जिनको ट्रेनिंग दी गई है और युवाओं को सर्टिफिकेट भी बांटा गया है। भगत ने कहा कि ठीक है सर्टिफिकेट देने से कोई ट्रेंड हो जाता है तो मैं आपको पायलट का सर्टिफिकेट देता हूं, प्लेन उड़ा कर बताओ। बहरहाल, अब मामले की जांच शुरू हो गई है और जिस एनजीओ ग्रामीण साक्षरता सेवा संस्थान का नाम इस घोटाले में आ रहा है, मालूम हुआ है कि इसके संचालक अब उन युवाओं से संपर्क करके झूठा बयान देने के लिए 30-30 हजार रुपए का प्रलोभन दे रहे हैं। देखते हैं भगत का हडक़ाना काम आता है या एनजीओ का प्रलोभन।

फोन पर जमीन में निवेश का ऑफर

कोरोना की लहर कमजोर होने के बाद कारोबार के हर क्षेत्र में रफ्तार दिखाई दे रही है। इतनी हिम्मत आई है कि त्यौहारों के सीजन में लोग जमीन, मकान, फ्लैट आदि पर निवेश करने के लिये लोग आगे आ रहे हैं। जो रेरा से पंजीकृत हैं और तमाम शासकीय अनुमति ले चुके हैं वे तो अपने प्रोजेक्ट को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और हर तरह की मीडिया में बेझिझक कर रहे हैं लेकिन जिन लोगों के प्रोजेक्ट अधिकृत नहीं हैं वे ऐसा नहीं कर सकते। रेरा में शिकायत के बाद उन पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे लोगों ने मोबाइल फोन के जरिये ग्राहकों तक पहुंचने का रास्ता चुना है। वे वाट्सएप, मैसेज, फोन कॉल और यहां तक ई मेल के माध्यम से लोगों तक पहुंच रहे हैं। सस्ते और एक हद तक अविश्वसनीय दाम पर मिलने वाले फ्लैट, मकान, जमीन के ऑफर को लेकर लोगों में आकर्षण होता है पर वे धोखा खा सकते हैं।

इसे लेकर शिकायतें रेरा को भी मिल रही हैं। उसने अब एसएमएस पर भी निगरानी करनी शुरू की है। हाल के दिनों में सात ऐसे प्रोजेक्ट उनके ध्यान में आ चुके हैं जिनके पास वैध अनुज्ञा और रेरा से पंजीयन नहीं है। इन सबको नोटिस देकर खरीदी-बिक्री बंद करने की चेतावनी दी गई है और लोगों को भी आगाह किया गया है। अभी सिर्फ सात परियोजनाओं पर रेरा की निगाह पड़ी है, पर न केवल राजधानी बल्कि पूरे प्रदेश में प्राय: सभी विकसित हो रहे शहरों में ऐसी अवैध खरीदी बिक्री के ऑफर आ रहे हैं। ज्यादा समझदारी इसी में है कि एसएमएस और वाट्सएप पर दिये जाने वाले ऑफर पर भरोसा ही नहीं किया जाये वरना धोखा हो सकता है।

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