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पेले हुए 80 साल के: मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी की 9 अनसुनी कहानियां
23-Oct-2020 11:02 AM 31
पेले हुए 80 साल के: मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी की 9 अनसुनी कहानियां

photo credit : wikimedia

1977 में खेल से रिटायरमेंट लेने वाले पेले, आज भी दुनिया के सबसे मसहूर खिलाड़ियों में से एक हैं.

पेले तीन फ़ुटबॉल विश्व कप जीतने वाली टीमों का हिस्सा रहे हैं. ऐसा करने वाले वो दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं. अपने करियर में 1363 मैच खेलने वाले पेले ने रिकॉर्ड 1281 गोल किए.

उनके खेल और रिकॉर्ड से जुड़े सैंकड़ों किस्से दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं लेकिन इतिहास के इस सबसे प्रसिद्ध खिलाड़ी से जुड़ी कुछ ऐसी बाते हैं जो कई लोगों को नहीं पता. पढ़िए ऐसे ही कुछ रोचक किस्से.

पेले के कारण रेफ़री को बाहर जाना पड़ा

18 जून 1968 को बोगोटा की बात है. पेले के क्लब सैंटोस और कोलंबियन ओलंपिक स्वॉड के बीच एक फ्रेंडली मैच चल रहा था. इस दौरान रेफ़री गूइलेरमों वेलासक्वेज़ ने पेले को मैदान से बाहर जाने के लिए कहा. (रेड कार्ड का इस्तेमाल 1970 में शुरू हुआ था). उन पर फाउल करने का आरोप था. वेलाक्वेज़ के मुताबिक पेले ने उनके साथ बदतमीज़ी की थी.

लेकिन रेफ़री के इस फ़ैसले पर बहुत बड़ा विवाद हो गया और इसका विरोध शुरू हो गया. सैंटोस के खिलाड़ियों ने रेफ़री को घेर लिया. मैच की तस्वीरों में देखा जा सकता था कि वेलाज़क्वेज़ की आंखे काली हो गईं थीं.

वहां मौजूद दर्शकों ने भी उनका विरोध किया. 2010 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा. अपनी सीटी उन्होंने एक लाइन्समैन को दे दी और पेले को गेम में वापस बुला लिया गया.

क्या पेले ने वाकई एक युद्ध रोका था?

1960 के दशक में पेले की सैंटोस एफ़सी दुनिया के सबसे मशहूर फ़ुटबॉल क्लबों में से एक थी. इसका फ़ायदा उठाकर ये टीम दुनियाभर में कई फ़्रेंडली मैच खेला करती थी. ऐसा ही एक मैच नाईजीरिया के युद्धग्रस्त क्षेत्र में 4 फ़रवरी 1969 को खेला गया था. इस मैच में सैंटोस क्लब ने बेनिनि सिटी के एक स्थानीय क्लब को 2-1 से मात दी थी.

उस वक्त नाईजीरिया में एक ख़ूनी गृहयुद्ध चल रहा था. इतिहासकार ग्यूहरमें गॉरचे के मुताबिक़ ब्राज़ील के खिलाड़ी और अधिकारी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, इसलिए दोनों पक्षों ने युद्धविराम का फ़ैसला किया.

इस कहानी की सत्यता को लेकर अलग-अलग बातें कही जाती हैं. पेले की पहली आत्मकथा जो कि 1977 में छपी थी, उसमें इस बारे में कुछ नहीं लिखा गया था.

लेकिन 30 सालों के बाद छपी एक दूसरी आत्मकथा उन्होंने इसका ज़िक्र ज़रूर किया था. उन्होंने लिखा कि खिलाड़ियों को बताया गया था कि, "गृहयुद्ध एक एक्ज़ीबिशन गेम के लिए ख़त्म हो सकता था. "

पेले ने लिखा, "मुझे नहीं पता कि ये पूरी तरह से सही है या नहीं, लेकिन नाइजीरीया ने ये ज़रूर सुनिश्चित किया कि जिस वक़्त हम वहां मौजूद थे, उस समय वहां किसी तरह की घुसपैठ न हो."

कैसे पेले ने 'बीटल्स को नीचा दिखाया'

1975 में पेले न्यू यॉर्क कॉसमॉस के लिए खेलने अमरीका के न्यू यॉर्क चले गए. उन्होंने वहा अंग्रेज़ी सीखना शुरू किया.

एक बार वो बीटल्स के पूर्व गायक और गिटारिस्ट जॉन लेनन से टकरा गए. उनके बारे में पेले ने 2007 में लिखा, "लेनन उस समय जापानी भाषा सीख रहे थे."

पेले के मुताबिक़ लेनन ने बताया था कि वो और बीटल्स के उनके दूसरे साथियों ने एक बार इंग्लैंड के एक होटल में ब्राज़ील की टीम से मिलने की कोशिश की थी. पेले ने लिखा कि उन लोगों को ब्राज़ील फुटबॉल एसोशिएशन के डायरेक्टर ने मिलने से रोक दिया.

यूरोप के क्लब के लिए क्यों नहीं खेले पेले?

पेले के आलोचकों का कहना है कि उनका यूरोप के किसी क्लब के लिए नहीं खेलना, उनके लिए फ़ायदेमंद साबित हुआ.

दिक्कत ये थी कि ब्राज़ील के कई दूसरे छोटे-बड़े खिलाड़ियों की तरह जब वो अपने करियर के चरम पर थे, तब उन्हें विदेश जाने से रोका गया.

सैंटोस क्लब ने रियल मैड्रिड और एसी मिलान जैसे क्लब के ऑफ़र ठुकरा दिए थे. उस समय खिलाड़ी कहां खेलेंगे, ये फ़ैसला उनके हाथ में नहीं होता था.

उन्हें ब्राज़ील में ही रखने का दबाव सरकार की तरफ़ से भी था. 1961 में तत्कालीन राष्ट्रपति जैनियो क्वॉड्रोस ने ऐलान किया कि पेले एक "राष्ट्रीय संपत्ति हैं" और उन्हें "एक्सपोर्ट" नहीं किया जा सकता.

हालांकि 1975 पेले एक विदेशी क्लब का हिस्सा बने, उन्होंन न्यू यॉर्क कॉसमॉस नाम की टीम के लिए खेला.

50 साल की उम्र में बने ब्राज़ील के कप्तान

पेले सिर्फ़ एक बार ब्राज़ील के कप्तान बने, इससे पहले हर बार क्लब और देश दोनों की ही टीमों के कप्तानी के ऑफ़र उन्होंने ठुकरा दिए.

राष्ट्रीय टीम से रिटायर होने के 19 सालों के बाद, 1990 में उन्होंने बतौर कप्तान एक दोस्ताना मैच में हिस्सा लिया. ब्राज़ील का मुकाबला 'रेस्ट ऑफ़ द वर्ल्ड' टीम से हुआ.

ये मैच पेले के 50वें जन्मदिन पर खेला गया था. पेले मैच के पहले 45 मिनट के लिए मैदान पर उतरे थे.

जब पेले को 'किडनैप' कर लिया गया

सैंटोस क्लब के खिलाड़ी 5 सिंतबर 1972 को त्रिनिदाद और टोबैगो में खेले जाने वाले एक मैच को लेकर नाखुश थे.

टीम के डिफ़ेंडर ओबेरेदान ने ब्राज़ील के एक अख़बार को 2010 में बताया था, "हम लोग इस बात के लिए तैयार थे गेम को तेज़ी से खेलना है ताकि हम हम अपनी प्लेन में वापस जा सकें."

लेकिन पेले के 43वें मिनट में किए गए गोल के बाद पोर्ट ऑफ़ स्पेन स्टेडियम के दर्शक बेकाबू हो गए.

दर्शक मैदान के अंदर घुस गए और थोड़ी ही देर बार पेले को कंधे पर उठा कर सड़कों पर चलने लगे, जश्न के इस माहौल के बीच पेले को वहां से वापस लाना आसान नहीं था, इसमें कई मिनट लग गए.

सिलवेस्टर स्टेलॉन पड़े फ़ीके

1980 तक सिलवेस्टर स्टेलॉन एक मशहूर नाम बन चुके थे. उनकी फ़िल्म 'एस्केप टू विक्टरी' की शूटिंग 1980 में शुरू हुई थी. ये फ़िल्म दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाज़ियों और कैदियों के टीम के बारे में एक काल्पनिक कहानी थी.

कई पूर्व फ़ुटबॉल खिलाड़ी और तब खेलने वाले खिलाड़ियों के साथ पेले भी इसका हिस्सा था. पेले ने एक सीन में एक्रोबैटिक बाइसाइकिल शॉट भी मारा था.

पेले ने ब्राज़ील की वेबसाइट यूओएल को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि शॉट असल में स्टेलॉन को मारना था.

उन्होंने कहा, "स्क्रिप्ट के मुताबिक़ स्टेलॉन को शॉट मारना था और मैं गोलकीपर था."

पेले ने ज़ोर से हंसते हुए कहा, "लेकिन वो बॉल मार ही नहीं पाए."

गोलकीपर की तरह खेलते पेले

अगर पेले गोलकीपर बने होते, तब भी शायद निराश नहीं करते. सैंटोस क्लब के साथ खेलते हुए उन्होंने चार मैचों में ये भूमिका निभाई थी. इसमें 1964 में खेल गया ब्राज़ीलियन कप का सेमीफाइनल भी है. ब्राज़ील ने सारे मैच जीते, पेले ने किसी भी मैच में एक भी गोल नहीं होने दिया.

दुनिया में सिर्फ एक पेले नहीं है

पेले के फैन्स "देयर इज़ ओनली वन पेले" (दुनिया में पेले सिर्फ़ एक है) गाना गाते हैं लेकिन ये सच नहीं है.

पेले नाम के दुनियाभर में कई लोग हैं, फ़ुटबॉल के मैदान पर भी और बाहर भी. अफ़्रीका के मशहूर खिलाड़ी जिनका नाम अबेदी एयू है, वो अबेदी पेले के नाम से मशहूर है, वो घाना और यूरोप के कई क्लबों के लिए खेलते हैं.

इंग्लैंड के केप वर्डे के डिफेंडर पेड्रो मॉन्टेरो, जो 2006 में साउथ हैंप्टन से जुड़ गए थे, पेले नाम से जाते हैं. ये नाम उन्हें बचपन में दिया गया था.

पेले के मशहूर होने का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि एडसन, वो नाम जिससे पेले को बैप्टाइज़ किया गया था वो भी बहुत मशहूर हुआ.

ब्राज़ीलियन इंस्टीट्यूट ऑफ ज्योग्राफ़ी एंड स्टैटिस्टिक के मुताबिक ब्राज़ील में 1950 के दशक में 43,511 लोगो का नाम एडसन था. दो दशक बाद, जब पेले के गोल की संख्या 1000 पार कर चुकी थी, इस नाम की संख्या 1,11,000 हो गई थी.

एक 'राजा' जो राष्ट्रपति बन सकता था?

1990 में पेले ने ऐलान किया था कि वो 1994 के ब्राज़ील के राष्ट्रपति चुनाव में उतरने के बारे में सोच रहे हैं.

ये कभी सच नहीं हो पाया लेकिन पेले ने राजनीति में एंट्री ज़रूरी मारी. 1995 से 1998 तक वो ब्राज़ील के खेल मंत्री रहे.

उन्होंने उस कानून को बनाने में अहम भूमिका निभाई जो ब्राज़ील के फ़ुटब़ॉल खिलाड़ियों को क्लब चुनने की अधिक आज़ादी देता है - ऐसा जब वो खेलते थ, तब मुमकिन नहीं था.(bbc)

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