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Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में अंतरराज्यीय आवागमन प्रारंभ करने के पूर्व पूरे देश में कोविड-19 के प्रसार की स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए ठोस उपाय सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि अंतरराज्यीय आवागमन आरंभ करने के पहले इस संबंध में व्यापक विचार विमर्श कर ठोस उपाय लागू किए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को पत्र में लिखा है कि देश वर्तमान में कि कोविड-19 के वायरस प्रभावित आपदा से जूझ रहा है। छत्तीसगढ़ देश के सर्वप्रथम राज्यों में से एक है, जहां 18 मार्च को कोविड-19 का पहला मरीज मिलने के बाद 21 मार्च को लॉक डाउन की घोषणा कर दी गई थी। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि आप के निर्णय अनुसार राज्य में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉक डाउन की स्थिति लागू रहेगी ।

श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस के नियंत्रण के उपायों से संबंध में पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में 4 अप्रैल 2020 तक कुल 1590 व्यक्तियों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 1375 व्यक्ति के परिणाम नेगेटिव रहे हैं, 205 की जांच जारी है तथा 10 व्यक्ति कोविड-19 वायरस से पीडि़त पाए गए थे। इन 10 व्यक्तियों में से अब तक आठ व्यक्ति ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं तथा शेष 2 मरीजों की हालत सामान्य बनी हुई है । राज्य में अभी तक कोविड-19 वायरस से किसी की भी मृत्यु नहीं हुई है और ना ही कोई गंभीर रूप से संक्रमित है।

 श्री बघेल ने पत्र में बताया है कि राज्य शासन की ओर से किए गए उपायों एवं अनुशासित जन के सहयोग से अभी तक स्थिति नियंत्रण में है किंतु देश के अन्य भागों में कोविड-19 वायरस पीडि़तों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। जैसे-जैसे कोविड-19 वायरस पीडि़तों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जैसे जैसे कोविड-19 वायरस टेस्ट की संख्या बढ़ेगी, संक्रमितों की संख्या में निरंतर वृद्धि होने की पूर्ण संभावना है। देश में यदि 14 अप्रैल के पश्चात ट्रेन, वायु यातायात एवं अंतरराज्यीय सडक़ परिवहन प्रारंभ किया जाता है, तो यह संभावना है कि छत्तीसगढ़ राज्य में अन्य राज्यों से संक्रमित व्यक्ति आ सकते हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य को नई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी तरह की स्थितियां अन्य राज्यों में भी उत्पन्न होने की पूर्ण संभावना है। (बाकी पेजï 5 पर)

 मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि अंतरराज्यीय आवागमन को प्रारंभ करने का निर्णय लेने से पूर्व व्यापक विचार विमर्श कर ऐसे ठोस उपाय कर लिए जाएं जिससे कि पूरे देश में कोविड-19 प्रसार की स्थिति नियंत्रण में रखी जा सके।

 


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। सरकार ने होटल पिकाडिली का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया है। यहां कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे एम्स के डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ के ठहरने और खाने की व्यवस्था की गई है।

खुद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने ट्वीट कर इस आशय की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने एम्स के स्वास्थ्य कर्मचारियों के ठहरने की व्यवस्था के लिए होटल पिकाडिली का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया है। यहां सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था बिना किसी शुल्क के की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि रायपुर एम्स में कोरोना पीडि़तों का इलाज हो रहा है। अब तक यहां 10 में से 8 मरीज पूरी तरह स्वस्थ्य होकर घर लौट चुके हैं। इसके अलावा 2 और मरीज भी बेहतर स्थिति में हैं। अन्य राज्यों की तुलना में यहां कोरोना संक्रमण काफी कम है और चिकित्सकों की भूमिका की चौतरफा सराहना हो रही है। इसको देखते हुए राज्य सरकार ने चिकित्सकीय कार्य से जुड़े एम्स के मेडिकल स्टॉफ को हर संभव मदद के लिए ठोस पहल कर रही है।

मरीज ने नहीं किया दुव्र्यवहार-एम्स प्रबंधन

एम्स प्रबंधन ने मरीजों द्वारा दुव्र्यवहार संबंधी खबरों का साफ तौर पर खंडन किया है। एम्स प्रबंधन ने अपने मेडिकल बुलेटिन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि कोरबा के नाबालिग कोरोना वायरस के पॉजिटिव रोगी ने चिकित्सकों या अन्य किसी कर्मचारी पर थूकने का कोई प्रयास नहीं किया। रोगी निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप दवा ले रहा है।

उल्लेखनीय है कि एक-दो समाचार पत्रों में (छत्तीसगढ़ नहीं) इस आशय की खबर प्रकाशित हुई है कि एम्स में इलाज करा रहे कोरबा के मरीज ने मेडिकल स्टॉफ के साथ दुव्र्यवहार किया है। जबकि ऐसा नहीं है। एम्स चिकित्सकों के प्रयासों के बाद कोरबा के मरीज की स्थिति बेहतर है और एक-दो दिनों में डिस्चार्ज होने की उम्मीद है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। लॉकडाउन के चलते गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने आज खुद शहर में निकलकर कानून व्यवस्था का जायजा लिया। एसएसपी आरिफ़ शेख ने उन्हें अलग-अलग चौक-चौराहों और सडक़ों का भ्रमण कराया। इस दौरान गृहमंत्री ने शहर ने अलग-अलग जगहों पर तैनात पुलिस अफसरों से चर्चा करते हुए लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए।

कोरोना संक्रमण के चलते शहर में पिछले 12 दिनों से लॉकडाउन जारी है और यहाँ के अधिकांश चौक-चौराहों पर पुलिस टीम तैनात है। लॉकडाउन में भी लोगों की आवाजाही बनी रहने पर जिला एवं पुलिस प्रशासन ने यहाँ और ज्यादा कड़ाई बरतनी शरू कर दी। कल से शहर के अधिकांश इलाकों के चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात हैं और सडकों पर कर्फ्यू से नजारा बना हुआ है। यहाँ दूध, दवा और पेट्रोल को छोडक़र बाकी सब दुकानें बंद करा दी गयी हैं।

दूसरी तरफ सडक़ों पर आने-जाने वाले कुछ वाहन चालकों से कड़ाई से पूछताछ करते हुए उनके वाहन जप्त करने तक की कार्यवाही की जा रही है। पुलिस की ओर से बार-बार यह अपील भी की जा रही है कि लॉकडाउन में लोग कोरोना संक्रमण से बचने अपने घरों में रहें और ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ रहने का प्रयास करें। वे गली-कूचों और सडक़ों पर आ रहे लोगों को यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि लॉकडाउन तोडऩे पर उन्हें जुर्माना के साथ सजा भी हो सकती है।


Date : 06-Apr-2020

रायपुर, 6 अप्रैल।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत लंबित मजदूरी भुगतान और आगामी तीन माह की मजदूरी के लिए शीघ्र राशि जारी करने का अनुरोध किया था। केन्द्र सरकार ने इस पर कार्यवाही करते हुए 685.29 करोड़ रूपए जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। इस राशि में से 404 करोड़ रूपए मजदूरी भुगतान के लिए दिया गया है। साथ ही सामग्री एवं प्रशासनिक मद में व्यय के लिए भारत सरकार द्वारा 281.28 करोड़ रूपए जारी किए गए हैं। इस मद में 88.13 करोड़ रूपए का राज्यांश मिलाकर कुल 773.42 करोड़ रूपए मनरेगा कार्यों मे व्यय किए जाएंगे। 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा केन्द्र सरकार से पत्राचार कर वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए मनरेगा कार्यों के लिए राशि जल्द जारी करने की मांग की गई थी। उनकी पहल पर केंद्र सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में मजदूरी, सामग्री और प्रशासनिक व्यय के लिए यह राशि जारी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में मजदूरी भुगतान की पहली किस्त के रूप में 934.70 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 404.01 करोड़ रूपए राज्य को प्राप्त हो गया है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। लॉक डाउन के बीच सरकार ने स्कूली बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑन लाइन क्लास शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए बकायदा पोर्टल तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक-दो दिनों में वेब पोर्टल लॉच करेंगे।

स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की घर बैठे पढ़ाई के लिए योजना बनाई है। प्रदेश में 14 तारीख तक लॉक डाउन है। कोरोना संक्रमण के चलते आने वाले समय में भी स्कूलों में नियमित पढ़ाई हो पाना मुश्किल दिख रहा है। वैसे भी, जनरल प्रमोशन हो गया है। मई महीने में गर्मियों की छुट्टी भी लग जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई में नुकसान न हो, इसके लिए वेब पोर्टल तैयार किया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला की देखरेख में यह पोर्टल तैयार किया गया है। वैसे तो निजी स्कूलों का ही अपना पोर्टल है। मगर पहली बार प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होगी। जिसे विद्यार्थी डाउनलोड कर सकेंगे।  यही नहीं, शिक्षक भी ऑन लाइन क्लास ले सकेंगे। विद्यार्थी घर बैठे न सिर्फ क्लास में हिस्सा ले सकेंगे बल्कि शिक्षकों से सवाल भी कर सकेंगे। शिक्षक विद्यार्थियों को होमवर्क भी देंगे। इस वेब पोर्टल का नाम ष्द्दह्यष्द्धशशद्य.द्बठ्ठ है।

छत्तीसगढ़ अकेला राज्य है जहां सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को ऑन लाइन क्लास की सुविधा उपलब्ध होगी। (बाकी पेजï 5 पर)

माना जा रहा है कि सरकार के इस प्रयास से लगातार स्कूल बंद होने के कारण पढ़ाई में नुकसान की भरपाई काफी हद तक संभव हो पाएगी। यह सुविधा सिर्फ पहली से दसवीं तक के बच्चों के लिए है। 11वीं और 12वीं के लिए अभी ऑन लाइन क्लास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी और प्राचार्यों को ऑन लाइन क्लास की तैयारियों में जुटने के लिए कहा है। इसके लिए डाइट के अकादमिक सदस्यों को बहुत से कार्य घर बैठकर करने होंगे। इसके लिए तत्काल डाइट के सभी अकादमिक सदस्यों को टेलीग्राम गु्रप में जोड़ते हुए उन्हें अकादमिक कार्यों हेतु सक्रिय रखें। इसके लिए डाइट अकादमिक स्टॉफ छत्तीसगढ़ के नाम से ग्रुप बनाया गया है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 6 अप्रैल।
राज्य में कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम हेतु अब यूएई एवं अन्य देशों से छत्तीसगढ़ आने वाले लोगों का कोरोना टेस्ट प्राथमिकता से किया जाएगा। इसके साथ ही क्वॉरेंटाईन किए गए, उन लोगों का भी कोरोना टेस्ट होगा, जो बीते 28 दिनों की अवधि में ऐसे राज्यों से छत्तीसगढ़ में आए हैं, जहां संक्रमण ज्यादा रहा है। 

यह निर्णय आज यहां स्टेट कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में स्वास्थ्य विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय अधिकारियों की बैठक में लिया गया। गौरतलब है कि यूके से आने वाले सभी लोगों का कोरोना टेस्ट राज्य में पूरा हो चुका है। स्वास्थ्य सचिव श्रीमती सिंह ने स्क्रीनिंग कोर कमेटी को विदेशों एवं अन्य राज्यों से आए लोगों की सैंपलिंग के लिए प्रतिदिन के मान से संख्या का निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के सैंपल कलेक्शन के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित किया जाए। बैठक में राहत शिविरों, क्वॉरेंटाईन सेंटर एवं होम क्वॉरेंटाईन में रखे गए लोगों की मॉनिटरिंग के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई। 

सचिव श्रीमती सिंह ने कहा कि क्वॉरेंटाईन लोगों से संपर्क कर उनके स्वास्थ्य की डेली रिर्पोटिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि लक्षण अथवा स्वास्थ्य में गड़बड़ी की स्थिति में अविलंब इलाज मुहैया कराया जा सके। सचिव श्रीमती सिंह ने डेली रिर्पोटिंग हेतु जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तरीय सर्विलेंस टीम को निर्देशित करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि हेल्प लाईन नंबर 104 पर 7 से 8 हजार काल्स प्रतिदिन आ रहे है। 

क्वॉरेंटाइन लोगों की मॉनिटरिंग एवं मार्गदर्शन के लिए स्टेट हेल्प लाईन सेंटर की क्षमता बढ़ाने एवं यहां चिकित्सक एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम एवं संभावित लोगों की सैंपलिंग के लिए जिलों को व्हीटीएम किट एवं पीपीई किट सहित अन्य सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में स्वास्थ्य संचालक नीरज बंसोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक भुवनेश यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


Date : 06-Apr-2020


छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 6 अप्रैल।
लॉक डाउन के बीच सरकार ने स्कूली बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑन लाइन क्लास शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए बकायदा पोर्टल तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक-दो दिनों में वेब पोर्टल लॉच करेंगे। 

स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों की घर बैठे पढ़ाई के लिए योजना बनाई है। प्रदेश में 14 तारीख तक लॉक डाउन है। कोरोना संक्रमण के चलते आने वाले समय में भी स्कूलों में नियमित पढ़ाई हो पाना मुश्किल दिख रहा है। वैसे भी, जनरल प्रमोशन हो गया है। मई महीने में गर्मियों की छुट्टी भी लग जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई में नुकसान न हो, इसके लिए वेब पोर्टल तैयार किया गया है। 

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला की देखरेख में यह पोर्टल तैयार किया गया है। वैसे तो निजी स्कूलों का ही अपना पोर्टल है। मगर पहली बार प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होगी। जिसे विद्यार्थी डाउनलोड कर सकेंगे।  यही नहीं, शिक्षक भी ऑन लाइन क्लास ले सकेंगे। विद्यार्थी घर बैठे न सिर्फ क्लास में हिस्सा ले सकेंगे बल्कि शिक्षकों से सवाल भी कर सकेंगे। शिक्षक विद्यार्थियों को होमवर्क भी देंगे। इस वेब पोर्टल का नाम ष्द्दह्यष्द्धशशद्य.द्बठ्ठ है।

छत्तीसगढ़ अकेला राज्य है जहां सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को ऑन लाइन क्लास की सुविधा उपलब्ध होगी।  माना जा रहा है कि सरकार के इस प्रयास से लगातार स्कूल बंद होने के कारण पढ़ाई में नुकसान की भरपाई काफी हद तक संभव हो पाएगी। यह सुविधा सिर्फ पहली से दसवीं तक के बच्चों के लिए है। 11वीं और 12वीं के लिए अभी ऑन लाइन क्लास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। 

स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी और प्राचार्यों को ऑन लाइन क्लास की तैयारियों में जुटने के लिए कहा है। इसके लिए डाइट के अकादमिक सदस्यों को बहुत से कार्य घर बैठकर करने होंगे। इसके लिए तत्काल डाइट के सभी अकादमिक सदस्यों को टेलीग्राम गु्रप में जोड़ते हुए उन्हें अकादमिक कार्यों हेतु सक्रिय रखें। इसके लिए डाइट अकादमिक स्टॉफ छत्तीसगढ़ के नाम से ग्रुप बनाया गया है। 


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। कोरोना संक्रमण और संक्रामक रोगों से बचाव एवं व्यक्तिगत स्वच्छता हेतु ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित मास्क की मांग लगातार बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार की पहल पर विभाग द्वारा सूती कपड़े और पीसी कॉटन वस्त्रों से मास्क निर्मित कर रियायती दर पर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार इसके किफायती और बार-बार उपयोग होने वाले एक लाख मास्क की आपूर्ति विभिन्न विभागों को की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से तैयार कराया जा रहा है।

सूती कपड़े से निर्मित इस मास्क की विशेषता है कि इसे डेटॉल या किसी एंटीसेप्टिक से साफ कर अनेक बार उपयोग किया जा सकता है इन विशेषताओं के कारण से यह मास्क धूल, प्रदूषण और संक्रामक रोग की रोकथाम के लिए उपयुक्त है तथा बीस रुपए प्रति मास्क की दर से आसानी से उपलब्ध भी है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव के लिए लगे लॉकडाउन की स्थिति में इस मास्क को क्रय करने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित, बी- 26 सेक्टर-7 विजेता कॉम्प्लेक्स के सामने, न्यू राजेंद्र नगर रायपुर स्थित कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। कोरोनावायरस (कोविड-19)  संक्रमण को रोकने में जहां डॉक्टर पूरी मुस्तैदी  रोगियों की सेवा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नर्सें एवं एएनएम पूरी तरह से इस संक्रमण को रोकने के लिए समुदाय को जागरूक करने का कार्य कर रही हैं। इस मुश्किल घड़ी में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर खुद को और समाज को सुरक्षित रखने की अपील करने वाली कालीबाड़ी अस्पताल रायपुर की सीनियर सिस्टर सुमन सुषमा मसीह कहती हैं कोरोना को हराने हमें रिस्क तो लेना ही होगा।

सिस्टर मसीह का कहना है परिवार और सगे संबंधियों की मदद करने का मौका तो अक्सर मिल जाता है, परंतु विपत्ति के समय लोगों की सेवा कर देश के साथ खड़े होने का मौका कम ही मिलता है। मुझे कोरेंटाइन किए हुए मरीजों की सेवा करने का अवसर तो नहीं मिला है, बावजूद इसके अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को कोरोनावायरस के खतरे से आगाह कर उन्हें सुरक्षित रखने की जानकारी देना मेरी जिम्मेदारी है।

देश को हमारी जरूरत है, हमें अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कार्य करना है और हम करेंगे। सिस्टर का सीधा सामना कोरोना संदिग्धों या फिर पॉजिटिव मरीजों से नहीं हैं परंतु कालीबाड़ी चिकित्सालय की आपात चिकित्सा, डिलीवरी, शिशु वार्ड की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। यहां पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिवारों से बातचीत कर उनकी पूरी जानकारी ले रही हैं और उन्हें कोरोना के खतरों के प्रति जानकारी दे रही हैं। मरीजों से जानकारी लेकर वह संतुष्ट होना चाहती हैं कि वहां पहुंचने वाला मरीज या उनका सगा संबंधी कोरोना संदिग्ध तो नहीं। जब अपने सवालों से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद  ही सिस्टर मसीह मरीजों एवं अन्य लोगों को कोरोना और साधारण फ्लू के लक्षण बताते हुए उनसे बचने उन्हें घर पर रहने की अपील भी कर रही हैं।

37 वर्षों से नर्स की बागडोर संभालने वाली सिस्टर मसीह को उनकी मां से इस पेशे में आने की प्रेरणा मिली। जबलपुर में शिक्षा ग्रहण करने के बाद उनका परिवार रायपुर शिफ्ट हुआ और उन्होंने  पुराने डीके अस्पताल में नर्स की ट्रेनिंग ली। वह बताती हैं नर्स की ट्रेनिंग उन्हें सहज ही मिल गई क्योंकि इस पेशे में लोग उस जमाने में नहीं आना चाहते हैं। परंतु मन में करूणा और सेवा भावना के चलते उन्होंने ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद उनकी पहली पोस्टिंग जबलपुर ( अविभाजित मध्यप्रदेश) में हुई ,परंतु भाई बहनों की जिम्मेदारी होने की वजह से वह सेवा ज्वाइन नहीं कर सकीं। इसके बाद फिर उन्हें साढ़े तीन माह की विशेष ट्रेनिंग के बाद बिलासपुर में पदस्थापना मिली। उन्होंने कुछ दिनों बाद रायपुर में ट्रांसफर करवा लिया और सितंबर सन् 1981 में रायपुर पॉली क्लीनिक में नर्स की कमान संभाली। इसके बाद से जिला अस्पताल में वे निरंतर सेवाएं दे रही हैं। उनके अथक सेवा भावना और कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें शिशु वार्ड, जच्चा बच्चा वार्ड, पोषण पुनर्वास केन्द्र, टीकाकरण और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम इंचार्ज की जिम्मेदारी दी गई। वह अपनी जिम्मेदारी पूरे लगन और मेहनत से निभा रही हैं। सिस्टर मसीह कहती हैं "दो वर्ष बाद मैं सेवानिवृत्त हो जाऊंगी, अस्पताल तो आना नहीं हो सकेगा मगर समाज के उन्नत स्वास्थ्य के लिए अथक प्रयास करती रहूंगी।

स्वास्थ्य-सेवा के पेशे में नर्सों के बगैर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैय्या कराना काफी कठिन है। स्वास्थ्य सेवा में इनका स्थान अहम है। कोरोनावायरस के संक्रमण के इन दिनों में नर्सें सबकुछ भूलकर पूरी मुस्तैदी से लोगों को वायरस से बचने के उपाय सुझा रही हैं। वर्तमान  परिस्थिति कोरोना महामारी के दौरान नि:संकोच  मरीजों के हितों को ध्यान में रखकर डियूटी कर रही हैं, उनके लिए धन्यवाद कहना तो बनता ही है।

 


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। घर पर 7 माह की बच्ची और क्षेत्र के 7 क्वॉरेंटाइन लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी । 28-वर्षीय एएनएम ज्योति निषाद निभा रही हैं दोनों जिम्मेदारियां। शहरी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र, बिरगांव, डेरा परा बिरगांव में पदस्त,ज्योति कहती हैं परिवार और समाज में तालमेल बिठाना और मानव सेवा करना ही एक एएनएम का असली जीवन है ।

ज्योति के क्षेत्र में 7 लोग क्वॉरेंटाइन किए गए हैं जो मुंबई, गोरखपुर, पटना और अन्य प्रदेशों से आए हैं । इन क्वॉरेंटाइन हुए लोगों का रूटीन चेकअप और आसपास के क्षेत्र में रह रहे 50 घरों के सर्वे कार्य का दायित्व  भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसे दिया गया है ।

ज्योति ने बताया औद्योगिक क्षेत्र में स्थित डेरापारा अपने आप में ही एक अलग पहचान रखता है।क्षेत्र में नशाखोरी और ट्रांसपोर्ट का एरिया होने के कारण यहां पर काम करना एक चुनौतीहै । यहां लोग अपनी मस्ती में मस्त है । स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता भी बहुत कम है ।

सऊदी अरब से आए एक व्यक्ति को जब यहाँ क्वॉरेंटाइन किया गया था, वह इस क्षेत्र का पहला क्वॉरेंटाइन का ममला था । लोग बहुत टेंशन में आ गये थे, उनको समझाना भी एक कठिन काम था।

जब हम उनसे मिलने गए तो उनका व्यवहार हमारे प्रति बडा अजीब सा था । लेकिन मैने ठान लिया था मैं इस काम को पूरा करुंगी। मैं उनके पास गई लेकिन लोग एकदम से नहीं खुलते हैं।धीरे-धीरे उनसे बातचीत की तो उन्होंने मुझे अपनी यात्रा हिस्ट्री बताई और  हमने उनको  कोरोनावायरस  के संक्रमण और महामारी पर विस्तार से बताया। हमने उन्हें समझाया उनका क्वॉरेंटाइन होना क्यों जरूरी है।पहले तो वह थोड़े से विचलित हुए , लेकिन बाद में वह मान गए,’’ ज्योति ने बताया ।

यह परिवार सारे नियमों का पालन किया। स्वास्थ्य विभाग ने इस परिवार की नियमित जांच की  और प्रतिदिन उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया जिसका परिणाम यह हुआ उनका क्वॉरेंटाइन का समय आसानी से पूरा हुआऔर क्षेत्र में संक्रमण के फैलने का खतरा भी टल गया ।

ज्योति कहती है परेशानी तब होती है जब लोग कहना नहीं मानते हैं।  कभी-कभी लोगों को समझाने के लिए  काफी मेहनत करनी पड़ती है।उनकी टीम में  एक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, एक डॉक्टर, एक आंगनवाड़ी सहायिका,एक मितानिन और एक मितानिन ट्रेनर है ।क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों का नियमित टेंपरेचर लेना होता है और क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों को हाथ पर सील लगाकर रखा जाता है

ज्योति की 7 माह की बच्ची का ध्यान आजकल उसके पति रख रहे हैं।जब वह काम के लिए निकलती है तो बच्ची का ध्यान भी आता है उसके मन में मरीज से सोशल डिस्टेंस बनाना होता है,क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों से भी निश्चित दूरी बनानी होती है, और सबसे ज़रूरी खुद को भी सुरक्षित रखना होता है क्योंकि घर में बच्ची से मिलना भी होता है।

मैं समुदाय से यही कहना चाहूंगी वह अपने परिवार के साथ-साथ सबके परिवार का ध्यान रखें।अगरआपको लगता है आप अस्वस्थ हैंतो नजदीकी शासकीय चिकित्सालय में संपर्क करें । स्वास्थ्य कार्यकर्ता मितानिन से भी संपर्क करें ताकि कोरोनावायरस जैसी संक्रमित बीमारी को बढऩे से रोका जा सके। मेरा परिवार भी खुश रहे और आपका परिवार भी खुश रहे ।‘’


Date : 06-Apr-2020

महावीर जयंती पर 5 हजार लोगों ने किया सामायिक का पालना, मुख्यमंत्री कोष में दिए 11 लाख

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। वैश्विक महामारी कोरोना के कारण चैत्र मास की तेरस तिथि सोमवार को सकल जैन समाज द्वारा घरों पर रहकर महावीर जयंती मनाई गई। इस अवसर पर सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच राजधानी के 5 हजार लोगों ने अपने-अपने घरों सामायिक का पालना किया। महावीर जयंती की कड़ी में सोमवार रात 7 बजे घरों घर भगवान महावीर की आरती की जाएगी।

महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष ललित पटवा ने बतयाा कोरोना लॉक डाउन के कारण राजधानी में आज भगवान महावीर की शोभायात्रा नहीं निकाली गई।

सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय अनुसार सकल जैन समाज के 5 हजार लोगों ने घरों पर विधिवत रूप से सामायिक का पालना किया। इस दौरान घर के अशक्त बुजुर्गों की भी भागीदारी रही जिसके कारण हर वर्ष की तुलना में इस बार सामायिक में लगभग 2 हजार ज्यादा लोगों की भागीदारी रही। महावीर जयंती के अवसर पर दादाबाड़ी में हर वर्ष आयोजित किया जाने वाला महोत्सव स्थगित रहा लेकिन सकल जैन समाज के लिए ऑनलाइन स्पर्धा की व्यवस्था की गई है।

ललित पटवा कहते हैं हमें खुशी है कि अब तक ऑनलाइन स्पर्धा के जरिए एक हजार से ज्यादा प्रतिभागियों की एंट्री हो चुकी है। स्पर्धा के विजेताओं को हम लॉक डाउन के बाद आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कृत करेंगे।

महावीर जयंती के अवसर पर सकल जैन समाज द्वारा 11 लाख की सहायतार्थ राशि मुख्यमंत्री कोष में दी गई। ललित पटवा ने बताया कोरोना संकट की घड़ी में सकल जैन समाज द्वारा अब तक 2 करोड़ की राशि सहायार्थ खर्च की जा चुकी है। महावीर जयंती की कड़ी में आज रात 7 बजे सकल जैन समाज द्वारा घरों घर दीपक जलाए जाएंगे।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। इस समय पूूरे विश्व में कोरोना वायरस की महामारी विकराल रूप ले चुकी है। हर कोई अपने अपने स्तर पर इसके संबंध अपना योगदान दे रहा है। केंद्र और राज्य के सहायता कोष में लोग आर्थिक सहयोग भी प्रदान कर रहे है। इसी क्रम में छत्तीसगढ उच्च न्यायालय के पत्र जारी कर न्यायाधीशों एवं कर्मचारियों को स्वेच्छा  से अपना एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा करने हेतु निर्देशित किया था।

इसी क्रम में रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम कुमार तिवारी के नेतृत्व में जिले के सभी न्यायाधीशों एवं कर्मचारियों ने भी स्वेच्छापूर्वक अपना एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री सहायता कोष म जमा करने पर सहमति दी। जिले के समस्त न्यायाधीशों एवं सभी कर्म चारियों की ओर से कुल रूपयेे 5,45,125/- अक्षरी पांच लाख पैतालीस हजार एक सौ पच्चीस रूपये जमा कराए गए है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। कोरोना की रोकथाम के लिए किए गए लॉक डाउन की वजह से दैनिक रोजी-मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले परिवारों को राहत पहुंचाने रायपुर जिला प्रशासन को आम नागरिकों से लगातार सहयोग प्राप्त हो रहा है। रायपुर कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन की अपील पर कई सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों और आम लोगों ने राहत पैकेट जिला प्रशासन को प्रदान कर अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

कोरोना की रोकथाम के प्रबंधों के तहत लोग घर पर ही रह कर राहत पैकेट के रूप में अपना सहयोग प्रदान कर सकें, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा डोनेशन ऑन   व्हील्स अभियान शुरू कर रहा है। इसके अंतर्गत 7 अप्रैल से विभिन्न कालोनियों, व्यावसायिक परिसरों में जिला प्रशासन का विशेष वाहन पहुंचकर लोगों से राहत पैकेट संकलित करेगा।

आपातकालीन खानपान व्यवस्था के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंह के अनुसार निर्धन परिवारों को राहत पैकेट प्रदान करने कई संगठन, आवासीय परिसर के निवासी व आम लोग निरंतर संपर्क कर रहे हैं एवं राहत पैकेट तैयार कर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने आगे आ रहे हैं।

इस समय रायपुर में लोगों को घरों पर रहने की समझाइश भी दी जा रही है तथा निषेधाज्ञा लागू कर अनावश्यक घरों में रहने  की अपील लगातार की जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए रायपुर जिला प्रशासन 7 अप्रैल 2020 से डोनेशन ऑन व्हील्स के जरिए आवासीय परिसरों, कालोनियों व विभिन्न प्रतिष्ठानों में अपने वाहनों के साथ पहुंचकर दानदाताओं के निवास से ही राहत पैकेट प्राप्त करेगा। इस राहत पैकेट में 5 किलोग्राम चावल, आधा किलोग्राम दाल, आधा किलोग्राम बेसन, आधा किलोग्राम नमक व एक नग साबुन शामिल करने की अपील दानदाताओं से की गई है। सहयोग की इच्छुक संस्थाएं, व्यवसायिक परिसर व कॉलोनियों के निवासी आदि इस सुविधा का लाभ उठाने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंह के दूरभाष क्रमांक- 9669577888 या रायपुर स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक (जनसपंर्क) श्री आशीष मिश्रा के दूरभाष क्रमांक- 9685792100 पर संपर्क कर वाहन के पहुंचने के दिनांक व समय की जानकारी प्राप्त कर सकते है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने ट्वीट किया है कि छत्तीसगढ़ में डेढ़ साल बाद भी भाजपा का जनाधार बरकरार है। उन्होंने लिखा है कि 5 अप्रैल को 9 बजे  बिजली की खपत 105455 से घटकर 87344 मेगावाट रही। यानी 17 फीसदी की कमी आई। वर्ष 2018 में विधानसभा में 90 में 15 सीट 17 प्रतिशत मिली थी। तब भी 17फीसदी और अब भी 17 फीसदी। फटाखा जुलूस नारे बाकी सब नौटंकी।


Date : 06-Apr-2020

खाद्यान्न वितरण, मनरेगा कार्यों के संबंध में भी की चर्चा

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा स्वास्थ्य मंत्री  टीएस सिंहदेव ने आज बस्तर और सरगुजा संभाग के सभी जिलों के कलेक्टरों से फोन पर चर्चा कर कोविड-19 का संक्रमण रोकने एवं इलाज के लिए की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने गांवों में खाद्यान्न वितरण, मनरेगा कार्यों और ग्राम पंचायतों व प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने लॉक-डाउन के दौरान संवेदनशीलता बरतते हुए जरूरतमंदों को सभी मदद और सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य मंत्री ने कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, सरगुजा, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, जशपुर तथा कोरिया के कलेक्टरों से चर्चा कर कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने, इलाज एवं लॉक-डाउन अवधि में मैदानी स्तर पर की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने जिलों में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर्स और होम-क्वारेंटाइन मे रह रहे लोगों के स्वास्थ्य की भी जानकारी ली।

उन्होंने इनकी लगातार निगरानी सुनिश्चित करने कहा। श्री सिंहदेव ने आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के मुताबिक अधिक से अधिक संदिग्धों के सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजने कहा। उन्होंने जिला अस्पतालों में कोविड-19 के उपचार के लिए सभी आवश्यक इंतजाम यथाशीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

श्री सिंहदेव ने लॉक-डाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों द्वारा लोगों की सहूलियत के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में भी पूछा। उन्होंने हर गांव में पर्याप्त खाद्यान्न रखने कहा। मनरेगा के अंतर्गत संचालित कार्यों में स्वच्छता और सोशल-डिस्टेंसिंग का पालन करने के भी निर्देश दिए। श्री सिंहदेव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए व्यक्तिमूलक और आजीविका संवर्धन के कार्य संचालित किए जाएं। उन्होंने ऐसे कार्यों को शुरू करने कहा जिनमें कम संख्या में श्रमिकों की जरूरत हो।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। प्रदेश में वन विभाग द्वारा चालू सीजन के दौरान अब तक तीन करोड़ 16 लाख रूपए की राशि के 14 हजार 96 क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण हो चुका है। चालू सीजन के दौरान राज्य में 253 करोड़ रूपए की राशि से 8 लाख 46 हजार 920 क्विंटल लघु वनोपजों के संग्रहण का लक्ष्य है। प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ श्री संजय शुक्ला ने बताया कि इनमें निर्धारित लक्ष्य के तहत अब तक वन मंडलवार सबसे अधिक खैरागढ़ वन मंडल द्वारा 839 क्विंटल और जिलेवार सबसे अधिक कबीरधाम जिले में 545 क्विंटल लघु वनोपजों का संग्रहण हो चुका है।

ग्रामीणों तथा वनवासियों द्वारा लघु वनोपजों के संग्रहण में शासन के दिशा-निर्देशों और लॉकडाउन के दौरान नियमों का शत-प्रतिशत पालन किया जा रहा है। राज्य में अब तक संग्रहित वनोपजों में वन मंडलवार खैरागढ़ में 27 लाख रूपए की राशि के 839 क्विंटल, कवर्धा में 13 लाख रूपए की राशि के 545 क्विंटल और जगदलपुर में 80 लाख रूपए की राशि के 3 हजार 37 क्विंटल वनोपज शामिल हैं।

 इसी तरह वन मंडलवार दंतेवाड़ा में 46 लाख रूपए की राशि के एक हजार 573 क्विंटल, कांकेर में 12 लाख रूपए के 762 क्विंटल, बिलासपुर में छह लाख रूपए के 332 क्विंटल, बालोद में ढाई लाख रूपए के 146 क्विंटल और बीजापुर में 15 लाख रूपए के 965 क्विंटल वनोपजों का संग्रहण हो चुका है।

वन मंडलवार बलौदाबाजार में 12 लाख रूपए की राशि के 582 क्विंटल, पश्चिम भानुप्रतापपुर में 4 लाख रूपए के 298 क्विंटल, सुकमा में 16 लाख रूपए के 686 क्विंटल, रायगढ़ में 5 लाख रूपए के 326 क्विंटल तथा दक्षिण कोण्डागांव में 20 लाख रूपए के 889 क्विंटल वनोपजों का संग्रहण कर लिया गया है। वन मंडल नारायणपुर में डेढ़ लाख रूपए के 9 क्विंटल, कोरबा में 7 लाख रूपए के 328 क्विंटल, पूर्व भानुप्रतापपुर में छह लाख रूपए के 271 क्विंटल, राजनांदगांव में एक लाख रूपए के 80 क्विंटल तथा धमतरी में 3 लाख रूपए के 160 क्विंटल वनोपजों का संग्रहण हो चुका है। वन मंडलवार कटघोरा में 4 लाख रूपए के 232 क्विंटल, केशकाल में 5 लाख रूपए के 318 क्विंटल, गरियाबंद में 5 लाख रूपए के 273 क्विंटल, जशपुर में 5 लाख रूपए के 280 क्विंटल, महासमुंद में एक लाख रूपए के 71 क्विंटल और सरगुजा में दो लाख रूपए के 113 क्विंटल वनोपजों का संग्रहण कर लिया गया है। इसी तरह वन मंडलवार सूरजपुर में 3 लाख रूपए के 161 क्विंटल, बलरामपुर में 3 लाख रूपए के 163 क्विंटल, कोरिया में 2 लाख रूपए के 146 क्विंटल, धरमजयगढ़ में एक लाख रूपए के 81 क्विंटल और मनेन्द्रगढ़ में लगभग एक लाख रूपए की राशि के 50 क्विंटल वनोपजों का संग्रहण हो चुका है।


Date : 06-Apr-2020

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर, 6 अप्रैल। कोरोना संक्रमण और संक्रामक रोगों से बचाव एवं व्यक्तिगत स्वच्छता हेतु ग्रामोद्योग द्वारा निर्मित मास्क  की मांग लगातार बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार की पहल पर विभाग द्वारा सूती कपड़े और  पीसी कॉटन वस्त्रों से    मास्क निर्मित कर रियायती दर पर बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार इसके किफायती और बार-बार उपयोग होने वाले एक लाख मास्क की आपूर्ति विभिन्न विभागों को की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से तैयार कराया जा रहा है। सूती कपड़े से निर्मित इस मास्क की विशेषता है कि इसे डेटॉल या किसी एंटीसेप्टिक से साफ कर अनेक बार उपयोग किया जा सकता है इन विशेषताओं के कारण से यह मास्क धूल, प्रदूषण और संक्रामक रोग की रोकथाम के लिए उपयुक्त है तथा बीस रुपए प्रति मास्क की दर से आसानी से उपलब्ध भी है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव के लिए लगे लॉकडाउन की स्थिति में इस मास्क को क्रय करने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित, बी- 26 सेक्टर-7 विजेता कॉम्प्लेक्स के सामने, न्यू राजेंद्र नगर रायपुर स्थित कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।


Date : 06-Apr-2020

विश्व स्वास्थ्य दिवस

रायपुर, 6 अप्रैल। घर पर 7 माह की बच्ची और क्षेत्र के 7 क्वॉरेंटाइन लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी। 28ववर्षीय एएनएम ज्योति निषाद निभा रही हैं दोनों जिम्मेदारियां। शहरी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र, बिरगांव, डेरा परा बिरगांव में पदस्त,ज्योति कहती हैं परिवार और समाज में तालमेल बिठाना और मानव सेवा करना ही एक एएनएम का असली जीवन है ।

ज्योति के क्षेत्र में 7 लोग क्वॉरेंटाइन किए गए हैं जो मुंबई, गोरखपुर, पटना और अन्य प्रदेशों से आए हैं। इन क्वॉरेंटाइन हुए लोगों का रूटीन चेकअप और आसपास के क्षेत्र में रह रहे 50 घरों के सर्वे कार्य का दायित्व  भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसे दिया गया है ।

ज्योति ने बताया औद्योगिक क्षेत्र में स्थित डेरापारा अपने आप में ही एक अलग पहचान रखता है। क्षेत्र में नशाखोरी और ट्रांसपोर्ट का एरिया होने के कारण यहां पर काम करना एक चुनौती है। यहां लोग अपनी मस्ती में मस्त है । स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरूकता भी बहुत कम है।

सऊदी अरब से आए एक व्यक्ति को जब यहाँ क्वॉरेंटाइन किया गया था, वह इस क्षेत्र का पहला क्वॉरेंटाइन का ममला था। लोग बहुत टेंशन में आ गये थे, उनको समझाना भी एक कठिन काम था ।

जब हम उनसे मिलने गए तो उनका व्यवहार हमारे प्रति बडा अजीब सा था। लेकिन मैने ठान लिया था मैं इस काम को पूरा करुंगी। मैं उनके पास गई लेकिन लोग एकदम से नहीं खुलते हैं। धीरे-धीरे उनसे बातचीत की तो उन्होंने मुझे अपनी यात्रा हिस्ट्री बताई और  हमने उनको कोरोनावायरस के संक्रमण और महामारी पर विस्तार से बताया। हमने उन्हें समझाया उनका क्वॉरेंटाइन होना क्यों जरूरी है। पहले तो वह थोड़े से विचलित हुए, लेकिन बाद में वह मान गए,’ ज्योति ने बताया।

यह परिवार सारे नियमों का पालन किया। स्वास्थ्य विभाग ने इस परिवार की नियमित जांच की और प्रतिदिन उनकी आवश्यकताओं को पूरा किया जिसका परिणाम यह हुआ उनका क्वॉरेंटाइन का समय आसानी से पूरा हुआ और क्षेत्र में संक्रमण के फैलने का खतरा भी टल गया ।

ज्योति कहती है परेशानी तब होती है जब लोग कहना नहीं मानते हैं। कभी-कभी लोगों को समझाने के लिए  काफी मेहनत करनी पड़ती है। उनकी टीम में एक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, एक डॉक्टर, एक आंगनबाड़ी सहायिका, एक मितानिन और एक मितानिन ट्रेनर है। क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों का नियमित टेंपरेचर लेना होता है और क्वॉरेंटाइन में रखे गए लोगों को हाथ पर सील लगाकर रखा जाता है

ज्योति की 7 माह की बच्ची का ध्यान आजकल उसके पति रख रहे हैं। जब वह काम के लिए निकलती है तो बच्ची का ध्यान भी आता है उसके मन में मरीज से सोशल डिस्टेंस बनाना होता है, क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोगों से भी निश्चित दूरी बनानी होती है, और सबसे जरूरी खुद को भी सुरक्षित रखना होता है क्योंकि घर में बच्ची से मिलना भी होता है।

मैं समुदाय से यही कहना चाहूंगी वह अपने परिवार के साथ-साथ सबके परिवार का ध्यान रखें। अगर आपको लगता है आप अस्वस्थ हैं तो नजदीकी शासकीय चिकित्सालय में संपर्क करें। स्वास्थ्य कार्यकर्ता मितानिन से भी संपर्क करें ताकि कोरोनावायरस जैसी संक्रमित बीमारी को बढऩे से रोका जा सके।

मेरा परिवार भी खुश रहे और आपका परिवार भी खुश रहे।’

 

 


Date : 06-Apr-2020

मृत शिक्षक के परिवार के लिए फेडरेशन ने मांगा 50 लाख

छत्तीसगढ़ संवाददाता

अंबागढ़ चौकी, 6 अप्रैल। सडक़ हादसे में शनिवार को जान गंवाने वाले मोहला ब्लॉक के मिस्प्री पूर्व माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक दाउराम कोल्हे की मौत पर छग सहायक शिक्षक फेडरेशन ने छग शासन से मृत शिक्षक के वारिसों को 50 लाख का बीमा दिलाने की मांग की है। छग सहायक शिक्षक फेडरेशन ने कहा कि शिक्षक कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन के निर्देश पर अपने स्कूलों के बच्चों के घर-घर तक सूखा राशन दाल-चावल वितरित कर वापस अपने घर लौट रहा था। इस दौरान भोजटोला सांगली मोड़ पर सडक़ दुघर्टना में उसकी मौत हो गई।

छग सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष मनीष मिश्रा, जिलाध्यक्ष शंकर साहू, प्रदेश प्रवक्ता विकास मानिकपुरी, प्रांतीय महामंत्री राजकुमार यादव, प्रांतीय महासचिव प्रेमलता शर्मा एवं अन्य प्रमुख पदाधिकारी कीर्तन मंडावी, शिव कोर्राम, राजकुमार सरजारे, मीतेन्द्र बघेल, राधेश्याम नेताम, सुनील शर्मा, मक्खन साहू, देव यादव, राजेश्वर साहू आदि लोगों ने पूर्व मा. शाला मिस्प्री में पदस्थ शिक्षक दाउराम कोल्हे शासन के निर्देश पर शनिवार को अपने स्कूल के बच्चों के घरों तक 40 दिनों का सूखा राशन दाल-चावल वितरित कर दोपहर को अपने घर लौट रहा था। इस दौरान वह सडक़ हादसे का शिकार हुआ और उसकी मौत हो गई। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन के विशेष निर्देश पर ड्यूटी कर रहा था, इसलिए उसे 50 लाख की बीमित राशि मिलना चाहिए। सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष मनीष मिश्रा ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर मृत शिक्षक के परिजनों को 50 लाख का बीमा राशि दिलाने की मांग की है।

फेडरेशन भी करेगा आर्थिक मदद

छग सहायक शिक्षक फेडरेशन ने अपने साथी दाउराम कोल्हे के आकस्मिक मौत पर गहरा दुख एवं संवेदना व्यक्त करते उन्हें श्रद्धाजंलि दी। फेडरेशन ने कहा कि इस संकट की घड़ी में सभी शिक्षक साथी अपने मृत सहयोगी के परिजनो के साथ है और उनके परिवार को हर संभव मदद एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।

 


Date : 06-Apr-2020

रायपुर, 06 अप्रैल। नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) की रोकथाम में लोगों की सहायता के लिए उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने विधायक निधि से 20 लाख रूपए ‘मुख्यमंत्री सहायता कोष‘ में देने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने अनेक कदम उठाए है, राज्य में लॉकडाउन के दौरान कमजोर वर्ग के लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है।

राज्य शासन द्वारा मजदूरों, बेघरवार लोगों, प्रवासी मजदूरों सहित अन्य पीडि़त लोगों को हर संभव सहयोग और सहयता की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस सहयोग के लिए श्री पटेल को धन्यवाद दिया है। क्रमांक: 26/आनंद/कृष्ण

 


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