छत्तीसगढ़ » बस्तर

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर, 13 नवंबर। बस्तर  विधानसभा के गुमलवाड़ा से लौट रहे मतदान दल पर नक्सलियों ने हमला कर दिया जिससे सुरक्षाबल के दो जवान जख्मी हो गए। 
    बस्तर संभाग में सोमवार को 12 सीटों पर मतदान कराए गए। मतदान के बाद कल ही मतदान पार्टी वापस लौट चुकी थी, लेकिन गुमलवाड़ा क्षेत्र में चुनाव कराने पहुंचे दल शाम को निकली तो नक्सलियों ने उन्हें घेर लिया। इस पार्टी को लगभग 18-20 किलोमीटर पैदल चलकर आना था। पैदल चलते हुए शाम हो गई थी। नक्सली वोटिंग मशीन लूटने के लिए विस्फोट के साथ फायरिंग कर रहे थे। इसलिए मतदान दल को रात वहीं गुजारनी पड़ी। नक्सली रात भर सिलसिलेवार विस्फोट करते रहे। आज सुबह जब यह दल जगदलपुर के लिए रवाना हुआ तो नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मुंतोड़ जवाब दिया जिससे नक्सली भाग खड़े हुए। वहीं मुठभेड़ में दो जवान जख्मी हो गए। अतिरिक्त सुरक्षा बलों के पहुंचने के बाद टीम रवाना हुई और हेलीकाप्टर से सुरक्षित लाया गया।
    ज्ञात हो कि पहाडिय़ों से घिरे इस इलाके तक पहुंचने के लिए मतदान दल को हेलीकाप्टर से ले जाया गया था। इसके बाद इस दल को करीब 20 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।  कल मतदान से पहले नक्सलियों ने बीजापुर के पामेड़ इलाके में भी जमकर फायरिंग की जिसमें 5 जवान जख्मी हुए थे।

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Posted Date : 12-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बस्तर, 12 नवम्बर। विधानसभा चुनाव के पहले चरण की सीटों पर सोमवार को वोट डाले गए। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुबह से मतदान के लिए कतारें लगी रही। दोपहर एक बजे तक कोंटा विधानसभा में 33 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी। एक अन्य नक्सल प्रभावित इलाके सबसे ज्यादा मोहला मानपुर में 52 फीसदी मतदान हो चुका था।  बाकी जगहों पर भी अच्छी वोटिंग हुई। खास बात यह है कि नक्सलियों द्वारा मतदान के बहिष्कार के आव्हान और बीते एक पखवाड़े में नक्सल हिंसा का मतदान पर कोई असर नहीं पड़ा। हर वर्ग के लोगों ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिसा लिया। 
    बस्तर संभाग में नक्सल उत्पात की छिटपुट घटनाएं हुई, लेकिन इसका कोई ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह था। कोंटा जैसे जगह में सुबह 2 घंटे में 10 फीसदी से अधिक मतदान हो चुका था। शुरूवाती 2 घंटे में सबसे कम 2.4 फीसदी वोट बीजापुर में डाले गए। सुबह 11 बजे तक यहां सिर्फ 9.4 फीसदी वोटिंग हुई थी। 
    नारायणपुर विधानसभा में दोपहर एक बजे तक 39 फीसदी वोटिंग हुई। इसके अलावा राजनांदगांव जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाके मोहला मानपुर में साढ़े 52 फीसदी वोट दोपहर एक बजे तक डाले जा चुके थे। बस्तर की आठ सीटों और मोहला मानपुर में दोपहर तीन बजे तक ही मतदान होना है। इसी तरह कोंटा में दोपहर एक बजे तक 33 फीसदी मतदान होने की खबर है। 
    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक सुबह 11 बजे तक कोंडागांव में 33.70, केशकाल में 31.57, खुज्जी में 31 फीसदी, डोंगरगांव में 33 फीसदी, राजनांदगांव शहर में 24 फीसदी, खैरागढ़ में 40 फीसदी, डोंगरगढ़ में 25.5 फीसदी, चित्रकोट में 15 फीसदी, बस्तर में 17 फीसदी,  दंतेवाड़ा में 19 फीसदी और भानुप्रतापपुर में 22 फीसदी पोलिंग हो चुकी थी। बीजापुर में मात्र 9 फीसदी मतदान हो चुका था। 
    यह भी बात सामने आई कुछ जगहों पर ईवीएम खराब हुआ है। इस पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर ने सफाई दी कि मतदान केंद्रों में मतदान सुचारू रूप से जारी है। जहां भी मशीन में कोई भी खराबी आयी वहां या तो मशीन ठीक कर दिया गया या मशीन बदल दिया गया है। जगदलपुर उप जिला निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार जगदलपुर विधानसभा के मतदान केंद्र क्रमांक 117 में कुल 9 मतदाता के नाम ही विलोपित किये गए हैं। 550 मतदाताओं के नाम काटे जाने की शिकायत गलत है। उक्त केंद्र में मतदान शांतिपूर्ण जारी है।

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Posted Date : 11-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बस्तर/राजनांदगांव/रायपुर, 11 नवंबर। विधानसभा के पहले चरण की 18 सीटों के लिए सोमवार को मतदान होगा। इनमें से 10 सीटों में सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान होगा। बाकी सीटों पर शाम 5 बजे तक मत डाले जा सकेंगे। बस्तर और राजनांदगांव जिले के धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दुर्गम मतदान केंद्रों में हेलीकॉप्टर से मतदान दल भेजे गए हैं। सभी सीटों पर प्रचार खत्म होने के बाद प्रत्याशी डोर टू डोर संपर्क पर जोर दे रहे हैं। ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर के आसार हैं। 
    प्रदेश में नई सरकार चुनने के लिए बस्तर संभाग के 7 जिले और राजनांदगांव जिले की 6 विधानसभा सीटों के लिए वोंिटंग होगी।  राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित विधानसभा क्षेत्र मोहला मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर के अलावा केशकाल और कोंडागांव के अलावा केशकाल, नारायणपुर और दंतेवाड़ा, बीजापुर व कोंटा विधानसभा में सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक वोट डाले जाएंगे। पहले चरण में 31 लाख 79 हजार मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पहले चरण की सीटों में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, कांग्रेस विधायक दल के उप नेता कवासी लखमा, पूर्व सांसद श्रीमती करुणा शुक्ला और भाजपा सांसद विक्रम उसेंडी मुकाबले में हैं। राजनांदगांव छह सीटों के लिए 93 उम्मीदवार मैदान में है। जिसमें सर्वाधिक राजनांदगांव से 30, खैरागढ़ विस क्षेत्र से 15 प्रत्याशी, डोंगरगढ़ से 10 प्रत्याशी, डोंगरगांव से 12 प्रत्याशी, खुज्जी से 16 प्रत्याशी तथा मोहला-मानपुर विधानसभा क्षेत्र से 10 प्रत्याशी चुनाव लडेंग़े।
    शनिवार की शाम प्रचार खत्म होने के बाद प्रत्याशियों का डोर टू डोर संपर्क चलता रहा। इन 18 सीटों में से 14 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर के आसार हैं। सिर्फ कोंटा, भानुप्रतापपुर, खैरागढ़, दंतेवाड़ा में ही त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति दिख रही है। इनमें से कोंटा, दंतेवाड़ा में सीपीआई और भानुप्रतापपुर व खैरागढ़ में जोगी पार्टी व आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मुकाबले में दिख रहे हैं। 
    राजनांदगांव विधानसभा समेत खैरागढ़, डोंगरगढ़, डोंगरगांव, मोहला मानपुर तथा खुज्जी में राजनीतिक दलों की किस्मत  पर मतदाता फैसला लेंगे। जिले की सभी छह सीटों पर तकरीबन 11 लाख 17 हजार मतदाता प्रत्याशियों के भाग्य पर बटन दबाएंगे। सर्वाधिक मतदाता खैरागढ़ विधानसभा में है। जहां दो लाख एक हजार 701 मतदाता हैं। 
    प्रस्तावित मताधिकार के लिए जिले के अंदरूनी इलाकों में 98 कंपनियों को सुरक्षा की जवाबदारी दी गई है। बताया गया है कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देश पर समूचे देश से सुरक्षा बलों को राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। बताया गया है कि इस बार नक्सलियों के मंसूबों को पूरा नहीं होने का इरादा लेकर फोर्स ने कमान सम्हाल ली है। देशभर के अलग-अलग राज्यों के जवान शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए तैयार हैं। मिली जानकारी के मुताबिक गोवा, कर्नाटक, बिहार, अरूणाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी सुरक्षा बलों को जिले में भेजा गया है। बताया जाता है कि नक्सलियों की आमदरफ्त वाले इलाकों में फोर्स को सुरक्षा के साथ मोर्चा सम्हालने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। नक्सलियों से निपटने के लिए बाहर से आई पैरामिलिट्री फोर्स को अतिरिक्त सुरक्षा बरतने की हिदायत दी गई है। 

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Posted Date : 11-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    बीजापुर/ कांकेर/ सुकमा, 11 नवंबर। बस्तर में कल सोमवार को वोटिंग से ठीक पहले आज नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर हमले किए। कांकेर में नक्सलियों द्वारा किए गए बम विस्फोट में बीएसएफ का  सब इंस्पेक्टर शहीद हो गया। जबकि एक जवान जख्मी हो गया। वहीं बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़  में एक वर्दीधारी नक्सली मारा गया है।  इधर सुकमा में सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने नक्सलियों द्वारा लगाए गए आधा दर्जन स्पाइक होल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा 8 किलो का प्रेशर बम भी बरामद किया गया है।
     पुलिस के अनुसार बीजापुर जिले के बेदरे थाना क्षेत्र में एसटीएफ का एक दल गश्त पर था। यह दल जब क्षेत्र में था तभी नक्सलियों ने पुलिस दल पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर तक मुठभेड़ के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए। बाद में जब पुलिस दल ने घटनास्थल की तलाशी ली तब वहां काली वर्दी में एक नक्सली का शव, एक बंदूक और अन्य सामान मिला।  इस संबंध में और जानकारी जुटाई जा रही है। 
    कांकेर जिले में बारूदी सुरंग में विस्फोट से से बीएसएफ का सब इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह  और दिनेश कुमार कडियाम नामक जवान घायल हो गया। महेन्द्र को इलाज के लिए रायपुर लाया जा रहा था कि उसने दम तोड़ दिया।  पुलिस के अनुसार कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र में बीएसएफ का दल गश्त के लिए निकला था। दल जब उदनपुर और कट्टाकाल  के बीच में था तभी नक्सलियों ने आधा दर्जन धमाके  किए और फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली भाग खड़े हुए। घटनास्थल के लिए अतिरिक्त पुलिस दल रवाना किया गया है। क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है। क्षेत्र में नक्सलियों ने चुनाव का विरोध किया है तथा पिछले 15 दिनों में तीन बड़ी घटनाएं कर चुके हैं।  
    महेन्द्र सिंह राजस्थान के निवासी थे। कांकेर में पोस्टमार्टम के बाद आज देर शाम तक उनका शव रायपुर लाया जाएगा। जहां से उसे उनके गृह ग्राम भेजा जाएगा।
    इधर सुरक्षाबलों ने सुकमा जिले के विभिन्न इलाकों से नक्सलियों के आधा दर्जन स्पाइक होल ढंूढ निकाले हैं। 8 किलो वजनी प्रेशर बम भी बरामद किया गया है।
    प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए शनिवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। पहले चरण के लिए कल मतदान होगा। अंतिम दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य में चुनाव प्रचार किया। 
    राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिले कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और राजनांदगांव के 18 विधानसभा क्षेत्रों में 12 नवंबर को मतदान होगा। अधिकारियों ने बताया कि 10 विधानसभा क्षेत्रों मोहला मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, केसकाल, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक मतदान होगा। वहीं खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट में सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा। 

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Posted Date : 10-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बचेली, 9 नवंबर। बस्तर में चुनाव आगामी 12 नवंबर को होना है। चुनाव प्रचार अब अंतिम चरणो में पहुॅच चुका है। सभी राजनीतिक दले धुऑधार प्रचार में लगे हुए है। पहले चरण के चुनाव के आखिरी समय में भाजपा ने बचेली में प्रचार के मोर्चे पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। 
    इसी दरमियान दंतेवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी भीमा मंडावी बुधवार को बचेली पहुॅचे। भीमा मंडावी के बचेली पहुॅचते ही भाजपा के कार्यकर्ताओ ने फूल-माला व तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। हाईटेक कॉलोनी, लिंगेश्वर कैंप, जोगापारा, चिंगडूपारा, बंगाली कैंप डीएनके 2, पुराना मार्केट लेबर हाटमेंट, बंगाली कैंप सभी जगह घर-घर जाकर बड़ो से आर्शीवाद लेकर व जवानो से हाथ मिलाकर भाजपा के पक्ष में वोट देने तथा प्रदेश में चौथी बार रमन सरकार बनाने की अपील की। उनके साथ रहे भाजयुमो व महिला मोर्चा के कार्यकर्ताओ ने भी प्रदेश में इतने सालों में हुए विकास कार्यो के बारे में भी लोगों को अवगत कराया।  

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Posted Date : 09-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के आश्वासनों के बीच वर्ष 1998 के चुनाव हुए। कॉग्रेस ने वर्ष 1985 के चुनाव परिणामों वाला अपना करिश्मा दोहरा दिया। भारतीय जनता पार्टी को केवल कांकेर सीट से ही संतोष करना पड़ा जबकि शेष सभी ग्यारह सीटे कॉग्रेस के हिस्से में गयीं। वायदों पर अमल हुआ और 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से पृथक होकर छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया। राज्य बनने का परिणाम यह हुआ कि बस्तर की राजनीति में स्थानीय मुद्दों की पुन: जगह बनने लगी। छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी बने जबकि विद्याचरण शुक्ल की ताजपोशी तय मानी जा रही थी। सतारूढ़ कांग्रेस पार्टी के बीच हो रही अनेक तरह की अंदरूनी खीचतानों के बीच अगला विधान सभा का चुनाव वर्ष 2003 में हुआ जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाते हुए नौ सीटों पर जीत हासिल कर ली, कांग्रेस को केवल तीन सीटों से संतोष करना पड़ा जो कि दक्षिण बस्तर में अवस्थित थीं।
    राज्य में अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। इस समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में प्राथमिक समस्या बन कर उभर आया था; क्या इस कारण जमीनी वामपंथ की हत्या हो गयी? यह सवाल आगे और बढ़ता है चूंकि वर्ष 2004 से 2006 के बीच की ही बात है जब कई माओवादी धड़े संगठित हुए। इसी दौरान आन्ध्रप्रदेश में भीषण दमनात्मक कार्यवाईयों के फलस्वरूप अपने काडर के अठारह सौ से भी अधिक कार्यकर्ताओं को माओवादियों ने खो दिया था। अत:यही समय बस्तर के प्रवेश करने तथा स्वयं को संरक्षित करने की दृष्टि से माओवादियों के लिये सबसे मुफीद था। इसी समय अबूझमाड़ माओवादी गतिविधियों का केन्द्रीय स्थल बना। यही वह समय है जब बस्तर में कई विकास परियोजनायें घोषित हुई। यही वह समय है जब सलवा-जुडूम आरंभ हुआ। यही वह समय है जब सैंकड़ों राहत शिविरों में लाखों विस्थापित रहने लगे और गाँवों में सन्नाटों ने बस्तियाँ बसायीं। यही वह समय है जब सलवा जुडुम का जवाब देने के लिये माओवादियों ने 'कोया भूमकाल मिलीशियाÓ का गठन किया और अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के हजारों आदिवासियों को गृह युद्ध की आहूति बनाया। इस सभी हलचलों के बीच देश-विदेश का मीडिया, मानवाधिकार कार्यकर्ता और एनजीओ बस्तर में सक्रिय हुए। सलवाजुडुम को ले कर देश भर में सरकार विरोधी मुहिम चलाई गयी। नतीजा यह हुआ कि वर्ष-2006 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सलवा-जुडुम को गैर-वैधानिक करार दिया गया।
    हालाकि समानांतर रूप से प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीव्यूशन सिस्टम जैसे उपाय ग्रामीण क्षेत्रों से जुडऩे के लिये तलाश लिये। (बाकी पेज 8 पर)
    वर्ष 2008 का विधानसभा चुनाव परिणाम भारतीय जनता पार्टी की बस्तर में सबसे बड़ी जीत का कारण बना। केवल कोण्टा की सीट जो कि कांग्रेस के कवासी लकमा के हिस्से आयी थी को छोड़कर शेष सभी ग्यारह सीटों में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई। इस जीत के कई प्रकार के विश्लेषण संभव है लेकिन स्पष्ट तौर पर नक्सली रणनीति और लोकतंत्र को धत्ता बताने के लाल-प्रयासों की पराजय के रूप में भी इसे देखना चाहिये। विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान माओवादियों ने मई 2013 को बस्तर की दरभा घाटी में कॉंग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर महेन्द्र कर्मा, नंदकुमार पटेल और विद्याचरण शुक्ल जैसे कद्दावर नेताओं की हत्या कर दी। महेन्द्र कर्मा इस चुनाव को बहुत गंभीरता से ले रहे थे तथा उनका व्यापक चुनाव प्रचार अभियान परिवर्तन यात्रा के बहुत पहले से ही आरंभ हो गया था। उनकी हत्या के पश्चात निश्चित ही सहानुभूति लहर ने कांग्रेस के पक्ष में बस्तर के वोटरों को लामबंद किया। नक्सली आतंकवाद को यह एक कड़ा जवाब भी था। इस चुनाव में भाजपा बस्तर से केवल चार सीटें ही जीत सकी जबकि शेष सभी कांॅग्रेस के खाते में गये।
    लोकतंत्र में अनेक खामियाँ है लेकिन वह आम जन का स्वीकार्य तंत्र भी है यदि ऐसा न होता तो बस्तर के चुनाव परिणाम के पैटर्न बिलकुल विपरीत होते। आदिवासी बस्तर ने झारखण्ड होने जैसी अदूरदर्शिता नहीं दिखाई तथा अपनी सरकार चुनने और बदलने का हक अपने पास रखा है। बस्तर को ले कर कोई भी राजनीतिक दल यह गलतफहमी नहीं पाल सकता कि यहाँ के वोटर राजनीतिक पैतरेबाजी नहीं समझते, यही कारण है कि बस्तर किसी भी एक पार्टी का गढ़ बनकर नहीं रहा। नक्सलियों की धमकी, चुनाव आयोग की सक्रियता, पोलिंग स्टेशन पर वीडियोग्राफी, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था आदि से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में वोट के प्रतिशत में कमी आती है तथा यह भी चुनाव परिणामों पर असर डालने वाला कारक है। नोटा भी इन दिनों चुनाव परिणामों पर अपनी राय सामने लाता है। इस सभी के दृष्टिगत यह कहा जा सकता है कि बस्तर के चुनाव रोचक और कदाचित राज्य की सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका भी अदा करते हैं।

     

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Posted Date : 09-Nov-2018
  • बस्तर की चुनावी समझ का लिटमस पेपर टेस्ट था वर्ष 1977 का विधानसभा चुनाव। वह दौर जनता पार्टी के चरम का था। यदि बस्तर की आदिवासी जनता में चुनावी समझ नहीं होती तो वर्ष 1977 के चुनाव में क्षेत्रवार भिन्न भिन्न परिणाम आने चाहिये थे, चूंकि अब महाराजा प्रवीर के देहावसान के एक दशक पश्चात उनका सीधे-सीधे प्रभाव मतदान पर नहीं पड़ रहा था। ध्यान से समझें तो यह बस्तर में राजनीति का संकर काल था जो व्यक्ति आधारित राजनीति से बाहर आकर नई दिशायें तलाश रहा था। अब आंचलिक समस्याओं के लिए मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य की राजधानी भोपाल तक बस्तरियों का पहुँचना वैसा ही था जितना कि दिल्ली दूर थी। इसी कारण क्या बस्तर देश की राजनीति से सीधे प्रभावित हो रहा था?
    आपातकाल के बाद चुनावों का दौर आया; बस्तर में भी विधानसभा के चुनाव होने थे। यह समय देश भर में इन्दिरा गाँधी के विरोध का था। यह जनता पार्टी के उत्थान का काल भी था; कई विचारधाराओं और छोटे-बड़े दलों को जोड़कर यह पार्टी बनी थी। क्या बस्तर की आदिवासी जनता ने भी राष्ट्रीय राजनीति के नायक जयप्रकाश नारायण के साथ अपनी सहभागिता दर्शाई थी? वर्ष 1977 के चुनाव तो यही कहते हैं। कोण्डागाँव को छोड़ कर शेष बस्तर की सभी सीटे जनता पार्टी के हिस्से में आयी थीं। राष्ट्रीय राजनीति के प्रभाव वाले इस दौर में एनएमडीसी की आमद के साथ ही दंतेवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में मजदूर राजनीति का उद्भव हुआ। जनता पार्टी से देशभर का मोह भंग हो चुका था और कॉग्रेस का नवोत्थान हो गया था। वर्ष 1980 के चुनाव परिणाम पहली बार बस्तर में खिचड़ी सिद्ध हुए। एक ओर नारायणपुर से जनता पार्टी का उम्मीदवार विजयी रहा तो कांकेर और कोण्टा से निर्दलीय प्रत्याशियों को विजय हासिल हुई। पांच सीटें कॉग्रेस की झोली में गईं जबकि तीन सीट भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में आयी। इस के साथ ही माक्र्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी की टिकट से महेन्द्र कर्मा ने दंतेवाड़ा सीट जीत ली थी। इस जीत के पीछे बैलाडिला लौह अयस्क परियोजना में कार्यरत कम्पनी एनएमडीसी की मजदूर यूनियनों का बहुत बड़ा योगदान था, साथ ही साथ वर्ष 1978 में हुआ किरन्दुल गोलीकाण्ड भी इस मजदूर बाहुल्य क्षेत्र में वामपंथ की जमीन तैयार करने में मुख्य सहयोगी बना।
    पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था, इन्दिरा गाँधी की राजनैतिक साख आगामी चुनाव में एक बार फिर दाँव पर थी। इसी बीच वह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी जिसने पूरे देश को आक्रोशित कर दिया था; 31 अक्टूबर 1984 को इन्दिरा गाँधी की हत्या कर दी गयी। वर्ष 1985 में हुए विधानसभा चुनावों में सहानुभूति की वह लहर चली कि बस्तर क्षेत्र में जनता पार्टी ने वर्ष 1977 के चुनावों में जो करिश्मा कर दिखाया था वह कॉग्रेस ने दोहरा दिया। भानपुरी की विधानसभा सीट जो कि भारतीय जनता पार्टी ने जीती इसे छोड़कर शेष सभी ग्यारह सीटों पर कॉग्रेस का कब्जा हो गया। 
    (बाकी पेज 8 पर)
    कांग्रेस ने बस्तर क्षेत्र में पहली बार ऐसा वर्चस्व कायम किया था। इन चुनावों के परिणामों से यह बात तो स्पष्ट है कि वृहद मध्यप्रदेश का भाग बस्तर क्षेत्र अपने राज्य का ऐसा उपेक्षित हिस्सा था जिसकी स्थानीयता ही चुनावी मुद्दा नहीं बन पाती थी। आश्चर्य की बात यह कि 1977 से ले कर 1993 तक लगभग हर चुनाव परिणाम के पीछे किसी न किसी राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की बड़ी घटना को देखा जा सकता है।
    इसके साथ ही यह बात इनकार करने योग्य नहीं है कि इन समयो में ही आन्ध्रप्रदेश से चल कर माओवाद ने बस्तर के अबूझमाड़ में अपने पैर रख दिये थे। यद्यपि वामपंथ की लोकतांत्रिक जमीन भी इसी दौर में फैली और मनीष कुंजाम जैसे जमीन से जुड़कर संघर्ष करने वाले नेता लाल झंडे को दंतेवाड़ा के साथ साथ बस्तर के दक्षिणी छोर कोण्टा में भी फहराने में सफल हुए; वाम दलों के लिये सीटों की यह स्थिति वर्ष 1990 और 1993 के चुनावों में बनी रही। नब्बे के दशक में राम मंदिर आन्दोलन बहुत तेजी से देश भर को प्रभावित कर रहा था। आश्चर्य यह कि राष्ट्र की मुख्यधारा का यही मुद्दा बस्तर में भी वोटरों को प्रभावित कर रहा था। बलीराम कश्यप जैसे आदिवासी नेताओं ने बस्तर में भारतीय जनता पार्टी के लिये जमीन तैयार की और वर्ष 1990 के चुनाव में इस दल ने बारह में से आठ सीटो पर अपना कब्जा कर लिया। कांॅग्रेस को केवल एक सीट हासिल हुई जबकि भानुप्रतापपुर से निर्दलीय उम्मीदवार झाडूराम रावटे ने जीत हासिल की। यह कहना होगा कि वर्ष 1972 और उसके बाद के चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत लगभग असंभव हो गयी थी यद्यपि इक्का-दुक्का प्रभावी अथवा बागी उम्मीदवार अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे। आंकड़े यह भी तस्दीक करते हैं कि वर्ष 1980 से ही बस्तर के विधानसभा चुनावों में मुख्य मुकाबला कॉग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच होने लगा था। वर्ष 1993, एक स्थिर राजनीति और लगभग मुद्दाविहीन चुनाव का दौर था। बस्तर में कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी ने पाँच पाँच सीटों पर जीत हासिल की जबकि दो सीटें भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के हिस्से गईं।

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Posted Date : 09-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर, 9 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जगदलपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश का वे एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो सबसे ज्यादा बार बस्तर आए हैं और वे जब भी बस्तर आए, कभी खाली हाथ नहीं आए। वे लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप कोई न कोई योजना लेकर आते रहे हैं, ताकि बस्तर का तेजी से विकास हो सके। उन्होंने कहा कि वे बस्तर से भूखमरी, गरीबी, बेकारी को मिटाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं, इसलिए उन्हें बार-बार बस्तर आने का मौका मिल रहा है। 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हल्बी में अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा कि देश के 5 राज्यों में आम चुनाव हो रहे हैं, लेकिन उन्हें सबसे पहले छत्तीसगढ़ आने मौका मिला। मां दंतेश्वरी के चरणों से उन्हें चुनाव प्रचार प्रारंभ करने का सौभाग्य मिला है। सभा में पहुंची भारी भीड़ को देखते हुए उन्होंने कहा कि दिवाली, भाईदूज के त्योहार में इतनी भीड़ यह बताता है कि लोग उनकी सरकार के साथ है। उन्होंने कहा कि वे उन सभी लोगों से कुछ मांगने आए हैं। उनकी सरकार सबका साथ-सबका विकास चाहती है। 
    उन्होंने कहा कि पहले मेरे-तेरे, जाति, परिवार की भलाई करनी वाली सरकार रही। सीमित क्षेत्र की भलाई करना उनका उद्देश्य था, लेकिन भाजपा जाति, स्त्री-पुरुष, गांव-शहर के भेदभाव से परे सबका साथ सबका विकास के उद्देश्य से काम कर रही है। पैसा पहले भी था, सरकारें पहले भी थीं। मगर बिचौलियों की भेंट चढ़ जाता था। हमने अपनी सरकार में बिचौलियों को खत्म किया, जिससे पैसा निचले स्तर तक पहुंच रहा है। उन्होने कहा कि आज रमन सरकार में जहां देखिए, वहीं पर विकास हो रहा है, यह सब संभव हुआ है इच्छाशक्ति से। पहले बिचौलिए खा जाते थे पैसा। 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा एक ही मंत्र है, सबका साथ-सबका विकास। हमारी सरकार को आपकी चिंता है। पीएम मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिर्फ कमल ही खिलना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को पूरा करना है, इसलिए बार-बार बस्तर आया हूं। आज भी इसीलिए बस्तर आया हूं। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर बस्तर का भाग्य बदलना है। 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार ने छत्तीसगढ़ में बीजेपी की रमन सिंह सरकार के काम में रोड़े डाले। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अलग राज्य बनाया, मगर कांग्रेस ने इसे ंउपेक्षित कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारा कोई एक हाईकमान नहीं है बल्कि देश की जनता ही हाईकमान है। उन्होंने कहा कि डॉ. रमन सिंह सरकार ने गांवों को सड़कों से जोड़ा। सात नई रेल लाइनों को मंजूरी दी गई। 15 हजार किलोमीटर की रेललाइन के चौड़ीकरण का काम केंद्र सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोना-कोना विकास का पर्याय बना हुआ है। 
    नक्सलियों पर प्रहार करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि जिन बच्चों के हाथ में कलम होनी चाहिए उन हाथों में नक्सलियों ने बंदूक थमाई। मां-बाप के सपनों को उन्होंने तबाह किया। स्कूल में आग लगाई। ऐसी मनोवृत्ति को राक्षसी वृत्ति न कहा जाए, तो क्या कहा जाए। अरबन माओवादी एयर कांडिशनर में रहते हैं। इनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं। शहर में रहकर ये आदिवासी बच्चों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। बस्तर  का विकास करके मुझे अटलजी का सपना पूरा करना है और जब तक मैं इस सपने को पूरा नहीं करूंगा मैं चैन से नहीं बैठंूगा। 
    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के शुरूआती दौर में बस्तर के बेटों को आंसू पीकर सोना पड़ता था। पूर्व सरकार ने बस्तर के विकास को तबाह कर रौंद डाला, लेकिन आदिवासी-दलित समझदार थे। उन्होंने उस सरकार को उखाड़ फेंका और सुरक्षित हाथों में अपना भविष्य सौंप दिया। छत्तीसगढ़ में जो विकास हुआ वह भाजपा को अवसर देने के कारण संभव हो पाया है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि 18 साल का वयस्क बस्तर अब अपने को समृद्ध बनने के लिए भाजपा प्रत्याशियों को मौका देगा। हमने बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पसीना बहाया है। इसका फल आपको मिले। इस खातिर 12 नवंबर को भारी संख्या में मतदान करंे। 
    उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसी की कृपा पर नहीं, बल्कि जनता की कृपा पर बैठी है। उनके लिए जनता जर्नादन सर्वोपरि है। छत्तीसगढ़ की जनता समझदार है, जो उनकी सरकार को चुनती है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र में बैठी पुरानी सरकार की सोच भेदभाव वाली थी, जिन्होंने अपने कार्यकाल में यहां के विकास के लिए योजना नहीं बनाई। वे पहले संगठन के कार्यों से छत्तीसगढ़ आते थे। अब उनकी सरकार दिल्ली में बैठी है। कांग्रेस की सरकार होती तो छत्तीसगढ़ के लोग आज भी वहीं के वहीं होते और विकास की गति शून्य जैसी रहती। 
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जनता से सवाल पूछते हुए कहा कि उन्हें अब काम करने वाली सरकार चाहिए या काम नहीं करने वाली। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अब तेज गति से काम करने वाली सरकार बैठी है, जो राज्य की भाजपा सरकार से कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। ये दोनों सरकार मिलकर बस्तर समेत छत्तीसगढ़ को तेजी के साथ आगे ले जाएंगे। उन्होंने ग्रामीण सड़क योजना, रेल लाइन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि बस्तर के लोगों को रायपुर जैसे सुविधाएं मिलने लगी है। बस्तर में विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान खुलने लगे हैं। इतना ही नहीं यहां के लोगों को दिल्ली तक हवाई सफर करने का मौका भी मिल रहा है। 
    श्री मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से छत्तीसगढ़ के विकास को डबल इंजन मिला, एक दिल्ली का इंजन और दूसरा रायपुर का इंजन। हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ के 9 हजार गांवों को सड़कों से रोक दिया, राज्य में नेशनल हाइवे का नया जाल बना दिया गया है। कांग्रेस हमेशा दलित-पीडि़तों को वोट बैंक के रूप में देखती है, कभी इंसान के रूप में नहीं देखती है। अटल जी की सरकार ने पहली बार आदिवासियों के लिए अलग से मंत्रालय बनाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री रमन सिंह, केदार कश्यप, दिनेश कश्यप, महेश गागड़ा, संतोष बाफना, कमलचंद भंजेदव, भीमा मंडावी, बैदूराम कश्यप, लच्छुराम कश्यप सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्तागण उपस्थित थे। 

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Posted Date : 06-Nov-2018
  • बस्तर में हुए सभी आरम्भिक चुनावों में महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की छाया थी। महाराजा प्रवीर चन्द्र भंजदेव की अपनी ही सोच थी जिसमे कभी वे गहरे सामंतवादी प्रतीत होते थे तो कभी प्रखर बुद्धिजीवी। बस्तर क्षेत्र में हुए पहले चुनाव में राष्ट्रीय भावना हावी थी किंतु उम्मीदवारों के चयन में प्रवीर फैक्टर का बड़ा असर रहा। यह सब कुछ प्रारंभ हुआ था जब 13 जून 1953 को उनकी सम्पत्ति कोर्ट ऑफ वार्ड्स के अंतर्गत ले ली गयी। 
    1957 में प्रवीर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजित हो कर विधानसभा पहुँचे; 1959 को उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। 11 फरवरी 1961 को राज्य विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्रवीर धनपूँजी गाँव में गिरफ्तार कर लिये गये। इसके तुरंत बाद फरवरी-1961 में प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट के तहत प्रवीर को गिरफ्तार कर नरसिंहपुर जेल ले जाया गया। राष्ट्रपति के आज्ञापत्र के माध्यम से 12.02.1961 को प्रवीर के बस्तर के भूतपूर्व शासक होने की मान्यता समाप्त कर दी गयी। 
    यही परिस्थिति 1961 के कुख्यात काण्ड का कारण बनी जहाँ प्रवीर की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे आदिवासियों को घेर कर लौहण्डीगुड़ा में गोली चलाई गयी। बस्तर की जनता ने इस बात का लोकतांत्रिक जवाब दिया। फरवरी 1962 को कांकेर तथा बीजापुर को छोड़ पर सम्पूर्ण बस्तर में महाराजा पार्टी के निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे तथा यह तत्कालीन सरकार को प्रवीर का लोकतांत्रिक उत्तर था। इस चुनाव का एक और रोचक पक्ष है। कहते हैं कि राजनैतिक साजिश के तहत तत्कालीन जगदलपुर सीट को आरक्षित घोषित कर दिया गया जिससे कि प्रवीर बस्तर में स्वयं कहीं से भी चुनाव न लड़ सकें। उन्होंने कांकेर से पर्चा भरा और हार गये। कांकेर से वहाँ की रियासतकाल के भूतपूर्व महाराजा भानुप्रताप देव विजयी रहे थे।
    बस्तर जिले की सभी सीटों पर प्रवीर की जबरदस्त पकड़ के कारण राजनैतिक साजिशों के लम्बे दौर चले। अंतिम परिणति हुई 1966 में महाराजा प्रवीर चन्द्र भंजदेव की उनके ही महल में गोलीबारी के दौरान नृशंस हत्या। इसके अगले ही वर्ष चुनाव हुए; बस्तर की जनता ने फिर जवाब दिया। कांकेर, चित्रकोट और कोण्टा सीट को छोड़ कर कॉग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। अंतत: राजनैतिक पासे बाबा बिहारी दास की आड़ में खेले गये। उस दौर में स्वयं को प्रवीर का अवतार घोषित कर बाबा बिहारीदास ने जबरदस्त ख्याति पूरे बस्तर में अर्जित कर ली थी अत:0 वर्ष 1972 का चुनाव भी प्रवीर फैक्टर के साथ ही लड़ा गया। बाबा बिहारी दास ने कॉग्रेस के पक्ष में प्रचार किया। बिहारीदास ने चित्रकोट, बकावंड, कोंड़ागाँव, दंतेवाड़ा, केशकाल, नारायणपुर और जगदलपुर विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया। इन सभी सीटों पर कॉग्रेस वर्ष-1967 का चुनाव हार गई थी; अप्रत्याशित रूप से इस बार सभी सीटों पर कॉग्रेस की जीत हुई। 
    लोकतांत्रिक बस्तर के इन आरंभिक चुनावों से यह ज्ञात होता है कि दौर एक ऐसे नायक का था जिसे व्यापक जनसमर्थन प्राप्त था। अपने जीवनकाल तथा मृत्यु के पश्चात के दो चुनावों तक उसने बस्तर संभाग की राजनीति को अपने अनुरूप बनाये रखा। एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी यह कि वर्ष 1967 के चुनावों में जनसंघ ने भी दो सीटे जीती थी और यही परिणाम उसने 1972 के चुनावों में भी दिखाया। प्रवीर के अवसान के साथ ही बस्तर नायक विहीनता के अंधकार में जाता हुआ प्रतीत होता है।

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Posted Date : 05-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर, 5 नवंबर। छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा के मलकानगिरी के भैजंगवाड़ा जंगल में जवानों ने 5 नक्सलियों को मार गिराया है। जवानों ने 5 हथियार और एक हैंड ग्रेनेड बरामद किया है।  मुठभेड़़ में नक्सली नेता रणदेब के मारे जाने की खबर है।
    पुलिस को सूचना मिली थी कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर मलकानगिरी के भैजंगवाड़ा के जंगल में नक्सली बैठक ले रहे हैं। बैठक में नक्सलियों के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की सूचना थी। पुलिस ने तत्काल वहां छापामार कार्रवाई की।
    पुलिस की टीम जैसे ही भैजंगवाड़ा के जंगल पहुंची नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। इस बीच जवानों ने पांच नक्सलियों को मार गिराया।

     

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Posted Date : 05-Nov-2018
  • विकास के नाम पर पहुंच रहे जनता के पास

    विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी संतोष बाफना विकास के नाम पर मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं। वहीं विधानसभा क्षेत्र के धुरगुड़ा, भाटागुड़ा, गारावंड कला, तूरेनार, कलचा, रामपाल, उपनपाल, करनपुर, भेजापदर एवं अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क पर कार्यकर्ताओं के बीच बाफना ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में हुए विकासकार्यो से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। कई विकास कार्यो को पूर्ण करने के लिए जनता को भाजपा का समर्थन करना है। गरीबी के खिलाफ भूख को खत्म करने में डॉ. रमन ने एक रूपया में चांवल और मुफ्त में नमक दिया है आगे और भी बहुत कुछ करना है। प्रचार अभियान के दौरान पदलाम नाग, जगदीश भूरा, संतोष त्रिपाठी, सिमांत शेखर के साथ अन्य भाईपाई एवं समर्थक उपस्थित थे।

    रेखचंद पहुंच रहे जनता के बीच,मांग रहे सहयोग
    कांग्रेस के प्रत्याशी रेखचंद जैन भी सघन जनसंपर्क करते हुए भाजपा के विकास को झूठा बताते हुए जनता से सहयोग मांग रहे हैं। वे मतदाताओं के बीच पहुंचकर स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार दूर होने की बात कह रहे है। 
    कांग्रेस की सरकार आने पर जनउपयोगी सुविधाओं में विस्तार से ज्यादा उसमें योग्य लोगों को लाने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि कागजों में जो स्कू लों की संख्या बताई जाती है उनमें से आधे स्कूल या तो शिक्षक विहीन है या बंद है। जिला मुख्यालय में ही स्वास्थ की व्यवस्था लचर है और मेडिकल कालेज विगत 10 वर्षो से निर्माणाधीन है।

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Posted Date : 02-Nov-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर 2 नवंबर। फायरिंग में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की मौत पर दुख जताते हुए नक्सलियों ने सफाई दी है कि  हमें नहीं मालूम था कि पुलिस के साथ दूरदर्शन की टीम है, हमने जानबूझकर हमला नहीं किया है। सरकार और पुलिस अधिकारी नक्सलियों को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हंै। दो पन्नों का ये पत्र दरभा डिवीजन कमिटी के सचिव साईनाथ ने जारी किया है।
    नक्सल संगठन के सचिव ने जारी बयान में कहा है कि  सुरक्षा बलों के लिए 30 अक्टूबर को एम्बुस लगाया गया था। सुबह से ही नक्सली ने एम्बुस कर रखा था,जिसमें दूरदर्शन की भी टीम फंस गयी। यह हत्या पुलिस के सदस्य होने के भूलवश हुई है। पत्रकार हमारा दुश्मन नहीं बल्कि मित्र है।   
    जारी बयान में कहा है कि एम्बुश सड़क निर्माण में सुरक्षा दे रहे जवानों के लिए लगाया था। दूरदर्शन की टीम पुलिस के साथ उनके वाहन पर होने की वजह से मीडिया टीम भी एम्बुश में फंस गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने मीडिया के माध्यम से घटना को दूररदर्शन की टीम पर हमला बताकर दुष्प्रचारित करने  की है। पत्रकार उनके दुश्मन नहीं, मित्र है। 
    हमले का कारण बताते हुए माओवादियों ने कहा कि अरनपुर-बुरगुम सड़क निर्माण का गांव के लोग विरोध कर रहे है। सड़क निर्माण के विरोध में जब लोगों ने रैली निकाली तब पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस लोगों के घर में घुसकर लूटमार कर रही है और उन पर गोलियां चलाई जा रही है। ग्रामीणों के खड़ी फसल को नष्ट कर जबरदस्ती सड़क बनाई जा रही है और लोगों पर कहर ढाई जा रही है।    
    पत्र में अपील की गई है कि नक्सल इलाको में पत्रकार पुलिस के साथ ना आये। खासकर चुनाव ड्यूटी में आने वाले कर्मचारी किसी भी हालत में पुलिस के साथ न आये। पत्र में चुनाव बहिष्कार की भी बातें लिखी है।

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Posted Date : 30-Oct-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर, 30 अक्टूबर।  चुनाव का बहिष्कार करने वाले नक्सलियों ने पांच दिन पहले ही पत्रकारों के लिए  एक प्रेस नोट जारी कर चुनाव के दौरान अंदरूनी इलाकों में  बेखौफ  होकर  रिपोर्टिंग करने की अपील की थी।  
    जारी विज्ञप्ति में कहा था कि संघर्षरत् इलाकों की सच्चाई को जनता के सामने लाने प्रयासरत् पत्रकारों को अंदरूनी इलाकों का दौरा करने से रोकने के लिए किए गए आतंकी प्रयासों को याद दिलाना इस संदर्भ में गैर वाजिब नहीं होगा।
    19 अक्टूबर को माओवादियों की दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी द्वारा प्रिंट व इलेक्टॉनिक मीडिया के लिए जारी एक प्रेस नोट में माओवादियों ने लिखा है कि भाजपा सरकार जन पक्षधर पत्रकारों से खफ ा रही है और उन पर लगातार हमले करवाती रही हैं। यही नहीं बल्कि हत्याएं व धमकियां भी सरकार और पुलिस द्वारा पत्रकारों को लगातार दी जाती रही है। 
     जारी प्रेसनोट में  लिखा है कि उनकी पार्टी यह मानती है कि चुनाव बहिष्कार एक लोकतांत्रिक अधिकार है। जनता के इस अधिकार को सरकारें व पुलिस प्रशासन नहीं मानती है और जबरन इसमें शामिल करने की कोशिश करती हैं और कुछ जनविरोधी पत्रकारों के जरिए सरकार अखबारों में इस आशय की झूठी रिपोर्टिंग प्रकाशित करवाती है कि वोट डालने पर माओवादी उंगली काट देते हैं। जबकि बांदा व झांसी में आम चुनावों के दौरान भाजपा को वोट ना देने के कारण एक-एक दलित की नृसंश हत्या की गई थी।
    माओवादियों ने उनके आधार इलाकों में पत्रकारों के रिपोर्टिंग और प्रवेश की बंदिशों को हटाते हुए स्वेच्छा से बेखौफ  होकर चुनाव बहिष्कार की रिपोर्टिंग करने की अपील की है।

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Posted Date : 24-Oct-2018
  • मामला चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर,24 अक्टूबर। चित्रकोट विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी लच्छूराम कश्यप के बेटे चंद्रभान कश्यप को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि अपने पिता के नामांकन भरकर वापसी के दौरान बडांजी पुलिस ने वाहन चेकिंग के लिए चंद्रभान कश्यप के वाहन को रुकवाया था। जो नेताजी के बेटे को नागवार गुजरी और मौजूद पुलिस व अधिकारियों पर वे बरस पड़े गाली-गलौच तक दे डाली।
    जब पुलिस ने वाहन की चेकिंग की तो वाहन से भारी मात्रा में चुनाव सामग्री बरामद हुई। तहसीलदार के निर्देश पर पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पूर्व विधायक व वर्तमान भाजपा प्रत्याशी लच्छू राम कश्यप के बेटे समेत तीन अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया और चुनाव सामग्री समेत वाहन को भी जब्त कर लिया है। विधायक प्रत्याशी के बेटे चंद्रभान के अनुसार उनके द्वारा किसी प्रकार से आचार सहिंता का उलंन उलंघन नहीं किया गया है बल्कि पुलिस उन्हें फं सा रही है। इस मामले की पूरी जानकारी देते हुए बस्तर एडिशनल एसपी ने कहा कि चुनाव ड्यूटी में लगे निगरानी दल से जांच के दौरान गाली.गलौज करने व आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप में लोहंडीगुड़ा तहसीलदार के निर्देश पर बड़ाजी पुलिस ने शासकीय कार्यो में बाधा व कर्मचारियों से गालीगलौच का मामला कायम कर भाजपा प्रत्याशी लच्छूराम कश्यप के बेटे सहित अन्य 3 लोगों के कार्रवाई की है।

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Posted Date : 09-Oct-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर, 9 अक्टूबर। बस्तर में चलाये जा रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन के तहत पुलिस को लगातार सफलताएं मिल रही हैं। जगदलपुर बस स्टैंड से आज पुलिस टीम ने 3 नक्सल सहयोगी को गिरफ्तार किया है। तीनों काफी सालों से नक्सल संगठन में रहकर नक्सलियों के लिए काम कर रहे थे।तीनों नक्सलियों को विस्फोटक सामग्री, दवाई, दैनिक उपयोग की सामग्री के साथ ही पुलिस की रेकी करने का काम करते थे। तीनों को जगदलपुर साइबर सेल बस्तर के सहयोग से गिरफ्तार किया गया है। इन्हें दंतेवाड़ा लेजाया गया जहां पुलिस इनसे नक्सली गतिविधियों के सम्बन्ध में जानकारी जुटा रही हैं।

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Posted Date : 28-Sep-2018
  • जगदलपुर-रावघाट लाइन की आधारशिला
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर, 28 सितंबर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि रेल लाइन किसी भी राज्य के विकास का प्रतीक होती है। हम रेल लाइन बिछा रहे हैं और वो जेल-बेल खेल रहे हैं। वे आज यहां जगदलपुर-रावघाट रेल लाइन शिलान्यास और बेड़मा दाहीकोंगा जगलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग  का चौड़ीकरण और नवीनीकरण का लोकार्पण -भूमिपूजन के अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने बस्तर को 3 हजार करोड़ से अधिक की सौगात दी। कार्यक्रम में इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय और रेज राज्य मंत्री राजेन  गौहेन मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हउए।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन बस्तर के लिए ऐतिहासिक है। रेल लाइन से बस्तर के विकास में तेजी और खुशहाली आएगी।  देश के लिए यह परियोजना एक मॉडल है।  आज बस्तर करवट बदल रहा है, एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। इस रेल लाइन से 4 जिले बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर जुड़ेंगे। जगदलपुर रायपुर के बीच रेल लाइन की वर्तमान दूरी 622 किमी इस परियोजना के बाद 360 किमी होगी। जगदलपुर से होते हुए पल्लीगांव, कुरकानार, बस्तर, सोनपाल, भानपुरी, दहिकोंगा, बनियागांव, कोंडागांव, जुगानी, चंदगांव, नारायणपुर, भरंडा से गुजरते हुए रावघाट पहुंचेगी। यह दूरी 140.282 किमी की है ।
     तय समय से एक घंटे देर से पहुंचे मुख्यमंत्री ने 541.88 करोड़ रूपए की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-30 के बेड़मा से जगदलपुर तक 119 किमी चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य का लोकार्पण किया। इसी तरह 20 करोड़ की लागत से 25.60 किमी लम्बी लोहण्डीगुड़ा विकासखण्ड के तारागांव गरदा कोड़ेनार मार्ग निर्माण का भूमिपूजन और 33 करोड़ 75 लाख रूपए की लागत से 45 किलोमीटर लम्बी चित्रकोट बारसूर मार्ग निर्माण का भूमिपूजन किया। चिड़़पाल में उपस्वास्थ्य केन्द्र भवन, दरभा में ट्रंाजिस्ट हॉस्टल निर्माण, ग्राम सोरगांव विकासखण्ड बस्तर में शासकीय हाईस्कूल भवन निर्माण और ग्राम तारागांव विकासखण्ड भानपुरी में बस्तर हस्तशिल्प परियोजना भवन का भी लोकार्पण किया।  
    सीएम ने विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत् 440 हितग्राहियों को 79 लाख रूपए की सामग्री एवं चेक वितरण किया।  

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Posted Date : 08-Sep-2018
  • जगदलपुर में अविनाश वुड्स का भव्य शुभारंभ 
    जगदलपुर, 8 सितंबर। बस्तर के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर को रियल इस्टेट सेक्टर के परिदृश्य में एक नई पहचान के रूप में अविनाश ग्रुप की बहुमंजिला आवासीय परियोजना अविनाश वुड्स लॉन्च हो गई है। लांचिंग अवसर पर अविनाश ग्रुप के डायरेक्टर मुकेश सिंघानिया एवं डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल ने बताया कि अविनाश ग्रुप के लिए जगदलपुर में अविनाश वुड्स बहुमंजिला आवासीय परियोजना लाना गर्व की बात है। जगदलपुर और क्षेत्र के रहवासियों के द्वारा अविनाश वुड्स की लॉन्चिंग के पूर्व से ही जबरदस्त रुचि देखी जा रही थी। बड़ी संख्या में ग्राहक फ्लैट्स बुकिंग के प्रति आकर्षित हो रहें हैं। उन्होंने जानकारी देते बताया कि अविनाश ग्रुप ने अपनी परियोजनाओं में अब तक जिस उच्च गुणवत्ता,उत्तम ग्राहक सेवा,आलिशान निर्माण और समय पर डिलीवरी का हमेशा पालन किया है। श्री सिंघानिया ने दावा किया कि अविनाश अतुल्य आवासीय परियोजना में अभिकल्पन निर्माण और उपलब्ध सारी सुविधाएं राजधानी रायपुर में निर्मित ग्रुप की आवासीय परियोजनाओं के समकक्ष होंगी। इसके अलावा संपूर्ण कॉलोनी का विकास भी ग्राहकों की अपेक्षाओं के अनुरूप ही होगा।
    अविनाश वुड्स बहुमंजिला आवासी परियोजना जगदलपुर के प्राइम लोकेशन एलआईसी ऑफिस रोड धरमपुरा में स्थित है,जोकि जगदलपुर रिहायशी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।जहां से स्कूल-कॉलेज, मार्केट जैसी सारी सभी प्रमुख सुविधाएं बेहद कऱीब उपलब्ध हैं।यह आवासीय परियोजना लगभग 2.24 एकड़ पर विस्तारित है। जी+6 मंजिल बहुमंजिला आवासीय परियोजना में कुल 174 फ्लैट्स रहेंगे,जिसके अनुसार ब्लॉक ए,बी और सी में अपार्टमेंट 2 बीएचके और 3 बीएचके रहेंगे।अविनाश वुड्स बहुमंजिला आवासीय परियोजना आधुनिक सुविधाओं से लैस रहेगी जैसे,प्रवेशद्वार,सिक्योरिटी केबिन के साथ 24 घंटे सिक्योरिटी,बाउंड्री वॉल से घिरा कैंपस,किड्स प्ले एरिया,लैंडस्केप गार्डन,क्लब हाउस,जोगिंग ट्रैक,जिम,इंडोर गेम्स,कम्युनिटी हॉल,हर ब्लॉक में दो लिफ्ट,कॉमन एरिया के लिए पावर बैकअप,गार्बेज डक्ट,रेन वाटर हारवेस्टिंग एवं फायर फाइटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी।इसके अलावा आवासीय परिसर में विश्व स्तरीय क्लब वुड्स भी रहेगा,जिसमें इंडोर गेम्स जैसी नायाब सुविधाएं रहेंगी। 
    अविनाश ग्रुप ने अपने 22 वर्षों के संक्षिप्त कार्यकाल में कॉलोनी विकास से लेकर शॉपिंग मॉल,मल्टीप्लेक्स के निर्माण को नई दिशा प्रदान की है और अविनाश ग्रुप के द्वारा छत्तीसगढ़ में 53 बेमिसाल परियोजनाओं की पेशकश की गई है। जिनमें 38 आवासीय,13 व्यावसायिक,3 शॉपिंग मॉल/मल्टीप्लेक्स एवं क्लब के उत्कृष्ट एवं बेमिसाल अभिन्यास निर्माण शैली से लेकर अधोसंरचना के मामले में एक नई पहचान बनाई है।

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Posted Date : 09-Aug-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    जगदलपुर, 9 अगस्त। छग राज्य युवा आयोग अध्यक्ष कमलचंद भंजदेव का फॉलो वाहन बीती रात एक नाले में बह गया। वाहन में ड्राइवर के साथ एक युवक सवार था। युवक किसी तरह बच गया लेकिन ड्राइवर का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। गोताखोर सुबह से तलाश में लगे हुए हैं।
    कोतवाली थाना प्रभारी कादिर खान के मुताबिक चालक बिट्टू अपने एक साथी के साथ बीती देर रात फॉलो वाहन बोलेरो से जगदलपुर-नगरनार मार्ग से मंगड़ू कचोरा की ओर जा रहा था। नगर से 5 किलोमीटर दूर रास्ते में पडऩे वाले गोरिया बाहर नाला में पुल के उपर से पानी बह रहा था। चालक उसके बाद भी वाहन पार करने लगा। तेज बहाव होने की वजह से वाहन नाले में बह गया। बिट्टू का साथी वाहन से जैसे तैसे बच निकला। बिट्टू वाहन समेत बह गया। 
    आज सुबह बिट्टू के साथी ने इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी। फिलहाल पुलिस गोताखोरों की मदद से बिट्टू और वाहन की तलाश शुरू की। वाहन तो मिल गया लेकिन बिट्टू का पता नहीं चल पा रहा है। दो दिनों से लगातार हुई बारिश से गोरिया बाहर नाला पूरे उफान पर है। इसलिए गोताखोर टीम को नाले में चालक को ढूंढने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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Posted Date : 26-Jul-2018
    • प्रदेश में संचार क्रांति का शुभारंभ
    • जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भवन का लोकार्पण 

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    जगदलपुर/रायपुर, 26 जुलाई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को डिमरापाल  जगदलपुर में 170 करोड़ की लागत से तैयार बलीराम कश्यप स्मृति मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन का लोकार्पण करते हुए रमन सरकार की संचार क्रांति योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित कहा कि बस्तर का विकास तेजी के साथ हो रहा है। वहां इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसे बड़े शिक्षा संस्थानों के साथ रेल व हवाई सेवा शुरू हो गई है। बस्तर अब बदल रहा है और वहां पहुंचकर उन्हें जो प्यार मिला है, वह उन्हें हमेशा याद रहेगा। केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के बिना भारत का विकास संभव नहीं है। देश की आत्मा ग्रामीणों और आदिवासियों में बसती है। 
    राष्ट्रपति श्री कोविंद ने अपने दौरे के दूसरे दिन लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वे 16 साल पहले स्व. बलीराम कश्यप के निमंत्रण पर बस्तर आए थे। उस समय बस्तर कुछ अलग था। आज वहीं बस्तर कुछ और ही है। पहले और अब की तुलना में बस्तर में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। यहां आकर उन्हें आदिवासियों के बीच अपनापन का अहसास हुआ। उनकी इच्छा थी कि अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर वे दिल्ली से दूर आदिवासियों के बीच अपना कुछ समय बिताएं और यह अवसर पाकर वे बहुत खुश हैं। 
    उन्होंने बस्तर में संचालित रामकृष्ण मिशन के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस संस्था के माध्यम से बस्तर के लोगों ने जीने की कला सीखी। वे बस्तर से पहले से परिचित हंै और उन्हें इस संस्था के माध्यम से लोगों की सेवा करने का मौका भी मिला है। उन्होंने कहा कि जब वे बिहार के राज्यपाल थे, तब सरगुजा आए थे। वहां भी वे आदिवासियों से मिले मान-सम्मान को कभी भूल नहीं पाएंगे। पिछली बार वे गिरौदपुरी गए थे। छत्तीसगढ़ का बहुत विकास हुआ है। 
    राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कश्यप स्मृति मेडिकल कॉलेज अस्पताल का जिक्र करते हुए कहा कि यह संस्थान आगे पूरे प्रदेश के लिए चिकित्सा विज्ञान का प्रमुख केंद्र बनेगा। बस्तर की आवास कहे जाने वाले बलीराम कश्यप की स्मृति में खुले मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन का लोकार्पण करते हुए उन्हें खुशी हो रही है। बस्तर से मिला प्यार उन्हें हमेशा याद रहेगा। आदिवासी वहां प्रकृति से मिलकर विकास की नई गाथा लिख रहे हैं। वे अब बदलता बस्तर देख रहे हैं। 
    उन्होंने स्वच्छता दूत कुंवर बाई व कम्प्यूटर साक्षर गोविंदी बाई के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि धमतरी जिले की दोनों महिलाएं  देश के लिए मिसाल ब,नीं। उन्होंने शहीद दिवस पर देश के लिए त्याग, बलिदान देने वाले जवानों और उनके परिवारों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वे शहीद जवानों और उनके परिवार वालों का सम्मान करते हैं। 
    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में चल रही विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज से स्काई योजना भी शुरू हो गई है और इसका लाभ यहां की 45 लाख महिलाओं और 5 लाख छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्हें मुफ्त फोन बांटे जाएंगे, जो मोबाइल एप 'गोठÓ के साथ मिलेगा और उसमें खेती-किसानी कौशल विकास, रोजगार, स्व-रोजगार, शिक्षा से संबंधित योजनाओं की जानकारी मिलती रहेगी। मोबाइल एप में महिलाओं, किसानों, बच्चों और युवाओं के लिए कई उपयोगी जानकारी भी होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का आना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में प्रदेश के कई मंत्री भी शामिल हुए।

    नये युग में प्रवेश कर रहा छत्तीसगढ़-सीएम  
     समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशवासियों की ओर से राष्ट्रपति श्री कोविन्द का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा - राष्ट्रपति के हाथों मेडिकल कॉलेज अस्पताल भवन का लोकार्पण और राज्य सरकार की संचार क्रांति योजना का शुभारंभ तथा दंतेवाड़ा और बस्तर जिले का उनका दो दिवसीय दौरा हम सबके लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा - राष्ट्रपति के हाथों जगदलपुर में मेडिकल कॉलेज के विशाल अस्पताल भवन के लोकार्पण से बस्तर वासियों का एक सपना पूरा हो रहा है। संचार क्रांति योजना के जरिये छत्तीसगढ़ एक नये युग में प्रवेश कर रहा है। डॉ. रमन सिंह ने अंचल के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व सांसद स्वर्गीय श्री बलिराम कश्यप को याद करते हुए कहा - जगदलपुर में एक सर्वसुविधायुक्त मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का निर्माण स्वर्गीय श्री कश्यप का भी सपना था, जो आज राष्ट्रपति के हाथों पूरा हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा - राष्ट्रपति श्री कोविन्द ने अपने कार्यकाल की पहली सालगिरह पर बस्तर वासियों को आशीर्वाद देने यहां आए हैं। वे चाहते तो नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में भव्य समारोह कर सकते थे, लेकिन उन्होंने हमारे बस्तर अंचल में आने का निर्णय लिया। 
    यह आदिवासियों के प्रति और छत्तीसगढ़ तथा बस्तर के प्रति उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है।  राष्ट्रपति ने बस्तर के बदलते स्वरूप को नजदीक से देखा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। 
    कॉलेज खुलने पर स्कूल बंद नहीं होता 
        मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज के नये अस्पताल भवन के लोकार्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग यह सवाल कर रहे हैं कि पुराने महारानी अस्पताल का क्या होगा ? डॉ. सिंह ने इस भ्रांति का निराकरण करते हुए कहा कि अगर कहीं कॉलेज खुलता है, तो वहां का स्कूल बंद नहीं हो जाता। इस नये अस्पताल भवन में मरीजों को आधुनिक और बेहतरीन चिकित्सा सुविधा मिलेगी। डॉ. सिंह ने वहां के डॉक्टरों से कहा कि वे बस्तरवासियों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहे। इस अस्पताल के सभी डॉक्टर और कर्मचारी बस्तर संभाग के 40 लाख लोगों की आशा की किरण है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना को देश के करोड़ों गरीबों के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बताया और कहा कि इसके तहत गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों को पांच लाख रूपए तक सहायता मिलेगी। 
        डॉ. रमन सिंह ने श्री कोविन्द के हाथों राज्य सरकार की  संचार क्रांति योजना के शुभारंभ का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना से छत्तीसगढ़ एक नये युग में प्रवेश कर रहा है। यह योजना छत्तीसगढ़ का एक नवाचार है और देश तथा दुनिया के लिए उदाहरण है कि योजना के तहत 50 लाख हाथों में मोबाइल फोन दिया जाएगा। लगभग 45 लाख महिलाओं के हाथों में और पांच लाख युवाओं के हाथों में स्मार्ट फोन होगा।  छत्तीसगढ़ के विकास के नये दरवाजे खुलने लगे हैं।

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Posted Date : 28-Jun-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    कोंडागांव, 28 जून। विश्रामपुरी थाना के कोरगांव जंगल में पेड़ पर एक शिक्षक की फांसी पर लाश मिली।  
    पुलिस ने बताया कि ग्राम आमाडीही निवासी भागवत मरकाम ग्राम खल्लारी प्राथमिक शाला में शिक्षक के पद में पदस्थ था।  पिछले 2 वर्षों से मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने कि चलते वह घर से कहीं भी निकल जाता था।  पिछले 4 माह से बहिगांव गुडरीपारा में  उसकी बहन के यहां इलाज के लिए रखा गया था। 21 जून को  बिना किसी को सूचना दिए  घर से निकल गया था। परिजन  पतासाजी कर ही रहे थे कि उन्हें  मौत की खबर मिली।

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