अंतर्राष्ट्रीय

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09-Jul-2020 5:33 PM

मॉस्को 9 जुलाई (स्पूतनिक)। पश्चिमी अफ्रीकी देश आइवरी कोस्ट के प्रधानमंत्री अमादोउ गोन कौलिबली का 61 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।

देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति अलसाने क्वाट्रा ने अपने फेसबुक पर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्री कौलिबली बुधवार को कैबिनेट की साप्ताहिक बैठक में शामिल हुए थे। बैठक के बाद अस्वस्थ महसूस होने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया।

श्री कौलिबली 2017 में प्रधानमंत्री बने थे और आगामी अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारुढ़ आरएचडीपी पार्टी की ओर से उम्मीदवार थे। उन्हें गत मार्च में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था।


09-Jul-2020 5:28 PM

पेइचिंग/मास्को, 9 जुलाई । भारत और अमेरिका की चौतरफा घेराबंदी से टेंशन में आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अब रूस की शरण में पहुंच गए हैं। शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फोन कर उनसे रणनीतिक सहयोग और संपर्क बढ़ाने का अनुरोध किया है। चीनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि मास्को और पेइचिंग दोनों ही एकाधिकारवाद और आधिपत्य के खिलाफ हैं।

शी जिनपिंग ने बुधवार को पुतिन से कहा कि यह जरूरी है कि तेजी से बदलती वैश्विक स्थिति में चीन और रूस दोनों ही अपने रणनीतिक सहयोग और संपर्क को और तेज करें। शी जिनपिंग और पुतिन के बीच यह बातचीत ऐसे समय पर हुई जब अमेरिका-चीन के बीच संबंध बहुत तेजी से खराब रहे हैं और उधर भारत से भी चीन का सीमा पर भारी तनाव चल रहा है।

यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब पांच दिन पहले ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन को फोनकर उन्हें जनमत संग्रह में जीत के लिए बधाई दी थी और एक बड़े सैन्य समझौते को मंजूरी दी थी। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे वैश्विक नेता थे जिन्होंने पुतिन को जीत की बधाई दी थी। इस दौरान पुतिन ने पीएम मोदी से कहा था कि वह चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच विशेष और विशेष अधिकारों वाले रिश्ते को और ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं।

पुतिन के साथ बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि चीन रूस के साथ सहयोग जारी रखना चाहता है और दृढ़तापूर्वक विदेशी हस्तक्षेप और तोडफ़ोड़ का विरोध करता है। साथ ही दोनों देशों की संप्रभुता को, सुरक्षा और विकास के हितों को बनाए रखना चाहता है। शी ने कहा कि चीन ने हमेशा से ही रूस के विकास के रास्ते का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र में सहयोग को और ज्यादा तेज करेगा। (navbharattimes.indiatimes.com)


09-Jul-2020 2:37 PM

वॉशिंगटन, 9 जुलाई। कोरोना वायरस के मुद्दे पर अमेरिका लगातार चीन के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है। अब अमेरिका चीन के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। व्हाइट हाउस ने इस बारे में जानकारी दी है लेकिन वह कार्रवाई क्या होगी, इस बारे में अभी कुछ नहीं बताया गया है। चीन के वुहान शहर से कोरोना फैलने के बाद से ही अमेरिका और चीन के बीच तल्खियां बढ़ती देखी गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वायरस को लेकर लगातार चीन पर सवाल उठा रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी केली मेकेनी ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति से आगे निकलने वाली नहीं हूं कि चीन पर हमारी कार्रवाई क्या होगी, लेकिन आप कुछ आगामी कार्रवाई के बारे में सुन रहे होंगे, जो चीन से संबंधित हैं। इसलिए, मैं इसकी पुष्टि कर सकती हूं।

दोनों देशों के बीच कोरोना के अलावा तल्खियां बढऩे के दूसरे कारण भी हैं। दरअसल चीन ने हांगकांग में नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया है। चीन ने अमेरिकी पत्रकारों पर प्रतिबंध लगाया है। चीन में उइगर मुस्लिम के साथ हो रहे व्यवहार और तिब्बत में सुरक्षा को लेकर भी अमेरिका ने चीन के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भारत और चीन के मसले पर कहा कि चीन की अत्यंत आक्रामक गतिविधियों का भारतीयों ने सर्वश्रेष्ठ तरीके से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि चीन की क्षेत्रीय विवादों को उकसाने की प्रवृत्ति रही है और दुनिया को यह धौंस चलने नहीं देनी चाहिए।

पोम्पियो ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, कि मैंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इस (चीन की आक्रामक गतिविधियों) के बारे में कई बार बात की है। भारतीयों ने उनका जवाब भी सर्वश्रेष्ठ तरीके से दिया है। (khabar.ndtv.com)


09-Jul-2020 12:13 PM

बीजिंग/जिनेवा/नयी दिल्ली, 9 जुलाई (वार्ता)। कोरोना वायरस के दिनोंदिन बढ़ते कहर के बीच दुनिया भर में इसके कारण होने वाली मौतों की संख्या साढ़े पांच लाख के पास पहुंच गयी है, जबकि 1.20 करोड़ से अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं।
कोविड-19 के मामले में अमेरिका दुनिया भर में पहले, ब्राजील दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर है। वहीं इस महामारी से हुई मौतों के आंकड़ों के मामले में अमेरिका पहले, ब्राजील दूसरे और ब्रिटेन तीसरे स्थान पर है।
अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार विश्व भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,20,12,125 हो गयी है जबकि 5,48,896 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
विश्व महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कोरोना से अब तक 3054650 लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 1,32,298 लोगों की मौत हो चुकी है। ब्राजील में अब तक 17,13,160 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं जबकि 67,964 लोगों की मौत हो चुकी है।
भारत में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के 24879 नये मामले सामने आये हैं और अब कुल संक्रमितों की संख्या बढक़र 7,67,296 हो गई है। इसी अवधि में कोरोना वायरस से 487 लोगों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या बढक़र 21,129 हो गई है। देश में इस समय कोरोना के 2,69,789 सक्रिय मामले हैं और अब तक 4,76,378 लोग इस महामारी से निजात पा चुके हैं।
रूस कोविड-19 के मामलों में चौथे नंबर पर है और यहां इसके संक्रमण से अब तक 6,99,749 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 10,650 लोगों ने जान गंवाई है। पेरु में लगातार हालात खराब होते जा रहे है वह इस सूची में पांचवें नम्बर पर पहुंच गया है। वहां संक्रमितों की संख्या 3,12,911 हो गई तथा 11,133 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के मामले में चिली विश्व में छठे स्थान पर आ गया हैं। यहां अब तक कोरोना वायरस से 3,03,083 लोग संक्रमित हुए हैं और मृतकों की संख्या 6573 है।
ब्रिटेन संक्रमण के मामले में सातवें नंबर पर आ गया है। यहां अब तक इस महामारी से 2,88,511 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 44,602 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। कोरोना संक्रमण के मामले में मेक्सिको स्पेन से आगे निकल कर आठवें स्थान पर आ गया है और यहां संक्रमितों की संख्या 2,75,003 पहुंच गई है और अब तक इस वायरस से 32,796 लोगों की मौत हुई है। वहीं स्पेन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 252,513 है जबकि 28,396 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में दसवें स्थान पर है यहां संक्रमितों की संख्या 2,48,379 हो गई है और 12,084 लोगों की इसके कारण मौत हुई है।
यूरोपीय देश इटली में इस जानलेवा विषाणु से 2,42,149 लोग संक्रमित हुए हैं त था 34,914 लोगों की मौत हुई है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना संक्रमितों की संख्या सवा दो लाख से अधिक हो गयी है और यहां अब तक 2,37,489 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 4922 लोगों की मौत हो चुकी है। एक अन्य पड़ोसी देश बंगलादेश में 172134 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं जबकि 2197 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।
दक्षिण अफ्री ने कोरोना संक्रमण के मामले में सऊदी अरब और तुर्की को पीछे छोड़ दिया है। यहां संक्रमितों की संख्या 2,24,465 हो गई है और 3602 लोगों की मौत हो चुकी है। सऊदी अरब में कोरोना संक्रमण से अब तक 220144 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 2059 लोगों की मौत हो चुकी है। तुर्की में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,08,938 हो गयी है और 5282 लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में कोरोना संक्रमितों की संख्या 206,072 हैं और 29,936 लोगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में 1,98,699 लोग संक्रमित हुए हैं और 9046 लोगों की मौत हुई है।
वैश्विक महामारी कोरोना के उद्गमस्थल चीन में अब तक 84,950 लोग संक्रमित हुए हैं और 4,641 लोगों की मृत्यु हुई है। कोरोना वायरस से बेल्जियम में 9776, कनाडा में 8786 , नीदरलैंड में 6154, स्वीडन में 5482, इक्वाडोर में 4873 , मिस्र 3564, इंडोनेशिया 3559, इराक 2779, स्विट्जरलैंड में 1966, आयरलैंड में 1738, पुर्तगाल में 1631 और अर्जेटीना में 1694 लोगों की मौत हुई है।

 


08-Jul-2020 2:00 PM

वाशिंगटन, 8 जुलाई । अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दुनिया भर में कोरोना वायरस के प्रसार के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ अपने देश के सभी संबंध खत्म करने की आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र को जानकारी दे दी है। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
अमेरिका डब्ल्यूएचओ पर लगातार कोविड-19 को लेकर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाता रहा है। यह वैश्विक महामारी पिछले साल चीन के वुहान शहर से ही शुरू हुई थी। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य संगठन के विश्व को गुमराह करने के कारण इस वायरस से दुनिया भर में पांच लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जिनमें से 1,30,000 से अधिक लोग तो अमेरिका के ही हैं।
अमेरिका ने अप्रैल से ही डब्ल्यूएचओ को पैसे देना बंद कर दिया थाञ ट्रंप प्रशासन के संबंधों की समीक्षा शुरू करने के बाद अमेरिका ने अप्रैल में ही डब्ल्यूएचओ को कोष देना बंद कर दिया था। इसके एक महीने बाद ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ संबंध समाप्त करने की घोषणा की थी. अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सबसे अधिक कोष, 45 करोड़ डॉलर से अधिक प्रति वर्ष देता है। जबकि चीन का योगदान अमेरिका के योगदान के दसवें हिस्से के बराबर है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक बयान में कहा, ‘ मैं कह सकता हूं कि छह जुलाई 2020 को अमेरिका ने महासचिव को विश्च स्वास्थ्य संगठन से हटने की आधिकारिक जानकारी दी जो छह जुलाई 2021 से प्रभावी होगा। ’दुजारिक ने कहा कि महासचिव डब्ल्यूएचओ के साथ इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि संगठन से हटने की सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं की नहीं। अमेरिका 21 जून 1948 से डब्ल्यूएचओ संविधान का पक्षकार है। (abplive.com)
 


08-Jul-2020 1:59 PM

इस्लामाबाद, 8 जुलाई। पाकिस्तान सरकार ने फर्जी लाइसेंस की मदद से देश की विभिन्न एयरलाइंस में कार्यरत 28 पायलटों को बर्खास्त कर दिया है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में फर्जी लाइसेंस की मदद से एयरलाइंस में सेवा देने वाले पायलटों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि एक अन्य कदम के तहत पाकिस्तान नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने दो महिला पायलटों सहित 34 और पायलटों के लाइसेंस निलंबित कर दिए है। निलंबित पायलटों के लाइसेंसों की जांच के बाद मंत्रिमंडल इस पर निर्णय लेगा।
इससे पहले जून में, देश के नागरिक उड्डयन विभाग ने सरकारी विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस, एयरब्ल्यू और सीरीन एयर सहित कई एयरलाइंस के 160 पायलटों के लाइसेंस को संदिग्ध घोषित करते हुए जांच प्रक्रिया पूरी होने तक एयरलाइंस के प्रबंधन को उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे।
पाकिस्तान के कराची में हाल ही में हुए विमान हादसे की जांच प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों को पायलटों के संदिग्ध रिकार्ड मिलने के बाद नागरिक उड्डयन विभाग की तथ्यान्वेषी कमेटी उनके लाइसेंस में जांच कर रही है। इस घटना में चालक दल के सदस्यों सहित 97 लोग मारे गए थे। (वार्ता)
 


08-Jul-2020 1:58 PM

वॉशिंगटन, 8 जुलाई। अमेरिका ने मंगलवार को घोषणा की कि वह बायोटेक फर्म नोवावैक्स द्वारा निर्मित कोविड-19 वैक्सीन के विकास और निर्माण के लिए 1.6 बिलियन डॉलर प्रदान कर रहा है, यह राशि ऑपरेशन वार्प स्पीड के तहत दी जाने वाली सबसे बड़ी राशि है। अमेरिका ने अलग से यह भी कहा कि वह कोविड-19 के इलाज और प्रोफिलैक्सिस यानि रोगनिरोध पर किए जा रहे एक्सपेरिमेंट्स के लिए रेजिनरॉन को भी 450 यूएस डॉलर प्रदान कर रहा था। जो कि दो एंटीबॉडी का संयोजन है।
अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग, ह्यूमन सर्विस और रक्षा विभाग के साथ हुए समझौतों की शर्तों के मुताबिक नोवावैक्स साल के अंत तक अपनी वैक्सीन की 100 मिलियन खुराक देने के लिए सहमत हुआ है। कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ स्टेनली एर्क ने कहा, हम अपने देश की जनसंख्या को महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदान करने की चाह में असाधारण तत्परता के साथ अपने वैक्सीन कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। ऑपरेशन वार्प स्पीड का हिस्सा होने पर हमें गर्व है। इस वैक्सीन के अंतिम चरण यानि फेस 3 ट्रायल को एनवीएक्स-सीओवी 2373 नाम दिया गया है। ऐसा बताया जा रहा है यह सर्दियों तक होगा।   
मैरीलैंड बेस्ड कंपनी एसएआरएस-सीओवी-2’ एस, स्पाइक प्रोटीन, के संश्लेषित टुकड़ों को विकसित करने के लिए कीट कोशिकाओं का उपयोग करती है।जो वायरस कोशिकाओं पर आक्रमण करने के लिए मानव शरीर के इम्यून रिस्पॉन्स को सक्रिय करता है। यह एक सहायक का भी उपयोग करता है, एक यौगिक जो एंटीबॉडी को बेअसर करने के लिए प्रोडक्शन को बढ़ाता है। वसंत में, कंपनी ने कहा कि उसने एक मौसमी फ्लू वैक्सीन के प्रभाव को साबित कर दिया था जो समान तकनीक का उपयोग करके विकसित हुई थी।
अमेरिका द्वारा नोवावैक्स को दी जाने वाली राशि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैक्सीन को दिए गए 1.2 बिलियन डॉलर से अधिक है जिसे एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित किया जा रहा है। ऑपरेशन वार्प स्पीड के तहत, अमेरिका 2021 में कोविड-19 के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीकों की लाखों खुराक देने का लक्ष्य बना रहा है। बता दें कि ऑपरेशन वार्प स्पीड  एक पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय सरकार द्वारा कोविड-19 वैक्सीन, मेडिकल और निदान के विकास, निर्माण और वितरण को सुविधाजनक बनाने और तेज करने के लिए शुरू की गई है। (khabar.ndtv.com)
 


08-Jul-2020 11:35 AM

बीजिंग/जिनेवा/नई दिल्ली, 8 जुलाई (वार्ता)। वैश्विक महामारी कोरोना का कहर दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है और दुनिया भर में इसके संक्रमितों की संख्या 1.17 करोड़ से अधिक हो गई है जबकि 5.43 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं।

अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार विश्व भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,17,97,891 हो गयी है जबकि  5,43,481 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

कोविड-19 के मामले में अमेरिका दुनिया भर में पहले, ब्राजील दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर है। वहीं इस महामारी से हुई मौतों के आंकड़ों के मामले में अमेरिका पहले, ब्राजील दूसरे और ब्रिटेन तीसरे स्थान पर है।

विश्व महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कोरोना से अब तक 29,93,759 लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 1,31,455 लोगों की मौत हो चुकी है। ब्राजील में अब तक 16,68,589 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं जबकि 66,741 लोगों की मौत हो चुकी है।

भारत में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के 22,752 नये मामले सामने आये हैं और अब कुल संक्रमितों की संख्या बढक़र 7,42,417 हो गई है। इसी अवधि में कोरोना वायरस से 482 लोगों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या बढक़र 20,642 हो गई है। देश में इस समय कोरोना के 2,64,944 सक्रिय मामले हैं और अब तक 4,56,831 लोग इस महामारी से निजात पा चुके हैं।

रूस कोविड-19 के मामलों में चौथे नंबर पर है और यहां इसके संक्रमण से अब तक 6,93,215 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 10,478 लोगों ने जान गंवाई है। पेरु में लगातार हालात खराब होते जा रहे है वह इस सूची में पांचवे नम्बर पर पहुंच गया है वहां संक्रमितों की संख्या 3,09,278 हो गई तथा 10,952 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के मामले में चिली विश्व में छठे स्थान पर आ गया हैं। यहां अब तक कोरोना वायरस से 3,01,019 लोग संक्रमित हुए हैं और मृतकों की संख्या 6434 है।

ब्रिटेन संक्रमण के मामले में सातवें नंबर पर आ गया है। यहां अब तक इस महामारी से 2,87,874 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 44,476 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

कोरोना संक्रमण के मामले में मेक्सिको स्पेन से आगे निकल कर आठवें स्थान पर आ गया है और यहां संक्रमितों की संख्या 2,68,008 पहुंच गई है और अब तक इस वायरस से 32,014 लोगों की मौत हुई है। स्पेन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 252,130 है जबकि 28,392 लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में दसवें स्थान पर है यहां संक्रमितों की संख्या 2,45,688 हो गई है और 11,931 लोगों की इसके कारण मौत हुई है। यूरोपीय देश इटली ग्याहवें स्थान पर पहुंच गया है यहां अब तक कोविड-19 से 2,41,956 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 34,899 लोगों की मौत हुई है।

पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना संक्रमितों की संख्या सवा दो लाख से अधिक हो गयी है और यहां अब तक 2,34,509 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 4839 लोगों की मौत हो चुकी है। एक अन्य पड़ोसी देश बंगलादेश में 168645 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं जबकि 2151 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।

सऊदी अरब कोरोना संक्रमण के मामले में तुर्की और फ्रांस से आगे निकल गया है और यहां संक्रमितों की संख्या 2,17,108 हो गई है और 2017 लोगों की मौत हो चुकी है। दक्षिण अफ्रीका भी कोरोना संक्रमण के मामले में तुर्की और फ्रांस से आगे पहुंच गया है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या 215855 हो गई और 3502 लोगों की मौत हो चुकी है। तुर्की में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,07,897 हो गयी है और 5260 लोगों की मौत हो चुकी है।

फ्रांस में कोरोना संक्रमितों की संख्या 206,072 हैं और 29,936 लोगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में 1,98,343 लोग संक्रमित हुए हैं और 9032 लोगों की मौत हुई है। वैश्विक महामारी कोरोना के उद्गमस्थल चीन में अब तक 84,917 लोग संक्रमित हुए हैं और 4,641 लोगों की मृत्यु हुई है।

कोरोना वायरस से बेल्जियम में 9774, कनाडा में 8765 , नीदरलैंड में 6151, स्वीडन में 5447, इक्वाडोर में 4873, मिस्र 3489, इंडोनेशिया 3309, इराक 2685, स्विट््जरलैंड में 1966, आयरलैंड में 1742, पुर्तगाल में 1629 और अर्जेटीना में 1644 लोगों की मौत हुई है।


07-Jul-2020 6:56 PM

डेटन (अमेरिका), 7 जुलाई । दुनिया के सबसे अधिक उम्र के शरीर से जुड़े जुड़वा भाइयों का चार जुलाई को निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे। रोनी और डोनी गेलयन का जन्म 28 अक्टूबर 1951 को ओहियो के बेवरक्रिक में हुआ था। 2014 में 63 वर्ष की उम्र में उन्होंने सबसे अधिक समय तक जीने वाले शरीर से जुड़े जुड़वा का रिकॉर्ड बना लिया था। वे दोनों पेट से जुड़े हुए थे। 

डब्ल्यूएचआईओ की एक रिपोर्ट में उनके भाई जिम ने कहा कि दोनों का डेटन के एक स्वास्थ्य केन्द्र में निधन हो गया। मॉन्टगोमेरी काउंटी कोरोनर ने कहा कि उनकी मौत प्राकृतिक थी। टीएलसी ने 2010 में इन जुड़़वा भाइयों पर एक वृत्तचित्र भी प्रसारित किया था। दोनों भाइयों ने कार्निवल और सर्कस में हिस्सा भी लिया, जहां वे सबके लिए आकर्षण का केन्द्र बनें। 

जिम गेलयन ने कहा कि उनके वेतन से कई वर्षों तक उनका घर भी चला। दोनों ने 1991 में काम करना बंद कर दिया और 2010 तक अकेले रहे। इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढऩे की वजह से उन्होंने परिवार के साथ रहना शुरू कर दिया था। (abpnews)

 


07-Jul-2020 6:14 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई। भारत सरकार ने हाल ही में टिक टॉक समेत चीन के 59 ऐप्स पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया। वहीं अब  टिकटॉक हांगकांग में भी बंद होने जा रहा है। कंपनी ने यहां इसे बंद करने का फैसला किया है। टिक टॉक प्रवक्ता ने कहा कि हाल की घटनाओं की वजह से बने हालात के मद्देनजर हांगकांग में टिक टॉक ऐप के ऑपरेशन को बंद करने का फैसला लिया है।

वीडियो मेकिंग ऐप टिक टॉक ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून आने के बाद इसे बंद करने का निर्णय लिया है। यह कंपनी अब वॉल्ट डिज्नी के पूर्व कोएक्जीक्यूटीव केविन मेयर द्वारा चलाई जाती है। टिकटॉक द्वारा पहले भी कहा गया है कि कंपनी चीन सरकार द्वारा सामग्री पर सेंसर या टिकटॉक के यूजर्स डाटा तक पहुंच को लेकर किए गए किसी भी अनुरोध को नहीं मानेगी। कंपनी ने साफ किया कि उससे अब तक ऐसा करने को कहा भी नहीं गया है। 

हांगकांग कंपनी के लिए एक छोटा बाजार रहा है, साथ ही इससे खास लाभ भी नहीं मिला। टिक टॉक ने पिछले साल बताया था कि हांगकांग में करीब 150,000 टिक टॉक यूजर्स हैं। टिक टॉक को हांगकांग में बंद करने का फैसला इसलिए भी लिया गया, क्योंकि ये साफ नहीं हो पा रहा है कि हांगकांग अब पूरी तरह से बीजिंग के अधिकार क्षेत्र में आएगा या नहीं।

भारत के बाद कई देश में प्रतिबंधित करने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका में इस पर बैन लगाया जा सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने सोमवार देर रात कहा कि हम निश्चित रूप से चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया भी टिक टॉक को बैन कर सकता है। यहां भी इस ऐप को बैन करने की मांग अब तूल पकडऩे लगी है। (abplive.com)


07-Jul-2020 1:42 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई। कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते अमेरिका में रह रहे भारतीय छात्रों को बड़ा झटका लग सकता है। सोमवार को अमेरिका ने ऐलान किया है कि ऐसे छात्रों का वीजा वापस लिया जाएगा जिनकी क्लासेज केवल ऑनलाइन मॉडल पर हो रही है।

इमिग्रेशन और कस्टम इनफोर्समेंट डिपार्टमेंट (आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन विभाग) की तरफ से एक बयान जारी करके कहा गया कि नॉनइमिग्रैंट एफ-1 और एम -1 छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा जिनकी केवल ऑनलाइन क्लासेज चल रही है। विभाग के अनुसार ऐसे छात्रों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी या फिर अगर वह अभी भी अमेरिका में रह रह हैं तो उन्हें अमेरिका छोडक़र अपने देश जाना होगा। उन्होंने कहा कि अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो छात्रों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

आईसीई ने स्टेट्स के विभागों से कहा कि ऐसा छात्र जिनकी कक्षाएं पूरी तरह से ऑनलाइन चल रही हैं उन्हें अगले सेमेस्टर के लिए वीजा जारी नहीं किया जाएगा और न ही ऐसे छात्रों को राज्य में घुसने की अनुमति दी जाएगी। आईसीई के अनुसार, एफ-1 के छात्र अकैडमिक कोर्स वर्क में हिस्सा लेते हैं जबकि एम-1 स्टूडेंट वोकेशनल कोर्सवर्क के छात्र होते हैं। हालांकि अमेरिका की ज्यादातर यूनिवर्सिटीज ने अब तक अगले सेमेस्टर के लिए योजना के बारे में नहीं बताया है। ज्यादातर कॉलेजों के लिए हाइब्रिड मॉडल का ऐलान किया था लेकिन हॉर्वर्ड जैसे कुछ बड़े विश्वविद्यालयों ने छात्रों के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन क्लासेज का इंतजाम किया था। 

इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन के अनुसार अमेरिका में 2018-2019 एकैडमिक इयर के लिए 10 लाख से ज्यादा इंटरनेशनल छात्र हैं। जिनमें बड़ी संख्या में चीन, भारत, साउथ कोरिया, सउदी अरब और कनाडा जैसे देश शामिल हैं।   (khabar.ndtv.com)


07-Jul-2020 1:15 PM

नई दिल्ली, 7 जुलाई (एजेंसी)। अटलांटा में हाल के विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत का केंद्र रहे एक स्थान के निकट से गुजर रही कार पर हुई गोलीबारी में आठ साल की एक बच्ची की मौत चार जुलाई को हो गई। हथियार से लैस कम से कम दो लोगों ने कार पर गोली चलाई थी।

पुलिस ने बच्ची की पहचान सिकोरिया टर्नर के रूप में की है। अटलांटा की मेयर किशा लांस बॉटम्स ने रविवार को एक भावनात्मक संवाददाता सम्मेलन में बच्ची की शोकाकुल मां के बगल में बैठकर पीडि़त के लिए न्याय की मांग की। यह घटना वेंडी रेस्त्रां के निकट हुई। यह वही स्थल है जहां 12 जून को अफ्रीकी अमेरिकी व्यक्ति रेशार्ड बू्रक्स की हत्या अटलांटा के एक पुलिस अधिकारी ने कर दी थी। इसके बाद इस रेस्त्रां को जला दिया गया और इलाका पुलिस बर्बरता के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया।

अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में अवैध तौर पर रखे गए अवरोधकों से बच्ची की मां ने गुजरने का प्रयास किया और उसी समय शनिवार रात में वाहन पर गोलियां चली। अटलांटा जर्नल कंस्टीट्यूशन के अनुसार मेयर ने कहा, तुमने गोली चलाई और आठ साल की एक बच्ची को मार डाला। वहां सिर्फ एक गोली चलानेवाला नहीं था बल्कि गोली चलाने वाले कम से कम दो लोग थे। पुलिस ने कहा है कि लोगों से गोलीबारी करने वालों की पहचान के लिये मदद ली जा रही है। उन्होंने इस संबंध में एक पोस्टर भी जारी किया है कि इसमें शामिल एक व्यक्ति के पूरी तरह से काले कपड़े पहने होने जबकि एक अन्य व्यक्ति के सफेद टीशर्ट में होने की बात कही गई है।


07-Jul-2020 10:19 AM

संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी 

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण से जुड़ी एक संस्था का कहना है कि अगर इंसानों ने जंगली जीवों को मारना और उनका उत्पीड़न जारी रखा तो उसे कोरोना वायरस संक्रमण जैसी और बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है.

यूएन इन्वायरमेंट प्रोग्राम ऐंड इंटरनेशनल लाइवस्टॉक रिसर्च इन्स्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस जैसे ख़तरनाक संक्रमण के लिए पर्यावरण को लगातार पहुंचने वाला नुक़सान, प्राकृतिक संसाधनों का बेतहाशा दोहन, जलवायु परिवर्तन और जंगली जीवों का उत्पीड़न जैसी वजहें ज़िम्मेदार हैं.

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जानवरों और पक्षियों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां लगातार बढ़ी हैं. विज्ञान की भाषा में ऐसी बीमारियों को ‘ज़ूनोटिक डिज़ीज़’ कहा जाता है.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इंसानों ने पर्यावरण और जंगली जीवों को नहीं बचाया तो उसे कोरोना जैसी और ख़तरनाक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रोटीन की बढ़ती मांग के लिए जानवरों को मारा जा रहा है और इसका ख़ामियाज़ा आख़िरकार इंसान को ही भुगतना पड़ रहा है.

हर साल लाखों लोगों की मौत

विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों से होने अलग-अलग तरह की बीमारियों के कारण दुनिया भर में हर साल तकरीबन 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है.

पिछलों कुछ वर्षों में इंसानों में जानवरों से होने वाली बीमारियों यानी ‘ज़ूनोटिक डिज़ीज़’ में इजाफ़ा हुआ है. इबोला, बर्ड फ़्लू और सार्स जैसी बामारियां इसी श्रेणी में आती हैं.

पहले ये बीमारियां जानवरों और पक्षियों में होती हैं और फिर उनके ज़रिए इंसानों को अपना शिकार बना लेती हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ज़ूनोटिक बीमारियों के बढ़ने की एक बड़ी वजह ख़ुद इंसान और उसके फ़ैसले हैं.

बेतहाशा बढ़ा है मांस का उत्पादन

यूएन इन्वायरमेंट प्रोग्राम की एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर इंगर एंडर्सन ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में इंसान नए वायरसों की वजह से होने वाले कम से कम छह तरह के ख़तरनाक संक्रमण झेल चुका है.

उन्होंने कहा, “मध्यम और निम्न आय वर्ग वाले देशों में हर साल कम से कम 20 लाख लोगों की मौत गिल्टी रोग, चौपायों से होने वाली टीबी और रेबीज़ जैसी ज़ूनोटिक बीमारियों के कारण हो जाती है. इतना ही नहीं, इन बीमारियों से न जाने कितना आर्थिक नुक़सान भी होता है.”

इंगर एंडर्सन ने कहा, “पिछले 50 वर्षों में मांस का उत्पादन 260% बढ़ गया है. कई ऐसे समुदाय हैं जो काफ़ी हद तक पालतू और जंगली जीव-जंतुओं पर निर्भर हैं. हमने खेती बढ़ा दी है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी बेतहाशा किए जा रहे हैं. हम जंगली जानवरों के रहने की जगहों को नष्ट कर रहे हैं, उन्हें मार रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि बांध, सिंचाई के साधन, फ़ैक्ट्रियां और खेत भी इंसानों में होने वाली संक्रामक बीमारियों के लिए 25% तक ज़िम्मेदार हैं.
कैसे हल होगी मुश्किल?

इस रिपोर्ट में सिर्फ़ समस्याएं ही नहीं गिनाई गई हैं, बल्कि सरकारों को ये भी समझाया गया है कि भविष्य में इस तरह की बीमारियों से कैसे बचा जाए.

विशेषज्ञों ने रिपोर्ट में पर्यावरण को कम नुक़सान पहुंचाने वाली खेती को बढ़ावा देने और जैव विविधता को बचाए रखने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया है.

एंडर्सन कहती हैं, “विज्ञान साफ़ बताता है कि अगर हम इकोसिस्टम के साथ खिलवाड़ करते रहे, जंगलों और जीव-जंतुओं को नुक़सान पहुंचाते रहे तो आने वाले समय में जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां भी बढ़ेंगी.”

उन्होंने कहा कि भविष्य में कोरोना वायरस संक्रमण जैसी ख़तरनाक बीमारियों को रोकने के लिए इंसान को पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा को लेकर और संज़ीदा होना पड़ेगा.  (www.bbc.com)
 


07-Jul-2020 9:35 AM

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी तस्वीर पर

पुर्तगाल में फ़ैशन और लाइफ़स्टाइल पत्रिका ‘वोग’ के हालिया कवर पर विवाद पैदा हो गया है.

वोग के इस अंक को ‘द मैडनेस इश्यू’ कहा गया है और प्रकाशकों का कहना है कि वो इसके ज़रिए मानसिक स्वास्थ्य जैसे ‘अहम मुद्दे पर रौशनी डालना’ चाहते थे.

इस अंक के कवर पर एक महिला की तस्वीर है जो अस्पताल के बाथटब में बैठी है और एक नर्स उसके सिर पर पानी उड़ेल रही है.

वोग ने इस कवर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है.

द मैडनेस इश्यू,

ये प्यार के बारे में है.

ये ज़िंदगी के बारे में है.

ये हमारे बारे में है.

ये आपके बारे में है.

ये अभी के बारे में है.

ये स्वास्थ्य के बारे में है.

ये मानसिक स्वास्थ्य के बारे में है.

द मैडनेस इश्यू आज के वक़्त के बारे मेंहै.

मनोचिकित्सकों और मानिसक सेहत की परेशानियों से जूझ रहे लोगों ने इस चित्रण पर नाख़ुशी ज़ाहिर की है. उनका कहना है कि ये मानसिक बीमारियों के उपचार के ‘अनुचित’ और ‘आउटडेटेड’ तरीके को दिखाता है.

इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए वोग ने कहा है कि तस्वीर का इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा शुरू करने उद्देश्य से किया गया था.

पत्रिका के प्रकाशक ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए अपने एक बयान में कहा, “वोग के इस अंक में कवर के ज़रिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ ढूंढने की कोशिश की गई है और इसका मक़सद असल ज़िंदगी और सच्चा कहानियों को दिखाना है. पत्रिका के भीतर मनोचिकित्सकों, सामाजिक वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञिकों और अन्य विशेषज्ञों से बातचीत पर आधारित लेख है.”

कवर पेज पर बाथटब में जिस लड़की की तस्वीर है, वो स्लोवाकिया की मॉडल सिमोना किर्चानेरोवा हैं. उन्होंने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि वोग के कवर पर आना उनके करियर का एक ‘अहम हिस्सा' है क्यों तस्वीर में उनके पास जो लोग दिख रहे हैं, वो उनके परिजन हैं.

सिमोना ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं वॉग के कवर पेज पर, अपनी मां और दादी के साथ.

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

लंदन की क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट डॉक्टर कैटरीना एलेक्ज़ेंड्रॉकी ने बीबीसी से कहा कि वो वोग के इस कवर को ‘अनैतिक’ मानती हैं.

उन्होंने कहा, “जो लोग गंभीर मानसिक तकलीफ़ों से गुज़र चुके हैं, उन्हें एक महिला को इतनी नाज़ुक स्थिति में एक फ़ैशन मैग़ज़ीन के कवर पर देखकर अपने पुराने और मुश्किल वक़्त की याद आ सकती है.”

डॉक्टर कैटरीना कहती हैं, “ये तस्वीर उस धारणा का समर्थन करती नज़र आती है कि मानसिक तकलीफ़ के दौरान महिलाएं असहाय और कमज़ोर हो जाती हैं. ये तस्वीर हमें उन लोगों के बारे में नहीं बताती जिन्होंने अपनी इच्छाशक्ति और संघर्ष से मानसिक बीमारियों को हराया है.”

पुर्तगाल की मॉडल सारा सैंपियों ने कहा है कि वोग के कवर पर जो तस्वीर है वो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बातचीत का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती.

सारा ने कहा कि वो ख़ुद मानसिक तकलीफ़ों से गुज़र चुकी हैं और उन्हें ये तस्वीर ज़रा भी पसंद नहीं आई.

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई अपनी एक वीडियो में कहा कि ‘ये तस्वीर किसी पुराने मेंटल हॉस्पिटल की लग रही है, जहां मरीज़ों को टॉर्चर किया जाता था.’

सारा ने कहा कि ये तस्वीर ऐसे संवदेनशील समय में सामने आई है जब बहुत से लोग कोरोना वायरस महामारी की वजह से तरह-तरह की मानसिक परेशानियों, अकेलेपन और अलगाव से जूझ रहे हैं.

'तस्वीर में वो सब है, जिसकी ज़रूरत नहीं'

मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता और लेखिका पूर्णा बेल ने ट्विटर पर लिखा, “मैं ये उन सभी लोगों की तरफ़ से कह रही हूं जो कभी ख़ुद मेंटल हॉस्पिटल में रहे हैं या जिनके प्रियजन वहां रहे हैं: पत्रिका के कवर पेज पर प्रकाशित होने से पहले ये तस्वीर कई लोगों की नज़रों से गुज़री होगी और उन्होंने इसे सही ठहराया होगा. ये अपने आप में बहुत दुखद है.”

लिस्बन की साइकोथेरेपिस्ट सिल्विया बैपतिस्ता का कहना है कि वोग के इस कवर में वो सब कुछ है जिसकी ज़रूरत मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चा को नहीं है.

उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि मानसिक बीमारियों को ‘ग्लैमराइज़’ किया जाना ग़लत है.

हालांकि वोग के प्रकाशकों ने अपने पूरे बयान में यही कहा कि वो मानसिक स्वास्थ्य के विषय की अहमियत समझते हैं.

उन्होंने कहा, “हमारा इरादा तस्वीरों और स्टोरीटेलिंग के ज़रिए आज के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डालना था.” (www.bbc.com)

 


06-Jul-2020 2:09 PM

नई दिल्ली, 6 जुलाई । कोरोना संकट के चलते जहां देश में बड़े स्तर पर लोगों की नौकरियां जा रही हैं, वहीं अब खाड़ी देश कुवैत से भी परेशान करनी वाली खबर सामने आयी है। दरअसल कुवैत सरकार ने वहां की नेशनल असेंबली में एक बिल पेश किया है।
माना जा रहा है कि इस बिल के चलते कुवैत में करीब 7-8 लाख भारतीयों की नौकरियां जा सकती हैं। कुवैत की नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी कमेटी ने इस बिल को मंजूरी दे दी है और असेंबली से मंजूरी मिलते ही यह बिल कानून बन जाएगा।
दरअसल प्रवासी कोटा बिल के तहत कुवैत में भारतीयों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 15 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया गया है। गल्फ न्यूज के हवाले से यह खबर आयी है। कुवैत में भारतीय मूल के लोग सबसे ज्यादा हैं और वहां उनकी कुल संख्या करीब 14 लाख पचास हजार है। यह बिल कुवैत में रहने वाले दुनिया के अन्य देशों के प्रवासियों को भी प्रभावित करेगा। बिल के मुताबिक मिस्त्र के लोगों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 10 फीसदी तय करने का फैसला किया गया है। 
भारत के बाद कुवैत में सबसे बड़ी संख्या मिस्त्र के लोगों की ही है। कोरोना माहमारी फैलने के बाद कुवैत में प्रवासियों के खिलाफ माहौल बन रहा है। गौरतलब है कि कुवैत में प्रवासियों की तादाद इतनी ज्यादा है कि वहां की कुल जनसंख्या के 70 फीसदी प्रवासी हैं। कुवैत के मूल निवासी ही अपने देश में अल्पसंख्यक हो गए हैं। कुवैत में स्थित भारतीय दूतावास ने भी वहां रहने वाले भारतीयों की मदद के लिए इंडियन वर्कर्स वेलफेयर सेंटर बनाया हुआ है। जहां लोगों की मदद की जाती है। (www.jansatta.com)
 


06-Jul-2020 1:33 PM

काठमांडू, 6 जुलाई । चीन के भारी दबाव के बीच नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भविष्य पर फैसला एक बार फिर से टल गया है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की अहम बैठक को 8 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है। माना जा रहा है कि चीन की राजदूत हाओ यांकी के कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाकात के बाद इस बैठक को टाला गया है। इसी बैठक में ओली के भाग्य का फैसला होना था।

हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओली और प्रचंड के बीच रविवार को काफी देर तक वार्ता हुई लेकिन यह बेनतीजा समाप्त हो गई थी। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी को बचाने के लिए चीन ने अपनी राजदूत हाओ यांकी को मिशन पर लगा दिया है। चीन की राजदूत हाओ यांकी ने ओली के धुर विरोधी नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड के समर्थन में चल रहे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव नेपाल से रविवार शाम को उनके घर पर मुलाकात की थी।

यही नहीं चीनी राजदूत ने नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की थी और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में चल रहे मतभेदों पर गहरी चिंता जताई थी। माना जा रहा है कि चीनी राजदूत के हस्तक्षेप के बाद पीएम ओली के भविष्य पर फैसले को 8 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है। इससे पहले प्रधानमंत्री ओली और सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के बीच सत्ता की साझेदारी को लेकर हुई अहम बातचीत रविवार को विफल रही थी।

प्रधानमंत्री ओली के एक करीबी सूत्र ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता अपने-अपने रुख पर अड़े रहे और बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। शनिवार को भी 45 सदस्यों वाली स्थायी समिति की अहम बैठक को सोमवार तक के लिये टाल दिया गया था जिससे ओली के काम करने के तौर-तरीकों और भारत विरोधी बयानों को लेकर मतभेद को दूर करने के लिए शीर्ष नेतृत्व को और वक्त मिल सके। (navbharattimes)


06-Jul-2020 11:49 AM

बीजिंग/जिनेवा/नई दिल्ली, 6 जुलाई (वार्ता)। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और दुनिया भर में इसके संक्रमितों की संख्या 1.14 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि 5.33 लाख से ज्यादा लोग काल का ग्रास बन चुके हैं।
अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार विश्व भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,14,19,529 हो गयी है जबकि  5,33,780 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
कोरोना से अमेरिका दुनिया भर में पहले, ब्राजील दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर है। वहीं इस महामारी से हुई मौतों के आंकड़ों के मामले में अमेरिका पहले, ब्राजील दूसरे और ब्रिटेन तीसरे स्थान पर है।
भारत में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के 24,248 नये मामले सामने आये हैं और अब कुल संक्रमितों की संख्या बढक़र 6,97,413 हो गई है। इसी अवधि में कोरोना वायरस से 425 लोगों की मृत्यु होने से मृतकों की संख्या बढक़र 19,693 हो गई है। देश में इस समय कोरोना के 2,53,287 सक्रिय मामले हैं और अब तक 4,24,433 लोग इस महामारी से निजात पा चुके हैं। 

क्लिक करें और यह भी पढ़ें : देश में 24 घंटे में 24 हजार नए केस, अब तक 6.97 लाख कोरोना संक्रमित

विश्व महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कोरोना से अब तक 28,88,585 लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 1,29,946 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। ब्राजील में अब तक 16,03,055 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं जबकि 64,867 लोगों की मौत हो चुकी है।
रूस में भी कोविड-19 का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है और यहां इसके संक्रमण से अब तक 6,80,283 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 10,145 लोगों ने जान गंवाई है। पेरु में लगातार हालात खराब होते जा रहे है वह इस सूची में पांचे नम्बर पर पहुंच गया है वहां संक्रमितों की संख्या 3,02,718 हो गई तथा 10,589 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण के मामले में चिली विश्व में छठे स्थान पर आ गया हैं। यहां अब तक कोरोना वायरस से 2,95,532 लोग संक्रमित हुए हैं और मृतकों की संख्या 6308 है।
ब्रिटेन संक्रमण के मामले में सातवें नंबर पर आ गया है। यहां अब तक इस महामारी से 2,86,931 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 44,305 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
कोरोना संक्रमण के मामले में मेक्सिको स्पेन से आगे निकल कर आठवें स्थान पर आ गया है और यहां संक्रमितों की संख्या 2,56,848 पहुंच गई है और अब तक इस वायरस से 30,639 लोगों की मौत हुई है। स्पेन में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण अथवा इससे मौत का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। यहां अब तक 250,545 लोग संक्रमित हुए है जबकि 28,385 लोगों की मौत हो चुकी है।
यूरोपीय देश इटली में भी इस महामारी ने बहुत कहर बरपाया है। इटली दसवें स्थान पर है यहां अब तक कोविड-19 से 2,41,611 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 34,861 लोगों की मौत हुई है।
कोरोना वायरस से प्रभावित खाड़ी देश ईरान में संक्रमितों की संख्या 2,40,438 हो गई है और 11,571 लोगों की इसके कारण मौत हुई है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना संक्रमितों की संख्या दो लाख से अधिक हो गयी है और यहां अब तक 2,28,474 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 4712 लोगों की मौत हो चुकी है। एक अन्य पड़ोसी देश बंगलादेश में 162417 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं जबकि 2052 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है।
सऊदी अरब कोरोना संक्रमण के मामले में तुर्की और फ्रांस से आगे निकल गया है और यहां संक्रमितों की संख्या 2,09,509 हो गई है और 1916 लोगों की मौत हो चुकी है। तुर्की भी कोरोना संक्रमण के मामले में फ्रांस से आगे निकल गया है और यहां संक्रमितों की संख्या 2,05,758 हो गयी है और 5225 लोगों की मौत हो चुकी है।
फ्रांस में भी पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण अथवा इस बीमारी से मौत का नया मामला सामने नहीं आया है। यहां अब तक 204,222 लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं और 29,896 लोगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में 1,97,523 लोग संक्रमित हुए हैं और 9023 लोगों की मौत हुई है।
वैश्विक महामारी कोरोना के उद्गमस्थल चीन में अब तक 84,870 लोग संक्रमित हुए हैं और 4,641 लोगों की मृत्यु हुई है।
कोरोना वायरस से बेल्जियम में 9771, कनाडा में 8739, नीदरलैंड में 6146, स्वीडन में 5420, इक्वाडोर में 4781, स्विट््जरलैंड में 1965, आयरलैंड में 1741 और पुर्तगाल में 1614 लोगों की मौत हुई है।

 


05-Jul-2020 6:21 PM

बगदाद, 5 जुलाई (वार्ता)। इराक की राजधानी बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर रविवार को तडक़े रॉकेट हमला किया गया लेकिन पेट्रियॉट वायु रक्षा प्रणाली ने इसे बीच में ही नाकाम कर दिया मगर इस घटना में एक बच्चा घायल हो गया।

स्थानीय मीडिया ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि बगदाद के मध्य में स्थित ग्रीन जोन में अमेरिकी दूतावास पर हमले का प्रयास किया गया। लेकिन मिसाइल को बीच में ही पेट्रियॉट वायु रक्षा प्रणाली ने रोक दिया। इसके बाद मिसाइल दूतावास के पास स्थित एक आवासीय इमारत पर जा गिरी।

सूत्रों के मुताबिक इस हादसे में किसी की भी मौत नहीं हुयी। लेकिन एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।

अमेरिकी दूतावास पर रॉकेट हमले के कई प्रयासों के बाद ग्रीन जोन में स्थित अमेरिकी बलों ने पैट्रियट वायु रक्षा प्रणली का परीक्षण किया जिसके चंद घंटे बाद यह घटना हुई। इराकी सांसदों ने इसे भडक़ाने वाला बताते हुए इस परीक्षण की निंदा की है।

ग्रीन ज़ोन में सरकारी कार्यालय, दूतावास स्थित है तथा यह बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली भारी सुरक्षा वाली सडक़ के माध्यम से भी जुड़ता है। इस इलाके को नियमित रूप से रॉकेट हमलों से निशाना बनाया जाता रहा है।


05-Jul-2020 5:56 PM

वाशिंगटन, 5 जुलाई । अमेरिकी में सियासी जगत से इतर एक रैपर की इंट्री ने राष्ट्रपति के चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। रैपर केन्ये वेस्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव लडऩे की दावेदारी पेश की है। दिलचस्प बात ये है कि उन्हें टेस्ला प्रमुख एलन मस्क का समर्थन भी मिल गया है।

अमेरिका में इस साल के अंत में होने जा रहे राष्ट्रपति के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप और जो बिडेन के बीच मुकाबला जारी है। मगर अब मनोरंजन जगत के स्टार और रैपर केन्ये वेस्ट ने चुनाव लडऩे की घोषणा कर मुकाबले को काफी रोमांचक बना दिया है। इसका ऐलान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर किया। उन्होंने अपने ट्वीट में हैशटैग 2020 विजन का इस्तेमाल भी किया है।

उन्होंने लिखा, भगवान पर भरोसा रखते हुए हमें अमेरिका के वादे को समझना चाहिए। एक विजन के साथ देश के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। मैं अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव लडऩे जा रहा हूं। उनका ट्वीट सामने आने के बाद कई लोगों का उन्हें समर्थन भी मिलने लगा है। प्रमुख हस्तियों में एक टेस्ला के मालिक एलन मस्क भी हैं जिन्होंने उन्हें अपना समर्थन देने की बात कही है।

रैपर वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पक्के समर्थक माने जाते हैं। 2020 का राष्ट्रपति का चुनाव लडऩे की घोषणा से इसका मतलब ये हुआ कि ट्रंप को अब एक और शख्स से मुकाबला करना होगा। रैपर हॉलीवुड अदाकारा केन्ये किम कार्देशियन के पति हैं। उन्हें व्हाइट हाउस में जाने का मौका भी मिल चुका है। भले ही रैपर केन्ये ने चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी है मगर अभी उन्हें किसी सियासी जमात का समर्थन हासिल करना होगा। इसके अलावा 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलम्बिया में बैलेट के लिए क्वालिफाई करने की जरूरत होगी। (abp news)

 


05-Jul-2020 1:28 PM

हॉन्गकॉन्ग, 4 जुलाई । हुवावे के बल पर वर्ष 2030 तक डिजीटल तकनीक की दुनिया पर राज करने का सपना देख रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बड़ा झटका लगा है। दुनिया में चीन की ताकत का प्रतीक कहे जानी वाली हुवावे कंपनी पर अमेरिका ने ताजा प्रतिबंध लगा दिया है। इससे हुवावे की अमेरिकी तकनीकों तक पहुंच बहुत सीमित हो गई है। इन प्रतिबंधों के बाद के अब हुवावे के 5 प्रतिशत तकनीक मुहैया कराने के वादे पर सवाल उठने लगे हैं। संकट की इस घड़ी में भारत और पूरी दुनिया में बढ़ रहे चीन विरोधी माहौल ने हुवावे की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक हुवावे इस समय बहुत ज्यादा दबाव में है। उसकी अमेरिकी तकनीकों तक पहुंच इससे पहले इतनी कम कभी नहीं थी। अब दुनियाभर में मोबाइल कंपनियां यह सवाल कर रही हैं कि क्या हुवावे समय पर अपने 5 प्रतिशत तकनीक मुहैया कराने के वादे को पूरा कर पाएगी या नहीं। यही नहीं लद्दाख में सीमा पर चल रहे भारी तनाव से दुनिया के विशालतम बाजारों में से एक भारत में चीनी कंपनी के लिए संकट पैदा हो गया है। यही नहीं पूरे विश्व में चीन विरोधी भावनाएं तेज होती जा रही हैं।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने पिछले महीने घोषणा की थी कि हुवावे के खिलाफ माहौल बहुत खराब हो गया है क्योंकि दुनियाभर में लोग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सर्विलांस स्टेट के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। पोम्पियो ने चेक रिपब्लिक, पोलैंड और इस्टोनिया जैसे देशों की तारीफ की जो केवल विश्वसनीय वेंडर्स को ही अनुमति दे रहे हैं। पोम्पियो ने पिछले दिनों भारत की टेलिकॉम कंपनी जियो की भी तारीफ की थी जिसने हुवावे की तकनीक को नहीं लिया है।

वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक न्यू अमेरिकन सिक्यॉरिटी की शोधकर्ता कारिसा नेइश्चे ने कहा कि यूरोप में बदलाव की शुरुआत हो गई है। उन्होंने कहा कि यूरोप के देश और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां इस बात से बहुत चिंतित हैं कि अमेरिकी प्रतिबंधों से हुवावे के बिजनस को बहुत बड़ा झटका लगा है और वह सही समय पर 5 प्रतिशत तकनीक मुहैया नहीं करा पाएगी। दरअसल, अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में ताइवान की कंपनी टीएसएमसी भी आ गई है जो हुवावे को चिप और अन्य जरूरी उपकरण मुहैया कराती है। (navbharattimes.indiatimes.com)


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