अंतरराष्ट्रीय

Previous12Next
Date : 17-Oct-2019

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब में एक बस दुर्घटना में 35 लोगों की मौत पर बृहस्पतिवार को शोक जताया। पश्चिमी सऊदी अरब में बुधवार को एक बस और अन्य भारी वाहन की टक्कर में 35 लोग मारे गये और चार अन्य घायल हो गये। मरने वालों में एशियाई और अरब के नागरिक भी शामिल थे।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, सऊदी अरब में मक्का के पास बस दुर्घटना की खबर से दुखी हूं। हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों की जल्द सलामती की दुआ करता हूं।
सऊदी अरब के पश्चिमी इलाके में गुरुवार तडक़े हुए एक भीषण सडक़ हादसे में कम से कम 35 लोगों की मौत हो गयी तथा कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया के हवाले से पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि मदीना क्षेत्र के अल अखल इलाके में एक बस कई वाहनों से जा टकराई जिसकी वजह से 35 लोगों की जान चली गयी। उन्होंने बताया कि बस में सऊदी नागरिक समेत एशियाई देशों के नागरिक भी सवार थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मदीना के पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सऊदी अरब के इस पश्चिमी शहर में बुधवार (16 अक्टूबर) को यह हादसा हुआ। इसमें एक निजी चार्टर्ड बस और एक लोडर की टक्कर हो गई। घायलों को अल हमना अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। तेल पर आर्थिक निर्भरता को कम करने के प्रयास में सऊदी अरब धार्मिक पर्यटन क्षेत्र को सालभर जारी रखना चाहता है। (लाइव हिंदुस्तान)
 


Date : 15-Oct-2019

लंदन, 15 अक्टूबर । बुकर पुरस्कार के लिए विजेताओं का चयन करने वाले निर्णायक मंडल ने इस साल नियमों को तोड़ते हुए इस पुरस्कार के लिए मार्गरेट एटवुड और बर्नार्डिन एवरिस्टो को संयुक्त विजेता घोषित किया। एवरिस्टो इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने वाली पहली अश्वेत महिला हैं। इस पुरस्कार के लिए छांटी गई छह पुस्तकों में ब्रितानी-भारतीय उपन्यासकार सलमान रुश्दी का उपन्यास क्विचोटे भी शामिल था। 
बुकर के नियमों के अनुसार इस पुरस्कार को बांटा नहीं जा सकता, लेकिन निर्णायक मंडल ने कहा कि वे एटवुड के द टेस्टामेंट और एवरिस्टो के गर्ल, वुमैन, अदर में से किसी एक को नहीं चुन सकते। इन पुरस्कारों की शुरुआत 1969 में की गई थी। इससे पहले 1992 में दो लोगों को संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया गया था। इसके बाद नियमों में बदलाव कर दिया गया था। आयोजकों ने इस साल के निर्णायक मंडल से कहा था कि वे दो विजेताओं को नहीं चुन सकते।
पांच सदस्यीय निर्णायक मंडल के अध्यक्ष पीटर फ्लोरेंस ने पांच घंटे के विचार विमर्श के बाद कहा, हमारा निर्णय है कि नियमों को तोड़ा जाएगा। निर्णायक मंडल ने कहा कि वे चाहते हैं कि दोनों लेखिकाएं यहां गिल्डहॉल में एक बड़े कार्यक्रम में 50000 पाउंड की राशि आपस में बांटे। फ्लोरेंस ने कहा, हमने जितनी ज्यादा उनके बारे में बात की, हमें उतना ज्यादा लगा कि हम दोनों को इतना पसंद करते हैं कि दोनों ही विजेता बनें।
79 वर्षीय कनाडाई लेखिका एटवुड ने एवरिस्टो के साथ यह पुरस्कार साझा करने पर खुशी जताते हुए कहा, मुझे लगता है कि मैं काफी बुजुर्ग हो गई हूं और मुझे लोगों के इतने ध्यान की आवश्यकता नहीं है, इसलिए मुझे खुशी है कि आपको भी पुरस्कार मिला है। उन्होंने कहा, यदि मैं अकेले यह पुरस्कार जीतती... तो मुझे थोड़ा संकोच होता। इसलिए मैं खुश हूं कि आपको (एवरिस्टो) भी यह पुरस्कार मिला है।
एवरिस्टो ने कहा, हम अश्वेत ब्रितानी महिलाएं जानती हैं कि यदि हम अपने बारे में नहीं लिखेंगी तो कोई और भी यह काम नहीं करेगा। साठ वर्षीय एवरिस्टो ने कहा, यह अविश्वसनीय है कि मुझे मार्गरेट एटवुड के साथ यह पुरस्कार मिला, जो महान और उदार हैं।
इनके अलावा लुसी एलमन को डक्स, न्यूबरीपोर्ट चिगोजी ओबिओमा को एन ऑर्केस्ट्रा ऑफ मायनोरिटीज और एलिफ शफाक को 10 मिनट्स 38 सेकंड्स इन दिस स्ट्रेंज वल्र्ड के लिए छांटा गया था। एटवुड का उपन्यास द हैंडमेड्स टेल भी 1986 में इस पुरस्कार के लिए छांटा गया था लेकिन तब वह यह पुरस्कार जीत नहीं पाई थीं। इस साल 151 किताबों में से इन छह उपन्यासों को छांटा गया था।
रुश्दी ने मिडनाइट्स चिल्ड्रन के लिए 1981 में यह पुरस्कार अपने नाम किया था। मुंबई में जन्मे रुश्दी की पुस्तक पांच बार इस पुरस्कार के लिए छांटी गई है। पिछले साल एना बन्र्स को मिल्कमैन के लिए यह पुरस्कार मिला था।(भाषा)
 


Date : 14-Oct-2019

नेपाल, 14 अक्टूबर। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल में कठोर चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन को तोडऩे की कोई कोशिश हुई तो वो हड्डी-पसली तोड़ देगा। चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार राष्ट्रपति जिनपिंग की यह चेतावनी नेपाल दौरे पर आई है।
नेपाल में ही राष्ट्रपति जिनपिंग ने काफ़ी सख्त भाषा में कहा कि चीन में किसी ने आज़ादी की वकालत की तो उसका कचूमर निकाल दिया जाएगा। नेपाल के नेताओं से बातचीत के दौरान जिनपिंग ने कहा, अगर चीन के किसी भी हिस्से में मुल्क को बाँटने की कोशिश की तो उसकी हड्डियां तोड़ दी जाएंगी। किसी बाहरी ताक़त ने ऐसी कोशिशों का समर्थन किया वो चीन की नजऱ में दिन में सपने देखने वाले लोग हैं।
चीन के राष्ट्रपति की इस कड़ी चेतावनी को कई संदर्भों में देखा जा रहा है। नेपाल में तिब्बत की आज़ादी के समर्थन में कुछ तिब्बती एक्टिविस्ट राष्ट्रपति जिनपिंग के दौरे का विरोध कर रहे थे।
इन प्रदर्शनकारियों पर नेपाल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। शी जिनपिंग के इस बयान को इससे भी जोडक़र देखा जा रहा है। इसके साथ ही हॉन्ग कॉन्ग में पिछले चार महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन से भी जिनपिंग के बयान को जोड़ा जा रहा है।
ट्विटर पोस्ट पीएम नेपाल : मित्रराष्ट्र जनवादी गणतन्त्र चीनका महामहिम राष्ट्रपति सी चिनफिङको दुई दिवसीय ऐतिहासिक नेपाल भ्रमण भव्य रुपमा सम्पन्न भएको छ। उहाँको भ्रमणबाट दुई देशबीचको सम्बन्धले नयाँ उचाई र गतिशीलता प्राप्त गरेको छ। 
रविवार को हॉन्ग कॉन्ग में कई शांतिपूर्ण रैलियां निकाली गईं और इस दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें भी हुईं। इस विरोध-प्रदर्शन में पुलिस ट्रांसपोर्ट स्टेशन और चीन समर्थित दुकानों को नुक़सान पहुंचा है।
प्रदर्शनकारियों की रैलियों के कारण हॉन्ग मेट्रो के 27 स्टेशन बंद रहे। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया गया लेकिन टेलीविजन फुटेज में दिख रहा है कि वीकेंड पर खऱीदारी करने निकले लोग भगदड़ में फंसे हुए थे। कई लोग तो परेशान और रोते हुए दिखे। शॉपिंग सेंटर पर कई लोग जख़़्मी भी हुए।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पुलिस ने एक शॉपिंग से मॉल से प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नारे लगा रहे लोगों पर बल का प्रयोग किया।
प्रशासन का कहना है कि मॉन्ग कोक पुलिस स्टेशन पर पेट्रोल बम फेंका गया और एक पुलिस अधिकारी की गर्दन पर चीरा लग गया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार पुलिस अधिकारी की हालत स्थिर है। प्रदर्शनकारियों में ज़्यादातर युवा थे और अलग-अलग इलाक़ों में झुंड में बँटे थे।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से शी यिहोंग नाम के एक ऐकेडमिक ने कहा, हॉन्ग कॉन्ग की वर्तमान स्थिति काफी गंभीर है। यह चेतावनी अमरीका और उन सभी के लिए है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हॉन्ग में जारी अतिवादियों की हिंसा के पक्ष में खड़े हैं। राष्ट्रपति जिनपिंग ने न केवल चीन का रुख़ साफ़ किया है बल्कि अमरीका को भी चेतावनी है कि वो चीन के आंतरिक मामलों से दूर रहे।
हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टेड कू्रज़ ने हॉन्ग कॉन्ग में चीन के रुख़ की आलोचना की थी और चीन को क्षेत्रीय शांति के लिए ख़तरा बताया था।
शी जिनपिंग के नेपाल दौरे में दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर सहमति बनी है। चीन नेपाल में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम करेगा। दोनों देशों के साझा बयान में कहा गया है, नेपाल और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध अब नए दौर में पहुंच गए हैं। दोनों देश एक दूसरे की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता का सम्मान करेंगे।
नेपाल ने भी वन चाइना पॉलिसी को लेकर प्रतिबद्धता जताई। नेपाल ने कहा कि ताइवान चीन का अविभाज्य अंग है। नेपाल ने ये भी कहा कि तिब्बत का मामला चीन का आंतरिक मामला है। इसके साथ ही नेपाल ने चीन को आश्वस्त किया कि वो अपनी धरती से चीन विरोधी गतिविधियां नहीं चलने देगा।
शी जिनपिंग को नेपाल के त्रिभुवन एयरपोर्ट से विदा करने के बाद प्रधानमंत्री केपी ओली ने ट्वीट कर कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।
नेपाल ने चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड का भी समर्थन किया। हालांकि भारत इस परियोजना के ख़िलाफ़ है। साझा बयान में नेपाल और चीन को रणनीतिक पार्टनर बताया गया है। चीन और नेपाल के बीच कुल 20 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।
दोनों देशों में इस बात पर भी सहमति बनी है कि चीन नेपाल में अपने बैंकों का ब्रांच खोलेगा। दोनों देशों में प्रत्यर्पण संधि पर भी बात हो रही है। हालांकि इस संधि को लेकर विवाद है।
भारत भी नेपाल से प्रत्यर्पण संधि करना चाहता है लेकिन अभी तक नहीं हो पाया है। भारत और नेपाल के बीच दो अक्टूबर 1953 में इस तरह की संधि हुई थी लेकिन भारत इसमें संशोधन चाहता है। इस संशोधन की कोशिश 2008 और 2010 में भी हुई थी लेकिन अब तक लटका ही है।
चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि नेपाल पर अमरीका के नेतृत्व वाले यूएस इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटिजी में शामिल होने का दबाव है। अख़बार के मुताबिक नेपाल ने चीन को आश्वस्त किया है कि वो ऐसे किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होगा जिससे चीन की संप्रभुता पर सवाल खड़ा होता है।
साल 1997 में जब हॉन्ग कॉन्ग को चीन के हवाले किया गया था तब बीजिंग ने एक देश-दो व्यवस्था की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी कानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी।
साल 2014 में हॉन्ग कॉन्ग में 79 दिनों तक चले अम्ब्रेला मूवमेंट के बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वालों पर चीनी सरकार कार्रवाई करने लगी थी। इस आंदोलन के दौरान चीन से कोई सहमति नहीं बन पाई थी।
विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को जेल में डाल दिया गया था। आजादी का समर्थन करने वाली एक पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उस पार्टी के संस्थापक से इंटरव्यू करने पर एक विदेशी पत्रकार को वहां से निकाल दिया गया था। हॉन्गकॉन्ग में अमरीकी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अलावा अमरीका ने प्रस्तावित संशोधन पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि वहां रहने वाले उनके नागरिकों और व्यावसायिक हितों पर इसका ग़लत असर पड़ेगा।
साल 2003 में भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर लाए गए क़ानून के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। उस समय चीन को पीछे हटना पड़ा था। हालांकि अभी के वक्त में बीजिंग की पकड़ हॉन्गकॉन्ग पर कहीं अधिक मजबूत है।
2014 में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शन के बाद चीन का दबदबा दुनिया भर में बढ़ा है। इसकी अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हुई है। (बीबीसी)
 


Date : 14-Oct-2019

मैड्रिड, 14 अक्टूबर । हाईवे पर चलती कार में संबंध बनाने वाले एक कपल को कोर्ट ने रैश ड्राइविंग का दोषी करार दिया है। ये मामला स्पेन के विलकास्टिन का है। कोर्ट ने कपल को 6 महीने की स्थगित सजा सुनाई है। साथ ही 2 साल तक ड्राइविंग पर बैन लगा दिया है।
स्पेन के मैड्रिड के कपल का वीडियो पिछले साल सामने आया था। बगल से गुजर रही कार से उनका वीडियो शूट कर लिया गया था। क्लिप वायरल होने के बाद पुलिस ने कार की तलाश में घंटों की सीसीटीवी फुटेज खंगाली थी। 
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने लोगों से कपल के बारे में जानकारी भी मांगी थी। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद कपल ने रैश ड्राइविंग का अपराध स्वीकार कर लिया था। प्रॉसेक्यूटर्स के साथ डील के बाद कपल ने कोर्ट में भी जुर्म कबूल कर लिया। दोनों को छह महीने की स्थगित सजा सुनाई गई है जिसका मतलब है कि उन्हें फिलहाल जेल नहीं जाना होगा। 
कोर्ट ने अपने फैसले में कार चालक को जिग जैग तरीके से कार चलाने का दोषी पाया। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अन्य लोगों की जान खतरे में डाली क्योंकि ड्राइवर की गर्लफ्रेंड उनके ऊपर बैठी थी।(आजतक)
 

 


Date : 14-Oct-2019

आइलैंड, 14 अक्टूबर । एक महिला टूरिस्ट बीच पर घूमने के दौरान महज धागे की जैसी दिखने वाली बिकिनी पहनी हुई थी। सोशल मीडिया पर फोटोज सामने आने के बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और उनके ऊपर जुर्माना लगाया गया। ये मामला फिलिपीन्स के बोराके आइलैंड का है। 
स्थानीय लोगों ने टूरिस्ट की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने 26 साल की लिन जू तिंग के ऊपर कार्रवाई की। लिन ताइवान की रहने वाली हैं। 
पुलिस ने लिन को गिरफ्तार करने के बाद कहा कि वह जब तक 3400 रुपये जुर्माने के रूप में नहीं चुकातीं, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। लिन अपने बॉयफ्रेंड के साथ फिलिपीन्स घूमने आई हुई थीं। 
रिपोर्ट के मुताबिक, लिन बिकिनी पहनकर दो बार पुका बीच पर गई थीं। हालांकि, यह सामने नहीं आया है कि महिला पर किस कानून के तहत कार्रवाई की गई। मुमकिन है कि ताइवान के अश्लीलता संबंधी कानून के तहत गिरफ्तारी की गई हो। 
स्थानीय पुलिस ने कहा- महिला के कपड़ों की वजह से बुधवार और गुरुवार को काफी संख्या में स्थानीय लोगों और टूरिस्ट्स ने तस्वीरें खींची। वह महज धागे के बराबर था। हमारे कंजरवेटिव कल्चर में यह अस्वीकार्य है।(आजतक)
 


Date : 13-Oct-2019

टोक्यो, 13 अक्टूबर। शक्तिशाली तूफान हेजिबीस ने शनिवार को जापान में दस्तक दे दी, जिसकी चपेट में आने से कम से कम दो लोगों की मौत हो गयी। तूफान के आने के बाद देश के बड़े हिस्से में 'अभूतपूर्वÓ बारिश हुई, जिससे बाढ़ आ गई और भूस्खलन हो गया। तूफान के आने से पहले अधिकारियों ने इसके भीषण प्रभाव को देखते हुए आपदा का सर्वोच्च स्तर जारी किया था और 'अभूतपूर्वÓ बारिश की चेतावनी दी थी।
प्रशासन ने 73 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी है। अधिकारियों ने भीषण बाढ़ और भूस्खलन की कई घटनाओं की रिपोर्ट दी है। इन घटनाओं में कम से कम 80 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं और कई अन्य लापता हैं। तूफान के आने से पहले ही इसके प्रभाव के चलते तेज बारिश हुई। रग्बी विश्व कप के दो मैचों को भी रद्द कर दिया गया है। तूफान की वजह से जापानी ग्रैंड प्रिक्स में देरी हुई तथा तोक्यो क्षेत्र में सभी उड़ानें रोक दी गयीं और रेल यातायात पर भी असर पड़ा।
जापान मौसम विज्ञान विभाग (जेएमए) ने बताया कि तूफान ने स्थानीय समयानुसार शाम करीब सात बजे से पहले मुख्य होंशू द्वीप पर दस्तक दी। इसके बाद यह तोक्यो से दक्षिण पश्चिम एक प्रायद्वीप इजू की ओर मुड़ गया। तूफान समुद्र तट पर पहुंचने से पहले यह 216 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रहा है।
तट पर दस्तक देने से पहले तूफान की चपेट में आकर एक व्यक्ति की मौत हो गयी। पूर्वी तोक्यो के चिबा में तूफान के कारण एक कार पलट गयी जिससे ड्राइवर की मौत हो गयी। मरने वाले दूसरे व्यक्ति की उम्र 60 साल है। उत्तर तोक्यो में भूस्खलन की चपेट में आकर उनकी मौत हुई है। जेएमए के अधिकारी यासुशी काजीवारा ने पत्रकारों को बताया, 'शहर में भीषण भारी बारिश हो रही है इसी कारण शहरों और गांवों के लिये आपात चेतावनी जारी की गयी है।Ó
इस बीच, तोक्यो और उसके आसपास के इलाकों में शनिवार शाम को 5.7 तीव्रता का भूकंप का झटका भी महसूस किया गया। इससे लोगों में और दहशत आई। (भाषा)


Date : 11-Oct-2019

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। ईरान और सऊदी अरब के बीच जारी जंग ने अब एक नया रूप ले लिया है। शुक्रवार को सऊदी अरब के तटीय इलाके के पास ईरान के एक ऑयल टैंकर में बड़ा धमाका हुआ है। ये धमाका सऊदी के शहर जेद्दाह के पास हुआ है। धमाका किस तरह हुआ है, अभी इसकी वजह सामने नहीं आई है।
इससे पहले सऊदी अरब-अमेरिका ने आरोप लगाया था कि ईरान की ओर से सऊदी अरब के कुछ तेल संयंत्रों को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच संबंध काफी बिगड़ गए थे। हालांकि, ईरान ने इन हमलों में अपना हाथ होने से इनकार किया था।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरान की आईएसएनए से इसको रिपोर्ट किया और कहा है कि ये एक आतंकी हमला है। जिस ईरान के तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है, वह ईरान की ऑयल कंपनी का है। ईरानी एजेंसी के मुताबिक, ये धमाका जेद्दाह के पास हुआ है। धमाके के बाद काफी नुकसान हुआ है।
गौरतलब है कि बीते दिनों ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने बीते दिनों सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों को निशाना बनाया था, जिसके बाद सऊदी अरब पूरी तरह से भडक़ गया था।
अमेरिका भी सऊदी अरब के समर्थन में आया था और अपनी सेना को वहां भेजने की बात कही थी। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले ही परमाणु समझौते को लेकर बवाल हो रहा है, यही कारण है कि अमेरिका इस मसले पर खुलकर सऊदी अरब के साथ है।
इन हमलों के बाद से ही अमेरिका की ओर से ईरान पर कई प्रतिबंध बढ़ाए गए थे, साथ ही अन्य देशों से भी ईरान से संबंध ना सुधारने की अपील की थी।
दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया है कि वह ईरान और सऊदी अरब के बीच समझौता करने की पहल करेंगे, हाल ही में चीन से लौटकर पाकिस्तान पहुंचे इमरान खान जल्द ही ईरान और सऊदी अरब की यात्रा पर जाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब ने कहा है कि उन्होंने कभी भी पाकिस्तान से समझौता कराने की अपील नहीं की। (आजतक)
 


Date : 11-Oct-2019

प्रदर्शन की कोशिश, पांच तिब्बती हिरासत में 

चन्नई, 11 अक्टूबर। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शुक्रवार को चेन्नई पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के भारत के फैसले पर द्विपक्षीय संबंधों में उतार-चढ़ाव की हालिया स्थिति के  तत्काल बाद यह यात्रा हो रही है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी, राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित तथा तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष पी धनपाल ने चीनी राष्ट्रपति का स्वागत किया। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए करीब 24 घंटे की भारत यात्रा पर आये हैं। मेहमान राष्ट्रपति की अगवानी के लिए एक छोटा सांस्कृतिक समारोह भी आयोजित किया गया।
तमिलनाडु से करीब 50 किलोमीटर दूर पुरातनकालीन तटीय शहर मामल्लापुरम में यह शिखर वार्ता होगी जो चीन के फुजियान प्रांत के साथ मजबूत व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के कारण अहम है। चीनी नेता के स्वागत के लिए हवाईअड्डे पर बड़ी संख्या में कलाकार रंग-बिरंगे झंडे लेकर कतारों में खड़े थे। वे ढोल बजा रहे थे और परंपरागत संगीत की थाप पर थिरक रहे थे।
चिनफिंग के साथ विदेश मंत्री वांग यी और चीन के स्टेट काउंसिलर यांग जियेची आए हैं। दोनों ही भारत में अपने समकक्षों विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अलग-अलग बातचीत कर सकते हैं।
दोनों पक्षों के अधिकारियों ने कहा कि मोदी-शी शिखर वार्ता में मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय कारोबार तथा विकास सहयोग को कश्मीर मुद्दे पर मतभेदों तथा सीमा संबंधी जटिल विषय से अलग ले जाने पर ध्यान होगा। संबंधों में असहज स्थिति के बावजूद चिनफिंग के भव्य स्वागत के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार की एजेंसियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इस तटीय शहर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है। चिनफिंग जिन ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करेंगे, उन्हें भी विशेष रूप से सजाया-संवारा गया है। दोनों नेता मामल्लापुरम में बंगाल की खाड़ी को निहारते सातवीं सदी के शोर मंदिर परिसर में अनौपचारिक परिवेश में वार्ता करेंगे।
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ अशोक कंठ के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को शिखर वार्ता में विवादास्पद मुद्दों से आगे बढऩे पर तथा कश्मीर मसले से दोनों देशों के संबंधों पर प्रतिकूल असर नहीं पडऩे देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
होटल के बाहर प्रदर्शन की कोशिश, 5 हिरासत में
पुलिस ने यहां शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति के ठहरने वाले होटल के बाहर कथित रूप से प्रदर्शन की कोशिश कर रहे पांच संदिग्ध तिब्बतियों को हिरासत में लिया। अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग इसी होटल में ठहरने वाले हैं। तटीय शहर मामल्लपुरम के समीप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिये चिनफिंग दोपहर बाद पहुंचने वाले हैं। तिब्बती झंडे के साथ वहां अचानक प्रदर्शन की कोशिश कर रहे एक शख्स को पुलिस फौरन वहां से दूर ले गयी तथा प्रदर्शनकारियों को नारेबाजी करने से भी रोकती दिखी। कुछ पुलिसकर्मी उसे एक आटोरिक्शा में बैठा कर दूर ले गये, जबकि चार अन्य को पुलिस वाहन में ले जाया गया। शहर और मामल्लपुरम, किसी किले में तब्दील हो गया है और जिस स्टार होटल में चिनंिफग ठहरने वाले हैं उसे बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। मोदी और चिनफिंग यहां दोपहर को पहुंचेंगे, जहां वे दो दिन शुक्रवार एवं शनिवार को विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं। (जनसत्ता)

 


Date : 11-Oct-2019

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर । पुलिस ने यहां शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति के ठहरने वाले होटल के बाहर कथित रूप से प्रदर्शन की कोशिश कर रहे पांच संदिग्ध तिब्बतियों को हिरासत में लिया। अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग इसी होटल में ठहरने वाले हैं। तटीय शहर मामल्लपुरम के समीप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिये चिनफिंग दोपहर बाद पहुंचने वाले हैं।
तिब्बती झंडे के साथ वहां अचानक प्रदर्शन की कोशिश कर रहे एक शख्स को पुलिस फौरन वहां से दूर ले गयी तथा प्रदर्शनकारियों को नारेबाजी करने से भी रोकती दिखी। कुछ पुलिसकर्मी उसे एक आटोरिक्शा में बैठा कर दूर ले गये, जबकि चार अन्य को पुलिस वाहन में ले जाया गया। शहर और मामल्लपुरम, किसी किले में तब्दील हो गया है और जिस फाइव स्टार होटल में चिनफिंग ठहरने वाले हैं उसे बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। मोदी और चिनफिंग यहां दोपहर को पहुंचेंगे, जहां वे दो दिन शुक्रवार एवं शनिवार को विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं।
इससे पहले, पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार दोपहर यहां पहुंचे। वह दिल्ली से एक विशेष विमान से यहां पहुंचे और तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी समेत अन्य ने उनका स्वागत किया।प्रधानमंत्री यहां से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तटीय नगर मामल्लापुरम जाएंगे जहां दोनों हाई प्रोफाइल नेताओं के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता होगी।  पिछले साल मोदी और शी के बीच चीनी शहर वुहान में पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। दोनों के बीच इस दो दिवसीय वार्ता के दौरान विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी। वार्ता का समापन शनिवार को होगा।
शी अपराह्न करीब दो बजे चेन्नई पहुंचेंगे और इसके बाद एक आलीशान होटल में जाएंगे। मोदी शाम पांच बजे शी को मामल्लापुर के तीन स्मारकों अर्जुन की तपस्या स्थली, पांच रथ और शोर मंदिर लेकर जाएंगे। इसके बाद दोनों नेता मंदिर परिसर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम देखेंगे। दोनों नेता शोर मंदिर परिसर में बैठेंगे और विकास एवं सहयोग का नया खाका बनाने पर विचार साझे करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में शी के लिए निजी रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। दोनों नेता शनिवार को फिशरमैन्स कोव रिजार्ट में एक बैठक करेंगे, जिसके बाद प्रतिनिधि मंडल स्तर की वार्ता होगी। इसके बाद मोदी दोपहर के खाने पर शी की मेजबानी करेंगे और चीनी नेता दोपहर पौने एक बजे चेन्नई हवाईअड्डे के लिए रवाना होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग समुद्र किनारे स्थित इस प्राचीन नगर में सातवीं सदी के शोर मंदिर परिसर में शुक्रवार को बैठेंगे। वे कश्मीर मुद्दे पर भारत और चीन की कड़ी बयानबाजी से तनावपूर्ण हुए द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। शी के शुक्रवार शाम करीब पांच बजे यहां पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। राज्य एवं केंद्र सरकार की एजेंसियां इस तटीय शहर में बैठक की पूरे जोर शोर से तैयारियां कर रही हैं। इस शहर का चीन के फुजियांग प्रांत से मजबूत ऐतिहासिक संबंध रहा है। अधिकारियों ने बताया कि शी अपराह्न करीब दो बजे चेन्नई पहुंचेंगे और इसके बाद एक आलीशान होटल में जाएंगे। मोदी शाम पांच बजे शी को मामल्लापुर के तीन स्मारकों अर्जुन की तपस्या स्थली, पांच रथ और शोर मंदिर लेकर जाएंगे। इसके बाद दोनों नेता मंदिर परिसर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम देखेंगे। दोनों नेता शोर मंदिर परिसर में बैठेंगे और विकास एवं सहयोग का नया खाका बनाने पर विचार साझे करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में शी के लिए निजी रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे।(जनसत्ता)

 


Date : 11-Oct-2019

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। बांग्लादेश के अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। यह आदेश ढाका की एक कोर्ट ने मोहम्मद यूनुस को कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की बर्खास्तगी को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान पेश नहीं होने पर दिया।
अदालत के क्लर्क नूरुज्जमां ने मीडिया को बताया कि ढाका लेबर कोर्ट के चेयरमैन रोहिबुल इस्लाम ने मोहम्मद यूनुस के खिलाफ वारंट जारी किया है क्योंकि वे कोर्ट में सुनवाई के दौरान गैरमौजूद रहे। जिसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया।
मिली जानकारी के मुताबिक मुहम्मद यूनुस को ग्रामीण कार्य संचार निदेशक नाजनीन सुल्ताना और उप महाप्रबंधक खांडेकर अबू अबेदिन के साथ कोर्ट में शामिल होने वाले थे।
तीनों पर आरोप है कि कार्यस्थल ट्रेड यूनियन बनाने के चलते उन्होंने कर्मचारियो को कंपनी से निकाल दिया था। ग्रामीण संचार, ग्रामीण बैंक की आईटी विंग है। मोहम्मद यूनुस ग्रामीण संचार के अध्यक्ष हैं।
कोर्ट के एक अधिकारी के मुताबिक हालांकि, ग्रामीण संचार विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारी अदालत में पेश हुए, लेकिन मुहम्मद यूनुस पलट नहीं पाए, जिसके बाद अदालत के अध्यक्ष रोहिबुल इस्लाम ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
कोर्ट ने कहा कि कंपनी के दो अधिकारियों को जमानत दे दी गई जो इसके सामने आए। यूनुस के वकील काजी इरशादुल आलम का कहना है कि यूनुस अदालत में पेश होने के लिए कोई भी समन मिलने से पहले ही बांग्लादेश से बाहर चले गये थे। उनके लौटते ही जरुरी कदम उठाया जाएगा। (आजतक)
 


Date : 11-Oct-2019

पेइचिंग/नई दिल्ली, 11 अक्टूबर । राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे से पहले चीनी मीडिया ने भारत से दोस्ती को अहम बताते हुए कहा है कि दोनों देश मिलकर ही 21वीं सदी को एशिया का बना सकते हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा बीते कुछ वक्त से एशिया की सदी की बात काफी होती है। एशिया के कई नेता और रणनीतिकार कहते हैं कि 19वीं सदी यूरोप की थी, 20वीं सदी अमेरिका की और अब 21वीं सदी एशिया की होगी। अखबार ने भारतीय थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह चीन और भारत की आर्थिक प्रगति से ही संभव होगा। 
शी चिनफिंग की पीएम नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक समिट को महत्वपूर्ण बताते हुए चीनी मीडिया ने कहा है कि इससे संबंध नए आयाम पर पहुंचेंगे। भारत के साथ आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए अखबार ने कहा कि चीनी कंपनियों ने बीते कुछ सालों में भारत के मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों में हिस्सा लेते हुए निवेश में इजाफा किया है। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों का भी चीन में इन्वेस्टमेंट बढ़ा है। 
हालांकि अखबार ने भारत पर चीन को लेकर अविश्वास जताने का भी आरोप लगाया है। चीनी मीडिया के मुताबिक भारत की ओर से संदेह के चलते ही दोनों देश आर्थिक तौर पर एक साथ प्रगति नहीं कर पा रहे हैं। अखबार ने कहा कि यह वह दौर है, जब भारत और चीन का साथ मिलकर काम करना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। 
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का जिक्र करते हुए चीन के सरकारी अखबार ने कहा कि यदि इससे शांतिपूर्ण ढंग से निपटा जाए तो यह दुनिया के सामने एक मॉडल होगा। इससे दुनिया को यह संदेश मिलेगा कि किस तरह से दो ताकतें एक साथ आ सकती हैं। यही नहीं अखबार ने भारत से दोस्ती को अहम करार देते हुए कहा कि यदि चीन-भारत संबंध अच्छे नहीं रहते हैं तो फिर एशिया का उदय असंभव है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, दोनों देश यदि द्विपक्षीय मुद्दों पर तार्किक ढंग से विचार नहीं करते हैं तो फिर एशिया से बाहर की ताकतें इसका फायदा उठाएंगी।
चीनी राष्ट्रपति शुक्रवार को चेन्नै के निकट महाबलीपुरम में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक समिट के लिए पहुंच रहे हैं। दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा और सीमा जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 11-Oct-2019

वाशिंगटन, 11 अक्टूबर (स्पूतनिक)। अमरीका ने कहा है कि यदि तुर्की सीरिया में हथियारों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर जातीय नरसंहार को अंजाम देता है तो उसे कड़े प्रतिबंधों का सामना करना होगा। 
अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को पत्रकारों से यह बात कही। 
अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ‘यदि तुर्की इस तरह से कार्य करता है जोकि असंगत, अमानवीय अथवा सीमा को पार करने वाली हो तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीति के अनुसार अमेरिका उस पर कड़े प्रतिबंध लगाएगा।’
यदि तुर्की जातीय नरसंहार, सैन्य उपकरणों एवं हथियारों का दुरुपयोग और आम नागरिकों के खिलाफ हमले करता है तो उसे कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना होगा। 
इससे पहले तुर्की ने बुधवार को उत्तरी सीरिया में कुर्द लड़ाकों के नेतृत्व वाली सेना और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हमले कर अपने सैन्य अभियान की शुरुआत कर दी है। तुर्की का कहना है कि वह अपनी सीमा के नजदीक सुरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए यह हमले कर रहा है। तुर्की के इस सैन्य अभियान की अरब लीग, यूरोपीय संघ के सदस्यों समेत पश्चिमी देशोंं ने भी आलोचना की है।
गौरतलब है कि अमेरिका समर्थित कुर्द लड़ाके सीरिया में अपने सहयोगियों के साथ इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे हैं। 
 

 


Date : 11-Oct-2019

अंकारा, 10 अक्टूबर। सीरिया के उत्तरी क्षेत्रों में तुर्की की सेना की तरफ से चलाये जा रहे अभियान में दो दिन में 174 आतंकवादियों की मौत  हो गई है। तुर्की के राष्ट्रपति तैयप अर्दोगन ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
गौरतलब है कि श्री अर्दोगन ने बुधवार को सीरिया में कुर्द लड़ाकों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई  की घोषणा की थी। इन लड़ाकों को तुर्की ने आतंकवादी करार दिया था। उधर सीरिया इस अभियान को अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।
श्री अर्दोगन ने  अंकारा में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमने यह अभियान बुधवार को शुरू किया था और पहले इसमें तोपों की मदद ली गई और इसके बाद वायु सेना तथा थल सेना की मदद से आतंकवादी ठिकानों पर गोलाबारी की गई। इस कार्रवाई में अभी तक 174 आतंकवादियों की मौत हो गई है और अन्य घायल हुए हैं। हम पर आरोप लगाए जा रहे हैं  लेकिन हम इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि नागरिक ठिकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।’’ (वार्ता)
 


Date : 11-Oct-2019

हाल ही में इस्तांबुल की एक अदालत ने एक तुर्की वैज्ञानिक बुलंद शेख को 15 महीने जेल में बिताने की सजा इसलिए सुनाई क्योंकि उन्होंने पर्यावरण व स्वास्थ्य सम्बंधी एक अध्ययन के नतीजे अखबार में प्रकाशित किए थे।
दरअसल बुलंद शेख ने अप्रैल 2018 में एक तुर्की अखबार जम्हूरियत में एक स्वास्थ्य सम्बंधी अध्ययन के नतीजे प्रकाशित किए थेए जो वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा करवाया गया था। इस अध्ययन में वे यह देखना चाहते थे पश्चिमी तुर्की में बढ़ते कैंसर के मामलों और मिट्टीएपानी और खाद्य के विषैलेपन के बीच क्या संबंध है। अकदेनिज युनिवर्सिटी के खाद्य सुरक्षा और कृषि अनुसंधान केंद्र के पूर्व उपनिदेशक बुलंद शेख भी इस अध्ययन में शामिल थे। पांच साल चले इस अध्ययन में शेख और उनके साथियों ने पाया कि पश्चिमी तुर्की के कई इलाकों के पानी और खाद्य नमूनों में हानिकारक स्तर पर कीटनाशकए भारी धातुएं और पॉलीसायक्लिक एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन मौजूद हैं। कुछ रिहायशी इलाकों का पानी एल्युमीनियमए सीसाए क्रोम और आर्सेनिक युक्त होने का कारण पीने लायक भी नहीं है।
2015 में अध्ययन पूरा होने के बाद शेख ने एक मीटिंग के दौरान सरकारी अफसरों से इन नतीजों पर जरूरी कार्रवाई करने की बात की। 3 साल बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने यह अध्ययन अखबार में चार लेखों की शृंखला के रूप में प्रकाशित किया।
इस मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय की आपत्ति इस बात पर नहीं थी कि प्रकाशित अध्ययन सही है या नहींए बल्कि उनकी आपत्ति इस बात पर थी कि यह जानकारी गोपनीय है कि लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा है।
बुलंद शेख के वकील कैन अतले ने अपनी दलीलें पूरी करते हुए कहा था कि शेख ने एक नागरिक और एक वैज्ञानिक होने के नाते अपना फर्ज निभाया है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग किया है। 
तुर्की नियम के मुताबिक शेख यदि किए गए अध्ययन के प्रकाशन पर खेद व्यक्त करते तो उन्हें जेल की सज़ा ना देकर पद से निलंबित भर किया जा सकता थाए लेकिन शेख ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। 
शेख के मुताबिक शोध से प्राप्त डैटा छिपाने से समस्या के हल को लेकर हो सकने वाली एक अच्छी चर्चा बाधित होती है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मेरे लेखों का उद्देश्य जनता को उनके स्वास्थ्य पर किए गए अध्ययन के नतीजों से वाकिफ  कराना था, जिन्हें गुप्त रखा गया था और उन अधिकारियों को उकसाना था जिन्हें इस समस्या को हल करने के लिए कदम उठाने चाहिए। (स्रोत फीचर्स)
 


Date : 10-Oct-2019

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। शी जिनपिंग के भारत दौरे से ठीक पहले चीन की ओर से जम्मू-कश्मीर पर बड़ा यू-टर्न लिया गया है। चीन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के मसले पर वह नजर बनाए हुए है और भारत-पाकिस्तान को इस मसले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के हिसाब से सुलझाना चाहिए। चीन का ये बयान दो दिन पहले दिए गए बयान से पूरी तरह उलट है, जिसमें उसने इस मसले को भारत-पाकिस्तान के बीच का मसला बताया था। हालांकि, अब चीन के इस ताजा बयान पर भारत ने भी कड़ी आपत्ति जताई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस समय चीन के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और चीनी प्रीमियर से भी मिले। इसी मुलाकात के बाद चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जम्मू-कश्मीर के मसले पर एक साझा बयान जारी किया गया। ये बयान उस वक्त आया है जब 11 अक्टूबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग महाबलीपुरम में पहुंच रहे हैं, जहां पर उन्हें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इन्फॉर्मल बैठक में हिस्सा लेना है।
चीन ने अपने इस बयान में कहा कि पाकिस्तान की ओर से उसे जम्मू-कश्मीर के ताजा हालात के बारे में बताया गया है, चीन इस मामले में नजऱ बनाए हुए है। चीन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर का मसला पुराने इतिहास का एक विवाद है, जिसे शांतिपूर्ण तरीके से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों के हिसाब से सुलझाना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वह इस मसले पर नजऱ बनाए हुए है और उम्मीद करता है कि दोनों देश आपस में बात कर इसपर आगे बढ़ेंगे।
बुधवार को जब चीन का ये बयान सामने आया तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इसपर बयान दिया। भारत की ओर से कहा गया है कि हमने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच बैठक के संबंध में रिपोर्ट देखी है, जिसमें उन्होंने अपनी बातचीत के दौरान कश्मीर का भी उल्लेख किया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का पक्ष पुराना ही है और ये स्पष्ट है कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है। चीन हमारे पक्ष से अच्छी तरह वाकिफ है। भारत के आंतरिक मामलों पर किसी अन्य देश को टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है।
इससे पहले जब शी जिनपिंग की यात्रा के ऐलान से पहले चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान दिया था उसमें भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत करने की बात कही थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने अपने बयान में कहा था कि चीन यह मानता है कि कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच हल किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का मसला दुनिया के लगभग हर मंच पर उठाया जा चुका है, लेकिन हर बार भारत ने इस मसले पर करारा जवाब दिया था। भारत ने सभी मंचों पर अपनी स्थिति को साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 निष्प्रभावी करना भारत का आंतरिक मामला है और इसे संविधान के मुताबिक लिया गया है। ऐसे में किसी अन्य देश को इस मसले पर बयान नहीं देना चाहिए। (आजतक)
 


Date : 10-Oct-2019

अमरीका, 10 अक्टूबर। अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो का कहना है कि अमरीका ने उत्तर सीरिया में तुर्की के हमले को हरी झंडी नहीं दी थी। पॉम्पियो ने उत्तर-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले का भी बचाव किया। ट्रंप के इस फैसले की अमरीका के भीतर और बाकी दुनिया में तीखी आलोचना हो रही है। तुर्की ने उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द लड़ाकों के कब्जे वाले इलाकों में हवाई हमले करना शुरू कर दिया है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का कहना है कि इन हवाई हमलों का मकसद सीमा पर टेरर कॉरिडोर को पैदा होने से रोकना है। तुर्की सुरक्षाबल एक ऐसा सेफ जोन बनाने की कोशिश कर रहे हैं जहां कुर्द सैनिक न हों। तुर्की का कहना है कि इस सेफ जोन में सीरियाई शरणार्थियों के घर भी होंगे।
कुर्दों के नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमलों का जवाब दिया है और दोनों पक्षों के सैनिकों में संघर्ष हुआ है। कुर्दों ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने में मदद की थी और वे आईएस के खिलाफ लड़ाई में अमरीका के अहम सहयोगी थे। मौजूदा समय में कुर्द अपने काबू वाले इलाकों की जेलों में बंद हजारों आईएस लड़ाकों और शिविरों में रह रहे उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा करते हैं। अभी यह साफ नहीं है कि युद्ध शुरू होने की स्थिति में वो ऐसा करते रहेंगे या नहीं।
अमरीकी सेना का कहना है कि उसने उन दो ब्रिटिश नागरिकों को हिरासत में ले लिया है जो आइएस की एक सेल में अपनी बर्बर भूमिका के लिए कुख्यात हैं। इस सेल ने पश्चिमी देशों के करीब 30 नागरिकों को बंधक बनाकर उनका उत्पीडऩ और हत्या की थी।
इन ब्रितानी नागरिकों के नाम अल शफी अल शेख और अलेक्जेंडा कोटी है। ये दोनों आईएस की ब्रितानी सेल के सदस्य थे जिसका छद्म नाम द बीटल्स था। इन दोनों को अब उत्तरी सीरिया में कुर्द समर्थित सेना के कब्जे वाली एक जेल से छुड़ा लिया गया है।
अमरीकी ब्रॉडकास्टर पीबीएस को दिए एक इंटरव्यू में माइक पॉम्पियो ने अमरीकी राष्ट्रपति के चौंकाने वाले फैसले का बचाव किया।
पॉम्पियो ने ये भी कहा कि तुर्की को सुरक्षा की वास्तविक चिंता है और वो अपने दक्षिण में आतंकी खतरे से जूझ रहा है।
पॉम्पियो ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत बताया जिनमें कहा जा रहा है कि अमरीका ने तुर्की को उत्तर-पूर्वी सीरिया में हमले की इजाजत दी। उन्होंने कहा, अमरीका ने तुर्की को ग्रीन सिग्नल नही दिया।
अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो तुर्की के इस हमले का समर्थन नहीं करता है। ट्रंप ने तुर्की के इस कदम को बुरा फैसला भी बताया है।
इससे पहले के अपने एक बयान में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर तुर्की ने अपनी हदें पार कीं तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगे। बाद में एक प्रेस कांफे्रंस में ट्रंप ने कहा कि तुर्क और कुर्द सदियों से एक-दूसरे के लिए लड़ते आए हैं। ट्रंप ने कहा, कुर्द लड़ाकों ने दूसरे विश्व युद्ध में हमारी मदद नहीं की। ये सब कुछ कहने के बाद ट्रंप ने एक बात और जोड़ी, जो भी चीजेंं मैंने बताई, उनके बावजूद हम कुर्दों को पसंद करते हैं।
उत्तरी-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को हटाने का डोनल्ड ट्रंप का फैसला अचानक ही आया था। ट्रंप के इस फैसले की उनकी अपनी पार्टी रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी दोनों से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
यहां डोनल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले सीनेटर लिंजी ग्राहम ने भी ट्रंप के इस फैसले की निंदा की है। उन्होंने कहा, अमरीका ने अपने सहयोगी को बेशर्मी से छोड़ दिया।
ग्राहम ने कहा, प्रशासन ने तुर्की के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में मैं दोनों पार्टियों से मजबूत समर्थन की उम्मीद करता हूं। उन्होंने कुर्दों के समर्थन में एक के बाद एक कई ट्वीट किए और लिखा, अमरीका इससे बेहतर है। मिस्टर प्रेजिडेंट, कृपया तुर्की के खिलाफ खड़े होइए।
कुर्द समर्थित सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) का कहना है वो अपनी सात जेलों में आईएस के 12,000 से ज़्यादा संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में रखे हुए हैं। इनमें से कम से कम 4,000 विदेशी नागरिक हैं। इनकी ठीक-ठीक लोकेशन का अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ तुर्की से लगी सीमा के कऱीब हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक संदिग्ध आईएस परिवारों के दो शिविर रोज और अन इसा सेफ जोन के भीतर हैं।
यूरोपीय संघ का कहना है कि इसकी उम्मीद बेहद कम है कि कथित सेफ जोन शरणार्थियों को वापस लेने की अंतरराष्ट्रीय शर्तों को पूरा कर पाएगा।
बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड और यूके ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से बैठक और मौजूदा स्थिति पर बात करने की गुजारिश की है। सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य गुरुवार को मिलेंगे। अरब लीग ने भी 12 अक्टूबर को काहिरा में तुर्की के हमले पर चर्चा करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है।
नेटो को महासचिव येन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि नेटो सदस्य तुर्की को सुरक्षा सम्बन्धित वास्तविक खतरे हैं लेकिन उन्होंने उम्मीद की थी कि वो (तुर्की) कोई भी कदम उठाने से ये ध्यान में जरूर रखेगा कि वो उचित और जरूरी हो।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी अपने एक बयान में कहा कि तुर्की को ये जिम्मेदारी लेनी होगी कि आईएस के संदिग्ध लड़ाके जेल में ही रहें और आईएस दोबारा न बनने पाए।
बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक सीरिया के कई गाँवों और शहरों पर हवाई हमले किए जिसकी वजह से वहां के हजारों लोगों को घर छोडक़र भागना पड़ा।
कुर्द सुरक्षाबलों ने बताया कि अब तक हमलों में कम से कम पांच नागरिकों की मौत हो गई हौ और कम से कम 25 लोग घायल हुए हैं। कुर्द समर्थित एसडीएफ़ ने बताया कि आईएस लड़ाकों वाला एक जेल भी तुर्की के हवाई हमले की चपेट में आया है। बढ़ते मानवीय संकट के बीच एसडीएफ ने मासूम लोगों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए नो फ्लाई जोन बनाने की गुजारिश की है।
वहीं तुर्की की सेना ने ट्वीट किया है कि उन्होंने आतंकियों के 181 ठिकानों को निशाना बनाया है। एसडीएफ के प्रवक्ता मुस्तफा बाली के मुताबिक उनके सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की है।(बीबीसी)
 


Date : 10-Oct-2019

तेहरान, 10 अक्टूबर। रुढि़वादी इस्लामिक देश ईरान में आज से महिलाओं को स्टेडियम में बैठकर फुटबॉल मैच देखने की अनुमति मिल जाएगी। महिलाओं को 40 सालों के लंबे इंतजार के बाद यह आजादी मिली है। हालांकि अब भी महिला ऐक्टिविस्टों को यह यकीन नहीं है कि कम्बोडिया के खिलाफ होने वाला यह मैच खेलों में महिलाओं की एंट्री की मजूबत शुरुआत है। वैश्विक फुटबॉल संस्था फीफा के दबाव में ईरान सरकार को तेहरान के आजादी स्टेडियम में महिला दर्शकों के लिए सीटें आवंटित करनी पड़ी हैं। इस स्टेडियम में 78,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। 
कंबोडिया के खिलाफ गुरूवार को होने वाले विश्व कप 2022 क्वॉलिफायर मैच के टिकट महिलाओं ने धड़ाधड़ खरीदे। पहले बैच के टिकट एक घंटे से भी कम समय में बिक गए। बता दें कि पिछले महीने एक फुटबॉल मैच के दौरान महिला दर्शक साहर खोदयारी ने स्टेडियम में जाने की कोशिश की थी। इस पर प्रशासन ने उसे हिरासत में ले लिया था। इस उत्पीडऩ से परेशान साहर ने आग लगा ली थी और बाद में अस्पताल में उनका निधन हो गया था। इस घटना के बाद फीफा ने इस्लामिक देश पर महिलाओं को भी मैच देखने की आजादी देने का दबाव बनाया था। फीफा ने ईरान से कहा था कि उसे वर्ल्ड कप क्वॉलिफायर मैचों में महिलाओं की भी एंट्री को अनुमति देनी चाहिए। 
गौरतलब है कि सहर खुदायारी वेश बदलकर फुटबॉल मैच देखने स्टेडियम पहुंची थीं। यहां उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इसके बाद महिला ने डर से खुद को आग लगा ली थी। दरअसल ईरान में अब तक महिलाओं के स्टेडियम में घुसने पर पाबंदी थी। अगर कोई महिला स्टेडियम में घुसती है तो उसे 6 महीने की जेल का प्रावधान था। मृतक महिला भी पुरुषों का वेश बनाकर स्टेडियम में घुसी थी, लेकिन उसे पुलिस ने पहचान लिया और हिरासत में ले लिया था। (रॉयटर्स)
 


Date : 10-Oct-2019

बांग्लादेश, 10 अक्टूबर । खाने में बाल मिलना आम बात है। कई कोशिशों और सावधानियों के बावजूद खाने में कभी-कभीर बाल आ ही जाता है। लेकिन इस बात पर बांग्लादेश के एक शख्स को इतना गुस्सा आया कि उसने अपनी पत्नी के सिर के सारे बाल काट डाले। जी हां, शख्स ने अपनी पत्नी को खाने में बाल मिलने पर गंजा कर दिया।
मामला बांग्लादेश के जॉयपुरहट का है। इस गांव के रहने वाले 35 साल के शख्स बबलू मोंडाल ने पत्नी को गंजा करने के जुर्म पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस को इस घटना की खबर गांववालों ने दी। 
इंडियन एक्सप्रेस को पुलिस ने बताया, शख्स को चावल और दूध वाले ब्रेकफास्ट में बाल मिले, ये नाश्ता उसकी पत्नी ने उसके लिए बनाया था। बाल देखकर शख्स को बहुत गुस्सा आया और फिर उसने ब्लेड लिया और जबरन पत्नी के सिर को गंजा कर दिया।
गांव में मौजूद स्थानीय समूह एन ओ सलिश केंद्र के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ जुर्म बढ़ रहा है। 2019 के शुरुआती छ महीनों में ही 630 रेप केस दर्ज हुए। इसके अलावा प्रताडि़त करना और मार-पीट जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं। (एनडीटीवी)
 


Date : 10-Oct-2019

न्यूयॉर्क, 10 अक्टूबर । अपने नियोक्ता से 17 लाख डॉलर से अधिक (लगभगल 12 करोड़ से ज्यादा) की धोखाधड़ी करने वाले भारतीय मूल के 66 वर्षीय एक व्यक्ति ने जालसाजी का जुर्म स्वीकार कर लिया है। संघीय जांच ब्यूरो में स्पेशल एजेंट इन चार्ज जेनिफर बून और मैरिलैंड डिस्ट्रिक्ट में यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी रॉबर्ट हर ने बताया कि मैरीलैंड के रहने वाले राकेश कौशल ने पिछले हफ्ते अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
कौशल अभी हिरासत में है। उन्हें जनवरी 2020 में सजा सुनाई जाएगी। जालसाजी के मामलों में अधिकतम 20 वर्ष की कैद की सजा हो सकती है।
याचिका के मुताबिक निर्माण एवं डिजाइन सेवा देने वाली मैरीलैंड की एक कंपनी ने अगस्त 2015 और जनवरी 2017 के बीच कौशल को नौकरी पर रखा था। ये कंपनी प्रमुख रूप से संघीय सरकारी एजेंसियो के लिए काम करती है। ईवान विक्टर थ्रान मैरिलैंड में तीन निर्माण कंपनियों का मालिक और अध्यक्ष था।
कौशल ने स्वीकार किया कि उसने थ्रान के साथ मिलकर धोखाधड़ी करने की योजना बनाई और तीन कंपनियों की ओर से किए गए काम के फर्जी भुगतान अनुरोध दिए। अभियोजकों का कहना है कि धोखाधड़ी के बाद कौशल ने 6,50,000 डॉलर की रकम अपने निजी बैंक खाते से भारत के एक खाते में भेजी।(भाषा)
 


Date : 09-Oct-2019

लंदन, 9 अक्टूबर। ब्रिटेन के लंदन में जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे पर्यावरण समूह ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन’ के करीब 500 पर्यावरण कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।
‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन’ ने सोमवार को लंदन समेत यूराप के कई मुख्य शहरों में प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी सडक़ पर टेंट लगाकर उसमें बैठ गये जिससे यातायात बाधित हो गया और फिर कानून प्रवर्तन के अधिकारियों ने उन्हें वहां से खदेड़ा। 
मंगलवार को लंदन पुलिस ने ट्राफलगर स्क्वॉयर तक ही प्रदर्शन करने की अनुमति दी और इससे बाहर जाकर विरोध करने वालों को गिरफ्तार कर लिया गया। 
पुलिस के अनुसार सोमवार को ‘एक्सटिंक्शन रिबेलियन’ के व्यापक प्रदर्शन के दौरा कुल 280 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और मंगलवार को शाम साढ़े पांच बजे तक 212 लोगों को गिरफ्तार किया गया।  
इस बीच, अधिंकाश प्रदर्शनकारियों पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया लेकिन वे फिर से विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गये। 
उल्लेखनीय है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन जर्मनी की राजधानी बर्लिन ,नीदरलैंड की राजधानी एम्सटर्डम और सिडनी में भी हो रहे हैं। (वार्ता)
 


Previous12Next