अंतरराष्ट्रीय

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • सिडनी, 25 अप्रैल । मेलबॉर्न अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक जापानी महिला को हिरासत में ले लिया गया। देश के बाहर 19 छिपकलियों की तस्करी करते हुए पकड़ी गई इस महिला को अदालत में पेश किया गया।
    ऑस्ट्रेलियाई सीमा बल (एएफबी) के अनुसार, 27 वर्षीय इस महिला पर एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की नजर थी क्योंकि यह नेटवर्क हाई अलर्ट पर है और इसके पीछे की वजह यह है कि हाल ही में जापानी नागरिकों से संबंधित इस तरह के दो मामले सामने आ चुकी है।
    एएफबी की इस छानबीन की जानकारी कमांडर ग्रीम ग्रोस के हवाले से मिली। उनके मुताबिक, महिला की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण है, मैं आशा रखता हूं कि इससे ऑस्ट्रेलिया के मूल वन्यजीवों को नष्ट करने वालों से बचाने में मदद मिलेगी। 
    जब्त किए गए सरीसृपों में 17 शिंगलेबैक छिपकलियां और 2 ब्लू टंग्स छिपकली शामिल हैं। इन्हें विक्टोरियन स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंट, लैंड, वॉटर एंड प्लानिंग (डीईएलडब्ल्यूपी) को सौंप दिया गया है।
    डीईएलडब्ल्यूपी के चीफ कंर्जवेशन रेगुलेटर केट गैवेंस ने कहा, कानूनी प्रक्रियाओं की समाप्ति के बाद पशु चिकित्सकों से इन सरीसृपों की जांच कराई जाएगी और अगर उन्हें किसी वजह से जंगल में वापस भेजा नहीं जा सका तो गैर लाभकारी संगठनों और स्कूलों को दे दिया जाएगा। अदालत में यदि महिला को दोषी करार दिया जाता है तो अधिकतम दस साल कारावास की सजा हो सकती है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 25-Apr-2019
  • चरमपंथियों से ज्यादा अमेरिकी, अफगान बलों ने ली आम नागरिकों की जान-संयुक्त राष्ट्र

    काबुल, 25 अप्रैल । संयुक्त राष्ट्र की जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा पहली बार हो रहा है जब अफगानिस्तान के आम नागरिक तालिबान एवं अन्य चरमपंथी समूहों की बजाए अमेरिका एवं सरकार समर्थित बलों के हाथों ज्यादा मारे गए हैं। 

    यह हिंसक आंकड़े तब आए हैं जब अमेरिका ने तालिबान के साथ शांति समझौते के लिए बल देने के साथ ही अफगानिस्तान में अपने हवाई अभियान को बढ़ा दिया है। वर्ष 2001 में तालिबान के खदेड़े जाने के बाद से अब देश के ज्यादा हिस्सों पर उसका नियंत्रण है या उसका प्रभाव यहां देखने को मिलता है।
    अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने अपनी तिमाही रिपोर्ट में कहा कि 2019 के शुरुआती तीन महीनों में अंतरराष्ट्रीय एवं सरकार समर्थित बल 305 आम नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार थे जबकि चरमपंथी समूहों ने 227 लोगों की जान ली।
    यूएनएएमए ने कहा कि इनमें से ज्यादातर मौत अमेरिकी हवाई हमलों या अमेरिका समर्थित अफगान बलों द्वारा जमीन पर चलाए गए तलाशी अभियानों के चलते हुईं।
    रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से कुछ पूरी बेखौफी के साथ बेधडक़ किए गए प्रतीत होते हैं। इसमें कहा गया, यूएनएएमए ने अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों एवं अंतरराष्ट्रीय सैन्य बलों से नागरिकों की मौत के आरोपों की जांच की, इन जांचों के परिणामों को प्रकाशित करने की अपील की और पीडि़तों को उचित मुआवजा देने को कहा। 
    यूएनएएमए ने अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थितियों के बीच नागरिकों की मौत के डेटा एकत्रित करना शुरू किया था। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • कोलंबो, 24 अप्रैल । देश में ईस्टर के दिन हुए हमलों के बाद श्री लंका ने बुर्के पर प्रतिबंध की योजना पर अमल की तैयारी शुरू कर दी है। जांच के संदिग्धों और अन्य सबूतों से हमले में बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने के संकेत मिले हैं। रविवार को हुए इन हमलों में अब तक 350 लोगों की मौत हो गई है और करीब 500 लोग घायल हो गए। 
    मीडिया में आई खबरों में मंगलवार को यह जानकारी दी गयी। डेली मिरर ने सूत्रों के हवाले से कहा कि सरकार मस्जिद अधिकारियों से विचार विमर्श करके इस कदम को लागू करने की योजना बना रही है। अखबार ने सूत्र के हवाले से कहा, ‘उन्होंने (सूत्र) कहा कि सरकार मस्जिद अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर इस कदम को लागू करने की योजना बना रही है और सोमवार को कई मंत्रियों ने इस मामले पर राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना से बात की।’ 
    ऐसा पाया गया कि 1990 की शुरुआत में खाड़ी युद्ध तक श्री लंका में मुस्लिम महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा में बुर्का और नकाब कभी शामिल नहीं रहे। खाड़ी युद्ध के समय चरमपंथी तत्वों ने मुस्लिम महिलाओं के लिए पर्दा शुरू किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा सूत्रों ने बताया कि डेमाटागोडा में घटनाओं में शामिल रही कई महिलाएं भी बुर्का पहनकर भाग गई। अगर श्री लंका ने बुर्का पर प्रतिबंध लगा दिया तो वह एशिया, अफ्रीका और यूरोप में उन देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिन्होंने आतंकवादियों को पुलिस से बचने या विस्फोटकों को छिपाने के लिए बुर्का का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए ऐसा किया। 
    चाड, कैमरून, गाबोन, मोरक्को, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है। एशिया और यूरोप के विभिन्न देशों में बुर्के आदि पर प्रतिबंध लगाया गया है। (भाषा)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • तोक्यो, 24 अप्रैल । जापान सरकार ने उन हजारों लोगों से माफी मांगी है जिनकी युजेनिक्स प्रोटेक्शन कानून के तहत जबरन नसबंदी कराई गई थी। सरकार ने पीडि़तों को मुआवजा देने का भी वादा किया है।
    मुख्य कैबिनेट सचिव योशिहिदे सुगा ने कहा कि वह पीडि़तों से दिल से माफी मांगते हैं। जापान की संसद ने बुधवार (24 अप्रैल) को एक विधेयक पारित किया जिसके तहत हर पीडि़त को 28,600 डॉलर (करीब 20 लाख रुपये) मुआवजा मुहैया कराने समेत पीडि़तों की मदद की जाएगी।
    जापान में 1948 युजेनिक्स सुरक्षा कानून 1996 लागू किया गया था। इस दौरान 25,000 लोगों की उनकी मर्जी के बिना नसबंदी की गई थी। इस कानून के तहत चिकित्सकों को अक्षम लोगों की नसबंदी करने की अनुमति थी। (भाषा)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नाइजेरिया, 24 अप्रैल । उत्तरी नाइजीरिया के कात्सिना राज्य में बंदूकधारियों ने 10 लोगों की हत्या कर दी और दो महिलाओं का अपहरण कर लिया। इस ताजा हिंसा में सशस्त्र आपराधिक गिरोह शामिल हैं। पुलिस और स्थानीय निवासियों ने मंगलवार को बताया कि बंदूकधारी रविवार शाम को मोटरसाइकिलों पर सवार होकर यार सांता शेरेरे शहर में आए। उन्होंने गोलियां चलाईं और वाहनों तथा दुकानों को आग लगाई। कात्सिना राज्य के पुलिस प्रवक्ता गैम्बो इसा ने कहा, कि पुलिस की एक टीम और स्थानीय निवासियों ने हमले के बाद नौ लोगों के शव निकाले।
    उन्होंने बंदूकधारियों को अपराधी बताया और कहा कि पुलिस ने उनका पीछा करने की कोशिश की। स्थानीय निवासी सदा इरो ने बताया कि थोड़ी देर बाद ही एक अन्य शव बरामद किया गया जिससे मृतकों की संख्या 10 पर पहुंच गई। इरो ने कहा कि बदमाशों ने हमले के दौरान दो महिलाओं को भी अगवा कर लिया और जाने से पहले कई दुकानों तथा वाहनों को आग लगा दी। नाइजीरिया की राजधानी अबुजा से करीब 350 किलोमीटर उत्तर में स्थित कात्सिना राज्य में हाल के महीनों में हिंसक हमले देखे गए हैं। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । नेपाल में बुधवार को रिक्टर पैमाने पर 5.2 की तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह भूकंप साल 2015 में आए प्रलयकारी भूकंप के चार साल पूरा होने के ठीक एक दिन पहले आया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर ने ट्वीट कर जानकारी दी कि राजधानी की सीमा से लगे धादिंग में सुबह 6.29 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह के भूकंप के बाद उसी जिले में 4.3 की तीव्रता के फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। वहीं जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया, हालांकि इसमें अभी तक किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। 
    अरुणाचल प्रदेश में करीब 1.45 मिनट पर भूकंप आया। अरुणाचल प्रदेश में करीब 1.2 मिलिनय लोग रहते हैं। तिब्बत के इलाकों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। 
    चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र ने कहा कि रिक्टर पैमाने पर 6.3 तीव्रता का भूकंप तिब्बत के मेदोग काउंटी में तडक़े 4.15 बजे 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। नेपाल में 25 अप्रैल, 2015 को बड़े पैमाने पर भूकंप ने तबाही मचाया था, जिसमें लगभग 9,000 लोग मारे गए थे और पांच लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।  
    इससे पहले फिलीपिंस में सोमवार और मंगलवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए थे सोमवार को सेंट्रल फिलीपिंस में 6.4 की तीव्रता का भूकंप आया, जिससे लोग सहम गए। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा कि मनीला में कई ईमारत, दफ्तर भूकंप के झटके से हिलते दिखे। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई। हालांकि, अभी तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई है। बता दें कि साल 2013 में आए भूकंप में कई लोग मारे गए थे। 
    भूकंप आने के वक्त यदि आप घर से बाहर हैं तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों आदि से दूर रहें। जब तक झटके खत्म न हों, बाहर ही रहें। चलती गाड़ी में होने पर जल्द गाड़ी रोक लें और गाड़ी में ही बैठे रहें। ऐसे पुल या सडक़ पर जाने से बचें, जिन्हें भूकंप से नुकसान पहुंचा हो। भूकंप आने के वक्त यदि आप घर में हैं तो फर्श पर बैठ जाएं। मज़बूत टेबल या किसी फर्नीचर के नीचे पनाह लें। टेबल न होने पर हाथ से चेहरे और सिर को ढक लें। घर के किसी कोने में चले जाएं और कांच, खिड़कियों, दरवाजों और दीवारों से दूर रहें। बिस्तर पर हैं तो लेटे रहें, तकिये से सिर ढक लें। कमजोर सीढिय़ों का इस्तेमाल न करें, आमतौर पर इमारतों में बनी सीढिय़ां मज़बूत नहीं होतीं। झटके आने तक घर के अंदर ही रहें और झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलें। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली/कोलंबो, 24 अप्रैल। श्रीलंका के कोलंबो में सवोय सिनेमा के पास बुधवार सुबह एक और धमाका हुआ है। विस्फोटक मोटरसाइकिल में रखा हुआ था, जिसमें यह धमाका हुआ है। हालांकि अभी इस घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली है।
    उल्लेखनीय है कि श्रीलंका में गत रविवार को ईस्टर के मौके पर हुए आत्मघाती हमलों और सिलसिलेवार धमाकों में मरने वालों की संख्या 359 हो गई है। पुलिस प्रवक्ता रुवान गुनसेकेरा ने बताया कि व्यापाक तलाश अभियान चलाया गया और इस संबंध में मंगलवार को कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। गुनासेकेरा ने कहा, ‘‘मरने वालों की संख्या 359 पर पहुंच गई है।’’ 
    इस्लामिक स्टेट ने द्वीप राष्ट्र में हुए इन घातक हमलों की जिम्मेदारी ली और हमलों को अंजाम देने वाले आत्मघातियों की पहचान भी की है। ईस्टर के मौके पर गिरजाघरों और होटलों को निशाना बनाकर किए गए हमलों को सात आत्मघाती हमलावरों ने अंजाम दिया था।
    इस्लामिक स्टेट ने श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए भयानक आत्मघाती हमलों की मंगलवार को जिम्मेदारी ली और इसे अंजाम देने वाले सात आत्मघाती बम हमलावरों की पहचान की।
    जिहादी गतिविधियों की निगरानी करने वाले साइट इंटेलीजेंस ग्रुप के अनुसार अपनी प्रचार संवाद समिति ‘अमाक’ के मार्फत एक बयान में आईएसआईएस ने कहा, ‘‘दो दिन पहले श्रीलंका में गठबंधन के सदस्य देशों के नागरिकों और ईसाइयों को निशाना बना कर जिन लोगों ने हमला किया, वे इस्लामिक स्टेट समूह से जुड़े थे।’’ 
    इस बयान में हमलावरों की पहचान अबु उबायदा, अबु अल मुख्तार, अबु खलील, अबु हम्जा, अबु अल बारा, अबु मुहम्मद और अबु अब्दुल्लाह के रूप में की गयी है। बयान में यह भी बताया गया कि किसने कहां हमला किया। बयान में यह भी दावा किया है कि इन धमाकों में करीब 1000 लोग या तो मारे गये हैं या घायल हुए हैं। (भाषा)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 24 अप्रैल । अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों को चुना जाता रहा है और इस कड़ी में अब जापान का नाम भी शामिल हो गया है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक जापान में पहली बार भारतीय मूल के एक व्यक्ति योगेंद्र पुराणिक ने स्थानीय निकाय के चुनाव में जीत दर्ज की है। योगेंद्र पुराणिक को यह जीत टोक्यो नगरपालिका के चुनाव में मिली है। वे यहां के इदोगावा-कू वॉर्ड से चुनाव जीते हैं। योगेंद्र इस इलाके में ‘योगी’ के नाम से लोकप्रिय हैं।
    जापान की राजधानी टोक्यो में 23 वॉर्ड हैं जहां कुल 58 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। ताजा चुनाव में कुल 44 उम्मीदवार चुने गए हैं और योगेंद्र भी उनमें से एक हैं। इदोगावा ऐसा इलाका है जहां पर भारतीय सबसे अधिक संख्या में रहते हैं। यहां भारतीयों की आबादी करीब 4,300 है जबकि जापान में रहने वाले कुल भारतीयों की तादाद करीब 34 हजार है।
    योगेंद्र का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था और उनकी शुरुआती शिक्षा भी यहीं हुई है। वे पहली बार 1997 में जापान आये थे और तब वे विश्वविद्यालय के छात्र थे। दो साल की पढ़ाई के बाद वे 2001 में फिर जापान लौटे और यहां बतौर इंजीनियर काम करने लगे। बाद में उन्होंने बैंकों और दूसरी कंपनियों में भी काम किया। योगेंद्र इदोगावा वार्ड में 2005 से रह रहे हैं और यहीं रहते हुए उन्होंने जापान की नागरिकता हासिल की थी और फिर राजनीति से जुड़ गए। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा है, ‘मैं जापान के लोगों और विदेशियों के बीच पुल का काम करना चाहता हूं।’ (पीटीआई)

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Posted Date : 24-Apr-2019
  • अहमदाबाद, 24 अप्रैल। दो गोरिल्लाओं की रेंजर अधिकारियों के साथ सेल्फी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। फोटो में ये गोरिल्ला सेल्फी के लिए बड़े ही स्टायलिश पोज देते नजर आ रहे हैं।
    रेंजर अधिकारियों ने इन दोनों गोरिल्लाओं को तब बचाया था जब वो बच्चे थे। यह सेल्फी कांगो के वीरुंगा नेशनल पार्क में ली गई थी, जहां जानवरों को उनके मां-पिता की शिकारियों की ओर से हत्या के बाद लाया जाता है।
    पार्क के डिप्टी डायरेक्टर ने बीबीसी न्यूज डे को बताया कि गोरिल्ला अपने देखभाल करने वालों की नकल करना सीख लेते हैं। उन्होंने बताया कि रेंजर अधिकारियों को वो अपने मां-बाप की तरह देखने लगते हैं।
    वीरुंगा के डिप्टी डायरेक्टर इंनोसेंट मब्यूरनम्वे ने बीबीसी को बताया कि दोनों गोरिल्लाओं की मांओं की हत्या जुलाई 2007 में कर दी गई थी।
    गोरिल्ला उस समय सिर्फ दो और चार महीने के थे। कुछ ही समय बाद दोनों को वीरुंगा के एक अभयारण्य में ले जाया गया, जहां वे तब से रह रहे हैं।
    डिप्टी डायरेक्टर बताते हैं, क्योंकि दोनों गोरिल्ला रेंजर अधिकारियों के साथ बड़े हुए हैं, जिन्होंने उन्हें बचाया था, वो इंसानों की नकल करने लगे हैं और दो पैरों पर खड़े रहना उनका इंसानों की तरह बनने की कोशिश है। वो कहते हैं, लेकिन यह आम तौर पर नहीं होता है।
    मैं इसे देखकर बहुत चकित था। इसलिए यह बहुत मजेदार है। एक गोरिल्ला को इंसानों की तरह खड़े होना और उसकी नकल करते देखना काफी रोचक होता है। एक रेंजर होना हमेशा मजेदार नहीं होता, यह बहुत ही खतरनाक काम है।
    पिछले साल वीरुंगा नेशनल पार्क में पांच रेंजर अधिकारियों की हत्या संदिग्ध विद्रोहियों ने घात लगाकर दी थी। 1996 से अब तक यह आंकड़ा 130 से पार चुका है। पूर्वी कांगो में सरकार और विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच संघर्ष चल रहा है।
    इनमें से कुछ सशस्त्र समूह पार्क को अपना ठिकाना बनाए हुए हैं, जहां वे अकसर जानवरों का शिकार करते हैं। (बीबीसी)

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Posted Date : 22-Apr-2019
  • 22 अप्रैल, 2019। अधिकतर कामकाजी महिलाओं को ऐसा लगता है कि गर्भवती होने से उनकी नौकरी को खतरा हो सकता है. उन्हें काम से निकाल दिया जा सकता है जबकि पिता बनने वाले पुरूषों को अकसर नौकरी या कार्यस्थल पर बढ़ावा मिलता है. शोधकर्ताओं का कुछ ऐसा ही कहना है. शोध से जुड़ी इस निष्कर्ष को एप्लाइड मनोविज्ञान के जर्नल में प्रकाशित किया गया। इसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि मां बनने वाली औरतों को ऐसा महसूस होता है कि अब कार्यस्थल पर उनका अच्छे से स्वागत नहीं किया जाएगा.
    फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह उन महिलाओं पर किया गया पहला अध्ययन है, जिन्हें ऐसा महसूस होता है कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें नौकरी से बाहर निकाल दिया जाएगा. मैनेजमेंट के सहायक अध्यापक पुस्टियन अंडरडॉल ने कहा, हमने पाया कि महिलाओं ने जब अपने गर्भवती होने का खुलासा किया तो उन्होंने कार्यस्थल पर प्रोत्साहन का अनुभव कम कि पुस्टियन आगे कहती हैं, जब महिलाओं ने इस बात का जिक्र अपने मैनेजर या सह-कार्यकर्ताओं से किया तो हमने देखा कि उन्हें करियर के क्षेत्र में प्रोत्साहन दिए जाने की दर में कमीं आई जबकि पुरूषों को प्रोत्साहित किए जाने की दर में बढ़ोतरी हुई। 
    निष्कर्ष पह पहुंचने के लिए पुस्टियन ने दो सिद्धान्तों की गहराई से अध्ययन किया।  पहले में यह पाया गया कि गर्भवती महिलाओं को नौकरी से निकाले जाने का डर रहता है. दूसरे में पुस्टियन ने पाया कि महिलाओं को ऐसा इस वजह से लगता है कि क्योंकि गर्भावस्था के दौरान निजी जिंदगी और करियर के क्षेत्र में कई बदलाव आते हैं। शोध में कुछ नई बातें बताई गई हैं कि गर्भवती महिलाओं के साथ कार्यस्थल पर किस तरह से पेश आना चाहिए। 
    पुस्टियन के अनुसार, मां बनने वाली महिलाओं के प्रति करियर से जुड़ी प्रोत्साहन को कम नहीं किया जाना चाहिए।  इसके साथ ही मैनेजर्स को माता और पिता दोनों को ही सामाजिक और करियर से जुड़ी ही संभव सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि काम और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने में उन्हें मदद मिलें। (इनपुट-आईएएनएस)

     

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Posted Date : 22-Apr-2019
  • नई दिल्ली, 22 अप्रैल । रविवार को श्रीलंका में इतिहास का सबसे भीषण हमला हुआ। इस द्वीपीय देश में 8 सीरियल ब्लास्ट में अब तक 290 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इधर श्रीलंकाई पुलिस ने अब तक 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस हमले को लेकर पहले से अलर्ट था।

    10 दिन पहले के एक अलर्ट के मुताबिक श्रीलंका को एक विदेशी खुफिया एजेंसी ने सतर्क किया था। इसमें कहा गया था कि कोलंबो में बड़े चर्च और भारतीय उच्चायोग को निशाना बनाने का प्लान है। इसमें नेशनल तौहीद जमात नाम के एक कट्टरपंथी संगठन का नाम लिया गया था। नेशनल तौहीद जमात पर कट्टरपंथी वहाबी विचारधारा के प्रचार प्रसार का आरोप लगता रहा है। ये संगठन पिछले साल भी सुर्खियों में आया था जब इस पर श्रीलंका में बौद्ध मूर्तियां तोडऩे का आरोप लगा था।
    पूरी दुनिया में पिछले 20 सालों में ऐसा भीषण हमला सिर्फ दो बार ही देखने को मिला है। पहला अमेरिका में 11 सितंबर 2001 जिसमें 3 हजार नागरिकों की मौत हुई थी या फिर भारत में 26/11, जिसमें 165 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। श्रीलंका में भी आतंकवादियों ने जिस तरह का खूनी खेल खेला है, वो ना सिर्फ इसी पैमाने का आतंकी हमला है, जिस पैमाने पर 9/11 और 26/11 का हमला था, बल्कि ये हमारे सामने आतंकवादियों के खूनी मंसूबों की नई चुनौती भी है।
    श्रीलंका का आतंकी हमला तो बेचैन कर देना वाला है क्योंकि श्रीलंका में 10 साल की शांति के बाद आतंक की खूनी वापसी हुई है। श्रीलंका एक ऐसा देश है, जिसने 30 साल तक गृह युद्ध और आतंकवाद झेला है। 2009 में गृह युद्ध के खात्मे के बाद श्रीलंका में शांति लौटी, लेकिन अब फिर से आतंक की आहट चिंता बढ़ा रही है।
    रविवार को ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए ईस्टर का पवित्र दिन था। आतंकवादियों ने कत्लेआम के लिए इसी दिन को चुना। उन्होंने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के बड़े चर्चों पर टारगेट किया। पहला ब्लास्ट सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर राजधानी कोलंबो के कैथोलिक चर्च सेंट एंथनी में हुआ। दूसरा ब्लास्ट कोलंबो के बाहरी इलाके के नेगोंबो में सेंट सबैस्टियन चर्च में हुआ। इसी के तुरंत बाद कोलंबो से करीब 300 किलोमीटर दूर बैटीक्लो शहर में तीसरे चर्च में ब्लास्ट की ख़बर आई। इसके बाद कोलंबो के तीन फाइव स्टार होटल में धमाके हुए, जिसमें शंगरीला, सिनैमॉन ग्रैंड और किंग्सबरी शामिल थे। बाद में दो और ब्लास्ट हुए, जिनमें कोलंबो के नेशनल ज़ू के पास के एक होटल और दूसरा ब्लास्ट डमेटोगोड़ा के एक घर में हुआ।
    श्रीलंकाई मीडिया के मुताबिक 8 में से कम से कम 2 जगहों पर हमलों में आत्मघाती हमलावर शामिल थे। बाद में श्रीलंका सरकार ने कन्फर्म किया कि ज़्यादातर हमलों में आत्मघाती हमलावर शामिल थे। ये भी बताया गया कि ये हमला एक ही संगठन के लोगों ने सुनियोजित साजि़श के तहत अंज़ाम दिया। श्रीलंका पुलिस ने कोलंबो के एक घर में छापा मार कर 7 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। बताया गया कि इस छापेमारी में और संदिग्धों को पकडऩे में श्रीलंका पुलिस के 3 अफसर मारे गए। पुलिस का कहना है कि वो पक्के तौर पर अभी ये नहीं कह सकते कि इस हमले के पीछे कौन लोग हैं?
    आज से 10 दिन पहले ही श्रीलंका पुलिस ने ऐसे किसी आतंकी हमले का अलर्ट जारी किया था, जिसमें ये कहा गया था कि इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों का श्रीलंका के बड़े चर्चों पर हमला करने का प्लान है।
    करीब दो करोड़ आबादी वाले श्रीलंका में बौद्ध धर्म के लोग बहुसंख्यक हैं। इस द्वीपीय देश में 70 फीसदी आबादी बौद्ध धर्म को मानने वाली है। इसके अलावा करीब 12 फीसदी हिंदू, 10 फीसदी आबादी मुस्लिम और करीब साढ़े सात फीसदी आबादी ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों की है।
    श्रीलंका ने सिंघली और तमिल संघर्ष को भी देखा है। हाल के दिनों में बौद्ध और मुस्लिम समुदाय के बीच टकराव को भी देखा है, लेकिन ईसाई समुदाय को निशाना बनाने के पीछे कौन सी सोच है, कौन गुनहगार है, ये बड़ा सवाल है। अभी तक किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है। ना ही श्रीलंकाई सरकार या पुलिस ने पक्के तौर पर ये बताया है कि कौन से संगठन पर शक की सुई घूम रही है। (आजतक)

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Posted Date : 22-Apr-2019
  • कोलंबो, 22 अप्रैल । श्रीलंका सरकार ने कहा है कि रविवार को हुए सिलसिलेवार धमाके आत्मघाती हमलावरों ने किए और इनकी साजिश विदेश में रची गई। पुलिस के मुताबिक अब तक हुए आठ धमाकों में 290 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 500 लोग घायल हैं। मृतकों में 36 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इस मामले में 24 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।
    श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमासिंघे के मुताबिक बम धमाकों के सिलसिले में कम से कम 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए सभी लोग श्रीलंका के ही नागरिक हैं। इन लोगों के किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से संपर्कों की भी जांच की जा रही है। अभी तक किसी भी संगठन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी नहीं ली है।
    प्रधानमंत्री का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि संभावित हमलों के बारे में पुलिस के पास पहले से जानकारी थी लेकिन कैबिनेट को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी।
    हमलों के बाद रविवार को समूचे श्रीलंका में कफ्र्यू लगा दिया गया था, जिसे सोमवार सुबह हटा लिया गया। सोशल मीडिया को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
    श्रीलंका के रक्षामंत्री आर विजयवर्धन का कहना है, ये आत्मघाती हमले हैं। खुफिया एजेंसियों ने हमले के बारे में सूचित किया था, लेकिन इससे पहले कि उन्हें रोका जाता, धमाके हो गए। हमले की साजिश विदेश में रची गई।
    नेगोम्बो में एक आदमी ने एएफपी को बताया कि सेंट सेबस्टियन चर्च में वो और उनकी पत्नी प्रार्थना में शामिल होने गए थे।
    दिलीप फर्नांडो ने कहा, लेकिन वहां बहुत भीड़ थी। मैं वहां खड़े नहीं रहना चाहता था, इसलिए मैं दूसरे चर्च में चला गया। लेकिन दिलीप के परिवार के कुछ सदस्य चर्च के अंदर थे, विस्फोट में वो बच गए लेकिन उनका मानना है कि उन्होंने आत्मघाती हमलावर को देखा था।
    दिलीप के अनुसार, प्रार्थना के बाद उन्होंने देखा कि एक युवा भारी बैग के साथ चर्च के अंदर गया। उसने मेरे दादा का सिर भी छुआ। यही हमलावर था।
    हमले किसने किए हैं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पकड़े गए लोगों को लेकर भी कुछ सार्वजनिक नहीं किया गया है। श्रीलंका के दूरसंचार मंत्री हरिन फर्नांडो ने भी बीबीसी से बातचीत में कहा कि सरकार के पास आज हुए हमलों के बारे में खुफिया रिपोर्ट थी। उन्होंने कहा, इस खुफिया रिपोर्ट के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी नहीं दी गई थी। इस रिपोर्ट को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया, ये सवाल भी कैबिनेट में उठा है। उन्होंने बताया, खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चार तरह से हमले हो सकते हैं। आत्मघाती बम धमाके हो सकते हैं, हथियारों से हमला हो सकता है, चाकू हमला हो सकता है या विस्फोटकों से लदे ट्रक से हमला हो सकता है। इस रिपोर्ट में कुछ संदिग्धों के नाम का भी जिक्र है। उनके टेलिफोन नंबर भी रिपोर्ट में दिए गए थे। ये आश्चर्यजनक है कि ख़ुफिय़ा विभाग के पास ये रिपोर्ट थी लेकिन इस बारे में कैबिनेट या प्रधानमंत्री को नहीं पता था।
    फर्नांडो ने कहा, ये रिपोर्ट एक दस्तावेज है और ये दस्तावेज अब हमारे पास है। इस रिपोर्ट में कुछ नामों का भी जिक्र है। इसमें कुछ संगठनों के भी नाम हैं। जो मैं सुन रहा हूं उससे पता चल रहा है कि जांच सही चल रही है और हम उन लोगों तक पहुंच जाएंगे जिन्होंने ये हमले किए हैं। हमले के पीछे कौन लोग हैं और कौन समूह हैं उनकी पहचान कर ली गई है। कल शाम तक हमारे पास पूरी जानकारियां होंगी।
    लोगों को इस बार का डर है कि हमले आगे भी जारी रह सकते हैं। श्रीलंका में अब तक कुल आठ धमाके हो चुके हैं। ईस्टर पर चर्च और होटलों को निशाना बनाया गया है।
    आठवें धमाके में तीन पुलिस अधिकारी भी मारे गए हैं। ये धमाका उस समय हुआ जब पुलिस अधिकारी कोलंबो में एक घर की तलाशी ले रहे थे। अभी ये पता नहीं चल पाया है कि क्या ये धमाका बम को निष्क्रिय करने की कोशिश के दौरान हुआ। पुलिस के मुताबिक इस धमाके के सिलसिले में दो संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया।
    कोलंबो नेशनल हॉस्पिटल ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की है। विदेश मंत्रालय ने मृतकों में 36 विदेशी नागरिकों के शामिल होने की आशंका ज़ाहिर की है।
    धमाकों के कुछ घंटे बाद ही बीबीसी सिंहला सेवा के संवाददाता अज़्जाम अमीन ने कोलंबो जनरल अस्पताल के हवाले से बताया कि कोलंबो में लगभग 50 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा बट्टिकोला में 25 लोगों की मौत हुई है और पुलिस के मुताबिक नेगोम्बो में मरने वालों की संख्या कम से कम 50 बताई।
    कोच्चादाई स्थित सेंट एंथोनी, बट्टिकोला और नेगोम्बो चर्चों, जबकि कोलंबो में शांगरी ला स्टार, किंग्सबरी और सिनेमन ग्रांड होटलों में धमाके हुए हैं। इसके अलावा दोपहर 2 बजे भी कोलंबो में दो धमाके हुए। इनमें एक धमाका कोलंबो के डिमाटागोडा में तब हुआ जब सुरक्षाकर्मी एक घर की तलाशी ले रहे थे। इसमें तीन सुरक्षा अधिकारी मारे गए।
    श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा है कि धमाके की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। उन्होंने लोगों से फेक न्यूज पर विश्वास न करने की अपील की। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सुरक्षा के मसले पर एक आपात बैठक बुलाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बम धमाकों की निंदा करते हुए ट्वीट किया है, श्रीलंका में भयानक धमाकों की कड़ी निंदा करता हूं। इस तरह की बर्बरता कोई जगह नहीं है। भारत श्रीलंका के लोगों के साथ है। मेरी संवेदनाएं पीडि़त परिवारों के साथ हैं और घायलों के लिए प्रार्थना करता हूं।
    धमाकों में कई विदेशी नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की भी ख़बर है। कम से 27 विदेशी नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। ईस्टर संडे ईसाई कैलेडर में एक बड़ा पर्व होता है और इस मौके पर चर्चों में बड़े पैमाने पर प्रार्थनाएं आयोजित होती है। सेंट एंथोनी और अन्य चर्चों में हजारों लोग ईस्टर की प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए थे।
    एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी सिंहला को बताया कि धमाके के बाद उसने बहुत सारे शवों को एक के ऊपर एक बिखरे देखा।
    श्रीलंका रेड क्रॉस ने ट्वीट कर कहा है कि सोशल मीडिया में रेड क्रॉस इमारत पर हमले की खबर प्रसारित की जा रही है, जो कि गलत सूचना है। रेड क्रॉस ने लोगों से गलत सूचनाओं को प्रसारित करने से बचने की अपील की है।
    धमाके के बाद शहर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी है। अब तक इस हमले की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है।
    श्रीलंका के वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने ट्वीट किया है, चर्चों और होटलों में ईस्टर संडे बम धमाकों में निर्दोष लोग मारे गए हैं और ऐसा लगता है कि हत्या, अफरातफरी और अराजकता फैलाने के लिए इसे बहुत व्यस्थित तरीके से अंजाम दिया गया है।
    श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्षी नेता महिंदा राजपक्षे ने धमाकों की निंदा करते हुए इसे अमानवीय करार दिया है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर हमले की निंदा की है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया है, मैं कोलंबो में भारतीय उच्चायुक्त से लगातार सम्पर्क में हूं। स्थितियों पर हम करीब से नजर रखे हुए हैं।
    घटना के एक चश्मदीद रौशन ने बीबीसी तमिल को बताया, मैं अपने घर में था तभी मुझे टायर फटने जैसी आवाज़ आई, मैं घर से बाहर निकला तो मैंने धुएं का बड़ा गुबार देखा। उन्होंने कहा, हमने दो तीन जि़ंदा बचे लोगों को अस्पताल भेजा। मैं अंदर गया था, शायद वहां 100 लोगों की मौत हुई थी, वहां लोगों के अंगों के टुकड़ों पड़े हुए थे। श्रीलंका में जबसे गृहयुद्ध समाप्त हुआ है, छिटपुट हिंसा की घटनाएं होती रही हैं। बहुसंख्यक सिंहला बौद्ध मस्जिदों और मुसलमानों की सम्पत्ति को निशाना बनाते रहे हैं। इसकी वजह मार्च 2018 में इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी थी। (बीबीसी)

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Posted Date : 22-Apr-2019
  • यूक्रेन, 22 अप्रैल । वोलोदीमीर जेलेंस्की ने जिस नाटक में अभियन किया था उसमें उनका किरदार दुर्घटनावश राष्ट्रपति बन गया था। यूक्रेन में हुए राष्ट्रपति चुनावों के एक्जिट पोल के मुताबिक कॉमेडियन वोलोदीमीर जेलेंस्की भारी जीत के साथ अगले राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। एक्जिट पोल के अनुसार उन्हें 70 फीसदी से अधिक मत मिले हैं। तीन सप्ताह पहले मतदान के पहले चरण में वो सबसे आगे थे। तब 39 उम्मीदवार मैदान में थे। जेलेंस्की ने मौजूदा राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको को चुनौती दी थी।
    पोरोशेंको ने हार स्वीकार कर ली है। राजधानी कीव में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वो राजनीति नहीं छोड़ेंगे। वहीं अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जेलेंस्की ने कहा, मैं कभी आपका भरोसा नहीं तोड़ूंगा।
    उन्होंने कहा, मैं अभी औपचारिक रूप से राष्ट्रपति नहीं हूं लेकिन यूक्रेन के एक नागरिक के तौर पर सोवियत संघ के बाद के सभी देशों से कह सकता हूं- हमें देखो, सबकुछ संभव है।
    यदि एग्जिट पोल नतीजों में बदले तो जेलेंस्की पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद के लिए चुन लिए जाएंगे। यूक्रेन के राष्ट्रपति का देश की सुरक्षा, रक्षा विभाग और विदेश नीति पर खासा प्रभाव होता है।
    एग्जिट पोल के मुताबिक निवर्तमान राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको को 25 फीसदी मत मिल सकते हैं। पोरोशेंको साल 2014 से यूक्रेन के राष्ट्रपति हैं। अरबपति कारोबारी पोरोशेंको उस समय राष्ट्रपति चुन लिए गए थे जब यूक्रेन में हुए प्रदर्शनों के बाद रूस समर्थक राष्ट्रपति को पद छोडऩा पड़ा था। अब इस चुनाव के एक्जिट पोल के नतीजे जारी होने के बाद पोरोशोंको ने कहा, चुनाव के नतीजे हमें अनिश्चितता और भ्रम में ले जाएंगे। उन्होंने कहा, मैं पद छोड़ रहा हूं लेकिन मैं जोर देकर ये कहना चाहता हूं कि मैं राजनीति नहीं छोड़ूंगा।
    41 वर्षीय जेलेंस्की एक राजनीतिक हास्य ड्रामे में अभिनय के लिए चर्चित हैं। सर्वेंट ऑफ द पीपल नाम के इस धारावाहिक में उनका किरदार एक ऐसे शख़्स का है जो दुर्घटनावश यानी तुक्के से अचानक यूक्रेन का राष्ट्रपति बन जाता है। उन्होंने अपने शो के नाम पर बनी राजनीतिक पार्टी से ही राष्ट्रपति चुनाव लड़ा।
    जेलेंस्की के पास कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है। अपने चुनाव अभियान में उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वो बाक़ी उम्मीदवारों से अलग कैसे हैं। उन्होंने कोई ठोस नीतिगत विचार अपने चुनाव अभियान में पेश नहीं किया।
    बावजूद इसके उन्होंने पहले चरण का मतदान तीस प्रतिशत से अधिक मतों के साथ जीता। दूसरे नंबर पर रहे पोरोशेंको को 15.95 फीसदी मत ही मिले थे। यूक्रेन का राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी गिनती यूरोप के प्रभावशाली नेताओं में होने लगेगी। (बीबीसी)

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Posted Date : 22-Apr-2019
  • कैलिफोर्निया, 22 अप्रैल । शहर में अपने 13 बच्चों को गैरकानूनी रूप से बिस्तर से बांध कर रखने और उन्हें भूखा रखने के दोषी दंपत्ति को उनके बच्चों ने माफ कर दिया है।
    13 बच्चों के माता-पिता डेविड और लुईस टर्पिन ने शुक्रवार को रिवरसाइड काउंटी की अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद अदालत ने इस दंपति को 25 साल की सजा दी है। उम्मीद है कि अब ये दंपत्ति अपनी बाकी की जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुजारेगी। इस दंपत्ति को जनवरी 2018 में तब गिरफ्तार किया गया था जब उनकी एक 17 साल की बेटी ने घर से भाग कर इसकी जानकारी दी। टर्पिन दंपत्ति कम-से-कम 9 वर्षों तक अपने 13 में से 12 बच्चों को यातना देने, दुव्र्यवहार करने और जंजीर से बांध कर रखने का दोषी पाया गया है।
    डेविड और लुईस के बच्चों ने कोर्ट से कहा कि वो तमाम दुव्र्यवहारों के बाद भी अपने माता-पिता से प्यार करते हैं।
    दंपत्ति की एक बेटी के बयान को उसके भाई ने पढ़ा, मैं अपने माता-पिता से बेहद प्यार करती हूं। यह हमें पालने का सबसे अच्छा तरीका नहीं था, लेकिन इन्होंने ही मुझे वह इंसान बनाया जो मैं आज हूं।
    डेविड टुर्पिन (56) और लुईस टुर्पिन (49) अपने बच्चों को बार-बार सजा देते और पीटते थे, इसके बाद बच्चों ने घर से भागने की योजना बनाई। दंपत्ति के एक और बच्चे ने जो बताया उसकी आपबीती सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। उसने कहा, मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि मुझपर क्या बीती है। कभी कभी मुझे आज भी बुरे सपने आते हैं कि मेरे भाई-बहनों को जंजीर से बांध कर पीटा जाता था। वह बीत चुका है और अब बस यही कहना चाहूंगा कि मैंने अपने माता-पिता को जो बहुत सी चीजें उन्होंने हमारे साथ कीं उसके लिए माफ़ कर दिया है। लेकिन सभी बच्चे इतने सुलझे हुए नहीं थे।
    एक बेटी ने कहा, मेरे माता-पिता ने मुझसे मेरी पूरी जिंदगी छीन ली, लेकिन अब मैं अपना जीवन वापस ले रही हूं। मैं मजबूत हूं, एक फाइटर हूं, रॉकेट की तरह जिंदगी में आगे बढ़ रही हूं। उसने कहा, मेरे पिता ने मेरी मां को बदल दिया, मैंने ऐसा होते देखा। उन्होंने मुझे लगभग बदल ही दिया था तभी मुझे यह अहसास हुआ कि आखिर हो क्या रहा है। कोर्ट में डेविड और लुईस ने रोते हुए अपने किये पर बच्चों से माफी मांगी।
    पिता का बयान उनके वकील ने पढ़ा, इसमें लिखा था, मैंने सही मंशा से घर पर शिक्षा देने और अनुशासन सिखाने की कोशिश की। मैंने कभी अपने बच्चों को हानि नहीं पहुंचाना चाहता था। मैं अपने बच्चों से प्यार करता हूं और मुझे लगता है कि मेरे बच्चे भी मुझसे प्यार करते हैं। डेविड अमरीका के प्रसिद्ध रक्षा उत्पादक लॉकहीड मार्टिन और नोर्थ्रोप गु्रमैन में इंजीनियर रह चुके हैं।
    हाउसवाइफ लुईस ने कोर्ट में अपने किये पर माफी मांगी और कहा, मैं अपने बच्चों से बेहद प्यार करती हूं, मैं उम्मीद करती हूं कि मुझे उन्हें देखने, गले लगाने और उन्हें सॉरी बोलने का मौका मिलेगा।
    कोर्ट में जब जज ने उनके स्वार्थी, कू्रर और अमानवीय व्यवहार की निन्दा की तो दंपति के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जज बर्नार्ड श्वार्ट्ज ने कहा, आपने अपने बच्चों के साथ जो किया वो अब दुनिया के सामने है। आपको कम सजा दिए जाने का कारण मेरी नजर में सिर्फ इतना है कि आपने शुरुआती दौर में ही इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की है। आपके हॉउस ऑफ हॉरर में बच्चों ने अपमान सहन किया और आपने उन्हें नुकसान पहुंचाया है।
    लॉस एंजेलिस के बाहर दक्षिण में 112 किलोमीटर दूर साफ-सुथरे इलाके में स्थित इस घर में जब प्रशासन के अधिकारी पहुंचे तो उन्हें चारों ओर गंदगी और बदबू फैली हुई मिली। पुलिस के छापे के दौरान घर में 2 से 29 साल के ये बच्चे बुरी तरह कुपोषित पाए गए। दंपत्ति का एक 22 वर्षीय लडक़ा बिस्तर से जंजीर से बंधा मिला। उसकी दो बहनों को कुछ समय पहले ही जंजीरों से आजाद किया गया था।
    पीडि़तों को साल में एक बार से अधिक नहाने की मनाही थी, वे शौचालय का उपयोग करने में असमर्थ थे और उनमें से किसी भी बच्चे को कभी दांत के डॉक्टर से नहीं दिखाया गया था। कुछ वयस्क भाई-बहनों का ग्रोथ इतनी कम थी कि अधिकारियों ने उन्हें पहली नजर में बच्चा समझा।
    एबीसी को दंपत्ति की एक बेटी का 911 पर किए गए कॉल का ऑडियो मिला जिसमें उसने वहां रह रहे बच्चों की स्थिति का जिक्र किया था। इमरजेंसी ऑपरेटर को उसने बताया- मेरी दो बहनें और एक भाई... बिस्तर में जंजीर से बंधे हैं। 17 वर्षीय इस लडक़ी को अपने घर का पता तक मालूम नहीं था। उसने कहा, कभी-कभी जब मैं सो कर जागती हूं तो ठीक से सांस तक नहीं ले पाती क्योंकि घर में बहुत बदबू आती है। उस लडक़ी को महीने और साल तक का पता नहीं था और न ही वो मेडिकेशन यानी चिकित्सा शब्द का मतलब ही जानती थी।
    इन सभी बच्चों का नाम अंग्रेजी का वर्ण जे से शुरू होता है। इन्हें घर में ही रखा जाता था, लेकिन हैलोवीन, डिजनीलैंड और लास वेगास के फैमिली ट्रिप पर ले जाया गया था।
    नर्सों, मनोवैज्ञानिकों समेत देश भर के करीब 20 लोगों ने इन सात वयस्क भाई-बहनों और छह बच्चों की देखभाल की पेशकश की है। (बीबीसी)

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Posted Date : 21-Apr-2019
  • श्रीलंका, 21 अपै्रल (बीबीसी)। रविवार को ईस्टर के मौके पर श्रीलंका में छह जगह बम धमाके हुए। कोलंबो नेशनल हॉस्पिटल के डिप्टी डायरेक्टर ने 150 लोगों के मौत की पुष्टि की है। वहीं, हमले में 440 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। कोलंबो अस्पताल के मुताबिक हादसे में नौ विदेशी नागरिकों की मौत हो गई है।
    बीबीसी सिंहला सेवा के संवाददाता अज़्जाम अमीन के मुताबिक कोलंबो में 47 लोगों की मौत हुई है। कोलंबो जनरल अस्पताल ने भी इसकी पुष्टि की है। इसके अलावा बट्टिकोला में 25 लोगों की मौत हुई है और पुलिस के मुताबिक नेगंबो में मरने वालों की संख्या कम से कम 50 हो सकती है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक़, तीन चर्चों और कोलंबो के तीन फाइव स्टार होटलों में धमाके हुए हैं। कोच्चादाई स्थित सेंट एंथोनी, बट्टिकोला और नेगोंबो चर्चों, जबकि कोलंबो में शांगरी ला स्टार, किंग्सबरी और सिनेमन ग्रांड होटलों में धमाके हुए हैं।
    श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा है कि धमाके की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। उन्होंने लोगों से फेक न्यूज पर विश्वास न करने की अपील की। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सुरक्षा के मसले पर एक आपात बैठक बुलाई गई है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बम धमाकों की निंदा करते हुए ट्वीट किया है, श्रीलंका में भयानक धमाकों की कड़ी निंदा करता हूं। इस तरह की बर्बरता कोई जगह नहीं है। भारत श्रीलंका के लोगों के साथ है। मेरी संवेदनाएं पीडि़त परिवारों के साथ हैं और घायलों के लिए प्रार्थना करता हूं।
    धमाकों में कई विदेशी नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की भी ख़बर है। कोलंबो अस्पताल ने 9 विदेशी नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। ईस्टर संडे ईसाई कैलेडर में एक बड़ा पर्व होता है और इस मौके पर चर्चों में बड़े पैमाने पर प्रार्थनाएं आयोजित होती है। सेंट एंथोनी और अन्य चर्चों में हज़ारों लोग ईस्टर की प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए थे।
    एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि धमाके के बाद उसने बहुत सारे शवों को एक के ऊपर एक बिखरे देखा। 
    (बाकी पेजï 5 पर)
    श्रीलंका रेड क्रॉस ने ट्वीट कर कहा है कि सोशल मीडिया में रेडक्रॉस इमारत पर हमले की खबर प्रसारित की जा रही है, जो कि गलत सूचना है। रेड क्रॉस ने लोगों से गलत सूचनाओं को प्रसारित करने से बचने की अपील की है।
    धमाके के बाद शहर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी है। अब तक इस हमले की किसी ने जि़म्मेदारी नहीं ली है। 
    श्रीलंका के वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने ट्वीट किया है, चर्चों और होटलों में ईस्टर संडे बम धमाकों में निर्दोष लोग मारे गए हैं और ऐसा लगता है कि हत्या, अफरा तफरी और अराजकता फैलाने के लिए इसे बहुत व्यस्थित तरीके से अंजाम दिया गया है।
    श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्षी नेता महिंदा राजपक्षे ने धमाकों की निंदा करते हुए इसे अमानवीय करार दिया है।
    भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया है, मैं कोलंबो में भारतीय उच्चायुक्त से लगातार सम्पर्क में हूं। स्थितियों पर हम करीब से नजर रखे हुए हैं।
    घटना के एक चश्मदीद रौशन ने बीबीसी तमिल को बताया, मैं अपने घर में था तभी मुझे टायर फटने जैसी आवाज आई, मैं घर से बाहर निकला तो मैंने धुएं का बड़ा गुबार देखा।
    उन्होंने कहा, हमने दो तीन जि़ंदा बचे लोगों को अस्पताल भेजा। मैं अंदर गया था, शायद वहां 100 लोगों की मौत हुई थी, वहां लोगों के अंगों के टुकड़ों पड़े हुए थे।
    श्रीलंका में जबसे गृहयुद्ध समाप्त हुआ है, छिटपुट हिंसा की घटनाएं होती रही हैं। बहुसंख्यक सिंघला बौद्ध मस्जिदों और मुसलमानों की सम्पत्ति को निशाना बनाते रहे हैं। इसकी वजह मार्च 2018 में इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी थी।

     

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Posted Date : 20-Apr-2019
  • बेलफास्ट, 20 अप्रैल । गुड फ्राइडे के दिन उत्तरी आयरलैंड के लंदनडेरी में रातभर चले दंगों में एक 29 वर्षीय आयरिश पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पत्रकार ने हिंसा की एक तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की थी। इस हमले से पूरा आयरलैंड सदमें में है। पुलिस ने कहा कि यह हमला आयरिश राष्ट्रवादी आतंकियों का हो सकता है। पुलिस ने बताया कि हमला 1998 गुड फ्राइडे पीस डील के विरोध में किया गया।  
    नॉर्दर्न आयरलैंड में गुरुवार को पुलिस की एक रेड के बाद शहर के क्रेगन एरिया में अफरातफरी मच गई। पुलिस का कहना है कि वह इस वीकेंड पर होने वाले आतंकी हमलों को रोकने की कोशिश कर रही थी। हमले में कम से कम 50 पेट्रोल बम फेंके गए और 2 कारों को आग लगा दी गी। ट्विटर पर इस हिंसा की तस्वीर पोस्ट करने के थोड़ी देर बाद ही 29 साल की पत्रकार लायरा मैकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने इसे पूरी तरह से पागलपन करार दिया था। 
    पुलिस ने बताया कि वह इस घटना से एक आतंकी हमले की तरह निपट रहे थी और हत्या की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, इस हत्या के पीछे द न्यू इरा (आयरिश रिपब्लिकन आर्मी) ग्रुप का हाथ होने की संभावना है। 
    1998 डील की बात करें तो इसके तहत मुख्य आतंकी संगठनों के हथियारों पर पाबंदी लगाई गई थी। इसके अलावा नॉर्दर्न आयरलैंड से ब्रिटिश सेना को हटाना और एक पावरशेयरिंग सरकार के बनने की बात इस डील में थी। (रॉयटर्स)
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Posted Date : 19-Apr-2019
  • पाकिस्तान, 19 अप्रैल 2019, । पाकिस्तान का कहना है कि वह मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए किसी के दबाव में नहीं आएगा। यह बात गुरुवार को इस्लामाबाद के एक उच्च अधिकारी ने कही। पड़ोसी देश का यह जबाव ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही चीन ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने उसे मसूद से तकनीकी बाधा हटाने के लिए अल्टीमेटम दिया है।
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    मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया है। उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् से वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने को लेकर लाए गए प्रस्ताव पर चीन ने अड़ंगा लगाया था। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा कि अजहर को लेकर पाकिस्तान का रवैया स्पष्ट है। 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी अजहर ने ही ली थी। इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

    जब यह पूछा गया कि चीन ने अजहर को संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक आतंकी घोषित करने पर तकनीकी बाधा लगा दी तो फैसल ने कहा, इस संबंध में पाकिस्तान जो भी निर्णय लेगा वह उसके राष्ट्रीय हित में होगा। पाकिस्तान किसी के दबाव में नहीं आएगा। चीन ने बुधवार को उन खबरों को खारिज कर दिया था जिसमें कहा जा रहा था कि चीन को अजहर से तकनीकी बाधा हटाने के लिए 23 अप्रैल तक का समय मिला है। 

    चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि मसूद का मामला समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पता नहीं, मीडिया कैसे कह रहा है कि इस मामले में चीन को तकनीकी बाधा हटाने के लिए 23 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया गया है। जबकि चीन को कोई अल्टीमेटम नहीं मिला है। मीडिया को उन लोगों से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए जो ऐसी सूचनाएं जारी करते हैं।

    पुलवामा हमले के बाद मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने एक प्रस्ताव पेश किया था। हालांकि पाकिस्तान के दोस्त चीन ने इसके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव को तकनीकी बाधा में डाल दिया। जिसके बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस अजहर को ब्लैकलिस्ट करने के लिए सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् पहुंच गए थे। (अमर उजाला)

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Posted Date : 18-Apr-2019
  • लंदन, 18 अप्रैल । ब्रिटेन जुलाई में दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो ऑनलाइन पोर्नोग्राफी तक पहुंच रोकने के लिए उम्र को सत्यापित करेगा।
    बाल संरक्षण समूहों ने इस कवायद का स्वागत किया है लेकिन डिजिटल अधिकार की पैरवी करने वाले समूहों ने डेटा लीक की आशंका जाहिर की है और ऑनलाइन निजता संबंधी सवाल भी उठाए हैं।
    नया कानून 15 जुलाई से प्रभावी होगा। इस कानून के तहत इंटरनेट पोर्नोग्राफी के कॉमर्शियल प्रोवाइडरों को यूजर की उम्र को लेकर यह सुनिश्चत करना होगा कि उनकी उम्र 18 साल या अधिक की है।
    अलग-अलग वेबसाइट उम्र संबंधी पुष्टि के लिए अलग-अलग तरीके अपना सकेंगे। ऑनलाइन पासपोर्ट, क्रेडिट कार्ड आदि के जरिए उम्र का सत्यापन होगा। (भाषा)

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Posted Date : 18-Apr-2019
  • पेरिस, 18 अप्रैल । नोट्रे डेम के पादरी ने कहा है कि भीषण आग से तबाह हुए गिरजाघर को छह साल तक बंद रखा जाएगा।  स्थानीय कारोबारियों से बात करने के दौरान बिशप पेट्रिक चौवेट ने माना कि चर्च अगले पांच से छह साल तक बंद रहेगा।
    दो दिन पहले ही भीषण आग में चर्च का ऊपरी हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा। चौवेट ने कहा, भीषण आग में चर्च का एक हिस्सा काफी कमजोर हो गया है। चर्च का कौन-सा हिस्सा कमजोर हुआ है, इस बारे में उन्होंने नहीं बताया।
    उन्होंने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि चर्च के 67 कर्मचारी भविष्य में क्या करेंगे। फ्रांस के प्रधानमंत्री एडुवर्ड फिलिप ने नोट्रे डेम चर्च के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वास्तुकारों की सेवाएं लेने की घोषणा की है।
    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रां द्वारा कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाने के बाद प्रधानमंत्री ने इस बारे में बताया। बैठक में चर्च के पुनर्निर्माण का मुद्दा छाया रहा। (भाषा)

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Posted Date : 18-Apr-2019
  • इस्लामाबाद, 18 अप्रैल । पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक राजमार्ग पर बस में सवार 14 यात्रियों को उताकर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। डॉन न्यूज की खबरों के मुताबिक 15-20 सशस्त्र हमलावरों ने मकरान कोस्टल हाईवे पर कराची और ग्वादर के बीच पांच से छह बसों को रोककर इस घटना को अंजाम दिया।
    जानकारी के मुताबिक उन अज्ञात हमलावरों ने सेना की वर्दी पहनी हुई थी। पहले मकरान कोस्टल हाईवे पर कराची और ग्वादर के बीच यात्रा करने वाली बसों को रोक लिया और पांच से छह बसों को रोक लिया। इनमें सवार 16 यात्रियों को नीचे उतारा और 14 यात्रियों को मौत के घाट उतार दिया। जानकारी के अनुसार बुजी टॉप इलाके में बंदूकधारियों ने यात्रियों के पहचान पत्र की जांच भी की थी। हालांकि, इन यात्रियों में से दो यात्री भागने में कामयाब रहे और पास के चेक पोस्ट पर पहुंच गए।
    फिलहाल, इन दोनों यात्रियों को उपचार के लिए ओरमारा अस्पताल भेज दिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी है। अभी तक हत्या और यात्रियों की पहचान पता करने के पीछे हमलावरों का क्या मकसद था, इसका पता नहीं चल पाया है। 
    ऐसी ही एक घटना बलूचिस्तान के मास्टुंग इलाके में 2015 में हुई थी। तब कराची में ट्रेन के दो डब्बों में सवार लगभग दो दर्जन यात्रियों ने सेना कर्मियों का अपहरण कर उनमें से 19 लोगों को मार दिया। पिछले हफ्ते, क्वेटा में हजारा समुदाय को निशाना बनाने वाले एक आतंकवादी हमले में कम से कम 20 लोग मारे गए थे। (एजेंसी)

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