अंतरराष्ट्रीय

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06-May-2021 9:27 PM 24

बीजिंग, 6 मई | बाइडेन सरकार ने 5 मई को कोविड-19 टीकों के लिए बौद्धिक संपदा पेटेंट को छोड़ देने का फैसला किया। अमेरिकी व्यापार सचिव कैथरीन ताई ने उसी दिन एक वक्तव्य में इस फैसले की घोषणा की। इससे पहले, अमेरिकी दवा निर्माताओं ने इस मामले में आंतरिक बहस और जोरदार विरोध किया है। लेकिन कैथरीन ताई ने कहा कि सुरक्षित और प्रभावी टीकों को जल्द से जल्द लोकप्रिय बनाने के लिए और जल्द ही महामारी को समाप्त करने के लिए अमेरिकी सरकार ने यह फैसला किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार निजी क्षेत्र और सभी संभावित भागीदारों के साथ सहयोग को मजबूत करेगी, टीकों के निर्माण और बिक्री का विस्तार करेगी, और टीकों के लिए आवश्यक कच्चे माल का उत्पादन करने का प्रयास करेगी।

व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ रॉन क्लैन ने 2 मई को कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार वैश्विक कोविड-19 वैक्सीन की कमी का एक कारण है, और विनिर्माण एक और बड़ी समस्या है। आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस और अधिक संबंधित सूचना प्रकाशित करेगा।

(साभार : चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)(आईएएनएस)


06-May-2021 7:44 PM 35

नई दिल्ली. कोविड रोधी रूस की वैक्सीन स्पूतनिक V का नया वर्जन लॉन्च किया गया है. स्पूतनिक लाइट नाम की इस वैक्सीन के 80 प्रतिशत तक प्रभावी होने का दावा किया गया है. इस वैक्सीन की सिर्फ एक डोज ही कोविड-19 से सुरक्षा देने में सक्षम बताई जा रही है. इस वैक्सीन की फंडिंग करने वाले रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ), ने एक बयान में कहा कि दो-शॉट वाली स्पूतनिक वी वैक्सीन की तुलना में सिंगल डोज वाली स्पूतनिक लाइट ज्यादा प्रभावी है. स्पूतनिक V 91.6 प्रतिशत तक प्रभावी है जबकि स्पूतनिक लाइट 79.4 प्रतिशत तक प्रभावी है.

परिणाम में कहा गया है कि, 5 दिसंबर 2020 से 15 अप्रैल 2021 के बीच रूस में चले व्यापक टीकाकरण अभियान में ये वैक्सीन दी गई जिसके 28 दिन बाद इसका डाटा लिया गया था. बता दें 60 देशों में रूस की वैक्सीन को इस्तेमाल करने की मंजूरी दी जा चुकी है. लेकिन यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) और यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने इसे अभी तक मंजूरी नहीं दी है.

पिछले साल रूस ने पंजीकृत कराई थी पहली वैक्सीन
कुछ पश्चिमी देशों ने भी स्पूतनिक वैक्सीन को लेकर सावधान भी किया है. सोवियत युग के एक उपग्रह के नाम पर बनी इस वैक्सीन को लेकर ऐसा कहा जा रहा है कि रूस इसे अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने के लिए एक नरम-शक्ति उपकरण के रूप में उपयोग कर सकता है.

रूस ने बड़े पैमाने पर क्लिनिकल परीक्षणों से पहले अगस्त में जैब पंजीकृत किया था, लेकिन प्रमुख चिकित्सा पत्रिका द लैंसेट ने कहा है कि यह सुरक्षित है और इसकी दो खुराकें 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी हैं.

एक बयान में कहा गया है कि स्पूतनिक V वैक्सीन विकसित करने वाले राज्य में संचालित गामलेया शोध संस्थान और आरडीआईएफ ने फरवरी में रूस, यूएई और घाना सहित कई देशों में स्पूतनिक के तीसरे चरण के ट्रायल शुरू किए थे, जिसमें 7,000 लोग शामिल हुए थे. इसके अंतरिम नतीजे इस साल के अंत तक आ सकते हैं.

इसका कहना है कि दुनिया भर में अब तक दो करोड़ से ज्यादा लोग स्पूतनिक V की पहली खुराक ले चुके हैं. (news18.com)


06-May-2021 7:05 PM 18

हांग कांग में लोकतंत्र के समर्थकों पर हमले की जांच-पड़ताल करने के लिए दंडित एक पत्रकार को मानवाधिकारों पर पत्रकारिता का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया गया है. बाओ चॉय हांग कांग के सरकारी मीडिया के लिए काम करती थीं.

 (dw.com)

हांग कांग के सरकारी मीडिया संगठन आरटीएचके के लिए काम करने वाली बाओ चॉय को पिछले महीने नंबर प्लेटों के मालिकों के रिकॉर्ड हासिल करने के लिए "जान-बूझ कर झूठा बयान देने" का दोषी पाया गया था. कई मीडिया समूहों ने इस फैसले को जनहित की पत्रकारिता पर एक हमला बताया था. अब चॉय और उनके पांच सहकर्मियों को सालाना मानवाधिकार प्रेस पुरस्कारों में चीनी भाषा डॉक्यूमेंटरी पुरस्कार से नवाजा गया है. ये पुरस्कार 25 सालों से एशिया में मानवाधिकारों पर पत्रकारिता को सम्मान दे रहे हैं.

चॉय की टीम की डॉक्यूमेंटरी का शीर्षक था "हू ओंस द ट्रूथ? (किसका सच?)" इसमें जुलाई 2019 को यूएन लॉन्ग जिले में लोकतंत्र के समर्थकों पर कुछ लोगों द्वारा डंडों से किए गए हमले और समय रहते कदम उठाने में पुलिस की असफलता की छानबीन की गई थी. जजों ने 23 मिनट की इस डॉक्यूमेंटरी की "छोटे से छोटे सुराग का पीछा करने और बिना डरे शक्तिशाली लोगों से सवाल पूछने" के लिए सराहना की. उन्होंने उसे "खोजी पत्रकारिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया."

जुलाई 2019 की उस घटना को उस साल लोकतंत्र के पक्ष में हुए विरोध प्रदर्शनों में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है, जिसके बाद शहर की पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व में जनता का विश्वास और गिर गया था. आरटीएचके ने गवाहों और सिक्योरिटी कैमरों से ली हुई वीडियो फुटेज का इस्तेमाल कर घटनाक्रम का ब्योरा तैयार किया था. टीम ने नंबर प्लेटों के मालिकों की भी जानकारी हासिल की थी और लोगों का साक्षात्कार भी किया था.

खोजी पत्रकारिता की मिसाल

रिपोर्ट में हमलावरों के बारे में नई जानकारी सामने आई. सामने आया कि उनमें से कुछ के राजनीतिक रूप से प्रभाव वाली उन ग्रामीण समितियों से संबंध हैं जो चीन का समर्थन करती हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उस शाम हाथों में डंडे लिए लोग उस जिले में हमले से घंटों पहले विशेष गाड़ियों में आने शुरू हो गए थे लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई कार्रवाही नहीं की.

पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है और आला अफसरों ने उस मुठभेड़ को दो विपक्षी दलों के बीच हुए झगड़े के रूप में लोगों के सामने पेश करने की कोशिश की है. हांग कांग में नंबर प्लेटों की जानकारी काफी समय से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और पत्रकार भी इसका इस्तेमाल करते आए हैं. ऐसा चीन का पक्ष लेने वाले मीडिया संगठन भी करते आए हैं. लेकिन बाद में नियम बदल दिए गए और पत्रकारों को नंबर प्लेटों की जानकारी ढूंढने से प्रतिबंधित कर दिया गया.

37 वर्ष की चॉय को यह करने के लिए छह महीने जेल की सजा मिल सकती थी लेकिन अंत में उन पर 6,000 हांग कांग डॉलर (770 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाया गया. वो इस फैसले के खिलाफ अपील करना चाहती हैं. चीन ने हांग कांग की आलोचनात्मक मीडिया को काबू में करने की अपनी इच्छा को कभी छुपाया नहीं है और इस क्रम में आरटीएचके अक्सर सरकार का निशाना बन जाता है.

सरकार ने संगठन को पुनर्व्यवस्थित करने के आदेश दिए हैं और हाल ही में एक पुराने नौकरशाह को उसके नए मुखिया के रूप में नियुक्त भी किया गया है. तब से उन्होंने कई कार्यक्रमों को "एकतरफा नजरिए" और "गलतियों" के लिए हटा दिया है. नवंबर में चॉय की गिरफ्तारी के बाद चैनल ने उन्हें निलंबित कर दिया था और उनकी कानूनी लड़ाई में भी कोई योगदान नहीं दिया.

इसके अलावा चैनल ने घोषणा भी की कि उसने पत्रकारिता पुरस्कारों में भेजे गए सभी आवेदनों को वापस ले लिए है, लेकिन एचआरपीए जैसे कई पुरस्कार संगठनों ने इस वापसी को मानने से इनकार कर दिया था. इसी सप्ताह चैनल ने पत्रकार सम्मेलनों में अधिकारियों से आक्रामक सवाल पूछने के लिए मशहूर हो चुकी रिपोर्टर नबेला कौसर को नौकरी से निकाल दिया था.

जोशुआ वोंग की सजा बढ़ाई गई

जेल में सजा काट रहे लोकतंत्र के समर्थक जोशुआ वोंग की सजा को और 10 महीने बढ़ा दिया है. वोंग ने मान लिया था कि उन्होंने पिछले साल तियानमेन चौराहे की घटना की याद में आयोजित एक "गैर कानूनी" प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. (dw.com)

सीके/एए (एएफपी)


06-May-2021 7:02 PM 23

गहने बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी पैंडोरा ने कहा है कि वह अब खदान से निकाले गए हीरों का इस्तेमाल नहीं करेगी. कंपनी ने कहा है कि अपने गहनों के लिए वह सिर्फ मानवनिर्मित हीरों का प्रयोग करेगी.

 (dw.com)

ब्रेसलेट्स के लिए मशहूर डेनमार्क की कंपनी पैंडोरा पहले ही बहुत कम गहनों के लिए कुदरती हीरों का इस्तेमाल करती है. सालाना यह करीब साढ़े आठ करोड़ गहने बेचती है जिनमें कुदरती हीरों का इस्तेमाल लगभग 50 हजार गहनों में ही होता है.

इसी सप्ताह जारी एक बयान में पैंडोरा ने बताया कि जल्दी ही ब्रिटेन में कंपनी पहली ऐसी कलेक्शन पेश करेगी जिसमें प्रयोगशाला में बने हीरों का इस्तेमाल हुआ है. 2022 तक कंपनी का लक्ष्य बाकी बाजारों में भी 'पैंडोरा ब्रिलियंस' नामक इस पहल को पेश करना है.

कंपनी के प्रमुख ऐलेग्जेंडर लासिक कहते हैं, "ये हीरे सदा के लिए भी हैं और सबके लिए भी. यह (नई कलेक्शन) कुछ नया करने का प्रतीक तो है ही, यह खूबसूरती को सहेजने का भी प्रतीक है. और हमारे महत्वाकांक्षी सस्टेनेबल एजेंडे को भी आगे बढ़ाती है."

लोकप्रिय हो रहे हैं हाथ से बने हीरे

प्रयोगशाला में बने हीरों की पहुंच युवाओं के बीच बढ़ रही है. ये सस्ते होते हैं और खदानों से नहीं निकाले होने की गारंटी के साथ आते हैं. पिछले दो साल में तो इनकी कीमतों में और भी कमी देखी गई है. ऐसा डि बेयर्स कंपनी के अपनी नीति बदलने के कारण हुआ था. बेन ऐंड कंपनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब सिंथेटिक हीरों की कीमत खदान से निकाले गए हीरों से दस गुना कम हो चुकी है.

पैंडोरा को उम्मीद है कि लैब में बनाए गए हीरे कुदरती हीरों के बाजार को पछाड़ देंगे और इनकी मांग में इसी तरह बढ़त होती रहेगी.

लैब में कैसे बनते हैं हीरे

ये हीरे एक विशेष तकनीक के इस्तेमाल से बनाए जाते हैं. इसमें हाइड्रोकार्बन गैस के मिश्रण को 800 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है. इससे कार्बन के ऐटम टूट कर परत दर परत हीरे के आकार के खोल में जमा होते जाते हैं और क्रिस्टल में बदल जाते हैं.

पैंडोरा अब तक हीरे केजीके डायमंड्स से खरीदती थी. कंपनी का कहना है कि अब वह यूरोप और अमेरिका के सप्लायर्स से लैब में बनाए हीरे लेगी और जो कुदरती हीरे उसके पास पहले से हैं, उन्हें बेच दिया जाएगा.

कुदरती हीरों के विरोधी कहते हैं कि हीरा खदानें जलवायु के लिए नुकसानदायक हैं और कथित खूनी-हीरों से धन विवादग्रस्त इलाकों में में जाता है. हालांकि 2003 में किंबरली प्रोसेस के नाम से एक संस्था बनाई गई थी जिसका मकसद खूनी विवादों में हीरों से मिले धन का इस्तेमाल बंद करना था लेकिन जानकारों का कहना है कि इन चमकदार पत्थरों की तस्करी अब भी जारी है. वैसे कई बड़ी कंपनियां हीरों पर अपनी मुहर लगाती हैं ताकि उनका गलत इस्तेमाल ना हो पाए. इन्हें 'नैतिक हीरे' कहा जाता है. न्यूयॉर्क स्थित टिफनी ऐंड कंपनी ने पिछले साल से अपने ग्राहकों को हर हीरे की पूरी यात्रा बताना शुरू किया जिसके जरिए वे खदान तक की उसकी यात्रा को जान सकते हैं.

पैंडोरा को तो अपने हीरों को लिए ऐसे किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि उसके लैब में बने हीरों के लिए 60 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल होगा जिसे अगले साल तक सौ फीसदी करने का लक्ष्य है. (dw.com)

वीके/आईबी (रॉयटर्स)


06-May-2021 6:33 PM 17

अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन के कोरोना वैक्सीन के लिए पेटेंट में छूट देने का फैसला दवा कंपनियों को रास नहीं आ रहा है. भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विकासशील देशों में कोविड-19 की खतरनाक स्थिति की कारण प्रस्ताव दिया है कि इन देशों में वैक्सीन के लिए बहुत ज्यादा जरूरत है. इसलिए अमेरिका विश्व व्यापार संगठन में उनका समर्थन कर वैक्सीन तक पहुंच बनाने में उनकी मदद करे.

पेटेंट को समर्थन भी

अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाइन ने बाइडन प्रशासन की ओर से ऐलान करते हुए कहा कि यह वैश्विक आपदा के हालात में ‘असामान्य कदम उठाने की जरूरत’ है. वहीं डब्ल्यूटीओ के अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा संरक्षण नियमों में बदलाव के लिए सर्वसम्मति की जरूरत होगी, जिसमें काफी समय लग जाएगा. टाई ने यह भी कहा कि अमेरिका बैद्धिक संपदा संरक्षण का मजबूत समर्थक है.

दवा कंपनियों की दलील
इस मामले में दवा कंपनियां सहमत नहीं हैं बल्कि वे इसके नुकसान को भी रेखांकित कर रही हैं. न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक फार्मास्यूटिकल्स रिसर्च एंड मैन्यूफैक्चरर्स ऑफ अमेरिका के मुख्य कार्यकारी और अध्यक्ष स्टीफन जे यूबल कहते हैं इससे महामारी से लड़ने के प्रयासों को नुकसान होगा. इस फैसले से सार्वजनिक और निजी साझेदारों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी.

और ये बड़ी आशंका भी

यूबल का कहना है कि इससे पहले से ही बहुत दबाव में काम कर रही सप्लाई चेन कमजोर हो जाएंगी. इसके अलाव इससे नकली वैक्सीन के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा. यूबल ने यह भी कहा कि इसका एक खतरनाक असर यह भी होगा कि अमेरिकी खोजें उन देशों में पहुंच जाएंगी जो अमेरिका की बायोमेडिकल खोज को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं.

फिर कौन बनाएगा वैक्सीन

दवा उद्योग की दलील है कि पेटेंट संरक्षण में छूट से जोखिम लेने और नवाचारको बहुत नुकसान होगा एलैर्जन के पूर्व मुख्य कार्यकारी ब्रेन्ट सॉन्डर्स ने अपने ट्वीट में सवाल किया है कि ऐसे में वैक्सीन कौन बनाएगा. दूसरी ओर इस छूट की मांग कर रहे वैश्विक स्वास्थय कार्यकर्ताओं ने बाइडन प्रशासन के इस फैसला की सराहना की है.इनिशिएटिव फॉर मेडिसिन्स, एक्सेस एंड नॉलेज की कार्यकारी निदेशक प्रीति क्रिस्थेल का कहना है कि बाइजन ने दर्शाया है कि वे अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लीडर हैं.

लेकिन ये समस्याएं भी तो हैं

दवा उद्योग का कहना है कि पेटेंट में छूट वैक्सीन उत्पादन में तेजी नहीं लाएगा. उसका कहना है कि इसमें और भी बहुत सी बाधाएं हैं जिसमें कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर वितरण प्रमुख हैं. फाइजर का कहना है कि कंपनी को वैक्सीन के लिए 19 देशों के 86 सप्लायर्स से 280 चीजों की जरूरत होती है. इसके साथ ही विशेष कर्मचारी और उपकरण अलग से लगते हैं.

कितना मददगार होगा कदम?

बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष डॉ मिशेल मैकमरी का कहना है कि यह देशों को बिना जरूरी सामग्री के रेसिपी बुक को देने की तरह होगा. इससे वैक्सीन का इंतजार कर रहे लोगों को मदद नहीं मिलेगी. बाइडन प्रशासन के समर्थन वाले बयान से बायोएटेक मोडर्नना और नोवावैक्स जैसी कंपनियों के शेयर मार्केट में भाव गिर गए हैं. (news18.com)

कोरोना वैक्सीन में देरी वायरस को नए वेरिएंट बनाने का दे सकती है मौका

मोडर्ना ने पिछले साल अक्टूबर में ही घोषणा की थी वह महामारी से लड़ने  के लिए वैक्सीन बनाने वालों पर पेटेंट लागू करने पर जोर नहीं देगी. लेकिन बाइडन प्रशासन के फैसले के आलोचकों का यह भी कहना है कि यह कदम दवा कंपनियों को हतोत्साहित ही करेगा.


06-May-2021 3:38 PM 20

कोलंबो, 6 मई | श्रीलंका के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने गुरुवार को भारतीय कोविड -19 संस्करण के प्रसार को रोकने के प्रयास में सभी भारतीय यात्रियों को तत्काल प्रभाव से देश में प्रवेश करने से रोकने के अपने फैसले की घोषणा की। डेली मिरर अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सीएएएसएल के अतिरिक्त महानिदेशक पी ए जयकांता ने कहा कि प्रतिबंधों को तब तक लागू किया जाएगा, जब तक कि अगले मूल्यांकन तक स्वास्थ्य मंत्रालय सूचना नहीं देता।

उन्होंने कहा कि सीएएएसएल ने सभी एयरलाइंस को भारतीय यात्रियों को रोकने के लिए निर्देशित किया है।

यह घोषणा तब हुई जब भारत महामारी की दूसरी घातक लहर से लड़ने के लिए संघर्ष कर रहा है।

15 दिन हो गए हैं, जबकि भारत में प्रतिदिन तीन लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि लगातार नौ दिनों से 3,000 से अधिक मौतें रोजाना दर्ज की जा रही हैं।  (आईएएनएस)
 


06-May-2021 3:24 PM 34

 

नई दिल्ली. बिल गेट्स द्वारा बनाई गई होल्डिंग कंपनी कैस्केड इनवेस्टमेंट ने मेक्सिको की दो सबसे बड़ी कंपनियों में अपने स्टॉक ट्रांसफर किए हैं, जो कि मेलिंडा फ्रेंच गेट्स को मिलेंगे. इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों में मेलिंडा गेट्स ने कुल मिलाकर दो अरब डॉलर से अधिक की रकम हासिल की है.

रेगुलेटरी द्वारा 3 मई की फाइलिंग के मुताबिक, कैस्केड ने अपने स्टॉक मेलिंडा के नियंत्रण वाली कोका-कोला फेमसा और ग्रुपो टेलेविसा में ट्रांसफर किए. तीन मई वहीं तारीख है जिस दिन अरबपति समाजसेवी बिल और मेलिंडा गेट्स ने तलाक की घोषणा करते हुए अपनी 27 साल की शादी को तोड़ने का फैसला किया था.

उन्होंने तलाक का ऐलान करते हुए कहा था कि हमारा अब यही मानना है, ‘अब हम एक दंपति के रूप में साथ नहीं रह सकते है, लेकिन अपनी संस्था में हम साथ काम करते रहेंगे.’ ट्विटर पर एक संयुक्त बयान में दोनों ने कहा, ‘काफी सोच विचार करने और अपने संबंधों पर काम करने के बाद हमने अपनी शादी को खत्म करने का फैसला किया है.’ शादी खत्म करने के फैसले के बाद दोनों में करीब 145 बिलियन डॉलर की संपत्ति का बंटवारा भी होगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

मंगलवार को ब्लूमबर्ग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस हफ्ते कैस्केड इनवेस्टमेंट ने फ्रेंच गेट्स को करीब 1.8 अरब डॉलर के शेयर कनेडियन नेशनल रेलवे कंपनी और ऑटोनेशन इंक में ट्रांसफर किए हैं. कैस्केड के पास फिलहाल $50 बिलियन से अधिक मूल्य की सिक्योरिटीज, जिसमें रिपब्लिक सर्विसेज इंक, डीरे एंड कंपनी और इकोलैब इंक शामिल हैं. अलग होने का ऐलान करते हुए गेट्स दंपति ने कहा कि वे दोनों बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में काम करते रहेंगे.

सिएटल स्थित संस्था बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की कुल संपत्ति 2019 में 43.3 अरब डॉलर थी. माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल (65) और मेलिंडा (56) की मुलाकात कंपनी में ही हुई थी. मेलिंडा 1987 में माइक्रोसॉफ्ट में एक प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम करती थीं तभी दोनों की मुलाकात हुई थी. कुछ साल तक प्रेम संबंधों में रहने के बाद दोनों ने 1994 में हवाई में विवाह कर लिया था. दंपति के तीन बच्चे हैं.

न्यासी बने रहेंगे गेट्स दंपति

संस्था ने एक बयान में कहा कि दोनों इसके सह-अध्यक्ष और न्यासी बने रहेंगे और संगठन में बदलाव की कोई संभावना नहीं है. बयान के अनुसार, 'संस्था की रणनीति को आकार देने तथा उसकी स्वीकृति के लिए, संस्था के मुद्दों की हिमायत करने और संस्था के संपूर्ण मार्गदर्शन के लिए दोनों साथ काम करते रहेंगे.’

बिल गेट्स पूर्व में दुनिया के सबसे अमीर शख्स रह चुके हैं और उनकी संपत्ति 100 अरब डॉलर से भी अधिक होने का अनुमान है. उन्होंने एक बयान में कहा, 'हमने तीन प्यारे बच्चों की परवरिश की और एक संस्था बनायी जो दुनिया भर में लोगों को स्वस्थ एवं बेहतर जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए काम करती है.' (news18.com)


06-May-2021 3:17 PM 19

कोरोना वायरस महामारी का दुनिया भर में कारोबार और उद्योग पर जबरदस्त असर पड़ा है. सबसे बुरी तरह प्रभावित होनेवालों में रेस्टोरेंट सेक्टर रहा है, जो अभी भी पिछले साल की मार से उबर नहीं पाया है. हालांकि, ऐसे खराब समय में इस सेक्टर ने नुकसान उठाने के बावजूद महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों की मदद करने में शानदार भूमिका निभाई है. दिल को छू लेनेवाली एक ऐसी ही खबर ने इंटनरेट पर जगह बनाई है. ये खबर है लंदन में भारतीय मूल के रेस्टोरेंट चलानेवाले के बारे में, जिन्होंने हाल ही में लॉकडाउन के दौरान अपना कारोबार बंद करने से इंकार कर दिया.

रेस्टोरेंट चलानेवाले भारतीय मूल के शख्स की कहानी चर्चा में
पंजाबी रेस्टोरेंट चलानेवाले अमृत मान लोकप्रिय कोवेंट गार्डेन रेस्टोरेंट की चौथी पीढ़ी के कारोबारी हैं. उन्होंने भोजन उपलब्ध कराने और लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों की मदद करने का फैसला किया. रेस्टोरेंट की विशेषता उत्तर भारतीय व्यंजनों को लेकर है और गुरबचन सिंह मान ने उसकी स्थापना की थी.

सामान्य तौर पर रेस्टोरेंट को चालू रखने के बजाए वर्तमान पीढ़ी के मालिक अमृत मान ने जरूरतमंदों तक खाना उपलब्ध कराने और फूड बैंक को पहुंचाने का फैसला किया. उन्होंने कहा, "मैंने सोच समझकर रेस्टोरेंट को बंद नहीं करने का फैसला किया. हमारे लिए कोवेन्ट गार्डन एक गांव है, एक समुदाय है. मैंने किचन बंद करने से इंकार कर दिया. इसका कोई मतलब नहीं होता है. ये आपको उम्मीद देता है."

लॉकडाउन में मदद करने के लिए नहीं बंद किया रेस्टोरेंट
इस तरह, अमृत मान अपने पारिवारिक घर से बाहर आए ये सुनिश्चित करने के लिए कि उनका परिवार महामारी के दौरान सुरक्षित रह सके और ताकि वो समाज के प्रति अपनी सेवा अदा कर सकें. 40 में से 7 सदस्य मान के मिशन में मदद करने के लिए उनके साथ रेस्टोरेंट में ठहरे. उन्होंने वर्तमान में 100,000 भोजन बेसहारा लोगों और करीब 50,000 फूड बैंक तक उपलब्ध कराया है. (abplive.com)


06-May-2021 3:14 PM 30

 

संयुक्त राष्ट्र. भारत में कोविड-19 की ‘भयानक’ स्थिति ‘हम सभी के लिए’ चेतावनी होनी चाहिए और इसकी प्रतिध्वनि वायरस संबंधी मौतों, वायरस में बदलाव और आपूर्ति में देरी के संदर्भ में क्षेत्र और विश्व में तबतक सुनाई देगी जबतक दुनिया इस देश की मदद के लिए कदम नहीं उठाएगी. संयुक्त राष्ट्र बाल एजेंसी के प्रमुख ने यह बात कही.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) ने भारत को 20 लाख फेसशील्ड और दो लाख मास्क सहित अहम जीवनरक्षक सामान की अतिरिक्त की आपूर्ति की है. एजेंसी की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा फोर ने मंगलवार केा कहा, ‘भारत की भयानक स्थिति ने हम सभी के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है.’ उन्होंने कहा, ‘जबतक दुनिया भारत की मदद के लिए कदम नहीं उठाती, तबतक वायरस संबंधी मौतों, वायरस में बदलाव और आपूर्ति में देरी सबंधी प्रतिध्वनि क्षेत्र एवं पूरी दुनिया में सुनाई देगी.’

भारत में कोरोना के एक दिन में रिकॉर्ड 4,12,262 नए मामले
इस बीच, भारत में कोरोना वायरस के मामले हर दिन एक नया रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं और बृहस्पतिवार को संक्रमण के 4,12,262 नए मामले दर्ज किए गए तथा 3,980 लोगों ने जान गंवाई. इसके साथ ही संक्रमण के कुल मामले 2,10,77,410 हो गए और मृतकों की संख्या 2,30,168 पर पहुंच गई.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 35,66,398 है जो संक्रमण के कुल मामलों का 16.92 प्रतिशत है. कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले लोगों की राष्ट्रीय दर गिरकर 81.99 प्रतिशत हो गई है. आंकड़ों के मुताबिक, इस बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 1,72,80,844 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.09 प्रतिशत है. (news18.com)


06-May-2021 3:11 PM 22

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कोरोना वैक्सीन के लिए बौद्धिक संपदा संरक्षण कानून में छूट देने का फैसला है. बाइडन प्रशासन ने यह कदम दुनिया में चल रहे उन प्रयासों के मद्देनजर किया जिनमें विकासशील देशों में कोविड-19 की खतरनाक स्थिति की कारण मांग की जा रही थी कि अमेरिका विश्व व्यापार संगठन में उनका समर्थन कर वैक्सीन तक पहुंच बनाने में उनकी मदद करे. लेकिन इस प्रस्ताव को मानना बाइडन के लिए आसान नहीं था.

क्या जरूरी है अमेरिका का समर्थन

अमेरिका की विश्व व्यापार संगठन में मजबूत और प्रभावी पकड़ है. ऐसे में साफ था का बौद्धिक संपदा संरक्षण कानून यानि पेटेंट कानून में छूट के लिए बाइडन प्रशासन की मंजूरी बहुत जरूरी थी. बाइडन प्रशासन के लिए यह आसान इसलिए नहीं था क्योंकि अमेरिका खुद हमेशा से बैद्धिक संपदा कानून का पैरोकार रहा है और ऐसे में उसे दवा कंपनियों की नाराजगी भी झेलने का खतरा था. लेकिन बाइडन को भारत और दक्षिण अफ्रीका के इस प्रस्ताव का समर्थन देने के लिए झुकना ही पड़ा.

क्या होगा इस प्रस्ताव से
इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि दुनिया में फैली कोरोना महामारी के प्रकोप के चले बैद्धिक संपदा संरक्षण के कुछ नियमों में ढील दी जाए, जिससे सभी को वैक्सीन के निर्माण की जानकारी तक पहुंच हासिल हो सके जो इन नियमों से फिलहाल संभव नहीं है. इस छूट से विकासशील देशों में तेजी से वैक्सीन का निर्माण हो सकेगा और जरूरतमंदों को सही समय पर मदद मिल सकेगी.
सहमत होना पड़ा बाइडन को

भारत और दक्षिण अमेरिका में महामारी का भयंकर रूप देखने को मिल रहा है. ऐसे में इस प्रस्ताव के समर्थन में बहुत से डेमोक्रेट कांग्रेस सदस्य सामने आए हैं. ऐसे में बाइडन को यह फैसला लेना ही पड़ा और बुधवार को अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाइन को बाइडन प्रशासन की ओर से यह घोषणा करनी ही पड़ी. उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह वैश्विक आपदा है और असामान्य हालातों में असामान्य कदम उठाने की जरूरत है.

तो क्या अब पास हो जाएगा प्रस्ताव

टाइ ने इस बयान में यह भी कहा है कि अमेरिका बैद्धिक संपदा संरक्षण में बहुत ज्यादा विश्वास करता है लेकिन इस महामारी को खत्म करने के ले वह कोविड वैक्सीन के संरक्षण में छूट देने का समर्थन करता है. न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस का समर्थन इस बात की गारंटी नहीं होगा कि छूट मिल ही जाएगी. इसके रास्ते में यूरोपियन यूनियन की बाधा का भी सामना करना होगा.

समय लग सकता है

अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा संरक्षण नियमों में बदलाव के लिए सर्वसम्मति की जरूरत होगी. टाई का कहना है कि अमेरिका विश्व व्यापार संगठन में इस मुद्दे पर होने वाली बातचीत में भाग लेगा, लेकिन इस मुद्दे पर आम सहमित की जरूरत होने के कारण इसमें काफी समय लग जाएगा. वहीं इस मामले में दवा कंपनियों ने नाराजगी जाहिर की है. फार्मास्यूटिकल्स रिसर्च एंड मैन्यूफैक्चरर्स ऑफ अमेरिका के मुख्य कार्यकारी और अध्यक्ष स्टीफन जे यूबल का कहना है कि इससे महामारी से लड़ने के  प्रयासों को धक्का लगेगा.

वैक्सीन लगवाने से क्यों झिझक रहे हैं लोग- अमेरिकी विश्लेषण ने बताया

रिपोर्ट के मुताबिक बाइडन प्रशासन की घोषणा केवल एक कदम भर है जबकि प्रस्ताव पास करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है, उसका ऐसा प्रारूप बनाना होगा जिस पर सभी सहमत हों और उसके बाद क्या और कैसे होगा इस पर भी काफी काम करना होगा. वहीं बहुत से लोगों का यह भी कहना है कि छूट दुनिया में वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ा देगी इसकी गारंटी नहीं हैं. (news18.com)

 


06-May-2021 3:09 PM 16

फ्रांस में सार्वजनिक जगहों पर 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के हिजाब पहनने पर रोक लगाने को लेकर सीनेटरों के एक प्रस्ताव का विरोध हो रहा है. सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा हैशटैग जमकर वायरल हो रहा है.

   (dw.com)

16 साल की मरियम चौरक अपने आपको सच्चा मुसलमान मानती हैं और हिजाब पहनने को पैगंबर मोहम्मद के प्रति अपने लगाव की अभिव्यक्ति के तौर पर देखती है. लेकिन फ्रांसीसी सीनेटरों का एक प्रस्ताव जल्द ही उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा करने की आजादी से वंचित कर सकता है.

फ्रांस के 'अलगाववाद विरोधी' बिल में संशोधन का मकसद फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को मजबूत करना है. 'एंटी सेपरेटिज्म' बिल में सार्वजनिक जगहों पर 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के हिजाब पहनने पर रोक लागू करने का प्रावधान है. इस प्रस्ताव का विरोध ना केवल सोशल मीडिया पर हो रहा है बल्कि यह फ्रांस की सीमा को भी पार कर गया है. सोशल मीडिया पर #HandsOffMyHijab इन दिनों जमकर वायरल हो रहा है.

मरियम चौरक कहती हैं, "यह मेरी पहचान का हिस्सा है. मुझे इसे हटाने के लिए मजबूर करना अपमानजनक होगा." वे आगे कहती हैं, "मुझे समझ में नहीं आता वे ऐसा कानून क्यों पारित करना चाहते हैं जिससे भेदभाव होगा." फ्रांस में धार्मिक स्थल और सार्वजनिक रूप से पहने जाने वाले धार्मिक पहनावे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. फ्रांस एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यह मुस्लिम अल्पसंख्यकों का यूरोप में सबसे बड़ा ठिकाना है.

फ्रांस ने 2004 में सरकारी स्कूलों में स्कार्फ पहनने पर रोक लगा दी थी. 2010 में फ्रांस की सरकार ने पार्कों, गलियों, सार्वजनिक परिवहन और प्रशासनिक भवनों में नकाब पहनने पर रोक लगा दी थी. नया संशोधन सभी धर्म से जुड़े प्रतीक चिन्ह पहनने से संबंधित है, हालांकि विरोधियों का कहना है कि यह मुसलमानों को लक्षित करता है. सीनेटर क्रिश्चियन बिल्हाक ने अप्रैल में सांसदों से कहा कि इससे युवाओं की सुरक्षा होगी. उन्होंने ऊपरी सदन में कहा था, "माता-पिता को अपने बच्चों पर हठधर्म नहीं थोपना चाहिए."

फ्रांस की युवा लड़कियां इस प्रस्ताव के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चला रही हैं. उन्हें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, एक अमेरिकी सांसद और हिजाब पहनकर ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली अमेरिकी खिलाड़ी से समर्थन हासिल है. 

25 साल की मेडिकल की छात्रा मोन अल मशलोए कहती हैं, "वे (नेता) हमारा उद्धार करना चाहते हैं, वे हमें इस काल्पनिक उत्पीड़न से बचाना चाहते हैं, लेकिन यही वे हैं जो अत्याचार कर रहे हैं." फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों पहले ही कह चुके हैं कि हिजाब फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष आदर्शों से मेल नहीं खाता है.

एए/सीके (रॉयटर्स)
 


06-May-2021 1:15 PM 24

भारत विश्व व्यापार संगठन में मांग करता रहा है कि कोविड वैक्सीन पर पेटेंट हटाया जाए. अब अमेरिका ने भी भारत की मांग का समर्थन किया है और कहा है पेटेंट अधिकार हटा लेने चाहिए ताकि गरीब देश भी वैक्सीन को अपने यहां बना सकें.

  (dw.com)

 

विश्व व्यापार संगठन में दक्षिण अफ्रीका ने भी भारत की इस लड़ाई में साथ दिया है. बुधवार को अमेरिका ने भारत की इस मांग पर अपना रुख बदला और मांग का समर्थन किया. अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाई ने कहा कि व्यापारों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार जरूरी हैं लेकिन अमेरिका कोविड वैक्सीन पर से वे अधिकार हटाने का समर्थन करता है ताकि महामारी को खत्म किया जा सके.

एक बयान में टाई ने कहा, "यह एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट है और कोविड-19 महामारी के असाधारण हालात में असाधारण कदम उठाने की जरूरत है.” अमीर देशों पर कोविड वैक्सीन की जमाखोरी के आरोपों के बीच अमेरिका पर इस मांग का समर्थन करने का भारी दबाव था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख तेद्रोस अधनोम गेब्रयेसुस ने अमेरिका के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में यह फैसला मील का पत्थर है. टाई ने हालांकि कहा कि इस फैसले में समय लग सकता है क्योंकि विश्व व्यापार संगठन में निर्णय आम सहमति से होते हैं.

दवा कंपनियां असहमत
अमेरिका ने अपने यहां सप्लाई सुरक्षित कर ली है पर अब वह वैक्सीन के निर्माण और वितरण का विस्तार करना चाहता है और इसके लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने पर काम करेगा. विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख न्गोजी ओकोंज-इवेला ने कहा कि यह हमारे वक्त का सबसे बड़ा नैतिक और आर्थिक मुद्दा है. हालांकि दवा निर्माता कंपनियां और उनके देश इस मांग का तीखा विरोध करते रहे हैं. उन्होंने अमेरिका के रुख को निराशाजनक बताया है.

जेनेवा स्थित इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स ऐंड असोसिएशन्स ने कहा, "अधिकार हटाना तो साधारण है लेकिन यह एक जटिल समस्या का गलत हल है.” टाई ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए हाल के हफ्तों में अमेरिकी दवा कंपनियों फाइजर, मॉडर्ना और जॉन्सन ऐंड जॉन्सन के अधिकारियों से मुलाकात की है.

भारत में कहर जारी
इस बीच भारत में महमामारी की विकरालता बढ़ती जा रही है. बुधवार को देश में 3,980 लोगों की कोविड से मौत दर्ज की गई, जो अब तक एक दिन में सबसे बड़ी संख्या है. देश में संक्रमण के चार लाख 12 हजार से ज्यादा नए मामले दर्ज हुए. उधर केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन ने तीसरी लहर की चेतावनी दी है. उन्होंने ने कहा कि इस लहर को हराने के बाद भी 130 करोड़ लोगों के देश को नई लहर के लिए तैयार रहना चाहिए.

उधर भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की लड़खड़ाती स्वास्थ्य व्यवस्था को सहारा देने के लिए वैक्सीन निर्माताओं, अस्पतालों और स्वास्थ्य कंपनियों को 6.7 अरब डॉलर का ऋण सस्ती दरों पर देने का ऐलान किया है.

वीके/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)
 


06-May-2021 1:12 PM 17

लंदन में हो रही ग्रूप-7 की बैठक पर कोविड-19 संक्रमण का हमला हुआ है. बैठक में हिस्सा ले रहे भारत के विदेश मंत्री और उनकी पूरी टीम ने बुधवार को कहा कि वे एकांतवास में जा रहे हैं क्योंकि उनकी टीम के दो लोग पॉजीटिव मिले हैं.

   (dw.com)

ब्रिटेन में जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की तीन दिवसीय बैठक हो रही है. कोरोना वायरस महामारी के चलते दो साल में पहली बार इस तरह की बैठक हो रही है, जहां सातों देशों के विदेश मंत्री आमने-सामने मिले. इसी दौरान भारत इस महामारी के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रहा है और इस बैठक में बतौर मेहमान शामिल हो रहा था. मंगलवार और बुधवार को भारतीय दल को कई बैठकों में हिस्सा लेना था. लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर बताया कि उनके संक्रमण के सीधे संपर्क में आने की आशंका जताई गई है. उन्होंने लिखा, "मुझे कल शाम बताया गया कि मैं संभावित कोविड-पॉजिटिव व्यक्तियों के संपर्क में आया हूं. पूर्ण सावधानी बरतते हुए और बाकियों का ख्याल करते हुए मैंने अपनी सारी बैठकें वर्चुअल मोड में करने का फैसला किया है. यह जी-7 की आज की बैठकों पर भी लागू होगा."

एकांतवास में भारतीय दल

जी-7 की यह बैठक जून में ब्रिटेन में होने वाले सम्मेलन से पहले की तैयारियों के तहत हो रही है. जून में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत दुनिया के कई बड़े नेता उस बैठक का हिस्सा होंगे. ब्रिटिश अधिकारियों ने भारतीय दल के दो सदस्यों के संक्रमित होने की पुष्टि की है और बताया है कि पूरा दल एकांतवास में है. ब्रिटेन के नियमों के मुताबिक एकांतवास दस दिन का होता है.

भारतीय दल के सदस्यों ने अभी तक लैंकेस्टर हाउस में हो रही किसी मुख्य बैठक में हिस्सा नहीं लिया था इसलिए बुधवार को बैठकें जारी रहीं. जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री से पूछा गया कि जी-7 बैठक का आयोजन क्या एक गलती थी, उन्होंने कहा, "यह जरूरी है कि हम सरकार के तौर पर जितना हो सके सामान्य तरीके से ही काम करें."

ब्रिटिश अधिकारियों ने एस जयशंकर के बैठक में न आ पाने पर अफसोस जाहिर किया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "मुझे अफसोस है कि जयशंकर व्यक्तिगत तौर पर बैठक में मौजूद नहीं हो पाएंगे." मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्री ने ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल से मुलाकात की थी. भारत जी-7 का सदस्य नहीं है लेकिन ब्रिटेन ने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण कोरिया के साथ भारत को मेहमान के तौर पर इस बैठक में बुलाया है. अमेरिकी विदेश मंत्री ऐंटनी ब्लिंकन ने कहा कि आमने-सामने मिलने जैसी बात और कहीं नहीं है.

जी-7 में चीन और रूस की आलोचना

जी-7 के विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन और रूस बातचीत के केंद्र में हैं. मंत्रियों ने चीन को मानवाधिकारों और मूलभूत स्वतंत्रताओं का सम्मान करने को कहा है. साझा बयान में कहा है गया है कि जी-7 देश "शिनजियांग और तिब्बत में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं. खासतौर पर उइगुर और अन्य अल्पसंख्यकों समुदायों के लिए." रूस के बारे में समूह ने कहा कि यूक्रेन की सीमा पर सेनाओं का जमावड़ा उसका गैर जिम्मेदाराना और अस्थिर करने वाला व्यवहार है.

वीके/एए (एएफपी, रॉयटर्स)
 


06-May-2021 12:43 PM 31

लाहौर. पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने दूतावास में मौजूद भ्रष्‍टाचार की रिपोर्ट मिलने के बाद अब भारतीय राजनयिक अच्‍छे लगने लगे हैं. इमरान खान का कहना है कि भारतीय दूतावास के कर्मचारी ज्‍यादा सक्रिय और अपने नागरिकों केा बेहतर सेवाएं देने वाले हैं. उन्‍होंने विदेशों में मौजूद पाकिस्‍तानी दूतावासों के कर्मचारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्‍हें विदेश में मौजूद पाकिस्‍तानी नागरिकों को बेहतर सेवा देनी चाहिए.

इमरान खान ने बुधवार को दुनियाभर के देशों में बैठे पाकिस्‍तानी राजदूतों के साथ वर्चुअल बैठक में उनकी जमकर खिंचाई की. पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री ने राजदूतों के उदासीन रवैये और नियमित सेवाओं में अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताई. बैठक के दौराना इमरान खान ने मध्य पूर्व के देशों में मौजूद पाकिस्तानी दूतावासों को नाकारा बताया. इमरान ने कहा, सऊदी अरब से मुझे जो जानकारी मिल रही है उसे जानने के बाद मुझे लगता है कि वहां पर हमारे कर्मचारी काम ही नहीं कर रहे हैं.

इमरान खान ने कहा, कुवैत के नाडरा (नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी) ऑफिस में तैनात कर्मचारी लोगों को गाइड करने के बजाय रिश्वत लेते हैं. उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें शिकायत मिली है कि ऑफिस में तैनात कुछ अधिकारी फर्जी दस्तावेज बनाने में शामिल हैं और मैं ऐसी जानकारी मिलने के बाद से सदमे में हूं. इस दौरान नाराज इमरान खान ने अपने दूतावासों को भारतीय दूतावासों का उदाहरण दिया और कहा कि वे अपने देश में निवेश लाने के लिए ज्यादा सक्रिय हैं और अपने नागरिकों को बेहतर सेवाएं भी उपलब्ध कराते हैं.

क्‍या है पाकिस्‍तान सिटीजन पोर्टल

उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान सिटीजन पोर्टल पर बहुत सारी शिकायतें मिल रही है. ये पोर्टल देश में या विदेश में मौजूद पाकिस्‍तानियों के लिए तैयार किया गया है. इस पोर्टल पर जो भी शिकायत की जाती है उसकी जानकारी प्रधानमंत्री इमरान खान तक पहुंचाई जाती है. (news18.com)


06-May-2021 11:02 AM 26

तेल अवीव, 6 मई | कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में पर्यटन की कमर टूट गई है लेकिन इजरायल से कुछ दूसरी तस्वीर ही नजर आ रही है। इजरायल के केन्द्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से मार्च में इजरायल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगभग 4.5 गुना या 350 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने इजरायल जाने वाले पर्यटकों की संख्या मार्च में 6,700 से बढ़कर 30,200 हो गई और अप्रैल 2020 में केवल 600 रह गई है।

26 जनवरी के बाद आने वाली और बाहर जाने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध के बाद, इजरायल ने मार्च के मध्य में अपने आसमान को फिर से खोल दिया, इसके बाद यह वृद्धि हुई।

हालांकि, 2021 के पहले चार महीनों में, पर्यटकों की संख्या में 26.4 प्रतिशत की कमी आई थी, जो पिछले चार महीनों (सितंबर-दिसंबर 2020) में 63,700 की तुलना में 46,900 थी।

यह भी जनवरी-अप्रैल 2020 में 733,600 की तुलना में लगभग 94 प्रतिशत की कमी है, क्योंकि 27 फरवरी, 2020 को इजरायल में पहले कोरोनोवायरस मामले की खोज की गई थी।(आईएएनएस)


06-May-2021 11:00 AM 27

वॉशिंगटन, 6 मई| जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अनुसार, समग्र वैश्विक कोविड 19 कैसियोलाड ने 154.7 मिलियन का शीर्ष हासिल किया है, जबकि 3.23 मिलियन से अधिक मौते हो चुकी हैं। गुरुवार सुबह अपने नवीनतम अपडेट में, विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) ने खुलासा किया कि वर्तमान वैश्विक कैसलोएड और मृत्यु दर क्रमश 154,763,588 और 3,237,435 है।

सीएसएसई के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक 32,557,299 और 579,265 मौतों के साथ अमेरिका सबसे खराब स्थिति वाला देश है।

संक्रमण के संदर्भ में, भारत 20,665,148 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।

सीएसएसई के आंकड़ों के अनुसार, दो मिलियन से अधिक पुष्टिकारक वायरस मामलों वाले अन्य देश ब्राजील (14,930,183), फ्रांस (5,767,541), तुर्की (4,955,594), रूस (4,792,354), यूके (4,441,642), इटली (4,070,400), स्पेन (3,551,262), जर्मनी (3,471,616), अर्जेंटीना (3,071,496), कोलम्बिया (2,934,611), पोलैंड (2,811,951), ईरान (2,591,609), मेक्सिको (2,356,140) और यूक्रेन (2,146,121) है।

मौतों के मामले में, ब्राजील 414,399 मृत्यु दर के साथ दूसरे स्थान पर है।

50,000 से अधिक की मृत्यु के साथ राष्ट्र भारत (226,188), मेक्सिको (218,004), यूके (127,830), इटली (122,005), रूस (110,022), फ्रांस (105,792), जर्मनी (83,981), स्पेन (78,566) हैं। कोलंबिया (76,015), ईरान (73,568), पोलैंड (68,482), अर्जेंटीना (65,865), पेरू (62,674) और दक्षिण अफ्रीका (54,557)। (आईएएनएस)


06-May-2021 10:59 AM 35

काठमांडू, 6 मई | महामारी की दूसरी लहर के बीच लगातार तीसरे दिन, नेपाल में एक दिन में कोविड 19 मामलों और उससे होने वाली मौतों में उछाल दर्ज किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्वास्थ्य और जनसंख्या मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कुल 58 लोगों की मौत हुई और 8,659 लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हुए।

यह पहली बार था जब देश में दैनिक मामले 8,000 से अधिक आए हैं।

नेपाल ने सोमवार और मंगलवार को 7,000 से अधिक दैनिक मामलों की सूचना दी।

बुधवार के आंकड़ों ने क्रमश कुल केस और मृत्यु दर को बढ़ाकर 359,610 और 3,475 कर दिया है।

हिमालयी देश, जिसमें मार्च के अधिकांश दिनों में 100 से कम दैनिक मामले देखे गए थे, वहां अब अप्रैल के बाद से तेजी से मामलों ने बढ़ना शुरू कर दिया।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता, जागेश्वर गौतम ने बुधवार को एक प्रेस मीट में कहा, "अब, मामलों में तेजी से वृद्धि के कारण, अस्पताल दवाब बढ़ रहा है।"

मंत्रालय के अनुसार पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह मामलों में 127 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

काठमांडू विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर अर्चना श्रेष्ठ ने कहा, "सात प्रांतों में से एक, लुम्बिनी में पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह 384 प्रतिशत केसों की वृद्धि हुई है।"

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सबसे खराब स्थिति में एक ही दिन में 11,000 संक्रमणों का अनुमान लगाया है।

पुनरुत्थान के बीच, 77 जिलों में से 50 में निषेधात्मक आदेश जारी किए गए हैं।(आईएएनएस)


06-May-2021 9:53 AM 27

ओटावा. कनाडा में जल्दी ही 12 से 15 साल के बच्चों को भी कोरोना वायरस का टीका लगने जा रहा है. देश में फाइजर की कोविड वैक्सीन को इस आयु वर्ग के लिए अनुमति मिल गई है. इस बात की जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी है. खास बात है कि 12 साल के बच्चों के लिए वैक्सीन को मंजूरी देने वाला कनाडा दुनिया का पहला देश है. इससे पहले 16 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों को टीका लगाने की अनुमति थी.

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थ कनाडा में मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉक्टर सुप्रिया शर्मा ने इस फैसले कि पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि इसके बाद बच्चों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिलेगी. फिलहाल अमेरिका और यूरोपीय संघ में इसकी समीक्षा की जा रही है. शर्मा ने बताया कि मिले सबूतों से पता चलता है कि इस आयु वर्ग के लिए वैक्सीन सुरक्षित है और प्रभावी है. कनाडा में बच्चों के लिए स्वीकृत यह पहली वैक्सीन है.

अमेरिका भी कर रहा है तैयारी

संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका का फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अगले हफ्ते तक युवाओं के लिए फाइजर को अनुमति दे सकता है. कुछ ही हफ्तों पहले कंपनी ने पाया था कि उनकी वैक्सीन कम उम्र के लोगों पर भी प्रभावी है. मार्च में फाइजर ने 12-15 साल की उम्र के 2260 वॉलिंटियर्स पर हुई स्टडी के शुरुआती नतीजे जारी किए थे.
इसमें बताया गया था कि डमी शॉट प्राप्त करने वाले 18 साल की उम्र के लोगों की तुलना में पूरी तरह वैक्सीन प्राप्त कर चुके इस आयु वर्ग के लोगों में कोविड-19 का कोई मामला नहीं मिला. शर्मा ने कहा कि कनाडा में सभी कोविड-19 में एक पांचवा हिस्सा बच्चों और युवाओं में हुआ है. उन्होंने जानकारी दी है कि इस वर्ग को वैक्सीन लगाना कनाडा के प्लान का अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा है कि ज्यादातर बच्चों को कोविड-19 से गंभीर बीमारी महसूस नहीं हुई है. ऐसे में वैक्सीन उनके दोस्तों और परिवारों की सुरक्षा में भी खासी मदद करेंगी.

बच्चों में भी नजर आए साइड इफेक्टस

एपी के अनुसार, कंपनी ने बताया है कि बच्चों में भी युवाओं की तरह समान साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं. जिसमें बुखार, दर्द, ठंड लगना और थकान शामिल है. हालांकि, लंबे समय की सुरक्षा के लिए स्टडी 2 साल तक जारी रहेगी. हाल ही के कुछ महीनों में कनाडा में टीकाकरण और तेज हुआ है. (news18.com)


06-May-2021 8:49 AM 26

काठमांडू. नेपाल में पुष्पकमल दहल ’प्रचंड’ के नेतृत्व वाली सीपीएन (माओवादी सेंटर) द्वारा बुधवार को सरकार से आधिकारिक रूप से समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत खो दिया. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता गणेश शाह के अनुसार सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले की जानकारी देते हुए पार्टी ने संसद सचिवालय को इस आशय का एक पत्र सौंपा. उन्होंने कहा कि माओवादी सेंटर के मुख्य सचेतक देव गुरुंग ने संसद सचिवालय में अधिकारियों को पत्र सौंपा.

पत्र सौंपने के बाद गुरुंग ने संवाददाताओं को बताया कि पार्टी ने ओली सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया, क्योंकि सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया. उन्होंने कहा कि सरकार की हालिया गतिविधियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा उत्पन्न किया है. समर्थन वापस लेने के बाद ओली सरकार ने प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत खो दिया है.

ओली ने दो दिन पहले ही की थी ये घोषणा

प्रचंड के नेतृत्व वाली पार्टी द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला ऐसे समय आया है जब ओली ने दो दिन पहले घोषणा की थी कि वह 10 मई को संसद में विश्वासमत प्राप्त करेंगे.
माओवादी सेंटर के निचले सदन में कुल 49 सांसद हैं. चूंकि सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के कुल 121 सांसद हैं प्रधानमंत्री ओली के पास 275 सदस्यीय सदन में अपनी सरकार बचाने के लिए 15 सांसद कम हैं.

इस बीच, प्रधानमंत्री ओली बुधवार को मुख्य विपक्षी नेता नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के बूढानीलकंठ स्थित आवास पहुंचे ताकि सरकार बचाने के लिए उनका समर्थन मिल सके.

नेपाली कांग्रेस के करीबी सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने देश के नवीनतम राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की.

सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी में सत्ता के लिए खींचतान के बीच नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी द्वारा सदन भंग करने के चलते नेपाल में गत वर्ष 20 दिसम्बर को राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया था. राष्ट्रपति भंडारी ने प्रधानमंत्री ओली की सिफारिश पर 30 अप्रैल और 10 मई को फिर चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी.

सदन को भंग करने के ओली के कदम का उनके प्रतिद्वंद्वी ’प्रचंड’ के नेतृत्व वाली पार्टी ने काफी विरोध किया.

फरवरी में, शीर्ष अदालत ने प्रतिनिधि सभा को बहाल कर दिया जो प्रधानमंत्री ओली के लिए एक झटका था. (news18.com)


06-May-2021 8:49 AM 22

 

वॉशिंगटन. अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के खिलाफ सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की ओर से लगाया गया निलंबन बरकरार रहेगा. यह निर्णय फेसबुक के स्‍वतंत्र पर्यवेक्षण बोर्ड ने लिया है. बोर्ड ने पाया कि कंपनी उचित जुर्माना लगाने में विफल रही. हालांकि बोर्ड का कहना है कि अगले 6 महीने के अंदर इस केस की फिर समीक्षा की जाएगी.

कंपनी के इस पर्यवेक्षण बोर्ड के फैसले फेसबुक के लिए बाध्‍यकारी होते हैं. इस बोर्ड ने कहा है कि डोनाल्‍ड ट्रंप ने ऐसा वातावरण बनाया था, जिसके कारण हिंसा का गंभीर खतरा उत्‍पन्‍न हो गया था. ऐसा ट्रंप की ओर से 6 जनवरी को यूएस कैपिटॉल में उनके समर्थकों द्वारा हुई हिंसा पर उनके बयान से संबंधित था.

बोर्ड ने अपनी समीक्षा के बाद कहा, 'किए जा रहे उल्‍लंघनों की गंभीरता और हिंसा के चल रहे खतरे को देखते हुए फेसबुक की ओर से 6 जनवरी को डोनाल्‍ड ट्रंप के फेसबुक अकाउंट को सस्‍पेंड करना और 7 जनवरी को उसे आगे के लिए बढ़ा देना उचित कदम रहा.'

पैनल ने यह भी कहा कि फेसबुक के लिए किसी यूजर को अज्ञात समय के लिए प्‍लेटफॉर्म से दूर रखना उचित नहीं है. अगले 6 महीने के अंदर इस पर समीक्षा की जाएगी. बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप पर अपने समर्थकों को भड़काने के आरोप लगे थे. (news18.com)


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