अंतरराष्ट्रीय

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25-Feb-2021 3:07 PM 8

ओक्लाहोमा, 25 फरवरी | अमेरिका के ओक्लाहोमा में एक व्यक्ति ने अपनी पड़ोसी महिला की हत्या कर दी। इतना ही नहीं उसने महिला का दिल काटकर निकाल लिया ताकि वह उसे आलू के साथ पका कर खा सके। ओक्लाहोमा स्टेट ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के एक एजेंट ने जज को बताया कि लॉरेंस पॉल एंडरसन ने ओक्लाहोमा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 40 मील की दूरी पर चिकशा में अपनी पड़ोसी एंड्रिया लिन ब्लैंकेनशिप की उसके ही घर में हत्या कर दी। इसके बाद उसने उसका दिल काटकर निकाल लिया, ताकि उसे आलू के साथ पकाकर अपने परिवार को खिलाकर राक्षसों को बाहर निकाल सके।

एंडरसन पर उसके अंकल लियोन पे और उनकी 4 साल की पोती कैओस येट्स की हत्या का भी आरोप है। उसने अपनी आंटी डेलसी पे को भी चाकू मारा था, लेकिन वह बच गई थीं।

घटनास्थल से अधिकारियों ने जब एंडरसन को पकड़ा, तब वह तकिए पर उलटी कर रहा था। बाद में उसने अधिकारियों को ब्लैंकेनशिप के बारे में बताया। उसे 20 साल की सजा मिल चुकी है, जो कम की गई और वह जनवरी में ही रिहा हुआ था। (आईएएनएस)
 


25-Feb-2021 2:37 PM 13

अक्सर लोग जब झुंझला जाते हैं तो उन्हें अपना गुस्सा निकालने के लिए किसी चीज का सहारा लेना पड़ता है. कभी वे दूसरों पर चिल्लाते हैं या फिर घर के सामान को तोड़ते हैं. ऐसे लोगों के लिए अब बाकायदा एक कमरा खुल गया है.

(dw.com)

ब्राजील के लोगों के पास निराशा और तनाव से बाहर आने के लिए एक अनोखा कमरा मिल गया है. इस कमरे का नाम "रेज रूम" है. लोग इस कमरे में अपना गुस्सा और रोष निकालने के लिए आ सकते हैं. साओ पाउलो के पास इस गोदाम में रखे पुराने टीवी, कंप्यूटर और प्रिंटर पर हथौड़े चलाकर लोग अपनी भड़ास निकाल सकते हैं. मशीनों को तोड़कर और शीशों को चकनाचूर कर वे अपना तनाव कम कर सकते हैं.

42 साल के वांडरलेई रोड्रिग्स ने इस "क्रोध कमरे" को सिडाडे तिरादेंतेस इलाके में खोला है. वे बताते हैं कि उनके पास उचित संख्या में ग्राहक आते हैं, खासकर महामारी के दौरान अपना गुस्सा निकालने के लिए ग्राहक यहां आ रहे हैं. रोड्रिग्स के मुताबिक,"मुझे लगता है कि इसे इस इलाके में खोलने के लिए यह सबसे अच्छा मौका था. क्योंकि लोग बहुत तनाव और चिंता से गुजर रहे हैं."

"रेज रूम" में अगर कोई अपना गुस्सा निकालना चाहता है तो उसे करीब साढ़े चार डॉलर खर्च करने होंगे. कमरे में जाने के पहले व्यक्ति को सुरक्षात्मक सूट और हेलमेट पहनने पड़ते हैं. वे उन मुद्दों को दीवारों पर लिखते हैं जो उन्हें परेशान कर रहे हैं. उदाहरण के लिए "पूर्व प्रेमिका", "पूर्व पति", "भ्रष्टाचार" और "काम", ये शब्द उनके गुस्से का निशाना बनते हैं.

40 साल के एलेक्जेंडर डे कार्वाल्हो विज्ञापन के क्षेत्र में काम करते हैं और काम के लिए हर दिन घर से दो घंटे की ड्राइव करते हैं. वे कहते हैं महामारी के कारण वे स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहते हैं. वे बताते हैं, "यहां आकर अपना गुस्सा और कैद की हुई भावनाओं को बाहर निकाल देना अच्छा लगता है."

दो बेटियों की मां और बेरोजगार लुसियाना होलांडा कहती हैं कि वे अपनी निराशा "रेज रूम" में निकालना पसंद करती हैं. होलांडा कहती हैं, "तनाव से भरा होना, एक मां होने के साथ काम नहीं होना यह कुछ हद तक गुस्सा जाहिर करने का अच्छा तरीका है. मैं अपनी बेटियों या अन्य किसी व्यक्ति पर गुस्सा नहीं निकाल सकती. इसलिए मैं चीजें तोड़ना पसंद करती हूं."

एए/सीके (रॉयटर्स)
 


25-Feb-2021 12:29 PM 18

एक जर्मन अदालत ने अबु वला नाम के व्यक्ति को दस साल जेल की सजा सुनाई है. वला को जर्मनी में इस्लामिक स्टेट का नेता बताया जाता है, जो यहां से लोगों को आईएस के लिए भर्ती करने का काम करता था.

 (dw.com)

सरकारी वकीलों ने वला के लिए 11.5 साल के जेल की सजा मांगी थी, लेकिन अदालत ने उसे 10.5 साल कैद की सजा दी है. वला के अलावा इस्लामिक स्टेट के तीन और सदस्यों को भी सजा सुनाई गई है. अपना फैसला सुनाते हुए अदालत ने माना कि अबु वला आतंकी संगठन का सदस्य है और उसने आतंकवाद फैलाने में संगठन की मदद की है.

अदालत के कहा कि वला ने अपने साथियों के साथ मिल कर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया था जिसके जरिए वे युवा लोगों को आतंकवादी बनने के लिए बढ़ावा देते थे. इनकी ज्यादातर गतिविधियां जर्मनी के लोवर सैक्सनी राज्य के रूर इलाके में होती थीं, यहां वे युवाओं को टारगेट करते, उनका ब्रेनवॉश कर के उन्हें इस्लामिक स्टेट की ट्रेनिंग वाले इलाकों में भेजते. वला के तीन दूसरे साथियों को चार से आठ साल की सजा मिली है.
गुरुद्वारे पर हमले कराने वाला अबु वला कौन है?

37 साल के अबु वला का जन्म इराक में हुआ. 2001 में वह जर्मनी आया और लोवर सैक्सनी के शहर हिल्डेसहाइम की एक मस्जिद में बतौर मौलवी काम करने लगा. धीरे धीरे यह मस्जिद इस्लामी कट्टरपंथियों को आकर्षित करने लगी. 2017 में जर्मन सरकार ने इस मस्जिद को बंद करवा दिया. कट्टरपंथ फैलाने के लिए वला ने कई वीडियो भी बनाए जिनमें उसका चेहरा नहीं दिखता था. इन वीडियो में वह हमेशा कैमरे की ओर पीठ किए दिखता था.
 
मस्जिद पर लंबी जांच के बाद 2016 में वला और चार दूसरे लोगों को गिरफ्तार किया गया. 2017 में मुकदमा शुरू हुआ, जिसका फैसला अब आया है. वला पर इस्लामिक स्टेट का समर्थन करने और आतंकी संगठन का सदस्य होने का आरोप लगा. जांच के दौरान पता चला कि उसने जर्मनी से आठ लोगों को आतंकी बना कर सीरिया और इराक में लड़ने के लिए तैयार किया.

2015 में उसने दो जुड़वा भाइयों को इराक भेजा जहां उन्होंने आत्मघाती हमला किया. इसके अलावा वला को उस युवा को भी आतंकवादी बनाने के लिए जिम्मेदार बताया जाता है, जिसने 2019 में जर्मनी में एक गुरुद्वारे पर हमला किया था. इस गुरुद्वारे पर कुल तीन लोगों ने हमला किया था. इतना ही नहीं, 2016 में बर्लिन के क्रिसमस बाजार में जो आतंकी हमला हुआ था, उसके तार भी वला से जुड़े हैं. इस बाजार में जो व्यक्ति ट्रक ले कर घुसा, वह भी वला के संपर्क में था. इस हमले में 12 लोगों की जान गई थी.
आईबी/एनआर (डीपीए, एएफपी)


24-Feb-2021 10:51 PM 15

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल ग्रह पर पहुंच चुका है. मंगल ग्रह पर इस रोवर से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को बहुत उम्मीदें हैं. पर्सवियरेंस की लैंडिग के समय जो विशाल पैराशूटउपयोग में लाया गया था. उसमें एक सीक्रेट मैसेज भी था. जिसे स्पेस फैंस ने कुछ ही देर में डिकोड भी करके दिखा दिया. इसके साथ ही रोवर के पैराशूट में एक खास जीपीएस लोकेशन भी बनाई गई थी.

किसने लिखा यह संदेश
यह खास पहेली नासा की पर्सिवियरेंस रोवर की टीम के एक सदस्य ने लिखी थी. सिस्टम इंजीनियार इयान क्लार्क ने एक बाइनरी कोड से पैराशूट के नारंगी और सफेद रंग की पट्टियों में तीन शब्दों का संदेश लिखा था. क्लार्क ने इस पैराशूट में पर्सिवियरेंस रोवर के कैलीफोर्निया के पैसाडेना स्थित नासा की जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी के हेडक्वार्टर के जीपीएस कोऑर्डेनेट्स भी लिख दिए थे.

क्या संदेश था वह
क्लार्क क्रॉसवर्ड का शौक रखते हैं और दो साल पहले ऐसा संदेश लिखने का विचार उनके दिमाग में आया था. इंजीनियर एक खास नायलोन फैब्रिक के पैटर्न के जरिए यह जानना चाहते थे कि मंगल पर उतरने के दौरान पैराशूट कैसा रहता है. इसके साथ ही इस पैराशूट के कपड़े पर क्लार्क ने लिखा “डेयर माइटी थिंग्स” यानि शक्तिशाली काम करने का साहस.

केवल छह ही लोग जानते थे इस मैसेज को
क्लार्क ने यह भी बताया कि इस कोडेड मैसेज के बारे में  केवल छह लोग ही जानते थे. उन्होंने तब तक इंतजार किया जब तक कि मंगल से इस पैराशूट की तस्वीरें पृथ्वी तक वापस नहीं आ गईं. इसके  हाद इसे सोमवार को टेलीविजन की न्यूज कॉन्फ्रेंस में जारी किया गया. क्लार्क ने कहा कि स्पेस फैंस को इस संदेश का पता लगाने में कुछ ही घंटे लगे. 


कहां से ली गई यह पंक्ति
क्लार्क का कहना है कि अगली बार उन्हें और भी ज्यादा रचनात्मक होने की जरूरत होगी. डेयर माइटी थिंग्स अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की पंक्ति हैं जो अभी जोपीएल का मंत्रा है और सेंटर की बहुत सी दीवारों पर लिखा हुआ है. क्लार्क के अनुसार उनका इरादा कोडिंग करने का जरूर था लेकिन वे इसे बहुत जाहिर नहीं बनाना चाहते थे.

और भी सरप्राइज हो सकते हैं
पर्सिवियरेंस रोवर के पैराशूट पर जो जीपीएस कोऑर्डिनेट्स अंकित किए गए हैं. वे वास्तव में नासा के जेपीएल विजिटर सेंटर के प्रवेश द्वार से 3 मीटर अंदर के स्थान के हैं. पर्सिवियरेंस रोवर के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर मैट वालेस का कहना है कि एक बार पर्सिवियरेंस की भुजा सक्रिय होकर आसपास की तस्वीरें भेजना शुरू करेगी तो कुछ और ही सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं.

नासा के पर्सिवियरेंस रोवर से वैज्ञानिकों को बहुत उम्मीदें हैं. वह ऐसे बहुत से प्रयोग करेगा जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंगल पर मानव अभियान को लेकर आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है. इसके अलावा यह मंगल से मिट्टी के नमूने भी जमा करेगा जो बाद में पृथ्वी पर लाए जाएंगे. (hindi.news18.com)


24-Feb-2021 3:12 PM 22

-नीरज राजपूत

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस साइट्स‌ ने चीन के रूटोग बेस की सैटेलाइट्स इमेज जारी की है. इसमें साफतौर पर देखा जा सकता है कि वहां कितना बड़ा मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है. पैंगोंग त्सो के उत्तर और दक्षिण में जो पहले चरण का डिसइंगेजमेंट हुआ है उसके बाद पीएलए आर्मी के टैंक, आर्मर्ड व्हीकल्स और हैवी मशीनरी इसी रूटोग बेस पर पहुंच गए हैं. चीनी सैनिक भी बड़ी तादाद में यहां लौट गए हैं. रूटोग की दूरी मोल्डो गैरिसन से करीब 100 किलोमीटर है.

एलएसी के दूसरी तरफ भारत के भी करीब तीन-चार बड़े बेस हैं. इनमें चुशूल ब्रिगेड हेडक्वार्टर, नियोमा और लोमा शामिल है. इसके अलावा, लुकुंग और थाकुंग एक्सेस पर तांगसे एक बड़ी मिलिट्री छावनी है. शनिवार को भारत और चीन के कोर कमांडर स्तर के 10वें दौर की बैठक हुई थी. ये बैठक दोनों देशों के बीच डिसइंगेजमेंट समझौते के पहले चरण के पूरे होने के बाद हुई.

जानकारी के मुताबिक, पैंगोंग-त्सो लेक के उत्तर और दक्षिण में पहले चरण का डिसइंगेजमेंट पूरा हो चुका है. पहले चरण के डिसइंगेजमेंट में पैंगोंग त्सो के उत्तर में फिंगर एरिया में दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गई हैं. चीनी सेना ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरी इलाका खाली कर दिया है और अब सिरिजैप पोस्ट पर चली गई है.

एलएसी के सबसे विवादित इलाके, फिंगर एरिया से चीनी सेना ने अपने सैनिकों और बंकर्स के साथ-साथ मिसाइल बेस और तोपखाने को भी हटा लिया है. आपको बता दें कि डिसइंगेजमेंट समझौते के तहत चीनी सेना को फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरा इलाका खाली करना था, और जितना भी डिफेंस-फोर्टिफिकेशन पिछले नौ महीने में किया था, वो सब तोड़ना है.  भारतीय सेना भी फिंगर 4 से फिंगर 3 पर अपनी स्थायी चौकी, थनसिंह थापा पोस्ट पर चली गई है.

चीनी सेना ने पैंगोंग-त्सो के दक्षिण छोर से भी कैलाश हिल रेंज को खाली कर रही है. पैंगोंग-त्सो के दक्षिणी छोर से लेकर रेचिन ला दर्रे तक करीब 60 किलोमीटर इलाकों को दोनों देशों की सेनाओं को खाली करना है. क्योंकि यहां पर दोनों देशों की सेनाओं की एक दूसरे से मात्र 40-50 मीटर की दूरी थी. यहां पर दोनों देशों की आर्मर्ड और मैकेनाइज्ड फोर्सेज़ यानि टैंक, आईसीवी व्हीकल्स (बीएमपी इत्यादि) और हैवी-मशीनरी तैनात थी.

भारतीय सेना ने मोबाइल से और ड्रोन की मदद से इस डिसइंगेजमेंट की वीडियोग्राफी की है. क्योंकि डिसइंगेजमेंट समझौते में साफतौर से लिखा गया था कि जो भी इस दौरान प्रक्रिया होगी उसको वेरीफाई किया जाएगा. इसका उल्लेख रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में दिए अपने भाषण में भी दिया था-‘फेस्ड, कोर्डिनेंट्ड एंड वेरीफाइवेल’ डिसइंगेजमेंट. (abplive.com)


24-Feb-2021 3:10 PM 36

साओ पाउलो: दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की जुड़वां बहने मायला और सोफिया एक साथ जेंडर कन्फर्मेशन सर्जरी कराने वाली दुनिया की पहली जुड़वां बन गई हैं. दक्षिण पूर्वी ब्राजील के शहर ब्लूमेनोऊ में रहने वाली 19 साल की दोनों बहनें जन्म से ही सबकुछ एक साथ करती रही हैं, लेकिन अब उन्होंने जेंडर कन्फर्मेशन जैसा बड़ा कदम भी एक साथ उठाया है. दोनों का कहना है कि वो बचपन से ही खुद को 'लड़का महसूस नहीं करती थीं'. दोनों ने इस सर्जरी के लिए सपने देखे थे, जो अब पूरा हो चुका है. डॉक्टरों ने बताया है कि यह दुनिया का यह ऐसा पहला मामला है जब जुड़वां भाई-बहनों ने एक साथ यह सर्जरी कराई हो.

ब्लूमेनाऊ के ट्रांसजेंडर सेंटर ब्राजील क्लिनिक के डॉक्टर होज़े कार्लोस मार्टिन्स ने इन बहनों पर एक दिन के अंतर पर पांच घंटे लंबी चली सर्जरी को अंजाम दिया. उन्होंने बताया कि यह जुड़वां भाई बहनों की जेंडर कन्फर्मेशन सर्जरी किए जाने का यह पहला ज्ञात मामला है. ये बहनें पैदा होते वक्त पुरुष मानी गई थीं, अब वो फीमेल कन्फर्मेशन करा रही हैं.

सर्जरी के एक हफ्ते बाद मायला और सोफिया ने AFP के साथ एक वीडियो-कॉन्फ्रेंस इंटरव्यू किया. मायला अर्जेंटीना में मेडिसिन की स्टूडेंट हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें अपने शरीर से प्यार था, लेकिन उन्हें अपना जेनिटेलिया यानी जननांग पसंद नहीं था. वो हमेशा प्रार्थना करती थीं कि भगवान उन्हें लड़की बना दें.

यौन शोषण और बुलिंग का हुईं शिकार

सोफिया और मायला ने बताया कि दोनों ने बचपन से ही यौन शोषण और बुलिंग का सामना किया है और इस पूरे मुश्किल के दौर में दोनों ने एक-दूसरे का साथ दिया और हमेशा एक दूसरे को संभाले रखा. दोनों को हमेशा उनकी मां और परिवार के दूसरे सदस्यों से भी सपोर्ट मिला है. उनके दादा जी ने अपनी 100,000 रियास यानी लगभग 20,000 डॉलर की एक प्रॉपर्टी नीलाम कर उनके सर्जरी का खर्च उठाया है.

साओ पाउलो में सिविल इंजीनियरिंग कर रही सोफिया ने ब्राजील को 'दुनिया का सबसे बड़ा ट्रांसफोबिक यानी ट्रांसजेंडरों के प्रति दुराग्रह रखने वाला देश' बताया. National Association of Transvestites and Transsexuals के मुताबिक, पिछले साल ब्राजील में 175 ट्रांसजेंडरों की हत्या कर दी गई थी, जो किसी भी देश से सबसे ज्यादा है. (khabar.ndtv.com)


24-Feb-2021 2:30 PM 30

सैन फ्रांसिस्को, 24 फरवरी | ट्विटर के सीईओ जैक डोरसे की क्रेडिट और पेमेंट्स फर्म स्क्वायर ने बिटकॉइन में 170 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। यह क्रिप्टोकरंसी में इसके पिछले निवेश से 3 गुना ज्यादा है। मंगलवार को कंपनी ने अपनी तिमाही आय की रिपोर्ट में बताया कि उसने 51,236 की औसत कीमत पर लगभग 3,318 बिटकॉइन खरीदे हैं। कंपनी ने कहा, "बिटकॉइन में स्कवायर की 50 मिलियन डॉलर की खरीद को जोड़ें तो यह 31 दिसंबर, 2020 तक के स्क्वायर फर्म के कुल कैश का 5 फीसदी है।" कंपनी ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब पिछले कुछ महीनों से बिटकॉइन की कीमतें रिकॉर्ड तेजी से बढ़ी हैं। अभी एक बिटकॉइन की कीमत 50,000 डॉलर से कुछ ही कम है।

कंपनी ने आगे कहा, "कंपनी के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए स्क्वायर का मानना है कि क्रिप्टोकरंसी आर्थिक सशक्तिकरण का एक साधन है, जो लोगों को वैश्विक मौद्रिक प्रणाली में भाग लेने और उन्हें अपनी वित्तीय भविष्य सुरक्षित करने का मौका देता है।"

बता दें कि इस महीने की शुरूआत में ही डोरसे और रैपर जे-जेड ने भारत और अफ्रीका में बिटकॉइन डेवलपमेंट के लिए 500 बिटकॉइन (लगभग 174 करोड़ रुपये) का निवेश करने की घोषणा की थी। (आईएएनएस)


24-Feb-2021 2:13 PM 17

फेसबुक ने पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया के सभी न्यूज पेजों को बंद कर दिया था. अब ऑस्ट्रेलिया की सरकार के साथ नया करार होने के बाद उसने इन पेजों को रिस्टोर करने का वादा किया है.

(dw.com)

ऑस्ट्रेलिया सरकार और सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के बीच चल रही रस्साकशी का हल निकल आया है. देश में संचार मंत्री पॉल फ्लेचर ने ऑस्ट्रेलिया के न्यूज चैनल एबीसी न्यूज से कहा, "सरकार को फेसबुक ने बताया है कि वह ऑस्ट्रेलिया के (डिलीट किए हुए) न्यूज पेजों को आने वाले दिनों में बहाल करेगा."

ऑस्ट्रेलिया में लाए जा रहे नए मीडिया कानून के तहत टेक कंपनियों को न्यूज कॉन्टेंट का इस्तेमाल करने के लिए मीडिया कंपनियों को रकम चुकानी पड़ती. इस कानून से नाराज फेसबुक ने अपनी वेबसाइट से न्यूज के पेज ही हटा दिए. देश में इस पर बवाल उठने के बाद सरकार और फेसबुक के बीच अब नया करार हुआ है. सरकार ने कानून को वापस लेने की फेसबुक की मांग मान ली है.

सरकार के साथ समझौता

फेसबुक ऑस्ट्रेलिया के एमडी विल ईस्टन ने इस बारे में कहा, "सरकार ने जो बदलाव किए हैं उनके बाद हम लोगों के हितों में पत्रकारिता में फिर से निवेश कर सकते हैं और आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलिया में न्यूज वाले पेजों को बहाल कर सकते हैं." फेसबुक के 'ग्लोबल न्यूज पार्टनरशिप्स' के वीपी कैम्पबैल ब्राउन ने एक ब्लॉग पोस्ट में इस बात की पुष्टि की. उन्होंने लिखा, "सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है कि यह बात हम ही तय करेंगे कि फेसबुक पर न्यूज चलेगी या नहीं ताकि हमें जबरन कोई भुगतान ना करना पड़े."

सरकार ने जो कानून बनाया था अगर वह अमल में आता तो फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों के लिए मीडिया कंपनियों के साथ बातचीत करना अनिवार्य हो जाता. इस वक्त फेसबुक और गूगल अपने एल्गोरिदम से तय करते हैं कि किस यूजर को कौन सी खबर दिखाई जाएगी. यह कानून उनके एकाधिकार को खत्म करता. लेकिन एक हफ्ते तक चली बहस के बाद सरकार को इन बड़ी कंपनियों के आगे घुटने टेकने पड़े है.

सोशल मीडिया की ताकत

इस कानून को दिसंबर में ही संसद से मंजूरी मिल गई थी. फरवरी में जैसे ही इसे अमल में लाया गया, फेसबुक ने तीखी प्रतिक्रिया दी. जिस तरह से फेसबुक ने न्यूज को ब्लैकआउट किया, उसके कारण ऑस्ट्रेलिया के बाहर से भी लोग ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी कोई खबर ना देख सकते थे, ना ही शेयर कर सकते थे.

साथ ही अब न्यूज पेजों को बंद करने के लिए भी फेसबुक या गूगल पर कोई जुर्माना नहीं लग सकेगा. विल ईस्टन ने कहा, "हमें इस बात की खुशी है कि हम सरकार के साथ एक समझौते पर पहुंच सके हैं और सरकार ने हमारे साथ जो विचार विमर्श किया, उसकी हम सराहना करते हैं."

आईबी/एमजे (एएफपी, डीपीए)


24-Feb-2021 1:28 PM 18

अहमद आर्बरी की पिछले साल उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वह जॉगिंग कर रहे थे. अब उनकी मां ने मुकदमा दायर किया है, जिसमें पुलिस अफसरों और अभियोजकों के नाम भी शामिल हैं.

(dw.com)

अहमद आर्बरी की बरसी के मौके पर उनकी मां वांडा कूपर ने मंगलवार को संघीय नागरिक अधिकार मुकदमा दायर किया. आर्बरी अफ्रीकी अमेरिकी थे, जिनकी हत्या दौड़ते वक्त गोली मारकर की गई थी. वांडा कूपर अपने मुकदमे में दस लाख अमेरिकी डॉलर मुआवजे की मांग कर रही हैं. हत्या का आरोप तीन गोरे लोगों पर है. इस मुकदमे में उन पुलिस अफसर और अन्य अधिकारियों के भी नाम हैं जिनपर कूपर ने हत्या को छिपाने की कोशिश का आरोप लगाया है. आर्बरी की मौत से अमेरिका स्तब्ध हो गया था और ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन को बल मिला था. मुकदमे में आरोप लगाया गया कि हत्या नस्लीय रूप से प्रेरित थी और आरोपियों ने आर्बरी को कानून और उसके अधिकारों से वंचित किया.

मामले में क्या हुआ?

23 फरवरी 2020 को 25 साल के  आर्बरी जॉर्जिया के ब्रूंसविक में जॉगिंग करने के लिए निकले थे, उसी दौरान एक पिता और पुत्र ने उनका पीछा किया और गोली मार दी. आर्बरी उस वक्त निहत्थे थे. स्थानीय पुलिस ने उनकी हत्या के लगभग दो महीने तक कोई गिरफ्तारी नहीं की. इस घटना का वीडियो आने के बाद इस मामले पर देशभर में आक्रोश पैदा हुआ था. इसके बाद जांच बैठाई गई यह जानने के लिए कि आखिर क्या हुआ था. जिस व्यक्ति ने वीडियो बनाया था उसे भी बाद में गिरफ्तार कर लिया गया और केस में उसका भी नाम शामिल कर लिया गया. आरोपियों पर हत्या का आरोप लगाया गया था और सभी आरोपी फिलहाल मुकदमे की सुनवाई के इंतजार में हैं.

आर्बरी की मां द्वारा दायर नए मुकदमे में कहा गया है कि आरोपियों ने उनके बेटे की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि उन्हें लगता था कि इलाके में पहले हुई चोरी के लिए अहमद जिम्मेदार है. मुकदमे में आरोप लगाया कि आरोपियों ने आर्बरी को करीब से शॉटगन से गोली मारी और उसकी हत्या की. मंगलवार को आर्बरी की बरसी के मौके पर लोगों ने मोमबत्ती जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी आर्बरी को याद किया और देश में नस्लवाद के मुद्दे को संबोधित करने की कसम खाई. उन्होंने कहा, "एक अश्वेत को अपने जीवन के लिए बिना डरे जॉगिंग करने के लिए सक्षम होना चाहिए. आज हम अहमद आर्बरी के जीवन को याद करते हैं और इस देश को हर रंग के लोगों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए खुद को समर्पित करते हैं."

एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)

 


24-Feb-2021 11:46 AM 32

तियांगुआ. पति-पत्नी के झगड़े होना आम बात है, लेकिन कभी-कभी तकरार काफी बढ़ जाती है और आपराधिक कदम पर आकर रुकती है. ऐसा ही हुआ है ब्राजील के एक कपल के साथ. यहां दोनों के बीच झगड़े की वजह से एक अन्य लड़की की मौत हो गई है. दोस्तों के साथ बैठे पति की टेबल पर पत्नी ने गोली चला दी और वह गोली सीधे जाकर साथ बैठी युवती को लगी. युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. यह पूरा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया है.

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला ब्राजील के तियांगुआ का है. गुरुवार को यहां एक कपल के झगड़े ने गंभीर रूप ले लिया. दरअसल,31 वर्षीय डायेन राफेला डी सिल्वा रॉड्रिगेज का पति अपने दस्तों के साथ एक बार में बैठा था. इसी टेबल पर 26 साल की जाएन बटिस्टा बारो भी थीं. रॉड्रिगेज अचानक अंदर पहुंचीं और टेबल पर गोलीबारी शुरू कर दी. इस हमले में एक गोली सीधे बारो के सिर में लगी और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

इस हमले में एक 24 साल का युवक भी घायल हुआ है, जिसका अस्पताल में इलाज जारी है. कैमरे में दिख रहा है कि रॉड्रिगेज बाइक पर दूसरे व्यक्ति के साथ पहुंचती है. इसके बाद वो हाथ में क्रीम हैंडबैग लेकर बार में दाखिल होती है. वीडियो में दिख रहा है कि गोलीबारी करन के बाद महिला का पति उससे बंदूक छीनने की कोशिश करता है. रिपोर्ट के अनुसार, यह साफ नहीं है कि बंदूक क्या हुआ.

पुलिस ने कुछ ही समय बाद रॉड्रिगेज को गिरफ्तार कर लिया था. अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध ने गोली इसलिए चलाई क्योंकि वो अपने पति से नाराज थी. कपल के बीच ऐसे बार में जाने को लेकर पहले भी बहस हो चुकी थी. गिरफ्तारी के बाद गोली चलाने वाली महिला ने पुलिस को बताया कि उसने पति की टेबल पर गोली चलाई थी. वो मृतक युवती को जानती भी नहीं है. (news18.com)
 


24-Feb-2021 11:46 AM 35

दुबई. अमीरी के किस्सों के लिए मशहूर दुबई में केवल इंसान ही रईस नहीं हैं. यहां का माहौल और खाना भी शायद आम आदमी की पहुंच से बाहर होगा. इसका एक उदाहरण यहां कि 'रॉयल गोल्ड बिरयानी' है. इस बिरयानी को दुबई की सबसे महंगी बिरयानी कहा जाता है. बिरयानी पहले ही दुनिया में चर्चित डिश है. ऐसे में इस नई थाली ने इसे फिर  सुर्खियों में ला दिया है. दुबई के रेस्त्रां में आपको स्वाद सोने की थाली में मिलेगा. आइए इसकी कीमत और खासियत के बारे में और जानते हैं.

दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर में बॉम्बे बॉरो नाम का एक रेस्त्रा हैं. इस रेस्त्रां ने हाल ही में एक खास बिरयानी प्लेट 'रॉयल गोल्ड बिरयानी' लॉन्च की है. अगर भारतीय करंसी में इस थाली की कीमत को देखें, तो यह करीब 20 हजार रुपए की होगी. सोने की थाली में सजाकर पेश होने वाली इस बिरयानी में आपको 23 कैरट की सोने की पत्तियां भी दी जाएंगी. इन्हें आप खा सकते हैं.

ग्राहक को चावल चुनने की सुविधा
बाहर खाने के शौकीन अपने भोजन को लेकर काफी सजग होते हैं. उन्हें अपने खाने में किसी तरह की कमी पसंद नहीं है. ऐसे में इस रेस्त्रां ने ग्राहकों की इस परेशानी की भी बढ़िया व्यवस्था कर रखी है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रेस्त्रां इस बिरयानी के लिए ग्राहकों को अपने पसंद का चावल चुनने का भी ऑप्शन देता है. ऑर्डर से पहले आप किस तरह का चावल चाहते हैं, यह आप बता सकते हैं. वहीं, एक डिश में 3 किलो चावल होने के कारण अकेले खा पाना भी मुश्किल ही लगता है.

ब्रिटिश काल के इस भारतीय रेस्त्रां के स्वाद के किस्से काफी मशहूर हैं. यह एक लग्जरी रेस्त्रां है. खुलकर पैसा खर्च करने वाले खाने-पीने के शौकीनों के लिए यह जगह एकदम सटीक है. यहां बिरयानी के अलावा कई तरह की नॉन वेज डिश मिल जाएंगी. इस बिरयानी के बारे में रेस्त्रां ने इंस्टाग्राम पर जानकारी दी है. उन्होंने लिखा है कि स्पॉट पर ऑर्डर दिए जाने के बाद डिश को तैयार होने में 45 मिनट लगेंगे, लेकिन हम वादा करते हैं कि यह आपके जीवन का यादगार भोजन होगा. (news18.com)


23-Feb-2021 8:29 PM 25

काठमांडू. नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को वहां के सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में देश की भंग संसद की बहाली के आदेश दिए हैं. चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ ने पीएम ओली के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए अगले 13 दिन के भीतर संसद सत्र बुलाने को कहा है.

दरअसल पीएम ओली के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 13 याचिकाएं दायर की गई थीं. इनमें नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक देव गुरुंग की भी याचिका शामिल है. कोर्ट ने मंगलवार को एक साथ सभी याचिकाओं पर सुनवाई की. जिस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने संसद भंग को असंवैधानिक बताया है.

ओली ने 20 दिसंबर को संसद भंग करने की सिफारिश कर दी थी. उनके इस कदम के बाद राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने नए जनादेश के लिए 30 अप्रैल और 10 मई को दो चरणों मे चुनाव कराए जाने का ऐलान कर दिया था.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिए गए थे ओली
ओली के संसद भंग करने के फैसले के बाद सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने ओली को ही पार्टी से निकाल दिया था. हालांकि, बाद में नेपाल के चुनाव आयोग ने ओली को पद से हटाए जाने और पार्टी से निकाले जाने के नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के फैसले को भी खारिज कर दिया था.

ओली पर लगाया था संविधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन का आरोप
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के अपने धड़े के समर्थकों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा था कि ओली ने न सिर्फ पार्टी के संविधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया, बल्कि नेपाल के संविधान की मर्यादा का भी उल्लंघन किया और लोकतांत्रिक रिपब्लिक प्रणाली के खिलाफ काम किया. उन्होंने कहा था कि ओली के कदमों के चलते लोग प्रदर्शन करने को विवश हुए हैं और आज, पूरा देश प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ है. (news18.com)


23-Feb-2021 7:56 PM 21

वाशिंगटन, 23 फरवरी | अमेरिका में कोविड-19 से मरे लोगों की संख्या 500,000 के पार पहुंचने के बाद मृतकों के प्रति सम्मान दर्शाते हुए इनकी याद में व्हाइट हाउस साउथ पोर्टिको में मोमबत्तियां जलाई गइ। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि "इस वायरस से पृथ्वी पर किसी अन्य देश की तुलना में अधिक लोगों की जान गई है।" उन्होंने अपनी पत्नी जिल बाइडेन, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और हैरिस के पति डगलस एमहॉफ के साथ कुछ क्षण के लिए मौन रखा।

राष्ट्रपति ने कहा, "लेकिन जैसा कि हम अमेरिका में इस बड़े पैमाने पर हुई मौतों को स्वीकार करते हैं, हम प्रत्येक व्यक्ति और उनके द्वारा जिए गए जीवन को याद करते हैं।"

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों ने दर्शाया कि कोविड-19 से अब तक 500,176 अमेरिकी जान गंवा चुके हैं।

बाइडेन ने मौन रखने से पहले कहा, "हम हर उस व्यक्ति को याद करेंगे, जिसे हमने खोया है, उन प्रियजनों को जिन्हें वे अपने पीछे छोड़ गए हैं, हम इससे उबर जाएंगे, मैं वादा करता हूं।"  (आईएएनएस)

 


23-Feb-2021 7:52 PM 18

इस्लामाबाद, 23 फरवरी | पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और तालिबान फरवरी 2020 में दोनों (अमेरिका और तालिबान) के बीच हुए दोहा समझौते का पालन करते रहेंगे। पाकिस्तान की न्यूज एजेंसी डॉन के मुताबिक, कुरैशी ने कहा कि उन्हें यह भी उम्मीद है कि अफगानिस्तान संघर्ष के राजनीतिक समाधान को प्राप्त करने के लिए अमेरिका -तालिबान समझौते के कार्यान्वयन में प्रगति बनी हुई है।

टोलो न्यूज के अनुसार, उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति और स्थिरता हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास फलीभूत होंगे।

दोहा समझौता के तहत 1 मई तक अफगानिस्तान से सभी अंतर्राष्ट्रीय बलों की वापसी के लिए कहा गया है। इस बीच, इसने तालिबान से अल-कायदा और अन्य आतंकवादी समूहों के साथ अपने संबंधों को खत्म करने के लिए कहा है।

यह सोमवार को दोहा में अफगान रिपब्लिक और तालिबान के शांति वातार्कारों के बीच एक बैठक आयोजित होने के बाद आया है।

तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों पक्षों ने वार्ता के एजेंडे पर अपनी बैठकों को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अफगान और अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि तालिबान को हिंसा को कम करना चाहिए और वार्ता की मेज पर लौटना चाहिए।  (आईएएनएस)

 

 


23-Feb-2021 5:54 PM 26

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हार, हार की हताशा में व्हाइट हाउस शांतिपूर्ण ढंग से न छोड़ना, जाते जाते कैपिटल हिल हिंसा के आरोप और दूसरा महाभियोग... पिछले करीब तीन महीनों में डोनाल्ड ट्रंप की इमेज को न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया भर में काफी झटका लगा है. इन तमाम निगेटिव खबरों के बीच राहत की बात यही रही कि सीनेट ने उनके खिलाफ आरोप को तवज्जो नहीं दी और महाभियोग नाकाम हो गया. ऐसे माहौल में ट्रंप इस हफ्ते कंज़र्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस में स्पीच देने वाले हैं, तो सबकी नज़रें उन पर हैं.

खबरों की मानें तो ट्रंप के उपराष्ट्रपति रहे माइक पेंस ने इस कार्यक्रम में भाषण देने से मना कर दिया है. वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में सूत्रों के हवाले से ये खबरें आ रही हैं कि ट्रंप अपने स्पीच में क्या कहने की मंशा रखेंगे. खुद को 2024 के लिए रिपब्लिक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करने के अलावा ट्रंप पार्टी के भविष्य को लेकर भी कुछ अहम बातें कर सकते हैं, ऐसा माना जा रहा है. यह इसलिए भी अहम इवेंट होगा क्योंकि पिछले दिनों ट्रंप अपनी ही पार्टी के कुछ विरोधी नेताओं पर नाराज़गी का इज़हार कर चुके हैं.

लेकिन इन अटकलों से अलग ट्रंप के प्रवक्ता जैसन मिलर के हवाले से खबरें कह रही हैं कि ये सब मनगढ़ंत बातें हैं, उनका मकसद सबसे पहले 2022 में सीनेट और प्रतिनिधि सभा में जीत हासिल करने की तरफ है. कहा गया है कि अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी के चक्कर में दुनिया के कुछ देशों और महत्वपूर्ण संस्थाओं से अमेरिका को अलग कर देने वाले ट्रंप अपने मेक अमेरिका ग्रेट अगेन एजेंडे को लेकर नए सिरे से आक्रामक तेवर दिखा सकते हैं.

एक्सिओज़ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि ट्रंप अपने स्पीच में स्पष्ट रूप से तेवर दिखा सकते हैं कि भले ही मेरे पास ट्विटर या व्हाइट हाउस न हो, लेकिन अब भी मैं ही शहंशाह हूं. इसी रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के सलाहकार उनके लिए आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं और 2022 मिडटर्म की तैयारी ज़ोरों पर है. यह भी कहा गया है कि ट्रंप अपने समर्थक कैंडिडेटों के लिए अच्छा खासा पैसा लुटाने का भरोसा भी देने के मूड में हैं.

ट्रंप के करीबियों के हवाले से कहा गया है कि इस स्पीच में साफ तौर पर शक्ति प्रदर्शन होगा और यह बताया जाएगा कि रिपब्लिकन पार्टी का मतलब ट्रंप पार्टी ही है. इससे पहले कुछ खबरों में कहा गया था कि ट्रंप को सलाह दी गई ​है कि पार्टी के वोटर पार्टी के भीतर खुले झगड़े की अपेक्षा नहीं कर रहे हैं. इसलिए सलाहकारों ने कहा है कि ट्रंप इस मंच से मौजूदा राष्ट्रपति बाइडेन और अन्य डेमोक्रेट नेताओं पर हमला बोलें, न कि अपनी ही पार्टी के नामों को उछालें.

यह भी खास बात है कि महाभियोग से बचे ट्रंप के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल आरोपों की जांच चल रही है और पद जाने के बाद उनकी इससे बचना मुश्किल कहा जा रहा है. ऐसे में, ट्रंप के तेवर क्या रंग लाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन यहां एक सवाल यह भी है कि रिपब्लिकन पार्टी के वोटरों के बीच अन्य नेताओ की तुलना में ट्रंप अब भी लोकप्रिय हैं? देखिए इस सवाल का जवाब कैसे तय करता है कि ट्रंप के स्पीच की अहमियत क्या है.

ट्रंप की पकड़ को लेकर रिपब्लिकन समर्थकों के बीच एक सर्वे यूएसए टुडे ने बीते रविवार को प्रकाशित किया, जिसके मुताबिक ट्रंप के 46% वोटरों ने माना कि ट्रंप नई पार्टी बनाएं तो वो उनके साथ होंगे, जबकि 42% ने कहा कि महाभियोग के बाद वो ट्रंप के और भी मज़बूत समर्थक हुए. इस सर्वे के मुताबिक ट्रंप के 58% समर्थक यही विश्वास करते हैं कि कैपिटल हिल हिंसा के लिए ट्रंप कतई ज़िम्मेदार नहीं थे, यह उनके खिलाफ एक साज़िश थी. साफ है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए ट्रंप का पहला पोस्ट व्हाइट हाउस भाषण कितना अहम होगा.
 


23-Feb-2021 1:59 PM 22

चीन अपने आसपास के छोटे देशों में ही घुसपैठ नहीं कर रहा, बल्कि उसकी साजिश विकसित देशों में भी सेंध लगाने की दिखती है. हाल में चीन का ब्रिटिश स्कूलों को एक के बाद एक खरीदना सुर्खियों में है. चीन घाटे में चल रहे ब्रिटिश स्कूलों को खरीद रहा है. इसके पीछे आशंका जताई जा रही है कि वो आगे चलकर स्कूलों में अपनी विचारधारा को बढ़ावा दे सकता है ताकि ब्रिटिश बच्चे भी चीन के प्रभाव में रहें.

क्यों बेची जा रहीं इमारतें 
कोरोना काल में देशों की अर्थव्यवस्था तो चरमराई ही, इसका असर शैक्षणिक संस्थानों पर भी हुआ. स्कूल लंबे समय से या तो बंद हैं या खुलकर संक्रमण फैलने पर दोबारा बंद हो चुके. पढ़ाई ऑनलाइन करनी पड़ी. ऐसे में स्कूल प्रशासन अपनी इमारतों का भी खर्च पूरा नहीं कर पा रहा. ये देखते हुए कई स्कूल अपनी इमारतें बेच रहे हैं.

17 स्कूल खरीदे चीन ने 
इन्हीं घाटे में आ चुके स्कूलों को चीन धड़ल्ले से खरीद रहा है. ऐसा एक-दो स्कूलों के साथ नहीं, बल्कि पूरे 17 स्कूलों के साथ हो चुका है. इन स्कूलों को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से संबंध रखने वाली कंपनियों ने सस्ते दामों पर खरीद लिया है और अब कोरोना काल खत्म होने के इंतजार में हैं.

पहले ही हो चुकी शुरुआत 
वैसे कोरोना से पहले भी चीन ब्रिटिश स्कूलों को खरीदना शुरू कर चुका था. इसकी वजह ब्रिटिश मुद्रा पाउंड में आई गिरावट थी. दूसरी ओर चीनी अर्थव्यवस्था तेजी से ऊपर की ओर गई. ऐसे में घाटे में चलती स्कूली इमारतों को खरीदना आसान हो गया.

अपनी विचारधारा बच्चों के जेहन में डालेगा
माना जा रहा है कि इसके बाद सही समय आने पर चीन इस स्कूलों को शुरू करेगा और अपनी विचारधारा थोपेगा. इससे ब्रिटिश या इन स्कूलों में आने वाले विदेशी बच्चे शुरुआत से ही चीन समर्थक हो जाएंगे. चीन की इस विचारधारा के पीछे महज कयास नहीं, बल्कि पहले भी चीन ऐसा करता आया है.

ऐसे हो रही पैठ
चीन के कन्फ्यूशियस इंटरनेशनल एजुकेशन ग्रुप ने ब्रिटेन का वो स्कूल खरीद लिया, जहां राजकुमारी डायना ने पढ़ाई की थी. एक ब्रिटिश स्कूल को चीन की यांग हुइयान ने खरीदा है. वह एशिया की सबसे अमीर महिला हैं और उसके पिता यांग गुओकियांग चीन कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं. कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट चीन की खास विचारधारा को चलाने वाला स्कूल है, जो ब्रिटेन के 150 स्कूलों में चलाया जा रहा है. साथ ही ये ब्रिटेन की 29 यूनिवर्सिटी तक पहुंच चुका है.

क्या है कन्फ्यूशियस संस्थान 
ये चीनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देते हुए किसी खास राज्य या देश में पैठ बना लेते हैं. इसके लिए वे फंडिंग का सहारा लेते हैं. वे घाटे में दिखते स्कूल-कॉलेजों को फंड करते हैं और फिर वहां की कमेटी में घुसपैठ कर लेते हैं. ये सांस्कृतिक लेनदेन की बात करते हैं लेकिन धीरे-धीरे ये होस्ट यूनिवर्सिटी की पढ़ाई-लिखाई में सीधा दखल देने लगते हैं. चूंकि ये काफी पैसे देते हैं इसलिए संस्थान इन्हें अलग भी नहीं कर पाते हैं. हालांकि बीते कई सालों से ये अपनी पॉलिसी और तौर-तरीकों को लेकर विवादों में रहे.

ये चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के नाम पर आधारित हैं. वैसे तो पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस दार्शनिक की आलोचना किया करती थी लेकिन बाद में उसे दुनिया के दूसरे देशों से जुड़ने का यही सबसे सीधा जरिया लगा. असल में कन्फ्यूशियस का दर्शन दूसरे देशों के लिए काफी जाना-पहचाना है और चीन की सरकार को लगा कि उनका नाम ब्रांड इमेज के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी तरह से कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूशन की शुरुआत हुई.

पहला इंस्टीट्यूट साउथ कोरिया में साल 2004 में खुला. इसके बाद से दुनिया के बहुत से विकसित और मध्य आय वाले देशों में ये संस्थान पहुंच चुका है. लेकिन अब विकसित देशों जैसे ब्रिटेन में ये घुसपैठ कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक साल 2019 में दुनियाभर के देशों में 530 कन्फ्यूशियस संस्थान बन चुके थे.

पहले कनफ्यूशियस संस्थानों की तुलना कई सारे विदेशी संस्थानों जैसे ब्रिटिश काउंसिल, अलायंस फ्रेंचाइस जैसों से होती रही लेकिन जल्दी ही लोगों को समझ आने लगा कि चीन से आए इन संस्थानों का इरादा केवल भाषा और संस्कृति के बारे में बोलना-बताना नहीं, बल्कि युवाओं को अपने प्रभाव में लाना भी है.

ब्रिटिश अधिकारी अब जता रहे चिंता 
खुद ब्रिटिश शिक्षाविद और अधिकारी चीन की अपने स्कूलों में घुसपैठ पर परेशान हो रहे हैं. ब्रिटेन में रिफॉर्म पार्टी के नेता नाइजेल फेरेंज ने इस स्कूलों के चीनी टेकओवर पर चिंता जताते हुए कहा कि ये ट्रेंड साल 2014 से चुपके-चुपके शुरू हुआ और अब धड़ल्ले से बढ़ा है. ब्रिटेन के लगभग 7 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं. चीन इन्हीं निजी स्कूलों को खरीद रहा है. ऐसे में ये आशंका बढ़ जाती है कि जल्द ही बच्चों के मन में चीनी विचारधारा ठूंसी जाने लगेगी. (news18.com)


23-Feb-2021 1:53 PM 30

वाशिंगटन, 23 फ़रवरी : अमेरिका ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन द्वारा अपने सैनिकों को पीछे हटाने  की खबरों पर वह करीबी नजर बनाए है. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन द्वारा सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमत होने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को यह बयान जारी किया. दोनों देश पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से सैनिक एवं हथियार हटाए जाने को लेकर भी सहमत हुए हैं. 

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ हम सैनिकों के पीछे हटने की खबरों पर करीबी नजर बनाए हैं. हम तनाव कम करने के मौजूदा प्रयासों का स्वागत करते हैं.'' उन्होंने लद्दाख के पैंगोग इलाके से भारत और चीन के सैनिकों के पीछे हटने की खबरों पर किए सवाल के जवाब में कहा, ‘‘हम यकीनन, स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखेंगे, क्योंकि दोनों पक्ष शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं.''

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच पिछले साल पांच मई में पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था और इसके बाद दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों तथा घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी.  (khabar.ndtv.com)


23-Feb-2021 1:52 PM 22

चीन, 23 फ़रवरी :चीन में एक मशहूर आउटलेट को जबरदस्त ऑनलाइन आलोचना के बाद माफी मांगनी पड़ी है. दरअसल 'सेक्सी टी' नामक आउटलेट के विज्ञापन पर विवाद फैल गया. ब्रांड ने महिलाओं को मग पर 'सौदा' जैसे जुमले का इस्तेमाल किया था. विज्ञापन में लिखा गया था कि ग्राहक अपने ऑर्डर का इतंजार करते वक्त खूबसूरत लड़कियों को रिझा सकते हैं.


जबरदस्त आलोचना के बाद सेक्सी टी स्टॉल ने मांगी माफी


विज्ञापन में विवादास्पद नारे के बाद रेस्टोरेंट के खिलाफ ऑनलाइन गुस्सा भड़क गया. ये पहली बार नहीं है जब दुकान का प्रचार विवादों में घिरा हो. इससे पहले भी चाय का बैग 'मेंढक के बच्चे की तस्वीर के साथ, मैं तुम्हें चाहता हूं, मास्टर" जैसे नारों के जरिए बेचा जा चुका है. बाद में दुकान की तरफ से सफाई दी गई कि उसका मकसद 'महिलाओं का अपमान' करना नहीं था.


प्रोडक्ट के प्रचार में नारे और महिलाओं को बताया था 'सौदा'


उसने बाजार से मग की नवीनतम रेंज को हटाने की बात कही और खेद जताया. सेक्सी टी स्टोर के देश भर में 270 आउटलेट्स फैले हुए हैं. प्रोडक्ट को बेचने के लिए महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को प्रचार का बेहूदा तरीका बताया गया. विवादास्पद मग की तस्वीर चाइनीज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने के बाद लोगों विरोध किया. मार्केटिंग के असभ्य और 'असम्मानजनक' तरीके को आड़े हाथ लिया गया. एक यूजर ने लिखा कि वाक्यांश खुद अपने आप में अपमानजनक नहीं है बल्कि कंपनी का जुमला भी अपमानजनक है.


क्या बाजार से जुड़े किसी शख्स को विज्ञापन में गलत नहीं दिखाई दे रहा है? दूसरे यूजर ने लिखा, "महिलाओं को सौदे के रूप में बताना. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि ये आज का विज्ञापन है." कंपनी ने अपने अनुचित मार्केटिंग के तरीके पर खेद प्रकट किया है. उसने खुद के शर्मिदा होने की बात कही है और विवादास्पद मग की खेप को बाजार से हटाने का आश्वासन दिया है. कंपनी ने बताया, "हमने अनुचित जुमले का इस्तेमाल किया, यहां तक कि चांग्सा के लोगों को भी हजम नहीं हुआ...हम बहुत शर्मिंदा हैं. हमारा महिलाओं के अपमान करने का इरादा बिल्कुल नहीं था." (abplive.com)


23-Feb-2021 1:51 PM 19

दुबई, 23 फ़रवरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेंटिंग बनाने वाले यूएई में रह रहे किशोर की उस वक्त खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब उस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उसे हार्दिक धन्यवाद का पत्र लिखा. गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दुबई में नौवीं कक्षा के छात्र सरन शशिकुमार ने गणतंत्र दिवस के मौके पर पीएम मोदी की छह लेयर वाली स्टैंसिल तस्वीर बनाई थी.

शशिकुमार का परिवार केरल का रहने वाला है. उसने यह तस्वीर जनवरी महीने में दुबई के दौरे पर गए संसदीय मामलों के मंत्री वी मुरलीधरन के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाई थी. 

पत्र में पीएम मोदी ने लिखा है, 'कला हमारे अंतरतम विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने और हमारी कल्पना को रचनात्मकता से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है.आपके द्वारा बनाई गई तस्वीर पेंटिंग के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता और समर्पण, साथ ही साथ राष्ट्र के प्रति आपका प्यार और स्नेह भी को भी दर्शाता है.'

'मुझे यकीन है कि आप अपने कलात्मक कौशल को आने वाले वर्षों में उत्कृष्टता के उच्च स्तर तक ले जाएंगे. आप कई और सुंदर चित्र बनाना जारी रखें और साथ ही, अकादमिक क्षेत्र में उच्चाईयों को पाएं. एक उज्ज्वल और सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं.' पीएम मोदी के हस्ताक्षर वाले पत्र की तस्वीर शशिकुमार ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट की है.

पत्र के जवाब में शशिकुमार ने टि्वटर पर लिखा है, 'मेरी पेंटिंग की तारीफ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद. यह मेरे जैसे उभरते कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा और प्रेरणा का स्रोत है. (khabar.ndtv.com)

 


23-Feb-2021 1:26 PM 18

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था ने अंडमान के समुद्र में एक नाव में फंसे हुए भूखे-प्यासे रोहिंग्या शरणार्थियों को तुरंत बचाने के लिए कहा है. आशंका जताई जा रही है कि नाव पर सवार लोगों में से कुछ की मौत भी हो चुकी है.

(dw.com)

यूएनएचसीआर का कहना है कि नाव दक्षिणी बांग्लादेश से लगभग 10 दिनों पहले निकली थी लेकिन रास्ते में उसका इंजन खराब हो गया. भारतीय कोस्ट गार्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि नाव का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास एक इलाके में पता लगा लिया गया है. नाव में कुल कितने लोग हैं इसके बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसमें कम से कम 90 लोग हैं.

यूएनएचसीआर ने एक बयान में कहा, "उन लोगों की जान बचाने और त्रासदी को और बढ़ने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने की जरूरत है." संस्था ने कहा है कि जो भी देश इन फंसे हुए शरणार्थियों को बचाने में मदद करेगा संस्था उसे समर्थन देगी. रोहिंग्या संकट की जानकारी रखने वाले समूह 'द अराकान प्रोजेक्ट' के निदेशक क्रिस लेवा के मुताबिक नाव पर कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है.

लेवा का कहना है कि नाव के पास स्थित भारतीय नौसेना के जहाजों ने नाव में फंसे शरणार्थियों को थोड़ा खानी और पानी दिया था, लेकिन इसके आगे उनका क्या होगा यह कहा नहीं जा सकता. रोहिंग्याओं से ही जुड़ी एक और संस्था 'रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव' का कहना है कि नाव पर सवार लोगों में 65 महिलाएं और लड़कियां, 20 पुरुष और दो साल से कम उम्र के पांच बच्चे हैं. 

एक बार फिर संकट में रोहिंग्या शरणार्थी

भारतीय नौसेना के एक प्रवक्ता ने स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी लेकिन कहा कि बाद में एक बयान जारी किया जाएगा. यूएनएचसीआर के मुताबिक नाव बांग्लादेश के तटीय जिले कॉक्स बाजार से निकली थी जहां म्यांमार से अपनी जान बचा कार भागे करीब 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में बुरे हालात में रह रहे हैं. बांग्लादेश में अधिकारियों का कहना है कि उन्हें शिविरों से किसी भी नाव के निकलने की जानकारी नहीं है.

कॉक्स बाजार के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रफीकुल इस्लाम ने बताया, "अगर हमारे पास इसकी जानकारी होती तो हमने उन्हें रोक लिया होता." अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ऐमनेस्टी ने एक बयान में कहा कि सरकारों द्वारा समुद्र में फंसे रोहिंग्या लोगों की मदद करने से मना कर देने की वजह से पहले ही कई जानें जा चुकी हैं. ऐमनेस्टी के दक्षिण एशिया कैम्पेनर साद हम्मादी ने कहा, "उन शर्मनाक घटनाओं को दोहराया नहीं जाना चाहिए. बांग्लादेश में सालों लंबी अनिश्चय की स्थिति और अब म्यांमार में हाल ही में हुए तख्तापलट की वजह से रोहिंग्या लोगों को लगता है कि उनके पास इस तरह की जोखिम भरी यात्राएं करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है."

सीके/एए (रॉयटर्स)


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