अंतरराष्ट्रीय

Previous12Next
Posted Date : 19-Jan-2019
  • जुबैर अहमद

    लाहौर से, 19 जनवरी । दक्षिण एशिया में सआदत हसन मंटो और फैज अहमद फैज सब से ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखक है। पिछले सत्तर साल में मंटो की किताबों की मांग लगातार रही है। एक तरह से वह घर-घर में जाना जाने वाला नाम बन गया है। उनके सम्पूर्ण लेखन की किताबों की जिल्दें लगातार छपती रहती हैं, बार-बार छपती हैं और बिक जाती हैं।
    यह भी सच्चाई है कि मंटो और पाबंदियों का चोली-दमन का साथ रहा है। हर बार उन पर फाहशी (लचर) होने का इल्जाम लगता रहा है और पाबंदियां लगाई जाती हैं। ठंडा गोश्त, काली सलवार और बू नाम की कहानियों पर पाबंदिया लगाई गई। उनकी कहानियों को पाबंदियों ने और भी मकबूल किया। मंटो को बतौर कहानीकार पाबंदियों का फायदा हुआ। मंटो की कहानिओं पर पांच बार पाबंदी लगी पर उन्हें कभी दोषी करार नहीं दिया गया।
    अब एक तरफ नंदिता दास की नई फिल्म मंटों पर पाकिस्तान में पाबंदी लगाई गई है और दूसरी तरफ लाहौर के सांस्कृतिक केंद्र अलहमरा ने मंटो मेला पर पाबंदी लगा दी है। 13 जनवरी को लाहौर आर्ट्स कॉउन्सिल-अलहमरा ने अपने फेसबुक पन्ने पर नेशन अखबार की खबर साझा की है जिसके मुताबिक मंटो मेला फरवरी के बीच वाले हफ्ते में होने वाला था। इस पाबंदी का कारण मंटो की कहानियों का बोल्ड नेचर सुनने में आया है।
    यह भी चर्चा है कि इस पाबंदी का कारण मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर में मजहबी इंतहापसंदों का प्रभाव है। उनका मानना है कि लेखक की कृतियां लचरता फैलाने का कारण है। लोगों के दवाब के कारण अलहमरा ने इस मेले को पाबन्दी लगाने की बजाए सिर्फ आगे बढ़ाने की दलील दी है लेकिन अभी तक किसी तारीख का ऐलान नहीं हुआ।
    इस मंटो मेले पर चार नाटक मंडलियों द्वारा नाटक किए जाने थे जिनमें पाकिस्तान का विश्व ख्याति प्राप्त अजोका थिएटर है। यह सारी नाटक मंडलियां कई दिनों से मंच अभ्यास कर रही थीं। नंदिता दास की फिल्म पर पाबंदी लगाने के बारे में यही दलील सामने आई है कि बोर्ड को कोई एतराज नहीं था पर फिल्म में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे का च्सही चित्रणज् नहीं है। अब फिल्म नेटफ्लिक्स पर मौजूद है और इसे कोई भी देख सकता है।
    इस फिल्म पर पाबंदी के खिलाफ लाहौर, पेशावर और मुलतान में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लाहौर में विरोध प्रदर्शन मंटो मेमोरियल सोसाइटी के प्रधान सईद अहमद और दूसरे बुद्धिजीवियों ने साथ मिलकर किया। उन्होंने बीते सप्ताह में एकअदबी समागम मंटो फिल्म के लिए ही किया था।
    इस समागम में शिरकत करते हुए इतिहासकार आयशा जलाल ने अहम मुद्दे रखे। आयशा जलाल मशहूर इतिहासकार हैं और उनकी कई किताबें बहुत अहम मानी जाती हैं। आयशा मंटो की रिश्तेदार भी हैं और उन्होंने मंटो और भारत -पाक बंटवारे के बारे में किताब भी लिखी है। उनसे पूछा गया कि सत्तर साल में क्या बदला है क्योंकि तब भी मंटो पर विवाद था और अब भी है।
    फिल्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने पाकिस्तान में बनाई गई सरमद खूसट की फिल्म की भी बात की और कहा कि नंदिता दास की फिल्म इतिहास के हिसाब से बेहतर है। उन्होंने कहा कि बेशक फिल्म पर पाबंदी लगाई गई है पर यह नेट पर उपलब्ध है तो पाबंदी की कोई तुक नहीं बनती।
    आयशा जलाल ने कहा कि बंटवारे की सामाजिक आलोचना इससे अलग मामला है। अगर किसी को आलोचना बर्दाश्त नहीं है तो इसमें मंटो का कोई कसूर नहीं है। बल्कि यह उनका मामला है या उनकी साहित्य के बारे में समझ का मामला है।
    आयशा का कहना है कि अभी का प्रसंग बिलकुल अलग है पर मंटो पर कई बार इल्जाम लगे हैं पर उन्हें ज्यादा से ज्यादा कुछ जुर्माना ही हुआ है। उस समागम में यह भी बात हुई कि मंटो को नाखुश दिखाया गया है और उसका पाकिस्तान में आने का अनुभव भी अच्छा नहीं था।
    आयशा ने कहा कि जो भी हो पर यहां आ जाने के लिए सहमत हो जाने के बावजूद उनको शिकायत थी और उनके वजूद को कभी साफ तौर पर माना नहीं गया। एक दिन उनको सब से बढिय़ा कहानीकार मान लिया जाता है और अगले दिन उनको कहा जाता है कि फ्लैट खाली करो। यही सब कुछ नंदिता की फिल्म में है पर यह फिल्म एक भारतीय फिल्मकार ने बनाई है और एतराज यह है कि एक भारतीय हमें कैसे बता सकता है कि जो बंदा पाकिस्तान आया वह नाखुश था।
    उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया पर पाबंदी लगाने का प्रयास ही हमारी नाकामयाबी की निशानी है। हम जितने नाकामयाब हुए हैं उतने ही फिजुल कानून बनाये जा रहे हैं। लगता तो यह है कि पिछले सत्तर साल में कुछ नहीं बदला है। अगर अन्याय करने वालों, जुल्म कमाने वालों, कब्जे करने वालों और जबर्दस्तियाँ करने वालों, से डर लगता है तो फिर मंटो भी नहीं बदला। मंटो वैसा ही है और जिंदा है। वो बहुत सारी मिट्टी के नीचे दफन नहीं है बल्कि हमारे साथ बैठ कर हंस रहा है कि वह बड़ा अफसानानिगार है या खुदा।
    क्कह्म्द्गह्यद्गठ्ठह्लड्डह्लद्बशठ्ठड्डद्य द्दह्म्द्ग4 द्यद्बठ्ठद्ग
    (लेखक लाहौर में पंजाबी जुबान के कार्यकर्ता हैं।) (बीबीसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 19-Jan-2019
  • मिस्र, 19 जनवरी । मिस्र पहले अरब देश बन गया है जिसने महिलाओं में कामोत्तेजना बढ़ाने वाली दवा के उत्पादन और बिक्री को मंजूरी दे दी है। बीबीसी संवाददाता सैली नाबिल ने जानने की कोशिश की कि सामाजिक तौर पर रूढि़वादी माने जाने वाले इस देश में इसके लिए कितना बड़ा बाजार है।

    ये गोली खाने के बाद मुझे थकान होने लगी, नींद आने लगी और मेरे दिल की धड़कन भी तेज हो गई। ये कहना है लैला (बदला हुआ नाम) का जिन्होंने कथित तौर पर फीमेल वायग्रा कही जाने वाली दवाई की गोली पहली बार ली। इस दवाई को केमिकल भाषा में फ्लिबानसेरिन कहा जाता है।
    आज से तीन साल पहले अमरीका में इसके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी गई थी और अब मिस्र में एक स्थानीय कंपनी इस दवा का उत्पादन कर रही है। लैला की उम्र करीब तीस साल है वो एक रूढि़वादी परिवार की बहू हैं। वो अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहती क्योंकि मिस्र में और महिलाओं की तरह वो भी मानती हैं कि यहां यौन समस्याओं और यौन जरूरतों पर बात करने पर पाबंदी है।
    उनकी शादी को दस साल हो चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जिज्ञासावश ये दवा खरीदने का फैसला किया। लैला को कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है और उन्होंने ये दवा बिना डॉक्टरी सलाह के ली है। मिस्र में ऐसा करना आम बात है क्योंकि यहां काफी लोग बिना डॉक्टरी सलाह के सीधे केमिस्ट की दुकान से दवा खरीद लेते हैं।
    गोली से तौबा!
    वो कहती हैं कि फार्मेसिस्ट ने मुझे बताया कि कुछ सप्ताह तक हर रात एक गोली लेनी चाहिए। उसने कहा कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होंगे। मैं और मेरे पति देखना चाहते थे कि इसका क्या असर होता है। मैंने एक बार कोशिश की लेकिन अब मैं फिर कभी ये गोली नहीं लूंगी।
    मिस्र में दवा दुकानदारों का कहना है कि यहां फीमेल वायग्रा की अच्छी बिक्री हो रही है।  मिस्र में तलाक की दर धीरे-धीरे बढ़ रही है और कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दंपत्तियों के बीच यौन समस्याएं इसकी एक बड़ी वजह हैं।
    फ्लिबानसेरिन के स्थानीय निर्माता का कहना है कि देश में हर दस में तीन महिलाओं में कामोत्तेजना कम होने की परेशानी है। लेकिन ये आंकड़े अंदाजा भर हैं क्योंकि इस देश में इससे संबंधित किसी तरह के आंकड़े मौजूद नहीं हैं। कंपनी के प्रतिनिधि अशरफ अल मरागी कहते हैं कि इस दवा की यहां बहुत जरूरत है।
    मरागी कहते हैं कि ये दवा इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है और असरदार है और इस कारण अगर थकान और नींद आती है तो ये लक्षण भी जल्द खत्म हो जाएंगे। हालांकि कई फार्मासिस्ट और डॉक्टर इससे इत्तेफाक नहीं रखते। एक फार्मासिस्ट जिनसे मैंने बात की उनका कहना है कि इस दवा के कारण व्यक्ति का रक्तचाप कम होकर चिंताजनक स्तर तक पहुंच सकता है और दिल और यकृत की बीमारी से जूझ रहे लोगों को इस दवा के सेवन से बचना चाहिए।
    उत्तरी काहिरा में फार्मेसी चलाने वाले मुराद सादिक कहते हैं कि वो इसके साइड इफेक्ट के बारे में अपने ग्राहकों को हमेशा बताते हैं लेकिन वो उन्हें दवा खरीदने के लिए राजी भी करते हैं। रोज करीब दस लोग ये दवा खरीदने आते हैं। इनमें से अधिकतर पुरुष होते हैं। महिलाएं शर्म के कारण इसे खरीदने के लिए सामने नहीं आतीं।
    मुराद सादिक की फार्मेसी में मैंने देखा कि एक विज्ञापन में फ्लिबानसेरिन को गुलाबी गोली कहा गया है। इसे नीली गोली का महिला संस्करण कहा जा रहा है। मिस्र में पुरुषों के लिए वायग्रा को नीली गोली कहा जाता है। लेकिन दवा उत्पादकों का कहना है कि इसे फीमेल वायग्रा कहना गलत होगा। मरागी कहते हैं ये शब्द तो मीडिया सामने ले कर आई है।
    पुरुषों में वायग्रा पेनिस में खून का बहाव बढ़ा कर इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक करता है। वहीं महिलाओं में फ्लिबानसेरिन दिमाग में केमिकल बैलेंस कर उनमें अवसादरोधक औषधि और यौन इच्छा बढ़ाने का काम करता है।
    सेक्स थेरपिस्ट हीबा कौतुब ने अपने पास आने वाले मरीजों को इस दवा का सुझाव देने से मना कर दिया है। वो कहती हैं कि इसे फीमेल वायग्रा कहना गलत है। वो कहती हैं कि शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझने वाली महिलाओं के लिए ये दवा कभी काम ही नहीं करेगी।
    महिलाओं के लिए सेक्स एक भावनात्मक प्रक्रिया है। ये उनके लिए सोच का मसला है। अगर किसी महिला के पति उसके साथ बुरा बर्ताव करते हैं को वो महिला कभी उनके साथ स्वस्थ शारीरिक संबंध नहीं रख पाएगी। ऐसे मामले में कोई दवा काम नहीं आएगी।
    हीबा कौतुब कहती हैं कि फ्लिबानसेरिन से लाभ बहुत कम हैं और ये खतरा लेने लायक नहीं। वो चेतावनी देती हैं कि रक्तचाप का कम हो जाना भी गंभीर मुश्किल पैदा कर सकता है। अपनी यौन समस्याओं के बारे में खुल कर बात करने के मामले में अभी मिस्र की महिलाओं को लंबा वक्त लगेगा।
    लैला कहती हैं कि वो ऐसी कई महिलाओं को जानती हैं जिन्होंने शादी में तनाव के कारण यौन संबंधों में भी खटास आने के बाद, तलाक के लिए आवेदन किया है।
    अगर यौन संबंधों के मामले में आपके पति कमजोर हैं तो आप उनकी मदद कर सकते हैं और उनका इलाज करा सकते हैं। लेकिन ये तभी संभव है जब वो आपसे प्यार करते हों। लेकिन अगर आपके पति आपको प्रताडि़त कर रहे हैं तो आप खुद उनमें दिलचस्पी लेना खत्म कर देते हैं। ऐसे में अगर वो बिस्तर पर ठीक भी हों तो कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन पुरुष इस नाजुक मसले को समझते नहीं हैं।
    हालांकि फ्लिबानसेरिन की बिक्री शुरू हुए अभी अधिक वक्त नहीं हुआ है, लेकिन मुराद सादिक को उम्मीद है कि इसकी मांग बढ़ेगी। लेकिन कौतुब, शादी पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर करती हैं।
    वो कहती हैं कि अगर कोई पुरुष ये देखता है कि दवा लेने के बद भी उनकी पत्नी की कामोत्तेजना नहीं बढ़ रही है तो वो इसका दोष महिला पर ही लगाएगा। वो इसका दोष बेसअर हो रही दवाई और रिश्ते में तनाव को नहीं देंगे। वो इस कारण अपनी पत्नी को छोड़ भी सकते हैं।  (बीबीसी)

     

     

    ...
  •  


Posted Date : 19-Jan-2019
  • बोगोटा, 19 जनवरी । कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में हुए एक जोरदार कार धमाके में कम से कम नौ लोगों के मारे जाने की खबर है। देश के रक्षा मंत्रालय ने घटना की पुष्टि की है।
    यह धमाका बोगोटा शहर के दक्षिणी हिस्से में एक पुलिस कैडेट स्कूल के ठीक बाहर हुआ। यह धमाका स्थानीय समयानुसार नौ बजकर तीस मिनट पर हुआ। हादसे में कम से कम 38 लोग गंभीर तौर पर घायल भी हुए हैं। तस्वीरों में जनरल सैनटनडर स्कूल के बाहर उस वाहन को देखा जा सकता है। यह शहर का काफी सक्रिय हिस्सा है। घायलों में पनामा और इक्वाडोर के एक-एक नागरिक भी हैं।
    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि एक कार स्कूल के बाहर तेजी से आई और चेकप्वॉइंट पर जब सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की तो ड्राइवर ने कार की गति बढ़ा दी और कार दीवार से जा टकराई। टकराने के साथ ही कार में तेज धमाका हो गया। धमाके से कुछ वक्त पहले ही स्कूल में एक समारोह संपन्न हुआ था, जिसमें पुलिस अधिकारियों को बड़े पदों पर प्रमोट किया गया।
    ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कार में धमाका होने के साथ ही कार चला रहे ड्राइवर की भी मौत हो गई होगी। कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान ड्यूक ने हमले को लेकर गंभीरता जताई है और कहा है कि वो जल्द से जल्द राजधानी पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोलंबिया हिंसा के आगे झुकने वाला नहीं है।
    बोगोटा के मेयर एनरिक पेनालोसा ने हमले की आलोचना की है और इस हमले को आतंकवादी हमला कहा है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस हमले के पीछे किसका या किस संगठन का हाथ था। कोलंबिया के रेडियो स्टेशन आरसीएन ने घटना का एक फुटेज ट्वीट किया।
    हालांकि कार में बम धमाका होना कोलंबिया के लिए कोई बहुत नया नहीं है। दशकों से सरकार और फार्क (रेवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेज ऑफ कोलंबिया) के बीच गतिरोध रहा है। लेकिन स्थानीय मीडिया का कहना है कि बीते नौ वर्षों में कोलंबिया में ऐसा धमाका नहीं हुआ। (बीबीसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 19-Jan-2019
  • मैक्सिको, 19 जनवरी । मैक्सिको में आग लगने की एक घटना में 20 लोगों की मौत और 54 के बुरी तरह घायल होने की खबर है। मैक्सिको शहर के गवर्रन एल्फ्रेडो डेल मैजो माजा ने यह जानकारी दी है। घटना शुक्रवार को उत्तरी मैक्सिको के हिडाल्गो नामक छोटे से कस्बे में हुई। खबर के मुताबिक आग लगने का कारण एक ईंधन पाइपलाइन का लीक होना बताया जा रहा है।
    अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ लोगों ने पाइपलाइन से ईंधन चुराने के लिए उसमें छेद कर दिया था। इसके कुछ घंटों बाद स्थानीय लोगों ने भी लाइन से ईंधन चुराने की कोशिश की। उसी दौरान वहां धमाके से आगे लग गई और दर्जनों लोग उसकी चपेट में आ गए। हिडाल्गो के गवर्नर ने बताया कि मृतकों और घायलों की संख्या शुरुआती रिपोर्टों के आधार पर दी गई है। उधर, राष्ट्रपति आंद्रेस मैन्युअल लोपेज ओब्राडोर ने सरकार को सभी पीडि़तों की मदद करने का आदेश दिया है। (वॉशिंगटन पोस्ट)

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Jan-2019
  • वाशिंगटन, 18 जनवरी । चीन की अदालत द्वारा कनाडा के एक नागरिक को नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में मौत की सजा सुनाए जाने पर अमेरिका ने ऐतराज जताया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पैलाडिनो ने चीन के इस कदम को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है।
    खबरों के अनुसार पैलाडिनो ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और कनाडा की विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने फोन पर बात की है। दोनों इस बात पर सहमत हैं कि कनाडाई नागरिक को मनमाने तरीके से चीन में पहले हिरासत में लिया गया। फिर राजनीति से प्रेरित होकर मौत की सजा सुनाई गई। दोनों इस मामले में चीन के सामने आधिकारिक आपत्ति जताने पर भी सहमत हुए हैं।
    आरोपित कनाडाई नागरिक- रॉबर्ट लॉयड शेलेन्बर्ग को बीते साल नवंबर में चीन के उत्तर-पूर्वी शहर डालियान की अदालत ने नशीले पदार्थों की तस्करी के ही आरोप में 15 साल की सजा सुनाई थी। लेकिन अभी हाल ही में इसे कम मानते हुए सजा-ए-मौत में तब्दील कर दिया। खबरों की मानें तो रॉबर्ट की सजा को बढ़ाए जाने के पीछे कनाडा में चीनी दूरसंचार कंपनी- हुआवे के एक वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी को कारण माना जा रहा है। अमेरिका के आग्रह पर कनाडा में इस अधिकारी की गिरफ्तारी हुई है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में हुआवे के अधिकारी को पकड़ा गया है।  (पीटीआई)

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Jan-2019
  • मोहित चतुर्वेदी
    इंडोनेशिनया, 18 जनवरी । इंडोनेशिनया में ऐसा हादसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। बुधवार को सुलावेसी आईलैंड में एक महिला को विशाल मगरमच्छ ने मार डाला। पुलिस ने बताया कि डीसी टुओ नॉर्थ सुलावेसी के मिनाहासा के पर्ल फॉर्म की लेबोरेट्री की हेड हैं। 14 फीट के मगरमच्छ ने गुरुवार को डीसी टुओ ने मार डाला। महिला की डेड बॉडी बुरी हालत में मिली। लोकल कंजरवेशन एजेंसी के हेंड्रिक रनडेनगन ने बताया कि गुरुवार सुबह 44 वर्षीय महिला की डेड बॉडी बुरी हलत में उनके घरवालों को मिली। 
    उन्होंने कहा- घटनाक्रम देखकर लग रहा है कि महिला मगरमच्छ का शिकार हो गई है। पुलिस की जांच जारी है। मगरमच्छ का नाम मैरी है। जिसने महिला का एक हाथ और पेट खा लिया। हेंड्रिक रनडेनगन ने बताया- डेड बॉडी के कई पार्ट गायब हैं। हो सकता है कि मगरमच्छ ने मारकर डेड बॉडी के पार्ट्स खाए हैं।
    पिछले सोमवार को बड़े से मगरमच्छ को बेहोश किया गया और बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। दर्जन से ज्यादा लोगों ने मगरमच्छ का ऑपरेशन किया। जिसमें आर्मी और पुलिस के लोग भी शामिल थे। उसे बेहोश करके 3 घंटे तक ऑपरेशन चला और डेड बॉडी के पार्ट्स को निकाले गए। हेंड्रिक रनडेनगन ने कहा- डीसी टुओ ने अवैध रूप से रूप से मगरमच्छ को घर में रखा था। जिसे जंगल में छोड़ दिया गया है। 
    इस मगरमच्छ को इंडोनेशिया के एक द्वीप से लाया गया था। जहां कई खतरनाक मगरमच्छ पाए जाते हैं जो लोगों पर अटैक करते हैं और उन्हें खा जाते हैं। अप्रैल 2016 में राजा अमपट आईलैंड में रशियन टूर्रिस्ट पर मगरमच्छ ने हमला किया था और मार डाला था।  (एनडीटीवी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Jan-2019
  • बीजिंग, 18 जनवरी । चाइना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। एक चीनी कंपनी ने टारगेट पूरा न होने पर कर्मचारियों को बीच सडक़ रेंगने पर मजबूर किया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। लोग कंपनी की इस हरकत से काफी हैरान हैं और खूब आलोचना कर रहे हैं। कर्मचारी साल का टारगेट पूरा नहीं कर पाए तो सजा के तौर पर कंपनी ने कर्मचारियों को बीच सडक़ पर रेंगने पर मजबूर किया गया।
    वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग भीड़-भाड़ वाली सडक़ पर रेंग रहे हैं। आगे एक शख्स झंडा लेकर चल रहा है और पीछे कर्मचारी रेंग रहे हैं। सभी कर्मचारी सूट-बूट में हैं। सुबह ऑफिस पहुंचने के बाद जब उन्हें पता चला कि टारगेट पूरा न होने पर उन्हें सजा दी जाएगी तो वो भी हैरान थे। जब उनको बाहर बुलाकर रेंगने को कहा गया तो वो रेंगने पर मजबूर हो गए। कुछ देर बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और इसे रोका गया। लेकिन उससे पहले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। इस वीडियो को एससीएमपी ने ट्विटर पर पोस्ट किया है। 
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद कंपनी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। कंपनी के असंवेदनशील व्यवहार की वजह से लोगों में काफी गुस्सा है। ट्विटर पर कुछ लोगों ने कंपनी को हमेशा के लिए बंद करने को कहा तो कुछ लोगों ने कर्मचारियों पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा- कर्मचारियों को ऐसा करने की जरूरत क्या थी? क्या सैलरी के कारण वो ऐसा कर रहे थे?
    चीन में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले साल एक चीनी कंपनी ने टारगेट न पूरा होने के कारण कर्मचारियों को सजा दी थी। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।  (एनडीटीवी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Jan-2019
  • मेलबर्न, 18 जनवरी । ऑस्ट्रेलिया में ऐसा हादसा हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। इजरायली स्टूडेंट ऑस्ट्रेलिया में घूम रही थी। आधी रात ऐसा हादसा हुआ जिससे उसकी मौत हो गई। पता लगाया जा रहा है कि ये हादसा कैसे हुआ। घटना के दौरान वह अपनी बहन के साथ फोन पर बात कर रही थी। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने जनता से 21 वर्षीय ऐय्या मासरवे के हत्यारे का पता लगाने में मदद करने की अपील की है जिसका शव बुधवार सुबह मेलबर्न विश्वविद्यालय के परिसर के पास मिला था जहाँ वह पढ़ाई कर रही थी।
    मेलबर्न में डिटेक्टिव इंस्पेक्टर ने कहा कि यह एक भीषण व भयानक हमला था, जिसने उस निर्दोष युवती की जान ले ली, जो हमारे शहर की मेहमान थी। मेलबर्न की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी में एक साल के एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत पांच महीने बीता चुकी मासरवे आधी रात के करीब एक कॉमेडी क्लब से निकलने के बाद ट्राम के जरिये उपनगरीय इलाके बुंदूरा जा रही थी। 
    पुलिस ने कहा कि वह अपनी बहन के साथ फोन पर बात कर रही थी, जो विदेश में थी और तभी बातचीत के बीच में ही कुछ गलत होते देख उसने शोर मचाया। स्टैम्पर ने कहा, उसने (उसकी बहन) फोन के जमीन पर गिरने की आवाज और कुछ अलग आवाजें भी सुनी। बुधवार सुबह सात बजे स्टॉप से करीब 50 मीटर दूर राहगीरों ने उसका शव देखा। उसी स्टॉप पर वह ट्राम से बाहर निकली थी।
    स्टैम्पर ने कहा कि उसी वक्त उसकी बहन की तरफ से भी इसकी सूचना मिली। पुलिस ने इन खबरों की पुष्टि नहीं की कि वे इस मामले की यौन उत्पीडऩ पहलू से भी जांच कर रहे हैं, लेकिन इतना जरूर कहा कि कुछ यौन अपराधी भी जांच के दायरे में हैं। छात्रा के परिजन ऑस्ट्रेलिया पहुंच रहे हैं। (एनडीटीवी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Jan-2019
  • सलवा आठ महीने पहले अपना घर छोड़कर चली गईं थीं और अब कनाडा में रह रही हैं। यह एक नाटकीय कहानी की तरह है जिसने सऊदी अरब में महिलाओं पर लगने वाले प्रतिबंधों पर रोशनी डाली।

    18 साल की राहफ मोहम्मद अल-कुनन के मामले ने तब पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था जब उन्होंने बैंकॉक हवाई अड्डे पर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था और वापस जाने से मना कर दिया था। वह सऊदी अरब में अपना परिवार छोड़कर आई थीं और ट्वीटर पर उनके समर्थन में एक कैंपेन चलने के बाद उन्हें कनाडा में आश्रय दिया गया।
    इस घटना के बाद से सऊदी अरब में महिला अधिकारों की बात फिर से उठने लगी और उन पर लगने वाले प्रतिबंधों पर सवाल उठाए जाने लगे। इन्हीं स्थितियों से गुजरी एक और लड़की ने बीबीसी को अपनी कहानी बताई जो सऊदी अरब छोड़कर कनाडा आ गई थीं।
    24 साल की सलवा अपनी 19 साल की छोटी बहन के साथ आठ महीने पहले घर छोड़कर भाग गई थीं और अब वह मॉन्ट्रीओल रहती हैं। पढ़ें, सलवा की कहानी उन्हीं के शब्दों में। हम करीब छह साल से सऊदी अरब छोडऩे की तैयारी कर रहे थे। लेकिन, हमें इसके लिए पासपोर्ट और नेशनल आईडी कार्ड की जरूरत थी।
    मुझे इन सभी दस्तावेजों के लिए अपने अभिभावकों की सहमति की जरूरत थी (सऊदी अरब में महिलाओं को कई चीजों के लिए किसी पुरुष संबंधी की अनुमति की जरूरत होती है।) पर अच्छी बात ये थी कि मेरे पास आईडी कार्ड था क्योंकि विश्वविद्यालय में पढऩे के दौरान मेरे परिवार ने इसके लिए सहमति दे दी थी।
    मेरे पास पासपोर्ट भी था क्योंकि मुझे दो साल पहले अंग्रेजी की परीक्षा के लिए इसकी जरूरत थी। लेकिन, मेरे परिवार ने मुझसे ये सब ले लिया था और मुझे उनसे इन्हें वापस लेना था।
    मैंने अपने भाई के घर से चाबियां चुराईं और दुकान पर जाकर उनके जैसी नकली चाबियां बनवा लीं। जब घरवाले सो रहे थे तो मैंने चुपके से घर से निकलकर ये सब काम किया। ये बहुत जोखिम भरा था क्योंकि अगर मैं पकड़ी जाती तो मेरे साथ बहुत बुरा हो सकता था।
    अब मेरे पास चाबियां थीं तो मैंने अपना और बहन का पासपोर्ट निकाल लिया और जब मेरे पिता सो रहे थे तो उनका फोन ले लिया। इसके जरिए मैंने गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उनके अकाउंट में लॉगइन किया और उनके पंजीकृत नंबर को बदलकर अपना नंबर डाल दिया। मैंने उनके अकाउंट से हम दोनों के लिए देश छोडऩे की सहमति ले ली।
    एक रात जब सब लोग सो रहे थे तो हम दोनों किसी तरह भाग गए। उस वक्त हम दोनों बहुत तनाव में थे। हम ड्राइव नहीं कर सकते थे इसलिए हमने टैक्सी मंगवाई। अच्छी बात ये थी सभी टैक्सी ड्राइवर विदेशों से हैं इसलिए उन्हें हमें अकेले जाता देख हैरानी नहीं हुई।
    हम रियाद के पास किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए निकले। उस वक्त अगर किसी को भी पता चल जाता कि हम क्या कर रहे हैं तो हमारी हत्या तक हो सकती थी। जब मैं कॉलेज के आखऱिी साल में थी तब से मैं एक अस्पताल में काम कर रही हूं। मैंने इतने पैसे इक_े कर लिए थे कि जर्मनी के लिए एक हवाई जहाज की टिकट और एक ट्रांजिट वीजा खरीद सकूं। मेरे पास बेरोजगारी भत्ते के भी पैसे थे।
    मैंने अपनी बहन के साथ जर्मनी की फ्लाइट ली। वह पहली बार था जब मैं हवाई जहाज में बैठी थी। वो एक गजब का अनुभव था। मैं खुश थी, डरी हुई थी बल्कि मैं सबकुछ एक साथ महसूस कर रही थी। जब मेरे पिता को पता चला कि हम दोनों ने घर छोड़ दिया है तो उन्होंने पुलिस बुलाई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
    और जैसे कि मैंने गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उनका फोन नंबर बदल दिया था तो जब अधिकारी उन्हें फोन करते तो वो मेरे पास आता था। जब हम जर्मनी में उतरे तो मुझे पुलिस की तरफ से एक मैसेज भी आया जो दरअसल मेरे पिता के लिए था।
    सऊदी अरब में कोई जिंदगी नहीं है। मेरी जिंदगी सिर्फ इतनी थी कि मैं घर से विश्वविद्यालय और वहां से घर आती थी। इसके अलावा मैं कुछ नहीं करती थी। वो मुझे गलत बातें सीखाते थे जैसे कि मर्द हमसे ऊपर होता है। मुझे रमजान में रोजा रखने के लिए मजबूर किया जाता था।
    जब मैं जर्मनी पहुंची तो मैं आश्रय को लेकर कानूनी मदद के लिए वकील के पास गई। मैंने फॉर्म भरे और उन्हें अपनी कहानी बताई। मैंने कनाडा में रहने का फैसला किया क्योंकि मानवाधिकार के मामले में यह देश बहुत अच्छा माना जाता है। मैंने खबरों में पढ़ा था कि सीरिया के शरणार्थियों को वहां बसाया जा रहा है।
    मेरी अर्जी को स्वीकार कर लिया गया। जब मैं टोरंटो उतरी तो मैंने एयरपोर्ट पर कनाडा के झंडे को देखा और वहां होना मेरे लिए एक उपलब्धि की तरह था। मैं आज अपनी बहन के साथ बिना किसी तनाव के मॉन्ट्रीओल में रह रही हूं। कोई यहां मुझे कुछ करने के लिए मजबूर नहीं करता। हो सकता है कि सऊदी अरब में ज्यादा पैसा हो लेकिन यहां जिंदगी ज्यादा बेहतर है क्योंकि अब मैं जब चाहूं अपने अपार्टमेंट से निकल सकती हूं। इसके लिए मुझे किसी की सहमति की जरूरत नहीं।
    यह बात मुझे बहुत ज्यादा खुशी देती है। मुझे आजादी महसूस होती है। मैं जो चाहती हूं वो पहन सकती हूं। मुझे यहां पतझड़ और बर्फ बहुत अच्छे लगते हैं। मैं फ्रेंच सीख रही हूं लेकिन वो बहुत मश्किल है। मैं बाइक चलाना, तैरना और आइस स्केटिंग भी सीख रही हूं। मुझे लग रहा है कि मैं जिंदगी में कुछ कर रही हूं। मेरी मेरे परिवार से बातचीत नहीं होती है। लेकिन, मुझे लगता है कि ये मेरे और उनके दोनों के लिए अच्छा है और अब मुझे यहां अपने घर जैसा ही लगने लगा है। बल्कि ये ज्यादा अच्छा है।(बीबीसी)

     

     

     

     

    ...
  •  


Posted Date : 18-Jan-2019
  • नई दिल्ली, 18 जनवरी । चीन इस्लाम का चीनीकरण करने की योजना बना रहा है। इस पंचवर्षीय योजना का मकसद देश में अल्पसंख्यक मुसलमानों पर नियंत्रण मजबूत करना है। इस्लाम के चीनीकरण का मतलब है इसे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारों के अनुरूप करना। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में इसे लेकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जोरदार अपील के बाद कम्युनिस्ट पार्टी की एक इकाई इस्लाम, ईसाइयत और बौद्ध जैसे बाहर से आए धर्मों के चीनीकरण के लिए काम कर रही है। इस इकाई का नाम है यूनाईटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट। यह इकाई देश में अस्थिरता पैदा करने वाले कारणों की पहचान करके उनका हल खोजती है।
    इस्लाम के चीनीकरण की यह नई योजना चीन के लिए अंतरराष्ट्रीय आलोचना और जांच का सबब बन सकती है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब वहां के शिनजियांग प्रांत में लाखों उइगुर मुसलमानों को अलग शिविरों में रखे जाने की रिपोर्टें आई हैं। शिनजियांग एक स्वायत्त क्षेत्र है जो चीन के पश्चिमी हिस्से में मध्य एशिया की सीमा पर है। एक करोड़ की उइगर मुसलमानों की आबादी वाला यह प्रांत 1949 में कुछ समय के लिए एक अलग राष्ट्र (पूर्वी तुर्किस्तान) बना था लेकिन उसी साल चीन ने उसे अपना हिस्सा बना लिया। साल 1990 के बाद से यहां के मुस्लिम एक अलग राष्ट्र की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं जिसमें हजारों लोग मारे जा चुके हैं। (बीबीसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Jan-2019
  • वाशिंगटन, 17 जनवरी । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन भारतीय-अमेरिकी नागरिकों को अपने प्रशासन में अहम पदों पर नियुक्त किया है। इनके नाम अमेरिकी संसद की मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं। इन्हें जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है।
    खबरों के मुताबिक जिन भारतीय-अमेरिकियों को नियुक्तियां दी गईं उनके नाम रीता बरनवाल, आदित्य बमजई और बिमल पटेल बताए गए हैं। इनमें रीता बरनवाल को परमाणु ऊर्जा विभाग में सहायक सचिव बनाया गया है। वहीं निजता एवं नागरिक आजादी से जुड़े मामलों पर निगाह रखने वाले बोर्ड में आदित्य बमजई को सदस्य बनाया गया है। जबकि कोषालय विभाग में बिमल पटेल सहायक सचिव बनाए गए हैं।
    इस तरह अब तक ट्रंप प्रशासन में भारतीय-अमेरिकियों की संख्या तीन दर्जन का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह संख्या तब है जब दो भारतीय-अमेरिकी निक्की हेली और राज शाह ट्रंप प्रशासन की सेवाएं छोड़ चुके हैं। निक्की हेली पहली भारतीय-अमेरिकी थीं, जिन्हें कैबिनेट रैंक मिली थी। वे संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत थीं। जबकि राज शाह पहले भारतीय अमेरिकी थे जिन्हें प्रेस उपसचिव बनाया गया था। (पीटीआई)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Jan-2019
  • वॉशिंगटन, 17 जनवरी । दुनिया भर में बुधवार को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्तीफे की फर्जी खबर फैल गई। इसको लेकर अमरीका समेत दुनियाभर में ट्रंप विरोधी लोग जश्न मनाने लगे। दरअसल, बुधवार को अमरीका में ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ न्यूज पेपर के फर्जी संस्करण का व्हाइट हाउस के आस-पास और वॉशिंगटन के व्यस्त इलाके में खुले आम वितरण हुआ। इसमें दावा किया गया कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफा दे दिया है। मूल न्यूज पेपर के संस्करण की तरह इसे पेश किया गया। इसमें 6 कॉलम में बड़ा शीर्षक दिया गया- ‘अप्रत्याशित : ट्रंप व्हाइट हाउस से विदा, संकट खत्म’ (च्हृक्कक्रश्वस्ढ्ढष्ठश्वहृञ्जश्वष्ठ ञ्जह्म्ह्वद्वश्च द्धड्डह्यह्लद्बद्य4 स्रद्गश्चड्डह्म्ह्लह्य ङ्खद्धद्बह्लद्ग ॥शह्वह्यद्ग, द्गठ्ठस्रद्बठ्ठद्द ष्ह्म्द्बह्यद्बह्यज्)।
    इस लीड न्यूज में 4 कॉलम में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर लगी हुई है, जिसमें वो सिर नीचे झुकाए परेशान नजर आ रहे हैं। न्यूज पेपर में एक मई, 2019 की तारीख भी दर्ज थी। पेनसिलवेनिया एवेन्यू और व्हाइट हाउस के बाहर इस न्यूज पेपर को बांट रही एक महिला ने कहा कि वॉशिंगटन पोस्ट का यह विशेष संस्करण लीजिए। यह मुफ्त है। आपको यह कभी नहीं मिलेगा। महिला प्लास्टिक बैग में न्यूज पेपर का बंडल रखकर वहां से गुजरने वालों को उससे निकालकर न्यूज पेपर थमा रही थी।
    वहीं, यह मामला सामने आने के बाद ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने ट्वीट कर अपना स्पष्टीकरण जारी किया। वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा कि कि ट्रंप के इस्तीफे की फर्जी न्यूज वाले अखबार का वितरण किया गया। इस फर्जी न्यूज पेपर से वॉशिंगटन पोस्ट का कोई लेना-देना नहीं है। इस घटना की जांच की जा रही है। हालांकि अभी इस खबर पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    अमरीका में मैक्सिको की दीवार को लेकर विवाद गहराया हुआ है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैक्सिको की दीवार बनाने के लिए संसद यानी कांग्रेस से फंड को मंजूरी देने की मांग कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट्स सांसद इसके पक्ष में नहीं हैं। अमरीकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी का वर्चास्व कायम हो गया है और डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अल्पमत में है। दोनों के बीच जारी खींचतान के चलते अमरीका कामबंदी से जूझ रहा है।
    इसकी वजह से अमरीका की एक चौथाई सरकारी मशीनरी काम नहीं कर पा रही है। देशभर में करीब 8 लाख कर्मचारी ऐसे हैं, जो छुट्टी पर हैं या फिर बिना तनख्वाह के काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अमरीका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर डेमोक्रेट्स मैक्सिको से लगने वाली सीमा की दीवार के लिए फंड को मंजूरी नहीं देते हैं, तो वो आपातकाल लागू कर देंगे। अमरीका में यह पहला मौका नहीं है, जब ट्रंप का विरोध हो रहा है। इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति ने मुस्लिमों की निगरानी समेत कई ऐसे फैसले लिए थे, जिनकी वजह से उनको लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। (भाषा)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Jan-2019
  • लंदन, 17 जनवरी । ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे के खिलाफ संसद में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। विपक्षी लेबर पार्टी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी, 325 सांसदों ने सरकार का साथ दिया और 306 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
    प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के बारे में यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे लेकर वो मंजूरी दिलवाने मंगलवार को संसद में गईं, लेकिन संसद ने उसे एक सिरे से खारिज कर दिया था। उसके बाद लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बेन ने कहा था कि टेरीजा मे की सरकार संसद में अपना विश्वास खो चुकी है।
    बुधवार को ब्रितानी संसद में छह घंटों तक अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई जिसके बाद वोटिंग हुई। लेकिन टेरीजा मे की अपनी पार्टी के बागी सांसद और डीयूपी के सांसद जिन्होंने सिर्फ 24 घंटे पहले टेरीजा मे के ब्रेक्सिट डील के विरोध में वोट किया था, बुधवार को उन सांसदों ने सरकार से समर्थन में वोट डाला।
    इसी वजह से टेरीजा मे केवल 19 वोटों के अंतर से अपनी सरकार बचाने में कामयाब रहीं। अविश्वास प्रस्ताव गिर जाने के बाद प्रधानमंत्री मे ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि  यूरोपीय संघ छोडऩे के लिए हुए जनमत संग्रह के नतीजों का पालन करने और इस देश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए मैं काम करती रहूंगी।
    उन्होंने सभी पार्टी के नेताओं से अपील की कि वो उनसे मिलकर ब्रेक्सिट के लिए आगे का रास्ता तलाशने में उनकी मदद करें। उनका कहना था कि  हमें ऐसा हल ढूंढना चाहिए जो कि विचार करने योग्य हो और जिसे इस सदन का पर्याप्त समर्थन हासिल हो। लेकिन नेता प्रतिपक्ष जेरेमी कोर्बेन ने कहा कि किसी भी सकारात्मक बातचीत से पहले प्रधानमंत्री को नो-डील ब्रेक्सिट की संभावना को खारिज करना होगा।
    कोर्बेन का कहना था कि  सरकार को बिल्कुल स्पष्ट तरीके से हमेशा के लिए यूरोपीय संघ से बिना किसी समझौते के अलग होने की स्थिति में होने वाली तबाही और उसके नतीजे में फैलने वाली अराजकता की किसी भी आशंका को दूर करना होगा। प्रधानमंत्री मे ने विश्वास दिलाया कि वो एक नए प्रस्ताव के साथ सोमवार को सदन के सामने होंगी। उनका कहना था कि  ब्रेक्सिट पर काम करने और ये सुनिश्चित करने की इस सदन पर ब्रिटेन की जनता का विश्वास बना रहे, मैं इस सदन के किसी भी सदस्य के साथ काम करने के लिए तैयार हूं।  (बीबीसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Jan-2019
  • कीनिया, 17 जनवरी । कीनिया के एक होटल में चरमपंथी हमले में 21 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। कीनिया सरकार ने नैरोबी के वेस्टलैंड्स इलाके में स्थित लग्जरी होटल डुस्टीडी-2 पर हुए चरमपंथी हमले में मृतकों की पुष्टि की है।
    हमले में घायल 28 लोगों का नैरोबी के अस्पताल में इलाज चल रहा है। कीनिया की रेड क्रास ने कहा है कि 19 लोग अभी भी लापता हैं। कीनिया के राष्ट्रपति उहुरू केन्याटा ने कहा है कि राजधानी नैरोबी में एक आलीशान होटल पर संदिग्ध चरमपंथियों का कब्जा समाप्त हो गया है और हमलावरों को मिटा दिया गया है।
    उन्होंने टीवी पर दिए अपने संदेश में कहा, वो हर व्यक्ति जो इस जघन्य अपराध के वित्तपोषण और इसे अमल में लाने की योजना में शामिल था, उसे ढूंढ निकाला जाएगा।
    मंगलवार को कुछ बंदूकधारियों ने शहर के वेस्टलैंड्स इलाके में स्थित इस होटल और यहां के दफ्तरों पर धावा बोला था। हमलावरों के कब्जे से इलाके को मुक्त कराने में सुरक्षाकर्मियों को करीब 19 घंटे का वक्त लगा।
    इस हमले की जिम्मेदारी सोमालिया के चरमपंथी समूह अल-शबाब ने ली है। अक्टूबर 2011 में सोमालिया में जिहादी समूह से लडऩे के लिए अपनी सेना भेजने के बाद से ही कीनिया अल-शबाब के टारगेट पर है।
    नैरोबी से एंड्रयू हार्डिंग ने बताया, सुबह तक आ रही छिटपुट गोलीबारी और विस्फोट की आवाजों के बीच मंगलवार रात भर सुरक्षाबल डरे सहमे नागरिकों के समूहों को इलाके से सुरक्षित निकालने में जुटे रहे, कई लोगों ने अपने दफ्तरों या बाथरूम में छिपकर घंटों बिताए।
    एएफपी के मुताबिक बुधवार को पुलिस छापे में हमले से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, अल-शबाब ने एक बयान जारी कर इस हमले को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के येरुशलम को इसराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के फैसले का जवाब बताया। येरुशलम इस्लाम, यहूदी और ईसाई धर्म का एक पवित्र शहर है- और इसराइल पूरे येरूशलम को अपनी अविभाज्य राजधानी मानता है, तो फलस्तीनी शहर के पूर्वी हिस्से को अपने भविष्य की राजधानी के रूप में दावा करते हैं।
    इस हमले में मारे गए लोगों में एक अमरीकी नागरिक जेसन स्पिंडलर भी शामिल हैं। उनके भाई जोनाथन ने ट्वीट कर बताया कि जेसन 2001 में न्यूयॉर्क में हुए 9/11 हमले में बच गये थे। एनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उनकी मां सारा स्पिंडलर ने कहा, उनका बेटा तीसरी दुनिया के उभरते बाजारों में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रहा था।
    ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने बताया कि इस हमले में दोहरी राष्ट्रीयता रखने वाले ब्रिटिश ल्यूक पोटर की भी मौत हो गई है, वहीं एक अन्य ब्रिटिश नागरिक घायल हुए हैं। कोबरा के नाम से मशहूर कीनियाई जेम्स ओडोर की भी इस हमले में मौत हो गई है। उन्हें फुटबॉल की उनकी दीवानगी के लिए पसंद किया जाता था। इस हमले में फंसे होने के बावजूद जेम्स लगातार ट्वीट कर रहे थे।
    खबर के मुताबिक, हमले के दौरान दो कीनियाई नागरिक अब्दुल्ला दाहिर और फैसल अहमद होटल के मैदान में एक साथ लंच कर रहे थे। उनके दोस्तों ने बताया कि इन दोनों के बीच अटूट दोस्ती थी।
    ये हमला स्थानीय समयानुसार दोपहर तीन बजे शुरू हुआ। बंदूकधारियों ने इमारत में प्रवेश से पहले कार पर्किंग में बम फेंके। कीनिया के चीफ पुलिस जोसेफ बोइनेट ने बताया कि यहां हमलावरों में से एक ने खुद को बम के साथ उड़ा लिया।
    पास की इमारत में काम करने वाली एक महिला ने समाचार एजेंसी रायटर्स से कहा, मैंने गोलियां चलने की आवाज सुनी, फिर हाथ ऊपर उठाए लोगों को भागते हुए देखा, कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए बैंक में घुस रहे थे।
    हमले में सुरक्षित बचे रोन जेनो ने ट्वीट कर लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, आपके समर्थन के लिए धन्यवाद। मैं अब अपने परिवार के साथ घर से बाहर हूं। दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के लिए बहादुर @NPSOfficial_KE @kdfinfo  को धन्यवाद। हाल के वर्षों में कीनिया में कई हमले की घटनाएं सामने आई हैं। ज्यादातर हमले देश की राजधानी के सोमाली सीमा के करीब किए गए। (बीबीसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Jan-2019
  • लंदन, 17 जनवरी । ब्रेक्जिट समझौते के ब्रिटेन की संसद में गिरने के बाद मुश्किलों में घिरीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे के लिए बुधवार थोड़ी राहत लेकर आया। विपक्षी लेबर पार्टी द्वारा उनके खिलाफ संसद में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। खबर के मुताबिक 325 सांसदों ने उनकी सरकार का समर्थन किया। वहीं, 306 सांसदों ने संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। मे को 19 मतों के अंतर से जीत मिली। इससे एक दिन पहले यूरोपीय संघ के साथ ब्रेक्जिट समझौते को लेकर संसद में थेरेसा मे की ऐतिहासिक हार हुई थी।
    लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद मे ने सांसदों से अपील की कि वे अपने ‘निजी हितों को दरकिनार’ कर ब्रेक्जिट के लिए ‘मिलकर रचनात्मक तरीके से काम’ करें। मे ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर कहा, अब हम सब को ब्रेक्जिट पर आगे काम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ब्रिटेन के लोग चाहते हैं कि हम ब्रेक्जिट समझौता जल्द से जल्द कर लें और उनसे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी ध्यान दें।
    मे ने कहा कि वे आगे की ऐसी राह तलाशने के लिए सभी दलों के सांसदों को मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित करेंगी, जिसे लोगों का और संसद का समर्थन हासिल हो। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि ब्रिटेन के लोगों के यूरोपीय संघ छोडऩे के निर्देश को मानना मेरा कत्र्तव्य है। इसके साथ ही मे ने उनकी योजनाओं पर पुन: मतदान के लिए सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में फिर से आने का वादा दोहराया। (पीटीआई)

     

    ...
  •  


Posted Date : 17-Jan-2019
  • संयुक्त राष्ट्र, 17 जनवरी । संयुक्त राष्ट्र के करीब एक तिहाई कर्मचारियों ने पिछले दो वर्षों में यौन शोषण का शिकार होने की जानकारी दी है। इस तरह के दुव्र्यवहार को लेकर हुए पहले सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
    मंगलवार को जारी हुए सर्वेक्षण के नतीजों के अनुसार पिछले दो वर्षों में करीब 33 प्रतिशत कर्मचारियों का कम से कम एक बार यौन शोषण किया गया है। यौन उत्पीडऩ करने वाले हर तीन व्यक्तियों में दो पुरुष और हर चार में से एक निरीक्षक या प्रबंधक था। सर्वेक्षण के अनुसार यौन शोषण करने वाले प्रत्येक 10 लोगों में एक व्यक्ति संस्था का वरिष्ठ नेता था। यौन शोषण की सबसे आम घटनाओं में यौन कहानियां या चुटकुले सुनाना है। इनके जरिए महिलाओं के कपड़ों, शरीर या यौन गतिविधियों को लेकर अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं।
    सर्वेक्षण के नतीजों के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कर्मचारियों को एक पत्र में कहा है कि ये आंकड़े और तथ्य दुखी और चिंतित करने वाले हैं जिन्हें बदलने की जरुरत है ताकि संयुक्त राष्ट्र के कार्यस्थल में सुधार किया जा सके। गुतारेस के मुताबिक सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि विश्व निकाय में यौन शोषण के मामले अन्य संगठनों के मुकाबले कम हैं लेकिन समानता, गरिमा और मानवाधिकारों में चैम्पियन संयुक्त राष्ट्र को उच्च मानक तय करने चाहिए।  (सत्याग्रह)

     

    ...
  •  


Posted Date : 16-Jan-2019
  • बिल कोड

    13 साल के हडसन होर्न ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड के सनशाइन कोस्ट की चमकती रेत पर ड्रोन उड़ा रहे हैं। उनकी पैनी निगाहें मिनी-एयरक्राफ्ट पर भी हैं और उसके रिमोट से जुड़े मॉनिटर पर भी।
    मॉनिटर पर कोई परफेक्ट व्यू मिलते ही वो कैमरे का कमांड देते हैं और तस्वीर खिंच जाती है। पैसे कमाने के लिए दुनिया भर के किशोर कई तरह के काम करते हैं। कुछ किशोर बच्चे संभालते हैं। कुछ घास काटते हैं। किराने के सामान पैक करके भी कुछ किशोर पैसे कमाते हैं। लेकिन सभी किशोर मिनी-एयरक्राफ्ट बनाकर आसमान से फोटो नहीं खींचते, न ही वे ऐसा करके पैसे कमाने के बारे में सोच पाते हैं। हडसन होर्न ठीक यही काम करते हैं। वह 13 साल के ड्रोन फोटोग्राफर हैं।
    हमारी मुलाकात सबसे पहले सनशाइन कोस्ट पर ही हुई। होर्न ने बताया कि वह एक ड्रोन बिजनेस चलाते हैं, जिसका नाम नेक्स्ट लेवल लेंस है।
    होर्न एरियल फोटोग्राफी करते हैं। उनको ऑस्ट्रेलिया के ड्रोन किड के रूप में जाना जाता है। अपने माता-पिता की मदद से होर्न ने ड्रोन फोटोग्राफी का बिजनेस खड़ा किया है। उन्होंने अपनी हॉबी को बिजनेस में बदला है और किशोर अवस्था में ही उद्यमी बनने की तरफ कदम बढ़ा दिया है।
    होर्न का कहना है कि वह कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए दो साल से नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले साल उन्होंने 7,000 डॉलर से ज्यादा कमाए थे। किसी स्कूली छात्र के लिए इतनी कमाई बुरी नहीं है।
    होर्न रियल इस्टेट की फोटोग्राफी करते हैं। वह विशेष आयोजनों की फोटोग्राफी के लिए बुलाए जाते हैं। वह फोटो खींचते हैं और उनको पोस्टकार्ड और प्रिंट बनाकर बेचते हैं। कभी-कभी वह शादियों में भी ड्रोन फोटोग्राफी करते हैं। कुछ प्रोजेक्ट डेवलपर और रियल इस्टेट बिल्डर भी उनकी सेवाएं लेते हैं।
    होर्न को जब पहला ड्रोन मिला था, तब वो सिर्फ 9 साल के थे। होर्न को उससे पहले से ही मशीनों से प्यार है। जब वह 8 साल के थे, तभी से वो रेडियो कंट्रोल कार के कल-पुर्जे निकालकर उसकी जांच किया करते थे। बाद में ड्रोन के साथ भी उन्होंने ऐसे ही प्रयोग किए और उसके बारे में सीखा। वह कहते हैं, मेरी रुचि रोबोटिक्स में है। मैं समझना चाहता हूं कि चीजें कैसे चलती हैं।
    वह ड्रोन के इंजन को खोलकर उसके हर पुर्जे का काम समझते हैं। कुछ प्रयोग करते हैं और मशीन को फिर से जोड़ देते हैं। अपने पहले ड्रोन के लिए पैसे जुटाने की खातिर उन्होंने बचपन के खिलौने बेच दिए थे। पैसे कम पड़ गए तो उन्होंने अपने मां-बाप से कर्ज लिया।
    एक दिन वह समुद्र किनारे ड्रोन उड़ाने और उससे फोटो खींचने की प्रैक्टिस कर रहे थे, वहीं पर उनकी मां की एक सहेली आईं जो रियल इस्टेट में एजेंट थीं। उन्होंने होर्न को पहला काम दिलाया।
    रियल इस्टेट सेक्टर में पहला काम खत्म करने के बाद उन्होंने मछुआरों के एक टूर्नामेंट की फोटोग्राफी की और उसकी तस्वीरें मछुआरों को बेची। इस किशोर ने छह महीने का बिजनेस कोर्स भी किया है जिसमें उन्होंने व्यापार और निवेश के गुर सीखे।
    वो बताते हैं, मैंने सीखा कि अगर आप कुछ नया बिजनेस खरीदना चाहते हैं तो आपको अपने पिछले निवेश का पैसा दोगुना करना होगा। होर्न ने जब बिजनेस शुरू किया था तब वो सिर्फ 11 साल के थे। कानूनी तौर पर वह काम नहीं कर सकते थे। इसलिए उन्होंने एक फैमिली ट्रस्ट बनाया जिससे कि वह कानूनी तौर पर अपना बिजनेस चला सकें।
    पिछले साल हडसन ने अपने बिजनेस से 7,000 डॉलर से ज्यादा कमाए। होर्न खाली समय में भी ड्रोन से खेलते रहते हैं। वह कहते हैं, मैं वीडियो गेम्स खेलने की जगह दिन भर ड्रोन के पुर्जे जोड़ सकता हूं।
    होर्न के दूसरे शौक भी आम बच्चों से अलग हैं। उनको पहाड़ों पर साइकिल चलाना पसंद है और वह स्कूल भी साइकिल से ही जाते हैं।
    वह बताते हैं, कई बार मैं अपने दोस्तों से इस बारे में बात करता हूं। वे यह देखना चाहते हैं कि मैं यह सब कैसे करता हूं।
    आप अगर रियल इस्टेट के काम में हैं या ऐसा ही कोई दूसरा काम कर रहे हैं तो आप यह नहीं कर सकते।
    होर्न का कहना है कि आगे क्या होगा उनको पता नहीं। लेकिन, रोबोटिक्स के प्रति उनका प्यार ही उनका भविष्य संवारेगा।
    वह एक बात के लिए आश्वस्त हैं कि उनका भविष्य ड्रोन से जुड़ा हुआ है। वैसे वह सिर्फ ड्रोन से फोटोग्राफी करके संतुष्ट नहीं हैं। एक दिन वह खुद से ड्रोन बनाना चाहते हैं। वो कहते हैं, यदि मैं इस पेशे से बाहर जाता हूं तो भी मैं ड्रोन बना सकता हूं। (बीबीसी)

     

    ...
  •  


Posted Date : 16-Jan-2019
  • वॉशिंगटन डीसी, 16 जनवरी । अमेरिकी इतिहास में सबसे लंबे शटडाउन का असर अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सरकारी आवाज व्हाइट हाउस पर पडऩे लगा है। बीते कुछ महीनों से सैलरी नहीं मिलने के बाद व्हाइट हाउस किचेन के शेफ छुट्टी पर चले गए हैं। इससे व्हाइट हाउस किचेन ठप हो गया। पहले से लंच या डिनर का निमंत्रण पा चुके मेहमानों के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने फास्टफूड का इंतजाम करते हुए पिज्जा और बर्गर खिलाना शुरू कर दिया है।
    गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने संसद से 5.7 बिलियन डॉलर अथवा 40 हजार करोड़ रुपये की मांग की थी। लेकिन राष्ट्रपति की इस मांग को संसद में डेमोक्रेट सांसदों ने ठुकरा दिया और इसके साथ ही अमेरिका में शटडाउन का ऐलान हो गया। मौजूदा शटडाउन अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा शटडाउन हो गया है। अमेरिका में शटडाउन अपने 22वें दिन में सोमवार को पहुंच गया है। इससे पहले राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में हुआ सबसे लंबा शटडाउन 21 दिनों तक चला था।
    सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कॉलेज फुटबाल चैंपियनशिप की विजेता टीम क्लेमसन टाइगर्स को व्हाइट हाउस लंच पर बुलाया था। लेकिन उसी दिन बिना सैलरी के काम करने से मना करते हुए व्हाइट हाउस किचेन के शेफ छुट्टी पर चले गए।
    इस स्थिति में राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस डाइनिंग रूम में मेहमानों के लिए फास्टफूड ऑर्डर करते हुए पिज्जा, बर्गर और फ्रेंच फ्राइज का इंतजाम करा दिया। खास बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह ऑर्डर अपने पैसे से मंगाया और इसके लिए कोई बिल व्हाइट हाउस में नहीं लगाया।
    गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ते समय वादा किया था कि राष्ट्रपति चुने जाने पर वह पड़ोसी देश मेक्सिको से अमेरिका में अवैध एंट्री करने वालों को रोकने के लिए सरहद पर दीवार का निर्माण कराएंगे। लिहाजा, राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने इस दिशा में कदम बढ़ाया लेकिन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए संसद से अतिरिक्त बजट की मांग की जिसे डेमोक्रैट पार्टी के सांसदों ने रोक दिया।
    इसके बाद अमेरिका में शटडाउन शुरू हो गया। हजारों की संख्या में सरकारी कर्मचारियों को घर खर्च की समस्या खड़ी हो चुकी है क्योंकि इन 22 दिनों के दौरान उन्हें वेतन नहीं दिया गया है। बीते हफ्ते आए आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कुल 8 लाख सरकारी कर्मचारियों का वेतन नहीं मिला जिसके बाद लाखों की संख्या में कर्मचारी छुट्टी पर घर बैठ गए हैं वहीं अन्य बिना सैलरी के काम करने पर मजबूर हैं।  (टेलीग्राफ)

     

    ...
  •  


Posted Date : 16-Jan-2019
  • ब्राजीलिया, 16 जनवरी । क्या आपने आसमान से बरसते हुए मकड़ों को देखा है। आप कहेंगे आसमान से भी क्या मकड़े बरसते हैं। ऐसा वाकई कुछ नहीं होता, लेकिन हम आपको दिखाने जा रहे हैं एक ऐसा विडियो जिसमें हजारों मकड़े आसमान में उड़ते दिख रहे हैं जैसा लग रहा हो बारिश की तरह बरस रहे हों। 
    सेसिलिया फॉन्सेका नाम की एक महिला ने फेसबुक पर कोई 11 सेकंड का एक विडियो शेयर किया है जिसमें आसमान में घने बादल हैं और हर तरह काले काले मकड़े उड़ते दिख रहे हैं। यह नजारा ब्राजील के मिनास जेराइस राज्य का है (नवभारत टाईम्स)

     

    ...
  •  


Posted Date : 16-Jan-2019
  • 60 की उम्र में आते-आते लोग काम से रिटायरमेंट लेने के लिए सोचते हैं। लेकिन चीन की एक महिला ने रिटायर होने के बाद ऐसा काम किया। उस उम्र में लोग आराम करने का सोचते हैं। चीन में बुक स्टोर में काम करने वली दाई डाली ने 2005 में जॉब छोड़ दी। जिसके बाद वो काम की तलाश में थीं। वो उदास रहने लगी थीं। जिसके बाद उनके मन में पोल डांस करने का सोचा और क्लास जाना शुरू कर दिया। उनको पोल डांस के बारे में कुछ भी नहीं पता था। लेकिन वो चाहती थीं कि पोल डांसर बनें और दुनिया को बताएं कि इस उम्र में भी कुछ भी किया जा सकता है। 
    65 साल की उम्र में दाई डाली ने पोल डांसिंग क्लास जाना शुरू किया। जिसके बाद उन्हें पोल डांस से प्यार हो गया। चाईनाडेली से बात करते हुए उन्होंने कहा- मुझे हवा में घूमते हुए डांस करना बहुत अच्छा लगता है। पोल डांस ने मेरी लाइफ को बदल दिया। 73 की उम्र में वो प्रोफेश्नल पोल डांसर बन चुकी हैं। उन्होंने बताया- शुरुआत में मुझे सीखने में कई परेशानियां हुईं। कई बार मुझे ऐसी चोटें लगीं जिसकी वजह से मुझे हफ्तेभर तक घर में ही रहना पड़ा। लेकिन मैंने ये पैशन नहीं छोड़ा। 
    3 साल पहले दाई डाली ने एशिया गॉट टैलेंज में परफॉर्मेंस दी थी। एएक्सएन एशिया ने यूट्यूब पर वीडियो शेयर किया है। जिसको खूब देखा गया और पसंद किया गया। जिसके लिए उनकी खूब तारीफ हुई और दुनिया ने उनका ये टेलेंट देखा था। वो इन सालों में कई अवॉर्ड्स जीत चुकी हैं। लोकल मीडिया से लेकर इंटरनेशनल मीडिया उनका इंटरव्यू कर चुका है। उनकी स्टोरी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। 

     

    ...
  •  




Previous12Next