अंतरराष्ट्रीय

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03-Dec-2020 6:52 PM 20

मॉस्को, 3 दिसंबर | मॉस्को में गत 24 घंटे में कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां इस दौरान कुल 28,145 लोग इस महामारी से संक्रमित हो गए, जिससे इस महामारी से संक्रमित होने वाले कुल रोगियों की संख्या बढ़कर 2,375,546 हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। न्यूज एजेंसी तास ने बताया कि एंटी-कोरोनावायरस क्राइसिस सेंटर ने एक प्रेस बयान में कहा कि देश की औसत संक्रमण वृद्धि दर अब 1.2 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

गत 24 घंटे में सबसे ज्यादा मामले मॉस्को से दर्ज किए गए। यहां इस दौरान कुल 7,750 नए कोविड -19 मामलों की पुष्टि की गई।

देश का कोविड-19 से मौत का आंकड़ा 40,630 तक पहुंच गया है।

--आईएएनएस


03-Dec-2020 6:44 PM 20

इस्लामाबाद, 3 दिसंबर | पाकिस्तान में कोरोनावायरस संक्रमण के कुल मामले 406,810 तक पहुंच गए हैं। वहीं पिछले 24 घंटों में और 3,499 नए मामले सामने आए हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने मंत्रालय के हवाले से बताया कि देश में बीमारी से कुल 8,205 लोगों की मौत हुई और 346,951 मरीज रिकवर हुए हैं। देश वर्तमान में संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सिंध प्रांत वर्तमान में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, यहां 177,625 मामले सामने आए हैं, इसके बाद सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में 121,083 मामले दर्ज किए गए हैं।

एक प्रेस ब्रीफिंग में बुधवार को स्वास्थ्य मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार फैसल सुल्तान ने कहा कि सरकार ने वैक्सीन की खरीद के लिए 15 करोड़ डॉलर का बजट आवंटित करने की मंजूरी दी है।

उन्होंने कहा कि फ्रंटलाइन हेल्थकेयर कर्मचारी और 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीन पहले दिया जाएगा।

वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय में फेडरल पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी नौशीन हामिद ने कहा कि सरकार अपने नागरिकों को नि: शुल्क वैक्सीन देगी और वैक्सीनेशन 2021 की दूसरी तिमाही में शुरू होगा।

--आईएएनएस


03-Dec-2020 5:09 PM 14

अफगान सरकार और तालिबान प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को हुई बातचीत में शांति वार्ता के लिए शुरुआती करार हो गया है. दोनों पक्षों के बीच बीते 19 सालों में यह पहले लिखित समझौते की संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने सराहना की है.

 dw.com

यह समझौता आगे की बातचीत के लिए रूपरेखा तैयार करेगा. इसे शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए वार्ताकार युद्धविराम जैसे अहम मुद्दों की ओर बढ़ सकेंगे. अफगान सरकार की तरफ से वार्ताकारों में शामिल नादर नादरी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "बातचीत की प्रक्रिया और प्रस्तावना तय हो गई है और अब एजेंडे पर बातचीत शुरू होगी." तालिबान के प्रवक्ता ने भी इस बात की पुष्टि ट्वीटर पर की है.

यह समझौता कतर की राजधानी दोहा में कई महीनों की बातचीत के बाद संभव हुआ है जिसे अमेरिका बढ़ावा दे रहा है. दोनों पक्ष अभी भी युद्धरत हैं और तालिबान अफगानिस्तान की सरकारी सेना को लगातार निशाना बना रहा है.

अफगान समझौते के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जालमाय खालिजाद का कहना है कि दोनों पक्ष "अपने राजनीतिक रोडमैप और विस्तृत युद्धविराम के लिए बातचीत की प्रक्रिया और नियम वाले तीन पन्नों के समझौते पर" रजामंद हो गए हैं.


तालिबान लड़ाके बातचीत के शुरुआती चरणों में युद्धविराम पर सहमति से इनकार कर रहे हैं. हालांकि पश्चिमी देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसके लिए लगातार मांग कर रहा है. उनका कहना है कि जब बातचीत तय दिशा में आगे बढ़ जाएगी तभी वो ऐसा करेंगे. खालिजाद का कहना है, "यह समझौता यह दिखाता है कि बातचीत कर रहे पक्ष कठोर मुद्दों पर सहमत हो सकते हैं."

2001 में तालिबान को अमेरिका के नेतृत्व वाली सेना ने सत्ता से उखाड़ फेंका. तब तालिबान शासन ने अमेरिका पर 11 सितंबर के हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को सौंपने की उनकी मांग खारिज कर दी थी. अमेरिका समर्थित सरकार उसके बाद से ही अफगानिस्तान में है लेकिन तालिबान का अब भी देश के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है.

फरवरी में हुए एक समझौते के तहत विदेशी फौजें मई 2021 में अफगानिस्तान से निकल जाएंगी. इसके बदले में तालिबान को आतकंवाद पर रोक लगाने की गारंटी देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सैनिकों की वापसी को तेज करना चाहते हैं जिसकी बड़ी आलोचना हो रही है. हालांकि ट्रंप का कहना है कि वह सारे अमेरीकी सैनिकों को क्रिसमस के खत्म होने तक वापस घर में देखना चाहते हैं ताकि अमेरिका की सबसे लंबी जंग खत्म हो सके.

ट्रंप प्रशासन ने एलान किया है कि जनवरी के बाद सैनिकों की संख्या में तेजी से कटौती होगी. हालांकि कम से कम 2500 सैनिक इसके बाद भी वहां रहेंगे. जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास ने मंगलवार को नाटो की बैठक में अफगानिस्तान से वापसी के खिलाफ चेतावनी दी. हाइको मास ने कहा कि नाटो को "यह सुनिश्चित करना होगा कि अफगानिस्तान में सैनिकों की कमी परिस्थितियों के साथ जुड़ी हो." 

पिछले महीने तालिबान और सरकार के वार्ताकारों के बीच बातचीत मुश्किल में आ गई थी जब प्रस्तावना में अफगान सरकार के प्रतिनिधियों के नाम डाल दिए गए थे. बातचीत की प्रक्रिया से वाकिफ यूरोपीय संघ के एक राजनयिक का कहना है कि दोनों पक्षों ने विवादित मुद्दों को फिलहाल किनारे रख दिया है और उन पर अलग से बातचीत की जाएगी. नाम नहीं बताने की शर्त पर इस राजनयिक ने कहा, "दोनों पक्ष भी जानते हैं कि पश्चिमी शक्तियों का धैर्य खत्म हो रहा है और जो सहायता मिल रही है वह शर्तों के साथ है.. जाहिर है कि दोनों पक्षों को पता है कि कुछ प्रगति दिखाने के लिए आगे बढ़ना होगा."

एनआर/आईबी (रॉयटर्स)


03-Dec-2020 4:48 PM 19

वॉशिंगटन, 3 दिसंबर| अमेरिका में बीते 24 घंटे में कोरोनावायरस से 2,713 लोगों की जानें चली गई हैं। अप्रैल के बाद से यह पहली बार है, जब एक दिन में इतने अधिक लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही देश में अब तक मरने वालों की संख्या कुल 273,316 हो गई है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ है।

यूनिवर्सिटी के हालिया आंकड़ों के हवाले से सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका इस वक्त वायरस से सबसे अधिक प्रभावित है। यहां बुधवार को 195,121 नए मामलों की भी पुष्टि हुई है, जिसके साथ यहां संक्रमितों की संख्या कुल 13,916,543 तक पहुंच गई है।

कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट के मुताबिक, इस बीच बुधवार को अस्पतालों में फिलहाल रहने वाले कोरोना के मरीजों की भी संख्या बढ़कर 100,226 तक पहुंच गई है।

विस्कॉन्सिन के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बुधवार को सीएएनएन को बताया, "हमारे अस्पतालों के आईसीयू और आपातकालीन कमरों में प्रसार निरंतर जारी है।" (आईएएनएस)


03-Dec-2020 4:45 PM 19

सैन फ्रांसिस्को, 3 दिसंबर| अमेजन की योजना कथित तौर पर पॉडकास्ट स्टार्टअप वंडरी को खरीदने की बताई जा रही है और इसी के साथ कंपनी ऑडियो सेक्टर में भी अपने पैर पसारने की तैयारियों में जुटी हुई है। इस विषय के जानकार लोगों ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि वंडरी की कीमत तीस करोड़ डॉलर बताई जा रही है, जबकि साल 2019 के जून में कंपनी की कीमत दस करोड़ डॉलर आंकी गई थी।

वंडरी इस साल चार करोड़ डॉलर अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश में है। कंपनी की लगभग 75 फीसदी कमाई विज्ञापनों से होती है, जबकि बाकी की कमाई टीवी और सब्सक्रिप्शन सर्विसेज की लाइसेंसिंग से होती है।

साल 2016 में वंडरी को लॉन्च किया गया था। डॉ. डेथ, डर्टी जॉन, बिजनेस वॉर्स, द श्रिंक नेक्स्ट डोर और ग्लेडिएटर जैसे अपने शोज के माध्यम से यह दर्शकों का दिल जीत चुकी है।

यह वंडरी के लिए एक आखिरी बड़ा मौका हो सकता है, जिसके तहत वह अमेजन जैसी किसी बड़ी कंपनी द्वारा अधिग्रहण किए जाने के साथ पॉडकास्टिंग के बढ़ते बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत बना सकता है। (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 2:19 PM 24

ल्योन (फ्रांस), 3 दिसंबर | इंटरपोल ने अपने 194 सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वैश्विक अलर्ट जारी किया है कि संगठित अपराध नेटवर्क शारीरिक और ऑनलाइन दोनों ही तरीके से कोविड-19 टीकों को निशाना बना सकते हैं। बुधवार को इंटरपोल द्वारा जारी किए गए बयान में ऑरेंज नोटिस के साथ 'कोविड-19 और फ्लू के नकली रूप, उनकी चोरी और अवैध विज्ञापन' के संबंध में संभावित आपराधिक गतिविधि की बात कही गई है।

इसमें उन अपराधों के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं जहां लोगों ने नकली टीकों का विज्ञापन, बिक्री और अवैध प्रशासकीय काम किए हैं।

उन्होंने कहा, "कोविड-19 के कई टीके एप्रूव होने और दुनिया भर में वितरण के करीब हैं। ऐसे में इनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नकली उत्पादों को बेचने वाली अवैध वेबसाइटों की पहचान करना जरूरी होगा।"

इंटरपोल ने कहा, "कानून प्रवर्तन और स्वास्थ्य नियामक निकायों के बीच समन्वय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुदायों की भलाई के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"

इंटरपोल के महासचिव जर्गेन स्टॉक ने कहा, "जैसा कि सरकारें वैक्सीन को लाने और उनके उपयोग की तैयारी कर रही हैं, वहीं आपराधिक संगठन इन वैक्सीन की सप्लाई चेन में घुसपैठ करने की योजना बना रहे हैं। आपराधिक नेटवर्क फर्जी वेबसाइटों के जरिए भी जनता को निशाना बना रहे होंगे। इससे लोगों के स्वास्थ्य और उनके जीवन को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।"

महासचिव ने आगे कहा, "यह जरूरी है कि जितना संभव हो सके कानून प्रवर्तन एजेंसियां तैयार हो जाएं, ताकि कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े सभी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। इसीलिए इंटरपोल ने यह वैश्विक चेतावनी जारी की है।"

कोविड से संबंधित धोखाधड़ी को बढ़ते देख इंटरपोल ने जनता को सलाह दी है कि वे चिकित्सा उपकरणों या दवाओं की खोज के लिए ऑनलाइन सर्च करते समय विशेष ध्यान रखें।

इंटरपोल की साइबर क्राइम यूनिट द्वारा किए गए एक विश्लेषण से पता चला है कि ऑनलाइन फार्मेसी से जुड़ी 3,000 वेबसाइटों में से 1,700 को साइबर खतरा है। ऑनलाइन घोटालों से बचने के लिए, सतर्क रहना महत्वपूर्ण। लिहाजा लोग कोविड-19 के संबंध में नई स्वास्थ्य सलाह के लिए हमेशा अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों या विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट देखें।  (आईएएनएस)
 


03-Dec-2020 2:05 PM 22

अरुल लुइस
संयुक्त राष्ट्र, 3 दिसंबर (आईएएनएस)|
करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का नियंत्रण गैर-सिख निकाय को देने को लेकर भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव की भावना का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रथम सचिव आशीष शर्मा ने बुधवार को कहा, "यह अधिनियम सिख धर्म और उसकी सुरक्षा के खिलाफ है।"

पिछले साल पाकिस्तान ने 'शांति के लिए पारस्परिक और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा, समझ और सहयोग देने' के लिए प्रस्ताव लाया था। जिसमें भारत के डेरा बाबा नानक साहब गुरुद्वारे को पाकिस्तान में पवित्र गुरुद्वारे को जोड़ने वाले करतारपुर गलियारे का उद्घाटन किया था, ताकि सिख भक्तों के लिए इस यात्रा को आसान बनाया जा सके। इसे शांति के लिए पारस्परिक और परस्पर सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक पहल कहा गया।

हालांकि, पिछले महीने पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से पवित्र मंदिर का नियंत्रण छीन लिया और इसे इवाकु ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को सौंप दिया गया।

महासभा में 'शांति की संस्कृति' पर बहस के दौरान शर्मा ने कहा, "पाकिस्तान ने पिछले साल पारित किए गए संस्कृति के शांति के पहले प्रस्ताव का उल्लंघन किया है, जो कि करतारपुर तीर्थ के प्रबंधन को मनमाने ढंग से गैर-प्रशासनिक नियंत्रण में स्थानांतरित कर रहा है। यह अधिनियम सिख धर्म और उसकी सुरक्षा के खिलाफ है।"

पाकिस्तान ने फिलीपींस के साथ मिलकर इस साल फिर से करतारपुर साहिब का उल्लेख करते हुए एक बार फिर से प्रस्ताव पेश किया है और इसे 90 मतों के साथ पारित किया गया। वहीं 52 मत देने वाले लोग अनुपस्थित रहे।

इस साल के प्रस्ताव में कहा गया है कि महासभा "पड़ोस के साथ अंतरजातीय सद्भाव और शांतिपूर्ण भावना के तहत करतारपुर साहिब गलियारे को खोलने की पहल का स्वागत करती है, और तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के अनुमति देने के लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच समझौते की सराहना करती है।"

शर्मा ने कहा कि "यदि पाकिस्तान भारत में धर्मों के खिलाफ नफरत की अपनी मौजूदा संस्कृति को बदलता है और अपने सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने लोगों का समर्थन करना बंद करता है, तो हम दक्षिण एशिया और उसके बाहर शांति की वास्तविक संस्कृति का प्रयास कर सकते हैं। लेकिन कब तक हम पाकिस्तान के सामने मूकदर्शक बने रहेंगे, जो धमकी, जबरदस्ती, धर्मांतरण और हत्याओं के जरिए अपने देश से अल्पसंख्यकों को भगा रहा है।"

शर्मा ने शांति की संस्कृति के लिए की गई कार्रवाई पर धर्मों के व्यापक स्पेक्ट्रम का प्रतिनिधित्व करने वाले बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित एक अन्य प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसे 10 देशों ने भी समर्थन दिया। शर्मा ने कहा कि भारत भी इसे सह-प्रायोजित करेगा।
 


03-Dec-2020 12:46 PM 16

सु्प्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपनी सीमा क्षेत्र के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना सुनिश्चित करें. रिकॉर्डिंग को कम से कम एक साल तक के लिए सुरक्षित रखने को कहा.

 डायचेवेले पर आमिर अंसारी का लिखा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने आदेश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि हर पुलिस स्टेशन के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉकअप, गलियारों, लॉबी और रिसेप्शन पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं. साथ ही बाहर के क्षेत्र के लॉकअप कमरों को कवर किया जाए जिससे कोई भी हिस्सा कैमरे की जद से बाहर न होने पाए. इसी के साथ कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) और सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) के कार्यालयों समेत ऐसी जांच एजेंसियों के दफ्तर में सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने को कहा है जिनके पास पूछताछ और गिरफ्तारी की शक्ति है.

जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की एक बेंच ने थानों में सीसीटीवी लगाने का अपना फैसला परमवीर सिंह सैनी की याचिका पर दिया है. सैनी ने अपनी याचिका में गवाहों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा है कि थानों के बाहरी हिस्से में लगने वाले सीसीटीवी कैमरे नाइट विजन वाले होने चाहिए और साथ ही सरकार से कहा है कि जिन थानों में बिजली और इंटरनेट नहीं वहां वे यह सुविधा उपलब्ध कराएं. कोर्ट ने कहा सौर/पवन ऊर्जा समेत बिजली मुहैया कराने के किसी भी तरीके का उपयोग करके जितनी जल्दी हो सके बिजली दी जाए.

बेंच ने अपने आदेश में कहा, "हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी के घायल होने या मौत होने पर पीड़ित पक्ष को शिकायत करने का अधिकार है. सीसीटीवी फुटेज से ऐसी शिकायतों की जांच में आसानी होगी."

सीसीटीवी कैमरे से प्रताड़ना पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में प्रताड़ना से जुड़े एक मामले के निपटारे के दौरान इस साल जुलाई में 2017 के एक केस पर ध्यान दिया था जिसमें उसने सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था जिससे मानवाधिकारों के हनन की जांच की जा सके. साथ ही घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई जा सके. इसी के साथ कोर्ट ने हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को इसके लिए एक समिति बनाने को भी कहा था.

कोर्ट ने राज्यों को छह सप्ताह के भीतर कैमरे लगाने का समय देते हुए, एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि व्यक्ति का अधिकार है कि उसके मानवाधिकारों की रक्षा हो.


03-Dec-2020 10:03 AM 18

चीन के चांग ई-5 मून मिशन ने चांद की सतह से पहली रंगीन तस्वीर भेजी है. चीन के इस मून लैंडर ने चांद की सतह पर अपने पैर के पास ले लेकर क्षितिज तक की तस्वीर ली है.

चांद से मिट्टी और पत्थर के नमूने पृथ्वी पर भेजने के लिए तैयार किए गए इस मिशन ने मंगलवार को सफलतापूर्वक चांद के सतह पर लैंडिग की थी.

उतरने के बाद से ही इसने चांद की सतह से नमूने इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया है. इसे रिटर्न मॉड्यूल तक पहुंचाने की शुरूआत गुरुवार से की जा सकती है.

ये काम कुछ दिनों तक ही किया जाएगा जिसके बाद नमूनों को चांद की कक्षा में पहले से ही मौजूद सर्विस व्हीकल और रिटर्न मॉड्यूल तक पहुंचाया जाएगा, जो इसे वापिस धरती तक पहुंचाएगा.

योजना के अनुसार रिटर्न मॉड्यूल मंगोलिया के भीतरी इलाक़े में सिज़िवांग के घास के मैदानों में लैंड कर सकता है.

चांग ई-5 मिशन से पहले चीन ने दो और मून मिशन भेजे थे, साल 2013 में चांग ई-3 और 2019 में चांग ई-4 मून मिशन. इन दोनों में है एक लैंडर के साथ-साथ एक छोटा मून रोवर शामिल किया गया था.

इन दोनों की तुलना में चांग ई-5 जटिल मिशन है.

8.2-टन के चांग ई-5 को एक अंतरिक्षयान के ज़रिए 24 नवंबर को दक्षिणी चीन के वेनचांग स्टेशन से छोड़ा गया था.

कुछ दिन पहले ये मिशन चांद के ऊपर पहुंचा और इसने खुद को चांद की कक्षा में स्थापित किया और चांद के चक्कर लगाने लगा. बाद में ये दो टुकड़ों में बंट गया - पहला सर्विस व्हीकल और रिटर्न मॉड्यूल जो चांद की कक्षा में ही रुका रहा और दूसरा मून लैंडर जो धीरे-धीरे चांद की सतह की तरफ बढ़ने लगा.

मून लैंडर चांद की सतह पर मॉन्स रूमकेर में उतारा गया जो चांद की ज्वालामुखी वाली पहाड़ियों के पास मौजूद एक जगह है.

चांद की सतह से मिट्टी और पत्थर इकट्ठा करने के लिए भेजे गए चांग ई-5 मून लैंडर में कैमरा, रडार, एक ड्रिल और स्पेक्ट्रोमीटर फिट किया गया है. अब ये इनका इस्तेमाल कर चांद की सतह से मिट्टी के बेहतर नमूने इकट्ठा करेगा.

चांग ई मून मिशन

चांग ई-5 से 44 साल पहले, अब तक मून मिशन के दौरान अमेरिकी अपोलो अंतरिक्षयान से चांद पर गए अंतरिक्षयात्रियों और सोवियत रूस के रोबोटिक लूना कार्यक्रम ने चांद की सतह से क़रीब 400 किलो तक मिट्टी और पत्थर जमा किए हैं, लेकिन अधिकतर वो मिशन थे जिनमें अंतरिक्षयात्री शामिल थे.

चांद से लाए ये सभी नमूने क़रीब तीन अरब साल पुराने हैं.

माना जा रहा है कि मॉन्स रूमकेर से लाए गए नमूनों की उम्र 1.2 से 1.3 अरब साल होगी, यानी वो पहले लाए गए नमूनों की अपेक्षा नए होंगे. जानकारों का मानना है कि इससे चांद के भूवैज्ञानिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी.

इन नमूनों की मदद से वैज्ञानिकों को सटीक रूप से 'क्रोनोमीटर' तैयार करने में भी मदद मिलेगी जिससे सौर मंडल के ग्रहों के सतहों की उम्र को माना जाता है.

ये किसी ग्रह या उपग्रह की सतह पर मौजूद ज्वालामुखी की संख्या पर निर्भर करता है. वैज्ञानिकों के अनुसार जिस ग्रह की सतह पर अधिक ज्वालामुखी होंगे वो अधिक पुरानी होगी यानी उसकी उम्र अधिक होगी (इसके लिए वैज्ञानिक ज्वालामुखी के क्रेटर की संख्या की गिनती करते हैं). हालांकि इसके लिए अलग-अलग जगहों को देखा जाना ज़रूरी होता है.

अपोलो और लूना मिशन के भेजे गए नमूनों से 'क्रोनोमीटर' तैयार करने में वैज्ञानिकों को काफी मदद मिली थी. अब चांग ई-5 मिशन के भेजे नमूनों से उन्हें इसे और सटीक रूप से विकसित करने में मदद मिलेगी. (bbc)


03-Dec-2020 9:27 AM 18

तेल अवीव. इजराइल में एक बार फिर राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है और ऐसा माना जा रहा है कि ये प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के शासन का अंत है. इजराइल की संसद नेसेट को भंग किए जाने का प्रारंभिक प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया गया. इसके साथ ही देश में दो साल में चौथी बार आम चुनाव कराए जाने की संभावना पैदा हो गई है. गठबंधन में नेतन्याहू के सहयोगी बेनी गेंट्ज  ने नेतन्याहू पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. गेंट्ज ने कहा है कि वे संसद में सरकार के खिलाफ वोट करेंगे और अब बेहतर यही होगा कि देश में नए चुनाव कराए जाएं.

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे हैं और कई महीनों से तेल अवीव की सड़कों पर प्रदर्शन भी हो रहे हैं. इजराइली संसद नेसेट में पेश इस प्रस्ताव के पक्ष में 61 जबकि विरोध में 54 वोट पड़े. अगले सप्ताह की शुरुआत में अंतिम मतदान के बाद संसद को भंग किया जा सकता है, जिसके पश्चात मार्च या अप्रैल में इजराइल में फिर से चुनाव हो सकते हैं. अंतिम मतदान को टालने की कोशिशों के तहत आने वाले दिनों में सरकार में शामिल दोनों मुख्य दलों के बीच वार्ताएं हो सकती हैं.

इस प्रस्ताव को नेसेट समिति की मंजूरी मिलनी बाकी है. इसके बाद इस पर दो बार और मतदान कराया जाएगा. नेतन्याहू लिकुड पार्टी के अध्यक्ष हैं. गेंट्ज ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के लीडर हैं. मई में दोनों दलों ने एक कॉमन प्रोग्राम के जरिए सरकार बनाने पर सहमित जताई थी. एक डील भी हुई थी. इसके तहत नेतन्याहू पहले 18 महीने प्रधानमंत्री रहेंगे. अगले 18 महीने गेंट्ज पीएम होंगे. सरकार बनने के बाद से ही दोनों पार्टियों के कई मतभेद सामने आ चुके हैं.

नेतन्याहू नहीं निभाते वादा

गेंट्ज ने मंगलवार रात आरोप लगाया कि जब से सरकार बनी है, तभी से बेंजामिन गठबंधन के वादे नहीं निभा रहे. गेंट्ज ने कहा अगर यही हाल रहा तो आगे साथ चलना मुश्किल होगा. बेनी ने कहा- गठबंधन सहयोगियों को पता होना चाहिए कि उनका नेता क्या कर रहा है. गेंट्ज देश के रक्षा मंत्री हैं. उनके मुताबिक, वे नहीं चाहते कि सरकार फौरन गिर जाए. गेंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने सरकार भंग करने के समर्थन मतदान किया है. पार्टी ने प्रधानमंत्री पर अपने कानूनी हितों को देश से ऊपर रखने का आरोप लगाया. गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में नेतन्याहू पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वत लेने के आरोप लगे थे. अगले महीने इस मामले की सुनवाई शुरू होने वाली है, जिसमें नेतन्याहू को पेश होना है.

इजराइल में कैसे होता है चुनाव

इजराइल की संसद नेसेट का चुनाव अनुपातिक मतदान प्रणाली के अंतर्गत होता है. जिसमें मतदाता को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को मतदान करना होता है, किसी भी पार्टी को नेसेट (संसद) में पहुंचने के लिए कुल मतदान में से न्यूनतम 3.25 फीसदी वोट पाना जरूरी है. यदि किसी पार्टी का वोट प्रतिशत 3.25 से कम होता है तो उसे संसद की कोई भी सीट नहीं मिलती है. पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के अनुपात में उन्हें संसद की सीटें आवंटित कर दी जाती हैं.

यह प्रक्रिया 28 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाती है. इजराइल के इतिहास में कोई भी पार्टी आज तक पूर्ण बहुमत से सरकार नहीं बना पाई है. बता दें कि नेसेट प्राचीन हिब्रू शब्द है जो यहूदी परंपरा के अनुसार 120 ऋषियों और पैगंबरों की एक विधानसभा थी. नेसेट के सदस्य का कार्यकाल चार साल का होता है. इसी के द्वारा इजराइल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव होता है. नेसेट में ही इजराइल का कानून बनता है. इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं. यहां मतदान करने की न्यूनतम उम्र 18 साल है. (news18)


03-Dec-2020 9:12 AM 16

बुडापेस्ट. हंगरी के सांसद जोसेफ जाजेर ने यह स्वीकार कर लिया है कि वह एक गैर-कानूनी सेक्स पार्टी में मौजूद थे. उन्होंने यह स्वीकार किया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान हुई सेक्स पार्टी के दौरान बेल्जियन पुलिस ने इस पार्टी का भंडाफोड़ पिछले सप्ताह किया था. जोसेफ हंगरी की सत्ताधारी कंर्जवेटिव फिडेज पार्टी के सांसद हैं. जोसेफ ने रविवार को अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उन्होंने सेक्स पार्टी में भाग लिया था लेकिन उन्होंने इस पार्टी के बारे में बेल्जियन मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं की. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्होंने मौखिक ​चेतावनी दी और घर छोड़ कर आई.

पार्टी में डिप्लोमैट भी थे मौजूद

बेल्जियन न्यूजपेपर एचएलएन और दूसरी मीडिया में मंगलवार को आई रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के दौरान पुलिस पहुंच गई और उसे रोक दिया. उस समय वहां 25 लोग मौजूद थे, उनमें से एक सांसद जोसेफ भी वहां उपस्थित थे. सांसद ने वहां से भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया. एचएलएन के अनुसार वहां पार्टी में कई कूटनीतिक भी मौजूद थे. इस अखबार ने सांसद का नाम प्रकाशित नहीं किया है लेकिन यह कहा कि उन्होंने रविवार को इस्तीफा दे दिया. सांसद की पार्टी ने इस घटना से किनारा कर लिया है.

ब्रुसेल्स के अभियोजक कार्यालय ने यह कन्फर्म किया है कि पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान हो रही पार्टी में व्यवधान डाला और वहां मौजूद लोगों को पकड़ा. यह पार्टी शुक्रवार को ब्रुसेल्स में शुक्रवार की शाम को हो रही थी. अभियोजक के कार्यालय यह कन्फर्म नहीं किया है कि वहां ग्रुप सेक्स पार्टी हो रही थी. वहीं ब्रुसेल्स पुलिस के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. (news18)


03-Dec-2020 9:09 AM 17

 स्टॉकहोम. स्वीडन में एक मां को इस जुर्म में गिरफ्तार  कर लिया गया है कि उसने अपने ही बेटे के पिछले 28 साल से फ्लैट में बंद कर रखा है. मां ने बेटे को स्टॉकहोम  के एक फ्लैट में 12 साल की उम्र से ही कैद  कर रखा था. अब बेटा 41 वर्ष का हो चुका है. बेटे के इतने साल से गायब होने के चलते इस परिवार के रिश्तेदारों को यह शक हो रहा था कि उसे मां ने कहीं कैद कर रखा है. रिश्तेदारों को जब यह पता चला कि एक शख्स फ्लैट के अंदर बंद है. इसके बाद दरवाजा तोड़कर शख्स को कैद से मुक्त किया गया और डॉक्टर को बुलाया गया. स्वीडिश मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने पाया कि वह वह व्यक्ति कुपोषण  का शिकार है. बेटे के पैरों में कई घाव पाए गए. उसके सारे दांत गिर चुके हैं. वह व्यक्ति ना ही चल पा रहा है और ना ही बोल पा रहा है.

पीड़ित की सर्जरी करवाने की नौबत आ गई

बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और वहां उसकी सर्जरी की गई. डॉक्टरों ने व्यक्ति की जान बचाने के बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया. पुलिस ने मां को गिरफ्तार कर लिया है और इस मामले में जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने बंद फ्लैट से कई तरह के सैंपल इकट्ठा किए.

मां ने बेटे को स्कूल से निकाला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने वर्ष 1984 में 12 साल की उम्र में ही बेटे का नाम स्कूल से कटवा दिया. पड़ोसियों का कहना है कि ये महिला अपने बेटे को लेकर जरूरत से ज्यादा सतर्क रहती है. उनका कहना है कि महिला के परिवार में कोई घटना घट गई थी जिसके बाद से उसने बेटे को कैद में रखना शुरू कर दिया.

पड़ोसियों ने बताया कि आरोपी महिला बीते 30 साल से फ्लैट की एक खिड़की पर मोमबत्ती जलाकर रखती है. पड़ोसियों ने ये भी बताया कि इस महिला ने लोगों से बात करना बंद कर दिया था. महिला से जब कोई उसके बेटे के बारे में उसका हालचाल लेती तो वो बोलने लगती कि वह ठीक है. महिला इस बारे में बातचीत नहीं करने के लिए बातचीत का विषय बदल देती है. (news18)


03-Dec-2020 9:05 AM 15

सिंगापुर के लोग अब वैसा मांस खा सकेंगे जिसके लिए जानवरों को मारना नहीं पड़ेगा. इसे 'क्लीन मीट' कहा जा रहा है. सिंगापुर ने इसकी मंज़ूरी दे दी है और इस मामले में वो दुनिया का पहला देश बन गया है.

सिंगापुर के इस फ़ैसले से सैन फ़्रांसिस्को स्थित ईट जस्ट स्टार्टअप के लिए रास्ता साफ़ हो गया है.

ईट जस्ट कंपनी लैब में चिकन का मांस तैयार कर बेचने की तैयारी कर रही है. पहले ये मांस नगेट्स के तौर पर मिलेंगे लेकिन कंपनी ने अभी बताया नहीं है कि ये कब से उपलब्ध होंगे. स्वास्थ्य, पर्यावरण और जानवरों के बचाव की चिंताओं के कारण रेग्युलर मांस के विकल्प की मांग बढ़ी है.

फ़ाइनैंशियल सर्विस कंपनी बार्कली के अनुसार वैकल्पिक मांस का बाज़ार अगले दशक में 140 अरब डॉलर का हो सकता है. यानी यह 1.4 ट्रिलियन डॉलर की मांस इंडस्ट्री का 10 फ़ीसदी हिस्सा होगा. सुपरमार्केट और रेस्तरां के मेन्यू में बीऑन्ड मीट के साथ इम्पॉसिबल फूड जैसे प्लांट बेस्ड मीट उत्पादकों के मांस की मांग बढ़ी है.

प्लांट बेस्ड मीट वैसे मांस को कहते हैं जिन्हें तैयार किया जाता है. ये मांस की तरह ही होते हैं और स्वाद भी वैसा ही होता है. ये बर्गर पैटी, नगेट्स और टुकड़ों के रूप में मिलते हैं. लेकिन ईट जस्ट का उत्पाद अलग है क्योंकि यह प्लांट बेस्ड नहीं है. यहां मांस जानवरों की मांसपेशियों की कोशिकाओं से लैब में तैयार किए जाएंगे.

शाकाहारी खाना क्या दुनिया को बचा सकता है?

कंपनी का कहना है कि वैश्विक फूड इंडस्ट्री के लिए यह एक अहम खोज है और उसे उम्मीद है कि बाक़ी के देश भी सिंगापुर की तरह इसकी मंज़ूरी देंगे.

पिछले दशक में दर्जनों स्टार्टअप्स की ओर से बाज़ार में संवर्धित मांस लाने की कोशिश की गई. इन्हें उम्मीद है कि ये पारंपरिक मांस खाने वालों का भरोसा अपने इस वादे पर जीत लेंगे कि उनका उत्पाद ज़्यादा असली है.

इसराइल स्थित फ़्यूचर मीट टेक्नॉलजी और बिल गेट्स से जुड़ी कंपनी मेमफिश मीट्स भी लैब में बना मांस बाज़ार में उतारने की कोशिश कर रही हैं. इनका कहना है कि उत्पाद लोगों की जेब पर भारी नहीं पड़ेगा और स्वाद के मामले में भी अव्वल होगा. सिंगापुर की कंपनी शिओक मीट्स लैब में जानवरों के मांस बनाने पर काम कर रही है.

कई लोगों का कहना है कि इससे पर्यावरण को फ़ायदा होगा लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि विशेष परिस्थितियों में यह जलवायु परिवर्तन के लिए और घातक साबित होगा.

चुनौतियां अभी बाक़ी हैं

बीबीसी न्यूज़ सिंगापुर की मारिको ओई के मुताबिक़ ईट जस्ट ने कहा है कि यह फूड इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित होगा लेकिन चुनौतियां अभी बाक़ी हैं. प्लांट-बेस्ट मांस उत्पादों की तुलना में लैब में तैयार किया गया मांस बहुत महंगा होगा. ईट जस्ट ने पहले कहा था कि लैब में तैयार चिकन नगेट्स 50 डॉलर में मिलेगा.

अब लागत में कमी आई है तो क़ीमत भी कम होगी लेकिन अब भी आम लोगों की जेब से बाहर का सौदा है. दूसरी चुनौती है कि कंपनी के उत्पाद पर उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया क्या होगी.

लेकिन ईट जस्ट के उत्पाद को लेकर सिंगापुर की मंज़ूरी के बाद दूसरे प्लेयर भी सामने आएंगे और अपना ऑपरेशन शुरू करेंगे. इसके साथ ही दूसरे देश भी इसे लेकर मंज़ूरी देने पर विचार कर सकते हैं.

कितना सुरक्षित
सिंगापुर फूड एजेंसी (एसएफ़ए) ने कहा है कि एक एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप ने ईट जस्ट के डेटा की समीक्षा की है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग कंट्रोल और संवर्धित चिकन कितना सुरक्षित है की जाँच की गई.

एसएफ़ए ने कहा है कि जाँच में यह सुरक्षित पाया गया है और सिंगापुर में इन्ग्रीडीअन्ट के तौर पर नगेट्स बेचने की मंज़ूरी दी गई है.

एजेंसी का कहना है कि एक रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क बनाया गया है जो इस बात पर नज़र रखेगा कि संवर्धित मांस और अन्य वैकल्पिक प्रोटीन उत्पाद सुरक्षा मानदंडों का पालन कर रहे हैं या नहीं.


ईट जस्ट के सह संस्थापक जोश टेट्रिक ने सिंगापुर के फ़ैसले पर कहा है, ''यह सिंगापुर से शुरुआत है और आने वाले दिनों में उनके लैब के मांस को पूरी दुनिया के लोग पसंद करेंगे.''

ईट जस्ट का कहना है कि मांस तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में एंटिबायोटिक्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. कंपनी के मुताबिक़ पारंपरिक चिकन की तुलना में उनके लैब में बने चिकन के मांस में माइक्रोबायोलॉजिकल तत्व बहुत कम होंगे.

ईट जस्ट ने कहा है, ''सिंगापुर में मिली मंज़ूरी से कॉमर्सियल लॉन्चिंग का रास्ता साफ़ हो गया है. हम उच्च गुणवत्ता का मांस सीधे जानवरों की कोशिका से लैब में तैयार करेंगे और यह इंसानों के लिए बिल्कुल सुरक्षित होगा.'' (बीबीसी)


03-Dec-2020 8:29 AM 12

टोरंटो, 3 दिसंबर | सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती मनाने के लिए मॉन्ट्रियल के कॉनकॉर्डिया विश्वविद्यालय ने धर्म के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए गुरु नानक देव अकादमिक (स्टडी) चेयर की स्थापना की है। यह कनाडा में सिख धर्म के लिए पहली चेयर होगी। यह गुरु नानक की 550वीं जयंती के लिए भारतीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से पिछले साल प्रस्तुत दो चेयर में से एक है। अन्य चेयर पहले ही ब्रिटेन में बर्मिघम विश्वविद्यालय में स्थापित की गई है।

ओटावा में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने कहा कि गुरु नानक प्रकाश पर्ब के शुभ अवसर पर भारत के उच्चायोग को कॉनकॉर्डिया विश्वविद्यालय, मॉन्ट्रियल में गुरु नानक देव अकादमिक चेयर के शुभारंभ की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।

इस चेयर को भारतीय विदेश मंत्रालय, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस और इंडो-कनाडाई कोचर फैमिली का समर्थन प्राप्त होगा।

कनाडा में भारतीय उच्चायोग लगभग 100 भारतीय मिशनों में से एक है, जो सिख धर्म की शिक्षाओं को फैलाने के लिए विभिन्न पहलों के साथ गुरु नानक की जयंती मना रहा है।

टोरंटो के पंजाबी बहुल शहर ब्रैम्पटन में इस अवसर को चिह्न्ति करने के लिए एक सड़क का नाम गुरु नानक स्ट्रीट भी रखा गया है।

शहर के ब्रैम्पटन सिविक अस्पताल, जिसने 2007 में गुरु नानक देव के नाम पर अपने आपातकालीन विभाग का नाम रखा था, उसने भी अपनी इमारत में गुरु नानक आपातकालीन विभाग का अनावरण किया है।

अस्पताल के फाउंडेशन के सीईओ ने कहा, "उन सभी को लोगों को गुरु पर्ब मुबारक, जो आज इसे हैं। जब हम ब्रैम्पटन सिविक के निर्माण के लिए धन जुटा रहे थे, तो सिख समुदाय ने शहर के इस अति-आवश्यक नए अस्पताल को स्थापित करने में मदद करने के लिए समर्थन किया और हम इसके लिए हमेशा आभारी हैं।"

--आईएएनएस


02-Dec-2020 6:44 PM 18

चीन, 2 दिसंबर | लद्दाख सीमा पर टकराव के बाद भारत ने चीन के खिलाफ एक के बाद एक सख्‍त कदम उठाने शुरू कर दिए. केंद्र की मोदी सरकार  ने जहां एक तरफ बीजिंग से कई समझौते खत्‍म कर दिए तो दूसरी तरफ सैकड़ों मोबाइल ऐप्‍स पर बैन लगाकर तगड़ा आर्थिक नुकसान  पहुंचाया. वहीं, भारतीय कारोबारियों ने भी फेस्टिव सीजन में चीन को 40 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा का झटका दिया. इस सबके बीच दुनिया के सबसे बड़े चावल आयातक  चीन को आपूर्ति संकट के कारण आखिर में भारत के सामने झुकना पड़ा है. बीजिंग ने 30 साल में पहली बार दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक भारत से चावल खरीदा है.

क्‍वालिटी के मुद्दे पर इनकार करता रहा है चीन

चीन हर साल अलग-अलग देशों से 40 लाख टन चावल का आयात करता रहा है, लेकिन भारत से गुणवत्‍ता के मुद्दे पर चावल खरीदने से इनकार करता रहा है. कोरोना वायरस के कारण इस बार दुनियाभर में चीन के खिलाफ माहौल बना हुआ है. ऐसे में चावल आपूर्ति के संकट के कारण उसने करीब 30 साल बाद भारत के साथ चावल खरीद का सौदा किया है. खास बात ये है कि उसने ये सौदा ऐसे समय में किया है, जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव चरम पर है. चावन निर्यातक संगठन के अध्‍यक्ष बीवी कृष्‍ण राव ने कहा कि चीन ने पहली बार भारत से चावल खरीदा है. उम्‍मीद है कि बीजिंग भारतीय चावल की अच्‍छी क्‍वालिटी को देखकर अगले साल ज्‍यादा चावल आयात करेगा.


भारतीय कारोबारियों ने चीन के साथ दिसंबर-फरवरी शिपमेंट्स के लिए 1,00,000 टन टूटे चावल का सौदा किया है. राव ने बताया कि ये सौदा करीब 300 डॉलर प्रति टन की दर पर किया गया है. इस बार चीन को हमेशा आपूर्ति करने वाले देश थाइलैंड, वियतनाम, म्‍यांमार और पाकिस्‍तान के पास निर्यात के लिए सीमित चावल है. वहीं, ये देश भारत के मुकाबले करीब 30 डॉलर प्रति टन ज्‍यादा की दर से सौदे की पेशकश कर रहे थे. बता दें कि साल 2020 के शुरुआती 10 महीनों में भारत का चावल निर्यात 1.19 करोड़ टन रहा है, जो पिछले साल 83.40 लाख टन रहा था. इस तरह भारत का चावल निर्यात पिछले साल के मुकाबले इस साल जनवरी-अक्‍टूबर में ही 43 फीसदी ज्‍यादा रहा है.(hindi.news18.com)


02-Dec-2020 5:16 PM 18

-विनसेंट नी

झोऊ शियोक्सआन उर्फ़ शायनज़ी एक जाने-माने टीवी होस्ट के ख़िलाफ़ कोर्ट पहुँची हैं

चीन के कोर्ट में बुधवार को एक ऐसे मुक़दमे की सुनवाई हो रही है जिसे लेकर जानकार कह रहे हैं कि ये देश के #metoo आंदोलन का भविष्य तय कर सकता है.

झोऊ शियोक्सआन उर्फ़ शायनज़ी एक जाने-माने टीवी होस्ट के ख़िलाफ़ कोर्ट पहुँची हैं. उनका आरोप है कि इस टीवी होस्ट ने 2014 में उनका यौन शोषण किया था.

लेकिन टीवी होस्ट सभी आरोपों से इनकार करते हैं और उन्होंने भी शायनज़ी और उसके समर्थकों के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा कर दिया है.

जानकारों का कहना है कि चीन में शायद ही ऐसा होता है कि ऐसा कोई मामला इस चरण तक पहुँचे.

मुक़दमे की सुनवाई सार्वजनिक नहीं होगी. सुनवाई से पहले शायनज़ी ने बीबीसी से कहा कि चाहे जो भी हो, वे इसे लेकर पछताएँगी नहीं.

उन्होंने कहा, "अगर मैं जीत जाती हूँ तो इससे बहुत सी महिलाओं को सामने आकर अपनी कहानी बताने का हौसला मिलेगा. अगर मैं हार जाती हूँ तो तब तक अपील करती रहूँगी जब तक मुझे न्याय नहीं मिल जाता."

जब साल 2018 में हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वी वाइंसटाइन के ख़िलाफ़ कई मुक़दमे सामने आए तब शायनज़ी ने अपनी दोस्त का साथ देते हुए अपना अनुभव भी वीचैट पर लिखने का सोचा.

उस वक़्त 25 साल की शायनज़ी ने अपना 2014 का अनुभव 3000 शब्दों के एक लेख में बताया. उनका आरोप था कि जब वे चीनी सरकारी मीडिया चैनल सीसीटीवी में इंटर्नशिप कर रही थीं तब जाने-माने टीवी होस्ट झू जुन ने उनका यौन शोषण किया.

शियांजी ने कहा कि उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन उनका दावा है कि पुलिस ने उन्हें आरोप वापस लेने को कहा क्योंकि झू एक बड़े टीवी होस्ट हैं और समाज में उनका काफ़ी रुतबा है.

शायनज़ी का लेख चीन के इंटरनेट पर जल्द ही वायरल हो गया जब उनकी एक एनजीओ कार्यकर्ता दोस्त शू चाओ ने अपने वीबो अकाउंट पर इसे शेयर किया.

उन दिनों अमेरिका और यूरोप में #metoo आंदोलन के चलते चीनी मीडिया में भी यौन शोषण पर चर्चा शुरू हो चुकी थी और चीन में भी इससे सम्बंधित कुछ शिकायतें सामने आयी थी.

पिछले साल जनवरी में बीजिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर को एक पूर्व छात्रा के यौन शोषण के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था.

कुछ महीने बाद, एक जानी-मानी चैरिटी संस्था के संस्थापक को भी अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

उन पर आरोप था कि साल 2015 में एक फंडरेज़िंग इवेंट के दौरान उन्होंने एक वॉलंटियर का रेप किया.

चीनी मीडिया ने शायनज़ी की शिकायत में दिलचस्पी दिखाई क्योंकि जिस व्यक्ति पर उन्होंने आरोप लगाया है, वे काफ़ी लोकप्रिय हैं.

कई महिलाओं और पुरुषों ने भी ऑनलाइन कहा कि उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा और शायनज़ी का साथ देने आगे आए.

लेकिन शायनज़ी का दावा है कि जल्द ही इस घटना की मीडिया रिपोर्टिंग सेंसर ने बंद करवा दी.

इसके कुछ हफ़्ते बाद शायनज़ी और शू चाओ पर होस्ट झू ने मानहानि का दावा कर दिया. लेकिन हुआ ये कि इसके बाद इस घटना ने चीनी मीडिया का ध्यान ज़्यादा आकर्षित किया.

शायनज़ी ने कहा कि तबसे ही यौन शोषण के हज़ारों पीड़ित, चाहे महिला हो या पुरुष, सब सोशल मीडिया के ज़रिए उनके संपर्क में हैं.

शायनज़ी ने बीबीसी को बताया, "मुझे इससे बहुत नुक़सान हुआ है. एक बार तो उन्होंने मुझ पर आरोप लगा दिया कि मुझे कोई भ्रम की मानसिक बीमारी है और मुझे ये साबित करना पड़ा कि मैं बिल्कुल ठीक हूँ."

"सबूत इकट्ठा करने की प्रकिया में मुझे अपना अनुभव बार-बार जीना पड़ा. हर बार यातना और अपमान महसूस होता था."

शू चाओ फ़िलहाल इंग्लैंड में पढ़ रही हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा कि अगर कोर्ट ने झू के पक्ष में फ़ैसला दिया तो उन दोनों लड़कियों पर मानहानि का केस चलेगा.

उन्होंने कहा, "लेकिन मैं इन आरोपों से लड़ने के लिए तैयार हो रही हूँ, चाहे दूर से भी लड़ना पड़े."

झू ने लगातार इन आरोपों को ख़ारिज किया है. बीबीसी ने झू और उनके वकीलों से भी इंटर्व्यू करने की कोशिश की लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया.

'अब भी माफ़ी नहीं माँगी'
चीन में कार्यस्थलों पर यौन शोषण के ख़िलाफ़ क़ानून हैं. लेकिन हाल तक यौन शोषण की कोई परिभाषा तय नहीं थी.

येल लॉ स्कूल के पॉल साई चाइना सेंटर में इस विषय के जानकार डॉरीयस लॉनग्रिनो ने कहा, "आज तक बेहद कम यौन शोषण से संबंधित केस चीनी कोर्ट तक पहुँचे हैं. अक्सर ये देखने में आया है कि अगर वर्कप्लेस पर किसी अभियुक्त को सज़ा दी गयी है तो फिर वह कम्पनी पर ही लेबर कांट्रैक्ट के उल्लंघन का आरोप लगा कर केस कर देता है."

"या तो अभियुक्त कम्पनी पर केस कर देता है या शिकायतकर्ता पर मानहानी का केस कर देता है."

बल्कि 'यौन शोषण' शब्द साल 2005 में महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित एक क़ानून के दौरान ही सामने आया.

डॉरीयस ने बताया कि तबसे ही कई स्थानीय और प्रांतीय स्तर पर इसे लागू करने की कोशिशें हुई लेकिन ज़मीन पर कम ही बदलाव देखने को मिला.

एक एनजीओ 'बीज़िंग युआनझोंग जेंडर डिवेलप्मेंट सेंटर' के मुताबिक़ 2010 से 2017 तक पाँच करोड़ कोर्ट के आदेशों में से सिर्फ़ 34 ही यौन शोषण से संबंधित हैं.

इनमें से सिर्फ़ दो पीड़ितों ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया था और दोनों में सबूत के अभाव की वजह से केस ख़ारिज हो गया.

हालाँकि ऐसा लग रहा है कि अब चीज़ें बदल रही हैं.

पिछले साल एक हाई-प्रोफ़ाइल केस में एक समाजसेविका ने एक एनजीओ के डायरेक्टर-जनरल के ख़िलाफ़ केस जीता था.

चीनी मीडिया ने इसे #metoo आंदोलन की पहली जीत कहा था.

जुलाई में आयी एक चीनी न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक़ कोर्ट ने दोषी को 15 दिन के अंदर माफ़ीनामा देने का आदेश दिया था लेकिन केस जीतने के बावजूद पीड़ित को एक साल बाद भी माफ़ीनामा नहीं मिला है.

वर्कप्लेस पर यौन शोषण
मई में चीनी सांसद एक नया सिविल कोड लेकर आए हैं जो एक जनवरी 2021 से लागू होगा. इस कोड में यौन हिंसा को परिभाषित किया गया है- "कोई एक्शन जो दूसरे कि मर्ज़ी के बिना, बोलने, लिखने, तस्वीरों के ज़रिए या शारीरिक तौर पर किया जाये."

इस कोड में कहा गया है कि सरकार, कम्पनी और स्कूलों को भी ऐसा बर्ताव रोकने की कोशिश करनी होगी.

आलोचकों का कहना है कि यौन शोषण के पीड़ितों की सुरक्षा के लिए ये अब भी काफ़ी नहीं है.

डॉरीयस के मुताबिक़, "इस कोड में ये तो कहा गया है कि कम्पनियों को वर्कप्लेस पर यौन शोषण रोकने के लिए कदम उठाने होंगे लेकिन ये नहीं कहा गया है कि अगर कम्पनी ऐसा नहीं करती है तो उस पर क्या कार्रवाई होगी."

2018 के एक सर्वे के मुताबिक़, 100 भागीदारों में से 81% ने बताया कि उनकी कम्पनियों में यौन शोषण के ख़िलाफ़ नीतियाँ ही नहीं हैं और 12% ने बताया कि नीतियाँ हैं लेकिन उनका निर्वाहन नहीं हो रहा. सिर्फ़ 7% ने कहा कि उनकी कम्पनी ने इन नीतियों को लागू किया है.

तमाम कमियों के बावजूद डॉरीयस मानते हैं कि शायनज़ी के केस का इतनी दूर तक आना ही हौसला बढ़ाता है.

"ये एक बड़ा पल होगा जहां हम देखेंगे कि कोर्ट इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई करती है या नहीं."

"इसके बाद ही कहा जा सकेगा कि क़ानून यौन शोषण के पीड़ितों की सुरक्षा करने में सक्षम है."

(बीबीसी के यित्सिंग वांग के सहयोग से)  (bbc.com)


02-Dec-2020 5:15 PM 16

नीरा टंडन के नाम पर अगर सीनेट ने रज़ामंदी दे दी तो वे दूसरी भारतीय-अमेरिकी होंगी जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी

सोमवार को ही ये ख़बर आई थी कि नई अमेरिकी सरकार के लिए भारतीय-अमेरिकी नीरा टंडन का नामांकन अमेरिका के प्रबंधन और बजट विभाग के निदेशक पद के लिए हुआ है.

लेकिन अब रिपब्लिकन नेता निकी हेली ने इस नामांकन को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है.

निकी हेली ने कहा कि "नीरा का नामांकन बहुत चिंताजनक है क्योंकि अतीत में उनके ग़लत फ़ैसले देखने को मिले हैं."

एक ट्वीट में निकी ने कहा, "टंडन ने अतीत में ग़लत फ़ैसले लिए हैं. उन्होंने ट्रंप को लेकर कहा था कि वे अमेरिका के ख़िलाफ़ साज़िश का हिस्सा हैं और रिपब्लिकन सांसदों को नीचा दिखाने का उनका ट्रैक रिकॉर्ड है. एक कहावत है कि 'पर्सनल इज़ पॉलिसी' और इसलिए बाइडन का उन्हें नामांकित करना काफ़ी चिंताजनक है."

निकी हेली, साउथ कैरोलाइना की दो बार गवर्नर रह चुकी हैं और अमेरिका की कैबिनेट में जगह पाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी थीं और उन्होंने ट्रंप सरकार के पहले दो साल में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत के तौर पर काम किया.

एक और ट्वीट में निकी हेली ने लिखा है, "बजट चीफ़ के लिए बाइडन की पसंद नीरा टंडन हैं. ओबामा-केयर में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और हिलेरी क्लिंटन के लिए काम करते हुए वे उनकी क़रीबी रही हैं. उन्होंने एक लिबरल थिंक-टैंक का नेतृत्व करते हुए 'मेडिकेयर एक्स्ट्रा फ़ॉर ऑल' जैसे प्रस्तावों को देखा."

टंडन के नाम पर अगर सीनेट ने रज़ामंदी दे दी तो वे दूसरी भारतीय-अमेरिकी होंगी जिन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी.

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रिपब्लिकन नेता निकी हेली ने इस नामांकन को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है

बाइडन ने किया बचाव
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी नीरा के नामांकन का बचाव किया.

एक ईमेल के ज़रिए बाइडन ने अपने समर्थकों से कहा, "वो आपके लिए ऐसे लड़ेंगी जैसे अपने परिवार के लिए क्योंकि उनका बचपन फ़ूड स्टांप्स (अमेरिका में राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम) पर निर्भर रहकर और सेक्शन-8 के घरों (कम आमदनी वाले परिवारों के लिए सरकारी आवास योजना) में बीता है जिसकी वजह से वह समझती हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था को सभी लोगों को गरिमामयी और मानवीय जीवन प्रदान करना चाहिए."

लेकिन रिपब्लिकन सांसद नीरा टंडन के आलोचक रहे हैं.

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक़, रिपब्लिकन कहते हैं कि उनके द्वारा अतीत में दिए बयानों की वजह से उन्हें पद मिलने की संभावनाओं पर ख़तरा है.

प्रभावशाली सेनेटर जॉन कॉर्निन, जो सीनेट इंडिया कॉक्स के सह-अध्यक्ष भी हैं, उनका कहना है कि "टंडन का नामांकन बाइडन का सबसे ख़राब नामांकन है."

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रिपब्लिकन नेताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया
मीडिया से बात करते हुए कॉर्निन ने कहा कि "टंडन ने पिछले कुछ हफ़्तों में अपने कई पुराने ट्वीट डिलीट कर दिये हैं जो एक बचकानी हरकत है, जैसे वो लोगों को मिल ही नहीं पाएँगे."

कॉर्निन ने कहा, "मुझे थोड़ी हैरानी है कि वे ऐसा करेंगी और किसी रिपब्लिकन से सलाह भी नहीं लेंगी. कुछ बातें ना होती अगर वे पहले ही आगाह कर देतीं और विचार-विमर्श कर लेतीं."

सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने रिपब्लिकन नेताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने कहा, "सीनेट के रिपब्लिकन्स ने ये दिखावा करते हुए चार साल बिता दिए कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के बेवक़ूफ़ाना ट्वीट नहीं देखे, अब अचानक उनकी दिलचस्पी राष्ट्रपति-इलेक्ट बाइडन के कैबिनेट उम्मीदवारों की ट्विटर फ़ीड में बढ़ गयी है."

शूमर ने कहा, "हम सब जानते हैं कि टंडन एक योग्य उम्मीदवार हैं. इस पद पर जाने वाली वह पहली महिला होंगी जो श्वेत नहीं हैं."

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हिलेरी और ओबामा की भी क़रीबी
जिस पद के लिए नीरा को नामांकित किया गया है, वो व्हाइट हाउस के प्रमुख पदों में से एक है और इसका काम सरकार के बजट को संभालना है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अगर अमेरिका के सीनेट ने रज़ामंदी दे दी तो 50 साल की नीरा व्हाइट हाउस में इतने प्रभावशाली पद पर बैठने वाली ऐसी पहली महिला होंगी जो श्वेत नहीं होगी.

फ़िलहाल नीरा एक पब्लिक पॉलिसी रिसर्च संस्था 'सेंटर फ़ॉर अमेरिकन प्रोग्रेस' में मुख्य कार्यकारी हैं.

द वॉल स्ट्रीट अख़बार के मुताबिक़, नीरा को नामांकित करने का फ़ैसला बाइडन की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत वे उदारवादी और मध्यमार्गी आर्थिक सलाहकारों की टीम बनाना चाहते हैं. ये टीम ट्रेज़री सेक्रेटेरी के लिए नामांकित जैनेट येलेन के साथ-साथ काम करेगी.

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़, नीरा पर रूढ़िवादी ख़ेमे की ओर से सरकार के ख़र्चों को कम करने का दबाव होगा लेकिन वे मौजूदा आर्थिक गिरावट को लेकर बाइडन सरकार के जवाब को तैयार करने में एक अहम भूमिका निभाएँगी.

वे हिलेरी क्लिंटन की भी क़रीबी सहयोगी रही हैं और ओबामा के कार्यकाल में अफ़ोर्डेबल केयर एक्ट पास करवाने में मदद की थी. (bbc.com)


02-Dec-2020 5:07 PM 17

रूस में अभी हुए एक मिक्स्ड मार्शल ऑर्ट्स मुकाबले में एक युवती दारिना ने अपने से चार गुना वजन वाले 530 पौंड वजन के ग्रिगोरी नाम के पहलवान को हरा दिया। 90 सेकंड चले इस मुकाबले का वीडियो दुनिया भर में फैल रहा है। 


02-Dec-2020 3:17 PM 16

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के पहले सचिव ने कहा है कि आतंकवाद दुनिया के सामने एक बड़ा संकट है. उन्होंने दुनिया को साथ मिलकर इससे लड़ने और हराने का आग्रह किया है.

 डायचेवेले पर  आमिर अंसारी का लिखा

भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित दुनिया सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रों को अपने आप को फिर से संगठित करने की जरूरत है. द्वितीय विश्व युद्ध की 75वीं वर्षगांठ की स्मृति के मौके पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के पहले सचिव आशीष शर्मा ने कहा कि आतंकवाद समकालीन दुनिया में युद्ध छेड़ने के माध्यम के रूप में सामने आया है और इससे पृथ्वी पर उसी तरह का नरसंहार होने का खतरा है जो दोनों विश्व युद्धों के दौरान देखा गया था. शर्मा ने कहा, "आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इसे सिर्फ वैश्विक कार्रवाई से हराया जा सकता है."

भारत ने यूएन में देशों से अपील की कि वे युद्ध छेड़ने के समकालीन प्रारूपों से लड़ने और दुनिया में अधिक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खुद को समर्पित करें. हालांकि भारत ने इस मौके पर किसी देश का नाम नहीं लिया है, लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि भारत पाकिस्तान पर देश में आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाता आया है. इससे पहले भी भारत यूएन के मंच का इस्तेमाल  आतंकवाद के मुद्दे को जोर शोर से उठाने के लिए कर चुका है.

शर्मा ने विशेष बैठक में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत के योगदान का जिक्र किया और बताया कि कैसे औपनिवेशिक शासन के अधीन होने के बाजवूद भारत के 25 लाख जवान द्वितीय विश्व युद्ध में लड़े. उन्होंने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध में सेवा देते हुए भारत के 87,000 जवान मारे गए या फिर लापता हो गए और लाखों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए.


02-Dec-2020 2:03 PM 18

ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने फ़ाइज़र कंपनी के बनाए टीके के इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है.

ब्रिटिश नियामक संस्था एमएचआरए ने कहा है कि फ़ाइज़र/बायोएन्टेक की ये वैक्सीन कोविड-19 से 95% सुरक्षा देती है और इसके व्यापक इस्तेमाल की अनुमति देना सुरक्षित है.

बताया जा रहा है कि कुछ ही दिनों के भीतर ऐसे लोगों को टीका लगना शुरू हो जाएगा जिन्हें सबसे ज़्यादा ख़तरा है.

ब्रिटेन ने पहले से ही इस टीके की चार करोड़ डोज़ के लिए ऑर्डर दिया हुआ है,

हर व्यक्ति को टीके के दो डोज़ दिए जाएँगे. यानी अभी दो करोड़ लोगों को टीका मिल सकता है.

ये दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित वैक्सीन है जिसे बनाने में 10 महीने लगे. आम तौर पर ऐसी वैक्सीन के तैयार होने में एक दशक तक का वक़्त लग जाता है.

हालाँकि जानकारों का कहना है कि टीके के बावजूद लोगों को संक्रमण रोकने के नियमों का पालन करते रहना चाहिए.


कैसे काम करती है ये वैक्सीन?

ये एक नई तरह की एमआरएनए कोरोना वैक्सीन है जिसमें महामारी के दौरान इकट्ठा किए कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़ों को इस्तेमाल किया गया है. कंपनी के अनुसार जेनेटिक कोड के छोटे टुकड़े शरीर के भीतर रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाती है और कोविड-19 के ख़िलाफ शरीर को लड़ने के लिए तैयार करती है.

इससे पहले कभी इंसानों में इस्तेमाल के लिए एमआरएनए वैक्सीन को मंज़ूरी नहीं दी गई है. हालांकि क्लिनिकल ट्रायल के दौरान लोगों को इस तरह की वैक्सीन के डोज़ दिए गए हैं.

एमआरएनए वैक्सीन को इंसान के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है. ये इम्यून सिस्टम को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने और टी-सेल को एक्टिवेट कर संक्रमित कोशिाकओं को नष्ट करने के लिए कहती है.

इसके बाद जब ये व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित होता है तो उसके शरीर में बनी एंटीबॉडी और टी-सेल वायरस से लड़ने का काम करना शुरू कर देते हैं.


वैक्सीन की रेस में और कौन-कौन शामिल?

ऑक्सफर्ड-एस्ट्राज़ेनिका की वैक्सीन - ये वाइरल वेक्टर टाइप वैक्सीन है जिसकमें जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड वायरस का इस्तेमाल किया गया है. इसे फ्रिज में सामान्य तापमान पर स्टोर किया जा सकता है और इसकी दो डोज़ लेनी होंगी. अब तक क्लिनिकल ट्रायल में इसे 62 से 90 फीसदी तक कारगर पाया गया है.

इस वैक्सीन के प्रति डोज़ की क़ीमत 4 डॉलर तक होगी.

मॉडर्ना की वैक्सीन - ये एमआरएनए टाइप की कोरोना वैक्सीन है जिसे वायरस के जेनेटिक कोड के कुछ टुकड़े शामिल कर बनाया जा रहा है. इसे माइनस 20 डिग्री तापमान पर स्टोर करने की ज़रूरत होगी और इसे छह महीनों तक ही स्टोर किया जा सकेगा. इसकी दो डोज़ लेनी होंगी और अब तक हुए क्लिनिकल ट्रायल में इसे 95 फीसदी तक कारगर पाया गया है.

इस वैक्सीन के प्रति डोज़ की क़ीमत 33 डॉलर तक होगी.

फ़ाइज़र की वैक्सीन - मॉडर्ना की वैक्सीन की तरह ये भी एमआरएनए टाइप की कोरोना वैक्सीन है. अब तक हुए क्लिनिकल ट्रायल में इसे 95 फीसदी तक कारगर पाया गया है. इसे माइनस 70 डिग्री के तापमान पर स्टोर करना होगा.

ये वैक्सीन दो डोज़ दी जाएगी और प्रति डोज़ की क़ीमत 15 डॉलर तक होगी.

गामालेया की स्पुतनिक-वी वैक्सीन - ये ऑक्सफर्ड की वैक्सीन की तरह वाइरल वेक्टर टाइप वैक्सीन है जिसके अब तक हुए क्लिनिकल ट्रायल में 92 फीसदी तक कारगर पाया गया है. इसे फ्रिज में सामान्य तापमान पर स्टोर किया जा सकता है और इसकी दो डोज़ लेनी होंगी.

इस वैक्सीन के प्रति डोज़ की क़ीमत 7.50 डॉलर तक होगी.

इसके अलावा रूस स्पुत्निक नाम की एक और वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहा है. वहीं चीनी सेना ने कैनसाइनो बायोलॉजिक्स की बनाई एक वैक्सीन को मंज़ूरी दे दी है. ये दोनों वैक्सीन ऑक्सफर्ड की वैक्सीन की तरह वाइरल वेक्टर टाइप वैक्सीन हैं.

(स्रोत- वैक्सीन बनाने वाली कंपनी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के जारी किए आंकड़ों के अनुसार) (bbc.com)


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