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पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी, ISI चीफ अचानक पहुंचे काबुल, आखिर माजरा क्या है?
21-Oct-2021 7:15 PM (26)

इस्लामाबाद. तालिबान के नेतृत्व वाली अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार के साथ वार्ता करने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख फैज हमीद गुरुवार को काबुल पहुंचे. तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री की यह पहली अफगान यात्रा है.

मीडिया से बातचीत का ये वीडियो तालिाबन प्रवक्ता अहमदुल्ला वासिक ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, एक दिवसीय यात्रा के दौरान पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अफगानिस्तान के कार्यकारी विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के साथ बातचीत की. साथ ही प्रतिनिधिमंडल काबुल की अंतरिम सरकार के नेतृत्व और अन्य अफगान नेताओं से मुलाकात हुई. तालिबान सरकार से मुलाकात के बाद शाह महमूद कुरैशी ने बताया, “अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ एक बातचीत हुई है. इस बातचीत में प्रधानमंत्री भी थे और कैबिनेट के लगभग सभी मंत्री भी मौजूद थे.

यह यात्रा मॉस्को में हाल में हुई चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और रूस के अधिकारियों की बैठक के बाद हो रही है. इसके अलावा, इस यात्रा को तेहरान में अगले सप्ताह होने वाली अफगानिस्तान और रूस के पड़ोसी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले अहम माना जा रहा है. (news18.com)

पाकिस्तानी आतंकी अशरफ का दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कराएगी पॉलीग्राफ़ टेस्ट
21-Oct-2021 7:14 PM (23)

नई दिल्‍ली. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने पाकिस्तानी जासूस और आतंकी मोहम्‍मद अशरफ का बहुत जल्द ही पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने वाली है, जिससे उस आतंकी की साजिश का पता लगाया जा सके. स्पेशल सेल के सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद अशरफ से जब पूछताछ की गई तो कई बार वह अपने बयानों को बदल रहा है और कई बार झूठ भी बोल रहा है. लिहाजा सच और झूठ के बारे में जानने के लिए स्पेशल सेल की टीम अशरफ का पॉलीग्राफ टेस्ट करवाना चाहती है.

सूत्रों के मुताबिक अशरफ ने भी पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के लिए लिखित तौर पर अपनी मंजूरी दिल्ली पुलिस को दे दी है. दरअसल भारतीय कानून के मुताबिक किसी भी शख्स का पॉलीग्राफ़ टेस्ट करने से पहले कोर्ट से इजाजत लेना आवश्यक है. स्पेशल सेल के अधिकारी के मुताबिक पॉलीग्राफ यह एक ऐसी मशीन है जिसका प्रयोग किसी भी शख्स के झूठ पकड़ने के लिए किया जाता है. इस मशीन को लाई डिटेक्टर मशीन भी कहते हैं. इस टेस्ट के मार्फत सवाल-जवाब के दौरान शख्स के हर्ट रेट यानी दिल की धड़कन की रफ्तार, ब्लड प्रेशर सहित कई अन्य वैज्ञानिक विधि से सही और झूठ के पैमाने को नापा जाता है. हालांकि कुछ मामलों को अगर ध्यान से देंखें तो, कुछ आरोपियों ने इस मशीन को भी गच्चा देने में कामयाब हो चुके हैं.

पाकिस्तान मूल के अशरफ पर लगे हैं काफी गंभीर आरोप 
पाकिस्तान मूल के रहने वाले मोहम्मद अशरफ पिछले करीब 10 सालों से भी ज्यादा वक्त यह सेंट्रल दिल्ली में छुप कर रहा था, जिसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पिछले कुछ समय पहले ही गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के समय हुई पूछताछ के दौरान उससे मिले इनपुट्स के आधार पर दिल्ली के ही कलिन्दी कुंज इलाके से कुछ हथियारों को भी जप्त किया गया था, जिसे उसने जमीन में गाड़ कर रखा था. मोहम्मद अशरफ की गिरफ्तारी के बाद उसके पास से बिहार मूल का पहचान पत्र, भारतीय पासपोर्ट सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किया गया था. जिसके बाद स्पेशल सेल की टीम बिहार के कटिहार, अररिया, कोलकाता, जम्मू और अजमेर गई थी और उससे जुड़े लोगों और अन्य सबूतों को खंगालने में जुटी थी.

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के ऑपरेशन की अगर बात करें तो इस मसले पर खुफिया एजेंसी आईबी के पूर्व अधिकारी डीपी सिन्हा और उनके सहयोगी अभिषेक शरण ने ऑपरेशन ट्रोजन हॉर्स में भी इस बात का जिक्र किया है कि – पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी करीब 10 से 15 साल पहले काफी स्लीपर सेल आतंकियों को भारत भेजा था, जिसका काम ही था कि पांच साल -10 सालों तक उससे कोई संपर्क नहीं साधा जाए, न ही किसी आतंकी वारदात में उसका प्रयोग किया जाए, लेकिन जब उसका एक स्थाई पता, घर-परिवार, पहचान पत्र इत्यादि बन जाए उसके बाद उसका प्रयोग सिर्फ इनपुट्स लेने के लिए या जरूरत पड़ने पर किसी को शरण देने के लिए किया जाए. इसी ऑपरेशन के तहत मोहम्मद अशरफ भी भारत आया था. जो पिछले कुछ समय से छुपकर रह रहा था, लेकिन जैसे ही 10 सालों के बाद अब ऑपरेशन में जुड़ने लगा, ये भारतीय खुफिया एजेंसी और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के रडार पर आ गया.
दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के संज्ञान में है ये मामला

मोहम्मद अशरफ की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग को खत भी लिखा था और अशरफ की औपचारिक तौर पर गिरफ्तारी मामले की जानकारी भी दी थी. दिल्ली पुलिस के द्वारा पाकिस्तानी दूतावास को इस मामले की जानकारी भी दी गई कि अशरफ को काफी विस्फोटक और भारी हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया है, लिहाजा इस गिरफ्तारी के बारे में अशरफ के परिजनों को सूचित कर दिया जाए.

स्पेशल सेल के द्वारा मोहम्मद अशरफ के खिलाफ की गई तफ्तीश के दौरान उसने इस बात को स्वीकार किया कि -वो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहा था, उसका हैंडलर पाकिस्तान में ही रहता है जिसका नाम नासिर है. अशरफ ने पूछताछ के दौरान ये भी बताया कि पिछले कुछ दिनों पहले उसने अपने हैंडलर को बताया क्यों पाकिस्तान आना चाहता है पर अपने परिजनों से मिलना चाहता है, लेकिन उसके हैंडलर ने साफ तौर पर कहा कि भारत में भी बहुत बड़े काम करने हैं और उस काम को निपटाने के बाद ही उसके पाकिस्तान में लाने के लिए सोचा जाएगा. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल मोहम्मद अशरफ के साथ रहने वाले मौलवी अहमद नूरी से भी पूछताछ कर रही है, जो दिल्ली के शास्त्री पार्क में रहने वाला है. इसके साथ ही अशरफ के संपर्क में रखने वाले उत्तर प्रदेश के कई लोग जांच एजेंसी के रडार पर हैं जिसके बारे में स्पेशल सेल की टीम पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के दौरान कई सवाल- जवाब करने वाली है. (news18.com)

पाकिस्तानी अधिकारी माइक बंद करना भूले, रूस में अपने ही मंत्री का उड़ा रहे थे मजाक, हो गई फजीहत
21-Oct-2021 6:50 PM (29)

मॉस्को. अफगानिस्तान मुद्दे पर रूस में बुलाई गई बैठक में पाकिस्तान की एक बार फिर फजीहत हो गई. इतने गंभीर मसले जहां भारत, चीन, ईरान और अमेरिका और रूस जैसे देश संकट का हाल निकाल रहे थे. वहीं, पाकिस्तानी अधिकारी अपने देश के ताजा हालातों पर आपस में डिस्क्शन कर रहे थे.

यहां पाकिस्तानी डिप्लोमेट उनके देश में चल रही मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी और उनकी बेटी के बीच टि्वटर विवाद को डिस्कस कर रहे थे. मामला तब खुला, जब डिप्लोमेट अपना माइक बंद करना भूल गए. दरअसल, पाक मंत्री शिरीन मजारी की बेटी इमान ने इमरान सरकार पर जादू-टोने के भरोसे देश चलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.

क्या कहा पाकिस्तानी डिप्लोमेट ने?
अफगानिस्तान में पाकिस्तान के विशेष दूत मोहम्मद सादिक ने दूसरे पाक अधिकारियों से उर्दू में कहा, ‘शुरू से इनका यही है, एग्रेसिव’. इसके बाद वह हंसने लगते हैं. लेकिन मोहम्मद सादिक इस दौरान अपना माइक बंद करना भूल गए.

क्या है विवाद?
पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी और उनकी बेटी इमान जैनब मजारी-हाजिर के बीच ट्विटर विवाद से देश में तूफान आ गया है. जब इमरान खान के बारे में यह बातें सुर्खियां बनी कि आईएसआई चीफ की नियुक्ति पर वह अपनी बेगम से मशविरा ले रहे हैं और इसमें जादू-टाेना किया जाना है. तब पेशे से वकील इमान ने ट्विटर पर सवाल पूछा, ‘क्या देश चलाने के लिए सरकार को “जादू का इस्तेमाल” करना चाहिए’ इमान ने आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री इमरान खान मुल्क के मामलों और जरूरी फैसलों में जादू-टोना और भविष्यवाणी पर निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि अगर देश को जादू-टाेने से चलाना है तो सरकार इतनी बड़ी कैबिनेट पर पैसे खर्च क्यों कर रही है.

पाक मंत्री ने अपनी बेटी को दी धमकी 
जवाब में पाक मंत्री शिरीन ने अपनी बेटी के ट्वीट पर जवाब दिया, “मुझे शर्म आती है कि आप इस तरह के निम्न, व्यक्तिगत, निराधार हमलों का इस्तेमाल करेंगी. जबकि वकील होने के नाते आपको मालूम होना चाहिए कि ऐसे आरोपों पर मानहानिक का केस दायर किया जा सकता है.” (news18.com)

ब्राजील के राष्ट्रपति बोल्सोनारो पर 'मानवता के खिलाफ अपराध' का मुकदमा चलाने की सिफारिश
21-Oct-2021 1:15 PM (18)

ब्राजील की एक संसदीय समिति ने राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो पर मानवता के खिलाफ अपराधों का मुकदमा चलाने की सिफारिश की है. ऐसा कोविड महामारी से ठीक से ना निपटने के लिए किया गया है.

  (dw.com) 

ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो पर देश की संसदीय समिति ने नौ आरापों में मुकदमा चलाने की सिफारिश की है. इन आरोपों में मानवता के खिलाफ अपराधों के अलावा नीमहकीमी भी शामिल है.

सेनेटर रेनान कैलहाइरोस ने समिति की अंतिम रिपोर्ट को पेश किया. यह समिति राष्ट्रपति बोल्सोनारो की सरकार की कोरोना वायरस संबंधी नीतियों की जांच कर रही थी. छह महीने की जांच के बाद यह रिपोर्ट पेश की गई है.

करीब 1,200 पेज की इस रिपोर्ट में सरकारी धन के दुरुपयोग का भी आरोप है. रिपोर्ट कहती है कि कोविड की शुरुआत में मलेरिया की दवाई की सिफारिश करने के अलावा सरकार ने कोई और नीतिगत फैसला नहीं लिया.

बोल्सोनारो पर अपराधिक मुकदमा चलाने के अलावा समिति ने उन पर महाभियोग चलाने की भी सिफारिश की है. हालांकि ऐसी सिफारिशों को मानने का फैसला चैंबर ऑफ डेप्युटीज के अध्यक्ष पर निर्भर करता है, जिन्हें बोल्सोनारो का करीबी माना जाता है.
हत्या का आरोप नहीं

समिति ने जिन आरोपों में मुकदमे की सिफारिश की है, उनमें आदिवासियों का नरसंहार और कत्ल जैसे संगीन आरोप शामिल नहीं किए गए. हालांकि इन आरोपों पर चर्चा हुई थी. समिति ने राष्ट्रपति के अलावा 65 अन्य व्यक्तियों और दो उद्योगों को भी रिपोर्ट में नामित किया है.

समिति में 11 सदस्य थे. इनमें से सात विपक्षी दलों से जुड़े हैं या निर्दलीय हैं. पिछले छह महीने के दौरान समिति ने दर्जनों लोगों के बयान दर्ज किए. अगले हफ्ते इस रिपोर्ट पर समिति में वोटिंग होने की संभावना है. रिपोर्ट को पारित करने के लिए बहुमत की जरूरत होगी, जिसे फिर प्रॉसीक्यूटर जनरल को भेजा जाएगा. प्रॉसीक्यूटर जरनल ही मुकदमा चलाने पर फैसला करेगा.
बोल्सोनारो का बोलबाला घटा

ब्राजील में 2.2 करोड़ लोग कोरोना वायरस महामारी का शिकार बने. वहां छह लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. महामारी के दौरान देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी. इस कारण मार्च और अप्रैल में बड़ी संख्या में मौतें हुईं.

इस स्थिति के बावजूद बोल्सोनारो ने कोरोनावायरस की गंभीरता को शुरुआत से ही ज्यादा अहमियत नहीं दी. उन्होंने वैक्सीन पर संदेह जाहिर किए और कड़ी पाबंदियां लगाने जैसे उपाय भी नहीं किए. उन्होंने बार-बार कहा कि उन्होंने खुद कोई टीका नहीं लगवाया.

बोल्सोनारो पर यह भी आरोप है कि उन्होंने ब्राजील के लिए वैक्सीन खरीदने में देरी की जबकि उनका देश अमेरिका और भारत के बाद दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित मुल्क है.

बोल्सोनारो सरकार के प्रति जनता का समर्थन लगातार घट रहा है. सितंबर में डाटाफोला संस्था द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में 53 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रपति की नीतियों को खारिज किया. 2019 में बोल्सोनारो द्वारा सत्ता संभालने के बाद से यह समर्थन का निम्नतम स्तर है.

वीके/एए (एपी, डीपीए)

मॉस्को में तालिबान से मिला भारतीय प्रतिनिधिमंडल
21-Oct-2021 1:12 PM (20)

अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार में उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनाफी के नेतृत्व वाले उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भारत सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की.

  डॉयचे वैले पर विवेक कुमार की रिपोर्ट

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में पाक-अफगानिस्तान-ईरान प्रभाग के जॉइंट सेक्रेटरी जेपी सिंह कर रहे हैं. यह दल मॉस्को में हो रहे अफगानिस्तान सम्मेलन के दौरान रूस की सरकार के विशेष न्योते पर वहां गया है.

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि सम्मेलन से इतर दोनों प्रतिनिधिमंडलों की मुलाकात हुई. भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

भारत पहले भी तालिबान के प्रतिनिधियों से औपचारिक बातचीत कर चुका है. पिछली बार ऐसी मुलाकात दोहा में हुई थी जब 31 अगस्त को कतर में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने तालिबान के नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई से भारतीय दूतावास में ही मुलाकात की थी.

तब भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था, "आज कतर में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने दोहा में तालिबान के राजनीतिक दफ्तर के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई से मुलाकात की. तालिबान के आग्रह पर यह बैठक भारत के दूतावास में हुई.”
सरकारी स्तर पर पहला संपर्क

बुधवार को मॉस्को में हुई मुलाकात अफगानि्सतान में अंतरिम कैबिनेट के गठन के बाद दोनों पक्षों के बीच पहला औपचारिक संपर्क है. अफगानिस्तान के समाचार चैनल टोलो न्यूज ने मुजाहिद के हवाले से बताया कि भारत युद्ध पीड़ित देश को मानवीय सहायता देने को तैयार है.

मुजाहिद के मुताबिक दोनों पक्षों ने एक दूसरे की चिंताओं पर ध्यान देने और कूटनीतिक व आर्थिक रिश्ते सुधारने पर भी जोर दिया.

मॉस्को में अफगानिस्तान पर यह सम्मेलन 2017 में स्थापित किया गया था. इस सम्मेलन में छह पक्षों को अफगानिस्तान पर अपनी राय व्यक्त करने और एक दूसरे से सलाह मश्विरा करने का मौका मिलता है. इन पक्षों में रूस के अलावा अफगानिस्तान, भारत, ईरान, चीन और पाकिस्तान शामिल हैं. 2017 के बाद से ये देश कई बार इस मुद्दे पर चर्चा कर चुके हैं.

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में सरकार बना लिए जाने के बाद यह पहला सम्मेलन है, जिसमें दस देशों के प्रतिनिधि आमंत्रित हैं. तालिबान ने 15 अगस्त को तब काबुल पर कब्जा कर लिया था जब अमेरिकी सेना के नेतृत्व वाली नाटो फौजें दो दशक लंबे अभियान के बाद वहां से जाने के अंतिम चरण में थीं.
मदद की अपील

मॉस्को फॉर्मैट में अफगान उप प्रधानमंत्री हनाफी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि उनकी अंतरिम सरकार को मान्यता दे. इस सरकार में ऐसे लोग भी शामिल हैं जो संयुक्त राष्ट्र की ब्लैक लिस्ट में हैं.

अफगान समाचार एजेंसी खाम प्रेस के मुताबिक हनाफी ने कहा, "अफगानिस्तान को अलग-थलग कर देना किसी के भी हित में नहीं है. यह पहले भी साबित हो चुका है.” हनाफी ने अमेरिका से आग्रह किया कि देश के सेंट्रल बैंक की संपत्ति पर लगी पाबंदियां हटाए. ये संपत्तियां करीब 9.4 अरब अमेरिकी डॉलर की हैं.

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने अमेरिका के सम्मेलन में हिस्सा ना लेने पर अफसोस जाहिर किया. उन्होंने कहा, "हमें अमेरिका के ना आने का अफसोस है. उम्मीद है ऐसा कि उसूली समस्या के कारण नहीं हुआ और वजह बस यही हो कि अफगानिस्तान में अमेरिका का विशेष दूत बदल गया है.”

लावरोव ने कहा कि अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान को वित्तीय, आर्थिक और मानवीय सहायता दे ताकि मानवीय संकट और बड़े पैमाने पर विस्थापन को टाला जा सके. (dw.com)
 

सऊदी की एक शाम: समंदर किनारे मर्द और औरत में नहीं कोई दूरी
21-Oct-2021 1:10 PM (27)

कुछ समय पहले तक आस्मा के लिए अपने प्रेमी के साथ सऊदी अरब के समुद्र तट पर पूरा दिन बिताना अकल्पनीय था. पर अब सऊदी अरब बदल रहा है.

(dw.com) 

बेहद रूढ़िवादी सऊदी अरब के समुद्र तट पर अपने प्रेमी के साथ पूरा दिन बिताना आस्मा के लिए अकल्पनीय था. अब 32 साल की आस्मा लाल सागर के सफेद रेतीले तटों पर अपने दोस्त के साथ डांस कर सकती हैं.

आस्मा इस बात से भी खुश हैं कि वह समुद्र तट पर अपने साथी के साथ डांस करते हुए पास के लाउडस्पीकर पर बजने वाले तेज संगीत का आनंद ले सकती हैं. यह सामाजिक परिवर्तन खाड़ी के इस इस्लामी साम्राज्य में शुरू हुए खुलेपन का एक उदाहरण मात्र है.

हाल के दिनों में सऊदी अरब में हुए कई सामाजिक परिवर्तनों के दो मुख्य कारण हैं. इन परिवर्तनों के साथ-साथ जहां एक ओर अति कठोर सामाजिक ढांचे को आधुनिकता की सोच में बदला जा रहा है, वहीं तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था का विकल्प तैयार करना भी है.

खाड़ी देश के सामाजिक सुधार पर्यटन और घरेलू खर्च को प्रोत्साहित करके अपनी तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की इच्छा से प्रेरित हैं.
संगीत से बैन हटा, महिलाएं कर रहीं ड्राइविंग

सऊदी अरब में 2017 तक सार्वजनिक स्थानों पर संगीत पर प्रतिबंध लगा हुआ था. प्रतिबंध का सम्मान देश की धार्मिक पुलिस द्वारा सुनिश्चित किया जाता था. प्रतिबंध चार साल पहले हटा लिया गया था, इसके एक साल बाद महिलाओं को ड्राइविंग की इजाजत दी गई. अरब देश के अधिकांश बीचों में अभी भी पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग व्यवस्था है.

बीच पर इस तरह की छूट देश में पर्यटन और सार्वजनिक मनोरंजन को बढ़ावा देने के लिए अब तक उठाए गए कदमों में से एक है. 300 रियाल भुगतान करके आप जेद्दाह के पास प्योर बीच नामक एक समुद्र तट रिसॉर्ट में जा सकते हैं. यहां संगीत और डांस पर कोई प्रतिबंध नहीं है और आप समुद्र तट की सफेद रेत की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं.
'सपना सच हो गया'

स्विमसूट के ऊपर नीले रंग की पोशाक पहने आस्मा ने एएफपी को बताया, "मैं अपने घर के पास इस समुद्र तट पर आकर बहुत खुश हूं. मैं मजे ले सकती हूं. हमारा सपना था कि हम यहां आएं और एक खूबसूरत वीकएंड बिताएं. अब वह सपना सच हो गया है."

जो लोग सऊदी अरब के प्योर बीच पर जाते हैं वे भी समुद्र में स्नान कर सकते हैं. महिलाओं ने बिकनी पहन रखी है और उनमें से कुछ हुक्का पी रही हैं. सूरज ढलने के साथ पास ही मंच पर पश्चिमी संगीत की धुन पर कलाकार नृत्य पेश करते हैं. एक जोड़ा एक दूसरे को गले लगाता देखा जा सकता है.

दूरगामी सामाजिक परिवर्तनों के फलस्वरूप सऊदी अरब में अब जो दृश्य देखने को मिल रहे हैं वे कई देशों में काफी सामान्य हैं, लेकिन इस अरब साम्राज्य में ऐसे दृश्य बहुत ही अलग और असामान्य लगते हैं क्योंकि सऊदी अरब शुरू से ही यह सख्त वहाबी मुस्लिम विचारधारा वाला एक रूढ़िवादी देश रहा है. इसके अलावा मक्का में काबा और मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद दुनिया में मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से दो हैं.
खुलता सऊदी समाज

इस देश में जेद्दाह और आसपास के क्षेत्र के बाहर प्योर बीच जैसे दृश्य कभी नहीं देखे गए. ऐसा इसलिए है क्योंकि जेद्दाह देश का वह इलाका है जहां खुलेपन का विचार सबसे ज्यादा प्रचलित है. सऊदी अरब का प्योर बीच जेद्दाह शहर के केंद्र से लगभग 125 किलोमीटर उत्तर में किंग अब्दुल्ला इकोनॉमिक सिटी में स्थित है.

मिस्र के हादिल उमर कहते हैं, "मैं यहां पला-बढ़ा हूं. कुछ साल पहले तक हमें संगीत सुनने की भी इजाजत नहीं थी. तो हमारे लिए यह स्वर्ग के समान है."

अपना खुद का कारोबार चलाने वाली एक युवा सऊदी महिला दीमा ने समुद्र तट पर संगीत पर डांस करते हुए एएफपी को बताया, "मुझे नहीं लगता कि मुझे अच्छा समय बिताने के लिए विदेश जाने की जरूरत है. यहीं सब है इसके लिए."

2017 में सत्ता में आए क्राउन प्रिंस और वास्तविक शासक मोहम्मद बिन सलमान के तहत देश परिवर्तन का अनुभव कर रहा है. लेकिन 'एमबीएस' ने महिला अधिकार कार्यकर्ताओं, मौलवियों और पत्रकारों को हिरासत में लेते हुए असंतोष पर व्यापक कार्रवाई शुरू की है. एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने उन पर इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की 2018 की नृशंस हत्या को मंजूरी देने का आरोप लगाया है.

एए/वीके (एएफपी)
 

फेसबुक, ट्विटर पर बैन डोनाल्ड ट्रंप ला रहे खुद का प्लेटफॉर्म, जो बाइडन पर साधा निशाना
21-Oct-2021 12:45 PM (24)

न्यूयॉर्क. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TRUTH Social लेकर आ रहे हैं. बुधवार को ही उन्होंने नई कंपनी के संबंध में घोषणा की है. खबर है कि प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग अगले महीने तक हो सकती है और राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग के लिए यह अगले साल से उपलब्ध हो जाएगा. खास बात यह है कि फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स ट्रंप पर रोक लगा चुके हैं.

दरअसल ट्रंप एक नई मीडिया कंपनी की शुरुआत करने जा रहे हैं, जिसका अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी होगा. उनका कहना है कि ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप और इसका ‘TRUTH Social’ ऐप का मुख्य मकसद बड़ी टेक कंपनियों का प्रतिद्विंदी खड़ा करना है, जिन्होंने उन पर रोक लगा रखी है. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति जो बाइडन पर भी निशाना साधा.

ट्रंप ने कहा, ‘हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहां ट्विटर पर तालिबान की बड़े स्तर पर मौजूदगी है. इसके बाद भी आपके पसंदीदा राष्ट्रपति चुप हैं.’ उन्होंने बयान दिया, ‘यह स्वीकार्य नहीं है.’ विज्ञप्ति के अनुसार, नई कंपनी की शुरुआत डिजिटल वर्ल्ड एक्विजिशन कॉर्प. के साथ विलय के जरिए शुरू हुई है.

ट्विटर और फेसबुक से प्रतिबंधित होने के बाद से ही ट्रंप लगातार अपनी खुद की सोशल मीडिया साइट लॉन्च करने के बारे में बात कर रहे हैं. करीब 9 महीने पहले पूर्व राष्ट्रपति को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन कर दिया गया था. कंपनियों ने 6 जनवरी को वॉशिंगटन डीसी के पास कैपिटल हिल हिंसा केस में उनकी भूमिका के चलते यह कदम उठाया था. नवंबर में आयोजित हुए राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के दूसरी बार उम्मीदवार रहे ट्रंप को डेमोक्रेट और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.(news18.com)

मॉस्को वार्ता: तालिबान ने कहा- अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देने के लिए भारत तैयार
21-Oct-2021 12:44 PM (24)

नई दिल्ली. रूस में बुधवार को आयोजित मॉस्को वार्ता के बीच तालिबान और भारत के बीच दूसरी बार आधिकारिक चर्चा हुई. इसके बाद तालिबान ने बयान जारी किया है कि भारत ने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता देने की बात कही है. खास बात है कि यह पहला मौका है जब तालिबान ने भारत के साथ आधिकारिक रूप से मीटिंग की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकारी है. इससे पहले अगस्त में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल के साथ कतर में हुई बैठक को लेकर तालिबान ने चुप्पी साध रखी है.

‘इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान’ के प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट किया, ‘मॉस्को फॉर्मेट में भारतीय राजनयिकों ने कहा है कि अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है, अफगानिस्ता बुरे हालात से गुजर रहा है. भारत, अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है.’ वार्ता में तालिबान का प्रतिनिधित्व उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनाफी कर रहे थे. वहीं, भारतीय पक्ष की तरफ से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जेपी सिंह और उनके साथी आदर्श स्वैका पहुंचे थे. तालिबान ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष इस बात को जरूरी माना कि एक-दूसरे की चिंताओं पर विचार को जरूरी माना.

मॉस्को फॉर्मेट में तालिबान के साथ 10 और देश भी शामिल हुए थे. इस दौरान अफगानिस्तान में समावेशी सरकार की बात पर जोर दिया गया. भारत के अलावा अन्य देशों ने भी तालिबान के साथ अलग-अलग बातचीत की. मॉस्को वार्ता में तालिबान ने इस बात की पुष्टि की है कि अफगान की धरती का इस्तेमाल उसके पड़ोसियों के खिलाफ नहीं होगा. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए मॉस्को वार्ता में शामिल हुए देशों ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों को लेकर चिंता जताई. साथ ही देशों ने इस दौरान अफगानिस्तान में सुरक्षा को बढ़ावा देना जारी रखने की इच्छा जाहिर की.

मॉस्को वार्ता में चीन और  पाकिस्तान भी शामिल हुए. जबकि, अमेरिका नदारद रहा. चर्चा के दौरान आधिकारिक रूप से मान्यता देने को लेकर चर्चा नहीं की गई. बैठक में तत्काल रूप से मानवीय सहायता की बात कही गई और संयुक्त राष्ट्र में रूस के उस प्रस्ताव का समर्थन किया गया, जिसमें उसने अफगानिस्तान में मानवीय संकट का जिक्र किया था. बयान के अनुसार, इसके संदर्भ में वार्ता में शामिल हुए देशों ने जल्द से जल्द संयुक्त राष्ट्र के तहत एक इंटरनेशनल डोनर कॉन्फ्रेंस का प्रस्ताव दिया है. (news18.com)

ब्रिटेन: जालंधर के शख्स ने पत्नी को बेरहमी से मारा, लाश को प्लास्टिक बैग में फेंकी, लेकिन कर गया एक गलती
21-Oct-2021 12:44 PM (35)

लंदन. जालंधर के युवक को पत्नी की हत्या के जुर्म में ब्रिटेन में 20 साल कैद की सजा दी गई. आरोपी ने आपसी कलह में पत्नी की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी. जिसके बाद लाश को प्लास्टिक में पैक कर फुटपाथ पर फेंक दिया. इस हत्याकांड का पूरा राज CCTV फुटेज से खुला था. जिसके बाद आरोपी पति पर हत्या का केस दर्ज हुआ और उसे सजा हो गई.

जालंधर के राजा गार्डन के रहने वाले कशिश अग्रवाल की शादी फिल्लौर की रहने वाली गीतिका गोयल से हुई थी. यूके के लीस्टर सिटी में कशिश ने 3 मार्च को पत्नी गीतिका की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी. मृतका के परिजनों का आरोप था कि 2016 में दोनों की शादी हुई. जिसके बाद उन्हें यूके की नागरिकता मिल गई. इसके बाद पति कशिश पत्नी को परेशान करने लगा. इसी वजह से उनमें झगड़ा हुआ और कशिश ने पत्नी की हत्या कर दी.

हत्याकांड को अंजाम देने के बाद उसने गीतिका के भाई हेमंत को फोन कर कहा कि गीतिका बिना कुछ बताए कहीं चली गई है. उसका फोन भी नहीं लग रहा. इसकी शिकायत पुलिस तक हुई तो अगले ही दिन फुटपाथ से गीतिका की लाश बरामद हो गई. गीतिका की छाती और अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार किए गए थे. जिसके बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू की.

इस दौरान पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज लगी. जिसमें आरोपी कशिश घटना की रात गैरेज में दाखिल होते दिखा. इसके बाद वह कार निकालते भी नजर आया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने जुर्म कबूल कर लिया. जांच में पता चला कि वह गीतिका की लाश को खींचकर लाया और फिर कार की डिक्की में डालकर फुटपाथ पर फेंक आया.

(news18.com)

घर की अटारी से रोज रात आती थी तेज आवाजें, अंदर जाते ही उड़ गए लोगों के होश!
21-Oct-2021 12:42 PM (60)

कई बार इंसान को अपने घर में रह रही चीजों की जानकारी ही नहीं होती. इंसान सालों तक घर में रहते हैं लेकिन उन्हें मालूम ही नहीं चल पाता कि उनके अलावा भी उनके घर में कोई रह रहा है. अब ज़रा इंग्लैंड में रहने वाले इस कपल को ही देख लीजिये.इस कपल के घर में एक साल तक करीब एक लाख मधुमक्खियां रह रही थी.इस बात का पता उन्हें सालभर बाद पता चला. इस घटना के बारे में RC पेस्ट मैनेजमेंट के राल्फ क्लेव्स ने सोशल मीडिया पर बताया.

इस पेस्ट कंट्रोलर ने सोशल मीडिया पर मधुमक्खी के विशाल नेस्ट के साथ तस्वीर शेयर की. ये नेस्ट करीब 3 फ़ीट लंबा था. इसकी तस्वीर देख सभी हैरान रह गए. राल्फ ने इस नेस्ट को रग्बी में रहने वाले एक कपल के घर की अटारी से नीचे उतारा. उसने बताया कि वहां ऐसे दो और नेस्ट थे. इनका साइज थोड़ा छोटा था फिर भी वो दोनों भी फुटबॉल के साइज के ही थे. लेकिन ये वाला नेस्ट सबसे बड़ा था. खुद 6 फ़ीट एक इंच के राल्फ ने बताया कि ये नेस्ट लगभग उनका आधा है.

नेस्ट को देखते हुए राल्फ ने बताया कि इसमें करीब एक लाख मधुमक्खियां रहती थी. ये राल्फ के करियर में मिली सबसे बड़ी नेस्ट थी. राल्फ ने बताया कि उन्होंने 1997 से पेस्ट कंट्रोलर का काम करना शुरू किया था. इसके बाद से अबतक मिले सारे नेस्ट में ये सबसे बड़े थे. लेकिन राल्फ के लिए सबसे अच्छी बात ये थी कि नेस्ट उस समय खाली था. उसने बताया कि इसे मधुमक्खियां छोड़ कर जा चुकी हैं. वो एक साल ही अपने घर में रहती हैं फिर नया घर बनाती है.

मिला नेस्ट करीब 70 इंच बड़ा था. इसे बनाने में मधुमक्खियों को करीब एक साल का समय लगा था. इसे सड़े टिम्बर से बनाया जाता है. मधुमक्खियां इसे अपनी लार से मिक्स कर बनाते हैं. ये काफी पतला होता है. जैसे माचिस की डिब्बी का पेपर. राल्फ ने इसके साथ फोटोज क्लिक कर शेयर किया, जहां से ये वायरल हो गया. (news18.com)

तहलका मचा रही है एक टांग वाली मॉडल, 6 साल की उम्र में बोन कैंसर के चलते खोया था पैर
21-Oct-2021 12:42 PM (43)

मॉडल चेरी लुइस सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरत पिक्चर्स पोस्ट करती हैं और दुनिया के सामने अपने आत्मविश्वास को दिखाती हैं. उनके इस आत्मविश्वास की तारीफ करने के बजाय यहां भी ट्रोल्स ये तक कहने लगते हैं कि उनका पैर न होना फोटोशॉप का कमाल है, ताकि उन्हें लोगों का अटेंशन मिल सके.

चेरी महज 6 साल की थीं, जब उन्हें बोन कैंसर की बीमारी थी. बीमारी ने उन्हें बाएं पैर से अपंग कर दिया. उन्हें तेज़ बुखार हुआ और बाएं पैर में बेतहाशा दर्द होने लगा. उन्हें दौड़ने में भी दिक्कत थी. तमाम डॉक्टर के पास जाने और जांच-पड़ताल करने के बाद उन्हें रेयर बोन कैंसर की पुष्टि हुई.

Osteosarcoma नाम के बोन कैंसर में उनकी हड्डियों की सेल्स में ट्यूमर की तरह लंप होने लगे, जिसमे नए टिश्यूज़ बनना बंद हो गए. डॉक्टर्स ने उनके बाएं पैर और आधे पेल्विस को निकालने की सलाह दी, ताकि चेरी की ज़िंदगी बचाई जा सके. इस ऑपरेशन के बाद उनका आत्मविश्वास खो गया था और वे डिप्रेस भी हो गई थीं.

29 साल की चेरी ने अपनी ज़िंदगी की राह फैशन इंडस्ट्री में ढूढ ली. वे अब मॉडल और फैशन स्टायलिस्ट हैं. न्यूज़ीलैंड के न्यू प्लाइमाउथ में रहने वाली चेरी ने 20 की उम्र पार करने के बाद ये जाना कि अगर उन्हें उनकी अपंगता से ही अटेंशन मिल रही है, तो इसे सकारात्मक तरीके से लेने की ज़रूरत है.

अब चेरी Bluebella और Modibodi जैसे ब्रैंड्स के लिए मॉडलिंग करती हैं और अपनी पिक्चर्स को सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. चेरी बताती हैं कि टीनएज में वे टीवी पर पैराओलंपिक्स के अलावा कभी भी किसी एम्पुटी को नहीं देखती थीं. उन्हें लगता था कि उन्हें न तो कभी कोई नौकरी मिलेगी, न ही कोई उन्हें प्यार करेगा. इस बात को लेकर वे रात-रात भर रोती रहती थीं.

उन्होंने जब देखा कि लोग उनकी तरफ इतना ध्यान देते ही हैं, तो इसे दूसरी तरह से इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया पर मॉडलिंग करके अपना आत्मविश्वास वापस लाना शुरू कर दिया. 16 साल की उम्र में उन्होंने फैशन स्कूल में जाना शुरू कर दिया था. उन्हें अपनी आधिकारिक नौकरी Bluebella लिंजरी ब्रैंड के साथ मिली. फिर उन्होंने Modibodi के साथ काम किया, जो पीरियड पैंट्स बनाती है.

हालांकि चेरी के फोटोज़ को देखकर लोग ऐसा भी कहने लगते हैं कि वे फोटोशॉप का इस्तेमाल करती हैं, ताकि उन्हें लोगों का अटेंशन और पब्लिसिटी मिल सके. खुद चेरी को इन चीज़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनको लेकर क्या कहानियां गढ़ रहे हैं. वे अपना काम शान से कर रही हैं और चमक रही हैं.  (news18.com)

TV पर मौसम का हाल बता रही थी एंकर, अचानक स्क्रीन पर चलने लगा Porn Video और फिर...
21-Oct-2021 12:42 PM (7)

अमेरिका के वाशिंगटन में मौसम का पूर्वानुमान देख रहे दर्शकों को रविवार की शाम उस समय थोड़ा झटका लगा जब एक स्थानीय समाचार चैनल ने गलती से एक अश्लील क्लिप प्रसारित कर दी. वाशिंगटन के स्पोकेन में स्थित एक स्थानीय सीबीएस-संबद्ध समाचार आउटलेट केआरईएम ने शाम 6 बजे न्यूजकास्ट के दौरान 13-सेकंड का वीडियो प्रसारित किया.

मौसम विज्ञानी मिशेल बॉस मौसम का अपडेट दे रही थीं, तभी उनके पीछे स्क्रीन पर अश्लील वीडियो चलने लगा. न वो और न ही उनके को-एंकर, कोडी प्रॉक्टर, किसी को भी इस वीडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन दोनों ने अपनी रिपोर्ट जारी रखी क्योंकि ग्राफिक वीडियो बैकग्राउंड में चलाए जाने से पहले मौसम फुटेज में कटौती कर रहा था.

एडवीक की रिपोर्ट के अनुसार, केआरईएम ने अपने 11 बजे प्रसारण के दौरान "अनुचित" वीडियो के लिए माफी मांगी. स्टेशन ने कहा, "केआरईएम 2 में आज रात 6 बजे हमारे न्यूजकास्ट में कुछ हुआ, हम सभी उसके लिए माफी मांगना चाहते हैं." "शो के पहले भाग में एक अनुचित वीडियो प्रसारित किया गया. हम यह सुनिश्चित करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं कि ऐसा दोबारा न हो."

KREM की मूल कंपनी के एक कार्यकारी ने पुष्टि की कि चैनल ने गलती से एक्स-रेटेड फ़ुटेज प्रसारित करने के लिए माफ़ी मांगी थी. TEGNA के मुख्य संचार अधिकारी ऐनी बेंटले ने कहा, "हमने कल रात अपने 11 बजे के न्यूजकास्ट के दौरान अपने दर्शकों से माफी मांगी.

दर्शकों से कई संबंधित कॉल आने के बाद स्पोकेन पुलिस विभाग अब घटना की जांच कर रहा है.

विभाग ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, "स्पोकेन पुलिस विभाग की विशेष पीड़ित इकाई ने रविवार शाम को एक स्थानीय समाचार आउटलेट को जवाब दिया, जब स्टेशन की मौसम रिपोर्ट के दौरान दर्शकों की स्क्रीन पर एक पॉर्न वीडियो दिखाई दिया."

2017 में इसी तरह की एक घटना में सामने आई थी, जब बीबीसी के एक सतर्क दर्शक ने एक कर्मचारी को काम पर एक्स-रेटेड क्लिप देखते हुए देखा. एक लाइव प्रसारण के दौरान समाचार देने वाले एक एंकर के पीछे बीबीसी कर्मचारी की स्क्रीन दिखाई दे रही थी. (ndtv.in)
 

बच्चे की जान पर बनी, तो हथिनी ने मगरमच्छ को रौंद डाला ! खूनी खेल देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे
21-Oct-2021 12:40 PM (35)

जंगली जानवरों की ज़िंदगी से जुड़े हुए वीडियो इंटरनेट पर आए दिन वायरल होते जाते हैं और इन्हें लोग पसंद भी खूब करते हैं. खासतौर पर अगर वीडियो सर्वाइवल के संघर्ष का हो, तो इन्हें देखकर हम कई बार सहम भी जाते हैं. इस वक्त एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में लड़ाई एक हथिनी और मगरमच्छ के बीच की है.

वीडियो अफ्रीकी देश जाम्बिया का है. वीडियो में एक हथिनी मगरमच्छ से लड़ते हुए दिखाई दे रही है. चूंकि मगरमच्छ हथिनी के बच्चे पर तब हमला कर देता है, जब वो अपने झुंड के साथ नदी किनारे पानी पीने के लिए रुकता है. हथिनी की नज़र जैसे ही मगरमच्छ पर पड़ती है, वो अपने बच्चे को बचाने के लिए खूंखार जानवर से भिड़ जाती है. इस लड़ाई को एक टूरिस्ट ने अपने कैमरे में कैद कर लिया और अब ये खूंखार जंग पूरी दुनिया देख रही है.

हथिनी ने सिखाया मगरमच्छ को सबक
Daily Mail में छपी खबर के मुताबिक हाथियों का झुंड जाम्बिया की ज़ाम्बेज़ी नदी के किनारे पानी पीने के लिए आया था. इस दौरान मगरमच्छ ने हाथी के बच्चे पर हमला बोल दिया था. मगरमच्छ की हरकत देखते ही बच्चे की मां एक्शन में आ गई. उसने उल्टा मगरमच्छ पर धावा बोल दिया और उसे पानी में पटक-पटककर चित कर दिया. हथिनी ने मगरमच्छ पर अपनी सूंड़ के कई बार वार किया. मगरमच्छ हथिनी के चंगुल से छूटने की कोशिश करने लगा, लेकिन हथिनी के सामने उसकी एक नहीं चली.

मगरमच्छ की हालत हो गई खराब
हथिनी से मार खाकर मगरमच्छ की हालत इतनी खराब हो जाती है कि वो शांत पड़ जाता है. हथिनी उसे घसीटकर पानी के बाहर ले आती है, लेकिन मगरमच्छ कोई भी हरकत नहीं करता है. ऐसे में माना जा रहा है कि मगरमच्छ की मौत हो चुकी होती है. इस घटना को वहां मौजूद डेनमार्क के सैलानी हंस हेनरिक हार ने अपने कैमरे में शूट कर लिया. वीडियो में हथिनी और मगरमच्छ के बीच की ये लड़ाई देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. खासकर तब, जब हथिनी 7-8 फीट के मगरमच्छ पटक-पटकर चित कर देती है. (news18.com)

खुद का सोशल मीडिया नेटवर्क लॉन्च करेंगे डोनाल्ड ट्रंप, बोले - ट्विटर पर तालिबान है, लेकिन मुझे चुप करा दिया
21-Oct-2021 12:36 PM (11)

वाशिंगटन : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा है कि वह खुद का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रहे हैं, जिसका नाम ट्रूथ सोशल रखा गया है. इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का स्वामित्व ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के पास होगा. इसमें वीडियो ऑन डिमांड सेवा भी शामिल होगी, जिसमें नॉन वोक मनोरंजन प्रोग्रामिंग की सुविधा भी होगी. डोनाल्ड ट्रंप ने बयान में कहा कि मैंने बिग टेक कंपनियों के अत्याचार के खिलाफ खड़े होने के लिए ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी और ट्रूथ सोशल को शुरू किया है.  ट्रंप को 6 जनवरी को उनके समर्थकों द्वारा किए विरोध प्रदर्शन के बाद ट्विटर और फेसबुक पर बैन कर दिया गया था. ट्रंप ने आगे कहा कि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां तालिबान की ट्विटर पर बड़ी मौजूदगी है, लेकिन आपके पसंदीदा अमेरिकी राष्ट्रपति को चुप करा दिया गया. यह अस्वीकार्य है.

बता दें कि कैपिटॉल बिल्डिंग (अमेरिकी संसद भवन) में अपने समर्थकों द्वारा की गई हिंसा के बाद डोनाल्ड ट्रंप की चारों तरफ आलोचना हुई, जिसके बाद माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर (Twitter) ने डोनाल्ड ट्रंप के ट्विटर अकाउंट पर स्थायी रूप से बैन लगाने के बाद उनकी टीम का अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया था. इससे पहले, ट्विटर ने घोषणा की थी कि उसने निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खाते (अकाउंट) को ‘आगे हिंसा और भड़कने के जोखिम' के चलते स्थायी रूप से निलंबित कर दिया था.

दरअसल, ट्विटर ने डोनाल्ड ट्रंप का निजी अकाउंट स्थायी रूप से बैन कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्विटर पर निशाना साधा था.  ट्रंप ने आरोप लगाते हुए किए ट्वीट में लिखा था कि मैं लंबे वक्त से कहता आया हूं कि ट्विटर "फ्री स्पीच को बैन" कर रहा है और आज "डेमोक्रेट और कट्टर लेफ्ट" के साथ मिलकर मुझे चुप करने के लिए मेरे अकाउंट को बंद कर दिया. ट्रंप के इस ट्वीट के कुछ देर बाद कंपनी ने ट्रंप के कैंपेन अकाउंट (@TeamTrump) को बंद कर दिया था.  (ndtv.in)
 

पाकिस्तान बनने वाला है बांग्लादेश!, 40 साल में 4% घटे हिंदू, जानें कट्‌टरपंथी कैसे देते हैं हमलों को अंजाम
21-Oct-2021 12:17 PM (24)

ढाका. क्या भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश अब पाकिस्तान या अफगानिस्तान की बनने की राह पर है. बीते दिनाें दुर्गा पूजा के दौरान हिंदू समुदाय के साथ जो हिंसक घटनाएं देखने को मिली, उससे यही पता चलता है कि बांग्लादेश में कट्‌टरपंथी ताकतें हावी हो रही हैं.

अगर बांग्लादेश के बीते 40 साल के इतिहास पर नजर डालें तो हम पाएंगे कि यहां हिंदुओं की आबादी 13.5% से सिर्फ 8.5% रह गई है. बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन भारत में होता रहा है. बांग्लादेश में परंपरागत रूप से हिंदू सत्तारूढ़ अवामी लीग की मुखिया भले ही हिंदुओं समुदाय की सुरक्षा की गारंटी देती हों, लेकिन हाल ही घटनाओं पर उनकी सरकार की नाकामी दिखाती है कि वह भी इन पर रोक लगाने में असमर्थ हैं.

हिंदुओं पर हमलों का पूरा पैटर्न समझिए
वामपंथी रुझान वाले गणसमिति आंदोलन के जुनैद साकी का कहना है कि सत्तारूढ़ अवामी लीग अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं को सुरक्षा देने का बस वादा करती है. ये जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देते. हिंदुओं पर हमले एक निश्चित पैटर्न पर होते हैं.

कुछ सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाती है और इसे इस्लाम के खिलाफ करार दिया जाता है. फिर कट्‌टरपंथी संगठन हिंदुओं पर हमले का फरमान जारी कर देते हैं. इसके बाद हमलों का दौर शुरू हो जाता है. अल्पसंख्यक खासकर हिंदू समुदाय भी समझ चुका है, वे राजनीतिक रूप से हाशिये हैं और कुछ नहीं कर सकते.

बांग्लादेश की जनसंख्या बढ़ी, हिंदुओं की घटी
बांग्लादेश में 1971 से 2011 के चार दशकों के दौरान कुल आबादी 110 फीसदी बढ़ी है. 1971 में आबादी 7 करोड़ 14 लाख थी. जो 2011 में बढ़कर लगभग 15 करोड़ हो गई. जबकि इसी अवधि के दौरान हिंदुओं की आबादी लगभग 96 लाख से सवा करोड़ ही हुई. हिंदुओं की आबादी केवल 30% ही इजाफा हुआ, जो कि देश की तुलना में काफी कम है. (news18.com)

बांग्लादेश कानूनों में हिंदू पुरुष कर सकता है कई शादियां लेकिन महिलाएं क्यों लाचार
21-Oct-2021 10:25 AM (75)

बांग्लादेश का अपना कानून है. इस कानून में हिंदुओं के लिए हिंदू कोड लागू है. लेकिन इस कानून में विवाह को लेकर कई ऐसी बातें हैं, जिसके खिलाफ वहां हिंदू कई बार विरोध की आवाज बुलंद कर चुके हैं लेकिन कुछ नहीं होता है. ये ऐसा कानून है, जो अब हिंदुओं के लिए भारत में भी नहीं है. कुछ हद तक ये कानून हैरान करने वाला भी है.

भारत में जहां विवाह के बाद हिंदू महिलाओं को तमाम अधिकार दिए गए हैं, जिसमें संपत्ति, गुजारा भत्ता, तलाक जैसे अधिकार शामिल हैं, वहीं बांग्लादेश में हिंदू पर्सनल लॉ लागू है और वो सारे कानून जो हिंदू कोड के तहत अंग्रेजों के शासनकाल में लागू थे, इसमें महिलाओं को काफी लाचार स्थिति में रहना होता है.

बांग्लादेश में करीब 88 फीसदी आबादी मुस्लिमों की है जबकि 10 फीसदी हिंदू और 02 फीसदी ईसाई, बौद्ध और अन्य धर्म के लोग. 1971 में जब बांग्लादेश एक देश के तौर पर हरकत में आया और उसने अपना संविधान लागू किया तो हिंदू के पारिवारिक मामलों के लिए उन्हीं पर्सनल कानूनों पर चलने का फैसला किया, जो तमाम एक्ट के तहत ब्रिटिश दौर में लागू होते थे.

हिंदू पर्सनल लॉ में दयाबाग संस्था के तहत प्रावधान
बांग्लादेश में हिंदू पर्सनल लॉ को दयाबाग संस्था के हिंदू प्रावधानों के तहत रखा गया, जिसकी मान्यता पूर्वात्तर भारत में आजादी से पहले काफी ज्यादा रही है. इन कानून के तहत बांग्लादेश में रहने वाला हिंदू पुरुष कितने भी विवाह कर सकता है लेकिन विवाह के बाद पत्नी के पास संपत्ति से लेकर तलाक का अधिकार नहीं होता.

बांग्लादेश में हिंदू मैरिज एक्ट के खिलाफ वहां की महिला अधिकार संस्थाओं ने कई बार आवाज उठाई है. इस कानून में हिंदू पुरुषों को तो कई विवाह की आजादी है लेकिन हिंदू स्त्री तलाक भी नहीं ले सकती. 

क्यों तलाक नहीं ले सकतीं बांग्लादेश में हिंदू महिलाएं
चूंकि हिंदू मान्यताओं और संहिताओं में विवाह के बाद पुरुष और स्त्री के बंधन को पवित्र माना गया है तो ये भी माना गया है कि वो अलग नहीं हो सकते हैं, ये बात अक्षरशः बांग्लादेश में लागू होती है.

लगातार होती है इस कानून को बनाने की मांग
हालांकि हिंदू पर्सनल के इन कानूनों का बांग्लादेश में भी काफी विरोध होता रहा है. कई संस्थाएं लगातार इसके खिलाफ आवाज उठाती रही हैं लेकिन बांग्लादेश सरकार ने इसमें कभी बदलाव नहीं किया. इसे लेकर कई बार सर्वे भी होते रहे हैं.

बांग्लादेश में एक हालिया सर्वे के अनुसार 26.7 फीसदी पुरुष और 29.2 फीसदी महिलाएं इस पर्सनल लॉ के विरोध में हैं. वो चाहते हैं कि महिलाओं को तलाक का अधिकार दिया जाए लेकिन सरकार इससे साफतौर पर ये कहकर इनकार करती रही है, क्योंकि इसका प्रावधान हिंदू सिविल लॉ में नहीं है.

भारत में हिंदू कोड को आजादी के बाद बदला था नेहरू सरकार ने
भारत में भी यही हिंदू संहिता अंग्रेजी राज तक लागू थी. नेहरू सरकार ने जब संविधान के तहत इसे बदलकर महिलाओं को पारिवारिक औऱ वैवाहिक मामलों में अधिकार संपन्न किया तो इसका काफी विरोध हुआ था. बड़े पैमाने पर तब हिंदू संतों औऱ संस्थाओं ने देशभर में इसके खिलाफ आक्रामक प्रदर्शन किये थे लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस पर डटे रहने का फैसला किया था.

बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं की स्थिति खराब
वैसे बांग्लादेश में इन कानूनों के चलते हिंदू पुरुष कई शादियां करते रहे हैं तो महिलाओं की हालत पर इसका बुरा असर पड़ा है. कुछ हद तक हिंदू विवाह को रजिस्ट्रेशन के दायरे में लाने के लिए बांग्लादेश संसद ने 2012 में एक कानून बनाया था लेकिन उसमें महिलाओं को कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं, बस स्वैच्छा से शादियों को सरकारी कार्यालय में रजिस्टर्ड करने की बात है.

तलाक नहीं ले सकतीं लेकिन अलग रह सकती हैं
बांग्लादेश में हिंदू महिलाएं किसी भी हालत में पति से तलाक नहीं ले सकतीं लेकिन अगर वो चाहें तो अदालत में अलग रहने और हर्जाना भत्ता देने का मुकदमा जरूर कायम कर सकती हैं लेकिन ऐसे सारे मुकदमों में उन्हें वाजिब कारण बताने और उसे साबित करने में बहुत मुश्किलें होती हैं. (news18.com)

मदीना रियासत का हवाला देते हुए इमरान ने पाक सेना प्रमुख बाजवा पर साधा निशाना
21-Oct-2021 9:59 AM (54)

मृत्युंजय कुमार झा
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर:
इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस के प्रमुख के पद को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के बीच व्याप्त तनाव अभी भी बना हुआ है।

दो सप्ताह हो गए हैं, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान ने अभी तक आईएसआई प्रमुख के पद के लिए तीन नामों में से एक का चयन नहीं किया है, जो उनके और सेना प्रमुख के बीच टकराव का मुख्य कारण बना हुआ है।

खान के मंत्रियों के दावों के बावजूद कि बाजवा के साथ मामला सुलझा लिया गया है, खान हर संभव सार्वजनिक मंच से सैन्य प्रतिष्ठान को लेकर कई तरह के बयान दे रहे हैं, जो बेहद असामान्य है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया है कि वह 'नया पाकिस्तान' को एक ऐसा इस्लामिक कल्याणकारी राष्ट्र बना देंगे, जो कि पैगंबर के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर मदीना के मॉडल पर आधारित होगा, जहां शक्तिशाली लोगों और जनरलों सहित कानून के समक्ष सभी समान होंगे।

खान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा के साथ अपने चल रहे संघर्ष के परोक्ष संदर्भ में कहा, "मदीना की व्यवस्था न्याय और योग्यता पर आधारित है, यहां तक कि एक जनरल को भी प्रदर्शन के आधार पर उच्च पद पर पदोन्नत किया जाता है।"

खान ने मंगलवार को रहमतुल-लील-आलामीन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "कानून पैगंबर मुहम्मद (पीबीयूएच) के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित होगा।"

पाकिस्तानी दैनिक द न्यूज ने खान के हवाले से कहा, "भविष्यवक्ताओं ने मुसलमानों को ज्ञान प्राप्त करने पर जोर दिया है, भले ही उन्हें इस उद्देश्य के लिए चीन जाना पड़े। ज्ञान प्राप्त करके, मुसलमान अतीत में दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक बन गए।"

हालांकि इमरान खान प्रधानमंत्री बनने के बाद से 'नया पाकिस्तान' के बारे में बात कर रहे हैं, मगर उन्होंने कभी इस बारे में बात नहीं की कि वह इसे कैसे हासिल करने की योजना बना रहे हैं? क्या मदीना पाकिस्तान के राजनीतिक, सैन्य और न्यायिक पुनर्निर्माण का एक नमूना है या सिर्फ एक नारा है?

मदीना रियासत को लेकर इमरान खान की व्याख्या अलग है। पिछले हफ्ते, उन्होंने पाकिस्तान के लोगों को पश्चिमी संस्कृति से बचाने के लिए रहमतुल-लील-आलामीन प्राधिकरण - मुल्लाओं और धार्मिक मौलवियों की एक परिषद के गठन की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा, "वे (प्राधिकरण) हमें बताएंगे कि किन चीजों को बदलने की जरूरत है।"

दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खान ने मुल्लाओं से वादा किया था कि उनके शासन के दौरान इस्लामी नियमों के खिलाफ कोई भी कानून नहीं बनाया जाएगा और जो दो प्रमुख विधेयक हैं, पहला घरेलू हिंसा के मुद्दे को संबोधित करने के लिए और दूसरा जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए है, उन्हें लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि वे इस्लामी कानून के खिलाफ हैं।

पिछले साल उनकी सरकार ने मदरसों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास में विवादास्पद एकल राष्ट्रीय पाठ्यचर्या नीति (एसएनसीपी) पेश की थी। उन्होंने प्रांतीय सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर पवित्र कुरान की शिक्षा अनिवार्य की जाए। आवश्यक परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना कोई भी छात्र बीए, बीएससी, बीई, एमई, एमए, एमएससी, एमफिल, पीएचडी या मेडिकल डिग्री प्राप्त नहीं कर पाएगा।

एक पूर्व क्रिकेटर और पश्चिमी सभ्यता से मेल खाने वाले प्लेबॉय के रूप में खान की प्रतिष्ठा कभी-कभी विदेशियों को यह मानने के लिए गुमराह करती है कि वह पाकिस्तान के लिए एक उदार ²ष्टिकोण का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। वास्तव में, खान पाकिस्तान के आगे रूढ़िवाद और निर्लज्ज कट्टरता में उतरने का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

जबकि पाकिस्तानी समाज के उदारवादी वर्गों को हाशिए पर रखा जा रहा है, धार्मिक दल और उनके मंसूबे फल-फूल रहे हैं।

(यह आलेख इंडियानैरेटिव डॉट कॉम के साथ एक व्यवस्था के तहत लिया गया है)  (आईएसआई)

मां ने बनाए घर आने वाले मेहमानों के लिए नियम, बच्चे से मिलना है पूरी करनी होंगी सभी शर्तें !
21-Oct-2021 9:55 AM (50)

नई मां अपने बच्चे को लेकर कितनी प्रोटेक्टिव होती है, ये हर कोई जानता है. वे बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर वो काम करना चाहती हैं, जो उनके बस में है. यूनाइटेड किंगडम के लंदन में रहने वाली लोला जिमेनेज़ भी नई-नवेली मां बनी हैं. अब उन्होंने अपने बच्चे से मिलने आने वाले मेहमानों के लिए भी एक रूलबुक तैयार कर दी है. जो भी बच्चे से मिलने आने वाला है, उसे इन्हीं नियम-कायदों के मुताबिक चलना होगा.

Coronavirus महामारी के बीच ही लाला जिमिनेज़ ने एक बेटे को जन्म दिया है. बच्चे के इस दुनिया में आने की खबर मिलते ही दोस्तों और परिवार वालों ने उससे मिलने की प्लानिंग कर ली. हालांकि लोला ने जानने वालों की खुशी देखते हुए फटाफट अपने बेटे की सुरक्षा के लिए एक नियम-कायदों की लिस्ट बना दी और साफ कर दिया कि अगर बच्चे से मिलना है तो इन सख्त नियमों का पालन करना ही होगा.

Instagram पर मां ने शेयर की लिस्ट
लोला ने बेटे डेनियल को इसी साल अगस्त में जन्म दिया है. उन्होंने अपनी प्रेगनेंसी के दौरान कोविड वैक्सीन भी इसीलिए नहीं लगवाई, कि इसका कोई भी दुष्प्रभाव उनके बेटे पर नहीं पड़े. ऐसे में जब बच्चा दुनिया में आ गया है, तो वे कोई रिस्क लेना नहीं चाहतीं. Mirror की रिपोर्ट के मुताबिक मां ने Instagram पर रूल्स की लिस्ट शेयर की है और कहा है कि वे बच्चे को कोरोना से दूर रखना चाहती हैं. लोला के इस कदम के बाद से उन्हें न तो दोस्तों और न ही परिवार वालों से किसी तरह का रेस्पॉन्स मिला है. हालांकि वे कहती हैं कि सभी मांओं को बच्चे की सुरक्षा को लेकर अपनी सीमाएं तय करनी चाहिए.

आप भी जान लीजिए नियम-कानून
नई-नवेली मां की रूलबुक के मुताबिक परिवार और दोस्तों के अलावा वे और किसी विज़िटर को घर पर इजाज़त नहीं देंगे. घर आने वाले मेहमानों को अपने जूते और ऊपर के कपड़े उतारने होंगे और हाथ धोकर सैनेटाइज़ करना होगा. अगर आप घर आ रहे हैं अपना लेटरल फ्लो टेस्ट करा लें और उसकी निगेटिव रिपोर्ट दिखा दें. अगर ये पॉजिटिव है, तो आप फिर कभी आएं. घर में स्मोकिंग नहीं करनी है न ही शराब पीकर बच्चे से मिलने आना है. आप बच्चे को पकड़ नहीं सकते हैं, न ही आपको उसे प्यार से चूमना है. आप प्रेजेंट्स लेकर न आएं और सेकेंड हैंड चीज़ें बिल्कुल नहीं खरीदें. मां जब भी बच्चा वापस मांगे और गेस्ट से जाने के लिए कहे तो आप बिना विवाद के चले जाएं. (news18.com)

मगरमच्छ से भरे तालाब में गिर गया महिला का iPhone, पानी में तैरते ऊदबिलाव ने दिखाई ऐसी चतुराई
21-Oct-2021 9:54 AM (75)

जानवरों की समझदारी के कई मामले सामने आते हैं. कुछ मामलों को जानकर तो यकीन नहीं हो पाता कि कोई जानवर ऐसा कर सकता है. वैसे तो कुत्तों की समझदारी के ज्यादातर मामले सामने आते हैं. कुत्ते इंसान के साथ रहते हैं ऐसे में उनका इंसानों से खास रिश्ता रहता है. लेकिन हाल ही में चीन के एक एनिमल पार्क के तालाब में रहने वाले ऊदबिलाव की हरकत चर्चा बटोर रही है. पार्क में घूमने आए एक टूरिस्ट का मोबाइल वीडियो बनाते हुए अचानक तालाब में गिर गया. बताया जा रहा है कि तालाब में मगरमच्छ भी थे. ऐसे में सभी को लगा कि अब उसे मोबाइल नहीं मिलेगा. लेकिन तालाब में मौजूद ऊदबिलाव ने महिला को मोबाइल लौटा दिया.

इस ऊदबिलाव की समझदारी की चर्चा हो रही है. उसने टूरिस्ट का फोन गलती से गिरने के बाद उसे तालाब के नीचे से निकाल कर वापस कर दिया. घटना तब घटी जब तालाब के पास एक जू कीपर जानवरों को खाना खिला रहा था. जानवरों को खाते देखने के लिए वहां अच्छी-खासी भीड़ जमा हो गई. इंस्ट्रक्टर के कहने पर ऊदबिलाव कुछ-कुछ कलाकारी भी कर के दिखा रहे थे. इसी समय ज़ू में आई एक महिला का फोन तालाब में गिर गया. ऐसा होते वहां मौजूद ऊदबिलाव ने देख लिया. उसने तुरंत महिला का मोबाइल तालाब के तले से निकाला. मुंह में दबाकर ऊदबिलाव ने मोबाइल महिला को लौटा दिया.

ये पूरी घटना वहां मौजूद दूसरे टूरिस्ट ने अपने कैमरे में कैद कर ली. जैसे ही ऊदबिलाव ने मोबाइल निकाला, लोगों ने ताली बजाकर उसकी तारीफ की. इतना ही नहीं, ज़ूकीपर ने इनाम के तौर पर ऊदबिलाव को एक्स्ट्रा मछली भी खाने को दिया. बताया जा रहा है कि जिस टूरिस्ट का मोबाइल तालाब में गिरा था जो बीजिंग की रहने वाली है. उसने अपना मोबाइल वापस देने के लिए ऊदबिलाव को गिफ्ट भेजने का प्रॉमिस किया था. शंघाई ज़ू ने कन्फर्म किया कि महिला ने अपना वादा निभाया और ऊदबिलाव के लिए गिफ्ट भेजे.

जैसे ही इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई, ये वायरल हो गई. लोगों ने ऊदबिलाव की समझदारी की काफी तारीफ की. इसका वीडियो जैसे ही सामने आया, लोगों ने ऊदबिलाव की इस हरकत को क्यूट बताया. ज़ू ने भी नन्हे ऊदबिलाव की इस करकट के बदले उसे रिवार्ड दिया. डिनर में ऊदबिलाव को एक्स्ट्रा मछली खाने को दी गई. (news18.com)

पापा का फोन देख बच्चे ने डायल किया पुलिस का नंबर, बोला- 'घर आ जाओ, मेरे पास बहुत सारे खिलौने हैं'
21-Oct-2021 9:54 AM (101)

बच्चों की शरारतों का क्या ही कहिए, कभी ये मुसीबत बन जाती हैं, तो कभी ये बेहद प्यारी होती हैं. न्यूजीलैंड में एक बच्चे ने भी ऐसी ही शरारत की. जब उसके पापा किसी दूसरे काम में व्यस्त थे, तभी बच्चे ने उनका फोन उठाया और सीधा घर पर पुलिस बुला ली. हालांकि एमरजेंसी में पुलिस बुलाने की उसकी वजह बेहद अलग थी.

न्यूजीलैंड की साउथ आइलैंड पुलिस ने इस वाक्ये को खुद ही बताया है और बच्चे की कॉल को रिलीज़ करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि ये इतना ज्यादा क्यूट कॉल था, कि हम शेयर किए बिना नहीं रह पा रहे. 4 साल के छोटे से बच्चे ने एमरजेंसी नंबर 111 को अपने पापा के मोबाइल से डायल किया और छिपकर पुलिस से बातें करने लगा. बच्चे ने उन्हें अपने घर पर इनवाइट किया, ताकि वो उन्हें अपने अच्छे-अच्छे खिलौने दिखा सके और उनसे खेल सके.

बच्चे ने खिलौने दिखाने के लिए बुला ली पुलिस
जिस बच्चे ने पुलिस को कॉल किया था, उसकी मां की तबियत ठीक नहीं थी. ऐसे में पापा उसके छोटे बच्चे के साथ व्यस्त थे. इसी बीच लड़के छिपकर पुलिस को कॉल किया और उनसे पूछा क्या ये पुलिस लेडी का नंबर है? ऑपरेटर ने बच्चे से पूछा कि वो उनके लिए क्या कर सकते हैं? बदले में पुलिस ने बच्चे को कहा कि आप बताएं कि हम क्या करें? फिर क्या था, बच्चे ने उन्हें घर पर अपने खिलौने दिखाने के लिए बुला लिया. इसी बीच उसके पापा ने बच्चे को देखा और पुलिस को इस कॉल के बारे में सफाई दी.

कॉल के बाद पुलिस वाकई पहुंच गई घर
पुलिस ने कॉल रिसीव करने के बाद तय किया कि वो बच्चे के खिलौने देखने उसके जाएंगे. कर्ट नाम के पुलिस ऑफिसर बच्चे के घर पहुंचे और उसके कूल टॉयज़ का कलेक्शन भी देखा. इतना ही नहीं पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ये भी बताया है कि बच्चे के पास बहुत सारे खिलौने थे. पुलिस के इस एक्शन की खूब तारीफ हो रही है और लोग कह रहे हैं कि ये बहुत ही अच्छा जेस्चर था. हालांकि पुलिस का ये भी कहना है कि बच्चों को एमरजेंसी नंबर डायल करने के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए, लेकिन कॉल बहुत ही क्यूट था. (news18.com)

तालिबान ने अफगान महिला वॉलीबॉल टीम की सदस्य महजुबिन का सिर कलम किया
21-Oct-2021 9:04 AM (68)

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर| अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम की सदस्य महजुबिन हकीमी का तालिबान ने काबुल में सिर कलम कर दिया। वह युवा आयु वर्ग टीम की तरफ से खेलती थीं। फारसी इंडिपेंडेंट के साथ एक साक्षात्कार में, अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोचों में से एक, सुराया अफजाली (छद्म नाम) ने पुष्टि की कि एथलीट की मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि महजुबिन के परिवार के अलावा कोई मौत के समय और तरीके के बारे में नहीं जानता।

महजुबिन पिछली अफगान सरकार के पतन से पहले काबुल नगर पालिका वॉलीबॉल क्लब के लिए खेलती थीं और क्लब के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक थीं।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बकौल सुराया अफजाली, महजुबिन हकीमी की हत्या संभवत: अक्टूबर की शुरुआत में हुई थी और यह मुद्दा अब तक छिपा हुआ था, क्योंकि उसके परिवार को धमकी देकर इस बारे में किसी को बताने से मना किया गया था।

अफजाली के अनुसार, पिछली सरकार के पतन के बाद, अफगानिस्तान में महिला एथलीटों को एक गंभीर सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा और तालिबान ने उनका पीछा किया और विभिन्न शहरों में उनमें से कई के घरों की तलाशी ली।

कई महिला एथलीट, विशेष रूप से अफगान महिला वॉलीबॉल टीम की सदस्य, जिन्होंने विदेशी और घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और मीडिया कार्यक्रमों में दिखाई दी हैं, गंभीर खतरे में हैं।

अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोच ने कहा कि टीम के केवल दो खिलाड़ी व्यक्तिगत कार्रवाई के माध्यम से अफगानिस्तान छोड़ने में सक्षम थे और अफगानिस्तान के अंदर टीम के बाकी सदस्य खतरे और आतंक में हैं।

अफजाली ने कहा, "वॉलीबॉल टीम के सभी खिलाड़ी और बाकी महिला एथलीट बुरी स्थिति में हैं और निराशा और डर में हैं।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "सभी को पलायन करने और अज्ञात जगहों पर रहने के लिए मजबूर किया गया है। अफगानिस्तान छोड़ने के लिए विदेशी संगठनों और देशों का समर्थन हासिल करने के प्रयास अब तक असफल रहे हैं।"

महजुबिन की मौत ने तालिबान और उन लोगों द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंकाओं को हवा दी है, जो लंबे समय से महिलाओं के खेल को बाधित करने की मांग कर रहे हैं।

तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण के साथ खेल, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की सभी गतिविधियां बंद हो गई हैं और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं के जीवन, काम और सुरक्षा पर जारी प्रतिबंध के बारे में अभी भी चिंताएं हैं। 

हर हफ्ते 10 हज़ार का फास्ट फूड खाकर फूल गई लड़की, 3 महीने के बाद मां भी नहीं पहचान पाई !
21-Oct-2021 9:02 AM (73)

फास्ट फूड-जंक फूड किसे अच्छे नहीं लगते? एक बार खाने के बाद इसे बार-बार खाने का मन करता है. वो बात अलग है कि इसका दुष्प्रभाव शरीर पर ज़बरदस्त तरीके से पड़ता है. ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली कोरा हेंडरसन के भी मुंह McDonald के फूड आइटम्स का ऐसा चस्का लगा कि वो इसे खा-खाकर फूल गई. हद तो तब हो गई, जब लड़की की अपनी मां भी उसे पहचानने में धोखा खा गई.

सिडनी की रहने वाली 22 साल की कोरा 3 महीने बाद अपने परिवार से मिलने के लिए आईं, तो उनका वज़न इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मां भी अपनी बेटी को नहीं पहचान पाईं. दिलचस्प बात तो ये है कि मां अगर कोरा को इस बात का एहसास न दिलातीं कि वो इतनी ज्यादा मोटी हो चुकी है, तो उसे खुद इस बात का एहसास ही नहीं था कि वो मोटी होती जा रही है.

बेतहाशा बढ़ता गया वज़न
कोरा पहले फ्लाइट अटेंडेंट का काम करती थीं. उस दौरान भी लंबी फ्लाइट्स में सफर करने के दौरान वे पीछे बैठकर कुछ न कुछ खाती रहती थीं और फ्लाइट के लैंड करते ही फूड कोर्ट पहुंच जाती थीं. उनकी इस आदत की वजह से भी वजन बढ़ रहा था. महामारी में फ्लाइट्स बंद होने के बाद उनकी नौकरी छूट गई और उनकी हालत और खराब होने लगी. वे पहले से ज्यादा आलसी महसूस करती थीं और उनका कुछ करने का मन ही नहीं होता था. वे बताती हैं कि घर बैठे-बैठे भी वे 2 हज़ार रुपये दिन में मैकडोनल्ड पर खर्च कर देती थीं, यानि हफ्ते में ये बिल 10 हज़ार से ऊपर पहुंच जाता था.

मां की सलाह के बाद घटाया वज़न
जब कोरा ने 3 महीने बाद घर वापसी की, तो मां उन्हें पहचान ही नहीं पाईं. ऐसे में उन्हें अपने मोटापे का एहसास हुा और उन्होंने इस पर ध्यान देना शुरू कर दिया. जिम में जाने के अलावा उन्होंने अपने जंक फूड पर एक महीने के लिए बैन लगा दिया, जबकि लिक्विड के नाम पर वे सिर्फ पानी पीती रहती थीं. उन्होंने पौष्टिक भोजन करना शुरू कर दिया. इसका परिणाम ये हुआ कि उनका वजन तो घटा ही, उनका एनर्जी लेवल भी तेज़ी से बढ़ा. कोरा बताती हैं कि वज़न का घटना आपकी ज़िंदगी को बिल्कुल बदलकर रख देता है. हेल्दी खाना खाने से शरीर को ईंधन मिलता है, जबकि जंक फूड आपकी एनर्जी को खत्म कर देता है. (news18.com)

कश्मीर में दुबई के निवेश से भड़का पाकिस्तान, पूर्व राजदूत बोले- हम मजाक बनकर रह गए
21-Oct-2021 8:35 AM (82)

नई दिल्ली. कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से लेकर अब तक पाकिस्तान हर मंच पर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है. लेकिन उसे कहीं भी कामयाबी नहीं मिली. इसके बाद उसने इस्लामी मुल्कों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन पर भी कश्मीर को लेकर मदद मांगी. लेकिन उसे चुप करा दिया गया. अब खबर है कि पाकिस्तान के कथित मुस्लिम बरादर मुल्क संयुक्त अरब अमीरात ने कश्मीर को लेकर भारत से डील साइन की है. दुबई जल्द ही कश्मीर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में निवेश करने जा रहा है. खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में बवाल मच गया है.

इस नए समझौते के तहत दुबई कश्मीर में IT टावर, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक टावर के साथ ही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी बनाएगा. हालांकि अभी इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि दुबई, कश्मीर में कितना निवेश करेगा. लेकिन दुबई भारत के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर भी कर चुका है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, कश्मीर के विकास के लिए दुनिया हमारे साथ आ रही है. यह करार बताता है कि भारत ग्लोबल पावर के तौर पर सामने आ रहा है.

पाकिस्तान बन गया मजाक: बासित
भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने कहा कि पाकिस्तान में निरंतरता की कमी के चलते हम दूसरे देशों के लिए मजाक बनकर रह गए हैं. उन्होंने इस फैसले पर भड़कते हुए कहा कि यह पाकिस्तान के लिए डिप्लोमेटिक हार है. पहले ही OIC ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन नहीं किया है.

दूसरे इस्लामी मुल्क भी करेंगे निवेश
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंधेरे में हाथ-पैर मार रहा है और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है. इस हाल के लिए पाकिस्तान की पुरानी सरकारें भी दोषी हैं. ऐसा नहीं है कि कश्मीर का हल नहीं निकाला जा सकता है. लेकिन इच्छाशक्ति की कमी है. वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर में दुबई के बाद ईरान और दूसरे मुस्लिम देश भी निवेश करेंगे. (news18.com)

यूनिसेफ: यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए या अपंग हुए
20-Oct-2021 9:12 PM (70)

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए हैं या अपंग हो चुके हैं. युद्ध के कारण देश इस समय दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है.

(dw.com)  

यूनिसेफ ने मंगलवार, 19 अक्टूबर को कहा कि युद्धग्रस्त देश यमन में 10,000 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं. एजेंसी के अनुसार यमन हर दिन चार बच्चों के मारे जाने या घायल होने के "शर्मनाक मील के पत्थर" पर पहुंच गया है.

यमन में पिछले पांच वर्षों से युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें ईरानी समर्थित हूथी विद्रोही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से लड़ रहे हैं. इस युद्ध में सऊदी अरब और क्षेत्र में उसके सहयोगी भी सरकार का समर्थन कर रहे हैं.

यूनिसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने कहा कि उनकी एजेंसी का अनुमान है कि यमन में अब तक 10,000 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2015 में युद्ध में सऊदी गठबंधन के हस्तक्षेप के बाद से हर दिन लगभग चार बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं.

यूनिसेफ ने इसे "शर्मनाक मील का पत्थर" बताया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है मार्च 2015 से इस साल 30 सितंबर के बीच यमन में हुई लड़ाई में 3,455 बच्चे मारे गए और 6,600 घायल हुए.

युद्ध के परिणामस्वरूप अनगिनत यमनी बच्चे अप्रत्यक्ष रूप से घातक तरीकों से प्रभावित हो रहे हैं. यमन वर्तमान में संघर्षों, आर्थिक तबाही, सामाजिक विघटन और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं से ग्रस्त है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यमन वर्तमान में दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिसमें लगभग दो करोड़ लोग या देश की एक तिहाई आबादी को किसी भी सहायता की सख्त जरूरत है. बच्चे इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हैं और कुल 1.1 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं. यानी पांच में से चार यमनी बच्चों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

इसके अलावा यूनिसेफ के अनुसार लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं. एजेंसी के जेम्स एल्डर ने कहा, "वे भूख से मर रहे हैं क्योंकि वयस्कों ने एक युद्ध शुरू कर दिया है जिसमें बच्चे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं."

यमन में गृहयुद्ध के चलते करीब 20 लाख बच्चे अब स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जबकि हिंसा ने लगभग 17 लाख बच्चों और उनके परिवारों को विस्थापित कर दिया है. (dw.com)

एए/सीके (डीपीए, एपी)

UK ने फेसबुक पर लगाया 50 मिलियन यूरो से ज्यादा का जुर्माना, जानें क्या है मामला
20-Oct-2021 8:22 PM (65)

ब्रिटेन की कंपटीशन वॉचडॉग कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरोटी (CMA) ने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म फेसबुक पर 50 मिलियन यूरो से ज्यादा (4,35,43,00,000 रुपये से ज्यादा) का जुर्माना लगाया है. फेसबुक पर ये कार्रवाई एनिमेटेड ग्राफिक्स स्टार्टअप Giphy के अधिग्रहण से जुड़े मामले में जानकारी नहीं देने के चलते की गई है.

कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरोटी ने कहा कि फेसबुक पर 50.5 मिलियन यूरो का जुर्माना पिछले साल की खरीद से जुड़े मामले में जानबूझकर ज़रूरी जानकारी देने से इनकार करने के चलते लगाया गया है.

सीएमए में मरजर्स के वरिष्ठ निदेशक जोइल बैमफोर्ड ने अपने बयान में कहा, "हमने फेसबुक को चेताया था कि उनका ज़रूरी सूचनाओं को देने से इनकार करना आदेश का उल्लंघन है, लेकिन दो अदालतों में अपील खारिज होने के बावजूद फेसबुक अपनी कानूनी दायित्वों की अवहेलना जारी रखी."

उन्होंने कहा, "इसे उन कंपनियों को चेतावनी की तरह लेना चाहिए जो खुद को कानून से ऊपर समझती हैं." सीएमए ने कहा कि ये पहला मौका है जब कोई कंपनी जानबूझकर ऐसे किसी आदेश का उल्लंघन करती हुई पाई गई है. इसके अलावा सीएमए ने अलग से फेसबुक पर 5 लाख यूरो का जुर्माना भी लगाया है. ये जुर्माना चीफ कंप्लायंस अधिकारी को दो बार बिना मंज़ूरी के बदलने के मामले में लगाया गया है.

आपको बता दें कि फेसबुक ने मई 2020 में Giphy की खरीद का एलान किया था. रिपोर्ट्स की मानें तो ये खरीद 400 मिलियन डॉलर में हुई थी.(abplive)

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