अंतरराष्ट्रीय

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • इस्लामाबाद, 22 जुलाई । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम शरीफ ने खुद को सिहाला रेस्ट हाउस उप जेल में स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव नकार दिया है। मरियम शरीफ का कहना है कि वे अपने पिता नवाज शरीफ और पति मोहम्मद सफदर के साथ अडियाला जेल में ही रहना चाहती हैं।
    मरियम शरीफ, नवाज शरीफ और मोहम्मद सफदर को लंदन के एवनफील्ड में गलत तरीके अपनाकर चार फ्लैट खरीदने के आरोप में पाकिस्तान की भ्रष्टाचार निरोधी अदालत की तरफ से सजा सुनाई जा चुकी है। इसी? मामले में इन तीनों को इस्लामाबाद की इस जेल में रखा गया है।
    इस दौरान अडियाला जेल के महिलाओं के लिहाज से पूरी तरह उपयुक्त न होने की वजह से इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त ने उन्हें और उनके पिता को सिहाला रेस्ट हाउस उपजेल भेजने का प्रस्ताव दिया था। उनका यह भी कहना था कि इस्लामाबाद के उपनगरीय इलाके में ही स्थित इस उप जेल में कई दूसरी सुविधाएं भी मौजूद हैं।
    सिहाला उप जेल में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति व पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी के अलावा कई दूसरे बड़े नेताओं को भी रखा जा चुका है। उधर, दूसरी जेल में स्थानांतरित किए जाने से इनकार करने के दौरान मरियम शरीफ के वकीलों ने उनके साथ नवाज शरीफ व मोहम्मद सफदर को जमानत पर रिहा किए जाने के लिए उच्च अदालत में अर्जी भी दाखिल की है। (द हिंदू)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • इस्लामाबाद, 22 जुलाई । पाकिस्तान के कई सांसदों ने प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों को चुनाव लडऩे की मंजूरी दिए जाने को लेकर आज चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे तो संसद में आतंकवादी आ जाएंगे। उन्होंने पाकिस्तान के चुनाव आयोग को आगाह किया कि प्रतिबंधित संगठनों को चुनाव लडऩे की मंजूरी देने से चरमपंथी तत्व मुख्यधारा में आ जाएंगे।  
    पाकिस्तान मुस्लिम लीग - नवाज (पीएमएल - एन) के सीनेट सदस्य परवेज राशिद ने प्रतिबंधित समूहों से सम्बद्ध उम्मीदवारों को 25 जुलाई को होने वाले चुनाव में खड़े होने की मंजूरी जबकि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जेल भेजने की तरफ संकेत करते हुए कहा, आतंकी संसद में लाए जा रहे हैं जबकि सांसदों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, आतंकी संसद में जगह पाने में सफल होंगे क्योंकि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों को चुनाव लडऩे की अनुमति दी जा रही है। सीनेट में विपक्ष के नेता और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की प्रमुख सदस्य शेरी रहमान ने आगाह किया कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लडऩे की अनुमति देने से वे मुख्यधारा में आ जाएंगे। उन्होंने कहा, अगर ये लोग (चरमपंथी तत्व) संसद में आ गए तो हम सांस नहीं ले पाएंगे।
    इससे पहले आतंकवादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन (एचयूएम) के संस्थापक और अल - कायदा से संपर्क रखने वाले वैश्विक आतंकवादियों की अमरीकी सूची में शामिल फजलुर रहमान खलील ने कहा था कि वह 25 जुलाई को होने वाले चुनावों में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक- ए- इंसाफ (पीटीआई) पार्टी का समर्थन करेगा। अमरीका ने एचयूएम आतंकवादी संगठन में कथित भूमिका के लिए 30 सितंबर 2014 को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में फजलुर रहमान खलील को शामिल किया था। उसने बाद में अंसारुल उम्माह की स्थापना की जिसे वह एक राजनीतिक दल बताता है। एचयूएम और अंसारुल उम्माह दोनों अमरीका की स्पेशल डेजिगनेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (एसडीजीटी) की सूची में शामिल हैं। इस्लामाबाद में नेशनल असेंबली सीट से पाकिस्तान तहरीक- ए-इंसाफ के उम्मीदवार असद उमर ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि खलील पीटीआई में शामिल हो गया है, लेकिन बाद में उसने सुधार करते हुए कहा कि मौलाना ने चुनावों में उसे समर्थन देने का फैसला किया है। (भाषा)

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Posted Date : 22-Jul-2018
  • फौज नहीं चाहती कि नवाज चुनाव से पहले छूटें
    शाहजाद मलिक
    इस्लामाबाद, 22 जुलाई । इस्लामाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज, जस्टिस शौकत अजीज सिद्दीकी ने दावा किया है कि फौज की खुफिया संस्था आईएसआई की मर्जी के मुताबिक फैसले देने पर उन्हें वक्त से पहले मुख्य न्यायाधीश बनवाने और उनके खिलाफ दायर मामले खत्म करवाने की पेशकश की थी। जस्टिस शौकत सिद्दीकी ने यह आरोप शनिवार को रावलपिंडी बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में दिए अपने भाषण में लगाए हैं।
    उन्होंने दावा किया कि आईएसआई पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप कर रही है। अपने भाषण में जस्टिस सिद्दीकी ने कहा कि आईएसआई के अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की थी और कहा था कि अगर वो उनकी मर्जी के मुताबिक फैसले देंगे तो उन्हें इस साल सितंबर में ही इस्लामाबाद हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बना दिया जाएगा।
    जस्टिस सिद्दीकी के मुताबिक, उनसे कहा गया था ,हमारी मर्जी के फैसले देंगे तो आपको न सिर्फ वक्त से पहले चीफ जस्टिस बना देंगे बल्कि आपके खिलाफ जो मामले हैं उनको भी खत्म करवा देंगे।
    जस्टिस सिद्दिकी इस साल नवंबर में चीफ जस्टिस बनने वाले हैं। उनके खिलाफ कुछ वक्त पहले सुप्रीम कोर्ट की जुडिशियल काउंसिल में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक मामला दायर हुआ था। हालांकि यह मामला उस वक्त आगे नहीं बढ़ा था। इस न्यायिक मामले की सुनवाई जुलाई के आखिरी हफ्ते में होने वाली है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ये बहस का मुद्दा बन सकता है। सिर्फ जस्टिस सिद्दीकी ही नहीं बल्कि चीफ जस्टिस मियां शाकिब निसार और सुप्रीम कोर्ट के अन्य पांच जजों के खिलाफ भी न्यायिक मामले दायर किए गए हैं लेकिन सुनवाई के लिए उनकी तारीख अभी तक तय नहीं हुई है। जस्टिस सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने फौज के खुफिया संस्थान के अधिकारी से दो टूक अल्फाज में कह दिया था कि वह अपने जमीर को गिरवी रखने की जगह मौत को अधिक तरजीह देना पसंद करेंगे।
    उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके इनकार के बाद आईएसआई के अधिकारियों ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अनवर काजी से संपर्क कर उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सजा के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई करने वाली बेंच में शामिल न करने के लिए कहा।
    उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए क्योंकि आईएसआई नहीं चाहती कि 25 जुलाई को होने वाले चुनाव से पहले नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज शरीफ जेल से बाहर आएं।
    जस्टिस सिद्दीकी के मुताबिक, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने आईएसआई की पेशकश स्वीकार कर ली थी और ऐसा बेंच बनाया गया जिसने अपील की सुनवाई की तारीख 25 जुलाई के बाद यानी आम चुनाव के बाद की रखी है। उनके इस बयान पर हॉल में मौजूद वकीलों ने शेम-शेम के नारे लगाए।
    बीते सप्ताह नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (नैब) की एक अदालत ने नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज और दामाद कैप्टन सफदर को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिया था। जस्टिस शौकत अजीज सिद्दीकी का कहना था कि देश की तकदीर के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है वो बहुत बदकिस्मती की बात है। आईएसआई कोर्ट के मामले को प्रभावित करने में पूरी तरह शामिल है। आईएसआई के लोग विभिन्न जगहों पर पहुंचकर अपनी मर्जी की कोर्ट की बेंच बनवाते हैं और केसों को चिन्हित किया जाता है।
    जस्टिस सिद्दीकी का कहना था इसके अलावा आईएसआई यह फैसला भी लेती है कि कौन सा मुकदमा कौन-सी बेंच के पास भिजवाना है। उनका कहना था कि अकाउंटेबिलिटी अदालत के फैसले पर अमल होने पर नजर रखना इस्लामाबाद हाईकोर्ट की जिम्मेदारी थी लेकिन नवाज शरीफ के खिलाफ चलने वाले मामले की निगरानी आईएसआई और सुप्रीम कोर्ट करती रही।
    उनका आरोप है,पूर्व प्रधानमंत्री और उनके बच्चों के खिलाफ मामलों में होने वाली कार्यवाही के बारे में आईएसआई को विवरण दिया जाता था। जस्टिस सिद्दीकी का कहना था कि उन्हें नहीं मालूम कि आज के बाद उनके साथ क्या होगा लेकिन वह किसी तौर पर भी अपने जमीर का सौदा नहीं करेंगे। (बीबीसी)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • न्यूयॉर्क, 21 जुलाई । न्यूयॉर्क में जांच एजेंसियां कोहेन के संभावित बैंक और टैक्स फ्रॉड की जांच कर रही हैं। इसके साथ ही एजेंसी संभावित चुनावी कानून उल्लंघन की भी जांच कर रही है जो एडल्ट फिल्म एक्ट्रेस स्टॉर्मी डेनिएल्स को एक लाख तीस हजार डॉलर (89,36,850 रुपए) का पेमेंट करने से जुडा है।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लंबे समय तक वकील रहे माइकल कोहेन ने गुप्त रूप से एक बातचीत रिकॉर्ड की है। यह बातचीत साल 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के पहले की है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप प्लेब्वॉय की एक पूर्व मॉडल को पेमेंट करने का जिक्र कर रहे हैं। मॉडल का कहना है कि ट्रंप से उनका अफेयर था।
    न्यूयॉर्क टाईम्स में एक प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इस रिकॉर्डिंग से परिचित वकीलों और अन्य लोगों ने बताया कि कोहेन के दफ्तर पर इस साल छापे के दौरान वह रिकॉर्डिंग जब्त की गई थी।
    जांच एजेंसियां न्यूयॉर्क में कोहेन के संभावित बैंक और टैक्स फ्रॉड की जांच कर रही हैं। इसके साथ ही एजेंसी संभावित कानून उल्लंघन की भी जांच कर रही है, जो एडल्ट फिल्म एक्ट्रेस स्टॉर्मी डेनिएल्स को एक लाख तीस हजार डॉलर (89,36,850 रुपये) का पेमेंट करने से जुड़ा है।
    रिकॉर्डिंग की बात सामने आने से यह सवाल उठने लगे हैं कि जब ट्रंप राष्ट्रपति बनने की होड़ में लगे थे तो उस वक्त अपने निजी और व्यावसायिक जिंदगी का राज छिपाए रखने की कोशिश कर रहे थे। कोहेन के प्रतिनिधि और ट्रंप के अटॉर्नी ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
    ट्रंप के अटॉर्नी रुडी जीलुआनी ने बताया कि कोहेन से पेमेंट की चर्चा की थी, लेकिन वह कभी दिए नहीं गए। उन्होंने कहा कि दो मिनट से भी कम की रिकॉर्डिंग है और इसमें राष्ट्रपति कहीं से भी कुछ गलत नहीं कर रहे हैं।
    पूर्व मॉडल कैरन मैक्ड्यूगल ने कहा कि साल 2006 से उनकी ट्रंप के साथ अफेयर चला और उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप ने मैक्ड्यूगल के साथ किसी भी रिश्ते से इनकार किया है और स्टॉर्मी डैनियल्स के साथ यौन संबंध बनाए जाने को खारिज किया है।(न्यूयॉर्क टाईम्स)

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Posted Date : 21-Jul-2018
  • न्यू यॉर्क, 21 जुलाई । अमेरिका में करोड़ों डॉलर के कॉल सेंटर स्कैम में शामिल होने को लेकर भारतीय मूल के 20 से ज्यादा लोगों को 20 साल तक की कैद की सजा सुनाई गई है। भारत स्थित फर्जी कॉल सेंटर के जरिए हजारों अमेरिकियों से सैकड़ों करोड़ डॉलर की धोखाधड़ी हुई थी। इस सप्ताह जिन 21 लोगों को दोषी ठहराया गया है उन्हें 4 से 20 साल कैद की सजा हुई है। 
    कई दोषियों को सजा पूरी होने के बाद भारत भेजा जाएगा। अमेरिका के अटर्नी जनरल ने इस फैसले को बड़ी जीत बताया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कॉल सेंटर स्कैम के जरिए हजारों अमेरिकियों से सैकड़ों करोड़ डॉलर की चपत लगाई गई। अभियोजकों ने कहा कि भारत स्थित कॉल सेंटरों से तमाम फर्जी स्कीमों को लेकर टेलिफोन किए गए और हजारों अमेरिकियों को चूना लगाया है, जिनमें खासतौर पर बुजुर्ग और वैध प्रवासी शामिल हैं। 
    अमहदाबाद स्थित कॉल सेंटरों से अमरीकियों के पास फोन किए गए। फोन करने वालों ने खुद को अमेरिका के इंटरनल रेवेन्यू सर्विस या यूएस सिटिजेनशिप ऐंड इमिग्रेशन सर्विसेज का अधिकारी बताकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया। डेटा ब्रोकर्स से हासिल की गई सूचनाओं का इस्तेमाल करके तमाम अमेरिकियों को भुगतान न करने पर गिरफ्तारी, जुर्माने या अमेरिका से बाहर करने की धमकी दी गई। पीडि़त इन धोखाधड़ी करने वालों के झांसे में आ गए और उनके मनचाहे तरीके से पैसों का भुगतान कर दिया। इससे पहले 3 अन्य भारतीयों को भी इसी धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम के लिए सजा सुनाई गई थी। (पीटीआई)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • वॉशिंगटन, 20 जुलाई। एक महीने में लगातार दूसरी बार अमरीकी मैगजीन टाइम ने अपने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर अपने कवर पेज के जरिए निशाना साधा है। इस बार मैगजीन के कवर पेज पर ट्रंप की तस्वीर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मॉर्फ (मिला) कर दिया गया है। 
    हालांकि, फिनलैंड से वापस आने के बाद ट्रंप अपने बयान से पलट गए और पुतिन को चुनावों में धांधली का आरोपी बताया। तस्वीर में जहां ट्रंप के बाल, भौहें और होठ हैं, तो नाक और नीली आंखें पुतिन की हैं। यह फोटो विजुअल आर्टिस्ट नैन्सी बर्सन ने तैयार की है। टाइम मैगजीन ने एक बयान में कहा कि यह तस्वीर अमरीकी विदेश नीति की मौजूदा स्थिति को दिखाती है। ट्रंप और पुतिन ने इसी हफ्ते फिनलैंड के हेलसिंकी में पहली बार औपचारिक वार्ता की थी। 
    इस वार्ता के बाद ट्रंप को डेमोक्रैट्स और रिपब्लिकन्स की तरफ से काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था क्योंकि उन्होंने अमरीकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप को लेकर अपनी ही खुफिया एजेंसी पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, फिनलैंड से वापस आने के बाद ट्रंप अपने बयान से पलट गए और पुतिन को चुनावों में धांधली का आरोपी बताया। 
    30 जुलाई को आने वाले इस संस्करण के कवर का विडियो भी बनाया गया है। बता दें कि बीते महीने भी टाइम मैगजीन ने अपने कवर पर ट्रंप की तस्वीर ही प्रकाशित की थी जिसमें वह एक रोती-बिलखती बच्ची के साथ थे। यह कवर ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति के तहत बच्चों को उनके मां-पिता से अलग करने पर निशाना साधते हुए तैयार किया गया था। (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 20-Jul-2018
  • तुर्की, 20 जुलाई। तुर्की में दो साल से लागू आपातकाल खत्म कर दिया गया है। तुर्की के सरकारी मीडिया ने आज यह खबर दी है। साल 2016 के दौरान तुर्की में सेना के एक गुट द्वारा तख्तापलट की कोशिश की गई थी। लेकिन राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने उस कोशिश को नाकाम कर दिया था। तब से तुर्की में आपातकाल लगा हुआ था और इस बीच सरकार ने इसे सात बार आगे बढ़ाया।
    आपातकाल हटाए जाने का यह फैसला एर्दोआन के दोबारा चुनाव जीतने के कुछ हफ्तों बाद आया है। चुनाव के दौरान एर्दोआन ने वादा किया था कि दोबारा राष्ट्रपति बनने पर वे आपातकाल खत्म कर देंगे। इसके साथ उनका यह भी कहना था कि वे आतंकवाद का सामना करने के लिए नए सख्त कानून लाएंगे। अल जजीरा के मुताबिक इस बारे में एक प्रस्तावित कानून अगले हफ्ते तुर्की की संसद में पेश किया जा सकता है। यही वजह है कि सरकार विरोधियों का कहना है कि आपातकाल खत्म होने से मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा। इनके मुताबिक सरकार जिस तरह के कानून ला रही है उनसे आपातकाल जैसी व्यवस्था स्थायी रूप से लागू हो जाएगी।
    20 जुलाई, 2016 को तुर्की में तख्तापलट की कोशिश की गई थी। उस दौरान 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद ही तुर्की में आपातकाल लगा था और सरकार ने हजारों लोगों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे दर्ज किए थे। इसके अलावा कई लोगों को सरकारी सेवा से हटाया गया था। इन सब पर इस्लामिक नेता फेतुल्लाह गुलेन का समर्थन करने का आरोप था। किसी जमाने में एर्दोआन के सहायक रहे गुलेन फिलहाल अमरीका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। 2016 में हुई बगावत के पीछे उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाता है, हालांकि वे इससे इंकार करते रहे हैं। (बीबीसी)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • वाशिंगटन, 19 जुलाई। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब कहा है कि वे 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में दखलंदाजी के लिए निजी तौर पर रूस को जिम्मेदार मानते हैं। और चूंकि व्लादिमीर पुतिन रूस से राष्ट्रपति हैं इसलिए उन्हें भी। उनके मुताबिक हेलसिंकी, फिनलैंड में रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान भी उन्होंने यह मसला उनके सामने उठाया था। ट्रंप और पुतिन की मुलाकात इसी सोमवार को हुई थी।
    ट्रंप ने कहा, मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं और फिर कहूंगा कि यह (अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस का दखल) सच है। जब उनसे पूछा गया कि अगर आप रूस को जिम्मेदार मानते हैं तो आपने अब तक पुतिन की निंदा क्यों नहीं की? क्या आप उन्हें भी निजी तौर पर इसका जिम्मेदार मानते हैं? तो उन्होंने कहा, मैं उन्हें भी जिम्मेदार मानूंगा। ठीक वैसे ही जैसे इस देश (अमरीका) में होने वाली तमाम चीजों के लिए मैं खुद को जिम्मेदार मानता हूं।
    ट्रंप ने एक दिन पहले भी इसी तरह की बात दोहराई थी। साथ में यह भी कहा था कि हेलसिंकी में उनकी जुबान फिसल गई थी। वे वह नहीं कहना चाहते थे जो उनके मुंह से निकला। ट्रंप ने हेलसिंकी में पुतिन के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में कहा था कि अमरीकी एजेंसियों का यह आकलन सही नहीं है कि रूस ने अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में दखलंदाजी की। उनके इस बयान के बाद अमरीका में ट्रंप की चौतरफा आलोचना हो रही थी। इसके बाद से वे लगातार अपने बयान पर सफाई दे रहे हैं।
    यहां यह भी याद दिलाना जरूरी है कि रूस पर 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में नतीजों को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में मोडऩे की कोशिश करने का आरोप है। इन आरोपों की अमरीका में जांच जारी है। (पीटीआई)

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Posted Date : 19-Jul-2018
  • अमरीका, 19 जुलाई। अलबामा में एक कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर पहुंचने के लिए 30 किमी पैदल चल कर आया। बॉस को जब यह बात पता चली तो उसने उसे अपनी कार भेंट में दे दी। यह कहानी एक समर्पित कर्मचारी की है जो पूरी रात चलता रहा ताकि अपनी नई नौकरी पर पहले दिन समय से पहुंच सके। उसकी इस कहानी ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी और फिर चारों तरफ से मदद पहुंच रही है। फिर कंपनी के सीईओ ने भी उसे अपनी कार भेंट की।
    वाल्टर कार नाम का यह कर्मचारी बेलहॉप्स के लिए काम करता है। यह कंपनी लोगों का सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है। पेल्हम में रहने वाले एक परिवार ने वीकेंड में इस कंपनी को अपनी सेवा के लिए बुक किया था जिसे पूरा करने की जिम्मेदारी वाल्टर कार पर थी। पेल्हम की पुलिस ने वाल्टर को चलते हुए देखा तब तक वह चार घंटे चल चुका था और उसने करीब 22.5 किलोमीट दूरी तय कर ली थी।
    पुलिस उसे अपने साथ गई और नाश्ता कराया। उसी वक्त उन्हें पता चला कि वाल्टर की कार खराब हो गई है और वह आधी रात से ही चल रहा है ताकि अपने काम पर समय से पहुंच सके। फिर पुलिस अधिकारियों ने उसे पेल्हम के उस ठिकाने पर पहुंचाया जहां वाल्टर को अपनी सेवा देनी थी।
    वाल्टर कार का कहना है कि मेरी कहानी तो वास्तव में बस इतनी है कि मैं अपने काम पर पहुंचना चाहता था और यह भी कि मैं कितना समर्पित हूं। मुझे नहीं लगा था कि कोई मेरी कहानी पूरी दुनिया को बताएगा।
    पुलिस अधिकारी वाल्टर की कत्र्तव्यनिष्ठा से बहुत प्रभावित हुए और जेनी लैमी को पूरी दास्तान सुनाई। जेनी लेमी को ही वाल्टर की कंपनी की सेवा लेनी थी। जेनी लेमी ने वाल्टर के कारनामे को पूरी दुनिया के साथ सोशल मीडिया पर बांटा। लेमी ने बताया कि वाल्टर एक बेहद शालीन शख्स हैं। लेमी ने उनसे कहा कि वह अपनी कहानी कंपनी के दूसरे कर्मचारियों को बताएं। सारी बात पता चलने के बाद बेलहॉप्स कंपनी के सीईओ ने अपनी कार वाल्टर को भेंट कर दी। (डायचे वेले)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • इस्लामाबाद, 18 जुलाई। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम शरीफ की देश में हो रहे चुनाव के पहले जेल से बाहर आने की उम्मीद अब लगभग खत्म हो गई है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने नवाज शरीफ, उनकी बेटी और दामाद सफदर अवान की जमानत संबंधी याचिका पर कोई राहत नहीं दी। इसके बदले हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने अदालत की कार्यवाही स्थगित करते हुए नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो को नोटिस जारी किए हैं। पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव हैं। जबकि हाई कोर्ट ने कहा है कि अब इस मामले में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई जुलाई के आखिरी हफ्ते में ही होगी।
    नवाज शरीफ को लंदन में चार फ्लैटों की कथित अवैध खरीद के मामले में दस साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, इस मामले में उनकी बेटी मरियम शरीफ को सात और दामाद को एक साल की सजा सुनाई गई है।
    साल 2016 में पनामा पेपर लीक मामले में नाम आने के बाद नवाज शरीफ मुश्किलों में घिर गए थे। इसके चलते जुलाई 2017 में उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर उनके और मरियम के खिलाफ जांच शुरू की गई। बाद में पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटिब्लिटी ब्यूरो ने शरीफ और उनकी बेटी मरियम को लंदन में फ्लैट खरीदने के मामले में दोषी पाया और सजा सुनाई। यह फैसला जब आया उस समय समय नवाज शरीफ और मरियम लंदन में थे। बीते शुक्रवार को लंदन से लाहौर पहुंचने के तुरंत बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था। (एएफपी)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • इस्लामाबाद, 18 जुलाई। आतंकवादी संगठन हरकत - उल - मुजाहिदीन (एचयूएम) के संस्थापक और अल - कायदा से संपर्क रखने वाले वैश्विक आतंकवादियों की अमरीकी सूची में शामिल फजलुर रहमान खलील ने आज कहा कि वह 25 जुलाई को होने वाले चुनावों में पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी का समर्थन करेगा। अमरीका ने एचयूएम आतंकवादी संगठन में कथित भूमिका के लिए 30 सितंबर 2014 को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में फजलुर रहमान खलील को शामिल किया था। उसने बाद में अंसारुल उम्माह की स्थापना की जिसे वह एक राजनीतिक दल बताता है। एचयूएम और अंसारुल उम्माह दोनों अमरीका की स्पेशल डेजिगनेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (एसडीजीटी) की सूची में शामिल हैं। इस्लामाबाद में नेशनल असेंबली सीट से पाकिस्तान तहरीक - ए - इंसाफ के उम्मीदवार असद उमर ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि खलील पीटीआई में शामिल हो गया है लेकिन बाद में उसने सुधार करते हुए कहा कि मौलाना ने चुनावों में उसे समर्थन देने का फैसला किया है। 
    इन दिनों पाकिस्तान में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। एक दिन पहले ही खबर आई थी कि परेशानियों से घिरी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) चुनाव प्रचार में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर को लांच कर सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और मरियम भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं। डॉन ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लैंड विवि में राजनीति के छात्र सफदर सोमवार को पाकिस्तान पहुंचे। वह रावलपिंडी के अदियाला जेल में सजा काट रहे अपने नाना नवाज शरीफ, पिता सेवानिवृत कैप्टन सफदर अवान और मां मरियम से मिलने जा सकते हैं। शरीफ और उनकी बेटी को पिछले सप्ताह लंदन से लौटने के बाद लाहौर हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया था। जवाबदेही अदालत ने लंदन में उनके चार आलीशान फ्लैट से संबद्ध मामले में दोषी करार दिया है।  (भाषा)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • वॉशिंगटन, 18 जुलाई। अफगानिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू करने के 17 साल बाद अमरीका ने तालिबान के साथ सीधी वार्ता की इच्छा जताई है, 11 सितंबर 2001 के बड़े आतंकी हमले के बाद अमरीका ने अफगानिस्तान में प्रवेश किया था। अब ट्रंप प्रशासन आतंकी संगठन तालिबान के साथ सीधी वार्ता के लिए तैयार है।  
    2001 में तालिबान सरकार को हटाने में अमरीका की जॉर्ज डब्लू बुश सरकार को कुछ ही महीने लगे, लेकिन तालिबान ने लड़ाई जारी रखी। अफगानिस्तान के 14 से ज्यादा जिलों पर उसका पूरा नियंत्रण है जो देश का 4 फीसदी है। इतना ही नहीं अन्य 263 जिलों में भी तालिबान की सक्रियता है। 
    अफगान-पाकिस्तान सीमा तो पूरी तरह से तालिबान के नियंत्रण में है। अब बॉर्डर पर दीवार बनाने के लिए पाकिस्तान ट्रंप प्रशासन का सहयोग चाहता है। दरअसल, पाकिस्तान में लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं और उसका कहना है कि सीमा पार से आए आतंकियों का इसमें हाथ है। 
    हालांकि पाकिस्तान भी खुद दूध का धुला नहीं है। उस पर तालिबान के एक धड़े को समर्थन देने का आरोप लगता रहा है, जिसे हक्कानी नेटवर्क कहा जाता है। तालिबान और अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अफगान सरकार ने ईद पर संघर्षविराम की घोषणा की थी। इस दौरान आतंकियों और सैनिकों के बीच सेल्फी लेते हुए कई दिलचस्प तस्वीरें सामने आई थीं। हालांकि बाद में संघर्ष फिर से शुरू हो गया। 
    ट्रंप पुतिन पर भरोसा कर सकते हैं लेकिन उनका प्रशासन मानता है कि रूस तालिबान का सहयोग कर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि सोवियत-अफगान वॉर के दौरान अमरीका ने तालिबान का सहयोग किया था। अफगानिस्तान के हालात का भारत पर भी असर होगा। 
    अफगानिस्तान और भारत मिलकर आतंकवाद पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये का विरोध कर रहे हैं। गनी ने तालिबान पर पाकिस्तान के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सहयोग मांगा है। भारत चाहता है कि तालिबान के साथ कोई भी बातचीत अफगान सरकार करे। तालिबान के साथ किसी भी डील का भारत-पाक संबंधों पर भी असर होगा। (एजेंसियां)

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Posted Date : 18-Jul-2018
  • वाशिंगटन, 18 जुलाई। अमरीकी मॉडल मारा मार्टिन का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अमरीका में स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड स्विमसूट फैशन शो के दौरान 30 वर्षीय मॉडल मारा मार्टिन ने अपनी 5 महीने की बेटी आरिया को ब्रेस्टफीड कराते हुए रैंप वॉक किया।
    स्विमसूट फैशन शो के दौरान रविवार को मारा मार्टिन जब सुनहरे रंग की बिकनी में रैंप पर उतरीं तो सबकी निगाहें उन पर ही थम गईं। रैंप पर उन्होंने अपनी पांच महीने की बेटी आरिया को ब्रेस्टफीड कराते हुए कैटवॉक किया। इस दौरान उस बच्ची को भी हरे रंग का स्विमसूट पहनाने के साथ उसे शोर से बचाने के लिए कानों पर हेडफोन लगा रखा गया था।
    रैंप में अपनी बच्ची को ब्रेस्टफीड करातीं मारा मार्टिन का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। मारा ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लोगों से मिली सराहना का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने लिखा है, मुझे यकीन नहीं हो रहा कि एक दिन सुबह उठने पर मेरा और मेरी का नाम उस काम के लिए सुर्खियों में है, जो मैं रोज करती हूं।
    इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि मैं इस मैसेज को शेयर करते हुए बेहद शुक्रगुजार महसूस कर रही हूं और उम्मीद करती हूं कि ब्रेस्टफीडिंग को लेकर समाज में एक सहजता आए।
    एनबीसी को दिए इंटरव्यू में मार्टिन और इस फैशन शो के ऑर्गेनाइजर्स ने कहा, रैंप पर आरिया को ब्रेस्टफीड कराने का यह फैसला अचानक ही लिया गया। मारा मार्टिन बताती हैं, यह उसका डिनर टाइम था और उसे थोड़ी भूख लग रही थी। तो जब टीम के एक सदस्य ने सलाह दी कि जाओ और बच्ची को रैंप पर ब्रेस्टफीड कराओ। वह बताती है कि उन्हें यह काफी आइडिया तुरंत ही भा गया।
    अमरीकी में सार्वजनिक स्थानों पर ब्रेस्टफीडिंग को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। यहां कई बच्चों की सार्वजनिक ब्रेस्टफीडिंग की वकालत करती रही है। उनका तर्क है कि इससे समाज में ब्रेस्टफीडिंग को लेकर सहाजता आएगी। हालांकि कई लोग इसकी मुखालफत भी करते हैं। उनका कहना है कि यह अश्लीलता को बढ़ावा देगा। (न्यूज 18)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • हेलसिंकी, 17 जुलाई। अपनी पुरानी आदत से व्लादिमीर पुतिन सोमवार को भी चूके नहीं। फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में तय मुलाकात के लिए रूसी राष्ट्रपति ने अमरीका के मुखिया डोनाल्ड ट्रंप को 35 मिनट इंतजार करवाया।
    हालांकि डोनाल्ड ट्रंप राहत महसूस कर सकते हैं कि वे इस मामले में अंगेला मेर्कल से ज्यादा खुशनसीब निकले। साल 2014 में व्लादिमीर पुतिन ने जर्मन चांसलर को चार घंटे 15 मिनट इंतजार करवाया था। कारण उस दिन अपने पिछले ठौर यानी सर्बिया में रूसी राष्ट्रपति को तय वक्त से कुछ ज्यादा ही रुकना पड़ गया था।
    साल 2000 में रूस के मुखिया बनने के बाद से ही व्लादिमीर पुतिन दूसरे राष्ट्राध्यक्षों और महत्वपूर्ण हस्तिों को इंतजार करवाते रहे हैं। क्या पोप फ्रांसिस और क्या रानी एलिजाबेथ (द्वितीय), कोई बच नहीं पाया। यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को तो एक बार उनसे मिलने के लिए चार घंटे इंतजार करना पड़ा था।
    क्या व्लादिमीर पुतिन ऐसा जानबूझकर करते हैं? बहुतों को तो ऐसा ही लगता है। उनके मुताबिक यह रूसी राष्ट्रपति की एक रणनीति है - सामने वाले के बनिस्बत अपने को बड़ा जताने की। उनका यह भी कहना है कि पुतिन इस तरह की अंतरराष्ट्रीय बैठकों के लिए देरी से आने को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं ताकि सामने वाले का मानसिक संतुलन थोड़ा सा हिल जाए। हालांकि दूसरी तरफ कइयों को लगता है कि यह व्लादिमीर पुतिन की आदत में शुमार है। उनके मुताबिक रूस के मुखिया मॉस्को में होने वाले अपने कार्यक्रमों के लिए भी अक्सर लेट हो जाते हैं। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • थाईलैंड, 17 जुलाई। मस्क ने थाई गुफा के बचावकर्ता के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने रविवार को ट्विटर पर थाई गुफा में फंसे 12 बच्चे व उनके कोच को बाहर निकालने में मदद करने वाले ब्रिटेन के गोताखोर पर छोटे बच्चो के प्रति यौन आकर्षण (पीडो) का आरोप लगाया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर मस्क की जमकर आलोचना हुई है। ब्रिटेन के गोताखोर वर्न अंसवर्थ ने एक साक्षात्कार में कहा था कि मस्क का मिनी सब के साथ राहत व बचाव अभियान में मदद करने के लिए हाथ बढ़ाना एक पीआर स्टंट था।
    इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मस्क ने रविवार को ट्वीट कर कहा, माफ करना बच्चों के प्रति यौन आकर्षण वाले (पीडो) व्यक्ति, तुम्हें सच में इसके लिए पूछना चाहिए था। थाम लुआंग गुफा में फंसे 12 बच्चे व उनके कोच को पिछले हफ्ते एक सप्ताह तक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा चलाए गए अभियान के बाद गुफा से बाहर निकाला गया था। गार्जियन की रपट के अनुसार, मस्क ने इस राहत व बचाव अभियान में मदद के लिए एक सबमरीन मुहैया कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इस सबमरीन की जरूरत नहीं होने की वजह से इसकी सहायता नहीं ली गई। उन्होंने बाद में इसे खारिज करते हुए कहा था कि वह एक वीडियो बनाएंगे जिससे यह साबित हो जाएगा कि उनका मिनी सब बचाव अभियान में जरूर सफल साबित होता।
    मस्क के विवादास्पद ट्वीट को बाद में हालांकि हटा दिया गया। इससे पहले अंसवर्थ ने साक्षात्कार में कहा था कि मस्क के मिनी सब के लिए यहां कोई भी मौका नहीं है। मस्क के इस बयान पर ट्विटर यूजर ने उन्हें आड़े हाथों लिया और कहा कि इस तरह का आरोप काफी खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना  है। कुछ ने कहा कि मस्क ने इस बयान से अपने 2.2 करोड़ फॉलोवर का अपमान किया है। (आईएएनएस)

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Posted Date : 17-Jul-2018
  • वाशिंगटन, 17 जुलाई। अमरीकी सरकार ने 29 साल की एक रूसी महिला को रूसी सरकार के एजेंट के तौर पर राजनीतिक समूहों में घुसपैठ की साजिश रचने के आरोप में अभियुक्त बनाया है। अमरीकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार मारिया बूटीना नाम की इस महिला ने रिपब्लिकन पार्टी के साथ करीबी रिश्ते बना लिए थे और वह गन राइट्स की वकालत कर रही थीं।
    यह मामला विशेष काउंसल रॉबर्ट मूलर द्वारा 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में कथित रूसी हस्तक्षेप की जांच से अलग है। फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात के कुछ समय बाद ही मारिया की गिरफ्तारी की खबर आई है।
    मरिया बूटीना पर रूसी सरकार के उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर काम कर रही थीं। मारिया वॉशिंगटन में रहती हैं और उन्हें रविवार को गिरफ्तार किया गया था। डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक बुधवार को उनके मामले पर सुनवाई होगी और तब तक वह जेल में रहेंगी।
    एफबीआई के स्पेशल एजेंट केविन हेल्सन ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि मारिया को रूसी संघ के हितों को बढ़ाने के लिए अमरीकी राजनीति में प्रभाव रखने वाले अमरीकियों से निजी संबंधों को इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए थे।
    अभियोजकों का कहना है कि मारिया ने अपनी गतिविधियों की जानकारी अमरीकी सरकार को नहीं दी थी जबकि फॉरन एजेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत ऐसा करना जरूरी है।
    कौन हैं मारिया
    अमरीका के न्याय विभाग ने किसी समूह या राजनेता का नाम लिए बिना कहा है कि मारिया ने गन राइट्स का प्रचार करने वाले एक संगठन से करीबी बढ़ाने की कोशिश की थी। अमरीकी मीडिया ने इससे पहले रिपोर्ट किया था कि मारिया के रिश्ते नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) से थे जो कि अमरीका की सबसे शक्तिशाली गन लॉबी है।
    मारिया बुटीना मूल रूप से साइबेरिया से हैं और उन्होंने अमरीकन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीजा पर अमरीका आने से पहले राइट टु बेयर आम्र्स नाम से समूह बनाया था। इससे पहले एक बार मारिया ने इस बात से इंकार किया था कि वह रूसी सरकार के साथ काम नहीं कर रही हैं।
    द वॉशिगंटन पोस्ट के मुताबिक मारिया रूसी बैंकर और पूर्व सीनेटर अलेग्जेंडर टोर्शिन की असिस्टेंट रही हैं, जिनपर अमरीकी ट्रेजरी ने अप्रैल में प्रतिबंध लगा दिया था। टोर्शिन नैशनल राइफल एसोसिएशन के आजीवन सदस्य हैं और मारिया अमरीका में 2014 से एनआरए के कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं।
    मारिया ने ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान के कार्यक्रमों में भी शिरकत की थी और कथित तौर पर रूस के साथ विदेशी नीति पर ट्रंप के विचार जानने चाहे थे। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक उस समय ट्रंप ने जवाब दिया था, हम पुतिन के साथ मिलकर रहेंगे। (बीबीसी)

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Posted Date : 16-Jul-2018
  • सोरोंग, 16 जुलाई । इंडोनेशिया में मगरमच्छ का शिकार बने एक व्यक्ति की मौत का बदला लेने के लिए गुस्साई भीड़ ने करीब 300 मगरमच्छों को मार डाला। अधिकारियों ने बताया कि बदले की आग में मगरमच्छों को मारने की यह घटना शनिवार को पापुआ प्रांत में शख्स के अंतिम संस्कार के बाद घटी।  
    पुलिस और संरक्षण अधिकारियों ने बताया कि यह व्यक्ति अपने पशुओं के चारे के लिए घास ढूंढने गया था जब वह मगरमच्छों के एक बाड़े में गिर गया। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ ने मृतक सुगिटो के एक पैर को काट लिया था और एक मगरमच्छ के पिछले हिस्से से टकराकर उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि आवासीय इलाके के पास फार्म की मौजूदगी को लेकर गुस्साए सुगिटो के रिश्तेदार और स्थानीय निवासी स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे। स्थानीय संरक्षण एजेंसी के प्रमुख बसर मनुलांग ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि फार्म मुआवजा देने को तैयार है। 
    अधिकारियों ने बताया कि इससे अंसतुष्ट भीड़ चाकू , छुरा और खुरपा लेकर फार्म पहुंच गई और 4 इंच लंबे बच्चों से लेकर दो मीटर तक के 292 मगरमच्छों को मार डाला। पुलिस और संरक्षण अधिकारियों का कहना था कि वह इस भीड़ को रोक पाने में असमर्थ थी। अधिकारियों ने कहा कि वे इसकी जांच कर रहे हैं और आपराधिक आरोप भी तय किए जा सकते हैं। इंडोनेशिया द्वीपसमूह में मगरमच्छों की कई प्रजातियों समेत विभिन्न वन्यजीव पाए जाते हैं। मगरमच्छों को संरक्षित जीव माना जाता है। (एएफपी)

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Posted Date : 16-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 16 जुलाई। फीफा वल्र्डकप कप 2018 में कल खेले गए हाईवोल्टेज मुकाबले में फ्रांस ने क्रोएशिया को 4-2 से मात देकर 20 साल बाद दूसरी बार खिताब पर कब्जा कर लिया। मैच तो खैर फ्रांस ने जीता लेकिन लोगों के दिल क्रोएशिया ले गया। तो वहीं इसपर चार चांद लगाने का काम किया क्रोएशिया की महिला राष्ट्रपति कोलिंदा ग्राबर किटारोविक ने। कोलिंदा इससे पहले वाले मैच में भी अपने देश को सपोर्ट करती हुई नजर आई थी जहां स्टैंड्स में रूस के प्रधानमंत्री के सामने जश्न मनाती हुई दिखीं थी। लेकिन इस बार कोलिंदा ग्राबर ने कुछ ऐसा किया जहां उन्होंने पूरे दुनिया के फुटबॉल फैंस का दिल जीत लिया।

    क्रोएशिया की जर्सी पहने कोलिंदा मैच खत्म होने के बाद खिलाडिय़ों के बीच आई और उन्हें गले लगाने लगी। तो वहीं भावुक हुए खिलाडिय़ों के आंसू भी पोंछने लगीं। कोलिंदा ने फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ भी कुछ खुशी के पल बिताए।
    फ्रांस से 4-2 की हार के बाद क्रोएशिया के फैंस जहां एक दूसरे के आंसू पोंछते नजर आए तो वहीं कई फैंस इस बात की भी खुशी मना रहे थे की उनकी टीम फीफा वल्र्डकप कप के इतने बड़े टूर्नामेंट में फाइनल तक पहुंची।
    लेकिन स्टेडियम में लगे बिग स्क्रीन पर जिस एक शख्स की तस्वीर दिख रही थी वो थी क्रोएशियन राष्ट्रपति कोलिंदा थी जो खिलाडिय़ों का हैंसला अफजाई करती नजर आई तो वहीं भावुक हुए खिलाडिय़ों के आंसू भी पोंछते दिखी। क्रोएशिया की जनसंख्या सिर्फ 40 लाख है और टीम को शुरू से ही फीफा वल्र्डकप कप की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। यूरोपियन सॉकर गवर्निंग बॉडी के हेड ने कहा कि इतने छोटे देश का फीफा के फाइनल तक पहुंचना और कड़ी टक्कर देना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
    क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रे लेनकोविक ने सभी कर्मचारियों से अपील की थी कि वो अपने स्टॉफ को जल्दी छोड़ दें जिससे सभी स्टॉफ अपने देश और विश्व कप के जश्न में शामिल हो चुके। बता दें कि क्रोएशिया में ट्रेन के टिकटों के दाम को घटाकर 50 प्रतिशत सस्ता कर दिया गया है। ये उन लोगों के लिए है जो जश्न में शामिल होने के लिए जाग्रेब से क्रोएशियन शहरों की तरफ कूच करेंगे।
    फीफा वल्र्डकप कप में क्रोएशिया के प्रदर्शन को देखते हुए टीवी सेट की बिक्री 400 प्रतिशत बढ़ गई थी। तो वहीं क्रोएशिया कैबिनेट ने सभी को वाइट और रेड जर्सी पहनकर अपनी टीम को सपोर्ट करने को कहा था। फाइनल मैच को देखते हुए सभी लोगों को ये आदेश दिए गए थे कि वो फाइनल का टिकट पहले ले लें। (एबीपी न्यूज)

     सोशल मीडिया अब क्रोएशियन राष्ट्रपति की विनम्रता, सादगी, और दरियादिली की वाहवाही से भरा हुआ है
    जो सोशल मीडिया दो दिन पहले तक कोलिंदा की बिकिनी तस्वीरों से पटा हुआ था, और यह मजाक चल रहा था कि ऐसी खूबसूरत राष्ट्रपति की वजह से यह टीम दुनिया भर की शुभकामना पा रही है, वह सोशल मीडिया अब क्रोएशियन राष्ट्रपति की विनम्रता, सादगी, और दरियादिली की वाहवाही से भरा हुआ है। यह राष्ट्रपति अपने देश से मॉस्को तक साधारण मुसाफिर विमान में सबसे सस्ती सीट पर बैठकर आई, पूरे विश्वकप का हर मैच एक साधारण दर्शक की तरह गैलरी में बैठकर देखा, अपने देश के मैचों में वह खिलाडिय़ों की तरह उनका टी-शर्ट पहनकर बैठी, जितने दिन छुट्टी पर रही, उतने दिनों की तनख्वाह नहीं ली, जब क्रोएशिया ने सेमीफाइनल पहुंचने वाला मैच जीता, तो वह खिलाडिय़ों के ड्रेसिंग रूम में जाकर एक-एक से गले मिली और बधाई दी, कल के फाइनल मैच के दौरान फ्रांस के जीत जाने पर भी उसने फे्रंच राष्ट्रपति को गले लगाकर बधाई दी। इसके बाद दुनिया भर के दर्शकों ने देखा कि जब विश्वकप अवार्ड समारोह चल रहा था, तो कोलिंदा ने दोनों टीमों के हर खिलाड़ी को बराबरी से गले लगाकर, बराबरी से बधाई दी, और इस पूरे दौर में भी अपनी टीम के हारने को लेकर उनका कोई मलाल उन पर हावी नहीं हो सका। जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन बारिश से बचने के लिए छाते तले थे, तब भी कोलिंदा बारिश में खुले खड़े हर किसी को बधाई और धन्यवाद दे रही थीं। हारने वाली टीम के देश की मुखिया की ऐसी गर्मजोशी दुनिया में पहले किसी ने शायद ही देखी होगी। छत्तीसगढ़ न्यूज डेस्क

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Posted Date : 16-Jul-2018
  • क्वींसलैंड, 16 जुलाई । ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में यूनिफार्म सुधार के क्रम के हिस्से में अगले साल से लड़कियों को उनकी जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप शॉर्ट्स और पैंट पहनने की अनुमति दी जाएगी। क्वींसलैंड राज्य शिक्षा मंत्री ग्रेस ग्रेस ने रविवार को कहा कि हम जानते हैं कि लगभग 60 प्रतिशत स्टेट स्कूल पहले से ही लड़कियों को इन यूनिफार्म के विकल्पों का प्रस्ताव दे रहे हैं, लेकिन हमने पाया कि कुछ स्कूलों ने कई वर्षों में अपने ड्रेस कोड को अपडेट नहीं किया है।
    उन्होंने कहा कि क्वींसलैंड की सभी लड़कियों को खेल व कक्षा की सक्रिय गतिविधियों में शामिल होने में सक्षम होना चाहिए और उन्हें इस बात की चिंता किए बिना कि उन्होंने क्या पहना है, स्कूल तक बाइक चलाकर आने और जाने के लिए सक्षम होना चाहिए। ग्रेस ने कहा कि नवीनतम ड्रेस कोड पर हितधारकों के साथ परामर्श व व्यापक समीक्षा के बाद सहमति बनी है।
    राज्य के स्ट्रेटन स्टेट कॉलेज के कार्यकारी प्राचार्य जान मारेस्का ने कहा कि हमने पूरे स्कूल समुदाय के साथ परामर्श के बाद पाया कि हमारी प्राथमिक स्कूल की आधी बच्चियां स्कर्ट पहनकर स्कूल नहीं आना चाहती हैं। जान मारेस्का ने अपने स्कूल के यूनिफार्म में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी हमारे स्कूल आकर अब देख सकता है कि लड़कियां तनावमुक्त होकर फुटबॉल को किक मार रही हैं, हैंडबाल खेल रही हैं, पेड़ के नीचे लेटकर बेफिक्र किताबें पढ़ रही हैं।  (आईएएनएस)

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Posted Date : 15-Jul-2018
  • लंदन, 15 जुलाई। लगता है कि फुटबॉल वल्र्ड कप में ग्लैमर के दिन ढलने वाले हैं, तभी तो फीफा अधिकारी भी मॉरल पुलिसिंग के रास्ते चल पड़े हैं। दरअसल एथिक्स को लेकर चिंतित अधिकारी चाहते हैं कि टीवी स्टेशनों को फुटबॉल के गेम के दौरान क्राउड में मौजूद हॉट महिलाओं पर ज्यादा फोकस नहीं करना चाहिए। 
    ग्लॅमर से करोड़ों की कमाई होती है। लोग खेल के साथ कुछ नई चीजें देखना चाहते हैं। अगर फीफा से ग्लॅमर हट जायेगा तो लोगों मे इसका मोह कम होगा।
    इनका आकलन है कि मौजूदा वल्र्ड कप के दौरान टीवी चैनलों ने दर्शकों में मौजूद दिलकश हसीनाओं को दिखाने में काफी टाइम खराब किया है और पिच पर हो रहे गेम पर पूरा फोकस नहीं किया। अब अधिकारियों ने कवरेज देखने के बाद ऐक्शन लेने का आदेश दिया है। खासकर रूसी टीवी ब्रॉडकास्टर्स पर आरोप है कि वे मैच के दौरान महिला दर्शकों पर कैमरा फोकस ज्यादा करते हैं। 
    बताया गया कि रूस और सऊदी अरब के बीच ग्रुप स्टेज के मैच के दौरान स्टैंड में बैठी एक ग्लैमरस मॉडल ने खूब फुटेज लूटा। फीफा के डायवर्सिटी बॉस फेडेरिको एदिएची से जब इस बाबत पूछा गया तो उनका कहना था कि ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं और उनमें साफतौर पर इसका सबूत मिल रहा है। हालांकि उन्होंने यह तो नहीं कहा कि ऐसे टेलिकास्ट पर पाबंदी लगाई जाएगी, मगर यह जरूर स्वीकार किया कि भविष्य में इस पर जरूर नजर रहेगी। फेडेरिको ने कहा कि जो भी गलत चीजें होंगी, हम उस पर ऐक्शन लेंगे। (नवभारत टाईम्स)

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