अंतरराष्ट्रीय

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • वाशिंगटन, 15 नवम्बर। अमेरिकी सरकार ने समाचार चैनल सीएनएन के एक संवाददाता का प्रेस पास निलंबित करने के निर्णय का अदालत में बचाव किया है। खबरों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने अपनी दलील में कहा है कि संविधान के पहले संशोधन के तहत किसी भी पत्रकार को अमेरिकी राष्ट्रपति भवन व्हाइट हाउस में प्रवेश का अधिकार नहीं है।
    सीएनएन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत व्हाइट हाउस के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उसने व्हाइट हाउस से अपने संवाददाता जिम एकोस्टा का प्रेस पास तत्काल बहाल करने की मांग की है। सीएनएन ने यह मुकदमा वाशिंगटन की जिला अदालत में दायर किया है। उसका कहना है कि पत्रकार के व्हाइट हाउस में आने पर प्रतिबंध लगाना संविधान के पहले और पांचवें संशोधन का उल्लंघन है। उधर, अमेरिकी न्याय विभाग की दलील है कि राष्ट्रपति और व्हाइट हाउस के पास पत्रकारों (नागरिकों) के राष्ट्रपति भवन में प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए व्यापक अधिकार हैं और इन्हीं के तहत वे कर सकते हैं कि किसे साक्षात्कार देना है या प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुलाना है।
    बीते बुधवार को व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जिम एकोस्टा के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। यह तब शुरू हुई जब सीएनएन संवाददाता ने मध्य अमेरिकी देशों की तरफ से अमेरिका की तरफ बढ़ रहे शरणार्थियों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान को गलत बताया। ट्रंप ने इन शरणार्थियों के आने को आक्रमण बताया था। मामला धीरे-धीरे बढ़ता चला गया। आखिर में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मुझे देश चलाने दें। आप सीएनएन चलाइए। और अगर आप सही से ऐसा करते हैं तो आपकी रेटिंग और बेहतर होगी।Ó बाद में व्हाइट हाउस ने एकोस्टा का प्रेस पास रद्द कर दिया था।  (पीटीआई)

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • वाशिंगटन, 15 नवम्बर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील में जज के पद के लिए भारतवंशी नियोमी राव का नामांकन किया है। नियोमी राव का नाम बुधवार को अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
    अगर अमेरिकी संसद नियोमी राव के नाम पर मुहर लगा देती तो वे इस पद पर पहुंचने वाली भारतीय मूल की दूसरी जज होंगी। उनके पहले बराक ओबामा सरकार के दौरान जस्टिस श्री श्रीनिवासन इस पद पर नियुक्त किए गए थे। राष्ट्रपति भवन में दीवाली समारोह के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 45 वर्षीय नियोमी राव को डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील के जज के तौर पर नामित करने का ऐलान किया था। इस पद के लिए नियोमी राव के नामित होने पर दक्षिण एशिया बार एसोसिएशन ने उन्हें बधाई दी है। नियोमी राव वर्तमान में सूचना एवं नियामक मामलों के कार्यालय ( ओआईआरए) में अधिकारी हैं। वे अमेरिका की येल और शिकागो विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट हैं।  (पीटीआई)

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • कैलिफोर्निया, 15 नवम्बर। कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग से मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक यह आंकड़ा 59 तक पहुंच चुका है। जबकि 130 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
    कैलिफोर्निया के जंगलों में पिछले सप्ताह लगी आग को अमेरिकी इतिहास में इस तरह की सबसे भीषण घटनाओं में से एक माना जा रहा है। इस हादसे में लापता बताए जा रहे लोगों में अधिकांश उत्तरी कैलिफोर्निया के बुट्टे काउंटी के पैराडाइज कस्बे के रहने वाले हैं। यह पूरा कस्बा जंगल की आग में खाक हो चुका है।
    बुट्टे काउंटी के प्रमुख कोरी होनिया ने मीडिया को बताया कि लापता लोगों की तलाश में 461 बचावकर्मी और 22 खोजी कुत्ते लगे हैं। जो शव अब तक मिले हैं उनकी पहचान के लिए डीएनए परीक्षण की रफ्तार भी बढ़ाई जा रही है। इस प्रक्रिया में गुरुवार से ऐसा कोई भी व्यक्ति जांच के लिए डीएनए नमूना जमा करा सकता है जिसे इस हादसे में अपने परिजन के खो जाने की आशंका हो।
    पैराडाइज कस्बे में 26,000 की आबादी थी। यह सिएरा नेवादा की खूबसूरत पहाडिय़ों की तलहटी में बसा हुआ था। इस इलाके की खूबसूरती की वजह से ही पैराडाइज कस्बे में सेवानिवृत्त लोग बड़ी तादाद में रहते थे। इसीलिए आग की घटना के बाद जो लोग लापता हैं, उनमें भी अधिकांश लोग 70, 80 और 90 के दशक की उम्र वाले बताए जा रहे हैं।  (पीटीआई)

     

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • इजरायल, 15 नवम्बर। इजरायल के रक्षा मंत्री एविगडोर लिबरमैन ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इजरायल के अखबार हारेत्ज के मुताबिक मिस्र की मध्यस्थता से इजरायल और फिलिस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के बीच संघर्ष विराम कराए जाने और कतर की तरफ से कथित तौर पर गजा में करोड़ों डॉलर की नगदी पहुंचाए जाने के विरोध में उन्होंने यह फैसला किया है।
    एविगडोर लिबरमैन ने इस संघर्ष विराम को 'आतंक के खिलाफ इजरायल का आत्मसमर्पणÓ बताते हुए देश में जल्द से जल्द चुनाव कराए जाने की मांग भी की है। उनका यह भी कहना है, 'अल्पकालिक फायदे के लिए हम अपनी दीर्घकालिक सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं।Ó उन्होंने यह दावा भी किया है कि वे इजरायली सरकार के एक वफादर सदस्य रहे हैं, साथ ही देश को चुनावों से बचाने के लिए सरकार के साथ अपने कई मतभेदों को भी उन्होंने अपने आप तक ही सीमित रखा था।
    उधर, इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को समर्थन देने वाले एक अन्य दल के नेता हबायित हेयेहुदी ने कहा है कि अगर शिक्षा मंत्री नफताली बेन्नेट को रक्षा मंंत्रालय का भार सौंपा गया तो उस स्थिति में उनकी पार्टी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेगी। इस स्थिति में इजरायल में प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार गिर सकती है और तब यहां समयपूर्व चुनाव करवाए जा सकते हैं। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • सिंगापुर, 15 नवम्बर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सिंगापुर में इंडिया-सिंगापुर हैकेथॉन 2018 के विजेताओं को पुरस्करा देंगे। ये हैकेथॉन 40 टीमों की एक प्रतियोगिता है। सिंगापुर के शिक्षा मंत्री ओंग ये कुंग इस पुरस्कार समारोह में मौजूद रहेंगे।
    प्रधानमंत्री पूर्वी एशिया से जुड़े क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों के लिए 14 नवंबर को सिंगापुर के दौरे पर पहुंचे है, 31 मई से दो जून के सिंगापुर के अपने आधिकारिक दौरे के दौरान मोदी ने अपने सिंगापुरी समकक्ष ली सीन लूंग के सामने प्रस्ताव रखा था कि भारत और सिंगापुर को एक संयुक्त हैकेथॉन का आयोजन करना चाहिए। ली ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया था।
    सिंगापुर ने इस हैकेथॉन के आयोजन का काम नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एनटीयू) और उसकी नवप्रवर्तन एवं उद्यम शाखा- एनटीयूटिव को सौंपा था। भारत ने इसकी जिम्मेदारी ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) को दी थी। सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग ने सिंगापुर के शिक्षा एवं विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को संभव बनाया।
    दोनों देशों से 20-20 टीमों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इन टीमों में यूनिवर्सिटी और कॉलेज के छात्र शामिल थे जिन्हें देश भर से चुना गया। भारत और सिंगापुर के तीन-तीन विजेताओं के लिए प्रथम पुरस्कार 10,000 सिंगापुरी डॉलर, द्वितीय पुरस्कार 6,000 सिंगापुरी डॉलर और 4,000 सिंगापुरी डॉलर का तृतीय पुरस्कार है।  (भाषा)

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • वाशिंगटन, 15 नवम्बर। ट्रंप प्रशासन ने सीएनएन के एक रिपोर्टर के प्रेस पास को निलंबित करने के निर्णय का अदालत में बचाव किया है। ट्रंप प्रशासन ने दलील दी है कि किसी भी पत्रकार को संविधान के पहले संशोधन के तहत व्हाइट हाउस में प्रवेश का अधिकार नहीं है।
    सीएनएन ने डोनाल्ड ट्रंप और उनके कई वरिष्ठ सहयोगियों के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया है जिसमें नेटवर्क के संवाददाता जिम अकोस्टा के व्हाइट हाउस के प्रेस पास की तत्काल बहाली की मांग की गई है। अमरीका के राष्ट्रपति के साथ तीखी बहस के बाद जिम कोस्टा का पास रद्द कर दिया गया था।
    विधि मंत्रालय ने बुधवार को अदालत में कहा, किसी भी पत्रकार को संविधान के पहले संशोधन के तहत व्हाइट हाउस में प्रवेश का अधिकार नहीं है।
    पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस द्वारा सीएनएन के प्रमुख व्हाइट हाउस संवाददाता एकोस्टा का प्रेस पास रद्द किये जाने के प्रतिक्रिया स्वरूप सीएनएन ने यह मुकदमा दायर किया है।
    क्यों भड़के थे ट्रंप?
    हाल के दिनों में सीएनएन और ट्रंप के बीच छत्तीस का आंकड़ा दिख रहा है। ट्रंप कई बार सीएनएन पर फेक न्यूज का आरोप लगा चुके हैं। मध्यावधि चुनावों के नतीजे के बाद ट्रंप प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, इसी दौरान सीएनएन के रिपोर्टर एकॉस्टा ने ट्रंप से माइग्रेंट कारवां पर सवाल पूछा। माइग्रेंट कारवां प्रवासियों का वो ग्रुप है, जो मेक्सिको के रास्ते अमरीका पहुंचने के लिए लगातार आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन्हें देश के लिए खतरा बताया है।
    इस मुद्दे पर सवाल से ट्रंप भड़क गए। ट्रंप ने गुस्से में इस रिपोर्टर को कहा- बहुत हुआ अब आप बैठ जाइए। इसी बहसबाजी के बीच व्हाइट हाउस की एक स्टाफ ने एकॉस्टा से माइक लेने की कोशिश की लेकिन उसने मना कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने कहा कि जिस तरह का व्यवहार आपने महिला के साथ किया इसके लिए सीएनएन को शर्मिंदा होना चाहिए। इसके बाद रिपोर्टर का प्रेस पास रद्द कर दिया गया। बाद में सीएनएन ने मुकदमा दायर कर दिया।  (पीटीआई)

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, अमरीका राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संकट का सामना कर रहा है और इस हालत में वह रूस या चीन के खिलाफ होने वाले किसी युद्ध में हार सकता है। अमरीका के संसदीय पैनल ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है।
    संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, अमरीका राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संकट का सामना कर रहा है और इस हालत में वह रूस या चीन के खिलाफ होने वाले किसी युद्ध में हार सकता है।
    कांग्रेस ने राष्ट्रीय रक्षा रणनीति आयोग को यह जिम्मेदारी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (एनडीएस) का अध्ययन करे। गौरतलब है कि ट्रंप की यह नीति मॉस्को और बीजिंग के साथ शक्ति पाने की नई होड़ को दिखाती है।
    डेमोक्रेटिक और रिपब्लिक पार्टी के दर्जनों पूर्व अधिकारियों के इस पैनल ने पाया कि एक ओर जहां अमरीकी सेना बजट में कटौती का सामना कर रही है और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं में कमी आ रही है, वहीं चीन और रूस जैसे देश अमरीकी ताकत के साथ संतुलन कायम करने के लिए अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं।
    आयोग का कहना है कि अमरीका की सैन्य श्रेष्ठता, जो दुनिया में उसकी ताकत का लोहा मनवाती है और राष्ट्रीय सुरक्षा, बेहद खतरनाक डिग्री तक खराब हुई है।
    पैनल ने पाया कि इस सदी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर अमरीका का ध्यान केंद्रित होने से वह युद्ध के अन्य क्षेत्रों जैसे मिसाइल रक्षा, साइबर और अंतरिक्ष अभियान सहित अन्य क्षेत्रों में पिछड़ रहा है। (भाषा)

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Posted Date : 15-Nov-2018
  • आयरलैंड, 15 नवम्बर। 17 साल की पीडि़ता से बलात्कार के अभियुक्त के बरी होने के बाद आयरलैंड में सेक्स के लिए सहमति के मुद्दे पर कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन होने हैं। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा, आपको उसकी पोशाक को भी देखना होगा। उसने थोंग पहन रखा था जिसमें आगे फीते थे। ज्यूरी ने 28 वर्षीय अभियुक्त को दोषी नहीं पाया है।
    अदालत के फैसले पर विवाद होने के बाद रेप पीडि़ताओं पर ही आरोप लगाए जाने का मुद्दा उठाना के लिए आयरलैंड की एक महिला सांसद सदन में अंडरवियर लेकर आ गईं।
    सांसद रुथ कैपिंगर में संसद में नीले रंग का फीतों वाला अंडरवियर दिखाते हुए कहा, यहां थोंग दिखाना शर्मनाक हो सकता है। लेकिन आपको सोचना होगा कि जब एक महिला के अंडरवियर को अदालत में दिखाया गया तो उसे कैसा लगा होगा।
    इस मामले के बारे सबसे पहले 06 नवंबर को आईरिश एक्जामिनर अखबार ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी। अभियुक्त का कहना था कि उसके और पीडि़ता के बीच संबंध सहमति से बने थे। लेकिन उनकी वकील एलिजाबेथ ओ-कोनेल की ओर से दिए गए तर्कों पर सोशल मीडिया पर काफी विवाद हुआ है।
    एक्जामिनर की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पूछा, क्या सबूत इस संभावना से इनकार करते हैं कि वो अभियुक्त की ओर आकर्षित थीं और और किसी से मुलाकात करने और साथ रहने के लिए सहमत थीं?
    वकील ने ज्यूरी से कहा, आपको देखना होगा कि उसने कैसे कपड़े पहने थे। उसने थोंग पहन रखा था जिसमें सामने फीते लगे हए थे। इस मामले के बारे में अखबार में रिपोर्ट प्रकाशित होने के अगले दिन ही डबलिन रेप क्राइसिस सेंटर की प्रमुख ने अधिवक्ता के बयानों की आलोचना की थी।
    हालांकि उन्होंने फैसले की आलोचना नहीं की लेकिन कानूनी प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अक्सर की जाती रही हैं। इसी बीच आयरलैंड के लोगों ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर तल्ख टिप्पणियां की हैं।
    हैशदिसइजनॉटकॉन्सेंट के साथ बहुत से लोगों ने ट्वीट किया है। बहुत सी महिलाओं ने अपने अंडरवियर की तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। अदालत में इस तरह के तर्क दिए जाने का विरोध करते हुए वो अपनी अंडरवियर के रंग और शेप दिखा रही हैं।
    बहुत सी महिलाओं ने ऐसे देशों के बारे में भी बताया है जहां रेप के मुकदमे के दौरान क्या कहा जा सकता है और क्या नहीं इसे लेकर सख्त नियम हैं। अदालत में अंडरवियर दिखाने के बाद सांसद कोपिंगर ने कहा कि जजों और ज्यूरी के सदस्यों को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इसी साल उत्तरी आयरलैंड में रेप के एक मुकदमे में रग्बी के दो चर्चित खिलाडिय़ों को बरी कर दिया गया था। अदालत की सुनवाई का ब्यौरा सार्वजनिक होने के बाद आयरलैंड और उत्तरी आयरलैंड में व्यापक प्रदर्शन हुए थे।
    कहां होने हैं प्रदर्शन?
    राजधानी डबलिन समेत कई शहरों में प्रदर्शन होने हैं। समाजवादी महिलावादी समूह रोजा ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया है। डबलिन के अलावा कोर्क, लिमेरिक और वॉटरफर्ड शहरों में भी आज प्रदर्शन होने हैं।  (बीबीसी)

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • सिंगापुर, 14 नवम्बर। पीएम मोदी ने सिंगापुर में आयोजित फिनटेक फेस्टिवल में बुधवार को अपना संबोधन दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि तकनीक के क्षेत्र में बीते कुछ दशकों में भारत ने लंबी छलांग लगाई है। आज तकनीक कई तरह की नई मौके तैयार कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि सिंगापुर तकनीक की मदद से ही कम समय में ग्लोबल फाइनेंस हब बन गया है। पीएम मोदी ने इस मौके पर भारत सरकार द्वारा लांच किए गए भीम एप, बॉयोमेट्रिक सिस्टम और बीते तीन साल में खोले गए नए बैंक खातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे अपनी सरकार की तरफ से फिनटेक फेस्टिवल में बोलने का मौका मिला है।
    उन्होंने कहा कि हमनें बीते कुछ वर्षों में 1.2 बिलियन लोगों का बॉयोमेट्रिक आइडेंटिटी जेनरेट किया, जबिक 1.3 बिलियन लोगों के भारत में वित्तीय समावेशन एक सच्चाई बन पाई।इस दौरा पीएम ने जनधन योजना की भी बात की। उन्होंने कहा कि हमनें बीते कुछ वर्षों में 330 मिलियन लोगों के नए खाते खोले। पीएम ने कहा कि 2014 तक भारत में 50 फीसदी से भी कम लोगों के पास बैंक खाते थे। आज के दिन तकरीबन सभी का अपना बैंक खाता है।
    आज भारत बॉयोमेट्रिक आइडेंटिटी, नए बैंक खातों और सेल फोन की मदद से विश्व का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बना हुआ है। पीएम ने कहा कि हमारी सरकार जब आई तो हमारा सिर्फ एक ही मकसद था और वह यह कि हम सभी का समावेशी विकास कर पाएं। ताकि हम इसकी मदद से हर एक नागरिक के जीवन स्तर को सुधार पाएं। इसके लिए हमें एक स्थाई वित्तीय समावेश की जरूरत थी। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • वाशिंगटन, 14 नवम्बर । अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में दीवाली समारोह का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने भारत को 'बहुत अच्छा मोलभाव करने वालाÓ बताया। यह लगातार दूसरा साल है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दीवाली समारोह आयोजित किया है।
    अमरीकी राष्ट्रपति भवन- व्हाइट हाउस के ऐतिहासिक- रुजवेल्ट कक्ष में दीया जलाने से पहले ट्रंप ने कहा, अमरीका के भारत के साथ काफी गहरे संबंध हैं। मैं अपनी मित्रता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं। समारोह में मौजूद अपनी बेटी इवांका का परिचय कराते हुए ट्रंप ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी इवांका के भी अच्छे दोस्त हैं। इवांका पिछले साल भारत दौरे पर आई थीं। उस समय भारत दौरे पर आने वाली वे ट्रंप प्रशासन की पहली शीर्ष अधिकारी थीं।
    भारत-अमरीका के बीच व्यापार समझौते पर हो रही बातचीत का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, यह सिलसिला दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच शुरू हुआ है। हम भारत के साथ बेहतर व्यापार समझौते के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं। लेकिन वे बहुत अच्छे व्यापारी हैं। वे बहुत अच्छे से मोलभाव करने वाले हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस नाते भी वे भारत का बहुत सम्मान करते हैं। दोनों देशों के रिश्ते स्वतंत्रता, समृद्धि और शांति की बुनियाद पर टिके हैं।
    व्हाइट हाउस में आयोजित दीवाली समारोह में अमरीकी सरकार में मौजूद भारतीय मूल के अधिकारी और अमरीका में मौजूद भारतीय राजदूत शामिल हुए। राष्ट्रपति भवन में दीवाली समारोह के आयोजन की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने साल 2003 में की थी। इसके बाद से यह परंपरा लगातार चली आ रही है। (इंडियन एक्सप्रेस/ पीटीआई)

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • श्रीलंका, 14 नवम्बर। श्रीलंका की संसद ने नए प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री पद पर उनकी नियुक्ति के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को संसद ने ध्वनिमत से पारित कर दिया।
    संसद के अध्यक्ष कारू जयसूर्या ने अविश्वास प्रस्ताव पारित होने की सूचना दी। उन्होंने कहा, ध्वनिमत का अभिप्राय समझते हुए मैं घोषणा करता हूं कि सरकार (राजपक्षे की) के पास संसद में बहुमत नहीं है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने का मतलब यह नहीं है कि पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे फिर इस पद पर काबिज हो जाएंगे। अलबत्ता 225 सीटों वाली संसद में 106 सदस्यों के समर्थन के साथ विक्रमसिंघे की पार्टी सबसे मजबूत स्थिति में है। फिर भी संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री चुनने का अधिकार राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के पास सुरक्षित है।
    वैसे राष्ट्रपति सिरिसेना को बीते कुछ समय में लगा यह एक और बड़ा झटका है। पहले सिरिसेना ने 26 अक्टूबर को जब विक्रमसिंघे को हटाकर राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त किया तब उन्होंने कुछ दिनों के लिए संसद निलंबित कर दी थी। ताकि राजपक्षे बहुमत जुटा सकें। पर चौतरफा दबाव में उन्हें संसद बहाल करनी पड़ी। हालांकि उन्होंने तुरंत ही संसद भंग कर अगले चुनाव की घोषणा भी कर दी। मगर श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला भी पलट दिया। इसके बाद अब संसद ने राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर उन्हें झटका दिया है। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • लंदन , 14 नवम्बर। लंदन में भारतीय मूल की एक गर्भवती महिला की तीर लगने से मौत हो गई। हालांकि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को आपात स्थिति में किए गए ऑपरेशन के बाद बचा लिया गया।
    जिस महिला पर हमला हुआ उसकी पहचान 35 वर्षीय सना मोहम्मद के रूप में हुई है। पूर्वी लंदन के इलफोर्ड इलाके में सोमवार को उस पर हमला हुआ। हमलावर ने तीर चलाया था जो सना के पेट में जा घुसा। हमले के बाद उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को रमनोडगे उन्मथालेगाडू नाम के शख्स को इस हमले के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसकी उम्र 50 साल है। वह सना का पूर्व पार्टनर बताया जा रहा है।
    सना ने सात साल पहले इम्तियाज मोहम्मद नाम के शख्स से दूसरी शादी की थी। इससे पहले उसे देवी उन्मथालेगाडू के नाम से जाना जाता था। लेकिन इम्तियाज से शादी के बाद उसने अपना नाम और धर्म दोनों बदल लिया। सना के पांच बच्चे हैं। इनमें से तीन पूर्व पार्टनर रमनोडगे से जन्मे हैं। जबकि दो दूसरे पति इम्तियाज से। पुलिस इस हत्या के पीछे इन्हीं पहलुओं को आधार बनाकर जांच कर रही है।  (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • वाशिंगटन, 14 नवम्बर। केबल न्यूज नेटवर्क (सीएनएन) ने व्हाइट हाउस की ओर से अपने वरिष्ठ पत्रकार जिम एकोस्टा की मान्यता रद्द किए जाने के मामले में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। जिम एकोस्टा व्हाइट हाउस में सीएनएन के मुख्य संवाददाता थे। बीते हफ्ते अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ बहस के बाद उनका प्रेस हार्ड पास वापस ले लिया गया था।
    नेटवर्क ने आरोप लगाया है कि ये एकोस्टा के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। ये मुकदमा मंगलवार को वाशिंगटन में दायर किया गया और इसमें राष्ट्रपति ट्रंप और उनके दूसरे सहयोगियों को प्रतिवादी बनाया गया है। इन अधिकारियों में चीफ ऑफ स्टाफ जॉन केली और व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स शामिल हैं।
    सारा सैंडर्स ने एकोस्टा का पास रद्द करने का कारण अस्वीकार्य आचरण को बताया था। उन्होंने मंगलवार को कहा कि जिम एकोस्टा सीएनएन के करीब 50 हार्ड पास धारकों में से एक हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्होंने दूसरे पत्रकारों को सवाल पूछने से अनुचित ढंग से रोका है।
    उन्होंने कहा, अगर कोई रिपोर्टर इस तरह व्यवहार करता है तो व्हाइट हाउस व्यवस्थित और निष्पक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकता। ये एक पेशेवर के लिए सही नहीं है। 
    इस घटना के बाद सारा सैंडर्स ने ट्वीट करके एकोस्टा पर अपना काम कर रही एक महिला को जबरन हाथ से रोकने की कोशिश का आरोप भी लगाया था। सारा ने ये बात उस महिला के लिए कहीं जो व्हाइट हाउस में इंटर्न हैं और प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिम एकोस्टा से माइक लेने की कोशिश कर रही थीं।
    हालांकि, एकोस्टा ने व्हाइट हाउस के आरोपों को गलत बताया और कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। बाद में सारा सैंडर्स ने उस वीडियो का एक जूम किया हुआ क्लिप भी शेयर किया। इस वीडियो को लेकर विशेषज्ञों का कहना था कि की स्पीड से छेड़छाड़ की गई है।
    इसके बाद व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन ने ट्रंप प्रशासन से ये फैसला वापस लेने की अपील की थी। ये घटनाक्रम सात नवंबर का है जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोनल्ड ट्रंप और एकोस्टा के बीच कुछ सवालों को लेकर बहस हो गई थी। इसके एक दिन बाद उनका पास रद्द कर दिया गया।
    संवाददाता जिम एकोस्टा अमरीकी राष्ट्रपति से मेक्सिको के शरणार्थियों और मेक्सिको से अमरीका की ओर बढ़ रहे प्रवासियों के एक काफिले के बारे में सवाल करना चाहते थे। लेकिन इस सवाल के बीच में ही ट्रंप के दफ्तर में तैनात एक महिलाकर्मी ने पत्रकार के हाथ से माइक झपटने की कोशिश की।
    इस दौरान अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी ये कहना शुरू कर दिया कि बहुत हुआ, बहुत हुआ...बस करिए। ट्रंप ने जिम एकोस्टा को माइक नीचे रखने के लिए भी कहा।
    इसके बाद डोनल्ड ट्रंप ने कहा, सीएनएन को खुद पर शर्मिंदा होना चाहिए कि आप उनके लिए काम करते हैं। जिस तरह का व्यवहार आपने सारा सैंडर्स की टीम की मेंबर के साथ किया, वो निंदनीय है।
    मुकदमे के बाद सीएनएन ने एक बयान में कहा है, हमने कोर्ट से आदेश पर तत्काल रोक लगाने और जिम अकोस्टा का पास लौटाने का आग्रह किया है और हम इस प्रक्रिया के तहत स्थाई राहत मांगेगे। भले ही ये मुकदमा सीएनएन और एकोस्टा की तरफ से है लेकिन ये किसी के भी साथ हो सकता है। व्हाइट हाउस हमारे चुने गए अधिकारियों को कवर करने वाले पत्रकारों पर इस तरह खतरनाक प्रभाव डाल सकता है। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 14-Nov-2018
  • सिंगापुर, 14 नवम्बर । अमरीका ने ईरान को एक बार फिर चेतावनी दी है। उसने कहा है कि वह जल्द ही ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू करवाएगा। मंगलवार को सिंगापुर में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने यह बात कही है।
    सिंगापुर में एक शिखर सम्मलेन में हिस्सा लेने से पहले जॉन बोल्टन ने एक कार्यक्रम में कहा, हम समझते हैं कि ईरान की सरकार इस समय भारी दबाव में है और हमारी मंशा भी उसे बुरी तरह निचोड़ कर रख देने की है। और जैसा ब्रिटिश कहते हैं कि तब तक निचोड़ो जब तक की गुठली न चीखने लगे। बोल्टन ने आगे कहा, हम प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू करवाने की दिशा में काम करने जा रहे हैं।
    बीते मई में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए छह देशों के परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था और उस पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी थी। ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध बीते पांच नवंबर से लागू हुए हैं। उस पर लगे ये प्रतिबंध अब तक के सबसे सख्त प्रतिबंध हैं। इनका उद्देश्य ईरानी तेल निर्यात को लगभग पूरी तरह से घटाना और अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था से ईरानी बैंकों को अलग करना है।
    हालांकि, अमरीका के इन एक तरफा प्रतिबंधों का विश्व की प्रमुख शक्तियों - ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन और रूस ने विरोध किया है और ये सभी उस परमाणु समझौते को बरकरार रखने के पक्ष में हैं, जो बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ था। (पीटीआई)

     

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • लॉस एंजिलिस, 13 नवम्बर । तुलसी गबार्ड 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से प्रत्याशी हो सकती हैं। उनके नजदीकी सूत्रों के हवाले से यह खबर आई है। हालांकि उन्होंने खुद इन खबरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
    लॉस एंजिलिस में हुई मेडट्रोनिक कॉन्फ्रेंस के दौरान जानी-मानी भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर संपत शिवांगी ने तुलसी गबार्ड का परिचय इस तरह कराया कि वे 2020 में अमेरिका की राष्ट्रपति हो सकती हैं। उनके इतना कहते ही कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाते हुए इस पर सहमति और प्रसन्नता जताई। तुलसी गबार्ड डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य और अमेरिका की पहली हिंदू सांसद हैं। वे हवाई प्रांत से चार बार अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन के लिए चुनी जा चुकी हैं।
    बताया जाता है कि इस साल क्रिसमस के आसपास गबार्ड राष्ट्रपति चुनाव लडऩे के बाबत फैसला ले सकती हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अगले साल तक होने की संभावना है। अलबत्ता कहा यह भी जा रहा है कि उनकी टीम ने तैयारी अभी से शुरू कर दी है। इसके तहत फिलहाल उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है गबार्ड के चुनाव अभियान में पैसे लगा सकें। इनमें बड़ी तादाद में भारतीय-अमेरिकी हो सकते हैं। इस समुदाय में तुलसी गबार्ड पहले से ही काफी लोकप्रिय हैं।
    यहूदी-अमेरिकियों के बाद भारतीय-अमेरिकियों को अमेरिका में सबसे धन-संपन्न समुदाय माना जाता है। वैसे गौर करने की बात है कि तुलसी गबार्ड भारतवंशी नहीं हैं। उनके पिता माइक गबार्ड हवाई से सीनेट के सदस्य रह चुके हैं। वे कैथोलिक ईसाई हैं। उनकी मां कैरल पॉर्टर गबार्ड कॉकेशियन (श्वेत नस्ल की) हैं जो हिंदू धर्म को अपना चुकी हैं। अमेरिकी समोआ में जन्मी और दो साल की उम्र से हवाई में रह रहीं तुलसी गबार्ड भी हिंदू धर्म को मानती हैं। उन्होंने कई धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन किया हुआ है। (एशियन एज)

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • नई दिल्ली, 13 नवम्बर। पूरी दुनिया में इंटरनेट छाया हुआ है, वहीं एक देश ऐसा भी है जहां ज्यादातर लोग इससे अनजान हैं। हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान की जहां 15 से 65 वर्ष की उम्र के 70 फीसदी लोग नहीं जानते कि आखिर इंटरनेट होता क्या है। इन्फर्मेशन कम्यूनिकेशन टेक्नॉलजी (आईसीटी) के सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। 
    पाकिस्तान के न्यूज पेपर डॉन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, थिंक टैंक लिरनेशिया द्वारा किए गए इस सर्वे में पाकिस्तान के 2,000 परिवारों को शामिल किया गया, जिससे पता चला कि 15-65 आयु वर्ग की आबादी में केवल 30 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्हें इंटरनेट के बारे में जानकारी है।
    लिरनेशिया का दावा है कि सैम्पलिंग पद्धति को 15 से 65 आयु वर्ग की 98 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया था। साल 2017 में अक्टूबर से दिसंबर के बीच किए गए इस सर्वे से यह जानने में मदद मिली कि कितने यूजर्स आईसीटी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं और कितने नहीं।
    रिपोर्ट में बताया गया है कि बेहतर सिम रजिस्ट्रेशन सिस्टम के बावजूद पाकिस्तान टेलिकम्यूनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) वेबसाइट पर 152 मिलियन ऐक्टिव सेल्युलर सब्सक्राइबर की जानकारी दी गई है। केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि कई दूसरे एशियाई देशों में भी इंटरनेट जागरूकता में कमी की बात सामने आई है। 
    रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेट का इस्तेमाल न करने के पीछे की मुख्य वजह है इसके बारे में जागरूकता का अभाव। पुरुषों के मुकाबले पाकिस्तानी महिलाएं इंटरनेट का 43 प्रतिशत कम इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, यह भारत में यह अंतर 57 प्रतिशत और बांग्लादेश में 62 प्रतिशत है।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • लंदन, 13 नवम्बर । भारत में लोग जांचने-परखने का कोई प्रयास किए बगैर ही 'राष्ट्र निर्माणÓ के उद्देश्यों से राष्ट्रवादी संदेश वाली फर्जी खबरें साझा करते हैं।
    बीबीसी ने सोमवार को जारी अपने एक अध्ययन में यह बात कही। उसने भारत, केन्या और नाईजीरिया में आम नागरिकों द्वारा फर्जी खबरें फैलाने के तौर तरीकों पर सघन अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला। इस अध्ययन के अनुसार ट्विटर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन वाले नेटवर्कों पर फर्जी खबर के स्रोत प्राय: एक ही होते हैं।
    आम नागरिकों के परिप्रेक्ष्य से फर्जी खबरों के प्रसार की इस विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में फर्जी खबरों और मोदी समर्थक राजनीतिक गतिविधि के बीच साम्यता है।
    बीबीसी ने अपने प्रथम प्रकाशित अध्ययन में कहा है कि जब इस बात का गहराई से परीक्षण किया गया कि कैसे फर्जी खबरें और गलत सूचनाएं इनक्रिप्टेड चैट ऐप के माध्यम से फैल रही है। तब यह सामने आया कि इस तरह की खबरें साझा करने में भावनाएं सिर चढ़कर बोल रही होती हैं।
    बीबीसी वल्र्ड सर्विस ग्रुप के निदेशक जेमी एंगूस ने कहा, मीडिया में ज्यादातर चर्चाएं पश्चिम में 'फर्जी खबरोंÓ पर केंद्रित होती हैं लेकिन इस शोध से इसका ठोस सबूत मिलता है कि दुनिया के बाकी हिस्से में भी ऐसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं और जब सोशल मीडिया पर खबरें साझा करने की बात आती हैं तो राष्ट्र निर्माण का विचार सच्चाई से आगे निकल जाता है।
    बीबीसी ने काफी सारे आंकड़ों के साथ व्यापक शोध किया और उसने पाया कि भारतीय ट्विटर नेटवर्क पर फर्जी खबरों के ज्ञात दक्षिणपंथी स्रोत वामपंथी स्रोतों की तुलना में आपस में अधिक जुड़े जान पड़ते हैं।
    बीबीसी ने कहा, इससे वामपंथी फर्जी खबरों की तुलना में दक्षिणपंथी फर्जी खबरें अधिक तेजी से और व्यापक तौर पर फैलती हैं। यह अध्ययन बीबीसी बियॉन्ड फेक न्यूज परियोजना का हिस्सा है। बीबीसी ने इस परियोजना के तहत गलत सूचना के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय पहल संबंधी कार्यक्रमों और परिचर्चा इसी हफ्ते शुरू की है।
    इस अध्ययन में खुलासा किया गया है कि भारत, केन्या और नाइजीरिया में लोग अनजाने में फर्जी खबरें फैलाते हैं और वे यह भी उम्मीद करते हैं कि कोई अन्य उनके लिए इस खबर की सच्चाई परखेगा। अध्ययन में कहा गया है, भारत में लोग ऐसे संदेश भेजने में अनिच्छुक होते हैं जिनसे उन्हें लगता है कि हिंसा भड़क सकती है लेकिन वे राष्ट्रवादी संदेशों को साझा करने को अपना कर्तव्य महसूस करते हैं।
    उसमें कहा गया है, भारत की प्रगति, हिंदू शक्ति, खोये हिंदू वैभव के बारे में फर्जी खबरें बिना जांचे-परखे साझा की जा रहा है। इन संदेशों को साझा करते समय लोग महसूस करते हैं कि वे राष्ट्र निर्माण कर रहे हैं। (भाषा/बीबीसी)

     

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • श्रीलंका, 13 नवम्बर। श्रीलंका की मुख्य राजनीतिक पार्टियों और चुनाव आयोग के एक सदस्य ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के संसद भंग करने के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी, तमिल नेशनल अलायंस और वामपंथी दल पीपुल्स लिब्रेशन फ्रंट ने शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग के एक सदस्य प्रोफेसर रत्नाजीवन हूले भी राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुंचे हैं।
    खबरों के मुताबिक याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से राष्ट्रपति के कदम को अवैध ठहराने की मांग की है। इनका कहना है कि संविधान के 19वें संशोधन के तहत राष्ट्रपति को साढ़े चार साल से पहले संसद को भंग करने का अधिकार नहीं है। जबकि, मौजूदा संसद अभी केवल तीन साल का कार्यकाल ही पूरा कर पाई है।
    श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने 26 अक्टूबर को प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था। लेकिन, बीते शुक्रवार को जब राजपक्षे की पार्टी ने बहुमत न जुटा पाने की बात कही तो राष्ट्रपति ने संसद को भंग कर पांच जनवरी को मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा कर दी। राष्ट्रपति का यह फैसला इसलिए विवादों में है क्योंकि अपदस्थ प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे लगातार कह रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त बहुमत है जिसे वे मौका मिलने पर संसद में साबित कर देंगे। लेकिन, राष्ट्रपति ने उन्हें मौका दिए बगैर संसद को भंग कर चुनाव कराने का ऐलान कर दिया।
    हालांकि, रविवार को राष्ट्रपति सिरीसेना ने संसद भंग करने के अपने विवादित फैसले का जमकर बचाव किया। उनका कहना था कि उन्होंने संसद में सांसदों के बीच झड़पों से बचने के लिए यह फैसला लिया है। उनके मुताबिक मीडिया में कुछ खबरें आईं थी कि 14 नवंबर को शक्ति परीक्षण के दौरान नेताओं के बीच झड़पें होंगी। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • कैलीफोर्निया, 13 नवम्बर। अमरीका में उत्तरी कैलीफोर्निया के जंगलों में लगी आग से मरने वालों की संख्या 42 तक पहुंच गई है। इसे इस राज्य के इतिहास में अब तक तक की सबसे भयावह आग लगने की घटना बताया जा रहा है।
    जिन जंगलों में आग लगी है उनके आसपास रहने वालों के घर-वाहन आदि खंडहर-कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। इन्हीं में कई लोगों ने बुरी तरह झुलस कर अपनी जान भी गंवाई है। राहत और बचाव दल के लोगों को इन्हीं खंडहरों और जल चुके वाहनों से कुछ और शव मिले हैं। अधिकारियों का मानना है कि ये अधिकांश वे लोग हैं जिन्हें आग से बचकर भागने का मौका तक नहीं मिला और वे जहां थे वहीं उसकी चपेट में आ गए। खबरों की मानें तो अभी शवों की तलाश का काम जारी है। मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। आग की वजह से लगभग 27,000 की आबादी वाला पूरा नजदीकी कस्बा खाक हो चुका है। शवों की पहचान के लिए अधिकारियों को डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ रहा है।  (पीटीआई)

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Posted Date : 13-Nov-2018
  • वाशिंगटन, 13 नवम्बर। अमरीका की 86 जेलों में इस वक्त 2,382 भारतीय कैद हैं। इन सभी पर अवैध रूप से अमरीकी सीमा में घुसने का आरोप है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से बड़ी संख्या पंजाब से आने वाले लोगों की है।
    उत्तर अमरीकी पंजाबी एसोसिएशन (एनएपीए) ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी के हवाले से यह खुलासा किया है। इसके मुताबिक 10 अक्टूबर तक कैलिफॉर्निया के एडेलांटो इमिग्रेशन एंड कस्टम्स सेंटर में 377 भारतीय नागरिक हिरासत में हैं। जबकि 269 इंपीरियल रीजनल एडल्ट डिटेंशन फैसिलिटी में और 245 फेडरल करेक्शनल इंस्टिट्यूशन विक्टरविले में रखे गए में हैं।
    एनएपीए के अध्यक्ष सतनाम एस चहल का कहना है, अमरीकी जेलों के ज्यादातर बंदी ये दावा करते हुए शरण मांग रहे हैं कि उन्हें अपने देश में हिंसा या उत्पीडऩ का सामना करना पड़ता है। यह गंभीर चिंता का विषय है। चहल लंबे समय से मानव तस्करी के खिलाफ संघर्ष कर कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पंजाब के अधिकारियों और मानव तस्करों के बीच साठ-गांठ है। ये सब मिलकर पंजाबी युवाओं को जान-बूझकर अपना घर छोड़कर विदेश में बस जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसके एवज में 35-40 लाख रुपए तक वसूल लेते हैं।  (सत्याग्रह)

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