‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 31 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष के मौके पर समाज को संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कुरुद में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधगण, नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए सनातन प्रेमी शामिल हुए।
मंगलवार को खेल मेला मैदान कुरुद में सर्व हिन्दू समाज कुरुद मंडल के बैनर तले आयोजित हिंदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध भगवाताचार्य पं. युवराज पांडे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संगठन, एकता और राष्ट्रभक्ति का जो दीप जलाया है, उसकी लौ तब तक तेज नहीं होगी, जब तक हर परिवार अपने हिस्से का कर्तव्य न निभाए। सम्मेलन को पंच परिवर्तन गीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और रामकथा ने आध्यात्मिक व प्रेरणादायी बना दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि घर-घर के संस्कारों से होती है। उन्होंने माता-पिता से आह्वान किया कि बच्चों के हाथ में केवल मोबाइल और टीवी रिमोट न दें, बल्कि रामायण, महाभारत और भारतीय महापुरुषों के चरित्र भी दें।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि आज के बच्चे मोटू-पतलू और कार्टून के संवाद तो तुरंत बता देते हैं, लेकिन अगर उनसे अपने महापुरुषों के नाम पूछे जाएं तो वे असहज हो जाते हैं, यह स्थिति चिंतन और परिवर्तन की मांग करती है।
श्री पाण्डे ने मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि मां ठान ले तो वही बालक आगे चलकर राम, कृष्ण, शिवाजी और विवेकानंद बनता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कार हीनता समाज को कमजोर करती है, जबकि अनुशासनयुक्त स्वतंत्रता राष्ट्र को मजबूत बनाती है।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्फुते ने संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में राष्ट्ररक्षा, धर्मरक्षा और हिंदुत्व की वैचारिक यात्रा को रेखांकित किया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी विचारों का स्मरण करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि जिनके दिन का चिंतन और रात का स्वप्न भारत माता हो, वही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति बनते हैं. उन्होंने मार्गरेट नोबल के उदाहरण से भारतीय विचारधारा की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित किया।
पंच परिवर्तन विषय पर वक्तव्य देते हुए खिलेश्वरी किरण ने कहा कि वर्तमान वैश्विक व राष्ट्रीय परिस्थितियों में सनातन व हिंदू समाज पर हो रहे प्रहारों के बीच सोच, समझ और कार्य-पद्धति में सकारात्मक परिवर्तन को अनिवार्य बताया। उन्होंने संगठन की शक्ति, मानसिक गुलामी त्यागने तथा संस्कारवान पीढ़ी निर्माण पर बल दिया। उन्होंने गायत्री एवं संघ परिवार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि गर्भ से संस्कार, अच्छे साहित्य का अध्ययन, सत्संग, बड़ों का सम्मान और समरसता ही समाज की नींव है।
श्रीमती किरण ने संयुक्त परिवारों के विघटन और मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वावलंबी व मूल्य-आधारित जीवन अपनाने का आह्वान किया। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के छायाचित्र पर माल्यार्पण व पूजा-अर्चना के साथ किया गया।
इस अवसर पर विधायक अजय चंद्राकर, कोआपरेटिव बैंक के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, नपा अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, जिपं उपाध्यक्ष गौकरण साहू, जनपद सभापति सिंधु बैंस, विधायक प्रतिनिधि भानू चंद्राकर, कार्यक्रम संयोजक दक्षनेंद्र गिरी गोस्वामी, सहसंयोजक हरिशंकर सोनवानी, कोषाध्यक्ष नेमीचन्द बैस, धनेश्वर निर्मलकर, दुर्गेश साहू, हरिओम शर्मा, ठाकुरराम, मोहन साहू, निर्मला निर्मलकर, एलपी. गोस्वामी, कृष्णकांत साहू, मालकराम, रघुनंदन साहू, कृपाराम यादव, हरिराम निषाद, जितेंद्र चंद्राकर, शशांक कृदत, धर्मेन्द्र साहू, मूलचंद सिन्हा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति, युवा और बच्चे उपस्थित थे।