राजनीति

बंगाल चुनावी संग्राम- चार : कुल्टी में स्थानीय मुद्दों को भूल, हाई कमान के नाम पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी
05-Apr-2021 9:00 PM 87
बंगाल चुनावी संग्राम- चार : कुल्टी में स्थानीय मुद्दों को भूल, हाई कमान के नाम पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी

तृणमूल प्रार्थी उज्जवल चटर्जी का चुनावी जुलूस

तृणमूल कांग्रेस मुख्यमंत्री ममता, भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मांग रही वोट
प्रार्थी सह विधायक की सरल छवि को भुनाने में जुटी तृणमूल, कांग्रेस कर रही तीसरे विकल्प का दावा 
पिछली बार की तरह इस बार भी तृणमूल के उज्जवल चटर्जी और भाजपा के डॉ अजय कुमार पोद्दार में सीधा मुकाबला

बिकास के शर्मा

आसनसोल, 5 अप्रैल (‘छत्तीसगढ़’) । पश्चिम बर्धमान जिले की अहम सीट कुल्टी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डॉ अजय कुमार पोद्दार जहाँ एक ओर कुल्टी क्षेत्र में प्रचार के दौरान लोगों को विधायक उज्जवल चटर्जी को एक निष्क्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में बताकर अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं, तो वहीँ तृणमूल प्रार्थी श्री चटर्जी पिछले 10 दिनों में इलाके में घूमते हुए पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तीसरी बार जिताने के लिए वोट मांगते नजर आ रहे हैं। कुल्टी में चाहे सत्ताशीन तृणमूल हो अथवा मुख्य विपक्षी होने को दावा ठोकने वाली भाजपा, दोनों ही दलों ने स्थानीय मुद्दों को भूलकर अपने-अपने दलों के शीर्ष नेताओं के नाम पर चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया। झारखंड के धनबाद जिले की सीमा लगा कुल्टी इलाका मूल रूप से एक समय एशिया के प्रसिद्ध ईस्को कारखाना और कोलियरियों के लिए पूरे पश्चिम बंगाल में जाना जाता था। साथ ही वहां के बराकर नगर की गल्ला मंडी की भी तीन दशक पूर्व एक विशेष ख्याति थी, जो नियामतपुर के विकसित होने एवं कल्याणेश्वरी रोड स्थित रेल ब्रिज पर बड़े वाहनों की आवाजाही बंद कर दिए जाने से प्रभावित हुई है। चुनाव को लेकर फ़िलहाल कुल्टी क्षेत्र के मतदाताओं में शांति है। कुछ लोग बदलाव की बात पर मौन स्वीकृति देते हुए आपको लोग मिल जायेंगे, तो स्थानीय विधायक के समर्थकों की एक लंबी फेहरिस्त भी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव में कारगर साबित हो सकती है। भाजपा प्रत्याशी डॉ पोद्दार ने कहा- 'तीन बार से उज्जवल चटर्जी विधायक हैं और पंद्रह वर्ष तक कुल्टी नगरपालिका के अध्यक्ष भी रहे किंतु क्या इलाके में कोई नए उद्योगों या रोजगारों का सृजन करने में उन्होंने कोई प्रयास भी किये हैं? कुल्टी में बदलाव निश्चित होगा और भाजपा को एक लाख मत प्राप्त होंगे।'

इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है, हालांकि गठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी भी अपने जीत को लेकर दावा करते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस प्रार्थी चंडी चटर्जी ने कहा कि साल 2016 में गठबंधन उम्मीदवार ने 43 हजार वोट लाये थे, जिसका सीधा अर्थ है कि हमें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।  श्री चटर्जी की मानें तो जनता तृणमूल कांग्रेस और भाजपा से तंग आ चुकी है क्यों कि दोनों ही दलों ने लोगों के अंदर आपसी भेदभाव को पैदा किया है और सांप्रदायिक राजनीति को आधार बनाकर चुनाव की वैतरणी पार लगाना चाहते हैं, ऐसे में संयुक्त मोर्चा एक ठोस विकल्प जनता के सामने है।
  
कुल्टी सीट तृणमूल कांग्रेस के लिए इस लिए भी अहम मानी जा रही है कि वर्ष 2006 में वाममोर्चा को मिले भारी बहुमत के दौरान भी तत्कालीन फॉरवर्ड ब्लॉक विधायक मानिकलाल आचार्या को टीएमसी प्रत्याशी सह निवर्तमान विधायक श्री चटर्जी ने 17 हजार मतों से पराजित किया था। उसके बाद से आज तक टीएमसी ही लगातर तीन बार चुनाव जीत चुकी है। कुल्टी सीट पर आगामी 26 अप्रैल को मतदान होगा और किसी भी दल के प्रत्याशी ने अभी तक नामांकन पर्चा नहीं भरा है।  

जनसंपर्क अभियान के दौरान अपने समर्थकों संग भाजपा प्रार्थी 

लोकसभा चुनावों की बढ़त से भाजपा के हौसले बुलंद
विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने आसनसोल सीट से गायक बाबुल सुप्रियो को टिकट दिया था।  उस वक्त कुल्टी विधानसभा इलाका उनके लिए काफी माकूल रहा और उन्होंने 42 हजार मतों से बढ़त हासिल की थी। एक तृणमूल नेता ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया कि तब तृणमूल विधायक श्री चटर्जी के लिए पार्टी आलाकमान को जवाब देना मुश्किल हो गया था कि आखिर क्यों भाजपा को वहां से बढ़त मिली। श्री चटर्जी ने पार्टी के कुछ पार्षदों पर अपना रोष भी व्यक्त किया था। वर्ष 2019 में मोदी लहर लोगों के और सर चढ़कर बोला और कुल्टी से भाजपा ने 72 हजार मतों से विधानसभा इलाके से बढ़त हासिल की थी। इसके बाद कुल्टी में तृणमूल कांग्रेस ने ब्लॉक अध्यक्ष महेश्वर मुखर्जी को पद से हटाकर पूर्व नपाध्यक्ष विमान आचार्या को आसीन किया था। भाजपा संयोजक राजेश सिन्हा ने बताया कि उनकी पार्टी इलाके में केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ जनता को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने घर-घर पहुंचाया। जिसकी बदौलत आज संगठन काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। श्री सिंहा ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार पार्टी की स्थिति ज्यादा मजबूत है और सदस्यता भी तीन गुना बढ़ी है।
 
हिंदी भाषियों को आकर्षित कर रहे सभी दल
इस बार के चुनाव में भाजपा ज्यादा सक्रियता के साथ प्रचार करती हुई दिखाई दे रही है, तो वहीं तृणमूल नेताओं की मानें तो उन्हें जीत को लेकर कोई शंका नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा द्वारा हिंदी भाषी प्रत्याशी दिए जाने के कारण तृणमूल के लिए बंगाली वोटर्स के बीच में कम और हिंदी भाषी मतदाताओं के बीच ज्यादा काम किया जा रहा है। साथ ही तृणमूल ने हिंदी भाषी संग दीदी कार्यक्रम के तहत पिछले डेढ़ माह में कुल्टी क्षेत्र में आधा दर्जन कार्यक्रमों के माध्यम से एक दशक में राज्य सरकार द्वारा हिंदी भाषियों के लिए किये गए की कार्यों को जनता से साझा किया है। भाजपा नेता विभाष सिंह ने बताया कि चुनाव के पूर्व और भाजपा के बढ़ते जनाधार से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस को हिंदी भाषियों की याद आई है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस हिंदी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि भाजपा अपनी बहिरागत सोच से कभी उबर नहीं पायेगी। उनकी मानें तो कुल्टी ही नहीं अपितु पूरे राज्य में डेढ़ सौ वर्षों से भी अधिक समय से हिंदी भाषी रह रहे हैं। उनके हितों की रक्षा किसी पूर्वर्ती सरकार नहीं बल्कि केवल तृणमूल कांग्रेस ने ही की है। श्री यादव ने कहा कि भाजपा यहाँ के हिंदी भाषियों को बाहरी मानती है, जबकि तृणमूल भाजपा की सोच को बहिरागत मानती है। उन्होंने दावा किया कि कुल्टी के हिंदी भाषी मतदाता तृणमूल प्रार्थी के साथ पिछले चुनाव में भी थे और इस बार भी हैं।

सभी प्रत्याशियों का डोर-टू-डोर प्रारंभ
चुनाव की तिथि के नजदीक आते ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति के तहत तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा प्रार्थी ने अपने प्रचार की शुरुआत कल्याणेश्वरी मंदिर में पूजा कर की थी तो तृणमूल प्रत्याशी श्री चटर्जी भी बिना किसी तामझाम के अपने समर्थकों संग क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। दीवार लेखन और सोशल मीडिया पर प्रचार एक साथ ही दोनों प्रत्याशियों द्वारा किया जा रहा है। कांग्रेस प्रार्थी को वाममोर्चा का समर्थन होने की वजह से कुछ स्थानों पर उनका भी दीवार लेखन दिखाई दे रहा है। लेकिन उनके जनसंपर्क अभियान में अभी थोड़ी शिथिलता है। भाजपा प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए परिवर्तन और अबकी बार 2 सौ पार के नारों के माध्यम से जनता को लुभा रही है तो स्थानीय तृणमूल कांग्रेस कर्मी सीएम एवं निवर्तमान विधायक की साफ़ छवि को हथियार बनाकर प्रचार में जुटी है।

2016 में 19488 से हुई थी तृणमूल की जीत
पिछले विधानसभा चुनाव में निवर्तमान विधायक श्री चटर्जी ने चुनाव जीता था। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी डॉ पोद्दार को 19,488 वोटों से हराया था। तृणमूल कांग्रेस को जहाँ 68,952 मत प्राप्त हुए थे वहीँ भाजपा को 49,464 वोट मिले थे। गठबंधन की ओर से कांग्रेस ने अभिजीत आचार्या (बाप्पा) को टिकट दिया था और वे 42,895 वोट लाकर तीसरी स्थान पर रहे थे। वर्तमान में श्री आचार्या भाजपा के सदस्य हैं, जिनकी बदौलत भाजपा प्रार्थी कुल्टी के दक्षिण-पश्चिम इलाके में खुद को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। हालांकि श्री आचार्या बहुत खुलकर पार्टी के लिए प्रचार करते हुए पूरे कुल्टी इलाके में नजर नहीं आ रहे हैं।
(मूलतः पश्चिम बंगाल के निवासी लेखन युवा पत्रकार हैं और आईसीएफजे, यूएसए, के फेलो रहे हैं)

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