राजनीति

Posted Date : 15-Dec-2017
  • मुंबई, 15 दिसंबर । महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन संकट में नजर आ रहा है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने इस बात के साफ संकेत दे दिए हैं कि 2019 का चुनाव शिवसेना अकेले ही लड़ेगी। शिवसेना ने कहा कि वह एक साल के भीतर भाजपा नीत महाराष्ट्र सरकार छोड़ देगी।
    शिवसेना की सरकार से अलग होने की यह एक नवीनतम चेतावनी और इस बात का संकेत है कि पार्टी 2019 का चुनाव अकेले लड़ेगी। भाजपा के साथ तल्ख रिश्ते साझा कर रही शिवसेना इससे पहले भी राजग सरकार से बाहर होने की कई बार धमकी दे चुकी है।
    मुंबई से 240 किलोमीटर दूर अहमदनगर जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना की युवा इकाई युवा सेना के प्रमुख आदित्य ठाकरे ने कहा कि गठबंधन से हटने के बाद शिवसेना अपने बल पर सत्ता में वापस आएगी।
    उन्होंने कहा, शिवसेना एक वर्ष में सरकार छोड़ देगी और अपने बल पर सत्ता में वापस आएगी। पार्टी सरकार कब छोड़ेगी इसका निर्णय शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे करेंगे। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2019 में होगा। (भाषा)

     

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Posted Date : 15-Dec-2017
  • बीजिंग, 15 दिसंबर । गुजरात चुनाव को लेकर आए सभी एक्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में एक बार फिर वापसी दर्शा रहे हैं। लेकिन सभी को इंतजार है 18 दिसंबर को आने वाले नतीजों का। गुजरात के नतीजों का सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में हो रहा है। पड़ोसी चीन भी गुजरात के चुनावी नतीजों पर अपने नजरें गढ़ाए बैठा है। चीनी कंपनियां चाहती हैं कि गुजरात में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही जीत हो। जिसका कारण है कि अगर बीजेपी जीतती है तो मोदी की रिफॉर्म की प्रक्रिया जारी रहेगी।
    गुजरात चुनाव ब्रांड मोदी के लिए एक लिटमेस टेस्ट की तरह है। जो यह तय करेगा की आने वाले दो साल सरकार का एजेंडा क्या रहेगा। उसके बाद 2019 का लोकसभा चुनाव भी है, क्या मोदी लहर कायम रह पाएगी।
    चीनी अखबार ग्लोबल टाईम्स में कहा गया है कि अगर गुजरात में मोदी को बड़ी जीत मिलती है तो उनका आर्थिक रिफॉर्म का सिलसिला जारी रह सकता है, जिसका इंतजार ही चीनी कंपनियां कर रही हैं। चीन की ओर से पिछले काफी समय से भारत में निवेश की मात्रा बढ़ी है। कई चीनी कंपनियों को यह विश्वास है कि भारत के नए और बड़े बाजार के रूप में तैयार हो रहा है। इसके लिए मोदी सरकार को आर्थिक फैसले ले रही है, वह चीनी कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
    चीन की कुछ कंपनियों को डर है कि अगर गुजरात में मोदी की हार होती है तो केंद्र में जो उनके द्वारा कठिन आर्थिक फैसले लिए जा रहे हैं उनपर ब्रेक लग जाएगा। चूंकि, गुजरात के बाद कई अन्य राज्यों में चुनाव होने हैं। चुनावी नतीजों के बाद अन्य राज्य में भी बीजेपी को झटका लग सकता है जो भारी पड़ेगा।
    अखबार के अनुसार, मोदी ने जो अभी तक फैसले लिए हैं, उनपर अर्थशास्त्रियों और विपक्ष ने उनपर हमला बोला है। लेकिन मोदी के गुजरात मॉडल का सही आकलन गुजरात के लोग ही कर सकते हैं। गुजरात का नतीजा कुछ भी हो इसका असर मोदी की छवि और उनके काम कर ने की नीति पर जरूर पढ़ेगा। अखबार ने कहा है कि चीन को गुजरात में बीजेपी की परफॉर्मेंस पर नजर रखनी चाहिए। अखबार में लिखा है कि भारत में चीनी कंपनियों को गुजरात के नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए। चूंकि नतीजे ही आने वाले समय के आर्थिक फैसलों का रास्ता तय करेंगे।
    गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव के नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे। अभी एग्जिट पोल आए हैं, अधिकतर एजेंसियों के एग्जिट पोल में बीजेपी को पूर्ण बहुमत दिखाया गया है। (आज तक)

     

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • पटना, 14 दिसंबर । यूं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों की अपने गृह जिला पर विशेष कृपा होती है। लेकिन बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णा नंदन वर्मा इस मामले में अपवाद नजर आते हैं। राज्य के शिक्षा विभाग के विभिन्न मानकों पर एक नयी रेटिंग व्यवस्था में मंत्री कृष्णा नंदन वर्मा का गृह जिला जहानाबाद सबसे नीचे आया है। दरअसल,बिहार के शिक्षा विभाग के इस सर्वे में बेगूसराय और पश्चिम चंपारण जिला सबसे अव्वल नम्बर पर है। वहीं, राजधानी पटना 16वें स्थान पर है। ये ग्रेडिंग सिस्टम पहली बार राज्य के विद्यालयों और जिला में शिक्षा की व्यवस्था से संबंधित है।
    इस ग्रेडिंग सिस्टम में जिन सात बिंदुओं को नम्बर का पैमाना बनाया गया है, उसमें संबंधित जिले से मैट्रिक की परीक्षा में पास विद्यार्थियों की संख्या, स्कूल में नामांकन के बदले छात्रों की असल उपस्थिति, आधार प्राप्त छात्रों की संख्या, नशा मुक्ति और बाल विवाह के लिए अभियान प्रमुख है। सभी पैमाने के साथ एक निश्चित नम्बर निर्धारित किया गया है।
    इस संबंध में  राज्य सरकार का कहना है कि इस ग्रेडिंग सिस्टम के पीछे असल मकसद जिलों के बीच एक प्रतिस्पर्धा हो और सभी में अपनी स्थिति सुधारने की होड़ लगे, यह एक मुख्य मकसद है। निश्चित रूप से शिक्षा मंत्री के लिए शुरुआती वर्ष का ग्रेडिंग खराब रहा, लेकिन सबकी निगाहें अगले साल के सर्वे पर होगी कि क्या शिक्षा मंत्री अपने गृह जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधार पाते हैं। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • गांधीनगर, 14 दिसंबर। गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम दौर के लिए गुरुवार को सुबह 8 बजे से वोटिंग जारी हो गई है। पीएम मोदी ने राणिप में वोट डालने के लिए पहुंचे और यहां वह लाइन में लगे। वोट डालने के बाद पीएम मोदी ने घरों के बाहर और सड़कों पर खड़े लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस दौरान वह काफी दूर तक पैदल चलकर भी गए। 
    इससेे पहले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने वीरमगाम में अपना वोट डाला। वोट डालने के बाद हार्दिक पटेल ने कहा कि काफी अच्छे परिणाम आएंगे क्योंकि गुजरात की छह करोड़ लोगों ने अपने भविष्य की फिक्र कर रहे हैं। अभी से सचिवालय के अंदर सीक्रेट फाइल गायब होनी शुरू हो गई हैं। आधे लोग तो कर्नाटक के चुनाव में लग गए हैं इसका मतलब है कि वो हार मान चुके हैं। वहीं डिप्टी सीएम नितिन पटेल और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने भी वोट डाला। 
    ठंड बढऩे की वजह से शुरुआती कुछ घंटों में कम ही मतदाता मतदान के लिए घरों से निकले। मतदान के शुरुआती दो घंटों में सिर्फ 10 फीसदी मतदान ही हुआ। वडोदरा और आसपास के शहरों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में गड़बड़ी को लेकर निर्वाचन आयोग से कई शिकायतें की गईं। 
    मोदी की मां हीरा बेन ने गांधी नगर के पोलिंग बूथ में वोट डाला। वहीं हार्दिक पटेल की माता-पिता ने वीरमग्राम में वोट डाला। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लाइन में लगकर वोट डाला।   
    शंकर सिंह वाघेला ने गांधी नगर के वासन में वोट डाला। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नारनपुरा से विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाला। कड़ी सुरक्षा के बीच अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा समेत 14 जिलों 

    की 93 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस दौर में कुल 851 उम्मीदवार मैदान में हैं। पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, लाल कृष्ण अडवानी समेत 2.22 करोड़ वोटर गुरुवार को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
    आज दूसरे दौर का मतदान संपन्न होने के बाद मतगणना 18 दिसंबर को होगी। पहले चरण में 89 सीटों के लिए हुई वोटिंग में 66.75 फीसदी मतदान हुए। साल 2012 में भाजपा ने 115 सीट जीती थीं। कांग्रेस को 61 सीटों पर जीत मिली थीं। अब देखना दिलचस्प होगा कि 18 दिसंबर को गुजरात की जनता क्या जनादेश देती है और वो 22 साल के बीजेपी के शासन पर ही भरोसा जताती है या फिर कांग्रेस को एक विकल्प और उम्मीद के तौर पर एक मौका देना चाहती है।   (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 14 दिसंबर। चुनाव आयोग ने कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी का इंटरव्यू दिखाने पर रोक लगा दी है। बुधवार देर शाम जारी अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा है कि इंटरव्यू दिखाने को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
    चुनाव आयोग ने इंटरव्यू दिखाने वाले चैनलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया है। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को 18 दिसंबर, शाम पांच बजे तक इस बात का जवाब देने को कहा है कि चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में उनके खिलाफ क्यों न उचित कार्रवाई की जाए।
    आयोग ने आगे कहा है कि अगर राहुल गांधी निर्धारित समय तक अपना जवाब नहीं देते हैं तो चुनाव आयोग इस मामले में उचित फैसला लेगा।
    बीजेपी की तरफ से रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी का इंटरव्यू दिखाने की शिकायत चुनाव आयोग में की थी। पीयूष गोयल ने कहा, जहां तक हमें आचार सहिंता की समझ है चुनाव के 48 घंटे के भीतर इंटरव्यू नहीं दे सकते। चुनाव आयोग से भी हमें यही जानकारी मिली है कि कल (मंगलवार) शाम से इंटरव्यू देने की इजाजत नहीं थी।
    कांग्रेस के लोग शायद घबराए हुए हैं, उन्हें लग रहा है कि मामला बिगड़ रहा है। उन्हें डर लग रहा है कि बीजेपी 150 से ज्यादा सीट जीत जाएगी, इसी के कारण वे आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं।
    (बाकी पेजï 5 पर)
    चुनाव आयोग ने अपने आदेश में लिखा है, गुजरात चुनाव में दूसरे दौर के मतदान से पहले कुछ टीवी चैनलों पर कांग्रेस के स्टार प्रचारक और नेता राहुल गांधी का इंटरव्यू दिखाया जा रहा है।
    इस इंटरव्यू में राहुल गांधी गुजरात विधानसभा चुनाव की बातें कर रहे हैं, इस इंटरव्यू का प्रसारण उन जगहों पर भी हो रहा हैं जहां गुरुवार को दूसरे दौर का मतदान होना है, इसलिए इसे प्रसारित करना आचार संहिता का उल्लंघन है और यह जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 126(3) के तहत आता है।
    चुनाव आयोग ने आगे लिखा है, यदि कोई भी चैनल जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 126(3) का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
    बीजेपी के आरोप के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा, अगर भाजपा चुनाव आयोग का आदर करती तो 2014 के वोट पडऩे के ठीक एक दिन पहले मोदीजी ने अपने एक भक्त चैनल को इंटरव्यू देकर, उसका प्रचार-प्रसार क्यों करवाया?
    सुरजेवाला ने ट्वीट भी किया है जिसमें उन्होंने लिखा, चुनाव आयोग के नए नियम- 
    1. बीजेपी नेता और वित्त मंत्री चुनाव से एक दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और अपना घोषणापत्र जारी करते हैं, लेकिन कोई एफआईआर नहीं।
    2. मोदीजी चुनाव वाले दिन चार जनसभाएं करते हैं, लेकिन कोई एफआईआर नहीं। 
    3. अमित शाह आज ही के दिन अहमदाबाद में प्रेस कांफ्रेंस करते हैं, लेकिन कोई एफआईआर नहीं।
    4. पीयूष गोयलजी आज दो बार प्रेस कांफ्रेंस करते हैं, लेकिन कोई एफआईआर नहीं।
    राहुल जी का इंटरव्यू हुआ तो एफआईआर हो जाएगी।  (बीबीसी)

     

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 14 दिसंबर। गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। इन चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने कमर कसी हुई है। कांग्रेस और अन्य पार्टियां 22 साल से राज्य की सत्ता पर काबिज बीजेपी को हटाने की हर मुमकिन कोशिश में लगी हुई हैं। 
    बीजेपी इन चुनावों में 150 से ज्यादा सीट जीतने का दावा कर रही हैं लेकिन राज्य की जनता फिर से बीजेपी को सत्ता में लाती है या नहीं, यह तो 18 दिसंबर को तय होगा जब चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। वहीं इसी बीच राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने इन चुनावों के नतीजों को लेकर भविष्यवाणी कर दी है।
    (बाकी पेजï 5 पर)
    योगेंद्र यादव ने जो तीन मुमकिन परिणाम अपने हिसाब से बताएं हैं, अगर उनकी बात की जाए तो तीनों ही नतीजों में बीजेपी को राज्य में हार मिल रही है। योगेंद्र यादव द्वारा बीजेपी की हार की भविष्यवाणी के बाद ट्विटर यूजर्स उनकी काफी आलोचना कर रहे हैं। योगेंद्र के ट्वीट पर कई लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। एक ने लिखा महोदय यदि आपका पहले वाला ये धंधा सफलतापूर्वक चल रहा होता तो शायद आप अपना करिअर बीच में छोडऩे पर मजबूर नहीं होते। एक ने लिखा सर कृपया करके इस ट्वीट को अपनी टाइमलाइन पर शेयर कीजिए ताकि हम इसकी शुद्धता/ट्रेंड को नतीजे वाले दिन वेरिफाई कर सकें।
    एक ने लिखा गुजरात चुनावों में 110 सीटों से ज्यादा पर बीजेपी जीतेगी सर, हमारे जैसे लोगों ने बीजेपी को वोट दिया है, हम चाहते हैं कि फिर से बीजेपी सत्ता में आए और हमारे गुजरात को महान बनाए। एक ने लिखा अगर बीजेपी हारती है तो कुछ ही वर्षों में गुजरात बेकार राज्य बन जाएगा और तब कांग्रेस फिर से बीजेपी पर आरोप लगाएगी। एक ने लिखा इस ट्वीट को संभालकर रख रहे हैं, देखो और इंतजार करो। वोटर्स के प्री पोल विश्लेषण में आपका पुराना फेल रिकॉर्ड रहा है। इसका उदाहरण आम आदमी पार्टी है जिसके लिए आपने 100 सीट जीतने का दावा किया था।  (जनसत्ता)

     

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 14 दिसंबर। भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा ने गुजरात में दूसरे और अंतिम चरण के चुनाव से ठीक एक पहले पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर जमकर निशाना साधा है। पटना साहिब से भाजपा सांसद सिन्हा ने कहा कि अगर सारे ट्रिक, नखरे, गलतबयानी और लंबे वादे खत्म हो गए हों, तो वन मैन शो और टू मैन आर्मी गुजरात से दिल्ली लौट आए। शत्रुघ्न का इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तरफ था।
    शत्रुघ्न ने ट्वीट किया, हमारे वन मैन शो और टू मैन आर्मी (मोदी व शाह) से विनम्र निवेदन। अगर हमारे सभी ट्रिक, नखरे, गलतबयानी और लंबे वादे खत्म हो चुके हैं तो कृपया दिल्ली घर लौट आइए। उन मंत्रियों, मंत्रालयों, गुजरात में बैठी सरकार को भी वापस लौट आना चाहिए, जो क्रेडिट लेने के लिए आपस में लड़ रहे हैं।
    भाजपा नेता ने कहा, अगर हम जीत जाते हैं, तो हमें पता है कि आपको पूरा श्रेय मिलेगा, लेकिन अगर हम हार जाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? एक पुरानी कहावत है, ताली कप्तान को तो, गाली भी कप्तान को। उम्मीद और प्रार्थना करता हूं कि गुजरात चुनाव में हमें केवल ताली मिले। जय हिंद। 

    पार्टी से दरकिनार किए गए सिन्हा सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते रहते हैं।
    मोदी व शाह गुजरात विधानसभा चुनाव अभियान के लिए गुजरात में डटे हुए हैं, जहां पार्टी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा है। राज्य में दूसरे व अंतिम चरण के मतदान के लिए प्रचार अभियान मंगलवार शाम समाप्त हो गया। यहां गुरुवार को 93 सीटों पर मतदान होंगे। मतों की गिनती 18 दिसंबर को होगी। भाजपा वर्ष 1995 से यहां सत्ता में है।   (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 14-Dec-2017
  • ऐसा लगता है कि पाक विरोधी नारेबाजी से भारत  में शायद अब भी वोट पाए जा सकते हैं-कसूरी 

    लाहौर, 14 दिसंबर। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें भारतीय राजनीति में बिना वजह घसीटे जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि नई दिल्ली में एक निजी डिनर में किसी ने गुजरात शब्द तक नहीं बोला। नई दिल्ली में कांग्रेस के निलंबित नेता मणिशंकर अय्यर की मेजबानी में पिछले सप्ताह रात्रिभोज में शामिल कसूरी का नाम विवाद में आया है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तान गुजरात चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। गुजरात के पालनपुर में इस सप्ताह एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने दावा किया कि कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों और मनमोहन सिंह ने 6 दिसंबर को रात्रिभोज पर अय्यर के घर पर मुलाकात की थी। कसूरी ने भारतीय राजनीति में बिना वजह घसीटे जाने पर नाराजगी जताई।
    कसूरी ने कहा, मैं आपको बताता हूं कि भारत या पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। यहां तक कि चर्चा के दौरान किसी भी व्यक्ति ने गुजरात शब्द तक नहीं बोला। उन्होंने कहा, मैं हैरान और दुखी हूं कि मेरा नाम भारत की अंदरूनी राजनीति में घसीटा जा रहा है। आरोपों की प्रकृति को लेकर ऐसा लगता है कि पाकिस्तान विरोधी नारेबाजी से भारत में शायद अब भी वोट हासिल किए जा सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि पीएम मोदी ने गुजरात चुनावों में पाकिस्तान की दखलअंदाजी का आरोप क्यों लगाया, कसूरी ने कहा, ...यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि भारत एक परिपक्व लोकतंत्र है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में हमारे चुनावी अभियानों के दौरान, भारत का कभी जिक्र नहीं होता। रात्रिभोज में शामिल होने वाले मेहमानों के बारे में बताते हुए कसूरी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व मंत्री नटवर सिंह, नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सोहेल महसूद, इस्लामाबाद में भारत के कुछ पूर्व उच्चायुक्त, रक्षा विशेषज्ञ और चर्चित पत्रकार भी मौजूद थे।
    उन्होंने कहा, सोहेल महमूद को इसलिए आमंत्रित किया गया क्योंकि रात्रिभोज पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री के लिए आयोजित किया गया था। कसूरी ने बैठक में किसी पूर्व पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी की मौजूदगी के बारे में जानकारी होने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि उनके मोदी की पार्टी भाजपा के नेताओं से भी संबंध हैं और उन्होंने लालकृष्ण अडवानी की पाकिस्तान यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
    कसूरी ने कहा, मेरे निमंत्रण पर अडवानी पाकिस्तान में कटासराज मंदिर गए थे। मीडिया में यह बात कहा जाना कि मेरे केवल कांग्रेसी नेताओं से संबंध हैं। यह गलत है। उन्होंने अय्यर को कैंब्रिज के दिनों का पुराना दोस्त बताया और कहा कि रात्रिभोज में गणमान्य लोगों की उपस्थिति का कारण शांति प्रक्रिया में उनका शामिल होना है।  (भाषा)

     

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • आगरा, 13 दिसंबर । समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोला है। आगरा में उन्होंने एक जनसभा में साफ तौर पर कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि अब मेरे आंदोलन से कोई अरविंद केजरीवाल नहीं निकलेगा।
    अन्ना हजारे ने इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी हमला बोला है। उन्होंने कहा है, हम पूंजीपतियों की सरकार नहीं चाहते। न कोई मोदी न राहुल। हमें ऐसी सरकार चाहिए जो गरीबों के लिए, किसानों के लिए काम करे। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि आजादी के 70 साल बाद भी देश में अब तक सही मायने में लोकतंत्र नहीं आ पाया है।
    अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में साथ-साथ थे। लेकिन इसके एक साल बाद केजरीवाल ने अन्ना से अलग होकर आम आदमी पार्टी (आप) बना ली और राजनीति में उतर गए। इसके बाद कई मौकों पर अन्ना खुले तौर पर केजरीवाल की आलोचना कर चुके हैं।
    बहरहाल अन्ना अब फिर एक आंदोलन खड़ा करने के संकेत दे रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि अगले साल 23 मार्च को दिल्ली में बड़ी रैली करेेंगे। उन्होंने देशभर के किसानों से अपील की है कि वे बड़ी तादाद में इस आंदोलन में भाग लें। इसी के मद्देनजर केजरीवाल को लेकर दिया गया उनका बयान भी अहम हो जाता है। (पीटीआई)

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 13 दिसंबर। गुजरात चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच जारी राजनीतिक वाद-विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों नेता पहली बार बुधवार को संसद भवन परिसर में मिले। 
    ये मौका था संसद पर आतंकी हमले की 16वीं बरसी का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीदों को नमन करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ गर्मजोशी के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान पहले पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह को हाथ जोड़कर नमस्कार किया और बाद में उनके साथ हाथ मिलाया। 
    इससे पहले गुजरात में पिछले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते कहा था कि पाकिस्तान राज्य के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा कि कुछ पाकिस्तानी अधिकारी एवं मनमोहन की कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर छह दिसंबर को बैठक हुई। इसके एक दिन बाद ही अय्यर ने मोदी को अपनी एक टिप्पणी में नीच आदमी कहा था।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 13 दिसंबर। गुजरात विधानसभा चुनावों को लेकर मनमोहन सिंह पर लगाए आरोपों पर राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी को शर्म आनी चाहिए। मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा कम की है।
    शरद पवार की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री के उस बयान के बाद आई जिसमें उन्होंने मणिशंकर अय्यर के घर पर हुई बैठक को लेकर आरोप लगाया था कि गुजरात चुनाव में पाकिस्तान दखल दे रहा है। इस बैठक में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे। उनके इस बयान के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने भी उनसे माफी मांगने को कहा था।
    शरद पवार महाराष्ट्र की भाजपा-शिव सेना गठबंधन सरकार के खिलाफ मंगलवार को आयोजित एक विरोध रैली का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर शक करने पर उन्हें (नरेंद्र मोदी) शर्म आनी चाहिए। दुनिया में कोई नहीं जो उनकी निष्ठा पर संदेह करे। 
    शरद पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लोगों की समस्याएं सुलझाने के बजाय हर चीज में पाकिस्तान को घसीट रहे हैं। इसके अलावा एनसीपी अध्यक्ष ने महाराष्ट्र के किसानों से कहा कि वे राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करें। उन्होंने कहा कि कर्ज माफ होने तक किसान न तो बिजली का बिल भरें और न ही बैंकों का कर्ज चुकाएं। रैली में आए 20 हजार लोगों से उन्होंने कहा कि जो सरकार आम लोगों के काम की नहीं है उसे सहयोग देने की जरूरत नहीं है। (इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नागपुर, 13 दिसंबर। एनसीपी अध्यक्ष और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने किसानों से राज्य सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने मंगलवार को नागपुर में सरकार के खिलाफ विपक्ष के संयुक्त हल्ला बोल और जनाक्रोश मोर्चे को संबोधित करते हुए कहा, सरकार जब तक किसानों का कर्ज माफ नहीं करती, तब तक किसान न तो बिजली का बिल भरें और न ही बैंकों का कर्ज चुकाएं। जो सरकार आम लोगों के काम की नहीं है, उसके साथ भी सहयोग करने की जरूरत नहीं है। मंगलवार को शरद पवार का 77वां जन्मदिन था।
    राज्य की बीजेपी-शिवसेना सरकार के खिलाफ कांग्रेस, एनसीपी, शेकाप, एसपी और अन्य विपक्षी पार्टियों ने मिलकर नागपुर में बाबासाहेब आंबेडकर के स्मारक से विधानभवन तक यह मोर्चा निकाला था। दो किलोमीटर लंबे इस मोर्चे में करीब डेढ़ लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। मोर्चे के बाद हुई विराट सभा को शरद पवार के अलावा कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, अशोक चव्हाण व पृथ्वीराज चव्हाण, एनसीपी के अजित पवार और एसीपी के अबु आसिम आजमी ने भी संबोधित किया।  मोर्चे में जमा विराट भीड़ देखकर उत्साहित विपक्ष के नेता केंद्र की मोदी सरकार से लेकर राज्य की फडणवीस सरकार पर जमकर बरसे। 
    एनसीपी प्रमुख पवार ने कहा, केंद्र और राज्य सरकार को जगाने के लिए हल्ला बोल आंदोलन करना पड़ रहा है। क्या मुख्यमंत्री का विपक्ष को धमकी देना उचित है/ आम जनता, किसानों और मजदूरों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। यही लोग बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे। (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 13 दिसंबर । कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने जीएस टीवी को दिए इंटरव्यू में गुजरात चुनाव से लेकर बीजेपी द्वारा लगाए गए कई आरोपों का जवाब दिया। राहुल ने कहा कि गुजरात चुनावों में कांग्रेस जीतकर आ रही है और ये जीत एक तरफा होगी। इतना ही नहीं उन्होंने बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा उनके परिवार पर लगाए जाने वाले आरोपों पर कहा कि वह इस नफरत की राजनीति से और मजबूत होते गए।  उन्होंने कहा कि मुझे मजबूत बनाने में सबसे ज्यादा मदद पीएम मोदी ने की है। 
    राहुल ने कहा कि गुजरात चुनाव में लोगों की आवाज बनकर बीजेपी और पीएम मोदी से सवाल कर रहा था। मैं सिर्फ लोगों से जाकर उनसे प्यार से मिलता था और उन्हें गले लगा था। उनसे किसानों ने कहा कि दाम नहीं मिल रहा है तो मैंने सरकार से सवाल किया। व्यापारियों ने जीएसटी की परेशानियां बताई तो मैंने सरकार से सवाल किया। आदिवासियों ने कहा कि पानी नहीं मिल रहा है तो मैंने सरकार से सवाल किया। मैंने जो भी बोला वह गुजरात की आवाज थी और ये सरकार राहुल से नहीं बल्कि गुजरात से डर रही है। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • मुंबई, 13 दिसंबर । शिवसेना ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान को वास्तव में गुजरात चुनावों में दखल देते पाया गया है तो पीएम नरेंद्र मोदी को हिम्मत दिखाते हुए उस पर हमला बोल देना चाहिए। इतना ही नहीं शिवसेना ने मोदी से कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पर रात्रिभोज में मौजूद सभी नेताओं को गिरफ्तार करने और राजद्रोह का मामला दर्ज करने की भी अपील की है। अय्यर के घर आयोजित इस रात्रिभोज में पाकिस्तान के उच्चायुक्त, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दूसरे नेता भी मौजूद थे। 
    शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है, प्रधानमंत्री ने एक गंभीर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान गुजरात चुनावों में दखल दे रहा है। यदि यह सत्य है तो हम चिंतित हैं। अब तक पाकिस्तान सिर्फ जम्मू एवं कश्मीर में और चीन लद्दाख व अरुणाचल प्रदेश में दखल दे रहा था।
    संपादकीय में शिवसेना ने बीजेपी से सवाल किया गया है कि क्या पाकिस्तान गुजरात में कांग्रेस सांसद अहमद पटेल को अगले मुख्यमंत्री के तौर पर स्थापित करने में वास्तव में मदद कर रहा है। बीजेपी के सहयोगी दल ने मोदी द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बजाय गुजरात के चुनावी रैली में इस तरह के गंभीर आरोप लगाने पर आश्चर्य जाहिर किया। 
    संपादीकय में लिखा गया है, एक मजबूत खुफिया तंत्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बैठक की जानकारी मीडिया रिपोर्ट से हुई। यह भी समान रूप से एक गंभीर मामला है। इसे चुनावी सभा में उछालने की बजाय, उन्हें भारतीय सेना को पाकिस्तान में दखल देने का आदेश देना चाहिए। 
    शिवसेना ने कहा कि मोदी की चुनावी बातों ने बीजेपी के बैद्धिक दिवालिएपन को उजागर कर दिया है, क्योंकि हर चुनाव में या तो पाकिस्तान या फरार माफिया दाऊद इब्राहिम को घसीटा जाता है। आखिर कब तक आप हर मौके पर पाकिस्तान का नाम लेना जारी रखेंगे? देश आपसे कार्रवाई की उम्मीद करता है। (आईएएनएस)

     

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • रजनीश कुमार
    गुजरात से, 13 दिसंबर। गुजराती साहित्य परिषद के संस्थापक रंजीतराम मेहता ने 100 साल पहले अपने एक लेख में लिखा था कि पूरे भारत में सबसे ज्यादा जातिवाद गुजरात में है। उन्होंने ये बात गुजरात में एकता और एकता क्यों नहीं नाम से छपे एक लेख में कही थी।
    हालांकि इस बार के विधानसभा चुनाव को लेकर कहा जा रहा है कि जाति मुखर होकर सामने आई है। क्या इससे पहले गुजरात की चुनावी राजनीति में जाति नेपथ्य में रहती थी?
    1960 में गुजरात के गठन के बाद पहली बार 1973 में चिमनभाई पटेल गैर ब्राह्मण मुख्यमंत्री बने। इसके पहले जीवराज नारायण मेहता बनिया थे और बाकी के मुख्यमंत्री ब्राह्मण थे। ऐसा तब था जब गुजरात में ब्राह्मण जाति एक फीसदी से भी कम थी।
    सूरत में सोशल साइंस स्टडी सेंटर के प्रोफेसर किरण देसाई कहते हैं कि चिमनभाई का आना कांग्रेस और गुजरात की राजनीति के लिए एक बड़ी घटना थी। देसाई ने कहा कि इंदिरा गांधी ने मोरारजी देसाई की कांग्रेस को कमजोर करने के लिए पटेलों और पिछड़ी जातियों को आगे किया था।
    गुजरात में जाति कोई नई बात नहीं है। इससे पहले के चुनावों में भी जातीय गोलबंदी होती रही है। अस्सी के दशक में माधव सिंह सोलंकी ने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमानों को खाम मंच पर इक_ा किया। तब माधव सिंह सोलंकी के नेतृत्व में 149 सीटें मिली थीं।
    सूरत में वीर नारमद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर परवेज अब्बासी कहते हैं कि देश आजाद होने के बाद लगभग सभी अहम राज्यों में ब्राह्मणों का दबदबा था। उन्होंने कहा कि यह केवल गुजरात की बात नहीं है।
    अब्बासी कहते हैं कि तब गैर-ब्राह्मणों में जागरूकता नहीं थी। वे पढ़े-लिखे नहीं थे। उनकी महत्वाकांक्षा दबी हुई थी। आगे चलकर स्थिति बदली और हम इसका नतीजा भी देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण हुआ करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब वो अपने प्रतिनिधित्व को लेकर काफी मुखर हैं।
    कई विश्लेषकों का कहना है कि गुजरात में पिछले कुछ दशक से हिंदुत्व की राजनीति चल रही थी, इसलिए जाति खामोश थी। गुजरात यूनिवर्सिटी में सोशल साइंस के प्रोफेसर गौरांग जानी कहते हैं कि शाहरुख खान की फिल्म का वह संवाद- बनिये का दिमाग और मियांभाई की डेरिंग गुजरात को समझने में काफी मदद करता है।
    वो कहते हैं कि गुजरात के दंगों को समझने के लिए यह संवाद बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि उस जमाने में हेराफेरी दारू की होती थी। इसके साथ तस्करी भी होती थी। ये दोनों चीजें अंडरवल्र्ड की ऊर्जा थीं। गुजरात में दारू का धंधा हिन्दू और अपर कास्ट के लोग करते थे। इसलिए यहां बनिए का दिमाग हुआ और इसमें हेराफेरी करने का जोखिम मुसलमान लड़के उठाते थे। मतलब मियांभाई की ये डेरिंग हुई।
    गैरांग जानी कहना है कि इसमें मुसलमान के साथ दलित लड़के भी थे। उन्होंने कहा कि उस जमाने में बनिए का दिमाग और मियांभाई बहादुरी एक आर्थिक निर्भरता थी। मुसलमान और दलित लड़के बेरोजगार थे इसलिए उन्हें इस रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
    प्रोफेसर जानी ने कहते हैं कि ये एक फंक्शनल रिलेशनशिप थी। ये रिलेशनशिप पूरे गुजरात और अहमदाबाद में थी। अगर किसी को स्कूटर बनवाना है तो मुसलमान के पास जाना होगा। पतंग बनाने वाले मुसलमान थे। यहां तक कि स्वामीनारायण मंदिर में रेशम का काम करने वाले भी मुसलमान थे। हालांकि इनके काम बिल्कुल असंगठित थे। गुजरात में जो दंगे हुए उनमें सबसे पहले मुसलमानों की कमाई पर चोट की गई।
    उनका कहना है कि जिस लतीफ को अंडरवल्र्ड कहा जाता है उसे ऐसे ही पैदा किया गया। उनके मुताबिक जब तक मुसलमान विलेन रहे तब तक हिन्दू एकता के नाम पर जाति चुप रही है, लेकिन इमोशन की भी एक उम्र होती और सच बहुत दिनों तक पांव दुबकाए नहीं रहता।
    उन्होंने कहा कि जातियों को इतने साल बाद अब लग रहा है कि उनके दुश्मन मुसलमान नहीं बल्कि सरकार की नीतियां हैं और इसलिए वे सड़क पर हैं।
    ब्राह्मण और बनिया यहां डेढ़-डेढ़ फीसदी हैं। मतलब दोनों तीन फीसदी हैं। पांच फीसदी राजपूत हैं। ये पांच फीसदी राजपूत ओबीसी में नहीं हैं। इन्हें राजघराने वाला राजपूत कहा जाता है।
    यहां जाडेजा, वाघेला और गोहिल राजपूत ओबीसी में नहीं हैं। वाघेला टाइटल लगाने वाले कुछ ऐसे लोग भी हैं जो ओबीसी में हैं। बारह फीसदी पटेल हैं। पटेलों में दो उपजातियां हैं कड़वा और लेउवा। लेउवा को प्रगतिशील माना जाता है। सरदार पटेल लेउवा थे।
    इन सबको जोड़ दें तो गुजरात में 20 फीसदी अपर कास्ट और 60 फीसदी से ऊपर ओबीसी, एसटी और एससी हैं। इस बार बीजेपी को ओबीसी और पटेलों को लेकर डर सता रहा है।
    माधव सिंह सोलंकी कोली जाति के थे और इन्होंने ही खाम समीकरण को जमीन पर उतारा था। गुजरात में कोली ओबीसी में सबसे बड़ा तबका है।
    साल 1955 में सौराष्ट्र में जब भूमि सुधार हुआ तो राजपूतों की जमीन पटेलों के पास आई। इसीलिए पटेलों और राजपूतों में दुश्मनी की स्थिति रहती है। प्रोफेसर जानी कहते हैं कि राजपूत पुलिस में खूब जाते थे, लेकिन आरक्षण के बाद इसमें भी कमी आई और इनकी हालत खराब होती गई।
    लेकिन दिलचस्प है कि जहां पाटीदार के पास ज्यादा जमीन थी वहां भूमि सुधार नहीं किया गया और उनके पास आज भी काफी जमीन है।
    गुजरात में दलितों के लिए 13 सीटें आरक्षित हैं और 2012 में बीजेपी ने 10 सीटों पर जीत हासिल की थी। आदिवासियों के लिए 27 सीटें रिजर्व हैं। इन पर 2012 में कांग्रेस ने 16, बीजेपी ने 10 और जेडीयू ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी।
    2014 के आम चुनाव में पाटीदार बीजेपी की रीढ़ थे। आज की तारीख में बड़ी संख्या में पाटीदार हार्दिक पटेल के साथ हैं। इससे पहले के चुनाव में कुछ जातियाँ अपने प्रभुत्व और अस्मिता को रेखांकित करती थीं पर इस बार सभी जातियाँ स्वतंत्र और प्रभुत्व की चाहत के साथ चुनाव में दिख रही हैं।
    पाटीदार और ठाकोर के उभार और उनकी मांग से बाकी जातियों को भी प्रेरणा मिली है। इस बार दलित और आदिवासी भी फ्रंटफुट पर हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 60.11 फीसदी वोट मिले थे जबकि कांग्रेस को 33.45 फीसदी वोट मिले थे। दोनों में 26.66 का फर्क रहा। (बीबीसी)

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Posted Date : 13-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 13 दिसंबर । गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 93 सीटों के लिए 14 दिसंबर, गुरुवार को वोट डाले जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बने इस चुनाव में दोनों ही पार्टियों का दावा है कि इस बार नतीजे (उनके पक्ष में) चौंकाने वाले आएंगे। लेकिन खबरों की मानें तो ऊपरी दावों से इतर कांग्रेस के नेता अंदरूनी तौर पर दूसरे चरण के चुनाव को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हैं। उनका भरोसा डांवाडोल नजर आ रहा है।
    पार्टी सूत्रों के मुताबिक पहले चरण की तुलना में इस बार स्थितियां बदली हुई हैं।कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक दूसरे चरण में जिन सीटों पर वोट डाले जाने हैं उनमें उत्तर गुजरात की 32 सीटें शामिल हैं। इनमें से 2012 में कांग्रेस ने 17 सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार यह प्रदर्शन दोहराना मुश्किल हो सकता है क्योंकि 13 सीटों पर करीब 16 बागी प्रत्याशी कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में डटे हुए हैं।
    यही नहीं पार्टी नेताओं को यह डर भी सता रहा है कि छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करते वक्त उन्हें ज्यादा ही अहमियत दे दी गई है। एक नेता इसका उदाहरण देते हैं। उनके मुताबिक भारतीय ट्राइबल पार्टी के छोटू भाई वसावा को सात सीटें देने की जरूरत नहीं थी। आदिवासी इलाके में उनका प्रभाव हो सकता है। लेकिन वह उनके अपने क्षेत्र तक ही सीमित है। ऐसे में उन्हें इतनी सीटें देकर कांग्रेस ने अपना नुकसान ही किया है।
    इसी तरह दलित आंदोलन से निकले नेता जिग्नेश मेवानी (ये निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं) को समर्थन देते हुए उनके लिए कांग्रेस ने अपनी वडगाम सीट छोड़ दी। नतीजा ये हुआ कि इस सीट पर अब कांग्रेस के दो बागी नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे मेवानी की जीत की संभावनाएं भी कम नजर आ रही हैं।
    तीसरा खतरा भाजपा की आक्रामक रणनीति है जो उसने कांग्रेस का आदिवासी वोट बैंक अपने पक्ष में करने के लिए अपनाई हुई है। कांगेस के एक सूत्र के मुताबिक इस चरण में जिन सीटों पर वोटिंग होनी है उनमें 27 आदिवासी बाहुल्य वाली हैं। इनमें भी अधिकांश सीटें पंचमहल, छोटा उदयपुर और दाहोद जिलों में हैं जहां आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) व विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बीते दो साल में काफी काम किया है।
    मिसाल के तौर इन आदिवासी बहुल इलाकों में एकल विद्यालयों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। ये विद्यालय वीएचपी संचालित करती है। यहां आदिवासी बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, रहने-खाने की सुविधा, यूनीफॉर्म आदि सब उपलब्ध कराई जाती है। भाजपा ने संघ प्रचारकों के जरिए आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं के समझने की भी कोशिश की है। इस सबका चुनाव में उसे लाभ मिले तो कोई बड़े अचरज की बात नहीं होगी। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

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Posted Date : 12-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 12 दिसंबर । गुजरात चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना के साथ की। इसके बाद राहुल गांधी रैलियां करेंगे। 
    वहीं इससे पहले राहुल के सोमनाथ मंदिर में गैर-हिंदू दर्शनार्थियों को दर्शन से पहले दिए जाने वाले रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने पर बवाल खड़ा हो गया था। राहुल गांधी का नाम वहां पर गैर-हिंदू रजिस्टर में दर्ज किया गया था। इस खबर के फैलते ही बीजेपी ने राहुल के धर्म पर सवाल खड़ कर दिए थे। इसके बाद कांग्रेस की ओर से तस्वीर जारी करते हुए कहा गया है कि राहुल गांधी हिंदू ही नहीं जनेऊधारी भी है। 
    वहीं सोमवार को गुजरात के सावली में चुनावी सभी में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वह गुजरात चुनावों में पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान और जापान की बात कर रहे हैं लेकिन अपने गृह राज्य के बारे में नहीं बोल रहे हैं।
    राहुल ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी पर चुप्पी साधने के लिए भी मोदी पर सवाल उठाए। दावा किया जाता है कि उनकी कंपनी का टर्नओवर भाजपा के केंद्र में सत्तारूढ़ होने के बाद कई गुना बढ़ गया। राहुल ने कहा कि मोदी गुजरात में अपने प्रचार का मुद्दा लगातार बदल रहे हैं। राहुल को आज ही कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
    उन्होंने कहा कि पहले नर्मदा के पानी पर बात की गई लेकिन जब किसानों ने कहना शुरू किया कि उनके खेतों तक पानी पहुंचा ही नहीं तो मोदी ने पटरी बदल दी और ओबीसी मुद्दों पर बोलने लगे। जब लोगों ने उसे भी पसंद नहीं किया तो वह विकास के मुद्दों पर चले गए लेकिन लोगों ने इसकी भी हवा निकाल दी।
    बनासकांठा जिले में उन्होंने एक सभा में कहा, अब मोदी जी अफगानिस्तान, चीन, पाकिस्तान और जापान की बात करते हैं। मोदी जी, यह चुनाव गुजरात के भविष्य को लेकर है। कृपया गुजरात के बारे में भी कुछ बोलिए। राहुल का इशारा साफ तौर पर प्रधानमंत्री के कल के बयान की तरफ था जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान गुजरात विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है और मणिशंकर अय्यर के नीच वाले बयान से एक दिन पहले अय्यर के आवास पर उस देश के कुछ वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की बैठक हुई थी।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 12-Dec-2017
  • नई दिल्ली, 12 दिसंबर। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों के विश्लेषक, सैन्य इतिहासकार, कॉलमिस्ट और कांग्रेस मेंबर मनदीप सिंह बाजवा ने संघियों पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट किया है। बाजवा ने ट्वीट में लिखा है कि जब मैं संघियों को देखता हूं तब मेरा खून खोल उठता है, जिनके परिवार ने कभी इस देश के लिए लड़ाई नहीं की थी वे सोचते हैं कि जनरल दीपक कपूर भारत को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं। मैं याद दिलाना चाहता हूं कि इसी जनरल ने 1971 की लड़ाई में अपनी मातृभूमि की रक्षा की थी।
    कांग्रेस ने मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और उच्चायुक्त के साथ जिस मीटिंग की बात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों को सिरे से नकार दिया था, अब उसी मीटिंग पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर का बयान आया। रिटायर्ड जनरल कपूर ने खुद इस मीटिंग में मौजूद होने की बात कही। अब उनकी इस जानकारी के बाद कांग्रेस के लिए इस पूरे मसले पर मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पीएम मोदी ने एक रैली में आरोप लगाया था कि पाकिस्तान गुजरात विधानसभा चुनावों में हस्तक्षेप कर रहा है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से उसकी पार्टी के आला नेताओं के हाल ही में पड़ोसी देश के नेताओं से मिलने पर स्पष्टीकरण भी मांगा।
    इसके बाद ट्वीटर पर यूजर्स ने उनसे सवाल पूछने शुरू कर दिए। पंकज श्रीनी ने पूछा कि सर क्या दीपक कपूर को आगे आकर बताना नहीं चाहिए कि उस मीटिंग में क्या हुआ। ऐसा क्या है जो वो छिपा रहे हैं। रवि ने लिखा कि जनरल ने 1971 के युद्ध में भारत का बचाव किया, लेकिन अब उन्हें अपने कॉन्टेक्ट्स को विस्तार से बताने की जरूरत है। (जनसत्ता)

     

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Posted Date : 12-Dec-2017
  • समीरात्मज मिश्र
    वाराणसी, 12 दिसंबर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर सीपी ठाकुर का कहना है कि जब दलित समाज का व्यक्ति सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच चुका है, तो अब आरक्षण को समाप्त कर देना चाहिए।
    वाराणसी में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए सीपी ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर जब एक दलित समाज के व्यक्ति को बैठा दिया जाए, तब आरक्षण को समाप्त कर देना चाहिए। ऐसा बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने कहा था। अब जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलित समाज के व्यक्ति को राष्ट्रपति बना दिया दै तो ये आरक्षण को समाप्त करने का अच्छा समय है।
    सीपी ठाकुर वाराणसी में लोकबंधु राजनारायण के जन्म शताब्दी समारोह के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने समाज में ऊंची जाति के तौर पर देखे जाने वाले समुदाय के गरीब लोगों को भी आरक्षण देने की वकालत की।
    उन्होंने कहा कि जो गरीब और पिछड़ी जाति के लोग हैं, उन्हें आरक्षण देकर मुख्य धारा में लाना चाहिए, लेकिन जो सम्पन्न जाति के लोग आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, उन्हें भी नहीं भूलना चाहिए।
    सीपी ठाकुर ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर द्वारा प्रधानमंत्री को नीच कहे जाने को गलत ठहराते हुए उसकी निंदा की, लेकिन आरक्षण पर दिया उनका बयान चर्चा का विषय बना रहा। भारतीय जनता पार्टी के नेता जहां इसे उनका निजी बयान कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं वहीं विपक्षी दल भी अभी इस पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
    लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी का कोई भी नेता या प्रवक्ता फिलहाल इस विषय पर आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। लेकिन जानकारों का कहना है कि गुजरात चुनाव के मौके पर सीपी ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेता के इस बयान को पार्टी यूं ही खारिज भी नहीं कर पाएगी। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 12-Dec-2017
  • अहमदाबाद, 12 दिसंबर । हाल ही में लोकसभा और भाजपा से इस्तीफा दे चुके नाना पटोले ने गुजरात में आयोजित एक चुनावी रैली मेंकांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मंच साझा किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उनसे मिलने के लिए गये वरिष्ठ सांसदों के साथ उन्होंने अभद्र व्यवहार किया था।
    पटोले ने कहा कि उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि नरेन्द्र मोदी किसानों के मुद्दों को सुलझाने में नाकाम रहे और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के अपने वादों पर कायम नहीं रहे। महाराष्ट्र के भंडारा-गोंडिया संसदीय क्षेत्र से पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि एक बार मोदी से मिलने उनके आवास पर गये वरिष्ठ सांसदों के साथ उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
    महाराष्ट्र में भाजपा के नेता नाना पटोले ने 8 दिसंबर को घोषणा की कि उन्होंने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और बीजेपी को भी छोड़ दिया है। इसके बाद अगले दिन उन्होंने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि पीएम मोदी राजनीतिक फायदे के लिए अपनी ओबीसी पृष्ठभूमि का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि उन्होंने अत्यंत पिछड़ा वर्ग और किसानों के फायदे के लिए कुछ भी नहीं किया है।(एनडीटीवी)

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