विशेष रिपोर्ट

यूपी से लौटते मजदूरों को रास्ते में छोड़ भागा बस वाला, भटकना और तकलीफ खत्म होने का नाम नहीं ले रही
यूपी से लौटते मजदूरों को रास्ते में छोड़ भागा बस वाला, भटकना और तकलीफ खत्म होने का नाम नहीं ले रही
22-Jun-2020 7:57 PM

सुरेन्द्र सोनी

बलौदा (जिला जांजगीर चांपा), 22 जून। उत्तरप्रदेश के ईंट भठ्ठे में काम करने वाले 65 मजदूरों को ईंटा भठ्ठा ने पूरी मजदूरी ने देकर अकबरपुर रेलवे स्टेशन में छोड़ दिया, यहां से रेलवे ने रांची भेज दिया। रांची में भटकने के बाद प्रशासन ने छत्तीसगढ़ के बॉर्डर में उतार कर बस वापस लौट गई। पैदल ही छत्तीसगढ़ की सीमा रायगढ़ में पहुंचे। किसी तरह मजदूरों की गुहार पर अफसरों ने बस से रवाना किया गया, लेकिन बस चालक और कंडक्टर ने कोरबा बलौदा के बीच कनकी पंतोरा बेरियर के पहले ही इन्हें उतार दिया। बलौदा पुलिस थाना के बाद इन्हें जबरन उतार कर दो हजार लेकर बस चालक वहां से वापस लौट गया।

तीन चार दिनों से भूखे प्यासे मजदूर बच्चों के साथ शाम को सडक़ में खड़े रहे, लेकिन थाने से भी मदद नहीं मिली। नगर के युवक ने सूखा राशन दिया तो चूल्हा जलाकर भोजन बनाया। रात में ही मजदूरों ने मस्तूरी ब्लॉक बिलासपुर में परिजनों को वाहन के प्रबंध कराने की सूचना दिए। आज सुबह मस्तूरी बिलासपुर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और परिजनों के सहयोग से मजदूर बलौदा से सुबह 8 बजे अपने गृह ग्राम के लिए रवाना हुए।

च्छत्तीसगढ़’ संवाददाता ने रविवार शाम 5 बजे  बलौदा के सब्जी बाजार में उतरे मजदूरों को देखा। मजदूरों ने बताया कि उत्तरप्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के ईंटा भ_े में काम करने वाले महिला पुरुष और 20 बच्चे  सहित 65 मजदूरों को छत्तीसगढ़ जाने के लिए पांच दिन पहले ईंटा भ_ा मालिक ने अकबरपुर रेलवे स्टेशन में छोड़ दिया।

बारिश होने के कारण से ईंटे भ_े का काम बंद हो गया तो र्इंटा भ_ा मालिक ने काम बंद होने का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया, जबकि कोरोना काल के लॉकडाउन में इन लोगों से भरपूर काम लिया और इनकी मेहनत की कमाई भी पूरा नहीं देकर जगह खाली करने को कहा। जहां पर श्रमिक काम बंद होने से अपने राज्य अपने गांव जाने के लिए दिनभर इधर-उधर भटकते रहे।

बेहाल मजदूरोंं की काफी जद्दोजहदऔर गुहार लगाने के बाद वहां से रेलवे के द्वारा इनको एक ट्रेन जो झारखण्ड के मजदूरों को ले कर रांची झारखण्ड जा रही थी उसी में बैठा के रांची के लिए भेज दिया, जबकि इन्हें छत्तीसगढ़ के बिलासपुर आना था। रांची झारखण्ड में इन्हें उतार दिए और अपने साधन से छत्तीसगढ़ जाने को कह रेलवेस्टेशन से बाहर कर दिए रांची में फिर से मजदूर भटकते रहे। फिर वहां के प्रशासन के द्वारा इन्हें बस की व्यवस्था कर छत्तीसगढ़ के बॉर्डर में उतार कर बस वापस लौट गए।

वहां से सभी मजदूर बच्चों सहित भारी भरकम अपना सामान लादे पैदल ही छत्तीसगढ़ की सीमा रायगढ़ में पहुंचे यहां भी इन्हें सहयोग मिलने के बजाए ताने सुनने को मिला। किसी तरह मजदूरों की गुहार उच्चाधिकारियों तक गई जहां से इनके निवास स्थान तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया कर बस में बैठाया गया और बस रवाना हुआ, लेकिन बस चालक और कंडक्टर ने कोरबा बलौदा के बीच कनकी पंतोरा बेरियर के पहले ही इन्हें उतार दिया। इसकी जानकारी वहां बेरियर के पास कोरबा एसडीएम को हुई तो उनके चर्चा के बाद  बस चालक बलौदा के बछोद पॉइंट तक छोडऩे पर राजी हुआ। इस बीच बस चालक के द्वारा डीजल हेतु पैसे की मांग की गई तब अधिकारियों ने असमर्थता बताई और मजदूरों को ही पैसे देने को कहा। लेकिन मजदूरों का कहना है कि पैसे देने की कोई सहमति नहीं हुई थी और इसी वजह से बस चालक ने बलौदा पुलिस थाना के बाद दैनिक सब्जी बाजार के पास इन्हें जबरन उतार कर इन लोगों से दो हजार लेकर बस चालक वहां से वापस लौट गया।

अब बेसहारा, तीन चार दिनों से भूखे प्यासे मजदूर छोटे छोटे बच्चों के साथ शाम को 5 बजे बीच सडक़ में खड़े रहे। उन्होंने नजदीक बलौदा के पुलिस थाना में मदद की गुहार लगाई, लेकिन बलौदा पुलिस ने भी इन्हें दूसरे जिले से हो कह कर वहां से भगा दिया।

जांजगीर-चांपा जिले बलौदा नगर के एक युवा गोपेश गौरहा ने देखा कि मजदूर और छोटे-छोटे बच्चे भूखे प्यासे हंै तो गोपेश ने उन सभी के लिए चावल, दाल सब्जी प्याज टमाटर, सोयाबीन बड़ी, और लकड़ी, दोना पत्तल की व्यवस्था कर उन्हें भोजन बनाने के लिए दिया। चार दिनों के भूखे प्यासे श्रमिकों ने सब्जी बाजार के सेड के नीचे ही चूल्हा जला कर भोजन बनाया और खा कर रात्रि वहीं विश्राम किये। तब तक बलौदा के अधिकारियों को इसकी खबर नहीं थी, जबकि बलौदा पुलिस इन्हें पहले ही आगे के लिए चलता कर दिए थे।

रात में ही मजदूरों ने मस्तूरी ब्लाक बिलासपुर  में अपने-अपने परिजनों को यहां पहुंचने और कोई वाहन के प्रबंध करने कराने की सूचना दिए। आज सुबह मस्तूरी बिलासपुर प्रशासन,जनप्रतिनिधियों और परिजनों के सहयोग से मजदूर बलौदा से सुबह 8 बजे अपने गृह ग्राम के लिए रवाना हुए।

 

 

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