राष्ट्रीय

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28-Sep-2020 10:48 PM

अमरावती, 28 सितंबर (आईएएनएस)| आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने सोमवार को राज्य के किसानों के लिए 2,340 करोड़ की लागत की 2 लाख मुफ्त बोरवेल खोदे जाने की योजना का शुभारंभ किया। रेड्डी ने कहा, "हम उन किसानों के साथ खड़े हैं, जो अपने खेती में बोलवेल के माध्यम से सिंचाई करने में सक्षम नहीं हैं। सभी निर्वाचन क्षेत्रों में, हम 2 लाख बोरवेल ड्रिल करने की योजना चला रहे हैं, इतना ही नहीं, हम किसानों को केसिंग पाइप भी देंगे।"

उन्होंने कहा कि 'वाईएसआर जल कल' योजना चुनावी घोषणापत्र में था।

मुख्यमंत्री ने कहा, "इस योजना को लागू करके मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि मैं आंध्र प्रदेश के किसानों का भरोसा नहीं खोना चाहता। किसान बोरवेल लगवाने के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, या फिर अपने गांव में सचिव की सहायता से सकते हैं।"

राज्य के किसान बोरवेल लगवाने के आवेदन के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट वाईएसआर जलाकला डॉट एपी डॉट इन, वेबसाइट पर जा सकते हैं। किसान अतिरिक्त सहायता के लिए टोलफ्री नंबर 1902 पर भी संपर्क कर सकते हैं।


28-Sep-2020 10:16 PM

भोपाल 28 सितंबर (आईएएनएस)| मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित तौर पर पत्नी से पिटाई करने के आरोपों से घिरे पुलिस महानिदेशक स्तर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा का तबादला किए जाने के बाद गृह विभाग ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। गृह विभाग ने पुरुषोत्तम शर्मा से पत्नी की पिटाई और एक अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्पष्टीकरण मांगा है। गृह विभाग के अवर सचिव अन्नू भलावी के हस्ताक्षर जारी स्पष्टीकरण आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर आपसे संबंधित दो वीडियो वायरल हुए हैं, जिसमें आपके द्वारा अनैतिक आचरण और पत्नी के साथ घरेलू हिंसा किया जाना, प्रथम दृष्टया परिलक्षित हो रहा है। यह कृत्य अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बनता है। 29 सितंबर की शाम तक स्पष्टीकरण दें , समय सीमा में जवाब न दिए जाने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञात हो कि शर्मा से संबंधित दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। उसके बाद उन्हें संचालक लोक अभियोजक संचालनालय के पद से हटा दिया गया था और अब उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।


28-Sep-2020 9:50 PM

नई दिल्ली, 28 सितंबर। कोरोना महामारी के बीच लगाए गए लॉकडाउन को अलग-अलग चरणों में खोला जा रहा है. अब तक सरकार 4 अनलॉक में कई तरह की रियायतें दे चुकी है और अर्थव्यवस्था को खोला है. इसके तहत आज अनलॉक-5 में 31 अक्टूबर तक के लिए नई गाइडलाइंस का ऐलान किया जा सकता है. अक्टूबर से ही भारत में लंबा चलने वाला त्योहारों का मौसम शुरू हो रहा है. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि कोरोना के बढ़ते मामलो के बीच सरकार अब कौन सी रियायतें देती है और किन चीजों पर प्रतिबंध लगाती है.

पिछले महीने गृह मंत्रालय ने कुछ और छूटें देने की बात कही थी और धीरे-धीरे कंटेनमेंट जोन के बाहर और गतिविधियों के लिए छूट दी थी. अब जहां उद्योग आने वाले त्योहार के दिनों में उपभोक्ताओं की ओर से मांग में बढ़ोत्तरी की उम्मीद कर रहे हैं, और अधिक छूटें दी जा सकती हैं.

अक्टूबर से लागू होने वाले अनलॉक 5 में कौन सी छूटें दी जा सकती हैं?

जबकि सार्वजनिक स्थान जैसे मॉल, सैलून, रेस्टोरेंट, जिम को पहले ही पाबंदियों के साथ खोले जाने की छूट दी जा चुकी है लेकिन अब भी सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल, इंटरटेनमेंट पार्क नहीं खुले हैं. ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि इन्हें अक्टूबर से खोले जाने की अनुमति दी जाती है या नहीं. जबकि इसके लिए मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से कई बार गुजारिश की जा चुकी है. हालांकि पिछले दिशानिर्देशों में 21 सितंबर से ओपन एयर थियेटर खोले जाने का निर्देश दिया जा चुका है.

बल्कि पश्चिम बंगाल ने तो पहले से 1 अक्टूबर से सीमित संख्या में लोगों के प्रवेश के साथ सिनेमा हॉल खोले जाने के लिए अनुमति दे दी है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, सामान्य समय की ओर लौटने के लिए जात्रा, नाटक, ओपन एयर थियेटर, सिनेमा और सभी म्यूजिकल, डांस, गायकी और जादू के शो की 50 लोगों या उनसे कम के साथ 1 अक्टूबर से खोले जाने की छूट दी जा रही है. हालांकि इस दौरान सामाजिक दूरी के नियम, मास्क पहनना और बचाव के आवश्यक उपायों का पालन करना होगा.

पिछले महीने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लोगों के थियेटर में बैठने का एक तरीका सुझाया था. जिसके मुताबिक, पहली पंक्ति की सीटों पर एक छोडक़र एक पर लोगों को बैठाया जाना था जबकि अगली पूरी पंक्ति को खाली छोड़ा जाना था. ऐसा ही आगे की पंक्तियों में भी किया जाना था.

पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया था कि कड़े नियमों के साथ 1 अक्टूबर से थियेटरों को खोलने की अनुमति गृह मंत्रालय की ओर से दी गई है. हालांकि पीआईबी ने अपने एक फैक्ट चेक में इस दावे को झूठा करार दिया था.

महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के दौरान पर्यटन क्षेत्र पर बुरी तरह से मार पड़ी है. ऐसे में अनलॉक 5 की प्रक्रिया के दौरान और भी पर्यटन स्थलों और टूरिस्ट सेंटर्स को पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. ऐसे ही एक प्रयास में सिक्किम सरकार ने 10 अक्टूबर से होटलों, होम-स्टे और अन्य टूरिज्म से जुड़ी सेवाओं को शुरू करने का निर्णय लिया है.

वहीं रविवार को ओडिशा सरकार ने घोषणा की कि यह अक्टूबर से सभी पर्यटन के स्थलों को खोल देगी. (hindi.news18)


28-Sep-2020 8:02 PM

नई दिल्ली, 28 सितम्बर (आईएएनएस)| दिल्ली सरकार के मुताबिक अगले दो हफ्तों के दौरान दिल्ली में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में कमी दर्ज की जाएगी। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि दिल्ली में कोरोना का डाउनट्रेंड शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि दिल्ली में अभी तक कोरोना के कारण 5000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, "दिल्ली में कोरोना संक्रमण का डाउनट्रेंड शुरू हो गया है। इसके साथ ही दिल्ली में कोरोना के नए मामलों में भी कमी आने लगी है। दिल्ली में कोरोना के मामले दोगुने होने में अब 50 दिन का समय लग रहा है। कोरोना की पहचान और रोकथाम के लिए दिल्ली में प्रतिदिन 50 से 60 हजार टेस्ट करवाए जा रहे हैं।"

दिल्ली सरकार की तरफ से करवाए जाने वाले सीरो सर्वे की तारीख इस बार कुछ आगे बढ़ाई जा सकती है। दरअसल 30 सितंबर को दिल्ली सरकार कोर्ट के समक्ष सीरो सर्वे की रिपोर्ट पेश करेगी। इसी को देखते हुए अक्टूबर का सीरो सर्वे थोड़ा लेट हो सकता है। हालांकि दिल्ली सरकार के मुताबिक सीरो सर्वे लेट जरूर हो सकता है, लेकिन इसे टाला या रद्द नहीं किया जाएगा।

सीरो सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि, दिल्ली में रह रहे कितने लोगों के शरीर में कोरोना से लड़ने वाला एंटीबॉडी तैयार हो चुका है।

दिल्ली में अभी तक 2,71,114 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 2,36,651 व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं 5235 लोगों की कोरोना से संक्रमित होने के बाद मृत्यु हो चुकी है। दिल्ली में फिलहाल 29,228 एक्टिव कोरोना रोगी हैं।

दिल्ली सरकार का यह भी मानना है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ चुकी है। साथ ही दूसरी लहर का पीक भी दिल्ली देख चुकी है। दिल्ली सरकार के मुताबिक अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर का पीक धीरे-धीरे ढलान की ओर है। यानी आने वाले दिनों में दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा सकती है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई थी और अब इसका पीक भी आ चुका है। ऐसा लगता है दूसरी लहर का पीक आने वाले समय में धीरे-धीरे कम होगा। मुझे उम्मीद है और सारे कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे कि तेजी से कंटेनमेंट जोन बनाना। 17 अगस्त तक दिल्ली में 550 कंटेनमेंट जोन थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 2000 से अधिक कर दिया गया है।"

17 अगस्त से दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले बढ़ना शुरू हुए। 16 सितंबर को साढ़े चार हजार नए मामले सामने आए। हालांकि अब यह मामले कम होना शुरू हुए हैं। अब लगभग 3700 मामले सामने आ रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने बीते कुछ दिनों में कोरोना टेस्टिंग में कई गुना इजाफा इजाफा किया है। फिलहाल दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 60,000 कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं।

-- आईएएनएस


28-Sep-2020 8:01 PM

मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)| महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी ने अगस्त में ही विवादास्पद कृषि विधेयकों को लागू कर दिया था, जो अब सरकार के लिए बड़ी शर्मिदगी के तौर पर उभरकर सामने आया है।

गौरतलब है कि ये विधेयक पिछले सप्ताह संसद में पारित हुए हैं और राज्य सरकार ने इसके पारित होने से पहले इसे लागू कर दिया था। इन विधेयकों को लेकर पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

मार्केटिंग के निदेशक सतीश सोनी द्वारा 10 अगस्त को जारी अधिसूचना में सभी कृषि उपज एवं पशुधन बाजार समितियों (एपीएमसी) और जिला कृषि सहकारी समितियों को राज्य में प्रस्तावित कानूनों पर तीन अध्यादेशों को 'सख्ती से लागू करने' का आदेश दिया गया था।

ये विधेयक, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 हैं।

एमवीए गठबंधन पार्टी यानी शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, कांग्रेस नए कानूनों का कड़ा विरोध कर रही है, लेकिन वह केंद्र द्वारा कोई भी नियम, दिशानिर्देश या ढांचा जारी करने से पहले ही इसे राज्य सरकार आगे बढ़ा चुकी थी और उसके छह सप्ताह बाद संसद द्वारा इन विधेयकों को मंजूरी दी गई, जिसके बाद इसे लेकर विरोध प्रदर्शन किया जाने लगा।

इस संबंध में सोनी से संपर्क किए जाने पर भले ही उन्होंने अधिसूचना जारी करने की पुष्टि की, लेकिन वर्तमान में इस पर राजनीतिक रवैये को देखते हुए टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। इससे साबित होता है कि महाराष्ट्र इन नए कानूनों को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता व मार्केटिंग मंत्री बालासाहेब शामरा पाटिल से इस पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर वह टालमटोल करने लगे।

पाटिल ने आईएएनएस से कहा, "आदेश जारी किया गया था, लेकिन अब उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के हालिया बयान के बाद स्थिति अलग है।"

हैरानी की बात यह है कि राज्य में इन विधेयकों के लागू होने के छह सप्ताह बाद भी अजीत पवार ने इस घटनाक्रम पर अनभिज्ञता जाहिर की। इसका पता तब चला, जब उन्होंने संकेत दिया कि राज्य इन कृषि विधेयकों को लागू नहीं करेगी।

उपमुख्यमंत्री ने 26 सितंबर को पुणे में मीडियाकर्मियों से कहा था, "राज्य और देशभर के किसान विरोध कर रहे हैं, ऐसे में सरकार कोई भी 'अंतिम निर्णय' लेने से पहले विशेषज्ञों से परामर्श करेगी।"

इस बीच, राज्य कांग्रेस प्रमुख और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने सोमवार को दोपहर में राजभवन तक विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई, जिससे पार्टी के लिए स्थिति और अपमानजनक हो गई।

मार्केटिंग विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने खुलासा किया कि अधिसूचना जारी करने का निर्णय केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल के निर्देशों के बाद लिया गया था, जिन्होंने राज्य को तुरंत ऐसा करने के लिए कहा।

आईएएस अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, "यह मामला लॉ डिपार्टमेंट के पास भेजा गया था, जिसने कहा कि हमारे पास इसे लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, जिसके बाद संबंधित मंत्री (पाटिल) द्वारा इसे मंजूरी दे दी गई थी।"

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सलाहकार व वसंतराव नाइक शेट्टी स्वावलंबन मिशन (एमओएस रैंक) के अध्यक्ष किशोर तिवारी इस बात से सहमत थे और उन्होंने भी सवाल किया कि किसके इशारे पर नौकरशाहों ने आदेश जारी किए, जबकि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, केरल, ओडिशा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे कई अन्य राज्य इसका विरोध कर रहे हैं।

तिवारी ने आईएएनएस से कहा, "संबंधित विभाग के प्रमुख को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री को अंधेरे में रखने के लिए बर्खास्त किया जाना चाहिए.. इससे राज्य सरकार के खिलाफ एक गहरी साजिश की बू आ रही है और एमवीए सहयोगियों को तुरंत इस बारे में चर्चा करनी चाहिए, जिससे किसानों का विश्वास उनमें बना रहे।"

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह दिलचस्प है कि तीनों दलों, शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के नेता 10 अगस्त की अधिसूचना से अनभिज्ञ लग रहे हैं, जबकि आधिकारिक रुख किसानों के विरोध को देखते हुए इन कानूनों का विरोध करना है।

इन दलों के नेताओं ने इस बात की ओर इशारा किया कि किस तरह इन कृषि विधेयकों के कारण भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने गठबंधन तोड़ लिया और भाजपा शासित राज्यों में भी सत्ताधारी पार्टी को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।

शिवसेना सांसद संजय राउत और राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने रविवार को एनडीए छोड़ने और 'मजबूती से किसानों के साथ' खड़े होने पर पंजाब के शिअद के फैसले का स्वागत किया था, जबकि उनके अपने महाराष्ट्र में उन्हें शर्मिदगी उठानी पड़ी।

इस नए खुलासे से राज्य के किसानों को आघात लगने की उम्मीद है, वहीं यह मुद्दा एमवीए के भीतर विवाद को जन्म दे सकता है, हालांकि राज्य में विपक्षी दल भाजपा के लिए यह खुश होने की बात है।

--आईएएनएस


28-Sep-2020 7:18 PM

बिहार,28 सितम्बर | बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और पहले चरण की 71 सीटों के लिए नामांकन का दौर भी एक अक्टूबर से शुरू हो रहा है. इसके बावजूद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है. एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने 42 सीटों की दावेदारी करते हुए कहा कि इससे कम सीटों पर एनडीए से नाता तोड़कर अलग चुनाव लड़ सकते हैं.

हालांकि, एनडीए में फिलहाल एलजेपी को 25 से 30 सीटें ही मिलने की संभावना है. ऐसे में चिराग के सामने एनडीए से बाहर होकर अपने पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है. चिराग बिहार को रौशन करेंगे या नहीं ये देखना दिलचस्प होगा.

चिराग पासवान की बीजेपी से डिमांड

दरअसल, एलजेपी 2015 की तरह ही इस बार भी 42 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है. एलजेपी की दलील है कि 2014 में वो 7 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी तो उन्हें एक लोकसभा सीट के अनुपात से 6 विधानसभा सीट मिली थी. 2019 लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 6 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और उन्हें एक राज्यसभा सीट मिली थी. इस लिहाज से एलजेपी को इस चुनाव में भी 42 सीटें मिलनी चाहिए. 

हालांकि, 42 सीटें न मिलने की हालत में एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने बीजेपी के सामने नया फॉर्मूला रखा है. एलजेपी को 33 विधानसभा सीटों के साथ बिहार में राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाले 12 एमएलसी में से दो सीटें चाहिए. इसके अलावा अक्टूबर के अंत में उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव में एक राज्य सभा सीट की डिमांड भी एलजेपी रख रही है. चिराग ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को एक दूसरा फॉर्मूला भी दिया है. इसके तहत अगर उन्हें राज्यसभा की सीट नहीं दी जाती है तो बिहार में एनडीए सरकार बनने पर बीजेपी के साथ-साथ एलजेपी से चिराग पासवान को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए. 

एलजेपी की काट में जेडीयू का दलित दांव

एलजेपी बिहार में 2015 के चुनाव में 42 विधानसभा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरकर महज दो सीटें ही जीत सकी थी. अब एलजेपी ने बीजेपी के सामने जो शर्तें रखी हैं, उन्हें एनडीए में अमलीजामा पहनाना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में चिराग पासवान अपनी अलग सियासी राह भी तलाश रहे हैं. हालांकि, चिराग के तेवर को देखते हुए नीतीश कुमार भी अपने राजनीतिक समीकरण को मजबूत करने की कवायद लगातार कर रहे हैं, जिसके तहत रविवार को उन्होंने महादलित समुदाय से आने वाले अशोक चौधरी को बिहार के जेडीयू का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है. 

रामविलास पासवान की राजनीति

एलजेपी के संस्थापक रामविलास पासवान भारत के सबसे बुज़ुर्ग दलित नेताओं में से एक हैं. वह चुनावी राजनीति में 1969 में आए थे. 1977 में उन्होंने लोकसभा चुनाव में सबसे ज़्यादा मतों से जीत हासिल करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. 1986 में जगजीवन राम की मृत्यु के बाद वह उत्तर भारत में दलितों के सबसे बड़े नेता थे. कांशीराम और मायावती तो पासवान की तुलना में 15 साल बाद राजनीति में आए थे. इसके बाद भी रामविलास पासवान बिहार में दलितों के बजाय दुसाध समुदाय के नेता बनकर रह गए. 

2005 में एलजेपी किंगमेकर थी

साल 2000 में रामविलास पासवान ने जनता दल से अलग होकर एलजेपी का गठन किया और फरवरी 2005 में किंगमेकर बनकर उभरे थे. बिहार के सत्ता की चाबी रामविलास पासवान के पास थी, लेकिन उस ताकत का इस्तेमाल नहीं कर सके और चाबी को कुएं में भेंट कर आए थे. बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा और अक्टूबर 2005 में फिर चुनाव हुए और फिर राज्य में पार्टी दोबारा से वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी. अब एलजेपी की कमान चिराग पासवान के हाथों में है. 

बिहार में पांच फीसदी दुसाध समुदाय

बता दें कि बिहार की कुल आबादी में अनुसूचित जातियों से जुड़े लोगों की आबादी तकरीबन 16 फीसदी है. अनुसूचित जाति की तकरीबन 93 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. बिहार में 23 जातियां अनुसूचित जातियों की कैटगरी में आती हैं. बिहार में अब कोई दलित नहीं है क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार ने अपने शासन काल में अनुसूचित जाति के सभी 23 वर्गों को महादलित की श्रेणी में रख दिया है. बिहार  में चमार जाति की हिस्सेदारी तकरीबन 31 फीसदी है और अनुसूचित जातियों का दूसरा बड़ा समूह दुसाध समुदाय का है, जिस समुदाय से चिराग पासवान आते हैं. 

एलजेपी की मजबूती पांच फीसदी दुसाध मतदाता हैं. पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े देखें तो दुसाध समुदाय के करीब 80 फीसदी वोट रामविलास की पार्टी को ही मिले हैं. एलजेपी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 6.4 और 2019 में 7.86 फीसदी मत मिले थे जबकि 2015 के चुनाव में 4.8 फीसदी रहा. वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन कहते हैं कि पासवान जाति की बात करें तो बिहार में तकरीबन पांच फीसदी के करीब वोट बैंक वाली इस जाति के सर्वमान्य नेता रामविलास पासवान रहे हैं. 

पासवान समुदाय के 11 विधायक

बिहार विधानसभा में कुल 38 आरक्षित सीटें हैं. 2015 में आरजेडी ने सबसे ज्यादा 14 दलित सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि, जेडीयू को 10, कांग्रेस को 5, बीजेपी को 5 और बाकी चार सीटें अन्य दलों को मिली थीं. इसमें 13 सीटें रविदास समुदाय के नेता जीते थे जबकि 11 पर पासवान समुदाय से आने वाले नेताओं ने कब्जा जमाया था. 2005 में JDU को 15 सीटें मिली थीं और 2010 में 19 सीटें जीती थीं. बीजेपी के खाते में 2005 में 12 सीटें आई थीं और 2010 में उसने 18 सीटें जीती थीं. आरजेडी को 2005 में 6 सीटें मिली थीं जो 2010 में घटकर एक रह गई थी. 2005 में 2 सीट जीतने वाली एलजेपी ने तो 2010 में इन सीटों पर खाता तक नहीं खोला और कांग्रेस का भी यही हाल था. (AAJTAK.IN)


28-Sep-2020 6:56 PM

नयी दिल्ली, 28 सितम्बर (वार्ता) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में संसद में पारित कृषि संबंधी विधेयक को लेकर मोदी सरकार पर फिर निशाना साधा और कहा कि उसने यह कानून लाकर किसानों के लिए मौत का फरमान जारी किया है।

श्री गांधी ने सोमवार को ट्वीट किया , “ कृषि संबंधी कानून हमारे किसानों के लिए मौत का फरमान हैं। उनकी आवाज संसद और संसद के बाहर दोनों जगह दबाई गयी। यह प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो गया है।”

इसके साथ ही उन्होंने एक अखबार में छपी एक खबर भी पोस्ट की है जिसमें कहा गया है कि राज्यसभा के उपसभापति कहते हैं कि विधेयक को पारित करते समय जब मत विभाजन की मांग की गयी तो विपक्ष अपनी सीटों पर नहीं था लेकिन राज्यसभा टीवी की तस्वीरें कुछ और ही दिखा रही है।

अभिनव टंडन

वार्ता


28-Sep-2020 6:55 PM

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (वार्ता) ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ के रचयिता गीतकार अभिलाष का कल देर रात मुंबई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे।

श्री अभिलाष के एक परिवारिक मित्र विजय प्रभाकर नगरकर ने यहां बताया कि श्री अभिलाष ने मार्च में पेट के एक ट्यूमर का ऑपरेशन कराया था। तभी से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी। गोरेगांव पूर्व के शिव धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनका वास्तविक नाम ओमप्रकाश कटारिया था। उनका जन्म 13 मार्च 1946 को दिल्ली में हुआ। उनके परिवार में एक पुत्र है।

उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने उन्हें कलाश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। सिने गीतकार अभिलाष का विश्व प्रसिद्ध गीत 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' देश के 600 विद्यालयों में प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है। विश्व की आठ भाषाओं में इस गीत का अनुवाद हो चुका है और इसे प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है। इस गीत को वर्ष 1985 में फ़िल्म अंकुश के लिए संगीतबद्ध किया था। इस गीत को तकरीबन दो करोड माेबाइल फोन धारकों ने अपने कॉलर ट्यून बनाया है।

'इतनी शक्ति हमें देना दाता' गीत के अलावा श्री अभिलाष के लिखे साँझ भई घर आजा (लता), आज की रात न जा (लता), वो जो ख़त मुहब्बत में (ऊषा), तुम्हारी याद के सागर में (ऊषा), संसार है इक नदिया (मुकेश), तेरे बिन सूना मेरे मन का मंदिर (येसुदास) आदि गीत भी बेहद लोकप्रिय हुए। वह लगभग 40 सालों से फ़िल्म जगत में सक्रिय रहे। संवाद लेखन और गीत लेखन के लिए श्री अभिलाष को सुर आराधना अवार्ड, मातो श्री अवार्ड, सिने गोवर्स अवार्ड, फ़िल्म गोवर्स अवार्ड, अभिनव शब्द शिल्पी अवार्ड, विक्रम उत्सव सम्मान, हिंदी सेवा सम्मान और दादा साहेब फाल्के अकादमी अवार्ड से सम्मानित किया गया है। वह स्क्रीन राइटर एसोसिएशन के संयुक्त सचिव और इंडियन परफार्मिंग राइट सोसाइटी के निदेशक का पद भी संभाल चुके हैं।

सत्या जितेन्द्र

वार्ता


28-Sep-2020 6:51 PM

नयी दिल्ली 28 सितम्बर (वार्ता) राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने छत्तीसगढ़,हरियाणा और तेलंगाना को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर इस वर्ष खरीफ सत्र में धान की खरीद के लिए 19444 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी करने को मंजूरी दी है ।

कृषि मंत्रालय के अनुसार यह राशि इसलिए मंजूर की गई है ताकि राज्यों के मार्केटिंग महासंघों (फेडरेशनों )को अपने सहकारी संगठनों के जरिए समयबद्ध ढंग से धान की खरीद करने की प्रक्रिया में सहायता मिले। छत्तीसगढ़ के लिए सबसे अधिक 9000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। हरियाणा के लिए 5444 करोड़ रुपये और तेलंगाना के लिए 5500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गयी हैं।

कोविड महामारी के दौरान एनसीडीसी की ओर से उठाये गये इस कदम से इन तीनों राज्यों के किसानों को बेहद जरूरी वित्तीय सहायता प्राप्त होगी । उचित समय पर उठाए गए इस कदम से राज्यों की एजेंसियां तत्काल खरीद प्रक्रिया को शुरू कर सकेंगी। इससे किसानों को सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना उत्पाद बेचने में जरूरी सहायता मिलेगी।

अरुण सत्या

वार्ता


28-Sep-2020 6:49 PM

लखनऊ, 28 सितंबर (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश में आठ सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने हैं। तिथियां हालांकि अभी नहीं घोषित हुई हैं, फिर भी सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी विसात बिछानी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने तो अपने दो सीटों पर उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं। बसपा ने सभी सीटों पर प्रभारी बना दिए हैं। वहीं आगे चलकर उम्मीदवार भी हो जाएंगे। भाजपा ने तो बहुत पहले से अपनी तैयारी तेज कर रखी है।

समाजवादी पार्टी ने जहां पर उपचुनाव होने हैं, वहां वर्चुअल बैठकें और प्रदेश अध्यक्ष ने दौरा भी शुरू किया है। कुछ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी भी दी गई है।

उधर, भाजपा अपनी तैयारियों के लिए खुलकर मैदान में डटी है। हर सीट पर एक मंत्री और एक संगठन के पदाधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। संगठन की ओर से स्थानों पर स्वयं प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव ने दौरा करना शुरू किया है, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जौनपुर, देवरिया, बांगरमऊ व उन्नाव खुद पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने योजनाओं की झड़ी लगाकर कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र भी दिया है। संगठन महामंत्री सुनील बसंल भी लगातर कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं। संपर्क अभियान भी शुरू हो चुका है।

कांग्रेस ने रामपुर की स्वार सीट पर हैदर अली खां उर्फ हमजा को और उन्नाव की बांगरमऊ सीट से वाजपेयी को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। दोनों सीटों पर कांग्रेस ने अपने पुराने व दिग्गज राजनीतिक परिवारों पर भरोसा जताया है। आरती के दादा उमाशंकर दीक्षित गांधी नेहरू परिवार के काफी नजदीक थे। वे काफी कद्दावर नेता माने जाते थे। पार्टी ने इसी तरह रामपुर सीट पर मिक्की मियां की तीसरी पीढ़ी को मैदान में उतारा है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने आठों सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने के लिए बाकायदे प्रभारी भी घोषित किए हैं।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक पदाधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि पार्टी जिसे प्रभारी बनाती है, उसे ही अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया जाता है। बसपा ने सभी सीटों पर प्रत्याशी चयनित कर लिए हैं। उनकी घोषणा बाकी है। इस बार हर सीट पर जीतने वाले प्रत्याशी को मैदान पर उतारा जा रहा है। हर कैडर के हिसाब से रणनीति बनाई जा रही है।

जिन आठ सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें जौनपुर की मल्हानी और रामपुर की स्वार सीटें सपा के पास थीं। बाकी 6 सीटें भाजपा के पास थीं। बसपा अगर एक भी सीट पर चुनाव जीतती है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा। अभी तक जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें से कानपुर की घाटपुर सीट के लिए कुलदीप संखवार और देवरिया से अभयनाथ त्रिपाठी का प्रमुखता से हैं। हालांकि इसी प्रकार करीब सभी सीटों पर नाम तय हो गए हैं, लेकिन पार्टी की ओर से अभी कोई घोषणा नहीं की गई है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रसून पांडेय कहते हैं कि आमतौर पर उपचुनाव सत्तारूढ़ दल का इम्तिहान माना जाता है। यूपी में विधानसभा चुनाव साल 2022 में होने हैं। ऐसे में इस उपचुनाव से आगे का रुख पता चलेगा। विपक्ष के लिए भी अपने को जनता के सामने कितना खरा साबित करने का यह यह बेहतरीन मौका होगा। उपचुनाव के परिणाम आगे आने वाले चुनाव के लिए बड़ा संकेत देगा।

--आईएएनएस


28-Sep-2020 6:24 PM

सतना/भोपाल 28 सितंबर (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश के सतना जिले के सिंहपुर थाने में थाना प्रभारी की सर्विस रिवाल्वर से चली गोली चोरी के संदेह में पकड़े गए व्यक्ति को लग गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस पर गुस्साई भीड़ ने जमकर हंगामा किया। इस इस घटना के बाद थाना प्रभारी और एक पुलिस जवान को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सिंहपुर थाने की पुलिस ने चोरी के संदेह में राजपति कुशवाहा को पकड़ा था। रविवार की रात को थाना प्रभारी विक्रम पाठक की सर्विस रिवाल्वर से राजपति को गोली लगी और उसकी मौत हो गई। इस घटना के सामने आने पर सोमवार को गांव के लोग सड़क पर उतर आए और उन्होंने प्रदर्शन किया। भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज कर आंसूगैस के गोले छोड़ना पड़े।

पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल ने थाना प्रभारी विक्रम पाठक व एक आरक्षक आशीष को निलंबित कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री चौहान ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा, "शिवराज सरकार में ये कैसी कानून व्यवस्था है? सतना जिले के सिंहपुर थाने में पूछताछ के लाए गए राजपति कुशवाह नामक व्यक्ति को रात में लकअप में गोली मार दी गई। परिजन यह आरोप लगा रहे है।"

उन्होंने कहा, "परिजन व ग्रामीण शव लेने व घटना का विरोध करने जब थाना पहुंचे तो उन पर बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया गया, उन्हें शव भी नहीं दिया जा रहा है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि वह इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए, दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, परिवार को इंसाफ मिले।"

इस घटना पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता अजय सिंह ने कहा कि थाना प्रभारी की सर्विस रिवाल्वर से किसी व्यक्ति की मौत हो जाना बेहद गंभीर मामला है, दोषियों पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

--आईएएनएस


28-Sep-2020 6:04 PM

नई दिल्ली, 28 सितम्बर (आईएएनएस)| दिल्ली में सीआर पार्क की दुर्गापूजा काफी फेमस है। हर साल यहां हजारों की तादाद में लोग दुर्गापूजा मनाते हैं। लेकिन कोविड 19 के चलते इस बार दुर्गापूजा भव्य तरीके से नहीं मनाई जाएगी। इस साल दुर्गापूजा को वर्चुअल तरीके से मनाए जाने की तैयारियां चल रही हैं, तो वहीं कुछ जगहों पर दुर्गापूजा नहीं मनाई जाएगी। सीआर पार्क में न सिर्फ पूजा बल्कि कल्चरल ऐक्टिविटीज भी होती हैं। वहीं बच्चों के लिए ड्रॉइंग, म्यूजिकल चेयर, सिंगिंग कॉम्पटीशन जैसी दिलचस्प ऐक्टिविटीज भी आयोजित की जाती हैं। लेकिन इस बार ये सभी एक्टिविटीज नहीं होगी, हालांकि कुछ जगहों पर इसे ऑनलाइन किया जाएगा।

दिल्ली में कुछ ही जगहों पर दुर्गापूजा भव्य रूप में मनाई जाती है, और इन जगहों में सीआर पार्क का जिक्र न हो यह असंभव है। सीआर पार्क को मिनी-कोलकाता के रूप में भी जाना जाता है।

चितरंजन पार्क काली मंदिर सोसाइटी के सेक्रेटरी सिरीबाश भट्टाचार्य ने आईएएनएस को बताया, "अभी हम लोगों को सभी चीजें क्लियर नही हुई हैं। लेकिन हमने सोचा है कि एक छोटी 4 फुट की मूर्ति बनाकर पूजा करें, लेकिन इसमें लोग शामिल नहीं होंगे, ये पूजा पूरी तरह ऑनलाइन होगी।"

"हमने इसके लिए लोकल टीवी से बात की है, जो इस पूजा का ऑनलाइन प्रसारण करेगा। हालांकि हम उसे इसके लिए पैसे देंगे, अभी फिलहाल चीजों पर चर्चा की जा रही है।"

उन्होंने बताया, "इस बार भोग (प्रसाद) नहीं होगा, कल्चरल प्रोग्राम ऑनलाइन किये जा रहे हैं। ल् मुख्य कार्यक्रम नहीं मनाए जाएंगे। सबकुछ सरकार की गाइडलाइंस के हिसाब से किया जाएगा। "

सीआर पार्क में कुछ ऐसे दुर्गा पंडाल लगाए जाते हैं, जो आपको कोलकाता की दुनिया में वापस ले जाते हैं। सिर्फ पंडाल ही नहीं, यहां आपको कोलकाता के स्ट्रीट फूड आइटम्स भी मिलते हैं।

सीआर पार्क में प्रसिद्ध गायकों और संगीतकारों को आमंत्रित करके सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी कराया जाता है। लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इस साल काफी पाबंदियों के बीच में दुर्गापूजा मनाई जाएगी।

चितरंजन पार्क दुर्गा समिति बी ब्लॉक ग्राउंड के जनरल सेक्रेटरी सुप्रकाश मजूमदार ने आईएएनएस को बताया, "इस बार कोई पूजा नहीं हो रही है, सिर्फ एक दिन के लिए होगी, जिसमें मूर्ति नहीं होगी, न ही पंडाल लगाया जा रहा है। हमने एक जगह चिन्हित की है, वहीं पूजा की जाएगी और उसमें 10 लोग शामिल होंगे।"

एकयन तरंग एक डांस ग्रुप है, जो हर साल दुर्गा पूजा पर डांस परफॉर्म करते थे। साथ ही सीआर पार्क के अलावा दिल्ली की और जगहों पर भी परफॉर्म करने जाते थे, लेकिन इस साल ग्रुप के सदस्यों में उदासी है। डांस ग्रुप की सदस्य अरुंधती बैनर्जी ने आईएएनएस को बताया, "हर साल दुर्गा पूजा होने के बाद, हम अगले साल की पूजा का इंतजार करते थे, लेकिन कोरोना की वजह से इस बार दुर्गा पूजा भव्य नहीं हो रही है।"

उन्होंने बताया, "ऑनलाइन प्रोग्राम के लिए काली मंदिर अपील कर रहा है, जिसका प्रसारण ऑनलाइन किया जाएगा। वहीं छोटे बच्चों के कॉम्पटीशन हो रहें हैं, लेकिन बस फर्क इतना है कि इस बार ऑनलाइन प्रसारण होगा। पहले कोलकाता से लोगों को बुलाया जाता था, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।"

--आईएएनएस


28-Sep-2020 5:59 PM

जबलपुर, 28 सितम्बर |  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों का उपचार कर रहे अस्पतालों के रिसेप्शन पर उपचार शुल्क सूची लगाए जाने के पूर्व में दिए गए अपने आदेश के अनुपालन के संबंध में प्रदेश सरकार ने क्या कदम उठाए हैं, इस पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है.

मामले में कोर्ट मित्र अधिवक्ता नमन नागरथ ने शनिवार को बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस संजय यादव तथा जस्टिस बीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बुधवार को यह निर्देश जारी किए हैं. याचिका पर अगली सुनवाई एक अक्टूबर को निर्धारित की गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नागरथ ने कहा कि राज्य सरकार ने अदालत के 7 सितंबर के निर्देश के अनुपालन के बारे में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की थी जिसमें अस्पतालों में रिसेप्शन केंद्रों पर कोरोना वायरस रोगियों के लिए उपचार दरों की सूची लगाने के लिए कहा गया था.

अदालत ने कहा, ‘यद्यपि यह अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा कहा गया है कि आदेश का अनुपालन किया जा रहा है और 14 सितंबर को इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट दायर की गई है लेकिन राज्य सरकार द्वारा निजी सहित हर अस्पताल के रिसेप्शन केंद्र पर कोविड-19 रोगियों के उपचार की दरें प्रदर्शित करने के संबंध निर्देश जारी करने की कार्रवाई का खुलासा नहीं करता है.’

अदालत ने आगे कहा, ‘न ही इसमें यह दिख रहा है कि राज्य ने उक्त आदेश के संबंध में अखबारों में बड़े स्तर पर विज्ञापन दिया है.’

गौरतलब है कि प्रदेश के शाजापुर जिले स्थित एक निजी अस्पताल के प्रबंधन ने बिल का भुगतान नहीं होने पर एक वृद्ध मरीज को बिस्तर से बांधकर रखा हुआ था. इस संबंध में अखबारों में फोटो सहित समाचार प्रकाशित हुए थे.

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 11 जून को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को पत्र लिखा था. जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के महासचिव डॉ. अश्वनी कुमार द्वारा उक्त घटना का उल्लेख करते हुए शीर्ष न्यायालय को आठ जुलाई को एक पत्र लिखा था. जिसमें उक्त घटना को मानव अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था.

खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को निर्देशित किया था कि कोविड- 19 मरीजों के उपचार से संबंधित शुल्क सूची अस्पतालों में चस्पा की जाए. निर्धारित से अधिक राशि लेने पर पीड़ित पक्ष जिला प्रशासन तथा हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर शिकायत कर सकता है.(THEWIRE)


28-Sep-2020 5:28 PM

पटना, 25 सितंबर (आईएएनएस)| बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना की सड़कों पर दो राजनीतिक दल -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जन अधिकार पार्टी (जाप) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और जमकर लाठी डंडे चले। इस दौरान भाजपा कार्यालय के सामने की सड़क रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। भाजपा के नेताओं का कहना है कि पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ता कृषि सुधार से जुड़े विधेयकों का विरोध करते हुए सडकों पर उतरे थे। इसी दौरान वे भाजपा के प्रदेश कार्यालय में दाखिल होने की कोशिश करने लगे, जिसका भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। धीरे-धीरे इस विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया।

आरोप है कि इसके बाद भाजपा के कार्यकर्ताओं ने लाठी डंडों से जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं की पिटाई शुरू कर दी। इस दौरान सड़क रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। किसी तरह मामला शांत करवाया गया।

कई किसान संगठनों ने कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को 'भारत बंद' का आह्वान किया था, जिसका बिहार में विपक्षी दलों ने भी समर्थन दिया।

इधर, भारतीय जनता पार्टी (भजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि किसानों का शोषण कर अपनी राजनीति चमकाने वाले दल और उनके समर्थकों के प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर हमला कर कायरता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि बिचौलियों की इस करतूत की जितनी निंदा की जाय कम होगी। इसका जवाब अगले माह होने वाले विधानसभा के चुनाव में राज्य के किसान देंगे।

इधर, जाप के प्रमुख पप्पू यादव ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर गुंडगर्दी करने का आरोप लगाया है। पप्पू यादव ने कहा, "बिहार बंद के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं की गुंडागंर्दी दिखी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जाप के कार्यकर्ताओं पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने हमला किया जिसमें जाप के कुछ सदस्य चोटिल हो गए।"

यादव ने कहा कि, पूंजीपतियों की समर्थक भाजपा किसानों की आवाज को दबाना चाहती है और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है।


28-Sep-2020 5:27 PM

लखनऊ, 28 सितंबर (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश की राजधानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसान बिल के विरोध व राज्य में अपराध बढ़ने समेत कई तरह के आरोप लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया। लखनऊ के परिवर्तन चौक पर बड़ी संख्या में कांग्रेसी जीपीओ की ओर बढ़े, जिनको चौक के पास ही रोक लिया गया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। बिल के विरोध को लेकर जगह-जगह से कांग्रेस नेता हिरासत में लिए गए। कई को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया गया है। सेवादल के कई कार्यकर्ता परिवर्तन चौक के पास पुलिस हिरासत में लिए गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। विरोध की हर आवाज को दबाया जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लल्लू का कहना है कि यह बिल किसानों के लिए 'काला कानून' है। रविवार को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद पूरे देश का किसान खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। यह बिल किसान विरोधी है, जो आने वाले समय में खुद के खेत में ही किसान और अपने घर पालने के लिए बंधुआ मजदूरी करेगा। इसको केंद्र सरकार को वापस लेना चाहिए या इस बिल में एमएसपी तय किया जाना चाहिए।

उधर, कृषि बिल को लेकर कांग्रेस और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। इसी कड़ी में सुबह अलग-अलग जगहों से दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता विधानसभा कूच करने लगे। इस दौरान पुलिस से भिड़ंत भी हुई। वहीं, प्रसपा कार्यकर्ताओं को कार्यालय के बाहर ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। रोके जाने से आक्रोशित हुए कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिस पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है।

किसान बिल के विरोध में प्रदर्शन करने से रोकने के लिए लखनऊ कमिश्नरेट के अफसरों ने बॉर्डर सील कर दिए थे। विधानसभा, मुख्यमंत्री और राजभवन के बाहर भारी पुलिस बल सुबह से ही तैनात है। चार कंपनी पीएसी समेत अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात की गई है। शहर के करीब 14 स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाई गई है।


28-Sep-2020 5:27 PM

नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)| केरल से कांग्रेस सांसद टी.एन. प्रथापन ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है, जिसमें उन्होंने संसद से हाल ही में पास हुए कृषि से जुड़े तीन विधेयकों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन विधेयकों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके बाद अब ये बिल कानून का रूप ले चुके हैं।

प्रथापन ने अपनी याचिका में कहा है कि कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के खिलाफ है।

याचिका में दलील दी गई है कि कृषि उपज विपनन समिति (एपीएमसी) के बिना किसान बिना सुरक्षा कवच के हो जाएंगे और बाजार बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों के लालच में पड़ जाएगा। ये बहुराष्ट्रीय कंपनियां अधिक लाभ कमाना चाहते हैं और गरीबों को इन्हें कोई परवाह नहीं है जो अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर रहते हैं।

अधिवक्ता जेम्स पी. थॉमस के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि एपीएमसी से किसानों का शोषण रोकने में मदद मिली है। एपीएमसी ये सुनिश्चित करती है कि कोई किसान मंडी से खाली हाथ नहीं लौटेगा।

याचिका में प्रथापन ने कहा, "समझौतों को बढ़ावा देने के लिए की गई फार्मिग से किसानों को अपनी उपज के सही दाम नहीं मिल पाएंगे।"

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि शीर्ष अदालत कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून की धारा 2, 3, 4, 5, 6, 7, 13, 14, 18 और 19 को अवैध ठहराए।
 


28-Sep-2020 5:26 PM

लखनऊ, 28 सितंबर (आईएएनएस)| मथुरा की अदालत में दीवानी मुकदमा दायर होने के 2 दिन बाद ही कस्बे में कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक पाने और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा के पूर्व सांसद और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने दीवानी मुकदमे का स्वागत करते हुए कहा है कि कृष्ण जन्मभूमि को 'मुक्त' करने के लिए अयोध्या जैसा विशाल आंदोलन करना चाहिए।

उन्होंने कहा, "अयोध्या, मथुरा और काशी में तीन मंदिरों को मुक्त करने का हमारा संकल्प है। अब जब राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया है, हम कृष्ण जन्मभूमि को मुक्त करने के लिए काम करेंगे। बेहतर होगा कि जो भूमि भगवान भगवान कृष्ण की है, उस पर मुस्लिम स्वेच्छा से अपना दावा छोड़ दें।"

भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने भी यही कहा कि मुस्लिमों को कृष्ण जन्मभूमि पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए, क्योंकि इस्लाम ऐसी किसी भूमि पर प्रार्थना करने की अनुमति नहीं देता है, जिस पर जबरन कब्जा किया गया हो।

इस बीच बाबरी मामले में वादी रहे इकबाल अंसारी ने कहा कि इस तरह की राजनीति खत्म होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "कुछ स्वार्थी लोग हिंदू-मुस्लिम झगड़े कराना चाहते हैं, लेकिन यह राष्ट्रहित में नहीं है। अयोध्या विवाद खत्म हो गया है और मुसलमानों ने अदालत के फैसले को विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर लिया है। दूसरे मुद्दे को उठाने की कोई जरूरत नहीं है।"

अयोध्या विवाद में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर ऐसे मुद्दों को उठाया जा रहा है।

बता दें कि यह मामला मौजा मथुरा बाजार सिटी के कटरा केशव देव केवट में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण ने 'मित्र' रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों के जरिए दायर किया था। अग्निहोत्री लखनऊ की एक वकील हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अदालतों में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुकदमे में हिंदू महासभा का प्रतिनिधित्व किया था।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुकदमा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत मथुरा अदालत में दायर किया गया था।

अग्निहोत्री के माध्यम से श्री कृष्ण विराजमान द्वारा दायर किए गए ताजा मुकदमे में कहा गया है, "यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड, ट्रस्ट मस्जिद ईदगाह या मुस्लिम समुदाय के किसी भी सदस्य का कटरा केशव देव की संपत्ति और उस पूरी 13.37 एकड़ जमीन में जहां देवता भगवान श्री कृष्ण विराजमान है, उसमें कोई अधिकार नहीं है।"

अग्निहोत्री ने आगे कहा, "यह मुकदमा कथित ट्रस्ट मस्जिद ईदगाह के प्रबंधन की समिति द्वारा अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए किया जा रहा है।"

माना जाता है कि मथुरा की यह जगह भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है।


28-Sep-2020 4:28 PM

कोच्चि, 28 सितंबर (आईएएनएस)| यहां की एक विशेष एनआईए अदालत ने सोमवार को इस्लामिक स्टेट में भर्ती होने गए सुब्हानी हजा मोइदीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही इराक सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उस पर 2.10 लाख रुपये का जुमार्ना भी लगाया है। अदालत ने शुक्रवार को मोइदीन पर लगे आरोपों को लेकर उसे दोषी पाया था और सोमवार को सजा सुनाने की बात कही थी।

मोइदीन के खिलाफ अदालत ने जो आरोप लगाए हैं, उनमें आपराधिक साजिशें रचने के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) भी शामिल है। बता दें कि मोइदीन को एजेंसी ने अक्टूबर 2016 में गिरफ्तार किया था।

मोइदीन ने अदालत में निर्दोष होने की बात कही। साथ ही कहा कि उसने किसी भी आतंकवादी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया और किसी भी देश के खिलाफ युद्ध नहीं किया है।

जबकि मोइदीन पर आरोप है कि उसने 2015 में पेरिस में हुए आतंकवादी हमले के एक आरोपी सालाह अब्देसलाम के साथ हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इस हमले में 130 लोग मारे गए थे।

हमले को लेकर मोइदीन का बयान लेने के लिए 2018 में फ्रांसीसी पुलिस ने यहां की जेल का दौरा भी किया था।


28-Sep-2020 4:28 PM

मथुरा, 28 सितम्बर (आईएएनएस)| श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मालिकाना हक मामले को लेकर दाखिल याचिका पर अब 30 सितंबर को सुनवाई होगी। सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन याचिकाकर्ता अदालत नहीं पहुंचे। श्रीकृष्ण विराजमान, स्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और कई लोगों की ओर से पेश किए दावे में कहा गया है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना जाता है) और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच जमीन को लेकर समझौता हुआ था। इसमें तय हुआ था कि मस्जिद जितनी जमीन में बनी है, बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरीशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने मथुरा की सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत में याचिका दाखिल की है। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में न्यायालय से 13.37 एकड़ की जन्मभूमि का मालिकाना हक मांगा गया है। भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच पांच दशक पूर्व हुए समझौते को अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने और मस्जिद को हटाकर पूरी जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की मांग की है। लखनऊ की रहने वाली रंजना अग्निहोत्री और अन्य कई लोगों ने मिलकर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को जमीन देने को गलत बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में दावा पेश किया।

अधिवक्ता द्वारा शुक्रवार को मथुरा की अदालत में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से गलत है और भगवान कृष्ण एवं उनके भक्तों की इच्छा के विपरीत है। हालांकि 12 अक्तूबर 1968 को कटरा केशव देव की जमीन का समझौता श्रीकृष्ण जन्मस्थान सोसाइटी द्वारा किया गया। जिसके तहत 20 जुलाई 1973 को यह जमीन डिक्री की गई। याचिका में डिक्री को खारिज करने की मांग की गई है।

कोर्ट को यह तय करना था कि इस याचिका को स्वीकार किया जाए या नहीं, लेकिन सुनवाई को 30 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया। ज्ञात हो कि याचिका में श्री कृष्ण जन्मभूमि के 13.37 एकड़ के स्वामित्व और शाही ईदगाह के निर्माण पर सवाल उठाए गए हैं।


28-Sep-2020 4:27 PM

भोपाल, 28 सितम्बर (आईएएनएस)| मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित तौर पर पत्नी की पिटाई करने का वीडियो वायरल होने पर पुलिस महानिदेशक स्तर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा को संचालक लोक अभियोजक संचालनालय के पद से हटा दिया गया है। वहीं शर्मा ने पत्नी से हुए विवाद को पारिवारिक विवाद बताया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शर्मा का अपनी पत्नी से विवाद हो रहा है और वे कथित तौर पर पिटाई करते हुए भी नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शर्मा को लोक अभियोजक संचालनालय के संचालक पद से हटा दिया। उन्हें गृह मंत्रालय में उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।

राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि अगर वीडियो सही है तो मामला गंभीर है और निश्चित रुप से कार्रवाई होनी चाहिए।

वीडियो वायरल होने के बाद शर्मा ने सफाई दी है और इसे पारिवारिक विवाद बताते हुए कहा, मैंने कोई क्राइम नहीं किया है। ये मेरे और मेरी पत्नी के बीच का यह पारिवारिक मामला है। अगर वह मुझसे इतने नाराज हैं तो मेरे साथ क्यों रहती हैं। मेरे पैसे का इस्तेमाल क्यों करती हैं? मेरे पैसों पर विदेश यात्राएं क्यों करती हैं? यह मेरा पारिवारिक मामला है, इसे मैं खुद सुलझा लूंगा, मैं मेरी पत्नी से लगातार संपर्क में हूं, मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं कि यह मामला सुलझा लिया जाए।

यह सेल्फ डिफेंस के तहत झूमा-झटकी का मामला है। मैंने कोई मारपीट नहीं की है, सिर्फ धक्का-मुक्की और झूमा झटकी हुई है।


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