राष्ट्रीय

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Date : 20-Feb-2020

नई दिल्ली, 20 फरवरी । महज 13 साल की उम्र में एक ग्रेनेड विस्फोट में अपने दोनों हाथ खो देने वाली मालविका अय्यर आज हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मालविका आज एक इंटरनेशनल मोटिवेशनल स्पीकर, डिसेबल्ड के हक के लिए लडऩे वाली एक्टिविस्ट, सोशल वर्क में पीएचडी के साथ फैशन मॉडल के तौर पर जानी जाती हैं। 30 साल की मालविका, जो जानती है कि कैसे बुरी स्थिति को भी बेहतर बनाया जा सकता है, उनका एक वायरल ट्वीट काफी तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल मंगलवार को अपना जन्मदिन मनाते हुए मालविका ने संयुक्त राष्ट्र में एक भाषण दिया था, जिसका एक हिस्सा उन्होंने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर भी शेयर किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। अपने इस ट्वीट में मालविका ने अपनी सर्जिकल खामियों के बारे में बात की, जो तब हुईं जब डॉक्टर उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, और कैसे वे खामियां उनके लिए वरदान साबित हुईं।
मालविका ने लिखा, जब बम ने मेरे हाथों को उड़ा दिया, तो डॉक्टरों ने मेरी जान बचाने के लिए बहुत कोशिश की। इसलिए उन्होंने मेरे दाहिने हाथ को पीछे करके कुछ सर्जिकल गलतियां कीं। दरअसल डॉक्टर की गलती का मतलब था कि उनके हाथ की नुकीली हड्डी मांस से ढंकी न होकर उभरी हुई रह गई। इस पर मालविका ने कहा, स्टंप में एक हड्डी होती है, जो किसी मांस से नहीं ढकी होती है। अगर मैं किसी चीज पर हाथ मारती हूं, तो बहुत दर्द होता है। हालांकि उनकी यह हड्डी अब उनकी एकमात्र उंगली की तरह काम करती है। इसी से उन्होंने अपनी पीएचडी की थीसिस टाइप की। 
मालविका ने लिखा, लेकिन वह गलती बहुत अविश्वसनीय साबित हुई है। वह हड्डी अब मेरी एकमात्र उंगली की तरह काम करती है। यही कारण है कि मैं टाइप कर पाती हूं! अपनी ट्वीट में आगे मालविका ने यह भी लिखा कि हर बादल में एक चांदनी छुपी होती है और उनकी यह जीवन भी कुछ उसी तरह का है। उन्होंने लिखा, मैंने अपनी पीएचडी थीसिस लिखने का जश्न मनाया और अब मैं अपनी वेबसाइट को साझा करने के लिए रोमांचित हूं, जिसे मैंने अपनी बहुत ही असाधारण उंगली के साथ बनाया है। इसके साथ ही वह अपनी वेबसाइट का लिंक भी शेयर करती हैं। 
इसके बाद मालविका ने छोटी-छोटी चीजों में खुशी पाने के महत्व और अपने दोस्तों और समर्थकों को उसे खुश करने और उसे प्यार करने के लिए धन्यवाद देने के साथ अपने ट्वीट को समाप्त किया। मालविका अय्यर को उनके इस ट्वीट पर हजारों लाइक और कमेंट्स मिले। एक यूजर ने लिखा, आप एक अविश्वसनीय व्यक्ति हैं। एक दूसरे यूजर ने लिखा, वास्तविक नायिका को जन्मदिन की शुभकामनाएं, जिन्होंने मुस्कुराहट के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना किया।(एनडीटीवी)

 


Date : 20-Feb-2020

नई दिल्ली, 20 फरवरी । 26/11 के मुंबई हमले को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इसे हिंदू आतंकवाद का रूप देने की पूरी साजिश रच रखी थी। मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के इस दावे के बाद बीजेपी नेताओं की तरफ से लगाए लांछनों से आहत कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वह जीवीएल नरसिम्हा राव और अमित मालवीय पर मानहानि का मुकदमा करेंगे। उधर, मुंबई अटैक केस के सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने भी राकेश मारिया के दावों की पुष्टि की है। 

मारिया की पुस्तक, लेट मी से इट नाउ, में हिंदू आतंकवाद की साजिश वाले खुलासों के बाद बीजेपी नेताओं ने दिग्विजिय सिंह को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का गुप्तचर बता दिया था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर वह आईएसआई के गुप्तचर हैं तो उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? उन्होंने आगे कहा, अगर ऐसा है तो पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बिल्कुल अयोग्य हैं क्योंकि वो उन्हें गिरफ्तार नहीं करवा सके हैं।
दरअसल, बीजेपी नेताओं ने दिग्वजिय सिंह पर इसलिए निशाना साधा था क्योंकि सिंह ने मुंबई हमले के लिए आरएसएस पर उंगली उठाई थी और बजरंग दल पर आईएसआई से पैसे लेने का आरोप लगाया था। वैसे भी, दिग्विजय के अलावा यूपीए सरकार में गृह मंत्री रहे कांग्रेस नेता सुशील शिंदे और पी. चिदंबरम पर भगवा आतंकवाद या हिंदू आतंकवाद का टर्म गढऩे और आतंकवाद में हिंदुओं की भी संलिप्तता गलत तरीके से साबित करने की कोशिश करने के आरोप लग चुके हैं। 
मालवीय ने कहा था, 26/11 टेरर अटैक के तुरंत बाद कांग्रेस नेता दिग्विजिय सिंह के साथ कुछ बॉलिवुड हस्तियों ने एक किताब का लोकार्पण किया था जिसमें आरएसएस पर आरोप जड़े गए थे। उन्होंने कहा, उस किताब में कहीं पर भी पाकिस्तानी आतंकवादियों के हाथ होने की आशंका तक जाहिर नहीं की गई थी। उन्होंने वही कहा जो पाकिस्तान उनसे कहलवाना चाहता था। यह बात सच है कि दिग्विजिय सिंह ने 26/11 आरएसएस की साजिश? नाम से प्रकाशित पुस्तक को लोकार्पण के वक्त कहा था, इस किताब में कहीं भी आप 26/11 में पाकिस्तानी आतंकवादियों का हाथ नहीं देख सकते हैं।
अब दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव और पार्टी की मीडिया सेल के चीफ अमित मालवीय को मानहानि का नोटिस भेजेंगे। इधर, लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के प्रतिनिधि अधीर रंजन चौधरी ने हिंदू टेरर को लेकर उठ रहे सवालों पर पार्टी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब हिंदू टेरर टर्म सामने आया तब पूरी पृष्ठभूमि कुछ वैसी ही थी। उन्होंने मक्का मस्जिद में बम धमाके और प्रज्ञा ठाकुर की गिरफ्तारी एवं अन्य हिंदुओं की गिरफ्तारी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमेशा धोखा देते हैं और हमले में अपनी असली पहचान छिपा लेते हैं। 
उधर, 26 नवंबर, 2008 को हुए भयावह मुंबई टेरर अटैक के केस में सरकारी वकील की भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध वकील उज्ज्वल निकम ने भी पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के दावों का समर्थन किया है। उन्होंने भी कहा कि हमलावरों के पास से मिली आईडीज में हिंदू नाम दर्ज थे। उन्होंने कहा, यह सच है कि आईडीज में हिंदू नाम लिखे थे। मुंबई कोर्ट में दिए कसाब के बयान से साबित हो गया था कि 10 दोषियों के पास 10 फर्जी आईडीज थे। हमने कोर्ट के सामने इसे साबित किया था। उन्होंने आगे कहा, कसाब ने कहा था कि उसे मिलिट्री ट्रेनिंग देने वाले काफा ने हमलावरों से कहा था कि उन्हें 10 फर्जी आईडीज दिए जाएंगे। इसका इस्तेमाल पुलिस को गुमराह करने के लिए किया जाना था। हमने यह साबित कर दिया था। 
उज्ज्वल निकम के समर्थन के बीच कांग्रेस पार्टी ने सवाल किया कि हिंदू आतंकवाद की साजिश वाली बात को मारिया ने 12 वर्षों तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया? पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने मारिया के दावे के बारे में पूछे जाने पर कहा, राकेश मारिया साहब, जब 26/11 का घिनौना आंतकवादी हमला हुआ था, उस दौरान मुंबई पुलिस में आला पद पर थे। ऐसे में उन्होंने ये बात पिछले 12 वर्ष में सार्वजनिक क्यों नहीं की? यह जांच प्रक्रिया और अदालती प्रक्रिया का भाग क्यों नहीं बना? उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब मारिया को देने चाहिए। 
गौरतलब है कि पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी पुस्तक लेट मी से इट नाउ में कहा है कि मुंबई हमले में जिंदा पकड़ा गया एकमात्र आतंकवादी आमिर अजमल कसाब की कलाई पर हिंदुओं का पवित्र धागा कलावा यूं ही नहीं बंधा था। उन्होंने पुस्तक में दावा किया कि लश्कर-ए-तैयबा मुंबई हमले को हिंदू आतंकवादियों की ओर से किए गए हमले का रूप देना चाहता था। इसके लिए हमलावरों को हिंदू नामों से फर्जी आईडी कार्ड दिए गए थे और कसाब की पहचान बेंगलुरु के समीर दिनेश चौधरी के रूप में दर्ज करवाई गई थी। 
मारिया ने कहा कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता, तो कसाब चौधरी के रूप में मर जाता और मीडिया हमले के लिए हिंदू आतंकवादियों को दोषी ठहराती। उन्होंने लिखा, अखबारों में बड़ी-बड़ी सुर्खियां बनतीं जिनमें दावा किया जाता कि किस प्रकार हिंदू आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया। शीर्ष टीवी पत्रकार उसके परिवार और पड़ोसियों से बातचीत करने के लिए बेंगलुरु पहुंच जाते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और वह पाकिस्तान में फरीदकोट का अजमल आमिर कसाब निकला।' उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस कॉन्स्टेबल शहीद तुकाराम ओम्बले ने कसाब को जिंदा पकड़ लिया और लश्कर की हिंदू टेरर वली साजिश पर पानी फिर गया। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 20-Feb-2020

अहमदाबाद, 20 फरवरी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 फरवरी को अहमदाबाद में होने वाले 22 किलोमीटर लंबे रोडशो के दौरान सडक़ के दोनों ओर करीब एक लाख लोगों के मौजूद रहने की संभावना है। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
डोनाल्ड ट्रंप ने जो दावा अपने एक वीडियो में किया है, उससे यह संख्या काफी कम है। हाल में ट्रंप ने एक वीडियो में कहा था, ‘‘ रोडशो के मार्ग में 70 लाख लोग मौजूद होंगे। गौरतलब है कि अहमदाबाद की कुल आबादी 70 से 80 लाख है।
अहमदाबाद नगर निगम आयुक्त विजय नेहरा ने बुधवार को कहा कि इस रोड शो में करीब एक लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है। रोडशो की मार्ग योजना के अनुसार ट्रंप और मोदी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से सबसे पहले साबरमती आश्रम आएंगे।
कुछ दिन पहले ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा था कि दुनिया की सबसे पुरानी लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से 24 फरवरी को मिलेगी। इस दौरान ट्रंप सबसे बड़ी जनसमूह को एड्रेस करेंगे। ट्रंप और रूपाणी के दावे से उलट अब अहमदाबाद नगर निगम खुद कह रहा है कि लोगों की संख्या मात्र एक लाख हो सकती है। (एबीपी न्यूज/एजेंसी)
 

 


Date : 20-Feb-2020

जयपुर, 20 फरवरी । राजस्थान के नागौर में चोरी के आरोप में दो दलित भाइयों को पीटने का मामला सामने आया है। यह घटना रविवार की बताई जा रही है। एक पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने चोरी के आरोप में दोनों भाइयों की बुरी तरह से पिटाई की और कथित तौर पर प्राइवेट पार्ट पर पेट्रोल डाला। इस मामले में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है। 
बर्बरतापूर्ण मारपीट की इस घटना का वीडियो सामने आया है। जिसमें नागौर शहर के एक गांव में पेट्रोल पंप पर कुछ लोग दोनों भाइयों में से एक को पीटते दिखाई दे रहे हैं। 24 वर्षीय युवक अपने चचेरे भाई के साथ पेट्रोल पंप गया था।  मारपीट के बाद आरोपी यही नहीं रुके बल्कि उन्होंने कथित तौर उस युवक के प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल डाल दिया। 
दोनों भाइयों के पुलिस में शिकायत करने के बाद बुधवार को इस मामले में प्राथमिकी (स्नढ्ढक्र) दर्ज की गई है। 
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजपाल सिंह ने कहा, पंप के कर्मचारियों ने दो भाइयों को चोरी के आरोप में बुरी तरह से पीटा है। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। उन्होंने बुधवार को शिकायत दर्ज की है। पुलिस ने कहा कि इस मामले में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है। मामले की जांच चल रही है।(एनडीटीवी)
 


Date : 20-Feb-2020

लखनऊ, 20 फरवरी । उत्तर प्रदेश में एक स्कूल प्रिंसिपल छात्रों को नकल करने के तरीके बताते हुए कैमरे में कैद हो गए। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उत्तर प्रदेश सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड एग्जाम मंगलवार से शुरु हो चुके हैं। 
लखनऊ से 300 किलोमीटर दूर मऊ जिले में स्थित एक प्राइवेट स्कूल के मैनेजर-कम-प्रिंसिपल प्रवीण मल का वीडियो एक छात्र ने बना लिया था। वीडियो उस वक्त बनाया गया, जब वह छात्रों को संबोधित कर रहे थे। वीडियो में प्रिंसिपल कुछ अभिभावकों के सामने ही छात्रों को बोर्ड एग्जाम में नकल करने के तरीके बताते हुए दिख रहे हैं। एक छात्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शिकायत पोर्टल पर इस क्लिप को अपलोड कर दिया। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
दो मिनट लंबे वीडियो में प्रिंसिपल को यह कहते हुए सुना जा सकता है, मैं चुनौती दे सकता हूं कि मेरा कोई भी छात्र कभी भी फेल नहीं होगा। उन्हें डरने की कोई बात नहीं है। वीडियो में वह कह रहे हैं, आप आपस में बात कर सकते हैं और पेपर दे सकते हैं। किसी के हाथ न लगाएं। आप एक दूसरे से बोलते हैं... यह ठीक है। डरो मत। आपके सरकारी स्कूल परीक्षा केंद्रों के शिक्षक मेरे मित्र हैं। यहां तक कि अगर आप पकड़े जाते हैं और कोई आपको एक या दो थप्पड़ मारेगा तो डरें नहीं।
साथ ही उसने कहा, कोई भी जवाब नहीं छोडऩा। अपनी आंसरशीट में 100 रुपये का नोट रख देना। टीचर आंख बंद करके नंबर देंगे। अगर आपने किसी प्रश्न का गलत जवाब दिया और वह चार नंबर का था, तो आपको तीन नंबर मिल जाएंगे। इसके बाद वह अपना भाषण जय हिंद, जय भारत के नारे लगाकर खत्म कर देता है। 
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की मंगलवार से शुरू हुई हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में नकल को लेकर सख्ती के मद्देनजर परीक्षा के पहले ही दिन 2 लाख 39 हजार 133 विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। नकल पर अंकुश लगाने के लिए इस बार राजधानी लखनऊ में राज्य स्तरीय निगरानी एवं नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है जहां से पूरे प्रदेश के परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जा रही है। 
माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर सचिव (प्रशासन) शिव लाल ने बताया कि आज हाईस्कूल की परीक्षा में एक लाख 57 हजार 042 परीक्षार्थी और इंटरमीडिएट की परीक्षा में 82 हजार 091 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इसी तरह हाईस्कूल की परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए 26 छात्र और एक छात्रा पकड़ी गई, जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करते हुए सात छात्रों को पकड़ा गया।
उल्लेखनीय है कि नकल पर नकेल कसने के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक कंट्रोल रूम बनाया गया है और इनके ऊपर एक राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम बनाया गया है जिससे सभी कंट्रोल रूम जुड़े हैं। शिव लाल ने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं प्रदेशभर में 7,859 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जा रही है जहां एक लाख 90 हजार सीसीटीवी कैमरों की मदद से नजर रखी जा रही है। परीक्षाओं के सीधे प्रसारण (लाइव वेबकास्टिंग) के लिए राउटर एवं ब्राडबैंड से इन सीसीटीवी कैमरों को जोड़ा गया है।
वर्ष 2020 की हाईस्कूल की परीक्षा के लिए 30 लाख 22 हजार 607 परीक्षार्थियों और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए 25 लाख 84 हजार 511 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया है। हाईस्कूल की परीक्षा 3 मार्च को और इंटरमीडिएट की परीक्षा 6 मार्च को समाप्त होगी। इन परीक्षाओं के परिणाम 25 अप्रैल तक घोषित किए जाने की संभावना है।(एनडीटीवी)
 


Date : 20-Feb-2020

हुबली, 20 फरवरी । उत्तर कर्नाटक के गडग जिले में स्थित एक लिंगायत मठ ने परंपराओं को तोड़ते हुए एक मुस्लिम युवक को अपना प्रधान पुरोहित (पुजारी) बनाने का फैसला किया है। 26 फरवरी को इस पद को ग्रहण करने की तैयारी में जुटे 33 साल के दीवान शरीफ रहमानसाब मुल्ला ने कहा कि वह बचपन से ही 12वीं सदी के सुधारक बसवन्ना की शिक्षाओं से प्रभावित थे और वह सामाजिक न्याय तथा सद्भाव के उनके आदर्शों पर काम करेंगे। इस मठ के लिए सालों पहले शरीफ के पिता ने दो एकड़ जमीन दान की थी। 
आसुति गांव में स्थित मुरुगराजेंद्र कोरानेश्वरा शांतिधाम मठ में शरीफ को पुजारी बनाया जाएगा। यह मठ कलबुर्गी के खजुरी गांव के 350 साल पुराने कोरानेश्वर संस्थान मठ से जुड़ा हुआ है। खजूरी मठ के पुजारी मुरुगराजेंद्र कोरानेश्वर शिवयोगी ने कहा, बसव का दर्शन सार्वभौमिक है और हम अनुयायियों को जाति और धर्म की विभिन्नता के बावजूद गले लगाते हैं। उन्होंने 12 वीं शताब्दी में सामाजिक न्याय और सद्भाव का सपना देखा था और उनकी शिक्षाओं का पालन करते हुए, मठ ने सभी के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।
आसुति में शिवयोगी के प्रवचनों से प्रभावित होकर शरीफ के पिता स्वर्गीय रहिमनसब मुल्ला ने गांव में एक मठ स्थापित करने के लिए दो एकड़ जमीन दान की थी। शिवयोगी ने कहा कि आसुति मठ 2-3 साल से काम कर रहा है और परिसर का निर्माण जारी है। पुजारी ने कहा, शरीफ बसव के दर्शन के प्रति समर्पित हैं। उनके पिता ने भी हमसे लिंग दीक्षा ली थी। 10 नवंबर, 2019 को शरीफ ने दीक्षा ली। हमने उन्हें पिछले तीन वर्षों में लिंगायत धर्म और बासवन्ना की शिक्षाओं के विभिन्न पहलुओं को लेकर प्रशिक्षित किया है।
शरीफ ने बताया कि वह बचपन से ही बसव की शिक्षाओं के प्रति आकर्षित थे। उन्होंने कहा, मैं पास के मेनासगी गांव में आटा चक्की चलाता था और अपने खाली समय में बसवन्ना और 12 वीं शताब्दी के अन्य साधुओं द्वारा लिखे गए प्रवचन करता था। मुरुगराजेंद्र स्वामीजी ने मेरी इस छोटी सेवा को पहचान लिया और मुझे अपने साथ ले लिया। मैं बसवन्ना और मेरे गुरु द्वारा प्रचारित उसी रास्ते पर आगे बढ़ूंगा। 
शरीफ विवाहित हैं और वह तीन बेटियों तथा एक बेटे के पिता हैं। लिंगायत मठों में परिवार वाले व्यक्ति की पुजारी के तौर पर नियुक्ति भी असामान्य ही है। शिवयोगी ने कहा, लिंगायत धर्म संसार (परिवार) के माध्यम से सद्गति (मोक्ष) में विश्वास करता है। पारिवारिक व्यक्ति एक स्वामी बन सकता है और सामाजिक तथा आध्यात्मिक कार्य कर सकता है। उन्होंने कहा, मठ के सभी भक्तों ने शरीफ को पुजारी बनाने का समर्थन किया है। यह हमारे लिए बासवन्ना के आदर्श कल्याण राज्य को बनाए रखने का मौका है। (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 20-Feb-2020

कासरगोड (केरल), 20 फरवरी। केरल में एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच धार्मिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। केरल के कासरगोड में एक मुस्लिम परिवार ने गोद ली हुई हिंदू बेटी की शादी हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मंदिर में कराई। गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले ऐसे ही एक मस्जिद के अंदर एक हिंदू विवाह संपन्न कराया गया था। 
कासरगोड के भगवती मंदिर में रविवार को एक मुस्लिम परिवार ने अपनी हिंदू बेटी की शादी कराई। पारंपरिक हिंदू परिधान में सजी राजेश्वरी की शादी विष्णु प्रसाद के साथ हुई। इस दौरान परिवार और दोस्तों के अलावा हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद थे। राजेश्वरी की मां की उस वक्त मौत हो गई थी जब वह बच्ची थी। 
राजेश्वरी के पिता अब्दुल्ला और खदीजा के फार्म पर काम करते थे। उनकी मौत के बाद इस परिवार ने राजेश्वरी को गोद ले लिया। राजेश्वरी अब्दुल्ला और खदीजा के बच्चों शमीम, नजीब और शरीफ के साथ ही बड़ी हुई। 
गौरतलब है कि इस साल जनवरी में केरल के कयमकुलम की एक मस्जिद में हिंदू विवाह कराया गया था। चेरूवली मुस्लिम जमात मस्जिद के पास रहने वाली 22 वर्षीय अंजू की मां बिंदु ने मस्जिद कमिटी से मदद मांगी थी। मस्जिद कमिटी ने परिवार की मदद का फैसला किया। मस्जिद कमिटी अंजू की शादी में 2 लाख रुपये और 10 सोने के सिक्के उपहार में दिए। 1 हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। (एएनआई)
 


Date : 20-Feb-2020

नई दिल्ली, 20 फरवरी। एम्स में 48 घंटे के अंदर ब्रेन डेड घोषित दो लोगों के अंगदान से सात लोगों को जीवनदान मिला। इसमें से दो मरीजों को लिवर, चार मरीजों को किडनी व एक मरीज को दिल प्रत्यारोपित हुआ। एम्स के डॉक्टरों ने दोनों लिवर, दो किडनी व दिल का प्रत्यारोपण किया। वहीं दो किडनी आरएमएल अस्पताल में भेजी गई। जहां दो मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण हुआ। इसके अलावा अंगदान में मिले चारों कॉर्निया, चार हार्ट वाल्व व हड्डियां सुरक्षित टिश्यू बैंक में रखी गई हैं। इस तरह कई अन्य मरीजों की जिंदगी भी रोशन हो सकेगी।
एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दोनों डोनर के परिवार के जज्बे की तारीफ की है। एम्स में भर्ती किसी मरीज का मस्तिष्क काम करना बंद कर दे तो उसे ब्रेन डेड घोषित करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही मरीजों की मौत होने पर नोटिफिकेशन भी जारी किया जाता है। ताकि मरीज की मौत होने पर डॉक्टर व नर्स पीडि़त परिवार के लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें।
एम्स के अनुसार 26 वर्षीय सचिन नामक युवक को 13 फरवरी को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती किया गया था। वह उत्तर प्रदेश के कासगंज का रहने वाला था और मजदूरी करता था। दूसरी मंजिल से गिरने के कारण उसे गंभीर चोट लगी थी। 15 फरवरी को उसे डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। एम्स के ऑर्बो (ऑर्गेन रीट्रिवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन) की प्रभारी डॉ। आरती विज ने कहा कि काउंसलिंग के बाद परिजनों ने अंगदान की स्वीकृति दी। इसके बाद देर रात को दिल, लिवर, किडनी व दोनों कॉर्निया दान की प्रक्रिया पूरी हुई।
दिल 21 साल के एक युवक को प्रत्यारोपित किया गया। वहीं एम्स में लिवर 43 वर्षीय पुरुष मरीज को व एक किडनी 30 वर्षीय युवती को प्रत्यारोपित की गई। वहीं दूसरी किडनी आरएमएल में 34 वर्षीय युवक को प्रत्यारोपित की गई। वहीं 17 फरवरी की रात 61 वर्षीय अनिल मित्तल ने अंगदान किया। अनिल मित्तल का परिवार अंगदान के प्रति जागरूक है। परिवार के करीब 30 सदस्यों ने अंगदान की शपथ ले रखी है। अनिल मित्तल ने भी दधीचि देहदान समिति में अंगदान के लिए पंजीकरण कराया था। इसलिए उनके ब्रेन डेड होने पर परिवार के लोगों ने उनका हृदय, फेफड़ा, लिवर, दोनों किडनी, कॉर्निया व हड्डी दान की स्वीकृति दी। लेकिन हृदय व फेफड़ा प्रत्यारोपण के लिए योग्य नहीं पाया गया। इसलिए लिवर व एक किडनी अलग-अलग दो मरीजों को एम्स में प्रत्यारोपित किए गए।
एम्स में अंगदान से सांप्रदायिक सौहार्द की बेहतरीन मिसाल पेश की। आरएमएल अस्पताल के नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु महापात्रा ने बताया कि एम्स में जिस बुजुर्ग ने अंगदान किया उनकी एक किडनी आरएमएल में 17 वर्षीय नवयुवक को प्रत्यारोपित किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में खास बात यह है कि डोनर हिंदू हैं, जबकि जिस मरीज को किडनी प्रत्यारोपण हुआ वह मुस्लिम है।
उन्होंने कहा कि यह नवयुवक टाइप-1 मधुमेह से पीडि़त है। इस वजह से उसकी किडनी खराब हो गई और आंख की रोशनी भी जा चुकी है। वह उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला है। वह लंबे समय से डायलिसिस पर था। तीन साल से आरएमएल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। किडनी प्रत्यारोपण से उसे नया जीवन मिला है। (जागरण)

 


Date : 20-Feb-2020

नई दिल्ली, 20 फरवरी। दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ जज एस मुरलीधर के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में तबादले के बाद घमासान मच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के फैसले पर नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को 20 फरवरी से काम बंद करने का आग्रह किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिशन द्वारा पारित रिसोल्यूशन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के कोलिजियम के निर्णय पर बार एसोसिएशन अचंभित है और एक बेहतरीन जज के तबादले पर असंतोष व्यक्त करता है।
एसोसिएशन ने तबादले पर आपत्ति दर्ज कराई है। कहा गया है कि ऐसे तबादले न केवल हमारे संस्थाओं के लिए हानिकारक हैं, बल्कि आम आदमी का व्यवस्था से विश्वास उठाने जैसा है। प्रस्ताव में कहा गया कि हमें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम अपने फैसले पर दोबारा से विचार करेगी। रिसोल्यूशन की एक प्रति मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई है।
ऐसी घटना विरले ही देखी जाती है कि बार एसोसिएशन किसी जज के तबादले पर इस तरह से खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराए।
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे कर रहे हैं। उन्होंने ही दिल्ली हाई कोर्ट के तीसरे सबसे वरिष्ठ जज के तबादले की सिफारिश की है।
जस्टिस मुरलीधर के तबादले की चर्चा पहले भी दो बार हो चुकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों के विरोध के बाद इसे रोक दिया गया था। मुरलीधर के तबादले पर पहली बार दिसंबर 2018 में और फिर जनवरी 2019 में चर्चा हुई थी।
कॉलेजियम ने बोम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रंजीत मोरे का तबादला मेघालय हाई कोर्ट में और जस्टिस रवि विजयकुमार मलिमथ का तबादला कर्नाटक हाईकोर्ट से उत्तराखंड हाई कोर्ट किया गया है।
सिफारिशें 12 फरवरी को मानी गई हैं। पिछले हफ्ते जस्टिस सत्यरंजन धर्माधिकारी जो कि बाम्बे हाईकोर्ट की दूसरी सबसे वरिष्ठ जज थी उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। धर्माधिकारी के इस्तीफे के बाद मोरे दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों को कानून मंत्रालय द्वारा अभी स्वीकृति नहीं मिली है। अगर सरकार इसे कॉलेजियम के पास वापस भेजेगी तो दोबारा इस पर विचार करने का विकल्प कॉलेजियम के पास होगा।
मुरलीधर सहित दोनों जजों के पास कॉलेजियम से अपने फैसले पर विचार करने के लिए कहने का विकल्प है।
मुरलीधर के कड़े फैसले
जस्टिस मुरलीधर को 2006 में दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर जज नियुक्त किया गया था। 2023 में वो रिटायर होंगे। दिल्ली बार एसोसिएशन के अनुसार मुरलीधर कड़े फैसले देने वाले जजों में से माने जाते हैं।
जस्टिस मुरलीधर हाशिमपुरा नरसंहार मामले, 1984 में हुए सिख दंगों में शामिल रहे सज्जन कुमार के मामले में भी फैसला सुनाने वालों में से थे।
मुरलीधर दिल्ली हाईकोर्ट की उस बेंच में शामिल थे जिसने पहली बार 2009 में होमोसेक्सूएलिटी को डिक्रिमिनलाइज किया था। (दिप्रिंट)
 


Date : 20-Feb-2020

नई दिल्ली, 20 फरवरी । दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ 67 दिनों से धरना प्रदर्शन हो रहा है। इसके चलते शाहीन बाग में कालिंदी कुंज सडक़ बंद है। आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लगाई गई हैं, जिसके बाद शीर्ष कोर्ट ने शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए वार्ताकार नियुक्त किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बुधवार को वार्ताकार सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े और सीनियर एडवोकेट साधना रामचंद्रन शाहीन बाग पहुंचे। उन्होंने मंच पर पहुंचकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़ा और फिर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से सुलह के फॉर्मूले पर बातचीत की। इसके बाद वार्ताकार लौट गए और गुरुवार को फिर से वार्ताकार शाहीन बाग पहुंचेंगे।
शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद साधना रामचंद्रन ने कहा, हमने बुधवार को पहली मुलाकात की। शाहीन बाग में माताओं, बहनों और नागरिकों से मुलाकात की। बहुत अच्छा लगा। बुधवार तो बात पूरी हो नहीं पाई। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि हम गुरुवार को दोबारा आएं। अब हम गुरुवार को दोबारा आएंगे और बातचीत करेंगे। वार्ताकारों ने यह भी साफ किया कि वो सिर्फ बात करने आए हैं और जो भी सहमति बनेगी उस पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना है।
साधना रामचंद्रन ने कहा कि हम यहां कोई फैसला करने नहीं आए हैं। हम सिर्फ आपसे बात करने और आपको सुनने आए हैं। इससे पहले जब दोनों वार्ताकार शाहीन बाग के मंच पर पहुंचे, तो लोगों ने ताली बजाकर और नारे लगाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद वार्ताकार साधना रामचंद्रन ने कहा कि मीडिया हमारे समाज का अहम हिस्सा है, लेकिन हम मीडिया के सामने वार्ता नहीं करेंगे। हालांकि हम बाद में इसको लेकर मीडिया को ब्रीफ कर देंगे।
वार्ताकारों ने सबसे पहले दादियों को सुना
शाहीन बाग पहुंचे वार्ताकारों ने सबसे पहले धरना प्रदर्शन कर रहीं दादियों से बातचीत की। सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने कहा कि हम सबसे पहले शाहीन बाग की दादियों की बात सुनेंगे। इसके बाद बाकी महिलाओं से बात की जाएगी। संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हम यहां पर आप सभी की बात सुनने आए हैं। हम सबकी बात आराम से सुनेंगे।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वार्ताकारों के सामने अपनी बात रखी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चाहे हम पर गोली चलाई जाए, लेकिन जब तक नागरिकता संशोधन अधिनियम वापस नहीं ले लिया जाता है, तब तक हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हमको देशद्रोही कहा जा रहा है और कुछ लोग हमको गोली मारना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम देशद्रोही नहीं हैं, बल्कि देशभक्त हैं। हमने अंग्रेजों से लोहा लिया है।
प्रदर्शनकारी बोले- वार्ता करने सरकार क्यों नहीं आ रही
सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि आजादी हिंदुस्तान के लोगों के दिल में बसती है। आप जैसे लोग संविधान को आगे लेकर चलेंगे, तो देश में आजादी आगे बढ़ेगी। इस बीच एक प्रदर्शनकारी महिला ने वार्ताकार साधना रामचंद्रन से कहा कि यहां कोई जश्न नहीं मनाया जा रहा है। यहां प्रदर्शन किया जा रहा है और मौत हो रही हैं। सरकार को वार्ता करनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने आपको भेज दिया, लेकिन सरकार का क्या? सरकार वार्ता के लिए क्यों नहीं आ रही है?(आजतक)
 


Date : 20-Feb-2020

तमिलनाडु, 20 फरवरी। तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हुआ। अविनाशी शहर के पास केरल राज्य सडक़ परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की बस और कंटेनर ट्रक के बीच टक्कर हो गई। इस हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई। बस कर्नाटक के बेंगलुरु से केरल के एर्नाकुलम जा रही थी। 
अविनाशी के डिप्टी तहसीलदार ने बताया कि बस में 48 लोग सवार थे, जिसमें से 16 पुरुषों और 4 महिलाओं की मौत हो गई। मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। केरल के परिवहन मंत्री ए के ससीन्द्रन ने कहा कि मृतकों और घायलों में ज्यादातर पलक्कड़, त्रिशूर और एर्नाकुलम के रहने वाले हैं। अधिकारियों का कहना है कि ट्रक गलत दिशा में खड़ी थी।
तिरुपुर के जिला कलेक्टर ने भी कहा कि बस में 48 लोग सवार थे। करीब 20 लोग मारे गए हैं। हम पलक्कड़ कलेक्टर से बात कर रहे हैं। वह एक टीम भी भेज रहे हैं। हम शवों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं और परिवारों को तत्काल राहत दिलाने के लिए काम कर रहे हैं। अन्य यात्रियों के लिए लाइफ सपोर्ट गाडिय़ों की व्यवस्था की जा रही है।
केरल के परिवहन मंत्री एके सशीनधरन तिरुपुर में दुर्घटना स्थल का दौरा करेंगे। वह जल्द ही तिरुवनंतपुरम से रवाना होंगे। केरल का परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग शवों और घायलों को वापस लाने की कोशिश में जुट गया है। (आजतक)
 


Date : 20-Feb-2020

रवीश पाल सिंह
भोपाल, 20 फरवरी । भोपाल में बीते 72 दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों के लिए बुधवार का दिन बेहद भावुक करने वाला रहा। बुधवार दोपहर को धरना दे रही एक महिला अतिथि विद्वान ने अपने केश त्यागते हुए सार्वजनिक रूप से खुद का मुंडन करवा लिया। मुंडन करवाने वाली महिला अतिथि विद्वान का नाम डॉक्टर शाहीन खान है।
मुंडन करवाने के बाद, आजतक, से बात करते हुए वह भावुक हो गईं और कहा कि चुनाव के बाद अतिथि विद्वानों से कांग्रेस ने वादा किया था कि सरकार बनने पर हमारी मांगों को पूरा किया जाएगा। हमने साल भर तक इंतजार किया और उसके बाद ही हमने जब आंदोलन शुरू किया तो अतिथि विद्वानों को फालेन आउट नोटिस मिलना शुरू हो गए। हम यहां दो महीने से ठंड में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने हमारी कोई सुध नहीं ली। हमने बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य बनाया लेकिन अब खुद हमारा भविष्य अंधकारमय है इसलिए यहां से लिखित आर्डर मिलने तक हम नहीं उठेंगे। 
वहीं, अतिथि विद्वान नियमतिकरण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवराज सिंह ने कहा कि इससे दुखदाई दिन अतिथि विद्वानों के लिए नहीं हो सकता, क्योंकि एक महिला ने अपने केश त्याग दिए। डॉक्टर शाहीन ने जो बाल मुंडवाए हैं उसे हम राहुल गांधी के पास भेजेंगे ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके दिए गए वचन का यहां पालन नहीं हो रहा है।  
वहीं, महिला अतिथि विद्वान के मुंडन करवाने के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर ट्वीट कर निशाना साधा है। शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ का फरवरी 2018 का एक पुराना ट्वीट शेयर करते हुए लिखा है कि मुख्यमंत्री जी, आज भी केश नारी के सम्मान का प्रतीक है। अतिथि विद्वान बहनों ने आपकी सोती हुई सरकार को नींद से जगाने के लिए अपने केश त्यागे, क्या आज आपको उनकी पीड़ा का अंदाजा है? क्या आपकी नजर में आज प्रदेश शर्मसार हुआ? क्या उनकी भलाई के लिए आप कोई कदम उठाएंगे?
दरअसल, जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे तब कमलनाथ ने महिला अतिथि विद्वान के मुंडन कराने पर शिवराज को घेरते हुए इसे दिल को झकझोरने वाली घटना कहा था। अपने नियमतिकरण की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के अतिथि विद्वान 2 दिसंबर 2019 से आंदोलन कर रहे हैं जो अबतक जारी है।(आजतक)
 


Date : 20-Feb-2020

नई दिल्ली, 20 फरवरी । निर्भया गैंगरेप और मर्डर के दोषियों के पास फांसी टालने का विकल्प खत्म होने लगा तो अब वो नए तिकड़म में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि चारों दोषियों में एक विनय शर्मा ने सोमवार को जेल की दीवार पर माथा पटककर खुद को घायल कर लिया। वह तिहाड़ जेल के बैरक नंबर तीन में रह रहा है। जेल अथॉरिटीज ने कहा कि निर्भया के दोषियों पर वॉर्डन इन-चार्ज की कड़ी नजर रहती है, फिर भी विनय खुद को चोट पहुंचाने में सफल हो गया। हालांकि, वॉर्डन ने उसे रोका, लेकिन तब तक वह घायल हो चुका था। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक चिकित्सा के बाद उसे छोड़ दिया गया। 
सूत्रों ने कहा कि विनय ने जेल के ग्रिल्स में अपना हाथ फंसाकर फ्रैक्चर करने की भी कोशिश की। उसके वकील एपी सिंह ने कहा कि यह घटना 16 फरवरी को हुई थी और विनय की मां ने उन्हें अगले दिन इसकी जानकारी दी थी। 17 फरवरी को विनय ने अपनी मां को पहचानने से भी इनकार कर दिया था। सिंह ने कहा कि विनय की मानसिक अवस्था ठीक नहीं है और नया डेथ वॉरंट जारी होने के बाद से उसकी दिमागी हालत बिगड़ गई है।
हालांकि, जेल अधिकारियों का कहना है कि विनय के साथ बातचीत में इसका कोई संकेत नहीं मिला। एक अधिकारी ने कहा, वह बिल्कुल स्वस्थ है और हाल ही में हुए साइकोमेट्री टेस्ट में वह बिल्कुल दुरुस्त निकला। एक सीनियर ऑफिसर ने कहा कि 3 मार्च का नया डेथ वॉरंट जारी होने के बाद से जेल वॉर्डन और गार्ड के साथ चारों दोषियों का रवैया बेहद आक्रामक हो गया है। उनका व्यवहार बिल्कुल बदल गया है। हालांकि, उनका खान-पान पहले की तरह ही है। विनय शर्मा और मुकेश सिंह ने खाने से जरूर इनकार कर दिया था, लेकिन बहुत मनाने के बाद मान गया। 
मुकेश, अक्षय, विनय और पवन- निर्भया के इन चारों दोषियों में कोई भी आत्महत्या करने की कोशिश नहीं करे, इसके लिए चार लोगों को उनकी निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है। वॉर्डन्स को चौबीसों घंटे दोषियों के सेल में लगे सीसीटीवी कैमरों पर पर नजर रखने को कहा गया है। साथ ही, उनके सेल के बाहर गार्ड्स तैनात हैं। जेल के दूसरे कैदियों के साथ इनका संपर्क बेहद सीमित कर दिया गया है ताकि किसी कैदी का इनके साथ भावनात्मक रिश्ता न बन जाए। 
चारों को अपने-अपने माता-पिता से मिलने की इजाजत है, हालांकि कई बार उन्होंने मिलने से इनकार भी किया है। उन्हें मानसिक तौर पर बिल्कुल चुस्त-दुरुस्त रखने के सारे प्रयास किए जा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि फांसी की सजा पाए दोषी कई बार इसलिए हिंसक व्यवहार करते हैं ताकि उन्हें चोट पहुंचे और वह फांसी को कुछ और वक्त तक टालने में कामयाब रहें। जेल अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई दोषी घायल हो जाता है या उसका वजन कम हो जाता है तो स्वस्थ होने तक उसकी फांसी टाली जा सकती है। (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 20-Feb-2020

दिल्ली, 19 फरवरी । नारायणा इलाके में बदमाशों ने एक कार चोरी करने के बाद आंध्रा बैंक का एटीएम भी उखाड़ लिया। सही समय पर मालिक को कार चोरी होने की जानकारी मिल गई और उसने जीपीएस की मदद से न केवल कार का पीछा किया बल्कि उसका इंजन भी बंद कर दिया। कार का इंजन बंद होने के बाद वह से आरके पुरम क्षेत्र में छोडक़र फरार हो गए। पुलिस ने बलेरो और एटीएम को जब्त कर फरार बदमाशों की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार हरमेंद्र सिंह सपरिवार राजौरी गार्डन में रहता है। उसका ट्रांसपोर्ट का कारोबार है और उसका कार्यालय नारायणा इलाके में है। उसके कर्मचारी भगवान कुमार ने 16 फरवरी की देर रात ढाई बजे उसे फोन कर बताया कि कार्यालय के बाहर खड़ी बलेरो कार चोरी हो गई है। कार में जीपीएस लगा हुआ था। उसने अपने मोबाइल पर जीपीएस की मदद ली तो पता चला कि बदमाश कार को लेकर धौला कुंआ के पास से गुजर रहे हैं। उसने तुरंत अपने बेटे भवनीत के साथ कार से बदमाशों का पीछा किया।
थोड़ी देर बाद बदमाश कार को लेकर आरके पुरम इलाके में पहुंच चुके थे। हरमेंद्र ने जीपीएस की मदद से कार के इंजन को बंद कर दिया और पीछा करते हुए आरके पुरम पहुंच गए। सेक्टर 13 पालिका भवन के पास कार खड़ी थी। कार में कोई मौजूद नहीं था। जांच करने पर कार के पिछले हिस्से में आंध्रा बैंक का एक एटीएम और स्प्रे का डिब्बा पड़ा था। उसने तुरंत घटना की जानकारी पुलिस को दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन शुरू की। इस दौरान पता चला कि बदमाश नारायणा इलाके से आंध्रा बैंक का एटीएम एक बलेरो कार पर लादकर भागे हैं। पुलिस ने कार और एटीएम को जब्त कर लिया। नारायाणा पुलिस ने हरमेंद्र के बयान पर मामला दर्ज कर बदमाशों की तलाश शुरु कर दी है।(अमर उजाला)
 


Date : 19-Feb-2020

नई दिल्ली, 19 फरवरी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक खत्म हो गई है। महंत नृत्यगोपाल दास ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे, जबकि वीएचपी नेता चंपत राय को महामंत्री बनाया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी गोविंद गिरी को मिली है। इस बैठक में 9 प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
 राम मंदिर का निर्माण कब शुरू होगा, इस पर अभी फैसला होना बाकी है। 15 दिन बाद ट्रस्ट के पदाधिकारी अयोध्या में फिर मिलेंगे। इसके बाद ही राम मंदिर निर्माण की तारीख तय होगी। 
नृत्यगोपाल दास ट्रस्ट के नए अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास ने कहा कि राम मंदिर का मॉडल वही रहेगा, लेकिन उसे और ऊंचा और चौड़ा करने के लिए प्रारूप में थोड़ा बदलाव किया जाएगा। 
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक खत्म हो गई है। महंत नृत्यगोपाल दास ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे, जबकि वीएचपी नेता चंपत राय को महामंत्री बनाया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी होंगे। इस बैठक में 9 प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
वैष्णव वैरागी अखाड़ों की निर्वाणी अणी के महंत और अयोध्या में हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास भी ट्रस्ट की बैठक के दौरान पहुंच गए। लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं किया गया। उन्हें बैठक कक्ष के बाहर ही एक अन्य कमरे में बैठा दिया गया। महंत धर्मदास काफी समय से ट्रस्ट में शामिल होने की मांग कर रहे थे। वो पुजारी बनना चाहते हैं।सूत्रों के मुताबिके, उन्होंने ट्रस्ट में शामिल न करने और रामलला की सेवा पूजा का अधिकार न देने की सूरत में अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। बैठक के बाद उनको समझाने बुझाने की कवायद भी हो सकती है। (आजतक)


Date : 19-Feb-2020

संजय शर्मा

नई दिल्ली, 19 फरवरी : दिल्ली के शाहीन बाग में केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह का रास्ता खुल सकता है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकार वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और वरिष्ठ वकील साधना रामचंद्रन बुधवार को शाहीन बाग पहुंचे हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सुलह के फॉर्मूले पर बातचीत की. इसके बाद वार्ताकार लौट गए.
शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद वार्ताकार साधना रामचंद्रन ने कहा कि हमने आज शाहीन बाग में माताओं, बहनों और नागरिकों से पहली मुलाकात की. बहुत अच्छा लगा. आज बात तो पूरी हो नहीं पाई, आज शुरूआत ही हुई है. वो चाहते हैं कि हम कल दोबारा आए, हम कल दोबारा आएंगे.
इससे पहले जब वार्ताकारों ने प्रदर्शनकारियों से पूछा कि रास्ता कैसे खुलेगा, तो प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) वापस नहीं लिया जाता है, तब तक हम एक इंच भी पीछ नहीं हटेंगे, फिर चाहे कोई हम पर फायरिंग ही क्यों न करे. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम पर देशद्रोही होने का आरोप लगाया जा रहा है. कुछ लोग हमको गोली मारना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि हम देशद्रोही नहीं हैं, बल्कि देशभक्त हैं. हमने अंग्रेजों से लोहा लिया है. वहीं, इससे पहले जब वार्ताकार शाहीन बाग के प्रदर्शन मंच पर पहुंचे, तो लोगों ने उनका तालियां बजाकर स्वागत किया. इसके बाद वार्ताकारों ने कहा कि मीडिया की मौजूदगी में हम प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत नहीं करना चाहते हैं. मीडिया पहले हमें प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने दे. इसके बाद हम इसकी जानकारी मीडिया को देंगे.
वहीं, मीडिया कर्मियों का कहना था कि उन्हें सवाल पूछने दिए जाएं. हालांकि वार्ताकारों ने मना कर दिया और कहा कि हम मीडिया को बाद में ब्रीफिंग दे देंगे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों का भी यह कहना था कि मीडिया को यहां रहने दिया जाए. इसके बावजूद अगर किसी तरह की कोई असुविधा होती है, तो मीडिया को जाने के लिए हम कह देंगे. इस दौरान कुछ महिलाएं भी मीडिया की मौजूदगी का विरोध किया.
प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर संजय हेगड़े ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि हमारे पास वक्त है. हम आपको सुनने आए हैं. संजय हेगड़ ने मंच पर पहुंचकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी पढ़ा. उन्होंने कहा कि प्रोटेस्ट की इजाजत सबको है, लेकिन किसी को रास्ता रोकने का अधिकार नहीं है. संजय हेगड़े ने यह भी कहा कि हम यहां फैसला सुनाने नहीं आए हैं, बल्कि वार्ता करने आए हैं.
वार्ताकार बोले- सबसे पहले 'दादी' को सुनेंगे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए वार्ताकारों ने बुधवार को शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत की. इस दौरान वार्ताकार संजय हेगड़े ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि हम सबकी बात सुनने आए हैं. हमको न कोई जल्दबाजी और न ही कोई हड़बड़ी है. उन्होंने कहा कि हम सबसे पहले 'दादी' की और फिर उम्र में बड़े लोगों की बात आराम से सुनेंगे. हम सुनना और समझना चाहते हैं. हम कम बोलेंगे और ज्यादा सुनेंगे.
वार्ताकार संजय हेगड़े बोले- आप संविधान को आगे लेकर जाएंगे
संजय हेगड़े ने एक प्रदर्शनकारी महिला से बात करने के बाद कहा, 'मैं आपकी बात से बेहद प्रभावित हुआ हूं. मेरे बच्चे बड़े-बड़े लॉ कॉलेज में पढ़ते हैं, लेकिन वो भी शायद इतने अच्छे से अपनी बात नहीं रख पाते हैं.' सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि आजादी हिंदुस्तान के लोगों के दिल में बसती है. आप जैसे लोग संविधान को आगे लेकर चलेंगे, तो देश में आजादी आगे बढ़ेगी.
एक प्रदर्शनकारी महिला ने सवाल किया, 'क्या दिल्ली पुलिस को यहां की वीडियोग्राफी करने की इजाजत है? इसके जवाब में सीनियर एडवोकेट साधना रामचंद्रन ने कहा कि आपके आंदोलन के हक को सुप्रीम कोर्ट अच्छे से जानता है.
वार्ताकारों से प्रदर्शनकारी महिला ने कहा- यहां जश्न नहीं मना रहे हैं
एक प्रदर्शनकारी महिला ने वार्ताकार साधना रामचंद्रन से कहा कि यहां कोई उत्सव नहीं मनाया जा रहा है. यहां प्रदर्शन किया जा रहा है और मौत हो रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार से वार्ता होनी चाहिए थी, लेकिन हम इस लायक भी नहीं कि हमारी बात सुनी जाए? सुप्रीम कोर्ट ने आपको भेज दिया, लेकिन सरकार का क्या? सरकार वार्ता के लिए क्यों नहीं आ रही है.
एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा कि असम का मॉडल हमारे सामने है. कितने लोगों का नाम असम में हुए एनआरसी की लिस्ट से बाहर है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले हमको बुलाया और फिर आने नहीं दिया. सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ' की बात करती है, लेकिन जब बेटी आवाज उठाती है, तो उसको पिटवाया जाता है. हमने 70  साल पहले जिस पाकिस्तान के आइडिया को नकारा था, उसको अब अपनाया जा रहा है.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार आकर हमको समझाए कि सीएए नागरिकता देने का कानून है, नागरिकता लेने का नहीं हैं. हम सुप्रीम कोर्ट से अपील करना चाहेंगे कि चाहे हमको मरवा दे, लेकिन हमसे प्रोटेस्ट करने का अधिकार न ले.
मीडिया के सामने नहीं होगी बातचीत
इससे पहले सीनियर एडवोकेट साधना रामचंद्रन ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको प्रदर्शन करने का हक है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि आप आंदोलन कर सकते हैं, लेकिन यह हक वहीं तक होना चाहिए, जहां तक दूसरों का हक न रुके. प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन रोड ब्लॉक करना, मेट्रो रोकना और पब्लिक रास्ता रोकना सही नहीं है. इस मामले का हल मिलकर निकालें. सरकार और प्रदर्शन पर बैठे लोगों को इसका हल निकालना है. इस मामले का हल ऐसे तरीके से निकालें कि यह लोगों के लिए नजीर बन जाए. साधना रामचंद्रन और संजय हेगड़े ने कहा कि हम मीडिया के बिना बातचीत करेंगे.
वजाहत हबीबुल्लाह बोले- हम चाहते हैं कि संविधान की रक्षा हो
संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन के बाद शाहीन बाग के मंच पर पहुंचे वार्ताकार वजाहत हबीबुल्लाह ने प्रदर्शनकारियों से कहा, 'हमें सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है. हम आपकी बात सुनने के लिए आए हैं. हम चाहते हैं कि संविधान की रक्षा हो. यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को ध्यान में रखा है और हमें यहां पर भेजा है. हम यहां पर न्याय संगत बात करने के लिए आए हैं. सुप्रीम कोर्ट भी इस बात से चिंतित है और इसी वजह से हमें नियुक्त किया है, ताकि कोई बीच का रास्ता निकले. हम आप सभी की बात सुनेंगे.' इस दौरान हबीबुल्लाह के साथ एडवोकेट तस्लीमा भी मौजूद रहीं.
67 दिनों से जारी है विरोध प्रदर्शन
दिल्ली के शाहीन बाग पहुंचने से पहले सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने ट्वीट कर लोगों से सुझाव मांगा. संजय हेगड़े ने ट्वीट में कहा, 'मैं शाहीन बाग जा रहा हूं. कोई सुझाव.' अब लोग संजय हेगड़े को ट्विटर पर सुझाव भी दे रहे हैं. शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ 67 दिन से धरना जारी है.
बुधवार को संजय हेगड़े शाहीन बाग पहुंचे, तो वजाहत हबीबुल्लाह भी प्रदर्शन स्थल पहुंच गए. वार्ताकारों के जाने के बाद वजाहत हबीबुल्लाह मंच पर पहुंच गए. सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए एक वार्ताकार पैनल का गठन किया था, जिसमें पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन शामिल हैं.
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शाहीन बाग में सड़क पर डटे प्रदर्शनकारी वार्ताकारों से बातचीत को तैयार हो गए हैं, लेकिन अपनी मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं. शाहीन बाग में धरने पर डटी 'दादी' वार्ताकारों से बातचीत की अगुवाई करेंगी. हालांकि, प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जब तक सीएए नहीं हटता, हम धरने से नहीं हटेंगे.
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रास्ता खुलवाने पर है सबका जोर
सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग पर चल रही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि देश में प्रोटेस्ट का अधिकार सबको है लेकिन सड़क बंद करने का अधिकार किसी को नहीं है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की पहल शाहीनबाग के प्रदर्शनकारी मध्यस्थता के बाद प्रदर्शन खत्म कर सकते हैं.
एक तरफ जहां केंद्र सरकार कई बार साफ कर चुकी है कि किसी भी कीमत पर नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) से पीछे नहीं हटेगी, वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक यह कानून वापस नहीं होता, प्रदर्शन जारी रहेगा. (Aajtak)


Date : 19-Feb-2020

नई दिल्ली, 19 फरवरी। राममंदिर आंदोलन के खास किरदार रहे महंत नृत्यगोपाल दास और विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय सरकार की ओर से गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी होने जा रहे हैं। इसकी पुष्टि आफिसियो ट्रस्टी जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने की।

इसी के साथ अयोध्या से पांचों ट्रस्टी मंगलवार रात दिल्ली पहुंच गए हैं। हालांकि ट्रस्ट से किसी को एजेंडा नहीं मिला है, सिर्फ इतना निर्देश है कि बैठक शुरू होने से तीन घंटे पहले ट्रस्टी के. परासरन के घर स्थित पंजीकृत कार्यालय पहुंचना होगा।

ट्रस्ट के प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि शीर्ष स्तर से महंत नृत्यगोपाल दास व चंपत राय की भूमिका तय हो चुकी है। दोनों ट्रस्टी बनने के बाद अहम पद भी संभालेंगे।

आफिसियो ट्रस्टी अनुज कुमार झा ने बताया कि ट्रस्ट का एजेंडा बुधवार को सभी ट्रस्टियों को मिल जाएगा। बैठक शाम पांच बजे से 8 बजे तक प्रस्तावित है।

यह तय हो चुका है कि महंत नृत्य गोपाल दास व चंपत राय को ट्रस्ट में शामिल करने का प्रस्ताव आएगा।

इसीलिए दोनों को बैठक स्थल पर बुलाया गया है। बताया कि बोर्ड ऑफ ट्रस्टी जब पदाधिकारियों का चुनाव करेंगे, तब महंत के अध्यक्ष बनने की बात सामने आएगी।

राममंदिर ट्रस्ट की पहली बैठक में शामिल होने गए यहां के ट्रस्टियों के पास कई मुद्दे हैं। सबसे बड़ी चुनौती निर्मोही अखाड़े से चुने गए प्रतिनिधि ट्रस्टी दिनेंद्र दास के समक्ष है, उन्हें अखाड़े के छह पंचों को ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा उठाना है।

साथ ही निर्मोही अखाड़े को पूजा का अधिकार की मांग करनी है, जबकि डीएम समेत अन्य ट्रस्टियों ने रामालय ट्रस्ट की ओर से वाराणसी में राममंदिर के लिए स्वर्णदान लेने पर रोक समेत राममंदिर बनवाने के नाम पर बने अन्य ट्रस्टों की परिसंपत्तियों को फ्रीज करके उपयोग में लेने का मुद्दा भी उठेगा। (अमर उजाला)


Date : 19-Feb-2020

नई दिल्ली, 19 फरवरी। सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के मामले की आज सुनवाई हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के समय मांगा। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोवडे ने कहा कि हम चाहते है कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कोर्ट में आकर यह बताएं कि समस्या कहां आ रही है।
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगर केंद्रीय मंत्री को सुप्रीम कोर्ट बुलाया जाएगा तो इसका राजनीतिक असर पड़ेगा। इस पर चीफ जस्टिस एसए बोवडे ने कहा कि कोर्ट ने फिलहाल ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया है। यह सुझाव है।
सीजेआई ने पूछा, क्या परिवहन मंत्री आकर हमें जानकारी दे सकते हैं? इसे समन नहीं निमंत्रण समझें क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में योजना की साफ तस्वीर अधिकारियों से ज्यादा स्पष्ट उन्हें होगी।
केंद्र सरकार को चार हफ्ते की मोहलत
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में मीटिंग कर इलेक्ट्रिक वाहनों से संबधित मामले में विचार करने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को लेकर समझौता नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न केवल दिल्ली-एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है।
अपनी नीति का पालन नहीं कर रही सरकार
दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की अपनी खुद की नीति का पालन करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। वरीष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह योजना वायु प्रदूषण पर रोक लगाने और कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए तैयार की गई थी।
अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए?
प्रशांत भूषण ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों को ठीक से चार्ज करने के लिये बुनियादी सुविधायें विकसित करने की आवश्यकता है। पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह बताने के लिए कहा था कि इस योजना के क्रियान्वयन के लिए उसने अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं? (आज तक)

 


Date : 19-Feb-2020

नई दिल्ली, 19 फरवरी। आगरा के ताजमहल को कौन नहीं जानता? ताजमहल की खूबसूरती की दीदार करने दुनियाभर से लोग आते हैं। लेकिन इस बार मामला कुछ खास है। इस बार इसका नजारा लेने आ रहे हैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। 
जाहिर है डोनाल्ड ट्रंप घूमते हुए ताजमहल के पीछे की तरफ जाएंगे, जहां यमुना बहती हैं। यमुना की गंदगी की हालत पूरी दुनिया को पता है। उससे आती हुई बदबू से लोगों की हालत खराब हो जाती है। ट्रंप को बदबू न आए, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नया कदम उठाया है। 
उत्तर प्रदेश सरकार की सिंचाई विभाग ने फैसला लिया है कि वह यमुना में बुलंदशहर के गंगा नहर से 500 क्यूसेक पानी छोड़ेगा। ताकि यमुना थोड़ी साफ और बहती हुई दिखाई पड़े। पानी में बहाव बढ़ेगा तो बदबू कम होगी। 
ट्रंप 23 से 26 फरवरी तक भारत में रहेंगे। ज्यादातर समय दिल्ली में ही बीतेगा। लेकिन ये भी संभावना है कि ट्रंप अहमदाबाद या आगरा जा सकते हैं। इसलिए ऐसे में दोनों शहरों को चमकाया जा रहा है। 
उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि बुलंदशहर से छोड़ा गया पानी 21 फरवरी तक आगरा के यमुना नदी तक पहुंच जाएगा। इससे यमुना नदी की पर्यावरणीय स्थिति में काफी ज्यादा सुधार आने की उम्मीद है।
सिंचाई विभाग का कहना है कि उसका प्रयास ये है कि 24 फरवरी तक यमुना में गंगाजल का बहाव लगातार बना रहे। इससे यमुना में घुले ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी। यमुना का पानी इससे पीने लायक तो नहीं होगा लेकिन इससे बदबू में कमी आने की पूरी संभावना है। 
हैरतअंगेज बात ये है कि पर्यावरण के लिए काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा का पानी यमुना में डालने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। एक-दो दिन के लिए यमुना को थोड़ा ठीक किया जा सकता है लेकिन हमेशा के लिए नहीं। (आज तक)

 


Date : 19-Feb-2020

नई दिल्ली, 19 फरवरी । रिकॉर्ड तोड़ सर्दी के बाद फरवरी में ही गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग की मानें तो इस बार फरवरी में दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों का तापमान औसत से ज्यादा रह सकता है।
इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि इन शहरों के लोगों को ज्यादा गर्मी और पानी की कमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि गर्मी ने उत्तर के मैदानी इलाकों में दस्तक देने से पहले तटीय क्षेत्रों में असर दिखाना शुरू कर दिया है। हवाओं के बदले रुख के कारण दिल्ली में 10 फरवरी के बाद तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। बीते 10 दिनों में तापमान में 5 डिग्री से ज्यादा की वृद्धि हुई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मार्च-अप्रैल में भारत के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा तापमान की रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक अप्रैल में, दिल्ली, यूपी, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, एमपी और महाराष्ट्र में औसत तापमान के 1 डिग्री से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहने की संभावना है।
फरवरी पहले ही महाराष्ट्र समेत तटीय क्षेत्रों के लिए सर्दी में गर्म हो गया है और यहां अगले दो महीनों में गर्मी की बढऩे की संभावना है। मुंबई में मंगलवार को अधिकतम तापमान का 39 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाना, इसका ताजा उदाहरण है। मौसम विभाग के अनुसार फरवरी में 1966 के बाद मुंबई में अब तक का सर्वाधिक तापमान 17 फरवरी को 38.1 डिग्री सेल्सियस और 18 फरवरी को बढक़र 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था।
इससे पहले मुंबई में 25 फरवरी 1966 को अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। विभाग की पूर्वानुमान इकाई की प्रमुख वैज्ञानिक सती देवी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि फरवरी के तीसरे सप्ताह में तटीय इलाकों में तापमान के स्तर में लगतार बढ़ोतरी हो रही है।
उन्होंने बताया, भारत में सामान्य तौर पर पश्चिम के तटीय इलाकों से गर्मी की शुरुआत होती है लेकिन तापमान में इजाफे के लिये जिम्मेदार मानी जाने वाली हवाओं के रुख में तेजी को देखते हुये इस साल फरवरी में ही तापमान रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है।
मंगलवार को मुंबई का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस और अहमदाबाद में 33 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा पुणे और हैदराबाद में भी पारा 30 डिग्री के स्तर को पार कर गया है। मौसम विभाग ने बढ़े हुए तापमान को देखते हुए ग्रीष्म लहर (हीट वेव) से बचाव के बारे में मंगलवार को परामर्श जारी कर दिया।
इसका मतलब यह है कि जब मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री पर पहुंचता है कि इलाके में ग्रीष्म लहर की स्थिति घोषित कर दी जाती है।(आजतक)

 

 

 


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