राष्ट्रीय

Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी । रेलवे में ई-टिकट की कालाबाजारी करने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। गिरोह के सरगना गिरिडीह निवासी गुलाम मुस्तफा को दस दिन पहले भुवश्नेश्वर से गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ 27 अन्य लोगों को पकड़ा गया है। गुलाम के पास से जब्त लैपटॉप और मोबाइल के साक्ष्य के आधार पर धनबाद रेल मंडल के पांच रिजर्वेशन टिकट एजेंटों को आरपीएफ ने उठाया है। उनसे पूछताछ हो रही है। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि पांच साल से सक्रिय यह गिरोह 1000 करोड़ रुपये कमा चुका था। गिरोह के तार दुबई, पाक और बांग्लादेश तक फैले हैं। गिरोह के सदस्य टिकट कालाबाजारी की कमाई आतंकवाद फंडिंग, मनीलॉड्रिंग व गैर कानूनी कार्यों में इस्तेमाल करते थे।  मुस्तफा के पास से आईआरसीटीसी के 563 निजी आईडी पाए गए हैं। एसबीआई की 2400 और ग्रामीण बैंक की 600 शाखाओं की सूची मिली है। संदेह है कि इन बैंकों में उसके खाते हैं। इसकी जांच हो रही है। गुलाम ने टिकट कालाबाजारी से शुरुआत की और ट्रेनिंग लेकर सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गया।
फर्जी आधार-पैन बनाते थे
गुलाम मुस्तफा और गिरोह से जुड़े देश भर में फैले तमाम एजेंट एएनएमएस नामक सॉफ्टवेयर की मदद से रेलवे के तत्काल टिकट बुक किया करते थे। टिकट बुकिंग के लिए ये लोग फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनाते थे। 
दुबई भेज रहे थे पैसा  
आरपीएफ डीजी ने बताया कि कमाई का पैसा तीन हजार खातों के जरिए विदेश भेजा जाता था। बड़ी रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर दुबई में बैठे आकाओं तक पहुंचता था। मास्टरमाइंड मुस्तफा बेंगलुरु से गिरोह चला रहा था। उसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला था।  
हर माह 15 करोड़ रुपए कमा रहा था मुस्तफा
गिरिडीह के बिरनी में रहनेवाला गुलाम मुस्तफा बेंगलुरु में बैठक कर अंतरराष्ट्रीय ई-टिकट फर्जीवाड़ा का गिरोह का संचालन कर रहा था। आईआरसीटीसी का सिस्टम हैक कर पूरे देश में हर महीने 10 से 15 करोड़ रुपए के रेल टिकटों की कालाबाजारी हो रही थी। गुलाम मुस्तफा के गिरोह का तार देश के कोने-कोने में फैला है। उसके पास से जब्त लैपटॉप और मोबाइल के साक्ष्य के आधार पर धनबाद रेल मंडल के पांच रिजर्वेशन टिकट एजेंटों को आरपीएफ ने उठाया है। उनसे पूछताछ हो रही है।
धनबाद डिवीजन के हजारीबाग रोड आरपीएफ पोस्ट में इस संबंध में दो मामले भी दर्ज किए गए हैं। आरपीएफ के सीनियर कमांडेंट हेमंत कुमार ने बताया कि आरपीएफ मुख्यालय से मिले इनपुट पर सरिया, हजारीबाग, गोमिया, विष्णुगढ़ और चिचाकी आदि क्षेत्रों के कई लोगों से गुलाम मुस्तफा के प्रत्यक्ष संबंध के संकेत मिले हैं। स्थानीय पुलिस की सहायता से आरपीएफ गुलाम मुस्तफा के धंधे से जुड़े लोगों तक पहुंचने के प्रयास में है। कई लोगों के बैंक खाते, लैपटॉप और मोबाइल खंगाले जा रहे हैं। उनसे पूछताछ हो रही है। इसके पास मिले फर्जी आईआरसीटीसी आईडी और सॉफ्टवेयर की जांच हो रही है। आईआरसीटीसी के टेक्निकल विंग से भी इनके खिलाफ जानकारी मांगी गई है।
ऐसे करता था फर्जीवाड़ा : आरपीएफ कमांडेंट ने बताया कि गुलाम मुस्तफा ने बेंगलुरु में टिकटों की कालाबाजारी शुरू की थी। वह डॉर्कनेट के माध्यम से सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर फटाफट तत्काल टिकट बनाता था। एजेंटों से संपर्क कर उन्हें एएनएमएफ सॉफ्टवेयर बेचे जाते थे। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही तत्काल टिकटों की बुकिंग शुरू होने से पहले ही यात्रियों की पूरी जानकारी टाइप कर लिया जाता था। आईआरसीटीसी बॉलेट में जमा राशि के आधार पर लाइन खुलते ही फौरन तत्काल टिकट बुक करा लिए जाते थे। इन टिकटों के बदले यात्रियों से मोटी रकम वसूली जाती थी। 
गुलाम की रिश्तेदार सबीना का खंगाला जा रहा बैंक खाता
गुलाम मुस्तफा की महिला रिश्तेदार सबीना सरिया में रहती है। मुस्तफा से उसके वित्तीय संबंध उजागर होने की बात कही जा रही है। सबीना का सरिया के बैंकों में खाते हैं। आरपीएफ उन खातों को खंगाल रही है। उन खातों से हुए लेन-देन के संबंध में जांच की जा रही है। आरपीएफ कमांडेंट हेमंत कुमार ने इसकी पुष्टि की है। इधर रडार पर रखे गए अन्य गुलाम के अन्य करीबियों के भी बैंक खातों को खंगाला जा रहा है।
आरपीएफ के रडार पर कौन-कौन 
1. गिरिडीह के सरिया मोकामो गांव के मो. कलीम को आरपीएफ ने गिरफ्तार किया है। इसके पास से एक मोबाइल व लैपटॉप जब्त किए गए हैं। कलीम गुलाम मुस्ताफ के इशारे पर ई-टिकट फर्जीवाड़ा से जुड़ा था।
2. आरपीएफ बगोदर कोल्हा गोलगो गांव के धीरेंद्र यादव उर्फ रिंकू की तलाश में है। वह दिव्यांग है। उसके पास आईआरसीटीसी की एजेंट व फर्जी पर्सनल आईडी मिली है। उसके घर से मोबाइल और लैपटॉप जब्त किया है।
3. बगोदर चौधरीबांध निवासी अमित कुमार भी आरपीएफ के रडार पर है। उसके पास से एक लैपटॉप मिला है।
4. सरिया डाक बंगला निवासी अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ भी जांच चल रही है। 
5. सरिया के कोराडीह के तुलसी साह को आरपीएफ खोज रही है। उसकी दुकान और आवास पर छापेमारी हुई। वह फरार है।
आरपीएफ सीनियर कमांडेंट हेमंत कुमार ने कहा कि गुलाम मुस्ताफ से मिले प्रत्यक्ष व तनकीकी साक्ष्यों के आधार पर धनबाद डिवीजन में भी आरपीएफ की टीम सक्रिय है। कई लोगों के आरपीएफ की जांच के जद में हैं। कई बिंदुओं पर जांच चल रही है।(हिन्दुस्तान)
 


Date : 22-Jan-2020

दीपक दास
नई दिल्ली, 22 जनवरी। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने टिकट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए कथित सॉफ्टवेयर डिवेलपर को भी अरेस्ट किया है। इस रैकेट के तार पाकिस्तान, बांग्लादेश और दुबई तक से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। यह रैकेट टिकटों की धांधली कर हर महीने करोड़ों कमाता था और आतंकी फंडिंग में इस्तेमाल करता था। आरपीएफ ने बताया कि झारखंड के रहने वाले गुलाम मुस्तफा को भुवनेश्वर से अरेस्ट किया गया है और सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरपीएफ ने मुस्तफा समेत 27 लोगों को अरेस्ट किया है। अब मामले की जांच से आईबी और एनआईए भी जुड़ गए हैं। 
यह रैकेट महज 1.48 मिनट में 3 टिकट बुक कर लिया करता था। सैकड़ों आईडी के जरिए यह खेल होता था, जिससे अंदाजा लगया जा सकता है कि यह रैकेट मिनटों में ही हजारों टिकटों पर हाथ साफ कर लेता था। आमतौर पर एक टिकट को मैन्युअली बुक करने में 2.55 मिनट तक का वक्त लगता है। साफ है कि इस गैंग के चलते कई जरूरतमंदों को यात्रा के लिए टिकट नहीं मिल पाते थे और उन्हें परेशान होना पड़ता था। आरपीएफ के मुताबिक यह गैंग कई बार 85 फीसदी टिकट अकेले ही बुक कर लेता था, जिन्हें मनमाने दामों पर यात्रियों को दिया जाता था। हालांकि रेलवे की कमाई पर इससे कोई असर नहीं पड़ता था, लेकिन आम यात्रियों से काफी रकम ऐंठ ली जाती थी।
आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि मुस्तफा से दो लैपटॉप बरामद किए हैं, जिनमें एएनएमएस नाम का एक सॉफ्टवेयर भी है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए यह रैकेट बड़ा खेल करता था। अरुण कुमार ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंजिनियरिंग जैसी किसी भी पढ़ाई से नाता न रखने वाले मुस्तफा ने इसे डिवेलप किया था। 
बिना ओटीपी और कैप्चा के कर लेते थे टिकट बुक 
इस सॉफ्टवेयर के जरिए रैकेट ने आईआरसीटीसी की ओर से टिकट फ्रॉड रोकने के लिए लागू सभी बैरियर्स का तोड़ निकाल लिया था। कैप्चा और बैंक ओटीपी जैसी कई प्रक्रियाओं के बिना ही ये लोग टिकट बुक कर लिया करते थे। यह गैंग इस घोटाले के जरिए हर महीने 10 से 15 करोड़ रुपये तक समेट रहा था। इस गैंग का पहला टारगेट कैश कमाना होता था। 
आतंकी फंडिंग में लगाते थे टिकटों की रकम 
कैश कमाने के बाद ये लोग इस रकम से टेरर फाइनैंसिंग करते थे। आरपीएफ की ओर से गिरफ्तार लोगों से अब तक पूछताछ में यह पता चलता है कि इस पूरे रैकेट के तार पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं। यही नहीं सुरक्षा एजेंसियों को मुस्तफा के लैपटॉप में एक ऐसा ऐप्लिकेशन भी मिला है, जिसके जरिए फर्जी आधार कार्ड तैयार किए जाते थे। 
यूपी के बस्ती का अशरफ है सरगना, बम धमाकों का आरोपी 
आरपीएफ ने यूपी के बस्ती जिले के रहने वाले हामिद अशरफ की पहचान रैकेट के मुखिया के तौर पर की है। अशरफ बीते साल पड़ोस के ही जिले गोंडा में हुए बम धमाकों में वॉन्टेड रहा है। गिरफ्तारी के डर से वह नेपाल के रास्ते दुबई चला गया था। 
मुस्तफा ने खुलवाए थे 3000 बैंक अकाउंट 
आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने बताया कि मुस्तफा ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी। वह ओडिशा में एक मदरसे में पढ़ा था। आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर उसने अपने 563 आईडी बना रखी थीं। इसके अलावा 2,400 एसबीआई शाखाओं और 600 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी उसके खाते थे। इस गैंग ने टिकटों के घोटाले में कितनी महारत हासिल कर ली थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 20,000 एजेंट्स और अन्य लोगों ने इस रैकेट से सॉफ्टवेयर खरीदा था। 
भारत की एक सॉफ्टवेयर कंपनी भी रैकेट से जुड़ी? 
इस मामले में एक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी पर भी जांच एजेंसियों की नजर है। आरपीएफ ने डीजी ने कहा कि हमें इस कंपनी के भी रैकेट से जुड़े होने का संदेह है। यह कंपनी सिंगापुर में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भी शामिल रही है। आरपीएफ के मुताबिक मुस्तफा पाकिस्तान में सक्रिय तबलीक-ए-जमात का समर्थक है। (टाईम्स न्यूज)
 

 


Date : 22-Jan-2020

मुंबई, 22 जनवरी । नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। विपक्ष के नेताओं के सीएए के विरोध में आए दिन बयान सामने आ रहे हैं। वहीं, अब हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर गृहमंत्री अमित शाह को बहस करने की चुनौती दे दी है।
सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में असदुद्दीन ओवैसी मुखर होकर अपनी आवाज उठाते आए हैं। इस नए कानून की मुखालफत में कभी वह हैदराबाद में तिरंगा रैली निकाल रहे हैं, तो कभी गणतंत्र दिवस पर आधी रात को चारमीनार पर तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल तेलंगाना में इन दिनों नगर पालिका के चुनाव चल रहे हैं और इन चुनावों में अपनी पार्टी एआईएमआईएम के चुनाव प्रचार में असदुद्दीन ओवैसी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनसभाएं कर रहे हैं।
चुनाव प्रचार में करीमनगर इलाके में जनसभा के दौरान ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह को सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर बहस की चुनौती दी। उन्होंने बहस का प्रस्ताव रखते हुए कहा, मैं गृह मंत्री को नए कानून पर बहस करने की चुनौती देता हूं, दाढ़ी वाले से बहस करने पर टीआरपी भी अच्छी आएगी।
ओवैसी यहीं पर नहीं रुके, गृहमंत्री को घेरने के बाद उन्होंने वित्त मंत्री को निशाने पर लिया। वित्त मंत्रालय की हलवा सेरेमनी की बात करते हुए उन्होंने कहा, बीजेपी के नेता नाम बदलने की कवायद करते हैं और बीजेपी की वित्त मंत्री हलवा के आगे नमस्ते कर रही हैं। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा, हलवा उर्दू या हिंदी का शब्द नहीं है, हलवा अरबी शब्द है। इसको क्यों नहीं बदल रहे हैं। ओवैसी ने बीजेपी के नेताओं को घेरते हुए कहा, यह सब कुछ चेंज करने की बात करते हैं। इस बार आवाम इनको ही चेंज कर देगी।
असदुद्दीन ओवैसी ने एलान किया है कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर की मुखालफत के लिए 25 जनवरी की रात चारमीनार पर 26 जनवरी का जश्न मनाएंगे और फिर 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर ह्यूमन चेन बनाएंगे। उन्होंने बताया इस ह्यूमन चेन का आगाज सुबह 11 बजे किया जाएगा।(एबीपी न्यूज)
 


Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी । गृह मंत्रालय द्वारा एक आरटीआई आवेदन के जवाब में टुकड़े-टुकड़े गैंग की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात पर हमला करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि टुकड़े-टुकड़े गैंग का अस्तित्व है और वह सरकार चला रहा है। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने दावा किया था कि उनकी एक आरटीआई में गृह मंत्रालय से यह जवाब आया है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग के संबंध में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। मीडिया में आई खबर को टैग करते हुए थरूर ने ट्वीट किया, टुकड़े-टुकड़े गैंग का अस्तित्व है। वे सरकार चला रहे हैं और देश को बांट रहे हैं।
वहीं इस आरटीआई उत्तर को लेकर एक संवाददाता सम्मेलन में पूछे गए सवाल पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, मुझे लगता है कि गृह मंत्री को इस टुकड़े-टुकड़े गैंग के बारे में हमसे ज्यादा जानकारी है। देश जानता है कि कौन भारत को बांट रहा है।
एक कार्यकर्ता ने दावा किया है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास टुकडे-टुकडे गैंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अपने ट्वीट में एक्टिविस्ट संकेत गोखले ने पिछले महीने गृह मंत्रालय से पूछे गए सवाल के जवाब को अटैच किया है। संकेत ने अपने पोस्ट में लिखा, टुकड़े-टुकड़े गैंग आधिकारिक रूप से मौजूद नहीं है, यह केवल अमित शाह की कल्पना का एक अनुमान मात्र है। हालांकि एनडीटीवी ने इस मुद्दे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया है।
टुकड़े-टुकड़े गैंग एक शब्द है जिसका इस्तेमाल अक्सर दक्षिणपंथी दल वाम समर्थित समूहों और उनके समर्थकों पर हमला करने के लिए प्रयोग करती है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में कथित रूप से राष्ट्र विरोधी नारे लगाए जाने के बाद टुकड़े-टुकड़े गैंग को गढ़ा गया था। उस दौरान जेएनयू छात्र संघ के प्रमुख कन्हैया कुमार के खिलाफ एक राजद्रोह का मुकदमा दायर किया गया था, जिसने इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।
पिछले साल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस शब्द को कई बार प्रयोग किया था। दिल्ली में एक कार्यक्राम के दौरान अमित शाह ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं कहना चाहता हूं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग को दंडित करने का समय आ गया है। उन्हें शहर में हिंसा के लिए दोषी ठहराया जाना है। दिल्ली के लोगों को उन्हें दंडित करना चाहिए।
इस महीने के शुरुआत में गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दो बार आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने कन्हैया कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी जिन्होंने कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए थे।
जेएनयू कैंपस में हुए हमले के बाद से सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय को इसी मसले पर बार-बार निशाना बनाया गया। जेएनयू हिंसा के दौरान नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों को निशाना बनाया; जिसमें 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। सोशल मीडिया पर टुकड़े-टुकड़े गैंग का यूज करते हुए कई यूजर्स ने अपनी राय रखी थी। बीजेपी की कर्नाटक यूनिट ने भी अपने ट्वीट में इसका जिक्र किया था।(भाषा)
 


Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी। भारतीय बाल कल्याण परिषद (आइसीसीडब्ल्यू) द्वारा बहादुर बच्चों को 62 साल से प्रतिवर्ष दिए जा रहे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विवादों में घिरने के बावजूद इस बार भी दिए जाएंगे। वर्ष 2019 के 22 बच्चों का चयन किया गया है। इनमें 10 लड़कियां हैं जबकि 12 लडक़े। एक लडक़े को यह पुरस्कार मरणोपरांत दिया जाएगा। हालांकि इन बच्चों को यह पुरस्कार कब और किसके हाथों दिए जाएंगे, इसे लेकर अभी कुछ स्पष्ट नहीं है।
तीन बच्चों को गहरे समुद्र में डूबने से बचाया
परिषद की आजीवन संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने बच्चों की बहादुरी के किस्से बताए। केरल के रहने वाले 17 वर्षीय मोहम्मद मुहसीन ईसी ने अपने तीन दोस्तों को गहरे समुद्र में डूबने से बचाया लेकिन खुद समुद्र में डूब गया। उसका शव अगले दिन मिला। इस बहादुर बच्चे को मरणोपरांत अभिमन्यु अवार्ड से नवाजा जाएगा।
बस में आग लगने से 40 लोगों को बचाया
परिषद का सबसे बड़ा सम्मान भारत अवार्ड केरला के ही रहने वाले आदित्य के. को प्रदान किया जाएगा। आदित्य ने पर्यटकों से भरी एक बस मे आग लग जाने पर बहादुरी दिखाते हुए उस बस के शीशे तोड़ कर 40 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचाई। आदित्य उस बस में सवार था और आग लगने के बाद बस का ड्राइवर बस छोड़ कर भाग गया था और यात्री धुआं भरने की वजह से चीख पुकार करने लगे थे। ऐसे में आदित्य ने सूझबूझ दिखाते हुए बस के शीशे को तोड़ दिया जिससे यात्री बाहर निकल पाए। भारत पुरस्कार के तहत परिषद की ओर से 50 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। जबकि अभिमन्यु पुरस्कार के तहत 40 हजार रुपये।
मार्कंडेय अवार्ड उत्तराखंड के रहने वाली 10 वर्षीय राखी को मिलेगा, जबकि धु्रव अवार्ड ओडिशा की रहने वाली पूर्णिमा गिरी और सबिता गिरी को प्रदान किया जाएगा। ओडिशा की ही रहने वाली 10 वर्षीय बदरा को प्रह्लाद अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर की रहने वाली 17 वर्षीय सरताज मोहीदीन मुगल को श्रवण अवार्ड प्रदान किया जाएगा। इन सभी पुरस्कारों के तहत 40 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
सामान्य पुरस्कार में कई बच्चे शामिल
इसके अलावा सामान्य सम्मान के तहत प्रत्येक को 20-20 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। सामान्य पुरस्कार पाने वालों में छत्तीसगढ़ की सवा नौ वर्ष के कांति पैकरा, और साढ़े 12 वर्षीय भामेरी निर्मलकर, मणिपुर की आठ वर्षीय लारेंबम याईखोंबा मंगांग, मिजोरम की पौने 17 वर्षीय लालियानसांगा, कर्नाटक की सवा 11 वर्षीय बेंकटेश, जम्मू-कश्मीर के साढ़े 18 वर्षीय मुदासिर अशरफ, कर्नाटक की 9 वर्षीय आरती किरण शेट, मिजोरम की 11 वर्षीय कैरोलिन मलसामतुआंगी, मेघालय के पौने 11 वर्षीय एवरब्लूम के नोंगरम, हिमाचल प्रदेश के साढ़े 13 वर्षीय अलाईका, असम के पौने 11 वर्षीय कमल कृष्णा दास, केरला के सवा 13 वर्षीय फतह पीके, मिजोरम के पौने 13 वर्षीय बनलालरियातरेंगा, महाराष्ट्र के पौने 11 वर्षीय जेन सदावरते व 15 वर्षीय आकाश मच्छिंद्रा खिल्लारे शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने इन पुरस्कारों से किया था अलग
मालूम हो कि 2018 तक परिषद द्वारा चुने गए बच्चों को यह पुरस्कार जहां प्रधानमंत्री के हाथों मिलता था। वहीं, इन्हें गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का मौका भी मिलता था, लेकिन पिछले साल आइसीसीडब्ल्यू पर लगे वित्तीय गड़बडिय़ों के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने स्वयं को इन पुरस्कारों से अलग कर लिया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अलग से अपने पुरस्कार देता है। सरकारी स्तर पर अलगाव के बाद परिषद ने अपने पुरस्कारों के नाम भी बापू गयाधनी, संजय चोपड़ा, गीता चोपड़ा की बजाय मार्कंडेय, धु्रव एवं प्रह्लाद अवार्ड कर दिया है।
राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों की शुरुआत भारतीय बाल कल्याण परिषद द्वारा 1957 में बच्चों के बहादुरी और मेधावी सेवा के उत्कृष्ट कार्यों के लिए पहचानने और दूसरों के लिए उदाहरण बनने और अनुकरण करने के लिए प्रेरित करने के लिए की गई थी। आईसीसीडब्ल्यू ने अब तक 1,004 बच्चों को पुरस्कार के साथ सम्मानित किया है, जिसमें 703 लडक़े और 301 लड़कियां शामिल हैं। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक पदक, एक प्रमाण पत्र और नकद मिलता है।
चयनित बच्चों को तब वित्तीय सहायता प्राप्त होती है, जब तक कि वे स्नातक पूरा नहीं कर लेते हैं। इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए चयन करने वालों को छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता मिलती है। (जागरण)
 


Date : 22-Jan-2020

गांधीनगर, 22 जनवरी । गुजरात के महिसागर में दो शीर्ष महिला अधिकारी आपस में भिड़ गईं। जिला विकास अधिकारी (आईएएस) नेहा कुमारी और पुलिस अधीक्षक उषा राडा के बीच विवाद की वजह कोई प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि एक गाय थी। दोनों ही अधिकारियों ने सरकार में अपने शीर्ष अधिकारियों को लिखित में शिकायत दी और अंतत: विवाद को खत्म कराने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। 
मुख्यमंत्री कार्यालय ने राज्य में वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी संगीत सिंह को मामले की जांच करने और दोनों अधिकारियों को आपसी विवाद को खत्म करने का निर्देश दिया। बताया जा रहा है कि पिछले साल क्रिसमस तक आईएएस अधिकारी नेहा और आईपीएस अधिकारी उषा राडा के बीच बहुत अच्छे संबंध थे। इसी दौरान नेहा कुमारी कार्यालय के सदस्य कलेक्टर के लिए बने आधिकारिक आवास परिसर में वॉलीबॉल खेल रहे थे। खेलने के दौरान वॉलीबॉल उषा राडा की गिर नस्ल की गायों को जा लगी। 
सरकार के पास दर्ज कराई गई शिकायतों के मुताबिक गायों को वॉलीबॉल लगने से गुस्साई एसपी राडा ने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि वे वॉलीबॉल की नेट को काट दें। यहीं नहीं उन्होंने मध्य गुजरात विज कंपनी लिमिटेड को वॉलीबॉल ग्राउंड की बिजली काटने का निर्देश दिया। अपनी शिकायत में नेहा कुमारी ने कहा कि पुलिसकर्मी राडा के आदेश पर वॉलीबॉल की नेट काटकर अपने साथ ले गए। 
झगड़ा गुजरात सरकार के लिए शर्मिंदगी का विषय बना 
उधर, राडा ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि नेहा कुमारी अपने 25 लोगों के साथ 26 दिसंबर 2019 को उनके आधिकारिक आवास में घुस आईं और उनके साथ गर्मागर्म बहस की। एसपी ने कहा कि नेहा ने उन्हें धमकी दी थी कि मैं तुमको देख लूंगी। राडा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि नेहा कुमारी और उनके साथ आए लोगों ने गिर गायों पर पत्थर फेंके जबकि उन्हीं गायों का दूध वह नेहा कुमारी को प्रतिदिन भेजती हैं। 
एसपी ने कहा कि नेहा कुमारी ने बिना पहले नोटिस दिए राजस्व अधिकारियों को भेजा और पुलिस हाउसिंग कॉप्लेक्स के निर्माण को रुकवा दिया। यही नहीं एसपी ऑफिस की मरम्मत कर रहे ठेकेदारों को भी धमकी दी। उधर, दो शीर्ष अधिकारियों के बीच हुआ झगड़ा सरकार के लिए शर्मिंदगी का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने वरष्ठितम आईएएस अधिकारी संगीता सिंह को इस विवाद को सुलझाने का जिम्मा दिया है। (टाईम्स न्यूज)
 


Date : 22-Jan-2020

पश्चिमी सिंहभूम, 22 जनवरी। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में मंगलवार दोपहर एक दिल दहलाने वाली घटना में बुरुगुलीकेरा गांव में सात लोगों की हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि पत्थलगड़ी आंदोलन के समर्थकों ने पत्थलगड़ी का विरोध करने पर इन लोगों की हत्या की है। पत्थलगड़ी के तहत सरकारी संस्थानों और सुविधाओं के बहिष्कार करने और स्थानीय शासन की मांग की जाती है। आइए जानते हैं, क्या है पत्थलगड़ी और कैसे झारखंड समेत कई राज्यों के आदिवासी इलाकों में बढ़ता गया इसका असर।
संविधान की पांचवीं अनुसूची में मिले अधिकारों के सिलसिले में झारखंड के खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुछ इलाकों में पत्थलगड़ी कर (शिलालेख) इन क्षेत्रों की पारंपरिक ग्राम सभाओं के सर्वशक्तिशाली होने का ऐलान किया गया था। कहा गया कि इन इलाकों में ग्राम सभाओं की इजाजत के बगैर किसी बाहरी शख्स का प्रवेश प्रतिबंधित है। इन इलाकों में खनन और दूसरे निर्माण कार्यों के लिए ग्राम सभाओं की इजाजत जरूरी थी। इसी को लेकर कई गांवों में पत्थलगड़ी महोत्सव आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में हजारों आदिवासी शामिल हुए। 
जून 2018 में पूर्व लोकसभा स्पीकर कडिय़ा मुंडा के गांव चांडडीह और पड़ोस के घाघरा गांव में आदिवासियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। पुलिस फायरिंग में एक आदिवासी की मौत हो गई। वहीं पुलिस ने कई जवानों के अपहरण का आरोप लगाया। बाद में जवान सुरक्षित लौटे। इस संबंध में कई थानों में देशद्रोह की एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि हेमंत सोरेन ने सीएम बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में 2017-18 के पत्थलगड़ी आंदोलन में शामिल लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस ले लिए हैं। 
आदिवासियों के बीच गांव और जमीन के सीमांकन के लिए, मृत व्यक्ति की याद में, किसी की शहादत की याद में, खास घटनाओं को याद रखने के लिए पत्थर गाडऩे का चलन लंबे वक्त से रहा है। आदिवासियों में इसे जमीन की रजिस्ट्री के पेपर से भी ज्यादा अहम मानते हैं। इसके साथ ही किसी खास निर्णय को सार्वजनिक करना, सामूहिक मान्यताओं को सार्वजनिक करने के लिए भी पत्थलगड़ी किया जाता है। यह मुंडा, संथाल, हो, खडिय़ा आदिवासियों में सबसे ज्यादा प्रचलित है। 
जब एसपी समेत 300 पुलिसकर्मी बने बंधक 
साल 2017 के अगस्त महीने में खूंटी जिले में पत्थलगड़ी की सूचना पाकर पुलिस पहुंची। वहां गांववालों ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। थानेदार जब कुछ पुलिसबल के साथ वहां पहुंचे तो उन्हें बंधक बना लिया गया। सूचना पाकर जिले के एसपी अश्विनी कुमार लगभग 300 पुलिसकर्मियों को लेकर उन्हें छुड़ाने पहुंचे तो उन्हें भी वहां बंधक बना लिया गया। लगभग रातभर उन्हें बिठाए रखा, सुबह जब खूंटी के जिलाधिकारी वहां पहुंचे तब लंबी बातचीत के बाद गांववालों ने उन्हें छोड़ा। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। अब झारखंड में हुई हत्याओं ने एक बार फिर इसकी ओर ध्यान खींचा है। 
आंदोलनकारी नेता बोले, चुनाव से हमारा लेना-देना नहीं 
यूनिसेफ में काम कर चुके और हिंदी प्रफेसर रहे युसूफ पूर्ति इस आंदोलन को गलत ठहराने वालों को ही गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि भारत आदिवासियों का देश है। वह भी इस देश का हिस्सा हैं। इन इलाकों में जो बैंक स्थापित हुए हैं, वे बिना ग्राम पंचायत के आदेश के हैं। राज्यपाल का आदेश भी उनके पास नहीं है। ऐसे में ये बैंक अवैध हैं। उनका कहना है, हमें चुनाव से लेना देना नहीं है। नागरिकों का कर्तव्य है कि वे वोट दें। आम आदमी तय करेगा पीएम, सीएम कौन बनेगा। हम तो मालिक हैं इस देश के। हमें हमारा अधिकार सरकार नहीं दे रही है। ऐसे में हम नहीं, वे देशद्रोही हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ग्राम सभा को संस्कृति, संसाधन की सुरक्षा का हक 
आंदोलन के नेताओं का कहना है कि आदिवासी इलाके अनुसूचित क्षेत्र हैं। यहां संसद या विधानमंडल से पारित कानूनों को सीधे लागू नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 13(3) के तहत रूढ़ी और प्रथा ही विधि का बल है और आदिवासी समाज रूढ़ी और प्रथा के हिसाब से ही चलता है। वैसे हकीकत यह है कि किस प्रथा को नियम माना जाए, इसकी व्याख्या संविधान के अनुसार होती है। हर प्रथा को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। वन अधिकार कानून 2006 और नियमगिरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला कहता है कि ग्रामसभा को गांव की संस्कृति, परंपरा, रूढि़, विश्वास, प्राकृतिक संसाधन आदि की सुरक्षा का संपूर्ण अधिकार है। इसका अर्थ है कि अगर ग्रामसभा को लगता है कि बाहरी लोगों के प्रवेश से उसकी इन चीजों को खतरा है तो वह उनके प्रवेश पर रोक लगा सकती है। 
नई सरकार ने हटाए आदिवासियों पर दर्ज मुकदमे 
झारखंड की मौजूदा सरकार आदिवासियों की हितैषी मानी जा रही है। खुद सीएम हेमंत सोरेन आदिवासी समुदाय से आते हैं। सोरेन ने झारखंड का सीएम बनते ही हेमंत सोरेन ने पहली कैबिनेट में फैसला लिया था कि पत्थलगड़ी, सीएनटी और सीपीटी आंदोलन के दौरान लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएंगे। पिछली बीजेपी सरकार ने छोटा नागपुर टेनेंसी ऐक्ट (सीएनटी) और संथाल परगना टेनेंसी ऐक्ट (एसपीटी) में कुछ बदलाव किए थे। इन बदलावों के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के चलते कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पूर्व सीएम रघुबर दास आंदोलन के पीछे नक्सलियों, ईसाई मिशनरियों का हाथ बताते रहे हैं। उनका आरोप था कि यह आदिवासियों को विकास से दूर करने, इन इलाकों के खनिजों पर कब्जा करने के लिए हो रहा है। 
गुजरात-महाराष्ट्र की सीमा बनी केंद्र 
देशभर में चल रहे पत्थलगड़ी का केंद्र गुजरात के तापी जिला का कटास्वान नामक स्थान है। यह गुजरात और महाराष्ट्र के बॉर्डर का भील आदिवासी बहुत इलाका है। यहां के निवासी रहे कुंवर केसरी सिंह को पत्थलगड़ी का प्रेरणास्त्रोत माना जा रहा है। वह एक वकील थे। उन्होंने आदिवासियों के स्वशासन की मांग की थी। उनकी कार पर नंबर प्लेट की जगह, आवर लाइट, हेवेन्स गाइड, लिखा रहता था। उन्होंने देश में विभिन्न जगहों पर काम कर रही आदिवासी स्वशासन की संस्थाओं को भारत सरकार घोषित किया। फिर इन कथित ‘भारत सरकारों का संघ भारत सरकार कुटुंब परिवार’ नाम से बनाकर खुद को इसका मुखिया घोषित किया। अब उनकी जगह उनका बेटा राजेंद्र केसरी इसे नियंत्रित कर रहा है। 
छत्तीसगढ़-ओडिशा में भी पहुंचा आंदोलन 
छत्तीसगढ़ में इसका नेतृत्व बलदेव सिंह धुड़बे कर रहे हैं। यहां साल 2017 के नवंबर में पत्थलगड़ी शुरू हुआ। यही नहीं, दुर्ग जिले के बालोद जिले में कंगलामांझी सरकार आज भी चल रही है। इनके पास अपनी सेना है, वे परेड करते हैं, साल में एक बार राजसभा का आयोजन होता है। देशभर के कई आदिवासी नेता इसमें शामिल होते हैं। ये भी भारत सरकार को नहीं मानते। वहीं, ओडिशा में इसका नेतृत्व बीरमित्रापुर के एमएलए जॉर्ज तिर्की कर रहे हैं। उनका नारा है न हिन्दुस्तान न पाकिस्तान, हमें चाहिए आदिवासिस्तान। वह एक ट्राइबल कॉरिडोर बनाने की मंशा भी रखते हैं। (नवभारतटाईम्स)
 


Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी । नागरिकता कानून यानी सीएए को लेकर दायर 140 से ज्यादा याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान वकीलों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने इन सभी याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को 4 हफ्ते का वक्त दिया है।
आज की सुनवाई खत्म होने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के अलग-अलग हाईकोर्ट में सीएए के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर कोई भी आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा है कि केंद्र के जवाब के बाद पांच जजों की बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी कि इसपर स्टे लगाना है या नहीं। अब इस मसले को चार हफ्ते बाद सुना जाएगा। उसी दिन संवैधानिक बेंच बनाने पर भी फैसला किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने नागरिकता कानून की प्रक्रिया को तीन महीने के लिए टालने की मांग की, जिसपर कोर्ट ने कहा कि वह कोई एकतरफा रोक नहीं लगा सकती। सभी याचिकाओं को सुनने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। 140 से ज्यादा याचिकाओं में कुछ याचिकाएं नागरिकता कानून के समर्थन में भी है।
सुप्रीम कोर्ट में सीएए पर दायर याचिकाओं को अलग-अलग कैटेगरी में बांट दिया है। इसके तहत असम, नॉर्थईस्ट के मसले पर अलग सुनवाई की जाएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश में जो सीएए की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है उसको लेकर भी अलग से सुनवाई की जाएगी। अदालत ने सभी याचिकाओं की लिस्ट जोन के हिसाब से मांगी है, जो भी बाकी याचिकाएं हैं उनपर केंद्र को नोटिस जारी किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता कानून पर सभी याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। वहीं, असम-त्रिपुरा से संबंधित याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र को 2 हफ्ते का वक्त दिया है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई एसए बोबडे ने कहा है कि हम अभी कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि काफी याचिकाओं को सुनना बाकी है। ऐसे में सभी याचिकाओं को सुनना जरूरी है। अटॉर्नी जनरल ने अपील की है कि कोर्ट को आदेश जारी करना चाहिए कि अब कोई नई याचिका दायर नहीं होनी चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा कि फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं। हम एक पक्षीय तौर पर कोई रोक नहीं लगा सकते। सीएए पर सुनवाई के लिए संवैधानिक बेंच की मांग पर सीजेआई की ओर से कहा गया है कि संवैधानिक बेंच अभी सबरीमाला और महिलाओं की बराबरी पर सुनवाई कर रही है। वकील राजीव धवन ने मांग की है कि कौन कब बहस करेगा, ये अभी तय होना चाहिए।
अटॉनी जनरल ने कहा कि इस मामले में तुरंत आदेश देने जैसा कुछ नहीं है। इस पर आपत्ति जताते हुए सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा, सीएए के तहत बांग्लादेश से आने वाले आधे लोग हिंदु हैं और आधे मुस्लिम। असम में 40 लाख बांग्लादेशी हैं। इस कानून के तहत आधे ही लोगों को नागरिकता मिलेगी। ये पूरी डेमोग्राफी को बदल देगा।
वहीं, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की दलील पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यूपी में 40 हजार लोगों को नागरिकता देने की बात कही जा रही है, अगर ऐसा हुआ तो फिर कानून वापस कैसे होगा। वहीं, अदालत में वकील विकास सिंह, इंदिरा जयसिंह ने कहा है कि असम से 10 से अधिक याचिकाएं हैं, वहां पर मामला पूरी तरह से अलग है। असम को लेकर अलग आदेश जारी होना चाहिए।
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अभी तक 144 में से 60 याचिकाओं की ही कॉपी मिली है। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि पहले ये तय हो कि इस मामले को संवैधानिक बेंच के पास भेजना है या नहीं? हम इस कानून पर रोक की मांग नहीं कर रहे हैं। अगर इस कानून पर स्टे नहीं लगता है है तो हमारी मांग सीएए की प्रक्रिया को तीन महीने के लिए टाल दिया जाए।(न्यूज18)
 


Date : 22-Jan-2020

सरोज सिंह
नई दिल्ली, 22 जनवरी। तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली चुनाव में हरिनगर विधानसभा सीट से टिकट दिया है। देर रात पार्टी ने उनके नाम का ऐलान किया। बीजेपी और अकाली दल के बीच इस पर विधानसभा चुनाव में गठबंधन नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि पार्टी द्वारा उनको टिकट देने के पीछे ये बहुत बड़ी वजह है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में नामांकन के लिए आज आखिरी तारीख है। आठ फरवरी को दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। नामांकन पत्र दाखिल करने की जद्दोजहद के बीच तेजिंदर बग्गा ने बीबीसी से बातचीत की।
34 साल के तेजिंदर बग्गा के ट्विटर पर 6.4 लाख फॉलोअर हैं। जब बीजेपी दिल्ली की पहली लिस्ट में उनका नाम नहीं आया तो भी ट्विटर पर उनके पक्ष में एक मुहिम सी दिखी थी। उन्हें ट्रोल भी किया गया। तो क्या ट्विटर पर फैन फॉलोइंग और ट्रोलिंग देखकर बग्गा को ये टिकट मिला? इस सवाल पर बग्गा जोर से हंसे।
फिर जल्दी से चुनाव प्रत्याशी वाली गंभीरता लाते हुए उन्होंने कहा, एक बात बताइए, लोग आपसे जिस भाषा में बात करेंगे, आप भी तो उसी भाषा में बात करेंगे न? तो मैं भी वही करता हूं। फिर लोग मुझे ट्रोल कहते हैं। मुझे ऐसी बातों की कोई परवाह नहीं। मैं तो बस अपना काम करता हूं और करता रहूंगा।
ऐसा नहीं है कि बग्गा राजनीति में नए हैं। 2017 में पार्टी ने आधिकारिक तौर पर उन्हें दिल्ली बीजेपी का प्रवक्ता बनाया था। लेकिन पहली बार बग्गा में चर्चा में तब आए थे जब उन्होंने आम आदमी पार्टी के पुराने साथी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पर हमला किया था।
प्रशांत भूषण के एक बयान पर उनको आपत्ति थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए।
फिलहाल ये मामला कोर्ट में है लेकिन बग्गा के मुताबिक ये सवाल उनका पीछा ही नहीं छोड़ता। इस मुद्दे पर उन्होंने ज़्यादा कुछ बोलने से इनकार करते हुए कहा, जो कोई देश को तोडऩे की बात करेगा तो उसका वही हाल होगा, जो प्रशांत भूषण का हुआ। उनके मुताबिक किसी पर हमला करने की उनकी इस छवि का चुनाव में कोई असर नहीं होगा। उन्होंने कहा, कोई आपकी मां को कोई गाली देगा तो आप सुनती रहेंगी क्या? या इस बात का इंतजार करेंगी की इस पर कोई कानून बने?
प्रशांत भूषण पर हमले के अलावा भी कई बार बग्गा सुर्खियों में रहे हैं। साल 2014 में जब कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने नरेन्द्र मोदी के लिए एक विवादस्पद बयान दिया था, तब बग्गा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए चाय की केतली लेकर चाय पिलाने पहुंचे थे।
इस तरह के आयोजनों के लिए वो अक्सर चर्चा में रहते हैं। कभी केजरीवाल के गुमशुदा होने के पोस्टर लगवाने की बात हो या फिर मोदी के प्रधानमंत्री पद के लिए रॉक परफार्मेंस की बात हो; नए तरीकों के साथ हेडलाइन में बने रहने का नायाब तरीका वो खोज ही निकालते हैं।
बग्गा अपने लिए तिलकनगर सीट से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने उन्हें हरिनगर सीट से टिकट दिया। पार्टी के इस फैसले का वो स्वागत करते हैं।
मुझे हमेशा से देश के लिए कुछ करने का मन था। मैं चार साल की उम्र से संघ की शाखा में पिता के साथ जाता था। तब मैं दिल्ली के विकासपुरी इलाके में रहता था। सोलह साल की उम्र में मैंने कांग्रेस सरकार की सीलिंग की मुहिम का विरोध किया था। वर्ष 2002 में सीलिंग के विरोध में जेल भरो आंदोलन की शुरुआत भी की थी और तीन दिन तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी बंद रहा था। तेईस साल की उम्र में बीजेपी की नेशनल यूथ टीम में आ गया था।
बीजेपी से जुड़ाव और अपने राजनीतिक सफर पर रोशनी डालते हुए तेजिंदर पाल सिंह बग्गा बोलते ही चले जाते हैं। उन्होंने कहा, सबसे पहले बीजेपी यूथ विंग में मैं मंडल से जिला और फिर स्टेट लेवल टीम में आया। हरिनगर विधानसभा सीट से टिकट मिलना बीस साल से राजनीति में पैर जमाने की कोशिशों का ही नतीजा है।
बग्गा के परिवार में चुनावी राजनीति में इससे पहले किसी ने हाथ नहीं आजमाया है। ऐसा करने वाले वो पहले शख्स हैं। उनके पिता साल 93-94 में संघ से जुड़े थे लेकिन बाद के सालों में उतने सक्रिय नहीं रहे।
लांस प्राइज की किताब है, दि मोदी इफेक्ट : इनसाइड नरेन्द्र मोदी कैंपेन टू ट्रांसफॉर्म इंडिया। साल 2015 में आई इस किताब में नरेन्द्र मोदी ने भी अपना इंटरव्यू दिया है। इस किताब में 2014 में नरेन्द्र मोदी की जीत के कारणों को टटोलने की कोशिश की गई है।
बीबीसी से बातचीत में बग्गा ने दावा किया, इस किताब को लिखने के लिए लेखक ने पीएमओ से दो नाम मांगे थे जिन्होंने उनके कैम्पेन में योगदान दिया। पीएमओ की तरफ से जिन दो लोगों के नाम लेखक को दिए गए उनमें से एक नाम था प्रशांत किशोर का और दूसरा नाम था मेरा। किताब में मेरे हवाले से चार-पांच पन्ने हैं।
हरिनगर विधानसभा सीट पिछली बार अकाली दल को गई थी। लेकिन तेजिंदर पाल सिंह बग्गा कहते हैं, पिछली छह में से पांच बार इस सीट से बीजेपी के ही उम्मीदवार चुनाव लड़ा था। तो ये सीट परंपरागत तौर पर बीजेपी की ही सीट है।
पिछली दो बार से दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन रहता था, जो इस बार के चुनाव में टूट गया। क्या इस सीट पर गठबंधन टूटने का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा?
इस पर बग्गा कहते हैं, इस बार अकाली दल चुनावी मैदान में नहीं है तो मुझे नहीं लगता की कोई असर पड़ेगा। बाकी सिरसाजी मेरे बड़े भाई जैसे हैं, पूरा सम्मान करता हूं और उनका आशीर्वाद लेने जरूर जाऊंगा।
2015 में हरिनगर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के जगदीप सिंह 25 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।
बग्गा की उम्मीदवारी पर जगदीप सिंह ने बीबीसी से कहा, ट्विटर पर फॉलो करने वाले विधानसभा में जीत नहीं दिला सकते। वो हरिनगर में न तो रहते हैं और न ही उन्हें इस विधानसभा सीट का नक्शा पता है। क्या वे बता सकते हैं कि हरिनगर में पद्म बस्ती कहां है? वहां के लोगों की दिक्कतों की तो बात ही छोड़ दीजिए।
लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी ने जगदीप को टिकट नहीं दिया है। वो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। इस चुनाव में आप ने राजकुमारी ढिल्लों को उतारा है। कांग्रेस की तरफ से सुरेन्द्र सेतिया मैदान में हैं।
हरिनगर विधानसभा सीट में लगभग एक लाख 65 हजार वोटर हैं जिनमें सिख मतदाताओं की संख्या लगभग 45 हजार है।
बग्गा का कहना है कि वह पिछले पांच सालों में केजरीवाल सरकार की विफलताओं और केन्द्र में मोदी सरकार के कामकाज पर वोट मांगेंगे। उनके मुताबिक, केजरीवाल सरकार कहती है शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया है। लेकिन उन्होंने केवल स्कूल में कमरे बनावाए है। अगर 20000 कमरे भी बनावाए हैं तो उतने टीचर भी भरने चाहिए थे न? लेकिन आरटीआई में तो पता चला है कि टीचरों की संख्या कम हुई है। हम इसी सब पर अपने कैम्पेन में फोकस करेंगे।
क्या अरविंद केजरीवाल के सामने नई दिल्ली से लडऩा उनके लिए ज़्यादा बेहतर होता? इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, पार्टी का सेवक हूं, जहां से कहेंगे लडऩे के लिए तैयार हूं। (बीबीसी)
 


Date : 22-Jan-2020

सरोज सिंह
ट्विटर पर आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल का बायो : सब इंसान बराबर हैं, चाहे वो किसी धर्म या जाति के हों। हमें ऐसा भारत बनाना है जहाँ सभी धर्म और जाति के लोगों में भाईचारा और मोहब्बत हो, न कि नफरत और बैर हो...
नई दिल्ली, 22 जनवरी (बीबीसी)। देश में इन दिनों दिल्ली से लेकर केरल तक, हर जगह नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन चल रहा है। लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री इन प्रदर्शनों में अभी तक कहीं दिखाई नहीं दे रहे। अब जरा पुरानी तारीखों को याद कीजिए।
जून, 2018
जून की गर्मी में दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। साथ में थे उनके दो मंत्री मनीष सिसोदिया और सतेंद्र जैन। उप-राज्यपाल ने मिलने का वक्त नहीं दिया तो केजरीवाल उनके ऑफिस में ही धरने पर बैठ गए। उनकी मांग थी कि दिल्ली सरकार के आईएएस अधिकारी अपनी हड़ताल वापस लें।
मई, 2018
ऊपर लिखे वाक्ये से ठीक एक महीना पहले ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने विधायकों के साथ उप-राज्यपाल के यहां धरना दे चुके थे। तब उनकी मांग थी- उप-राज्यपाल, राज्य सरकार की सीसीटीवी परियोजना को रोकने का काम न करे। हालांकि तीन घंटे में ही उनका ये धरना खत्म हो गया।
जनवरी, 2014
दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। 26 जनवरी के लिए तैयारियां चल रही थी। रेल भवन के बाहर बने लॉन में दिल्ली के मुख्यमंत्री केन्द्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे थे। तब उनकी मांग थी पांच पुलिस वालों के तबादले की। 
एक छापे के दौरान दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती और पुलिस के बीच विवाद के बाद पुलिस और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी की स्थिति पैदा हो गई थी। चुनावी राजनीति में कदम रखने के पहले और बाद में हमेशा से केजरीवाल की छवि, धरना कुमार, की रही।
लेकिन पिछले एक महीने से दिल्ली में सीएए को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन चल रहे हैं। आम आदमी पार्टी सीएए का खुल कर विरोध भी कर रही है। लेकिन केजरीवाल वहां अब तक नहीं गए हैं। इतना ही नहीं, न वो जेएनयू गए और न ही जामिया। हां, जेएनयू हिंसा को लेकर उन्होंने 5 जनवरी को एक ट्वीट जरूर किया था।
नागरिकता संशोधन कानून पर आम आदमी पार्टी का स्टैंड साफ है। वो इस कानून के खिलाफ हैं।
18 दिसंबर को एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कानून को लेकर केन्द्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तीन करोड़ से चार करोड़ गैर-मुस्लिम लोग रहते हैं। इनमें से आधे भी हमारे देश में आ गए तो इनको नौकरी कौन देगा? इनको घर कहां से दोगे। कहां बसाओगे?
दिल्ली विधानसभा के लिए 8 फरवरी को मतदान होने हैं। अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से एक बार फिर से किस्मत आजमा रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि देश के हर मुद्दे पर मुखर राय रखने वाले अरविंद केजरीवाल का सीएए के विरोध प्रदर्शनों से गायब रहना क्या उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है या फिर वाकई में केजरीवाल दिल्ली पर ही केवल फोकस करना चाहते हैं?
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी मानते हैं कि ये आप पार्टी की सोची समझी नीति का हिस्सा है।
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, एक साल पहले तक वो ममता बनर्जी हों या नीतीश कुमार, दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जब जब केन्द्र-राज्य के संबंधों पर अपना पक्ष रखा, केजरीवाल ने उनका साथ दिया। कई गैर-बीजेपी वाली राज्य सरकारों के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से उन्होंने अपनी रणनीति को थोड़ा बदल दिया है। वे राष्ट्रीय मसलों से ख़ुद को अलग रखना चाहते हैं। और सिर्फ दिल्ली की राजनीति करना चाहते हैं।
2012 में केजरीवाल ख़ुद को युवाओं की आवाज बताते थे। उनकी पार्टी ने सबसे अधिक युवा और अनुभवहीन चेहरों को टिकट भी दिया था।
ऐसे में जिस सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हो रहा हो, वहां से दूरी बनाने की रणनीति कितनी सही है?
इस सवाल के जवाब में प्रमोद जोशी कहते हैं, शाहीन बाग के प्रदर्शन को एक बड़ा तबका मुसलमानों का प्रदर्शन मानता है। मुसलमान केजरीवाल की पार्टी का एक बड़ा वोट बैंक जरूर है। उनको अपने साथ रखने के लिए केजरीवाल ने अपने पार्टी के दूसरे विधायक अमानतउल्ला को लगा रखा है।
लेकिन केजरीवाल को लगता है कि अगर खुलकर सपोर्ट में गए, तो वोटों का धु्रवीकरण होगा। उनका दूसरा बड़ा वोट बैंक हिंदू वोट बैंक, नाराज न हो जाए। चुनाव के इतने करीब वो ये जोखिम मोल नहीं ले सकते। उनको जीत के लिए दोनों का वोट चाहिए।
लेकिन आप आदमी पार्टी के दिल्ली के सांसद संजय सिंह इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है, इन चुनावों में सीएए, एनआरसी कोई मुद्दा नहीं है। असली मुद्दा है बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा। हमारी सरकार उन्हीं मुद्दों पर काम कर भी कर रही है। रही बात सीएए का विरोध किया तो संसद के दोनों सदनों में जो कुछ हमें बोलना था वहां हमने कहा। केवल राज्य सभा में नहीं लोकसभा में भी हमारी पार्टी ने स्टैंड साफ कर दिया है।
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने इस सवाल के जवाब में हमसे ही सवाल पूछा, धरने पर जाएं तो आप पूछते हैं, इतना धरना क्यों देते हैं, नहीं जाते तो आप ही पूछते हैं क्यों नहीं जाते।
आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली में मुसलमान वोटरों की संख्या तकरीबन 12-13 फीसदी है। जिसमें करीब 76 फीसदी वोट आम आदमी पार्टी को पिछले चुनाव में मिले थे।
हिंदू वोटरों की बात करें तो पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली के लगभग 50 फीसदी हिंदू मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया था।
सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी के संजय कुमार के मुताबिक़ सारा मामला टाइमिंग का है। वो कहते हैं दिल्ली चुनाव के बाद आप थोड़े बदले बदले केजरीवाल देंखेंगे।
संजय कुमार कहते हैं, अगर केजरीवाल सीएए का समर्थन करते हैं तो बीजेपी के साथ दिखेंगे। साथ ही मुस्लिम वोट गवांएगे। और अगर आप सीएए के विरोध में खुल कर धरने में शामिल होती है तो देश में एक नैरेटिव चल रहा है, सीएए के विरोधी एंटी नेशनल हैं। ऐसा करने से हिंदू नाराज होंगे। संजय कुमार दिल्ली के 2015 के नतीजों का विश्लेषण भी किया है। उनके मुताबिक, 2015 में आप पार्टी को 70 में से 67 सींटों पर जीत मिली थी, तो ऐसा नहीं की केवल युवा वोटरों के सहारे इतनी बड़ी जीत मिली। उनको हर तबके का वोट मिला था। इस बार भी वो इतिहास दोहराना चाहते हैं तो किसी भी एक तबके की नाराजगी उनको भारी पड़ सकती है। केजरीवाल इसी से बचना चाहते हैं।
 


Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दरियागंज में हिंसा के मामले में भीम आर्मी प्रमुख को सशर्त जमानत दी है और अब इन शर्तों में उन्हें राहत देते हुए कोर्ट ने कहा है कि अब वो दिल्ली आ सकते हैं लेकिन दिल्ली आने से पूर्व उन्हें डीसीपी क्राइम को सूचित करना होगा। इसके साथ ही उन्हें दिए गए पते पर ही दिल्ली में रहना होगा।
इससे पूर्व चंद्रशेखर को तीस हजारी कोर्ट से सशर्त जमानत दी थी। बुधवार 15 जनवरी को कोर्ट ने उनकी जमानत इस शर्त पर मंजूर की थी कि चंद्रशेखर आजाद चार सप्ताह तक दिल्ली नहीं आ पाएँगे और चुनाव तक कोई धरना नहीं करेंगे।
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भीम आर्मी ने 20 दिसंबर को पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद से जंतर मंतर तक मार्च करने का एलान किया था। इसके लिए पुलिस से अनुमित नहीं ली गई थी। इसी संबंध में उन्हें दिल्ली के दरियागंज इलाके से गिरफ्तार किया गया था।
इसके पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए थे और उनकी कार्रवाई के लिए फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि देश की संसद में जो बातें कही जानी चाहिए थीं वो नहीं कही गईं, इसी वजह से लोग सडक़ों पर हैं। (बीबीसी)
 


Date : 21-Jan-2020

अमरावती, 21 जनवरी। आंध्र प्रदेश विधानसभा ने सोमवार देर रात राज्य में तीन राजधानी बनाने के संबंधी बिल को मंजूरी दे दी। कैबिनेट से मंजूरी के बाद वाईएस जगनमोहन रेड्डी सरकार ने यह बिल विधानसभा में पेश किया था। इसके अनुसार, विशाखापट्टनम को कार्यकारी, अमरावती को विधायी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाया जाएगा।
विधान परिषद से इस बिल के पास होने के बाद आंध्र देश का ऐसा पहला राज्य हो जाएगा जिसकी तीन राजधानियां होंगी। सरकार इस कदम को राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी बता रही है।  हालांकि सरकार के इस कदम का व्यापक विरोध भी शुरू हो गया है। 
अमरावती में हजारों किसानों और महिलाओं ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और सुरक्षा घेरा तोडक़र विधानसभा परिसर तक पहुंच गए। लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। प्रदर्शनकारियों ने पथराव भी किया। इसमें छह लोग घायल हुए हैं। इस मामले में कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
वहीं विधानसभा परिसर में विपक्ष के नेता एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में टीडीपी विधायकों ने मुख्य प्रवेश द्वार से विधानसभा के अंदर तक पैदल मार्च किया और विरोध जताया। मुख्यमंत्री जगनमोहन के संबोधन के दौरान व्यवधान डालने के लिए टीडीपी के 17 विधायकों को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया। नारेबाजी कर रहे विधायकों को मार्शलों ने आकर सदन से बाहर किया।
बाद में इन विधायकों के साथ सदन के गेट पर नायडू पर धरने पर बैठ गए। अमरावती के ग्रामीण इलाकों में जाने की कोशिश कर रहे नायडू को पुलिस ने हिरासत में लेकर उन्हें उनके घर छोड़ा। नायडू ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां तीन राजधानी हों।
यह एक काला दिन है, हम अमरावती और आंध्र प्रदेश को बचाना चाहते हैं। केवल वह ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और सडक़ों पर हैं। सरकार सबको गिरफ्तार कर रही है। यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
वहीं, इससे पहले राज्य की राजधानी स्थानांतरित करने संबंधी विधेयक पेश किए जाने के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अमरावती क्षेत्र के सैकड़ों किसान व महिलाएं, सशस्त्र कर्मियों की ओर से की गई सुरक्षा घेराबंदी को तोड़ते और निषेधाज्ञा की अवज्ञा करते हुए सोमवार को आंध्र प्रदेश विधानसभा परिसर के करीब तक पहुंच गए।
पुलिस ने निहत्थी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया क्योंकि विधानसभा का महत्वपूर्ण सत्र कुछ ही फासले पर जारी था। परिसर के पिछले हिस्से में नाटकीय घटनाक्रम जारी रहने के बावजूद विपक्ष के नेता एन चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार से कुछ मीटर की दूरी पर अपनी तेलुगु देशम पार्टी के विधायकों के साथ पैदल यात्रा की अगुवाई की।
हालांकि पुलिस बल की भारी तैनाती के चलते तेदेपा विधानसभा का घेराव करने के अपने कार्यक्रम को योजना के मुताबिक अंजाम नहीं दे पाई। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी किसानों व अन्य की तरफ से पत्थर फेंके जाने की घटना में उसके छह कर्मी घायल हो गए। साथ ही कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। (अमर उजाला)

 


Date : 21-Jan-2020

कोलंबो, 21 जनवरी । श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पहली बार ये स्वीकार किया है कि देश में गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए 20 हजार से अधिक लोग मर चुके हैं।

राष्ट्रपति राजपक्षे ने राजधानी कोलंबो में संयुक्त राष्ट्र के एक दूत से मुलाकात के दौरान ये टिप्पणी की। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान में कहा गया है कि लापता लोगों के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
श्रीलंका में ऐसे हजारों परिवार हैं जो देश में इस मांग के साथ रैलियां निकालते रहे हैं कि सरकार लापता लोगों का पता लगाए। कई लोगों ने उम्मीद लगा रखी थी कि वो अभी भी जीवित होंगे और हो सकता है कि उन्हें सुरक्षाबलों ने पकड़ रखा हो।
श्रीलंका की सेना ने 26 साल तक चले खूनी संघर्ष के बाद मई 2009 में विद्रोही तमिल टाइगर्स को परास्त किया था। युद्ध खत्म होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षाबलों पर अत्याचार के आरोप लगाए थे।(बीबीसी)

 


Date : 21-Jan-2020

नई दिल्ली, 21 जनवरी । आईएमएफ की चीफ इकॉनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ का कहना है कि भारतीय जीडीपी में गिरावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि विश्व अर्थव्यवस्था की जीडीपी में अगर भारतीय अर्थव्यवस्था की भागीदारी की बात करें तो ये काफी अहम है। अगर भारतीय जीडीपी में गिरावट आती है तो इसका असर पूरी दुनिया के आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा। इसलिए हमनें ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को भी 0.1 फीसदी कम किया है। जिसका अधिकांश हिस्सा भारत के ग्रोथ रेट में कमी की वजह से है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने सोमवार को भारत सहित वैश्विक आर्थिक वृद्धि परिदृश्य के अपने अनुमान को कम किया है। इस वैश्विक संगठन ने इसके साथ ही व्यापार व्यवस्था में सुधार के बुनियादी मुद्दों को भी उठाया है।

उसने भारत समेत कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अचंभे में डालने वाली नकारात्मक बातों का हवाला देते हुए कहा कि 2019 में वृश्विक आर्थिक वृद्धि की दर 2.9 प्रतिशत रह सकती है। विश्व आर्थिक मंच के सालाना शिखर सम्मेलन के उद्घाटन से पहले ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य पर जानकारी देते हुए मुद्राकोष ने भारत के आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 2019 के लिये कम कर 4.8 प्रतिशत किया है।
आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार 2019 में वैश्विक वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रहेगी। जबकि 2020 में इसमें थोड़ा सुधार आयेगा और यह 3.3 प्रतिशत पर पहुंच जायेगी। उसके बाद 2021 में 3.4 प्रतिशत रहेगी। इससे पहले आईएमएफ ने पिछले साल अक्टूबर में वैश्विक वृद्धि का अनुमान जारी किया था। उसके मुकाबले 2019 और 2020 के लिये उसके ताजा अनुमान में 0.1 प्रतिशत कमी आई है जबकि 2021 के वृद्धि अनुमान में 0.2 प्रतिशत अंक की कमी आई है।
मुद्राकोष ने कहा, ‘‘आर्थिक वृद्धि के अनुमान में जो कमी की गई है, वह कुछ उभरते बाजारों में खासकर भारत में आर्थिक गतिविधियों को लेकर अचंभित करने वाली नकारात्मक बातें हैं। इसके कारण अगले दो साल के लिये वृद्धि संभावनाओं का फिर से आकलन किया गया। कुछ मामलों में यह आकलन सामाजिक असंतोष के प्रभाव को भी प्रतिबिंबित करता है।
भारत में जन्मीं आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि मुख्य रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में नरमी तथा ग्रामीण क्षेत्र की आय में कमजोर वृद्धि के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान कम हुआ है।मुद्राकोष के अनुसार 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रहेगी।
आईएमएफ के अनुसार मौद्रिक और राजकोषीय प्रोत्साहनों के साथ-साथ तेल के दाम में नरमी से 2020 और 2021 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सुधरकर क्रमश: 5.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहेगी। हालांकि मुद्राकोष के अक्टूबर में जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य के पूर्व अनुमान के मुकाबले यह आंकड़ा क्रमश: 1.2 प्रतिशत और 0.9 प्रतिशत कम है। यहां 2019 से आशय वित्त वर्ष 2019-20 से है।
गोपीनाथ ने यह भी कहा कि 2020 में वैश्विक वृद्धि में तेजी फिलहाल काफी अनिश्चित बनी हुई है। यह अर्जेन्टीना, ईरान और तुर्की जैसी दबाव वाली अर्थव्यवस्थाओं के वृद्धि परिणाम और ब्राजील, भारत और मेक्सिको जैसी उभरती और क्षमता से कम प्रदर्शन कर रही विकासशील देशों की स्थिति पर निर्भर है।(एनडीटीवी)


Date : 21-Jan-2020

लंदन, 21 जनवरी । एक महिला के पति ने अपनी सास के लिए पत्नी और अपने बच्चे को छोड़ दिया। दरअसल, लंदन में रहने वाली लॉरेन वॉल के पति ने शादी के कुछ वक्त बाद ही उसे छोड़ दिया था और उसकी मां जूली के साथ रहने लगा था। अपने साथ हुए इस धोखे के बाद लॉरेन वॉल काफी वक्त तक सदमे में रही थी। 
डेली मेल से बात करते हुए लॉरेन वॉल ने अपने साथ 15 साल पहले हुए इस धोखे के बारे में बात की। लॉरेन ने कहा, मेरी मां ने मेरी शादी पर 15,000 पाउंड (लगभग 13,86,075 रुपये) खर्च किए थे और इस वजह से मैं उन्हें अपने साथ हमारे हनीमून पर भी लेकर गई थी लेकिन उन्होंने मेरे साथ जो किया उसके लिए मैं उन्हें कभी माफ नहीं कर पाऊंगी। 
लॉरेन और पॉल ने एक दूसरे को 2 सालों तक डेट किया था। इसी बीच लॉरेन ने एक बच्ची को भी जन्म दिया था। लॉरने ने बताया कि उस वक्त वह 19 साल की थी और उनके सभी सपने सच हो रहे थे। लॉरेन और पॉल की शादी अगस्त 2004 में हुई थी लेकिन इसके 8 हफ्ते बाद ही पॉल ने उसे छोड़ दिया था। इसके 9 महीने बाद लॉरेन की मां जूली ने पॉल के बच्चे को जन्म दिया। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की थी कि वो दोनों एक साथ हैं। लॉरेन ने कहा कि पॉल हमेशा ही मां से काफी अच्छे से बात करता था लेकिन मुझे यह कभी अजीब नहीं लगा। लॉरेन ने कहा कि दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी लेकिन वो मेरा पति था। इस वजह से मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो दोनों मुझे धोखा दे रहे हैं। 
लॉरेन ने बताया कि शादी होने के कुछ वक्त बाद ही पॉल ने मुझे (बाकी पेजï 5 पर)
और हमारे बच्चे को छोड़ दिया था और इसके बाद जब मुझे पता चला कि वो मेरी मां के साथ है तो मुझे इस बात पर कुछ पलों के लिए विश्वास नहीं हुआ। मैंने कभी नहीं सोचा था कि जिन लोगों पर मैं इतना भरोसा करती हूं वो मुझे धोखा देंगे। लॉरेन ने कहा, यह सही में बहुत बुरा है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी मां, मेरे साथ ऐसा करेगी।
सास जूली के बच्चे को जन्म देने के कुछ वक्त बाद दोनों ने शादी कर ली। जूली और पॉल ने 15 अगस्त 2009 को शादी की थी। लॉरेन ने बताया कि उसकी मां ने उसे अपनी शादी का न्यौता भी दिया था। लॉरेन ने कहा, मेरी शादी 14 अगस्त 2004 को हुई थी और उन्होंने 15 अगस्त 2009 को शादी की। लॉरेन ने आगे कहा, लेकिन अपनी बेटी के लिए मैं उन दोनों की शादी में गई। मैंने अपनी मां को उसी शख्स से शादी करते हुए देखा, जिससे मैंने 5 साल पहले शादी की थी। लॉरेन ने कहा कि पॉल ने कभी उससे माफी नहीं मांगी और क्योंकि वो उसकी मां का पति है, इस वजह से उनकी बात होती रहती है।
लॉरेन ने कहा कि वो हमारी बेटी को बताए लेकिन उसने इस बारे में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हालांकि, लॉरेन ने भी अब अपने लिए एक पार्टनर ढूंढ लिया है और वह काफी खुश है लेकिन अपने साथ हुए इस धोखे के बाद वह कभी किसी पर भरोसा नहीं कर पाई हैं। (एनडीटीवी)

 


Date : 21-Jan-2020

केरल, 21 जनवरी । ऐसे समय जब भारत में साम्प्रदायिक हिंसा आम हो गई है, केरल की मुस्लिम जमात ने मस्जिद में हिंदू जोड़े का विवाह कराकर साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल कायम की है।

खबर में बताया गया है कि मस्जिद के भीतर अंजू और शरद का विवाह पूरे धार्मिक विधि-विधान से सम्पन्न हुआ जहां दोनों समुदायों के लोग बतौर मेहमान मौजूद थे। ये खबर तब सामने आई जब केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने फेसबुक पोस्ट के जरिए जोड़े को बधाई देते हुए जमात के सदस्यों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि अंजू की मां ने माली हालात खराब होने की वजह से विवाह में मस्जिद कमेटी से मदद मांगी थी, इस पर कमेटी सदस्य उनकी मदद के लिए राजी हो गए।(द टेलिग्राफ)

 

 


Date : 21-Jan-2020

सूरत, 21 जनवरी । एक जोड़े की शादी इसलिए रुक गई क्योंकि लडक़े के पिता और लडक़ी की मां दोनों प्यार में पडक़र फरार हो गए। किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगने वाली यह कहानी हकीकत है। मामला गुजरात के सूरत का है। जानकारी के मुताबिक लडक़ा और लडक़ी ने काफी पहले इंगेजमेंट किया था और अब एक साल बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया था। यह शादी फरवरी के दूसरे हफ्ते में होने वाली थी। लेकिन शादी से पहले लडक़े के 48 साल के पिता और लडक़ी की 46 साल की मां एक साथ फरार हो गए। इसके बाद दोनों ही परिवार की तरफ से गुमशुदगी का केस दर्ज कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक लडक़े के पिता कातरगम इलाके में रहते थे तो वहीं लडक़ी का परिवार नवसारी का रहने वाला था। बीते 10 जनवरी को दोनों अपने-अपने घर से अचानक लापता हो गए। जिसके बाद लडक़ा-लडक़ी की शादी रुक गई। अभी तक इन दोनों के माता-पिता का कुछ भी पता नहीं चल सका है। बताया जा रहा है कि लडक़े के पिता एक बिजनेसमैन हैं और प्रॉपर्टी डीलर भी हैं।
कहा जा रहा है कि लडक़ी की मां और लडक़े के पिता इन दोनों की जान-पहचान उस वक्त से थी जब इन दोनों की शादी भी नहीं हुई थी। दोनों कभी कातरगम इलाके में पड़ोसी थे और एक-दूसरे को अच्छे से जानते भी थे। कहा जा रहा है कि यह दोनों शादी से पहले रिलेशनशिप में भी थे। हालांकि बाद में लडक़ी की शादी कहीं और हो गई और दोनों अलग हो गए। 
(बाकी पेजï 5 पर)
लडक़ी का परिवार भावनगर जिले का रहने वाला बताया जा रहा है और उन्होंने उनकी शादी नवसारी में रहने वाले एक हीरा कारोबारी से की थी। पुराना रिश्ता टूटने के बाद दोनों अलग हो चुके थे।
लेकिन अचानक जब दोनों की मुलाकात इस तरह हुई थी इन दोनों ने साथ भागने का फैसला कर लिया। बहरहाल अब इस मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है। यह घटना इस इलाके में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लडक़े के पिता औऱ लडक़ी की मां की तस्वीरें भी सोशल मीडिया परे शेयर की जा रही हैं और लोग इसपर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं।(जनसत्ता)


Date : 21-Jan-2020

भागलपुर, 21 जनवरी। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे सोमवार सुबह इंटरसिटी ट्रेन से भागलपुर परिसदन पहुंचे। उन्होंने डीआईजी और एसएसपी समेत सभी अधिकारियों को सुबह 6 बजे आराम करने की बात कहकर वापस कर दिया लेकिन ट्रैक सूट और माफलर डालकर वे पुलिस केन्द्र के लिए निकल पड़े।

पुलिस लाइन घूमने के दौरान किसी भी पुलिसकर्मी ने न तो उन्हें पहचाना और न  ही टोका। बाहर निकलने पर देखा कि दो महिला पुलिसकर्मी ऑटोमेटिक राइफल लेकर जा रही थीं। उन्होंने पूछा कि गोली चलाने आता है तो महिला पुलिसकर्मी अनुराधा कुमारी ने कहा कि आता है। डीजीपी ने पूछा कोई राइफल छीनकर भाग जाएगा तो क्या करोगी। जवाब मिला- अभी 45 गोली खाली करके आए हैं। डीजीपी के लगातार सवाल से दोनों महिला पुलिसकर्मी झल्ला गईं और कहा- हटते हैं कि नहीं।
लेकिन डीजीपी ने फिर कहा- तुमको गोली चलाना नहीं आता है। इस बात पर दोनों पोजिशन में आ गईं और कहा -हटिए नहीं तो टनका देंगे। डीजीपी ने कहा, हमको पहचानती हो तो एक महिला जवान ने कहा कोई भी हों, जल्दी हटिए और पोजिशन ले लिया। तब जाकर डीजीपी ने अपना परिचय दिया। इनता सुनकर दोनों ने सॉरी बोला और सैल्यूट ठोका। एक ने कहा हां सर, आपको टीवी पर देखा है। दोनों को धन्यवाद देकर डीजीपी आगे बढ़ गए। डीजीपी ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि महिला पुलिस में आत्मबल बढ़ा है। सुबह का वाकया बहुत अच्छा लगा। (लाइव हिंदुस्तान)


Date : 21-Jan-2020

लखनऊ, 21 जनवरी । लखनऊ के मशहूर घंटाघर पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरुद्ध शुक्रवार रात से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे दर्जनों लोगों की पहचान कर लखनऊ पुलिस ने उनके खिलाफ दंगा करने और गैरकानूनी ढंग से एकत्र होने के तीन केस दर्ज किए हैं। जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उनमें ज़्यादातर महिलाएं हैं, जिनमें उर्दू के जाने-माने शायर मुनव्वर राणा की बेटियां सुमैया राणा और फौजिया राणा भी शामिल हैं।

शुक्रवार रात को लगभग 50 महिलाओं ने घंटाघर पर धरना देना शुरू किया था, लेकिन जल्द ही भीड़ बढ़ती गई और ढेरों महिलाएं और बच्चे उनके साथ आकर बैठते गए। पुलिस की शिकायतों में 100 से ज़्यादा अनाम प्रदर्शनकारियों पर भी सरकारी अधिकारी द्वारा उचित तरीके से जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करने, सरकारी अधिकारी पर हमला कर अथवा बलप्रयोग द्वारा अपने कर्तव्य का पालन करने से रोकने' का आरोप लगाया गया है।
जिस घटना को इन आपराधिक मामलों का आधार माना जा रहा है, वह दरअसल एक महिला कॉन्स्टेबल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत है, जिसमें उसने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने उसके साथ हाथापाई की। जिन प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर महिला कॉन्स्टेबल को धक्का दिया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया, उन पर दंगा करने और गैरकानूनी ढंग से एकत्र होने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस पर आरोप है कि शनिवार रात को वे घंटाघर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के लिए रखे कम्बल और खाने का सामान उठाकर ले गए। लखनऊ पुलिस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए एक बयान में कहा, अफवाहें न फैलाइए, और कहा कि कम्बलों को उचित प्रक्रिया के बाद ज़्बत किया गया था।
लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ पिछले माह हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भडक़ गई थी, और पुलिस ने सदफ जफर सहित कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम लेकर इसी तरह के आपराधिक मामले दर्ज किए थे। उन लोगों पर अन्य आरोपों के साथ-साथ हत्या के प्रयास का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, (बाकी पेजï 5 पर)
बाद में जमानत की सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा था कि उनके पास इन सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
पिछले ही महीने संसद द्वारा पारित किए गए नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) में देश की नागरिकता के लिए पहली बार धर्म को आधार बनाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे तीन मुस्लिम-बहुल देशों - पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश - के उन अल्पसंख्यकों को मदद मिलेगी, जो धार्मिक अत्याचार की वजह से भागकर वर्ष 2015 से पहले भारत आ गए थे। देशभर में आलोचकों के मुताबिक, यह कानून मुस्लिमों के साथ भेदभाव करता है, और संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।(एनडीटीवी)


Date : 21-Jan-2020

नई दिल्ली, 21 जनवरी  दिल्ली विधानसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट पर सबकी नजर है। इस सीट पर आज सीएम अरविंद केजरीवाल नामांकन दाखिल करेंगे। केजरीवाल को सोमवार को ही नामांकन करना था लेकिन रोड शो के साथ पर्चा दाखिल करने पहुंचे केजरीवाल के समय से पहुंच नहीं पाए थे। नई दिल्ली विधानसभा सीट देश की सबसे वीआईपी विधानसभा सीट मानी जाती है। क्यों इसके इलाके में लुटियन दिल्ली का बड़ा इलाका आता है जिसमें सांसद, बड़े अधिकारी रहते हैं। यही वही सीट है जिसने आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल के राजनीतिक करियर को बड़ा आयाम दिया था। केजरीवाल ने इस सीट से साल 2013 के चुनाव में तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित को हराया था। इसके बाद साल 2015 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी की नूपुर शर्मा को हराया था। माना जा रहा था कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सीट पर किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारेंगी ताकि इस सीट पर केजरीवाल को कड़ी टक्कर दी जा सके और अरविंद केजरीवाल को यहीं पर घेर लिया जाए। लेकिन ऐसा लग रहा है कि दोनों ही पार्टियों ने एक तरह से यहां पर वॉकओवर दे दिया है और ऐसे नेताओं को दिया है जो कोई बड़ा चेहरा नही हैं।  

बीजेपी ने उतारा सुनील यादव को
भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुनील यादव को बीजेपी ने केजरीवाल के खिलाफ उतारा है। पेशे से सुनील यादव वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के तौर पर शुरुआत की थी। सुनील यादव इससे पहले दिल्ली बीजेपी में सचिव भी रहे हैं। तेजतर्रार युवा छवि के सुनील यादव डीडीसीए में भी डायरेक्टर के तौर पर जुड़े रहे हैं।
कांग्रेस ने उतारा रोमेश सभरवाल
नई दिल्ली से सीट कांग्रेस ने रोमेश सभरवाल को उतारा है। वह 40 सालों से कांग्रेस जुड़े हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के लिए तारीखों की घोषणा कर दी गई है, और राष्ट्रीय राजधानी में एक ही चरण में 8 फरवरी को मतदान होगा। मतदान के बाद 11 फरवरी को नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं जिसमें से 58 सामान्य श्रेणी की है जबकि 12 सीटें अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित हैं। (एनडीटीवी)।