राष्ट्रीय

15-Apr-2021 6:47 PM 17

चंडीगढ़, 15 अप्रैल | कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को 5 वीं, 8 वीं और 10 वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रमोट करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही प्रमोट कर दिया जाएगा, जबकि कक्षा पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) की 12वीं की परीक्षा को पहले ही स्थगित किया जा चुका है और इसपर बाद में निर्णय बाद में लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ये निर्णय शीर्ष अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ वर्चुअल बैठक के बाद लिया।

बैठक में चिकित्सा शिक्षा मंत्री ओ.पी. सोनी, शिक्षा मंत्री विजय इंदर सिंगला, मुख्य सचिव विनी महाजन, डीजीपी दिनकर गुप्ता शामिल थे।(आईएएनएस)


15-Apr-2021 4:18 PM 25

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), 15 अप्रैल | उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है। इससे पहले गोरखपुर में दो गुटों में जमकर बवाल हुआ और बवाल इतना बढ़ गया कि नौबत फायरिंग तक आ गई। मामला खजनी थाना क्षेत्र के महुआडाबर गांव का है, जहां ग्राम प्रधान पद के दो प्रत्याशियों के बीच बुधवार देर रात जमकर मारपीट हुई और फायरिंग भी की गई। पीड़ित गिलगिल दुबे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि आरोपी शंभू यादव को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

गिलगिल के भाई भोलेंद्र ने बताया कि उनका भाई बुधवार देर रात घर लौट रहा था, इसी दौरान उसको गोली मारी गई। (आईएएनएस)


15-Apr-2021 4:17 PM 24

नई दिल्ली, 15 अप्रैल | गुजरात के तट के पास समंदर के बीचोबीच गुरुवार को मादक पदार्थो की तस्करी करते हुए आठ पाकिस्तानी धर दबोचे गए हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इनके पास से 30 किलोग्राम हेरोइन बरामद किया है। भारतीय तटरक्षक बल की नजर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के करीब एक पाकिस्तानी नाव पीएफबी एनयूएच पर पड़ी, जिस पर आठ पाकिस्तानी नागरिक सवार थे। इनकी तलाशी लिए जाने पर नाव से 30 किलोग्राम हेरोइन पाया गया।

इसके बाद सभी आठ पाकिस्तान नागरिकों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। कानून प्रवर्तन एजेंसियां ड्रग तस्करों के पीछे किसी माफिया गैंग के होने की जांच कर रही है।

बरामद किए गए मादक पदार्थों की जांच करने और इसके प्रकार का पता लगाने के लिए फॉरेन्सिक साइंस लेबोरेटरी की एक टीम को बुलाया गया है।

तटरक्षक बल के एक अधिकारी ने कहा कि गुजरात एटीएस के साथ मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया गया। एटीएस को समुद्र तट के रास्ते से राज्य में अवैध वस्तुओं की तस्करी की सूचना थी।

पिछले एक साल में भारतीय तटरक्षक बल द्वारा लगभग 4,900 करोड़ रुपये के 1.6 टन नशीले पदार्थों को सफलतापूर्वक जब्त कर लिया है, जो मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के लिए किसी झटके से कम नहीं है। (आईएएनएस)
 


15-Apr-2021 4:15 PM 50

लखनऊ, 15 अप्रैल | भाजपा ने उन्नाव जिला पंचायत चुनाव में दुष्कर्म के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है। इसके बाद अब कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर उनके पक्ष में सामने आयी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक वीडियो डाल कर फैसले पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर उनकी माता और उनके परिवार की क्या गलती है। जो उनका टिकट ग्राम पंचायत चुनाव में काट दिया गया। ऐश्वर्या सेंगर ने पूछा है कि क्या उनके परिवार को हमेशा अन्याय सहना पड़ेगा। वीडियो में बेटी ऐश्वर्या ने कहा कि मेरा नाम क्या है इससे शायद अब फर्क ही नहीं पड़ता, लेकिन मेरा सरनेम सेंगर है। पिछले तीन साल से मेरे परिवार पर अन्याय पर अन्याय किया जा रहा है। मेरी मां संगीता सिंह सेंगर पिछले 15 वर्षों से उन्नाव में जिला पंचायत सदस्य हैं। सक्रिय राजनीति का हिस्सा रही हैं। ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपना हर दायित्व निभाती आ रही हैं। इसी कारण सभी सदस्यों द्वारा उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष भी चुना गया। आज एक महिला नेता की योग्यता, उनका अनुभव, उनकी मेहनत को ताक पर रख दिया गया।

ऐश्वर्या आगे कहती हैं कि इस देश में महिलाओं के लिए आरक्षण तो तय कर दिया गया है, लेकिन जब वो चुनाव के लिए आगे आती हैं तो उनके पिता और पति कौन हैं, ये क्यों महत्वपूर्ण हो जाता है? क्या एक औरत की योग्यता किसी की बीवी या बहन होने से कम हो जाती है? उसकी खुद की कोई पहचान नहीं?

उन्होंने आगे कहा कि आपसे सिर्फ अपनी मां की गलती पूछना चाहती हूं। वो दागी कैसे हुईं। क्या मुझे और मेरी मां को सम्मान से जीने का अब हक नहीं है। आज बोल रही हूं क्योंकि एक बार अन्याय को फिर से चुपचाप सुन लिया तो शायद जमीर जिंदा रहना न गंवारा करे।

गौरतलब हो कि जेल की सजा काट रहे कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर उन्नाव से भाजपा की उम्मीदवार बनाई गयी थीं। सेंगर की पत्नी को टिकट देने का मामला तूल पकड़ने और पीड़िता के परिवार की ओर से इसका विरोध करने के बाद पार्टी ने अपना निर्णय बदलते हुए संगीता का टिकट काट दिया। बताया गया है कि उनकी जगह नए उम्मीदवार का नाम जल्द घोषित किया जाएगा।

उन्नाव की अलग-अलग विधानसभा सीटों से कुलदीप सिंह सेंगर 4 बार विधायक रहा है। साल 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर को साल 2018 में उन्नाव दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भाजपा ने कुलदीप सिंह सेंगर को अगस्त 2019 में पार्टी से निष्काषित कर दिया था। कुलदीप सिंह सेंगर को कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। (आईएएनएस)
 


15-Apr-2021 4:13 PM 30

नई दिल्ली, 15 अप्रैल | दिल्ली सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए गुरुवार को वीकेंड कर्फ्यू की घोषणा की है। साथ ही इस दौरान आवश्यक सेवाओं, शादी में केवल पास के साथ ही जाने की इजाजत होगी।  (आईएएनएस)
 

 


15-Apr-2021 3:46 PM 75

पूर्णिया, 15 अप्रैल | बिहार के पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में एक महिला अपने ही जीजा के प्यार में ऐसी पागल हुई कि अपने ही पति की हत्या करने की साजिश रच दी और बाद में उसने अपने प्रेमी जीजा से इस हत्या को अंजाम करवाया। पुलिस ने अब दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि तीन दिन पहले पूर्णिया के कालीगंज से स्कॉर्पियो सवार 4 लोगों ने साईकिल दुकानदार मोहम्मद बाबुल को अगवा कर लिया और धमदाहा थाना क्षेत्र में उसकी गला दबाकर हत्या कर शव को फेंक दिया।

पुलिस को मामले की जांच के दौरान इनलोगों पर शक हुआ, जिससे पूरे मामले का खुलासा हो गया।

मुफस्सिल थाना के प्रभारी आदित्य कुमार झा ने बताया, "साईकिल मिस्त्री मोहम्मद बाबुल की पत्नी नवगछिया तुलसीपुर के रहने वाले अपने जीजा मोहम्म्द चांद से प्यार करती है। मृतक की पत्नी ने जीजा के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से अपने पति की हत्या करवाई।"

घटना में शामिल चांद को पुलिस नवगछिया स्थित उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना में प्रयुक्त किए गए गाड़ी को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।

उन्होंने बताया, "आरोपी चांद गाड़ी चलाने का काम चलाता था। घटना के दिन वह बाबुल को गाड़ी में बैठाकर धमदाहा की तरफ लेकर गया और वहीं कुछ लोगों के साथ मिलकर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और शव को सड़क किनारे फेंक दिया। इस दौरान वह मृतक की पत्नी से फोन पर लगातार संपर्क में था।"

सूत्रों के अनुसार, इन दोनों में पहले से ही प्रेम संबंध था, जिसको लेकर गांव में पंचायत भी बैठी थी।

थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। (आईएएनएस)
 


15-Apr-2021 3:36 PM 37

श्रीनगर, 15 अप्रैल | जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में गुरुवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जूनियर अधिकारी की एक इमारत से नीचे गिरने के बाद मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि शोपियां जिले के रेसिपोरा गांव में दो मंजिला इमारत से 178 सीआरपीएफ बटालियन के सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) श्याम सिंह नीचे गिर गए।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "उन्हें श्रीनगर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।"

अधिकारी ने कहा कि इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और मेडिको-कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।  (आईएएनएस)
 


15-Apr-2021 1:38 PM 17

नई दिल्ली, 15 अप्रैल : देश के कई राज्यों में कोरोना का डबल म्यूटेंट पाया गया है.करीब 10 राज्यों में वायरस का डबल म्यूटेंट पाया गया है. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश में डबल म्यूटेंट मिला है. सब जगह पर मामले बढ़ने के पीछे म्यूटेंट की भी भूमिका है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता की 100% राइज सिर्फ म्यूटेंट की वजह से है. करीब 14000 जीनोम सीक्वेंसिंग के आधार पर डबल म्यूटेंट की पुख्ता जानकारी आई है. मरने वालों और सेवेरिटी को लेकर म्युटेंट की भूमिका का एनालिसिस किया जा रहा है.दिल्ली में यूके वेरिएंट भी और डबल म्यूटेंट भी पाया गया है. 

दिल्ली से मिली जुली स्थिति पंजाब में है, राज्‍य में 80% यूके वेरिएंट पाया गया है. मुंबई में डबल म्यूटेंट नहीं है महाराष्ट्र में करीब 60% है. 18-19 राज्य में यूके वेरिएंट मिला है, यह पता लगाया जा रहा है कि प्रीलिमिनरी इन्फेक्शन, री इन्फेक्शन में इनकी भूमिका है या नहीं. सिवेरिटी में भूमिका है या नही, डेथ में है या नहीं और वैक्सीन पर क्या असर होगा.

सूत्रों ने बताया कि जिन-जिन राज्यों में डबल म्यूटेंट की मौजूदगी है, उन राज्यों से इस जानकारी को साझा किया जा रहा है. तेजी से फैलाव को रोकने के लिए एक पॉलिसी डिसीजन सरकार लेती है. स्टेट सर्विलांस ऑफिसर से साझा किया जाता है. जैसे ही लैब से रिपोर्ट मिलती है IDSP को तो वो उसको स्टेट सर्विलांस ऑफिसर से शेयर करती है.स्टेट सर्विलांस ऑफिसर स्थिति के हिसाब से ग्राउंड पर एक्चुअल एक्शन प्लान करने में मदद मिलती है.जिलेवार तरीके से म्यूटेंट की जानकारी रहती है.यू के वेरिएंट देश के 70-80 जिलों में मिला है, वहीं साउथ अफ्रीकन और ब्राजीलियन वेरिएंट की मौजूदगी कम जिलों तक ही सीमित है. (ndtv.in)
 


15-Apr-2021 1:18 PM 17

पूर्वोत्तर राज्यों में सत्ता के लिए दल बदलने और विधायकों के खरीद-फरोख्त की परंपरा पुरानी रही है, लेकिन असम अबतक इससे अछूता रहा है. असम में चुनाव नतीजे आने से पहले ही त्रिशंकु विधानसभा की आशंका व्यक्त की जा रही है.

  (dw.com)

पूर्वोत्तर इलाके के कई राज्यों में थोक भाव से दल बदलने की वजह से रातों रात सरकार बदलती रही है. लेकिन पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार कहा जाने वाला इलाके का सबसे बड़ा राज्य असम अब तक खरीद-फरोख्त की राजनीति से अछूता था. लेकिन राज्य में इस बार एनआरसी और सीएए की छाया तले हुए विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ और विपक्षी गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है. ऐसे में खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ गया है. बीजेपी के नेता हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही कह चुके हैं कि हर विपक्षी पार्टी में उनके लोग चुनाव लड़ रहे हैं.

विधायकों को खोने की आशंका के मद्देनजर कांग्रेस गठबंधन के कई उम्मीदवारों को जयपुर के होटल में रखा गया है तो उसकी सहयोगी बोड़ो पीपुल्स फ्रंट ने अपने उम्मीदवारों को विदेश भेज दिया है. हालांकि बीजेपी ने कांग्रेस, एआईयूडीएफ और बीपीएफ उम्मीदवारों को राज्य से बाहर भेजने को नाटक करार दिया है. लेकिन कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. इसलिए पहले से सावधानी बरतना बेहतर है.

असम विधान सभा के चुनाव
असम में तीन चरणों में 126 सीटों के लिए हुए विधानसभा चुनाव को बीजेपी की अगुवाई वाले सत्तारूढ़ गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर माना जा रहा है. तमाम सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आई है. ऐसे में राज्य की राजनीति में पहली बार विपक्ष दलों को अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त का डर सता रहा है. कांग्रेस और उसके सहयोगी बदरुद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने इसी खतरे को भांपते हुए पहले ही अपने कम से कम 20 उम्मीदवारों को कांग्रेस शासित राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक रिसॉर्ट में भेज दिया है.

दूसरी ओर, हाल तक बीजेपी सरकार में शामिल रहा बोड़ो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) अबकी विपक्षी गठबंधन में है. उसने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए अपने 10 उम्मीदवारों को विदेश दौरे पर भेज दिया है. वर्ष 2016 में बीपीएफ ने बोड़ो-बहुल इलाकों की 12 सीटें जीती थी. लेकिन बोड़ो स्वायत्त परिषद के चुनावी नतीजों के बाद बीजेपी ने बीपीएफ से नाता तोड़ कर दूसरी पार्टी के साथ हाथ मिला लिया था. तीसरे चरण के मतदान से पहले बीपीएफ के तामुलपुर सीट के उम्मीदवार आरके बसुमतारी ने तो मैदान से हटने का फैसला करते हुए बीजेपी का दाम थाम लिया था. इस वजह से खरीद-फरोख्त का अंदेशा बढ़ा है.

चुनाव में एनआरसी और सीएए
असम में एनआरसी और सीएए ज्वलंत मुद्दे रहे हैं और विधानसभा चुनाव भी इससे अछूते नहीं रहे हैं. इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने अपने घोषणापत्र और चुनाव अभियान के दौरान राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को दुरुस्त करने के अलावा असमिया अस्मिता, भाषा और संस्कृति की रक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया था. लेकिन नागरिकता कानून के मुद्दे पर उसने आश्चर्यजनक रूप से चुप्पी साधे रखी. दरअसल उसे इस मुद्दे के बैकफायर करने का संदेह है.

ऊपरी असम में करीब 45 सीटों पर मूल असमिया लोगों यानी अहोम समुदाय का जबरदस्त असर है. नागरिकता कानून का सबसे ज्यादा विरोध उसी इलाके में हुआ था. अहोम समुदाय के लोगों को आशंका है कि सीएए के कारण बांग्लादेश से आने वाले बांग्लाभाषी लोगों को भी नागरिकता मिल जाएगी और इससे असमिया लोगों के वजूद, भाषा और संस्कृति पर खतरा पैदा हो जाएगा. यही वजह है कि भाजपा ने इस मुद्दे पर चर्चा ही नहीं की.

विपक्ष का जोर एनआरसी पर
दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सीएए और एनआरसी को ही प्रमुख मुद्दा बनाया था. इसके जरिए उसने ऊपरी असम के अहोम समुदाय के अलावा अल्पसंख्यकों को साधने का प्रयास किया था. राज्य के 27 में से नौ जिले अल्पसंख्यक बहुल हैं और कम से कम 49 सीटों पर इस तबके के वोट निर्णायक होते हैं. वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इनमें से 22 सीटें जीती थीं. लेकिन तब कांग्रेस और एआईयूडीएफ के अलग-अलग चुनाव लड़ने की वजह से अल्पसंख्यक वोटों में विभाजन का फायदा उसे मिला था. इस बार यह दोनों साथ हैं. इसलिए पार्टी ने सीएए और इस पर सत्तारूढ़ पार्टी की चुप्पी को भुनाने का भरसक प्रयास किया है.

असम की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अस्सी के दशक से ही अहम रही है. इस बार भी सीएए-विरोधी आंदोलन की कोख से उपजी दो नई पार्टियों, असम जातीय परिषद (एजेपी) और राइजोर दल (आरडी) ने हाथ मिलाया है. पहली बार चुनाव मैदान में उतरी इन पार्टियों के प्रदर्शन के बारे में कोई पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है. लेकिन इनका बेहतर प्रदर्शन भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

राजनीतिक बहस में आरोप-प्रत्यारोप
असम में बीजेपी को खड़ा करने वाले दो ही बड़े नेता हैं, एक मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और दूसरे कांग्रेस से बीजेपी में आए हेमंत बिस्वा सरमा. असम में सरमा को बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है. लंबे समय तक कांग्रेस में रहने की वजह से पार्टी के नेताओं पर उनका खासा असर है. यही वजह है कि कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला से असम के उम्मीदवारों को राजस्थान भेजने की वजह पूछी गई तो उनका कहना था कि इसका जवाब हेमंत बिस्व सरमा और सर्बानंद सोनोवाल ही दे सकते हैं. इससे साफ है कि बीजेपी के यह दोनों नेता नतीजों से पहले ही कांग्रेस को डरा रहे हैं.

विपक्षी गठजोड़ के करीब तीन दर्जन उम्मीदवारों को राज्य से बाहर भेजने के बाद अब कांग्रेस अपने बाकी उम्मीदवारों को भी किसी सुरक्षित जगह भेजने पर विचार कर रही है. क्या खरीद-फरोख्त के डर से विधायकों को बाहर भेजा गया है? बीपीएफ नेता और मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्म कहती हैं, "मौजूदा हालात में हम इसकी संभावना से इंकार नहीं कर सकते.” कांग्रेस विधायक और सदन में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया कहते हैं, "हमें सावधानी बरतनी होगी. हम अपने उम्मीदवारों को अलोकतांत्रिक गतिविधियों से बचाने का प्रयास कर रहे हैं.” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई कहते हैं, "हमारे गठबंधन के सहयोगी बीजेपी की घटिया चालों से अपने उम्मीदवारों को बचाने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं. हमने गोवा और मणिपुर समेत कई राज्यों में देखा है कि बीजेपी सत्ता हासिल करने के लिए किस तरह जनादेश के साथ खिलवाड़ कर सकती है.”

बीजेपी का विपक्ष के आरोपों से इंकार
उधर, बीजेपी का दावा है कि विपक्ष के तमाम आरोप निराधार हैं. पार्टी ने भरोसा जताया है कि वह अपने सहयोगी दलों के साथ बहुमत हासिल कर दोबारा सत्ता में लौटेगी. प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता सुभाष दत्त कहते हैं, "विपक्षी दलों में जो डर है उससे साफ है कि उनको अपने उम्मीदवारों पर भरोसा नहीं है. हार तय जानकर वह लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं. हमें उनके उम्मीदवारों की जरूरत नहीं है.” बीजेपी विधायक शिलादित्य देब कहते हैं, "आजकल खरीद-फरोख्त का काम ऑनलाइन भी होता है. अगर कोई उम्मीदवार खुश नहीं है तो सात तालों में बंद रखने पर भी वह भाग जाएगा. बीपीएफ के एक उम्मीदवार ने तो ऐन मतदान के पहले ही उम्मीदवारी वापस ले ली थी. इसके लिए कौन जिम्मेदार था?”

गौहाटी विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर अखिल रंजन दत्त कहते हैं, "मौजूदा परिस्थिति में सत्ता हासिल करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का अंदेशा जायज है. ज्यादातर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों का पार्टी के आदर्शों या राजनीतिक निष्ठा से कोई लेना-देना नहीं होता. पार्टी नेतृत्व का भी उन पर कोई नियंत्रण नहीं रहता. यह प्रवृत्ति असम के लिए नुकसानदेह तो है ही, जनादेश का भी अपमान है.”
 


15-Apr-2021 1:16 PM 16

बिहार के मौसम में हो रहे लगातार बदलाव के कारण इस वर्ष आम के फलों में लगने वाले रोगों से किसान परेशान हैं.

  (dw.com)

किसानों का कहना है कि वातावरण में नमी के अधिक समय तक रहने के कारण आम के मंजर पर मधुआ रोग का प्रकोप रहा है. इसके बाद जब टिकोला लगा तब रेड बैंडेट केटर किलर का प्रकोप दिखने लगा है, जिससे फल खराब हो रहे हैं.

भागलपुर के रहने वाले आम के किसान रामप्रवेश सिंह कहते हैं कि मधुआ के शिशु और वयस्क कीट आम की नई शाखाओं समेत मंजर और पत्तियों का रस चूस जा रहे हैं, जिस कारण मंजर सूख कर झड़ गए. कुछ पेडों में टिकोले लगे हैं. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मधुआ कीट द्वारा चिपचिपा मधु सरीखा पदार्थ छोड़ने के कारण मंजर पर फफूंद उग रहे हैं. यह पौधे की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया की बाधा बन रहे हैं.

इधर, आम के किसान इस बार रेड बैंडेट केटर किलर से भी परेशान हैं. किसान सुरेश कुमार राय कहते हैं कि इस साल मंजर के समय मधुआ ओर अब रेड बैंडेट केटर किलर से किसान परेशान हैं. आम में टिकोले लग रहे हैं और नीचे की ओर से छेद हो जा रहा है और काली धारी बन जा रही है.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के उद्यान कीट वैज्ञानिक डॉ. मुकेश सिंह आईएएनएस को बताते हैं कि इस बार बिहार में अधिकांश समय मौसम में बदलाव होता रहा, जिस कारण वातावरण में नमी की मात्रा अधिक समय तक रही.

उन्होंने कहा कि आम में मंजर लगने के समय नमी की मात्रा काफी अधिक थी जिस कारण मधुआ रोग का प्रकोप बढ़ा. उन्होंने बताया कि इस साल मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर सहित कई क्षेत्रों में रेड बैंडेट केटर किलर की भी समस्या उत्पन्न हो गई है. उन्होंने कहा कि पांच साल पहले तक यह समस्या बिहार में नहीं थी. पिछले वर्ष यह समस्या दरभंगा के कुछ इलाकों में देखी गई थी. उन्होंने बताया, "रेड बैंडेड केटर किलर (फली छेदक कीट) आम में छेद कर सुराख बना रहे हैं तथा गुठली के भीतर जाकर उसे सड़ा देते हैं, जिससे आम का फल काला पड़ने के साथ नष्ट हो जाता है. कीटों का प्रकोप संक्रामक रोग की तरह बढ़ रही है."

उन्होंने बताया कि यहां के किसानों की सबसे बड़ी समस्या है कि वे बागों में तभी जाते हैं जब फलों का समय आ जाता है. ऐसे में बागों की देखरेख नहीं हो पाती है. उनका कहना है कि रेड बैंडेट केटर किलर के टिकोलों को किसान तोडकर पानी में फेंक दे या आग में जला दें, जिससे आम के फलों को कुछ हद तक बचाया जा सकता है. फल तोड़ने के बाद ऑफ सीजन में तना एवं मोटी टहनियों के छेद में छुपे प्यूपा संग्रह कर नष्ट करें.

सिंह यह भी कहते हैं कि आम के किसानों को दवा के छिड़काव से बचना चाहिए. जब जरूरत पड़े तब ही दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आमतौर पर यहां देखा जाता है कि आम के मंजर लगे नहीं दवा का छिड़काव किया जाता है.

मनोज पाठक (आईएएनएस)


14-Apr-2021 10:04 PM 15

-सौतिक बिस्वास
"क्या फिर से लॉकडाउन लगाया जाएगा?"
पिछले हफ़्ते मुंबई में अपने छोटे से कमरे में बैठे सेठी बंधु जब मुझसे वीडियो कॉल पर बात कर रहे थे तो उनकी आवाज़ में बेचैनी साफ़ तौर पर महसूस हो रही थी. ख़राब इंटरनेट कनेक्शन के बीच कांपती आवाज़ में वे यही सवाल बार-बार पूछ रहे थे.
इस बात को एक दशक से ज़्यादा अरसा हो गया जब संतोष और टुन्ना सेठी ओडिशा में अपना घर-परिवार छोड़कर काम की तलाश में निकले थे. उन्हें अपने घर से 1600 किलोमीटर दूर मुंबई में जाकर ठिकाना मिला.
शहर की गगनचुंबी इमारतों के साये तले संतोष और टुन्ना यहां अपना पसीना बहाते हैं. ये इमारतें बाहर से आए इनके जैसे मजदूरों ने ही दौलतमंद लोगों के लिए बनाई हैं.
सिर पर सीमेंट, रेत, ईंट और पत्थर ढोने के बाद वे हर रोज़ आठ घंटे की दिहाड़ी में 450 रुपये कमाते हैं. निर्माणाधीन इमारतों में उनकी रातें गुजरती हैं, उनका रहना खाना-पीना वहीं होता है. अपनी बचत का बड़ा हिस्सा वे अपने घर भेज देते हैं.
'इंडिया मूविंग: अ हिस्ट्री ऑफ़ माइग्रेशन' किताब के लेखक चिन्मय तुंबे के अनुसार, भारत में 45 करोड़ से भी ज़्यादा लोग एक जगह से दूसरी जगह पर जाकर काम करते हैं. उनमें छह करोड़ लोग अपना राज्य छोड़कर दूसरे राज्य में जाकर मजदूरी करते हैं.
प्रोफ़ेसर तुंबे बताते हैं, "भारत के शहरों की उभरती हुई 'इन्फॉर्मल इकॉनमी' की रीढ़ यही मजदूर हैं. देश के सकल घरेलू उत्पाद में दस फीसदी का योगदान करने के बावजूद ये तबका सामाजिक और राजनीतिक रूप से जोख़िम की स्थिति में है."

ATUL LOKE
संतोष और टुन्ना जहां काम करते हैं वहीं नज़दीक बनी अस्थायी झुग्गियों में रहते हैं.
'इन्फॉर्मल इकॉनमी' किसी देश की अर्थव्यवस्था का वो हिस्सा होता है, जहां ज़्यादातर भुगतान नकद में किया जाता है और जिससे सरकार टैक्स वसूल नहीं पाती है.
उधर, मुंबई में डर का आलम बुरी तरह से छाया हुआ है. सेठी बंधु भी इसी के साथ जी रहे हैं. वे पूछते हैं, "क्या हमें घर वापस लौटना होगा? क्या आपके पास कोई जानकारी है?"
महाराष्ट्र में अब तक कोरोना संक्रमण के 30 लाख से भी ज़्यादा मामले रिपोर्ट हो चुके हैं. लगता है कि जैसे राज्य की राजधानी मुंबई इस बात पर अड़ी हुई है कि भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर का केंद्र भी उसे ही बनना है.
राज्य सरकार ने कई बार ये चेतावनी दे दी थी कि अगर संक्रमण के मामले कम न हुए तो पूर्ण लॉकडाउन लगाया जा सकता है.
मंगलवार को वही हुआ. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार ने कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए नई पाबंदियां लागू कर दीं.
हालांकि राज्य सरकार ने अनिवार्य सेवाओं और यात्राओं को जारी रखने की छूट दी है और निर्माण गतिविधियों पर भी कोई रोक नहीं लगाई गई है. यानी इस सेक्टर में सेठी बंधु जैसे मजदूरों को फिलहाल काम मिलता रहेगा और वे निर्माण स्थल पर ही रह सकेंगे.

भारत में पिछले साल व्यापक रूप से लॉकडाउन लगाया था. ऐसा लगा कि उसकी योजना ठीक से नहीं बनाई गई थी. इसके कारण एक करोड़ से ज़्यादा मजदूरों को बड़े शहरों से पलायन करके अपने घर वापस लौटना पड़ा था.
फटेहाल मजदूर, जिनमें औरत और मर्द दोनों ही थे, पैदल ही, साइकिलों पर, ट्रकों पर और बाद में ट्रेन से निकल पड़े. नौ सौ से ज़्यादा लोगों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. इनमें से 96 लोगों ने तो ट्रेन में दम तोड़ दिया.
लॉकडाउन के दौरान हुए मजदूरों के पलायन ने साल 1947 के रक्तरंजित बंटवारे के दौरान शरणार्थी बनने पर मजबूर लाखों लोगों की याद दिला दी.
मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर की राय में "शायद ये अभूतपूर्व मानवीय संकट था जो बहुत से भारतीयों ने अपने जीवनकाल में देखा होगा."
मुंबई एक बार फिर से लुटी हुई दिख रही है और सेठी बंधु एक तरफ़ कुआं तो दूसरी तरफ़ खाई की स्थिति में हैं.
पिछले साल के लॉकडाउन की डरावनी यादें उनका पीछा कर रही हैं. रोज़ी-रोटी और आने-जाने के साधन बंद हो जाने के कारण पिछले साल वे दो महीने तक इसी शहर में फंसे रह गए थे और आख़िरकार उन्हें भीख मांगकर गुजारा करना पड़ा था.
संतोष सेठी की उम्र 43 साल हो गई है. वे बताते हैं, "वो यकीनन एक बुरा अनुभव था. एक ख़राब दौर था."

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संतोष और टुन्ना उन 17 मजदूरों के समूह का हिस्सा था जो मुंबई की एक निर्माणाधीन इमारत की जगह पर रह रहे थे.
पिछले साल 24 मार्च को जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि न तो उनके पास खाना बचा था और न ही पैसे.
उनके ठेकेदार ने उन्हें एक हज़ार रुपये दिए लेकिन इस रकम पर उनकी ज़रूरतों के लिहाज से हफ़्ते भर से ज़्यादा गुजर-बसर करना मुश्किल था.
बाहर कदम रखना और भी जोखिम भरा था क्योंकि सड़क पर लॉकडाउन की पाबंदियों को तोड़ने वाले लोगों को पुलिस के डंडे का सामना करना पड़ता था.
परेशान और फिक्रमंद घरवालों से वीडियो पर बात करने के दौरान वे बिलख पड़ते थे. भूख उनके लिए 'सबसे बड़ी मुसीबत' थी.
चालीस बरस के टुन्ना सेठी बताते हैं, "हम ज़्यादा वक्त भूखे ही रहते थे. दिन में एक ही बार खाना मिल पाता था. खाने-पीने की चीज़ें जुटाना एक भारी चुनौती थी."
खाने की तलाश में सेठी बंधुओं की मुलाकात बेघर और लाचार प्रवासी मजदूरों के लिए काम कर रहे एक ग़ैर सरकारी संगठन के लोगों से हुई. 'खाना चाहिए' नाम के इस संगठन ने पिछले साल के लॉकडाउन के दौरान सेठी बंधुओं जैसे छह लाख प्रवासी मजदूरों को मदद पहुंचाई थी और मुंबई के ज़रूरतमंद लोगों को 45 लाख प्लेट खाने की आपूर्ति की थी.

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बीते साल लॉकडाउन के दौरान संतोष और टुन्ना के लिए भीख मांगने तक की नौबत आ गई थी
फटेहाली और लाचारी के उन दिनों में सेठी बंधुओं की मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता सुजाता सावंत से हुई.
सुजाता सावंत बताती हैं, "वे लोग हमारे पास आ रहे थे और कह रहे थे कि वे इस शहर में मर जाएंगे और अपने परिवारवालों से कभी नहीं मिल पाएंगे. सेठी बंधु भी खाने की तलाश में हमारे पास आए थे और वे वापस अपने घर लौटना चाहते थे."
सुजाता सावंत और उनके साथी कार्यकर्ताओं ने ज़रूरतमंद मजदूरों के लिए ऐसे पैकेट तैयार किए थे जिनमें चावल, मसूर की दाल, तेल, साबुन, चाय, चीनी और नमक जैसी ज़रूरी चीज़ें थीं. ताकि ये मजदूर अपने ठिकाने पर लौटकर नहा सकें और अपने केरोसिन स्टोव पर खाना बना सकें.

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सुजाता सावंत बताती हैं कि "पूरे शहर में इन मजदूरों के मालिकों और उनके ठेकेदारों ने अपने फोन बंद कर लिए थे और उन्हें लावारिस छोड़ दिया था. एक मजदूर साबुन मांगने के लिए आया. उसने बताया कि वो पिछले 20 दिनों से बिना साबुन के नहा रहा था. एक और आदमी ने बताया कि वो पिछले तीन दिनों से सार्वजनिक शौचालय नहीं जा पाया था क्योंकि उसके पास अपनी झुग्गी के पब्लिक टॉयलेट में जाने के लिए पैसे नहीं थे."
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ये देखा कि स्थानीय राजनेताओं ने ग़ैरसरकारी संस्थाओं की ओर से भेजे गए राशन के पैकेट पर अपनी तस्वीर चिपका दी, ये पैकेट ब्लैक मार्केट में बेचे गए और कई बार तो उन इलाकों में बंटवाने से मना कर दिया, जिनके बारे में उनकी राय थी कि वहां उन्हें वोट नहीं मिलते.
भूख की राजनीति ने इन कोशिशों के रास्ते में बाधा खड़ी की.
'खाना चाहिए' के नीरज शेट्या बताते हैं, "हमने पाया कि लॉकडाउन के दौरान राशन के पैकेट के वितरण में लोगों के साथ धर्म, लिंग, जाति और भाषा के नाम पर भेदभाव किया जा रहा था."
दो महीने के संघर्ष के बाद सेठी बंधुओं को एक चार्टर प्लेन से उनके घर वापस भेजा गया. इस चार्टर प्लेन का इंतजाम मुंबई के वकीलों के एक समूह ने वहां फंसे मजदूरों को उनके घर वापस भेजने के लिए किया था.
वे भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर सुबह आठ बजे पहुंचे. लेकिन वहां से 140 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंजम पहुंचने के लिए उनके पास न तो दाना-पानी था और न ही यातायात का कोई साधन.
टुन्ना सेठी बताते हैं, "अधिकारियों ने हमारे साथ कुत्ते जैसा बर्ताव किया. उन्होंने बिस्कुट के पैकेट हमारी तरफ़ फेंक दिए और कहा कि हम बीमारी वाली जगह से आए हैं."
सेठी बंधुओं के गंजाम पहुंचते-पहुंचते शाम ढल गई थी जहां उनकी मुलाकात परिवारवालों से हुई. लेकिन इससे पहले उन्हें एक स्कूल की इमारत में 14 दिन क्वारंटीन में गुजारना पड़ा.

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सरकार ने उनकी ज़िंदगी की गाड़ी पटरी पर वापस लाने के लिए दो हज़ार रुपये की मदद दी लेकिन ये पैसे जल्द ही खत्म हो गए.
पांच भाइयों वाले उनके परिवार के पास एक एकड़ ज़मीन है. जो अनाज उपजता है, वो परिवार की रसोई में चला जाता है. कुछ महीनों तक संतोष ने एक पड़ोसी के खेत में 350 रुपये की दिहाड़ी के दर से काम किया. उनके जैसे वापस लौटने वाले कुछ लोगों ने सड़क बनाने का काम किया और कुछ को रोज़गार गारंटी स्कीम का सहारा मिला. महीनों इसी तरह गुजर गए.
जनवरी में उनके ठेकेदार ने उन्हें फिर से फोन किया. लग रहा था कि महामारी अब सुस्त पड़ रही है. संक्रमण के मामले कम हो रहे थे. निर्माण गतिविधियां फिर से शुरू होने लगी थीं. सेठी भाइयों ने एक बार फिर से मुंबई की ओर रवाना होने के लिए खचाखच भरी ट्रेन पकड़ी और दो दिनों के सफ़र के बाद उसी ज़िंदगी में लौट आए.
इस बार उनका ठिकाना बना शहर के बाहरी इलाके की एक सोलह मंज़िला निर्माणाधीन इमारत. एक ठेकेदार के पास उनके पिछले साल की मजदूरी का पैसा अभी भी बाकी है. इस बार भी रोज़ की दिहाड़ी में कोई बदलाव नहीं हुआ है. सेठी भाइयों के पास और कोई चारा नहीं था, उन्होंने दोबारा से काम शुरू कर दिया.
परिवार को फिर से पैसे भेजा जाने लगा. बीते सालों में उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया था, मां-बाप के लिए दवाएं खरीदी थीं, गांव में एस्बेस्टस की छत वाला एक पक्के का मकान बनवाया था.
मैंने उनसे पूछा कि पिछले साल की तरह पाबंदियां लगाए जाने के आसार हैं, क्या आप लाचार नहीं महसूस कर रहे हैं. मुंबई से जाने वाली बसों और ट्रेनों में घर लौटने के लिए परेशान मजदूरों की बाढ़ उमड़ रही है.
उन्होंने जवाब दिया, "किसी को हमारी परवाह नहीं है. क्या आप हमारे ठेकेदार से हमारी मजदूरी दिलाने में मदद करेंगे?"
टुन्ना सेठी ने पूछा, "मुझे मधुमेह है. मुझे दवाएं खरीदनी है. मेरे खर्च मेरे भाई से ज़्यादा हैं."
टुन्ना की बात पर संतोष सहमति जताते हैं.
उनके लिए ये दुनिया अनिश्चितताओं और परेशानियों से भरी हुई है. और इस सब के बीच भूख का डर परवान चढ़ रहा है.
"हम डरे हुए हैं. पिछले साल जैसा इस बार कुछ नहीं होगा, सही कह रहा हूं न? अगर ऐसा होता है तो घर लौटने में आपको हमारी मदद करनी होगी." (bbc.com/hindi)


14-Apr-2021 9:52 PM 86

भोपाल, 14 अप्रैल: प्रदेश की राजधानी भोपाल  में कोरोना काल में मौतों  का आंकड़ा एकाएक बढ़ गया है. शमशान घाट ओर कब्रिस्तान में आम दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा लाशें पहुंच रही हैं, जिसके चलते कब्रिस्तान में जगह की कमी तो शमशान घाटों में लकड़ियों की कमी होने लगी है. यहां तक कि शमशान घाटों में अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. भोपाल के कब्रिस्तान और शमशान घाटों का यह हाल है.

कोरोना की दूसरी लहर इतनी खौफनाक होगी इसका अंदाजा शायद किसी को नहीं था. एक तरफ जहां अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह नहीं है. वहीं शमशान घाट और कब्रिस्तानों में भी जगह की कमी होने लगी है.
वीडियो में दिख रहे भोपाल के कब्रिस्तान में जहां कोरोना से होने वाली मौत के बाद लाशों को दफनाया जाता है. यहां पर अब लाशों को दफनाने के लिए जगह नहीं बची है. मिट्टी खोदकर नई कब्र बनाने के लिए कलेक्टर को कब्रिस्तान वालों ने खत भी लिखा है. वहीं हर रोज दर्जन भर लाशें यहां पहुंच रही हैं.
Opinion : मध्य प्रदेश में मुर्दे उगल रहे हैं कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों का सच

वहीं भोपाल के शमशान घाटों की हालत और भी ज्यादा खराब है. यहां रोज 40 से ज्यादा लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. हालात ये हैं कि अंतिम संस्कार के लिए लाइन लग रही है, तो लकड़ियां भी अंतिम संस्कार के लिए कम पड़ने लगी हैं.

कोरोना काल के पहले दिन में मुश्किल से 4 या 5 लाशें आती थीं. लेकिन, अब रोज 40 के आसपास लाशें अंतिम संस्कार के लिए शमशान घाटों पर पहुंच रही हैं, भोपाल में 2 शमशान घाट और एक कब्रिस्तान में लाशों को दफनाया जा रहा है. ऐसे में सवाल ये है कि इन बिगड़ते हालातों को कैसे संभाला जाएगा, क्योंकि जिस तरह से मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं, उससे तो ये साफ है अब हालात बेकाबू हो चले हैं.
(news18.com)


14-Apr-2021 9:48 PM 28

जयपुर,14 अप्रैल: राजस्थान में कोरोना संक्रमण की रफ्तार को रोकने की दिशा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  ने एक बड़ा कदम उठाया है. इस दिशा में गहलोत सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदेश के सभी शैक्षणिक/ कोचिंग संस्थान और पुस्तकालयों को बंद करने का आदेश जारी किया है. साथ ही प्रदेश के राजकीय कार्यालयों को शाम 4:00 बजे बंद करने का आदेश दिया है. हालांकि अभी इन गाइडलाइंस में आंशिक संशोधन होने की संभावना है.

वहीं गहलोत राज्य सरकार ने विवाह समारोह में 50 लोगों की संख्या निर्धारित की है. इसमें बैंड बाजा वादकों को 50 व्यक्तियों की संख्या से अलग रखा जाएगा. राज्य में नई गाइडलाइंन 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी. बता दें कि गहलोत सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते यह निर्णय लिया है.

सरकारी ऑफिस 4 बजे होंगे बन्द
गहलोत सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक शाम 6 से  सुबह 6 बजे तक राज्य में कर्फ्यू  रहेगा. वहीं राज्य में अंत्येष्टि में 20 व्यक्तियों को शामिल होने की अनुमति दी गई है. इसके साथ ही प्रदेश में राजकीय कार्यालय शाम 4:00 बजे तक ही खुलेंगे. राज्य के सभी शहरों, क्षेत्रों में नगर निकाय की सीमा में शाम 6 बजे से प्रातः 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू रहेगा. अभी इन गाइडलाइंस में आंशिक संशोधन हो सकता है.(news18.com)
 


14-Apr-2021 9:45 PM 18

अहमदाबाद. गुजरात में बीते एक सप्ताह से शमशानों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है, जिसके चलते कोविड-19 या अन्य रोगों के कारण जान गंवाने वाले लोगों के संबंधियों को उनके अंतिम संस्कार के लिये घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि हिंदू धर्म में आमतौर पर सूरज ढलने के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता, लेकिन इन दिनों शमशानों में शवों की भारी संख्या के चलते लोगों को रात में भी अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है.


सूरत शहर के उमरा इलाके के एक शमशान में दो दिन पहले रात के समय एक साथ 25 शवों का लकड़ियों से बनी चिताओं पर अंतिम संस्कार किया गया. वडोदरा में भी श्मशानों में भीड़ बढ़ने के कारण लोगों को रात में ही अंतिम संस्कार करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है. वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष हितेन्द्र पटेल ने 'पीटीआई-भाषा' को यह जानकारी दी.


हालात से निपटने और इंतजार के घंटे कम करने के लिये अधिकारियों ने कुछ श्मशानों में लोहे की चिताओं का भी इंतजाम किया है. साथ ही जिन श्मशानों में अंतिम संस्कार नहीं किया जा रहा था, उन्हें भी खोल दिया गया है. अहमदाबाद शहर में कुछ मृतकों के परिजनों ने दावा किया कि उन्हें श्मशान में आठ घंटे से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा. यहां दो मुख्य श्मशानों वाडाज और दुधेश्वर में बीते कुछ दिन में भारी भीड़ देखने को मिली है.


वाडाज श्मशान में मंगलवार को अपने संबंधी के अंतिम संस्कार के लिये कतार में खड़े एक व्यक्ति ने पत्रकारों से कहा कि सुबह आठ बजे से दोपहर तक सात शव लाए जा चुके हैं. उसने कहा कि हमें अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी पड़ी. हम अपने संबंधी के अंतिम संस्कार के लिये सुबह जल्दी आ गए थे, जिसके चलते शाम हमारी बारी आ सकी. अहमदाबाद के दुधेश्वर इलाके के श्मशान में भी लोग ऐसी ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं.


कोविड-19 से जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के संबंधी जयदीपसिंह परमार ने कहा कि पहले तो उन्हें शव को श्मशान लाने के लिये एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा और उसके बाद अंतिम संस्कार के लिये आठ घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ी. उन्होंने कहा, ''एक व्यक्ति को औसतन आठ से नौ घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ रही है.''

इस समस्या के समाधान के लिये वडोदरा नगर निगम ने हाल ही में और अधिक शवों के अंतिम संस्कार के लिये धातु की बनी 35 नयी चिताएं लगाई हैं. नगर निकाय की स्थायी समिति के प्रमुख हितेन्द्र पटेल ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, ''पहले हमने कोविड-19 से जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार के लिये वडोदरा शहर में चार श्मशानों को अनुमति दी थी. भीड़ को देखते हुए हमने दो दिन पहले आठ अन्य श्मशानों को भी अनुमति दे दी.'' (news18.com)


14-Apr-2021 9:42 PM 17

नई दिल्‍ली. देश में कोरोना वायरस महामारी का कहर जारी है. हर दिन डराने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. इस बीच, चुनावी राज्‍य पश्चिम बंगाल की राजनीति सभाओं में उमड़ रही भारी भीड़ से कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां भी उड़ रही हैं. जिसे देखते हुए नए मुख्‍य चुनाव अधिकारी सुशील चंद्रा ने शुक्रवार को बंगाल के सभी राजनीति दलों की बैठक बुलाई है. जिसमें राजनीतिक दलों को कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने के लिये कहा जाएगा. चुनाव आयोग ने बंगाल के चुनाव अधिकारी से इस बैठक को बुलाने को कहा है.

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से बंगाल में भी कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसे देखते हुए ममता बनर्जी सरकार ने बुधवार को महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तेलंगना से राज्य में आने वाले हवाई यात्रियों के लिए निर्देश जारी किया और कहा कि उन्हें अपने साथ आरटी-पीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लानी होगी, जो विमान में सवार होने से अधिकतम 72 घंटे पहले की हो. एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि यह निर्देश देश में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि को देखते हुए दिया गया है. उन्होंने कहा, 'यात्री को बंगाल के लिए प्रस्थान करने से 72 घंटे पहले जांच करवानी होगी. आगमन पर जांच किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है.' अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही बंगाल उन 10 राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस प्रकार के प्रतिबंध लगाए हैं. (news18.com)


14-Apr-2021 9:40 PM 17

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टेट प्लेन अहमदाबाद भेजकर रेमडेसीविर की 25 हजार डोज मंगाई हैं. साथ ही सीएम योगी ने प्रदेश में रेमेडिसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता और बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. इस बाबत उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट भी तलब की है. सीएम योगी ने तीसरी बार स्टेट प्लेन को लोगों के जीवन को बचाने में काम आने वाली दवा लाने के लिए अहमदाबाद भेजा है. इससे पहले उन्होंने पिछले साल नौ जून को ट्रूनेट मशीनें मंगाने के लिए स्टेट प्लेन को गोवा भेजा था. सात अप्रैल को बैंगलोर से राजकीय विमान भेजकर मेडिकल इक्यूपमेंट मंगवाया था. सीएम योगी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया है कि बाजार में निर्धारित दरों पर रेमेडिसिविर इंजेक्शन लोगों को मिले, इसे सुनिश्चित किया जाए.

सीएम योगी के निर्देश पर रेमडेसीविर इंजेक्शन सहित कोरोना के इलाज में उपयोग की जा रही आठ दवाओं की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है. जिसके तहत राज्य के हर जिले में रेमडेसीविर, आईवरमैक्टिन, पैरासिटामोल, डाक्सिसाईक्लिन, एजिथ्रोमायसिन, विटामिन सी, जिंक टेबलेट, विटामिन बी काम्पलेक्स और विटामिन डी 3 की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. इन दवाइयों की किसी भी जिले में कोई कमी ना होने पाए, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दवा निर्माता कंपनियों से बात की है.

इन कंपनियों से कहा गया है कि किसी भी दशा में कोरोना के इलाज में काम काने वाली दवाओं की किल्लत ना होने पाए. हर जिले में दवाओं का पर्याप्त स्टाॅक रहे, इसके लिए हर जिले में दवाओं की उपलब्धता की जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर कर रहे हैं, ताकि किसी भी दवा की कमी ना होने पाए. सीएम योगी ने रेमडेसीविर सहित कोरोना के इलाज में काम आने वाली सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का फैसला किया है, जिसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मुस्तैदी से कोरोना की इलाज में उपयोग की जाने वाले दवाओं की आपूर्ति पर ध्यान दे रहे हैं. (news18.com)


14-Apr-2021 9:17 PM 22

मुंबई. सेंट्रल रेलवे ने बुधवार को मुंबईवासियों से कहा कि कर्फ्यू के मद्देनजर परेशान न होने को कहा है. साथ ही रेलवे ने हिदायत भी दी है कि कर्फ्यू को देखते हुए स्टेशन पर भीड़ लगाने की आश्यकता नहीं है. गौरतलब है कि पूरे महाराष्ट्र में आज रात 8 बजे से 15 दिनों के लिए कर्फ्यू की घोषणा की गई है. ये प्रतिबंध 1 मई तक रहेंगे. इस दौरान पूरे राज्य में सिर्फ मूलभूत सेवाएं ही जारी रहेंगी.

इस खबर के बाद राज्य में रह रहे श्रमिक वर्ग में चिंता के हालात हैं. स्टेशन पर अप्रवासी मजदूरों की लंबी कतारें भी देखी जा रही हैं. इससे पहले बीते साल भी देश में अप्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन की घोषणा के बाद बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था.

रेलवे ने किए दो ट्वीट, लोगों को पूरी व्यवस्था के बारे में समझाया
अब लोगों की परेशानियों के मद्देनजर मध्य रेलवे ने ट्वीट किया है-मध्य रेल द्वारा लगातार समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही है. लोगों को यह भी स्पष्ट किया जाता है कि लंबी दूरी की घोषित नियमित एवं स्पेशल ट्रेनें चलती रहेंगीं, इन सभी स्पेशल ट्रेनों में कोविड 19 के नियमों व मानदंडों के पालन हेतु केवल कन्फर्म टिकट धारक, यात्रियों को ही ट्रेन में बोर्डिंग की अनुमति है, लोगों से अनुरोध है कि वे पैनिक न करें और स्टेशनों की ओर भीड़ न करें, केवल 90 मिनट पहले ही स्टेशन पहुंचे. रेलवे वेटिंग लिस्ट को पर लगातार निगाह रखे है जैसी आवश्कता होगी अतिरिक्त स्पेशल ट्रेने चलाई जाएंगी.

उद्धव की अपील- केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने महामारी को मात देने के लिए बुधवार रात से 'ब्रेक द चेन' मुहिम का ऐलान किया है. जिसके तहत राज्‍य में 15 दिनों का सख्‍त कर्फ्यू रहेगा. इस दौरान मुख्‍यमंत्री ने राज्‍य की जनता से अपील करते हुए कहा कि केवल जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें. 14 अप्रैल से 15 दिन के लिए रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक धारा 144 लागू रहेगी. ये निर्णय लेने से पहले सीएम उद्धव ने सर्वदलीय बैठक के अलावा कोविड टास्क फोर्स से भी बातचीत की है. बेकाबू होते हालात में महामारी की चेन तोड़ने के लिए ये कदम उठाया जाना बेहद आवश्यक था. (news18.com)


14-Apr-2021 8:42 PM 34

मुंबई, 14 अप्रैल | महाराष्ट्र सरकार की 'शिव भोजन थाली' को 26 जनवरी, 2020 को लॉन्च किया गया था। अब पहली बार, 'लॉकडाउन' जैसे कर्फ्यू के दौरान एक महीने के लिए गरीबों को मुफ्त में थाली को वितरित किया जाएगा। कर्फ्यू के नियमों को बुधवार रात से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घोषणा की है कि थाली को पार्सल के रूप में गरीब लोगों को मुफ्त में दिया जाएगा। थाली में दो चपाती, एक सब्जी, एक कटोरी चावल और दाल शामिल है।

बता दें कि बुधवार को 14 अप्रैल से 30 अप्रैल तक रात 8 बजे से नए प्रतिबंधों की घोषणा की गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार पूरे राज्य में लगभग 964 केंद्रों के माध्यम से 200,000 एसबीटी दैनिक प्रदान करेगी।(आईएएनएस)


14-Apr-2021 8:38 PM 29

लखीमपुर खीरी (यूपी), 14 अप्रैल | दुधवा बाघ अभयारण्य (डीटीआर) के किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य में लगभग सात साल की एक बाघिन मृत पाई गई। बाघिन का शव मंगलवार दोपहर को मिला।

45 दिनों के अंतराल में उत्तर प्रदेश में यह बाघ की मौत का चौथा मामला है। शव चल्तुआ इलाके में बरामद किया गया।

अधिकारियों ने दावा किया कि बाघिन के गुप्तांग पर चोट के निशान थे और वह शिकार करने में सक्षम नहीं थी। उनका मानना है कि यह एक प्राकृतिक मौत है लेकिन शव परीक्षण रिपोर्ट अभी भी प्रतीक्षित है।

शव परीक्षण बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा किया जाएगा।

डीटीआर के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने कहा, "बाघिन को सोमवार को फील्ड स्टाफ द्वारा देखा गया था और उसके बाद नहीं देखा गया।"(आईएएनएस)


14-Apr-2021 8:37 PM 40

नई दिल्ली, 14 अप्रैल। पूर्व चुनाव आयुक्त जी.वी.जी. कृष्णमूर्ति का लंबी बीमारी के कारण बुधवार सुबह यहां निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण कृष्णमूर्ति का सुबह 10 बजे निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी पद्मा मूर्ति, बेटे और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील जी.वी. राव, और बेटी डॉ. राधा बोदापति हैं।

ईसीआई परिवार के एक शानदार पूर्व सदस्य के निधन पर शोक जताते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने याद किया कि कृष्णमूर्ति ने 1 अक्टूबर, 1993 से 30 सितंबर, 1996 तक चुनाव आयुक्त के रूप में आयोग में अपने कार्यकाल के दौरान अनुकरणीय योगदान दिया।

चंद्रा ने कहा, "विशेष रूप से चुनाव कराने के लिए कानूनों और प्रक्रियाओं को मजबूत करने में उनके योगदान को आयोग द्वारा लंबे समय तक याद किया जाएगा।"(आईएएनएस)