राष्ट्रीय

Date : 04-Dec-2019

आइजोल, 4 दिसंबर। मिजोरम में एचआईवी एड्स से 17 हजार 897 लोग संक्रमित हैं और यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है। इस साल की शुरुआत से अबतक औसतन हर रोज एचआईवी/एड्स के नौ संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। विश्व एड्स दिवस के मौके पर मिजोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से जारी आंकड़े में यह जानकारी दी गई है।
देश में एचआईवी/एड्स से सबसे अधिक प्रभावित राज्य मिजोरम है, जहां 17897 लोग इस रोग से प्रभावित हैं। राज्य में हर दिन एड्स के औसतन नौ नए मामले सामने आते हैं।
विश्व एड्स दिवस के मौके पर आंकड़े जारी करते हुए मिजोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (एमएसएसीएस) के अधिकारियों ने बताया कि देश के सबसे कम जनसंख्या वाले राज्यों में शामिल मिजोरम में एचआईवी के लिए 25-34 उम्र वर्ग में 42 प्रतिशत से अधिक के जांच नतीजे सकारात्मक रहे।
हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है और इस उपलक्ष्य में रविवार को कई जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। एड्स दिवस के मौके पर पूरे राज्य में कई जागरुकता कार्यक्रम चलाए गए।
अधिकारियों ने बताया कि 2018-19 में 2557 ताजा मामले सामने आये हैं जो राज्य की दस लाख की आबादी के हिसाब से बहुत अधिक है। उन्होंने बताया कि एचआईवी मरीजों की कुल संख्या में छह हजार से अधिक महिलायें हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि पहले मादक द्रव्यों के आदी लोगों और यौनकर्मियों के बीच एचआईवी संक्रमण की दर ज्यादा थी, लेकिन अब अन्य तबके में भी ऐसे मामले बढ़े हैं। अधिकारियों ने ईसाई बहुलता वाले इस राज्य में समस्या से मुकाबले के लिए नेताओं, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और चर्चों से सहयोग मांगा है। (भाषा)
 


Date : 03-Dec-2019

नई दिल्ली, 3 दिसंबर। अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने दावा किया है कि मुस्लिम पक्ष ने उन्हें केस की पैरवी से हटा दिया है। राजीव धवन ने खुद फेसबुक पोस्ट के जरिए ये खुलासा किया है। धवन ने लिखा कि मुझे केस से हटा दिया गया है क्योंकि मेरी सेहत ठीक नहीं रहती है। लेकिन दरअसल ऐसा कुछ नहीं है। यह बिल्कुल ही बेतुकी वजह है। जमीयत को ये अधिकार है कि वो मुझे केस से हटा दें, लेकिन वजह तो सही बताएं। जमीअत की दलील गलत है। 
वहीं, जमीयत के वकील एजाज मकबूल का कहना है कि ये कहना गलत है कि बीमार होने के कारण राजीव धवन को हटा दिया गया। दरअसल, जमीयत सोमवार को ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करना चाहता था। लेकिन राजीव धवन उपलब्ध नहीं थे इसलिए उनसे सलाह किए बगैर और नाम के पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। 
दूसरी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा समर्थित अन्य पक्षकारों के वकील एम आर शमशाद ने कहा कि राजीव धवन उनकी ओर से केस में वकील रहेंगे। पक्षकार राजीव धवन से मिलकर उनकी ओर से केस लडऩे के लिए मनाने की कोशिश करेंगे। धवन ने इस केस में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से जी जान से मेहनत की गई है। उन्होंने इस केस के लिए अपना दिल और आत्मा लगाई है। इसलिए भले ही जमीयत ने उन्हें केस से हटाया दिया हो। लेकिन दूसरे पक्षकार उन्हें ही बतौर वकील चाहते हैं।
अयोध्या मामले पर जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द की ओर से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। याचिका एम सिद्दीक की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से 9 नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। सूत्रों के मुताबिक जमीअत ने कोर्ट के फैसले के उन तीन बिंदुओं को फोकस किया है, जिसमें ऐतिहासिक गलतियों का जिक्र है, लेकिन फैसला इनके ठीक उलट आया है।
याचिका में कहा गया है कि अव्वल तो ये कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि मन्दिर तोडक़र मस्जिद बनाई गई थी। वहीं, दूसरा बिंदू है कि कि 22-23 दिसंबर 1949 की रात आंतरिक अहाते में मूर्तियां रखना भी गलत था, ये सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बात कही थी। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा तोडऩा भी गलत था। लेकिन इन गलतियों पर सजा देने के बजाय उनको पूरी जमीन दे दी गई। याचिका में कहा गया है कि लिहाजा कोर्ट इस फैसले पर फिर से विचार करे। (एनडीटीवी)
 


Date : 03-Dec-2019

नई दिल्ली, 3 दिसंबर । चांद की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा ढूंढऩे वाले चेन्नई के इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यम ने कहा कि उन्होंने नासा और इसरो दोनों को ही इस बारे में जानकारी दी थी। उसका कहना है कि केवल नासा ने ही उनके अलर्ट का जवाब दिया था। नासा ने मंगलवार को विक्रम लैंडर के मलबे की तस्वीर शेयर करते हुए इसकी जानकारी दी। नासा ने इसके लिए शनमुगा सुब्रमण्यम को क्रेडिट भी दिया है। 
एनडीटीवी से बात करते हुए शनमुगा सुब्रमण्यम ने कहा, मैंने लैंडर का मलबा ढूंढ़ा और इसके बारे में नासा और इसरो दोनों को जानकारी दी। केवल नासा ने इस पर ध्यान दिया। मुझे बहुत दुख है कि विक्रम लैंड नहीं कर पाया। शनमुगा सुब्रमण्यम ने केवल लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए ही इसे खोज निकाला है। शनमुगा सुब्रमण्यम का कहना है कि वह लैंडर को खोज निकालने के अपने मिशन के लिए हर रोज सात घंटे काम करता था।
अंतरिक्ष में रुचि लेने वाले एक भारतीय द्वारा अमेरिका के ऑर्बिटिंग कैमरा से चंद्रमा की तस्वीरों का निरीक्षण करने के बाद नासा ने कहा कि उसे भारतीय चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर का दुर्घटनास्थल और मलबा मिला है। इस जगह का पता शनमुगा सुब्रमण्यम ने पता लगाया, जिन्होंने खुद लूनर रिकनाइसांस ऑर्बिटल कैमरा (एलआरओसी) से तस्वीरें डाउनलोड कीं। इसकी पुष्टि नासा और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने सोमवार को की।
सुब्रमण्यम ने उस मलबे का पता किया, जिसकी तलाश वैज्ञानिक कर रहे थे और उन्होंने वैज्ञानिकों की वह जगह खोजने में मदद की, जहां विक्रम लैंडर क्रैश हुआ था। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को इसकी घोषणा की है कि विक्रम लैंडर का मलबा मिल गया है और जहां क्रैश हुआ, उस जगह की तस्वीर भी जारी की गई है। नासा ने अपने बयान में कहा, शनमुगा ने सबसे पहले मैन क्रैश साइट से लगभग 750 मीटर उत्तर पश्चिम में मलबा देखा।
एनडीटीवी से बात करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा, मैंने विक्रम लैंडर का संभावित मार्ग खोजने में कड़ी मेहनत की। मैं बहुत खुश हूं। बहुत मेहनत करनी पड़ी। मुझे हमेशा से अंतरिक्ष विज्ञान का शौक रहा है।(एनडीटीवी)
 

 


Date : 03-Dec-2019

नई दिल्ली, 3 दिसंबर । कांग्रेस के खाते में 170 करोड़ रुपये का कालाधन आने का आरोप के मामले में आयकर विभाग ने पार्टी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग की ओर से कांग्रेस पार्टी को यह नोटिस जारी किया गया है। हैदराबाद की एक कंपनी से कांग्रेस के खाते में ब्लैकमनी आने का आरोप है। कांग्रेस ने इस संबंध में आयकर विभाग को अभी तक दस्तावेज नहीं दिए हैं। इसलिए आयकर विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। ये नोटिस उन दस्तावेजों के जमा न करने के बाद भेजा गया। 

इसके साथ ही कंपनी के एक स्टाफ को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था लेकिन वो भी नहीं आया। हाल ही में आयकर विभाग की हैदराबाद की इस कंपनी में छापेमारी में पता चला कि कंपनी ने 170 करोड़ रुपये कांग्रेस को हवाला के जरिये भेजा है। कंपनी ने ये पैसा सरकार से फर्जी बिल लगाकर लिया, इस कंपनी के पास कई सरकारी प्रोजेक्ट हैं। कंपनी ने 150 करोड़ रुपये चन्द्रबाबू नायडू की टीडीपी को भी भेजे। उन्हें भी जल्दी ही नोटिस जारी होगा।
गौरतलब है कि नवंबर महीने में भारत और स्विट्जरलैंड ने बुधवार को कालाधन पर अंकुश लगाने के लिये अपने-अपने कर विभागों से आपस में गठजोड़ बढ़ाने को कहा है। वित्त मंत्रालय के बयान में यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया है कि भारत के राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे और स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्त मामलों की सेक्रेटरी डेनिएला स्टोफेल ने कर मामलों में प्रशासनिक सहायता खासकर एचएसबीसी मामले में स्विट्जरलैंड की तरफ से सहायता उपलब्ध कराने को लेकर पिछले कुछ साल में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। 
कर चोरी के खिलाफ अभियान में सहयोग के तहत दोनों देशों के बीच पहला वित्तीय लेखा सूचना को साझा करने का काम सितंबर 2019 में हुआ था। बयान के अनुसार दोनों देशों ने कर चोरी से निपटने के लिये वैश्विक कर पारदर्शिता को लेकर प्रतिबद्धता जतायी थी। दोनों देशों के संयुक्त बयान के अनुसार वित्तीय लेखा सूचना के स्वत: आदान-प्रदान से वित्तीय पारदर्शिता के एक नये युग की शुरूआत होगी। इससे भारतीय कर प्रशासन को स्विट्जरलैंड में भारतीयों के बैंक खातों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। दोनों देशों ने भारत-स्विट्जरलैंड कर संधि में सहयोग और प्रगाढ़ बढ़ाने के लिये सक्षम प्राधिकरणों के स्तर पर बातचीत को लेकर सहमति जतायी है।(एनडीटीवी)
 


Date : 03-Dec-2019

नई दिल्ली, 3 दिसंबर । भारतीय रेलवे का ऑपरेशन कॉस्ट यानी परिचालन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। यह बात इसके परिचालन अनुपात (ऑपरेटिंग रेश्यो) से पता चलती है जो साल 2017-18 में बढक़र 10 साल के उच्च स्तर 98.44 पर्सेंट पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिये 98.44 रूपये खर्च करने पड़ रहे हैं। संसद में पेश कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे का परिचालन अनुपात (आपरेटिंग रेश्यो) 2015-16 में 90.49 प्रतिशत, 2016-17 में 96.5 प्रतिशत रहा था।
सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रेल का परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 प्रतिशत रहने का मुख्य कारण इसका संचालन खर्च बढऩा है। इसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2008-09 में रेलवे का परिचालन अनुपात 90.48 प्रतिशत था जो 2009-10 में 95.28 प्रतिशत, 2010-11 में 94.59 प्रतिशत, 2011-12 में 94.85 प्रतिशत, 2012-13 में 90.19 प्रतिशत, 2013-14 में 93.6 प्रतिशत, 2014-15 में 91.25 प्रतिशत हो गया।
सीएजी ने सिफारिश की है कि रेलवे को आंतरिक राजस्व बढ़ाने के लिए उपाय करने चाहिए ताकि सकल और अतिरिक्त बजटीय संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रेल का कुल व्यय 2016-17 में 2,68,759.62 करोड़ रुपये से बढक़र 2017-18 में 2,79,249.50 करोड़ रुपये हो गया। इसमें पूंजीगत व्यय 5.82 प्रतिशत घटा है जबकि वर्ष के दौरान राजस्व व्यय में 10.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इसके अनुसार कर्मचारी लागत, पेंशन भुगतानों और रोलिंग स्टॉक (रेल डिब्बे आदि) पर पट्टा किराया मद में खर्च 2017-18 में कुल संचालन व्यय का लगभग 71 प्रतिशत था। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेल का सबसे बड़ा संसाधन माल भाड़ा है और उसके बाद अतिरिक्त बजटीय संसाधन और यात्री आय है।(जनसत्ता)
 


Date : 03-Dec-2019

गाजियाबाद, 3 दिसंबर । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम इलाके में आर्थिक तंगी से परेशान एक शख्स ने पहले अपने दो बच्चों की गला दबाकर हत्या की। फिर पत्नी और बिजनेस पार्टनर के साथ मिलकर आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी। पत्नी और पति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बिजनेस पार्टनर की हालत गंभीर बनी हुई है। यह मामला इंदिरापुरम के वैभव खंड का है। गुलशन पिछले कुछ दिनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। गुलशन गांधी नगर में जींस के कारोबारी हैं और दो करोड़ की देनदारी थी। रात को गुलशन की बिजनेस पार्टनर संजना गुलशन के घर आई, फिर पूरे परिवार ने बच्चियों की हत्या कर आत्महत्या की। 
शुरुआत में पुलिस को लगा था कि गुलशन के साथ मंजिल से कूदने वाली दोनों उनकी पत्नी हैं। लेकिन बाद में जांच में पता चला कि एक महिला उनकी पत्नी और दूसरी बिजनेस पार्टनर हैं।
घटना के बारे में गाजियाबाद के एक पुलिस अधिकारी ने बताया, कुछ समय पहले कॉलोनी के गार्ड ने आठवीं मंजिल से दो महिलाओं और एक आदमी को कूदते देखा।
अधिकारी ने बताया, पति-पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गई। जबकि एक महिला को गंभीर हालत में अस्पातल में भर्ती कराया गया है। अब तक हुई पुलिस छानबीन में मौके से कोई सुसाइड नोट मिलने की बात भी सामने नहीं आई है। पुलिस को अंदेशा है कि, सब कुछ अचानक लड़ाई-झगड़े के दौरान ही हुआ लगता है। संभव है कि ऐसे में किसी को सुसाइड नोट लिखने का मौका ही न मिला हो।(एनडीटीवी)

 


Date : 03-Dec-2019

आलोक प्रकाश पुतुल
रायपुर से, 3 दिसंबर । छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सारकेगुड़ा की रहने वाली मडक़म रत्ना बहुत धीरे-धीरे बात करती हैं। सात साल पहले की घटना को कुरेदने पर वो जैसे अतीत में लौट जाती हैं, मेरा भाई मडक़म रामविलास 15 साल का था। दौडऩे में उसका कोई मुकाबला नहीं था। गांव की पगडंडियों पर ऐसे दौड़ता था जैसे उड़ रहा हो।
रत्ना अपने भाई को याद करके बताती हैं कि कैसे उसका भाई गर्मी की छुट्टियों में भी पढ़ाई करता रहता था और स्कूल में सबसे अधिक नंबर लाता था। वे कहती हैं, पढऩे-लिखने में ब्रिलियेंट था वो। वकील बनना चाहता था। लेकिन पुलिस ने मेरे भाई को मार डाला।
मडक़म रत्ना छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के उन लोगों में शामिल हैं, जिनके परिजन 28-29 जून 2012 की रात सीआरपीएफ और सुरक्षाबलों के हमले में मारे गये थे।
सरकार ने उस समय दावा किया था कि बीजापुर में सुरक्षाबल के जवानों ने एक मुठभेड़ में 17 माओवादियों को मार डाला है। तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इसे बड़ी उपलब्धि माना था।
राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस कथित मुठभेड़ के लिये सुरक्षाबलों की प्रशंसा की थी। उन्होंने दावा किया था कि मारे जाने वाले सभी लोग माओवादी थे। लेकिन सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस कथित मुठभेड़ को लेकर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें कहा गया है कि मारे जाने वाले लोग माओवादी नहीं थे।
जस्टिस वी के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय जांच आयोग ने 17 आदिवासियों के मारे जाने की इस घटना को लेकर कहा है कि पुलिस के बयान के विपरित ग्रामीण घने जंगल में नहीं, तीनों गांव से लगे खुले मैदान में बैठक कर रहे थे।
आयोग ने कहा है कि फायरिंग एकतरफ़ा थी, जो केवल सीआरपीएफ और पुलिस द्वारा की गई थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात से भी इंकार किया है कि इस घटना में मारे गये लोगों का माओवादियों से कोई संबंध था।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतकों और घायलों के शरीर पर गोली के अलावा चोट के भी निशान हैं, जो मारपीट के कारण हैं और सुरक्षाबलों के अलावा यह कोई और नहीं कर सकता।
कोट्टागुड़ा गांव की कमला काका कहती हैं न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जरूर कहा है कि 17 आदिवासियों को पुलिस ने मार डाला लेकिन हमें न्याय तो तभी मिलेगा, जब इस अपराध में शामिल लोगों को सजा होगी। नर्सिंग के पेशे से जुड़ी कमला काका के भतीजे काका राहुल भी इस हमले में मारे गये थे।
कमला काका ने बीबीसी से कहा कि बीजापुर जिले के सारकेगुड़ा और सुकमा जिले के कोट्टागुड़ा और राजपेंटा गांव के ग्रामीण तीनों गांव से लगे एक खुले मैदान में बीज पोंडूम त्यौहार की तैयारी के लिये बैठे थे, उसी समय सुरक्षाबलों ने चारों तरफ से घेर कर गोलीबारी की, जिसमें 7 नाबालिगों समेत 17 लोग मारे गये।
वो कहती हैं, हम पहले दिन से यह बात कह रहे थे, लेकिन हमें हर जगह झूठा साबित करने की कोशिश की गई। बीज पोंडूम की बैठक के लिये उस रात मेरा भतीजा काका राहुल भी गया था और वह फिर कभी लौट कर नहीं आया।
कमला का आरोप है कि पहले पुलिस ने लोगों को गोलीबारी में मारा और फिर घेर कर उनमें से कई को पीटा भी। यहां तक कि अगले दिन मडक़म सुरेश को पुलिस ने स्कूल से उठाया और फिर उसे मार डाला।
कमला बार-बार दोहराती हैं, जिन लोगों ने निहत्थे, बेकसूर और भोले-भाले आदिवासियों को मारा, बच्चों को मारा, उनके खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं होती, ऐसी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है।
इस घटना में शिकायतकर्ताओं की वकील शालिनी गेरा का कहना है कि न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कहा है कि सुरक्षाबल के लोगों ने अचानक घबराहट की प्रतिक्रिया में शुरू में गोलीबारी का सहारा लिया। लेकिन यह पता चलने के बाद कि मारे जाने वाले लोग माओवादी नहीं, आम ग्रामीण हैं, तब भी सुरक्षाबल के लोगों ने उन्हें घेर कर बंदूकों से मारा-पीटा, उन्हें घायल किया और उन्हें गिरफ्तार किया।
शालिनी कहती हैं, यह सीधे-सीधे हत्या का मामला है और अब राज्य सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस कथित मुठभेड़ के लिये सुरक्षाबलों की प्रशंसा की थी और कहा था कि मारे जाने वाले सभी लोग माओवादी थे।
एक अन्य वकील अमरनाथ पांडेय का कहना है कि इस मामले में सरकार को चाहिए कि वह तत्काल दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे और दोषियों की गिरफ्तारी करे।
अमरनाथ पांडेय कहते हैं, यह ऐसा मामला नहीं है कि विधानसभा के पटल पर रखने के बाद सरकार के स्व-विवेक पर निर्भर करता हो कि वह कार्रवाई करे या ना करे। यह 17 आदिवासियों की साफ़-साफ़ हत्या का मामला है और सरकार को कार्रवाई करनी ही होगी।
राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दावा है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होगी। असल में जून 2012 में जब यह घटना हुई थी, तब कांग्रेस पार्टी ने अपनी एक जांच टीम बना कर इस मामले की जांच की थी और घटना को फर्जी मुठभेड़ करार देते हुये इसे जनसंहार बताया था।
केंद्र में कांग्रेस पार्टी द्वारा सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई की सराहना के बीच, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के इस्तीफे की मांग की थी।
मुख्यमंत्री कहते हैं, साल 2012 के बाद 2019 में यह जांच रिपोर्ट आई है। इसे पटल पर रखा गया है। 17-17 निर्दोष आदिवासी मारे गये हैं और इसके लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस मामले में किसी को बख़्शने का सवाल ही नहीं उठता।
घटना के तुरंत बाद बनाई गई कांग्रेस पार्टी की जांच कमेटी के अध्यक्ष कवासी लखमा अब छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री हैं। उनका कहना है कि इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। लेकिन भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक जांच आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किये जाने से पहले ही उसके कुछ अंश मीडिया में सार्वजनिक किये जाने को बड़ा मुद्दा मानते हैं।
सोमवार को भाजपा ने विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लाने का प्रयास किया।
धरमलाल कौशिक कहते हैं, पटल पर न रख कर के, जो ये समाचार पत्रों में छपा है, निश्चित रुप से विधानसभा की अवमानना है और लगातार विधानसभा की अवमानना हो रही है।
विधानसभा का सत्र सोमवार को समय से पहले, स्थानीय निकाय के चुनाव का हवाला देकर ख़त्म कर दिया गया और मंगलवार से नेता चुनावी राजनीति में जुट जाएंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस पार्टी से जुड़े आदिवासी नेता अरविंद नेताम कहते हैं, राजनीति जरूर हो लेकिन आदिवासी मुद्दों को हाशिये पर नहीं डाला जाना चाहिये।
सरकार किसी की भी हो, बस्तर में आदिवासियों का विश्वास हासिल करने की कोशिश किसी ने आज तक नहीं की। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने सरकार को एक अवसर दिया है।(बीबीसी)
 


Date : 03-Dec-2019

नई दिल्ली, 3 दिसंबर । बॉलीवुड और साउथ के सुपरस्टार प्रकाश राज सोशल मीडिया पर अपनी बेबाकी के लिए खास पहचान रखते हैं, और सभी समसामयिक मसलों पर अपनी राय भी रखते हैं। कर्नाटक में विधानसभा सीटों के लिए होने जा रहे उप-चुनाव को लेकर प्रकाश राज ने ट्वीट किया है और उन्होंने उन नेताओं को सबक सिखाने की बात कही है जिन्होंने जनादेश को बेचा है। इस तरह एक्टर प्रकाश राज का यह ट्वीट खूब पढ़ा जा रहा है, और उनका यह ट्वीट उनके तेवरों के ही मुताबिक है। कर्नाटक की 15 विधानसभा सीटों के लिए 5 दिसंबर को उपचुनाव होने हैं, और सबकी निगाहें इन्हीं उपचुनाव पर टिकी हुई हैं।
प्रकाश राज ने अपने ट्वीट में लिखा है: कर्नाटक उपचुनाव... डियर सिटिजंस... अब आपके पास उन लोगों को सबक सिखाने की ताकत और मौका है जिन्होंने आपके जनादेश को बेचा है। इस तरह प्रकाश राज ने कर्नाटक के मतदाताओं से अपने मताधिकार का इस्तेमाल सोच-समझकर करने के लिए किया है। वैसे भी प्रकाश राज मुखरता के साथ अपनी बात कहते हैं, और इस वजह से सोशल मीडिया पर अकसर उन्हें लेकर हंगामा मचा रहता है। 
प्रकाश राज बॉलीवुड और साउथ दोनों ही जगह एक बड़ा नाम हैं, और फिल्मों में उनके विलेन के रोल को खूब पसंद किया जाता है। बॉलीवुड में प्रकाश राज सलमान खान की वॉन्टेड के साथ जमकर लोकप्रियता हासिल की थी, और उसके बाद वे अजय देवगन की सिंघन और सलमान खान की दबंग में भी अपने किरदारों की वजह से जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं। हालांकि वह राजनीति में भी हाथ आजमा चुके हैं। प्रकाश राज सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहते हैं। (एनडीटीवी)
 


Date : 03-Dec-2019

नयी दिल्ली, 3 दिसंबर (भाषा)। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को आरएसएस के पूर्व विचारक के.एन. गोविंदाचार्य को ‘‘मिथ्या’’ सूचना देने के संबंध में वाट्सएप के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने को लेकर अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। वॉट्सएप ने शीर्ष अदालत को कथित रूप से यह कहकर गुमराह किया था कि उसका डेटा ‘‘पूरी तरह इनक्रिप्टेड’’ है। गोविंदाचार्य ने ‘भारतीयों की बुनियादी गोपनीयता’ का उल्लंघन करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक, वाट्सएप और इजराइल की प्रौद्योगिकी कंपनी एनएसओ गु्रप के खिलाफ एनआईए जांच की भी मांग की थी। 
प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबड़े और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने गोविंदाचार्य की ओर से पेश वकील विकास सिंह को अपनी याचिका वापस लेने के लिए कहा। इससे पहले वॉट्सएप के वकील ने कहा कि इसी तरह की याचिकाएं शीर्ष अदालत के सामने लंबित हैं। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुनवाई के लिए नयी याचिका की जरूरत नहीं है। गोविंदाचार्य ने मिथ्या जानकारी देने के संबंध में वॉट्सएप के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग की थी।
 


Date : 03-Dec-2019

नई दिल्ली, 3 दिसंबर । अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे उसके उपग्रह ने भारत के चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का मलबा खोज लिया है। 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर उतरने की कोशिश करते हुए तय समय से थोड़ी देर पहले विक्रम का संपर्क टूट गया था।
नासा ने अपने उपग्रह से ली गई तस्वीरें पोस्ट की हैं जिनमें दिखता है कि विक्रम किस जगह गिरा और कैसे उसका मलबा वहाँ बिखरा हुआ है। नासा ने उस जगह की पहले और बाद में ली गई तस्वीरें भी पोस्ट की हैं जिनसे समझ आता है कि चंद्रमा पर वो जगह कैसे बदली दिख रही है जहाँ विक्रम गिरा था।
इससे पहले, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख के सिवन ने 9 सितंबर को कहा था कि इसरो को चांद पर विक्रम लैंडर से जुड़ी तस्वीरें मिली हैं। 47 दिनों की यात्रा के बाद 7 सितंबर को जब चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर दूर था तब इसरो से उसका संपर्क टूट गया था।
इसरो प्रमुख ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ऑर्बिटर से मिली तस्वीर से लगता है कि विक्रम लैंडर की चांद पर हार्ड लैंडिंग हुई है। चांद का चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की थर्मल इमेज ली है।
चांद पर किसी स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग दो तरीके से होती है- सॉफ्ट लैंडिंग और हार्ड लैंडिंग। जब स्पेसक्राफ्ट की गति को धीरे-धीरे कम करके चांद की सतह पर उतारा जाता है तो उसे सॉफ्ट लैंडिंग कहते हैं जबकि हार्ड लैंडिंग में स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह पर क्रैश करता है।
सॉफ्ट लैन्डिंग का मतलब होता है कि आप किसी भी सैटलाइट को किसी लैंडर से सुरक्षित उतारें और वो अपना काम सुचारू रूप से कर सके।
अगर सब कुछ ठीक रहता और विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग होती तो भारत दुनिया का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा के दक्षिण ध्रुव के करीब उतरता। अब तक अमरीका, रूस और चीन को ही चांद की सतह पर सॉफ्ट लैन्डिंग में सफलता मिली है। हालांकि ये तीन देश अब तक दक्षिण धु्रव पर नहीं उतरे हैं। विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग देखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को इसरो पहुंचे थे।
चंद्रयान-2 को इस मिशन पर भेजने में 11 साल लगे। विक्रम लैंडर मुख्य रूप से चांद की सतह पर वहां के चट्टानों का विश्लेषण करने वाला था। विक्रम लैंडर से निकलकर प्रज्ञान रोवर की मदद से चांद की सतह पर पानी की खोज करना इसरो का मुख्य लक्ष्य था।(बीबीसी)
 


Date : 03-Dec-2019

सीटू तिवारी
पटना से, 3 दिसंबर । अर्चना कुमारी ने 2018 में हुई 30वीं बिहार न्यायिक सेवक परीक्षा में सफलता हासिल की है। हम लोगों का परिवार एक कमरे के सर्वेंट क्वॉर्टर में रहता था और हमारे क्वॉर्टर के आगे जज साहब की कोठी थी। पापा दिन भर जज साहब के पास खड़े रहते थे। बस वही कोठी, जज को मिलने वाला सम्मान और मेरे सर्वेंट क्वॉर्टर की छोटी सी जगह मेरी प्रेरणा बनी।
34 साल की अर्चना के पिता सोनपुर रेलवे कोर्ट में चपरासी के पद पर थे। और अब उनकी बिटिया अर्चना कुमारी ने 2018 में हुई 30वीं बिहार न्यायिक सेवक परीक्षा में सफलता हासिल की है। बीते नवंबर के आखिरी हफ्ते में घोषित नतीजों में अर्चना को सामान्य श्रेणी में 227वां और ओबीसी कैटेगरी में 10वीं रैंक मिली है।
बीबीसी से फोन पर बात करती अर्चना की आवाज में खुशी, बेहद साधारण परिवार से निकलकर बड़ी उपलब्धि हासिल करने का गर्व, विनम्रता, सब कुछ महसूस किया जा सकता था।
मूल रूप से पटना के धनरूआ थाना अंतर्गत मानिक बिगहा गांव की अर्चना अपने गांव में जज बिटिया के नाम से मशहूर हो रही हैं।
चार भाई-बहन में सबसे बड़ी अर्चना के लिए लेकिन उनका ये सफर जिंदगी के बहुत घुमावदार रास्तों से गुजरा। बचपन में ही अस्थमा की बीमारी के चलते वो बहुत बीमार रहती थीं और घर में गरीबी का डेरा था।
पटना के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, शास्त्रीनगर से बारहवीं पास अर्चना ने पटना यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी ऑनर्स किया है। लेकिन इसी बीच ग्रैजुएशन की पढ़ाई करते समय साल 2005 में उनके पिता गौरीनंदन प्रसाद की असामयिक मृत्यु हो गई।
अर्चना बताती हैं, बहुत मुश्किल था क्योंकि सबसे बड़ी होने के नाते भाई-बहनों की जिम्मेदारी थी। चूंकि मैंने कंप्यूटर सीखा था तो मैंने अपने ही स्कूल में कंप्यूटर सिखाना शुरू किया ताकि घर खर्च में मदद की जा सके। तीन बहनें थीं तो घरवालों पर शादी का बहुत दबाव था। 21 साल की उम्र में मेरी शादी कर दी गई और मैंने भी ख़ुद को समझा लिया कि मेरी पढ़ाई का अंत अब हो गया।
लेकिन छह साल की उम्र से ही जज बनने का सपना देख रही अर्चना खुशकिस्मत निकलीं। उनके पति राजीव रंजन ने उन्हें उनके सपनों को पूरा करने में मदद की। साल 2006 में अर्चना की शादी हुई थी। पति ने उनमें पढऩे की ललक दिखी तो साल 2008 में पुणे विश्वविद्यालय में अर्चना ने एलएलबी कोर्स में दाखिला ले लिया।
अर्चना बताती है, मेरी पूरी पढ़ाई हिंदी माध्यम से थी, इसलिए रिश्तेदारों ने कहा कि मैं जल्द ही पुणे यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी माहौल से भाग आऊंगी। वो बार-बार कहते थे कि मेरे पति गोइठा में घी सुखा रहे हैं। मेरे सामने अंग्रेजी में तो पढ़ाई करने की चुनौती तो थी ही, और बिहार से पहली बार बाहर निकली थी।
2011 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो पटना वापस आईं तो गर्भवती हो गईं। साल 2012 में उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे की पैदाइश के बाद की जिम्मेदारी बड़ी थी। लेकिन अर्चना ने अपने सपनों और मां की जिम्मेदारी का संतुलन साधा। वो अपने 5 माह के बच्चे और अपनी मां के साथ आगे की पढ़ाई और तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। यहां उन्होंने एलएलएम की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और साथ ही अपनी आजीविका के लिए कोचिंग में कानून के छात्रों को पढ़ाया भी।
अर्चना की सफलता में उनके पूरे परिवार का सहयोग है। उनकी सातवीं तक पढ़ी मां प्रतिमा देवी कहती हैं, बिटिया का रिजल्ट जब से निकला है नींद नहीं आई है और खाना भी खाया नहीं जा रहा है। अपनी ख़ुशी के बारे में आपको क्या बताएं और अगर इसके पापा रहते तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता।
प्रतिमा देवी को ख़ुद अपनी पढ़ाई ना कर पाने का बहुत अफसोस रहा। लेकिन उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दी। अर्चना के पति राजीव रंजन पटना के पटना मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में क्लर्क हैं। 
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, अर्चना में पढऩे की बहुत ललक है। मैंने उसे पढ़ाया जिसका नतीजा आपके सामने है। मेरी कोशिश हमेशा यही रहेगी कि वो और ज़्यादा तरक्की करें।(बीबीसी)
 


Date : 03-Dec-2019

लखनऊ, 3 दिसंबर। बड़े मामलों की छानबीन करने वाली सीबीआई ने उत्तर प्रदेश में एक कमीशन एजेंट से 100 रुपये की घूस मांगने के आरोप में डाक विभाग के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। पीटीआई के मुताबिक मामला प्रतापगढ़ जिले का है। अधिकारियों के मुताबिक एक कमीशन एजेंट के पति ने शिकायत की थी कि डाक अधीक्षक और डाक सहायक प्रत्येक बीस हजार रुपये जमा करने पर 100 रुपये की रिश्वत मांगते हैं।
शिकायतकर्ता का कहना था कि उसकी पत्नी गांवों से डाक विभाग के बचत खाते के लिए रकम इक_ा करती है और कुंडा प्रतापगढ़ के उप डाकघर में जमा रकम को सुपुर्द कर देती है। उसके मुताबिक वह भी इस कार्य में अपनी पत्नी की मदद करता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक हाल में जब वह रकम जमा करने गया तो दोनों डाक अधिकारियों ने उससे रकम जमा करने के बदले सुविधा शुल्क के नाम पर 500 और 300 रुपये लिए। उसने आरोप लगाया कि दोनों ने प्रत्येक 20,000 रुपये जमा करने पर 100 रुपये देने को कहा और ऐसा न करने पर काम रोकने और गड़बड़ी करने की धमकी भी दी।
सीबीआई के मुताबिक शिकायत के आधार पर जाल बिछाया गया और आरोपितों को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमारे लिए कोई बड़ा या छोटा मामला नहीं होता। हम सभी मामलों से एक समान रूप से निपटते हैं।’ प्रवक्ता ने कहा कि सीबीआई को जनता की शिकायत पर हस्तक्षेप करना पड़ा जहां गरीब ग्रामीणों को डाकखाने में अपना ही पैसा जमा करने पर रिश्वत देनी पड़ रही थी। (सत्याग्रह ब्यूरो)
 

 


Date : 02-Dec-2019

मुंबई, 2 दिसंबर। अपने फेसबुक पोस्ट से महाराष्ट्र की राजनीति में खलबली मचाने वाली बीजेपी नेता और राज्य की पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे ने अब ट्विटर पर हंगामा खड़ा दिया है। पंकजा ने अपने ट्विटर बायो में से पार्टी का नाम हटा दिया है। इसके बाद पहले से चल रहीं अटकलों ने और तेजी पकड़ ली है। इस बीच शिवसेना ने भी यह कहकर सस्पेंस बढ़ा दिया है कि कई नेता उसके संपर्क में हैं। पंकजा ने एक फेसबुक पोस्ट में यह लिखा था कि वह आठ से 10 दिन में यह तय करेंगी कि उन्हें कौन से रास्ते जाना है। पंकजा की तरह ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्विटर पर अपने बायो से पार्टी का नाम हटाया था, जिसके बाद उनको लेकर भी तरह-तरह की अटकलों का सिलसिला जारी है।  पंकजा के पोस्ट के बाद से उनकी नाराजगी को जगजाहिर माना जा रहा था। इसके बाद सवाल उठ रहा था कि क्या वह देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ अपना गुस्सा खुलकर जाहिर करेंगी? सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी समस्या रखते वक्त पंकजा का सारा गुस्सा पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ रहा है। इस बीच उन्होंने पहले फेसबुक पोस्ट कर जल्द ही बड़ा फैसला करने की बात कही तो ट्विटर पर बायो से पार्टी का नाम ही हटा दिया है। ऐसे में अफवाहों और अटकलों ने और भी रफ्तार पकड़ ली है।  फेसबुक पोस्ट में पंकजा ने कहा था, बदले राजनीतिक परिवेश में अपनी ताकत को समझना जरूरी है। मुझे 8-10 दिन तक कुछ चिंतन करना है और मैं 12 दिसंबर को आप सभी से मुलाकात करूंगी। यह हमारे नेता गोपीनाथ मुंडे जी का जन्मदिन है। मैं अगले 8-10 दिन में मैं यह तय कर लूंगी कि मुझे आगे क्या करना है और कौन से रास्ते पर जाना है। पंकजा मुंडे को चुनाव में परली विधानसभा सीट चचेरे भाई धनंजय मुंडे से हार का सामना करना पड़ा था।  पंकजा मुंडे को इस बार विधानसभा चुनाव में अपने चचेरे भाई और एनसीपी उम्मीदवार धनंजय मुंडे के हाथों हार का सामना करना पड़ा। उनके समर्थक उनकी हार के लिए देवेंद्र फडणवीस को जिम्मेदार ठहराते हैं कि उन्हें जानबूझकर हरवाया गया। एनसीपी के अजित पवार की कुछ दिन की बगावत के समय धनंजय मुंडे भी शुरुआत में उनके साथ थे, इससे पंकजा के समर्थकों का शक और गहरा हुआ है। पंकजा मुंडे ने सार्वजनिक तौर पर फडणवीस के खिलाफ तो कुछ नहीं बोला है लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी बात रखते हुए उनकी आलोचना जरूर की है। अब ऐसी अटकलें हैं कि वह शिवसेना जॉइन कर सकती हैं। उद्धव ठाकरे के सीएम बनने पर पंकजा ने ट्वीट कर उनकी तारीफ की थी और शुभकामनाएं दी थी। इन अटकलों को सोमवार को तब और बल मिला जब संजय राउत ने कहा कि कई नेता शिवसेना के संपर्क में हैं। राउत से पूछा गया था कि क्या पंकजा मुंडे शिवसेना में शामिल होने जा रही हैं।  (नवभारत टाईम्स)


Date : 02-Dec-2019

नई दिल्ली, 2 दिसंबर । प्रख्यात उद्योगपति राहुल बजाज द्वारा मोदी सरकार की आलोचना वाले बयान को उनके बेटे और बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने असाधारण साहसिक बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कोई भी उनके पिता के साथ नहीं खड़ा होना चाहता, बल्कि वे अपनी सुविधा के मुताबिक किनारे बैठकर ताली बजाते हैं।
गौरतलब है कि शनिवार को एक अखबार के कार्यक्रम में राहुल बजाज ने गृह मंत्री अमित शाह से कहा था कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो हम किसी की भी आलोचना कर सकते थे। अब हम अगर बीजेपी सरकार की खुले तौर पर आलोचना करें तो इतना विश्वास नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे।
उन्होंने कहा था कि कारोबारियों में डर का माहौल है। उनके इस बयान के बाद से लगातार सियासी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कांग्रेस जहां उनके समर्थन में उतर आई है, वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजाज के बयान को राष्ट्रहित पर चोट बताया है। उद्योगपति राहुल बजाज को जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने लिखा कि अपनी धारणा फैलाने की जगह जवाब पाने के और भी बेहतर तरीके हैं। ऐसी बातों से राष्ट्रीय हित पर चोट लग सकती है।
वहीं, राहुल बजाज की बातों का गृह मंत्री अमित शाह ने उसी मंच से जवाब दिया। अमित शाह ने कहा कि इस बात को खारिज किया कि देश में डर का मौहाल है। उन्होंने कहा, किसी को किसी के बारे में डरने की जरूरत नहीं है, मीडिया में नरेंद्र मोदी सरकार की लगातार आलोचना हो रही है, लेकिन यदि आप कह रहे हैं कि इस तरह का मौहाल पैदा हो गया है तो इसे ठीक करने के लिए हमें काम करने की जरूरत है।
इकॉनॉमिक टाईम्स को दिए एक इंटरव्यू राजीव बजाज ने कहा कि सच कितना भी कड़वा क्यों न हो, उनके पिता कभी भी बोलने से हिचकते नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि ऐसे मंच पर उनके पिता को इस तरह का संवेदनशील मसला उठाना चाहिए था या नहीं।
राजीव ने कहा, उनके (राहुल बजाज) लिए कोई दरबार ऐसे ही है, जैसे किसी बैल के लिए लाल कालीन! वह ऐसे मौके को छोड़ते नहीं, हालांकि व्यक्तिगत रूप से मैं इसे लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि कॉरपोरेट एक्सीलेंस को सेलिब्रेट कर रहे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसे संवेदनशील विषय का उठाना चाहिए या नहीं।
राहुल बजाज ने कहा था कि वह सरकार के मंत्रियों या वरिष्ठ अधिकारियों से ज्यादा बातचीत नहीं करते। इसके पहले फरवरी 2017 में राहुल बजाज ने मोदी सरकार की नोटबंदी की आलोचना की थी जिसके बाद बजाज खुद विरोधियों के निशाने पर आ गए थे। राजीव बजाज ने कहा कि तब उनके पिता के बयानों पर इंडस्ट्री के कई लोग चिंता जता रहे थे, लेकिन इसके तत्काल बाद ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने बजाज ऑटो की गाड़ी क्यूट को मंजूरी दी थी, जिस पर इजाजत 8 साल से रुकी हुई थी। (आजतक)


Date : 01-Dec-2019

नई दिल्ली, 1 दिसंबर। एक मासूम बच्ची का वीडियो जो डमी को असली इंसान समझ बैठती है। ये बच्ची उस डमी को देखकर बहुत खुश होती है, उसके गालों को हाथ लगाती है। लेकिन वो जैसे ही उसके चेहरे को हाथ लगाती है, डमी का हेड पलटकर गिर जाता है और वो बच्ची अचानक डर जाती है। (एनडीटीवी)
 


Date : 01-Dec-2019

नई दिल्ली, 1 दिसंबर । महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि उनकी पार्टी ने परंपरा को बरकरार रखने के लिए स्पीकर के चुनाव से प्रत्याशी का नाम वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में विधायकों ने आग्रह किया कि निर्विरोध स्पीकर चुनने की परंपरा रही है। उनकी इस बात को पार्टी ने माना और प्रत्याशी किशन कठोरे का नाम वापस ले लिया। वहीं महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नाना पटोले की तारीफ करते हुए कहा कि वह किसान परिवार से आते हैं। ठाकरे ने कहा, मुझे विश्वास है कि वह सबके साथ न्याय करेंगे।  इससे पहले महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा,  हमने महाराष्ट्र की परंपरा को ध्यान में रखा  हमें इस पद को किसी विवाद में नहीं लाना है। अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं होगा । पार्टी की बैठक में हमने फैसला लिया। हमने किशन किठोरी का नामांकन पत्र वापस लिया। बिन विरोध विधानसभा अध्यक्ष पद का चुनाव होगा महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा,  विरोधी पक्ष ने अपना उम्मीदवार पीछे लिया है। अध्यक्ष पद की गरिमा रखी है। बिना विरोध के अध्यक्ष पद का चुनाव हो गया है। 
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भंडारा से बीजेपी के टिकट से नाना पटोले ने चुनाव लड़ा था और प्रफुल पटेल को हराया था। लेकिन बाद में नाना पटोले ने पीएम मोदी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और कहा कि वह बैठक में सांसदों को बोलने नहीं देते। इसके बाद विवाद इतना बड़ा कि वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2019 के लोकसभा में चुनाव में नाना पटोले ने नागपुर में नितिन गडकरी से हार गए थे।  प्रफुल की काट ढूंढऩे के लिए ही बीजेपी ने नाना पटोले को भंडारा से टिकट दिया था। आज जब प्रफुल पटेल ने नाना पटोले के नाम का स्पीकर पद के उम्मीदवार के लिए आगे बढ़ाया तो नाना पटोले की तारीफ करते हुए कहा कि वह किसानों और गरीबों का नेता हैं। (एनडीटीवी)
 


Date : 01-Dec-2019

इंदौर, 1 दिसंबर । मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामले में पुलिस ने इंदौर में एक कारोबारी और मीडिया संस्थान के मालिक जीतेंद्र सोनी के ठिकानों पर छापेमारी की है। आरोप है कि सोनी का मीडिया संस्थान पिछले कई दिनों से हनी ट्रैप मामले से जुड़े ऑडियो-वीडियो की खबरें प्रकाशित और प्रसारित कर रहा था। इसी को लेकर एक जांच दल सोनी के घर, होटल, रेस्तरां और नाइट क्लब पर छापा मारने पहुंचा। पुलिस ने उनके मीडिया संस्थान के दफ्तर पहुंचकर उसे सील कर दिया है। 
पुलिस और  प्रशासन की ओर से अब तक इस कार्रवाई का कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया है। वहीं  स्थानीय पत्रकार संगठनों ने सोनी के मीडिया संस्थान पर छापे को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को डराने का सरकारी प्रयास करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। 
इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर पुलिस ने 19 सितंबर को हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह की पांच महिलाओं समेत छह सदस्यों को भोपाल और इंदौर से 18 एवं 19 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। गिरोह पर आरोप है कि वह अपने जाल में फंसे धनी एवं रसूखदार लोगों के साथ अंतरंग पलों का वीडियो बनाने के लिए कैमरे लिपस्टिक कवर और चश्मों में छुपाकर रखते थे। फिर इन्हीं वीडियो की मदद से धनी एवं रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल करता था।(भाषा)
 


Date : 01-Dec-2019

मुंबई, 1 दिसंबर । कांग्रेस के उम्मीदवार नाना पटोले को रविवार को निर्विरोध महाराष्ट्र विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया।  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने उम्मीदवार किशन कठोरे का नामांकन वापस ले लिया था। 
छप्पन वर्षीय श्री पटोले शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के गठबंधन महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार हैं। 
इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के गठबंधन महाविकास अघाड़ी की अगुवाई में उद्धव ठाकरे की सरकार ने शनिवार को विधानसभा में आसानी से अपना बहुमत साबित कर दिया।        
राज्य की 288 सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बहुमत के लिए 145 विधायकों का समर्थन चाहिए था जबकि उनके पक्ष में 169 वोट पड़े।  
राज्य विधानसभा में 105 विधायकों वाले सबसे बड़े दल भाजपा ने मतदान से पहले सदन का बहिर्गमन किया जबकि चार विधायक तटस्थ रहे। कांग्रेस नेता श्री पटोले चार बार विधायक रह चुके हैं और वह विदर्भ की सकोली विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्री पटोले ने 2014 में कांग्रेस छोडक़र भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। उन्होंने 2017 में भाजपा छोडक़र दोबारा कांग्रेस का दामन थाम लिया था। (वार्ता)
 


Date : 01-Dec-2019

समस्तीपुर, 1 दिसम्बर । बिहार में समस्तीपुर जिले में एक खेत से आज सुबह पुलिस ने एक किशोरी का शव बरामद किया है जिसकी दुष्कर्म कर हत्या किये जाने की आशंका है। 
पुलिस ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर एक खेत से 15 वर्षीय किशोरी का शव बरामद किया गया है। आशंका है कि अपराधियों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने के बाद अन्यत्र उसकी हत्या कर दी है और साक्ष्य छिपाने की नियत से शव को यहां लाकर फेंक दिया है। किशोरी की एक आंख भी धारदार हथियार से फोड़ दी गई है। 
सूत्रों ने बताया कि मृतका की पहचान नहीं हो सकी है।  इस सिलसिले में संबंधित थाना में मामला दर्ज कर पुलिस छानबीन कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल भेज दिया है।(वार्ता)
 


Date : 01-Dec-2019

प्रफुल्ल मारपकवर
मुंबई, 1 दिसंबर । महाराष्ट्र में नए राजनीतिक गठबंधन महाविकास अघाड़ी का सबसे बड़ा फायदा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने उठाया जिसे कुल 16 मंत्रालय मिलने जा रहे हैं। उसे नई सरकार में उप-मुख्यमंत्री का पद भी मिलने वाला है। वहीं, शिवसेना के 15 कैबिनेट मिनिस्टर होंगे। साथ ही, मुख्यमंत्री का पद पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नाम हो ही चुका है। जहां तक बात कांग्रेस की है तो पार्टी को 12 मंत्री पद से ही संतोष करना होगा। इसके अलावा, अघाड़ी ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए आज होने वाले चुनाव में कांग्रेस विधायक नाना पटोले को अपना उम्मीदवार बना रखा है। 
शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन के लिए हुई बातचीत का हिस्सा रहे एक कांग्रेस नेता ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस को स्पीकर पद दिए जाने के बाद शिवसेना ने अपने कोटे का एक मंत्रालय एनसीपी को दे दिया। उन्होंने कहा, इसका (गठबंधन का) मकसद हर कीमत पर बीजेपी को सत्ता से दूर रखना था। हालांकि, इस प्रक्रिया में कांग्रेस सबसे बड़े नुकसान में रही। 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और महासचिव मल्लिकार्जुन खडग़े के साथ 15 दिन पहले दिल्ली में हुई पहली मीटिंग में एनसीपी और शिवसेना महाराष्ट्र विधानसभा का अध्यक्ष और 12 मंत्री पद कांग्रेस को देने पर राजी हुई थी। दोनों दल कांग्रेस को अलग से एक डेप्युटी सीएम का पद देने पर भी सहमत हुए थे। उसके बाद हुई एक मीटिंग में एनसीपी ने राज्य में दो डेप्युटी सीएम बनाए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति प्रकट की। 
फिर बात हुई कि अगर कांग्रेस ने डेप्युटी सीएम पर अपना दावा छोड़ा तो उसे विधानसभा अध्यक्ष पद दे दिया जाएगा। एनसीपी और कांग्रेस, दोनों को डेप्युटी सीएम का एक-एक पद देने के मुद्दे पर 15 दिनों तक कई दौर की बातचीत हुई। आखिरकार कांग्रेस को डेप्युटी सीएम की मांग छोडक़र विधानसभा अध्यक्ष से खुश होना पड़ा। 
हालांकि, कांग्रेस ने गुरुवार को एनसीपी और शिवसेना से कहा कि उसे स्पीकर पद में दिलचस्पी नहीं है और वह उप-मुख्यमंत्री के पद पर भी कोई दावा नहीं करेगी। कांग्रेस नेता ने बताया, एनसीपी नेता अजित पवार ने स्पष्ट कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता है और सरकार में सिर्फ एक उप-मुख्यमंत्री होगा जो एनसीपी का होगा। उन्होंने आगे बताया, उन्होंने (अजित पवार ने) कहा कि कांग्रेस को स्पीकर पोस्ट दिया जाएगा।
इस बातचीत के बाद कांग्रेस के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। कांग्रेस नेता ने कहा, जब स्पष्ट हो गया कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं रह गई है तो सोनिया गांधी ने पूर्व सांसद नानाभाई पटोले का नाम स्पीकर के लिए बढ़ा लिया। गौरतलब है कि पटोले बीजेपी से सांसद रहे हैं। उन्होंने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पहला मोर्चा खोला था। उन्होंने मोदी पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था और बीजेपी छोडक़र कांग्रेस में चले गए थे। (टाईम्स न्यूज)