राजनीति

Date : 15-Jul-2019

नई दिल्ली, 15 जुलाई । सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों की याचिका को 10 बागी विधायकों की लंबित याचिका के साथ सुनने पर सहमति जता दी है। ये विधायक कोर्ट से उनका इस्तीफा स्वीकार करने के लिए कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग कर रहे हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में एक पीठ ने बागी विधायकों की तरफ से पेश होने वाले वरिष्ठ वकिल मुकुल रोहतगी की अर्जी पर संज्ञान लिया। याचिका में कहा गया है कि इन पांच विधायकों को भी उन 10 बागी विधायकों की लंबित याचिका में पक्षकार माना जाए जिनकी सुनवाई मंगलवार को होनी है। कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों ने 13 जुलाई को सुप्रीम उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इन बागी विधायकों की मांग है कि उच्चतम न्यायालय इनका इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष को दे। ये विधायक आनंद सिंह, के सुधाकर, एन नागराज, मुनिरत्न और रोशन बेग हैं। कोर्ट ने 12 जुलाई को कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को 16 जुलाई तक कांग्रेस - जेडीएस गठबंधन के 10 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में किसी भी तरह के निर्णय लेने से रोका था। 
उधर मुंबई के एक होटल में रूके हुए बागी विधायकों ने शहर के पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर कहा है कि वह मल्लिकार्जुन खडग़े या कांग्रेस के किसी भी अन्य नेता से मिलना नहीं चाहते हैं।  ऐसी अटकलें हैं कि खडग़े कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के साथ पोवई में स्थित रिनेसां होटल में उनसे मिलने जा सकते हैं। मुंबई के पुलिस प्रमुख को लिखे पत्र में बागी विधायकों ने कहा, उनकी इच्छा मल्लिकार्जुन खडग़े या गुलाम नबी आजाद या कांग्रेस के किसी भी नेता से मिलने की नहीं है। विधायकों ने पत्र में कहा है कि उन्हें खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया है कि कांग्रेस नेताओं को उनसे मिलने से रोका जाए। कर्नाटक में कांग्रेस - जेडीएस गठबंधन के नेताओं ने रविवार को सरकार बचाने के लिए भविष्य के कदमों पर चर्चा की। ये नेता लगातार कुछ बागी विधायकों का दिल जीतने की कोशिश में लगे हैं क्योंकि इसी सप्ताह कुमारस्वामी सरकार का विश्वासमत होने जा रहा है। 
हालांकि, बागी विधायकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे लोग एकजुट हैं और अपने इस्तीफे पर अडिग हैं। कर्नाटक सरकार गिरने के कगार है क्योंकि इसके 16 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है जिनमें से 13 विधायक कांग्रेस के हैं और तीन विधायक जद (एस) के हैं। दो निर्दलीय उम्मदीवारों ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था। (एनडीटीवी)
 


Date : 15-Jul-2019

नई दिल्ली, 15 जुलाई। एमडीएमके पार्टी के जनरल सेक्रेटरी वाइको ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसकी वजह से विवाद हो सकता है। एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में वाइको ने कहा कि संसद में हिंदी में दिए जाने वाले भाषणों की वजह से सदन में बहस का स्तर गिर गया है। उन्होंने देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पहाड़ और छछून्दर के बनाए मिट्टी के ढेर के बीच करके की।
द हिंदू को दिए इंटरव्यू के दौरान वाइको से पूछा गया कि सदन में भाषण के गिरते स्तर की क्या वजह है? इसके जवाब में एमडीएमके प्रमुख ने कहा, पहले संसद में विभिन्न विषयों पर गहरी जानकारी रखने वालों को भेजा जाता था। आज डिबेट का स्तर हिंदी की वजह से गिर गया है। वे बस हिंदी में चिल्लाते हैं। यहां तक कि पीएम नरेंद्र मोदी भी सदन को हिंदी में संबोधित कर रहे हैं।
नेता ने आगे कहा, वाजपेयी अंग्रेजी में बात करते थे। मोरारजी देसाई अंग्रेजी में बात करते थे लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि वे हिंदी प्रेमी नहीं थे। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने दोनों सदनों में अंग्रेजी में भाषण दिया। सिर्फ मोदी हिंदी के लिए अपनी दीवानगी जाहिर करते हैं। वह हिंदी, हिंदू और हिंदू राष्ट्र स्थापित करना चाहते हैं।
वाइको का बयान ऐसे वक्त में सामने आया है, जब उनके सहयोगी डीएमके ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर हिंदी भाषा थोपने का आरोप लगाया है। डीएमके ने रविवार को एक टीम की घोषणा की, जो केंद्र सरकार के नैशनल एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट की समीक्षा करेगी। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता एमके स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गैरहिंदी भाषी राज्यों में हिंदी टीचरों की भर्ती के लिए बजट में फंड का प्रावधान किया गया है।
स्टालिन के मुताबिक, केंद्र का यह कदम ड्राफ्ट पॉलिसी से हिंदी की अनिवार्यता हटाने से जुड़े प्रावधानों से बिलकुल उलट है। स्टालिन ने कहा कि डीएमके शिक्षा जगत के एक्सपर्ट्स से नैशनल एजुकेशन पॉलिसी पर राय जुटा रही है। डीएमके नेता ने ड्राफ्ट पॉलिसी को तमिल भाषा के लिए खतरा बताया। डीएमके की टीम में पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री के पोन्मुदी समेत 9 लोग हैं। यह टीम 10 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी, जिसे डीएमके केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को देगी।

 


Date : 13-Jul-2019

बेंगलुरु, 13 जुलाई । कर्नाटक में गठबंधन के कई विधायकों के इस्तीफे के बाद जारी सियासी घमासान में सीएम ने विश्वासमत का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बागी विधायकों के इस्तीफों पर मंगलवार तक यथा-स्थिति बनाए रखने के फैसले के ठीक 10 मिनट बाद आए सीएम के इस बयान के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सीएम कुमारस्वामी का अचानक इतना आत्मविश्वास बेवजह नहीं है। बीजेपी को खतरा है कि कहीं कुमारस्वामी का यह दांव उन पर भारी न पड़ जाए। 
शुक्रवार को कर्नाटक विधानसभा में सीएम कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य में भ्रम की स्थिति पैदा होने के बाद उनके लिए बेहतर होगा कि वे बहुमत साबित करने के बाद आगे बढ़ें। सीएम ने स्पीकर केआर रमेश कुमार से कहा, मैं विश्वास मत के लिए तैयार हूं। आप दिन और समय तय करें। हालांकि अभी तक विश्वास मत के लिए कोई तारीख तय नहीं है। 
सीएम के इस आत्मविश्वास ने न सिर्फ विपक्षी बीजेपी को चौंका दिया है, बल्कि बीजेपी के उन आरोपों पर भी कटाक्ष किया है, जिसमें उन पर बहुमत न होने के बाद भी सत्ता में बने रहने का आरोप लगाया जा रहा है। 
सीएम एचडी कुमारस्वामी के बेहद करीबी विधायक ने बताया, विपक्षी दल के विधायक सरकार बनाने को लेकर बहुत ज्यादा एकमत नहीं हैं। यदि बीजेपी कुमारस्वामी सरकार को विश्वासमत में हराने को लेकर कॉन्फिडेंट होती तो उन्होंने कब का अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया होता। बीजेपी का बैकफुट पर रहना यह साफ दिखाता है कि वह सिर्फ भ्रम की स्थिति का फायदा उठा रही है।
सूत्रों ने बताया कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया और सीनियर मंत्री डीके शिवकुमार ने सीएम से शुक्रवार को लंबी बातचीत की और विश्वासमत को लेकर रणनीति का खाका खींचा। एक विधायक ने बताया, कांग्रेस ने सीएम को बागियों से मिलने और उन्हें विश्वास में लेने के प्रयास करने की पूरी छूट दे दी है। कुमारस्वामी ने व्यक्तिगत तौर पर बागी विधायकों से मिलकर उन्हें गठबंधन में लौटने को कहा है। 
बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले 16 बागी विधायकों में से एक रामलिंगा रेड्डी अपना फैसला बदल सकते हैं। खबरें हैं कि रामलिंगा को बेंगलुरु डिवेलपमेंट का पोर्टफोलियो दिया जा सकता है, जो अभी डेप्युटी सीएम जी परमेश्वरा के पास है। कांग्रेस के एक अन्य बागी विधायक आर रोशन बेग ने भी शुक्रवार को विधानसभा सत्र में हिस्सा लिया। बेग भले ही पार्टी से सस्पेंड किए गए हों, लेकिन उनका सदन में होना उनकी और कांग्रेस के बीच की दूरी को कम करने जैसा है। 
वहीं दूसरी तरफ बीजेपी कर्नाटक के प्रभारी पी मुरलीधर राव और जेडीए मंत्री एसआर रमेश के बीच हुई मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी और जेडीएस गठबंधन कर सकते हैं, लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि सीएम बीजेपी के लिए सभी दरवाजे बंद कर चुके हैं। (टाईम्स न्यूज)