राजनीति

Posted Date : 14-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 14 अप्रैल । विश्व हिंदू परिषद् (वीएचपी) में आज 52 साल बाद पहली बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होंगे। ऐसे में सबकी नजर प्रवीण तोगडिय़ा पर है। दरअसल वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष तोगडिय़ा और बीजेपी-आरएसएस के बीच संबंध इन दिनों काफी खराब हैं।
    चुनाव से पहले तोगडिय़ा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद में चुनाव करोड़ों लोगों के लिए दुखद और आघात की घटना है। यह सामाजिक, धार्मिक संगठन है, 52 साल में चुनाव नहीं हुआ और आज राजनीतिक चुनाव थोपा जा रहा है। थोपने का कारण है या तो वीएचपी टूट जाए या हिंदुओं की परिषद सरकारी परिषद बन जाए।
    उन्होंने कहा, 80 साल के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। यंग इंडिया में वीएचपी का अध्यक्ष इतनी उम्र का होगा? बीजेपी की ओर से वह गवर्नर भी रह चुके हैं। विष्णु सदाशिव कोकजे वीएचपी का नेतृत्व करेंगे! उन्हें चुनने के लिए चुनाव हो रहा है। कार्यकर्ता के विवेक पर विश्वास है कि वह हिंदुत्व विचारधारा को पराजित नहीं होने देंगे। हालांकि यह सब चुनाव में तय होगा।
    एबीपी न्यूज के मास्टर स्ट्रोक शो में प्रवीण तोगडिय़ा ने कहा, संघ परिवार में 75 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट होता है। आडवाणीजी का रिटायरमेंट हुआ और वीएचपी में 80 साल का शख्स चुनाव लड़े यही आश्चर्य है, 61 साल के राघव रेड्डी हैं। उन्हें चुना जाए। परिवर्तन होता है। मिल बैठकर इसे तय करें। चुनाव पक्रिया पर रेड्डी जी सवाल उठा चुके हैं।
    तोगडिय़ा ने कहा कि चुनाव का परिणाम जो भी आएगा। लेकिन हम अपने संकल्प को आगे बढ़ाते रहेंगे। मोदी सरकार का वादा पूरा नहीं होता है तो फिर हम जनता के बीच निकलेंगे।
    तोगडिय़ा ने अयोध्या में राम मंदिर के मसले पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, लाखों-करोड़ों कार्यकर्ताओं ने जिनको सत्ता में लाने का काम किया। ताकि वह हिंदुओं की इच्छा पूरी करेंगे। लेकिन नहीं हुआ।
    उन्होंने कहा, हम 32 साल से वही बात कर रहे हैं जो आज कर रहे हैं। चार साल पहले जब मैं बोलता था कि राम मंदिर, गौरक्षा, कश्मीर में हिंदुओं की वापसी, धारा 370 पर संसद के माध्यम से कानून बनाया जाए तब इन्हें अच्छा लगता था। क्योंकि तब सरकार मनमोहन सिंह की थी। हमारे बोलने से सत्ताधारी मनमोहन सिंह की सरकार को नुकसान हो रहा था। विपक्ष में उनको फायदा हो रहा था। आज जब हम वही बात उठा रहे हैं तो उन्हें लगता है कि हम उनका विरोध कर रहे हैं।
    तोगडिय़ा ने पूछा बीजेपी ने वादे किये थे कि संसद में काननू लाकर मंदिर बनाने के वादे किये थे, किसानों की पूर्ण कर्जमाफी और युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था। क्या चुनावी वादे को छोड़ दिया जाए?
    1982 में आरएसएस, वीएचपी, बीजेपी ने मिलकर राम मंदिर का संकल्प लिया। जनसमर्थन मिला और बहुमत मिला। बीजेपी ने पालमपुर के अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर कहा कि बहुमत मिलने पर राम मंदिर बनाएंगे। हमने चार साल में तीन बार राम मंदिर के मसले पर बिठा कर कहा कि राम मंदिर पर टाइम तय करें। तब भी मुझे कहते थे कि संसद में कानून बनाएंगे। लेकिन छह महीने से कह रहे हैं कि संसद में कानून बनाने की बात करना बंद कर दो। तो हमने कहा कि मैं पद पर रहूं या नहीं मैं अपनी बात नहीं छोड़ूंगा।
    सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी आये। लेकिन 1993 के कानून को देखें तो राम मंदिर के बगल में मस्जिद भी बनेगी। देश में बाबरी मस्जिद बनी तो दंगे होंगे। हिंसा फैल जाएगी। क्या फिर से राम मंदिर के लिए हिंदू जान देगा। ऐसा अब नहीं हो सकता। कितनी बार वह जान देगा।
    तोगडिय़ा ने कहा, 2002 की घटना अयोध्या से लौट रहे 58 कारसेवकों को जलाने की वजह से हुई। जिन्होंने जिंदा जलाया उन्होंने ही दंगों का बीज बोया। अगर कोई हनुमान की पूंछ जलाता है और लंका दहन हो जाता है तो इसके लिए हनुमान जिम्मेदार नहीं हैं। आग लगाने वाला जिम्मेदार है।
    वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, 1972 से मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा था। साल 2002 के दंगों में 300 हिंदू पुलिस की गोलियों से मारा गया। सिर्फ मुसलमान नहीं मरे। पचासहजार हिंदू जेल गये। आज भी सैकड़ों जेल में हैं। सत्ता तो आपको (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) मिली।
    चुनाव में क्या होगा स्टैंड?
    प्रवीण तोगडिय़ा ने 2019 में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लडऩे के सवाल पर कहा, अगर प्रवीण तोगडिय़ा को मुख्यमंत्री बनना होता तो 2001 में ही मुख्यमंत्री बन गया होता। हमने समाज को जगाया है। वह अपना वादा पूरा करें। करते हैं तो अच्छा। वरना हिंदुओं की इच्छा पूर्ति के लिए हम निकलेंगे।
    मेरे बड़े भाई, गुजराती में मोटे भाई (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी)। जो 1972 से मेरे घर में आते थे, स्कूटर पर बैठते थे, खाते थे। इमरजेंसी में अंधेरे में दो प्रकाश अटल बिहारी-जय प्रकाश जैसे नारे दिवारों पर लिखते थे। उनको (मोदी) मैंने पत्र लिखा। मैंने उनके वादे याद दिलाए।
    तोगडिय़ा ने कहा कि एफडीआई, आधार, किसान कर्जमाफी, मनरेगा, राम मंदिर सभी मसलों पर मोदी सरकार ने यू-टर्न लिया। मजदूरों के खिलाफ काननू लाए गए। लाखों मजदूर सड़क पर आ गए।
    तोगडिय़ा ने कहा, जो भी मांग है रोजगार, मंदिर, किसान कर्जमाफी जैसे मुद्दे पूरे नहीं हुए तो मैं मोदी जी के साथ खड़ा नहीं रहूंगा। मैं जनता के बीच रहूंगा। मैं चाहूंगा कि सरकार वादे पूरे करे और हमें जनता के बीच जाने का मौका न मिले। अगर हम जनता के बीच गए तो कौन-कहां होगा यह भारत की जनता तय करेगी। (एबीपी न्यूज)

    ...
  •  


Posted Date : 13-Apr-2018
  • बैंगलुरू, 13 अप्रैल। कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लडऩे के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के प्रस्ताव को कांग्रेस ने ठुकरा दिया है। यही नहीं उनके जैसे अन्य सभी नेताओं को भी पार्टी ने टका सा जवाब दे दिया है जो दो सीटों से लडऩे की तैयारी कर रहे थे। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।
    सूत्रों के मुताबिक 12 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दो सीटों- चामुंडेश्वरी (मैसुरु जिला) और बादामी (बागलकोट जिला) से चुनाव लडऩा चाहते थे। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें दो में से किसी एक सीट को चुनना होगा। सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। लिहाजा सिद्धारमैया से कहा गया है कि वे इससे पहले ही अपने विकल्प के बारे में पार्टी नेतृत्व को बता दें।
    यही नहीं पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह मशविरा भी दिया है कि चूंकि उन्हें एक ही सीट से लडऩे की इजाजत है इसलिए वे अपने लिए कोई सुरक्षित ढूंढ लें क्योंकि चामुंडेश्वरी में वे मुश्किल में फंस सकते हैं। यहां वोक्कालिगा और लिंगायत मतदाताओं की तादाद काफी ज्यादा है। इसलिए यहां चुनावी संघर्ष तगड़ा और नजदीकी हो सकता है। जबकि बादामी सीट पर कुरुबा समुदाय के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। चूंकि मुख्यमंत्री खुद इसी समुदाय से आते हैं इसलिए यह सीट उनके लिए सुरक्षित रहेगी। हालांकि सीट का चुनाव उन्हें खुद करना है।
    सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री ही नहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वरा और कुछ अन्य नेता भी दो सीटों से चुनाव लडऩा चाहते थे। लेकिन पार्टी ने उन सभी के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं ताकि अन्य नेताओं को भी चुनाव लडऩे का मौका दिया जा सके। बताया जाता है कि पार्टी के इस रुख के बाद परमेश्वरा सहित अधिकांश नेता एक सीट से चुनाव लडऩे को तैयार हो गए हैं। परमेश्वरा कोरतागेरे सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं जहां से वे 2013 में हार गए थे। वे संभवत: बेंगलुरू की पुलकेशीनगर सीट से चुनाव में उतरने का विचार छोड़ रहे हैं।  (डेक्कन हेराल्ड)

    ...
  •  


Posted Date : 13-Apr-2018
  • खंडवा , 13 अप्रैल । जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की एक बच्ची से सामूहिक बलात्कार और फिर उसकी हत्या पर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह ने एक विवादास्पद बयान दिया है। खंडवा से सांसद नंदकुमार सिंह ने कहा कि इस घटना में पाकिस्तान का हाथ है और इसका मकसद लोगों में फूट डालना है। आरोपितों के पक्ष में जुलूस निकालने वालों और उसमें जय श्रीराम के नारे लगाने वालों के बारे में उन्होंने कहा कि यह भी पाकिस्तान के एजेंटों ने किया होगा। उन्होंने कहा, कश्मीर में तो एक फीसदी भी हिंदू नहीं है। वहां तो बेचारा हिंदू मुंह भी नहीं खोल पाता। वो क्या नारे लगाएगा।
    गिरफ्तार सभी आठों हिंदू
    उल्लेखनीय है कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है जिनमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। गिरफ्तार सारे ही लोग हिंदू हैं। सांजीराम, स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, प्रवेश कुमारू, सांजीराम का नाबालिग भतीजा और सांजीराम का बेटा विशाल जंगोत्रा। (सत्याग्रह)

     

    ...
  •  


Posted Date : 12-Apr-2018
  • जम्मू, 12 अप्रैल। कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस में दाखिल आरोपपत्र से इस बात का खुलासा हुआ है कि बकरवाल समुदाय की बच्ची का अपहरण, गैंगरेप और हत्या इलाके से इस अल्पसंख्यक समुदाय को हटाने की एक सोची समझी साजिश का हिस्सा थी। इसमें कठुआ स्थित रासना गांव में देवीस्थान मंदिर के सेवादार को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।
    मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में 15 पृष्ठों के दाखिल आरोपपत्र के मुताबिक, बच्ची को जनवरी में एक हफ्ते तक कठुआ के रासना गांव में देवीस्थान मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था। उससे छह लोगों ने गैंगरेप किया था। बच्ची को नशीली दवा देकर रखा गया था। उसकी हत्या से पहले दरिंदों ने उसे बार-बार हवस का शिकार बनाया था।
    इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सांझी राम के साथ विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, मित्र परवेश कुमार उर्फ मन्नू, राम का किशोर भतीजा और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा शामिल हुए। आरोपपत्र में जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल तिलक राज और उप निरीक्षक आनंद दत्त भी नामजद हैं, जिन्होंने राम से चार लाख रुपये लिए।
    इसके बाद इस केस से जुड़े अहम सबूत नष्ट किए। एक किशोर आरोपी की भूमिका के बारे में पुलिस ने अलग आरोपपत्र दाखिल किया। सभी आठ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। आरोपपत्र में कहा गया है कि बच्ची का शव बरामद होने से छह दिन पहले 11 जनवरी को किशोर ने अपने चचेरे भाई जंगोत्रा को फोन किया था और मेरठ से लौटने को कहा था।
    उसने उससे कहा था कि यदि वह मजा लूटना चाहता है, तो आ जाए। आरोपी किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ चुका है। किशोर की मेडिकल जांच से जाहिर होता है कि वह वयस्क है, लेकिन अदालत ने अभी तक रिपोर्ट का संज्ञान नहीं लिया है। खजुरिया ने बच्ची का अपहरण करने के लिए किशोर को लालच दिया। उससे कहा कि वह बोर्ड परीक्षा पास करने में उसकी मदद करेगा।
    इसके बाद उसने परवेश से योजना साझा कर उसे अंजाम देने में मदद मांगी, जो राम और खजुरिया ने बनाई थी। जंगोत्रा अपने चचेरे भाई का फोन आने के बाद मेरठ से रासना पहुंचा और किशोर और परवेश के साथ बच्ची से बलात्कार किया, जिसे नशीली दवा दी गई थी। राम के निर्देश पर बच्ची को मंदिर से हटाया गया। उसे खत्म करने के लिए पास के जंगल में ले गए।
    जांच के मुताबिक, खजुरिया भी मौके पर पहुंचा और उनसे इंतजार करने को कहा, क्योंकि वह बच्ची की हत्या से पहले उसके साथ फिर से बलात्कार करना चाहता था। बच्ची से एक बार फिर सामूहिक बलात्कार किया गया और बाद में किशोर ने उसकी हत्या कर दी। इसमें कहा गया है कि किशोर ने बच्ची के सिर पर एक पत्थर से दो बार प्रहार किया।
    इसके बाद उसके शव को जंगल में फेंक दिया। वाहन का इंतजाम नहीं हो पाने के चलते नहर में शव को फेंकने की उनकी योजना नाकाम हो गई थी। शव का पता चलने के करीब हफ्ते भर बाद 23 जनवरी के सरकार ने यह मामला अपराध शाखा को सौंपा जिसने एसआईटी गठित कर दी। एसआईटी द्वारा की जांच में चौंका देने वाले खुलासे होने लगे थे।
    आरोपपत्र में कहा गया है कि जांच में यह पता चला कि जनवरी के प्रथम सप्ताह में ही आरोपी सांझी राम ने रासना इलाके से बकरवाल समुदाय को हटाने का फैसला कर लिया था, जो उसके दिमाग में कुछ समय से चल रहा था। राम ने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को चार लाख रुपये तीन किश्तों में दिए थे, ताकि सबूत नष्ट किया जा सके।
    जांच में इस बारे में ब्योरा दिया गया है कि आरोपी पुलिस अधिकारियों ने मृतका के कपड़े फारेंसिक प्रयोगशाला में भेजने से पहले उसे धोकर किस तरह से अहम सबूत नष्ट किए और मौके पर झूठे साक्ष्य बनाए। आरोपी राम रासना, कूटा और धमयाल इलाके में बकरवाल समुदाय के बसने के खिलाफ था। वह हमेशा ही अपने समुदाय के लोगों को उनके खिलाफ करता था।  (आजतक)

     

    ...
  •  


Posted Date : 11-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 11 अप्रैल। लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने लोकपाल चयन समिति की बैठक में एक बार फिर शामिल होने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाया है। मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा है कि इसका एकमात्र मकसद लोकपाल चयन प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की राय को अलग से रखना है। उनका आगे कहना था कि सरकार इस बात से अवगत है कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम में भागीदारी के अधिकारों, प्रक्रिया में सलाह और मतदान के बगैर विशेष आमंत्रित के लिए कोई प्रावधान नहीं है। मल्लिकार्जुन खडग़े ने मोदी सरकार पर इस बारे में देश को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। (नवभारत टाईम्स)

    ...
  •  


Posted Date : 11-Apr-2018
  • मैनपुरी, 11 अप्रैल। समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने सपा और बसपा के गठबंधन को अच्छी कोशिश करार देते हुए कहा कि एक साथ आये इन दोनों दलों को अब लोकसभा चुनाव में कोई रोक नहीं सकेगा।
    यादव ने किशनी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सपा और बसपा का गठबंधन अच्छी कोशिश है। यह पहल जारी रहनी चाहिये। दोनों के एक होने से लोकसभा चुनाव में उन्हें दिल्ली पहुंचने से कोई नहीं रोक सकेगा।
    पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के पास जो नीतियां हैं, वे देश की किसी पार्टी के पास नहीं हैं। उन्होंने सभा में सपा का सहयोग करने के लिये बसपा को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में महंगाई और भ्रष्टाचार साथ-साथ चल रहे है। महिलाएं समझदार हैं। वे समझ रही है कि किसे वोट देना है।
    वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुलासा किया है कि इस गठजोड़ के लिए पहल उन्होनें की और वो गठबंधन के वास्ते दो कदम पीछे हटने को भी तैयार हैं। बीएसपी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लडऩे का फैसला दोहराते हुए अखिलेश ने बीजेपी से सबक लेने की बात कही। अखिलेश कहा था कि 2019 में भी सपा-बसपा साथ मिलकर लड़ेगी। 
    अखिलेश ने कहा कि 2019 में बीएसपी-सपा साथ लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मायावती ने गठजोड़ के खिलाफ कुछ नहीं कहा है। मैंने गठजोड़ की पहल की। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों पार्टियों के गठजोड़ को नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का आशीर्वाद है। इसके आने वाले दिनों में होने वाले एमएलसी चुनावों पर भी अखिलेश यादव ने बात की। उन्होंने कहा कि वे एमएलसी चुनाव नहीं लड़ेंगे। (एनडीटीवी)

    ...
  •  


Posted Date : 10-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 10 अप्रैल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का नेतृत्व करने की इच्छा जाहिर की है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। खबर के मुताबिक नर्मदा परिक्रमा पूरा करने के बाद नरसिंहपुर जिले में उन्होंने कहा, यदि पार्टी मध्य प्रदेश में वापसी करती है तो कांग्रेस हाईकमान के कहने के बाद भी वे मुख्यमंत्री का पद स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर समर्थन देने की बात कही। दिग्विजय का आगे कहना था कि वे विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए पार्टी को एकजुट रखने को लेकर फेवीकोल की तरह काम करेंगे। (द एशियन एज)

    ...
  •  


Posted Date : 10-Apr-2018
  • नई दिल्ली, 10 अप्रैल। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी और आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) दिल्ली के बीच बीते 45 साल से विवाद चल रहा है। स्वामी की तनख्वाह को लेकर। हालांकि अब खबर है कि यह विवाद अदालत के बाहर खत्म किया जा सकता है क्योंकि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस पर नरम रुख अख्तियार किया है।
    मसला दिसंबर 1972 का है। स्वामी ने इस तारीख से 31 मार्च 1991 तक आईआईटी दिल्ली में पढ़ाया था। इसी बीच उन्होंने कुछ समय अमरीका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया। इसी आधार पर आईआईटी दिल्ली ने उनकी कुछ तनख्वाह और भत्ते आदि रोक लिए। स्वामी इस मामले को अदालत में ले गए। यहां आईआईटी ने दलील दी कि चूंकि स्वामी ने संस्थान में काम करते हुए समानांतर रूप से हार्वर्ड में भी पढ़ाया इसलिए अब वह उन्हें उनका पूरा बकाया वेतन-भत्ता चुकाने के लिए बाध्य नहीं है। संस्थान केंद्र सरकार के मूलभूत नियम (एफआर)-54 के तहत सिर्फ उतने पैसे का भुगतान करेगा जो स्वामी को हार्वर्ड से हुई आमदनी और बकाए के अंतर के रूप में बच रहता है।
    यानी मान लें कि संस्थान पर स्वामी बकाया तीन करोड़ रुपए है और इस बीच उन्होंने एक करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय हार्वर्ड से हासिल की तो आईआईटी दिल्ली उन्हें तीन के बजाय सिर्फ दो करोड़ रुपए का भुगतान करना चाहता है। सूत्र बताते हैं कि आईआईटी दिल्ली के इस रुख का यूपीए (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रहे कपिल सिब्बल ने समर्थन किया था। लेकिन मोदी सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर अब इस रुख से पलट गए हैं। उन्होंने आईआईटी को लिखा है कि स्वामी का मामला एफआर-54 के तहत नहीं आता। क्योंकि इन नियमों को संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर ने 1992 में अपनाया था। जबकि स्वामी का मामला इससे पहले का है।
    बताया जाता है कि आईआईटी-दिल्ली को जावड़ेकर का यह पत्र पिछले सप्ताह ही मिल चुका है। इस मामले में बोर्ड ऑफ गवर्नर की अगली बैठक में चर्चा होगी। संभव है उसमें मोदी सरकार की अपेक्षा के अनुरूप कार्रवाई पर सहमति बन जाए। और स्वामी के साथ विवाद अदालत के बाहर ही उनके पक्ष में हल हो जाए।  (इंडियन एक्सप्रेस)

    ...
  •