राजनीति

Date : 04-Jan-2020

मुंबई, 4 जनवरी। शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने अभी तक अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को नहीं भेजा है। बताया जा रहा है कि अब्दुल सत्तार को राज्य मंत्री बनाए जाने से शिवसेना के कई नेता खफा थे जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
अभी हाल में उद्धव सरकार में 36 नए मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें एक उपमुख्यमंत्री, 25 कैबिनेट और 10 राज्य मंत्री शामिल हैं। कांग्रेस और एनसीपी ही नहीं बल्कि शिवसेना ने भी महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय को अपने साथ साधे रखने के लिए अपने कोटे से मंत्री बनाया था।
मुख्यमंत्री को नहीं भेजा इस्तीफा
अब्दुल सत्तार राज्यमंत्री बनाए जाने और हल्का मंत्री पद दिए जाने से नाराज बताए जा रहे थे। सत्तार ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री ठाकरे को न भेजकर शिवसेना के एक नेता को भेजा है। इस घटना के बाद शिवसेना नेताओं ने सत्तार को मनाने की कोशिश शुरू कर दी है लेकिन अपने अपने इरादे पर अडिग रहने की बात कर रहे हैं।
अब्दुल सत्तार की इस कार्रवाई को दबाव की रणनीति बताई जा रही है। सत्तार इस बात पर नाराज थे कि उन्हें जूनियर मंत्रालय क्यों दिया गया। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय को सत्तार का इस्तीफा अभी नहीं मिला है। कहा जा रहा है कि सत्तार ने इस्तीफे का पत्र पार्टी सचिव अनिल देसाई को भेजा है। 
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अभी हाल में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे सहित 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें कैबिनेट के 25 और राज्यमंत्री के 10 पद शामिल हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता अजीत पवार ने रिकार्ड बनाते हुए चौथी बार उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
कैबिनेट में मुस्लिम चेहरा
महा विकास अगाड़ी के अन्य नेताओं सहित आदित्य ठाकरे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। राज्य के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के अशोक चव्हाण, परिषद में विपक्ष के नेता रहे एनसीपी के धनंजय मुंडे, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वाल्से-पाटिल और एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक इस विस्तार का हिस्सा बने हैं। साल 2014 के बाद पहली बार मंत्रालय में चार मुस्लिम चेहरे आए हैं। शिवसेना के अब्दुल सत्तार नबी (राज्य मंत्री), एनसीपी के नवाब मलिक और हसन मुशरीफ और कांग्रेस के असलम शेख, इन सभी को कैबिनेट स्तर का पद दिया गया है। (आजतक)
 


Date : 04-Jan-2020

नई दिल्ली, 4 जनवरी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में बीते वर्ष 359 दिनों तक किसी न किसी कारण से धारा 144 लागू रही।
उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 2019 में 365 दिनों में से 359 दिन धारा 144 लागू रही।’ प्रियंका ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा, ‘इस स्थिति में भी प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।’
प्रियंका गांधी ने न हिंदू की एक रिपोर्ट ट्विटर पर साझा करते हुए यह बात कही है। इस रिपोर्ट ने बीएचयू के एक छात्र रजत कुमार ने दावा किया है कि साल 2019 के 365 दिनों में से 359 दिन बनारस में धारा 144 लागू रही।
रजत कुमार ने बीते 24 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में अपनी मास्टर डिग्री लेने से मना कर दिया था।
प्रियंका गांधी संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद हुई गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी केंद्र एवं उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर लगातार हमले कर रही हैं।
सीआरपीएफ की धारा 144 एक जगह पर चार से अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध लगाती है।
दरअसल अमर उजाला के वाराणसी संस्करण में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बनारस में बीते साल 365 दिनों में 359 दिनों तक शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रशासन द्वारा धारा 144 लागू किया गया था। यह रिपोर्ट अमर उजाला के रिपोर्टर पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी ने लिखी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, बनारस जिले में 17 नवंबर 2018 को धारा 144 लागू की गई थी, जो 55 दिन 10 जनवरी 2019 को हटाई गई और एक दिन बाद ही फिर इसे लागू कर दिया गया। तब से लेकर अब तक साल 2019 में अलग-अलग कारणों से सिर्फ पांच दिन छोडक़र धारा 144 लागू रही।
रिपोर्ट में जिला प्रशासन के अधिकारियों से कहा गया है कि शहर में वीआईपी लोगों का आवागमन लगभग रोजाना रहता है। इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन और पर्यटन के लिए लोग पूरे साल आते रहते हैं। कानून व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए धारा 144 लागू करनी पड़ती है।
हिंदुस्तान टाईम्स की रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रट (शहर) विनय सिंह ने बताया, ‘जिले में धारा 144 कुल 350 दिनों तक लागू रही।’
हिंदुस्तान टाईम्स से बातचीत में एक अन्य अधिकारी ने बताया है, ‘पिछले साल मार्च में आम चुनावों की घोषणा हुई थी। आचार संहिता लागू होने से जिले में धारा 144 लागू कर दी गई थी। बीते साल मई महीने में नई सरकार के गठन के साथ आचार संहिता खत्म हुई और धारा 144 हटा दी गई।’
वे आगे कहते हैं, ‘कुछ अन्य कार्यक्रमों के मद्देनजर निवारक उपाय के रूप में फिर से जिले में धारा 144 लागू की गई थी। बीते साल अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में अयोध्या मामले पर फैसला आने की घोषणा की वजह से फिर से लागू किया गया था।’ (भाषा)