राजनीति

21-Oct-2020 3:42 PM 14

पटना, 21 अक्टूबर| बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होकर चुनाव लड़ रही लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने बुधवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया। लोजपा के प्रमुख चिराग पासवान ने घोषणा पत्र जारी करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जोरदार सियासी हमला बोला। घोषणा पत्र का नाम 'विजन डाक्यूमेंट 2020' दिया गया है। चिराग ने विजन डॉक्यूमेंट में 'बिहार फस्र्ट, बिहारी फस्र्ट' का नारा दिया है। विजन डॉक्यूमेंट जारी करने के पहले चिराग पासवान ने अपनी मां रीना पासवान से आशीर्वाद लिया। 'नया बिहार, युवा बिहार' के नारे के साथ लोजपा के विजन डाक्यूमेंट में 'समान काम के बदले समान वेतन' का वादा किया गया है।

इस डॉक्यूमेंट में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, उद्योग, रोजगार, पलायन, कृषि, बाढ़-सूखा, शहरी और ग्रामीण विकास से लेकर कानून व्यवस्था, शासन प्रणाली तक की बातें की गई हैं।

लोजपा ने अपने घोषणा पत्र में बिहार में सामान वेतन लागू किया जाएगा का वादा किया गया है जबकि बेरोजगारों को आकर्षित करने के लिए बिहार में सभी सरकारी पदों को भरे जाने का वादा किया गया है। घोषणा पत्र में लोजपा की सरकार बनने पर युवा आयोग का गठन करने और माता सीता का भव्य मंदिर निर्माण करने का वादा किया गया है। बिहार में कोटा की तर्ज पर कोचिंग फैक्ट्री बनाने की बात भी कही गई है।

चिराग ने कहा कि उनकी सोच बिहार को फिर से गौरवशाली बनाने की है। लोजपा प्रमुख ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वो बांटो और राज करो नीति पर बिहार में सत्ता में रहे, यही कारण है कि 15 साल सरकार चलाने के बाद भी वे नाली, गली और खेत में पानी पहुंचाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके (नीतीश) के नेतृत्व में बिहार के विकास की कल्पना करना उचित नहीं है। (आईएएनएस)
 


21-Oct-2020 3:40 PM 12

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव 23 अक्टूबर को अपनी पहली संयुक्त रैली को संबोधित करेंगे। कांग्रेस पार्टी सूत्रों ने बुधवार को ये जानकारी दी।

महागठबंधन की एकता दिखाने और 28 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले पार्टी कार्यकतार्ओं में जोश भरने के लिए महागठबंधन के नेताओं द्वारा इस तरह की पहली रैली बिहार के नवादा जिले के हिसुआ में 23 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि रैली का मकसद बिहार के मतदाताओं को संदेश देना है कि महागठबंधन मजबूत हो और इसके सभी घटक दल एकजुट रहे।

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव अपने पिता लालू प्रसाद की अनुपस्थिति के बावजूद भारी भीड़ खींच रहे हैं। राजद नेता ने कहा कि संयुक्त रैली धार्मिक अल्पसंख्यकों को संदेश देगी कि वे एकजुट रहें क्योंकि जनता दल-यूनाइटेड भी उनको लुभाने की कोशिश में है। (आईएएनएस)


21-Oct-2020 2:28 PM 16

मनोज पाठक 
पटना, 21 अक्टूबर| राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस और वामपंथी दल मिलकर चुनाव मैदान में है। ऐसे में राजद का अधिकांश सीटों पर जनता दल (युनाइटेड) से मुकाबला है।

इस चुनाव में पिछले चुनाव से परिस्थितियां बदली हैं। पिछले चुनाव में जदयू, राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी, जबकि इस चुनाव में जदयू, भाजपा और दो अन्य छोटे दलों के साथ चुनाव मैदान में है। राजद इस चुनाव में कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ चुनाव मैदान में है।

वर्ष 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार की अगुवाई में चुनाव मैदान में उतरी राजद 101 सीटों पर चुनााव लड़ी थी जबकि इस चुनाव में वह 144 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। महागठबंधन में सबसे मजबूत और पिछले चुनाव में सबसे बड़े दल राजद का इस चुनाव में अधिकांश सीटों पर जदयू से मुकाबला है।

इस चुनाव में 77 सीटों पर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जदयू के उम्म्ीदवार राजद के उम्मीदवार के सामने हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से जदयू जहां 115 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं भाजपा 110 सीटों पर चुनाव मैदान में है।

भाजपा के सिर्फ 51 प्रत्याशी ही राजद के सामने है। ऐसे में भाजपा के लिए अन्य 59 सीट इन 51 सीटों से अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है। इस चुनाव में राजद के पांच प्रत्याशी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के आमने-सामने हैं जबकि 11 सीटों पर राजद प्रत्याशी का मुकाबला विकासशील इंसान पार्टी से है।

सूत्र कहते हैं कि चुनाव पूर्व सर्वे के आधार पर राजद ने नीतीश से लोगांे की नाराजगी का लाभ उठाने के लिए अपने अधिाकांश प्रत्याशी जदयू के प्रत्याशी के सामने उतारे हैं।

वैसे, राजद के नेता इससे इनकार कर रहे हैं। राजद के एक नेता बताते हैं कि जमीनी हकीकत, पार्टी की क्षेत्रवार मजबूती और जातीय समीकरणों के आधार पर प्रत्याशी उतारे गए हैं। यह महज संयोग है कि अधिकांश प्रत्याशियों का मुकाबला जदयू के प्रत्याशी से है। उन्होंने बताया कि राजद के लिए भाजपा और जदयू एक समान है।

राजद के अन्य एक नेता का कहना है कि तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री के उम्मीदवार हैं और तय है कि इस चुनााव के बाद वे मुख्यमंत्री पद संभालेंगे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की जीत तय है, हालांकि कुछ सीटों पर जीतों का अंतर 2000 से 3000 हो सकता है।

इधर, लोजपा प्रमुख चिराग पासवान भी खुले तौर पर भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे हैं और नीतीश का विरोध कर रहे हैं। लोजपा अधिकांश ऐसे क्षेत्रों से अपने प्रत्याशी उतारी है जहां जदयू चुनाव लड़ रही है। ऐसे में लोजपा ने भाजपा से नाराज होकर अलग हुए नेताओं को भी टिकट थमाया है, जो जदयू के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे और दियारा क्षेत्र से लोजपा के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह कहते भी हैं कि उन्हें व्यक्तिगत आधार पर भाजपा कार्यकतार्ओं का साथ मिल रहा है। वे कहते हैं कि नेताओं का अपना व्यक्तिगत आधार भी होता है।

इधर, जद यू के प्रवक्ता के.सी. त्यागी का कहना है कि राजद के ऐसे किसी भी चाल से उनकी पार्टी चिंतित नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दे पर वे चुनावी मैदान में हैं और राजग का नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे है। लोगों को यह तय करना है कि नीतीश कुमार चाहिए या कोई और।

बहरहाल, बिहार में चुनावी सरगर्मी बढ गई है और सभी दल सत्ता तक पहुंचने के लिए पूरा दमखम से जुटे हुए हैं। ऐसे में जदयू तेजस्वी के इस चाल से कैसे निपट पाता है, यह देखने वाली बात होगी। (आईएएनएस)


21-Oct-2020 2:07 PM 15

सांवेर से भाजपा प्रत्याशी तुलसी सिलावट के शपथ पत्र में कमाई के आंकड़े देखकर अर्थशास्त्री भी हैरान होंगे, आखिर लॉकडाउन में ये बढ़ोतरी कहां से आई 

पंकज मुकाती

इंदौर, 21 अक्टूबर (‘छत्तीसगढ़’)। बिकाऊ के नारों के बीच तुलसी सिलावट की कमाई में हुई बढ़ोतरी ने सबको चौंका दिया। शिवराज और भाजपा दोनों तुलसी पहलवान के लिए बेहद लकी साबित हुए। शिवराज का साथ उन्हें मालामाल कर गया। पिछले आठ महीने में तुलसी सिलावट की कमाई में 80. 80 फीसदी का इजाफा हुआ। वो भी लॉकडाउन के आठ महीनों में। जब आठ महीने में सारे कारोबार बंद थे तब सिलावट ने किस जादू से इतना पैसा कमाया? ये सवाल सांवेर की जनता के मन में भी है। 

सांवेर से भाजपा प्रत्याशी सिलावट की आय की जानकारी उनके अग्रिम आयकर रिटर्न में सामने आई। पिछले सप्ताह नामांकन दाखिले के साथ सिलावट ने अपना शपथ पत्र भी जारी किया। इसमें उन्होंने पिछले आठ महीने में आमदनी में 80 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी बताई है। यानी कांग्रेस की ड्योढ़ी छोडक़र भाजपा में कदम रखना फायदे का सौदा साबित हुआ। 

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शपथ-पत्र के साथ सिलावट ने अपनी इनकम टैक्स रिटर्न की जो जानकारी दी है उसके अनुसार 2019-20 के मुकाबले 2020-21 में उनकी आमदनी 80.80 प्रतिशत बढ़ी है। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी गुड्डू की आय कम हुई।  2017-18 में उन्होंने अपनी आय 1.07 करोड़ बताई थी जो 2019-20 में घटकर 40.61 लाख ही रह गई।

शपथ पत्र के अनुसार सिलावट के पास कुल 91 लाख 87 हजार 721 रुपए की चल संपत्ति है वहीं करीब 8.63 करोड़ की अचल संपत्ति है। आंकड़ों में देखें तो कमलनाथ सरकार में मंत्री रहते तुलसी सिलावट नुकसान में रहे। 2018-19 में उनकी आमदनी 6.46 लाख थी जो 2019-20 में घटकर 6.18 रह गई। मतलब, मंत्री बनने का कोई फायदा नहीं मिला। मगर, मार्च 2020 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। भाजपा का दामन थाम लिया।

 
लॉकडाउन में कमाई से अर्थशास्त्री भी हैरान 

24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के चलते लॉकडाउन घोषित कर दिया था। व्यापार से लेकर कारोबार तक घाटे में रहे। नौकरियां चली गई। मगर, लॉकडाउन के बावजूद तुलसी सिलावट ने कमाई बढ़ाने का कमाल कैसे कर दिखाया?अर्थशास्त्री यही समझने में लगे हैं।


21-Oct-2020 12:21 PM 15

लखनऊ, 21 अक्टूबर| समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का कोविड परीक्षण पॉजिटिव आने के बाद से वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं और सांसद मोहम्मद आजम खान अभी भी जेल में हैं। इसके बाद भी 3 नवंबर को होने जा रहे उप-चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की सूची में इन दोनों के नाम हैं। 7 विधानसभा सीटों के लिए समाजवादी पार्टी ने मंगलवार की शाम को स्टार प्रचारकों की सूची जारी की, जिसमें सपा सांसद जया बच्चन का नाम गायब है।

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "यह हमारे वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान दर्शाने का एक तरीका है। वे भले ही शारीरिक रूप से प्रचार करने में सक्षम न हों, लेकिन उनका आशीर्वाद हमारे साथ है।"

स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल अन्य नामों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, उपाध्यक्ष किरणमय नंदा, पार्टी महासचिव प्रोम गोपाल यादव, इंद्रजीत सरोज, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल शामिल हैं।

अब तक किसी भी नेता ने वर्चुअली या भौतिक रूप से अभियान शुरू नहीं किया है। (आईएएनएस)


20-Oct-2020 5:37 PM 25

भोपाल, 20 अक्टूबर| मध्यप्रदेश में होने वाले 28 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में 355 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए हैं। यह स्थिति नाम वापसी के बाद बनी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रदेश के 19 जिलों के 28 विधानसभा क्षेत्रों में 35 अभ्यर्थियों ने नाम वापस लिए। नाम वापसी के बाद 355 विधिमान्य अभ्यर्थी शेष हैं।

राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। वहीं बसपा ने भी सभी 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसके चलते कई स्थानों पर मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है। राज्य में तीन नबंवर को मतदान होना है और नतीजे 10 नवंबर को आएंगे।

राज्य की विधानसभा की वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो 230 सदस्यों वाली विधानसभा में 28 स्थान रिक्त हैं, जिन्हें भरने के लिए उपचुनाव होने जा रहे हैं। विधानसभा इस समय में 202 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 107 और कांग्रेस के 88 सदस्य हैं। इस तरह सदन में पूर्ण बहुमत के लिए भाजपा को नौ सीटें जीतना जरूरी है। वहीं कांग्रेस को सत्ता में वापसी के लिए सभी 28 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी। (आईएएनएस)
 


20-Oct-2020 2:26 PM 19

पटना, 20 अक्टूबर| बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ रही लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद प्रिंस राज मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर पहुंचे और उनसे तथा राजद के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। लोजपा नेता मंगलवार की सुबह राबड़ी देवी आवास पहुंचे और तेजस्वी यादव से मुलाकात की। मुलाकात के बाद आवास से बाहर निकले पिं्रस राज ने हालांकि इसे राजनीतिक मुलाकात नहीं बल्कि पारिवारिक मुलाकात बताया।

प्रिंस राज ने पत्रकारों से कहा, मैं अपने बड़े पापा दिवंगत रामविलास पासवान के श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने को लेकर न्यौता देने राबड़ी आवास आया था। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से मुलाकात हुई है। इसे राजनीति से जोड़ना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि दिवंगत नेता पासवान का सभी नेताओं से संपर्क था। कई लोगों से व्यक्तिगत तौर पर जाकर आयोजन में आने का निमंत्रण दे रहा हूं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का श्राद्धकर्म मंगलवार को पटना के आवास पर है, इसमें कई नेताओं के पहुंचने की संभावना है।

इधर, इस खबर के बाद से बिहार के सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।

गौरतलब है कि लोजपा अकेले चुनाव मैदान में उतरी है और लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान लगातार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं।

सोमवार को तेजस्वी ने कहा था कि नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के साथ सही व्यवहार नहीं किया है। (आईएएनएस)


19-Oct-2020 3:42 PM 14

विवेक त्रिपाठी  
लखनऊ, 19 अक्टूबर| उत्तर प्रदेश में विधानसभा की सात सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बसपा कुछ सीटें झटक कर अपने को मुख्य लड़ाई में साबित करने की फिराक में है। पार्टी उपचुनाव में जोर शोर से भाग ले रही है। बसपा ने इस चुनाव में भी सोशल इंजीनियरिंग का ही फार्मूला चुना है। इसके लिए अपने बड़े नेताओं की फौज को प्रत्याशी चयन के लिए लगाया था। हर एक सीट पर बहुत सोच विचार कर ही उम्मीदवार उतारा गया है।

बसपा के एक नेता ने बताया कि, उपचुनाव में पार्टी के बड़े नेताओं के कंधे पर चुनाव जीताने की जिम्मेदारी है। बसपा के पास इस चुनाव में खोने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन पाने के लिए बहुत कुछ है। पुराने इतिहास को देखें तो जहां पर उपचुनाव हो रहे हैं वो सीटें ज्यादातर बसपा के पास ही रही हैं। चाहे घाटपुर हो या बंगमऊ, बुलंदशहर -- यह सब सीटें बसपा के खाते में एक दो बार रह चुकी हैं। यहां पर उसे गणित सेट करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। लेकिन इस बार पार्टी ने सारे उम्मीदवार जीताऊ ही उतारे हैं। प्रदेश में जिस प्रकार से माहौल है उससे लोग बसपा के शासन को याद कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि चुनाव के लिए शीर्ष नेतृत्व के निर्देशन में हर एक सीट पर रणनीति तैयार की गयी है। राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष मुनकाद अली के अलावा सांसद विधायक भी पूरा फोकस उपचुनाव पर ही कर रहे हैं। चुनाव वाले क्षेत्र में विभिन्न समाज के लोगों ने डेरा डालकर रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है।

राजनीतिक पंडित बताते है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पहुंचकर 19 सीटें ही जीत पायी थी। इससे कार्यकतार्ओं का मनोबल टूटा था। उसकी भरपाई पार्टी इस उपचुनाव से करना चाहती है। यह बसपा के लिए बड़ा अवसर होगा। इससे आगे आने वाले चुनाव पर असर पड़ सकता है।

वरिष्ठ राजनीतिक विष्लेषक राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि बसपा 2012 से लगातार सत्ता से दूर है। भाजपा के सभी जातियों पर सेंधमारी का प्रयास कर रही उसके चलते बसपा के लिए चिंता का विषय जरूर है कि उसका वफादार वोटर उसके पास टिका रहे। इसके लिए पार्टी ने जमीनी स्तर पर तमाम कार्ययोजनाएं बनायी हैं। 2022 का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। विपक्ष की जगह कई सालों से खाली पड़ी है। विपक्ष में एक जगह बनाना और भाजपा को चुनौती देना बहुत महत्वपूर्ण है। इस चुनाव के जरिए यह परखा जा रहा है। बसपा अपनी ओर कितनी जातियों के वोटर को आकर्षित कर सकती है। क्योंकि सोशल इंजीनियरिंग में बसपा 2007 में सफल हो चुकी है। बसपा के दलित वोट उसकी ओर कितने बचे है। सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से वह अन्य जातियों को अपनी ओर कितना खींच पाती है। इसकी भी परीक्षा इस उपचुनाव में होगी। (आईएएनएस)
 


19-Oct-2020 3:41 PM 19

औरंगाबाद (बिहार), 19 अक्टूबर| बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद पर जोरदार सियासी हमला बोला। उन्होंने बिना किसी के नाम लिए कहा कि पति (लालू) जब अंदर (जेल) गए तो पत्नी (राबड़ी देवी) को मुख्यमंत्री बना दिया, लेकिन महिलाओं के विकास के लिए कुछ नहीं हुआ। औरंगाबाद के रफीगंज और गया के शेरघाटी में अलग-अलग चुनावी सभाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद के शासनकाल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पति-पत्नी के राज में क्या होता था, सबको मालूम है। लेकिन जब हम लोगों को काम करने का मौका मिला तब कानून का राज कायम किया। सभी क्षेत्रों में काम हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा, उस समय कितने तरह के अपराध होते थे? क्या-क्या नहीं होते थे, शाम होते लोग घर से बाहर नहीं निकलना चाहता थे। लेकिन जब हमलोगों को काम करने का मौका मिला तो सभी क्षेत्रों में काम हुआ।

उन्होंने चारा घोटाला में लालू के जेल जाने के संदर्भ में चर्चा करते हुए कहा, पति जब जेल गए तो पत्नी को बैठा दिया। लेकिन महिलाओं के लिए कुछ किया क्या। जब हमलोग आए तो पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा बढ़ी।

नीतीश कुमार ने कहा कि किसी की उपेक्षा नहीं की। हाशिये के तबके के लिए विशेष काम हुआ। आज बिहार के काम की चर्चा देश ही नहीं, दुनियाभर में हो रही है और कुछ लोग उसमें खोट निकालने में लगे हैं।

उन्होंने कहा, महिला सशक्तीकरण पर बल दिया। अल्पसंख्यकों के लिए काम किया। बेटियों को साइकल दी तो उनका आत्मविश्वास बढ़ा। हमने बिना भेदभाव के हर तबके के विकास के लिए काम किया है। महिलाओं को बराबर का अवसर दिया। (आईएएनएस)


19-Oct-2020 3:34 PM 11

पटना, 19 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब सभी राजनीतिक दल अपने पूरे दमखम के साथ जुट गए हैं, यही कारण है कि नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गया है। इसी दौरान बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुली बहस की चुनौती दी है। तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री विकास को लेकर कहीं भी बहस कर लें। तेजस्वी यादव ने सोमवार को पटना में पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुली चुनौती दी कि वे राज्य के प्रमुख के रूप में पिछले 15 वर्षों में उनकी किसी भी उपलब्धि पर उनसे बहस करें।

उन्होंने कहा, मैं आग्रह पूर्वक चुनौती देता हूं कि नीतीश कुमार पिछले 15 वर्षों में अपनी किसी भी उपलब्धि पर मेरे साथ बहस करें। हमें इस नई परंपरा को शुरू करना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र की स्थापना पहली बार बिहार के वैशाली में हुई थी। मुख्यमंत्री उम्मीदवारों के बीच बहस होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि लोग राज्य सरकार से बहुत नाराज हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि हम बहुत ही सहज बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रहे हैंै। तेजस्वी यादव बेरोगजारी और पलायन को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं और हर चुनावी सभा में इस मुद्दे को उछाल रहे हैं।

इधर, बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नित्यानपंद राय ने तेजस्वी पर पलटवार करते हुए कहा कि वे तेजस्वी के साथ किसी भी मुद्दे पर कहीं भी बहस को लेकर तैयार हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार राजग के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, इस कारण वे व्यस्त हैं।

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीन चरणों में होने वाले चुनाव के लिए मतदान 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर को होगा जबकि मतगणना 10 नवंबर को होगी।

उल्लेखनीय है कि राजद इस चुनाव में कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ चुनावी मैदान में उतरी है। (आईएएनएस)


19-Oct-2020 3:32 PM 12

चंडीगढ़, 19 अक्टूबर| कुछ समय के लिए पंजाब में राजनीतिक परिदृश्य से गायब होने के बाद क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने आखिरकार सोमवार को यहां विधानसभा सत्र के उद्घाटन के दिन अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राज्य सरकार ने एक दिन के बजाय दो दिनों के लिए विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों को नकारने के लिए राज्य द्वारा कानून बनाने के मुद्दे पर चर्चा होगी।

पिछले जुलाई में पंजाब के राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद से राजनीति गलियारे में ज्यादा नजर नहीं आने वाले सिद्धू ने विधानसभा पहुंचने से पहले अपने मित्र और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और विधायक परगट सिंह से मुलाकात की।

लेकिन सिद्धू ने विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ अभिवादन का आदान-प्रदान नहीं किया। हालांकि, उन्हें अपने अन्य पार्टी के दूसरे सहयोगियों के साथ कुछ समय बातचीत करते देखा गया।

सिद्धू ने आखिरी बार फरवरी 2019 में विधानसभा सत्र में भाग लिया था।

पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर मुख्यमंत्री से मतभेद के बाद कांग्रेस के नेता ने 14 जुलाई, 2019 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। सिद्धू स्थानीय निकायों के प्रभारी थे लेकिन उन्हें ऊर्जा विभाग में शिफ्ट कर दिया गया था।

पिछले महीने, सिद्धू ने अपने गृहनगर अमृतसर की सड़कों पर संसद द्वारा पारित 'काले' कृषि कानूनों के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन शुरू करके लोगों के साथ अपने संपर्क को फिर से शुरू किया।

उन्होंने तीन कृषि कानूनों के बारे में भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वे कृषक समुदाय को बर्बाद कर देंगे। (आईएएनएस)


19-Oct-2020 2:03 PM 8

मनोज पाठक 
पटना, 19 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी मैदान में उतरे सभी राजनीतिक दल राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए पुरजोर कोशिश में जुटे हैं। सभी दलों की चाहत सत्ता में भागीदारी की है।

चुनाव को लेकर दल हो या गठबंधन अपने नेता या मुख्यमंत्री का चेहरा सामने रख चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। कई मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तो खुद चुनावी मैदान में योद्धा भी बने हैं। इस चुनाव में जहां सत्ता तक पुहंचने के लिए विभिन्न पार्टियों ने चार अलग-अलग गठबंधन बनाकर चुनावी मैदान में हैं वहीं बिहार के मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए छह मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के मुख्यमंत्री का चेहरा हैं वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेतृत्व वाले विपक्षी दल के महागठबंधन राजद नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के दावे के साथ चुनावी मैदान में है। तेजस्वी खुद राघोपुर से चुनावी मैदान में उतरे हैं।

पिछले चुनाव से राज्य की सियासी परिसिथतियां भी बदली हैं। पिछली बार 2015 में विधानसभा चुनाव के जदयू और राजद ने साथ महागठबंधन बनाकर जब चुनाव लड़ा था तब महागठबंधन की ओर से नीतीश कुमार का चेहरा मुख्यमंत्री के लिए सामने रखा गया था, जबकि राजग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे के साथ चुनाव लड़ा और चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री तय करने की बात कही थी।

इस चुनाव में एक बार फिर भाजपा और जदयू साथ मिलकर चुनावी मैदान में हैं और मुख्यमंत्री का चेहरा नीतीश कुमार हैं।

वैसे, इस चुनाव में नीतीश के रास्ते इतने आसान नहीं है। इस चुनाव में छह मुख्यमंत्री के चेहरे हैं।

तेजस्वी और नीतीश के अलावे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा), बसपा के साथ छह दलों का गठबंधन ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया है। इधर, जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव को प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मैदान में जोर लगाए हुए है।

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अपने अध्यक्ष चिराग पासवान को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रखा है, हालांकि चिराग ने अब तक खुद को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया है। वैसे, लोजपा इस चुनाव में अकेले 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात करते हए आर-पार की लड़ाई लड़ रही है।

इधर, इस चुनाव में प्लुरल्स पार्टी की प्रमुख पुष्पम प्रिया चौधरी भी खुद को मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित कर चुनावी मैदान में है। पुष्पम प्रिया चौधरी ने स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करते हुए खुद को अगला मुख्यमंत्री घोषित कर रखा है।

बहरहाल, सभी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सत्ता के शिखर पर पहुंचने के लिए चुनावी मैदान में खूब पसीना बहा रहे हैं। लेकिन इस लोकतंत्र में जनता किनके कामों और चेहरे पर मुहर लगाती है, यह तो 10 नवंबर को ही पता चलेगा जब चुनाव परिणाम आएंगे। (आईएएनएस)


19-Oct-2020 2:02 PM 7

लखनऊ, 19 अक्टूबर| उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित दुर्जनपुर गांव में कोटा की दुकान के आवंटन के दौरान फायरिंग के मुख्य आरोपित धीरेंद्र प्रताप सिंह के पक्ष में लगातार बैरिया से भाजपा के विधायक सुरेंद्र सिंह की तरफ से हो रही बयानबाजी पर प्रदेश नेतृत्व के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी नाराजगी जताई है। नड्डा ने इस प्रकरण पर विधायक सुरेंद्र सिंह को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। नड्डा ने भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से फोन पर बातचीत में साफ कहा है कि विधायक जांच को प्रभावित करने का प्रयास न करें। यह ठीक नहीं होगा।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, नड्डा ने विधायक को सख्त चेतावनी दी है। वह विधायक सुरेंद्र सिंह की हरकतों से बेहद नाराज हैं। इसी कारण उन्होंने स्वतंत्रदेव सिंह को फोन किया है। इस दौरान उन्होंने विधायक के आचरण पर भारी नाराजगी जताई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा है कि हम ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं करेंगे। विधायक लगातार इस केस में बयान देते फिर रहे हैं। पार्टी को विधायक के ऐसे बयान बर्दाश्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बलिया कांड की जांच से विधायक दूर रहें तो बेहतर होगा। अगर उन्होंने जांच प्रभावित करने का प्रयास किया तो फिर कठोर कार्रवाई होगी।

इससे पहले लखनऊ में रविवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने बैरिया के विधायक सुरेंद्र सिंह को तलब किया था। माना जा रहा है कि इस प्रकरण में विधायक और समर्थकों पर भी कार्रवाई हो सकती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी उनसे कहा कि इससे पार्टी और सरकार की छवि खराब होती है।

सुरेंद्र सिंह ने भाजपा अध्यक्ष से कहा कि उन पर घटना के आरोपियों को बचाने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। विधायक की बयानबाजी को विपक्ष तुरंत लपक रहा है। प्रियंका गांधी ने विधायक के बयान पर भाजपा को काफी घेरा है।

गौरतलब है कि 15 अक्टूबर को बलिया के रेवती थाना इलाके के दुर्जनपुर गांव के पंचायत भवन में राशन दुकान आवंटन की प्रक्रिया चल रही थी। हनुमानगंज और दुर्जनपुर के राशन दुकान के चयन को लेकर दो पक्षों में हंगामा हो गया। इस दौरान देखते ही देखते ईंट-पत्थर चलने लगे। धीरेंद्र प्रताप सिंह पर आरोप है कि उसने फायरिंग कर दी। इसमें जयप्रकाश पाल (45) की मौत हो गई। धीरेंद्र प्रताप सिंह को इस मामले में रविवार को लखनऊ से गिरफ्तार कर आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। (आईएएनएस)


18-Oct-2020 3:06 PM 11

पटना, 18 अक्टूबर। बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। राज्य में भाजपा जहां स्पष्ट कर चुकी है कि वह जनता दल यूनाइटेड (जदयू), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। वहीं तमाम आलोचनाओं के बावजूद लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) भाजपा के प्रति अपना समर्थन दिखाने से नहीं चूक रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान लगातार कह रहे हैं कि राज्य में भाजपा और लोजपा की सरकार बनेगी। चिराग ने रविवार को कहा कि भाजपा अपना गठबंधन धर्म निभाए और मेरे खिलाफ जितना बोलना है बोलें। प्रधानमंत्री मोदी भी मेरी आलोचना कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने खुद को वोटकटवा पार्टी कहे जाने पर विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह पापा रामविलास पासवान का अपमान है। चिराग का कहना है कि मैं नीतीश के खिलाफ नहीं हूं उनकी नीतियों की आलोचना करता हूं।

एक टीवी चैनल के साथ हुई बातचीत में चिराग पासवान ने कहा, आप (भाजपा) मेरा जितना विरोध करना चाहते हैं करें, पार्टी पापा की है। भाजपा नेताओं के वोटकटवा कहने वाले बयान से आहत हूं। पार्टी को ऐसा कहना पापा का अपमान है। प्रधानमंत्री से मेरा दिल का रिश्ता है। प्रधानमंत्री मेरे दिल में बसते हैं। जब मेरे साथ कोई नहीं खड़ा था तब वो मेरे साथ थे। पिता के निधन पर उन्होंने मुझे सांत्वना दी। जब पापा अस्पताल में थे तो प्रधानमंत्री मुझे फोन किया करते थे। वे कठिन समय में मेरे साथ खड़े रहे। मैं अपने प्रधानमंत्री की बुराई क्यों करूं।

पांच सीटों पर मजबूरी में उतारे उम्मीदवार
लोजपा अध्यक्ष ने आगे कहा, नीतीश को खुश करने के लिए भाजपा नेता मेरे खिलाफ बोल रहे हैं। हम प्रधानमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। पांच सीटों को छोडक़र भाजपा के सभी उम्मीदवारों को मेरा समर्थन है। यहां भी मजबूरी में उम्मीदवार उतारने पड़े क्योंकि उन्होंने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं। मैं राजद-कांग्रेस के साथ नहीं जाऊंगा। मैं मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता। राज्य में भाजपा-लोजपा की सरकार बनेगी। मैं नीतीश के खिलाफ नहीं हूं उनकी नीतियों की आलोचना करता हूं।

शेर का बच्चा हूं तो जंगल चीर कर निकलूंगा
एनडीए से अलग होकर चुनाव लडऩे और इसके परिणाम को लेकर पूछे गए सवाल पर लोजपा नेता ने कहा, एनडीए से अलग होने के फैसले पर पछतावा नहीं हैं और न ही उन्हें यह फैसला लेने में डर लगा। पापा बोलते थे कि अगर शेर का बच्चा होगा तो जंगल चीर कर निकलेगा। अगर गीदड़ होगा तो वो मारा जाएगा। मैं भी अब खुद को परखने निकला हूं। शेर का बच्चा हूं तो जंगल चीर कर निकलूंगा। नहीं तो वहीं मारा जाऊंगा।

नीतीश ने युवा नेतृत्व को नकारा
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री पर युवा नेताओं को खारिज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि बिहार के मुख्यमंत्री ने नीतियों को लागू करना बंद कर दिया और संतृप्त हो गए। उन्होंने युवा नेताओं को खारिज कर दिया, उन्हें अनुभवहीन कहा लेकिन खुद उन्होंने खुद जेपी आंदोलन के दौरान एक युवा कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति शुरू की थी। हम भी बिहार के लिए जागरूक हैं और अच्छा सोच सकते हैं। राज्य ने उन्हें पहले ही 15 साल दे दिए हैं।

प्रधानमंत्री कर सकते हैं मेरी आलोचना
जमुई से सांसद ने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा मेरी आलोचना किए जाने का मैं स्वागत करूंगा। उन्होंने कहा, मुझे मोदी जी का सम्मान क्यों नहीं करना चाहिए। मेरे पिता के आईसीयू में भर्ती होने पर केवल उन्होंने मेरा साथ दिया था। मुख्यमंत्री लोजपा और भाजपा के बीच दूरी को चित्रित करने के लिए उत्सुक हैं। मैं यह कहकर इस डर को दूर करना चाहूंगा कि मैं भाजपा नेताओं, यहां तक की प्रधानमंत्री द्वारा मेरी आलोचना करने का स्वागत करुंगा। (amarujala)


17-Oct-2020 5:50 PM 3

पटना, 17 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 28 अक्टूबर को होने वाले मतदान के पहले अब राज्य में सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच, लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को लेकर भी अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई। पटना में शनिवार को भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट कहा कि लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान को भ्रम में नहीं रहना चाहिए। भाजपा नीतीश कुमार के साथ है।

बिहार में भाजपा के सभी नेता एक-एककर चिराग पासवान की लोजपा को लेकर अपनी सफाई दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में लोजपा राजग से अलग हटकर चुनाव लड़ रही है।

भूपेंद्र यादव ने भाजपा के चुनावी गीत 'मोदी जी की लहर' का वीडियो लांच कार्यक्रम में चिराग को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, "बहुत स्पष्ट है, लोजपा हमारे गठबंधन का हिस्सा नहीं है और हम चिराग पासवान को बताना चाहते हैं कि उन्हें किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। भाजपा-जदयू एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं और नीतीश कुमार हमारे मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं।"

विपक्षी दलों के महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार राजद नेता तेजस्वी यादव के 10 लाख लोगों को नौकरी देने के वादा के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "लोग रोजगार का वादा कर रहे हैं, लेकिन खुद का रोजगार नहीं है। चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए लोग संघर्ष क्या जानें।"

उन्होंने महागठबंधन को अपवित्र गठबंधन बताते हुए कहा कि वे न तो दलितों के नेता हैं और और न ही अगड़े और पिछड़े के हैं। जीतन राम मांझी, मुकेश साहनी और उपेंद्र कुशवाहा ने उनका साथ छोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि राजद के कमजोर नेतृत्व की मदद से, वामपंथी बिहार में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहे हैं। (आईएएनएस)


17-Oct-2020 5:45 PM 11

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने शनिवार को कांग्रेस की वंशवादी राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बगैर सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी पर कटाक्ष किया। नड्डा ने कहा, "चाहे कांग्रेस हो या कोई दूसरी क्षेत्रीय पार्टी, लोग अपने भाई-बहन, मां-बेटे को बचाने में व्यस्त हैं।"

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

नड्डा ओर से की गई यह टिप्पणी महत्व रखती है, क्योंकि यह कांग्रेस की ओर से बॉलीवुड अभिनेता से राजनेता बनें शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को टिकट देने के तुरंत बाद की गई है, जिसे व्यापक रूप से कांग्रेस को कैडर में परिवार को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है।

अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर कटाक्ष करते हुए नड्डा ने कहा, "अगर एक पार्टी का कार्यालय किसी राजनेता के घर से चलता है तो वह पार्टी केवल उस व्यक्ति से संबंध रखती है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी पार्टियों की बात करें तो उनका परिवार ही पार्टी बन गया है, जबकि भाजपा के मामले में पार्टी ही उनका परिवार है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जहां तक वर्चुअल संबोधन (जनता को ऑनलाइन संबोधित करना) की बात है, तो अन्य राजनीतिक दलों ने भाजपा की नकल करना शुरू कर दिया है। नड्डा ने कहा कि हालांकि भाजपा की तुलना में उनके वर्चुअल संबोधन में कुछ ही लोग शामिल होते हैं।

नड्डा ने दावा किया, "अन्य राजनीतिक दल हमारी नकल कर रहे हैं। जब हमारी वर्चुअल बैठकें होती हैं तो लाखों लोग हमारे साथ जुड़ते हैं, लेकिन जब अन्य राजनीतिक दल वर्चुअल बैठकें करते हैं, तो हजारों लोग कम हो जाते हैं।"

अपने संबोधन के दौरान नड्डा ने राष्ट्रव्यापी बंद की अवधि के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सामाजिक न्याय और भाजपा की 'मदद' के प्रयासों पर प्रकाश डाला।(आईएएनएस)


17-Oct-2020 2:06 PM 9

पटना, 17 अक्टूबर| बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब सभी पार्टियां अपना पूरा जोर लगा रही हैं। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेतृत्व वाले महागठबंधन ने बिहार में सरकार को बदलने का संकल्प लेते हुए शनिवार को अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। 'प्रण हमारा, संकल्प बदलाव का' नाम वाले इस संकल्प पत्र को जारी करते हुए राजद से तेजस्वी यादव ने एक बार फिर सत्ता में आने के बाद 10 लाख लोगों को रोजगार देने का संकल्प दोहराया। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित महागठबंधन के तमाम नेता मौजूद रहे।

संकल्प पत्र जारी करते हुए राजद के नेता तेजस्वी ने कहा कि सत्ता में आने के बाद नौकरी के लिए भरे जाने वाले आवेदनों में फीस माफ किया जाएगा तथा परीक्षा केंद्र जाने के लिए किराया भी माफ किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अगर उनके महागठबंधन को सत्ता में आने का मौका देती है तब नियोजित शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग 'समान काम, समान वेतन' को पूरा किया जाएगा। महागठबंधन के संकल्प पत्र में सत्ता में आने के बाद कृषि ऋण माफ करने का संकल्प लिया गया है जबकि राज्य में कपर्ूी श्रम आपदा केंद्र खोलने का वादा किया गया है।

तेजस्वी ने इस मौके पर एकबार फिर नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अभी केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार है, लेकिन बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिल सका। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप आएंगें।

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीन चरणों में होने वाले चुनाव के लिए मतदान 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर होगा जबकि मतगणना 10 नवंबर होगी।

उल्लेखनीय है कि राजद इस चुनाव में कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ चुनावी मैदान में उतरी है। (आईएएनएस)


16-Oct-2020 8:12 PM 7

पटना, 16 अक्टूबर| बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शुक्रवार को दावा करते हुए कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) स्वयं निर्णय लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग हुई है। उन्होंने लोजपा के सरकार बनाने के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पार्टी बिहार में एक सीट भी नहीं जीत सकती है, वह सरकार बनाने का दावा कर भ्रम फैला रही है। पटना में मोदी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि लोजपा के नेता झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने लोजपा नेता के दावे को झूठा व बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह से टेलीफोन पर मेरी बातें हुई हंै, लोजपा नेता और गृह मंत्री के बीच चुनाव को लेकर कभी कोई बात नहीं हुई।

मोदी ने कहा, "सीटों की संख्या को लेकर विवाद था, भाजपा जितनी सीटें दे रही थी, लोजपा उससे काफी अधिक सीटें मांग रही थी, जिसके कारण वार्ता टूटी और लोजपा स्वयं निर्णय लेकर गठबंधन से अलग हुई। जो पार्टी बिहार में एक सीट भी नहीं जीत सकती है, वह सरकार बनाने का दावा कर भ्रम फैला रही है।"

मोदी ने कहा कि, "लोजपा नेता कहते हैं कि वह नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे। इसका सीधा मतलब है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के निर्णय का विरोध कर बिहार में भाजपा की सरकार बनने देना नहीं चाहते हैं।"

भाजपा नेता ने सवालिया लहजे में कहा कि, "आखिर यह कैसी राजनीति है कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हैं और दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा समर्थित नीतीश कुमार का विरोध करते हैं।"

मोदी ने स्पष्ट किया कि लोजपा वोट कटवा है और उसका एक ही मकसद है कि बिहार में राजग की सरकार नहीं बने। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार में राजग की बहुमत की सरकार बनेगी। (आईएएनएस)


16-Oct-2020 4:16 PM 7

भोपाल, 16 अक्टूबर| मध्य प्रदेश के 28 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उप-चुनाव के लिए शुक्रवार को नामांकन भरने का अंतिम दिन है। यहां मतदान तीन नवंबर को होना है। गुरुवार तक राज्य में 216 उम्मीदवारों ने 282 नामांकन पर्चे दाखिल किए थे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 19 जिलों के 28 विधानसभा क्षेत्रों में गुरुवार को 92 अभ्यर्थियों के 122 नाम निर्देशन-पत्र जमा किए गए। इस प्रकार अब तक कुल 216 अभ्यर्थियों ने 282 नाम निर्देशन-पत्र जमा किये हैं। शुक्रवार को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख है।

निर्वाचन के तय कार्यक्रम के अनुसार, नाम निर्देशन-पत्र 16 अक्टूबर तक जमा होंगे। नाम निर्देशन-पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) 17 अक्टूबर को की जाएगी। नाम वापसी की प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक होगी। मतदान तीन नवम्बर और मतगणना 10 नवम्बर को होगी।

राज्य में भाजपा, कांग्रेस और बसपा ने सभी 28 क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे है। वहीं सपाक्स और सपा भी कुछ स्थानों पर उम्मीदवार उतार रही है। कुल मिलाकर इस उप-चुनाव में कई स्थानों पर सीधे मुकाबले की बजाय त्रिकोणीय होने के आसार बन रहे है। (आईएएनएस)


16-Oct-2020 4:15 PM 8

मनोज पाठक 
पटना, 16 अक्टूबर| बिहार का चुनाव यूं तो जाति और मजहब के नाम पर होता रहा है, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में यहां 'राम' और 'रावण' की भी एंट्री हो गई है। बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल (युनाइटेड) ने पटना के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव को राम और रावण के बीच का बताया है। इसे लेकर अब सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।

मोकामा विधानसभा क्षेत्र में मुख्य मुकाबला बाहुबली विधायक अनंत सिंह और साफ सुथरी छवि के राजीव लोचन के बीच माना जा रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले मुंगेर के सांसद और जदयू के नेता ललन सिंह ने चुनावी प्रचार के दौरान कहा कि मोकामा विधानसभा सीट पर राम बनाम रावण की लड़ाई है।

उन्होंने महागठबंधन समर्थित राजद के प्रत्याशी अनंत सिंह को रावण का प्रतीक बताया, जबकि जदयू के प्रत्याशी राजीव लोचन सिंह को राम का प्रतीक कहा। जीत के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, जब भी राम और रावण का मुकाबला होता है तो किसकी जीत होती है यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है।

अनंत सिंह पहली बार विधायक जदयू की टिकट पर ही बने थे। जब इसकी याद सांसद को दिलाई गई तब उन्होंने कहा, वह रावण हैं इसलिए वे रावण की पार्टी में चले गए। अब ठीक हो गया।

उल्लेखनीय है कि अनंत सिंह की पहचान दबंग की रही है। इनकी पहचान उनके क्षेत्र में 'छोटे सरकार' की रही है। पिछले वर्ष अनंत के नदवां गांव स्थित घर से एके-47 राइफल बरामद की गई थी और इसी मामले में वे पटना के बेउर जेल में बंद हैं। यही कारण है कि अनंत सिंह सात अक्टूबर को नामांकन भरने भी कैदी वैन पर सवार होकर जेल से आए थे।

इधर, जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन भी कहते हैं कि 2005 के बाद से बिहार में जंगल राज का सफाया किया जा रहा है। जो कुछ चीजें बच गई हैं, उनका भी इस चुनाव में सफाया तय है। उन्होंने कहा कि राम सदाचार के प्रतीक हैं जबकि रावण अनाचार, भ्रष्टाचार का प्रतीक रहा है।

उल्लेखनीय है कि 2005 से 2015 तक अनंत सिंह जदयू के टिकट पर मोकामा से तीन बार विधानसभा का चुनाव जीते। 2015 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह पर हत्या के आरोप लगने पर जदयू ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था। वहीं राजीव लोचन की छवि साफ सुथरी रही है। कहा जाता है कि प्रत्येक चुनाव में वे पर्दे के पीछे रहकर राजग प्रत्याशी की यहां मदद करते रहे हैं।

इधर, राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कटाक्ष करते हुए कहा, जब तक अनंत सिंह जदयू में थे तब तक वह राम थे, जैसे ही राजद में आए तो वे रावण हो गए। जिनके घर खुद शीशे के हैं उन्हें किसी दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 10 नवंबर को पता चल जाएगा कि कौन रावण है, कौन राम। उन्होंने कहा कि रावण सरकार का अब अंत निकट आ गया है। (आईएएनएस)