राजनीति

Date : 22-Jan-2020

नई दिल्ली, 22 जनवरी। जदयू के नेता पवन वर्मा ने पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को पत्र लिखकर दिल्ली में भाजपा के साथ जदयू के गठबंधन पर नाराजगी जताई है। पूर्व राज्यसभा सदस्य और जदयू के महासचिव ने अपने पत्र में नीतीश कुमार को भाजपा को लेकर उनकी निजी आशंकाओं की भी याद दिलाई।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य और जदयू के महासचिव पवन वर्मा ने पत्र में लिखा, ‘मैं अकेले में आपकी (नीतीश कुमार) स्वीकारोक्ति को याद कर रहा हूं कि भाजपा में वर्तमान नेतृत्व ने किस तरह से आपका अपमान किया। आपने कई बार कहा कि भाजपा देश को खतरनाक स्थिति में ले जा रही है।’ सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस पत्र में पवन वर्मा ने कहा, ‘आपने जैसा मुझे बताया, ये आपके निजी विचार थे कि भाजपा संस्थानों को नष्ट कर रही है और देश के अंदर लोकतांत्रिक एवं सामाजिक ताकतों को पुनर्गठित करने की जरूरत है। इस कार्य के लिए आपने पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकार को नियुक्त किया।’ वर्मा ने बिहार के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ‘एक से अधिक अवसरों पर आपने भाजपा-आरएसएस गठबंधन को लेकर आशंकाएं जाहिर की हैं।’
पवन वर्मा ने आगे कहा, ‘अगर ये आपके वास्तविक विचार हैं तो मैं समझ नहीं पाया कि जदयू कैसे बिहार के बाहर भाजपा से गठबंधन कर रहा है जबकि अकाली दल जैसे भाजपा के पुराने सहयोगियों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। खासकर ऐसे समय में जब भाजपा ने सीएए-एनपीआर-एनआरसी के माध्यम से बड़े पैमाने पर सामाजिक विभाजनकारी एजेंडा चला रखा है।’पवन वर्मा ने कहा कि जदयू को अपने गठबंधन का दायरा विस्तारित करने और दिल्ली चुनावों के लिए भाजपा से हाथ मिलाने से वह ‘काफी बेचैन’ हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि नीतीश कुमार विचारधारा को स्पष्ट करें।
जदयू ने पवन वर्मा के दावों पर प्रतिक्रिया नहीं दी। पवन वर्मा से पहले जदयू नेता प्रशांत किशोर भी भाजपा की सीएए और एनआरसी को लेकर आलोचना कर चुके हैं। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार भाजपा के समर्थन के बावजूद इशारों में केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। (सत्याग्रह ब्यूरो)
 


Date : 20-Jan-2020

कोलकाता, 20 जनवरी । पश्चिम बंगाल के बिष्णुपुर सीट से भाजपा सांसद सौमित्र खान ने रविवार को उन सभी मशहूर हस्तियों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का ‘कुत्ता’ करार दिया जो सीएए का विरोध कर रहे हैं।
खान ने संवाददाताओं से कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के बारे में तथ्यों को जानने के बावजूद प्रख्यात लोग अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। जो लोग ऐसा कर रहे हैं वे ममता बनर्जी के कुत्ते हैं।
लोकसभा चुनावों से पहले 2019 में तृणमूल कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हुए खान बिष्णुपुर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यही लोग कामदूनी और पार्क स्ट्रीट में हुए सामूहिक बलात्कार पर चुप रहे और बम विस्फोट की घटनाओं पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
सीएए और प्रस्तावित एनआरसी के विरोध में राज्य के अभिनेताओं, निर्देशकों और संगीतकारों ने रैलियों में हिस्सा लिया। सीएए और एनआरसी के खिलाफ एक वीडियो में भी वे एक साथ दिखे और कहा कि केंद्र सरकार अगर नागरिकता पर फिर से सबूत मांगती है तो वे कोई दस्तावेज नहीं दिखाएंगे।
पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने शनिवार को कहा था, ‘इन दिनों पश्चिम बंगाल में कई बुद्धिजीवी हैं जो लोगों को दिन भर ज्ञान देते हैं और हंगामा करते हैं। माकपा ने इन लोगों को सडक़ों पर लाकर बुद्धिजीवी बनाया और अब दीदीमोनी (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) ने उन्हें पैदा करने की फैक्टरी लगा ली है।’
इससे पहले दिलीप घोष ने कहा था कि असम और उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार ने इन प्रदर्शनकारियों को ‘कुत्तों’ की तरह मारा था। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को उत्तर प्रदेश और असम की तरह गोली मार दी जाएगी।
प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं की ओर से आ रहे इन आपत्तिजनक बयानों पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता सुबोध सरकार ने कहा, ‘यह भाजपा की वास्तविक भाषा है। अब लोगों को निर्णय करना है।’(भाषा)
 


Date : 17-Jan-2020

शंकर अर्निमेष 
नई दिल्ली, 17 जनवरी। झारखंड में भाजपा की हार और महाराष्ट्र में सत्ता से बेदखल होने की गूंज दिल्ली में सुनाई देने लगी है। दिल्ली में चुनाव होने हैं। भाजपा दबाव में है। भाजपा के मुखर सहयोगी मांग कर रहे हैं कि उनको विधानसभा सीटों में उचित हिस्सा मिले।
लंबे समय से भाजपा की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) छह सीटों पर नजर गड़ाए हुए है। 2015 के चुनाव में चार सीटों पर अकाली दल ने चुनाव लड़ा था। जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) जिसने पिछले साल भाजपा से गठबंधन किया था वो दिल्ली में कम से कम एक दर्जनभर विधानसभा सीटों के लिए टिकट मांग रही है।
दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जेजेपी, जिसने हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने में मदद की थी, पीछे हटने के मूड में नहीं है। पार्टी अपनी मांगें पूरी ना होने पर 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की धमकी दे रही है।
जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने कहा, ‘हमने दिल्ली का चुनाव लडऩे का फैसला किया है। हम हरियाणा से सटे क्षेत्रों में उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे। ‘गेंद अब भाजपा के पाले में है। अगर भाजपा हमें सम्मानजनक सीटें देती है, तो यह दोनों पार्टियों के लिए अच्छा रहेगा। अन्यथा, हम अगले दो से तीन दिनों में उम्मीदवारों को उतर देंगे।’
जेजेपी उन सीटों पर नजर गड़ाए हुए है जहां पर जाटों की संख्या उचित तादात में है। जैसे-नजफगढ़, मुंडका, महिपालपुर, महरौली, नांगलोई, बदरपुर, देवली और छतरपुर। पार्टी ने उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के लिए पहले ही पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
जेजेपी के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, ‘हमारे पास दिल्ली में खोने के लिए कुछ नहीं है। अगर हम दो सीटें जीतते हैं तो भी यह पार्टी के लिए एक बोनस होगा लेकिन अगर हम अकेले लड़ते हैं, तो यह भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है।’
भाजपा की दिल्ली इकाई ने अभी तक जेजेपी के साथ गठबंधन पर फैसला नहीं किया है, लेकिन झारखंड में लगे झटके जहां पर पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा था, भाजपा का एक वर्ग ऐसा है जो हरियाणा के संगठन को चार से पांच सीटें देने का इच्छुक है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘हम इस बार सावधान हैं और सीटों की मांग के हिसाब से जेजेपी की ताकत को समझ रहे हैं।’ ‘लेकिन हरियाणा के कुछ नेता दुष्यंत की मांगों के विरोध में हैं। उनका मानना है कि अगर हम दिल्ली में सीटें देते हैं, तो इससे दुष्यंत को हरियाणा में और भी मजबूती मिलेगी।’
भाजपा के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक अकाली दल भी अधिक सीटों पर नजर गड़ाए हुए है। दोनों दलों ने 2015 के विधानसभा चुनाव एक साथ लड़े थे, जिसमें अकालियों ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।
राजौरी गार्डन, कालकाजी, हरिनगर और शाहदरा के अलावा, अकाली दल अब मोती नगर और रोहताश नगर चाहती है।
पिछले चुनावों में अकाली उम्मीदवारों में से दो ने भाजपा के निशान पर चुनाव लड़ा था। जबकि राजौरी गार्डन से मनजिंदर सिंह सिरसा और हरिनगर में अवतार सिंह ने अकाली दल के चुनाव चिन्ह पर, वहीं कालकाजी में हरमीत सिंह और शाहदरा में जितेन्द्र पाल भाजपा के सिंबल पर लड़े थे। हालांकि, अकालियों ने 2019 हरियाणा विधानसभा चुनाव अलग से लड़ा था और उन्होंने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) का समर्थन किया था।
दिल्ली के भाजपा प्रभारियों में से एक ने दिप्रिंट को बताया कि बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं किया गया है। भाजपा नेता ने कहा, ‘सीटों के लिए अनुचित मांग पूरी नहीं की जाएगी। अकालियों की चुनावी ताकत पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है। सीटों के बंटवारे का फैसला करते समय हमें इसे ध्यान में रखना होगा।’
भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में दिल्ली में बहुत ही आकर्षक स्थिति नहीं है। इस परिदृश्य में भाजपा चिंतित हो जाती है कि जब झारखंड में सीटों के बटवारें को अंतिम रूप देने की बात आती है, जहां सुदेश महतो के नेतृत्व वाले ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के साथ पार्टी के इंकार के कारण कम से कम पांच सीटों पर खामियाजा भुगतना पड़ा।
एनडीए के अन्य सहयोगी दल जैसे राम विलास पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और जेडी (यू) भी दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ रही है। एलजेपी पहले ही चुनाव के लिए 15 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। (दिप्रिंट)
 


Date : 16-Jan-2020

मुंबई, 16 जनवरी । शिवसेना सांसद संजय राउत के बयान पर महाराष्ट्र में शिवसेना की सहयोगी पार्टी कांग्रेस को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संजय राउत ने बयान दिया था कि उस समय 1960 से 1980 तक मुंबई के कमिश्नर की नियुक्ति अंडरवर्ल्ड करता था। उनके इस बयान पर बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है उन्होंने कहा है कि क्या कांग्रेस उस समय अंडरवल्र्ड के भरोसे चुनाव जीतती थी, क्या कांग्रेस को अंडरवल्र्ड से फाइनेंस मिलता था। संजय राउत ने खुलासा किया है कि उस समय 1960 से 1980 तक मुंबई के कमिश्नर की नियुक्ति अंडरवल्र्ड करता था क्या यह सच है? कांग्रेस के बड़े नेताओं को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिेए।
गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस, शिवसेना और राकपा ने मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाया है।शिवसेना नेता संजय राउत लगातार अपने बयानों के लेकर चर्चाओं में रहते हैं बुधवार को उन्होंने कहा था कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह कट्टर राष्ट्रवादी हैं लेकिन उन्हें यह तथ्य समझना चाहिए कि देश में लोकतंत्र है। शिवसेना से राज्यसभा के सदस्य मीडिया समूह लोकमत की ओर से आयोजित पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे। लोगों के साथ साक्षात्कार के दौरान उनसे कुछ लोकप्रिय नेताओं के गुण बताने और उन्हें कुछ सलाह देने को कहा गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में राउत ने कहा कि वह बहुत मेहनती व्यक्ति हैं। मेरे पास उनका सलाह देने का अधिकार नहीं है। वह प्रधानमंत्री हैं।(एनडीटीवी)
 

 


Date : 16-Jan-2020

पुणे, 16 जनवरी । शिवसेना सांसद संजय राउत ने बुधवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में पुराने डॉन करीम लाला से मिली थीं।
राउत ने यहां लोकमत मीडिया समूह के पुरस्कार समारोह के दौरान एक साक्षात्कार में यह दावा किया। करीम लाला, मस्तान मिर्जा उर्फ हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार मुंबई के शीर्ष माफिया सरगनाओं में थे जो 1960 से लेकर अस्सी के दशक तक सक्रिय रहे।
राउत ने कहा, ‘वे (अंडरवल्र्ड) तय करते थे कि मुंबई का पुलिस आयुक्त कौन बनेगा, मंत्रालय (सचिवालय) में कौन बैठेगा।’
उन्होंने दावा किया कि हाजी मस्तान के मंत्रालय में आने पर पूरा मंत्रालय उसे देखने के लिए नीचे आ जाता था। इंदिरा गांधी पाइधोनी (दक्षिण मुंबई में) में करीम लाला से मिलने आती थीं।
राउत की पार्टी ने पिछले साल महाराष्ट्र में राकांपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनायी है।
राउत ने मुंबई में अंडरवल्र्ड के दिनों को याद करते हुए कहा कि दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी जैसे गैंगस्टर महानगर और आस-पास के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते थे।
शिवसेना के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘वे अंडरवल्र्ड के दिन थे। बाद में, हर कोई (डॉन) देश छोडक़र भाग गया। अब ऐसा कुछ नहीं है।’
राउत ने दावा किया कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम सहित कई गैंगस्टरों की तस्वीरें खींची। शिवसेना नेता ने यह भी दावा किया कि उन्होंने एक बार दाऊद इब्राहिम को फटकार लगाई थी।
संपर्क करने पर राज्य कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह इंदिरा गांधी के बारे में राउत की वास्तविक टिप्पणियां पढऩे के बाद ही टिप्पणी करेंगे।
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने शिवसेना पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, यह विडंबना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीतिक दुकान चलानेवाली शिवसेना उनके वंशजों से वंशज होने का सबूत मांग रही है। यह इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक उदंडता है।
संजय निरुपम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि बेहतर होगा कि शिवसेना के मि।शायर दूसरों की हल्की-फुल्की शायरी सुनाकर महाराष्ट्र का मनोरंजन करते रहें। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के खिलाफ दुष्प्रचार करेंगे तो उन्हें पछताना पड़ेगा। कल उन्होंने इदिराजी के बारे में जो बयान दिया है वो वापस ले लें।(भाषा)