विशेष रिपोर्ट

राजनांदगांव, रमन सिंह का गोद गांव मदनवाड़ा बेहाल दस साल में 10वीं में सिर्फ दस पास
राजनांदगांव, रमन सिंह का गोद गांव मदनवाड़ा बेहाल दस साल में 10वीं में सिर्फ दस पास
Date : 18-Jul-2019

रमन सिंह का गोद गांव मदनवाड़ा बेहाल दस साल में 10वीं में सिर्फ दस पास

प्रदीप मेश्राम
राजनांदगांव, 18 जुलाई। 
नक्सल प्रभावित मदनवाड़ा में शिक्षा को लेकर अलख जगाने की प्रशासनिक और राजनीतिक कोशिशें फिसड्डी साबित हुई हंै। शिक्षा के जरिए नक्सलियों के फैले जाल को तोडऩे के लिए राज्य सरकार ने हाईस्कूल खोल दिया। दशकभर में हाईस्कूल से 10 वीं के महज 10 विद्यार्थी ही उत्तीर्ण होकर उच्च शिक्षा के लिए बाहर निकले।  पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के गोद लिए इस गांव में शिक्षा का स्तर साल-दर-साल गिरता ही जा रहा है। 

 मदनवाड़ा में शुरूआत के पांच साल एक भी छात्र उत्तीर्ण नहीं हुआ। हाईस्कूल खोले जाने की घोषणा के बाद   शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों का टोटा रहा। नक्सल वारदात की वजह से सुर्खियों में रहे इस गांव में सरकारी मशीनरी की धमक जरूर बढ़ी है। 10 साल के भीतर बीते तीन साल में 5-5 विद्यार्थियों ने उत्तीर्ण  होकर शाला का थोड़ा मान बढ़ाया। 

संस्था के प्राचार्य पूरन सिंह जाड़े ने बताया कि वर्तमान में मात्र 29 विद्यार्थी अध्ययनरत हंै। जिसमें दो छात्र चालू शिक्षा सत्र में गैरहाजिर है। यानी 27 विद्यार्थी तालीम ले रहे हंै। बताया जाता है कि पूर्व सीएम रमन सिंह के गांव को गोद लेने के बाद विकास का पहिया थोड़े ही दिन घुमा।  सरकार ने  पांच शिक्षकों की पदस्थापना भी कर दी। जिसमें एक महिला शिक्षक भी शामिल है।  वर्ग-2 के दो और 3 व्याख्याता पंचायत स्कूल में पदस्थ है। 

प्राचार्य के मुताबिक ग्रामीणों की उदासीनता से शिक्षा के लिए एक उन्मुक्त वातावरण नहीं बन पा रहा है। इसके लिए जागरूकता का अभाव एक बड़ी समस्या है। बताया जाता है कि कुल 29 विद्यार्थियों में कक्षा नवमीं में 19 और 10वीं में मात्र 10 छात्र अध्ययरत हैं। मदनवाड़ा के इर्द-गिर्द करीब दर्जनभर गांव हंै। दोरदे, कलवर, बोरकन्हार और मसियापारा समेत कुछ गांवों में बच्चे पढ़ाई छोड़ घरेलू काम कर रहे हैं।

  इस संबंध में डीईओ जीडी मरकाम ने कहा कि किसी दिन दौरा कर वस्तुस्थिति की जानकारी लूंगा। दस साल में यदि सिर्फ कुछ छात्र उत्तीर्ण हुए हंै तो वाकई यह गंभीर मसला है। उधर मदनवाड़ा में पदस्थ शिक्षक भी विद्यार्थियों की कम मौजूदगी को लेकर फिक्रमंद है। बताया जाता है कि स्टॉफ की ओर से परिजनों के बीच जाकर बच्चों को स्कूल में दाखिला लेने पर जोर दे रहे हैं। इसके बाद भी हालत  सुधरी नहीं है।

 

 

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