अंतरराष्ट्रीय

Posted Date : 10-May-2018
  • इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 10 मई । पाकिस्तान के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने अपने ट्वीट में दावा किया है कि शिकारपुर पुलिस ने सूद पर पैसे उधार देनेवाले एक हिंदू व्यापारी का सिर, मूछ और भौंहें मुंड़वां दीं।
    देव ने ट्वीट किया, शिकारपुर पुलिस ने ग्राहकों को सूद पर पैसा देनेवाले हिंदू व्यापारी चुन्नीलाल का सिर, मूछ और भौंहें मुंड़वा दी। बेशर्म पुलिसवालों ने ऐसा सिर्फ अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सदस्य का अपमान करने के लिए किया। क्या यहां कानून का शासन है?
    पाकिस्तान में भेदभाव और अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की वजह से लगातार हिंदू आबादी घटती जा रही है। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल की वेबसाइट के मुताबिक मौजूदा समय में पाकिस्तान की कुल आबादी में 4 प्रतिशत हिंदू हैं। पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ है। हाल ही में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते हिंसा के मामलों पर पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट भी चिंता व्यक्त कर चुका है। (एएनआई)

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Posted Date : 10-May-2018
  • दमिश्क, 10 मई । दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच जंग का मैदान बन चुके सीरिया में इजरायल और सीरिया आमने-सामने आ गए हैं। इजरायल ने आरोप लगाया है कि ईरानी सुरक्षाबलों ने सीरिया बॉर्डर पर उनके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
    नेतन्याहू सरकार का दावा है कि इजरायल अधिकृत गोलन हाइट्स में सीरिया से सटी सीमा पर उसके सैन्य ठिकानों पर अटैक किया गया, जिसमें 20 रॉकेट और मिसाइल दागे गए। वहीं, सीरिया ने इजरायल पर मिसाइल दागने का आरोप लगाया है।
    ये हमला इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू के रूस दौरे के बीच हुआ है। बेंजामिन नेतन्याहू ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद कहा कि इजरायल को ईरान से अपनी सुरक्षा करने का पूरा हक है।
    एक तरफ जहां इजरायल सीरिया पर हमले करने का आरोप लगा रहा है। वहीं, सीरिया का दावा है कि राजधानी दमिश्क के पास इजरायल ने अटैक किया है। सीरिया की सरकारी मीडिया का दावा है कि दमिश्क की बाहरी सीमा पर हुए एक इजरायली हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इसमें असद समर्थक गैर-सीरियाई लड़ाकों सहित आठ ईरानी नागरिक शामिल हैं।
    सीरिया की सेना ने दमिश्क के निकट एक जिले पर दागी गई दो इजरायली मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है। सरकारी एजेंसी के मुताबिक, इजरायल की ओर से किस्सवेह जिले पर दागी गई दो मिसाइलों को विमान रोधी सुरक्षा सिस्टम से मार गिराया गया है।
    रूस जाने से पहले नेतन्याहू ने कहा कि सीरिया में वर्तमान में जो हो रहा है, उसके मद्देनजर रूसी सेना व आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्सेज) के बीच समन्वय सुनिश्चित करना जरूरी है।
    उन्होंने कहा, इजरायल ने बार-बार दोहराया है और फिर से कहता है कि वह ईरान के सीरिया में बढ़ते प्रभाव को खतरा मानता है और वह ईरान को सीरिया में प्रवेश की इजाजत नहीं देगा।
    इजरायली नेता ने रूस से ईरान की सीरिया में मौजूदगी रोकने को कहा है, जहां रूसी व ईरानी सेनाएं बशर अल-असद के शासन का समर्थन कर रही हैं।
    सीरिया में विद्रोहियों के खिलाफ असद सरकार 2011 से हमले कर रही है। रूस और ईरान सीधे तौर पर असद सरकार का साथ दे रहे हैं। वहीं, अप्रैल में सीरिया में कथित केमिकल अटैक के जवाब में अमरीका ने अपने सहयोगी देशों ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई की। अमरीका ने टॉमहॉक मिसाइलों से सीरिया के कथित केमिकल ठिकानों को निशाना बनाया।(आज तक)

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Posted Date : 09-May-2018
  • नई दिल्ली, 9 मई । अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार को कई जगहों पर धमाके हुए। ये धमाके काबुल के कला-ए-फतुल्लाह इलाके में हुए हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, मौके पर भारी पुलिस बल पहुंच गया है। अभी और जानकारी आनी बाकी है। बताया जा रहा है कि काबुल में तीन से पांच अलग जगहों पर धमाके हुए हैं। जिन अलग-अलग जगहों पर धमाका हुआ है उनमें से एक पुलिस हेड क्वार्टर भी है। काबुल के पीडी13 पुलिस हेडक्वार्टर में धमाके और गोलीबारी की आवाज सुनाई दी है।(आज तक)

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Posted Date : 09-May-2018
  • ब्राजील, 9 मई । ब्राजील की प्रथम महिला, यानी राष्ट्रपति मिशेल टेमर की पत्नी मार्सेला टेमर अपने पालतू कुत्ते को बचाने के लिए राष्ट्रपति आवास में ही बनी एक झील में पूरे कपड़े पहने कूद गईं- लेकिन सोशल मीडिया पर उनके पति की वजह से उनका जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है।
    दरअसल, 34-वर्षीय पूर्व ब्यूटी च्ीन मार्सेला टेमर का जैक रसेल टेरियर नस्ल का कुत्ता पिकोली बतखों के पीछे-पीछे झील में उतर गया था, लेकिन बाहर आने में कामयाब नहीं हो पाया, और उसे बचाने के लिए मार्सेला को झील में कूदना पड़ा। यह किस्सा 22 अप्रैल का है, लेकिन सार्वजनिक इसी हफ्ते हुआ।
    ब्राजीली मीडिया तथा माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर फस्र्ट लेडी की बहादुरी का मजाक उड़ाया जा रहा है, जिसकी वजह से यह सोमवार शाम तक सबसे ऊपर ट्रेंड करने वाला विषय बन गया था।
    वामपंथी ब्लॉगर लियोनार्डो स्टॉपा का कहना है कि मार्सेला के पति, यानी ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेमर देश के इतिहास के सबसे अलोकप्रिय राष्ट्रपति कहे जाते हैं, इसलिए मार्सेला का उद्देश्य कुत्ते को नहीं, बतखों का बचाना था। यूट्यूब ब्रॉडकास्ट में लियोनार्डो स्टॉपा ने कहा कि वह हताश थीं, क्योंकि मिशेल टेमर के कुछ वोटरों में से एक को उन्होंने वहां देखा।
     उम्र में अपनी पत्नी से 40 साल से भी ज्यादा बड़े मिशेल टेमर भ्रष्टाचार के कई मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं, और इसी को लेकर एक और ब्लॉगर ने ट्वीट किया कि मार्सेला के कुत्ते ने आत्महत्या करने की कोशिश की। वह मिशेल टेमर के साथ नहीं रह पाया।
    इस साल रियो कार्निवाल के दौरान काफी चर्चित रहे मजाक में मिशेल टेमर की तुलना खून पीने वाले पिशाचों से की गई थी। इसी को जोड़ते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि उसे मार्सेला द्वारा जानवरों का बहुत ज्यादा ध्यान रखे जाने से हैरानी नहीं होती, क्योंकि इसकी वजह बिल्कुल साफ है कि उन्होंने एक चमगादड़ से शादी की है। (एएफपी)

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Posted Date : 09-May-2018
  • नई दिल्ली, 9 मई। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार भारत ने चीन से मुकाबले के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में फाइटर प्लेन तैनात करने का फैसला किया है। भारत की कोशिश महत्वपूर्ण मलक्का, सुंदा, लुम्बोक और ओम्बई वेतार जलडमरूमध्य के साथ हिंद महासागर के पश्चिमी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की है। यह पहली बार होगा जब दूसरे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंडमान निकोबार में फाइटर प्लेन तैनात किए जाएंगे।
    मलक्का, सुंदा और लुम्बोक जलडमरूमध्य संकरे समुद्री रास्ते हैं, जो हिंद महासागर को दक्षिणी चीन सागर से जोड़ते हैं। विश्व व्यापार का 70 फीसदी इन संकरे रास्तों से होकर जाता है।
    पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा से ज्यादा चीनी युद्धपोत, पनडुब्बी और परमाणु पनडुब्बी भारत के हिस्से वाले समुद्री क्षेत्र में देखे गए हैं। चीन का मकसद हिंद महासागरीय क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने का है।
    हाल ही में नौसेना ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में घुसे चीनी युद्धपोतों की तस्वीर ट्वीट करके बीजिंग को साफ संदेश दिया था कि वो इस क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
    पिछले कुछ समय से आक्रामक चीन के खिलाफ अंडमान निकोबार चेन लाइन को डिफेंस के तौर पर बढ़ावा देने की योजना है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए मोदी सरकार ने इस पर ध्यान केंद्रित किया है।
    अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला उस समय हुआ है, जब पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक वार्ता के बाद दोनों देशों ने 3,488 किमी लंबी और विवादित नियंत्रण रेखा पर अपने रुख को शांत बनाने पर जोर दिया है।
    भारतीय नौसेना ने इस इलाके में 19 महत्वपूर्ण युद्धपोत तैनात किए हैं और युद्धपोतों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए दो तैरने वाले जहाज गोदाम भी बनाए हैं।
    द्वीपसमूह श्रृंखला में मरम्मत और नवीनीकरण सुविधाओं को स्थापित करने के महत्व को समझाते हुए एक वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने कहा, युद्धपोतों को मरम्मत के लिए भारत की मुख्य जमीन पर वापस लाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
    नाम न छापने की शर्त पर सरकार के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि लड़ाकू विमानों के लिए संभावित बेस के तौर पर कार निकोबार और कैंपबेल खाड़ी स्थित एयर बेस की पहचान की गई है।
    अधिकारी ने कहा, अंडमान को प्रोजेक्ट पावर के लिए भारत की शीर्ष चौकियों में से एक के रूप में उभरना चाहिए। कार निकोबार स्थित बेस को अपग्रेड किए जाने की जरूरत है, जबकि कैंपबेल खाड़ी स्थित एयरस्ट्रिप को भारी एयरक्राफ्ट के लायक बनाया जा रहा है। अभी तक रूस निर्मित एमआई17वी5 को निकोबार एयरबेस पर तैनात किया गया है।
    उच्च सूत्रों ने बताया कि अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर इन चीफ को सभी संसाधनों सहित वायुसेना और आर्मी के जवानों पर सीधे नियंत्रण की अनुमति दी जा सकती है। इस बारे में नई दिल्ली नए आदेश जारी कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद पहल की है।
    नया आदेश अंडमान और निकोबार कमांड को इस बात की भी शक्ति दे सकता है कि वह चार्टर बनाने के लिए उपयुक्त संसाधनों की मांग कर सकता है।
    अंडमान और निकोबार के कमांडर इन चीफ को और ज्यादा सशक्त बनाने के लिए सरकार ने हाल ही में वैधानिक नियम और आदेशों को अधिसूचित किया है, जो अंडमान और निकोबार कमांड को वायुसेना और आर्मी के जवानों पर सीधे नियंत्रण की अनुमति देता है।
    तीनों सेनाओं के जवान, अधिकारी विभिन्न एक्ट और नियमों के तहत शासित किए जाते रहे हैं। हालांकि ये बदलाव खासतौर पर अंडमान और निकोबार कमांड के लिए किए जा रहे हैं। अंडमान और निकोबार कमांड की स्थापना अक्टूबर 2001 में हुई थी, लेकिन तीनों सेनाओं के बीच क्षेत्र को लेकर आपसी लड़ाई में ये अपनी पूरी ताकत को हासिल कर पाने में नाकाम रहा है।  (इंडिया टुडे)

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