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धान की मिलिंग में देरी-भुगतान पर बहस, विपक्ष का वॉकआउट
04-Mar-2021 2:06 PM 60
धान की मिलिंग में देरी-भुगतान पर बहस, विपक्ष का वॉकआउट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 4 मार्च।
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदने के लिए सहकारी समितियों के खर्चे और कस्टम मिलिंग के भुगतान को लेकर गुरूवार को विधानसभा में काफी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि कस्टम मिलिंग का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस वजह से मिलिंग में देरी हो रही है। इस पूरे मामले में खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। 

प्रश्नकाल में भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा के सवाल के जवाब में खाद्य मंत्री ने कहा कि खरीफ वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए सहकारी समितियों को प्रासंगिक व्यय 9 रूपए प्रति क्विंटल, खाद्य सुरक्षा और भंडारण के लिए 3 रूपए प्रति क्विंटल के अलावा समिति का कमीशन कामन धान के लिए 31 रूपए 25 पैसे और ग्रेड ए धान के लिए 32 रूपए प्रति क्विंटल प्रदाय करने का प्रावधान है। 

भाजपा सदस्य के सवाल के जवाब में खाद्य मंत्री ने कहा कि सरकारी स्तर पर कैबिनेट सब कमेटी बनाई गई है। उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र सरकार के निर्देश पर यह कमेटी बनाई गई है? इसके जवाब में श्री भगत ने कहा कि सरकार एमएसपी पर धान खरीदी करती है, वह केन्द्र सरकार की गाइडलाइन का पालन करती है। 

भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा ने समिति के कमीशन के भुगतान को लेकर जानकारी चाही। इसके जवाब में खाद्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 2019-20 के लिए समिति के कमीशन का 262 करोड़ 80 लाख और 80 करोड़ मजदूरी भुगतान किया गया। शिवरतन शर्मा ने पूछा कि इसी विधानसभा में मंत्री ने स्वीकार किया है कि 2019-20 में 44 हजार टन लॉस हुआ है। कितने  मिलर्स को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है?

मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि मिलर्स को 630 करोड़ का भुगतान होना है। 430 करोड़ का भुगतान हो चुका है। जैसे-जैसे बिल आ रहे हैं उनका मिलान कर भुगतान किया जा रहा है। बीजेपी विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने पूछा कि एक क्विंटल चावल के पीछे प्रासंगिक व्यय कितना होता है? मिलर्स को भुगतान के पीछे देरी होने की वजह यही है? खाद्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि 9 रुपए प्रासंगिक व्यय है। बृजमोहन अग्रवाल ने इस पर आपत्ति की, और कहा कि मंत्री गलत जवाब दे रहे है।
 
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि जब पुराना धान स्टॉक में है, तो उसकी मिलिंग  के बजाए नए धान को क्यों भेजा जा रहा है? क्या पुराना धान खराब हो चुका है? इस पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। 

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