सामान्य ज्ञान

30-Sep-2021 10:56 AM (61)

नया भूमि अधिग्रहण बिल  ब्रिटिश कालीन करीब 120 वर्ष पुराने कानून की जगह लेने जा रहा है।  नया कानून किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण की इजाजत नहीं देता। लेकिन यदि रक्षा या राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर सरकार उनकी भूमि का अधिग्रहण करेगी तो उन्हें उचित मुआवजा पाने का हक होगा।

इस बिल में किस तरह की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा इसका अधिकार राज्यों को दिया गया है। साथ ही राज्यों को अपना भूमि अधिग्रहण कानून बनाने की भी छूट होगी। मगर राज्यों के कानून में मुआवजा और पुनर्वास किसी भी सूरत में केंद्रीय कानून से कम नहीं होगा।  पुराने भूमि अधिग्रहण बिल के मुकाबले मौजूदा भूमि अर्जन विधेयक में लगभग 158 छोटे बड़े संशोधन किए हैं। जिसमें 28 बड़े संशोधन हुए हैं। इसमें 13 संशोधन स्थायी समिति और 13 संशोधन शरद पवार की अध्यक्षता वाली समिति और दो संशोधन विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की संस्तुति पर किए गए हैं।

कानून में न सिर्फ जमीन के उचित मुआवजे का प्रावधान किया गया है बल्कि भू स्वामियों के पुनर्वास और पुनस्र्थापन की पूरी व्यवस्था की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहण पर किसानों को बाजार भाव से चार गुना दाम मिलेंगे जबकि शहरी इलाकों में जमीन अधिग्रहण पर भू स्वामी को बाजार भाव से दोगुने दाम मिल सकेंगे। इसके बाद जमीन का जबरन अधिग्रहण भी नहीं किया जा सकेगा। प्राइवेट कंपनियां अगर जमीन अधिग्रहीत करती हैं तो उन्हें वहां के 80 फीसदी स्थानीय लोगों की रजामंदी जरूरी होगी। फिलहाल देश में जमीन अधिग्रहण 1894 में बने कानून के तहत होता है।

नए कानून मेें बहुफसली सिंचित भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा। जमीन के मालिकों और जमीन पर आश्रितों के लिए एक विस्तृत पुनर्वास पैकेज की व्यवस्था की गई है। इस कानून में अधिग्रहण के कारण जीविका खोने वालों को 12 महीने के लिए प्रति परिवार तीन हज़ार रुपए प्रति माह जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान है।

पचास हजार का पुनस्र्थापना भत्ता, प्रभावित परिवार को ग्रामीण क्षेत्र में 150 वर्ग मीटर में मकान, शहरी क्षेत्रों में 50 वर्गमीटर ज़मीन पर बना बनाया मकान दिए जाने का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है। बिल में संशोधन सुझाया था कि जमीन डेवलपर्स को लीज पर देने का भी प्रावधान किया जाए, ताकि जमीन के मालिक किसान ही रहें और इससे उन्हें सालाना आय भी हो, यह संशोधन मंजूर कर लिया गया।

दूसरे संशोधन में कहा गया कि लोकसभा में सितंबर 2011 में बिल पेश किए जाने के बाद से अधिग्रहीत की गई भूमि के मूल मालिकों को 50 फीसदी मुआवजा देने का प्रावधान हो, सरकार 40 फीसदी पर राजी हो गई।


30-Sep-2021 10:56 AM (74)

30 सितंबर 1993 में आए भयानक भूकंप से महाराष्ट्र के लातूर में हजारों लोगों की मौत हो गई थी।  लातूर जिले में करीब 20 हजार लोग एक झटके में मारे गए। 30 सितंबर की सुबह करीब 3:56 पर वहां 6.4 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि लगभग पूरा लातूर ही उजड़ गया। करीब 20 हजार लोग मारे गए और 30 हजार घायल हुए.

लंबे समय तक वैज्ञानिकों को भूकंप के कारण का पता नहीं चला। दक्षिण भारत के करीब वाले इस हिस्से में पृथ्वी की एक ही प्लेट है। ऐसे में वैज्ञानिक नहीं समझ पाए कि भूकंप आया क्यों। अक्सर यही कहा जाता है कि भूकंप ज्वालामुखी या प्लेटों के टकराने या रगड़ खाने से आते हैं। भारतीय प्लेट उत्तर की तरफ सरकती जा रही है।

 वैज्ञानिकों के मुताबिक करोड़ों साल पहले भारत अफ्रीका से टूटा और फिर हजारों साल तक समुद्र में तैरते रहने के बाद ये एशियाई प्लेट से टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि हिमालय बना। भारतीय प्लेट आज भी एशियाई प्लेट को दबाती जा रही है। इसी वजह से हिमालय की ऊंचाई बढ़ रही है। वैज्ञानिकों ने माना कि लातूर का भूकंप इसी भूगर्भीय हलचल की वजह से आया।


30-Sep-2021 10:55 AM (36)

30 सितम्बर सन 1938 ईसवी को जर्मनी में म्यूनिख़ का ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में जर्मनी के नेता हिटलर, इटली के नेता मोसोलीनी, फ्रांस के प्रधान मंत्री एडवर्ड डेलाडी और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री नेविल चैम्बर्लिन ने भाग लिया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य जर्मनी और चेकोसोलोवाकिया के बीच मतभेदों को दूर करने का मार्ग खोजना था। इस सम्मेलन का परिणाम चेकोसोलोवाकिया का कुछ भाग जर्मनी में जुड़ जाने के रुप में निकला। इस संधि का यूरोप की बाद की घटनाओं पर प्रभाव पड़ा। इसी प्रकार इससे पश्चिमी देशों के साम्राज्यवाद का भी पर्दाफ़ाश हुआ। इसके अतिरिक्त इस सम्मेलन से हिटलर को ऐसा लगा कि यूरोप उसके वर्चस्वाद के मुकाबले में बहुत अधिक प्रतिरोध नहीं कर रहा है। दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी की पराजय के बाद सन 1945 ईसवी को चेकोसोलोवाकिया ने अपनी भूमि जर्मनी से वापस ले ली।


30-Sep-2021 10:55 AM (34)

फाग होली के अवसर पर गाया जाने वाला एक लोकगीत है। यह मूल रूप से उत्तर प्रदेश का लोक गीत है पर समीपवर्ती प्रदेशों में भी इसे गाया जाता है।

सामान्य रूप से फाग में होली खेलने, प्रकृति की सुंदरता और राधाकृष्ण के प्रेम का वर्णन होता है। इन्हें शास्त्रीय संगीत तथा उपशास्त्रीय संगीत के रूप में भी गाया जाता है।

 


30-Sep-2021 10:54 AM (43)

1. भारतीय नियोजनकाल का कौन सा दशक कृषि उत्पादन की दृष्टि से सर्वाधिक सफल माना जाता है?

(अ)1950 का दशक (ब)1960 का दशक (स) 1970 का दशक (द)1980 का दशक

2. राष्ट्रीय विकास परिषद में शामिल नहीं होता है?

(अ) राज्यों के मुख्यमंत्री (ब) योजना आयोग के सदस्य (स) वित्त आयोग के सदस्य (द) प्रधानमंत्री

3. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम संसद द्वारा किस वर्ष पारित किया गया?

(अ)2004 में (ब)2005 में (स)2006 में (द) इनमें से कोई नहीं

4. भारत की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का आकार क्या है?

(अ) 3, 64, 471 करोड़ रुपए (ब) 36447 करोड़ रुपए (स) 36,44,718 करोड़ रुपए (द) 3,64,47,185 करोड़ रुपए

5. देश की आयात-निर्यात नीति के अंतर्गत आयातित वस्तुओं पर मात्रात्मक नियंत्रण को कब से समाप्त किया गया?

(अ)15 जुलाई, 2000 (ब)1 अप्रैल, 2001 (स) 1 जुलाई, 2001 (द) 1 अगस्त 2001

6. सूर्य ग्रहण निम्नलिखित में से किस स्थिति में पड़ता है?

(अ) जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है (ब) जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है (स) जब सूर्य चंद्रमा तथा पृथ्वी आ जाती है (द) इसका कोई निश्चित समय नहीं है

7. निम्नलिखित में से किस परत को बेरीस्फीयर कहा जाता है?

(अ) वायुमंडल का सबसे ऊपरी परत (ब) पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (स) पृथ्वी की सबसे आंतरिक परत (द) पृथ्वी की मध्यवर्ती परत

8. निम्नलिखित में से कौन सी मोबाइल फोन सेवा आदित्य बिड़ला गु्रप की है?

(अ)आइडिया (ब)एयरटेल (स)वोडाफोन (द)इनमें से कोई नहीं

9. माखनलाल चतुर्वेदी राष्टï्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय किस शहर में स्थित है?

(अ) पटना (ब) रायपुर (स) रांची (द) भोपाल

10. निगम कर आरोपित किया जाता है?

(अ) केंद्र सरकार द्वारा  (ब) राज्य सरकार द्वारा (स) नगर निगम द्वारा (द) केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा

11. पासपोर्ट जारी करने में निजी क्षेत्र की सहभागिता के लिए किस कंपनी को पासपोर्ट सेवा परियोजना में भागीदार केंद्र सरकार ने बनाया है?

(अ) इंफोसिस (ब) विप्रो (स) टीसीएस (द) सत्यम

12. करेंसी फ्यूचर्स कारोबार किस स्टॉक एक्सचेंज में सर्वप्रथम शुरू किया गया था?

(अ) बीएसई (ब) एनएसई (स) एमसीएक्स-एसएक्स (द) उपर्युक्त तीनों में से यह एक साथ शुरू किया गया

13. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी शेयरधारित न्यूनतम कितने प्रतिशत बनाए रखने की सरकार की मौजूदा नीति है?

(अ) 26 प्रतिशत (ब) 33 प्रतिशत (स) 51 प्रतिशत (द) 75 प्रतिशत 

14. डेमिंग पुरस्कार निम्नलिखित में से किसके लिए प्रदान किए जाते हैं?

(अ) उत्पाद की पर्यावरण मित्रता (ब) उत्पाद में बालश्रम का उपयोग न होना (स) पूर्ण गुणवत्ता नियंत्रण (द) प्रबंधन श्रेष्ठïता

15. सुंदरवन का विश्व प्रसिद्घ डेल्टा निम्र में से किन नदियों से संबंधित है?

(अ) गंगा-ब्रह्मïपुत्र  (ब)  गंगा-दामोदर (स) कृष्णा (द) पद्मा-सुरमा

16. हिमालय का विस्तार अराकान योमा कहां स्थित है?

(अ)बलूचिस्तान में (ब)म्यांमार में (स)नेपाल में (द)कश्मीर में

17. यदि दुनिया में सारी वनस्पतियां - पौधे समाप्त हो जाएं, तो जीव-जंतु भी किसके अभाव में मर जाएंगे?

(अ) ठंडी हवा (ब) भोजन (स) ऑक्सीजन (द) लकड़ी

18. निम्न में से किसे भारत में अंग्रेजी साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है?

(अ) सर थामस रो (ब) लार्ड क्लाइव (स)वारेन हेस्टिंग्स  (द) लार्ड कार्नवालिस

19. संविधान का अनुच्छेद 370 किस राज्य पर लागू होता है ?

(अ) जम्मू-कश्मीर (ब) सिक्किम (स)मणिपुर (द) नगालैण्ड

20. नेपाल का प्रसिद्ध पशुपतिनाथ का मंदिर किस नदी के किनारे बसा हुआ है?

 (अ) गंगा (ब) भागीरथी (स)विश्वमती (द) बाघमती

21. दासबोध नामक पुस्तक लिखी थी?

(अ) तुकाराम ने (ब)रामदास ने (स) एकनाथ ने (द) मलूक दास ने

22. इब्नबतूता किसके दरबार में आया था?

(अ) अलाउद्दीन खिलजी (ब) मुहम्मद बिन तुगलक (स) कृष्णदेव राय (द) बलवन

23. पर्वतों के पदों अर्थात किसी पर्वत के सहारे स्थित पठार को क्या कहा जाता है?

(अ) अंतर्पर्वतीय पठार (ब) पर्वतपदीय पठार (स) महाद्वीपीय पठार (द) वायव्य पठार

24. निम्नलिखित में कौन एक पर्वतपदीय पठार है?

(अ) तिब्बत का पठार (ब) पेटागोनिया का पठार (स) ब्राजील का पठार (द) बोलीविया का पठार

25. मेसेटा का पठार निम्नलिखित में से किस प्रदेश में स्थित है?

(अ) मैक्सिको (ब) ब्राजील (स) स्पेन तथा पुर्तगाल (द) उत्तर पूर्वी अफ्रीका

26. कोबरा सर्प का विष मनुष्य के शरीर के कौन से हिस्से में असर डालता है?

(अ) नर्व सिस्टम (ब) त्वचा (स)आहार नली (द) हृदय

27. लाइसोमीटर में निम्नलिखित में से किसका मापन किया जाता है?

(अ) वायुमंडलीय आद्र्रता (ब) मैचों की दिशा तथा गति (स)सौर विकिरण की मात्रा (द) मृदा से होकर नीचे जाने वाली अंत:स्रवी जल की मात्रा  

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सही जवाब-1.(द)1980 का दशक, 2.(स) वित्त आयोग के सदस्य, 3.(ब)2005 में, 4.(स) 36,44,718 करोड़ रुपए, 5.(ब)1 अप्रैल, 2001, 6.(अ) जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है, 7.(स) पृथ्वी की सबसे आंतरिक परत, 8.(अ) आइडिया, 9.(द) भोपाल, 10.(अ) केंद्र सरकार द्वारा, 11.(स) टीसीएस, 12.(ब) एनएसई, 13.(स) 51 प्रतिशत, 14.(स) पूर्ण गुणवत्ता नियंत्रण, 15.(अ) गंगा-ब्रह्मïपुत्र, 16.(ब) म्यांमार में, 17.(स) ऑक्सीजन, 18.(ब)लार्ड क्लाइव, 19.(अ)जम्मू-कश्मीर, 20.(स) विश्वमती, 21.(ब)रामदास ने, 22.(ब)मुहम्मद बिन तुगलक, 23.(ब)पर्वतपदीय पठार, 24.(ब) पेटागोनिया का पठार, 25.(स) स्पेन तथा पुर्तगाल, 26.(अ)नर्व सिस्टम, 27.(द) मृदा से होकर नीचे जाने वाली अंत:स्रवी जल की मात्रा।  


29-Sep-2021 10:47 PM (56)

1. ओजोन गैस में किस तरह की गंध होती है?

(अ) सड़े अंडे की तरह (ब) सड़े मांस की तरह (स) सड़ी मछली की तरह (द) सरसों तेल की तरह
2. तांबा का शत्रु तत्व कौन सा है?
(अ) गंधक (ब) कार्बन (स) हाइड्रोजन (द) नाइट्रोजन   
3. कलकत्ता में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की स्थापना किसने की थी?
(अ) वारेन हेस्टिंग्स (ब) लार्ड कार्नवालिस (स) क्लाइव (द) विलियम बंैंिटंग
4. भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई थी?
(अ) 1600 ई. में (ब) 1601 ई. में (स) 1605 ई.में (द) 1700 ई.में
(अ) श्रीरंगापट्टïनम (ब) मैसूर (स) पूना (द) हैदराबाद
5. मुगल सम्राट जहांगीर ने इंगलिश खां की उपाधि किसे प्रदान की थी?
(अ) रॉबर्ट क्लाइव को (ब) थामस स्टीफल को (स) न्यूवरी को (द) हाकिन्स को
6. ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कितने व्यापारियों ने मिलकर की थी?
(अ) 20  (ब) 25 (द) 50 (द) 100
7. शुद्धि आंदोलन किस संगठन ने प्रारंभ किया था?
(अ) ब्रह्मï समाज (ब)  आर्य समाज (स)  प्रार्थना समाज (द) देव समाज
8.  मुझे चांद चाहिए- उपन्यास के लेखक कौन हैं?
(अ) सुरेन्द्र वर्मा (ब) राही मासूम रजा (स) मन्नू भंडारी (द) श्रीलाल शुक्ल
9. निम्नलिखित में से किस प्रदेश में रेलमार्ग का सबसे बड़ा जाल बिछा है?
(अ)महाराष्टï्र (ब) उत्तरप्रदेश (स) आंध्रप्रदेश  (द) पश्चिम बंगाल
10. मंगोल प्रजाति मूल रूप से किस देश में पाई जाती है?
(अ)भारत (ब) इण्डोनेशिया (स) चीन (द) मध्य एशिया
11. वसंत रास नृत्य का संबंध किस देवता से है?
(अ) विष्णु (ब) शिव (स) श्रीकृष्ण (द) गणेश
12. जब सरकार अपनी राजस्व आय से अधिक खर्च करती है, तब इसे क्या कहा जाता है?
(अ) प्राथमिक घाटा (ब) राजकोषीय घाटा (स) बजटीय घाटा (द) राजस्व घाटा
13. बारहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केन्द्रीय सरकार के विभाज्य करों में राज्यों का अंश कितना है?
(अ) 28 प्रतिशत (ब) 30.5 प्रतिशत (स) 29.6 प्रतिशत (द) 20.8 प्रतिशत
14. हिंदी भाषा बोलने वाले भारतीयों का प्रतिशत लगभग कितना है?
(अ) 35 प्रतिशत (ब) 40 प्रतिशत (स) 45 प्रतिशत (द) 50 प्रतिशत
15. दक्षिण भारत में हिंदी भाषा के क्षेत्र में किसने प्रचार-प्रसार किया?
(अ) जवाहरलाल नेहरू (ब) पी.वी. नरसिम्हा राव (स) सी. राजगोपालाचारी (द) सी. एन. अन्नादुराई
16. आंध्रप्रदेश की राजकीय भाषा कौन सी है?
(अ) तमिल (ब) तेलुगू (स) कन्नड़ (द) उडिय़ा
17.  नागार्जुन  परियोजना बंाध किस नदी पर बनाई गई है?
(अ) गोदावरी (ब) नर्मदा (स) भागीरथी (द) कृष्णा
18.  पठारों में रहने वाले मनुष्यों का मुख्य व्यवसाय क्या होता है?
(अ) पशुपालन (ब) कृषि (स)  खनन (द) मत्स्य पालन
19. लाहौर के पास  शाहदरा में जहांगीर का मकबरा किसने बनवाया था?
(अ) शाहजहां ने (ब) औरंगजेब ने (स) नूरजहां ने (द) इनमें से कोई नहीं
20. भारत सरकार के बजट के कुल घाटे में किस घाटे का सबसे अधिक योगदान है?
(अ) राजकोषीय घाटा (ब) राजस्व घाटा (स) आय- व्यय घाटा (द) प्राथामिक घाटा
21. भारत की भूमि पर बसने वाला पहला अंग्रेज कौन था?
(अ) राबर्ट क्लाइव (ब)  एडवर्ड फेंटन (स) थामस स्टीफल (द)  न्यूवरी
22.  भारत में फ्रांसीसी बस्तियों का वास्तविक संस्थापक निम्नलिखित में से कौन था?
(अ)  डूप्ले (ब)  अल्बुकर्क (स) फ्रांसीसी मार्टिन (द) आल्मीडा
23. रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित रचना-गेेहूं और गुलाब में- गुलाब किसका प्रतीक है?
(अ) सुगन्ध (ब) कला और संस्कृति (स) राजतन्त्र (द) पूंजीवाद
24. कर्बला नाटक किसने लिखा है?
(अ)पे्रमचंद (ब)नंददास (स) रामवृक्ष बेनीपुरी (द) भीष्म साहनी
25. निम्न में से प्रतिचुंबकीय पदार्थ है?
(अ) लोहा (ब) बिस्मथ (स) निकिल (द) कोबाल्ट
26. विद्युत चुंबक नर्म लोहे के बनाए जाते हैं, क्योंकि नर्म लोहा रखता है?
(अ) कम चुंबकीय प्रवृत्ति तथा कम धारणशीलता (ब) अधिक चुंबकीय प्रवृत्ति तथा कम धारण क्षमता (स) अधिक चुंबकशीलता तथा अधिक धारण क्षमता (द) कम चुंबकशीलता तथा अधिक धारण क्षमता
27.भारत का पश्चिमी तटीय मैदान क्या कहलाता है?
(अ) उत्तरी सरकार (ब) मालाबार तट (स) कोरोमंडल तट (द) कोंकण तट
28. पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट पर्वत श्रेणियों का मिलन कहां होता है?
(अ) नीलगिरि पहाडिय़ां में (ब) पालनी पहाडिय़ां में (स) अन्नामलाई पहाडिय़ां में (द) कार्डामम पहाडिय़ां में
29. गोवा की राजभाषा के रूप में कोंकणी भाषा किस लिपि में लिखी जाती है?
(अ) कन्नड़ (ब) मराठी (स) देवनागरी (द) तमिल
30. कोठारी आयोग किस उद्देश्य के लिए गठित किया गया था?
(अ) भारतीय उच्च सिविल सर्विसेज में परीक्षा तथा भर्ती संबंधी नीतियों और विधि के लिए (ब) पुलिस सुधार की सिफारिशों देने के लिए  (स)केन्द्र -राज्य संबंधों की पड़ताल के लिए (द) इनमें से कोई नहीं
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 सही जवाब-1.(स) सड़ी मछली की तरह, 2.(अ) गंधक, 3. (अ) वारेन हेस्टिंग्स, 4.(अ)1600 ई. में, 5.(द) हाकिन्स को, 6.(द) 100, 7.(ब)आर्य समाज, 8.(अ)सुरेन्द्र वर्मा, 9.(ब) उत्तरप्रदेश, 10.(द) मध्य एशिया, 11.(स) श्रीकृष्ण,12.(द) राजस्व घाटा, 13.(ब)30.5 प्रतिशत, 14.(ब)40 प्रतिशत, 15.(स)सी. राजगोपालाचारी, 16.(ब) तेलुगू, 17.(द) कृष्णा, 18. (स) खनन, 19.(स) नूरजहां ने, 20.(अ)राजकोषीय घाटा, 21. (स) थामस स्टीफल, 22.(स)फ्रांसीसी मार्टिन, 23.(ब) कला और संस्कृति , 24.(अ) पे्रमचंद, 25.(ब) बिस्मथ, 26.(ब) अधिक चुंबकीय प्रवृत्ति तथा कम धारण क्षमता, 27.(द) कोंकण तट, 28.(अ)नीलगिरि पहाडिय़ां में, 29.(स) देवनागरी, ३०.(अ) भारतीय उच्च सिविल सर्विसेज में परीक्षा तथा भर्ती संबंधी नीतियों और विधि के लिए।


29-Sep-2021 10:43 PM (53)

रुडोल्फ डीजल ने  दुनिया को डीजल इंजन देकर उद्योगों और परिवहन में क्रांति ला दी थी। 29 सितंबर 1913 को बेहद रहस्यमय ढंग से उनकी मौत हुई।

बेल्जियम से हार्विक (इंग्लैंड) की तरफ जाते हुए रुडोल्फ डीजल, ड्रेसडेन नाम के जहाज से अचानक लापता हो गए। 10 अक्टूबर 1913 को उत्तरी सागर में एक शव तैरता हुआ मिला। जांच में पता चला कि शव रुडोल्फ डीजल का है। उनकी मौत कैसे हुई, इस पर आज भी रहस्य बना हुआ है। आधिकारिक तौर पर कहा गया कि रुडोल्फ डीजल ने आत्महत्या की, हालांकि कई लोग इस दावे पर सवाल करते हुए उनकी हत्या की आशंका जताते हैं, लेकिन डीजल का नाम और काम आज भी जिंदा है।

28 फरवरी 1892 को रुडोल्फ डीजल ने अपने  कंप्रेशन इंग्निशन इंजन  को पेटेंट कराया। शुरुआत में ये इंजन मूंगफली के तेल या वनस्पति तेल से चलता था। बाद में रुडोल्फ ने इसमें सिलेंडर जोड़ा और फिर पेट्रोल से अलग और सस्ते दूसरे किस्म के तरल ईंधन का इस्तेमाल किया। सिलेंडर और ईंधन डालते ही इंजन ताकतवर ढंग से धकधका उठा। कम्प्रेश की गई हवा और ईंधन के साथ चलने से खूब ऊर्जा निकली। भाप के इंजन को ये बड़ी चुनौती थी। रुडोल्फ ने जोर देकर कहा कि भाप के इंजन में 90 फीसदी ऊर्जा बर्बाद हो जाती है, उनका इंजन इस बर्बादी को बहुत कम कर देता है। रुडोल्फ के आविष्कार से इंजन का नाम डीजल इंजन पड़ा और तरल ईंधन को डीजल कहा जाने लगा।

वर्ष 1912 तक दुनिया भर में 70 हजार  डीजल इंजन काम करने लगे। ज्यादातर फैक्ट्रियों में जनरेटरों के तौर पर। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद डीजल इंजन को परिवहन में आजमाया गया और फिर एक क्रांति हो गई। डीजल इंजन के जरिए ट्रकों और रेलगाडिय़ों में गजब की जान आ गई। पेट्रोल की तुलना में डीजल इंजन में ज्यादा वजन खींचने की क्षमता थी। ढुलाई और उसकी रफ्तार बढ़ गई, वो किफायती भी हो गई।

कहा जाता है कि सितंबर 1913 में रुडोल्फ एक अहम दौरे पर इंग्लैंड जा रहे थे। वहां वे नए किस्म का क्रांतिकारी डीजल इंजन प्लांट लगाना चाहते थे। उनकी मुलाकात ब्रिटिश नौसेना के अधिकारियों से होने वाली थी। पनडुब्बी बनाने की तैयारी कर रही ब्रिटिश नौसेना खास किस्म के डीजल इंजन चाहती थी। हालांकि उस वक्त की सैन्य तैयारियों को देखें तो ऐसे सबूत नहीं मिलते कि ब्रिटेन को पनडुब्बी बनाने का कोई आइडिया भी रहा होग। कुछ लोग कहते हैं कि ब्रिटिश सरकार को पेटेंट बेचने के विरोधियों ने पानी के जहाज से रुडोल्फ को फेंक दिया। एक पक्ष यह भी कहता है कि रुडोल्फ इतने दवाब में आ गए थे कि उन्होंने आत्महत्या कर ली।

क्या है अतुल्य भारत हिमालय अभियान
हिमालय की अनछुई चोटियों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने विश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर, 2013) के अवसर पर नई दिल्ली में अतुल्य भारत हिमालय अभियान के 777 दिन के विशेष कार्यक्रम की शुरूआत की। इस अभियान का उद्देश्य और अधिक संख्या में विदेश पर्यटकों को आकर्षित करना है, साथ ही दुनिया को यह याद दिलाना भी है कि हिमालय श्रृंखला का एक बड़ा भाग भारत में है।  इस अभियान के तहत गर्मी के मौसम में भी पर्यटकों को भारत आने के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।


29-Sep-2021 10:42 PM (49)

अंगोला दक्षिणी पश्चिमी अफ्रीका में एक देश है जिसकी सीमा समुद्र से लगी है । यह नामीबिया, कांगो और जाम्बिया से लगा हुआ है । सोलहवीं सदी के बाद से यहां पुर्तगाली उपस्थिति रही है जो उन्नीसवीं सदी में अंदर तक प्रविष्ट कर गए । वर्ष 1975 में स्वतंत्र होने के बाद यहां 27 सालों तक गृहयुद्ध चला । अंगोला नाम  N’gola  बन्तु भाषा का है (जो कि पुर्तगाली से निकली है) भाषा मे मुबुन्दु के राजा को कहा जाता है।

29 सितम्बर सन् 1992 ईसवी को अफ्रीका महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित देश अंगोला में पहली बार स्वतंत्र चुनाव आयोजित हुए। इस चुनाव में एम्पला पार्टी को सफलता मिली जो वर्ष 1976 ईसवी से सत्ता में थी। इस पार्टी के नेता ख़ोज़े एडवर्डो डॉस सैन्टोस दूसरी बार इस देश के राष्ट्रपति बने। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1975 में पुर्तग़ाल से स्वाधीन होने के बाद अंगोला में आंतरिक युद्ध आरंभ हो गया। यह युद्ध एम्पला और युनिट पार्टियों के बीच रहा था। एम्पला की सोवियत संघ और क्यूबा सहायता कर रहे थे जबकि युनिटा को अमरीका और दक्षिणी अफ्रीका का समर्थन प्राप्त था।


29-Sep-2021 10:41 PM (42)

टोक्सोप्लाजमोसिस (टोक्सो) एक कोशिकीय परजीवी टोक्सोप्लाजमा गोंड़ी के कारण होने वाला संक्रमण है। यह संक्रमण सबसे अधिक बिल्लियों और उनके मल के संपर्क में आने या कच्चे मांस के सेवन से होता है। यह जीव दुुनिया के आम परजीवियों में से एक है। एक आंकलन के अनुसार अमरीका में 60 लाख से अधिक लोगों में टोक्सोप्लाजमोसिस परजीवी हो सकते हैं। जानकारी के अभाव में बहुत की कम लोगों को इसके लक्षण मालूम पड़ते हैं।  स्वस्थ प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में आमतौर पर इस परजीवी के होने के लक्षण पता ही नहीं चल पाते हैं।

टोक्सोप्लाजमोसिस कुछ लोगों में फ्लू जैसे लक्षण भी पैदा कर सकता है। इससे प्रभावित अधिकतर लोगों में इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।  संक्रमित माताओं से जन्में शिशुओं के लिए कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए टोक्सोप्लाजमोसिस जटिल समस्याएं पैदा कर सकता है। जिन परिवारों में बिल्लियां पाली जाती हैं, उन परिवारों में यह संक्रमण होने की ज्यादा आशंका रहती है। संक्रमित मांस खाने से यह परेशानी पहले बिल्ली को होती है और फिर यह परिवार में फैल जाती है। बिल्लियों में टोक्सोप्लाजमोसिस के परजीवी के अंडे दूषित भोजन या फिर पानी से भी हो सकते हैं। टोक्सोप्लाजमोसिस परजीवी बिल्ली में अपना जीवन चक्र पूरा करता है और उसके मल के द्वारा टोक्सोप्लाजमा के लाखों अंडों का उत्पादन करता है। टोक्सोप्लाजमोसिस से पीडि़त व्यक्ति को मांसपेशियों में दर्द, बुखार , सांस लेने में तकलीफ और मस्तिष्क में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। टोक्सोप्लाजमोसिस से पीडि़त माताओं के जन्म लेने वाले बच्चे अंधेपन या मिर्गी की समस्या से पीडि़त हो सकते हैं।


29-Sep-2021 10:40 PM (33)

विश्व स्वास्थ्य संगठन का दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय संगठन (डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ) एक ऐसा संगठन है जिसने सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत सी उपलब्धियां हासिल की हैं। यह संगठन डब्ल्यूएचओ के उन छह क्षेत्रीय संगठनों में से एक है जिसने चेचक पूरी तरह समाप्त करने, औसत जीवन दर बढ़ाने, शिशु और माता मृत्यु दर में कमी लाने, पोलियो तथा गिनी वर्म जैसी बीमारियों को समाप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाई है।  

संगठन में एंटीमाइक्रोबायल प्रतिरोधक, रक्त सुरक्षा और प्रयोगशाला टेक्नोलॉजी, एचआईवी/एड्स, कुष्ठ रोग, मलेरिया, तपेदिक, वैक्टर बोर्न और उपेक्षित उष्णकटिबंधीय प्रदेश में होने वाली बीमारियां, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य, प्रतिरक्षण और टीके का विकास, गर्भधारण और प्रजनन स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने और पोषण जैसे अनेक स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल हैं।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की स्थापना 1948 में की गई थी। यह डब्ल्यूएचओ के छह क्षेत्रीय संगठनों में पहला था। डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में 11 सदस्य देश-भारत, बांग्लादेश, भूटान, कोरिया लोकतांत्रिक गणराज्य, इंडोनेशिया, मालदीव,म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और तिमोर लेस्ते शामिल हैं।  इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह को स्वास्थ्य मंत्रियों की 31वीं बैठक में इसका नया क्षेत्रीय निदेशक चुना गया है।


29-Sep-2021 10:38 PM (39)

 द फोर ऑवर वर्क वीक- एस्केप 9-5, लिव एनीव्हेयर, एंड जॉइन द न्यू रिच , वर्ष 2007 की अमेरिकी लेखक, शैक्षिक कार्यकर्ता और उद्यमी टिमोथी फैरिस द्वारा रचित पुस्तक है। यह पुस्तक न्यूयॉर्क टाइम्स सर्वश्रेष्ठ विक्रेता सूची में चार वर्षों तक रही और 35 भाषाओं में अनुदित की गई एवं इसकी विश्वभर में 13 लाख 50 हजार से अधिक प्रतिलिपियां विक्रय की गईं। हालांकि  प्रकाशकों ने इस पुस्तक को प्रकाशित करने से पूर्व 26 बार अस्वीकार किया था।
 फैरिस ने अपनी खेल पोषण पूरक कंपनी ब्रेनक्विकन में 14-घण्टे काम करते हुए द फोर ऑवर वर्क वीक में प्रस्तुत विचारों का विकास किया। समय की कमी और अधिक काम से परेशान फैरिस ने यूरोप में तीन-सप्ताह का विराम अवकाश लिया।  इस दौरान उन्होंने यूरोप, एशिया और दक्षिण अमेरिका की यात्रा करते हुए फैरिस ने आभासी सहायकों के दैनिक कार्य, बाहरी स्रोत से कम सम्पर्क और दिन में केवल एक बार ई-मेल जांचने के बुद्धिसंगत निर्णय विकसित किए।  एक समान जीवन शैली को व्यक्तिगत रूप से छोड़ते हुए उन्होंने पुस्तक की उत्पत्ति की।


28-Sep-2021 9:41 PM (69)

जर्मनी में वोटिंग के बाद नतीजे भी आ चुके हैं. किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. जर्मनी में चुनाव मुख्य तौर पर 05 पार्टियों के बीच हो रहा था. वैसे भी दूसरे विश्व युद्ध के बाद वहां कभी किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, लिहाजा सरकार हमेशा गठजोड़ की ही बनती रही है. इस बार भी वही होगा. आइए जानते हैं कि जर्मनी में किस तरह वोट पड़ते हैं. कैसी है वहां की संसद. सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी को कितने फीसदी वोट चाहिए होते हैं. कैसे कोई शख्स वहां का चांसलर बनता है.

जर्मनी की आबादी करीब 8.3 करोड़ है. लेकिन इस आबादी में कुल 6.04 करोड़ मतदाता हैं. 18 साल का होने वाला कोई भी युवा वोटर की पात्रता रखता है. वहां चुनाव हर 04 साल पर होते हैं. चुनाव कराने का जिम्मा इलैक्शन मैनेजमेंट बॉडी नाम की एक संस्था को होता है. चुनाव जर्मनी के निचले सदन बुंडेस्टाग के लिए होता है. इसी संसद की चुनी हुई सरकार देश को चलाती है.

चुनाव में मुख्य तौर पर कितनी पार्टियां थीं, क्या रहे उनके रिजल्ट?
– मोटे तौर पर जर्मनी के इस चुनावों में 06 पार्टियां मैदान में थीं. उसके अलावा कुछ छोटी-छोटी पार्टियां भी. जर्मनी की सत्ताधारी पार्टी का नाम सीडीयू है यानि क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन ऑफ जर्मनी. ये जर्मनी की सबसे पुरानी पार्टी है. इसकी स्थापना 1945 में हुई थी. ये हमेशा अपने सहयोगी सीएसयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है. जो मुख्य तौर पर बावरिया का एक क्षेत्रीय दल है. इसका पूरा नाम क्रिश्चियन सोशल यूनियन ऑफ बावरिया है. इस चुनाव में इन दोनों को 24.1 वोट मिले हैं.

जर्मनी के चुनावों में इस बार जिस पार्टी को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं, वो एसपीडी यानि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जर्मनी है. इस पार्टी का गठन 1963 में हुआ. अंतरिम नतीजों के अनुसार एसपीडी को 25.7 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं.

तीसरे नंबर ग्रीन पार्टी है. जिसे 14.8 प्रतिशत वोट मिले हैं. ये पार्टी 1993 में बनी थी. यह ग्रीन पार्टी का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है.

इसके अलावा दो अन्य मुख्य पार्टियों एफडीपी यानि फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी को 11.5 फीसदी और एएफडी यानि अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी को 10.3 फीसदी वोट मिले. इसके अलावा डी लिंके नाम की पार्टी को 4.9 वोट परसेंटेज हासिल हुए. अन्य पार्टियों ने 8.7 फीसदी वोट मिले. एफडीपी को कारोबारी समर्थक माना जाता है तो एएफडी धुर दक्षिणपंथी और डी लिंके वामपंथी दल है.

सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा कितना होना चाहिए?
– जर्मन बुंडेस्टाग में सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकडा़ 50 प्रतिशत का है. हर बार ये आंकड़ा दो या ज्यादा पार्टियों के गठबंधन से ही पूरा हो पाता है.

जर्मनी में सरकार बनाने के लिए 50 फीसदी वोटों का आंकड़ा जरूरी होता है. वहां दूसरे युद्ध के बाद से किसी पार्टी को चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लिहाजा गठजोड़ सरकारें ही बनती हैं.
निचले सदन यानि बुंडेस्टाग में कितनी सीटें हैं, कैसे पड़ता है वोट?
– जर्मन संसद के निचले सदन बुंडेसटाग में 598 सीटें हैं, जिनमें 299 पर चुनाव क्षेत्रों में सीधे निर्वाचन से होता है. चुनाव में हर मतदाता दो वोट डालता है पहला वोट पसंदीदा स्थानीय उम्मीदवार को जाता है जबकि दूसरा वोट पार्टी को दिया जाता है. बहुत से लोगों अपने दोनों वोट दो अलग अलग पार्टियों को भी देते हैं. यानी हो सकता है कि स्थानीय स्तर पर आपको किसी और पार्टी का उम्मीदवार पसंद हो और राष्ट्रीय स्तर पर किसी दूसरी पार्टी की नीतियां आपको अच्छी लगती हो.

क्या संसद में सीटें घटती बढ़ती रहती हैं?
– संसद में कितनी सीटें होंगी, यह मतदाताओं के दूसरे वोट पर निर्भर करता है.चुनाव में पांच प्रतिशत से ज्यादा वोट पाने वाली पार्टियों को उनके वोट के अनुपात में संसद में सीटें मिलती हैं. यदि कोई पार्टी उसे मिलने वाले वोटों की तुलना में ज्यादा सीटें सीधे जीत जाती है तो वह उन सीटों को रख सकती है लेकिन दूसरी पार्टियों को उसी अनुपात में अतिरिक्त सीटें मिल जाती है. इसे ओवरहैंग मैंडेट कहते हैं जिसकी वजह से संसद की सीटें बढ़ती घटती रहती हैं.

इस बार बुंडेस्टाग में कितनी सीटें हो सकती हैं?
– इस बार की संसद लोकतांत्रिक जर्मनी के इतिहास सबसे बड़ी संसद होगी.बुंडेस्टाग में कम से कम 598 सीटें होती हैं, लेकिन जर्मनी की जटिल चुनावी प्रणाली की वजह से सांसदों की संख्या घटती बढ़ती रहती है. मौजूदा संसद में 709 सदस्य हैं. चुनाव के बाद अस्तित्व में आने वाली संसद में इससे भी ज्यादा सदस्य हो सकते हैं.

चांसलर का चुनाव कैसे होता है?
– वैसे तो जर्मनी में कोई पार्टी जब चुनाव में खड़ी होती है तो चांसलर के पद के लिए अपने नेता के पद का ऐलान पहले ही कर देती है. उसी नेता की अगुवाई में पार्टी चुनाव लड़ती है. लेकिन चांसलर का चुनाव तब तक पूरा नहीं होता जब तक नई संसद बुंडेस्टाग में होने वाले मतदान में किसी उम्मीदवार को बहुमत वोट न मिल जाएं.

कौन बनाएगा इस बार जर्मनी में सरकार?
– वोटों के हिसाब से देखें तो एसपीडी को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं यानि 25.7 फीसदी वोट. नियमानुसार जर्मनी के राष्ट्रपति को उन्हें सबसे पहले सरकार को बनाने के न्योता देना चाहिए. लेकिन इसके लिए एसपीडी को राष्ट्रपति को ये बताना होगा कि वो किन पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना सकती है. अगर वो ऐसा नहीं करती तो मौजूदा सत्ताधारी पार्टी सीडीयू-सीएसयू को मौका मिलेगा. जो खुद भी सरकार बनाने का दावा कर रही है. उसे 24.1 फीसदी वोट मिले है. जो उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन भी है.

क्या सरकार बनाने की कवायद तय होता है कि चांसलर कौन होगा?
– एक बार जब यह साफ हो जाता है कि सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी. या कौन से गठबंधन की सरकार बनने वाली है. तो इसके बाद गठबंधन के अनुबंध के आधार पर आगे की बातें तय होती हैं. तभी गठबंधन के सहयोगी दल ये तय करते हैं कि वे किसे चासंलर बनाना चाहते हैं और किसे मंत्रिमंडल में जगह देना चाहते हैं.

सरकार बनने के बाद क्या होता है?
– सरकार बनने के बाद नवनिर्वाचित 600 से अधिक सदस्यों के लिए बुंडेस्टाग का पहले सत्र की बैठक बुलाई जाती है, जिसमें वे नए चांसलर के लिए गुप्त मतदान में भाग लेते हैं. यह राष्ट्रपति पर निर्भर करता है कि वे बुंडेस्टाग की पहली बैठक में चाहें तो किसी प्रत्याशी के बारे में सुझाव दें. यह बाध्यता नहीं है कि वे उस व्यक्ति का नाम प्रस्तावित करें जिसे गठबंधन वार्ता के दौरान चुना गया हो. उनसे ऐसे उम्मीदवार का नाम प्रस्तावित करने की उम्मीद की जाती है जिसके जीतने की संभावना हो. यदि वह व्यक्ति पहले दौर की वोटिंग में पूर्ण बहुमत प्राप्त करता है तो राष्ट्रपति को उसे चांसलर नियुक्त करना होगा.

अगर पहले दौर की संसद की वोटिंग में चांसलर उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो?
– अब तक तो सभी जर्मन चांसलर को पहले दौर में ही चुने गए हैं. कभी-कभी बहुमत बहुत मामूली रहा है. अगर चांसलर उम्मीदवार को साफ बहुमत नहीं मिलता तो चुनाव का दूसरा दौर शुरू होता है. इस दौर में संसद के सदस्य दूसरे उम्मीदवारों के नाम प्रस्तावित कर सकते हैं, लेकिन इन प्रत्याशियों को बुंडेस्टाग के एक चौथाई सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है. यदि 14 दिन के अंत तक भी कोई चांसलर नहीं चुना जाता है तो एक बार आखिरी दौर की वोटिंग होती है.

वैसे क्या लगता है कि कौन बन सकता है इस बार जर्मनी का चांसलर?
– सीडीयू-सीएसयू की तरफ से आर्मिन लाशेट को चांसलर पद के दावेदार हैं तो उन्हें टक्कर दे रहे हैं मौजूदा सरकार में वित्त मंत्री और एसपीडी पार्टी के ओलाफ शॉल्त्स. जर्मनी का चांसलर इन्हीं दोनों में किसी एक को बनना चाहिए. (news18.com)


28-Sep-2021 9:39 PM (82)

-Sanjay Srivastava

जिस समय भगत सिंह को अंग्रेज सरकार ने लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी दी, उस समय नेताजी सुभाष चंद्र बोस ट्रेन से कलकत्ता से कराची जा रहे थे. उन्होंने इस बारे में गांधीजी से पहले भी बात की थी. उन्होंने इस फांसी और गांधीजी की भूमिका पर क्या लिखा.

सुभाष चंद्र बोस जब तक भारत में रहे, वह भारत की राजनीतिक, सामाजिक हालात के साथ स्वतंत्रता संग्राम के बारे में लगातार लिखते रहते थे. उनके ये संस्मरण उनकी आत्मकथा के बाद लिख गए. उसमें उन्होंने 1931 के गांधी-इर्विन पैक्ट और भगत सिंह के फांसी और इससे उपजे हालात के बारे में भी लिखा.

“नेताजी संपूर्ण वांग्मय” के खंड दो में सुभाष चंद्र बोस की अप्रकाशित आत्मकथा के वो अंश हैं, जिसके बारे में उन्होंने 1935 से 1942 तक लिखा था. इसी में उन्होंने लिखा, ” कराची के 1931 के अधिवेशन से पहले मैं मुंबई जाकर गांधीजी से मिला. लंबी बातचीत हुई. खासकर लार्ड इर्विन के साथ कांग्रेस के हुए पैक्ट की. उस बातचीत में गांधी ने मुझे आश्वासन दिया कि वो उन लोगों की माफी के लिए पूरी कोशिश करेंगे, जो पैक्ट से बाहर रह गए हैं. इसके लिए पूरी कोशिश करूंगा और अपनी पूरी क्षमता के साथ करूंगा.”

गांधीजी पर जोर डाला गया कि भगत सिंह के प्राण बचाएं
सुभाष ने लिखा, “मुंबई से दिल्ली महात्मा गांधी और सुभाष एक ही ट्रेन से दिल्ली रवाना हुए. दिल्ली पहुंचते ही खबर मिली कि सरकार ने लाहौर षडयंत्र के सरदार भगत सिंह और उनके दो साथियों को फांसी पर चढ़ाने का फैसला कर लिया है. महात्माजी पर जोर डाला गया कि इन युवकों के प्राण बचाने का प्रयत्न करें. ये स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने इसके लिए अधिक से अधिक कोशिश की.”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपने संस्मरणों में भगत सिंह की फांसी पर विस्तार से लिखा है. जिसमें उन्होंने ये भी लिखा कि गांधीजी ने अपनी ओर से इसे रोकने की भरपूर कोशिश की.

सुभाष ने क्या सुझाव गांधीजी को दिया
सुभाष ने आगे लिखा, “इस अवसर मैने उन्हें सुझाव दिया कि अगर जरूरी हो तो वो इसी आधार पर वायसराय से समझौता तोड़ दें, क्योंकि ये फांसी देना यद्यपि दिल्ली पैक्ट के विपरीत भले नहीं हो लेकिन उसकी भावना के खिलाफ तो जरूर है. लेकिन महात्माजी क्रांतिकारी कैदियों से किसी भी प्रकार का नाता जोड़ना नहीं चाहते थे, इस कारण वो इतना आगे बढ़ने को तैयार नहीं थे. इस बात से बहुत अंतर पड़ गया कि वायसराय ने समझ लिया कि इस आधार पर महात्माजी पैक्ट को नहीं तोड़ेंगे.”

इर्विन के रुख से लगा था कि फांसी टल जाएगी
बकौल सुभाष, “उसी समय लार्ड इर्विन ने महात्माजी को बताया कि मुझे तीनों बंदियों की फांसी की सजा रद्द करने के लिए बहुत से लोगों के हस्ताक्षरों सहित अर्जी मिली है. फिलहाल मैं इस फांसी की सजा को स्थगित किए दे रहा हूं और फिर इस मामले पर गंभीरता से विचार करूंगा. इससे अधिक मुझपर इस बारे में और दबाव नहीं डाला जाए. महात्माजी और हरेक को इस समय यही लगा कि फांसी रुक गई है और अब लगता है कि ये नहीं दी जाएगी. इससे देशभर खुशी की लहर दौड़ गई.”

महात्मा गांधी जब भगत सिंह की फांसी के 06 दिन बाद कराची रेलवे स्टेशन पर उतरे तो नाराज युवकों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्हें काले झंडे दिखाए गए.
जब नेताजी को ये दुखद जानकारी मिली
सुभाष ने आगे लिखा, “इसके 10 दिन बाद कराची में कांग्रेस अधिवेशन होने वाला था. आमतौर पर सभी को आशा बंध गई थी कि फांसी नहीं दी जाएगी. लेकिन जब 25 मार्च को हमें कलकत्ता से कराची जाते समय ये समाचार मिला कि पिछली रात फांसी दे दी गई तो हमारे दुख और आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. पंजाब में बड़ी दर्दनाक खबरें फैली हुईं थीं कि किस प्रकार उनके शवों को ठिकाने लगा दिया गया. सारा देश शोक और वेदना में डूब गया. भगत सिंह उस समय युवकों में नई जागृति के प्रतीक बन गए.”

गांधीजी का विरोध हुआ
“इसका असर कराची के कांग्रेस अधिवेशन पर पड़ा. माहौल शोक संतप्त था. जब महात्माजी कराची के पास ट्रेन से उतरे तो उनके खिलाफ प्रदर्शन किया गया. उन्हें काले फूल और काली मालाओं से स्वागत किया गया. नवयुवकों के बहुत बड़े वर्ग में उस समय ये धारणा थी कि महात्माजी ने भगत सिंह और उनके साथियों के उद्देश्यों के साथ धोखा किया है.”

कांग्रेस अधिवेशन में क्या हुआ
सुभाष लिखते हैं, “कांग्रेस के उस अधिवेशन में जो अन्य प्रस्ताव स्वीकार किए गए, उसमें सरदार भगत सिंह और उनके साथियों के साहस और बलिदान की तारीफ की गई. साथ ही सभी प्रकार के हिंसात्मक कार्यों की निंदा की गई. भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह को भी मंच पर लाया गया और कांग्रेस नेताओं के समर्थन में उनसे भाषण कराया गया.”  (news18.com)


28-Sep-2021 9:38 PM (44)

आम लोगों को लगता है कि नासा के अभियान अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए ही होते हैं. यह सच है कि अमेरिका के सभी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाने का काम नासा का ही रहा है, लेकिन नासा के खुद के बहुत से अभियान भी पृथ्वी के अवलोकन के लिए होते हैं. सोमवार को नासा ने एक शक्तिशाली और उन्नत सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है जिसका काम पृथ्वी की निगरानी करना है. लैंडसैट 9 का काम अंतरिक्ष में पहुंच कर अपने सहयोगी सैटेलाइट लैंडसैट 8 की मदद करना है. दोनों ही सैटेलाइट मिलकर नासा के लिए तस्वीरें लेंगे.

इन तस्वीरों की मदद से, जो दोनों सैटेलाइट हर 8 दिन में पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए लेंगे, पृथ्वी की सेहत की निगरानी रखी जाएगी और साथ ही लोग पृथ्वी के जरूरी स्रोतों, जैसे कृषि, सिंचाई, जल संसाधन, वन, आदि का समुचित उपयोग कर सकेंगे. सैटेलाइट इन आठ दिनों तक हर 99 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर और हर दिन 14 चक्कर लगाकर ग्रह की तस्वीरें जमा करेंगे. ये तस्वीरें उस आंकड़ा समूहों में जोड़ दी जाएंगी जो लोगों के लिए 50 साल से मुफ्त में उपलब्ध है. नासा का कहना है कि मध्यम विभेदन तस्वीरों की क्षमताएं शोधकर्ताओं का मानवीय गतिविधियों के संकेतों की पहचान करने और उनके पृथ्वी पर प्रभावों को जानने में मदद करेंगी.

लैंडसैट 9 एक विकसित तकनीक का उन्नत सैटेलाइट है जो अपनी श्रृंखला का नौंवा सैटेलाइट है. इसका संचालन नासा का गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर करेगा और इसमें दो उपकरण लगे हैं. ऑपरेशनल लैंड इमेजर 2 पृथ्वी पर दिखाई देने वाली, नियर इन्फ्रारेड और शॉर्टवेव इन्फ्रारेड प्रकाश वाली तस्वीरों को लेगा. वहीं थर्मल इन्फ्रारेड सेंसर 2 पृथ्वी के सतह के भूभागों के तापमान का अध्ययन करेगा.

लैंडसेट 9 नासा और अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग का संयुक्त अभियान है, जो पिछले पांच दशकों से पृथ्वी की प्रक्रियाओं और उनके बहुत सारे बदलावों को समझने में मदद कर रहा है. लैंडसैट सीरीज ने अंटार्कटिका के ग्लेशियरों की गति, कृषि में उपयोग लाए गए पानी की मात्रा, अमेजन के जंगलों में वनों की कटाई जैसे बहुत से बदलावों को मापा है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्राजील सहित दुनिया के कई देशों के जंगलों की आग की स्थिति की निगरानी भी की है.

फिलहाल नासा के लैंडसैट 7 और लैंडसैट 8 उपग्रह काम कर रहे हैं और उनकी कक्षा का स्वरूप हर 16 दिन का है, जिससे पृथ्वी के हर जगह की तस्वीर हर 8 दिन में ली जाती है. नासा का कहना है कि लैंडसैट के उपकरण पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए एक बार में 185 किलोमीटर लंबे हिस्से की तस्वीर लेते हैं. इसकी हर पिक्सल 30 मीटर बड़ी होती है. जो एक बेसबाल के मैदान के या एक अमेरिकी खेत के बराबर होता है. 

नासा ने पहला लैंडसैट साल 1972 में लॉन्च किया था जिसका नाम अर्थ रिसोर्स टेक्नोलॉजी सैटेलाइट जिसने पृथ्वी की 80 लाख तस्वीरें खींची थीं. नासा का कहना है कि इन सैटेलाइट से वैज्ञानिकों को बदलती पृथ्वी का वैश्विक परिदृश्य दिखता है. यह बदलाव भूकंप जैसे प्राकृतिक कारणों या फिर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन वाले मानव जनित कारणों की वजह से आए हो सकते हैं जिनसे वैश्विक स्तर पर गर्मी और तापमान बढ़ रहे हैं. 

इस समय पृथ्वी जलवायु परिवर्तन  के खतरनाक दुष्प्रभावों को झेल रही है. इसके और ज्यादा नुकासान को रोकने के लिए दुनिया के तमाम देश माथा पच्ची कर रहे हैं. अंतरिक्ष से अवलोकन विकास का एक बेहतर दृश्य खोजने में मदद कर सकता है. इसके अलावा मुफ्त की जानकारी कई देशों को अपने कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग में सहयोगी साबित होगा. नासा का कहना है कि सैटेलाइट की जानकारी से किसानों को भी बेहतर और उपयोगी फसल का फैसला करने में सहायक सिद्ध हुई है. 


28-Sep-2021 11:55 AM (52)

28 सितंबर वर्ष 1907 को भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगत सिंह का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। अमृतसर में 13 अप्रैल, 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोडक़र भगत सिंह ने भारत की स्वतंत्रता के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी।

काकोरी काण्ड में राम प्रसाद बिस्मिल सहित 4 क्रांतिकारियों को फांसी और 16 अन्य को कारावास की सज़ाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि पण्डित चन्द्रशेखर आज़ाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड़ गए और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन। इस संगठन का उद्देश्य सेवा,त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था।

भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे. पी. सांडर्स को मारा था। इस कार्यवाई में क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने अलीपुर रोड दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी। जिसके फलस्वरूप 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भगतसिंह, राजगुरू और सुखदेव को फांसी दे दी गई। शाम को दी गई फांसी की खबर अगले दिन ब्रिटेन के द ट्रिब्यून अखबार में पहले पन्ने की पहली खबर थी। वैसे कुछ इतिहासकार भगत सिंह को हिंसक विद्रोही भी मानते हैं। उनके मुताबिक भगत सिंह ने क्रांति को जो रास्ता चुना था वह हिंसक था।


28-Sep-2021 11:54 AM (57)

मांड्या, भारत के कर्नाटक राज्य के मांड्या जिला का मुख्यालय है। हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार सागा मांडवया ने यहां पर तपस्या की थी। तभी से इस स्थान को मांडया के नाम से जाना जाता है।

मांडया बैंगलोर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मांडया पहले मैसूर जिले का हिस्सा था। यह स्थान समुद्र तल से ढाई से तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस जिले में पांच प्रमुख नदियां कावेरी, हेमवती, शिमाशा, लोकपावनी और वीरवैष्णवी बहती है। यहां पानी का प्रमुख स्रोत कावेरी नदी है। इसी नदी पर कृष्णराज सागर बांध बना हुआ है। इसी बांध द्वारा इस जिले में पानी की आपूर्ति की जाती है।

कृषि मांडया के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है। इस जिले में चीनी और धान की उपज काफी अधिक मात्रा में होती है। इसके अतिरिक्त यहां चीनी के तीन बड़े कारखाने है। इसी जगह पर शिवनासमुद्र जल विद्युत संयंत्र की स्थापना 1901 में हुई थी। यह एशिया का पहला जल विद्युत शक्ति संयंत्र है।


28-Sep-2021 11:54 AM (54)

कठोर जल उसे कहा जाता है जिसमें कैल्शियम और मैगनीशियम की मात्रा अधिक होती है। वर्षा का पानी जब चट्टïानों और मैदानों से होकर गुजरता है, तो उसमें ये खनिज घुल जाते हंै। विभिन्न अनुसंधानों से ये पता चला है कि अगर आपके आहार मे कैल्शियम अधिक है तो आपकी हड्डिïयां मजबूत होंगी। 

जहां तक मैगनीशियम की बात है तो उसमें मांसपेशियों की कमजोरी, अवसाद और ऊंचाई से लगने वाले डर को रोका जा सकता है। अगर हमारे शरीर में मैगनीशियम की कमी हो जाए तो उससे हमारा विकास धीमा पड़ जाता है। हमारे गुरदे प्रभावित होते हैं और हमारे बाल झडऩे लगते हैं।  इसलिए  कठोर दल का सेवन  स्वास्थ्य के लिए हितकर ही है, लेकिन इसके लगातार सेवन से त्वचा रुखी जरूर हो जाती है और हमारे बालों को भी  ये नुकसान पहुंचाता है।


28-Sep-2021 11:53 AM (71)

कमल का वैज्ञानिक नाम Nymphaeaceae है। इसकी पांच प्रजातियां हैं जिनमें तीन Nymphaea वर्ग की हैं और दो वर्ग  Nelumbo  की।  भारतीय कमल दूसरे वर्ग में आते हैं।

दुनिया की विभिन्न प्राचीन संस्कृतियों में कमल का बहुत महत्व रहा है। मिस्र के फैरो को मरणोपरांत  कमल के पत्तों की माला से सजाया जाता था।  बौद्ध धर्म में ये माना जाता है कि  क्योंकि कमल की जडं़े मिट्टी में जुड़ी होती है और वो देखता आकाश की ओर है इसलिए वो पृथ्वी और स्वर्ग को जोडऩे वाला माध्यम है। भगवान बुद्ध को कमल पर लेटा दिखाया जाता है। उसी तरह देवी लक्ष्मी भी कमल पर बैठी हुई दिखाई जाती हैं। इसके अलावा अनेक देवी देवताओं को हाथों पर कमल रखे हुए दिखाया जाता है।

भारतीय लोककलाओं में भी कमल को प्रमुखता के साथ उल्लेखित किया गया है। व्यापारिक दृष्टिï से भी कमल का काफी महत्व है। इसका हर भाग उपयोग होता है। इसका तना और बीज खाने के काम में आता है। बीजों से तैयार मखाने का उपयोग भी खाने के लिए किया जाता है।


28-Sep-2021 11:51 AM (37)

भैना छत्तीसगढ़ राज्य की एक जनजाति है। प्रमुखत: बिलासपुर जिला निवासी यह जन जाति कंवर तथा बैगा जनजातियों का सम्मिश्रण मानी जाती है ।

इसकी दो उपजातियां लारिया अथवा छत्तीसगढ़ी भैना तथा उडिय़ा भैना, अनेकानेक गोत्रों तथा टोटम समूह में विभक्त है। इसके अतिरिक्त भी इस जन जाति की दो उपजातियां और है, एक, झलयारा और दूसरी घटयारा। इनमें से पहली उपजाति पत्तों से निर्मित झोपड़ों में रहती है दूसरी अपने घरों के मुख्य द्वार पर घण्टा टांगती है।


28-Sep-2021 11:50 AM (37)

दुनिया में कपास के पौधों की लगभग 20 किस्में मिलती हैं, जिनमें से केवल चार किस्मों की खेती की जाती है। रूई के उत्पादन में प्रथम स्थान चीन का है, द्वितीय स्थान रूस और तृतीय स्थान अमरीका का है। इसके अतिरिक्त भारत, पेरू, ब्राजील, मिस्र, पाकिस्तान और कुछ दूसरे उष्ण देश है जिनमें कपास की अच्छी खेती की जाती है। दरअसल कपा की खेती के लिए सूर्य की ऊर्जा बहुत जरूरी है। सूर्य के तेज प्रकाश में ही इसका पौधा अच्छी तरह से पनपता है और इसमें अच्छा कपास आता है। सूर्य जितना अधिक गर्म होता है, रुई के रेशे उतने ही अधिक सफेद और मजबूत होते हंै। यही कारण है कि कपास की खेती पृथ्वी के उष्ण प्रदेशों या उनके पास के स्थानों में की जाती है।

रूई के रेशों का प्रयोग कपड़े, कालीन, चादर, दरी, पट्टिïयां और जिल्दसाजी में किया जाता है। बिनौले को कुचलकर और दबाकर तेल निकाला जा सकता है जिसका उपयोग मारगरिन और मैलोरिन में होता है। यह तेल साबुन बनाने में भी काम आता है। तेल निकालने के बाद जो पदार्थ बचा रहता है उसे बिनौले की खल कहते हैं। यह गाय, भैंस आदि घरेलू जानवरों को खिलाने के काम आता है। इस प्रकार कपास का पौधा हर दृष्टिï से उपयोगी होता है।