महासमुन्द

8 माह में 82 दिन लॉकडाउन, चप्पे-चप्पे पर पुलिस, फिर भी 16 हत्याएं व रेप के 64 मामले
29-Sep-2020 9:53 PM 1
8 माह में 82 दिन लॉकडाउन, चप्पे-चप्पे पर पुलिस, फिर भी 16 हत्याएं व रेप के 64 मामले

पिछले साल का रिकार्ड आठ महीने मेें ही टूटा 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुन्द, 29 सितम्बर।
वर्ष 2020 के शुरुआती आठ महीने में ही महासमुन्द में हुए अपराधों ने पिछले साल 2019 का रिकॉर्ड तोड़ा है। 

ज्ञात हो कि जिले में कोरोना संक्रमण के कारण पिछले आठ महीने में 82 दिन लॉकडाउन रहा। इस दौरान जिले के चप्पे-चप्पे पर पुलिस मुस्तैद रही। जिले में पिछले साल 2019 में 12 हत्याएं हुई थी और इस साल 2020 के 8 महीने में ही 16 हत्याएं हो चुकी हैं। कहा जा सकता है कि हत्या की घटनाओं में इस साल दो गुना इजाफा हुआ है। इस साल दुष्कर्म में भी 10.5 प्रतिशत का बढ़ोतरी हुई है। साल 2019 के 12 महीने में दुष्कर्म के 64 मामले सामने आए थे। जबकि इस साल 8 महीने में ही यह आंकड़ा 47 पर पहुंच गया है। जिले में लूट की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। पिछले साल जहां लूट की सिर्फ  7 वारदातें हुई थी। वहीं इस साल 8 महीने में यह आंकड़ा 10 के पार चला गया है। राहत वाली बात यह है कि जिले में अपहरण, छेड़छाड़, चोरी, नकबजनी, प्रताडऩा जैसे अपराधों में कमी आई है। 

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त आंकड़े के मुताबिक जिले में साल 2019 में अपहरण की 75 वारदातें हुई थी। वहीं इस साल अगस्त तक इस तरह की32 वारदातें हुई हैं। वहीं चोरी की बात करें तो पिछले साल 132 मामले सामने आए थे। इस साल अगस्त तक चोरी की सिर्फ  75 मामले जिले के थानों में दर्ज हुए हैं। छेड़छाड़ में 19 फीसदी की कमी और नकबजनी में 3.5 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। हालांकि आपराधिक घटनाओं में चोरी, नकबजनी की कई मामले अब भी अनसुलझे हैं। पुलिस इन घटनाओं में संलिप्त अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी है। 

ज्ञात हो कि जिले में अपराधियों ने अपराध की वारदातों को अंजाम देने में कोई कमी नहीं की है। जिले में साल 2019 में 12 महीने में कुल 1814 आपराधिक वारदातें हुई थी। वहीं इस साल आठ महीने में अपराधियों ने 1355 वारदात को अंजाम दिया है। इस तरह 8 महीने में जिले में 12 फीसदी अधिक वारदातें हुई हैं। नारकोटिक्स गांजा और आबकारी शराब की तस्करी में कोई कमी नहीं हो रही है। 

ओडिशा राज्य से लगे होने के कारण लगातार गांजा-शराब की तस्करी बढ़ी है। लॉकडाउन होने के कारण इसमें और भी इजाफा हुआ है। 2019 में गांजे से सम्बंधित सिर्फ  69 मामले आए थे। वहीं इस साल 8 महीने में ही यह 62 फीसदी इजाफे के साथ 75 मामले हो चुके हैं। वहीं 2019 में शराब के कुल 1235 मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की थी। वहीं इस साल सिर्फ 8 महीने में ही 909 मामले दर्ज हो चुके हैं। इस तरह आबकारी मामलों में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है।

इस मामले में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेघा टेम्भुरकर का कहना है कि जिले के थानों में जितने मामले दर्ज हुए हैं, उसमें ज्यादातर मामले पारिवारिक हैं। परिवार में किसी बात को लेकर विवाद, जमीन से सम्बंधित व अन्य मामले हैं। बड़ी वारदातें नहीं हैं। हत्या भी पारिवारिक विवाद में ही हुई है। जिले में फिरौती के लिए या गैंगवार में हत्या नहीं हुई है। बड़ी वारदातों को रोकने में हम सफल हुए हैं। हत्या के लगभग सभी मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अगर अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद भी गिरफ्तार नहीं होते तो इसे चूक कहा जाता। क्राइम को रोका नहीं जा सकता है। यहां मायने ये रखता है कि हम उन मामलों में कार्रवाई कर रहे या नहीं। हम लगातार नारकोटिक्स और आबकारी के मामले में सफलता हासिल कर रहे हैं। जिले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए शराब और गंजा जब्त किया है। कई मामलों में अपराधी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास जारी है। साइबर सेल को विशेष रूप से निर्देश दिए गए हैं। तस्करी के तार ओडिशा से जुड़े हुए रहते हैं। लिहाजा दूसरा राज्य होने के कारण कार्रवाई करने में कुछ बंधन भी है। 

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