बीजापुर

15 साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी एमएससी की पढ़ाई, दूसरे जिलों की ओर जा रहे छात्र
11-Sep-2021 10:15 PM (73)
  15 साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी एमएससी की पढ़ाई, दूसरे जिलों की ओर जा रहे छात्र

 उच्च शिक्षामंत्री से मिलकर छात्र सौप चुके है ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 

बीजापुर, 11 सितंबर। यहां शासकीय शहीद वेंकटराव महाविद्यालय में पिछले 15 सालों से एमएससी की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। जिसके चलते इस जिले के छात्र एमएससी की पढ़ाई के लिए अन्य जिलों की ओर रुख कर रहे है। जबकि इस बारे में उच्च शिक्षामंत्री को भी ज्ञापन सौपा जा चुका हैं। बावजूद पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है।

 वर्ष 2006 में शासकीय शहीद वेंकटराव महाविद्यालय की शुरुआत की गई।  15 साल बीत जाने के बावजूद इस  महाविद्यालय में एमएससी की पढाई शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में विद्यार्थियों को दूसरे जिलों बस्तर दन्तेवाड़ा जैसे पड़ोसी जिलों के महाविद्यालय में जाकर पढऩे को मजबूर होना पड़ रहा है। जहां छात्र-छात्राओं को विषम परिस्थितियों के चलते उन्हें आर्थिक दिक्कत का भी सामना करना पड़ता है। जिले के अधिकांश ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी यूजी तक शिक्षा ग्रहण कर नहीं पाते है।

 शिक्षा  से सम्बंधित विषय में  विद्यार्जन के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं एवं सम्बंधित विषय में समझ का अभाव उत्पन्न होता है। जिसके कारण मानसिक स्थितियां अक्सर बनी रहती है।

 विदित हो कि दन्तेवाड़ा किरन्दुल भानपूरी एवं अन्य जैसे छोटे कस्बो में एमएससी की कक्षाएं संचालित हो रही है।  लेकिन वर्ष 2006 से बीजापुर में संचालित शासकीय शहीद वेंकटराव पीजी महाविद्यालय में एमएससी की कक्षायें संचालित नही है। छात्रों के  मुताबिक शहीद वेंकटराव महाविद्यालय में न तो एमएससी  के प्रोफेसर है और  ना ही स्टाप हैं। एमएससी की क्लास यहां नहीं लगने से छात्रों को पिछले डेढ दशक से जगदलपुर दन्तेवाड़ा किरन्दुल भानपूरी एवं अन्य क्षेत्रों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर बीजापुर जिले के छात्र-छात्राओं ने उच्च शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर लिखितरूप से एक पत्र भी सौंपा है। बावजूद अब तक इस पर कोई अमल नहीं हो पाया हैं।

इस बारे में प्रोफेसर नारायण झाड़ी ने बताया कि इस संबंध में मंत्रालय से कुछ बिंदुओं पर जानकारी मंगाई गई थी। यहां से उस जानकारी को भेज दिया गया है। अब मंत्रालय से आदेश आते ही एमएससी की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। लेकिन अभी तक मंत्रालय से कोई आदेश नहीं आया है।

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