विशेष रिपोर्ट

बिलासपुर, अपनी जमीन पर तालाब बना दान
बिलासपुर, अपनी जमीन पर तालाब बना दान
Date : 08-Jun-2019

अपनी जमीन पर तालाब बना दान 

राजेश अग्रवाल

बिलासपुर, 8 जून (छत्तीसगढ़)। एक-एक इंच जमीन के लिए रिश्तों में आज जहां कड़वाहट आ जाती है वहीं ग्राम पकरिया के तीन भाईयों ने लगभग 10 लाख रुपये खर्च कर गांव के लोगों की आम निस्तारी के लिए अपनी 4 एकड़ जमीन पर तालाब बना दिया। आज इस तालाब की  पूजा अर्चना की गई और इसका गवाह पूरा गांव बना। 

तखतपुर से 6 किलोमीटर दूर ग्राम पकरिया में बिना किसी सरकारी मदद के गांव के लोगों की आम निस्तारी के लिए तालाब खोदवाने का अनुकरणीय कार्य गांव के ही ठाकुर परिवार ने किया। शिक्षक  रामस्नेही क्षत्री, अधिवक्ता रवि क्षत्री व कृषक रामू क्षत्री गांव में हर वर्ष होने वाले जल संकट से रूबरू हुआ करते थे। गांव में मात्र एक सरकारी तालाब है। इस तालाब में गर्मी आते-आते सूख जाता था। इसके बाद गांव में ग्रामीणों और जानवरों के लिए आम निस्तारी के लिए समस्या खड़ी हो जाती थी। गांव में संसाधन पानी की कम हो जाने के कारण ग्रामीण परेशान हो जाते थे। 

इस तकलीफ को देखते हुए तीनों भाईयों ने लगभग तीन साल पहले निर्णय लिया कि गांव में लोगों को आम निस्तारी की पानी की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए गांव में ही तालाब का निर्माण कराया जाए। इस निर्णय को मूर्त रूप देने के लिए पिछले तीन वर्षों से लगातार  प्रयास चल रहा था। पकरिया तखतपुर मुख्य मार्ग पर ही इनकी 4 एकड़ जमीन है, जिसकी कीमत वर्तमान में 50 लाख रूपये है। इस कीमती जमीन को उन्होंने तालाब के खोदने के लिए चयन किया।  इस जमीन को पिछले तीन साल गांव के ही मजदूरों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। कुछ कार्य जेसीबी से करवाकर तालाब को तैयार कराया गया। आज 2019 में जून माह में तालाब तैयार हो गया, जिसकी पूजा अर्चना पूरे विधि-विधान से की गई। इस तालाब में पानी भरने के बाद गहराई का पता चल सके इसके लिए लगभग 30 फीट लकड़ी का खम्भा 6 जून को बिलासपुर से लाया गया। इसे बीच तालाब में पूजा अर्चना के बाद लगाया गया। तालाब की गहराई पता करने का यह पारम्परिक तरीका है। पूजा-अर्चना में मुख्य यजमान रागिनी रवि क्षत्री थीं। पुजारी रघुनंदन दीवान ने पूजा अर्चना  पूरी कराई। 

ठाकुर परिवार के तीन भाई रामस्नेही, रवि और रामू ने मिलकर एक परोपकार की एक मिसाल कायम की। उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के अपनी जेब से ही पैसे खर्च कर तीन साल में इस तालाब का निर्माण करवाया जिसमें लगभग 10 लाख रूपये खर्च हो गए। पर आज इस बात को लेकर वे राहत महसूस कर रहे हंै कि वे आने वाली उनकी पीढ़ी को हमेशा गांव वाले इस बात के लिए भी याद रखेंगे।  

सरई का खम्भा क्यों?
नये तालाब में जो खम्भा लगाया जाता है वह सरई की लकड़ी का होता है। ऐसी मान्यता है कि सरई तालाब के पानी को  शुद्ध रखता है और जो भी पानी में गंदगी होती है उसे यह सरई की लकड़ी  सोंख लेती है।

 

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